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WhatsApp ने पुराने Android फोन्स से खत्म किया सपोर्ट, इन मोबाइल्स पर नहीं चलेगा ऐप

नई दिल्ली WhatsApp ने बड़ा ऐलान कर दिया है और बताया है कि कई पुराने स्मार्टफोन से सपोर्ट बंद किया जा चुका है. Wabetainfo ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 8 सितंबर 2026 से पुराने स्मार्टफोन से सपोर्ट बंद किया जा चुका है।  जो स्मार्टफोन Android 5.0 और 5.1 पर काम करते हैं, उनपर से WhatsApp का सपोर्ट बंद किया जा चुका है. जब  Android 5.0 और 5.1 पर काम करने वाले स्मार्टफोन यूजर्स जैसे ही मैसेजिंग ऐप को ओपन करेंगे, उसको ऐप के अंदर नोटिफिकेशन्स अलर्ट मिलेगा।  जो स्मार्टफोन Android 5.0 और 5.1 पर काम करते हैं, उनके पास एक ऑप्शन है कि वे अपने हैंडसेट को लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) वर्जन के साथ अपडेट कर लें. अगर न्यू अपडेट अवेलेबल नहीं है तो यूजर्स को न्यू हैंडसेट खरीदना चाहिए।  WhatsApp ने अप्रैल में कर दिया था ऐलान WhatsApp ने इस साल अप्रैल में ही ऐलान कर दिया था कि पुराने हैंडसेट से सपोर्ट बंद होने जा रहा है. अब कंपनी ने सपोर्ट बंद कर दिया है. अब वॉट्सऐप मिनिमम एंड्रॉयड 6.0 मार्शमैलो को सपोर्ट करेगा।  भारत  समेत कई देशों में पुराने हैंडसेट मौजूद  Wabetainfo ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत समेत पाकिस्तान, ब्राजील आदि कई देश हैं, जहां पर अभी भी बड़े स्तर पर पुराने डिवाइसों का इस्तेमाल किया जाता है. वे पुराने डिवाइस Android 5 या उससे भी पुराने ओएस वर्जन पर काम करते हैं।  WhatsApp पुराने एंड्रॉयड वर्जन से सपोर्ट क्यों बंद करता है?  WhatsApp लगातार न्यू फीचर्स जारी करता है और हर बार नए फीचर्स कुछ एंड्रॉयड वर्जन के साथ ही कंपेटेबल होते हैं. बहुत से फीचर्स ज्यादा पुराने एंड्रॉयड ओएस पर सपोर्ट नहीं करते हैं. एंड्रॉयड 5.0 या उससे पुराने ओएस से वॉट्सऐप ने सपोर्ट बंद कर दिया है। 

WhatsApp पर जुड़ेगा AI का पूरा नेटवर्क! कई AI Agents से सीधे बात कर सकेंगे यूजर्स

 नई दिल्ली  वॉट्सऐप का इस्तेमाल हम रोज चैटिंग, फोटो-वीडियो शेयर करने और कई जरूरी कामों के लिए करते हैं. अब कंपनी इसमें एक ऐसा फीचर जोड़ने की तैयारी कर रही है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए काफी काम का हो सकता है. इस नए फीचर की मदद से यूजर्स वॉट्सऐप के अंदर ही थर्ड-पार्टी एआई एजेंट और बोट्स जुड़ सकेंगे।  अभी अगर आपको किसी AI टूल का इस्तेमाल करना है, तो उसके लिए अलग वेबसाइट या ऐप खोलना पड़ता है. लेकिन वॉट्सऐप के इस नए फीचर के बाद ऐसा जरूरी नहीं होगा. यूजर्स सीधे वॉट्सऐप के अंदर ही अलग-अलग एआई एजेंट से बात कर सकेंगे. आइए जानते हैं यह फीचर कैसे काम कर सकता है।  क्या है ये नया फीचर? रिपोर्ट के मुताबिक, वॉट्सऐप ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे थर्ड-पार्टी एआई एजेंट और बोट्स को वॉट्सऐप से जोड़ा जा सकेगा।  मान लीजिए आप वॉट्सऐप पर किसी से बात कर रहे हैं और उसी दौरान आपको किसी एआई एजेंट की जरूरत पड़ जाती है. ऐसे में आपको अलग ऐप या वेबसाइट खोलने की जरूरत नहीं होगी. आप वॉट्सऐप के अंदर ही उस एआई एजेंट को जोड़कर उसका इस्तेमाल कर सकेंगे।  यानी AI के लिए सिर्फ वॉट्सऐप के अपने फीचर्स पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी. अलग-अलग कंपनियां और डेवलपर्स अपने एआई एजेंट को वॉट्सऐप के साथ जोड़ सकेंगे।  मान लीजिए आपको किसी एआई एजेंट से जानकारी लेनी है, कोई सवाल पूछना है या कोई काम करवाना है. ऐसे में आपको बार-बार अलग ऐप पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वॉट्सऐप के अंदर ही उस एआई एजेंट के साथ बातचीत की जा सकेगी।  कैसे काम करेगा? इस फीचर के आने के बाद संभव है कि यूजर्स को वॉट्सऐप में ही ऐसे AI बोट्स दिखाई दें, जिन्हें वे अपनी जरूरत के हिसाब से जोड़ सकें. इसके बाद सामान्य वॉट्सऐप चैट की तरह AI से बातचीत की जा सकेगी।  हालांकि, यह फीचर अभी आने की तैयारी में है और इसके काम करने का पूरा तरीका आने वाले समय में और साफ होगा. यह भी देखना होगा कि वॉट्सऐप किन एआई एजेंट को सपोर्ट करता है और यूजर्स को कितने विकल्प मिलते हैं।  यूजर्स को क्या फायदा होगा? सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि AI का इस्तेमाल करने के लिए बार-बार ऐप बदलने की जरूरत कम हो सकती है. वॉट्सऐप पहले से ही करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है. ऐसे में अगर एआई एजेंट भी यहीं मिल जाते हैं, तो उनका इस्तेमाल करना काफी आसान हो सकता है।  फिलहाल यह फीचर कब तक सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा, इसकी आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है. लेकिन अगर वॉट्सऐप इसे बड़े स्तर पर जारी करता है, तो AI और मैसेजिंग दोनों के इस्तेमाल का तरीका काफी हद तक बदल सकता है।   

नेपाल बाढ़ में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बना WhatsApp ग्रुप, एक्सपर्ट दे रहे बचावकर्मियों को गाइडेंस

पाल में बाढ़ की तबाही के बाद अभी भी रेस्क्यू का काम जारी है. प्रसाशन की कोशिश है कि मलबे के पीछे जिंदा बचे हर एक शख्स की जान बचानी है. जान बचाने में अब वॉट्सऐप भी अहम भूमिका अदा कर रहा है. दरअसल, एक WhatsApp ग्रुप में जुड़े एक्सपर्ट की टीम नेपाल की एक घाटी में रेस्क्यू टीम को गाइड कर रही है. करीब एक सप्ताह से पहले आई भीषण बाढ़ की वजह से तबाह हुए हाइड्रोपावर प्लांट्स की सुरंगों में किसी के जिंदा होने की उम्मीद है और बचावकर्मी उनकी तलाश में जुटे हैं.  ये जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट से मिली है. दरअसल, इंजीनियरों ने 26 अगस्त नेपाल की त्रिशूली घाटी में पानी, मिट्टी और चट्टानों का सैलाब आने से पहले एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था. अब आपदा के बाद से यह ग्रुप हेलीकॉप्टरों और भारी मशीनरी के साथ मिलकर लोगों को बचाने की कोशिश में एक अहम टूल बन चुका है. हाइड्रो पावर प्लांट्स में लापता अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि छह हाइड्रो पावर प्लांट्स से करीब 900 लोग लापता हैं, जिनमें कुछ लोग बच गए होंगे. कम से कम तीन प्लांट निर्माणाधीन थे, ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि वहां काम करने वाले लोग सुरंगों में चल गए होंगे और खुद की जान बचाई होगी. दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला, दूसरों की तलाश जारी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पहली सफलता बीते शुक्रवार को मिली है. शुक्रवार को आपदा का 9वां दिन था और अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्लांट से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला जा चुका है. उनमें से एक ने बताया कि सुरंग में और भी लोग जिंदा हो सकते हैं. 22 लाख टन मिट्टी और मलबा आया कई सुरंगों के एंट्री तक पहुंचना अभी भी काफी मुश्किल हो रहा हैं. इन सुरंगों को पानी के बाहव के लिए बनाया गाया था. बाढ़ अपने साथ घाटी में करीब 22 लाख टन मिट्टी और मलबा बहाकर ले आई, जिससे सुरंगों के रास्ते भी पूरी तरह से बंद हो चुके हैं. वॉट्सऐप ग्रुप से रेस्क्यू टीम को गाइडलाइंस अब वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए रेस्क्यू टीम को आगे का रास्ता दिखाया जा रहा है, सुरंगा का रास्ता और दूरी आदि के बारे में बताया जा रहा है. ऐसे में WhatsApp सिर्फ नॉर्मल चैटिंग और दोस्तों के साथ ग्रुप आदि बनाने तक सीमित नहीं है, इसकी मदद से रेस्क्यू के काम को भी अंजाम दिया जा सकता है.

WhatsApp ने रोका राम गोपाल यादव का मैसेज कैंपेन, प्रतिदिन 5 हजार लोगों को भेजते थे संदेश

 लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव हर सुबह करीब 5 हजार लोगों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं. लेकिन अब यह सिलसिला कुछ समय के लिए रुक गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि 31 जुलाई तक वह अपने नियमित व्हाट्सएप संदेश नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि व्हाट्सऐप ने उनके अकाउंट से संदेश भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है।  रामगोपाल यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह प्रतिदिन सुबह लगभग पांच हजार लोगों को सुप्रभात संदेश भेजते थे और उनके अच्छे दिन की कामना करते थे. उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप ने 31 जुलाई तक उनके द्वारा भेजे जाने वाले संदेशों पर रोक लगा दिया है. इसी वजह से वह इस अवधि में अपने शुभचिंतकों तक रोजाना पहुंचने वाला संदेश नहीं भेज सकेंगे।  रामगोपाल यादव की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई. कई समर्थकों ने उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जल्द प्रतिबंध हटने की उम्मीद जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने यह जानने की उत्सुकता दिखाई कि व्हाट्सऐप ने इतनी बड़ी संख्या में संदेश भेजने पर यह अस्थायी रोक क्यों लगाई।  गौरतलब है कि व्हाट्सएप की नीतियों के तहत एक साथ बड़ी संख्या में संदेश भेजने या असामान्य गतिविधि पाए जाने पर सुरक्षा कारणों से कुछ अकाउंट्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, रामगोपाल यादव के मामले में व्हाट्सएप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए प्रतिबंध का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता, ऑनलाइन ठगी का खतरा बताया

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी। सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे। क्या है पूरा मामला?  दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी।  क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा। एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम  वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स 'सेटिंग्स' में जाकर, फिर 'अकाउंट' और उसके बाद 'यूजरनेम' पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा। मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है। मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस  इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं।  मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा।  सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है? मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी। इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा। सुरक्षित यूजरनेम सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है।   

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, Meta को मिला 9 जुलाई तक का नया डेडलाइन

नई दिल्ली WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर भारत सरकार और Meta के बीच चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. अब सरकार ने Meta को अपना जवाब देने के लिए कुछ और समय दिया है।  पहले कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देना था, लेकिन अब यह समय बढ़ाकर 9 जुलाई कर दिया गया है. सरकार इस फीचर के सुरक्षा और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है. HT की एक रिपोर्ट मेें सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मेटा को कुछ दिन का एक्स्टेंशन दिया गया है।  दरअसल वॉट्सऐप ने हाल ही में यूजरनेम फीचर का ऐलान किया था. इस फीचर के आने के बाद यूजर्स अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी दूसरे लोगों से बात कर सकेंगे। यानी अगर आपके पास किसी का यूजरनेम है, तो कई मामलों में फोन नंबर शेयर किए बिना भी बातचीत शुरू की जा सकेगी. मेटा का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से बेहतर होगी।  लेकिन भारत सरकार की चिंता कुछ और है. सरकार का मानना है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर ठगी करने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।  इसी वजह से सरकार ने पिछले हफ्ते Meta को इस फीचर का रोलआउट रोकने और इसकी पूरी जानकारी देने का नोटिस भेजा था।  सरकारी अधिकारियों के मुताबिक मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर बैठक भी हो चुकी है. बैठक में कंपनी ने यूजरनेम फीचर के सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।  इसके बाद सरकार ने कंपनी को अपना विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दे दिया है. इसके बाद सरकार तय करेगी कि फीचर को भारत में किस तरह और किन शर्तों के साथ शुरू किया जा सकता है।  मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर को शुरू से ही सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यूजरनेम पूरी तरह ऑप्शनल होगा. वॉट्सऐप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा।  इसके अलावा किसी व्यक्ति से बातचीत करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना चाहिए. कंपनी का दावा है कि उसने फर्जी अकाउंट और स्कैम से बचाने के लिए कई सुरक्षा लेयर भी जोड़ी हैं. हाल ही में मेटा ने इस फीचर से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए एक FAQ भी जारी किया है।  सरकार हालांकि अभी इन दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम और पहचान छिपाने वाले फीचर्स का इस्तेमाल कई साइबर अपराधों में हुआ है। ऐसे में वॉट्सऐप पर भी इसी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार चाहती है कि फीचर शुरू होने से पहले यह साफ हो जाए कि इससे फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना आसान नहीं होगा।  भारत वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 80 करोड़ से ज्यादा लोग इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सरकार का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वॉट्सऐप के ग्लोबल रोलआउट पर भी असर डाल सकता है।  अब सभी की नजर 9 जुलाई पर है, जब मेटा अपना विस्तृत जवाब सरकार को सौंपेगी. उसके बाद यह तय होगा कि वॉट्सऐप का नया यूजरनेम फीचर भारत में कब और किन नियमों के साथ शुरू होगा। 

WhatsApp ला रहा बड़ा अपडेट, टैबलेट के लिए मिलेगा खास मोड; जानें क्या होंगे नए फीचर्स

 नई दिल्ली  WhatsApp आखिरकार टैबलेट के लिए भी अलग से एक खास मोड लेकर आ रहा है, जिसकी टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. यह अलग स्टैंडएलोन ऐप एंड्रॉयड टैबलेट पर काम करेगा. अभी तक एंड्रॉयड टैबलेट में वॉट्सऐप चलाने के लिए प्राइमरी स्मार्टफोन साथ रखना होता था। वॉट्सऐप के स्टैंडएलोन मोड की मदद से टैबलेट को बतौर प्राइमरी डिवाइस भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसकी जानकारी वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर और अपडेट को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Wabetainfo ने शेयर की है।    चुनिंदा यूजर्स के पास न्यू बीटा वर्जन का एक्सेस दिया है. Wabetainfo ने बताया है कि की यूजर्स ने बताया है कि टैबलेट पर न्यू स्क्रीन दिखाई देगा, जहां सबसे ऊपर Choose An Option दिखाई देगा, उसके नीचे दो ऑप्शन मिलेंगे. इसमें एक लॉगइन इनटू वॉट्सऐप और दूसरा ऑप्शन ट्रांसफर योर अकाउंट का ऑप्शन है।  दोनों ऑप्शन के अलग-अलग काम  पहले ऑप्शन की मदद से यूजर्स अपने प्राइमरी डिवाइस को कनेक्ट कर सकेंगे, उसके लिए क्विक रिस्पोंस कोड (QR Code) को प्राइम वॉट्सऐप अकाउंट से लिंक करना होगा।  Wabetainfo ने किया पोस्ट  सेकेंड ऑप्शन की मदद से यूजर्स टैबलेट को अपना प्राइमरी डिवाइस बना सकते हैं. इसके लिए मोबाइल नंबर एंटर करना होगा और नंबर को ऑथेंटिकेट करना होगा।  प्राइमरी डिवाइस बनाने का क्या है मतलब  टैबलेट या स्मार्टफोन में  वॉट्सऐप को प्राइमरी अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करने का मतलब है कि वह बाकी सभी पुराने डिवाइस से ऑटोमैटिक लॉगआउट हो जाएगा. साथ ही अगर चैट बैकअप सिंक नहीं हुआ होगा तो वह रिकवर भी नहीं होगी।  टैबलेट पर अगर प्राइमरी वॉट्सऐप अकाउंट यूज करते हैं, तो 14 दिन के बाद वह ऑटोमेटिक लॉगआउट नहीं होगा. इससे यूजर्स एक्सपीरिंयस बेहतर होगा और हमेशा एक साथ दो डिवाइस लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। 

WhatsApp का नया Username फीचर कितना सुरक्षित? कंपनी ने 7 सवालों के दिए जवाब, फ्रॉड पर भी किया साफ़ खुलासा

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।  हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके।  फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है।  व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा।  यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं।  केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता।  सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है।  मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है।  सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

WhatsApp Username Feature बना चिंता का कारण, बढ़ते साइबर फ्रॉड के डर से सरकार करेगी समीक्षा

 नई दिल्ली WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे।  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं? सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा।  अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है।  इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं।  टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है।  सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं।  वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके।  इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

अब नंबर शेयर किए बिना होगी WhatsApp पर बातचीत, कंपनी ने लॉन्च किया नया प्राइवेसी फीचर

