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स्टार्टअप इंडिया के 10 साल : उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को मिल रहा अवसर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक के विकास की दिशा में अग्रसर है। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस देश की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे हैं। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित होने की ओर कदम बढ़ा रहा है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है। ये ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं, जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब सुविधाएं, प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, मेडिटेक, टेलिकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्वस्तरीय स्टार्टअप बना सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा गंतव्य बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है, उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा की राह में संसाधनों का आभाव रोड़ा न बने। प्रदेश सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हो रही हैं ।

योगी सरकार के नेतृत्व में यूपी में औद्योगिक विस्तार को नई रफ्तार, डिफेंस कॉरिडोर में 1000 एकड़ भूमि आवंटन की तैयारी

झांसी, अलीगढ़, चित्रकूट और लखनऊ बने निवेशकों की पसंद करीब ₹3.5 हजार करोड़ के प्रस्तावित निवेश से औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बल ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो सकता है निवेश प्रस्तावित भूमि आवंटन से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार होगा उपलब्ध लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अंतर्गत पाइपलाइन में मौजूद निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटन की तैयारी की जा रही है। योगी सरकार की स्पष्ट डिफेंस इंडस्ट्रियल नीति, तेज निर्णय प्रक्रिया और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश–विदेश की कंपनियां उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में निवेश के लिए आगे आ रही हैं। उपलब्ध प्रस्तावों के अनुसार निवेश की इच्छुक कंपनियों को विभिन्न नोड्स में भूमि आवंटन प्रस्तावित है, जिनके माध्यम से करीब ₹3.5 हजार करोड़ के निवेश की संभावना है। डिफेंस कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र बना झांसी नोड उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत प्रस्तावित निवेश में झांसी नोड निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है। यहां गुडलक एस्ट्रा द्वारा 247 एकड़ भूमि पर ₹1000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, रेडवुड ह्यूजेस द्वारा 247 एकड़ भूमि पर ₹700 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यही नहीं, सिटाडेल और गुरुत्वा जैसी कंपनियों द्वारा भी डिफेंस एंड एलाइड मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश का प्रस्ताव है। झांसी में यह निवेश बुंदेलखंड को डिफेंस इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित करने के योगी सरकार के विजन को मजबूती देगा। अलीगढ़ और चित्रकूट में हाई-टेक डिफेंस और ड्रोन सेक्टर को बढ़ावा अलीगढ़ फेज–2 नोड में स्पेसकेम, मराल और जी-1 ऑफशोर जैसी कंपनियों द्वारा केमिकल, ऑफशोर और डिफेंस सपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग में निवेश प्रस्तावित है। चित्रकूट नोड में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा 209.95 एकड़ भूमि पर ₹672 करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, आईजी ड्रोन्स द्वारा ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर में ₹100 करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। यह निवेश चित्रकूट को योगी सरकार के डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम होगा। लखनऊ नोड में डिफेंस सपोर्ट और टेक्नोलॉजी यूनिट्स राजधानी लखनऊ स्थित डिफेंस नोड में भी नेक्सा मुंबई, इंद्रप्रस्थ और प्रोमोटेक जैसी कंपनियों द्वारा कम भूमि में उच्च तकनीक आधारित निवेश प्रस्तावित हैं। यह निवेश डिफेंस सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और सपोर्ट सिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) को डिफेंस कॉरिडोर में इसके अतिरिक्त भी निवेश के कई और आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिनके लिए आवश्यक भूमि के आवंटन की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। यूपीडा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसके पास डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में संभावित निवेश के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए भूमि आवंटन की सभी आवश्यक प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों का पालन किया जा रहा है। डिफेंस उत्पादन, रोजगार और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के तहत प्रस्तावित भूमि आवंटन से योगी सरकार को उम्मीद है कि हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होगा। इससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता तथा स्थानीय एमएसएमई व स्टार्टअप्स को डिफेंस सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती देगी।

देश में सबसे ज्यादा 45 आरवीएसएफ केंद्र यूपी में संचालित, इसके बाद हरियाणा और राजस्थान

लखनऊ,  प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वाहन स्क्रैपिंग में यूपी देश का नंबर एक राज्य है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय के डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार राज्य में दिंसबर 2025 तक लगभग 94,094 वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं जो देश में स्क्रैप वाहनों की कुल संख्या का लगभग 42 प्रतिशत है। इस मामले में यूपी के बाद हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र का नंबर आता है। पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग की नीति न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यूपी में हो रहा है सर्वाधिक आरवीएसएफ केंद्रों का संचालन डैश बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक पूरे भारत में लगभग 3.94 लाख वाहन स्क्रैप हो चुके हैं जिनमें 1.65 लाख सरकारी और 2.29 लाख निजी/व्यावसायिक वाहन हैं। देश में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसेलिटी (आरवीएसएफ) केंद्रों के मामले में भी यूपी सबसे आगे है। सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत प्रदेश में अब तक 84 आरवीएसएफ केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 45 केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनमें वाहनों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट करने से न केवल सड़कों पर प्रदूषण का स्तर कम हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। आरवीएसएफ केंद्रों की संख्या के मामले में हरियाणा दूसरे स्थान पर है और उसके बाद राजस्थान और गुजरात का स्थान है। पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा केंद्र सरकार की पुराने और अधिक प्रदूषण करने वाले वाहनों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करने की नीति वर्तमान में देश के 21 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। लेकिन इस मामले में यूपी की सक्रियता बेजोड़ है, जहां परिवहन विभाग स्क्रैपिंग का संचालन और निगरानी सीधे तौर पर करता है। परिवहन विभाग की यह नीति पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है।

गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश में निहित संभावनाओं की सिर्फ बात नहीं करते, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से संभावनाओं के अनुरूप परिणाम भी देते हैं। सरकार की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश माफियामुक्त, दंगामुक्त होकर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।   सीएम योगी मंगलवार अपराह्न गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में महोत्सव के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सरकार के प्रयासों से नौजवानों को रोजगार मिल रहा है। अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। उद्यमियों, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। बहन-बेटियों को मुस्कुराते हुए स्कूल-बाजार जाने का माहौल मिल रहा है। आज किसी ने बहन-बेटियों की राह में बाधा डालने का दुस्साहस किया तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने को तैयार मिलेंगे। यह तभी संभव हो रहा है जब सरकार में जनसेवा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी ताकत धैर्य और अनुशासन है। हमने कभी धैर्य नहीं खोया। उपेक्षा हुई तो संघर्ष का रास्ता अपनाया। इंसेफेलाइटिस की समस्या पर तत्कालीन सरकारों द्वारा की जा रही उपेक्षा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि तब हमने सड़कों पर आंदोलन किया और जब सरकार में आए तो पूरी जिम्मेदारी की भावना के साथ दो वर्षों में इंसेफेलाइटिस का खात्मा कर दिखाया। विकास की नई बुलंदियों पर गोरखपुर और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर और उत्तर प्रदेश विकास की नई बुलंदियों पर है। 2017 के पहले भी जब देश आगे बढ़ रहा था तो गोरखपुर पीछे छूट गया था। तुलना की जाए तो 2017 के पहले और इसके बाद के उत्तर प्रदेश और गोरखपुर में जमीन-आसमान का अंतर दिखेगा। 2017 तक प्रदेशभर की तरह गोरखपुर भी उपद्रव, गुंडागर्दी की चपेट में था। गुंडा टैक्स वसूला जाता था। सड़कें जर्जर थीं, बिजली नहीं मिलती थी। गंदगी, बीमारी और इंसेफेलाइटिस का कहर था। मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक सीएम योगी ने कहा कि मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक होते हैं। एक शरीर को अस्वस्थ करता है तो दूसरा समाज को। जब समाज हर प्रकार की स्वच्छता शारीरिक और सामाजिक, के प्रति जागरूक नहीं होता है तो उसे दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के अभियान का परिणाम धरातल पर मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की वर्तमान और पूर्व स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी गोरखपुर माफियाराज और गुंडाराज के लिए कुख्यात था। प्रदेश की भी यही स्थिति थी। हर दूसरे-तीसरे दिन प्रदेश में दंगा होता था। व्यापारी, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। व्यापारी गुंडा टैक्स देने को मजबूर थे। इंसेफेलाइटिस बीमारी चरम पर थी और नौनिहालों को इससे बचाने के लिए कोई पुरसाहाल नहीं था। नौजवान पलायन को मजबूर थे। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के लिए जो अभियान शुरू किया, उसके परिणाम आज जमीनी धरातल पर नजर आ रहे हैं। आठ साल बाद आने वाले पहचान नहीं पाएंगे गोरखपुर सहित यूपी के शहरों को मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ साल पहले यहां आया व्यक्ति यदि आज गोरखपुर आएगा तो यहां विकास से आए बदलाव के चलते शहर को पहचान नहीं पाएगा। ऐसी ही स्थिति अयोध्या, काशी, प्रयागराज को लेकर होगी। आठ साल बाद लखनऊ आए एक व्यक्ति द्वारा बताए गए संस्मरण को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह व्यक्ति लखनऊ को पहचान ही नहीं पाए। आठ साल पहले जब वह लखनऊ आए थे तब बहुत गंदगी थी, सड़कें संकरी थीं। और, उन्हें सूर्यास्त के बाद घर से न निकलने की सलाह दी गई थी। अब वह देर रात में भी भयमुक्त होकर निकल रहे हैं। बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार है। इसी मंत्र को अपनाते हुए आज जब भारत आगे बढ़ रहा है तो उत्तर प्रदेश और गोरखपुर भी पीछे नहीं है। आज बिना मांगे विकास की योजनाएं लोगों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोई सोचता था कि क्या गोरखपुर का खाद कारखाना चल पाएगा, क्या गोरखपुर में एम्स बन पाएगा या क्या बीआरडी मेडिकल कॉलेज फिर से चिकित्सा का बेहतरीन केंद्र बन सकेगा। पर, आज ये सारी बातें हकीकत हैं। कभी अपराध के लिए बदनाम रामगढ़ताल आज बेहतरीन पर्यटन केंद्र बन चुका है। गोरखपुर में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर में शानदार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर है। यहां फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों का संजाल है। 10 वर्ष पूर्व गोरखपुर से लखनऊ जाने में 8 से 10 घण्टे, अयोध्या और काशी जाने में 6 घण्टे लग जाते थे। आज शानदार रोड कनेक्टिविटी होने से गोरखपुर से लखनऊ की दूरी साढ़े तीन घण्टे में, काशी की दूरी ढाई घण्टे में और अयोध्या की दूरी डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। 2017 के पहले गोरखपुर से सिर्फ एक वायुसेवा थी, वह भी कभी कभार ही मिलती थी। आज गोरखपुर से दिल्ली, मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों के लिए हवाई सेवा है और दूरी एक से डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। गोरखपुर में हजारों करोड़ रुपये के निवेश से 50 हजार युवाओं को मिली नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना तो पिछले 8 वर्षों में गोरखपुर में हजारों करोड़ों रुपये का निवेश हुआ और इसके जरिए 50 हजार युवाओं को नौकरी मिली। यदि यह निवेश नहीं होता तो इन युवाओं को पलायन करना पड़ता। जबकि आज उन्हें अपने क्षेत्र में ही नौकरी मिल गई है। पहले गोरखपुर में एक विश्वविद्यालय था, आज चार विश्वविद्यालय हैं। गोरखपुर में प्रदेश सरकार का होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी बन गया है। अटल आवासीय विद्यालय में गरीबों के बच्चों को मुफ्त अत्याधुनिक शिक्षा प्राप्त हो रही है। उपलब्धियां विरासत के साथ विकास यात्रा का शो-केस सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर और प्रदेश की उपलब्धियां विरासत के साथ विकास की यात्रा का शो-केस हैं। इनकी शो-केसिंग … Read more

UP में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए साइन हुआ MoU

उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने को एमओयू साइन – उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कारपोरेशन की स्वतंत्र इकाई इंडिया एआई मिशन और यूपीडेस्कोके बीच हुआ एमओयू का आदान प्रदान  – उत्तर प्रदेश को AI हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, इंडिया एआई मिशन के तहत यूपी में सशक्त होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम – एमओयू प्रदेश के युवाओं को भविष्य के लिए आवश्यक डिजिटल और एआई कौशल प्रदान करने में होगा मददगार लखनऊ योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कारपोरेशन की स्वतंत्र इकाई इंडिया एआई मिशन और उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीडेस्को) लखनऊ के बीच एक एमओयू का आदान प्रदान किया गया। यह एमओयू उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। एमओयू प्रदेश के युवाओं और छात्रों के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम के नये अवसर प्रदान करेगा एमओयू प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, अनुराग यादव तथा इंडिया एआई मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह के बीच हुआ। इस अवसर पर मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसे राज्य और केंद्र सरकार के बीच मजबूत सहयोग का प्रतीक बताया। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सरकार पिछले पौने नौ वर्षों से डिजिटल गवर्नेंस, स्टार्टअप्स, आईटी पार्क, डाटा सेंटर और उभरती तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री की एआई, मशीन लर्निंग और डाटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना प्राथमिकताओं में शामिल है। यही वजह है कि इंडिया एआई मिशन के तहत एमओयू प्रदेश के युवाओं, छात्रों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। प्रदेश में स्थापित की जाएंगी 65 डाटा एवं एआई लैब प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुराग यादव ने कहा कि इंडिया एआई मिशन के तहत यह पहल प्रदेश के युवाओं को भविष्य के लिए आवश्यक डिजिटल और एआई कौशल प्रदान करने में सहायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योगी सरकार युवाओं के कौशल विकास, नवाचार को प्रोत्साहन देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर रही है। यह पहल प्रदेश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यूपीडेस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने बताया कि इंडिया एआई मिशन परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को नोडल प्रशासकीय विभाग तथा यूपीडेस्को को राज्य की नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि इंडिया एआई मिशन के तहत प्रदेश में कुल 65 डाटा एवं एआई लैब स्थापित किए जाने की योजना है। योगी सरकार ने दी 49 डाटा एवं एआई लैब की स्थापना को हरी झंडी वर्तमान में लखनऊ और गोरखपुर स्थित एनआईईएलआईटी (NIELIT)केंद्रों में दो इंडिया एआई डाटा एवं एआई लैब पहले से संचालित हो रही हैं, जबकि पीलीभीत में एक डाटा एवं एआई लैब उद्योग साझेदार के सहयोग से स्थापित की गई है। इसके अलावा, योगी सरकार द्वारा 49 डेटा एवं एआई लैब को स्वीकृति दी जा चुकी है और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं शेष 13 अतिरिक्त स्थानों की पहचान शीघ्र की जाएगी। इन इंडिया एआई डाटा एवं एआई लैब्स को विशेष रूप से एआई स्किलिंग के लिए आधुनिक अवसंरचना और तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इन लैब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई टूल्स, डेटा सेट्स और वास्तविक समय की समस्याओं पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे छात्र न केवल उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल कर सकेंगे, बल्कि नवाचार आधारित एआई समाधान भी विकसित कर पाएंगे।

यूपी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को रफ्तार, लखनऊ में अशोक लेलैंड की ईवी फैक्टरी का शुक्रवार को उद्घाटन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी व एच.डी. कुमारस्वामी की उपस्थिति में होगा नई फैक्टरी का शुभारंभ कानपुर रोड स्थित सरोजिनी नगर एक्सटेंशन में होगा कार्यक्रम, राज्य के उप मुख्य मंत्रियों समेत प्रमुख मंत्री भी रहेंगे उपस्थित इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर केंद्रित फैक्टरी बनेगी प्रदेश में निवेश, रोजगार व हरित परिवहन को बढ़ावा देने का माध्यम लखनऊ,  प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन इकोनामी के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की वजह से यूपी अब निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा होता जा रहा है। सहज और सुचारु नीतियों और राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों की वजह से यहां निवेशकों के आने का क्रम बढ़ता जा रहा है। इस क्रम में एक और बड़ा नाम जुड़ा है देश की अग्रणी वाणिज्यिक वाहन निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड का जो लखनऊ में इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण पर केंद्रित अपनी नई फैक्टरी का शुक्रवार 9 जनवरी को उद्घाटन करने जा रही है। इस फैक्टरी को राज्य की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। लखनऊ के कानपुर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र सरोजिनी नगर एक्सटेंशन-1 में आयोजित उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक तथा राज्य सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह भी मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही, अशोक लेलैंड प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन धीरज हिन्दुजा तथा प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शेनू अग्रवाल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का होगा उत्पादन यह संयंत्र लखनऊ के औद्योगिक क्षेत्र सरोजिनी नगर एक्सटेंशन-1 में स्थापित किया गया है, जिसे पहले स्कूटर्स इंडिया साइट के नाम से जाना जाता था। यह इकाई विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के उत्पादन पर केंद्रित होगी और राज्य में स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देगी। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, यह इकाई इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में अशोक लेलैंड की क्षमताओं को और मजबूत करेगी।   हरित भविष्य की ओर एक अहम कदम अशोक लेलैंड की यह नई फैक्टरी न केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और निवेश के नए अवसर भी उत्पन्न करेगी। इसे राज्य के औद्योगिक और पर्यावरणीय भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह लखनऊ समेत प्रदेश की औद्योगिक उन्नति को परिलक्षित करने का माध्यम बनेगा।

माननीय मुख्यमंत्री जी ने अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया यह आदेश

माननीय मुख्यमंत्री प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध   लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों/चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप नकल माफियाओं के विरुद्ध अभिसूचना संकलन करते हुए एस.टी.एफ. उ०प्र० को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद हेतु अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के संबंध में अनियमितताओं/धांधली एवं अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएँ प्राप्त हुईं। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा मामले की गोपनीय जाँच के आदेश दिए गए। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्यवाही करते हुए दिनांक 20-04-2025 को एस०टी०एफ० उ०प्र० को उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग प्रयागराज द्वारा दिनांक 16-04-2025 व 17-04-2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों- महबूब अली, बैजनाथ पाल एवं विनय पाल-को परीक्षा में धांधली एवं अवैध धन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उक्त संबंध में एस०टी०एफ० उ०प्र० द्वारा थाना विभूतिखंड, जनपद लखनऊ पर मु.अ.सं. 144/25, धारा 112, 308(5), 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.), 2023, अभियोग पंजीकृत कराया गया। जाँच की निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया गया था चूँकि अभियुक्त महबूब अली निवर्तमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। पूछताछ के दौरान अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसके द्वारा मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए गए थे, जिन्हें उसने कई अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से धन लेकर उपलब्ध कराया। अभियुक्त महबूब अली की स्वीकारोक्ति की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डेटा एनालिसिस से पुष्टि हुई है। जाँच के क्रम में गिरफ्तार अभियुक्तों तथा उनसे संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डाटा विश्लेषण एवं मुखबिर तंत्र से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम एवं मोबाइल नंबर प्रकाश में आए। इस संबंध में आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा माँगा गया। प्राप्त डाटा के मिलान में यह तथ्य सामने आया कि उक्त परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उक्त परीक्षा को निरस्त किए जाने के आदेश दिये गए हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया है कि उपरोक्त परीक्षा का आयोजन शीघ्रातिशीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

सरकार की प्रभावी नीतियों से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट में 53% की वृद्धि

यूपी में बढ़ा निवेशकों का भरोसा, एक साल में 309 परियोजनाएं पंजीकृत बेहतर हुई टाउनशिप नीति तो पूंजी निवेश 44 हजार करोड़ से बढ़कर 68 हजार करोड़ तक पहुंचा धार्मिक पर्यटन के विकास से रियल एस्टेट को मिली गति, छोटे शहरों की ओर भी रुख कर रहे हैं निवेशक लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उप्र सरकार द्वारा प्रदेश की टाउनशिप नीति को बेहतर करने का नतीजा यहां रियल एस्टेट के क्षेत्र में अद्वितीय वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश के रियल एस्टेट में 68 हजार 328 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है जो 2024 में 44 हजार 526 करोड़ रुपये था। यानी निवेश में 53.5% की प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज हुई है। प्रदेश में बीते एक वर्ष में रिकॉर्ड 309 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं जो उप्र सरकार की नीतियों के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाती हैं। सरकार ने बीते वर्ष टाउनशिप नीति में परिवर्तन करके बिल्डरों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ में टाउनशिप बनाने की बाध्यता समाप्त की थी और ये छूट दी गई थी कि वे न्यूनतम 12.5 एकड़ पर टाउनशिप बना सकेंगे। इसके अलावा नई टाउनशिप नीति में आवंटियों के हितों का ध्यान भी रखा गया। 25 एकड़ की टाउनशिप को तीन साल में और इससे ज्यादा की टाउनशिप को अधिकतम 5 साल में पूरा करने के नियम बनाए गए। जबकि पहले की नीतियों के चलते कई परियोजनाएं 8 से 12 साल की अवधि में भी पूरी नहीं हो पाईं और आवंटियों का पैसा फंस गया। टाउनशिप नीति में बदलाव निवेशकों के साथ-साथ आवंटियों के लिए राहत देने वाला सिद्ध हो रहा है। एनसीआर ही नहीं, छोटे शहर भी कर रहे आकर्षित कुछ समय पहले तक एनसीआर यानी नेशनल कैपिटल रीजन उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था, लेकिन वर्ष 2025 के आंकड़े ये बताते हैं अब निवेशकों का रुझान गैर-एनसीआर जिलों और उप्र के छोटे जनपदों की ओर भी बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में पंजीकृत हुई कुल 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर में और 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर क्षेत्रों में स्वीकृत हुईं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उप्र सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और टियर-2 शहरों के विस्तार का रियल एस्टेट के क्षेत्र में सकारात्मक असर पड़ा है। राजधानी लखनऊ बनी केन्द्र उप्र की राजधानी लखनऊ बीते वर्ष में 67 परियोजनाओं के साथ एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। वहीं अन्य शहरों की बात करें तो बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाएं रजिस्टर्ड हुई हैं। इसके अलावा बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, उन्नाव, गोंडा, मऊ, मिर्जापुर जैसे शहरों तक बिल्डर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन से मिल रहा है विस्तार उत्तर प्रदेश में बढ़ते धार्मिक पर्यटन के चलते भी इन शहरों में रियल एस्टेट निवेश बढ़ा है। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में साल 2025 में 23 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में 5, बाबा काशी विश्वनाथ के धाम वाराणसी में 9, संगमनगरी प्रयागराज में 7 परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ है। उप्र सरकार के प्रयासों से ये शहर बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी पुनर्विकास योजनाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि के साथ रियल एस्टेट विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के मजबूत केंद्र के रूप में उभर रहा है उत्तर प्रदेश

ईसीएमएस के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश को मिली अहम हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को मिल रही है नई गति डिस्प्ले मॉड्यूल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से देश के अग्रणी औद्योगिक प्रदेशों में अपनी पहचान सशक्त बनाता जा रहा है। केंद्र सरकार की “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस)” के तीसरे चरण के अंतर्गत हाल ही में 22 प्रस्तावों की स्वीकृति में उत्तर प्रदेश का नाम सम्मिलित होना इसी बदले हुए औद्योगिक परिदृश्य की तस्वीर है। ईसीएमएस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 04 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश उन 11 राज्यों में शामिल है जहां इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र की ओर से 41,863  करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश और 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और युवाओं को भी मिलेगा। योगी सरकार ने पिछले वर्षों में निवेश अनुकूल वातावरण को मजबूती देने का काम किया है। वर्ष 2017 में अधिसूचित “उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति” और “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पालिसी 2025” के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल रहा है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण उत्तर प्रदेश आज इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग के मामले में पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी मोबाइल विनिर्माण केंद्र बन गया है, जो देश के 55% से अधिक स्मार्टफोन और 50-60% मोबाइल कंपोनेंट्स का उत्पादन करता है। ईसीएमएस के अंतर्गत प्रदेश में स्थापित होने वाली इकाइयां इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में भी विशेष भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं के जरिये पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल, लीथियम आयन सेल और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल मोबाइल और आईटी हार्डवेयर इंडस्ट्री को दृढ़ता मिलेगी, प्रदेश में हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार भी होगा। योगी सरकार की मंशा है कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाला अग्रणी प्रदेश बनाया जाए। इसी सोच को लेकर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग देने का एक इकोसिस्टम बनाया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांड निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। ईसीएमएस के तहत जो स्वीकृति मिली है वह इस भरोसे को और मजबूती प्रदान करती है। ईएसडीएम सेक्टर से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) क्षेत्र से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं। इनमें वीवो, ओप्पो, सैमसंग, लावा, हायर और एलजी जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ-साथ होलिटेक, ट्रांसशन, जाह्वा, सनवोडा और सैमक्वांग जैसे कंपोनेंट आपूर्तिकर्ताओं ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित की हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आईटी सेक्टर को मिला नया विस्तार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख आईटी और डिजिटल हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का असर अब धरातल स्टार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेश में आईटी कंपनियों का लगातार विस्तार हो रहा है, जो रोजगार सृजन निवेश और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। इनमें से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 आईटी कंपनियां पंजीकृत हैं।    उत्तर प्रदेश में संचालित आईटी कंपनियों में स्टार्टअप्स, मध्यम उद्यम और वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटीईएस, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं पर कार्य कर रही हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने विज़न से आईटी कंपनियों का उत्तर प्रदेश की ओर रुझान बढ़ रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आईटी गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुके हैं। जो डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर आधारित सेवाएं प्रदान करने का काम कर रही हैं। इसके अलावा कानपुर और वाराणसी जैसे शहर भी तेजी से उभरते डिजिटल केंद्र बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के संतुलित विकास को मजबूती मिल रही है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 इकाइयां पंजीकृत हैं। ये इकाइयां आईटी निर्यात में अहम भूमिका निभा रही हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2026  तक प्रदेश में एसटीपीआई पंजीकृत इकाइयों की संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, इंफोसिस, पेटीएम और एडोब जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े स्तर पर संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही लगभग 90 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं, जहां रिसर्च और उच्च स्तरीय सेवाओं पर काम हो रहा है। इन कंपनियों की मौजूदगी से प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है। सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।