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विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से तैराकी का गुर

पहाड़ों और जंगलों से तरणताल तक- बैगा बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रहा ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से तैराकी का गुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों से निखर रही वनांचल की खेल प्रतिभाएं रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों के बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में आयोजित जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। जंगलों और पहाड़ों के बीच जीवन व्यतीत करने वाले बैगा बालक-बालिकाएं आज तरणताल (स्वीमिंग पूल) में तैराकी के आधुनिक खेल कौशल सीखकर अपने सपनों को नई दिशा दे रहे हैं।             नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के तरणताल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा इस विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें आकांक्षी विकासखंड गौरेला के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा समुदाय के बच्चों को प्राथमिकता से शामिल किया गया है। जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने स्वयं गांवों तक पहुंचकर बैगा परिवारों को प्रेरित किया और बच्चों को इस शिविर से जोड़ा। अवसर मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास           प्राकृतिक जलस्रोतों, नदी-नालों और जंगलों के बीच जीवन बिताने वाले इन बच्चों के लिए तरणताल का यह अनुभव बिल्कुल नया है। यहाँ वे केवल तैरना ही नहीं सीख रहे, बल्कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धी खेल संस्कृति को भी आत्मसात कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतने बड़े स्वीमिंग पूल में अभ्यास नहीं किया था। वे तैराकी के तकनीकी पहलुओं को सीखकर बेहद उत्साहित हैं और भविष्य में बड़े खिलाड़ी बनने का सपना देख रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से मिल रहा मार्गदर्शन          इस ग्रीष्मकालीन शिविर में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों द्वारा बच्चों को तैराकी की बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को फ्री-स्टाइल, बैक-स्ट्रोक, बटरफ्लाई-स्ट्रोक, ब्रेस्ट-स्ट्रोक तथा मेडले जैसी प्रतिस्पर्धी विधाओं का कड़ा अभ्यास कराया जा रहा है। सुबह और शाम, दो पालियों में संचालित इन सत्रों के माध्यम से बच्चों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और खेल कौशल को लगातार विकसित किया जा रहा है। प्रशिक्षकों का मानना है कि बैगा बच्चों में स्वाभाविक शारीरिक क्षमता, साहस और सीखने की तीव्र इच्छा है, जो उन्हें भविष्य का उत्कृष्ट खिलाड़ी बना सकती है। जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम          विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पलने के कारण अद्भुत सहनशक्ति और बेजोड़ शारीरिक क्षमता के धनी होते हैं। यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन बच्चों को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास न केवल खेल विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है, बल्कि सामाजिक समावेशन और जनजातीय सशक्तिकरण का भी एक जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल जनजातीय युवा          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और कौशल विकास के अवसरों का विस्तार कर रही है। सरकार का संकल्प है कि दूरस्थ अंचलों का कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे। बैगा समुदाय के बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ना सरकार की समावेशी विकास नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिससे न केवल बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो रहा है, बल्कि उनमें बड़े लक्ष्य हासिल करने का आत्मविश्वास भी जागृत हो रहा है। सपनों की नई लहर           कभी जंगलों और पहाड़ियों तक सीमित रहने वाले बैगा बच्चे आज तरणताल में पूरे आत्मविश्वास के साथ लहरों से मुकाबला कर रहे हैं। यह सकारात्मक परिवर्तन केवल एक खेल प्रशिक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकार की संवेदनशील सोच, जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता और बच्चों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल है।           यह ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर बैगा बच्चों के लिए एक ऐसे सुनहरे अवसर के रूप में उभरा है, जो उनके जीवन की दिशा बदल सकता है। आने वाले वर्षों में यही बच्चे राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ और पूरे भारत का गौरव बढ़ाएंगे, यही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

MLA दिनेश चड्ढा का वादा, गतका खिलाड़ियों को मिलेंगी बेहतरीन सुविधाएं

रूपनगर रूपनगर जिले के खिलाड़ियों ने 12वीं पंजाब स्टेट गतका चैंपियनशिप 2026 के दौरान अलग-अलग एज ग्रुप के मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करके ओवरऑल चैंपियनशिप जीती। पास के गांव लौदीमाजरा में खत्म हुए सालाना टूर्नामेंट में गुरदासपुर की टीम दूसरे और फतेहगढ़ साहिब तीसरे स्थान पर रही। इस टूर्नामेंट के दौरान सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें बलजोत सिंह रूपनगर ने सब-जूनियर कैटेगरी में बेस्ट गतका खिलाड़ी की ट्रॉफी जीती, दिलराज सिंह अमृतसर ने जूनियर कैटेगरी में बेस्ट खिलाड़ी की ट्रॉफी जीती और अमनप्रीत सिंह फतेहगढ़ साहिब ने सीनियर कैटेगरी में बेस्ट खिलाड़ी की ट्रॉफी जीती। रूपनगर MLA दिनेश चड्ढा ने समापन समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल होकर गतका एसोसिएशन डिस्ट्रिक्ट रूपनगर की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जिला रूपनगर खालसा की जन्मभूमि है, इसलिए इस जिले के लोगों की खास जिम्मेदारी है कि वे विरासती खेल गतका को बढ़ावा दें। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे गतका खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं देने के लिए राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों से भी बात करेंगे और इस खेल को बढ़ावा देने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। इस बीच, नेशनल गतका एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट हरजीत सिंह ग्रेवाल ने टीमों के खिलाड़ियों, रेफरी और कोच का धन्यवाद किया और कहा कि उनकी मिली-जुली कोशिशों से गतका खेल लगातार तरक्की की राह पर है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड गतका फेडरेशन का लक्ष्य गतका को ओलंपिक खेलों में शामिल कराना है, जिसके लिए वे पूरी तरह समर्पित हैं। इस कार्यक्रम में इलाके की धार्मिक और राजनीतिक हस्तियां भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। इस मौके पर बरिंदर सिंह ढिल्लों, इंदरपाल राजू सत्याल, नेशनल गतका एसोसिएशन के फाइनेंस सेक्रेटरी बलजीत सिंह सैनी, हरप्रीत सिंह लखेवाल, अमनिंदर सिंह रेहल, सुरिंदर सिंह हरिपुर, जगदीप सिंह थली, बीबी मनजीत कौर, गुरप्रीत सिंह भाऊवाल, गुरविंदर सिंह रूपनगर, चीफ रेफरी नरिंदर सिंह पारस, जसप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह घनौली और दूसरे लोग मौजूद थे।

दिव्यांग क्रिकेट महोत्सव: 22 से 26 फरवरी तक 100 घंटे क्रिकेट, नॉट आउट@100 का आयोजन

भोपाल  राजधानी में पहली बार देशभर के दिव्यांगजन लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इस अनूठा आयोजन का उद्घाटन 22 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सुबह 10 बजे नेहरू नगर भौंंरी स्थित पुलिस स्टेडियम में करेंगे। 26 फरवरी तक होने वाले इस आयोजन में मध्य प्रदेश समेत देश के 8 राज्यों के दिव्यांग शामिल हो रहे हैं। इस खेल महोत्सव का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे न्यास, टास्क इंटरनेशनल समेत अन्य संस्थाएं कर रही है। इस गिनीज, लिमका तथा एशिया बुक ऑफ रिकार्ड के प्रतिनिधियों के समक्ष प्रदर्शन होगा। यह जानकारी राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट खेल महोत्सव के कार्यक्रम संयोजक डॉ राघवेंद्र शर्मा ने पत्रकार वार्ता में दी। इस अवसर पर दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया भी मौजूद रहे। डॉ शर्मा ने बताया कि दिव्यांगजन दया के नहीं, अवसर के पात्र है। इस आयोजन के माध्यम से दिव्यांगों को आत्म सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश देने का प्रयास है। बता दें, श्रद्धेय कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष मनाई जा रही है। इसलिए हम इस महोत्सव के जरिए 100 घंटे निरंतर क्रिकेट खेलने का ऐतिहासिक आयोजन कर रहे हैं। इस बेहद विलक्षण और प्रेरणादायी कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ता तथा प्रेरक कार्यक्रम संयोजक, डॉ. राघवेंद्र शर्मा पिछले लगभग 20 वर्षों से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं सामाजिक सहभागिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह महोत्सव खेल के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन और नई सामाजिक चेतना का संदेश देगा।  इस महोत्सव का ये रहेगा आकर्षण – खेल महोत्सव में 8 राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, दिल्ली आदि के अलावा मध्य प्रदेश के साथ ही स्थानीय दिव्यांगजन भी क्रिकेट खेलेंगे।  – प्रत्येक मैच आईपीएल तर्ज पर 4-4 घंटे का होगा। इसमें दो तरह के बॉल होंगे, जिसमें एक अंधे दिव्यांगों के लिए आवाज वाली गेंद तथा अन्य दिव्यांगों के लिए क्वार्क बॉल होगा।  – पहली बार जमीन पर बैठकर चलने वाले दिव्यांग भी क्रिकेट खेलेंगे। इसके अलावा दिव्यांगों की क्षमतानुसार खेल होंगे। इसमें व्हीलचेयर, अंधे, मानसिक रूप वाले बच्चे, युवा और महिला- पुरुष खिलाड़ी अपना प्रदर्शन करेंगे। – खेल का कवरेज करने गिनीज, लिम्का और एशिया बुक ऑफ रिकार्डस के प्रतिनिधि आ रहे हैं।  – सुबह 10 बजे सीएम डॉ. यादव के उद्घाटन के बाद दोपहर 2 बजे तक बिना रुके बिना थके दिन-रात लगातार 100 घंटे तक 26 फरवरी तक खेल चलेगा।  

महेंद्रगढ़ जिले में 15 खेलों के खुलेंगे खेलो इंडिया केंद्र

चंडीगढ़. भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने देश भर में 139 अतिरिक्त खेलों इंडिया केंद्रों को मंजूरी दी है। इसके तहत महेंद्रगढ़ जिले में भी विभिन्न 15 खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खेल विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि जिले में निम्नलिखित 15 खेल विधाओं में केंद्र स्थापित करने की योजना है। इनमें ताइक्वांडो, वुशु, कराटे, जू-जित्सु, कुराश, रोइंग, कयाकिंग और कैनोइंग, सेलिंग, शूटिंग, साइकिलिंग, जिम्नास्टिक, सेपकटकरा, इक्वेस्ट्रियन (घुड़सवारी), स्क्वैश और गोल्फ शामिल हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रों की स्थापना के लिए उन संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास खेल के लिए पर्याप्त मैदान और आधुनिक ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो।

खेल मंत्री ने दी जानकारी, हरियाणा में 44 स्टेडियम्स के लिए 114 करोड़ का निवेश तय

चंडीगढ़   खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश में खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। यह सच है कि सभी स्टेडियमों की हालत अभी आदर्श नहीं कही जा सकती लेकिन सरकार उन्हें बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। प्रदेश के 44 खेल मैदानों और स्टेडियमों के सुधार के लिए 114 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। मंत्री गुरुवार शाम को लघु सचिवालय में आयोजित हुई जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि खेल स्टेडियमों और मैदानों के रखरखाव और उपयोगिता बढ़ाने के लिए सभी उपायुक्तों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बजट में खेलों के लिए और अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे लूट और भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा कि ऐसे बयान जनता को भ्रमित करने और सुर्खियों में बने रहने के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं। सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।    

राज्य सरकार की बड़ी घोषणा: खेलों के बुनियादी ढांचे को मिलेगा नया आयाम

रायपुर : राज्य सरकार की प्रतिबद्धता, खेलों के लिए बुनियादी ढांचा होगा सुदृढ़ राज्य सरकार की बड़ी घोषणा: खेलों के बुनियादी ढांचे को मिलेगा नया आयाम रायपुर से संदेश: खिलाड़ियों के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करेगी सरकार धमतरी और कुरूद को मल्टीपर्पज इंडोर स्पोर्ट्स की सौगात रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बार फिर खेल सुविधाओं में इजाफा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। खिलाड़ियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने, खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्ट प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत है। इसी कड़ी में धमतरी और कुरूद में इंडोर बैडमिंटन हॉल / मल्टीपर्पज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत खेल बुनियादी ढांचे का विस्तार और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार कई महत्त्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 1 से 3 करोड़ रुपये तक की पुरस्कार राशि देने की योजना सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है। यह पहल न केवल खिलाड़ियों के मनोबल को ऊँचा करती है बल्कि आने वाली नई पीढ़ी को भी खेलों की ओर प्रेरित करती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत मैदानों का उन्नयन, उच्च स्तरीय उपकरणों की उपलब्धता, खेल क्लबों को आर्थिक सहायता और पारंपरिक खेलों के आयोजन जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। कलेक्टर धमतरी ने बताया कि जिले के धमतरी और कुरूद में इंडोर बैडमिंटन हॉल / मल्टीपर्पज स्पोर्ट्स हॉल के प्रोजेक्ट के लिए लगभग 5-5 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यहां खिलाड़ियों के लिए विभिन्न इनडोर खेलों की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिनमें बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कैरम, शतरंज, लूडो एवं साँप-सीढ़ी, डार्ट बोर्ड, स्नूकर, तीरंदाजी, योग कक्ष, स्क्वॉश, बास्केटबॉल,  पिकलबॉल प्रमुख हैं। सबसे अहम यह है कि इन खेलों के लिए आवश्यक उपकरण और संरचनाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी। इतना ही नहीं स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में न केवल खेल सुविधाएं बल्कि खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे। इनमें खिलाड़ियों के आराम और तैयारी के लिए प्लेयर रूम, दर्शकों और प्रतिभागियों के लिए सुव्यवस्थित स्पोर्ट्स हॉल वेटिंग एरिया, आकस्मिक चिकित्सा सुविधा के लिए फर्स्ट एड रूम, महिला एवं पुरुषों के लिए अलग शौचालय शामिल हैं। इन प्रावधानों से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। धमतरी और कुरूद के आसपास के क्षेत्रों में अनेक युवा खेलों में सक्रिय हैं, लेकिन पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र न होने के कारण वे अपनी प्रतिभा को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुँचा पाते। इन इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्सों के निर्माण से स्थानीय खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलेगा और वे अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे। धमतरी और कुरूद के मल्टीपर्पज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, खेल के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगे। आने वाले समय में धमतरी और कुरूद के खिलाड़ी न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगे।

स्पोर्ट्स साइंस सेंटर से बदलेगा खेलों का भविष्य, मध्यप्रदेश बनेगा राष्ट्रीय हब

स्पोर्ट्स स्टोरी स्पोर्ट्स साइंस सेंटर मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर देगा नयी पहचान स्पोर्ट्स साइंस सेंटर से बदलेगा खेलों का भविष्य, मध्यप्रदेश बनेगा राष्ट्रीय हब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा मध्यप्रदेश का स्पोर्ट्स साइंस सेंटर खिलाड़ियों को मिलेगी आधुनिक ट्रेनिंग: स्पोर्ट्स साइंस सेंटर से चमकेगा मध्यप्रदेश का नाम भोपाल  भोपाल अब स्पोर्ट्स साइंस और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का राष्ट्रीय हब बनने जा रहा है। खेल विभाग द्वारा नाथु बरखेड़ा स्थित स्पोर्ट्स सिटी में लगभग 25 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र नवीनतम खेल प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शोध से लैस होगा, जिससे खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ मानसिक दृढ़ता, चोट से बचाव और प्रदर्शन सुधार का भी संपूर्ण सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं खेलों में गहरी रूचि रखते हैं और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिये प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि आज के दौर में खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण से सफलता नहीं मिल सकती, उन्हें वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों का सहयोग भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ भोपाल में स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई खेलों में गहन ध्यान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्कता होती है। अक्सर प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल तकनीकी कमी, मनोवैज्ञानिक दबाब या चोटो के कारण लक्ष्य हासिल करने में असफल हो जाते हैं। वर्तमान में खेलों में केवल कौशल या अच्छी कोचिंग ही पर्याप्त नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कढ़ी प्रतिस्पर्धा में खिलाड़ियों को हर उस कमी पर काम करना पड़ता है, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती है। जैसे मनोविज्ञान, पोषण, बॉयोमेकेनिक्स। ऐसे परिदृश्यों को देखते हुए भोपाल में बड़े पैमाने पर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की आवश्यकता महसूस की गई। केंद्र की मुख्य विशेषताएँ भोपाल में बन रहा यह स्पोर्ट्स साइंस सेंटर देश का पहला ऐसा मॉडल होगा, जहां एक ही परिसर में खिलाड़ियों को फिजियोलॉजी, बॉयोमेकेनिक्स, काइन्सियोलॉजी, मनोविज्ञान, बॉयोकेमिस्ट्री और पोषण विज्ञान का समन्वित प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। केन्द्र में खिलाड़ियों के लिये अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ और इकाइयां बनाई जा रही हैं। इसमें फिजियोलॉजी लैब, जिसमें VO2 मेक्स टेस्टिंग, बॉडी कंपोजीशन एनालिसिस, बॉयोमेकेनिक्स लैब जिसमें मोशन कैप्चर, गेट एनालिसिस, फोर्स-प्लेट टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त मनोविज्ञान इकाई जिसमें खिलाड़ियों की मानसिक दृढता, तनाव एवं चिंता प्रबंधन पर काम किया जायेगा। सेंटर में पोषण और बॉयोकेमिस्ट्री सपोर्ट यूनिट की स्थापना भी की जायेगी, जिसमें ब्लड मार्कर टेस्टिंग और वैज्ञानिक डाईट सपोर्ट से खिलाड़ियों पर निगरानी रखी जायेगी। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिये रिकवरी सूट की भी व्यावस्था की गई है, जिससे हाईड्रोथेरेपी, क्रायोथेरेपी और फिजियोथेरेपी की जा सकेगी। केंद्र में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, पोषण विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट और डेटा विश्लेषक खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाकर उनके प्रदर्शन सुधार के लिए सलाह देंगे। खिलाड़ी की कमजोरियों और आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार होंगे। स्पोर्ट्स साइंस सेंटर न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊँचाई देगा, साथ ही प्रदेश के उभरते हुए खिलाड़ियों को भी वैज्ञानिक प्रशिक्षण का लाभ उपलब्ध कराएगा। यह पहल भोपाल को स्पोर्ट्स साइंस का राष्ट्रीय हब बनायेगी और भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को गति देगी।  

खेल प्रतिभाओं की पहचान अब आसान:खेलों को बढ़ावा देने के लिये 180 नोडल खेल केन्द्र

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने एजुकेशन पोर्टल की तर्ज पर स्पोर्टस् मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है। डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से विभाग की खेलकूद शाखा की गतिविधियों, प्रतियोगिता के आयोजन और उससे संबंधित पत्राचार को पेपरलेस कर दिया गया है। इस प्रकिया के चलते खेलों से जुड़ी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत मान्यता प्राप्त एमपी बोर्ड के विद्यालय, सीबीएसई के ऐसे स्कूल जो स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के और स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न खेलों की प्रतियोगिता में शामिल होना चाहते हैं वे इस पोर्टल पर निश्चित पंजीयन शुल्क के साथ आवश्यक अभिलेख अपलोड करते हुए पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 14 से 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं के लिये एक ही बार कराना होगा। स्पोर्टस् मैनेजमेंट सिस्टम में प्रति वर्ष आवश्यकतानुसार अपग्रेड किये जाने की सुविधा प्रदाय की गई है। विद्यालय में अध्ययनरत नियमित खिलाड़ियों की दर्ज संख्या के मान से क्रीड़ा शुल्क का संकलन इसी पोर्टल के माध्यम से किये जाने की सुविधा दी गई है जो स्वत: ही संचालनालय, संयुक्त संचालक, संभाग एवं जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में शासन द्वारा निर्धारित प्रतिशत के अनुसार अंतरित हो जाता है। यह व्यवस्था खेलों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और खिलाड़ियों की आयु के बारे में प्रमाणीकरण के साथ अपात्र खिलाड़ी को किसी भी स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल होने से रोकता है। 180 नोडल खेल विद्यालय प्रशिक्षण केन्द्र सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को उच्च स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में स्थित शासकीय विद्यालयों में 180 नोडल खेल केन्द्रों की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों के माध्यम से खेल अधोसंरचना के साथ उत्कृष्ट स्तर की खेल सामग्री खेल प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पिछले वर्ष 500 खिलाड़ियों ने राज्य और संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सहभगिता की और इसमें 600 पदक प्राप्त किये। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी प्रदेश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है।  

दिलीप मालव ने अमेरिका में दिखाया दम, कराटे में जीता गोल्ड

विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेल प्रतियोगिता में उज्जैन की कराते खिलाड़ी अर्पणा ने अमेरिका में जीता गोल्ड मेडल  बर्मिंघम में हो रहे वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में शेखर ने जीता रजत पदक  दिलीप मालव ने अमेरिका में दिखाया दम, कराटे में जीता गोल्ड  बर्मिंघम शहर के बेटी अर्पणा चौहान ने अमेरिका के अलबामा राज्य के बर्मिंघम शहर में आयोजित वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स 2025 में गोल्ड मेडल हासिल किया है। अर्पणा की यह उपलब्धि से केवल उज्जैन ही नहीं, बल्कि भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।  साल 2018 से अर्पणा असम राइफल्स में खेल कोटा से सेवारत सैनिक हैं और इससे पहले भी कई प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। 26 वर्षीय अर्पणा का परिवार सांई विहार कॉलोनी उज्जैन में रहता है। पिता रतनलाल चौहान बीएसएनल से सेवानिवृत्त हैं व माता शारदा चौहान हैं। अर्पणा ने 10वीं तक केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की है और कक्षा 8वीं से ही वे कराते का प्रशिक्षण ले रही हैं। अर्पणा ने अपनी मेहनत और लगन से कराते में एक अलग पहचान बनाई है। अब तक उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में पदक जीते हैं। अर्पणा ने जीत का श्रेय परिवार, असम राइफल्स और पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड को दिया और कहा मेडल सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उन सभी का है, जिन्होंने मुझ पर विश्वास रखा। अर्पणा बड़े टूर्नामेंट्स की तैयारी में जुट गई हैं और कहा कि मुश्किलें आएंगी, पर हार मत मानो, क्योंकि मेहनत कभी धोखा नहीं देती। बर्मिंघम में हो रहे वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में शेखर ने जीता रजत पदक किसान परिवार में जन्मे शेखर पाण्डेय ने अमेरिका में आयोजित विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेल प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर देश के साथ ही जिले को भी गौरवान्वित किया है। विकास खंड के ग्राम पंचायत रेरूपुर के मौजा खिरौड़ी निवासी 25 वर्षीय शेखर पाण्डेय वर्ष-2021 मे सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त हुए थे। शेखर का रूझान बचपन से ही खेल प्रति रहा है। यही वजह है कि सीआईएसएफ में नियुक्ति के बाद भी खेलकूद से जुड़े रहे। शेखर का चयन यूएसए में आयोजित विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेल स्पर्धा 2025 के लिए किया गया था। शेखर ने इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते हुए डेकाथलान खेल में रजत पदक जीत कर देश एवं क्षेत्र का नाम रोशन करने में सफल रहे। उनकी कामयाबी पर परिवार एवं क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गयी। प्रतियोगिता का आयोजन यूएसए के अलबामा प्रांत के बर्मिंघम शहर में 27 जून से छह जुलाई के बीच किया गया है। शेखर ने दो जुलाई को आयोजित डेकाथलन खेल इवेंट में रजत पदक जीता है। शेखर इन प्रतियोगिताओं में भी लेंगे भाग शेखर पाण्डेय अब लांग जंप, ट्रिपल जंप, 110 मीटर हर्डल एवं पोलवाल्ट प्रतियोगिता में भी देश की तरफ से चुनौती पेश करेंगे। शेखर ने देश के लिए 17 मेडल और स्टेट में 30 मेडल जीत कर अपना परचम लहरा चुके हैं। पिता नंदलाल पांडेय कृषक एवं माता सीता देवी गृहिणी है। शेखर पाण्डेय इस समय एअरपोर्ट बंगलौर में तैनात है। उन्होंने आल इंडिया पुलिस गेम्स 2024 में पोल वाल्ट स्पर्धा में पांच मीटर जंपकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। शेखर अपने पिता के तीन संतानों में सबसे बड़े है। शेखर ने बताया कि पढ़ाई के बाद समय निकाल कर शेखर खेतों में अकेले जाकर पोलवाट, त्रिकूद, दौड़ और लांग जंप में प्रैक्टिस करते थे। उन्हें बधाई देने वालों में विकास पाण्डेय, रवि कुमार, गणेश प्रसाद, कन्हैयालाल, वीरेन्द्र कुमार, सतीश कुमार, काजू, जंगबहादुर सिंह, पिन्टू सिंह आदि शामिल है।  दिलीप मालव ने अमेरिका में दिखाया दम, कराटे में जीता गोल्ड सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) में कार्यरत जवान दिलीप कुमार मालव ने अमेरिका के बर्मिंघम शहर में 27 जून से 6 जुलाई 2025 तक आयोजित 21वें वर्ल्ड पुलिस गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कराटे प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत लिया है. दिलीप ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश और अपने राज्य राजस्थान का नाम गौरव से ऊंचा किया है. इस वैश्विक प्रतियोगिता में करीब 70 देशों के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं. जिला खेल अधिकारी कृपा शंकर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि दिलीप ने सेमीफाइनल मुकाबले में मलेशिया की टीम को और फाइनल में रोमानिया के खिलाड़ी को एकतरफा शिकस्त देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. सांसद दुष्यंत ने दी बधाई: इस प्रतियोगिता में दिलीप के साथ महेंद्र यादव, अनिल शर्मा और अजय थंगचन भी मौजूद रहे. दिलीप के इस अद्वितीय प्रदर्शन से पूरे जिले और प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है. इस मौके पर झालावाड़-बारां से सांसद दुष्यंत सिंह ने भी दिलीप कुमार मालव को फोन कर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. दिलीप मालव 7 जुलाई को अमेरिका से भारत लौटेंगे. झालावाड़ पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा.