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उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहा है यूपी दिवस-2026 का आयोजन

देश की सीमाओं के परे भी मनाया जा रहा है यूपी दिवस-2026, प्रवासी प्रदेशवासियों को मिला यूपी से जुड़ने का अवसर यूके, रूस, मंगोलिया, कंबोडिया और जापान समेत विभिन्न देशों में हुआ यूपी दिवस का आयोजन, ओडीओसी के उत्पाद रहे मुख्य आकर्षण लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले तीन दिवसीय यूपी दिवस-2026 के भव्य समारोह की शुरुआत प्रदेश की राजधानी लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल में की गई। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' की थीम पर आधारित इस उत्सव की शुरुआत देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुई। इस वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार यूपी दिवस-2026 का समारोह प्रदेश के सभी जनपदों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया जा रहा है। इसके तहत यूके, रूस, मंगोलिया, कंबोडिया, सिंगापुर, जापान समेत विश्व के विभिन्न देशों में यूपी दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही, देश के अन्य प्रदेशों के लोक भवनों में भी यूपी दिवस के आयोजन के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, कला, शिल्प, व्यंजन और विकास यात्रा को प्रस्तुत किया गया। जो उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को देश की सीमाओं के परे भी पहुंचा रही है। रूस, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी समेत कई देशों में हुआ यूपी दिवस का आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के साथ विकास यात्रा से विश्व को परिचित करवाने के उद्देश्य से इस वर्ष यूपी दिवस-2026 का आयोजन देश और प्रदेश की सीमाओं से परे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया गया। इस क्रम में रूस की राजधानी मास्को, लंदन, ब्रिटेन, और ओसाका, जापान में भारतीय दूतावासों के माध्यम से यूपी दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके अलावा मंगोलिया, लिथुआनिया, सिंगापुर, म्यांमार, जर्मनी, श्रीलंका, डीआर कांगो समेत कई अन्य देशों में भी विशेष कार्यक्रम हुए। पर्यटन एवं कला-संस्कृति विभाग की ओर से इन देशों में रहकर यूपी का नाम रोशन करने वाले प्रवासी प्रदेशवासियों को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। समारोहों में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं के साथ लोक कलाओं का प्रदर्शन हुआ। इस वर्ष यूपी दिवस का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) और 'एक जनपद-एक उत्पाद' (ओडीओपी) के उत्पादों की प्रदर्शनी रही। विभिन्न देशों में आयोजित इन कार्यक्रमों से प्रवासी प्रदेशवासियों को अपनी जड़ों, परंपराओं और स्वाद से जुड़ने का सुनहरा अवसर मिला। नई दिल्ली, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी मनाया गया यूपी दिवस उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और सांस्कृतिक भव्यता का उत्सव यूपी दिवस-2026 के समारोह के रूप में देश के अन्य राज्यों में भी मनाया जा रहा है। इस क्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री और गणमान्य जनप्रतिनिधि अन्य प्रदेशों के लोक भवनों में जाकर यूपी दिवस के समारोह आयोजित कर रहे हैं। नई दिल्ली के दिल्ली हाट और एलजी कार्यालय में सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई, जहां यूपी के हस्तशिल्प, व्यंजन और लोक नृत्य मुख्य आकर्षण बने। वहीं, गोरखपुर के सांसद एवं लोकप्रिय भोजपुरी अभिनेता रवि किशन के प्रतिनिधित्व में मुंबई, महाराष्ट्र में यूपी दिवस का सांस्कृतिक कार्यक्रम मनाया गया। इसी तरह आंध्र प्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, उत्तराखंड, तमिलनाडु, ओडिशा और पंजाब जैसे विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें यूपी की विकास गाथा और सांस्कृतिक विविधता को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में इस वर्ष यूपी दिवस का भव्य उत्सव प्रदेश की नई पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर रहा है।

‘कर्तव्य पथ’ पर विशेष अतिथि बनेंगी यूपी की 14 लखपति दीदी

महिला सशक्तिकरण को उड़ान सीएम योगी के विजन से आत्मनिर्भर बनीं यूपी की नारी शक्ति गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में उत्तर प्रदेश की शान बढ़ाएंगी 14 लखपति दीदी देशभर की लखपति दीदियों संग दिल्ली भ्रमण भी करेंगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आगे बढ़ीं प्रदेश की 14 लखपति दीदी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के ‘कर्तव्य पथ’ पर आयोजित समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगी। नारी शक्ति, आत्मनिर्भर भारत और समृद्ध उत्तर प्रदेश की जीवंत तस्वीर को प्रस्तुत करेंगी। यूपी से जाने वालीं 14 लखपति दीदी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। इन्हें अन्य राज्यों से आई लखपति दीदियों के साथ दिल्ली भ्रमण भी कराया जाएगा। 14 लखपति दीदी लखनऊ से दिल्ली के लिए रवाना हो गई हैं। 26 जनवरी को ‘कर्तव्य पथ’ पर इनकी उपस्थिति से उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ेगा। यह उपलब्धि सीएम योगी के उस विजन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की आर्थिक प्रगति को प्रदेश के समग्र विकास की धुरी माना गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लखपति दीदी अभियान के जरिए ग्रामीण महिलाओं का जीवन बेहतर हो रहा है। यूपी की ये 14 दीदी साबित कर रही हैं कि आत्मनिर्भर नारी ही समृद्ध प्रदेश और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला हैं। लखपति दीदियों ने इन क्षेत्रों में फहराया झंडा इन लखपति दीदियों ने ई-रिक्शा संचालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, कैफे, मसाला निर्माण, उन्नत कृषि, ब्यूटी पार्लर, जन सुविधा केंद्र, गो-आधारित उत्पाद और प्रेरणा कैंटीन जैसे क्षेत्रों में न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आत्मविश्वास दिया। आज ये महिलाएं लखपति बनकर गांव-गांव में प्रेरणा का केंद्र बन रही हैं। कर्तव्य पथ तक पहुंचने वाली यूपी की 14 लखपति दीदी 1. मंशा देवी – पंचायत हरपुर, ब्लॉक ब्रह्मपुर, गोरखपुर : ई-रिक्शा उद्यम व ट्रेनर | आय: ₹18–20 हजार प्रतिमाह। 2. प्रवेश कुमारी – पंचायत बुखारा, ब्लॉक मऊरानीपुर, झांसी गोमाता कैटल फीड एंटरप्राइज | आय: लगभग ₹25 हजार प्रतिमाह। 3. रितु देवी – ग्राम फिरोजपुर नरोट्टम, ब्लॉक देवमल, बिजनौर विदुर कैफे संचालन | आय: 6–7 हजार प्रतिदिन। 4. सरिता देवी – ग्राम पंचायत मीरजापुर जवई, ब्लॉक सिराथू, कौशांबी ई-रिक्शा आधारित उद्यम | आय: लगभग 3 लाख वार्षिक। 5. ऋतु शर्मा – ग्राम लालपुर, ब्लॉक टापल, अलीगढ़ मसाला निर्माण व बिक्री | आय: ₹8–10 हजार प्रतिमाह (250+ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा) 6. निर्मला देवी – ग्राम बरसंपुर, ब्लॉक करवी, चित्रकूट दुग्ध व्यवसाय | वार्षिक आय: 6.59 लाख 7. राजकुमारी देवी – ग्राम रखही, ब्लॉक भौरोहिया-कैंपियरगंज, गोरखपुर दुग्ध उत्पादन | आय: ₹1.67 लाख (8 माह में) 8. मंत्रवती शाक्य – ग्राम नगला भिखन, ब्लॉक जसवंतनगर, इटावा उन्नत कृषि | आय: लगभग ₹15 हजार प्रतिमाह। 9. विजेता गोयल – पंचायत कशांपुर, ब्लॉक बसरेहर, इटावा ब्यूटी पार्लर, CSC, गारमेंट | आय: ₹2.5 लाख वार्षिक 10. अनुपमा सिंह – पंचायत बनियाखेड़ा, संभल मोटे अनाज के उत्पाद, ब्यूटी पार्लर | आय: ₹1 लाख+ वार्षिक 11. गुड़िया देवी – ग्राम केवलपुर, ब्लॉक रोहनिया, रायबरेली दुग्ध व्यवसाय | आय: ₹3.42 लाख (2024-25) 12. आशा – पंचायत सकरापार, ब्लॉक देवरिया सदर, देवरिया प्रेरणा कैंटीन, बीमा सखी | आय: ₹1 लाख+ वार्षिक 13. सुमन देवी – पंचायत अब्दुलपुर मुन्ना, ब्लॉक हल्दौर, बिजनौर प्रेरणा कैफे | आय: ₹7–8 हजार प्रतिदिन 14. मोनिका – ग्राम खग्गूपुरा, ब्लॉक संभल, जनपद संभल सौंदर्य प्रसाधन निर्माण | आय: ₹18 हजार प्रतिमाह

यूपी का मॉडल समझने के लिए आधा दर्जन से अधिक दूसरे राज्यों के आबकारी आयुक्तों ने किया उत्तर प्रदेश का दौरा

यूपी की आबकारी नीति का अध्ययन करने के साथ डिस्टिलरी और मदिरा की दुकानों का किया निरीक्षण लखनऊ,  प्रदेश सरकार की दूरदर्शी और पारदर्शी आबकारी नीति प्रदेश के राजस्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आयी है। आबकारी राजस्व में लगातार हो रही रिकॉर्ड वृद्धि के चलते यूपी की आबकारी नीति की गूंज अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर सुनाई देने लगी है। यही वजह है कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों के आबकारी आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदेश का दौरा कर यहां की आबकारी नीति का गहन अध्ययन किया। प्रदेश सरकार के प्रयासों से तैयार नीति न केवल राजस्व वृद्धि पर केंद्रित है, बल्कि इसमें पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार, अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण और उपभोक्ता हितों को भी समान रूप से महत्व दिया गया है। इसी का परिणाम है कि यूपी आज देश के अग्रणी आबकारी राजस्व वाले राज्यों में शामिल हो चुका है। देश के विभिन्न राज्य यूपी की आबकारी नीति को लागू करने पर कर रहे विचार आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रदेश का भ्रमण यूपी की आबकारी नीति को समझने और उसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने यूपी के आबकारी आयुक्त और विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में यह समझने पर जोर दिया गया कि किस तरह नीति निर्धारण, ई-गवर्नेंस, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ कर राजस्व में निरंतर वृद्धि संभव बनाई गई। कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के अधिकारियों ने यूपी की नीति को व्यावहारिक और राजस्व केंद्रित बताते हुए इसकी सराहना की। कई राज्यों ने यह भी स्वीकार किया कि यूपी की आबकारी नीति से प्रेरणा लेकर वे अपने यहां भी आबकारी ढांचे में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। डिस्टिलरी और शराब की दुकानों का किया निरीक्षण प्रदेश दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों के आबकारी अधिकारियों ने प्रदेश की आसवनियों (डिस्टिलरीज) और शराब की दुकानों का निरीक्षण भी किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य यह जानना था कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक, किस तरह की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है और किस प्रकार अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यूपी में अपनाई गई डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली, ई-लॉटरी के माध्यम से दुकानों का आवंटन, बारकोडिंग और स्टॉक प्रबंधन प्रणाली की विशेष रूप से सराहना की। अधिकारियों ने माना कि इन उपायों से न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी का निरंतर संवाद बन रहा प्रदेश की प्रगति का माध्यम

उत्तर प्रदेश दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी में हुआ भावपूर्ण पत्रों का आदान-प्रदान    पत्रों के आदान-प्रदान में दिखा भरोसे व सम्मान को दर्शाने का भाव प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी का निरंतर संवाद बन रहा प्रदेश की प्रगति का माध्यम  डबल इंजन सरकार में सुशासन, विकास व आत्मनिर्भरता पर केंद्र व राज्य की है एकीकृत कार्यशैली विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में निर्णायक है उत्तर प्रदेश की भूमिका   लखनऊ  उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुए आत्मीय व भावपूर्ण पत्राचार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डबल इंजन की सरकार में केंद्र और राज्य एकीकृत कार्यशैली में काम कर रहे हैं। प्रदेश में डबल इंजन की सरकार सुशासन, विकास और आत्मनिर्भरता को अपनी प्रमुख वरीयता में रखते हुए उत्तर प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई अवसरों पर विकसित भारत में विकसित उत्तर प्रदेश की भूमिका का उल्लेख कर चुके हैं। ऐसे में, इस लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की निर्णायक भूमिका को समन्वय के जरिए सुनिश्चित किया जा रहा है। इस दिशा में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया आत्मीय संदेश और उसके उत्तर में मुख्यमंत्री का विस्तृत व भावपूर्ण पत्र, दोनों ही इस बात के सशक्त प्रमाण हैं कि उत्तर प्रदेश में विकास की यात्रा साझा सोच, साझा लक्ष्य और साझा प्रयासों के साथ आगे बढ़ रही है। यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस भरोसे और तालमेल का प्रतिबिंब है, जिसके सहारे उत्तर प्रदेश देश का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है। विश्वास और सम्मान से भरा संवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक भूमिका और विकास यात्रा की विस्तार से सराहना की। उन्होंने प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत स्तंभ बताया और कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास में हो रही प्रगति को रेखांकित किया। उनके शब्दों में उत्तर प्रदेश केवल जनसंख्या का बड़ा राज्य नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति से देश के विकास को नई गति देने वाला राज्य है। साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है मुख्यमंत्री का उत्तर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को न केवल शनिवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल में आयोजित उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के शुभारंभ समारोह के कार्यक्रम में सुनाया, बल्कि संदेश के प्रति प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सुशासन, गरीब कल्याण, अंत्योदय और आत्मनिर्भरता के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी रेखांकित किया कि बीते वर्षों में प्रदेश की छवि में आया बदलाव केंद्र और राज्य सरकार के बीच विश्वासपूर्ण सहयोग का परिणाम है। डबल इंजन सरकार की कार्य संस्कृति पत्र में मुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि और सौभाग्य योजना जैसी पहलों में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन देना है। यह दृष्टिकोण केंद्र और राज्य, दोनों की साझा प्राथमिकता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश और मुख्यमंत्री योगी के पत्र में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी विशेष उल्लेख है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज और बौद्ध स्थलों के विकास के साथ पर्यटन को नई दिशा मिली है। यह संतुलन दिखाता है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण के साथ आगे बढ़ रहा है। दोनों नेताओं के शब्दों में न केवल आपसी सम्मान झलकता है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि नीतियों से लेकर क्रियान्वयन तक, तालमेल पूरी मजबूती के साथ कायम है। विकसित भारत में उत्तर प्रदेश की भूमिका प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी, दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक होगी। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति इस साझा दृष्टि का परिणाम है। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर हुआ यह संवाद केवल शुभकामनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि उस साझा संकल्प की घोषणा है, जिसमें केंद्र और राज्य एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। संदेश स्पष्ट है कि डबल इंजन सरकार लगातार समन्वय के साथ उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने के लिए न केवल कृत संकल्पित है बल्कि लगातार इस दिशा में वृहद स्तर पर कार्य कर रही है।

‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर उत्तर प्रदेश दिवस-2026 कार्यक्रम का शनिवार से आयोजन

राज्य की विकास यात्रा, संस्कृति और स्वाद का भव्य जनोत्सव होगा 'उत्तर प्रदेश दिवस-2026' ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर उत्तर प्रदेश दिवस-2026 कार्यक्रम का शनिवार से आयोजन फिजी, मॉरीशस, मालदीव, सिंगापुर और थाईलैंड में भी मनाया जाएगा यूपी दिवस, प्रदेशवासियों को किया जाएगा सम्मानित गृह मंत्री अमित शाह करेंगे कार्यक्रम का उद्घाटन, ओडीओसी की प्रदर्शनी होगी मुख्य आकर्षण लखनऊ उत्तर प्रदेश प्रतिवर्ष अपनी स्थापना के गौरवशाली दिन को ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के रूप में 24 जनवरी को मनाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, इस वर्ष ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 24 से 26 जनवरी तक प्रदेश भर में मनाया जाएगा तथा राज्य की प्रगति यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर जनोत्सव बने, जिसमें प्रदेश के हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो तथा प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और जीवंत आत्मा के साथ-साथ विकास यात्रा की भी झलक मिले। ऐसे में, इस विशिष्ट आयोजन के माध्यम से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी। गृह मंत्री अमित शाह करेंगे यूपी दिवस-2026 का उद्घाटन उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का मुख्य समारोह लखनऊ के नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल प्रांगण में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्र सरकार के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे। देश भर से आमंत्रित गणमान्य अतिथियों के साथ-साथ प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। लखनऊ में मुख्य समारोह के आयोजन के साथ-साथ प्रदेश के सभी जनपदों में स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, विकास प्रदर्शनियां और जनभागीदारी वाले आयोजन किए जाएंगे। वहीं, मुख्य समारोह का दूरदर्शन के माध्यम से पूरे प्रदेश में लाइव प्रसारण किया जाएगा, जिससे प्रदेश का जन-जन यूपी दिवस के इस आयोजन का सहभागी बन सकेगा। ओडीओसी योजना होगी यूपी दिवस का मुख्य आकर्षण इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री योगी द्वारा घोषित ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना होगी। ओडीओसी योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के एक पारंपरिक और प्रसिद्ध व्यंजन को चुना गया है। इस विशिष्ट आयोजन में प्रदेश के सभी ओडीओसी व्यंजन एक ही परिसर में उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश के भोजन की विविधता को प्रदर्शित करेगी, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करेगी। यह यूपी के स्वाद को यूपी की पहचान बनाने का माध्यम बनेगी। साथ ही यूपी दिवस के अवसर पर ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत शिल्पकारों के उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विक्रय किया जाएगा। इसके अलावा जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को भी ट्रेड शो की तर्ज पर प्रदर्शित किया जाएगा। यूपी गौरव 2025-26 सम्मान का किया जाएगा वितरण हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश दिवस के समारोह में ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान 2025-26’ का वितरण किया जाएगा। इस वर्ष शिक्षा, साहित्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण तथा अंतरिक्ष विज्ञान में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली पांच विभूतियों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपदों को भी पुरस्कृत किया जाएगा। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना की औपचारिक लॉन्चिंग तथा सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन योजना का शुभारंभ करेंगे। विविध प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनियों और शिल्प मेलों का आयोजन किया जाएगा। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, कृषि, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की झलक देखने को मिलेगी। लोक, शास्त्रीय एवं समकालीन कला रूपों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। प्रदेश भर में आयोजित संस्कृति उत्सव 2025-26 के कार्यक्रमों को भी इससे जोड़ा जाएगा। प्रत्येक जनपद में आयोजित प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, मिशन शक्ति, नवाचार तथा ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवा, उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, कलाकार, खिलाड़ी तथा पंचायती राज, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास, कृषि एवं श्रम क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी सम्मानित किया जाएगा। देश की सीमाओं के परे भी होगा यूपी दिवस का आयोजन डबल इंजन सरकार के विजन के अनुसार, इस वर्ष यूपी दिवस-2026 के आयोजन को राज्य और देश की सीमाओं से बाहर भी ले जाया जाएगा। इसके अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों के लोकभवनों में यूपी दिवस-2026 के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही फिजी, मॉरीशस, मालदीव, सिंगापुर और थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावासों में भी यूपी दिवस मनाया जाएगा। इन कार्यक्रमों के लिए एमएसएमई और पर्यटन विभाग द्वारा स्मृति-चिह्न उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से इन देशों और राज्यों में निवासरत उत्तर प्रदेश के नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा। इस क्रम में, प्रदेश सरकार के विभिन्न मंत्री, सांसद और विधायक राज्य के प्रतिनिधि के रूप में इन देशों और राज्यों में उत्तर प्रदेश की संस्कृति और प्रगति से लोगों को परिचित कराएंगे तथा उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने के लिए आमंत्रित करेंगे। जन-जन की भागीदारी को सुनिश्चित करेगा आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 प्रदेश की संस्कृति, स्वाद, शिल्प और विकास यात्रा को प्रदर्शित करने के साथ-साथ जन-जन की भागीदारी का सबसे बड़ा मंच बने। ऐसे में, यह उत्सव प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य का पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सहयोग से यूपी दिवस के आयोजन को गरिमापूर्ण, अनुशासित और भव्य बनाने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर चुका है। यह आयोजन न केवल उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का उत्सव होगा, बल्कि ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगा। पूरे प्रदेश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का यह जनोत्सव प्रदेश की एकता और प्रगति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति भी रहेगी। … Read more

समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम

कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटन में यूपी ने प्राप्त किया सत्तर फीसदी लक्ष्य, भूमिहीन किसान हुए लाभान्वित समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम यूपी में भूमिहीन और सीमांत किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल का आवंटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले ग्रामीणों और भूमिहीन किसानों के आर्थिक स्वावलंबन के लिए बड़े पैमाने पर भूमि सुधार कार्यक्रम लागू किए हैं। जो उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके तहत प्रदेश का राजस्व विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक भूमिहीन, अल्पभूमि धारक किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटित करता है। इस क्रम में विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष लगभग सत्तर फीसदी लक्ष्य हासिल किया है। जिससे न केवल भूमिहीन किसानों को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्राप्त हुए हैं, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भूमिहीन किसानों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में चलाए जा रहे भू-सुधार कार्यक्रमों के तहत भूमिहीन या अल्पभूमि धारक ग्रामीणों को ग्राम सभा की ओर से भूमि आवंटित कराई जाती है। जिसके तहत वर्ष 2025-26 में राजस्व विभाग की ओर से 1076 आवंटियों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन किया जा चुका है। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 69.16 प्रतिशत है। राजस्व विभाग के इस कार्य से प्रदेश के भूमिहीन और सीमांत किसानों को खेती के लिए उपजाऊ भूमि उपलब्ध हुई है। इससे न केवल उनकी आजीविका में स्थिरता आएगी, बल्कि राज्य के कुल कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि होगी। राजस्व विभाग ने 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए राजस्व विभाग गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को आवास के लिए भी जमीन उपलब्ध करवाता है। इस क्रम में विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए गए हैं। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 70.90 प्रतिशत है। आवास स्थल प्राप्त करने से इन परिवारों को न सिर्फ सिर पर छत मिली, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार के रूप में देखा गया। प्रदेश सरकार के इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को वरीयता प्रदान की जाती है। राजस्व विभाग के भूमि सुधार कार्यक्रमों के तहत कृषि भूमि और आवास स्थल उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की समावेशी विकास नीति का अहम हिस्सा है। इससे न केवल प्रदेश में भूमि का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित होता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

