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जेनेवा में भारत ने पाकिस्तान और OIC को घेरा, UNHRC में PoK पर दिया करारा जवाब

 जेनेवा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने पाकिस्तान के सभी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का ये प्रोपेगैंडा उसकी अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश है।  दरअसल, पाकिस्तान ने UNHRC में कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया और जम्मू-कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे।  इसके जवाब में UN में भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा किए गए दावों पलटवार करते हुए कहा, 'भारत को पाकिस्तान और OIC द्वारा हमारे खिलाफ दिए गए बयानों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है. हम पाकिस्तान के बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं और हम OIC द्वारा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ को भी पूरी तरह खारिज करते हैं।  OIC के कोऑर्डिनेटर पद का गलत इस्तेमाल अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान द्वारा OIC कोऑर्डिनेटर की भूमिका का गलत इस्तेमाल केवल उसके इस धोखे को और पुख्ता करता है. भारत की ऐसे किसी भी प्रोपेगैंडा को कोई अहमियत देने की इच्छा नहीं है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों की वापसी है।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का ये झूठा प्रचार उसके अवैध कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे दमन की कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने आने से कभी नहीं छिपा सकता।  भारत ने मानवाधिकार परिषद के सामने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की दयनीय स्थिति को मजबूती से रखा. अनुपमा सिंह ने कहा कि रावलकोट में चल रही त्रासदी, सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की हत्या और वहां की गई बेरहम कार्रवाई उस सिस्टम का नतीजा है जो जबरदस्ती के अवैध कब्जे पर बना है. दशकों से सेना के कब्ज़े, डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग और बुनियादी आजादी से इनकार के कारण वहां के हालात बदतर हो चुके हैं।  'अधिकारों का मांग वालों पर चलाई गोलियां' काउंसिल में बात रखते हुए भारतीय राजनयिक ने कहा कि वहां हालात ऐसे मोड़ पर आ गए हैं, जहां आम जनता द्वारा रोटी, बिजली, अधिकारों और सम्मान की मांग का जवाब गोलियों और बेरहमी से दिया जाता है. एक अवैध और गैर-कानूनी कब्जा सिर्फ ताकत के दम पर ही कायम रखा जा सकता है. उन्होंने पाकिस्तान को एक 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का जीता-जागता उदाहरण बताया जो अपने ही बनाए आतंकवाद से परेशान है।  Pak ने आतंकवाद को बनाया सरकारी नीति अनुपमा सिंह ने कहा कि ये वही देश है, जिसके मौजूदा रक्षा मंत्री आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने और उन्हें तैनात करने की डींगें मारते हैं जो वहां की एक सरकारी नीति है. इसके बावजूद पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है, जो एक बड़ा विरोधाभास है।  सिंधु जल संधि पर भारत का रुख इसके साथ ही उन्होंने सिंधु जल संधि को पुरानी बताते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश सद्भावना और दोस्ती पर आधारित सहयोग की उम्मीद नहीं कर सकता।  जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर, टेक्नोलॉजी में तरक्की और टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत के कारण 1960 में हुई इस संधि की प्रासंगिकता पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है. अंत में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय इलाकों पर नजर रखने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने घर को ठीक करे, क्योंकि इस काउंसिल में उसके दिखावे का आकर्षण खत्म हो चुका है। 

ट्रंप की नई चाल का खुलासा! ब्रह्मा चेलानी बोले- भारत के बढ़ते प्रभाव से बदली अमेरिकी रणनीति

नई दिल्ली अमेरिका रंग बदल रहा है. जिस भारत-अमेरिका दोस्ती के कसीदे पढ़े जाते थे, उसका हनीमून पीरियड अब खत्म होता दिख रहा है. अमेरिका ने एक झटके में इंडो-पैसिफिक कमांड से ‘इंडो’ शब्द ही गायब कर दिया है. लेकिन इसमें एक मैसेज भी है. ऐसा लग रहा है क‍ि अमेर‍िका भारत के दबदबे से घबरा रहा है. इसल‍िए डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ चीन से अपनी सेटिंग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत को दबाने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान को खाद-पानी देने की तैयारी में हैं.कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी और पूर्व व‍िदेश सच‍िव न‍िरुपमा राव ने इस मूव को समझाने की कोश‍िश की है।  ब्रह्मा चेलानी ने क्या कहा? ब्रह्मा चेलानी ने एक्‍स पर ल‍िखा, पेंटागन के इंडो शब्द को हटाने और वापस यूएस पैसिफिक कमांड नाम अपनाने के फैसले, साथ ही हाल की यूएस नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भारत का ज‍िक्र न के बराबर होने से साफ नजर आ रहा क‍ि अमेर‍िका भारत को क‍ितनी अहमियत देता है. ऐसा लगता है कि अब यह रिश्ता किसी साझी सोच पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से सौदेबाजी यानी लेन-देन पर टिका है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ट्रंप चीन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोश‍िश कर रहे हैं. इसके साथ ही, इस इलाके में किसी एक ताकत (यानी भारत) का दबदबा न बन पाए, इसे रोकने के लिए ट्रंप को एक बार फिर पाकिस्तान की उपयोगिता याद आ गई है।  पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने क्या कहा? न‍िरुपमा राव ने एक्‍स पर ल‍िखा, मुद्दा यह है कि क्या अमेरिका अब भी भारत को इस इलाके की व्यवस्था बनाने वाला साझीदार मानता है या फिर अमेरिकी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई मोहरों में से सिर्फ एक उपयोगी मोहरा? यह एक बिल्कुल अलग बात है. और यह पीएम मोदी के उस बयान से पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें उन्होंने भरोसे की बात कही थी।  अगर हम हाल के कई इशारों को एक साथ देखें, तो एक बड़ी तस्वीर बनती है. ट्रंप का भारत को डेड इकॉनमी कहना. रायसीना डायलॉग में अमेरिकी अधिकारी लैंडौ की वह चेतावनी कि अमेरिका भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा. भारतीय नाविकों की मौत और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के साथ हुई तीखी बहस. G7 सम्मलेन में दिखा रुखापन और ठंडी तस्वीरें. पीएम मोदी का दुनिया में भरोसे की कमी होने पर जोर देना. और अब इंडो-पैसिफिक के प्रतीक को ही छोटा कर देना. इनमें से कोई भी एक बात अपने आप में रिश्ते टूटने का सबूत नहीं है. लेकिन जब इन सबको मिलाकर देखा जाता है, तो साफ पता चलता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों का सुनहरा और जोशीला दौर अब खत्म हो रहा है. यह रिश्ता अब ज्यादा सामान्य, ज्यादा मतलब का, लेन-देन वाला और शायद काफी ज्यादा मुश्किल होने वाला है।  भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?     एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि भारत को अब यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि अमेरिका उसका पक्का दोस्त है. अमेरिका भारत को सिर्फ तब तक पूछेगा, जब तक उसका फायदा है. जरूरत खत्म, तो दोस्ती खत्म।      सबसे बड़ा खतरा यह है कि अमेरिका इस इलाके में भारत को बॉस नहीं बनने देना चाहता. भारत को उलझाए रखने के लिए अमेरिका फिर से पाकिस्तान को ताकत और समर्थन दे सकता है।      ट्रंप चीन से लड़ने के बजाय उससे अपने व्यापारिक सौदे सेट करने में लगे हैं. अगर चीन के साथ अमेरिका की डील पक्की हो गई, तो अमेरिका को भारत की कोई खास जरूरत नहीं रह जाएगी।      पीएम मोदी ने भरोसे की कमी की जो बात कही थी, वह बिल्कुल सच साबित हो रही है. भारत को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी. अमेरिका के भरोसे बैठकर हम अपनी सुरक्षा खतरे में नहीं डाल सकते।   

बल्ले और गेंद से चमकी इंडिया A, तिलक-प्रियांश के धमाके के बाद निशांत सिंधु ने अफगानों की उड़ाई धज्जियां

  दांबुला श्रीलंका A के खिलाफ सुपर ओवर में दिल तोड़ने वाली हार झेलने के दो दिन बाद इंडिया A ने जोरदार वापसी की. दांबुला में बुधवार (17 जून) को खेले गए 'करो या मरो' के मुकाबले में भारतीय टीम ने अफगानिस्तान A को 101 रन से हराकर त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल (21 जून) में जगह पक्की कर ली. इंड‍िया ए के सामने सिर्फ जीत हासिल करने की चुनौती नहीं थी, बल्कि नेट रन रेट के समीकरण के तहत अफगानिस्तान को 236 रन के भीतर रोकना भी जरूरी था. टीम ने दोनों काम शानदार अंदाज में पूरे किए।  पहले बल्लेबाजी करते हुए इंडिया A ने 50 ओवर में 9 विकेट पर 319 रन बनाए. कप्तान तिलक वर्मा, प्रियांश आर्य और कुमार कुशाग्र ने अर्धशतक जड़कर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. जवाब में अफगानिस्तान A की टीम 36.5 ओवर में 218 रन पर ऑलआउट हो गई. भारत की जीत के हीरो रहे बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर निशांत सिंधु, जिन्होंने 31 रन देकर 4 विकेट झटके।  अफगानिस्तान के कप्तान इमरान मीर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और शुरुआती ओवरों में वैभव सूर्यवंशी को खूब परेशान किया. 15 वर्षीय बल्लेबाज पहले ही गेंद पर बीट हुए. दूसरे ओवर में उन्हें जीवनदान मिला, जब पॉइंट पर लिया गया शानदार कैच टीवी अंपायर ने ग्राउंड टच होने की संभावना के चलते नॉट आउट करार दिया. अगले ही ओवर में शॉर्ट फाइन लेग पर उनका एक और कैच छूट गया. उस समय वह सिर्फ 7 रन पर थे।  हालांकि सूर्यवंशी ने इन मौकों का फायदा उठाते हुए कुछ आक्रामक शॉट लगाए. उन्होंने अब्दुल्लाह अहमदजई और फरीदून दावूदजई की गेंदों पर दो शानदार छक्के जड़े. भारत की पारी में लगे तीन छक्कों में से दो उनके बल्ले से निकले. लेकिन आठवें ओवर में दावूदजई की शॉर्ट गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में वह पॉइंट पर कैच दे बैठे. उन्होंने 38 रन बनाए और गेंदबाज ने उनका विकेट लेने के बाद फिंगर-ऑन-द-लिप्स सेलिब्रेशन किया।  प्रभसिमरन सिंह की जगह प्लेइंग इलेवन में आए प्रियांश आर्य शुरुआत से ही शानदार लय में दिखे. अफगान गेंदबाजों ने ऑफ स्टंप के बाहर लगातार गेंदें फेंकी आर्य ने इसका पूरा फायदा उठाया. उन्होंने सिर्फ 34 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया. 15वें ओवर में फारमनुल्लाह ने उन्हें पॉइंट पर कैच आउट कराया. आर्य ने 58 रन बनाए और जब वह आउट हुए तब भारत का स्कोर 115 रन था।  इसके बाद पहली बार इस सीरीज में खेल रहे कुमार कुशाग्र ने कप्तान तिलक वर्मा के साथ पारी को संभाला. दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी की. गुजरात टाइटन्स  के लिए आईपीएल 2026 में सिर्फ एक मैच खेलने वाले कुशाग्र ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए ड्राइव, स्वीप और फुटवर्क का बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने 67 गेंदों में 58 रन बनाए. हालांकि आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में दावूदजई ने उन्हें बोल्ड कर दिया।  तिलक वर्मा ने शुरुआत में संयम दिखाया. एक समय वह 15 गेंदों पर सिर्फ 8 रन बनाकर खेल रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने रफ्तार बढ़ाई और 67 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. यह इस सीरीज में उनकी चार पारियों में तीसरी फिफ्टी रही. ऋतुराज गायकवाड़ के 30 रन पर आउट होने के बाद तिलक ने मध्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली और स्पिनरों के खिलाफ स्ट्राइक रोटेट करते हुए पारी को आगे बढ़ाया. उनके 59 रन भारत के बड़े स्कोर की नींव बने।  तिलक के आउट होने के बाद भारत की रनगति थोड़ी धीमी पड़ी, लेकिन निशांत सिंधु और विप्र निगम की उपयोगी पारियों ने टीम को 319 रन तक पहुंचा दिया. अफगानिस्तान की ओर से फारमनुल्लाह और अब्दुल्लाह अहमदजई ने दो-दो विकेट लिए।  कैसा रहा अफगान‍िस्तान का रनचेज  320 रन के टारगेट का पीछा करते हुए अफगानिस्तान ने शुरुआत में मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा. यश ठाकुर और अंशुल कंबोज ने दोनों ओपनरों को पवेलियन भेजा, लेकिन कप्तान इमरान मीर ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 27 गेंदों पर 32 रन बनाए. पावरप्ले के आखिरी ओवर में निशांत सिंधु ने उन्हें स्लॉग स्वीप के प्रयास में आउट कर भारत को बड़ी सफलता दिलाई।  इसके बाद बाहिर शाह और फैसल शिनोजाजा ने चौथे विकेट के लिए 76 गेंदों में 87 रन जोड़कर भारत की मुश्किलें बढ़ा दीं. दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया और 25वें ओवर तक स्कोर 3 विकेट पर 157 रन पहुंचा दिया।  यहीं से मैच का रुख बदल गया. बाएं हाथ के स्पिनर ऑलराउंडर अनुकूल रॉय ने फैसल शिनोजाजा को 46 रन पर अपना ही कैच पकड़कर आउट किया और भारत को वापसी का मौका दिलाया. बाहिर शाह ने 52 गेंदों पर 57 रन बनाकर अर्धशतक पूरा किया, लेकिन विपराज निगम ने अपनी लेग स्पिन से उनका विकेट लेकर अफगानिस्तान की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया।  इसके बाद निशांत सिंधु ने पुराने गेंद के साथ अफगानिस्तान की निचली बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया. उन्होंने 31 रन देकर 4 विकेट लिए, जबकि यश ठाकुर ने 2 विकेट झटके. विपराज निगम और अनुकूल रॉय ने भी महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं. नतीजा यह रहा कि 157/3 की मजबूत स्थिति में दिख रही अफगानिस्तान A की टीम अगले 61 रन के भीतर अपने बाकी सात विकेट गंवा बैठी और 218 रन पर सिमट गई।  101 रन की इस बड़ी जीत के साथ इंडिया A ने न सिर्फ फाइनल में जगह बनाई, बल्कि टूर्नामेंट में अपनी दावेदारी भी मजबूत कर दी. सुपर ओवर की निराशा के बाद भारतीय टीम ने जिस अंदाज में वापसी की, उसने फाइनल से पहले उसके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दे दी है।   

शुभमन गिल और ईशान किशन का धमाका, अफगानिस्तान पर बड़ी जीत के साथ Team India ने जीती सीरीज

लखनऊ  टीम इंडिया ने बुधवार को दूसरे वनडे में अफगानिस्तान के परखच्चे उड़ा दिए। भारत ने लखनऊ के मैदान पर 170 रनों से दमदार जीत हासिल की। शुभमन गिल और ईशान किशन ने 'शतकीय बम' फोड़े, जिससे भारत ने 403 रन का विशाल टारगेट दिया। जवाब में अफगानिस्तान टीम 44.3 ओवर में 232 रन ही जुटा सकी। दरविश रसूली (6) रिटायर्ड आउट हुए। अफगानिस्तान की ओर से सर्वाधिक रन रहमत शाह (89 गेंदों में 79, आठ चौके) ने बनाए। भारत के लिए गुरनूर बराड़ और अर्शदीप सिंह ने तीन-तीन शिकार किए। डेब्यूटेंट प्रिंस यादव को दो सफलता मिली। वॉशिंगटन सुंदर ने एक विकेट हासिल किया। विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए अफगानिस्तान ने सधी हुई शुरुआत की। रहमानुल्लाह गुरबाज और इब्राहिम जादरान ने पहले विकेट के लिए 52 रनों की साझेदारी की। गुरनूर बराड़ ने आठवें ओवर में गुरबाज का शिकार किया। उन्होंने 33 गेंदों में सात चौकों और एक छक्के की मदद से 41 रन बनाए। अर्शदीप सिंह ने 14वें ओवर में इब्राहिम जादरान (31 गेंदों में 21) को पवेलियन भेजा। वॉशिंगटन सुंदर ने 24वें ओवर में सेदिकुल्लाह अटल (50 गेंदों में 42) को एलबीडब्ल्यू किया। उन्होंने रहमत शाह के संग तीसरे विकेट के लिए 47 रनों की साझेदारी की। दरविश रसूली (6) रिटायर्ड हर्ट हो गए हैं। गुरनूर ने 26वें ओवर में कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी (4) को बोल्ड किया। डेब्यूटेंट प्रिंस यादव ने 31वें ओवर में नांगेयालिया खरोटी (6) को बोल्ड किया। राशिद खान (12), सलीम सफी (9) और अल्लाह गनजफर (1) सस्ते में लौटे। प्रिंस ने रहमत शाह को गुरनूर के हाथों लपकवाया और अफगानिस्तान की पारी को समेटा। इससे पहले, भारतीय टीम 49.5 ओवर में 402 पर सिमटी। शुभमन गिल और ईशान किशन ने अफगानी गेंदबाजों को कूटा। दोनों ने शतकीय पारी खेली। भारत ने आठवीं बार वनडे क्रिकेट में 400 रनों का आंकड़ा पार किया है। अफगानिस्तान के लिए नांगेयालिया खरोटी ने चार और राशिद खान ने तीन विकेट चटकाए। टॉस गंवाकर बैटिंग करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। यशस्वी जायसवाल मौके को भुना नहीं पाए। उन्होंने 9 गेंदों में 4 रन बनाए और दूसरे ओवर में सलीम सफी का शिकार बने। इसके बाद, रोहित शर्मा ने शुभमन के साथ दूसरे विकेट के लिए 87 रनों की साझेदारी की। रोहित दो रन से फिफ्टी से चूक गए। उन्होंने 39 गेंदों में छह चौकों और दो छक्कों की मदद से 48 रन बटोरे। उन्हें राशिद ने 14वें ओवर में बोल्ड किया। शुभमन ने ईशान किशन के साथ बखूबी मोर्चा संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 224 रनों की साझेदारी की। ईशान ने 79 गेंदों में 125 रन जुटाए, जिसमें 14 चौके और सात छक्के हैं। उन्हें नांगेयालिया खरोटी ने 37वें ओवर में पवेलियन भेजा। खरोटी ने 43वें ओवर में शुभमन और केएल राहुल का शिकार किया। गिल ने 110 गेंदों में 22 चौकों और दो छक्कों की मदद से 154 रन बटोरे। राहुल का खाता नहीं खुला। खरोटी ने 45वें ओवर में श्रेयस अय्यर (24 गेंदों में 26) को आउट किया। गुरनूर बराड़ (3) और अर्शदीप सिंह (3) दहाई अंक में नहीं पहुंचा जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने 19 गेंदों में 19 रन का योगदान दिया। प्रिंस यादव (5) भारत की ओर से आउट होने वाले आखिरी प्लेयर रहे। अफगानिस्तान: 232/10 (44.3 ओवर) भारत: 402/10 (49.5 ओवर)

होर्मुज मार्ग खुला, भारत की बढ़ी ऊर्जा सुरक्षा; भरपूर LNG से दूर होगी गैस की किल्लत

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता और इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बीच भारत के लिए डबल खुशखबरी आई है. एक तरफ तो होर्मुज में महीनों से फंसे तेल-गैस भरे जहाज अब वहां से भारत की तरफ से रवाना होने लगे हैं. इसमें पहले जहाज दिशा 62000 हजार क्यूबिक टन एलएनजी लेकर होर्मुज पार करके भारत के सफर पर निकल चुका है और इसके साथ 34 दूसरे जहाजों की भी रवानगी का रास्ता साफ हो चुका है. वहीं इस बीच दुनिया के सबसे बड़े एनएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यातकों में शामिल कतर ने संकेत दिया है कि जैसे ही होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी, वह रिकॉर्ड गति से गैस उत्पादन बढ़ाना शुरू कर देगा. इसका सीधा फायदा भारत जैसे बड़े आयातक देशों को मिलने वाला है।  बिजनस समाचार आउटलेट ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी ने अपने खरीदारों को बताया है कि होर्मुज के सुरक्षित रूप से खुलने के एक महीने के भीतर वह अपनी एनएलजी उत्पादन क्षमता को करीब 50 फीसदी तक बहाल कर देगी. इसके बाद अगले एक महीने में उत्पादन बढ़ाकर लगभग 80 फीसदी तक पहुंचाने की योजना है. यानी सिर्फ दो महीने के भीतर दुनियाभर के बाजार में गैस की आपूर्ति तेजी से बढ़ सकती है।  भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित एनएलजी से पूरा करता है और इसमें कतर उसकी सबसे बड़ी सप्लाई लाइनों में से एक है. भारत और कतर के बीच लंबे समय से गैस आपूर्ति का समझौता है. ऐसे में कतर से सप्लाई बढ़ने का मतलब है कि भारत को गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उद्योगों, बिजली उत्पादन तथा शहरों में गैस वितरण पर दबाव कम होगा।  हाल के महीनों में ईरान की इजरायल और अमेरिका के साथ जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुक गई है. इसकी वजह से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी और LNG की आपूर्ति पर भी असर पड़ा था।  दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब फिर होगा एक्टिव कतर का रास लाफान (Ras Laffan) एलएनजी कॉम्प्लेक्स दुनिया की सबसे बड़ी गैस निर्यात सुविधाओं में गिना जाता है. पिछले साल अकेले इसी परिसर से दुनिया की कुल LNG आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात किया गया था. लेकिन मार्च में ईरानी मिसाइल हमलों और उसके बाद क्षेत्रीय संघर्ष के चलते इस विशाल परियोजना का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ।  युद्ध के शुरुआती दिनों में कतर को अपने एनएलजी टर्मिनलों का संचालन सीमित करना पड़ा था. होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण बड़े गैस जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी. नतीजतन वैश्विक बाजार में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया।  हालात सामान्य होने में लगेगा समय हालांकि कतर तेजी से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन पूरी क्षमता से वापसी में अभी समय लगेगा. जानकारी के अनुसार रास लाफान संयंत्र की दो उत्पादन इकाइयों को गंभीर नुकसान पहुंचा था. इनकी मरम्मत और पूर्ण बहाली में कई साल लग सकते हैं।  फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि एक महीने में 50 फीसदी और दो महीने में 80 फीसदी क्षमता तक पहुंचना उम्मीद से कहीं तेज रिकवरी है. यही वजह है कि ऊर्जा बाजार इस खबर को बेहद सकारात्मक मान रहा है।  सस्ती हो जाएगी गैस अगर कतर योजना के मुताबिक उत्पादन बढ़ाने में सफल रहता है और होर्मुज मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इसका फायदा भारत को सस्ती गैस और ऊर्जा सुरक्षा के रूप में मिल सकता है।  यानी भारत के लिए यह सचमुच ‘डबल खुशखबरी’ है. एक तरफ होर्मुज के खुलने से सप्लाई चेन सामान्य होगी, दूसरी तरफ कतर से LNG की भारी आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है. इससे हाल के महीनों में बनी गैस की किल्लत और बाजार की अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो सकती है। 

ईंधन से लेकर फर्टिलाइज़र तक राहत की उम्मीद, US-Iran तनाव कम होने का भारत को डबल फायदा

नई दिल्ली क्या आप जानते हैं कि खाड़ी देशों में होने वाले तनाव का सीधा असर आपकी रसोई और जेब पर कैसे पड़ता है? जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा था तो भारत में सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि दूध, सब्जी से लेकर हवाई टिकट तक सब कुछ महंगा हो गया. लेकिन अब चूंकि यह युद्ध खत्म होने जा रहा है, तो अब क्या-क्या सस्ता होगा? यहां हम उन चीजों की लिस्ट दे रहे हैं।   1. रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर (LPG): भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी खाड़ी देशों से आयात करता है. युद्ध के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रोपेन और ब्यूटेन (एलपीजी के मुख्य घटक) की कीमतें 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पार कर गई थीं. तनाव खत्म होने से यह कीमत गिरकर 550-600 डॉलर के दायरे में आ सकती हैं, जिससे घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में 70 से 100 रुपये तक की कटौती देखने को मिल सकती है. हालांकि सरकार पहले से ही सिलेंडर पर सब्सिडी देती है, तो ऐसे में देखना होगा कि क्या सरकार इसे आम लोगों तक पास करेगी, या नहीं।  2. विदेशी फल और ड्राई फ्रूट्स (खजूर और अंजीर): भारत सालाना करीब 90 हजार से 1 लाख मीट्रिक टन खजूर ईरान और खाड़ी देशों से मंगाता है. समुद्री नाकेबंदी के कारण भारतीय थोक बाजारों में कीमिया और मजलूम खजूर के दाम 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए थे. रूट खुलते ही सप्लाई सामान्य होने से इनके थोक और रिटेल दामों में 25 से 30 फीसदी की सीधी गिरावट आने की संभावना है।  3. सीएनजी और पीएनजी (CNG & PNG): भारत अपनी कुल नेचुरल गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा (LNG के रूप में) कतर और यूएई जैसे देशों से इम्पोर्ट करता है. युद्ध के डर से स्पॉट एलएनजी की कीमतें 15-18 डॉलर प्रति mmBtu (Million British Thermal Units) तक पहुंच गई थीं. अब वैश्विक बाजार में गैस की कीमत घटकर 9-10 डॉलर प्रति mmBtu के स्तर पर आने की संभावना है, जिससे घरेलू स्तर पर सीएनजी और पीएनजी के दाम 4 से 6 प्रति किलो/Scm तक सस्ते हो सकते हैं।   4. रासायनिक उर्वरक (Chemical Fertilizers): भारत सालाना लगभग 70 से 80 लाख टन यूरिया और फॉस्फेटिक खादों का आयात करता है, जिसमें ओमान और सऊदी अरब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. सप्लाई चेन टूटने से प्रति टन आयात लागत में 50 से 70 डॉलर का उछाल आया था. होर्मुज रूट खुलने से फर्टिलाइजर कंपनियों की इनपुट कॉस्ट 12 से 15 प्रतिशत तक कम होगी, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ घटेगा और खुले बाजार में खाद की किल्लत खत्म होगी।  5. प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्रियां (Polymers): भारतीय प्लास्टिक उद्योग अपनी जरूरत का लगभग 40% पॉलीमर और प्लास्टिक दाना खाड़ी देशों की पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों से मंगाता है. कच्चे तेल के 125 डॉलर होने से पॉलिमर के दाम 20% तक महंगे हो गए थे. कच्चे तेल की कीमतें 75-80 डॉलर के सामान्य स्तर पर आने से प्लास्टिक इनपुट कॉस्ट में 15% तक की कमी आएगी, जिससे पैकेजिंग मैटेरियल सीधे सस्ते होंगे।  6. हवाई सफर (Air Tickets): किसी भी एयरलाइंस कंपनी के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 40% हिस्सा अकेले एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) पर खर्च होता है. क्रूड के 125 डॉलर पार जाने से एटीएफ की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर थीं. कच्चे तेल में गिरावट के बाद एटीएफ की कीमतों में 10% से 12% की कटौती तय है, जिससे एयरलाइंस कंपनियां हवाई किराए (Airfares) में 8% से 10% तक की कमी कर सकती हैं।  7. स्क्रैप मेटल और रीसाइक्लिंग उत्पाद: भारत यूएई और खाड़ी देशों से हर साल लाखों टन एल्युमिनियम और कॉपर स्क्रैप इम्पोर्ट करता है. युद्ध के दौरान समुद्री जहाजों का भाड़ा (Freight Rate) और वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम 300% तक बढ़ गया था. शिपिंग रूट सामान्य होने से माल ढुलाई का भाड़ा 30% तक कम होने की संभावना है, जिससे घरेलू रिसाइक्लिंग यूनिट्स को कच्चा माल 8 से 10 प्रतिशत सस्ता मिलेगा।  8. इंडस्ट्रियल सल्फर (Industrial Sulfur): रबर और केमिकल इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी सल्फर का भारत एक बड़ा आयातक है. खाड़ी देशों से सप्लाई रुकने से भारत में सल्फर की घरेलू कीमतें 18% से 22% तक उछल गई थीं. रिफाइनरियों में उत्पादन सामान्य होने और शिपमेंट शुरू होने से इंडस्ट्रियल सल्फर के दाम 15% तक नीचे आ सकते हैं।   9. पेंट्स और कोटिंग्स (Paints & Solvents): पेंट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे रेजिन और सॉल्वैंट्स) का करीब 50% हिस्सा पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स होता है. कच्चे तेल और गैस के दाम टूटने से पेंट कंपनियों की कुल मैन्युफैक्चरिंग लागत में 6 से 8 प्रतिशत की कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा वे उपभोक्ताओं को कीमतों में कटौती या डिस्काउंट के रूप में देंगी।  10. ऑनलाइन डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाएं: भारत का लॉजिस्टिक्स इंडेक्स सीधे तौर पर ईंधन और परिचालन लागत से जुड़ा है. वैश्विक ऊर्जा संकट थमने से माल ढुलाई इंडेक्स (Freight Index) में 7 से 10 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है. इसका सीधा असर ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों पर पड़ेगा, जिससे डिलीवरी चार्जेस और कूरियर फीस में 5 से 8 प्रतिशथ तक की राहत मिल सकती है। 

भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार! इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रोकने की क्षमता से बढ़ी सैन्य ताकत

 नई दिल्ली भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की 'नेक्स्ट-जेनरेशन' की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है।  इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है।  इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।  क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता? मिसाइल डिफेंस की भाषा में 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…     एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है।      एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है।  DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं।  ICBM को रोकने वाला 'एलीट क्लब': भारत की बड़ी वैश्विक छलांग इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है।  अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका 'बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस'सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।     नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का 'मेडन फ्लाइट-टेस्ट' यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।    यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है।  वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया।  इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।   भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

3 भारतीय नागरिकों की मौत से बढ़ा तनाव, UN ने भी अमेरिका को सुनाई खरी-खरी; नियम-कायदों की दिलाई याद

नई दिल्ली ओमान तट के पास एक कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। नागरिकों की जान जाने की इस गंभीर घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी उप-राजदूत जेसन मीक्स को दोबारा तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया है। पिछले कुछ ही दिनों में यह दूसरी बार है जब भारत ने किसी अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है। 30 मिनट तक चला कड़ा कूटनीतिक विरोध विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने जेसन मीक्स को तलब किया। यह बैठक लगभग 40 मिनट तक चली, जिसमें भारत ने कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले और उसमें तीन भारतीयों के मारे जाने पर अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। चूंकि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं, इसलिए उनकी जगह जेसन मीक्स को यह कूटनीतिक विरोध सौंपने के लिए बुलाया गया। अमेरिका ने जहाजों पर हमला किया; टाइमलाइन     8 जून: अमेरिकी हमले में जहाज 'मैरीवेक्स' निशाना बना; 24 भारतीय क्रू सदस्यों को बचाया गया     9 जून: 'एमटी सेटेबेलो' पर हमला; 3 भारतीयों की मौत, 21 को बचाया गया     10 जून: अमेरिकी CdA मीक्स को तलब किया गया     11 जून: 'एमटी जलवीर' पर हमला; 20 भारतीय क्रू सदस्यों को बचाया गया     12 जून: अमेरिकी CdA मीक्स को तलब किया गया निशाना बने तीन प्रमुख जहाज और भारतीयों की मौत हालिया विवाद मुख्य रूप से तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों से जुड़ा है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल मौजूद था। 'Settebello' पर हमला और मौतें: बुधवार को ओमान के सोहर बंदरगाह के पास इस पलाऊ-झंडे वाले टैंकर को निशाना बनाया गया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वारा दागी गई मिसाइल के कारण जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। जहाज पर 24 भारतीय सवार थे। इस भयावह हमले में 3 भारतीय नाविकों की जान चली गई, जबकि 21 को बचा लिया गया। 'MT Marivex' पर हमला: इससे पहले सोमवार को एक अन्य टैंकर, 'MT Marivex' पर भी अमेरिकी नौसेना द्वारा हमला किया गया था। उस जहाज पर भी 24 भारतीय नाविक मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया था।  अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर संयुक्त राष्ट्र समेत दूसरे संगठनों और देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की तीखी आलोचना की है और इसे अस्वीकार्य बताया है. अमेरिकी दादागीरी के सामने तनकर खड़े होते हुए अंतर्राष्ट्रीय मेरीटाइम संगठन (अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ) ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर डालने वाली सभी गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्र में व्यक्ति की सुरक्षा का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं UN ने कहा कि वो IMO के बयान से इत्तेफाक रखता है।  बुधवार को अमेरिका ने पलाऊ के झंडे वाले एक टैंकर पर हमला किया था. इस टैंकर का नाम MT सेटेबेलो है. अमेरिका नौसेना ने सेटेबेलो पर मिसाइलों से हमला किया था. इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।  भारत ने गुरुवार को कहा कि पिछले चार दिनों में ओमान के तट के पास भारतीय क्रू मेंबर वाले तीन कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी सेना ने हमला किया, जिसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई. नई दिल्ली ने इन हमलों को लेकर अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।  दुनिया भर में जहाजों की सुरक्षा और समुद्री अनुशासन करने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने इस घटना के लिए अमेरिका की तीखी आलोचना की।  IMO ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के पास हुई इस घटना में जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई और तीन नाविकों की मौत हो गई।  IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने कहा कि वह किसी भी पक्ष की ओर से की गई ऐसी किसी भी हरकत की "कड़ी" निंदा करते हैं, जिससे नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को खतरा हो।  "यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. मेरी संवेदनाएं उन तीन नाविकों के परिवारों के साथ हैं जिनकी जान चली गई और उन सभी लोगों के साथ भी जो क्रू सदस्यों के बारे में खबर का इंतजार कर रहे हैं।  डोमिंग्वेज़ ने कहा कि IMO ने हर समय नाविकों, आम नागरिक जहाजों और नेविगेशन की आज़ादी की सुरक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।  डोमिंग्वेज़ ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर डालने वाली सभी गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्र में जीवन की सुरक्षा का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. नाविकों की सुरक्षा एक साझा ज़िम्मेदारी है जिसे सबसे ज़्यादा अहमियत दी जानी चाहिए।  IMO के बयान से सहमति जताते हुए संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी-जनरल ने इस हमले की निंदा की. सेक्रेटरी-जनरल के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने ने कहा कि, 'खास बात यह है कि सेट्टेबेलो टैंकर पर हमला हुआ और कई भारतीय नाविक मारे गए. और इस हमले की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (IMO) के सेक्रेटरी-जनरल ने साफ़ तौर पर निंदा की थी. और हम उस बात का पूरी तरह से समर्थन और अनुमोदन करते हैं।    एमटी जलवीर पर हमला: ताजा मामला इस गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले जहाज एमटी जलवीर से जुड़ा है। अमेरिकी मध्य कमान ने एक बयान में कहा कि उसने एमटी जलवीर को ईरान के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध का कथित तौर पर उल्लंघन करके ईरानी तेल परिवहन करने के प्रयास के आरोप में निष्क्रिय कर दिया। कमान ने कहा कि चालक दल द्वारा 'अमेरिकी सेना के निर्देशों का बार-बार पालन न करने' के बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन कक्ष पर हमला किया। ओमान बंदरगाह के पास इस टैंकर पर हमले के बाद उसमें सवार 22 भारतीयों को बृहस्पतिवार को सुरक्षित निकाल लिया गया था। पिछले चार दिनों में ओमान तट के निकट अमेरिकी सेना द्वारा भारतीय चालक दल वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले की यह तीसरी घटना है। भारत का सख्त रुख भारतीय नागरिकों की जान जाने से यह कूटनीतिक विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक शिपिंग और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाएं बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों … Read more

भारत के लिए रूस की मेहरबानी! कच्चे तेल पर भारी छूट, वैश्विक बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है।  रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है।  क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी।  चीन ने कर द‍िया था मना चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं। 

भारत ने उठाई PoK की आवाज, मुनीर की कथित बर्बरता पर पाकिस्तान को घेरा

 नई दिल्ली भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से ध्यान हटाने के लिए फ़ेक न्यूज़ और गलत जानकारी फैला रहा है. रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के कुछ दिनों बाद भी वहां तनाव बना हुआ है।  इस इलाके से आ रही खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने 'पाकिस्तान से आने वाली फ़ेक न्यूज़ और वीडियो का एक पैटर्न' देखा है और इसे अपनी नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश बताया है।  जायसवाल ने कहा, "इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान से आने वाली फ़ेक न्यूज़ और वीडियो का एक पैटर्न देख रहे हैं. यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाने की एक हताश कोशिश है।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की कथित बर्बरता की खबरों का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।  उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की गंभीर बर्बरता की खबरें हैं. हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और ज्यादतियों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।  ये बयान रावलकोट में पाकिस्तानी बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के कुछ दिनों बाद आए हैं, जिसमें कथित तौर पर कम से कम 27 लोग मारे गए. जहां आधिकारिक आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 27 बताई गई है, वहीं सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में दावा किया गया है कि हताहतों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।  यह इलाका तनावपूर्ण बना हुआ है क्योंकि प्रदर्शनकारी समूह पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ़ लामबंद हो रहे हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे PoK में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तावित 'लॉन्ग मार्च' को रोक देंगे, जबकि आयोजकों ने प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया है।