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हरियाणा में गोतस्करी के आरोपी की मौत, पुलिस के साथ मुठभेड़ में हुआ ढेर

गुरुग्राम. नूंह के तावडू क्षेत्र के खरखड़ी गांव निवासी वांछित आरोपित शाहिद उर्फ आडवाणी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। नूंह क्राइम ब्रांच उसका पीछा करते हुए गुरुग्राम की ओर आई थी। सोहना के सिलानी गांव के पास बृहस्पतिवार को पुलिस और आरोपित के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, शाहिद गोतस्करी और एटीएम मशीन उखाड़ने के मामलों में वांछित था। उसकी तलाश में जुटी नूंह क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि वह गुरुग्राम की ओर आ रहा है। टीम ने पीछा किया और सिलानी गांव के पास उसे घेर लिया। इस दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें शाहिद मारा गया। शाहिद उर्फ आडवाणी वर्ष 2018 में गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की हिरासत से फरार हो गया था। इसके बाद से वह पुलिस की तलाश में था। उस पर गोतस्करी और एटीएम मशीन उखाड़ने समेत कई मामलों में संलिप्त होने का आरोप था। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच की। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

चुनाव आयोग का बड़ा कदम, मतदाता सूची से नाम हटाने के नियम सख्त; अब इन बातों का रखना होगा ध्यान

चंडीगढ़ मतदाता सूची से किसी का नाम हटवाने के लिए अब मनमाने ढंग से बड़ी संख्या में आवेदन नहीं किए जा सकेंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने फार्म-7 के जरिए दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों की संख्या तय कर दी है। इस कदम का उद्देश्य बिना ठोस आधार सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराने पर रोक लगाना और मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। नए निर्देश ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से दिए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहाना ने आयोग के निर्देशों की जानकारी दी। नई मतदाता सूचियों का प्रकाशन छह नवंबर को होगा। अभी तक करीब 34 लाख मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं, जो मौजूद नहीं हैं। राज्य में पिछली मतदाता सूचियों के आधार पर दो करोड़ छह लाख से अधिक मतदाता थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, फार्म-7 के जरिए मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति जताई जा सकती है या नाम हटाने की मांग की जा सकती है। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने या संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में दर्ज रहने की पात्रता न होने पर निर्धारित आधार और प्रक्रिया के तहत आपत्ति दी जा सकती है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़े दावे-आपत्तियों की निर्धारित अवधि में एक मतदाता अधिकतम 10 फार्म-7 आवेदन दे सकेगा। सूची के सामान्य अद्यतन के दौरान यह सीमा हर महीने पांच आवेदन होगी। फार्म वही व्यक्ति भर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज है।  

गुरुग्राम में जाम और अवैध पार्किंग पर लगाम की तैयारी, सड़कों पर उतरे 107 राइडर्स

गुरुग्राम. गुरुग्राम की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए यातायात पुलिस ने नई पहल की है। शहर में चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 107 राइडर्स की तैनाती की गई है। ये राइडर पूरे शहर में घूम-घूमकर जाम की स्थिति, गलत पार्किंग और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर नजर रखेंगे और मौके पर ही व्यवस्था संभालेंगे। यातायात पुलिस के अधिकारियों के अनुसार ये राइडर यातायात की निगरानी करने, वाहनों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने में अहम भूमिका निभाएंगे। तैनाती के तहत 30 से ज्यादा राइडर को पुराने शहर में, 30 राइडर को नए गुरुग्राम में लगाया गया है। बाकी राइडर्स को साउथ जोन और मानेसर जोन में तैनात किया गया है। चालान भुगतान की प्रक्रिया को सरल ट्रैफिक पुलिस ने चालान भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विंडो की संख्या एक से बढ़ाकर छह की गई है, ताकि चालान भुगतने वाले लोगों को परेशानी न हो। विंडो की संख्या बढ़ने से चालान भुगतने के प्रतीक्षा समय को कम किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किए गए 107 राइडर सड़कों पर वाहनों के संचालन की निगरानी करेंगे। वे वाहनों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था बनाए रखेंगे। यातायात पुलिस ने 12 अक्तूबर को कुल 3,044 वाहनों के चालान काटे। इनमें नो एंट्री के 69, खतरनाक ड्राइविंग के 117 और बिना पीयूसी के 220 चालान शामिल थे। वहीं, गलत दिशा में वाहन चलाने के 266, लेन बदलने के 163, गलत पार्किंग के 220 चालान, दोपहिया वाहन पर बिना हेलमेट के 246 व पिलियन राइडर बिना हेलमेट के 164 चालान काटे गए। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के 294 और बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहनों के 181 चालान किए गए।

राखीगढ़ी में 80 मानव कंकालों से खुलेगा इतिहास का राज, 19 से 25 अक्टूबर तक होगा महोत्सव

हिसार इतिहास की किताबों में दर्ज सभ्यता को समझने के लिए अब केवल लिखित विवरण पर निर्भर नहीं रहना होगा। राखीगढ़ी महोत्सव में पर्यटक उस अतीत से भी रूबरू होंगे, जिसे जमीन के नीचे दबी कब्रों, मानव कंकालों और उनके वैज्ञानिक अध्ययन ने सामने लाने में मदद की है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने टीला नंबर सात पर मिले हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान की कहानी पर एक लघु फिल्म तैयार की है। संग्रहालय की डिजिटल गैलरी में दिखाई जाने वाली इस फिल्म में खोदाई से लेकर डीएनए अध्ययन तक की प्रक्रिया को सरल ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। पहल का उद्देश्य पुरातात्विक शोध को विशेषज्ञों और शोधपत्रों तक सीमित रखने के बजाय आम दर्शकों के लिए समझने योग्य बनाना है। कब्रों में मिल चुके आभूषण संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है। इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे। पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा। एक कंकाल के डीएनए पर हुआ शोध राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई। एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। कब्रों में मिल चुके आभूषण संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है। इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे। पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा। एक कंकाल के डीएनए पर हुआ शोध राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई। एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा। इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।  

प्रॉपर्टी आईडी में मनमानी पर सख्ती, रेवाड़ी में एक्सईएन ने भेजा नोटिस

रेवाड़ी. शहर में प्रॉपर्टी आइडी की छोटी-छोटी समस्या को लेकर आम लोगों को नगर परिषद के अधिकारियों के पास चक्कर काटने पड़ते हैं। चेकर-मेकर पर मनमानी के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। ताता मामला शहर के नई आबादी स्थित एक प्रापर्टी आइडी का है। पहले चेकर-मेकर ने उसे ओके कर दिया। बाद में उसी आइडी पर स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज क्लियर नहीं होने का हवाला देते हुए आपत्ति लगा दी। डीएमसी प्रदीप अहलावत के संज्ञान में जब यह मामला पहुंचा तो उन्होंने एक्सइएन अंकित वशिष्ठ को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एक्सईएन ने भी बिना देरी किए चेकर-मेकर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब दाखिल करने के लिए पत्र लिखा है। खामियों के 500 आवेदन आए – खामियों के 500 आवेदन आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा नाम व पता गलत होने की शिकायतें आईं थीं। इस मौके पर किसी का निस्तारण नहीं किया गया। इनमें नाम और पता गलत के 300, मोबाइल नंबर गलत के 115 और अन्य के 85 शिकायतें शामिल हैं। मालिकों को अपनी प्रॉपर्टी आईडी ठीक करने के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे नप के अधिकारी गृहकर वसूली करने की बजाय गलती ठीक करने में उलझे हुए हैं। नगर परिषद क्षेत्र में प्रॉपर्टी सर्वे मुख्यालय स्तर पर याशी कंसल्टेंसी एजेंसी से कराया था। पिछले दो तीन साल पहले शुरू हुए सर्वे के बाद एजेंसी की ओर से सर्वे के नोटिस प्राॅपर्टी मालिकों को दिए गए तो अधिकतर ने खामियां बताकर शिकायत की। इसको लेकर नगर परिषद ने वार्डों में शिविर भी लगाए गए, लेकिन शिकायतों का निवारण नहीं हुआ। रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र में काफी ऐसी प्रॉपर्टी अटकी हुई हैं, जिनका समाधान होना बाकी है। प्राॅपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम और नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) पोर्टल पर अपलोड हुए आवेदनों पर आपत्तियां जताई जा रही हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही। इसलिए सरकार ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए निदेशालय को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

जज जगदीप सिंह को मिली नई जिम्मेदारी, फरीदाबाद के जिला न्यायाधीश नियुक्त

फरीदाबाद. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाने वाले न्यायाधीश जगदीप सिंह को फरीदाबाद का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही सेक्टर-12 स्थित जिला अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। न्यायाधीश जगदीप सिंह बुधवार को पदभार ग्रहण कर सकते हैं। जगदीप सिंह अगस्त 2017 में उस समय देशभर में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। सुरक्षा कारणों से इस मामले की सुनवाई रोहतक की सुनारिया जेल परिसर में विशेष अदालत लगाकर की गई थी। फैसले के बाद उन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान की गई थी। पंचकूला से फरीदाबाद तक का सफर न्यायिक नियुक्तियों से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जगदीप सिंह इससे पहले पंचकूला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात थे। अक्टूबर 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के प्रशासनिक आदेश के तहत उन्हें गुरुग्राम से पंचकूला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया था। अब उन्हें फरीदाबाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व सेशन जज संदीप गर्ग की जगह नई जिम्मेदारी फरीदाबाद में इससे पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर संदीप गर्ग तैनात थे। जगदीप सिंह की नियुक्ति के बाद न्यायिक प्रशासन में बदलाव होगा। उनके पदभार ग्रहण करने के बाद जिला अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी। राम रहीम को सजा सुनाने वाले न्यायाधीश की तैनाती को देखते हुए अदालत परिसर की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर बड़ा अपडेट, कोर्ट ने खारिज की HPSC के खिलाफ याचिकाएं

चंडीगढ़. हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) भर्ती प्रक्रिया को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की स्क्रीनिंग परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी में बदलाव और कुछ प्रश्नों को हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली 16 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में विषय विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ठोस गलती साबित हुए बिना न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी की शैक्षणिक शुद्धता का आकलन करना विशेषज्ञों का काम है। जब तक उत्तर कुंजी में स्पष्ट और निर्विवाद त्रुटि साबित न हो, तब तक अदालत को विशेषज्ञों की राय में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने HPSC की ओर से 27 जून 2025 को जारी अंतिम उत्तर कुंजी, 3 जुलाई 2025 की घोषणा और 11 जुलाई 2025 को घोषित स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी थी। अभ्यर्थियों का आरोप था कि आयोग ने अंतिम उत्तर कुंजी में छह प्रश्नों के उत्तर बदल दिए और 10 प्रश्नों को हटा दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन बदलावों से परीक्षा की निष्पक्षता और परिणाम की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। उन्होंने संशोधित उत्तर कुंजी जारी करने, सभी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराने और नई मेरिट सूची तैयार करने की मांग की थी। बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा से प्रश्न दोहराने का भी उठाया मुद्दा याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी दलील दी कि बिहार लोक सेवा आयोग की 29 अप्रैल 2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) परीक्षा के 30 प्रश्न हरियाणा की परीक्षा में दोहराए गए थे। उनका कहना था कि उत्तर कुंजी में बदलाव और प्रश्न हटाए जाने से योग्य अभ्यर्थियों के चयन की संभावनाएं प्रभावित हुईं। इसी आधार पर उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की मांग की। हालांकि, अदालत ने कहा कि किसी दूसरी परीक्षा के प्रश्न दोहराए जाने मात्र से परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह नहीं किया जा सकता। HPSC ने अदालत में क्या दलील दी? हरियाणा लोक सेवा आयोग ने अदालत को बताया कि परीक्षा की प्रारंभिक उत्तर कुंजी जारी करने के बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया और उनकी सिफारिशों के आधार पर अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की गई। आयोग के अनुसार, अभ्यर्थियों की शिकायतों की दोबारा समीक्षा भी विशेषज्ञों से कराई गई थी। इस समीक्षा के बाद उत्तर कुंजी में किसी और बदलाव की आवश्यकता नहीं पाई गई। विशेषज्ञों की राय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती अदालत हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रश्नों की शैक्षणिक शुद्धता और उत्तर कुंजी की वैधता का तकनीकी मूल्यांकन विशेषज्ञों के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता विशेषज्ञों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उनके फैसले में दुर्भावना साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अलग-अलग पाठ्यपुस्तकों में दिए गए उत्तरों की तुलना के आधार पर विशेषज्ञों की राय को खारिज नहीं किया जा सकता। उत्तर कुंजी में स्पष्ट त्रुटि का प्रमाण न होने के कारण न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया के लिए क्या मायने? हाई कोर्ट द्वारा सभी 16 याचिकाएं खारिज किए जाने से HPSC की अंतिम उत्तर कुंजी और स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली इन याचिकाओं पर कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। हालांकि, भर्ती के अगले चरण, नियुक्तियों की समयसीमा और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर आयोग की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी होगी। इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले मामलों के लिए यह संदेश भी मिलता है कि केवल असहमति पर्याप्त नहीं है; न्यायिक हस्तक्षेप के लिए स्पष्ट त्रुटि या ठोस आधार प्रस्तुत करना जरूरी है।

हरियाणा ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए मौका, कैडर बदलने का पोर्टल आज से होगा शुरू

चंडीगढ़. हरियाणा में विज्ञापन संख्या 4/2018 के अंतर्गत चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को काडर बदलने के लिए सरकार ने एक और मौका दिया है। आज बुधवार से पोर्टल फिर खोल दिया जाएगा, जिस पर पात्र कर्मचारी 30 अक्टूबर तक विकल्प दे सकेंगे। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि जरूरी नहीं कि कामन काडर बदलने से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो। मानव संसाधन विभाग ने इससे पहले 17 जुलाई को पोर्टल https://recruitment.groupd.csharyana.gov.in/ शुरू करते हुए कर्मचारियों को विकल्प दिया था कि वे या तो कामन काडर में बने रहें या फिर कामन काडर से बाहर निकलकर संबंधित विभाग के सेवा नियमों के अधीन आ सकते हैं। 15 अगस्त को बंद कर दिया गया था पोर्टल इसके बाद पोर्टल 15 अगस्त को बंद कर दिया गया। इसी दौरान सरकार के संज्ञान में आया कि पोर्टल पर विकल्प मॉड्यूल ने यह संदेश दिया कि कर्मचारी अपनी वरिष्ठता खो देगा, चाहे उसने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा उसे मूल रूप से आवंटित विभाग का विकल्प चुना हो या किसी अन्य विभाग का। इससे कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बन गई और वे सही विकल्प नहीं चुन सके। अब सरकार ने पोर्टल खोलते हुए स्पष्ट किया है कि वे कर्मचारी, जो सामान्य काडर में बने रहने का विकल्प चुनते हैं, उनकी सेवाएं हरियाणा समूह-डी कर्मचारी (भर्ती और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2018-संशोधित रूप में, द्वारा शासित होंगी और उनकी वरिष्ठता एचएसएससी द्वारा तैयार की गई संयुक्त योग्यता सूची के अनुसार निर्धारित की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति एचएसएससी की अनुशंसाओं के अंतर्गत किसी विभाग में हुई थी और जिन्हें 24 जून 2019 के माध्यम से विभाग परिवर्तन का एक बार का अवसर दिया गया था, तो वरिष्ठता निर्धारण के उद्देश्य से उस विभाग को कर्मचारी का प्रारंभिक विभाग माना जाएगा। नियमों के अनुसार विनियमित की जाएगी सेवा यदि ऐसा कर्मचारी 2024 के सामान्य स्थानांतरण अभियान के दौरान स्थानांतरित हुए बिना उसी विभाग में सेवा जारी रखता है और सामान्य काडर से बाहर रहने का विकल्प चुनता है, तो उसकी वरिष्ठता उस विभाग पर लागू एचएसएससी योग्यता/चयन सूची और संबंधित सेवा नियमों के अनुसार विनियमित की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रारंभ में किसी विभाग में हुई थी और बाद में 2024 के सामान्य तबादला अभियान के दौरान उसका तबादला किसी अन्य विभाग में कर दिया गया, और अब उसने वर्तमान विभाग में ही रहने का विकल्प चुना है, तो ऐसे कर्मचारी को वर्तमान विभाग में वरिष्ठता निर्धारण के उद्देश्य से नव नियुक्त कर्मचारी माना जाएगा। उसे लागू सेवा नियमों के अनुसार उस विभाग की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा। अर्थात् उस विभाग में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि पर उस काडर में कार्यरत सभी कर्मचारियों से नीचे।

