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सीएम योगी के सिंगापुर दौरे के पहले दिन यूपी को मिली बड़ी निवेश सफलता, लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित

निवेश के साथ कौशल विकास को भी मिला वैश्विक सहयोग, डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी पर विशेष फोकस यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप, गोल्डन स्टेट कैपिटल, पीआईडीजी और एवीपीएन ने जताई निवेश के लिए प्रतिबद्धता आईटीईईएस के साथ तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता सिंगापुर/लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सिंगापुर दौरे के पहले दिन उत्तर प्रदेश को निवेश और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त हुईं। आधिकारिक बैठकों और निवेशकों के साथ संवाद के बीच कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। पहले दिन कुल 19,877 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी निवेशकों के समक्ष स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतिगत ढांचा, त्वरित स्वीकृतियां और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हस्ताक्षरित किए गए समझौता ज्ञापनों में एक बड़ा प्रस्ताव यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप की ओर से आया, जिसने ग्रुप हाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क और डेटा सेंटर परियोजनाओं में 6,650 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इन परियोजनाओं से शहरी विकास, औद्योगिक गतिविधियों और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसी क्रम में गोल्डन स्टेट कैपिटल (जीएससी) ने उत्तर प्रदेश में 100 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर की स्थापना के लिए 8,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की। यह परियोजना राज्य को देश के अग्रणी डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसी तरह, प्राइवेट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ग्रुप (पीआईडीजी) ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और कृषि सह सोलर (एग्री-पीवी) परियोजनाओं में 2,500 करोड़ रुपये निवेश का समझौता ज्ञापन किया। इसके अतिरिक्त एवीपीएन लिमिटेड ने भी नवीकरणीय ऊर्जा और एग्री-पीवी क्षेत्र में 2,727 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इन पहलों से उत्तर प्रदेश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री की सिंगापुर विजिट के पहले दिन निवेश के साथ-साथ कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) को सुदृढ़ करने के लिए आईटीई एजुकेशन सर्विसेज (आईटीईईएस) के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत आईटीईईएस शैक्षणिक विकास, बुनियादी ढांचे के उन्नयन, नेतृत्व और क्षमता निर्माण, आईएसक्यू प्रमाणन तथा क्वालिटी एश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में परामर्श और तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कौशल व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करना है।

फिर बदलेगा उत्तर प्रदेश का मौसम, बारिश–कोहरा–गर्मी का तिहरा असर; कई जिलों में चेतावनी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम तेजी से बदल रहा है। अब धीरे-धीरे सर्दी जा रही है और गर्मी आ रही है। सुबह के समय प्रदेश में घना कोहरा छाया रहता है और लोगों को ठंड का एहसास होता है, लेकिन धूप निकलते ही तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है। इसी बीच मौसम विभाग ने एक ताजा अनुमान जारी किया और आने वाले दिनों में मौसम कुछ ऐसा रहने वाला है… बारिश होगी या नहीं? मौसम विभाग के मुताबिक, 22 फरवरी को राज्य में बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि सुबह के समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाने की चेतावनी जारी की गई है। दिन में मौसम साफ रहेगा और तेज धूप निकलेगी, जिससे तापमान में बढ़ोतरी जारी रहेगी। इन जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मिर्जापुर, गोंडा और बहराइच में सुबह के समय हल्का से घना कोहरा छा सकता है। कोहरे की वजह से दृश्यता कम हो सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों, खासकर वाहन चालकों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। कब बढ़ेगी गर्मी? मौसम विभाग के अनुसार, अभी प्रदेश में सुबह और शाम के समय में लोगों को ठंड का एहसास होता है। सुबह के समय घना कोहरा भी छाया रहता है। लेकिन, धूप निकलते ही मौसम साफ हो जाता है। शनिवार को अधिकतम तापमान 30.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.5 डिग्री ज्यादा है। न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। महीने की शुरुआत के मुकाबले दिन और रात दोनों के तापमान में करीब 6 से 7 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि फरवरी के अंत में ही गर्मी की आहट महसूस होने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों में तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के बाद तापमान फिर बढ़ने लगेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा।  