यूपी दिवस विशेष: यूपी में अब पलायन नहीं, ‘परावर्तन’ का दौर

योगी सरकार के श्रम, रोजगार, निवेश और सामाजिक सुरक्षा मॉडल से बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर युवाओं व श्रमिकों को अब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की मजबूरी नहीं विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ,  उत्तर प्रदेश, जो कभी रोजगार के लिए पलायन करने वाले राज्यों में गिना जाता था, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। बीते पौने नौ वर्षों में योगी सरकार की नीतियों का असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है। जहां पहले युवा और श्रमिक रोज़गार के लिए प्रदेश छोड़ने को मजबूर थे, अब उनके लिए घर के पास पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की अब कोई मजबूरी नहीं। पूर्व में राज्य से बाहर जा चुके युवा व श्रमिक भी अब लौट रहे हैं। पलायन का स्थान 'परावर्तन' ने ले लिया है, जो प्रदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है। रोजगार सृजन से लगा पलायन पर ब्रेक योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, एमएसएमई विस्तार, सेवायोजन मेलों और कौशल विकास योजनाओं के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुए हैं। बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट आई है और लाखों युवाओं को सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित सेवामित्र पोर्टल पर 53 हजार से अधिक कुशल कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है। औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर बने विकास की रीढ़ इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाओं और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट्स, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और लॉजिस्टिक्स हब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को जिलों तक पहुंचाया। उत्तर प्रदेश रोजगार और फैक्ट्री इकाइयों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्थायी नौकरियां बनी हैं। वर्तमान में प्रदेश में 30 हजार से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनकी संख्या 2017 तक इसकी आधी भी नहीं थी। बीते पौने नौ सालों में युवाओं, श्रमिकों और महिलाओं के लिए उनके गृह जनपदों में रोजगार के अवसरों की संख्या कई गुना बढ़ी है। श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से मजबूत हुआ भरोसा योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में निराश्रित हुए बच्चों के लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100 बालक-बालिकाओं को आवासीय शिक्षा दी जा रही है। दुर्घटना, मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक संबल सरकार ने श्रमिकों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है। कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर ₹5 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹3 लाख, आंशिक दिव्यांगता पर ₹2 लाख, पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना से मृत्यु पर ₹5 लाख, सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, ₹25,000 अंत्येष्टि सहायता तथा अपंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना/मृत्यु पर ₹1.25 लाख की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन प्रावधानों ने श्रमिकों की असुरक्षा को काफी हद तक खत्म किया है। पेंशन, बैंकिंग और परिवार सुरक्षा योजनाएं प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, अटल पेंशन योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना और निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना में लाखों लाभार्थी शामिल हैं। कन्या विवाह सहायता योजना के तहत दो बालिकाओं के विवाह पर ₹55,000 से ₹61,000 तक की सहायता दी जा रही है। इस सुरक्षा के चलते युवाओं में घर के पास ही रोजगार की भावना को बल मिला है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत राज्य में 9.52 करोड़ से अधिक बैंक खाते भी खोले जा चुके हैं। निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में इलाज की सौ फीसदी व्यय प्रतिपूर्ति की जा रही है। इससे श्रमिक परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उत्तर प्रदेश में ही मिल रही हैं।

योगी सरकार की पहल से प्रदेश के युवाओं को विदेश में भी मिल रहे रोजगार के अवसर

2,600 निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग प्रक्रिया प्रगति पर, विदेश में उपलब्ध कराया जाएगा रोजगार जर्मनी, जापान, इज़राइल और यूएई से मिल रहीं केयरिंग व नर्सिंग से जुड़ी नौकरियां प्रदेश भर में विभिन्न रोजगार मेलों के माध्यम से भी विदेश में खुल रहे नौकरियों के रास्ते अंतरराष्ट्रीय रोजगार के जरिए आय बढ़ाना और कौशल निखारना योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं, श्रमिकों को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा विदेश में रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराने की कार्यवाही प्रभावी ढंग से शुरू की गई है। सरकार की इस पहल से न केवल युवाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि उनके कौशल को वैश्विक पहचान भी मिल रही है। इज़राइल में निर्माण श्रमिकों को मिला रोजगार प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन एम.के. शनमुगा सुंदरम ने बताया कि जनवरी से मार्च 2024 के दौरान सेवायोजन विभाग द्वारा निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग, प्रशिक्षण एवं अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें इज़राइल भेजने की प्रक्रिया संचालित की गई। इस योजना के तहत अब तक लगभग 5,978 निर्माण श्रमिकों को इजराइल भेजा जा चुका है, जहां वे बेहतर वेतन और सुरक्षित माहौल में कार्य कर रहे हैं। यह प्रदेश के श्रमिकों के लिए बड़ी उपलब्धि है। हजारों श्रमिक प्रक्रिया में शामिल वर्तमान में 1,336 निर्माण श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के बाद इज़राइल भेजने की कार्यवाही प्रगति पर है। इसके अलावा 2,600 निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग प्रक्रिया चल रही है, जिन्हें आवश्यक मानकों पर खरा उतरने के बाद विदेश में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में और अधिक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा। कई देशों से मिल रहे रोजगार के अवसर योगी सरकार के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह है कि श्रम एवं सेवायोजन विभाग को जर्मनी, जापान, इज़राइल और यूएई जैसे देशों से भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इन देशों में विशेष रूप से केयरिंग और नर्सिंग सेक्टर में रिक्तियां सामने आई हैं, जिससे प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए द्वार खुल रहे हैं। रोजगार मेलों से भी मिले विदेश में नौकरियों के अवसर इसी क्रम में 26-28 अगस्त, 2025 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रोजगार महाकुंभ में कुल 16,212 युवाओं का चयन किया गया, जिनमें से 1,612 युवाओं को विदेश में रोजगार के लिए चुना गया। इसके अतिरिक्त 14-15 अक्टूबर, 2025 को जनपद गोरखपुर में आयोजित इंटरनेशनल प्लेसमेंट इवेंट के माध्यम से 279 अभ्यर्थियों का विदेश में रोजगार हेतु चयन हुआ। वहीं 09-10 दिसंबर, 2025 को वाराणसी में आयोजित काशी सांसद रोजगार महाकुंभ के जरिए 8,054 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें 85 युवाओं को विदेशी रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ। युवाओं और औद्योगिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 22 अगस्त, 2025 को नोएडा में एचआर मीट तथा 18 दिसंबर, 2025 को वाराणसी में इंटरनेशनल मोबिलिटी कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन किया गया, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार के प्रयास और अधिक सशक्त हुए हैं। आय और कौशल दोनों में बढ़ोतरी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय रोजगार को बढ़ावा देने के पीछे योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश के युवाओं की आय में वृद्धि हो, उनका कौशल वैश्विक मानकों के अनुरूप निखरे और वे आत्मनिर्भर बनें। सरकार द्वारा पारदर्शी चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण और टेस्टिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योग्य अभ्यर्थियों को ही विदेश में रोजगार के अवसर मिलें।

दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से सस्ती व स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर होगा फोकस

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन हाइड्रोजन में टेक्नोलॉजी लीडर बनने की ओर उत्तर प्रदेश दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से सस्ती व स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर होगा फोकस 50 करोड़ रुपये तक की शत प्रतिशत सरकारी सहायता से हाई एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को 5 वर्षों तक 25 लाख रुपये की सालाना फंडिंग रिसर्च व स्टार्टअप्स से ग्रीन जॉब्स और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में यूपी की बढ़त लखनऊ उतर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन पालिसी के अंतर्गत शोध (रिसर्च), नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नयी धार देने जा रही है। इस रणनीति के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किये जायेंगे और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को 05 सालों तक वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रीन हाइड्रोजन की लागत घटाकर उत्तर प्रदेश को देश की ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाया जाए।  योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किये जाएंगे, जिनका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीक विकसित करना और लागत को न्यूनतम करना है। दोनों सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे। इसमें होने वाले शोध कार्यों का उद्देश्य प्रत्यक्ष रूप से इंडस्ट्री की मांग और आवश्यकताओं के अनुरूप दक्षता विकसित करना होगा। सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की सौ प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाएगी, जिससे अत्याधुनिक लैब और परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें।  वर्ष 2070 तक देश को नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश बड़ी और प्रभावी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी का निर्माण केंद्र बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाता जा रहा है। गोरखपुर जिले में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। अनुमान है कि इस प्लांट के माध्यम से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर उत्तर प्रदेश में कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं। इसी सोच के साथ ग्रीन हाइड्रोजन नीति में स्टार्टअप्स के लिए भी बड़ा प्रोत्साहन रखा गया है। उन्हें 5 साल तक, हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। शर्त यह है कि ये स्टार्टअप्स किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़े हों। इससे जहां एक ओर युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता का अवसर  मिलेगा, वहीं उद्योग को नई तकनीक सुलभ होंगी।

स्टार्टअप इंडिया के 10 साल : उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को मिल रहा अवसर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक के विकास की दिशा में अग्रसर है। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस देश की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे हैं। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित होने की ओर कदम बढ़ा रहा है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है। ये ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं, जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब सुविधाएं, प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, मेडिटेक, टेलिकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्वस्तरीय स्टार्टअप बना सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा गंतव्य बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है, उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा की राह में संसाधनों का आभाव रोड़ा न बने। प्रदेश सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हो रही हैं ।