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रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव, भारत बोला- 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

नई दिल्ली अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में ‘सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पारित होने के बाद भारत ने वाशिंगटन को दो टूक शब्दों में कड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा. 16 सितंबर 2026 को पारित इस अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले मुल्कों पर कड़े अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।  नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय, व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इस संवेदनशील मसले पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर कई दौर की बेबाक बातचीत हो चुकी है. भारत ने अमेरिका को स्पष्ट समझा दिया है कि ऐसे एकतरफा फैसलों का असर न केवल द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी भारी उथल-पुथल मच सकती है. सरकार ने उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर इस कानून से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।  MEA के मुताबिक, भारत बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुरूप ऊर्जा के विविध स्रोतों से खरीद जारी रखेगा. मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर विभिन्न अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है. भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभावों को भी स्पष्ट रूप से अमेरिका के सामने रखा है।  भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।  विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में Sanctioning Russia and Iran Act के पारित होने का संज्ञान लिया है. भारत इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. अमेरिकी कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है और इससे भारत समेत अन्य देशों पर असर पड़ सकता है। 

सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में यूपी का बड़ा कदम, यशोभूमि में दिखेगा प्रदेश का इकोसिस्टम

सेमीकंडक्टर के ग्लोबल मंच पर यूपी की दस्तक, 17 से 19 सितंबर तक सेमीकॉन इंडिया 2026 का दिल्ली में आयोजन सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में यूपी का बड़ा कदम, यशोभूमि में दिखेगा प्रदेश का इकोसिस्टम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस यूपी के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दुनिया देखेगी तस्वीर, यशोभूमि में जुटेंगे ग्लोबल दिग्गज लखनऊ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अपनी बढ़ती क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने जा रहा है। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि (आईआईसीसी) द्वारका में होगा। इसमें योगी सरकार, उत्तर प्रदेश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नीतिगत सहयोग और भविष्य की तैयारियों को प्रमुखता से सामने रखेगी। कार्यक्रम में दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों, विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, भारतीय उद्योग जगत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों की भागीदारी होगी। यूपी के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की होगी प्रस्तुति सेमीकॉन इंडिया 2026 में उत्तर प्रदेश की ओर से ऐसे प्रचार वीडियो तैयार किए जाने की योजना है, जिनमें प्रदेश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को दिखाया जाएगा। इसमें मौजूदा बुनियादी ढांचे, नीतिगत सहयोग और भविष्य की तैयारियों को सामने रखा जाएगा। इसके साथ ही यूपी को भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में एक प्रमुख स्थान रखने वाले राज्य के रूप में प्रस्तुत करने पर भी जोर रहेगा। आयोजन का मुख्य विषय ‘ट्रांसफॉर्म टुमारो–सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग ग्लोबल सप्लाई चैन्स’ रहेगा। कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन पर चर्चा और प्रदर्शन किया जाएगा। 500 से ज्यादा प्रदर्शक, 10 राज्य पवेलियन सेमीकॉन इंडिया 2026 में 500 से अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे। करीब 2 लाख वर्गफुट क्षेत्र में प्रदर्शनी होगी। कार्यक्रम में 10 स्टेट पवेलियन और 7 कंट्री पवेलियन भी होंगे। इसके अलावा 40 स्टार्टअप के लिए स्टार्टअप पवेलियन तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम में 150 से अधिक वक्ताओं की भागीदारी, राज्य सरकारों के राउंडटेबल, प्रशिक्षण सत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंपोनेंट्स पर अलग ट्रैक और कंट्री राउंडटेबल भी आयोजित किए जाएंगे। इससे अलग-अलग राज्यों, कंपनियों और वैश्विक भागीदारों के बीच संवाद का अवसर मिलेगा। यूपी में निवेश और भविष्य की तैयारी पर फोकस प्रदेश की भागीदारी का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को व्यापक स्तर पर सामने रखना है। इसके तहत राज्य की मौजूदा सुविधाओं, नीतिगत समर्थन और भविष्य की तैयारियों की जानकारी दी जाएगी। ग्लोबल कंपनियों और राज्यों के बीच संवाद सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर उद्योग की बदलती जरूरतों, निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन और भविष्य के कार्यबल से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा है। साथ ही भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

बाढ़ से तबाह नेपाल के पावर सेक्टर को भारत का सहारा, रोजाना 18 घंटे मिलेगी बिजली

काठमांडू  प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए भारत ने एक बार फिर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां बिजली का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस संकट से उबारने के लिए भारत ने 31 दिसंबर 2026 तक नेपाल को रोजाना 18 घंटे 654 मेगावाट (MW) तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी दे दी है। नेपाल के 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के मुताबिक, इस तबाही में अब तक 1,385 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,130 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल और तिब्बत सीमा के पास बीते 26 अगस्त को हुए बर्फ की चट्टान खिसकने (Avalanche) के बाद आई इस तबाही ने दर्जनों गांवों और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। क्यों ठप पड़ गया नेपाल का पावर सेक्टर? नेपाल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से नदियों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है। लेकिन इस भौगोलिक निर्भरता का एक नुकसान यह भी है कि जब भी बाढ़ या भूस्खलन जैसी आपदा आती है, तो नेपाल का पावर ग्रिड रातों-रात धराशायी हो जाता है। 12 से ज्यादा पावर प्लांट तबाह: इस विनाशकारी बाढ़ में 12 से ज्यादा हाइड्रोपावर प्लांट या तो बह गए या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। कर्मचारी भी लापता: पावर सेक्टर में काम करने वाले लगभग 900 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मरम्मत का काम भी ठप पड़ा है। उलट गए हालात: जो नेपाल हाल के सालों में अपनी अतिरिक्त बिजली भारत को बेच रहा था, इस आपदा ने पासा पलट दिया। अब नेपाल को अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए भारत से बिजली मांगनी पड़ रही है। 654 MW बिजली सप्लाई का क्या है प्लान? भारतीय विद्युत मंत्रालय ने 13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए इस सप्लाई को हरी झंडी दे दी है। यह बिजली नेपाल को आधी रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक यानी दिन के 18 घंटे उपलब्ध कराई जाएगी। कुल 654 मेगावाट में से 600 मेगावाट बिजली मुजफ्फरपुर-ढालकेबार 400 kV डबल-सर्किट लाइन के जरिए भेजी जाएगी। बाकी 54 मेगावाट बिजली तनकपुर-महेंद्रनगर 132 kV लाइन से सप्लाई होगी। दिन का समय क्यों चुना गया? दिन के समय भारत के पास अपनी सौर ऊर्जा की अच्छी-खासी उपलब्धता रहती है। ऐसे में अपनी सरप्लस ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल कर भारत पड़ोसी देश की मदद आसानी से कर पा रहा है। भारत ने साफ किया है कि यह व्यवस्था 31 दिसंबर तक के लिए है। जनवरी 2027 से नेपाल को कितनी बिजली दी जाएगी, इसका रिव्यू दिसंबर के आखिरी हफ्ते में किया जाएगा। मुश्किल वक्त में काम आई भारत-नेपाल की दोस्ती नेपाल के पास नदियां और पनबिजली की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन भारत के पास वह मजबूत ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और बैकअप है जो किसी भी आपात स्थिति में नेपाल की लाइफलाइन बन सकता है। भारत के विद्युत मंत्रालय का कहना है कि इस फैसले से नेपाल को संकट से उबरने में मदद मिलेगी और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा संबंधों को और मजबूती मिलेगी। भारत के लिए यह कदम केवल एक मदद नहीं, बल्कि अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) कूटनीति की एक ठोस और व्यावहारिक मिसाल है।

लाल सागर में हूतियों की बढ़त से बढ़ा Bab-el-Mandeb पर खतरा, भारत के Oil Trade पर पड़ेगा बड़ा असर

 नई दिल्‍ली दुनिया भर में एनर्जी का संकट बढ़ता ही जा रहा है, क्‍योंकि होर्मुज पहले से ही प्रभावित है और अब सऊदी अरब ने इराकी क्षेत्र से किए गए कई ड्रोन हमलों के बाद अपनी कच्चे तेल की पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. इसके साथ यमन के लाल सागर तट पर 18 घंटे तक चले भीषण हमले में हूती विद्रोही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर कंट्रोल करने के कगार पर पहुंच चुके हैं।  ये तीनों रास्‍ते दुनिया की तेल सप्‍लाई के लिए काफी महत्‍वपूर्ण माने जाते हैं. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का 20 फीसदी तेल आयात करता था, जबकि सऊदी अरब के पाइपलाइन से हर दिन 40 से 50 लाख बैरल तेल सप्‍लाई होती थी. वहीं बाब अल-मंडेब से भी दुनिया के कुल समुद्री तेल और गैस व्यापार का लगभग 5% से 12% हिस्सा यानी 4 से 5 मिलियन बैरल हर दिन तेल सप्‍लाई होता है।  इसका मतलब है कि इन तीनों रास्‍ते से करीब 30 फीसदी सप्‍लाई प्रभावित होगी, क्‍योंकि होर्मुज और बाब अल मंडेब के बाद ईरान तेल सप्‍लाई को अपने तरीके से चला सकता है और वह मिडिल ईस्‍ट से आने वाले तेल-गैस को रोक सकता है।  भारत के ऑयल ट्रेड पर बढ़ेगा खतरा भारत से  3,000 किलोमीटर दूर मौजूद बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर अगर हूतियों का पूरी तरह कंट्रोल हो जाता है, तो इसका सीधा असर भारत के तेल आयात, यूरोप को होने वाले एक्सपोर्ट और सामान की ढुलाई पर पड़ सकता है।  बाब-अल-मंदेब लाल सागर और गल्फ ऑफ एडन को जोड़ने वाला करीब 29 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है. यह रास्ता सुएज नहर के जरिए यूरोप को हिंद महासागर और एशिया से जोड़ता है. भारत के लिए यह रास्ता इसलिए अहम है क्योंकि कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के साथ-साथ दवाइयां, मशीनरी, टेक्सटाइल और दूसरे सामान भी इसी रूट से यूरोप पहुंचते हैं।  कैसे बढ़ा हूतियों का कंट्रोल? हूती संगठन अंसार अल्लाह ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में अपना कंट्रोल मजबूत किया. लाल सागर का बड़ा हिस्सा भी उनके प्रभाव में आया. 2015 में सऊदी अरब की अगुवाई में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई हुई, लेकिन उन्हें पूरी तरह पीछे नहीं हटाया जा सका।  अब हूतियों के पास बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और दूसरे आधुनिक हथियार हैं. ताजा घटनाक्रम में स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने करीब 18 घंटे में यमन के लाल सागर तट पर तेजी से बढ़त बनाई।  रॉयटर्स के मुताबिक हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया और हनिश द्वीपों की ओर बढ़े. एपी ने मायून यानी पेरिम द्वीप पर हूतियों के कब्जे की खबर दी. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक हूती जूकर और हनिश द्वीपों तक भी पहुंचे हैं. हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि उन्होंने बाब-अल-मंदेब पर कंट्रोल कर लिया है. हालांकि ईरान ने हूतियों को ताजा मदद देने और ईरानी अधिकारियों को यमन भेजने की खबरों का खंडन किया है।  रास्ता बंद हुआ तो भारत पर क्या असर? अगर बाब-अल-मंदेब से जहाजों का आना-जाना मुश्किल होता है तो शिपिंग और इंश्योरेंस का खर्च तेजी से बढ़ सकता है. 2023 के आखिर में हूती हमलों के बाद करीब 2,000 जहाजों ने सुएज नहर से बचते हुए अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप का रास्ता अपनाया था. इससे भारत आने वाले सामान की सप्लाई में देरी हुई।  भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता तेल की कीमतों को लेकर है. बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मात्रा 2023 में करीब 9.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, जो 2025 की पहली छमाही में घटकर करीब 4.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई. हूतियों की ताजा बढ़त की खबर के बाद ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया और बाद में करीब 99 डॉलर के आसपास रहा. भारत रूस जैसे दूसरे स्रोतों से तेल खरीद सकता है, लेकिन वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का असर भारत पर भी पड़ेगा।  एक्सपोर्ट पर भी पड़ेगा असर भारत के लिए दूसरी बड़ी चिंता यूरोप को होने वाला एक्सपोर्ट है. अगर जहाजों को अफ्रीका के चारों तरफ जाना पड़ा तो मुंबई से रॉटरडैम की दूरी करीब 15,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 23,000 किलोमीटर हो सकती है. इससे ईंधन, बीमा और माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और भारतीय सामान यूरोप में महंगा हो सकता है।  ऐसे में 3,000 किलोमीटर दूर यमन में बाब-अल-मंदेब पर बढ़ता हूती कंट्रोल भारत के लिए सिर्फ पश्चिम एशिया का संकट नहीं है. इसका असर तेल की कीमत, शिपिंग खर्च और यूरोप के साथ भारत के कारोबार पर पड़ सकता है. होर्मुज स्ट्रेट पर पहले से दबाव के बीच बाब-अल-मंदेब का संकट भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और एक्सपोर्ट, दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती बन सकता है।  ये तीनों रास्‍ते पूरी तरह बंद हुए तो कितना बड़ा संकट?  अब अगर इन तीनों रास्‍तों को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है तो दुनिया की लगभग 30 फीसदी सप्‍लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यूरोप, भारत और चीन जैसे देशों को जाने वाली एनर्जी सप्‍लाई ज्‍यादा प्रभावित हो जाएंगी और अगर ये लंबे समय तक बंद रहता है तो दुनिया भर को एक भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है।  जैसे पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम तेजी से बढ़ेंगे. सप्‍लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों से आने वाली चीजें काफी महंगी हो जाएंगी, भारत से इन देशों को निर्यात भी प्रभावित होगा. कच्‍चा माल महंगा होने से प्रोडक्‍ट्स की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे बाजार में खरीदारी कम होगी और महंगाई के कारण इकोनॉमी प्रभावित होगी।  शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा. जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी. कंपनियों की कमाई भी तेजी से घट सकती है, जिससे इनके शेयरों पर असर होगा. ऐसे में भारत से लेकर ग्‍लोबल लेवल पर बाजारों में मंदी की स्थिति आ सकती है. आइए समझते हैं कौन सा रास्‍ता कितना अहमियत रखता है…  सऊदी पाइपलाइन का रास्‍ता सबसे पहले सऊदी अरब का तेल, उसके पूर्वी क्षेत्र से होते हुए Arabian Peninsula के अंदर से पश्चिम की ओर Yanbu Port की ओर जाता है, फिर यहां से लाल सागर में जाकर मिलता है और वहां … Read more

भारत का एशिया कप फाइनल में धमाकेदार प्रवेश, सेमीफाइनल में बांग्लादेश को दी करारी शिकस्त

दुबई  भारतीय टीम ने गुरुवार को एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रनों से मात दी। इस जीत के साथ सात बार की चैंपियन भारतीय टीम ने महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में जगह बना ली है। भारत 10वीं बार खिताबी मुकाबले तक पहुंचा है। महिला एशिया कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 149 रन बनाए। इसके जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 109 रन ही बना सकी। टीम के लिए शोर्ना अख्तर ने सर्वाधिक 22 रन बनाए। भारत के लिए दीप्ति शर्मा ने तीन और नन्दनी ने दो विकेट लिए। 150 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने अच्छी शुरुआत की है। दिलारा अख्तर और जुएरिया फिरदौस के बीच पहले विकेट के लिए 26 रन की साझेदारी हुई। श्री चरणी ने जुएरिया फिरदौस को आउट किया। उन्होंने 18 गेंद में 14 रन बनाए। दिलारा अख्तर 26 गेंद में 21 रन बनाकर आउट हुईं। शोभना मोस्टोरी ने 24 गेंद में 18 रन का योगदान दिया। निगर सुल्ताना ने 17 गेंद में 19 रन बनाए। शर्मिन अख्तर ने एक रन बनाया। फाहिमा 14 और रबैया खाता नहीं खोल सकीं। शोर्ना अख्तर ने 18 गेंद में नाबाद 22 रन बनाए। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को दूसरे ओवर में झटका लगा। टीम की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना दो रन ही बना सकीं। प्रतिका ने 20 रन बनाए। शेफाली वर्मा 40 गेंद में 64 रन बनाकर आउट हुईं। उन्होंने अपनी पारी में सात चौके और तीन छक्के लगाए। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष (16 गेंद में 21 रन) भी शुरुआत में धीमी रहीं, लेकिन उन्होंने महत्वपूर्ण रन जोड़ने में सफलता हासिल की। कप्तान हरमनप्रीत ने पारी के अंत में दो छक्के लगाए। बांग्लादेश के लिए सुल्ताना खातून ने दो जबकि राबिया खान, नाहिदा अख्तर और मारूफा अख्तर ने एक एक विकेट झटके। भारतीय महिला टीम और बांग्लादेश महिला टीम आमने-सामने है। बांग्लादेश की कप्तान निगार सुल्ताना ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व वाली भारतीय टीम ने जारी टूर्नामेंट में अपने सभी मुकाबले जीते हैं। जबकि बांग्लादेश की टीम ने दो मुकाबले जीते हैं और इतने ही मैच गंवाए हैं। बांग्लादेश की पारी बांग्लादेश को जीत के लिए 150 रनों का लक्ष्य मिला है। इसके जवाब में टीम ने अच्छी शुरुआत की है। जुएरिया फिरदौस ने 18 गेंद में 14 रन बनाए। श्री चरणी को पहली सफलता मिली। दिलारा अख्तर 26 गेंद में 21 रन बना सकीं। शोभना ने 24 गेंद में 18 रन का योगदान दिया। कप्तान निगर सुल्ताना ने 17 गेंद में 19 रन बनाए। शर्मिन अख्तर एक ही रन बना पाईं। स्पिन के मुफीद परिस्थितियों में भारत के लिए अनुभवी स्पिनर दीप्ति शर्मा ने चार ओवर में 26 रन देकर तीन विकेट चटकाए जबकि श्री चरणी और प्रेमा रावत को एक एक विकेट मिला। भारतीय पारी भारतीय टीम को दूसरे ओवर में स्मृति मंधाना के रूप में पहला झटका लगा है। उन्होंने5 गेंद में दो रन बनाए। वहीं दूसरी तरफ शेफाली वर्मा को दो जीवनदान मिल चुका है। भारत ने पावरप्ले में एक विकेट खोकर 45 रन बनाए। प्रतिका रावल 24 गेंद में 20 रन बनाकर रबैया की शिकार बनीं। शेफाली वर्मा ने 35 गेंद में 50 रन पूरे किए। हरमनप्रीत कौर और शेफाली क्रीज पर मौजूद हैं। सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा 40 गेंद में 64 रन बनाकर पवेलियन लौटीं। उन्होंने सात चौके और तीन छक्के लगाए। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 16 गेंद में 21 रन की पारी खेली। दीप्ति शर्मा ने 6 गेंद में 13 रन का योगदान दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 28 गेंद में 24 रन की पारी खेली। बांग्लादेश की ओर से सुल्ताना ने 2 विकेट लिए। शेफाली वर्मा ने लगाया अर्धशतक भारतीय सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने गुरुवार को बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में अर्धशतक लगाया। उन्होंने 35 गेंद में 5 चौके और दो छक्के की मदद से 50 रन पूरे किए। ये उनका 20वां टी20 इंटरनेशनल अर्धशतक है। दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन भारत महिला (प्लेइंग इलेवन): शैफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, प्रतिका रावल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), भारती फुलमाली, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, श्री चरणी, क्रांति गौड़, नंदनी शर्मा बांग्लादेश महिला (प्लेइंग इलेवन): दिलारा अख्तर, जुएरिया फिरदौस, शोभना मोस्टोरी, निगार सुल्ताना (विकेटकीपर/कप्तान), शर्मिन अख्तर, शोर्ना अख्तर, फाहिमा खातून, नाहिदा अख्तर, राबेया खान, सुल्ताना खातून, मारुफा अख्तर भारत-बांग्लादेश पहले सेमीफाइनल में किसने जीता टॉस बांग्लादेश ने गुरुवार को भारत के खिलाफ पहले सेमीफाइनल में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। हरमनप्रीत कौर ने टॉस के दौरान बताया कि उनकी टीम ने बदलाव नहीं किया है। महिला एशिया कप 2026 में भारत का सफर भारतीय टीम का एशिया कप 2026 में सफर शानदार रहा है। टीम ने तीन मुकाबले खेले हैं और सभी में जीत हासिल की है। हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व वाली भारतीय टीम इस नॉकआउट मुक़ाबले में जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। अपने पिछले मैच में भारत ने पाकिस्तान को सिर्फ 55 रनों पर ढेर कर दिया था और फिर आसानी से सात विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। इससे पहले टीम ने हांगकांग को 137 रनों से और थाईलैंड को 94 रनों से धोया था। बांग्लादेश भी सेमीफाइनल में पहुंचा बांग्लादेश का सेमीफाइनल तक का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने यूएई पर 34 रन की जीत के साथ अंतिम चार में अपनी जगह पक्की की। इससे पहले टीम ने इंडोनेशिया महिला टीम को 71 रनों से हराया था। जबकि दूसरे मैच में श्रीलंका के खिलाफ 4 विकेट से हार गई थी।

लद्दाख में सिंधु नदी पर भारत की बड़ी तैयारी, रॉक डैम से 4 करोड़ लीटर पानी होगा स्टोर

नई दिल्ली भारत का पहला 'रॉक चेक डैम' सिंधु नदी पर लद्दाख में बना रहा है. जिससे किसानों को आसानी से पानी मिलेगा. यह डैम बिना सीमेंट के सिर्फ प्राकृतिक पत्थरों से बनाया गया है. ऐसे में यह कदम न सिर्फ स्थानीय किसानों के लिए संजीवनी है, बल्कि पाकिस्तान की तरफ पानी बहने से पहले अपने जल संसाधनों का भरपूर उपयोग करने की भारत की नई रणनीति को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है. भारत ने एक तरह से पाकिस्तान को भी क्लीयर संदेश दिया है कि सिंधु नदी को लेकर अब पूरी तरह से रणनीति स्पष्ट है कि पानी का उपयोग भारत पूरी तरह से करने के लिए तैयार है।  बिना सीमेंट का है पूरा डैम लद्दाख में बना भारत का पहला रॉक डैम बिना सीमेंट और चूने का बनाया गया है. बल्कि नदी के तल के भारी पत्थरों  को आपस में इंटरलॉक करके इसे खड़ा किया गया है. जिसका सबसे ज्यादा फायदा लद्दाख के किसानों को होगा. सालों से लद्दाख के किसान वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान भारी जल संकट से जूझ रहे थे, सिंधु नदी का जलस्तर गहरी घाटियों में काफी नीचे चला जाता था, जिससे पंप से पानी खींचना बेहद मुश्किल था. पानी की इसी किल्लत ने खेती और किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी थी. लेकिन अब इस डैम के बनने से पानी का जलस्तर ऊंच रहेगा. सिंधु नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक चला गया है. डैम में 40 मिलियन यानि 4 करोड़ लीटर पानी जमा होगा. 'इगू फे' सिंचाई नहर के जरिए सूखे गांवों और खेतों की प्यास बुझा रहा है।  पाकिस्तान को कड़ा संदेश  एक तरफ लद्दाख में बना यह डैम किसानों को पानी उपलब्ध करा रहा है. तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए एक सख्त रणनीतिक संदेश है. यह दिखाता है कि भारत अब सिंधु के पानी का इस्तेमाल अपने सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए पूरी तेजी से कर रहा है. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया था. भारत ने साफ किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक यह समझौता बहाल नहीं होगा. अब इस पर भारत का सख्त मिजाज दिख रहा है।  लद्दाख में होगा पानी का इस्तेमाल  भारत ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में अपने जल अधिकारों का उपयोग तेज कर दिया. उपशी में पहले रॉक चेक डैम का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक आगे बढ़ा और सिंधु नदी पर कई अन्य पनबिजली परियोजनाओं को भी गति दी गई . लद्दाख प्रशासन अब जल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहा है. केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है जिसके तहत।  लद्दाख में ये 4 प्वाइंट अहम      लद्दाख में कुल 36 नए चेक डैम प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे.     लेह इलाके में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम बनेंगे.     कारगिल इलाके में 29 चेक डैम या वियर छोटी बांधनुमा संरचना का निर्माण होगा.     इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. 

भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, 10-11 सितंबर को दिल्ली पहुंचेगा बिजनेस डेलिगेशन

नई दिल्ली  भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ रहा है. यह प्रतिनिधिमंडल 10 और 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल (BRICS Business Council) और बिजनेस फोरम की बैठकों में हिस्सा लेगा. यह महत्वपूर्ण दौरा आगामी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करना और नए निवेश अवसरों की तलाश करना है।  व्यापार असंतुलन को पाटने पर मुख्य ध्यान इस दौरे का नेतृत्व 'साउथ अफ्रीकन ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल' (SABBC) की चेयरपर्सन बुसी माबुजा कर रही हैं. वर्तमान में दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापार अंतर है. साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका को भारत के साथ व्यापार में लगभग 3.18 अरब डॉलर (USD 3.18 billion) का व्यापार घाटा उठाना पड़ा था।  फिलहाल, दक्षिण अफ्रीका से भारत को मुख्य रूप से कोयला, मैंगनीज और केमिकल वुड पल्प जैसी कच्ची रॉ मैटेरियल का निर्यात किया जाता है. वहीं, भारत से दक्षिण अफ्रीका को पेट्रोलियम उत्पाद, गाड़ियां, दवाइयां और मशीनरी भेजी जाती है. दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल इस बार पारंपरिक 'क्रेता-विक्रेता' मॉडल को बदलकर सह-निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर देगा, ताकि वे भारत को ऊंचे मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों का निर्यात कर सकें।  इन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस दोनों देशों के बीच होने वाली बैठकों में कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर चर्चा की जाएगी     ऑटोमोटिव हब: भारतीय तकनीक और पूंजी का उपयोग करके दक्षिण अफ्रीका को एक क्षेत्रीय ऑटोमोटिव उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना।      फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य: दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में साझेदारी करना, ताकि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ सके।      अत्याधुनिक तकनीक और कौशल विकास: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्किल-एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करना।      हरित ऊर्जा: रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम स्थापित करना।      कृषि और पैकेजिंग: भारतीय बाजार में दक्षिण अफ्रीकी कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना और भारत की आधुनिक फूड प्रोसेसिंग व पैकेजिंग तकनीक को अपनाना।  'अफ्रीकी मुक्त व्यापार' और ब्रिक्स बैंक की भूमिका SABBC की चेयरपर्सन बुसी माबुजा के अनुसार, अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (AfCFTA) भारतीय कंपनियों के लिए पूरे अफ्रीका के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश करने का एक शानदार अवसर है. इसके अलावा, ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने दक्षिण अफ्रीका में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए 6.41 अरब रैंड से अधिक की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है, जिससे व्यापारिक साझेदारी को मजबूत आधार मिलेगा। 

इंदौर में भारत-वेस्टइंडीज T20 का रोमांच, 1000 से 12,500 रुपये तक टिकट; ऐसे करें ऑनलाइन बुकिंग

  इंदौर इंदौर शहर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच हो रहा है। अगर आप भी इस बार मैच का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो ऑनलाइन टिकट ले सकते हैं। इस मैच के लिए मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने टिकट दर घोषित कर दी है। सबसे महंगा टिकट 12500 रुपए का होगा, जबकि सबसे सस्ता 1000 रुपए का रहेगा। यह टिकट ऑनलाइन मिलेंगे। एक व्यक्ति अधिकतम चार टिकट खरीद सकेगा। ये रहेंगी टिकट की दरें 1000- ईस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर 1100- वेस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर 1250- ईस्ट गैलरी सेकंड फ्लोर 1350 – वेस्ट गैलरी सेकंड फ्लोर 1400- ईस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (रेगुलर) 1500- वेस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (रेगुलर) 1700- ईस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (प्रीमियम) 1800 – वेस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (प्रीमियम) 5500- साउथ पैवेलियन थर्ड फ्लोर 6500- साउथ पैवेलियन लोअर 7500- साउथ पैवेलियन सेकंड फ्लोर 8500- साउथ पैवेलियन फस्र्ट फ्लोर 11000- साउथ पैवेलियन फस्र्ट फ्लोर फूड बॉक्स हॉस्पिटैलिटी 12500- साउथ पैवेलियन लोअर लाइव हॉस्पिटैलिटी यहां से बुक कर सकते हैं टिकट ऑनलाइन टिकट बिक्री के लिए डिस्ट्रिक्ट बाय जोमैटो को अधिकृत किया है। दर्शक डिस्ट्रिक्ट मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से टिकट खरीद सकेंगे। टिकटों की कीमत 1000 से शुरू होकर 12500 तक रखी गई है। ईस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर का टिकट सबसे कम 1000 रुपए है, जबकि साउथ पैवेलियन लोअर लाइव हॉस्पिटैलिटी टिकट की कीमत 12500 रुपए है। साउथ पैवेलियन फस्र्ट फ्लोर 8500, सेकंड फ्लोर 7500 और थर्ड फ्लोर 5500 रुपए होगा। वहीं ईस्ट और वेस्ट गैलरी की अलग-अलग श्रेणियों के टिकट 1100 से 1800 रुपए के रखे गए हैं। टिकट सिंगल या अलग-अलग कैटेगरी के मिश्रित विकल्प में भी खरीदे जा सकेंगे। साइबर ठगों से सावधान रहने की चेतावनी मैच के टिकट के लिए MPCA और क्राइम ब्रांच ने संयुक्त रूप से एक एडवाइजरी जारी की है। ठगी करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया, टेलीग्राम और WhatsApp पर मैच के फर्जी टिकट बेचने वाले कई संदिग्ध लिंक सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए पुलिस और MPCA ने दर्शकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत लिंक पर क्लिक न करें और न ही जल्दबाजी में कोई भुगतान करें। टिकट बुक करने के लिए केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट से ही सत्यापन के बाद टिकट खरीदें, ताकि कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार न हो।

होर्मुज के बाद अब मलक्का पर भारत की नजर, सबांग पोर्ट से मजबूत होगी समुद्री रणनीति

 नई दिल्ली 32 किलोमीटर का एक समुद्री पैसेज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की राजनीति और कूटनीति में कैसे उथल-पुथल मचा सकता है. ईरान वॉर के दौरान इसे पूरी दुनिया ने देख लिया. ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर के मुल्कों का ईंधन सप्लाई चोक कर दिया. कच्चे तेल की कीमतें दनादन बढ़ने लगी. आखिर दुनिया की 20 फीसदी इंधन सप्लाई इसी होर्मुज से होती है।  अब भारत और इंडोनेशिया मिलकर हिंद महासागर में अपना 'होर्मुज' बनाएंगे. ये 'होर्मुज' स्ट्रेट ऑफ मलक्का के एंट्री पॉइंट पर स्थित है. यहां से भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित इंदिरा पॉइंट मात्र 100 मील की दूरी पर है. इस कदम के साथ भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर में चीन का सारा गेम प्लान बदल देंगे।  दरअसल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री रणनीति को नई धार देते हुए भारत और इंडोनेशिया ने सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है.  सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह को विकसित करने पर सहमति बनाई है. इसे आधुनिक रूप दिया जाएगा और इस द्वाप पर भारत का दखल बढ़ेगा।  इंडोनेशिया दौरे पर गए पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। सबांग बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार पर स्थित है.खास बात यह है कि सबांग पोर्ट भारत के महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से लगभग 100 मील की दूरी पर है।  आइए मलक्का स्ट्रेट को थोड़ा विस्तार से समझें और इसकी अहमियत को जानें चन्नई से दक्षिण पूर्व में आगे बढ़ते चले जाएं. एकदम आगे. चेन्नई के तट से समुद्री रास्ते पर आगे बढ़ें, तो जहाज पहले बंगाल की खाड़ी पार करता है, फिर अंडमान सागर की ओर जाता हुआ मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंचता है।  हजारों साल पहले, जब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मसालों की खुशबू समुद्री हवाओं के साथ फैल रही थी, तब नाविकों ने एक संकरे लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ते को पहचानना शुरू किया. यह स्ट्रेट यानी कि जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है।  आज यहां से दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत व्यापार होता है. इसमें तेल, चीनी सामान, कोयला और पाम ऑयल अहम है. सिंगापुर इसके दक्षिणी छोर पर स्थित विश्व का प्रमुख बंदरगाह है।  सबांग पोर्ट मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है. भारत के लिए इसका महत्व अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक है. भारत का पूर्वी एशिया जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ होने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. भारत के पेट्रोलियम उत्पादों, कोयले, मशीनरी और कंटेनर व्यापार के लिए यह समुद्री जीवनरेखा जैसा है. साथ ही “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क मजबूत करने में भी इसकी अहम भूमिका है।  वैश्विक स्तर पर यह स्ट्रेट ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धमनियों में गिना जाता है. पश्चिम एशिया से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस बड़ी मात्रा में इसी रास्ते से पूर्वी एशियाई देशों तक पहुंचता है।  Strait of Malacca से हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 2,800 अरब डॉलर का माल हर वर्ष गुजरता है. चीन के लिए क्या अहमियत है? चीन के लिए मलक्का जलडमरूमध्य उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन है. हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक रास्तों में से एक है. चीन के आयातित तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और अफ्रीका से इसी रास्ते होकर चीन पहुंचता है. इसके अलावा चीन के निर्यात-आधारित व्यापार का भी बड़ा हिस्सा मलक्का स्ट्रेट पर निर्भर है।   पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 2003 में "मलक्का दुविधा" का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि किसी संकट या युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बाधित हो जाए, तो चीन की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।  अब समझिए इसी मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर सबांग द्वीप है और इसकी द्वीप को भारत इंडोनेशिया के साथ मिलकर विकसित करेगा।  रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह समझौता केवल एक बंदरगाह विकास परियोजना नहीं, बल्कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री उपस्थिति का संकेत है।  सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित है और मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी मुहाने पर नजर रखता है. यहां से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर निगरानी रखना अपेक्षाकृत आसान है. भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. 2018 में भी भारत और इंडोनेशिया के बीच सबांग पोर्ट को लेकर सहयोग की रूपरेखा बनी थी, लेकिन अब दोनों देशों के संबंधों और इंडो-पैसिफिक की बदलती भू-राजनीति को देखते हुए इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है।  एक और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट दूसरी ओर सबांग बंदरगाह बता दें कि भारत अंडमान निकोबार में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यह भारत की एक महत्वाकांक्षी बहु-आयामी विकास योजना है, इसमें एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और आधुनिक टाउनशिप का निर्माण शामिल है, ताकि भारत मलक्का जलडमरूमध्य के पास एक प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब बन सके।   यह परियोजना भारत की व्यापारिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।  अब भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर सबांग पोर्ट को डेवलप करने की योजना बनाई है।  विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाओं का संयुक्त प्रभाव भारत को मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर रणनीतिक पहुंच प्रदान कर सकता है.  ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के अंडमान-निकोबार समूह का सबसे दक्षिणी हिस्सा है और वहां विकसित हो रहा ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा माना जाता है. दूसरी ओर सबांग पोर्ट में भारत की भागीदारी उसे इंडोनेशिया के साथ मिलकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर देगी।  चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स को भारत का जवाब इस समझौते का एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू भी है. पिछले एक दशक में चीन ने "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव" और "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति के … Read more

IND vs ENG: तीसरे T20 में भारत करेगा बड़े बदलाव? बिश्नोई OUT, प्रिंस यादव IN, वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका

नॉटिंघम आयरलैंड दौर पर शर्मनाक हार झेलनी वाली भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भी 0-1 से पीछे है. मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में आयोजित दूसरे टी20I में 190 रन बनाने के बावजूद मिली हार ने भारतीय टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और प्लेइंग-11 के कॉम्बिनेशन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  अब मंगलवार (7 जुलाई) को नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर होने वाले सीरीज के तीसरे टी20I मुकाबले में टीम मैनेजमेंट के सामने सही प्लेइंग-11 चुनने की बड़ी चुनौती होगी. पिछले मुकाबले में 60 रन लुटाने वाले लेग स्पिनर रवि बिश्नोई पर गाज गिर सकती है और उनकी जगह एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को मौका मिल सकता है. वहीं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी से भी डेब्यू की नाकामी को पीछे छोड़कर बड़ी पारी की उम्मीद होगी. मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा।  दूसरे टी20I मुकाबले में रवि बिश्नोई का प्रदर्शन टीम इंडिया की हार की बड़ी वजहों में से एक रहा था. उन्होंने अपने चार ओवरों में बिना कोई विकेट लिए 60 रन लुटाए. इंग्लैंड की पारी का 17वां ओवर मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसमें बिश्नोई ने 29 रन लुटाकर मुकाबले का रुख पूरी तरह पलट दिया. अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती के रहते इंग्लिश परिस्थितियों में तीसरे स्पेशलिस्ट स्पिनर को खिलाने का फैसला टीम पर भारी पड़ा।  …तो प्रिंस यादव की होगी एंट्री अब ट्रेंट ब्रिज में रवि बिश्नोई का प्लेइंग-11 से बाहर होना लगभग तय माना जा रहा है. उनकी जगह एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को मौका दिया जा सकता है. अगर बिश्नोई को प्लेइंग-11 से बाहर किया जाता है तो प्रिंस यादव को मौका मिलने की संभावना है. गेंद को मूव कराने की उनकी क्षमता इंग्लिश परिस्थितियों में टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. प्रसिद्ध कृष्णा भी एक विकल्प हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट में उनकी बैक ऑफ लेंथ गेंदों पर बड़े शॉट खेलना अपेक्षाकृत आसान रहा है. ऐसे में प्रिंस यादव को प्लेइंग-11 में शामिल किए जाने की संभावना ज्यादा लग रही है।  मैनचेस्टर में अर्शदीप सिंह ने तीन विकेट लेकर भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा था. उन्होंने अपने शुरुआती ओवर में ही फिल साल्ट और जोस बटलर को पवेलियन भेजकर इंग्लैंड को दो बड़े झटके दिए. हालांकि इसके बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने उनके एक ओवर में 27 रन बटोरकर पलटवार किया. इंग्लैंड ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए 191 रनों का लक्ष्य एक ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया. ऐसे में तीसरे मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों के सामने सिर्फ विकेट लेने की नहीं, बल्कि डेथ ओवर्स में रन रोकने की भी बड़ी चुनौती होगी।  वैभव सूर्यवंशी उड़ाएंगे गर्दा! तीसरे टी20I में एक बार फिर सबसे ज्यादा नजरें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर होंगी. वैभव अपने डेब्यू मुकाबले में 10 गेंदों पर 14 रन ही बना सके थे. हालांकि छोटी सी पारी में उन्होंने अपनी प्रतिभा और बेखौफ अंदाज की झलक जरूर दिखाई. वैभव ने जोफ्रा आर्चर और जोश टंग के खिलाफ छक्के जड़कर बता दिया कि उनके खेलने का अंदाज बदलने वाला नहीं है. अब इंटरनेशनल डेब्यू का दबाव खत्म हो चुका है. ऐसे में ट्रेंट ब्रिज की बैटिंग फ्रेंडली पिच पर वैभव के पास अपनी पहली बड़ी इंटरनेशनल पारी खेलने का शानदार मौका होगा।  इंग्लैंड दौरे पर भारतीय बल्लेबाजी में अगर किसी खिलाड़ी ने अपने स्वाभाविक अंदाज को बरकरार रखा है तो वह अभिषेक शर्मा हैं. उन्होंने पिछली दो पारियों में 59 और 43 रन बनाए हैं और दिलचस्प बात यह है कि दोनों इनिंग्स में उन्होंने 24-24 गेंदों का सामना किया. इंग्लैंड के गेंदबाज जहां अतिरिक्त उछाल, पिच से मिल रही मूवमेंट और गति में बदलाव से बाकी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर रहे हैं, वहीं अभिषेक ने शुरू से ही आक्रामक क्रिकेट खेला है. वैभव और अभिषेक की विस्फोटक ओपनिंग जोड़ी अगर ट्रेंट ब्रिज में लंबी साझेदारी करती है तो इंग्लैंड के गेंदबाजों पर शुरुआती ओवरों में ही दबाव बनाया जा सकता है।  कप्तान श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने इस दौरे पर कुछ रन जरूर बनाए हैं, लेकिन दोनों बल्लेबाज अब तक इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण पर पूरी तरह हावी नहीं हो पाए हैं. भारतीय बल्लेबाज पिछले छह महीने में ज्यादातर सपाट पिचों पर खेले हैं. अब इंग्लैंड में उन्हें अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और सैम करन जैसे गेंदबाजों की वैरिएशन के खिलाफ संघर्ष करना पड़ रहा है. तिलक वर्मा ने मैनचेस्टर में 11 गेंदों पर नाबाद 24 रनों की तेज पारी जरूर खेली थी, लेकिन बीच के ओवरों में इंग्लैंड के स्पिनर्स और धीमी गेंदों के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों को बेहतर रणनीति के साथ उतरना होगा।  श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया अब तक चार टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुकी है, जिसमें उसे तीन में हार मिली. जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हुआ. आयरलैंड के खिलाफ भारत को 0-2 से सीरीज गंवानी पड़ी. इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहला टी20I बारिश के कारण धुल गया और दूसरे मुकाबले में भारत को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में तीसरा टी20I सिर्फ सीरीज में वापसी के लिहाज से ही नहीं, बल्कि कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी बेहद अहम होने वाला है।  मुकाबले में भारत की संभावित प्लेइंग-11: अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, हर्षित राणा, अक्षर पटेल, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती।  इंग्लैंड की प्लेइंग-11: फिल साल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद और जोश टंग।