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश का बेहतर प्रदर्शन

अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच सोलर संयंत्र स्थापना में देश में दूसरा स्थान, घरेलू रूफटॉप सोलर में निरंतर वृद्धि लखनऊ समेत 10 जनपदों में सर्वाधिक रूफटॉप सोलर स्थापित सीएम योगी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा के प्रति जनजागरूकता और स्वीकार्यता में तेजी लखनऊ, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अगस्त 2025 से जनवरी 2026 की अवधि में राज्य सोलर संयंत्र स्थापना के मामले में देशभर में दूसरे स्थान पर रहा। इस दौरान घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की मासिक स्थापना में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के 10 प्रमुख जनपद लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर, बरेली, प्रयागराज, आगरा, झांसी, रायबरेली, शाहजहांपुर और सहारनपुर में सबसे अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। यह राज्य में सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ती जनजागरूकता और स्वीकार्यता को दर्शाता है। महाराष्ट्र से प्रतिस्पर्धा, गुजरात को पीछे छोड़ा इस अवधि में उत्तर प्रदेश का सीधा मुकाबला महाराष्ट्र और गुजरात से रहा। सौर ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी रहे गुजरात को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश ने शीर्ष दो राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत की है। यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह का कहना है कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की सौर नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, जिलावार निगरानी और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण का परिणाम है। देश में कुल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में उत्तर प्रदेश वर्तमान में तीसरे स्थान पर है, जबकि पीएमएसजीवाई के तहत आवेदनों की संख्या में प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इंस्टॉलेशन में हर माह वृद्धि अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच हर माह घरेलू सोलर कनेक्शनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, सब्सिडी का सीधे उपभोक्ताओं के खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरण और डिस्कॉम स्तर पर त्वरित स्वीकृति प्रणाली ने योजना को गति दी है। बढ़ते बिजली बिल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी लोगों को रूफटॉप सोलर अपनाने के लिए प्रेरित किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में योजना का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उद्देश्य देश के एक करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर प्रत्येक परिवार को स्वच्छ एवं मुफ्त ऊर्जा का लाभ दिलाना है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस योजना की सफलता से उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं में आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक विद्युत उत्पादन पर दबाव कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे हरित ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी। पहले स्थान की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश देश में पहला स्थान भी हासिल कर सकता है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर इंस्टॉलेशन में विगत सात माह से लगातार शीर्ष दो स्थान में बने रहना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। घरेलू सोलर अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन गया है उत्तर प्रदेश: योगी

