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FIFA के अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक्स पर बवाल, फैंस बोले- मैच का फ्लो हो रहा खराब, मजा हो रहा किरकिरा

 अटलांटा FIFA वर्ल्ड कप 2026 में पहली बार लागू किए गए अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक्स को लेकर नई बहस छिड़ गई है. खिलाड़ियों को अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की गर्मी से राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब खेल की लय और रोमांच को प्रभावित करने के आरोपों का सामना कर रही है. आलोचकों का कहना है कि इन ब्रेक्स ने मैचों का प्राकृतिक प्रवाह तोड़ा है और कोचों को रणनीति बदलने का अतिरिक्त मौका दे दिया है।  इस बहस की सबसे बड़ी मिसाल जर्मनी और कुरासाओ के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिली. वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने वाला सबसे छोटी आबादी वाला देश कुरासाओ चार बार के चैम्प‍ियन जर्मनी के खिलाफ 1-1 की बराबरी पर था. लिवानो कोमेनेंसिया के गोल के बाद कुरासाओ के खिलाड़ी और फैन्स उत्साह से भरे हुए थे और बड़ा उलटफेर संभव नजर आ रहा था।  हालांकि इसके तुरंत बाद हाइड्रेशन ब्रेक हो गया. खेल दोबारा शुरू होने के बाद कुरासाओ अपनी लय कायम नहीं रख सका. जर्मनी ने हाफ टाइम से पहले दो गोल दाग दिए और आखिरकार मुकाबला 7-1 से जीत लिया।  इंग्लैंड के पूर्व स्ट्राइकर एलन शियरर ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें कुरासाओ के लिए बुरा लगा. उनके अनुसार टीम ने गोल कर मोमेंटम हासिल किया था, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद खेल रुक गया और उसी के साथ उनकी लय भी टूट गई।  पूर्व आयरलैंड कप्तान रॉय कीन ने भी FIFA के फैसले पर सवाल उठाए. उनका मानना है कि फुटबॉल की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी लगातार चलने वाली गति है, लेकिन ये ब्रेक मैच की रफ्तार और रोमांच दोनों को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने इसे अमेरिकी खेलों में दिखने वाले टाइमआउट जैसा बताया।  कोचों के लिए बन गया रणनीतिक हथियार हाइड्रेशन ब्रेक का उद्देश्य खिलाड़ियों को पानी पिलाना था, लेकिन कोच इस समय का इस्तेमाल रणनीतिक चर्चा के लिए भी कर रहे हैं. नीदरलैंड्स के कोच रोनाल्ड कोमैन ने खुलकर स्वीकार किया कि ब्रेक के दौरान खिलाड़ियों को सुधार, रणनीति और मैच की स्थिति के बारे में निर्देश दिए जा सकते हैं और उनकी टीम भी इसका फायदा उठा रही है।  शुरुआती 16 मैचों में से 8 मुकाबलों में हाइड्रेशन ब्रेक के 10 मिनट के भीतर गोल देखने को मिले. इससे यह धारणा और मजबूत हुई है कि इन ब्रेक्स का सीधा असर मैच के रुख पर पड़ रहा है।  ब्राजील और मोरक्को के मैच में भी ऐसा ही देखने को मिला. मोरक्को ने शुरुआत से दबदबा बनाया और पहले हाइड्रेशन ब्रेक से ठीक पहले बढ़त हासिल कर ली. लेकिन खेल दोबारा शुरू होने के 10 मिनट से भी कम समय बाद विनीसियस जूनियर ने ब्राजील के लिए बराबरी का गोल दाग दिया।  कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, स्वीडन और ईरान जैसी टीमों ने भी ब्रेक के बाद गोल कर फायदा उठाया. कई मैचों के मोमेंटम मैप्स में भी यह साफ दिखाई दिया कि खेल रुकने के बाद मुकाबलों की दिशा बदल गई।  स्टेड‍ियम में बैठे फैन्स भी नाखुश  इन ब्रेक्स का असर केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है. स्टेडियम में मौजूद दर्शक भी इससे नाराज नजर आए हैं. मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में इराक और नॉर्वे के मुकाबले के दौरान पहले हाइड्रेशन ब्रेक पर दर्शकों ने हूटिंग तक की।  FIFA के नियमों के मुताबिक रेफरी हर हाफ के 22वें मिनट में खेल रोकते हैं और खिलाड़ियों को लगभग तीन मिनट का समय दिया जाता है. खास बात यह है कि यह नियम मौसम, तापमान या स्टेडियम की स्थिति से अलग सभी मैचों में लागू किया जा रहा है।  सोमवार को अटलांटा में स्पेन और केप वर्डे के बीच मैच एयर-कंडीशंड और छत वाले स्टेडियम में खेला गया, फिर भी हाइड्रेशन ब्रेक लागू किया गया. FIFA का कहना है कि सभी टीमों और मैचों के लिए समान परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।  स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते ने माना कि अत्यधिक गर्मी में यह फैसला समझ में आता है, लेकिन हर मैच में इसकी आवश्यकता पर उन्होंने सवाल उठाए. वहीं नॉर्वे के कोच स्टाले सोलबाकेन का भी मानना है कि 35 डिग्री सेल्सियस जैसी भीषण गर्मी में यह व्यवस्था सही है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में इसकी जरूरत नहीं है।  टीवी ब्रॉडकास्ट भी विवाद की वजह हाइड्रेशन ब्रेक्स को लेकर एक और बड़ी आलोचना प्रसारण से जुड़ी है. अमेरिका में ब्रॉडकास्टर फॉक्स इन ब्रेक्स के दौरान सीधे विज्ञापनों पर चला जाता है. दूसरी तरफ स्पेनिश भाषा के चैनल टेलीमुंडो ऐसा नहीं करता।  फुटबॉल में पारंपरिक रूप से हाफ टाइम के अलावा विज्ञापन ब्रेक देखने को नहीं मिलते. ऐसे में कई लोगों का मानना है कि ये रुकावटें दर्शकों के अनुभव को प्रभावित कर रही हैं।  नीदरलैंड्स के कप्तान वर्जिल वैन डाइक ने कहा कि लगातार विज्ञापनों पर जाना उन्हें पसंद नहीं है और तटस्थ दर्शकों के लिए भी यह अनुभव बेहतर नहीं माना जा सकता।  हालांकि फ्रांस के कोच डिडिएर डेशां का मानना है कि फुटबॉल बदल रहा है और अब मुकाबले दो हाफ की बजाय चार हिस्सों में बंटे हुए नजर आते हैं. उनके अनुसार खिलाड़ियों और कोचों को इस नई वास्तविकता के साथ तालमेल बैठाना होगा।  फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि FIFA भविष्य के सभी वर्ल्ड कप में इस व्यवस्था को जारी रखेगा या नहीं. हालांकि इंग्लैंड फुटबॉल एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि 2028 में ब्रिटेन और आयरलैंड में होने वाली यूरोपीय चैम्प‍ियनशिप में ऐसे हाइड्रेशन ब्रेक लागू होने की संभावना बेहद कम है। 

फुटबॉल फैंस के लिए खुशखबरी! FIFA World Cup अब भारत में इस नए चैनल पर होगा टेलीकास्ट

मुंबई  FIFA World Cup 2026 की शुरुआत 11 जून से हो रही है, लेकिन 31 मई 2026 तक भारत में इस मेगा इवेंट के भारत में टेलीकास्ट पर संशय के बादल थे, लेकिन एक जून 2026 को आधिकारिक तौर पर भारत में इस फुटबॉल विश्व कप को ब्रॉडकास्टर मिल गया है। एक नए स्पोर्ट्स चैनल पर फुटबॉल विश्व कप के मैचों का प्रसारण होगा। जी एंटरटेनमेंट ने Unite8 Sports चैनल पर इन मैचों को टेलीकास्ट करने के लिए राइट्स खरीदे हैं। दरअसल, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड यानी ZEEL ने फीफा वर्ल्ड कप के राइट्स खरीद लिए हैं। नए लॉन्च हुए Unite8 Sports टीवी चैनल्स पर फुटबॉल विश्व कप के मैचों का प्रसारण होगा। वहीं, 48 टीमों वाले इस विशाल टूर्नामेंट की लाइव स्ट्रीमिंग आपको Zee5 पर देखने को मिलेगी। 11 जून से इस टूर्नामेंट की शुरुआत हो रही है, जिसकी मेजबानी यूएसए, मेक्सिको और कनाडा मिलकर कर रहे हैं। कंपनी ने इस बात की भी घोषणा की है कि वह भारतीय बाजार में 2026 ही नहीं, बल्कि 2030 फीफा विश्व कप, 2027 फीफा महिला विश्व कप और 2034 तक अन्य प्रमुख फीफा कार्यक्रमों का प्रसारण करेगी। इसमें डॉक्यू-सीरीज कंटेंट भी शामिल है। फीफा विश्व कप (पुरुष और महिला) के अलावा 'जेड' यू-17 विश्व कप, महिला यू-17 विश्व कप, यू-20 विश्व कप, महिला यू-20 विश्व कप, फुटसल विश्व कप, फुटसल महिला विश्व कप और इंटरकांटिनेंटल कप भी जी के नए स्पोर्ट्स चैनल्स पर दिखाया जाएगा। ZEEL के CEO पुनीत गोयनका ने कहा, "हम दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स में से एक को भारतीय दर्शकों के लिए लाने के लिए उत्साहित हैं। फुटबॉल अलग-अलग इलाकों और डेमोग्राफिक्स में फैला हुआ है और मीडिया राइट्स हासिल करने और खास स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च करने में किया गया इन्वेस्टमेंट, इसके लंबे समय के पोटेंशियल में हमारे पक्के यकीन को दिखाता है।" आपको बता दें, फीफा को इसलिए भी जून के दूसरे सप्ताह से शुरू होने वाले विश्व कप के लिए भारत में ब्रॉडकास्टर नहीं मिला था, क्योंकि टाइमिंग एक सबसे बड़ी समस्या है। यही कारण है कि जियोहॉटस्टार और सोनी स्पोर्ट्स जैसे बड़े खिलाड़ी मीडिया राइट्स खरीदने से पीछे हट गए। इसके अलावा 2026 और 2030 वर्ल्ड कप के लिए FIFA की 100 मिलियन डॉलर की भारी मांग ने बातचीत को और भी ज्यादा मुश्किल बना दिया। हालांकि, बाद में इस डिमांड को 60 मिलियन फीफा ने कर दिया था, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें को सिर्फ $20 मिलियन का ऑफर ही उन्हें मिला, लेकिन पिछले जी के नए स्पोर्ट्स चैनल्स के आने से चीजें बदल गईं।

फुटबॉल फैन्स के लिए बुरी खबर: FIFA वर्ल्ड कप का प्रसारण अटका, भारत में देखने को लेकर संशय

