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बलरामपुर में सेवा और स्नेह की अनूठी पहल, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान

रायपुर : बलरामपुर जिले में सेवा और स्नेह का अनूठा संकल्प, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’ कलेक्टर ने जिलेवासियों से खिलौना दान कर बच्चों की खुशियों में सहभागी बनने की अपील रायपुर, बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे। ‘आंगन मिलन सेवा’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे। ’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है। खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं। जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’  इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा। सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर ‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं। यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।  

जमीनी स्तर पर आंगनवाड़ी का जायजा, आयुक्त संदीप जी.आर. ने बच्चों से की बातचीत और जाना हाल

आंगनवाड़ी सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे आयुक्त संदीप जी.आर. बच्चों से संवाद कर लिया फीडबैक भोपाल  नवागत आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने मैदानी स्तर पर विभागीय सेवाओं की स्थिति जानने सीहोर जिले के आंगनवाड़ी केंद्र डोडी क्रमांक-58 का भ्रमण एवं निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और अन्य हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा संबंधी सेवाओं का बारीकी से अवलोकन किया और सेवाओं की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने 3 से 6 वर्ष आयु के बच्चों के लिए उपलब्ध नाश्ता एवं गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और स्वाद की जानकारी ली। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे स्थानीय टेक होम राशन, शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों तथा केंद्र पर प्रदाय की जा रही अन्य पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी ली। आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक बाल हितैषी बनाने पर जोर आयुक्त संदीप जी.आर. ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और मातृ एवं शिशु कल्याण का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने बच्चों और हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने, पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्रिय, जीवंत और बाल हितैषी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बच्चों और हितग्राहियों से सीधे संवाद कर जानी जमीनी स्थिति आयुक्त संदीप जी.आर. ने आंगनवाड़ी केंद्र में उपस्थित बच्चों और महिला हितग्राहियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बच्चों से केंद्र पर मिलने वाले नाश्ते और गर्म पके भोजन के स्वाद एवं गुणवत्ता के बारे में सहज बातचीत की तथा पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में हितग्राहियों से फीडबैक लिया। पोषण ट्रैकर के उपयोग और कुपोषित बच्चों के प्रबंधन की ली जानकारी आयुक्त संदीप ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों के आयोजन, पोषण ट्रैकर के उपयोग तथा केंद्र में कुपोषित बच्चों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए की जा रही कार्यवाही की जानकारी ली। कार्यकर्ता द्वारा पोषण ट्रैकर में उपलब्ध शाला पूर्व शिक्षा गतिविधि के वीडियो के माध्यम से बच्चों के साथ कराई जा रही गतिविधि का भी उन्होंने प्रत्यक्ष अवलोकन किया। संदीप ने डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग के साथ बच्चों के लिए गतिविधि आधारित और रुचिकर प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की भी की समीक्षा निरीक्षण के दौरान आयुक्त सेदीप जी. आर. ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना सहित विभाग की अन्य योजनाओं में नवीन हितग्राहियों के पंजीयन तथा उन्हें योजनाओं का लाभ प्राप्त होने की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने योजनाओं का पात्र हितग्राहियों तक समय पर लाभ पहुंचाने और मैदानी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।  

जर्जर भवन में संचालित आंगनवाड़ी, बांस और टूटे एल्बेस्टर से बनी अस्थाई रसोई

जर्जर भवन में संचालित आंगनवाड़ी, बांस और टूटे एल्बेस्टर से बनी अस्थाई रसोई उमरिया  बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मानिकपुर के ग्राम कारीगढ़हरी स्थित आंगनवाड़ी केंद्र की जर्जर हालत सामने आई है। यहां करीब 46 बच्चे पढ़ाई, खेल और पोषण के लिए पहुंचते हैं, लेकिन जिस भवन में बच्चों को बैठाया जाता है, उसकी छत का प्लास्टर कई जगह से गिर चुका है। जर्जर भवन में बच्चों के बैठने से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं बच्चों के मध्यान भोजन के लिए बांस और टूटे-फूटे एल्बेस्टर शीट के टुकड़ों से अस्थाई रसोई तैयार की गई है। ऐसी व्यवस्था में भोजन बनाने वाले की सुरक्षा के साथ-साथ भोजन की स्वच्छता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि शासन-प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए आंगनवाड़ी भवन की मरम्मत कराए और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

राष्ट्रीय पोषण माह की तैयारी, ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ बनेगी जनभागीदारी की थीम

‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम पर मनेगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह मध्यप्रदेश में पोषण, बाल विकास और मातृ स्वास्थ्य संबंधी चलेंगे व्यापक जन-जागरूकता अभियान पोषण वाटिका, पोषण मेले और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता की होगी सामुदायिक निगरानी 9 सितम्बर से शुरू होगा राष्ट्रीय पोषण माह भोपाल  इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम पर व्यापक जनभागीदारी के साथ किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत आयोजित होने वाले पोषण माह का उद्देश्य आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास की गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र बनाते हुए समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस वर्ष 9 सितम्बर से राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। पोषण को जनआंदोलन बनाने पर जोर इस वर्ष पोषण माह को केवल जागरूकता अभियान तक सीमित न रखते हुए समुदाय को आंगनवाड़ी केन्द्रों से जोड़ने और पोषण सेवाओं में उसकी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेशभर में स्थानीय खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, बच्चों के प्रारंभिक विकास, गर्म पके भोजन की गुणवत्ता तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियां आयोजित होंगी। स्थानीय खाद्य पदार्थों से सजेगा पोषण का संदेश आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन को लेकर आंगनवाड़ी केन्द्रों पर स्थानीय एवं कम लागत में उपलब्ध खाद्य पदार्थों से पौष्टिक व्यंजनों की रेसिपी डेमोंस्ट्रेशन गतिविधियां होंगी। पोषण मेलों के माध्यम से स्थानीय सुपर फूड, मौसमी फल-सब्जियों, दालों, अनाज, मिलेट्स, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मेवा और बीज सहित प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बताई जाएगी। ‘प्रोटीन रिच फूड’ अभियान के माध्यम से परिवारों को रोजमर्रा के भोजन में किफायती और आसानी से उपलब्ध प्रोटीन स्रोत शामिल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों की पोषण वाटिकाओं में उत्पादित खाद्य पदार्थों तथा स्थानीय मौसमी खाद्य सामग्री को भी प्रदर्शित कर उनके नियमित उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। बच्चों की थाली में मिलेगा ताजा और विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन आंगनवाड़ी केन्द्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान रहेगा। स्थानीय उपलब्धता के अनुसार खाद्य सामग्री में विविधता सुनिश्चित करने के साथ साप्ताहिक मेन्यू को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गर्म पके भोजन की तैयारी, स्वच्छता और संतुलित पोषण को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न डेमोस्ट्रेशन किए जाएंगे। इनमें बच्चों के पालक, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह और मातृ समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आंगनवाड़ियों के प्रबंधन में समुदाय बनेगा भागीदार ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम को धरातल पर उतारने के लिए समुदाय की निगरानी और सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर सहयोगी मातृ समिति/आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति को सक्रिय किया जाएगा और पोषण माह के दौरान कम से कम एक बैठक आयोजित की जाएगी। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर नाश्ता एवं गर्म पके भोजन के मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे। इनके माध्यम से हितग्राहियों को मिलने वाले पोषण आहार की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी। समुदाय को भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और मेन्यू के अनुसार वितरण की निगरानी में भी सहभागी बनाया जाएगा। पहले 1000 दिन पर विशेष फोकस, विकासात्मक विलंब की होगी पहचान बाल विकास के लिए पोषण के साथ गुणवत्तापूर्ण देखभाल को भी पोषण माह का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 दिनों में उचित पोषण और संवेदनशील देखभाल के महत्व को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संशोधित होम विजिट शेड्यूलर के माध्यम से बच्चों के विकास और अभिभावकों की काउंसलिंग पर जोर दिया जाएगा। नवचेतना और आधारशिला पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विकासात्मक विलंब वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य विभाग एवं आरबीएसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल कार्यक्रम टीम के माध्यम से आवश्यक सेवाओं के लिए रेफर किया जाएगा। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में लाभार्भियों को 100 प्रतिशत लाभ पहुँचाना पोषण माह के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी व्यापक रूप से जोड़ा जाएगा। पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए 100 प्रतिशत सैचुरेशन ड्राइव चलाया जाएगा। लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर सत्यापन, स्वीकृति और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। योजना की पात्रता, मिलने वाले लाभ, किश्तों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान होंगे। लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को भी सोशल और जनसंचार माध्यमों के जरिए साझा किया जाएगा। आंगनवाड़ी बनेगी पोषण और बाल विकास की सामुदायिक प्रयोगशाला राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के माध्यम से मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों को केवल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केन्द्र के बजाय समुदाय की साझेदारी से पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास की सामुदायिक प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ समाज में जागरूकता के साथ स्पष्ट संदेश है कि बच्चों का पोषण और उनका समग्र विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।  

मध्य प्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी पदों पर निकली भर्ती, आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई

मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई तक भोपाल राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा। ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है। रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले … Read more

नई शिक्षा नीति 2020 का असर, आंगनवाड़ी और स्कूलों के तालमेल से मजबूत होगी बच्चों की बुनियाद

राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020: आंगनवाड़ी और स्कूलों के समन्वय से सुदृढ़ होगी प्रारंभिक शिक्षा की नींव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के को -लोकेशन के दिशा-निर्देशों से शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत भोपाल  छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत अक्सर एक अनजान जगह से होती है, जहां उनको नया माहौल मिलता है। इस माहौल के डर और झिझक को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय को अब एक ही परिसर में लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का को-लोकेट किया जा रहा है। इस व्यावहारिक रणनीति का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की एक ऐसी मजबूत नींव रखना है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो संस्थानों को एक परिसर में लाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर बच्चों के लिए एक सुरक्षित, प्रेरक और उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल तैयार करने का महाअभियान है। क्या बदलेगा इस व्यवस्था से यह को-लोकेशन मॉडल मुख्य रूप से उन आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू किया जा रहा है जो प्राथमिक विद्यालयों के समीप स्थित हैं और जहाँ बच्चों के लिए सुरक्षित पहुँच उपलब्ध है। इसमें अस्थायी या सीमित संसाधनों वाले परिसरों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों में स्थानांतरित कर अधिक सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे विद्यालय जहॉ अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं, वहाँ आंगनवाड़ी केंद्रों को को-लोकेट किया जा रहा है जिससे शासकीय परिसंपत्तियों और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। भौगोलिक कारणों से जिन क्षेत्रों में भौतिक रूप से को- लोकेशन संभव नहीं है, वहाँ समीपस्थ प्राथमिक विद्यालयों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है जिससे दोनों संस्थानों के बीच समन्वय और संसाधनों का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इस एकीकृत मॉडल से बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्रों से पहली कक्षा में स्थानांतरण बेहद सुचारू और सहज हो जाएगा। विद्यालय परिसर से पहले से परिचित होने के कारण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे शुरुआती कक्षाओं में होने वाले ड्रॉप आउट की दर में भारी कमी आएगी। इस नई व्यवस्था से आंगनवाड़ी के बच्चों को स्कूलों की आधुनिक अधोसंरचना, खेल के मैदानों और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों तक समान पहुँच मिलेगी। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने के साथ-साथ खेल-आधारित पाठ्यक्रमों जैसे 'आधारशिला' और 'जादुई पिटारा' के साझा उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। आंगनवाड़ी एवं विद्यालीन समन्वय से बच्चों के डेटा का मिलान आसान होगा, जिससे सेवाओं के दोहराव से बचा जा सकेगा और प्रत्येक बच्चे तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचना सुनिश्चित हो। 'विद्यारंभ'- म.प्र. ने रचा इतिहास आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्कूलों के इस को-लोकेशन मॉडल को प्रभावी बनाने में 'विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम' एक ऐतिहासिक कड़ी साबित हो रहा है, जो बच्चों की औपचारिक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर के निर्णयों के अनुरूप बाल चौपाल अर्ली चाइल्ड हूड केयर एंड एजुकेशन -डे) के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ "विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण समारोह" संपन्न हुआ। पूरे प्रदेश में एक साथ इस गरिमामयी अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने वाला मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य बना है। इस महाअभियान में 5 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के 9.28 लाख से अधिक बच्चों को उनके जीवन की पहली औपचारिक शिक्षा यात्रा के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस प्रदेशव्यापी आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें राज्य स्तर पर 1, जिला स्तर पर 65, परियोजना स्तर पर 445, सेक्टर स्तर पर 3,358 तथा आंगनवाड़ी स्तर पर 94,482 सफल कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन सभी स्तरों पर आयोजित कार्यक्रमों में मंत्रियों, विधायकों, कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। भविष्य की कार्ययोजना को सुदृढ़ करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को पात्र बच्चों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आगामी सत्र में शालाओं में उनका शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जा सके।  

आंगनबाड़ी केंद्रों में बदलाव, नन्हे कदम बनेंगे सशक्त भारत के भविष्य की नींव

रायपुर देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ संवर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलें में दिख रहा यह सकारात्मक बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रहा है। भवन ही बन गया शिक्षक : ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की अभिनव पहल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से निर्मित आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को साकार रूप दिया है। लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों और खुले स्थानों को शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है। रंग-बिरंगी चित्रकारी के माध्यम से बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश की जानकारी सहजता से मिल रही है। अब हर दीवारें बोलती हैं, हर कोना सिखाता है आंगनबाड़ी स्वयं एक जीवंत पाठशाला बन गई है। धमतरी का ‘बाला मॉडल’ : सीखने का नया अनुभव धमतरी जिले में बाला मॉडल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ और भाषा चार्ट, फर्श पर रंग और आकार तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ा रहे हैं। शिक्षा के साथ रोजगार का मजबूत आधार मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण ने दोहरा लाभ दिया है। एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना विकसित हुई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीणों के पलायन में कमी आई है। इस प्रकार आंगनबाड़ी केवल बच्चों के विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन गया है। खेल-खेल में सीखता बचपन, खिलखिलाता माहौल महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के दूरस्थ वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में नया वातावरण साफ दिखाई देता है। आकर्षक दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ और खेल सामग्री ने इन्हें आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा रूप दे दिया है। बच्चे अब उत्साह के साथ केंद्र आते हैं और भाषा, गणित व व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीखते हैं। पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहाँ पोषण, पूरक पोषण आहार टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे संदेश “जितनी बेहतर वजन रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और “लड़का-लड़की एक समान” सामाजिक परिवर्तन का संदेश भी दे रही हैं। कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेलघर और नियमित साफ-सफाई ने केंद्रों को बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सशक्त भारत की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों का यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार का समन्वित मॉडल बन चुका है। आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। * डॉ. दानेश्वरी संभाकर उप संचालक (जनसंपर्क)

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तय मानक के अनुरूप नहीं होने पर बदली जाएंगी साड़ियां रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग  द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ है, लेकिन जहां भी गड़बड़ी मिली है, वहां सुधार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर साड़ियां बदली जाएंगी।     आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दी गई साड़ियों की लंबाई और गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक्शन लिया है। विभाग के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रावधान के तहत हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को साल में दो साड़ी यूनिफॉर्म दी जाती है। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपए तय हैं। इसी आधार पर राज्य में करीब 1.94 लाख साड़ियों की आपूर्ति का आदेश छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी को दिया गया था। साड़ियों के रंग, डिजाइन और लंबाई का मापदंड राज्य स्तर पर तय किया गया था। इसके अनुसार साड़ी की लंबाई 5.50 मीटर और ब्लाउज पीस सहित कुल लंबाई 6.30 मीटर निर्धारित है।       महिला एवं बाल विकास विभाग को साड़ी की आपूर्ति से पहले छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी के  सैंपल की जांच तकनीकी एजेंसी राइट्स लिमिटेड, मुंबई से कराई गई थी, जिसमें गुणवत्ता सही पाई गई।                आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरित की गई l हालांकि वितरण के बाद दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों से कुछ शिकायतें सामने आईं। इनमें साड़ी छोटी होने, धागा निकलने और रंग छोड़ने की बात कही गई। विभाग ने तुरंत जांच समिति बनाकर इन मामलों की पड़ताल कराई। जांच में कुछ मामलों में लंबाई कम और बुनाई में खामियां सामने आईं।विभाग का कहना है कि कॉटन साड़ी होने के कारण पहली धुलाई में रंग छोड़ने की स्थिति कुछ जगहों पर दिखी, लेकिन बाद में रंग सामान्य रहा।          महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे साड़ियों की दोबारा जांच करें और जहां मापदंड से कमी मिले, उसकी जानकारी भेजें। साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी साड़ियों को बदलकर मानक के अनुसार नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएं।       विभाग ने यह भी बताया कि जारी कार्यादेश में ही एजेंसी को गुणवत्ता बनाए रखने और शिकायत मिलने पर सामग्री बदलने की शर्त लिखी गई थी।विभाग का कहना है कि किसी भी हितग्राही को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी मानक के अनुरूप साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी, केंद्र और राज्य वित्तीय नियमों के तहत हो रही प्रक्रिया

सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य के वित्तीय नियमों के तहत  पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग ने सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत आंगनबाड़ियों में आरओ एवं एलईडी टीवी खरीदी को लेकर  विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना से संबंधित सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य सरकार के वित्तीय नियमों के अनुरूप ही की जा रही हैं, जिससे किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं है।            विभाग ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि 10 फरवरी 2026 को भारत सरकार से सक्षम आंगनबाड़ी योजना के लिए मदर सैंक्शन प्राप्त हुआ। यह केंद्र प्रवर्तित योजना है, इसलिए मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। मदर सैंक्शन से पहले टेंडर जारी न होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।          महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एलईडी टीवी, आरओ प्यूरीफायर, वाल पेंटिंग और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए राशि भारत सरकार द्वारा ही निर्धारित की गई है। इसके तहत एलईडी टीवी के लिए 25 हजार रुपये, आरओ प्यूरीफायर के लिए 10 हजार रुपये, वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार रुपये और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये की राशि तय की गई है।             तकनीकी स्पेसिफिकेशन को लेकर भी विभाग ने पूरी स्पष्टता रखी है। एलईडी टीवी के लिए न्यूनतम 32 इंच या उससे अधिक का प्रावधान विभागीय पत्र में उल्लेखित है और सभी खरीदी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है।            महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम आंगनबाड़ी के उन्नयन से जुड़े सभी कार्य छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, कोषालय संहिता, वित्तीय संहिता, एसएनए स्पर्श प्रणाली तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर उन्नयन सुनिश्चित हो सके।

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी बच्चों के लिए पहली बार विद्यारंभ समारोह का आयोजन

मध्यप्रदेश में पहली बार आंगनवाड़ी बच्चों का विद्यारंभ समारोह मिलेगा ‘विद्यारंभ प्रमाण-पत्र’ 24 मार्च को पूरे प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में होगा समारोह राज्य स्तरीय ‘ग्रेजुएशन सेरेमनी’ में मंत्री सुभूरिया करेंगी बच्चों को सम्मानित भोपाल मध्यप्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार आंगनवाड़ी केंद्रों में शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे 5 से 6 आयु वर्ष के बच्चों को “विद्यारंभ प्रमाण-पत्र” प्रदान कर उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया जाएगा। प्रदेश में 24 मार्च को आयोजित होने वाले बाल चौपाल (ECCE Day)के अवसर पर प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ समारोहपूर्वक प्रमाण-पत्र वितरण किया जाएगा, जिससे शाला पूर्व शिक्षा को सामाजिक और संस्थागत मान्यता मिल सके। इस पहल को राज्य स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए भोपाल में विशेष राज्य स्तरीय ‘ ग्रेजुएशन सेरेमनी ’ का आयोजन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की शुभकामनाएँ देंगी। यह कार्यक्रम भोपाल जिले की बाणगंगा परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 1061 और 859 में आयोजित होगा, जहां 35 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह पहल केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 5-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र देकर उनके शैक्षणिक जीवन की औपचारिक शुरुआत को मान्यता दी जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के अनौपचारिक शिक्षा से औपचारिक विद्यालयी प्रणाली में सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करना, परिवार और समुदाय को शाला पूर्व शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा के सशक्त केन्द्र के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम के आयोजन में प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था रॉकेट लर्निंग का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। संस्था के साथ केंद्र और राज्य स्तर पर हुए समझौते के तहत वर्तमान में मध्यप्रदेश के 39 जिलों में गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। विद्यारंभ प्रमाण-पत्र पहल से न केवल बच्चों की शैक्षणिक यात्रा में निरंतरता सुनिश्चित होगी बल्कि समुदाय में आंगनवाड़ी केंद्रों के प्रति विश्वास और सहभागिता भी बढ़ेगी। इससे बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत होगा और भविष्य में ड्रॉपआउट दर कम करने में भी मदद मिलेगी।