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WhatsApp ने रोका राम गोपाल यादव का मैसेज कैंपेन, प्रतिदिन 5 हजार लोगों को भेजते थे संदेश

 लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव हर सुबह करीब 5 हजार लोगों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं. लेकिन अब यह सिलसिला कुछ समय के लिए रुक गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि 31 जुलाई तक वह अपने नियमित व्हाट्सएप संदेश नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि व्हाट्सऐप ने उनके अकाउंट से संदेश भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है।  रामगोपाल यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह प्रतिदिन सुबह लगभग पांच हजार लोगों को सुप्रभात संदेश भेजते थे और उनके अच्छे दिन की कामना करते थे. उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप ने 31 जुलाई तक उनके द्वारा भेजे जाने वाले संदेशों पर रोक लगा दिया है. इसी वजह से वह इस अवधि में अपने शुभचिंतकों तक रोजाना पहुंचने वाला संदेश नहीं भेज सकेंगे।  रामगोपाल यादव की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई. कई समर्थकों ने उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जल्द प्रतिबंध हटने की उम्मीद जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने यह जानने की उत्सुकता दिखाई कि व्हाट्सऐप ने इतनी बड़ी संख्या में संदेश भेजने पर यह अस्थायी रोक क्यों लगाई।  गौरतलब है कि व्हाट्सएप की नीतियों के तहत एक साथ बड़ी संख्या में संदेश भेजने या असामान्य गतिविधि पाए जाने पर सुरक्षा कारणों से कुछ अकाउंट्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, रामगोपाल यादव के मामले में व्हाट्सएप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए प्रतिबंध का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता, ऑनलाइन ठगी का खतरा बताया

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी। सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे। क्या है पूरा मामला?  दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी।  क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा। एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम  वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स 'सेटिंग्स' में जाकर, फिर 'अकाउंट' और उसके बाद 'यूजरनेम' पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा। मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है। मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस  इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं।  मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा।  सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है? मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी। इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा। सुरक्षित यूजरनेम सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है।   

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, Meta को मिला 9 जुलाई तक का नया डेडलाइन

नई दिल्ली WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर भारत सरकार और Meta के बीच चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. अब सरकार ने Meta को अपना जवाब देने के लिए कुछ और समय दिया है।  पहले कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देना था, लेकिन अब यह समय बढ़ाकर 9 जुलाई कर दिया गया है. सरकार इस फीचर के सुरक्षा और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है. HT की एक रिपोर्ट मेें सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मेटा को कुछ दिन का एक्स्टेंशन दिया गया है।  दरअसल वॉट्सऐप ने हाल ही में यूजरनेम फीचर का ऐलान किया था. इस फीचर के आने के बाद यूजर्स अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी दूसरे लोगों से बात कर सकेंगे। यानी अगर आपके पास किसी का यूजरनेम है, तो कई मामलों में फोन नंबर शेयर किए बिना भी बातचीत शुरू की जा सकेगी. मेटा का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से बेहतर होगी।  लेकिन भारत सरकार की चिंता कुछ और है. सरकार का मानना है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर ठगी करने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।  इसी वजह से सरकार ने पिछले हफ्ते Meta को इस फीचर का रोलआउट रोकने और इसकी पूरी जानकारी देने का नोटिस भेजा था।  सरकारी अधिकारियों के मुताबिक मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर बैठक भी हो चुकी है. बैठक में कंपनी ने यूजरनेम फीचर के सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।  इसके बाद सरकार ने कंपनी को अपना विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दे दिया है. इसके बाद सरकार तय करेगी कि फीचर को भारत में किस तरह और किन शर्तों के साथ शुरू किया जा सकता है।  मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर को शुरू से ही सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यूजरनेम पूरी तरह ऑप्शनल होगा. वॉट्सऐप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा।  इसके अलावा किसी व्यक्ति से बातचीत करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना चाहिए. कंपनी का दावा है कि उसने फर्जी अकाउंट और स्कैम से बचाने के लिए कई सुरक्षा लेयर भी जोड़ी हैं. हाल ही में मेटा ने इस फीचर से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए एक FAQ भी जारी किया है।  सरकार हालांकि अभी इन दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम और पहचान छिपाने वाले फीचर्स का इस्तेमाल कई साइबर अपराधों में हुआ है। ऐसे में वॉट्सऐप पर भी इसी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार चाहती है कि फीचर शुरू होने से पहले यह साफ हो जाए कि इससे फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना आसान नहीं होगा।  भारत वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 80 करोड़ से ज्यादा लोग इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सरकार का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वॉट्सऐप के ग्लोबल रोलआउट पर भी असर डाल सकता है।  अब सभी की नजर 9 जुलाई पर है, जब मेटा अपना विस्तृत जवाब सरकार को सौंपेगी. उसके बाद यह तय होगा कि वॉट्सऐप का नया यूजरनेम फीचर भारत में कब और किन नियमों के साथ शुरू होगा। 

