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वर्ष 2012 से 2017 तक भर्ती प्रक्रिया रही ठप, योगी सरकार ने मिशन मोड में पूरी की चयन प्रक्रिया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे भर्ती संकट को समाप्त कर व्यवस्था परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पूर्व में वर्ष 2012 से 2017 तक माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप रही, जिसके कारण विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हो गए और शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से घिर गई।  वर्ष 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद स्थिति तेजी से बदली। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए पारदर्शिता, सुशासन और मेरिट को केंद्र में रखा, जिसका परिणाम 33,401 पदों पर सफल चयन के रूप में सामने आया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 से वर्ष 2022 तक प्रधानाचार्यों के 783, प्रवक्ता के 5,321 तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 27,297 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। इस प्रकार कुल 33,401 पदों पर भर्ती कर माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नया संबल प्रदान किया गया। नीति स्पष्ट, नीयत साफ और नतीजे सामने माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया की यह सफलता योगी सरकार की नीति, नीयत और नतीजों का स्पष्ट उदाहरण है। सरकार की नीति विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की रही, नीयत पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की रही, जबकि इसका नतीजा हजारों रिक्त पदों पर भर्ती के रूप में सामने आया। जहां पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चयन प्रक्रिया ठहराव का शिकार रही, वहीं योगी सरकार ने लंबित प्रक्रियाओं को गति देकर यह साबित किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासनिक क्रियान्वयन से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है। माध्यमिक शिक्षा में 33 हजार से अधिक पदों पर भर्ती केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें ठप पड़ी चयन प्रक्रिया को गति मिली, युवाओं को अवसर मिला और विद्यालयों को शिक्षक मिले।  योगी सरकार ने दूर की विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा था। योगी सरकार ने इस चुनौती को शिक्षा सुधार के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बनाते हुए रिक्त पदों को भरने की दिशा में ठोस कदम उठाए। परिणामस्वरूप लंबे समय से लंबित चयन प्रक्रियाओं को गति मिली और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। बड़ी संख्या में टीजीटी, प्रवक्ता और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति से विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है। इससे शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिली है। विद्यालयों में शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने के लिए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां भी महत्वपूर्ण साबित हुईं हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक वातावरण दोनों बेहतर हुए हैं। शिक्षा सुधारों को मिला मजबूत आधार प्रदेश में ऑपरेशन अलंकार, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा और नकलविहीन परीक्षा प्रणाली जैसी पहल के साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाई है। पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को नई गति मिली है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार और मजबूत हुआ है।

51 लाख किसानों को 45 हजार करोड़ से अधिक का सीधा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में खाद्य तथा रसद विभाग ने किसानों और गरीब परिवारों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच का काम किया है। रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश में गेहूं खरीद अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। इस दौरान कुल 51,70,117 किसानों को लाभ मिला। योगी सरकार की ओर से किसानों को 45,935.46 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्रदेश में गेहूं खरीद को सुचारु बनाने के लिए 5,837 गेहूं क्रय केंद्र संचालित किए गए, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सहूलियत मिल रही है।  योगी सरकार की प्राथमिकता रही कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ समय पर मिले और उन्हें बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े। यही वजह रही कि खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। विभिन्न फसलों की खरीद से लाखों किसानों को मिला सीधा फायदा खाद्य तथा रसद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान खरीद के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक धान खरीद से 80,39,539 किसानों को लाभ पहुंचाया गया। किसानों को इसके बदले 1,03,694.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।इसी प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 एवं 2025-26 के अंतर्गत ज्वार खरीद से 26,972 किसान लाभान्वित हुए हैं, जिन्हें 363.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं बाजरा खरीद से 1,48,718 किसानों को फायदा पहुंचा और उन्हें 1,854 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। किसानों के विश्वास को योगी सरकार ने किया मजबूत   इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योगी सरकार केवल गेहूं और धान तक सीमित नहीं रही, बल्कि अन्य फसलों की खरीद को भी बढ़ावा दिया गया। खाद्य तथा रसद विभाग की सक्रिय कार्यप्रणाली ने प्रदेश में किसानों के विश्वास को मजबूत किया है। समय पर भुगतान, खरीद केंद्रों का विस्तार और पारदर्शी व्यवस्था ने यह साबित किया है कि योगी सरकार किसानों और गरीबों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

गांव-गांव बदल रही तस्वीर! गौ संरक्षण के जरिए योगी सरकार बढ़ा रही किसानों की आमदनी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर विकास का मजबूत मॉडल बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है। योगी सरकार अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी लाभ मिल रहा है।  महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया रास्ता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसके अलावा उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रहीं हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है। जैविक खाद और पंचगव्य उत्पाद बने ग्रामीण रोजगार का नया आधार उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों में गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार के संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। जिससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है।

तपती गर्मी में भी UP में नहीं थमी बिजली सप्लाई, योगी सरकार की सख्त निगरानी से व्यवस्था दुरुस्त

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच योगी सरकार प्रदेशवासियों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग लगातार बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रहा है, जिससे आम लोगों को गर्मी के इस कठिन दौर में बड़ी राहत मिल रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन्होंने प्रदेश के सभी डिस्कॉम के प्रबन्ध निदेशक से लेकर अधिशासी अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति को लेकर विस्तृत जानकारी ली तथा उन्हें आवश्यक निर्देश दिये। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, मथुरा, फिरोजाबाद, झांसी, बरेली, उन्नाव, बनारस, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया और कानपुर (केस्को) के मुख्य अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बैठक में कहा कि इस समय भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं। ऐसे मौसम में सुचारु विद्युत आपूर्ति का अत्यधिक महत्व है। इसलिए सभी क्षेत्रों को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो। सभी अधिकारी एवं कार्मिक अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष रूप से सजगता बरतें। उपकेन्द्रों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की जाए। जिन क्षेत्रों में रात्रि में अचानक लोड में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होने के कारण ट्रांसफार्मर या लाइनों पर लोड बढ़ता है, उनको चिन्हित कर विजिलेन्स की टीम के साथ जांच अभियान चलाने के निर्देश दिये। बैठक के दौरान यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने ट्रांसफार्मर की क्षतिग्रस्तता, ट्रिपिंग एवं सामग्री उपलब्धता के बारे में भी पूछा। सभी मुख्य अभियन्ताओं का कहना था कि निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप ग्रामीण एवं शहरों को क्रमशः 18 एवं 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी सब स्टेशनों पर रात्रिकालीन ड्यूटी लगाई गयी है। वरिष्ठ अधिकारी भी देर रात्रि तक व्यवस्था की मॉनीटरिंग में लगाए गये हैं। पर्याप्त संख्या में सामग्री एवं अनुरक्षण कार्यों के लिए मैन पावर उपलब्ध है। अध्यक्ष डॉ. गोयल ने कहा कि लाइनों, सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मर की नियमित जांच होती रहे। हेल्प लाइन नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। नए कनेक्शन के लिए झटपट पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। मुख्य अभियंताओं ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में ट्रिपिंग एवं आपूर्ति बहाल करने के समय में सुधार हुआ है। ऐसे स्थान जहां पर रात्रि में अचानक लोड बढ़ता है उनको चिन्हित करके विजिलेन्स के साथ चोरी रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके कारण कई स्थानों पर लोड कम हुआ है और विद्युत फाल्ट में भी कमी आई है . डॉ. गोयल ने निर्देशित किया कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाएं। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसका रिव्यू करें। अध्यक्ष ने कहा कि गर्मी और लू के मौसम में सामान्य शटडाउन न लिया जाये। कहीं भी ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने, तार गिरने तथा ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का बिना विलम्ब निस्तारण सुनिश्चित किया जाये। ट्रांसमिशन एवं वितरण के अधिकारी परस्पर सामंजस्य स्थापित करके कार्य करें जिससे ट्रांसमिशन के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। डॉ. गोयल ने कहा कि अधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में मौजूद रहें। अपना जनसम्पर्क अच्छा रखें। जन प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों, उपभोक्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का वाट्सएप ग्रुप बनाएं, जिसमें बिजली आपूर्ति सम्बन्धी आवश्यक सूचनाएं सबको मिलती रहें। अधिक विद्युत व्यवधान वाले क्षेत्रों में विशेष सजगता बरती जाए। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारी स्वंय जाकर समस्याओं को समझें और उनका निराकरण करायें साथ ही संचार माध्यमों से उपभोक्ता को बतायें। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत वितरण कार्यों से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपभोक्ताओं को विद्युत व्यवधान और आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि किसी की भी लापरवाही से विद्युत आपूर्ति प्रभावित होगी तो उस पर कार्रवाई होगी। बैठक को पावर कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक नितीष कुमार ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने राजस्व वसूली बढ़ाने तथा बिजनेस प्लान की प्रगति तथा आगामी कार्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी ली तथा इसमें तेजी लाने के निर्देश दिये।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार के प्रयास ला रहे रंग

लखनऊ.  सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संजीदा हैं। हादसों को न्यूनतम करने की दिशा में वे समय-समय पर संबंधित विभागों की समीक्षा, सकारात्मक प्रयास, जागरूकता आदि पर जोर देते हैं। लिहाजा, सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। ई-डीएआर पोर्टल के मुताबिक, वर्ष 2025 की जनवरी से अप्रैल की समयावधि की अपेक्षा जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मृत्यु में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में 3669 (21 प्रतिशत) दुर्घटनाएं कम हुई हैं, जबकि मृतकों की संख्या में भी 2212 (22 प्रतिशत) की कमी दर्शाई गई है। सीएम के निर्देश के उपरांत सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए लगभग 2000 स्थानों पर होर्डिंग लगाई गई और प्रचार-प्रसार के जरिए परिवहन विभाग आमजन को निरंतर जागरूक भी कर रहा है।   परिवहन निगम के 18 हजार से अधिक चालकों का हुआ चेकअप  सीएम योगी के निर्देश पर परिवहन निगम के चालकों की निरंतर स्वास्थ्य/नेत्र जांच की जा रही है। हर छमाही चेकअप किया जा रहा है। अप्रैल 2026 तक 18,975 वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षा किया जा चुका है। शेष 2560 चालकों की जांच भी चल रही है। सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत यूपीएसआरटीसी की बसों पर रेट्रो रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है। ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण अनिवार्य किया गया है। वहीं 300 किमी. से अधिक यात्रा वाली बसों में दो चालक की ड्यूटी भी अनिवार्य की गई है। सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग/निगम काफी संजीदगी से प्रयासों को धरातल पर उतार रहा है।  जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना भी हो रही कारगर  सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को न्यूतनम करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों को जीरो फैटेलिटी योजना के लिए चिह्नित किया गया था। यातायात निदेशालय के मुताबिक इस योजना के क्रियान्वयन के उपरांत 4 महीने में 566 व्यक्तियों की जान बचाई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर यह योजना लागू की गई है। इन 487 क्रिटिकल थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई है। हर टीम में एक उपनिरीक्षक व 4 मुख्य आरक्षी/ आरक्षी (2865 पुलिसकर्मी) नियुक्त हैं, जो जीरो फैटेलिटी को सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।  होल्डिंग एरिया को भी किया गया चिह्नित  पहली जनवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच सभी 18 मंडलों मे होल्डिंग एरिया भी चिह्नित व नोटिफाइड किए गए। मंडलों में 656 होल्डिंग एरिया चिह्नित किए गए, इसमें से 630 को नोटिफाइड भी किया गया। आगरा मंडल में सर्वाधिक 121, बरेली में 103, मुरादाबाद में 75, आजमगढ़ में 62 होल्डिंग एरिया चिह्नित/नोटिफाइड किए गए हैं।  मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों को निरंतर जागरूक कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में संबंधित विभागों के साथ ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। आम नागरिकों से भी निवेदन है कि हेलमेट, सीट बेल्ट व यातायात के नियमों का पालन करें। सड़क सुरक्षा, स्कूली वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर जल्द ही फिर से अभियान प्रारंभ किया जाएगा।  आशुतोष निरंजन, परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश

लखनऊ विश्वविद्यालय में लगेगा विशाल रोजगार मेला, 35 से अधिक कंपनियां करेंगी चयन

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से शनिवार को यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ के मालवीय सभागार में विशाल रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस रोजगार मेले के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। 35 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। रोजगार मेले में 35 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं का चयन करेंगी। मेले के माध्यम से 2500 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां करेंगी भर्ती रोजगार मेले में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी, मैन्युफैक्चरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटीईएस, बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस तथा परिधान उद्योग सहित कई क्षेत्रों की कंपनियां भाग लेंगी। भाग लेने वाली प्रमुख कंपनियों में बारबेक्यू नेशन,पेटीएम हिटैची, शाही इंडस्ट्रीज, स्विफ्ट ट्रक, जीएम मॉडयूलर्स सहित कई बड़ी कंपनियां शामिल होंगी। हर वर्ग के युवाओं को मिलेगा अवसर इस रोजगार मेले की खास बात यह है कि इसमें 8वीं पास से लेकर आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक, बीटेक और एमबीए तक की योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी भाग ले सकेंगे। सामान्यतः अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अधिकारियों के अनुसार यह रोजगार मेला “समावेशी रोजगार” की अवधारणा पर आधारित है, ताकि विभिन्न शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। कौशल और रोजगार पर योगी सरकार का फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कौशल विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। यही कारण है कि प्रदेशभर में लगातार रोजगार मेले, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने किया न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी का उद्घाटन, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने गुरुवार को आईटीओटी अलीगंज (आईटीआई परिसर), लखनऊ में न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी बिल्डिंग का उद्घाटन किया। नई बिल्डिंग में 10 नए व्यवसायों की शुरुआत के साथ संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। सरकार इसे “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के संकल्प को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार और स्वरोजगार के योग्य तैयार करना है। उन्होंने कहा कि आईटीओटी जैसे संस्थान युवाओं के सपनों को साकार करने के केंद्र बन रहे हैं। प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों में आत्मविश्वास जगाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि आत्मविश्वास ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विशेष रूप से ड्रॉपआउट रोकने पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र की निरंतर उपस्थिति और प्रगति सुनिश्चित करना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर और मध्यम वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कौशल प्रशिक्षण जीवन बदलने वाला अवसर साबित हो सकता है। उन्होंने प्रशिक्षकों से छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों से भी संवाद बढ़ाने की अपील की, ताकि प्रशिक्षण और शिक्षा के प्रति भरोसा और मजबूत हो सके। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में विभाग लगातार आधुनिक और उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि बदलते समय की जरूरतों के अनुसार पारंपरिक कोर्सेज के साथ नई तकनीकों और इंडस्ट्री आधारित ट्रेड्स को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि संस्थानों का मूल्यांकन केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि वहां से प्रशिक्षित होकर कितने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार प्राप्त हुआ। निदेशक प्राविधिक डी. के. सिंह ने बताया कि नई बिल्डिंग के निर्माण से पहले संस्थान में 10 व्यवसाय संचालित हो रहे थे, जो अब बढ़कर 20 हो गए हैं। इसके साथ ही संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या भी लगभग 1300 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि संस्थान में आईटीआई प्रशिक्षकों के लिए सीआईपीएस प्रशिक्षण भी संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 1338 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं हाल ही में चयनित 1781 नए अनुदेशकों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मजबूत होगी। न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी में शुरू किए गए नए व्यवसायों में ड्रेस मेकिंग, ड्राफ्ट्समैन मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मैकेनिक डीजल, मैकेनिक ट्रैक्टर, ऑफिस मैनेजमेंट, पेंटिंग टेक्नोलॉजी, सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस (हिंदी), इलेक्ट्रीशियन पावर डिस्ट्रीब्यूशन और टर्नर जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक ट्रेड शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन कोर्सेज से युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। साथ ही उन्होंने परिसर में नीम का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह, अपर निदेशक मानपाल सिंह सहित विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

हर प्रशिक्षण बैच में 5% सीटें दिव्यांगजनों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित

लखनऊ उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा समाज के वंचित एवं विशेष जरूरत वाले वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। योगी सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश में संचालित सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की गई हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया  कि भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांगजन की श्रेणी में शामिल किए जाने के दृष्टिगत उन्हें कौशल प्रशिक्षण में विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छुक एवं पात्र है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पंजीकृत किया जाना सुनिश्चित किया जाए। कौशल विकास केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान लौटाने का सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि मिशन का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण एवं रोजगार के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में समान अवसर एवं नई पहचान मिल सके। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर प्रदेश के सभी जनपदों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में गठित होने वाले प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का विवरण तैयार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

बरेली जिले में आयुष्मान मरीजों के इलाज पर 682 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

लखनऊ योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में अब तक 50 लाख 40 हजार 937 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने कुल 91 लाख 87 हजार 418 बार इलाज कराया है। इन मरीजों के इलाज के लिए 15 हजार 140 करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम किया गया, जिनमें से अब तक 13 हजार 315 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। बरेली में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने लिया योजना का लाभ साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत सबसे अधिक भुगतान बरेली जिले के लाभार्थियों के इलाज पर किया गया है। बरेली जिले में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने योजना का लाभ लिया। यहां 3 लाख 72 हजार 319 उपचार क्लेम दर्ज किए गए। इसके लिए 682 करोड़ 99 लाख 77 हजार 778 रुपये का क्लेम किया गया, जबकि 620 करोड़ 81 लाख 64 हजार 359 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही बरेली पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। गोरखपुर दूसरे स्थान पर है। यहां 1 लाख 71 हजार 492 लाभार्थियों ने योजना के तहत इलाज कराया और कुल 3 लाख 59 हजार 529 क्लेम दर्ज किए गए। इन क्लेमों के लिए 591 करोड़ 25 लाख 5 हजार 428 रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई, जबकि 539 करोड़ 56 लाख 47 हजार 285 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं मुरादाबाद तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 1 लाख 29 हजार 1 लाभार्थियों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराया। यहां 2 लाख 57 हजार 480 क्लेम दर्ज हुए, जिनके लिए 519 करोड़ 60 लाख 94 हजार 301 रुपये का क्लेम किया गया और 459 करोड़ 91 लाख 43 हजार 815 रुपये का भुगतान किया गया। बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ के लोगों ने भी प्रमुखता से लिया योजना के लाभ साचीज की सीईओ ने बताया कि बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ और कानपुर नगर के आयुष्मान कार्ड धारकों ने योजना का प्रमुखता से लाभ उठाया। इसमें बिजनौर में 486 करोड़ रुपये से अधिक, सहारनपुर में 463 करोड़ रुपये से अधिक और वाराणसी में 449 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम दर्ज किए गए। वहीं लखनऊ और कानपुर नगर जैसे बड़े शहरों में भी करोड़ों रुपये का भुगतान कर मरीजों को राहत दी गई। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, जिला अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसी का परिणाम है कि आज प्रदेश के गरीबों को बड़े अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, 7500 गो आश्रय स्थलों पर तैयार होगी जैविक खाद

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के गोपालकों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। सरकार अब प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों पर गोबर से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार कराएगी, जिसे किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसे गोसंरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। इस योजना के तहत तैयार होने वाली जैविक खाद को 50 किलो के पैकेट में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि हर किसान तक इसे आसानी से पहुंचाया जा सके। कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एजेंसियों के माध्यम से इसकी टेस्टिंग व खरीद की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। गोबर से खाद तैयार करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के तौर पर उभरा है। योगी सरकार का लक्ष्य गोसंरक्षण को किसानों की आय, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जोड़ना है। इसी उद्देश्य के तहत इस योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गोबर के जरिए बढ़ेगी गांवों की आमदनी उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार ने गोसंरक्षण को ग्रामीण समृद्धि के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। पहली बार प्रदेश में गाय के गोबर को आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पशुपालन से जुड़ी आय में बड़ा इजाफा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर आधारित जैविक खाद निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खासकर युवाओं और पशुपालकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को मिलेगा डीएपी-यूरिया के साथ जैविक विकल्प योगी सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे किसानों को डीएपी और यूरिया के साथ जैविक खाद का विकल्प भी मिलेगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी। योगी सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था अलग से की गई है। गोसंरक्षण में शीर्ष राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो-तस्करी की घटनाएं आम थीं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें पूरी तरह बंद कराया गया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश गोसंरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला राज्य बनकर उभरा है। पारदर्शिता बढ़ी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती योगी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र स्थापित किया जाए, जहां गोवंश संरक्षण के साथ जैविक उत्पाद निर्माण और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में राशि भेज रही है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा है और पारदर्शिता बढ़ी है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों में इस समय 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। योगी सरकार अब इन गोशालाओं को गोबर की खाद के प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने जा रही है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा देकर किसानों की खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। एक गाय से रोज लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। यही संसाधन जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाएंगे।