samacharsecretary.com

छत्तीसगढ़ में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगी नई दिशा, तैयार होगी लंबी अवधि की कार्ययोजना

छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत प्रदेश की दीर्घकालिक अधोसंरचना विकास की बनेगी समग्र कार्ययोजना रायपुर प्रदेश में अधोसंरचना विकास को गति देने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत एवं एकीकृत अधोसंरचना तैयार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। लोक निर्माण विभाग को मिशन का नोडल विभाग बनाया गया है। बैठक में मिशन के तहत प्रदेश के सड़क, ऊर्जा, ट्रांसमिशन, जल, सिंचाई, संचार, फाइबर नेटवर्क तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने प्रदेश के रोड नेटवर्क के लिए आगामी 20 वर्षों का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में वर्तमान अधोसंरचना की स्थिति, भविष्य की जरूरतों, कनेक्टिविटी की आवश्यकताओं और संभावित विकास क्षेत्रों का समग्र आकलन किया जाए। इसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर उनके क्रियान्वयन की कार्ययोजना तैयार की जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के साथ ऊर्जा, जल, सिंचाई, संचार एवं डिजिटल कनेक्टिविटी सहित सभी प्रमुख अधोसंरचना घटकों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ देखा जाए। प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकता का आकलन कर यह निर्धारित किया जाए कि आने वाले वर्षों में किस प्रकार की अधोसंरचना और किन क्षेत्रों में विकसित की जानी है। इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाओं का होगा अध्ययन मुख्य सचिव ने प्रदेश में इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सड़क एवं रेल सहित विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने तथा माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक परियोजनाओं को चिन्हित करने को कहा। उन्होंने अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए नए फंडिंग मैकेनिज्म की संभावनाओं का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए। निजी एवं सार्वजनिक निवेश सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों का परीक्षण कर परियोजनाओं के लिए उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। दीर्घकालिक योजना के साथ बनेगा वार्षिक एक्शन प्लान मुख्य सचिव ने कहा कि 20 वर्षीय मास्टर प्लान के साथ वार्षिक एक्शन प्लान भी तैयार किया जाए। इसमें प्रत्येक वर्ष प्रस्तावित कार्यों, उनकी प्राथमिकता, आवश्यक संसाधनों और समय-सीमा का स्पष्ट निर्धारण हो। उन्होंने परियोजनाओं की प्रॉपर प्लानिंग एवं मैपिंग के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में विकसित की जा रही आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों के एक्सपोजर विजिट आयोजित करने को भी कहा, इससे वहां अपनाई जा रही बेहतर तकनीकों एवं कार्यप्रणालियों को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जा सके। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मिशन के कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति तेज

छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति तेज मुख्य सचिव ने की कल्याणकारी योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की समीक्षा रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति और प्रत्येक पात्र परिवार तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति को लेकर आज उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने इस दौरान सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैश-बोर्ड पर दर्ज योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने की चल रही कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की। डैश-बोर्ड के माध्यम से पारदर्शिता और निगरानी       सुघ्घर छत्तीसगढ़ ग्रामीण योजना के तहत शासन की विभिन्न योजनाओं के सभी पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए एक विशेष राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड तैयार किया गया है। इस डैश-बोर्ड पर राज्य एवं केंद्र शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं के सर्वेक्षित हितग्राहियों की सूची दर्ज है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड में शासन की सभी योजनाओं की जिलेवार संतृप्ति का स्पष्ट विवरण होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और त्वरित गति से योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। प्रमुख योजनाओं की समीक्षा        बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं के संतृप्तिकरण की स्थिति पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। प्रधानमंत्री किसान योजना एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राशन कार्ड एवं मुफ्त राशन वितरण, जॉब कार्ड एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जन-धन योजना व अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं के साथ ही, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक के कार्यवाही विवरण के अनुसार संतृप्ति अभियान की प्रगति, ग्रेन्यूल आंकड़ों, बस्तर संभाग के अंतर्गत संतृप्तिकरण, नियद नेल्ला नार-2.0 और सुघ्घर छत्तीसगढ़ पोर्टल में राशन कार्ड के आधार पर हितग्राहियों की सूची की भी गहन समीक्षा की गई।        इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, सुशासन एवं अभिसरण और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ को मिला ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान, बस्तर-सिरपुर की खूबसूरती ने बनाई खास पहचान

रायपुर  छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पर्यटन क्षमता का लोहा मनवाया है. विशाखापट्टनम में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के 41वें वार्षिक सम्मेलन में प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक पर्यटन स्थलों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया. इस दौरान छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination' सम्मान से नवाजा. यह उपलब्धि न केवल प्रदेश के बढ़ते पर्यटन विकास की पहचान है, बल्कि देश और दुनिया के पर्यटकों के बीच छत्तीसगढ़ की मजबूत होती मौजूदगी का भी संकेत है।  विशाखापट्टनम के नोवोटेल वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ, ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान छत्तीसगढ़ ने अपनी पर्यटन विविधता को प्रमुखता से सामने रखा. सम्मेलन का मुख्य विषय भारत को वैश्विक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने पर केंद्रित रहा, जिसमें नए पर्यटन स्थलों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।  पर्यटन विकास के विजन को मिली नई पहचान सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की योजनाओं और संभावनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया. प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक केंद्रों और जनजातीय संस्कृति को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला. वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए प्रदेश की खूबसूरती और विविधता को देशभर से आए प्रतिनिधियों तक पहुंचाया।  देशभर के टूर ऑपरेटर्स को दिया आमंत्रण सम्मेलन के दौरान ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी यात्रा योजनाओं में शामिल करने का आमंत्रण दिया. पर्यटन बोर्ड की ओर से प्रदेश में चल रही विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई. साथ ही यह बताया गया कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।  केंद्रीय मंत्री समेत कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन मंत्री कंदुला दुर्गेश और विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया और राज्य की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा।  झरनों, जंगलों और संस्कृति की अनूठी पहचान छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है. बस्तर के जलप्रपात, घने जंगल, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और जनजातीय संस्कृति प्रदेश को एक विशिष्ट पर्यटन गंतव्य बनाती है. यही विविधता सम्मेलन में आकर्षण का केंद्र रही और इसे छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत बताया।  पर्यटन कारोबार को मिला बढ़ावा सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स पहुंचे. यहां बी-टू-बी बैठकों के माध्यम से पर्यटन पैकेज, नए डेस्टिनेशन और व्यापारिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई. इससे प्रदेश में पर्यटन निवेश और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में नए अवसरों के द्वार खुलने की उम्मीद है।  प्रतिष्ठित सम्मान से बढ़ा प्रदेश का गौरव सम्मेलन के समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination' पुरस्कार से सम्मानित किया. यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सतत विकास के प्रयासों की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है. इस उपलब्धि ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित किया है।  पर्यटन के लिए खुलेंगी नई संभावनाएं पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मान और राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान से छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी. इससे न केवल देश और विदेश से अधिक पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की भी संभावना है।  नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों, वन्यजीव संपदा और जनजातीय परंपराओं का अनूठा मेल छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों की श्रेणी में लाने की क्षमता रखता है. राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर मिली यह पहचान और ‘Best Emerging Tourist Destination' का सम्मान प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है।   

छत्तीसगढ़ में सजेगा उद्योगों का महाकुंभ! 18 से 20 सितंबर तक रायपुर में होगा 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर

छत्तीसगढ़ में सजेगा उद्योगों का महाकुंभ 18 से 20 सितंबर तक रायपुर में होगा 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर MSME, स्टार्टअप, निवेश, रोजगार और नवाचार को मिलेगा साझा मंच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित देश-प्रदेश के विशिष्ट अतिथि होंगे शामिल रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर 18 से 20 सितंबर तक देशभर के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, उद्यमियों, निवेशकों और युवाओं की मेजबानी करेगी। साइंस कॉलेज ओपन ग्राउंड में 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 का आयोजन किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फेयर में प्रदेश के MSME, स्टार्टअप, निर्माताओं, उद्यमियों और युवाओं को देशभर के उद्योगपतियों, खरीदारों और निवेशकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन केवल औद्योगिक उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, रोजगार, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को एक मंच पर लाने वाला व्यापक औद्योगिक आयोजन होगा। फेयर में उत्पाद एवं तकनीक प्रदर्शनी, B2B मीटिंग, निवेशकों से संवाद, Job Placement Drive, विशेषज्ञों के प्रेरक सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित विशिष्ट अतिथियों की रहेगी उपस्थिति इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की भी उपस्थिति रहेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रमुख विचारक कृष्ण गोपाल की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। राष्ट्रीय स्तर के नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, उद्यमियों और निवेशकों की मौजूदगी से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा, कृषि एवं वन उत्पाद, ऊर्जा संसाधन और विकसित हो रहे औद्योगिक आधार के कारण प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बड़े बाजार तक पहुंच, नए खरीदारों से संपर्क, तकनीकी सहयोग और निवेश हासिल करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का मंच प्रदान करेगा। प्रदेश के उद्यमियों को विभिन्न राज्यों से आने वाले उद्योगपतियों, खरीदारों, वितरकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इससे नए बाजारों तक पहुंच और कारोबारी साझेदारियों की संभावनाएं मजबूत होंगी। B2B मीटिंग से बनेंगे नए कारोबारी संबंध फेयर में देशभर से आने वाले उद्यमी अपने उत्पादों, मशीनरी, तकनीक और सेवाओं का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ B2B मीटिंग के माध्यम से निर्माता, वितरक, डीलर, सप्लायर, खरीदार और निवेशक सीधे संवाद कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों को केवल अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर देना नहीं, बल्कि उन्हें नए खरीदार, कारोबारी साझेदार और बाजार विस्तार के अवसर उपलब्ध कराना भी है। Job Placement Drive से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर इस बार फेयर का एक प्रमुख आकर्षण Job Placement Drive होगा। इसके माध्यम से प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को उद्योगों और कंपनियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। विद्यार्थियों को उद्योग प्रतिनिधियों से सीधे संवाद, इंटरव्यू और रोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा। स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को मिलेगा प्रोत्साहन फेयर में पारंपरिक उद्योगों के साथ स्टार्टअप और नई पीढ़ी के युवा उद्यमियों को भी विशेष अवसर दिया जाएगा। युवा उद्यमी अपने उत्पाद और नए व्यावसायिक विचार प्रदर्शित करने के साथ अनुभवी उद्योगपतियों, निवेशकों और संभावित कारोबारी साझेदारों से संपर्क स्थापित कर सकेंगे।बाजार, निवेश, तकनीक और मार्गदर्शन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह मंच नए उद्यमों को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों के सत्र देंगे नई दिशा तीन दिवसीय आयोजन में Motivational Talks और विशेषज्ञ व्याख्यान भी होंगे। इनमें उद्यमिता, उद्योग संचालन, बाजार विस्तार, नई तकनीक, व्यवसाय प्रबंधन, नवाचार और बदलती आर्थिक परिस्थितियों जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सफल उद्यमियों और विशेषज्ञों के अनुभव युवाओं तथा नए उद्यमियों को व्यवसाय की नई संभावनाओं को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे। औद्योगिक क्षमता के साथ दिखेगी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में औद्योगिक गतिविधियों के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा। तीनों दिनों रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें प्रदेश की लोक कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। इससे देशभर से आने वाले उद्यमियों और अतिथियों को छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता के साथ उसकी सांस्कृतिक पहचान से परिचित होने का अवसर मिलेगा। MSME क्षेत्र को मिलेगी नई ऊर्जा MSME क्षेत्र स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फेयर में ऐसे उद्यमियों को नए बाजार, खरीदार, तकनीकी सहयोग और व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा। विभिन्न राज्यों के उद्यमियों की एक मंच पर मौजूदगी से ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग, संयुक्त उपक्रम, सप्लाई चेन साझेदारी और नए व्यापारिक संबंध विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। 'लोकल से नेशनल' की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के दृष्टिकोण के अनुरूप स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इसी दिशा में प्रभावी मंच के रूप में सामने आ रहा है। प्रदेश के छोटे शहरों और जिलों में कार्यरत उद्यमियों को अपने उत्पाद देशभर के खरीदारों और उद्योग प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाएं मजबूत होंगी। निवेश और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद फेयर के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक और निवेश क्षमता को देश के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। खनिज, कृषि, वन उत्पाद, ऊर्जा, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, निर्माण, MSME और सेवा क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से निवेशकों और उद्योगपतियों को परिचित कराया जाएगा। आयोजन से नए उद्योगों की स्थापना, निवेश, व्यापार विस्तार और रोजगार सृजन के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार होने की उम्मीद है। तीन दिन में उद्योग, निवेश और रोजगार के अनेक अवसर 18, 19 और 20 सितंबर को आयोजित होने वाला इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर उद्योग जगत के लिए व्यापारिक संपर्क, निवेश, रोजगार, तकनीक और नवाचार के अनेक अवसर लेकर आएगा। एक ओर जहां उत्पादों और तकनीक की प्रदर्शनी होगी, वहीं … Read more

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता, नर चीतल शिकार मामले में 7 आरोपी गिरफ्तार; कोर्ट ने भेजा जेल

रायपुर : वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता : नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया। मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाडि़यां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई। सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री श्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

इन्फ्लुएंसर मीट से चमकेगा छत्तीसगढ़ पर्यटन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दुनिया देखेगी प्रदेश की खूबसूरती

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव रायपुर डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी। मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं। यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।  इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने हटाया अतिक्रमण

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने हटाया अतिक्रमण वर्ष 2006 में आवासीय परियोजना हेतु आबंटित भूमि पर निजी बिल्डर द्वारा किया जा रहा था अवैध निर्माण रायपुर, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित मंडल की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया है। कार्रवाई के दौरान निजी बिल्डर द्वारा बिना अनुमति निर्मित की जा रही सड़क को हटाया गया। दीनदयाल आवास योजना के अंतर्गत कलेक्टर रायपुर के आदेश 03 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आबंटित की गई थी। इस भूमि में ग्राम सेजबहार के खसरा क्रमांक 162/1 के भाग तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा क्रमांक 341/1 एवं 341/3 शामिल हैं। परियोजना के लिए विकास अनुज्ञा 17 मई 2006 को स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी आवासों के निर्माण का था प्रावधान स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। मंडल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण में पाया गया कि 1435 प्रस्तावित आवासों में से 1327 आवास स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप निर्मित किए गए, जबकि 39 आवास स्वीकृत अभिन्यास से पृथक निर्मित पाए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण किया गया। भूमि विवाद के कारण नहीं बन सके 79 आवास निरीक्षण, अभिलेख परीक्षण तथा पूर्व अधिकारियों एवं अभियंताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्माण अवधि के दौरान भूमि विवाद उत्पन्न होने के कारण स्वीकृत ले-आउट में दर्शाए गए भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के अंतर्गत अनुबंध क्रमांक 41, दिनांक 07 अगस्त 2006 के तहत 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत 193 एलआईजी आवासों का निर्माण किया गया। विवादित क्षेत्र में स्थित 79 आवासों का निर्माण न होने के कारण उनका विक्रय भी नहीं किया गया। सीमांकन के दौरान सामने आया अतिक्रमण हाल ही में मंडल द्वारा अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक निजी बिल्डर द्वारा मंडल की भूमि के हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर सड़क निर्माण किया जा रहा है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की। अवैध सड़क हटाकर भूमि को कराया अतिक्रमणमुक्त कार्यपालन अभियंता संभाग क्रमांक-3, सेजबहार रायपुर श्री नितेश कश्यप के नेतृत्व में मंडल की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस दौरान संपदा अधिकारी श्री अमृत लाल बरमन, सहायक अभियंता श्री हेमंत निषाद, उप अभियंता श्रीमती निकिता मिश्रा, श्री अनुपम राठौर, श्री पेमेन्द्र ध्रुव, श्री अमय विक्रम तथा श्री कमलेश दास सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में अनधिकृत सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। भूमि पर विकसित होगी नई आवासीय परियोजना मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है तथा भविष्य में इस क्षेत्र में नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि मंडल अपनी भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।

टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ मिशन की प्रगति पर मंथन, मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को दिए अहम निर्देश

मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व अभियान के कार्यों की समीक्षा की रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में टीवी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ को टीवी मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत किए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की।                  मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में कार्य करने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा है कि राज्य में टीबी के मरीजों की जांच के लिए व्यापक स्तर पर जांच शिविर लगाये जायें। जिसमें जांच के दौरान मिलने वाले टीबी के मरीजों का त्वरित ईलाज किया जाए। इसके लिए प्रत्येक गांव और शहरों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने टीबी मरीजों के जांच के लिए सभी जरूरी उपकरणों एक्स-रे मशीन एवं रेडियोग्राफरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने कहा है।                 विकासशील ने मरीजों की शीघ्र पहचान कर ईलाज शुरू किया जाना चाहिए एवं मरीजों को स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत पोषण आहार एवं पौष्टिक सामग्री हेतु निर्धारित राशि तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत जो गांव और ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त होती है। इसके बारे में गांव में होने वाली ग्राम सभा में लोगों को बताया जाना चाहिए। इसी तरह से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की घर-घर जाकर जांच की जाए। महिलाओं के बीपी, वजन, हिमोग्लोबिन इत्यादि की जांच की जाए। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को एफआरयू में रेफर किए जाए।                  मुख्य सचिव ने बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग की जाए। सभी आंगनबाड़ी, स्कूलों में हर बच्चें की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। रोग युक्त पाए जाने बच्चों को बड़े अस्पतालों में ईलाज के लिए भेजा जाए। अस्पतालों में ईलाज करा रहे बच्चों की टैªकिंग की जाकर उनके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग कर समुचित उपचार दिया जाए। सभी शिशुओं को जरूरी टीके लगाए जाये। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्य में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

छत्तीसगढ़ में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव; सरकार ने बिछाया रेड कारपेट

छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए बिछा रेड कारपेट, 9,580 करोड़ रुपये के मिले प्रस्ताव इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का न्योता आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह  रायपुर  छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए ‘रेड कारपेट’ बिछा हुआ है।  कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गो सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए ₹4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।  फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹1,000 करोड़ के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे। सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है।  सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹528 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमशः लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे। हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें गूगल इंडिया, आईबीएम, पॉलीकैब इंडिया, पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर  रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की। इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुऋतु सेन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारीगण शामिल थे।

जनभागीदारी के दम पर हरियाली की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ रायपुर,    प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है। हरियाली से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है। शहरों को मिल रही हरित पहचान तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं। जल संरक्षण बना जनआंदोलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है। नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे। धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। •  डॉ. दानेश्वरी संभाकर     उपसंचालक, जनसंपर्क