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CM की समीक्षा बैठक में सख्ती, शिकायतों के निराकरण में लापरवाही पर तहसीलदार निलंबित

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से लिए जा रहे फीडबैक तथा विभागवार और जिलेवार प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से जिलों में शिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। सीएम का सख्त संदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों के कारण योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में लापरवाही या नागरिकों की समस्याओं के प्रति गंभीरता की कमी पूरे प्रशासन की छवि को प्रभावित करती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को यह समझना होगा कि जनता की समस्या का समाधान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिले और शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी अथवा लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। एक अधिकारी सस्पेंड समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया कि कबीरधाम जिले के पिपरिया तहसीलदार ने सीएम हेल्पलाइन में आई शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद तहसीलदार प्रमोद चंद्रवंशी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रमोद चंद्रवंशी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। सीएम की समीक्षा बैठक के तुरंत बाद राजस्व एवं आपदा विभाग के अवर सचिव धनंजय नेताम ने तहसीलदार के निलंबन का निर्देश जारी किया। लेटर में लिखा है कि निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कबीरधाम निर्धारित किया जाता है। इसके साथ ही उन्हें नियमानुसार भत्ते मिलते रहेंगें। 88.85 प्रतिशत का हो चुका निराकरण समीक्षा बैठक में बताया गया कि 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सीएम हेल्पलाइन पर कुल 2 लाख 31 हजार 850 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 2 लाख 5 हजार 996 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 25 हजार 854 शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार अब तक प्राप्त कुल शिकायतों में से 88.85 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने हेल्पलाइन के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पिछली समीक्षा में दिए गए निर्देशों पर भी अच्छा कार्य हुआ है। इस व्यवस्था को निरंतर बेहतर बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का निराकरण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिक को वास्तविक रूप से राहत मिले और वह समाधान से संतुष्ट हो।

सुसाइड केस में हाईकोर्ट का फैसला, 2009 के मामले में तीन अपीलकर्ताओं की सजा रद्द

बिलासपुर   छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने वर्ष 2009 के एक आत्महत्या उकसाने के मामले में तीन जीवित अपीलकर्ताओं की सजा को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है. अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि अभियुक्तों की मंशा मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने की थी।  न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने निचली अदालत के अप्रैल 2013 के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार किया, जिसमें अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 34 के तहत 10 साल के कठोर कारावास और ₹500 के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।  यह मामला अंबिकापुर का है, जहाँ 18 अप्रैल 2009 को एक महिला ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना से ठीक पांच दिन पहले (13 अप्रैल 2009 को) महिला और उसके होने वाले पति के साथ अभियुक्तों (जो महिला के दूर के रिश्तेदार थे) ने मारपीट की थी, क्योंकि उन्हें दोनों के एक साथ होने पर आपत्ति थी।  अपीलकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया कि केवल मारपीट की घटना से उकसावे का अपराध सिद्ध नहीं होता और कथित सुसाइड नोट से जुड़ी हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट को भी अदालत में कानूनी रूप से साबित नहीं किया गया था।  मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने माना कि साक्ष्यों से मारपीट की घटना तो साबित होती है, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत अपराध गठित करने के लिए आवश्यक आपराधिक मंशा (इरादा) साबित नहीं हुई।  अदालत ने टिप्पणी की कि घटना आत्महत्या से लगभग पांच दिन पहले हुई थी और रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ नहीं लाया गया है जिससे यह पता चले कि अभियुक्तों ने महिला को खुदकुशी के लिए उकसाने के मकसद से मारपीट की थी।  सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने निचली अदालत के 2013 के सजा के आदेश को निरस्त कर दिया और अपीलकर्ताओं को बरी कर दिया. साथ ही, अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 481 के प्रावधानों के तहत उनके जमानत मुकले (बेल बॉन्ड) को छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी रखने का निर्देश दिया है।   

सात समंदर पार से आया दूल्हा, छत्तीसगढ़ की लड़की से की लव मैरिज

जांजगीर-चांपा  वो कहते हैं न अगर प्यार सच्चा हो तो दूरियां मायने नहीं रखतीं। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की बेटी ने इसे सच साबित कर दिखाया है। जिले के पामगढ़ विकासखंड के ग्राम भुईगांव की रहने वाली क्रिस्टीना नथेनियल ने नीदरलैंड के युवक क्रिस्टीयान एंड्रियश वरबूम से लव मैरिज की है। विवाह का प्रमाण पत्र जारी होने के बाद यह अनोखी शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। कौन हैं दूल्हा-दुल्हन? विवाह प्रमाण पत्र के अनुसार दूल्हे का नाम क्रिस्टीयान एंड्रियश वरबूम है, जिनकी उम्र 32 वर्ष है और वे नीदरलैंड के निवासी हैं। उनके पिता का नाम विलेम डीर्क वरबूम है। वहीं दुल्हन क्रिस्टीना नथेनियल हैं, जिनकी उम्र 25 वर्ष है। वे जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड के ग्राम भुईगांव की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम हनोल नथेनियल है। जिला कलेक्टर कार्यालय में पूरी हुई शादी की रस्म दोनों ने जांजगीर-चांपा जिला कलेक्टर कार्यालय में पहुंचकर विवाह की औपचारिकताएं पूरी कीं। विवाह अधिकारी प्रमोद गुप्ता के समक्ष तीन गवाहों की मौजूदगी में धारा-5 के तहत घोषणा की गई, जिसके बाद विवाह संपन्न हुआ। जिला विवाह अधिकारी ने विवाह प्रमाण पत्र जारी करते हुए इस विवाह को वैध घोषित किया। कार्यालय में दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई, जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। नीदरलैंड में नौकरी के दौरान शुरू हुई प्रेम कहानी जानकारी के अनुसार ग्राम भुईगांव की रहने वाली क्रिस्टीना नीदरलैंड में नौकरी करती हैं। वहीं उनकी मुलाकात क्रिस्टीयान एंड्रियश वरबूम से हुई थी। मुलाकात के बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई और समय के साथ यह रिश्ता प्यार में बदल गया। एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने के बाद दोनों ने जीवनसाथी बनने का फैसला किया। इस फैसले में दोनों परिवारों का भी पूरा समर्थन मिला और अब यह शादी पूरे जिले में मिसाल बन गई है। गांव में चर्चा, नए जीवन की शुरुआत भुईगांव जैसे छोटे से गांव की बेटी का नीदरलैंड के युवक से विवाह स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। इस रिश्ते में एक ओर छत्तीसगढ़ का ग्रामीण परिवेश है, तो दूसरी ओर यूरोप के नीदरलैंड की पृष्ठभूमि। भाषा, रहन-सहन और पारिवारिक परंपराओं में अंतर के बावजूद दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया है। विवाह के बाद दोनों किस देश में रहेंगे और अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत कहां से करेंगे, यह भी फिलहाल स्पष्ट नहीं है। सीमाओं से परे रिश्ते की नई कहानी आज अंतरराष्ट्रीय संपर्क और संवाद के बढ़ते अवसरों के बीच अलग-अलग देशों के लोगों के बीच रिश्ते जुड़ना असामान्य नहीं रहा है। ऐसे विवाह में एक-दूसरे की संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और जीवनशैली को समझना भी महत्वपूर्ण होता है। भुईगांव की क्रिस्टीना और नीदरलैंड के क्रिस्टीयान का विवाह इसी वजह से चर्चा में है। अब दोनों के सामने आपसी समझ, विश्वास और सम्मान के साथ साझा भविष्य संवारने का नया अध्याय है।

ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा केस में बड़ी कार्रवाई, जमीन-दुकान और बैंक FD जब्त करने का आदेश

 रायपुर  ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा एप (Online Satta) के जरिये सट्टा संचालित करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में मुख्य आरोपित बाबू उर्फ गुलशन खेमानी की करीब 1.42 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का आदेश न्यायालय ने दिया है। कुर्क की गई संपत्तियों में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र स्थित जमीन, व्यावसायिक दुकान और बैंक में जमा राशि शामिल है। यह कार्रवाई गंज थाना पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) की वित्तीय जांच के आधार पर की गई है। कॉल सेंटर और फर्जी खातों से चलता था सट्टा पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 को ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले गिरोह का राजफाश किया गया था। मामले में मुख्य आरोपित समेत 29 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया कि गिरोह कॉल सेंटर, मोबाइल नंबरों और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से सट्टे का संचालन करता था। सट्टे से मिलने वाली रकम दूसरे लोगों के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी और फिर अपने खातों में स्थानांतरित की जाती थी। इसके बदले सहयोगियों को कमीशन दिया जाता था। इस प्रकरण में पहले ही करीब 1.20 करोड़ रुपये मूल्य की सामग्री और वाहन जब्त किए गए थे। छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र तक फैली है संपत्ति वित्तीय जांच में आरोपित से जुड़ी संपत्तियों की पहचान के बाद पुलिस ने कोर्ट में कुर्की का आवेदन प्रस्तुत किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायपुर ने 16 अक्टूबर को इस पर आदेश पारित किया। आदेश के अनुसार कुर्क संपत्तियों में महासमुंद के ग्राम अरंड में 1.78 लाख रुपये की कृषि भूमि, रायपुर के देवपुरी में 23 लाख रुपये का भूखंड, जोरा पारा में 2.50 लाख रुपये का भूखंड, महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ में 74 लाख रुपये की व्यावसायिक दुकान और बैंक आफ इंडिया के एफडी खाते में दर्ज 40.50 लाख रुपये की राशि शामिल है। पुलिस अब अन्य जुड़ी संपत्तियों की भी जांच कर रही है।

अनिल अग्रवाल का बड़ा ऐलान, वेदांता कर्मचारियों को मिलेगी 10% एक्स्ट्रा सैलरी

कोरबा  वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने त्योहारों से पहले समूह के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने समूह के करीब एक लाख कर्मचारियों को वार्षिक वेतन का 10 प्रतिशत अतिरिक्त चेयरमैन ग्रांट के रूप में देने की घोषणा की है। इस संबंध में कर्मचारियों के नाम जारी पत्र में उन्होंने महंगाई के बीच आर्थिक संबल देने की बात कही है। बालको और वेदांता पावर प्लांट के हजारों कर्मचारियों को फायदा कोरबा स्थित भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड बालको में करीब 860 नियमित कर्मचारी और 5,300 ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। वहीं, सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में करीब 400 ठेका कर्मचारी कार्यरत हैं। चेयरमैन की इस घोषणा से इन सभी कर्मचारियों सहित समूह के एक लाख कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। त्योहारों से पहले मिले इस अतिरिक्त ग्रांट से कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। उत्पादन क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य वर्तमान में बालको में सालाना करीब पांच लाख टन एल्युमिनियम उत्पादन होता है। कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 10 लाख टन सालाना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए संयंत्र के विस्तार का काम जारी है। उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। सरकारी राजस्व में बड़ा योगदान कंपनी ने पिछले एक दशक में राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व में करीब 29,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। वेदांता समूह लगातार क्षेत्र के विकास और कर्मचारियों के कल्याण के लिए काम कर रहा है।

झीरम घाटी हत्याकांड: फांसी की सजा की पुष्टि के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा मामला

