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यूपी बोर्ड रिजल्ट आज 4 बजे, योगी सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता से सेट किया नया उदाहरण

यूपी बोर्ड रिजल्ट आज  4 बजे होगा घोषित, योगी सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता से रचा नया मानक परीक्षार्थी परिषद की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर पोर्टल पर देख सकेंगे अपना परिणाम 8033 केंद्रों पर 50 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने दी है परीक्षा, रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ मूल्यांकन 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन मात्र 15 कार्यदिवसों में पूरा किया गया लखनऊ/प्रयागराज  माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं का परिणाम गुरुवार 23 अप्रैल को अपराह्न 4:00 बजे परिषद मुख्यालय, प्रयागराज से घोषित किया जाएगा। परीक्षार्थी अपना परिणाम परिषद की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर पोर्टल पर देख सकेंगे।परीक्षाफल उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट और डिजिलॉकर रिजल्ट पोर्टल पर देखा जा सकेगा, जिससे छात्रों को घर बैठे ही आसान और त्वरित तरीके से परिणाम प्राप्त हो सकेगा। 50 लाख से अधिक छात्रों ने दी परीक्षा इस वर्ष बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों पर 15 कार्यदिवसों में शांतिपूर्ण एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराई गईं। हाईस्कूल में लगभग 26.02 लाख और इंटरमीडिएट में 24.91 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के व्यापक दायरे को दर्शाता है। रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ मूल्यांकन कार्य परीक्षाओं के सफल आयोजन के बाद 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच मात्र 15 कार्यदिवसों में पूरा किया गया। इस बार परिणाम को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली फोकस योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तकनीक आधारित और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार की सख्त निगरानी और प्रभावी व्यवस्थाओं के चलते परीक्षाएं पूरी तरह नकलविहीन और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुईं। परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने तक की प्रक्रिया में तय समयसीमा का पालन कर नया मानक स्थापित किया गया है। छात्रों के लिए स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट की सुविधा माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने परीक्षार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि परिणाम के बाद यदि किसी छात्र को अपने अंकों को लेकर संतोष न हो, तो उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। बोर्ड के द्वारा स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों का मनोबल बनाए रखें और उन्हें सकारात्मक सहयोग दें।

UP में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा: गन्ना समितियों में फ्री स्पेस देगी योगी सरकार

लखनऊ.  योगी सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गन्ना समितियों में रोजगार के लिए निशुल्क स्थान देने का निर्णय लिया है। यह स्थान ‘आधी आबादी’ को प्रेरणा कैंटीन और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए दिया जाएगा। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने एमओयू साइन किया है। योगी सरकार की पहल से स्वयं सहायता समूह की ग्रामीण महिलाओं को गन्ना समितियों के माध्यम से सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।  दो साल के लिए दिया जाएगा निशुल्क स्थान गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना समितियों में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की गन्ना सहकारी समितियां अपने परिसरों में उपलब्ध खाली या अतिरिक्त स्थान को महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराएंगी। यह स्थान प्रेरणा कैंटीन चलाने और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए उपयोग किया जाएगा। खास बात यह है कि इन स्थानों के उपयोग के लिए शुरुआती दो वर्षों तक कोई किराया नहीं लिया जाएगा। दो साल की मोरेटोरियम अवधि के बाद स्वयं सहायता समूहों को केवल 50 प्रतिशत किराया ही देना होगा, जो जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार तय किया जाएगा।  डिस्प्ले/मार्केटिंग सेंटर से हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पादों की कर सकेंगी बिक्री गन्ना आयुक्त ने बताया कि गन्ना समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थान का स्वामित्व पूरी तरह संबंधित समिति के पास ही रहेगा। किसी भी परिस्थिति में इस स्थान का स्वामित्व स्वयं सहायता समूहों या किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इससे सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रेरणा कैंटीन और डिस्प्ले/मार्केटिंग सेंटर के माध्यम से महिलाएं अपने हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पादों को बेच सकेंगी। इनमें खाद्य पदार्थों के अलावा सोलर लैंप, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुएं शामिल हैं। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी एक संगठित बाजार मिलेगा। इसके लिए विभाग स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण, विपणन और प्रचार-प्रसार में भी सहयोग देगा। महिलाओं को मेलों, प्रदर्शनियों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी। इसके अलावा जरूरत पर अतिरिक्त सहयोग भी प्रदान किया जाएगा ताकि गन्ना क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती, बढ़ेगा उत्पादन और खपत उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) को भी योजना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। मिशन यह सुनिश्चित करेगा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कैंटीन संचालन, साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण का उचित प्रशिक्षण मिले। वहीं, खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के साथ समन्वय भी किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी। इससे जहां एक ओर महिलाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गन्ना समितियों की गतिविधियों में भी विविधता आएगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और खपत बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।  

बालवाटिका को सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक गढ़ने की पहली प्रयोगशाला बना रही योगी सरकार

लखनऊ. बालवाटिका को प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ योगी सरकार उसे भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्णायक पहल कर रही है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देते हुए बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बालवाटिका के नवीन पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच प्रमुख आयामों से वैज्ञानिक रूप से जोड़ा गया है। अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास तथा आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से जोड़ा गया है। इसी के अनुरूप एससीईआरटी द्वारा इनके लिए चहक, कदम और कलांकुर जैसी वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथा, संख्या ज्ञान, कला एवं संगीत आधारित सामग्री विकसित की गई है। ये खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करतीं हैं।  योगी सरकार की इस पहल से बच्चों का विकास शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ उनके शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित व समग्र विकास के रूप में होगा। वे प्रारंभिक अवस्था से ही सृजनशील, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित भी होंगे।  यह है उद्देश्य इस पाठ्यक्रम को तैयार करने का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बालवाटिका के लिए तैयार यह पाठ्यक्रम खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण पर आधारित है। बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें। यह हैं पाठ्यक्रम-बाल विकास के निर्धारित चरण पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता तथा सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच का विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। भविष्य में दिखेगा सकारात्मक प्रभाव एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें विकसित होने वाली लगभग 85% क्षमताएं बच्चे के भविष्य की दिशा तय करती हैं। ऐसे में इस आयु वर्ग के लिए समग्र और गुणवत्तापूर्ण बाल केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।

पांच अग्रणी राज्य देश के कुल दूध का करते हैं 54 फीसदी उत्पादन, इसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 फीसदी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने संभाली कमान, पांच कंपनियों के जरिए जुड़ीं चार लाख महिला किसान सीएम योगी के कार्यकाल में पहली बार इतनी सशक्त हुईं महिलाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहले की तुलना में 40 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन बढ़ गया है। यही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यूपी सबसे सशक्त बनकर उभरा है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में पांच अग्रणी राज्यों की 54 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 16 फीसदी तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की बढ़ती ताकत और मजबूत डेयरी संरचना का स्पष्ट उदाहरण है। सीएम योगी के कार्यकाल में दुग्ध उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2016-17 में जहां उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।  सीएम योगी के जमीनी स्तर पर किए प्रयासों का परिणाम : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 40 प्रतिशत की यह वृद्धि प्रदेश में योजनाबद्ध विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जमीनी स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों का परिणाम है। बड़ी ताकत बनीं ग्रामीण महिलाएं इस दुग्ध क्रांति की बड़ी ताकत ग्रामीण महिलाएं बनीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिला समूह प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं और करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं। प्रदेश में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के जरिए करीब चार लाख महिला किसान जुड़ीं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’, पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’, अवध क्षेत्र में सामर्थ्य एमपीसीएल, गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल, तराई क्षेत्र में सृजन एमपीसीएल’ से जुड़कर महिलाएं रिकॉर्ड बना रही हैं। उत्तर प्रदेश की बदल रही तस्वीर पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिलाओं को इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया गया है। दुग्ध उत्पादन में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का भी प्रतीक बन गई है।

योगी सरकार की पहल को बताया तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, कहा- डिजिटल सुविधाओं से सशक्त होंगी कार्यकत्रियां

लखनऊ. योगी सरकार में अब आंगनवाड़ी सेवाएं डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनने जा रहीं हैं। आंगनवाड़ी व्यवस्था को और दुरुस्त बनाने के लिए लोकभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम को दौरान स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को भी नई मजबूती प्रदान करती है। नवनियुक्त कार्यकत्रियों ने मुख्यमंत्री की इस पहल को लेकर सराहना करते हुए खुशी जताई।   कार्यक्रम में पहुंचीं नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्री अंजली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्मार्टफोन से हमारा काम सुचारु रूप से चल पायेगा, साथ ही अब डाटा संरक्षण में आसानी होगी। तो वहीं नवनियुक्त आशा कार्यकत्री सुभाषिनी ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री के हाथों से अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ जिसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। उन्होंने कहा कि हमारी नियुक्तियां मेरिट आधार पर पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से हुईं हैं।   नवनियुक्त आशा कार्यकत्री रितिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे मुख्यमंत्री से आज जो ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस प्राप्त हुआ है उससे आंगनवाड़ी में बच्चों का वजन अच्छे से नाप पाऊंगी। सुपरवाइजर अरुणा बाजपेयी ने बताया कि  मुझे आज स्मार्टफोन मिला है जिससे मैं अपना विभागीय कार्य को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगी।  लाभार्थियों ने कहा कि डिजिटल आंगनवाड़ी की यह पहल न केवल कार्यकत्रियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेगी। यह कार्यक्रम केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश में बदलती व्यवस्था, पारदर्शी शासन और तकनीक के माध्यम से सशक्त समाज की दिशा में एक बड़ा संदेश बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री की इस पहल से प्रदेश की आंगनवाड़ी सेवाएं अब डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनेंगी। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

योगी सरकार फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को बनाएगी धुरंधर

लखनऊ.  योगी सरकार उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) के विद्यार्थियों को फॉरेंसिक की फील्ड में धुरंधर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए योगी सरकार फॉरेंसिक की दिग्गज यूनिवर्सिटी से एमओयू साइन करने जा रही है। यह एमओयू यूपीएसआईएफएस और चार विभिन्न संस्थानों के बीच होगा। इसमें महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) शामिल हैं। इन संस्थानों के साथ सहयोग से यूपीएसआईएफएस के छात्रों को इंटर्नशिप, रिसर्च और प्रैक्टिकल एक्सपोजर के व्यापक अवसर मिलेंगे। इससे जहां एक ओर छात्रों को व्यावहारिक और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ के रूप में तैयार करना है। केजीएमयू में विद्यार्थी मौत की परिस्थितियों और वैज्ञानिक तरीके से हुए विश्लेषण का करेंगे अध्ययन यूपीएसआईएफएस के डायरेक्टर जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फॉरेंसिक साइंस के छात्रों को ‘जॉब रेडी’ बनाना चाहते हैं। अब तक फॉरेंसिक शिक्षा में थ्योरी का दबदबा ज्यादा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर विशेष फोकस है। इसी के तहत सीएम योगी के निर्देश पर यूपीएसआईएफएस चार विभिन्न संस्थानों महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमओयू करने जा रहा है। इन एमओयू के जरिए छात्रों को केस स्टडी, पोस्टमार्टम प्रक्रिया, मेडिकल-लीगल पहलुओं और अपराध अनुसंधान के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ होने वाले समझौते के तहत यूपीएसआईएफएस के छात्र फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में पोस्टमार्टम की बारीकियों को करीब से समझ सकेंगे। इसमें पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन शामिल होगा। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी घटना में मौत किन परिस्थितियों में हुई और वैज्ञानिक तरीके से उसका विश्लेषण कैसे किया जाता है। अपराध के पीछे सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारणों को जेल जाकर समझेंगे छात्र यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के साथ एमओयू से छात्रों को जेलों में जाकर बंदियों के केस स्टडी करने का मौका मिलेगा। छात्र यह जान सकेंगे कि बंदियों के मामलों में जमानत कैसे होती है, जेल का वातावरण कैसा होता है और अपराध के पीछे सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारण क्या होते हैं। यह अनुभव उन्हें अपराध की जड़ों को समझने में मदद करेगा, जो एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के छात्रों को इंटरशिप के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही दोनों संस्थानों के फैकल्टी मेंबर दोनों संस्थानों में अपने लेक्चर दे सकेंगे। वहीं आगे चलकर, दोनों संस्थान मिलकर फॉरेंसिक साइंस की एक ज्वाइंट लैब भी स्थापित करेंगे। इस लैब में अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए अनुसंधान और परीक्षण किए जाएंगे। इससे न केवल छात्रों को नई तकनीकों का ज्ञान मिलेगा, बल्कि राज्य में फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा।  फैकल्टी मेंबर एक दूसरे के संस्थानों में देंगे लेक्चर धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, गांधीनगर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के बीच छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जाएंगे। यूपीएसआईएफएस के छात्र वहां जाकर इंटर्नशिप कर सकेंगे, जबकि धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के छात्र लखनऊ आकर फॉरेंसिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इससे राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होगा। इस पहल की एक खास बात यह भी है कि केवल छात्र ही नहीं, बल्कि फैकल्टी मेंबर्स भी एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर लेक्चर दे सकेंगे। इससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को विविध विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। यह पहल डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच ही सटीक निष्कर्ष तक पहुंचने का सबसे विश्वसनीय माध्यम होगा।

जटिल प्रसव के मामले भी अब संभाल रहे छोटे जिलों के अस्पताल

लखनऊ योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए हैं। आज प्रदेशवासियों को उनके ही जिले में गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल रही है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में जटिल प्रसव वाले मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की प्रवृत्ति अब प्रदेश में कम हो रही है। छोटे शहरों में ही जटिल मामले संभाले जा रहे हैं। इसके साथ ही योगी सरकार ने 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डाक्टरों को बीते चार वर्षों में प्रशिक्षण दिया। आरआरटीसी मॉडल से जिलों में मजबूत हो रही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करना आज भी स्वास्थ्य प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती है। विशेषकर जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाओं की कमी, आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय की क्षमता का अभाव और समय पर रेफरल की जटिलताओं के कारण कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। इन्हीं सवालों का व्यावहारिक और प्रभावी उत्तर बनकर उभरा है रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) मॉडल। प्रदेश में इस वक्त 20 मेडिकल कॉलेज आरआरटीसी के रूप में काम कर रहे हैं।  आरआरटीसी मॉडल: प्रशिक्षण से आगे, एक “सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन” आरआरटीसी ने पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए हब-एंड-स्पोक आधारित मेंटरशिप मॉडल विकसित किया, जिसमें मेडिकल कॉलेज “नॉलेज हब” के रूप में कार्य करता है और जिले “स्पोक” के रूप में उससे निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इस मॉडल के तहत ऑन-साइट मेंटरिंग, निरंतर क्षमता निर्माण, नर्सिंग स्टाफ का सशक्तीकरण व मल्टी-डिपार्टमेंट सहयोग लिया जाता है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थापित आरआरटीसी इस मॉडल की मिसाल है। यहां से अलीगढ़, हाथरस व कासगंज जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ की क्षमतावृद्धि की गई । आज वे जटिल से जटिल मामलों को संभाल रहे हैं। आरआरटीसी की को-ऑर्डिनेटर डॉ. तबस्सुम रहमत बताती हैं कि “हमारा लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि हर स्वास्थ्य इकाई को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वह जटिल परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सके।” जमीनी बदलाव: कासगंज से उभरती एक मिसाल आरआरटीसी मॉडल का प्रभाव सबसे स्पष्ट रूप से कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में जहां इस अस्पताल में पहला सफल सी-सेक्शन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, वहीं आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह सुसज्जित और सक्रिय है। अधिकतर डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित हैं। जटिल प्रसव मामलों का स्थानीय स्तर पर ही प्रबंधन संभव हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले जिन मामलों को तत्काल बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, अब उनमें से कई का इलाज जिले में ही हो रहा है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि माताओं और नवजातों के लिए जीवनरक्षक अंतर भी पैदा हुआ है। संकट के समय भी निरंतरता: कोविड-19 के दौरान अनुकूलन कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव था, तब भी आरआरटीसी की पहल नहीं रुकी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखा गया, विशेष सत्र आयोजित किए गए, और यह सुनिश्चित किया गया कि संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाएं बाधित न हों। यह दर्शाता है कि यह मॉडल केवल स्थिर परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी अनुकूल और प्रभावी है। एक केस, जो बताता है क्षमता का वास्तविक अर्थ जेएन मेडिकल कालेज की डॉ. नसरीन नूर एक जटिल केस को याद करती हैं। 23 वर्षीय एक महिला तेज पेट दर्द के साथ आई। प्रारंभिक जांच में स्थिति सामान्य प्रतीत हो रही थी, लेकिन विस्तृत मूल्यांकन में हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी का पता चला। एक गर्भाशय में और दूसरा ट्यूब में, जिसमें से ट्यूब वाली प्रेग्नेंसी फट चुकी थी। तत्काल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई। सावधानीपूर्वक फॉलोअप के बाद उसी महिला ने नौ महीने बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि यह संकेत है कि अब प्रणाली जटिल और जीवन-जोखिम वाली स्थितियों को पहचानने और संभालने में सक्षम हो रही है।

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी ने तोड़े पर्यटन क्षेत्र के सारे रिकार्ड, बना पर्यटन का सिरमौर

लखनऊ उत्तर प्रदेश पर्यटन क्षेत्र में सफलता की जो नई कहानी लिख रहा है, वह केवल पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश में आस्था और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे की पूरक बनकर प्रदेश में पर्यटन की विकास यात्रा को नई दिशा दे रही है। इस दिशा में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तैयार की गई पर्यटन नीति- 2022 के सफल क्रियान्वयन के साथ इको टूरिज्म का विकास, पर्यटन सुविधाओं में अवसंरचनात्मक सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे और परिवहन सेवाओं के विस्तार ने यूपी में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ का मॉडल उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक स्पिरिचुअल टूरिज्म हब के रूप में विकसित कर रहा है। आईआईएम लखनऊ ने कुछ समय पहले अयोध्या में पर्यटन को लेकर अध्ययन किया था। इसमें उसने योगी सरकार की टेंपल इकॉनामी की सराहना की है।  योगी सरकार के नौ वर्षों के शासनकाल में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिसकी गवाही पर्यटन के आंकड़े देते हैं। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में यूपी में लगभग 23.75 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2019 में यह संख्या लगभग दोगुनी बढ़कर 54.06 करोड़ पहुंच गई। हालांकि, इसमें कोविड महामारी के दौरान गिरावट दर्ज की गई, लेकिन योगी सरकार की पर्यटन नीति – 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से तेज रिकवरी हुई। परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में 64.91 करोड़ पर्यटकों के साथ यूपी देश में सर्वाधिक घरेलू पर्यटकों वाला राज्य बन गया और विदेशी पर्यटकों के मामले में चौथा। यही नहीं, वर्ष 2025 में महाकुंभ-2025 के आयोजन से पर्यटकों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 156.18 करोड़ तक पहुंच गई। गौरतलब है कि पिछले 9 वर्षों में यूपी में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग सात गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो यूपी को वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में उल्लेखनीय संकेत है। प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन मुख्यमंत्री के विजन को साकार करती उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 प्रदेश में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन को साकार करने वाली साबित हुई है। इस नीति के तहत होटल, होमस्टे, ईको-टूरिज्म, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म समेत 22 गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए निवेश आधारित सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत अब तक ₹36,681 करोड़ के निवेश लक्ष्य को हासिल किया गया है। साथ ही 1,684 से अधिक पर्यटन इकाइयों को पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। जिससे प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ और महिलाओं का भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  उत्तर प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों का निर्माण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न तीर्थ परिषदों का निर्माण कर उनका कायाकल्प किया गया। जिससे एक ओर तो तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा में बढ़ोतरी हुई, साथ ही इन क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला। इसमें अयोध्या, देवीपाटन, ब्रज तीर्थ, विंध्याचल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुक तीर्थ विकास परिषदों का गठन प्रमुख है। इसके साथ ही प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों, रामायण, कृष्ण, बौद्ध, जैन, सूफी, स्वतंत्रता संग्राम सर्किट आदि का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही 83 धार्मिक मार्गों के चौड़ीकरण व विकास से श्रद्धालुओं की यात्रा और सुगम हुई है। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। इसमें लखनऊ में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना, कौशांबी में संग्रहालय, बाराबंकी में बाबू केडी सिंह संग्रहालय, गोरखा रेजिमेंट सेंटर, मेरठ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित संग्रहालय और गोरखपुर में शहीद स्मारक जैसे निर्माण कार्य उल्लेखनीय हैं। प्रयागराज में आजाद पार्क और ‘देखो प्रयागराज’ ट्रेल का अनुभव, बुंदेलखंड (महोबा) का विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकास, अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, कुशीनगर में बुद्ध थीम पार्क, आगरा स्थित बटेश्वर और श्रावस्ती का समेकित पर्यटन विकास जैसी विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश में सांस्कृतिक समृद्धि के साथ पर्यटन विकास की वाहक साबित हो रही हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अगस्त 2022 में यूपी इको टूरिज्म बोर्ड का गठन किया गया। जिसके माध्यम से प्रदेश के प्रमुख इको टूरिज्म केंद्रों दुधवा, कतर्नियाघाट, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ और सोहगीबरवा वन क्षेत्रों के साथ अन्य प्राकृतिक पर्यावासों में भी नाइट स्टे, वॉच टॉवर, नेचर ट्रेल, कैफेटेरिया, होमस्टे और बर्ड वॉचिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं हैं, साथ ही ग्रामीण पर्यटन के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में युवा पर्यटन क्लबों का गठन कर स्थानीय सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ यही नहीं, योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल यूपी में पर्यटन विकास का सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ है। इसका सबसे सशक्त उदाहरण अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में देखने को मिला। अयोध्या में आने वाले पर्यटकों की संख्या वर्ष 2017 के 2.84 लाख से अविश्वसनीय रूप से बढ़कर वर्ष 2024 में 16.44 करोड़ के पार पहुंच गई। यही नहीं, वर्ष 2025 में भी अयोध्या में 29.95 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। इसी क्रम में वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, प्रयागराज में कुंभ और महाकुंभ के आयोजनों ने इन तीर्थक्षेत्रों में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। योगी सरकार का यह मॉडल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वर्ष 2017 से 2025 तक 197 ऐतिहासिक और पवित्र स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ, जिससे प्रदेश में पर्यटनजनित व्यापार और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में त्योहार और उत्सव अब दिव्य-भव्य महोत्सव का रूप ले चुके हैं। इसमें अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली और मथुरा के ब्रज और बरसाना के होली उत्सव में देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगती है। यही नहीं, प्रयागराज के महाकुंभ-2025 में … Read more

रामनवमी पर डबल छुट्टी! योगी सरकार ने 27 मार्च को भी किया अवकाश घोषित

लखनऊ रामनवमी पर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। पहले से घोषित 26 मार्च के सार्वजनिक अवकाश के साथ अब 27 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी गई है। मंदिरों में रामनवमी के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।   हर साल इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश से लोगों को सुविधा मिलेगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार आस्था और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि यात्रा और दर्शन भी अधिक सहज हो सकेंगे।

योगी सरकार के प्रयासों से खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिली रफ्तार, लाखों किसान योजनाओं से जुड़े

किसानों के हित में बड़ा कदम, यूपी में तेजी से आगे बढ़ रहा ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री अभियान के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और कृषि व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत प्रदेश के राजस्व गांवों में बड़ी संख्या में खेतों और फसलों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है, जिससे फसल से संबंधित सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।   प्रदेश में कुल 1,08,935 राजस्व गांवों में से 95,765 गांवों का जियो रेफरेंसिंग कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके आधार पर खरीफ और रबी दोनों सीजन में लाखों खेतों का डिजिटल सर्वे किया गया है। खरीफ सीजन में 5,37,08,511 से अधिक प्लॉट का सर्वे अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया है, जबकि रबी सीजन में भी 5,56,44,677 से अधिक प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति योगी सरकार द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी मिशन मोड में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार प्रदेश में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 2,88,70,495 है। सत्यापन अभियान के बाद 2,31,36,350 से अधिक किसानों का डेटा उपलब्ध हुआ है। इनमें से अब तक 1, 67,01,996 से अधिक पीएम किसान सम्मान योजना के लाभार्थी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल हो चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग 72.19 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त करीब 28, 37,162 वे किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं जो पीएम किसान सम्मान योजना में शामिल नहीं हैं।    डिजिटल तकनीक से कृषि व्यवस्था होगी मजबूत योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों का सटीक डाटाबेस तैयार होगा, जिससे फसल बीमा, कृषि अनुदान, आपदा राहत और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।    योगी सरकार के कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है। आने वाले समय में इन पहल के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।