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CGPSC SSE 2025 के उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर, दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू टले

रायपुर  छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 के अभ्यर्थियों के लिए अहम सूचना जारी की है. 20 विभागों के 265 पदों के लिए होने वाला दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. यह प्रक्रिया 20 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित थी।  अपरिहार्य कारणों से टाला गया कार्यक्रम CGPSC ने 16 सितंबर को जारी सूचना में बताया कि पूर्व निर्धारित दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार कार्यक्रम को अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया जा रहा है. हालांकि, आयोग ने इन कारणों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।  265 पदों पर चल रही है चयन प्रक्रिया राज्य सेवा परीक्षा-2025 के जरिए छत्तीसगढ़ शासन के 20 विभागों में कुल 265 पदों पर भर्ती होनी है. चयन प्रक्रिया के तहत दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार अगला अहम चरण था, जिसकी तारीखें अब आगे बढ़ा दी गई हैं।  आयोग ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार की नई तारीखें अलग से जारी की जाएंगी. इसके लिए अभ्यर्थियों को CGPSC की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपडेट देखते रहना होगा।  आदेश में क्या कहा गया आयोग के परीक्षा नियंत्रक की ओर से जारी सूचना में राज्य सेवा परीक्षा-2025 के विज्ञापन और संबंधित शुद्धि पत्रों का हवाला देते हुए 20 सितंबर से 1 अक्टूबर तक निर्धारित दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार कार्यक्रम को स्थगित करने की जानकारी दी गई है।  अभ्यर्थियों के लिए जरूरी बात फिलहाल 20 सितंबर से शुरू होने वाला पुराना कार्यक्रम लागू नहीं होगा. अभ्यर्थियों को नई तारीखों के लिए आयोग की अगली सूचना का इंतजार करना होगा. नई तारीख जारी होने के बाद ही दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।  एक नजर में • परीक्षा: राज्य सेवा परीक्षा-2025 • आयोग: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग • कुल पद: 265 • विभाग: 20 • पुराना कार्यक्रम: 20 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 • स्थिति: दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार स्थगित • कारण: अपरिहार्य कारण • नई तारीख: बाद में घोषित होगी • आधिकारिक वेबसाइट: www.psc.cg.gov.in

CGPSC पेपर लीक केस में ED का बड़ा दावा, चेतन के खाते में मिले 66.64 लाख; 170 लेन-देन की जांच

रायपुर  छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पेपर लीक मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया था। ED ने चेतन बोरघारिया से पूछताछ की है। ED के अनुसार चेतन के बैंक खाते में 170 ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख कैश जमा हुए। चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ED के मुताबिक, CGPSC परीक्षा 2021 में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। प्रिलिम्स एग्जाम से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र बांटा गया। इसके बाद बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई। 3 करोड़ से ज्यादा की अवैध रकम लेने का आरोप ED की जांच के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित अवैध रकम जुटाई। आरोप है कि अभ्यर्थियों को पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उनका चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने कथित संपर्क और प्रभाव का इस्तेमाल करने की बात कही गई। जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे आश्वासनों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में बातचीत सामने आई ED के मुताबिक, जब्त डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आई। इनमें वित्तीय लेन-देन और रकम वापस करने या भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत भी शामिल थी। जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ED को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया। 11 सितंबर को हुई थी गिरफ्तारी ED ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की अपराध से अर्जित रकम से जुड़े कामों में कथित संलिप्तता सामने आई है। इनमें रकम हासिल करना, अपने कब्जे में रखना, छिपाना और उसका इस्तेमाल करना शामिल है। इसके आधार पर चेतन बोरघरिया को PMLA की धारा 19 के तहत 11 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। ED के अनुसार, चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। जानिए क्या है CGPSC घोटाला यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं। वसूली गई रकम कहां से आई, जांच जारी इस घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार किया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच में जुटी है। एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के परिणाम पर CGPSC ने दिया बड़ा अपडेट

सीजीपीएससी ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के परिणाम को लेकर स्थिति की स्पष्ट 795 के स्थान पर 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित, न्यूनतम अर्हकारी अंक नहीं पाने के कारण संख्या हुई कम पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं, सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक जानकारियों से बचने की अपील रायपुर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के माध्यम से साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों को स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि राज्य सेवा परीक्षा-2025 में निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थियों का चिन्हांकन किसी त्रुटि के कारण नहीं, बल्कि निर्धारित न्यूनतम अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने के कारण हुआ है। आयोग के अनुसार, राज्य सेवा परीक्षा-2025 के विज्ञापन की कंडिका 3 (iv) एवं छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग प्रक्रिया नियम की कंडिका 7 के तहत प्रत्येक प्रश्न-पत्र में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों द्वारा निर्धारित अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं किए जाने के कारण साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों की संख्या वांछित संख्या से कम हो सकती है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 में भी इसी कारण 795 अभ्यर्थियों के स्थान पर कुल 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चिन्हांकित किया गया है। पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का प्रावधान नहीं आयोग ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन की कंडिका 11 (V) के अनुसार आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पुनर्मूल्यांकन तथा पुनर्गणना का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए किसी भी प्रश्न-पत्र के संबंध में पुनर्मूल्यांकन अथवा पुनर्गणना की प्रक्रिया नहीं की जा सकती। वेबसाइट पर उपलब्ध होगी मेरिट सूची और कट ऑफ आयोग ने बताया कि चयन परिणाम जारी होने के बाद प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की मेरिट सूची तथा मुख्य परीक्षा की कट ऑफ आयोग की वेबसाइट पर जारी की जाती है। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रारंभिक परीक्षा की ओएमआर उत्तर पत्रक तथा मुख्य परीक्षा की प्रश्न सह उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त कर अपने परीक्षा परिणाम के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रश्नवार और पहचान रहित मूल्यांकन प्रक्रिया आयोग ने कहा कि सभी लिखित परीक्षाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञों के माध्यम से गंभीरता और निष्पक्षता के साथ कराया जाता है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में प्रश्नवार मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो पूरी तरह पहचान रहित होती है। इससे मूल्यांकन कार्य में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए यह जानना संभव नहीं होता कि संबंधित उत्तर पुस्तिका किस अभ्यर्थी की है। आयोग के अनुसार, प्रत्येक अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बड़ी संख्या में विषय विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ता शामिल होते हैं। निर्धारित प्रक्रिया, नियमों एवं निर्देशों के माध्यम से मूल्यांकन की शुचिता, गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाती है। भ्रामक जानकारी से प्रभावित न होने की अपील छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रसारित की जा रही भ्रामक जानकारियों से प्रभावित न हों। आयोग ने कहा कि राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के माध्यम से साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चिन्हांकन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं निर्देशों के अनुरूप पूर्णतः सही ढंग से की गई है।

CGPSC को मिला नया नेतृत्व, रीता शांडिल्य बनीं कार्यकारी अध्यक्ष

रायपुर  पूर्व आईएएस अधिकारी रीता शांडिल्य को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की स्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। रीता शांडिल्य अभी सीजीपीएससी की कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। पहली बार आयोग में कोई महिला अध्यक्ष नियुक्त की गई है। इससे पहले टामन सोनवानी आयोग के अध्यक्ष रहे। अब तक आयोग में 8 अध्यक्ष हो चुके हैं जिनमें एक मात्र महिला रीता शांडिल्य हैं। किन विभागों में दे चुकी हैं सेवाएं रीता शांडिल्य नौकरी में रहते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग में सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।  घोटाले के बाद नई नियुक्ति बता दें है कि पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी के कार्यकाल के दौरान CGPSC में बड़ा घोटाला सामने आया था। यह मामला विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बना। नई सरकार के गठन के बाद इस मामले की सीबीआई जांच कराई गई। जांच के बाद तत्कालीन अध्यक्ष सोनवानी समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया था। विवाद खत्म करने का करेंगी प्रयास अब रीता शांडिल्य को स्थायी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और विश्वास योग्य बनाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। राज्य सरकार को भरोसा है कि उनकी नियुक्ति से आयोग की छवि सुधरेगी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद खत्म होंगे। आयोग में सुधार की उम्मीदें विशेषज्ञों का मानना है कि रीता शांडिल्य के नेतृत्व में CGPSC में प्रशासनिक सुधार की नई शुरुआत होगी। घोटाले से हिल चुकी आयोग की साख को बहाल करना और युवाओं के विश्वास को कायम करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी। साथ ही आयोग में समयबद्ध परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना भी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।