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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर दी बधाई

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री  मोदी जी का नहीं, बल्कि पूरे 140 करोड़ भारतवासियों का सम्मान, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्व मंच पर सशक्त होती उसकी भूमिका का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी कूटनीति ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है तथा मित्र देशों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व समुदाय में अपनी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ वैश्विक शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए निरंतर योगदान देता रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद, विधायकगण होंगे शामिल

रायपुर  पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. मती तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच में आयोजित होगा।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्म एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित   सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की  सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. मती तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा। पद्मविभूषण मती तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया। 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण मती तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया। प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं। पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है। उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्म (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजस्व विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, तकनीक आधारित नवाचारों तथा नागरिकों एवं किसानों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नागरिकों को बिना अनावश्यक कार्यालयीन आवागमन के गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बैठक में डिजिटल किसान किताब एवं भूमि संबंधी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें तहसील अथवा पटवारी कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन एवं किसानों के जीवन से जुड़ा विभाग है, इसलिए शासन के सभी सुधारों एवं नवाचारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों का त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरबीसी 6-4 की ऑनलाइन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसके लागू होने पर आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध होगी। उन्होंने अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से संपादित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष बल देते हुए सीमांकन प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने तथा समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों की जिला-वार नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नकल शाखा को पूर्णतः ऑनलाइन करने के लिए इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया जाएगा। इससे प्रमाणित अभिलेखों का निर्गमन कुछ ही मिनटों में संभव होगा तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित ग्रामों, विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राजस्व अभिलेख तैयार हो सकें, भूमि अभिलेख अद्यतन हों तथा स्थानीय नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि एवं नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री एवं एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह एवं विश्वासपूर्ण राजस्व व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और इसे और अधिक प्रभावी बनाना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व सेवाएं केंद्रीकृत एवं पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर नागरिक हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए। बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली, रेवेन्यू बोर्ड एवं संभागीय आयुक्त कार्यालयों में ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था, नक्शा डिजिटाइजेशन, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन तथा भू-अर्जन से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धमतरी, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में नक्शा परियोजना का पायलट कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक एवं अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, तहसीलों के अधोसंरचना विकास तथा तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक, राजस्व विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, विशेष सचिव मती इफ़्फत आरा, संचालक भू-अभिलेख  विनीत नंदनवार, संयुक्त सचिव  अरविन्द एक्का सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

रायपुर      ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0श् लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।          मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।        वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है। अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना          पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है। उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी       यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है। रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता       वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है। जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर       वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन       वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी। वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल    छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 को

रायपुर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मा…h

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के साझा प्रयासों को और सशक्त बनाने पर दिया गया जोर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री  राधाकृष्ण किशोर ने सौजन्य भेंट की।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य ही नहीं हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जशपुर क्षेत्र का झारखंड से वर्षों पुराना आत्मीय जुड़ाव रहा है, जिसने दोनों राज्यों के लोगों के बीच विश्वास और निकटता को निरंतर मजबूत किया है। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा परस्पर अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।

गैर-मुस्लिम महिला से शादी के लिए वक्फ बोर्ड रजिस्ट्रेशन जरूरी? नियमों को लेकर बड़ा अपडेट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में फर्जी निकाह रोकने छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने नए नियम बनाए हैं. गैर मुस्लिम महिला से निकाह के लिए अब वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलाना पर कार्रवाई हो सकती है. वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा, नए नियम के तहत अब वक्फ बोर्ड से रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा पाएंगे. अगर कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है तो पहले वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा. इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. डॉ. सलीम राज ने कहा, बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. केवल रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा सकेंगे. वक्फ बोर्ड का कहना है कि इससे फर्जी पहचान, दस्तावेज छिपाकर विवाह कराने और विवादित मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी. हर निकाह का पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा. निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड के माध्यम से जारी किया जाएगा. वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली हैं, इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है.

मुख्य सचिव की बैठक में बड़ा फैसला, बैकलॉग के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती के निर्देश

रायपुर. मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों की भर्ती के लिए शीघ्र कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने शासन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों के अंतर्गत भू-अर्जन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव आर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव भुवनेश यादव सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।

फर्जी मार्कशीट से नौकरी का खुलासा, रायपुर में GST विभाग के दो कर्मचारी हुए बर्खास्त

रायपुर. फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी विभाग ने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए। दोनों कर्मचारियों पर वर्ष 2013 की भृत्य भर्ती में कक्षा आठवीं की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी हासिल करने का आरोप था। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में हुई भृत्य भर्ती के दौरान दोनों अभ्यर्थियों ने कक्षा आठवीं की अंकसूची में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए थे। इसी मेरिट के आधार पर उनका चयन हुआ। बाद में दोनों की पदोन्नति होकर सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति हो गई। मामले में किशोर पटेल का नाम उस समय भी चर्चा में आया था, जब वह कर्मचारी संघ का नेता बन गया था। बताया जाता है कि तत्कालीन विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के समन्वय कक्ष में पदस्थापना के दौरान टाइपिंग कार्य को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद किशोर पटेल ने कर्मचारी संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी। यह मामला मीडिया में भी प्रमुखता से सामने आया था। बलौदाबाजार के कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि किशोर पटेल और भागवत पटेल की कक्षा आठवीं की अंकसूचियां फर्जी हैं। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित मिडिल स्कूल की परीक्षा परिणाम पंजी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में सामने आया कि समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। आरोप है कि इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रधान पाठक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। शिकायत मिलने पर जीएसटी आयुक्त की ओर से अंकसूचियों के सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था। उस समय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में अंकसूचियों को सही बताया था। हालांकि बाद में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और अंततः दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित करने और कथित संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल बर्खास्तगी ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने का भी प्रावधान है। फिलहाल इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जब्त मवेशियों को सुपुर्दगी देने के अधिकार पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अहम फैसला जल्द

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने गोवंश की जब्ती और उनकी अंतरिम कस्टडी को लेकर एक कानूनी सवाल पर सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट यह तय करने जा रहा है कि क्या गोवंश तस्करी या अवैध परिवहन के मामलों में दर्ज एफआईआर के बाद, ट्रायल आपराधिक अदालतों को जब्त मवेशियों को अंतरिम कस्टडी में सौंपने का अधिकार है, या विशेष कानून के चलते इस पर कोई पाबंदी है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने इस संवेदनशील और जटिल कानूनी विषय पर अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली को न्याय मित्र नियुक्त किया है। साथ ही राज्य के महाधिवक्ता को भी कोर्ट में उपस्थित रहकर इस मामले में विशेष सहयोग देने के लिए कहा है। मामले किनअगली सुनवाई15 जुलाई को होगी। हाई कोर्ट ने 18 मार्च 2021 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न के उत्तर के लिए मामले को लार्जर बेंच को रेफर किया था। यदि पुलिस गोवंश से जुड़े किसी मामले में मवेशियों को जब्त करती है, तो क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट को उन मवेशियों को अंतरिम रूप से किसी को सौंपने का अधिकार है, या ‘छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004’ की विशेष धाराएं अदालत के इस अधिकार को पूरी तरह रोक देती हैं। 2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहम्मद वासिम कुरैशी के अधिवक्ता ऋषिकांत महोबिया ने कोर्ट को बताया, मूल मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रहा मुकदमा ट्रायल कोर्ट में पहले ही पूरा हो चुका है और उसे दोषमुक्त किया जा चुका है। इस लिहाज से व्यक्तिगत तौर पर इस याचिका में अब कुछ शेष नहीं बचा है। डिवीजन बेंच ने कहा, भले ही मुख्य आरोपी बरी हो चुका हो, लेकिन सिंगल जज द्वारा ‘लार्जर बेंच’ के सामने जो बुनियादी कानूनी सवाल भेजा गया है, उसका जवाब तय होना राज्य के अन्य सभी मामलों के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य के लिए स्थिति साफ हो सके। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने डिवीजन बेंच के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि यह विषय काफी महत्वपूर्ण कानूनी बारीकियों से जुड़ा है, इसलिए उन्हें इस केस का अध्ययन करने और अपनी तैयारी पूरी करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है, न्याय मित्र नौशीना आफरीन अली को पूरी याचिका, संलग्न दस्तावेजों और अब तक की सभी ऑर्डर शीट्स का एक पूरा सेट तत्काल उपलब्ध कराया जाए।