 बिलासपुर  झीरम घाटी हत्याकांड में 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंच गया है। जगदलपुर स्थित राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। अब इस सजा की पुष्टि पर हाई कोर्ट को निर्णय लेना है। फिलहाल सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। 101 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 5 सितंबर 2026 को मामले के 10 आरोपितों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर को सजा सुनाई गई। करीब 13 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी 10 जीवित आरोपियों को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। मृत्युदंड की पुष्टि जरूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर हाई कोर्ट की पुष्टि अनिवार्य होती है। इसी प्रक्रिया के तहत विशेष अदालत ने मामला हाई कोर्ट भेजा है। हाई कोर्ट की खंडपीठ मामले के अभिलेखों और विशेष अदालत के फैसले की समीक्षा करेगी। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया था। हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा के बाद ही फांसी की सजा पर अंतिम मुहर लगेगी। 2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा शामिल थे। अब हाई कोर्ट में तय होगी आगे की प्रक्रिया अब मृत्युदंड की पुष्टि के मामले में हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रहती है या नहीं।

CGPSC घोटाले में सोनवानी को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने PMLA के तहत जमानत देने से किया इनकार

रायपुर  CGPSC एग्जाम 2020-2021 घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस के आरोपी आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि, ईडी की ओर से दिए दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। जानलेवा स्थिति या हिरासत में जरूरी इलाज नहीं मिलने के प्रमाण के बिना PMLA की विशेष छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता। CGPSC घोटाले में ईडी ने टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ईडी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के लिए आर्थिक लेन-देन किया गया। एजेंसी ने करीब 3.45 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है। इसमें 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपए जुटाने और रकम को अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाने का आरोप भी शामिल है। मेडिकल आधार पर जमानत की मांग खारिज सोनवानी की ओर से दलील दी गई कि उन्हें हृदय संबंधी परेशानी के कारण 20 अगस्त 2026 को अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई थी। उनके वकील ने उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत मांगी। ईडी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या एम्स में इलाज कराया जा सकता है। इसके अलावा सह आरोपियों को जमानत मिलने का तर्क भी हाईकोर्ट ने नहीं माना। 33 से ज्यादा अभ्यर्थियों से 3 करोड़ वसूली का आरोप जांच एजेंसी ED के अनुसार CG-PSC की 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में 33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपए जुटाए गए। एजेंसी ने कुल अपराध से अर्जित राशि लगभग 3.45 करोड़ रुपए बताई है। आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन में मदद के बदले रकम ली गई। 2021 की भर्ती में 1.29 लाख अभ्यर्थी हुए थे शामिल बता दें कि, साल 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा के लिए, 509 साक्षात्कार के लिए पहुंचे और 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। सीबीआई ने जनवरी 2026 में दाखिल आरोपपत्र में 29 लोगों को आरोपी बनाया था। अब जमानत के लिए जा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट सीबीआई इस मामले में पहले ही आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ईडी की अभियोजन शिकायत विशेष पीएमएलए अदालत में लंबित है और वित्तीय लेन-देन तथा अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। सोनवानी आगे सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सकते हैं या परिस्थितियों में बदलाव होने पर कानून के अनुसार फिर जमानत मांग सकते हैं। परिवार की परिभाषा से हटाया भतीजा, पर्चा लीक कराने लिए 45 लाख ईडी का आरोप है कि भर्ती नियमों में 14 जुलाई 2021 को संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजा’ शब्द हटाया गया, जिससे सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी के क्रमश: डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन का रास्ता बना। ये आरोप जांच एजेंसी के हैं, जिनका अंतिम निर्णय ट्रायल में होना है। इसके अलावा ईडी ने आरोप लगाया कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति को सीएसआर के नाम पर 45 लाख रुपए दिए गए। एजेंसी का दावा है कि यह रकम कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने के बदले दी गई थी।

CG High Court Holidays 2027: कोर्ट की छुट्टियों का कैलेंडर जारी, रजिस्ट्री ऑफिस का शेड्यूल अलग

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साल 2027 के लिए छुट्टियों की लिस्ट जारी कर दी है। हाईकोर्ट ने पूरे साल की छुट्टियों, गर्मी और सर्दी की छुट्टी की तारीखों का कैलेंडर जारी किया है। गर्मी और सर्दी की छुट्टी की डेट तय जारी लिस्ट के मुताबिक, गर्मी की छुट्टी 18 मई से 11 जून तक रहेगी। इस दौरान कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी, कोर्ट बंद रहेगा, लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस खुला रहेगा। वहीं सर्दी की छुट्टी 23 से 31 दिसंबर तक रहेगी। सर्दी की छुट्टी के दौरान रजिस्ट्री ऑफिस 20 से 24 दिसंबर तक खुला रहेगा, जबकि 27 से 31 दिसंबर तक बंद रहेगा। कौन-कौन से त्योहारों पर रहेगी छुट्टी साल भर के बड़े त्योहारों पर भी छुट्टी रहेगी। लिस्ट के अनुसार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस, 6 मार्च को महाशिवरात्रि, 10 मार्च को ईद-उल-फितर, 26 मार्च को गुड फ्राइडे, 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती और 15-16 अप्रैल को रामनवमी की छुट्टी रहेगी। इसके अलावा 17 मई को ईद-उल-जुहा, 16 जून को मुहर्रम, 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस, 17 अगस्त को रक्षाबंधन, 25 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी, 3 सितंबर को हरतालिका तीज और 4 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर कोर्ट बंद रहेगा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी रहेगी। शनिवार-रविवार का क्या रहेगा शेड्यूल छुट्टियों की लिस्ट के अनुसार महीने के दूसरे और तीसरे शनिवार को हाईकोर्ट और रजिस्ट्री ऑफिस दोनों बंद रहेंगे। बाकी शनिवार को कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस खुला रहेगा। हालांकि 6 नवंबर और 4 दिसंबर 2027 को शनिवार होने के बाद भी वर्किंग डे रहेगा, उस दिन कोर्ट खुलेगा। साल के सभी रविवार को हाईकोर्ट और रजिस्ट्री ऑफिस में छुट्टी रहेगी। ये नियम गर्मी और सर्दी की छुट्टी के दौरान पड़ने वाले रविवार पर भी लागू होगा। नोटिफिकेशन में बताया गया है कि चांद दिखने पर मनाए जाने वाले त्योहार मिलाद-उन-नबी, ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा और मुहर्रम की डेट में बदलाव हो सकता है। अगर राज्य सरकार डेट में बदलाव करती है तो चीफ जस्टिस की मंजूरी के बाद नई डेट लागू होगी।

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का लाभ, प्रेमिन के लिए सिलाई मशीन बनी रोजगार का सहारा

महतारी वंदन योजना से प्रेमिन के सपनों को मिले पंख, सिलाई मशीन बनी आत्मनिर्भरता का आधार हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से शुरू किया सिलाई का काम, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बनीं सहभागी महतारी वंदन योजना की 32 किस्तों से मिले 32 हजार रुपये ने बढ़ाया आत्मविश्वास, आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ाए कदम रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार शुरू करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत करने का अवसर भी प्रदान कर रही है। बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड अंतर्गत ग्राम उफरा निवासी श्रीमती प्रेमिन वर्मा इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग कर सिलाई मशीन खरीदी और स्वरोजगार की शुरुआत की। साथ ही अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए नियमित बचत भी कर रही हैं। श्रीमती प्रेमिन वर्मा बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही बड़ी चुनौती थी। एक मां होने के नाते उन्हें सबसे अधिक चिंता अपनी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य की रहती थी। वह चाहती थीं कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आर्थिक परेशानियां उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। लेकिन परिवार की सीमित आय के कारण भविष्य के लिए बचत कर पाना मुश्किल था। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। प्रेमिन को अब तक 32 किस्तों के माध्यम से कुल 32 हजार रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित रखने के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटी के भविष्य को सुरक्षित बनाने में उपयोग करने का निर्णय लिया। सिलाई मशीन ने खोले स्वरोजगार के नए रास्ते प्रेमिन वर्मा ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि की बचत कर एक सिलाई मशीन खरीदी। उनके लिए यह सिलाई मशीन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के सपने को साकार करने का माध्यम है। अब वह घर पर सिलाई का कार्य कर आमदनी अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे रही हैं। प्रेमिन बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी आर्थिक जरूरतों के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब स्वयं की मेहनत से आय अर्जित करने पर आत्मविश्वास बढ़ा है। सिलाई के काम ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाने का अवसर दिया है। बेटी के भविष्य के लिए हर महीने 500 रुपये की बचत स्वरोजगार के साथ प्रेमिन ने अपनी बेटी के भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। वह महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि में से प्रतिमाह 500 रुपये बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त बचत हो सके। प्रेमिन का मानना है कि छोटी-छोटी नियमित बचत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है। आज वह अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग महिलाओं को वर्तमान की जरूरतों के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए भी सक्षम बना सकता है। आर्थिक सहायता ने दिया आत्मविश्वास और सम्मान से जीने का संबल श्रीमती प्रेमिन वर्मा कहती हैं कि पहले आर्थिक परेशानियों और बेटी के भविष्य को लेकर मन में चिंता बनी रहती थी, लेकिन महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वह न केवल नियमित बचत कर पा रही हैं, बल्कि स्वयं के रोजगार से परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं। उनका कहना है कि मेरे लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद है। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता ने मुझे बचत करने और अपना काम शुरू करने का हौसला दिया है। अब मैं अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए भी पैसे जमा कर पा रही हूं। प्रेमिन वर्मा की सफलता की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता, सही योजना और दृढ़ संकल्प से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकती हैं। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को स्वरोजगार और बेटी की शिक्षा के लिए बचत में उपयोग कर उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।

पीएम किसान सम्मान निधि बनी मेघमणि साहू की खेती का सहारा, बीज-खाद और कृषि कार्यों के खर्चों में मिली राहत

रायपुर खेती-किसानी में समय पर बीज, खाद और अन्य जरूरी सामग्रियों की व्यवस्था करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम सलखन निवासी किसान  मेघमणि साहू भी इस योजना का लाभ लेकर खेती के खर्चों का बेहतर प्रबंधन कर रहे हैं। उनके लिए सम्मान निधि की राशि कृषि कार्यों के दौरान आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने में सहायक बन रही है।  मेघमणि साहू लगभग 3 एकड़ 25 डिसमिल कृषि भूमि पर खेती करते हैं। खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। फसल की बुआई से लेकर अन्य कृषि कार्यों तक उन्हें बीज, खाद और विभिन्न आवश्यक सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। इन कार्यों के लिए समय पर राशि उपलब्ध होना जरूरी होता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत उनके बैंक खाते में आने वाली सहायता राशि से उन्हें कृषि संबंधी खर्चों की व्यवस्था करने में सुविधा मिल रही है। सम्मान निधि से खेती के जरूरी खर्चों में मिल रही मदद  मेघमणि साहू बताते हैं कि खेती के दौरान कई छोटे-बड़े खर्च सामने आते हैं। फसल की बुआई के समय बीज और खाद की व्यवस्था करनी होती है, वहीं फसल की देखभाल के लिए भी विभिन्न सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली राशि इन जरूरतों को पूरा करने में उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। प्रत्येक किस्त में मिलने वाली 2 हजार रुपये की राशि से किसानों को अपनी कृषि संबंधी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की सुविधा मिलती है। किसानों को आर्थिक संबल दे रही सम्मान निधि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से पात्र किसानों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सीधे बैंक खाते में राशि हस्तांतरित होने से किसानों को सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल हुई है। यह राशि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि कार्यों के दौरान आवश्यक खर्चों की व्यवस्था करने में सहायक होती है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत किसान  मेघमणि साहू की यह ‘सेवा की कहानी’ दर्शाती है कि खेती के लिए मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता किसानों के दैनिक कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना खेती के खर्चों का प्रबंधन करने और कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने का उपयोगी माध्यम बनी है।