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योगी सरकार के प्रयासों से ग्रामीण जल गुणवत्ता जांच में तेजी, राष्ट्रीय स्तर पर यूपी को दूसरा स्थान मिला

गांवों में जल गुणवत्ता जांच में देश में दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश, योगी सरकार के प्रयासों से रफ्तार तेज फील्ड टेस्टिंग किट के जरिए की जा रही पानी की निगरानी, 97 हजार से अधिक गांवों में जल जांच का लक्ष्य योगी सरकार में ग्रामीण जल गुणवत्ता जांच अभियान को रफ्तार, 4.85 लाख महिलाओं को भी मिला रोजगार यूपी जल निगम ग्रामीण के लिए प्रदेश के गावों में 11.64 लाख जल गुणवत्ता जांच का है वार्षिक टारगेट लखनऊ  ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और लोगों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार के प्रयासों को महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में गांवों में फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) के माध्यम से जल गुणवत्ता की जांच के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। 27 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक 69.32 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पहले स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश ने 33.95 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु 28.42 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके साथ ही यूपी में एफटीके जांच के जरिए 4.85 लाख महिलाओं को रोजगार भी मिला है, जिससे वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल 97,071 गांव हैं। इनमें जल गुणवत्ता जांच के लिए सालाना 11,64,852 जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष प्रदेश ने अब तक 33.95 प्रतिशत वार्षिक लक्ष्य हासिल किया है। यह राष्ट्रीय औसत 12.83 प्रतिशत से काफी अधिक है। इस तरह उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करते हुए जल गुणवत्ता परीक्षण के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। 97 हजार से अधिक गांवों में जांच का लक्ष्य यूपी जल निगम ग्रामीण के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 97,071 गांवों के लिए वार्षिक रूप से 11,64,852 जल गुणवत्ता जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 27 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों में प्रदेश की वार्षिक लक्ष्य प्राप्ति 33.95 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह प्रक्रिया अभी आगे भी तेजी से जारी है। इस फील्ड टेस्टिंग किट के जरिए जल की जांच से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिल रही है। इससे पानी की गुणवत्ता से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान कर आगे आवश्यक कदम उठाने का आधार तैयार हो रहा है। जल गुणवत्ता जांच में पांच प्रमुख राज्यों में यूपी 27 अक्टूबर की राज्यवार रैंकिंग में कर्नाटक 69.32 प्रतिशत के साथ पहले, उत्तर प्रदेश 33.95 प्रतिशत के साथ दूसरे, तमिलनाडु 28.43 प्रतिशत के साथ तीसरे, आंध्र प्रदेश 24.39 प्रतिशत के साथ चौथे और असम 7.30 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है। उत्तर प्रदेश की उपलब्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के साथ इन प्रमुख राज्यों की सूची में उसकी बेहतर स्थिति को भी दर्शाती है। 4.85 लाख महिलाओं को मिला रोजगार उत्तर प्रदेश में जल गुणवत्ता जांच को जनभागीदारी से जोड़ते हुए प्रत्येक राजस्व गांव में पांच महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश की लगभग 4.85 लाख महिलाएं केंद्र सरकार के डब्ल्यूक्यूएमआईएस पोर्टल पर एफटीके आधारित जल परीक्षण के लिए पंजीकृत हैं। इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत हो रही है।

योगी सरकार की पहल से स्टार्टअप हब बना उत्तर प्रदेश, देश का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम

योगी सरकार के प्रयासों से देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश 24 हजार से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स के साथ प्रदेश में नवाचार और उद्यमशीलता को मिल रही नई गति नई स्टार्टअप नीति-2026 से युवाओं के लिए खुलेंगे उद्यमिता के नए अवसर, नोएडा और लखनऊ में विकसित होंगे यू-हब (डीप-टेक हब) स्टार्टअप्स को 35 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता, 88 मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स दे रहे हैं नवाचार को बढ़ावा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला उद्यमी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार की प्रभावी नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहन और संस्थागत सहयोग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। प्रदेश में भारत सरकार द्वारा पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 24 हजार से अधिक हो चुकी है। वहीं, 3,500 से अधिक स्टार्टअप 'स्टार्ट-इन-यूपी' के अंतर्गत पंजीकृत हैं। यह उपलब्धि प्रदेश में नवाचार, तकनीकी विकास और उद्यमशीलता के तेजी से बढ़ते वातावरण को दर्शाती है। योगी सरकार ने प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को संस्थागत स्वरूप देने के लिए 15 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 अधिसूचित की थी। इसके तहत 10 हजार स्टार्टअप का इकोसिस्टम तैयार करने और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम 100 इन्क्यूबेटर्स का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। स्टार्टअप क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए सरकार ने 9 नवंबर 2022 को नीति का प्रथम संशोधन भी अधिसूचित किया। इसका उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए बेहतर सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराना था। डीप-टेक और अत्याधुनिक तकनीक पर विशेष फोकस प्रदेश सरकार स्टार्टअप इकोसिस्टम को केवल संख्या तक सीमित रखने के बजाय अत्याधुनिक तकनीक और अनुसंधान आधारित उद्यमों को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में आठ स्टेट ऑफ आर्ट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया। इसके अंतर्गत मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होकर संचालित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, मेडिटेक, ड्रोन, 5जी/6जी, दूरसंचार, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में सात अन्य सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे प्रदेश के युवाओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को नई तकनीकों पर आधारित उद्यम विकसित करने का अवसर मिलेगा। नई स्टार्टअप नीति-2026 से मिलेगा उद्यमिता को नया विस्तार स्टार्टअप नीति-2020 के पांच वर्ष पूर्ण होने के बाद योगी सरकार ने बदलती तकनीकी और औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 10 जुलाई 2026 को नई स्टार्टअप नीति अधिसूचित की है। इसके साथ ही प्रदेश में स्टार्टअप, इन्क्यूबेशन और नवाचार गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है। इसी क्रम में प्रदेश के डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से नोएडा एवं लखनऊ में 'यू-हब (डीप-टेक हब)' विकसित करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है। ये हब तकनीकी नवाचार, अनुसंधान, निवेश और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्टार्टअप्स को 35 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता योगी सरकार की स्टार्टअप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत प्रदेश में उद्यमियों और इन्क्यूबेटर्स को वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 150 स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ते के रूप में 123.14 लाख रुपये, 440 स्टार्टअप्स को सीड कैपिटल एवं विपणन सहायता के रूप में 1,457.425 लाख रुपये तथा 111 स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकास सहायता के रूप में 539.86 लाख रुपये वितरित किए गए हैं। वहीं, 59 इन्क्यूबेटर्स को परिचालन व्यय सहायता के रूप में 1,347.54 लाख रुपये और 16 इन्क्यूबेटर्स को पूंजीगत अनुदान के रूप में 365.56 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई है। इस प्रकार स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को कुल 3,833.525 लाख रुपये यानी लगभग 38.34 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। 27 अगस्त 2026 को आयोजित 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक तथा नौ इन्क्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन वितरित किए। इसी अवसर पर 'यूपी स्टार्टअप मिशन' वेबसाइट का शुभारंभ भी किया गया, जिससे स्टार्टअप से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं तक पहुंच को और आसान बनाया जा सके। महिला उद्यमिता को भी मिल रहा प्रोत्साहन प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी है। डीपीआईआईटी द्वारा पंजीकृत स्टार्टअप्स में से 11 हजार से अधिक महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप हैं। यह प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, नवाचार और उद्यमशीलता के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के 48 स्टार्टअप्स को सिडबी द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 88 सरकारी मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स कार्यरत हैं। ये सूचना प्रौद्योगिकी, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्रों में नए उद्यमों को मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और व्यावसायिक अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। योगी सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता, वित्तीय सहायता, तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली पहलों ने उत्तर प्रदेश को स्टार्टअप के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। डीपीआईआईटी की वार्षिक स्टार्टअप रैंकिंग में प्रदेश को 'टॉप परफॉर्मर' श्रेणी प्राप्त होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सरकार का लक्ष्य इस मजबूत आधार को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश को नवाचार, डीप-टेक और उद्यमशीलता का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाना है।

UP ने मिशन कर्मयोगी में बनाया रिकॉर्ड, गृह विभाग के खाते में एक करोड़ से ज्यादा कोर्स

मिशन कर्मयोगी में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल, गृह विभाग ने अकेले पूरे किए एक करोड़ से अधिक कोर्स क्षमता विकास में यूपी की अग्रणी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान, राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश समेत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों और विभागों को प्रदान किए अवार्ड उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क का शुभारंभ, प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में निरंतर सुधार का बनेगा आधार लखनऊ,   मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के क्षमता विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर उत्तर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) तथा भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में उत्तर प्रदेश को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। राजस्थान ने दूसरा और जम्मू-कश्मीर ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने प्रशासनिक दक्षता, प्रशिक्षण और कर्मियों के सतत क्षमता विकास क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका प्रदर्शित की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की इस उपलब्धि के लिए संबंधित अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रयासों को सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश की ओर से रुपाम के महानिदेशक एम. देवराज, निदेशक संजय कुमार तथा अपर निदेशक एवं नोडल अधिकारी सुनील कुमार चौधरी को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। 19.23 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता, 99 प्रतिशत से अधिक सक्रिय मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश में क्षमता विकास को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया गया है। आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर विभागों और मंत्रालयों से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 19.23 लाख उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं, जिनमें 99 प्रतिशत से अधिक सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त उन्नति पहल के अंतर्गत 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों का पंजीकरण किया गया है। जनवरी 2026 में राज्य ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया। साधना सप्ताह में भी प्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। निर्भय नेत्री, निर्भय चेतना, कौशल सेतु और कौशल सारथी जैसी पहलें भी राज्य में क्षमता विकास के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। गृह विभाग ने अकेले पूरे किए एक करोड़ से अधिक कोर्स मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों के प्रदर्शन को भी सम्मानित किया गया। विभागीय श्रेणियों में श्रेणी ‘क’ के अंतर्गत गृह विभाग ने पहला स्थान हासिल किया। विभाग ने अकेले एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की। गृह विभाग की ओर से डीजी ट्रेनिंग राजीव अग्रवाल और डीआईजी देव रंजन वर्मा ने यह सम्मान प्राप्त किया। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को संबंधित श्रेणी में दूसरा पुरस्कार दिया गया। विभाग में भी एक करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) मोनिका रानी ने विभाग की ओर से यह सम्मान प्राप्त किया। उच्च शिक्षा विभाग को श्रेणी ‘ख’ में प्रथम पुरस्कार मिला। अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने यह सम्मान प्राप्त किया। इसी श्रेणी में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग को दूसरा स्थान मिला, जिसके लिए अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने पुरस्कार ग्रहण किया। श्रेणी ‘ग’ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को प्रथम और प्रशासनिक सुधार विभाग को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर तथा प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से सचिव भूपेंद्र चौधरी ने यह सम्मान प्राप्त किया। बॉक्स.. उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स से प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का होगा सतत मूल्यांकन कार्यक्रम में क्षमता विकास आयोग की प्रमुख पहलों का भी शुभारंभ किया गया। इनमें उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क प्रमुख हैं। उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स के माध्यम से देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता, गुणवत्ता और प्रगति का अधिक व्यवस्थित तथा निरंतर मूल्यांकन किया जा सकेगा। देश में एक हजार से अधिक प्रशिक्षण संस्थान लोक सेवकों के क्षमता विकास में योगदान दे रहे हैं। पहले संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन दो वर्ष में एक बार किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत नियमित समीक्षा और सुधार पर जोर दिया जाएगा। यह सूचकांक तीन संकेतकों और सात क्षेत्रों पर आधारित स्टार रेटिंग व्यवस्था प्रदान करेगा। इसमें संकाय, पाठ्यक्रम और संस्थागत संरचना से जुड़े आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। संस्थानों की तुलना उनकी समान श्रेणी के संस्थानों से होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से विश्लेषण और सुधार के अवसरों की पहचान की जाएगी, जबकि निर्णय लेने की जिम्मेदारी संस्थानों की ही रहेगी। इसके साथ ही उन्नति रेडीनेस इंडेक्स के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थान अपनी वर्तमान स्थिति का आकलन कर सुधार की दिशा तय कर सकेंगे। इसका उद्देश्य संस्थानों को क्षमता विकास संस्थानों के रूप में विकसित करना और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि करना है। बॉक्स.. नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क से प्रशिक्षण को मिलेगी व्यवस्थित दिशा क्षमता विकास आयोग ने नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क (एनसीडीएफ) की भी शुरुआत की। कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क और कर्मयोगी कॉम्पिटेंसी मॉडल पर आधारित यह रूपरेखा प्रशिक्षण संस्थानों को अधिकारियों की भूमिका, कार्यगत आवश्यकताओं और अपेक्षित दक्षताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने तथा संचालित करने में मदद करेगी। इस फ्रेमवर्क में लर्निंग के चार स्तर निर्धारित किए गए हैं- बुनियादी, निपुणता, उन्नत और विशेषज्ञता। ये स्तर रणनीतिक, कार्यनीतिक और परिचालन संबंधी निर्णयों की जटिलता को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने में सहायक होंगे। इसका लक्ष्य प्रशिक्षण को अधिक सुनियोजित, उद्देश्यपूर्ण और प्रभावशाली बनाना है। बॉक्स.. प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा क्षमता विकास की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों के बीच ज्ञान, अनुभव, विशेषज्ञता और संसाधनों के आदान-प्रदान पर भी जोर दिया गया। इसी क्रम में डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) ने अन्य राज्य प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इन पहलों से प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता का बेहतर आकलन करने, पाठ्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने और अधिकारियों-कर्मचारियों को उनकी भूमिकाओं के अनुरूप दक्ष बनाने में मदद मिलेगी।

प्रदेश में एक लाख से अधिक किसानों ने किया ई-केसीसी पोर्टल या एप के जरिए आवेदन

डिजिटल केसीसी में यूपी ने रचा इतिहास, बना देश में नंबर वन प्रदेश में एक लाख से अधिक किसानों ने किया ई-केसीसी पोर्टल या एप के जरिए आवेदन आठ महीने में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश 95 हजार आवेदन के साथ कर्नाटक दूसरे, 42 हजार के साथ हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर डबल इंजन की सरकार बनी किसानों के लिए वरदान, घर बैठे ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठा रहे लघु और सीमांत किसान लखनऊ,  खेती-किसानी में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उत्तर प्रदेश ने डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड (ई-केसीसी) के क्षेत्र में देश में नया मुकाम हासिल किया है। प्रदेश में अभी तक एक लाख से अधिक किसान ई-केसीसी पोर्टल या एप के जरिए आवेदन कर चुके हैं। महज आठ महीने में एक लाख का आंकड़ा पार करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत फरवरी में नाबार्ड द्वारा संचालित डिजिटल केसीसी सुविधा का शुभारंभ किया, जिसके बाद प्रदेश में इस पहल ने रफ्तार पकड़ी। खासकर लघु और सीमांत किसानों के लिए डबल इंजन सरकार की यह योजना कृषि ऋण तक पहुंच को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। अब किसानों को ऋण लेने के लिए बार-बार बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। डिजिटल माध्यम से घर बैठे आवेदन और प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिलने से किसानों को समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। कर्नाटक, हरियाणा और अन्य राज्यों से काफी आगे निकला यूपी डिजिटल केसीसी के मामले में उत्तर प्रदेश ने देश के दूसरे राज्यों को काफी पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। करीब 95 हजार आवेदन के साथ कर्नाटक दूसरे और लगभग 42 हजार के साथ हरियाणा तीसरे स्थान पर है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के किसानों को बड़े पैमाने पर इस योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। बैंक जाने की जरूरत कम, घर बैठे ऋण की सुविधा परंपरागत व्यवस्था में पहले कृषि ऋण के लिए किसानों को बैंक शाखाओं में जाकर आवेदन, दस्तावेज और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती थीं। डिजिटल केसीसी ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में रास्ता खोला है। अब किसान डिजिटल माध्यम से सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए औपचारिक कृषि ऋण व्यवस्था तक पहुंच आसान हो रही है। प्रदेश में डिजिटल कृषि सेवाओं की बढ़ी सुविधा सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी में डिजिटल केसीसी का शुभारंभ किया। जिसका उद्देश्य किसानों को तकनीक के माध्यम से कृषि ऋण व्यवस्था से जोड़ना और ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है। शुरुआत के महज आठ महीनों में एक लाख किसानों का इसके लिए आवेदन करना प्रदेश में डिजिटल कृषि सेवाओं की बढ़ी सुविधा का बड़ा उदाहरण है। डबल इंजन सरकार की किसान केंद्रित पहल डिजिटल केसीसी को किसानों की सुविधा बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार की किसान केंद्रित नीतियों के बीच डिजिटल माध्यम से ऋण सुविधा का विस्तार खेती की जरूरतों के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक लाख से अधिक किसानों का ई-केसीसी के लिए आवेदन करना इस पहल की बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश बना देश में नंबर-1

लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर संचयी इंस्टॉलेशन के मामले में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही योजना के तहत संचयी रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे निरंतर एवं समन्वित प्रयासों का परिणाम है।  उत्तर प्रदेश में पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति लगातार तेज रही है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, डिस्कॉम स्तर पर निरीक्षण एवं मीटरिंग की निगरानी, बैंकिंग फॉलोअप, वेंडर समन्वय तथा लंबित प्रकरणों के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। योजना मे यूपीनेडा द्वारा 8000 से अधिक वेंडर्स को इमपैनल्ड कर एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया गया जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव जनपदों की राष्ट्रीय रैंकिंग मे देखा जा रहा है। प्रदेश के कुल 15 जनपद देश के टॉप 100 मे शामिल है जिसमे उल्लेखनीय रूप से जनपद लखनऊ देश मे प्रथम स्थान एवं जनपद वाराणसी देश मे दसवे स्थान पर है। प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली प्रदेश में स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 2,942 मेगा वॉट से अधिक हो चुकी है। 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के मानक के आधार पर यह क्षमता प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता रखती है। ₹6.50 प्रति यूनिट के समतुल्य मूल्य पर यह बिजली ₹8.5 करोड़ से अधिक प्रतिदिन तथा ₹3,100 करोड़ से अधिक वार्षिक बिजली के बराबर है। इससे लाखों परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। 11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत रूफटॉप सोलर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भू-भाग की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह घरों की छत पर लगाया जाता है। 4 एकड़ प्रति मेगा वॉट के मानक के आधार पर प्रदेश में स्थापित वर्तमान रूफटॉप सोलर क्षमता से 11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत होती है। इस प्रकार घरों की छतों और उपलब्ध भवन संरचनाओं पर सौर संयंत्र लगाकर बड़े भू भाग के उपयोग की आवश्यकता कम की जा रही है, जिनका उपयोग अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। 34 लाख टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी रूफटॉप सोलर से उत्पादित स्वच्छ बिजली के आधार पर प्रदेश में 34 लाख टन से अधिक वार्षिक CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। इस पर्यावरणीय लाभ को वृक्ष-समतुल्यता के रूप में देखें तो यह 15 करोड़ से अधिक पेड़ों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित कार्बन के बराबर बैठता है। यह वृक्ष-समतुल्यता एक अनुमानात्मक पर्यावरणीय तुलना है।  8,000 से अधिक वेंडर्स, 1 लाख से अधिक को प्रत्यक्ष रोजगार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर ग्रीन जॉब इकोसिस्टम तैयार किया है। 8,000 से अधिक यूपीनेडा वेंडर्स के माध्यम से सोलर सिस्टम की बिक्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल कार्य, कमीशनिंग और आफ्टर-सेल्स सर्विस से जुड़े क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। वहीं योजना का रोजगार प्रभाव केवल वेंडर्स और इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं है। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, लोडिंग-अनलोडिंग, सामग्री आपूर्ति, स्ट्रक्चर फैब्रिकेशन, सर्वेक्षण, साइट असेसमेंट, ग्राहक सेवा, मरम्मत एवं रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इस प्रकार योजना ने प्रदेश में युवाओं के लिए ग्रीन स्किल और ग्रीन जॉब्स का एक नया बाजार तैयार किया है। केंद्र और राज्य की सब्सिडी से सीधे लाभार्थियों को लाभ इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में केन्द्रीय सब्सिडी ₹5,722 करोड़ से अधिक तथा राज्य सब्सिडी ₹2,000 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता का प्रभाव सामने आया है। केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय सहायता का प्रत्यक्ष लाभ लाभार्थियों तक पहुंचने से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर अपनाना अधिक सुलभ हुआ है। रूफटॉप सोलर अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार के बिजली खर्च में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और घरेलू आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी साधन बन रहा है। सूर्य घर से बदल रही है उत्तर प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था 8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट, 2,942 मेगा वॉट से अधिक स्थापित क्षमता, प्रतिदिन 1.32 करोड़ से अधिक यूनिट स्वच्छ बिजली, 11,700 एकड़ से अधिक भूमि-संरक्षण का प्रभाव, 34 लाख टन से अधिक संभावित वार्षिक कार्बन बचत, 8,000 से अधिक वेंडर्स और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना उत्तर प्रदेश में अब एक व्यापक ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन का आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर को जनभागीदारी, रोजगार, उद्योग, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए देश के सामने एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है।

एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में नई छलांग लगा रहा उत्तर प्रदेश: सुनील कुमार शर्मा

ग्रेटर नोएडा ‘यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। आने वाले समय में एआई और आईटी का कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ाव प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा। मंत्री ने बताया कि हाल में 52 स्टार्टअप के साथ हुई बैठक में सामने आया कि बड़ी संख्या में स्टार्टअप फूड सप्लाई से जुड़े हैं, जबकि कृषि क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करने वाले स्टार्टअप की संख्या अभी कम है। उन्होंने इसे एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि एआई और आईटी को कृषि आधारित उद्योगों से जोड़कर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। प्रदेश में मक्का की खेती को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ने के बाद किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। भविष्य में इसी तरह तकनीक आधारित समाधान कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निवेशकों को अनुकूल वातावरण देने के लिए लगातार नीतियों में आवश्यक बदलाव कर रही है। उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मुख्यमंत्री के स्तर से नीतिगत सुधार किए जाते हैं। निवेशकों को प्रोत्साहन राशि देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर विशेष जोर है और विभाग में निवेश प्रोत्साहन से संबंधित कोई फाइल लंबित न रखने की व्यवस्था की गई है। पिछले एक वर्ष में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए गए हैं। सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखा है। एक्सप्रेसवे, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तथा एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने रक्षा उत्पादन में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी अवैध हथियार निर्माण की चर्चा होती थी, वहीं आज प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइल और एके-203 जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के बढ़ते बजट को भी आर्थिक विस्तार से जोड़ते हुए कहा कि 2017 में राज्य का बजट करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 9.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बदलाव बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, निवेश और राजस्व क्षमता का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तकनीक और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को हर जिले तक पहुंचाना है। वर्ष 2026-27 के लिए तकनीक और औद्योगिक विकास को प्रदेश के सभी जिलों तक विस्तार देने के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है। उन्होंने निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के एआई, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का आह्वान किया।

यूपी डायलॉग’ में जुटे 100+ युवा, उत्तर प्रदेश के एक दशक के बदलाव पर हुई चर्चा

‘यूपी डायलॉग’ में जुटे 100 से ज्यादा युवा, उत्तर प्रदेश के एक दशक के बदलाव पर हुई चर्चा प्रदेश की अर्थव्यवस्था और एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर हुई चर्चा – विशेषज्ञों ने कहा, ‘2017 में ₹52 हजार थी प्रति व्यक्ति आय, अब ₹1.20 लाख’ – जनजातीय समाज और युवाओं के लिए चल रही योजनाओं पर भी चर्चा लखनऊ, लखनऊ के हजरतगंज स्थित एसेंस बैंक्वेट में फ्रेंड्स ऑफ यूपी की ओर से यूपी डायलॉग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम 'उत्तर प्रदेश का एक दशक' रही। इसमें ‘फ्रेंड्स ऑफ योगी’ के 100 से ज्यादा युवा वॉलंटियर्स शामिल हुए। इस दौरान पिछले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुए बदलाव और आने वाले समय में प्रदेश के विकास को लेकर चर्चा हुई। कार्यक्रम में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एम.के. अग्रवाल, प्रोफेसर अमित कुशवाह और पॉलिटिकल एनालिस्ट शशांक शेखर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान युवाओं ने वक्ताओं से कई मुद्दों पर सवाल पूछे और उत्तर प्रदेश के भविष्य को लेकर अपने सुझाव भी दिए। आर्थिक बदलाव और एक्सप्रेसवे पर हुई चर्चा प्रोफेसर एम.के. अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति में आए बदलावों पर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश की जीडीपी में लगातार दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश से होने वाले निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने प्रदेश में लिंगानुपात बेहतर होने की बात भी कही। प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में केवल एक एक्सप्रेसवे था, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर दस हो गई है। उन्होंने दावा किया कि देश के करीब 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। ‘₹52 हजार से बढ़कर ₹1.20 लाख हुई प्रति व्यक्ति आय’ पॉलिटिकल एनालिस्ट शशांक शेखर सिंह ने कहा कि 2017 के मुकाबले उत्तर प्रदेश की आर्थिक और वित्तीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस की स्थिति में है। उनके मुताबिक वर्ष 2017 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय करीब 52 हजार रुपये थी, जो 2026 में बढ़कर करीब 1.20 लाख रुपये हो गई है। उन्होंने जनजातीय समाज के लिए किए जा रहे कामों का भी जिक्र किया। सिंह ने बताया कि 65 गांवों में लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिया गया है। मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए जरूरतमंद परिवारों तक घर, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं, अभ्युदय योजना के जरिए युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास में युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। युवाओं से प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहने और अपने सुझाव सामने रखने की अपील भी की गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बना अनुकरणीय राज्य

लीड्स 2025 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को मिला ‘एग्जेम्प्लर’ अवार्ड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बना अनुकरणीय राज्य लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश नई दिल्ली/लखनऊ लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने देश में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स – लीड्स (LEADS) 2025* रैंकिंग में लैंडलॉक्ड राज्यों में सर्वोच्च “एग्जेम्प्लर (Exemplar)” पुरस्कार प्राप्त किया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का सर्वश्रेष्ठ एवं अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाला लैंडलॉक्ड (चारों ओर भूमि से घिरा) राज्य बनकर उभरा है। पिछले तीन साल (2022 से 2024) तक लगातार “अचीवर” रहने के बाद, इस साल शीर्ष पायदान पर राज्य की यह छलांग यहां के बेहतरीन कनेक्टिविटी नेटवर्क और प्रभावी नीतिगत सुधारों का सीधा परिणाम है। यह सम्मान बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित लीड्स 2025 रिपोर्ट एवं LEAPS (Logistics Excellence, Advancements & Performance Shield) 2025 पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदान किया गया। उत्तर प्रदेश की ओर से यह पुरस्कार इन्वेस्ट यूपी के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शशांक चौधरी ने प्राप्त किया। वर्ष 2018 में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईटी) द्वारा शुरू की गई ‘लीड्स' पहल राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रीय बेंचमार्किंग फ्रेमवर्क है। इस रैंकिंग में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाएं, नियामकीय व्यवस्था तथा परिचालन दक्षता जैसे महत्वपूर्ण मानकों का मूल्यांकन किया जाता है। इन्वेस्ट यूपी के एसीईओ ने इस सफलता पर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप लॉजिस्टिक्स सेक्टर को राज्य की 'वन ट्रिलियन डॉलर' अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाया गया है। 'उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति 2022' के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश का लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुआ है। राज्य सरकार ने पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप सिटी लॉजिस्टिक्स मास्टर प्लान विकसित किए हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत एवं कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार करना है। इन पहलों से परिवहन लागत में कमी, अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन दक्षता में सुधार सुनिश्चित हो रहा है। उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग सुविधाओं, ग्रामीण गोदामों और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश एवं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को बढ़ावा देकर लॉजिस्टिक्स विकास को गति दे रहा है। एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर और आगामी हवाई अड्डों के आसपास रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स पावरहाउस के रूप में उभर रहा है।

9 वर्षों में 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ाया गया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। योगी सरकार ने कौशल विकास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे रोजगार, उद्योग और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रदेश के लाखों युवाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। प्रदेश सरकार की नीतियों का परिणाम है कि पिछले 9 वर्षों में लगभग 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, ऑटोमोबाइल, निर्माण, फैशन डिजाइनिंग, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, कृषि आधारित उद्योगों समेत कई क्षेत्रों को शामिल किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं में से 7.50 लाख से अधिक को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली। “प्रोजेक्ट प्रवीण” के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख को कौशल प्रशिक्षण योगी सरकार ने युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग से जोड़ा है। इसी क्रम में संचालित “प्रोजेक्ट प्रवीण” योजना युवाओं के बीच काफी प्रभावी साबित हुई है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न आधुनिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना है, ताकि वे डिग्री के साथ रोजगार के लिए भी पूरी तरह तैयार हों। 188 रोजगार मेलों से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्रदेश सरकार ने रोजगार के अवसरों को युवाओं तक सीधे पहुंचाने के लिए मंडल और जनपद स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया। पिछले 9 वर्षों में आयोजित 188 वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इन मेलों में देश की प्रतिष्ठित कंपनियों, औद्योगिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भाग लिया। इससे युवाओं को अपने ही प्रदेश में बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए और पलायन में भी कमी आई। “स्किल कैपिटल” के रूप में पहचान मजबूत कर रहा यूपी योगी सरकार का फोकस केवल नौकरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और मार्केट लिंकिंग उपलब्ध कराई जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश में स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला राज्य है और यदि इस युवा शक्ति को कौशल और रोजगार से जोड़ा जाए तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है। योगी सरकार की नीतियों ने इसी सोच को जमीन पर उतारने का कार्य किया है। कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्योगों के विस्तार के समन्वय से उत्तर प्रदेश तेजी से “स्किल कैपिटल” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

यूपी में मौसम का कहर: 5 दिन तक बारिश के साथ तेज हवाएं और वज्रपात का अलर्ट, IMD ने दी चेतावनी

उतर प्रदेश उत्तर भारत में कई राज्यों में बारिश और आंधी का दौर चल रहा है। उत्तराखंड समेत तमाम राज्यों में तेज बारिश से मौसम बदला हुआ नजर आ रहा। उत्तर प्रदेश में पांच दिनों तक यानी कि तीन से सात मई और दिल्ली में तीन से पांच मई तक बारिश, आंधी, बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया है कि तीन से पांच मई के दौरान उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत में गरज, बिजली कड़कने और तेज हवाओं जिनकी स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है के साथ काफी भारी बारिश होने वाली है। इसमें से कुछ जगहों पर बहुत भारी बरसात होगी। इसके अलावा, तीन से पांच मई के दौरान उत्तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में छिटपुट से बिखरी हुई गरज, बारिश, बिजली कड़कने और 60 की स्पीड से हवाएं, व ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। इस हफ्ते के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, केरल, माहे में छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश, बिजली कड़कने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में तीन और चार मई को, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में तीन से पांच मई के दौरान, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। इसके अलावा, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में पांच से सात मई के दौरान, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छह मई को बिजली गिरने की चेतावनी है। यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हर जगह होगी बारिश उत्तर भारत के लिए मौसम विभाग ने कहा, 'तीन से पांच मई के दौरान, जम्मू कश्मीर में, तीन से सात मई के दौरान हिमाचल प्रदेश, तीन से आठ मई के दौरान उत्तराखंड में गरज, बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं बारिश और बर्फबारी होने वाली है। तीन से छह मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली में बारिश, बिजली कड़कने की संभावना है। इसके अलावा, 50 की स्पीड से हवाएं भी चलेंगी। तीन से सात मई के दौरान उत्तर प्रदेश में, तीन मई और पांच से सात मई के दौरान राजस्थान में गरज, बिजली कड़कने और आंधी के साथ मध्यम स्तर की बारिश होगी। चार मई को राजस्थान में, चार और पांच मई को पंजाब हरियाणा, चंडीगढ़ में गरज के साथ तेज हवाओं जिनकी स्पीड 70 किमी तक हो सकती है, की संभावना है। तीन और चार मई को जम्मू कश्मीर, तीन से पांच मई के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में, तीन और चार मई को उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं ओले गिरने वाले हैं। बिहार-झारखंड में भी बारिश का अलर्ट चार मई को राजस्थान में धूलभरी आंधी चलने की भी संभावना है। इसके अलावा, चार मई को उत्तराखंड में भारी बारिश होगी। पूर्वी भारत के लिए IMD के अनुसार, छह और सात मई को पश्चिम बंगाल, सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। छह से नौ मई के दौरान बिहार, ओडिशा, तीन, छह और सात मई को झारखंड में गरज, बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। तीन से पांच मई के दौरान पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और ओडिशा में, चार और पांच मई को झारखंड में तूफानी हवाओं के साथ आंधी चलने की संभावना है।