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी ने प्रस्तुत की प्रदेश की तेज आर्थिक प्रगति की तस्वीर सीएम योगी बोले, जनता जनार्द़न पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं, चोरी को रोका गया लखनऊ विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रदेश की तेज आर्थिक प्रगति की तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने राजस्व अनुशासन, किसानों की आय वृद्धि और कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलावों को सरकार की प्रमुख उपलब्धि बताया। कहा कि बिना अतिरिक्त कर लगाए टैक्स चोरी पर अंकुश और विकास के संतुलित मॉडल से प्रदेश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी मात्र 13 लाख करोड़ रुपये थी। 1947 से लेकर 2017 तक इस यात्रा को तय करने में 70 वर्ष लगे। 2017 के बाद मात्र आठ से साढ़े आठ वर्ष के बीच में डबल इंजन सरकार ने इसमें 23 लाख करोड़ अतिरिक्त जोड़े हैं। सीएम योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था 36 लाख करोड़ की हो चुकी है। जब देश आजाद हुआ था, यूपी का शेयर 14 प्रतिशत था। लगातार घटते-घटते 2016-17 में यह आठ प्रतिशत रह गया। अब लगातार आगे बढ़ते हुए 9.5 प्रतिशत तक पहुंचने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर कैपिटा इनकम को तीन गुना करने में सफलता मिली है। इसके लिए जनता जनार्दन पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया। हमने टैक्स चोरी को जरूर रोका है। रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया। आज प्रदेश पिछले पांच वर्षों में लगातार रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुका है। जोरदार वित्तीय अनुशासन और विकास दोनों का संतुलन आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। सीएम ने कहाकि बैंकों में पहले उत्तर प्रदेश के अंदर 100 रुपए जमा होते थे जो मात्र 43 रुपये जनता के उपयोग में खर्च होते थे। हमने इसे बढ़ाकर 61-62 रुपये तक पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश के नौजवानों और व्यापारियों तक इसके उपयोग को पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। यानी सीडी रेशियो 43 से बढ़कर 62 प्रतिशत पहुंचाने में हमने सफलता प्राप्त की है। मुझे इस बात का गर्व है कि उत्तर प्रदेश आज सही दिशा में बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश करता है सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष के लोग भी गाहे-बगाहे अन्नदाता की चर्चा करते हैं, लेकिन नीयत उनकी साफ नहीं है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य भी है। सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन भी करता है लेकिन अन्नदाता किसानों की स्थिति उनके समय में क्या थी। इन्होंने कहां पहुंचा दिया था? भारत आज से 2000 वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था का सिरमौर था। 44 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत का अधिकार था। वह भारत का स्वर्ण युग था। आज से 400 वर्ष पहले भी भारत की स्थिति यही थी और ग्लोबल इकॉनामी में भारत का शेयर 24-25 प्रतिशत था। किसानों के साथ पिछली सरकारों में औपनिवेशिक मानसिकता का व्यवहार हुआ सीएम योगी ने कहा कि औपनिवेशिक काल में यहां शोषण हुआ, लूट हुई, परंपरागत उद्यम समाप्त किए गए। अन्नदाता किसानों को, जो पहले उत्पादक था, उसे उपभोक्ता बनाकर रख दिया गया। कच्चा माल यहां से बाहर जाता था, फिर पक्का माल बनकर आता था और उस पर भारी टैक्स लगाकर महंगा बेचा जाता था। आज हम कह सकते हैं कि पिछली सरकारों में भी औपनिवेशिक मानसिकता के साथ अन्नदाता किसानों, एमएसएमई सेक्टर और परंपरागत उद्यम से जुड़े कारीगरों के साथ यही व्यवहार हुआ। किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से यह देश खड़ा हुआ आज पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान, कारीगर सभी को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया गया है। हम मानते हैं कि किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से यह देश खड़ा हुआ है। हर गांव हमारे यहां एक आधारभूत इकाई हुआ करता था। ग्राम स्वराज इसकी आधारशिला थी। चाहे पशुपालन हो, कृषि हो, हस्तशिल्प हो हर क्षेत्र में किसान उत्पादक था, कारीगर स्वयं में उद्यमी था और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु हुआ करता था। डबल इंजन की डबल स्पीड लागत कम, उत्पादन ज्यादा 2017 के पहले कृषि के बारे में कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। अन्नदाता केवल वोट बैंक बन गया था। लागत अधिक, उत्पादन कम था और बिचौलियों का वर्चस्व था। 2017 के बाद डबल इंजन की डबल स्पीड से लागत कम, उत्पादन ज्यादा अन्नदाता को विकास में भागीदार बनाया गया। अन्नदाता से उद्यमी बनने की कहानी आज उत्तर प्रदेश में देखी जा सकती है। भूभाग का 11 प्रतिशत यूपी के पास लेकिन 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन हमारा संकल्प कृषि को इनकम-बेस्ड और वैल्यू एडिशन मॉडल के साथ किसानों की आय बढ़ाना है। आज उत्तर प्रदेश में कृषि विकास दर 8.5 से बढ़कर साढ़े 18 प्रतिशत तक पहुंची है। एमएसपी पर पारदर्शी खरीद हो रही है और डीबीटी का पैसा सीधे अन्नदाता किसानों के खाते में जा रहा है। इसी का परिणाम है कि देश के कुल कृषि भूभाग का 11 प्रतिशत यूपी के पास है, लेकिन 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। अन्नदाता को खेत से बाजार तक ग्लोबल मार्केट उपलब्ध है। किसानों को खेती संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में भी उत्तर प्रदेश के किसानों को 95 हजार करोड़ रुपये की धनराशि उनके खाते में हस्तांतरित हुई है। आज अन्नदाता किसानों को उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाई जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और प्रगतिशील किसानों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान ड्रोन दीदी, एफपीओ, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से फसलों का मूल्यवर्धन हो रहा है। यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड एंटरप्राइज इकोसिस्टम” परियोजना के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले धड़ल्ले से चलते थे स्लॉटर हाउस 2017 के पहले प्रदेश में स्लॉटर हाउस धड़ल्ले से चलते थे। व्यापक तस्करी होती थी और आस्था के साथ खिलवाड़ … Read more

योगी सरकार की ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’

25 वर्ष से ज्यादा पुराने प्रोजेक्ट्स को मिलेगी नई जिंदगी स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य, सोसायटी अथवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति के बाद ही लागू होगी पुनर्विकास प्रक्रिया पीपीपी मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी, त्रिपक्षीय समझौते से तय होंगी जिम्मेदारियां डीपीआर, ट्रांजिट आवास और 3 वर्ष की समयसीमा, योगी सरकार का टाइम-बाउंड रीडेवलपमेंट ब्लूप्रिंट नियोजन मानकों में व्यावहारिक लचीलापन, बोर्ड अनुमोदन से तेज होगा अमल लखनऊ, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने हो चुके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जर्जर स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू कर दी है। इस नीति का मकसद 25 वर्ष या उससे अधिक पुराने भवनों को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त रूप में पुनर्विकसित करना है, ताकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास मिल सके। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग द्वारा अब इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। योगी सरकार की यह नीति न सिर्फ पुराने और असुरक्षित भवनों को नया जीवन देगी, बल्कि निर्माण, रियल एस्टेट और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। बेहतर नियोजन और आधुनिक डिजाइन के जरिए यह पहल उत्तर प्रदेश के शहरों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। एकल आवास नीति में शामिल नहीं प्रदेश के कई शहरों में पुराने अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे भवनों में रहना जोखिम भरा हो गया है और महंगी शहरी जमीन का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा। नई नीति के जरिए सरकार इन पुराने और कम उपयोग किए जा रहे परिसरों को नए सिरे से विकसित कर शहरों के स्वरूप को बेहतर बनाना चाहती है। नीति के तहत वे सभी सार्वजनिक और निजी प्रोजेक्ट्स पुनर्विकास के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 25 वर्ष पुराने हैं या जिन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित पाया गया हो। हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के मामलों में प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। 1500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल की भूमि और एकल मकान इस नीति में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा नजूल की भूमि, लीज पर आवंटित भूमि तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि भी इस पुनर्विकास नीति में शामिल नहीं होगी। तीन मॉडल्स से तय होगा पुनर्विकास सरकार ने पुनर्विकास के लिए तीन मॉडल तय किए हैं। पहला, शासकीय एजेंसी द्वारा सीधे काम कराना, दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी और तीसरा सोसायटी या एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास। पीपीपी मॉडल में शासकीय अभिकरण, डेवलपर और सोसायटी के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा, जिसमें सभी की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करना अनिवार्य होगा। इसमें नए फ्लैट्स का कारपेट एरिया, पार्किंग, कॉमन एरिया, ट्रांजिट आवास या किराये की व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तय समयसीमा जैसी सभी जानकारियां शामिल होंगी। पुनर्विकास के दौरान जिन निवासियों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना होगा, उन्हें वैकल्पिक आवास या किराया दिया जाएगा। तीन वर्ष में पूरी होगी परियोजना परियोजना को सामान्यतः तीन वर्ष में पूरा करना होगा, जबकि विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। नियोजन मानकों में भी व्यावहारिक लचीलापन रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी से केस-टू-केस आधार पर कुछ शर्तों में ढील दी जा सकेगी, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही, आपस में जुड़े एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर पुनर्विकास की अनुमति दी गई है, जिससे बेहतर और समेकित विकास संभव होगा।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण को गति देगी एआई कौशल क्रांति

    प्रदेश सरकार लाखों युवाओं के लिए शुरू करेगी एआई और इमर्सिव तकनीकों का व्यापक प्रशिक्षण अभियान डिजिटल अवसंरचना से डिजिटल दक्षता तक, टैबलेट बने कौशल विकास का माध्यम, निवेश और उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की रणनीति भविष्य के रोजगारों की ठोस रणनीति और तैयारी के साथ आगे बढ़ने को तैयार उत्तर प्रदेश लखनऊ,  योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते कुछ वर्षों में विकास की जिस नई कार्यसंस्कृति को स्थापित किया है, उसका केंद्र बिंदु केवल आधारभूत संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि ह्यूमन कैपिटल (मानव पूंजी) का सशक्तीकरण भी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना की शुरुआत की गई है। यह योजना प्रदेश में 25 लाख युवा शक्ति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित कर उत्तर प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने का व्यापक अभियान है। योगी सरकार का स्पष्ट मत है कि 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि कौशल की है। प्रदेश में पहले चरण में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत किया गया। बड़ी संख्या में युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराए गए, ताकि डिजिटल पहुंच सुनिश्चित हो सके। अब उसी आधार को मजबूत करते हुए सरकार इन उपकरणों को कौशल विकास के प्रभावी माध्यम में बदल रही है। एप्लिकेशन आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से युवाओं को व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख शिक्षा दी जाएगी, जिससे वे सीधे रोजगार या कारोबार से जुड़ सकें। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान केवल बजट का आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। योगी सरकार युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, दक्ष और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एआई और उन्नत तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश अपने युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बना रहा है। सरकार का यह प्रयास व्यापक आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश तेजी से बढ़ रहा है। डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के साथ अब आवश्यकता कुशल मानव संसाधन की है। ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे तो उद्योगों को भी गति मिलेगी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इस योजना की विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवा भी डिजिटल माध्यम से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे क्षेत्रीय असमानता कम करने में मदद मिलेगी और प्रदेश के हर हिस्से में समान अवसर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की सबका साथ सबका विकास की अवधारणा इसी प्रकार की योजनाओं के माध्यम से साकार हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रोजगार का स्वरूप तकनीक आधारित होगा। ऐसे में यदि राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर कौशल उन्नयन किया जाता है तो यह बेरोजगारी की चुनौती को काफी हद तक कम कर सकता है। योगी सरकार का यह कदम युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करेगा और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। भविष्य में इसके लाभ -युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, जिससे वे उभरते एआई आधारित उद्योगों में सीधे रोजगार पा सकेंगे -प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी -स्वरोजगार और स्टार्टअप की संभावनाएं बढ़ेंगी, क्योंकि तकनीकी रूप से दक्ष युवा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे -ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी एआई और उन्नत डिजिटल तकनीकों में 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना केवल कौशल विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का ये कदम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दशक के लिए रीडिफाइन करने वाला है।  इससे प्रदेश की युवा शक्ति नौकरी तलाशने वाली भीड़ नहीं, बल्कि इनोवेशन और निवेश को आकर्षित करने वाली दक्ष कार्यशक्ति में बदलेगी। मनिन्द्र अग्रवाल, डायरेक्टर, आईआईटी, कानपुर

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी 13% से बढ़कर 36% पहुंची

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के पीछे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में राज्य में महिला श्रम बल भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जिससे उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति मिल रही है। इसी अवधि में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में करीब 13 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रही  जीएसडीपी  2026-27 में बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये की ओर अग्रसर है। महिला श्रम बल भागीदारी दर में हर 1 प्रतिशत की वृद्धि से सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 0.5 से 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त उछाल आता है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में  अर्थशास्त्र का यह सिद्धांत व्यवहार में साबित होता दिख रहा है। यही नहीं, महिला कार्यबल बढ़ने से उत्पादन क्षमता, श्रम उत्पादकता और राज्य के टैक्स बेस तीनों में समानांतर विस्तार हुआ है। महिलाएं बनीं ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ महिलाओं की आय बढ़ने से घरेलू उपभोग में वृद्धि हुई है, जिससे एमएसएमई गतिविधियों और सेवा क्षेत्र को लगातार गति मिल रही है। ग्रामीण स्वयं सहायता समूह,  डेयरी और कृषि आधारित उद्योगों से लेकर शहरी सेवा क्षेत्र तक महिलाएं अब ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रही हैं। ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह आसान करेंगी महिलाएं नीतिगत स्तर पर महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए उत्तर प्रदेश में आर्थिक भागीदारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो उत्तर प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।

उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र सोमवार से

माननीय राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत 11 फरवरी (बुधवार) को वित्तमंत्री सुरेश खन्ना पेश करेंगे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट लखनऊ,  उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र 2026-27 9 फरवरी से प्रारंभ होगा। सत्र के प्रथम दिन सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा व विधान परिषद) के समक्ष माननीय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का अभिभाषण होगा। 10 फरवरी को सदन के वर्तमान व पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की जाएगी। सदन की कार्यवाही 20 फरवरी तक प्रस्तावित है। 11 फरवरी (बुधवार) को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पश्चात राज्यपाल के अभिभाषण (धन्यवाद प्रस्ताव) पर चर्चा होगी। 13 फरवरी तक सदन नियमित तौर पर चलेगा। 14 व 15 फरवरी को क्रमशः शनिवार व रविवार होने के कारण सदन की बैठक स्थगित रहेगी। 16 फरवरी से पुनः सदन की कार्यवाही प्रारंभ होगी। विधानसभा अध्य़क्ष सतीश महाना ने सभी सदस्यों से सदन के सफल संचालन का अनुरोध किया है। वहीं नेता सदन (मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ ने सभी सदस्यों से जनता के मुद्दों को सदन में रखने और स्वस्थ चर्चा कर प्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया है।

योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा

राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 के 40 विजेताओं का सम्मान, युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा कौशल, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, कौशल विकास मिशन के विशेष बूट कैंप से मिलेगी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी में मदद उत्तर प्रदेश बना देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य, कौशल विकास में रचा नया कीर्तिमान नॉर्थ रीजनल, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूपी के युवा बढ़ाएंगे प्रदेश का गौरव लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर, रोजगारोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) द्वारा इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन 2025-26 के अंतर्गत राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता के विजेताओं का भव्य सम्मान समारोह बुधवार को कौशल विकास मिशन मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 20 विभिन्न स्किल ट्रेड्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 40 विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं का सम्मान प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम एवं मिशन निदेशक पुलकित खरे ने विजेताओं को सम्मानित किया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने कौशल, समर्पण और परिश्रम से प्रदेश का नाम रोशन किया। युवाओं का कौशल निखारने को प्रतिबद्ध योगी सरकार प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने विजेता प्रतिभागियों से संवाद कर उनके प्रशिक्षण अनुभव, प्रतियोगिता यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक, रोजगारोन्मुख एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित होती है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे विजेता इस अवसर पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता युवाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाने का सशक्त मंच है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि चयनित सभी विजेता प्रतिभागी लखनऊ में आयोजित विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे, जहां उन्हें विशेषज्ञों द्वारा नॉर्थ रीजनल स्किल कॉम्पीटिशन की तैयारी कराई जाएगी। अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह ने कहा कि कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है और मिशन गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रति दो वर्ष में होती है प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित होती है। वर्ष 2024 में जहां कुल 7,472 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2026 के लिए यह संख्या बढ़कर 1,09,249 हो गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य बन गया है। वर्ष 2024 में प्रदेश ने 10 स्किल्स में भागीदारी की थी, जबकि इस वर्ष 20 स्किल्स में सहभागिता कर प्रदेश ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसके साथ ही, जहां पूर्व में प्रतियोगिता एक ही केंद्र पर आयोजित की जाती थी, वहीं इस वर्ष लखनऊ के 11 विभिन्न केंद्रों पर 1,270 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मिशन की गतिविधियों को जन-जन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया सेल का शुभारंभ किया गया तथा गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण को और सुदृढ़ करने हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर आन्त्रोप्रेन्योरशिप एंड स्माल बिजनेस डेवलपमेंट (NIESBUD) के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ITOT) के निदेशक डी.के. सिंह, NIESBUD नोएडा की डायरेक्टर शिवानी डे, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक संदीप कुमार, सहायक निदेशक डॉ. एम.के. सिंह एवं डॉ. पवित्रा टंडन, डीडीयू-जीकेवाई के सीओओ आशीष कुमार सहित मिशन के अधिकारी, कर्मचारी एवं विभिन्न जनपदों से आए अधिकारी उपस्थित रहे।

हर जिले की पहचान एक उत्पाद से जोड़कर संतुलित आर्थिक विकास को दी गति

निर्यात, रोजगार व आय वृद्धि के आंकड़ों ने ओडीओपी को साबित किया सफल मॉडल लखनऊ,  उत्तर प्रदेश का ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) मॉडल आज देश के विकास विमर्श का केंद्र बन चुका है। वर्ष 2018 की यह पहल अब सिर्फ केवल एक सरकारी योजना नहीं,  बल्कि जिला आधारित आर्थिक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन गई है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की इस विशिष्ट योजना ने प्रमाणित कर दिया कि यदि स्थानीय जरूरतों और पारंपरिक शक्तियों के अनुरूप नीति बनाई जाए, तो उसका असर धरातल पर स्पष्ट परिलक्षित होता है। ओडीओपी मॉडल की सफलता का प्रभाव प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में भी स्पष्ट दिखता है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का निर्यात 88 हजार करोड़ रुपये था, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 58 हजार करोड़ थी। यह निर्यात वर्ष 2024 में बढ़कर 186 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 93 हजार करोड़ है। यह उल्लेखनीय वृद्धि ओडीओपी को मिले समर्थन का स्पष्ट उदाहरण है। अब उत्तर प्रदेश का ओडीओपी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में देखा जा रहा है। जिला आधारित उत्पाद रणनीति ने निर्यात को जमीनी स्तर तक मजबूत किया और छोटे उत्पादक भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सके हैं। ओडीओपी योजना की मूल अवधारणा हर जिले की एक विशिष्ट पहचान तय करने की रही है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में स्थानीय पारंपरिक कला उद्योग या उत्पाद को चिन्हित कर उसे सरकारी संरक्षण में बाजार तक पहुंच और ब्रांडिंग का सहारा दिया गया। मुरादाबाद के पीतल, बनारस की बुनकरी, फिरोजाबाद के कांच, कन्नौज के इत्र और भदोही के कालीन जैसे उत्पादों को इसी सोच के माध्यम से नई पहचान हासिल हुई है। योगी सरकार के इस मॉडल ने असंतुलित क्षेत्रीय विकास की बड़ी समस्या का समाधान किया, जिसे वर्षों से नजरअंदाज किया जा रहा था। पहले औद्योगिक विकास कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रहता था, लेकिन ओडीओपी के बाद छोटे जिले व कस्बे भी आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बनने लगे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण लगा। प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार ओडीओपी के चलते कारीगरों व छोटे उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ओडीओपी स्किल डेवलपमेंट व टूलकिट वितरण योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक टूलकिट प्रशिक्षण और आसान वित्तीय सहायता ने पारंपरिक काम को आधुनिक बाजार से जोड़ा। प्रदेश में अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट्स का वितरण किया जा चुका है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया और उनकी पहुंच केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही, वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बना रहे हैं। ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के माध्यम से अब तक 6,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे सूक्ष्म,  लघु व मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को नई गति मिली है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 में ओडीओपी को विशेष मंच दिया गया। इस आयोजन में ओडीओपी पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए, जिनसे करीब 20.77 करोड़ रुपये की बिजनेस लीड/डील सामने आईं। इसी तरह प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान 6,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ओडीओपी प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें जीआई टैग वाले प्रदेश के 44 ओडीओपी उत्पाद प्रदर्शित किए गए।