 नई दिल्ली FIFA World Cup 2026: FIFA वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब सिर्फ 32 दिन बाकी हैं, लेकिन दुनिया के दो सबसे बड़े बाजार भारत और चीन में अब तक टूर्नामेंट के ब्रॉडकास्ट राइट्स तय नहीं हो पाए हैं. हालात ऐसे हैं कि करीब 3 अरब लोगों को अभी तक यह नहीं पता कि वे फुटबॉल के सबसे बड़े टूर्नामेंट का लाइव प्रसारण देख पाएंगे या नहीं। अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की मेजबानी में 11 जून से शुरू होने वाले  फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के लिए FIFA लगातार ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत कर रहा है, लेकिन उसकी भारी-भरकम मांग कई देशों को मंजूर नहीं हो रही। रिपोर्ट के मुताबिक FIFA की एक बड़ी टीम इस समय बीजिंग में डेरा डाले हुए है. इसमें FIFA (Federation Internationale de Football Association /International Federation of Association Football) के सेक्रेटरी जनरल मैटियास ग्राफस्ट्रॉम और मीडिया राइट्स डायरेक्टर जीन-क्रिस्टोफ पेटिट शामिल हैं. उनका मकसद चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV को किसी तरह डील के लिए राजी करना है। बताया गया कि FIFA ने शुरुआत में चीन से करीब 300 मिलियन डॉलर की मांग की थी, जबकि CCTV सिर्फ 80 मिलियन डॉलर तक खर्च करने को तैयार था. बाद में बातचीत 120 से 150 मिलियन डॉलर के बीच पहुंची, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन सकी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि FIFA अब अपनी मांग में 50 प्रतिशत से ज्यादा कटौती करने को तैयार है ताकि मई के आखिर तक समझौता हो सके. चीन में यह भी चर्चा है कि 2026 के साथ-साथ 2030 वर्ल्ड कप पैकेज पर भी बातचीत चल रही है। भारत में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस-डिज्नी जॉइंट वेंचर ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए करीब 20 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव दिया था, जिसे FIFA ने अपनी अपेक्षा से काफी कम माना. इसके बाद डील फिलहाल रुक गई। इस बीच भारत में यह चर्चा भी तेज हो गई कि कहीं एक बार फिर दूरदर्शन वर्ल्ड कप के प्रसारण अधिकार हासिल ना कर ले. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एशियाई देशों में सबसे बड़ी समस्या मैचों का समय भी माना जा रहा है. चीन में मुकाबले तड़के करीब 3 बजे प्रसारित होंगे, ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को डर है कि दर्शकों की संख्या उम्मीद से कम रह सकती है. ऊपर से चीन की टीम टूर्नामेंट में क्वालिफाई भी नहीं कर पाई है, जिससे टीवी कंपनियां इतने बड़े निवेश को लेकर सवाल उठा रही हैं। भारत और चीन के अलावा थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में भी FIFA की कीमतों को लेकर विवाद जारी है. थाईलैंड में तो हालात ऐसे हो गए कि वहां के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल को खुद दखल देना पड़ा. उन्होंने फैन्स को भरोसा दिलाया कि देश के लोग वर्ल्ड कप देखने से वंचित नहीं रहेंगे। दरअसल, थाईलैंड में पिछले साल फुटबॉल वर्ल्ड कप को 'Must Have' सूची से हटा दिया गया था. इसका मतलब था कि टूर्नामेंट फ्री-टू-एयर टीवी पर दिखाना जरूरी नहीं रहेगा. इसके बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। 2022 वर्ल्ड कप से पहले भी थाईलैंड को आखिरी समय में करीब 33 मिलियन डॉलर की डील करनी पड़ी थी. उस समय सरकार और निजी कंपनियों ने मिलकर फंड जुटाया था. एशियाई बाजारों में पाइरेसी भी FIFA के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. 2018 और 2022 वर्ल्ड कप के दौरान अवैध स्ट्रीमिंग काफी बढ़ गई थी, जिससे ब्रॉडकास्ट राइट्स की वैल्यू प्रभावित हुई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Weibo पर कथित ब्रॉडकास्ट डील्स की रकम भी वायरल हुई. इसमें जापान के लिए 200 मिलियन डॉलर, हॉन्गकॉन्ग के लिए 25 मिलियन डॉलर, जर्मनी के लिए 120 मिलियन डॉलर और इंग्लैंड के लिए दो वर्ल्ड कप के 350 मिलियन डॉलर बताए गए। FIFA ने हालांकि इस पूरे मामले पर चुप्पी बनाए रखी है. रॉयटर्स को जारी बयान में संगठन ने कहा कि चीन और भारत में मीडिया राइट्स को लेकर बातचीत जारी है और फिलहाल इसे गोपनीय रखा जाएगा. रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक 2022 वर्ल्ड कप की ग्लोबल टीवी रीच में चीन की हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत थी, जबकि भारत की हिस्सेदारी 2.9 प्रतिशत रही. डिजिटल स्ट्रीमिंग में दोनों देशों का संयुक्त योगदान 22.6 प्रतिशत था. यही वजह है कि FIFA इन बाजारों को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता।

ईरान की जिद पर अड़ा रुख, FIFA में भी टी20 वर्ल्ड कप जैसी राजनीति और धमकियों का सिलसिला

  नई दिल्ली FIFA World Cup 2026 को लेकर ठीक वैसा ही विवाद सामने आया है, जैसा करीब एक महीने पहले आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में सामने आया था. टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए भारत आकर मैच खेलने से इनकार कर दिया था. और अब इसी तरह ईरान की फुटबॉल टीम ने सुरक्षा कारणों से अमेरिका में मैच खेलने पर चिंता जताई है. बता दें कि फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से शुरू होगा और 19 जुलाई तक चलेगा। क्रिकेट वर्ल्ड कप में बांग्लादेश ने भी भारत की बजाय न्यूट्रल ग्राउंड की मांग करते हुए अपने मैच श्रीलंका या पाकिस्तान शिफ्ट करने की मांग उठाई थी. और अब फीफा वर्ल्ड कप में भी उसी तरह ईरान ने अपने मैच मैक्सिको शिफ्ट कराने की मांग की है. इसके बाद Mexico ने बड़ा ऑफर देते हुए कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ईरान के मैच अपने यहां आयोजित कर सकता है। क्या बोले मैक्सिको के राष्ट्रपति मैक्सिको की राष्ट्रपति Claudia Sheinbaum ने कहा कि अगर फुटबॉल की विश्व संस्था FIFA चाहे तो मैक्सिको ईरान के मैच होस्ट करने के लिए तैयार है और इसमें देश को कोई दिक्कत नहीं होगी. ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने पहले ही फीफा से अनुरोध किया है कि उनके मैचों को अमेरिका से बाहर किसी दूसरे देश में शिफ्ट किया जाए. हाल ही में क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव और अमेरिका से जुड़े हमलों के बाद ईरान की टीम को खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। वर्ल्ड कप तीन देशों में होगा FIFA वर्ल्ड कप 2026 पहली बार तीन देशों की मेजबानी में खेला जाएगा। यह टूर्नामेंट अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित होना है. अभी ईरान के ग्रुप स्टेज के कुछ मैच अमेरिका के अलग-अलग शहरों में खेले जाने तय हैं। वीजा और राजनीतिक माहौल की भी चिंता सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि ईरान को वीजा नियम, यात्रा प्रतिबंध और राजनीतिक माहौल को लेकर भी चिंता है। अधिकारियों का मानना है कि इन कारणों से टीम की तैयारी और टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पर असर पड़ सकता है। मैच शिफ्ट करना आसान नहीं हालांकि इस समय मैचों का शेड्यूल, स्टेडियम और टिकटिंग पहले ही तय हो चुकी है। ऐसे में किसी मैच को दूसरे देश में शिफ्ट करना आसान नहीं होगा. फिलहाल फीफा ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। क्या वर्ल्ड कप से हट सकता है ईरान? अगर ईरान की चिंताओं का समाधान नहीं होता है, तो ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के फैसले पर फिर से विचार कर सकती है. यह मामला दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का असर खेलों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल मैक्सिको ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं, लेकिन अंतिम फैसला फीफा को ही लेना होगा. बता दें कि टी20 वर्ल्ड कप में भी आखिरी में बांग्लादेश को बाहर होना पड़ा था और उसकी जगह स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप के लिए चुना गया था।

अमेरिका से तनाव के बीच ईरान ने फीफा वर्ल्ड कप में भाग लेने से किया इंकार, राजनीति में नई टकराव

 नई दिल्ली इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग का असर अब खेल जगत पर भी दिखने लगा है. ईरान की ओर से कहा गया है कि वह 2026 फुटबॉल विश्व कप (फीफा) में हिस्सा नहीं लेगा. यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट के साथ ही लगभग पूरी दुनिया के हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के खेल मंत्री अहमद दुन्यामाली ने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा कि जिस देश ने उनके सर्वोच्च नेता की हत्या की है, वहां जाकर खेलना संभव नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा हालात में टीम की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं की जा सकती। हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. इसके बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति बन गई है। क्या बोले ईरान के खेल मंत्री ईरान के खेल मंत्री ने कहा कि इन हमलों में हजारों लोग मारे गए हैं और देश युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है. ऐसे में टीम को विश्व कप खेलने के लिए भेजना सही नहीं होगा. 2026 का फुटबॉल विश्व कप 11 जून से 19 जुलाई के बीच अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में खेला जाना है. इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इससे पहले फुटबॉल की वैश्विक संस्था के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा था कि उनकी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत हुई है. ट्रंप ने भरोसा दिलाया था कि ईरानी टीम का टूर्नामेंट में स्वागत किया जाएगा और उन्हें सुरक्षित प्रवेश मिलेगा। पिछले साल हुए ड्रॉ में ईरान को ग्रुप-जी में बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड के साथ रखा गया था. इस ग्रुप के सभी मैच अमेरिका में होने थे, जिनमें दो मुकाबले लॉस एंजिलिस और एक सिएटल में तय थे। अगर ईरान टूर्नामेंट से हटा तो क्या होगा हालांकि अगर ईरान आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से हटता है तो नियमों के तहत उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उसकी जगह किसी दूसरी टीम को मौका दिया जा सकता है।