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छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी पर सख्ती, तहसील की सहायक ग्रेड-02 को कलेक्टर ने किया सस्पेंड

कोरबा. जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दंडाधिकारी कटघोरा के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें तहसील कार्यालय कटघोरा में नकल जारी करने के एवज में आवेदक किशन कुमार से अवैध राशि की मांग किये जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के समर्थन में एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की गई थी। मामले की जांच और परीक्षण के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा निर्धारित किया गया है।

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना रायपुर, प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है। सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला             योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी – गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।  केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना         केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है। पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प           मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया। ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी           ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी – जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण          पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके। 1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ           योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।  उप मुख्यमंत्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी  मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

स्कूल बसों की जांच में बड़ा खुलासा, जगदलपुर के 44 वाहन जांच से रहे नदारद

जगदलपुर. स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का विशेष जांच अभियान तेज हो गया है. परिवहन, शिक्षा विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम निजी स्कूल वाहनों की जांच कर रही है. 20 स्कूलों के 110 वाहनों की जांच का लक्ष्य तय किया गया था. लेकिन निर्धारित समय में केवल 66 वाहन ही जांच के लिए पहुंचे. 44 वाहन जांच प्रक्रिया से पूरी तरह गायब रहे. इस लापरवाही पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. आरटीओ डीसी बंजारे ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा..अनुपस्थित स्कूलों और वाहनों की सूची तैयार कर ली गई है. अब संबंधित स्कूल संचालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी है. वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. प्रशासन ने सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. आने वाले दिनों में जांच अभियान और तेज किया जाएगा.

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर पीवीटीजी गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में बढ़ी मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या रायपुर 'हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है। ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का लिया गया निर्णय              छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी। संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर आगे बढ़ रहा वन विभाग          वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है। चार वर्षों में बढ़ी हॉर्नबिल की आबादी         उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका         हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा नया आकर्षण         प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार         हॉर्नबिल सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन         रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है। वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता का केंद्र          यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ भारतीय विशाल गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। संरक्षण, विकास और पर्यटन का सफल संगम         विशेषज्ञों के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में की जा रही यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से संरक्षण आधारित आजीविका और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हॉर्नबिल सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति प्राप्त होगी। मोबाइल नंबर – 7976688165, 7566510937 वेबसाइट – : www.udantisitanaditigerreserve.in पर पर्यटक, संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान राष्ट्र की प्रेरणा का अमर स्रोत: CM विष्णुदेव साय

वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान राष्ट्र की प्रेरणा का अमर स्रोत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित केनाल लिंकिंग रोड पर वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी दुर्गावती का अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उनका जीवन राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी दुर्गावती का शौर्य और त्याग आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ है। उनकी गौरवगाथा हमें विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा अपने महान नायकों और गौरवशाली इतिहास का स्मरण करना अत्यंत आवश्यक है। जो समाज अपने इतिहास और विरासत को विस्मृत कर देता है, उसका भविष्य भी संकटग्रस्त हो जाता है, जबकि जो समाज अपने महापुरुषों को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद रखता है, उसका भविष्य सदैव उज्ज्वल होता है। मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुगल साम्राज्य की विशाल सेना के सामने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। अंतिम क्षण तक संघर्ष करते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा वीरगति को प्राप्त हुईं। उनका बलिदान भारतीय इतिहास में साहस और स्वाभिमान के अप्रतिम अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश "विकास भी, विरासत भी" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। विकास की यात्रा तभी सार्थक होती है, जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक चेतना और महान विभूतियों के योगदान को भी समान रूप से संरक्षित करें। रानी दुर्गावती ने जिस राष्ट्रचेतना, स्वाभिमान और संघर्ष की भावना का संचार किया, वह आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक भूलन सिंह मरावी, डॉ. नंदकुमार साय, रायपुर नगर निगम महापौर श्रीमती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

सांप के काटने के बाद डायल-112 की फुर्ती आई काम, नारायणपुर में समय रहते बची युवक की जान

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के भरण्डा गांव में धर्मांतरण को लेकर विवाद ने तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है. मामला बढ़ने पर पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. बताया जा रहा है कि 26 मतांतरित परिवारों ने गांव छोड़ने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है. इन परिवारों का कहना है कि उन्हें पारंपरिक रीति-रिवाज अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. वहीं आदिवासी ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं का सम्मान नहीं किया जा रहा. तनाव के दौरान कुछ समय के लिए सड़क भी जाम कर दी गई. प्रशासन ने दोनों पक्षों से चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी. हालात को देखते हुए पुलिस लगातार गांव में गश्त कर रही है. अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है.

अब नहीं चलेगा प्रेशर हॉर्न! बिलासपुर पुलिस की सख्ती, मॉडिफाइड साइलेंसर वालों पर कार्रवाई

बिलासपुर. बिलासपुर यातायात पुलिस ने प्रेशर हॉर्न, हूटर और मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ विशेष अभियान चलाया. अभियान के दौरान 20 बसों सहित कई वाहनों की जांच की गई, जिनमें नियमों के विपरीत लगे प्रेशर हॉर्न और अन्य उपकरण पाए गए. नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई, जबकि गंभीर मामलों में प्रकरण तैयार कर न्यायालय भेजा गया है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अवैध हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वाले दुकान संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. यातायात पुलिस का कहना है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा. जगदलपुर शहर के प्रमुख मार्गों में तेज व फर्राटेदार मोडिफाइड साइलेंसर लगाकर लोगों को डराने के साथ ही ध्वनि प्रदूषण कर लोगों को परेशान करने वाले ऐसे कई वाहनों के खिलाफ 2 साल से कड़ी कार्यवाही किया जा रहा था। इस कार्यवाही के दौरान पुलिस ने 40 के लगभग प्रेशर हॉर्न व 312 मोडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ आज कार्यवाही करते हुए सभी के ऊपर से बुलडोजर चलाकर उसे नष्ठ कर दिया गया। इस सामान की बाजार में अनुमानित कीमत 30 लाख रुपये के लगभग बताई जा रही है। बता दे कि आजकल के युवा वर्ग के द्वारा कंपनी की ओर से दुपहिया वाहनों में लगे साइलेंसर को निकाल कर बाजार से महंगे दामों पर अलग अलग तरह की आवाज करने वाली साइलेंसर को लगाने के साथ ही हाई स्पीड की प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल किया जा रहा था। युवकों के द्वारा अभी शहर के मेन रोड़ में तो कभी, गोलबाजार, दंतेश्वरी मंदिर के सामने, धरमपुरा, आड़ावाल व एसपी कार्यालय के सामने आए दिन रात के अंधेरो में तो कभी दिन में हाई स्पीड से इसका उपयोग करते हुए अपनी वाहनों को फर्राटे से दौड़ाते हुए दिखाई देते थे। 

दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

एल-नीनो की चुनौती को अवसर में बदलें किसान- कृषि विभाग दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का आधार रायपुर प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।          कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं। दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन          राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें         कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है। अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह           कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।          कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

82 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, स्वच्छता कर्मियों एवं हितधारकों को दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण

रायपुर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायगढ़ में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायगढ़ के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत नगर निगम ऑडिटोरियम, रायगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।   पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान राज्य सलाहकार मती मोनिका सिंह एवं  पुरुषोत्तम पंडा ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं सतत ग्रामों के निर्माण में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा सभी ग्राम पंचायतों को नियमों के अनुरूप कार्य करना आवश्यक होगा। कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर प्रशिक्षण सत्र में घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को 4-वे कचरा पृथक्करण प्रणाली की जानकारी दी गई, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी अपशिष्ट तथा घरेलू खतरनाक अपशिष्ट को अलग-अलग संग्रहित करने एवं उनके सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण करने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल बनता है। ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण, परिवहन एवं अंतिम निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कचरे को खुले में फेंकना, जलाना अथवा भूमि में दबाना नियमों के विरुद्ध है तथा ऐसे मामलों में जुर्माना सहित वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन और जनजागरूकता पर चर्चा  कार्यशाला में बल्क वेस्ट जेनरेटरों की पहचान एवं उनके पंजीयन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन की प्रक्रिया समझाई गई तथा बताया गया कि बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित निगरानी की जाएगी।  प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित करने, प्रत्येक परिवार को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करने तथा स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जनजागरूकता के माध्यम से ही स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रामों का निर्माण संभव है।  कार्यक्रम में मुख्य रसायनज्ञ  नवीन चंद्र मालवीय, वैज्ञानिक सु श्वेता खाखा, वैज्ञानिक  सतीश पटेल, पर्यावरण विभाग के अधिकारीगण, जिला पंचायत से एपीओ  वीरेंद्र सिंह राय, जिला सलाहकार (एसबीएम-जी)  अर्जुन मेहेर, विभिन्न जनपद पंचायतों की एसबीएम-जी टीम, सरपंच, सचिव एवं स्वच्छाग्रही बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

साय सरकार की बड़ी पहल, श्रमिक परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

साय सरकार की पहल से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगा बेहतर भविष्य, सरकार उठाएगी पढ़ाई का पूरा खर्च  अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 3 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित, निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री की सुविधा रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को राज्य के चयनित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक अध्ययन की सुविधा प्रदान की जाएगी। विशेष बात यह है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस, छात्रावास, भोजन, गणवेश, लेखन सामग्री तथा अन्य आवश्यक खर्चों का पूरा वहन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा किया जाएगा। इससे श्रमिक परिवारों को बच्चों की शिक्षा के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण में अध्ययन का अवसर प्राप्त होगा। प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और श्रमिक वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना भी इसी दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है, जिससे श्रमिकों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र एवं पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को श्रम विभाग के पोर्टल www.shramevjayate.cg.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया 22 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की सुविधा श्रम विभाग के पोर्टल, निकटतम श्रम कार्यालय, लोक सेवा केंद्र तथा श्रमेव जयते एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिससे अधिक से अधिक पात्र परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाएगी तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी।