samacharsecretary.com

CGPSC घोटाले में सोनवानी को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने PMLA के तहत जमानत देने से किया इनकार

रायपुर  CGPSC एग्जाम 2020-2021 घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस के आरोपी आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि, ईडी की ओर से दिए दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। जानलेवा स्थिति या हिरासत में जरूरी इलाज नहीं मिलने के प्रमाण के बिना PMLA की विशेष छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता। CGPSC घोटाले में ईडी ने टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ईडी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के लिए आर्थिक लेन-देन किया गया। एजेंसी ने करीब 3.45 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है। इसमें 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपए जुटाने और रकम को अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाने का आरोप भी शामिल है। मेडिकल आधार पर जमानत की मांग खारिज सोनवानी की ओर से दलील दी गई कि उन्हें हृदय संबंधी परेशानी के कारण 20 अगस्त 2026 को अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई थी। उनके वकील ने उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत मांगी। ईडी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या एम्स में इलाज कराया जा सकता है। इसके अलावा सह आरोपियों को जमानत मिलने का तर्क भी हाईकोर्ट ने नहीं माना। 33 से ज्यादा अभ्यर्थियों से 3 करोड़ वसूली का आरोप जांच एजेंसी ED के अनुसार CG-PSC की 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में 33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपए जुटाए गए। एजेंसी ने कुल अपराध से अर्जित राशि लगभग 3.45 करोड़ रुपए बताई है। आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन में मदद के बदले रकम ली गई। 2021 की भर्ती में 1.29 लाख अभ्यर्थी हुए थे शामिल बता दें कि, साल 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा के लिए, 509 साक्षात्कार के लिए पहुंचे और 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। सीबीआई ने जनवरी 2026 में दाखिल आरोपपत्र में 29 लोगों को आरोपी बनाया था। अब जमानत के लिए जा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट सीबीआई इस मामले में पहले ही आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ईडी की अभियोजन शिकायत विशेष पीएमएलए अदालत में लंबित है और वित्तीय लेन-देन तथा अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। सोनवानी आगे सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सकते हैं या परिस्थितियों में बदलाव होने पर कानून के अनुसार फिर जमानत मांग सकते हैं। परिवार की परिभाषा से हटाया भतीजा, पर्चा लीक कराने लिए 45 लाख ईडी का आरोप है कि भर्ती नियमों में 14 जुलाई 2021 को संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजा’ शब्द हटाया गया, जिससे सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी के क्रमश: डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन का रास्ता बना। ये आरोप जांच एजेंसी के हैं, जिनका अंतिम निर्णय ट्रायल में होना है। इसके अलावा ईडी ने आरोप लगाया कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति को सीएसआर के नाम पर 45 लाख रुपए दिए गए। एजेंसी का दावा है कि यह रकम कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने के बदले दी गई थी।

CG High Court Holidays 2027: कोर्ट की छुट्टियों का कैलेंडर जारी, रजिस्ट्री ऑफिस का शेड्यूल अलग

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साल 2027 के लिए छुट्टियों की लिस्ट जारी कर दी है। हाईकोर्ट ने पूरे साल की छुट्टियों, गर्मी और सर्दी की छुट्टी की तारीखों का कैलेंडर जारी किया है। गर्मी और सर्दी की छुट्टी की डेट तय जारी लिस्ट के मुताबिक, गर्मी की छुट्टी 18 मई से 11 जून तक रहेगी। इस दौरान कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी, कोर्ट बंद रहेगा, लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस खुला रहेगा। वहीं सर्दी की छुट्टी 23 से 31 दिसंबर तक रहेगी। सर्दी की छुट्टी के दौरान रजिस्ट्री ऑफिस 20 से 24 दिसंबर तक खुला रहेगा, जबकि 27 से 31 दिसंबर तक बंद रहेगा। कौन-कौन से त्योहारों पर रहेगी छुट्टी साल भर के बड़े त्योहारों पर भी छुट्टी रहेगी। लिस्ट के अनुसार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस, 6 मार्च को महाशिवरात्रि, 10 मार्च को ईद-उल-फितर, 26 मार्च को गुड फ्राइडे, 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती और 15-16 अप्रैल को रामनवमी की छुट्टी रहेगी। इसके अलावा 17 मई को ईद-उल-जुहा, 16 जून को मुहर्रम, 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस, 17 अगस्त को रक्षाबंधन, 25 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी, 3 सितंबर को हरतालिका तीज और 4 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर कोर्ट बंद रहेगा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी रहेगी। शनिवार-रविवार का क्या रहेगा शेड्यूल छुट्टियों की लिस्ट के अनुसार महीने के दूसरे और तीसरे शनिवार को हाईकोर्ट और रजिस्ट्री ऑफिस दोनों बंद रहेंगे। बाकी शनिवार को कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस खुला रहेगा। हालांकि 6 नवंबर और 4 दिसंबर 2027 को शनिवार होने के बाद भी वर्किंग डे रहेगा, उस दिन कोर्ट खुलेगा। साल के सभी रविवार को हाईकोर्ट और रजिस्ट्री ऑफिस में छुट्टी रहेगी। ये नियम गर्मी और सर्दी की छुट्टी के दौरान पड़ने वाले रविवार पर भी लागू होगा। नोटिफिकेशन में बताया गया है कि चांद दिखने पर मनाए जाने वाले त्योहार मिलाद-उन-नबी, ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा और मुहर्रम की डेट में बदलाव हो सकता है। अगर राज्य सरकार डेट में बदलाव करती है तो चीफ जस्टिस की मंजूरी के बाद नई डेट लागू होगी।

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का लाभ, प्रेमिन के लिए सिलाई मशीन बनी रोजगार का सहारा

महतारी वंदन योजना से प्रेमिन के सपनों को मिले पंख, सिलाई मशीन बनी आत्मनिर्भरता का आधार हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से शुरू किया सिलाई का काम, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बनीं सहभागी महतारी वंदन योजना की 32 किस्तों से मिले 32 हजार रुपये ने बढ़ाया आत्मविश्वास, आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ाए कदम रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार शुरू करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत करने का अवसर भी प्रदान कर रही है। बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड अंतर्गत ग्राम उफरा निवासी श्रीमती प्रेमिन वर्मा इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग कर सिलाई मशीन खरीदी और स्वरोजगार की शुरुआत की। साथ ही अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए नियमित बचत भी कर रही हैं। श्रीमती प्रेमिन वर्मा बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही बड़ी चुनौती थी। एक मां होने के नाते उन्हें सबसे अधिक चिंता अपनी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य की रहती थी। वह चाहती थीं कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आर्थिक परेशानियां उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। लेकिन परिवार की सीमित आय के कारण भविष्य के लिए बचत कर पाना मुश्किल था। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। प्रेमिन को अब तक 32 किस्तों के माध्यम से कुल 32 हजार रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित रखने के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटी के भविष्य को सुरक्षित बनाने में उपयोग करने का निर्णय लिया। सिलाई मशीन ने खोले स्वरोजगार के नए रास्ते प्रेमिन वर्मा ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि की बचत कर एक सिलाई मशीन खरीदी। उनके लिए यह सिलाई मशीन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के सपने को साकार करने का माध्यम है। अब वह घर पर सिलाई का कार्य कर आमदनी अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे रही हैं। प्रेमिन बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी आर्थिक जरूरतों के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब स्वयं की मेहनत से आय अर्जित करने पर आत्मविश्वास बढ़ा है। सिलाई के काम ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाने का अवसर दिया है। बेटी के भविष्य के लिए हर महीने 500 रुपये की बचत स्वरोजगार के साथ प्रेमिन ने अपनी बेटी के भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। वह महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि में से प्रतिमाह 500 रुपये बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त बचत हो सके। प्रेमिन का मानना है कि छोटी-छोटी नियमित बचत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है। आज वह अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग महिलाओं को वर्तमान की जरूरतों के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए भी सक्षम बना सकता है। आर्थिक सहायता ने दिया आत्मविश्वास और सम्मान से जीने का संबल श्रीमती प्रेमिन वर्मा कहती हैं कि पहले आर्थिक परेशानियों और बेटी के भविष्य को लेकर मन में चिंता बनी रहती थी, लेकिन महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वह न केवल नियमित बचत कर पा रही हैं, बल्कि स्वयं के रोजगार से परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं। उनका कहना है कि मेरे लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद है। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता ने मुझे बचत करने और अपना काम शुरू करने का हौसला दिया है। अब मैं अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए भी पैसे जमा कर पा रही हूं। प्रेमिन वर्मा की सफलता की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता, सही योजना और दृढ़ संकल्प से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकती हैं। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को स्वरोजगार और बेटी की शिक्षा के लिए बचत में उपयोग कर उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।

पीएम किसान सम्मान निधि बनी मेघमणि साहू की खेती का सहारा, बीज-खाद और कृषि कार्यों के खर्चों में मिली राहत

रायपुर खेती-किसानी में समय पर बीज, खाद और अन्य जरूरी सामग्रियों की व्यवस्था करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम सलखन निवासी किसान  मेघमणि साहू भी इस योजना का लाभ लेकर खेती के खर्चों का बेहतर प्रबंधन कर रहे हैं। उनके लिए सम्मान निधि की राशि कृषि कार्यों के दौरान आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने में सहायक बन रही है।  मेघमणि साहू लगभग 3 एकड़ 25 डिसमिल कृषि भूमि पर खेती करते हैं। खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। फसल की बुआई से लेकर अन्य कृषि कार्यों तक उन्हें बीज, खाद और विभिन्न आवश्यक सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। इन कार्यों के लिए समय पर राशि उपलब्ध होना जरूरी होता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत उनके बैंक खाते में आने वाली सहायता राशि से उन्हें कृषि संबंधी खर्चों की व्यवस्था करने में सुविधा मिल रही है। सम्मान निधि से खेती के जरूरी खर्चों में मिल रही मदद  मेघमणि साहू बताते हैं कि खेती के दौरान कई छोटे-बड़े खर्च सामने आते हैं। फसल की बुआई के समय बीज और खाद की व्यवस्था करनी होती है, वहीं फसल की देखभाल के लिए भी विभिन्न सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली राशि इन जरूरतों को पूरा करने में उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। प्रत्येक किस्त में मिलने वाली 2 हजार रुपये की राशि से किसानों को अपनी कृषि संबंधी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की सुविधा मिलती है। किसानों को आर्थिक संबल दे रही सम्मान निधि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से पात्र किसानों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सीधे बैंक खाते में राशि हस्तांतरित होने से किसानों को सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल हुई है। यह राशि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि कार्यों के दौरान आवश्यक खर्चों की व्यवस्था करने में सहायक होती है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत किसान  मेघमणि साहू की यह ‘सेवा की कहानी’ दर्शाती है कि खेती के लिए मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता किसानों के दैनिक कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना खेती के खर्चों का प्रबंधन करने और कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने का उपयोगी माध्यम बनी है।

नियद नेल्ला नार योजना से अबूझमाड़ के ग्राम बोरानिरपी में पहली बार पहुंची बिजली, रोशन हुआ पूरा गांव

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोरानिरपी में पहली बार बिजली पहुंचने से पूरा गांव रोशन हो गया है।     जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित इस दुर्गम वनांचल ग्राम का विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, जिससे गांव के सभी 11 परिवारों को विद्युत सुविधा मिल गई है। वर्षों से बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित इन ग्रामीणों के लिए यह पहल उनके दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगी।    विद्युतीकरण और प्रशासनिक प्रयास कलेक्टर नारायणपुर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड नारायणपुर संभाग द्वारा ग्राम बोरानिरपी तक विद्युत सुविधा पहुंचाने के लिए आवश्यक लाइन विस्तार एवं विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया गया है। अबूझमाड़ की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और दूरस्थ बसाहटों के बीच विद्युत अधोसंरचना का विस्तार कर गांव के प्रत्येक परिवार तक बिजली पहुंचाई गई है।ग्रामीणों के जीवन में आएंगे सकारात्मक बदलावग्राम बोरानिरपी में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों के दैनिक जीवन में निम्नलिखित सुधार होने की उम्मीद हैरूशिक्षा को बढ़ावारू घरों में पर्याप्त रोशनी उपलब्ध होने से बच्चों को शाम और रात्रि के समय पढ़ाई करने में आसानी होगी। दैनिक सुविधाएं ग्रामीणों को मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक विद्युत उपकरणों के उपयोग का लाभ मिलेगा। विद्युत सुविधा से संचार व्यवस्था बेहतर होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा भविष्य में पेयजल व्यवस्था, छोटे कृषि आधारित उपकरणों और स्थानीय स्वरोजगार के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों तक बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम बोरानिरपी का पूर्ण विद्युतीकरण इसी दिशा में एक मील का पत्थर है, जिससे अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

नोनी सुरक्षा योजना से बेटियों का भविष्य सुरक्षित, डेयरी और मछली पालन से ग्रामीणों को मिल रहे आय के नए अवसर

रायपुर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही हैं। बेटियों के सुरक्षित भविष्य से लेकर किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, स्वरोजगार और ग्रामीण अधोसंरचना के विकास तक शासन की विभिन्न योजनाएं गांवों में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। सरगुजा जिले में इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे परिवारों की कहानियां बताती हैं कि जब शासन की सहायता और ग्रामीणों की मेहनत एक साथ जुड़ती है, तो सीमित संसाधनों के बीच भी आत्मनिर्भरता और खुशहाली की राह आसान होने लगती है। सरगुजा के ग्रामीण अंचलों में नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, वहीं राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से पशुपालन को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित करने में मदद मिल रही है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ खेती और मछली पालन के अवसर बढ़ा रही हैं। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुगम हो रही है। विकास की ये पहलें ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। नोनी सुरक्षा योजना से आंचल के सपनों को मिला आर्थिक संबल हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आत्मनिर्भर बनकर अपने सपनों को साकार करे। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए बेटियों के भविष्य की चिंता स्वाभाविक होती है। ऐसे परिवारों को छत्तीसगढ़ शासन की नोनी सुरक्षा योजना महत्वपूर्ण सहारा प्रदान कर रही है। अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी मती मानती राजवाड़े की बेटी आंचल राजवाड़े को इस योजना के अंतर्गत भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है। मानती राजवाड़े के लिए यह बॉन्ड केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद भी है। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार आंचल के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर मिलने वाली राशि का उपयोग उसकी आगे की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा। इससे परिवार को भविष्य में शिक्षा संबंधी खर्चों की व्यवस्था करने में सहायता मिलेगी। नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के प्रति परिवारों में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ उनकी शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डेयरी व्यवसाय ने बदली मनोज की आर्थिक स्थिति, प्रतिदिन 30 लीटर दूध बेचकर कर रहे आमदनी कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त साधन बन रहा है। सरगुजा जिले के लमगांव निवासी  मनोज कुमार पटेल ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। शासन की सहायता और स्वयं की मेहनत से उन्होंने दूध उत्पादन एवं विक्रय का कार्य आगे बढ़ाया है। आज वे प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का विक्रय कर करीब 1,200 रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।  मनोज कुमार पटेल के अनुसार, दूध विक्रय से प्राप्त मासिक आय में पशुओं के चारे और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद लगभग 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। डेयरी व्यवसाय से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। खेती के साथ पशुपालन अपनाने से उनकी आय के स्रोतों में विविधता आई है। मनोज की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण युवा और किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकते हैं। डेयरी व्यवसाय की विशेषता यह है कि इससे ग्रामीण परिवारों को केवल मौसमी कृषि आय पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। दूध उत्पादन और बिक्री से नियमित नकद आय प्राप्त होती है, जिसका उपयोग परिवार की दैनिक जरूरतों, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जा सकता है। पशुपालन आधारित ऐसी गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ स्वरोजगार को भी प्रोत्साहित कर रही हैं। आजीविका डबरी से फूना राम पहाड़ी कोरवा को मिला मछली पालन का अवसर ग्रामीण विकास में जल संरक्षण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्षा जल का संचयन केवल सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि खेती के साथ मछली पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों का आधार भी बन सकता है। सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचल में रहने वाले  फूना राम पहाड़ी कोरवा के लिए आजीविका डबरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत उनकी खाली पड़ी जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल के संग्रहण और उसके उपयोग की सुविधा विकसित हुई। डबरी में संचित पानी से फूना राम को मछली पालन शुरू करने का अवसर मिला है। पहले अनुपयोगी पड़ी भूमि अब परिवार के लिए आजीविका की संभावनाएं पैदा कर रही है। मछली पालन से भविष्य में अतिरिक्त आय अर्जित करने का मार्ग खुला है। विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के लिए इस प्रकार की जल आधारित परिसंपत्तियां स्थानीय संसाधनों के उपयोग से आर्थिक गतिविधियां विकसित करने में सहायक हो सकती हैं। इसी प्रकार  बाबूनाथ के खेत में डबरी के गहरीकरण से जल संग्रहण क्षमता और सिंचाई सुविधा में सुधार हुआ है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से उन्हें सब्जी उत्पादन में सहायता मिली है, वहीं मछली पालन की संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। डबरी के माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई, सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़ने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका के एक से अधिक साधन विकसित करने का अवसर मिल रहा है। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण के कार्यों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर उनका लाभ और व्यापक हो सकता है। वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन कृषि उत्पादन बढ़ाने, अतिरिक्त फसलों की खेती और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में उपयोगी है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। 57.83 लाख रुपये से सड़क का नवीनीकरण, ग्रामीणों … Read more

प्रधानमंत्री आवास योजना से रामकिशुन श्रीवास का पक्के मकान का सपना हुआ साकार

रायपुर, हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक पक्का मकान हो, जहां वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके। आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई जरूरतमंद परिवारों के लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं होता। ऐसे परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। इस योजना ने राजनांदगांव जिले के नगर पंचायत डोंगरगांव अंतर्गत सेवता पारा, वार्ड क्रमांक 6 निवासी  रामकिशुन वास के पक्के मकान के सपने को भी साकार किया है। शासन के सहयोग से अपने सपनों का पक्का आशियाना तैयार किया रामकिशुन वास रामकिशुन वास का परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था। कच्चे मकान में रहने के कारण परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सीमित आर्थिक संसाधनों के चलते स्वयं का पक्का मकान बनाना उनके लिए कठिन था। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 उनके जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आई। योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए मिली 2 लाख 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता से उन्होंने अपने सपनों का पक्का आशियाना तैयार किया। पक्के घर का सपना पूरा होने से जीवन स्तर में आया सकारात्मक बदलाव   रामकिशुन वास बताते हैं कि पहले कच्चे मकान में रहने के कारण परिवार को कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। अब पक्का मकान बन जाने से परिवार को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल गया है। अपने घर की पक्की छत के नीचे परिवार के साथ रहने की खुशी उनके जीवन में एक नया सुकून लेकर आई है। वर्षों से संजोया गया पक्के घर का सपना पूरा होने से परिवार के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। जीवन में स्थायित्व और आत्मसम्मान की भावना हुई मजबूत  प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के पात्र आवासहीन परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास मिलने के साथ उनके जीवन में स्थायित्व और आत्मसम्मान की भावना भी मजबूत हो रही है। वास ने पक्के आवास का सपना साकार होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।  

प्रधानमंत्री आवास योजना से कविता बाई के पक्के घर का सपना हो रहा साकार

रायपुर हर परिवार का सपना होता है कि उसके सिर पर अपनी पक्की छत हो, जहां वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन बिता सके। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तनोद निवासी श्रीमती कविता बाई के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी सपने को साकार करने की उम्मीद लेकर आई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत उनके आवास को स्वीकृति मिलने से परिवार के लिए अपना पक्का घर बनाने की राह आसान हुई है। कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों के लिए पक्का घर केवल चारदीवारी और छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार होता है। श्रीमती कविता बाई भी अपने परिवार के लिए ऐसा ही आशियाना चाहती थीं, जहां उन्हें स्थायी आवास की सुविधा मिल सके। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास की स्वीकृति मिलने से उनकी इस इच्छा को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। अपने घर की उम्मीद को मिला नया सहारा श्रीमती कविता बाई के लिए आवास की स्वीकृति परिवार की एक बड़ी जरूरत पूरी होने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पक्का घर बनने से परिवार को बेहतर रहन-सहन, सुरक्षा और दैनिक जीवन में सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। योजना से मिली सहायता ने उनके परिवार को अपने आवास के सपने के करीब पहुंचाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने घर का निर्माण करने और बेहतर आवासीय सुविधाएं प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार श्रीमती कविता बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास स्वीकृत होने पर खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उनके लिए यह सहायता परिवार के बेहतर भविष्य और सुरक्षित आवास की उम्मीद का आधार बनी है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कविता बाई की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि आवास जैसी बुनियादी जरूरत पूरी करने के लिए मिलने वाली शासकीय सहायता जरूरतमंद परिवारों के जीवन में कितना महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। अपने पक्के घर की उम्मीद के साथ कविता बाई का परिवार अब बेहतर और सुरक्षित जीवन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

किराए के मकान की चिंता हुई दूर, हाउसिंग बोर्ड ने साकार किया स्मिता श्रीवास्तव के अपने घर का सपना

रायपुर हर मध्यमवर्गीय परिवार का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर, सुरक्षित और सुविधायुक्त घर हो, जहां वह अपने परिवार के साथ बिना किसी चिंता के सुकून भरा जीवन बिता सके। किराए के मकान में रहने वाले परिवारों के लिए यह सपना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हर महीने किराए का खर्च और स्थायी आवास की चिंता उनके जीवन का हिस्सा बनी रहती है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय परियोजनाएं ऐसे ही परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम बन रही हैं। राजधानी रायपुर के कबीर नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर में रहने वाली  स्मिता श्रीवास्तव की कहानी भी इसी बदलाव, खुशी और संतुष्टि का उदाहरण है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आम नागरिकों, विशेषकर मध्यमवर्गीय परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण, सुव्यवस्थित आवासीय परियोजनाओं और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अधिक से अधिक परिवारों को उनकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध कराना है। किराए के मकान से अपने आशियाने तक का सफर कबीर नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर की निवासी  स्मिता श्रीवास्तव बताती हैं कि पहले वे किराए के मकान में रहती थीं। हर महीने किराया चुकाने के साथ अपने स्थायी घर की चिंता भी बनी रहती थी। उनकी इच्छा थी कि परिवार के बजट में ऐसा घर मिले, जहां निर्माण की गुणवत्ता अच्छी हो और दैनिक जीवन की सभी जरूरी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध हों।  स्मिता कहती हैं, “पहले मैं किराए के मकान में रहती थी। हर महीने किराया देना और अपने घर की चिंता करना मेरे लिए एक बड़ी परेशानी थी। लेकिन आज हाउसिंग बोर्ड की वजह से मेरा अपने घर का सपना पूरा हो गया है।” उनके लिए किराए के मकान से निकलकर अपने घर में रहना जीवन की बड़ी उपलब्धि है। अब उन्हें हर महीने मकान मालिक को किराया देने की चिंता नहीं रहती। अपने घर में परिवार के साथ रहने से उन्हें स्थायित्व, सुरक्षा और आत्मसंतुष्टि का अनुभव हो रहा है। अच्छी लोकेशन और जरूरी सुविधाओं ने बढ़ाई खुशी  स्मिता श्रीवास्तव के अनुसार कबीर नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुविधाजनक लोकेशन है। आसपास अस्पताल, बच्चों के लिए स्कूल और दैनिक जरूरतों के लिए बाजार उपलब्ध होने से परिवार को काफी सुविधा मिलती है। आवागमन की बेहतर व्यवस्था के कारण शहर के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान है। वे बताती हैं कि आवास खरीदते समय उनकी प्राथमिकता केवल एक मकान लेना नहीं था, बल्कि ऐसा स्थान चुनना था, जहां परिवार की सभी आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो सकें। हाउसिंग बोर्ड की इस परियोजना में उन्हें अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं मिली हैं।  स्मिता कहती हैं, “यहां की सबसे अच्छी बात इसकी लोकेशन है। अस्पताल हो, बच्चों के लिए स्कूल हो या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार, सभी सुविधाएं आसपास ही उपलब्ध हैं। कहीं भी आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होती।” बजट के अनुरूप घर और बेहतर निर्माण गुणवत्ता से संतुष्ट  स्मिता बताती हैं कि एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए घर खरीदते समय बजट सबसे महत्वपूर्ण होता है। उनकी भी यही इच्छा थी कि आर्थिक क्षमता के अनुरूप ऐसा घर मिले, जिसमें निर्माण की गुणवत्ता के साथ आवश्यक सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया हो। वे कहती हैं, “हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर और सुरक्षित घर हो। मेरा भी यही सपना था कि मेरे बजट में मुझे एक ऐसा मकान मिले, जहां अच्छी निर्माण गुणवत्ता के साथ सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने मेरी उम्मीदों के अनुरूप मुझे एक बहुत अच्छा घर दिया है।” उनके अनुसार हाउसिंग बोर्ड के आवास में रहने से परिवार को बेहतर वातावरण मिला है। घर की बनावट, सुविधाजनक लोकेशन और आसपास उपलब्ध आवश्यक सेवाओं के कारण वे अपने निर्णय से संतुष्ट हैं। “अब किराए के मकान में नहीं, अपने खुद के घर में रह रही हूं” अपने घर से जुड़ी खुशी व्यक्त करते हुए  स्मिता श्रीवास्तव कहती हैं कि जीवन में कुछ उपलब्धियां ऐसी होती हैं, जिनकी खुशी शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल होता है। अपने घर का सपना पूरा होना उनके लिए ऐसा ही अवसर है। वे भावुक होकर कहती हैं, “अब सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मैं किराए के मकान में नहीं, बल्कि अपने खुद के घर में रह रही हूं। यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी और सुकून की बात है।” उनके लिए अपना घर केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि वर्षों की उम्मीदों, मेहनत और परिवार के सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है। अपने आशियाने में रहने से परिवार को स्थायित्व मिला है और भविष्य को लेकर उनका भरोसा भी बढ़ा है। मध्यमवर्गीय परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में प्रयास मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मंडल का प्रयास है कि आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों को उनकी आवश्यकताओं तथा आर्थिक क्षमता के अनुरूप सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध हों। आवासीय परियोजनाओं में बेहतर लोकेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण, आवश्यक नागरिक सुविधाओं और परिवारों की दैनिक जरूरतों को महत्व दिया जा रहा है। इसके माध्यम से नागरिकों को केवल मकान उपलब्ध कराने के बजाय सुरक्षित और सुविधाजनक आवासीय वातावरण विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड के प्रति जताया आभार  स्मिता श्रीवास्तव ने अपने घर का सपना पूरा होने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “आज मैं यहां अपने परिवार के साथ बेहद खुश और बेफिक्र होकर रह रही हूं। मैं इस सराहनीय पहल के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का हृदय से धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने हम जैसे परिवारों के अपने घर के … Read more

नारायणपुर के कपरी नाला में 2.97 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण अंतिम चरण में

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के कुनकुरी तहसील अंतर्गत नारायणपुर स्थित कपरी नाला में 2 करोड़ 97 लाख रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र की लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करने और कृषि गतिविधियों को अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। कपरी नाला में निर्माणाधीन इस परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर उसका कृषि कार्यों में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। क्षेत्र में सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है। स्टॉप डैम के निर्माण से वर्षा जल को रोककर उसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकेगा। इससे किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और फसलों के बेहतर उत्पादन की संभावनाएं मजबूत होंगी। 150 हेक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित, सिंचाई का प्रतिशत बढ़कर 37.91 तक पहुंचने की संभावना कपरी नाला में स्टॉप डैम के निर्माण से लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई का प्रतिशत बढ़कर 37.91 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद किसानों को आगामी कृषि सत्र 2027-28 से सिंचाई सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को समय पर फसलों की सिंचाई करने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के अवसर भी उपलब्ध होंगे। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह परियोजना उपयोगी साबित होगी, क्योंकि सिंचाई सुविधा के विस्तार से उनकी कृषि संबंधी कठिनाइयों में कमी आने की उम्मीद है। जल संरक्षण के साथ भू-जल संवर्धन और ग्रामीण जनजीवन को मिलेगा लाभ कपरी नाला में स्टॉप डैम का निर्माण जल संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वर्षा ऋतु के दौरान बहकर निकल जाने वाले पानी को रोककर उसका संचयन किया जा सकेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने और जल स्तर में सुधार होने की संभावना है। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को निस्तारी संबंधी जरूरतों के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी। जल संचयन की इस व्यवस्था से स्थानीय जल संसाधनों के संरक्षण और उनके समुचित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने पर पेयजल स्रोतों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त कपरी नाला के आसपास स्थित शिव मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलने की संभावना है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कृषि अधोसंरचना के विकास तथा किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जशपुर जिले में जल संरक्षण और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कपरी नाला में 2.97 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टॉप डैम से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत को नियंत्रित करने और किसानों की आय में वृद्धि के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। जल संरक्षण के साथ कृषि विकास को बढ़ावा देने वाली यह परियोजना क्षेत्र के ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों ने मुख्यमंत्री  साय के प्रति जताया आभार कपरी नाला में स्टॉप डैम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंचने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है। किसानों को उम्मीद है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और खेती-किसानी से जुड़ी उनकी समस्याओं में कमी आएगी। क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई सुविधा के विस्तार और जल संरक्षण की दिशा में इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।