WhatsApp ला रहा बड़ा अपडेट, टैबलेट के लिए मिलेगा खास मोड; जानें क्या होंगे नए फीचर्स

 नई दिल्ली  WhatsApp आखिरकार टैबलेट के लिए भी अलग से एक खास मोड लेकर आ रहा है, जिसकी टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. यह अलग स्टैंडएलोन ऐप एंड्रॉयड टैबलेट पर काम करेगा. अभी तक एंड्रॉयड टैबलेट में वॉट्सऐप चलाने के लिए प्राइमरी स्मार्टफोन साथ रखना होता था। वॉट्सऐप के स्टैंडएलोन मोड की मदद से टैबलेट को बतौर प्राइमरी डिवाइस भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसकी जानकारी वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर और अपडेट को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Wabetainfo ने शेयर की है।    चुनिंदा यूजर्स के पास न्यू बीटा वर्जन का एक्सेस दिया है. Wabetainfo ने बताया है कि की यूजर्स ने बताया है कि टैबलेट पर न्यू स्क्रीन दिखाई देगा, जहां सबसे ऊपर Choose An Option दिखाई देगा, उसके नीचे दो ऑप्शन मिलेंगे. इसमें एक लॉगइन इनटू वॉट्सऐप और दूसरा ऑप्शन ट्रांसफर योर अकाउंट का ऑप्शन है।  दोनों ऑप्शन के अलग-अलग काम  पहले ऑप्शन की मदद से यूजर्स अपने प्राइमरी डिवाइस को कनेक्ट कर सकेंगे, उसके लिए क्विक रिस्पोंस कोड (QR Code) को प्राइम वॉट्सऐप अकाउंट से लिंक करना होगा।  Wabetainfo ने किया पोस्ट  सेकेंड ऑप्शन की मदद से यूजर्स टैबलेट को अपना प्राइमरी डिवाइस बना सकते हैं. इसके लिए मोबाइल नंबर एंटर करना होगा और नंबर को ऑथेंटिकेट करना होगा।  प्राइमरी डिवाइस बनाने का क्या है मतलब  टैबलेट या स्मार्टफोन में  वॉट्सऐप को प्राइमरी अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करने का मतलब है कि वह बाकी सभी पुराने डिवाइस से ऑटोमैटिक लॉगआउट हो जाएगा. साथ ही अगर चैट बैकअप सिंक नहीं हुआ होगा तो वह रिकवर भी नहीं होगी।  टैबलेट पर अगर प्राइमरी वॉट्सऐप अकाउंट यूज करते हैं, तो 14 दिन के बाद वह ऑटोमेटिक लॉगआउट नहीं होगा. इससे यूजर्स एक्सपीरिंयस बेहतर होगा और हमेशा एक साथ दो डिवाइस लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। 

WhatsApp का नया Username फीचर कितना सुरक्षित? कंपनी ने 7 सवालों के दिए जवाब, फ्रॉड पर भी किया साफ़ खुलासा

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।  हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके।  फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है।  व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा।  यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं।  केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता।  सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है।  मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है।  सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

WhatsApp Username Feature बना चिंता का कारण, बढ़ते साइबर फ्रॉड के डर से सरकार करेगी समीक्षा

 नई दिल्ली WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे।  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं? सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा।  अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है।  इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं।  टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है।  सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं।  वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके।  इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

अब नंबर शेयर किए बिना होगी WhatsApp पर बातचीत, कंपनी ने लॉन्च किया नया प्राइवेसी फीचर

 नई दिल्ली WhatsApp जल्द अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है. अब किसी नए शख्स से बात करने के लिए आपको अपना मोबाइल नंबर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जैसे टेलीग्राम पर यूजरनेम के जरिए कनेक्ट हो कर बातचीत कर सकते हैं, ठीक वैसे ही अब वॉट्सऐप में आ रहा है।  कंपनी ने आधिकारिक तौर पर नए Username फीचर का ऐलान कर दिया है. इस फीचर की मदद से लोग अपने फोन नंबर की जगह वॉट्सऐप यूजरनेम शेयर करके चैट शुरू कर सकेंगे।  कंपनी ने बताया है कि इस हफ्ते से यूजर्स अपने पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकेंगे. हालांकि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए धीरे-धीरे जारी किया जाएगा. जिन देशों में यह उपलब्ध होगा, वहां वॉट्सऐप खुद ऐप के अंदर नोटिफिकेशन देकर इसकी जानकारी देगा।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर क्या है? अब तक वॉट्सऐप पर किसी से बात करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना जरूरी था. लेकिन नए फीचर के आने के बाद अगर आपने यूजरनेम बना लिया है, तो पहली बार आपसे संपर्क करने वाले शख्स को आपका मोबाइल नंबर नहीं दिखेगा. इससे आपकी प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।  वॉट्सऐप का कहना है कि आज कई लोग किसी इवेंट, क्लास, ऑफिस, सोसायटी या ग्रुप में जुड़ना चाहते हैं, लेकिन अपना निजी मोबाइल नंबर हर किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहते. इसी जरूरत को देखते हुए कंपनी यह फीचर लेकर आई है. अब लोग अपना यूजरनेम देकर बातचीत शुरू कर सकेंगे।  कंपनी के मुताबिक वॉट्सऐप पर दुनिया भर में 3 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं. ऐसे में कई लोगों की पसंद एक जैसी हो सकती है. इसी वजह से कंपनी ने फीचर लॉन्च होने से पहले यूजरनेम रिजर्व करने का विकल्प शुरू किया है, ताकि यूजर्स अपनी पसंद का नाम पहले ही सिक्योर कर सकें।  अगर आपको यूजरनेम चुनने में परेशानी होगी तो वॉट्सऐप एक यूजरनेम जेनेरेटर भी देगा. यह आपकी पसंद के हिसाब से कुछ सुझाव दिखाएगा, जिनमें से आप कोई भी चुन सकते हैं।  यह फीचर खास तौर पर कंटेंट क्रिएटर, इंफ्लूएंसर, छोटे कारोबार और संस्थाओं के लिए भी काफी काम का होगा. अगर उनके पास पहले से इंस्टाग्राम या फेसबुक पर कोई यूजरनेम है, तो वे उसी यूजरनेम को वॉट्सऐप पर भी क्लेम कर सकेंगे. इससे सभी मेटा प्लेटफॉर्म पर उनकी एक जैसी पहचान बनी रहेगी।  वॉट्सऐप ने कहा है कि यह कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बनने जा रहा है. यहां यूजरनेम खोजने के लिए कोई पब्लिक डायरेक्ट्री नहीं होगी और न ही लोगों के यूजरनेम सर्च करके देखे जा सकेंगे. किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।  कंपनी ने सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए एक नया Username Key सिस्टम भी बनाया है. अगर कोई यूजर चाहे तो वह यह एक्स्ट्रा सिक्योरिटी ऑप्शन चालू कर सकता है. इसके बाद किसी नए शख्स को मैसेज भेजने के लिए सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उस Key की भी जरूरत पड़ सकती है. इससे अनजान लोगों के लिए संपर्क करना और मुश्किल हो जाएगा।  वॉट्सऐप का कहना है कि यूजरनेम फीचर शुरू होने के बाद अगर आपने इसे चालू कर दिया है, तो किसी नए व्यक्ति या बिजनेस से पहली बार बातचीत करते समय आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा. इससे आपकी निजी जानकारी पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित रहेगी। अगर आपके पास वॉट्सऐप का नया वर्जन है, तो फीचर उपलब्ध होने पर आप Settings > Account > Username में जाकर अपना यूजरनेम रिजर्व कर पाएंगे. अभी यह सुविधा सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुई है. कंपनी आने वाले महीनों में इसे धीरे-धीरे दुनिया भर के यूजर्स तक पहुंचाएगी।  वॉट्सऐप का मानना है कि यूजरनेम फीचर उसकी प्राइवेसी स्ट्रैटिजी का अगला बड़ा कदम है. इससे यूजर्स को नए लोगों से बात करते समय अपना मोबाइल नंबर शेयर करने की मजबूरी नहीं रहेगी और वे पहले से ज्यादा  सुरक्षित तरीके से वॉट्सऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। 

WhatsApp Update: आया नया चैट फीचर, आपकी निजी बातचीत को मिलेगा अतिरिक्त सुरक्षा कवच

 नई दिल्ली WhatsApp में अब एक नया फीचर मिलेगा, जिसका नाम साइड चैट है. यह मैसेज को सीक्रेट और प्राइवेट रखेगा. यह फीचर Meta AI के साथ काम करता है. दरअसल, बीते महीने मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने इनकॉग्निटो चैट को पेश किया था, जो मेटा AI से बातचीत करने का सबसे आसान तरीका है और साइड चैट उसी का एक एक्सटेंड वर्जन है. यह जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है।  WhatsApp यूजर्स अब साइड चैट की मदद से किसी स्पेशल चैटिंग पर Meta AI से मदद मांग सकेंगे. ये डेटा लीक नहीं होगा. मेटा ने इस फीचर को अभी चुनिंदा यूजर्स के लिए जारी किया है. आने वाले दिनों में इसको और भी यूजर्स तक विस्तार किया जाएगा।  मेटा AI से बातचीत करने वाले लोगों को अक्सर डर सताता है कि उनकी सीक्रेट चैट्स लीक हो सकती हैं, डिसकी वजह से उनका काफी नुकसान हो सकता है. ऐसे यूजर्स के लिए इनकॉग्निटो चैट एकदम सही ऑप्शन है. इसकी एक लिमिटेशन है कि यह व्हाट्सऐप में हो रही बातचीत को एक्सेस नहीं कर पाता है।  WAbetainfo का पोस्ट  साइड चैट को ओपन करना आसान है व्हाट्सऐप के अंदर साइड चैट को ओपन करना बड़ा ही सिपंल है. यह फीचर यूजर्स को उनकी चैट के पास नजर आएगा, जिसका नाम Ask Privately है. चैट स्क्रीन को लेफ्ट स्वाइप करने पर साइड पैनल ओपन हो जाएगा। डार्क डिजाइन के साथ साइड चैटिंग  साइड चैट पैनल बड़ा ही अट्रैक्टिव है, जिसमें डार्क डिजाइन के साथ अलग स्क्रीन नजर आएगा. यह इनकॉग्निटो चैट इंटरफेस जैसा है. साइड चैट के अंदर वेब सर्च की भी खूबी है. साइड चैट पूरी तरह से प्राइवेट प्रोसेसिंग पर काम करता है, जिसकी वजह से मैसेज और चैट पूरी तरह से सीक्रेट रहती है।  

WhatsApp vs Telegram: सरकार की पहुंच किस ऐप तक ज्यादा और क्यों? समझिए दोनों का पूरा खेल

 नई दिल्ली भारत में सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक के लिए टेंपररी बैन कर दिया गया है. इस बैन के पीछे सबसे बड़ा कारण NEET UG परीक्षा का पेपर लीक रोकना बताया जा रहा है. वहीं दूसरे फेमस मैसेजिंग ऐप्स पर अभी कोई बैन नहीं लगाया गया है, जैसे कि WhatsApp. आखिर दोनों ऐप्स में ऐसा क्या अंतर है कि टेलीग्राम पर बैन लग गया और व्हाट्सऐप सेफ रह गया? टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों ही बहुत ज्यादा फेमस ऐप्स हैं और अपने मैसेजिंग फीचर्स के लिए जाने जाते हैं. लेकिन दोनों ऐप्स को अलग तरीके से बनाया गया है. WhatsApp एक पुराना मैसेजिंग सिस्टम की तरह काम करता है, जबकि टेलीग्राम एक बड़े क्लाउड-बेस्ड नेटवर्क की तरह काम करता है।  जानिए क्यों नहीं बना पा रही सरकार टेलीग्राम पर अपनी पकड़ क्लाउड बेस्ड स्टोरेज VS फोन स्टोरेज टेलीग्राम ऐप पर डेटा ऑनलाइन क्लाउड स्टोरेज में सेव रहता है. इसकी वजह से अगर आप किसी भी मोबाइल या डिवाइस में लॉगिन करते हैं तो अपनी सभी चैट्स और फाइल्स देख सकते हैं. अगर आपका फोन चोरी भी हो जाए, तब भी आपका डेटा क्लाउड पर सेफ रहता है. इसी फीचर की वजह से कोई भी व्यक्ति किसी भी डिवाइस से जानकारी आसानी से शेयर कर सकता है।  वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सऐप आपके फोन की स्टोरेज का ज्यादा इस्तेमाल करता है. डाउनलोड या शेयर किया गया डेटा फोन में सेव हो जाता है. ऐसे में अगर कोई जानकारी शेयर की जाती है, तो उसके निशान फोन में मौजूद रह सकते हैं. यहां क्लाउड बैकअप ऑप्शनल है।  यूजरनेम और फोन नंबर टेलीग्राम में यूजरनेम का फीचर मिलता है, जिसकी मदद से लोग बिना फोन नंबर शेयर किए एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं और ग्रुप्स जॉइन कर सकते हैं. इस वजह से यूजर्स का फोन नंबर सामने नहीं आता।  वहीं व्हाट्सऐप पर किसी से बात करने या ग्रुप जॉइन करने के लिए फोन नंबर जरूरी होता है. इसी वजह से ग्रुप्स में लोग एक दूसरे के नंबर आसानी से देख सकते हैं।  मैसेज ब्रॉडकास्ट करना टेलीग्राम पर चैनल्स का फीचर मिलता है, जो पब्लिक या प्राइवेट हो सकते हैं. चैनल का एडमिन एक क्लिक में अनलिमिटेड लोगों तक मैसेज, वीडियो और फाइल्स पहुंचा सकता है. इस वजह से जानकारी बहुत तेजी से फैल सकती है।  वहीं व्हाट्सऐप को प्राइवेट बातचीत और छोटे ग्रुप्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसके ब्रॉडकास्ट और ग्रुप फीचर्स में भी सीमाएं हैं, जिससे एक साथ बहुत ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचाना आसान नहीं होता।  कोई लोकल ऑफिस नहीं व्हाट्सऐप, मेटा कंपनी के अंडर आता है, जिसके ऑफिस और लीगल टीमें कई देशों में मौजूद हैं. वहीं टेलीग्राम किसी भी देश में लोकल ऑफिस खोलने से बचता है और अपनी कंपनी को काफी हद तक डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से चलाता है।  लोकल ऑफिस और लीगल टीम न होने की वजह से सरकारों के लिए टेलीग्राम पर दबाव बनाना मुश्किल हो सकता है।  व्हाट्सऐप एक अच्छा टूल है, जिसकी मदद से लोग रोजाना अपने दोस्तों और परिवार वालों से फोन नंबर के जरिए बात करते हैं. लेकिन टेलीग्राम को ज्यादा प्राइवेसी, बड़े ऑडियंस तक जानकारी पहुंचाने और एडवांस फीचर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यही वजह है कि टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है। 

WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी, गुप्त मैसेजिंग को मिलेगा नया सुरक्षा कवच

नई दिल्ली  इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp एक नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स को सीक्रेट मैसेज भेजने में मदद मिलेगी. दरअसल, अब टेक्स्ट मैसेज के साथ View Once फीचर का सपोर्ट शामिल किया जा रहा है. इसकी जानकारी WhatsApp के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Wabetainfo ने दी है।  रिपोर्ट्स में बताया है कि अभी View Once फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है. अभी इसको बीटा वर्जन के लिए भी पेश नहीं किया गया है. पहले यह फीचर फोटो और वीडियो आदि को सपोर्ट करता था. अब कंपनी इसको टेक्स्ट मैसेज के अंदर शामिल करने जा रही है।  एक बार मैसेज में View Once सपोर्ट आने के बाद यूजर्स किसी भी शख्स को सीक्रेट मैसेज भेजते हैं, उसके बाद जैसे ही रिसीवर उस मैसेज को पढ़ता है, फिर वह मैसेज ऑटोमेटिक डिलीट हो जाएगा. हालांकि इसके लिए  मैसेज भेजते समय View Once को इनेबल करना होगा।  मैसेज का स्क्रीनशॉट्स भी नहीं ले पाएंगे  WhatsApp पर View Once फीचर के तहत रिसीव होने वाले मैसेज का ना तो स्क्रीनशॉट्स लिया जा सकता है ना ही उसको एक से ज्यादा बार देखा जा सकता है. यह अपने आप में बेहद ही खास है. इस फीचर का इंतजार WhatsApp के टेक्स्ट मैसेज के लिए लंबे समय से किया जा रहा है और अब लेटेस्ट रिपोर्ट् में बताया गया है कि यह अभी डेवलपमेंट फेज में है।  WhatsApp का View Once फीचर कैसे काम करेंगे Wabetainfo की तरफ से एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है, जिसमें दिखाया है कि View Once नाम का ये फीचर कैसे काम करेगा. एक बार सेंडर की तरफ से View Once मैसेज भेजा जाएगा, जिसके बाद जैसे ही मैसेज रिसीवर द्वारा पढ़ लिया जाता है, उसके बाद मैसेज खुद ब खुद डिलीट हो जाता है।  WhatsApp लगातार अपने प्लेटफॉर्म में नए-नए फीचर्स को शामिल करता है. मेटा ने सिंपल से यूजर इंटरफेस में ढेरों फीचर्स को शामिल किया है.  हालांकि रिपोर्ट में WhatsApp के टेक्स्ट मैसेज के साथ मिलने वाले View Once की लॉन्चिंग टाइम लाइन का जिक्र नहीं किया है।