 नई दिल्ली WhatsApp जल्द अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है. अब किसी नए शख्स से बात करने के लिए आपको अपना मोबाइल नंबर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जैसे टेलीग्राम पर यूजरनेम के जरिए कनेक्ट हो कर बातचीत कर सकते हैं, ठीक वैसे ही अब वॉट्सऐप में आ रहा है।  कंपनी ने आधिकारिक तौर पर नए Username फीचर का ऐलान कर दिया है. इस फीचर की मदद से लोग अपने फोन नंबर की जगह वॉट्सऐप यूजरनेम शेयर करके चैट शुरू कर सकेंगे।  कंपनी ने बताया है कि इस हफ्ते से यूजर्स अपने पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकेंगे. हालांकि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए धीरे-धीरे जारी किया जाएगा. जिन देशों में यह उपलब्ध होगा, वहां वॉट्सऐप खुद ऐप के अंदर नोटिफिकेशन देकर इसकी जानकारी देगा।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर क्या है? अब तक वॉट्सऐप पर किसी से बात करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना जरूरी था. लेकिन नए फीचर के आने के बाद अगर आपने यूजरनेम बना लिया है, तो पहली बार आपसे संपर्क करने वाले शख्स को आपका मोबाइल नंबर नहीं दिखेगा. इससे आपकी प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।  वॉट्सऐप का कहना है कि आज कई लोग किसी इवेंट, क्लास, ऑफिस, सोसायटी या ग्रुप में जुड़ना चाहते हैं, लेकिन अपना निजी मोबाइल नंबर हर किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहते. इसी जरूरत को देखते हुए कंपनी यह फीचर लेकर आई है. अब लोग अपना यूजरनेम देकर बातचीत शुरू कर सकेंगे।  कंपनी के मुताबिक वॉट्सऐप पर दुनिया भर में 3 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं. ऐसे में कई लोगों की पसंद एक जैसी हो सकती है. इसी वजह से कंपनी ने फीचर लॉन्च होने से पहले यूजरनेम रिजर्व करने का विकल्प शुरू किया है, ताकि यूजर्स अपनी पसंद का नाम पहले ही सिक्योर कर सकें।  अगर आपको यूजरनेम चुनने में परेशानी होगी तो वॉट्सऐप एक यूजरनेम जेनेरेटर भी देगा. यह आपकी पसंद के हिसाब से कुछ सुझाव दिखाएगा, जिनमें से आप कोई भी चुन सकते हैं।  यह फीचर खास तौर पर कंटेंट क्रिएटर, इंफ्लूएंसर, छोटे कारोबार और संस्थाओं के लिए भी काफी काम का होगा. अगर उनके पास पहले से इंस्टाग्राम या फेसबुक पर कोई यूजरनेम है, तो वे उसी यूजरनेम को वॉट्सऐप पर भी क्लेम कर सकेंगे. इससे सभी मेटा प्लेटफॉर्म पर उनकी एक जैसी पहचान बनी रहेगी।  वॉट्सऐप ने कहा है कि यह कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बनने जा रहा है. यहां यूजरनेम खोजने के लिए कोई पब्लिक डायरेक्ट्री नहीं होगी और न ही लोगों के यूजरनेम सर्च करके देखे जा सकेंगे. किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।  कंपनी ने सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए एक नया Username Key सिस्टम भी बनाया है. अगर कोई यूजर चाहे तो वह यह एक्स्ट्रा सिक्योरिटी ऑप्शन चालू कर सकता है. इसके बाद किसी नए शख्स को मैसेज भेजने के लिए सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उस Key की भी जरूरत पड़ सकती है. इससे अनजान लोगों के लिए संपर्क करना और मुश्किल हो जाएगा।  वॉट्सऐप का कहना है कि यूजरनेम फीचर शुरू होने के बाद अगर आपने इसे चालू कर दिया है, तो किसी नए व्यक्ति या बिजनेस से पहली बार बातचीत करते समय आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा. इससे आपकी निजी जानकारी पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित रहेगी। अगर आपके पास वॉट्सऐप का नया वर्जन है, तो फीचर उपलब्ध होने पर आप Settings > Account > Username में जाकर अपना यूजरनेम रिजर्व कर पाएंगे. अभी यह सुविधा सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुई है. कंपनी आने वाले महीनों में इसे धीरे-धीरे दुनिया भर के यूजर्स तक पहुंचाएगी।  वॉट्सऐप का मानना है कि यूजरनेम फीचर उसकी प्राइवेसी स्ट्रैटिजी का अगला बड़ा कदम है. इससे यूजर्स को नए लोगों से बात करते समय अपना मोबाइल नंबर शेयर करने की मजबूरी नहीं रहेगी और वे पहले से ज्यादा  सुरक्षित तरीके से वॉट्सऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे।