samacharsecretary.com

सूरजपुर के आंगनबाड़ी केंद्रों में सजी ‘पोषण और खुशियों की चौपाल’, योजनाओं की दी गई जानकारी

आंगन मिलन सेवा सूरजपुर के आंगनबाड़ी केंद्रों में सजी पोषण और खुशियों की चौपाल स्वास्थ्य, स्वच्छता और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की दी गई जानकारी रायपुर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रमों में ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण जागरूकता और सामुदायिक सहयोग को एक नया प्रोत्साहन मिला है। पौष्टिक थाली और व्यंजन प्रदर्शनी        कार्यक्रमों के दौरान मेरी पौष्टिक थाली और पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शनी के माध्यम से संतुलित आहार तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के सही उपयोग की जानकारी दी गई। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। हर घर मुनगा अभियान        परिवारों के बच्चों के दैनिक आहार में विविधता लाने तथा स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर जोर दिया गया। इसके तहत हर घर मुनगा अभियान चलाकर मुनगा लगाने और उसे भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। सामुदायिक सहभागिता          इन आयोजनों को सफल बनाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। महिलाओं और बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और स्वास्थ्य व पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को अपने परिवार एवं समुदाय तक पहुंचाया। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना, परिवारों को बच्चों की उचित देखभाल व पोषण से जोड़ना और शासन की योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचाना है।

पंजाब में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिली खेल किट

चंडीगढ़. पंजाब भर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान से ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में जुड़ते हुए परिवारों और समुदायों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए ज़मीनी स्तर पर एक नेटवर्क तैयार कर रही हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर एक नेटवर्क तैयार कर रही हैं, जिसमें खेल और सामुदायिक भागीदारी नशे की रोकथाम की रणनीति के प्रमुख घटक बनकर उभर रहे हैं। श्री मुक्तसर साहिब के मलोट में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम ने यह झलक पेश की कि भगवंत मान सरकार का ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान एनफोर्समेंट और नशा मुक्ति से आगे बढ़कर सामुदायिक स्तर पर नशे की रोकथाम को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल

आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

आंगनबाड़ी केंद्र बने उत्सव स्थल, पहले दिन 97 हजार से ज्यादा लोगों की भागीदारी

आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद रायपुर  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’, पौष्टिक थाली का होगा प्रदर्शन

रायपुर. सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी माताओं, बच्चों, महिलाओं और समुदाय को पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण योजनाओं की जानकारी से जोड़ना तथा जनभागीदारी को मजबूत करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक एक दिवसीय आयोजन होगा। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में हितग्राही माताओं, स्वसहायता समूह की महिलाओं, बच्चों के अभिभावकों, मितानिनों तथा समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों के योगदान को सम्मानित भी किया जाएगा। आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में समुदाय के समक्ष ‘मेरी पौष्टिक थाली’ का प्रदर्शन कर संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। महिलाओं और बच्चों के लिए पौष्टिक व्यंजनों की विधि का प्रदर्शन, स्वास्थ्य एवं पोषण आधारित चित्रकला तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, माताओं एवं सुपोषित बच्चों का सम्मान और बच्चों के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में सामुदायिक सहभागिता से ‘न्योता भोज’ भी कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पोषण वाटिका के लिए पौधरोपण करते हुए ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। समुदाय से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराने की अपील भी की जाएगी। जिलेवार तिथियों में होंगे आयोजन- 25 सितंबर को रायपुर शहरी क्षेत्र, बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर 26 सितंबर को रायपुर ग्रामीण, कोरबा, कवर्धा और सूरजपुर 28 सितंबर को महासमुंद, दंतेवाड़ा, राजनांदगांव और गरियाबंद 29 सितंबर को धमतरी, दुर्ग, बलौदाबाजार और मुंगेली 30 सितंबर को भिलाई क्षेत्र, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, बीजापुर और जांजगीर 1 अक्टूबर को बेमेतरा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और सुकमा 2 अक्टूबर को जशपुर, कोंडागांव और मानपुर-मोहला 3 अक्टूबर को बालोद, नारायणपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 5 अक्टूबर को सक्ती, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ 6 अक्टूबर को बलरामपुर, बिलासपुर ग्रामीण और कोरिया जिले में कार्यक्रम आयोजित होंगे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण-स्वच्छता पर फोकस, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की पहल

बच्चों की थाली बनी सामूहिक जिम्मेदारी, प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वच्छता पर जोर ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश के साथ समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का अभियान रायपुर  राज्य में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ और ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान व्यापक रूप से चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पोषण अभियान और यूनिसेफ के सहयोग से प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को गर्म, ताजा, पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोस्टर एवं जागरूकता सामग्री के माध्यम से अभिभावकों और समुदाय को बताया जा रहा है कि वे बच्चों की थाली की गुणवत्ता और स्वच्छता पर नजर रखें। भोजन साफ-सफाई से तैयार हो रहा है या नहीं, उसका स्वाद एवं गुणवत्ता कैसी है, बच्चों को क्या और किस प्रकार परोसा जा रहा है—इन विषयों पर चर्चा करने के साथ आवश्यकतानुसार सुधार के सुझाव देने और उसमें सहयोग करने के लिए भी समुदाय को प्रेरित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने 12 सितम्बर को राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह रथ गांव-गांव पहुंचकर माताओं, परिवारों और समुदाय को संतुलित आहार, स्वच्छता तथा बच्चों के शुरुआती विकास के प्रति जागरूक कर रहा है। इसके साथ ही विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बच्चों के विकास की समय पर पहचान, परामर्श तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी सेवा भाव से किया जा रहा है। सेवा की कहानी : आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की थाली से जुड़ी सामुदायिक भागीदारी प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण माह के दौरान बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मूल्य को बेहतर बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, माताओं, स्व-सहायता समूहों और समुदाय द्वारा मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों द्वारा भोजन कम ग्रहण किए जाने की स्थिति में माताओं से चर्चा कर भोजन के स्वाद और परोसने के तरीके में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में स्थानीय एवं मौसमी सब्जियों, दाल और मिलेट जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के साथ रसोई की स्वच्छता और भोजन परोसते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बच्चों के नियमित वजन एवं विकास की निगरानी भी की जा रही है, ताकि उनके पोषण स्तर में होने वाले बदलावों की समय पर पहचान की जा सके। इन प्रयासों से आंगनबाड़ी केंद्रों में समुदाय की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब अभिभावक और ग्रामीण भी बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, मेनू और स्वच्छता के बारे में जानकारी लेने के साथ आवश्यक सुझाव दे रहे हैं। यह पहल ‘सेवा की कहानी’ के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समुदाय की जिम्मेदारी को सामने ला रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों, पंचायतों, अभिभावकों और समुदाय को पोषण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। 9 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में रंग-बिरंगी थाली प्रदर्शन, पोषण मेला, माता-पिता की बैठकें, स्वच्छता अभियान और विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ केवल एक संदेश नहीं, बल्कि प्रदेश के हर बच्चे को स्वस्थ, सुपोषित और बेहतर भविष्य देने का सामूहिक संकल्प है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से यह संकल्प धरातल पर साकार हो रहा है।

हर माह दो दिन लगेंगे सेवा समाधान शिविर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अधिकारियों तक को मिलेगी सुविधा

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अधिकारी तक, सबकी सेवा संबंधी समस्याओं का होगा त्वरित निराकरण संभाग-जिला स्तर पर हर माह प्रथम एवं तृतीय बुधवार को होंगे शिविर भोपाल  आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध निराकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उनके निर्देशानुसार अब संभाग एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय बुधवार को दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक नियमित समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिविरों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका से लेकर जिला स्तर के अधिकारी-कर्मचारी तक अपनी सेवा संबंधी समस्याएं और आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। नियुक्ति, समयमान वेतनमान, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन तथा अन्य देय स्वत्वों से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई कर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक प्राप्त प्रकरण का अभिलेख भी संधारित किया जाएगा, जिससे उसके निराकरण की नियमित निगरानी की जा सके। आयुक्त संदीप जी.आर. ने कर्मचारियों को उनके अधिकारों एवं देय स्वत्वों के लिए अनावश्यक कठिनाई से बचाने के साथ ही विभागीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। इसी क्रम में कर्मचारियों के वेतन का भुगतान प्रत्येक माह की पहली तारीख को सुनिश्चित करने तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय के साथ विभागीय कर्मचारियों के चिकित्सा देयक, यात्रा भत्ता और अन्य स्वत्वों का समय पर भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं। समस्या निवारण शिविरों की जानकारी सभी अधिकारियों-कर्मचारियों तक पहुंचाने के साथ प्राप्त प्रकरणों के निराकरण की नियमित समीक्षा और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान उनके निकटतम स्तर पर, पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से और निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित हो।  

बलरामपुर में सेवा और स्नेह की अनूठी पहल, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान

रायपुर : बलरामपुर जिले में सेवा और स्नेह का अनूठा संकल्प, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’ कलेक्टर ने जिलेवासियों से खिलौना दान कर बच्चों की खुशियों में सहभागी बनने की अपील रायपुर, बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे। ‘आंगन मिलन सेवा’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे। ’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है। खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं। जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’  इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा। सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर ‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं। यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।  

जमीनी स्तर पर आंगनवाड़ी का जायजा, आयुक्त संदीप जी.आर. ने बच्चों से की बातचीत और जाना हाल

आंगनवाड़ी सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे आयुक्त संदीप जी.आर. बच्चों से संवाद कर लिया फीडबैक भोपाल  नवागत आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने मैदानी स्तर पर विभागीय सेवाओं की स्थिति जानने सीहोर जिले के आंगनवाड़ी केंद्र डोडी क्रमांक-58 का भ्रमण एवं निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और अन्य हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा संबंधी सेवाओं का बारीकी से अवलोकन किया और सेवाओं की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने 3 से 6 वर्ष आयु के बच्चों के लिए उपलब्ध नाश्ता एवं गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और स्वाद की जानकारी ली। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे स्थानीय टेक होम राशन, शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों तथा केंद्र पर प्रदाय की जा रही अन्य पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी ली। आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक बाल हितैषी बनाने पर जोर आयुक्त संदीप जी.आर. ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और मातृ एवं शिशु कल्याण का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने बच्चों और हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने, पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्रिय, जीवंत और बाल हितैषी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बच्चों और हितग्राहियों से सीधे संवाद कर जानी जमीनी स्थिति आयुक्त संदीप जी.आर. ने आंगनवाड़ी केंद्र में उपस्थित बच्चों और महिला हितग्राहियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बच्चों से केंद्र पर मिलने वाले नाश्ते और गर्म पके भोजन के स्वाद एवं गुणवत्ता के बारे में सहज बातचीत की तथा पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में हितग्राहियों से फीडबैक लिया। पोषण ट्रैकर के उपयोग और कुपोषित बच्चों के प्रबंधन की ली जानकारी आयुक्त संदीप ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से शाला पूर्व शिक्षा गतिविधियों के आयोजन, पोषण ट्रैकर के उपयोग तथा केंद्र में कुपोषित बच्चों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए की जा रही कार्यवाही की जानकारी ली। कार्यकर्ता द्वारा पोषण ट्रैकर में उपलब्ध शाला पूर्व शिक्षा गतिविधि के वीडियो के माध्यम से बच्चों के साथ कराई जा रही गतिविधि का भी उन्होंने प्रत्यक्ष अवलोकन किया। संदीप ने डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग के साथ बच्चों के लिए गतिविधि आधारित और रुचिकर प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की भी की समीक्षा निरीक्षण के दौरान आयुक्त सेदीप जी. आर. ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना सहित विभाग की अन्य योजनाओं में नवीन हितग्राहियों के पंजीयन तथा उन्हें योजनाओं का लाभ प्राप्त होने की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने योजनाओं का पात्र हितग्राहियों तक समय पर लाभ पहुंचाने और मैदानी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।  

जर्जर भवन में संचालित आंगनवाड़ी, बांस और टूटे एल्बेस्टर से बनी अस्थाई रसोई

जर्जर भवन में संचालित आंगनवाड़ी, बांस और टूटे एल्बेस्टर से बनी अस्थाई रसोई उमरिया  बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मानिकपुर के ग्राम कारीगढ़हरी स्थित आंगनवाड़ी केंद्र की जर्जर हालत सामने आई है। यहां करीब 46 बच्चे पढ़ाई, खेल और पोषण के लिए पहुंचते हैं, लेकिन जिस भवन में बच्चों को बैठाया जाता है, उसकी छत का प्लास्टर कई जगह से गिर चुका है। जर्जर भवन में बच्चों के बैठने से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं बच्चों के मध्यान भोजन के लिए बांस और टूटे-फूटे एल्बेस्टर शीट के टुकड़ों से अस्थाई रसोई तैयार की गई है। ऐसी व्यवस्था में भोजन बनाने वाले की सुरक्षा के साथ-साथ भोजन की स्वच्छता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि शासन-प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए आंगनवाड़ी भवन की मरम्मत कराए और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था सुनिश्चित करे।