हरियाणा में राशन डिपो खोलने का मौका, 10 नवंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन

चरखी दादरी सरकार प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा गरीब एवं पात्र परिवारों को सुगम तरीके से राशन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है इसी कड़ी में प्रदेशभर में रिक्त राशन डिपो के लाइसेंस जारी करने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन दुकानों के आवंटन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। डीएफएससी नीतू कुमारी ने बताया कि इच्छुक एवं पात्र आवेदक हरियाणा अंत्योदय सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर तक है। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को आवश्यक खाद्यान्न की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करना, युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके साथ ही, ग्रामीण व दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राशन प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना भी इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। वेबसाइट पर उपलब्ध है तमाम जानकारी डीएफएससी नीतू कुमारी ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया, पात्रता शर्तों और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग हरियाणा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने जिले के सभी इच्छुक एवं पात्र आवेदकों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं से अपील की है कि वे निर्धारित पात्रता शर्तों एवं दिशा-निर्देशों का भली-भांति अध्ययन करने के बाद अंतिम तिथि 10 नवंबर से पहले अपना आवेदन ऑनलाइन जमा करवाएं ।  

हरियाणा में मारुति से फ्लिपकार्ट तक का निवेश, चार IMT के विस्तार की तैयारी तेज

चंडीगढ़ हरियाणा में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए सरकार मौजूदा औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आइएमटी) में बड़ी कंपनियों की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के साथ ही नए औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रयासों से प्रदेश को देशी और वैश्विक कंपनियों के लिए प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल के अनुसार, चार आइएमटी के विस्तार के लिए लगभग 14,300 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है। इससे औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना हैं। हरियाणा में छह प्रमुख आइएमटी विकसित की गई हैं। इनमें मानेसर लगभग 4,000 एकड़, रोहतक 3,600 एकड़, बावल 3,300 एकड़, खरखौदा 3,200 एकड़, फरीदाबाद 1,800 एकड़ और सोहना 1,500 एकड़ में फैली हैं। इन औद्योगिक क्षेत्रों में सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। फ्लिपकार्ट 140 एकड़ में 1300 करोड़ रुपये का किया निवेश प्रमुख निवेश परियोजनाओं में मारुति सुजुकी 800 एकड़ में 18,000 करोड़ रुपये, एटीएल 178 एकड़ में 7,000 करोड़ रुपये, आदित्य बिरला ग्रुप 70 एकड़ में 1,140 करोड़ रुपये और यूनो-मिंडा 94 एकड़ में 11,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही हैं डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि फ्लिपकार्ट 140 एकड़ में 1,300 करोड़ रुपये, डेंसो 37 एकड़ में 570 करोड़ रुपये, टोयोटा बोशोकु 21 एकड़ में 400 करोड़ रुपये और अमूल 10 एकड़ में 300 करोड़ रुपये की परियोजना के साथ निवेश कर रहे हैं। फैवेली ट्रांसपोर्ट पांच एकड़ में 200 करोड़ रुपये तथा यूफ्लेक्स 14 एकड़ में 300 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। यामाहा, एस्कोर्ट्स, व्हर्लपूल, इंडियन आयल, एशियन पेंट्स, जेसीबी, होंडा, हीरो, टाटा, गूगल, माइक्रोसाफ्ट, सैमसंग और भारत इलेक्ट्रानिक्स सहित अनेक कंपनियां भी प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। चार आइएमटी के विस्तार के लिए जमीन चिह्नित औद्योगिक नेटवर्क को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना के तहत खरखौदा के विस्तार के लिए लगभग 5,800 एकड़, कोसली में नई आइएमटी के लिए 5,000 एकड़, बावल के विस्तार के लिए 2,000 एकड़ और सोहना के विस्तार के लिए 1,500 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है। अमित अग्रवाल के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, स्पष्ट भूमि स्वामित्व, पूर्व-स्वीकृत औद्योगिक भूमि उपयोग, सिंगल-विंडो सहायता और बेहतर सड़क संपर्क विकसित करने पर जोर है। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए कौशल विकास केंद्र, सामान्य सुविधा केंद्र, स्टार्टअप सहायता और इन्क्यूबेशन सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 500 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि वाला सक्षम कोष बनाया गया है।