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WhatsApp में बड़ी अपडेट, नया AI ऑप्शन सिर्फ सिंपल स्टेप्स में इस्तेमाल करें

 नई दिल्ली  WhatsApp ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप के अंदर एक न्यू टैब दिखाया गया है, जिसका नाम Meta AI Tab है, जिसकी मदद से यूजर्स आसानी से AI फीचर्स को एक्सेस कर पाएंगे। लेटेस्ट अपडेट की जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. रिपोर्ट में बताया है कि न्यू टैब की मदद से यूजर्स आसानी से AIसे इंटरैक्ट कर सकेंगे. इसमें टेक्स्ट और वॉयस कमांड से बातचीत की जा सकेगी. साथ ही यहां एनीमेटेड इमेज आदि को तैयार किया जा सकेगा। इस एंड्रॉयड बीटा वर्जन में दिखा नया टैब  Wabetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि WhatsApp बीटा के Android 2.26.6.5 वर्जन में न्यू टैब दिखाई दिया है. यह एक सेंटरलाइज AI पावर्ड टूल है। Wabetainfo ने पोस्ट किया एंड्रॉयड यूजर्स को टेस्टिंग के लिए मिला  WhatsApp ने अभी सीमित एंड्रॉयड यूजर्स के साथ इसकी टेस्टिंग शुरू की है. कई यूजर्स इस फीचर्स को यूज कर रहे हैं. Wabetainfo ने इसको लेकर एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है, जहां बताया है कि न्यू AI टैब कैसा नजर आएगा। Meta AI के लिए एक नया टैब पोस्ट में एम्बेड इमेज की मदद से आप देख सकते हैं कि कुछ बीटा टेस्टर्स को बॉटम पर Meta AI के लिए एक नया टैब दिया है. मैसेजिंग ऐप में नया टैब जोड़ने के लिए मैसेजिंग ऐप में मुख्य इंटरफेस से कम्युनिटीस टैब को रिमूव कर दिया है। एक पुराने पोस्ट में पहले ही बताया जा चुका था कि इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में  कम्युनिटीज टैब की जगह AI पावर्ड चैट्स के लिए एक नया सेक्शन आ रहा है।  

WhatsApp अब नहीं रहेगा फ्री! इन 3 फीचर्स के लिए लगेंगे रुपये

 नई दिल्ली  WhatsApp पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल लेकर आ रहा है और अब इसको लेकर ऐप में एक नोटिफिकेशन भी नजर आने लगा है. मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट WaBetainfo ने शेयर की है. पेड सब्सक्रिप्शन एक ऑप्शनल फीचर होगा |  अब मैसेजिंग ऐप ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन्स जारी करना शुरू कर दिया है, जिसमें पेड सब्सक्रिप्शन की उपलब्धता को दिखाया है. प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान के तहत यूजर्स को नए फीचर्स एक्सेस मिलेंगे |  प्ले स्टोर पर आया नया अपडेट  WaBetainfo के मुताबिक, प्ले स्टोर पर WhatsApp beta के लेटेस्ट वर्जन Android 2.26.9.6 में नजर फीचर स्पॉट किया गया है.यूजर्स को न्यू प्लान के लिए waitlist को जॉइन कर सकेंगे |  WaBetainfo का पोस्ट  रिपोर्ट्स में न्यू फीचर को लेकर स्क्रीनशॉट्स शेयर किया गया है,जिसमें न्यू अपडेट को लेकर दिखाया गया है. स्क्रीनशॉट्स में बताया है कि प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के तहत यूजर्स नए फीचर्स भी मिलेंगे |  प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के तहत मिलने वाले नए फीचर्स      एक्सक्लूसिव स्टिकर मिलेंगे.     एक्स्ट्रा पिन चैट करने को मिलेगा.      शेड्यूल मैसेज का भी फीचर इसमें शामिल होगा.  वेटलिस्ट देने के पीछे का मकसद WhatsApp प्लस के शुरुआती स्टेज में शामिल यूजर्स वेटलिस्ट के लिए साइन अप कर सकते हैं. वेटलिस्ट में साइन-अप करने का यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि जब WhatsApp का सब्सक्रिप्शन प्लान अवेलेबल होगा तो उन्हें अपने आप उसमें शामिल होना पड़ेगा |   WhatsApp यूजर्स को बताना जरूरी  मैसेजिंग ऐप ने न्यू फीचर को सिर्फ इसलिए तैयार किया है ताकि WhatsApp यूजर्स को पता चल सके कि उनका अकाउंट प्लान के लिए एलिजिबल है. प्लान एक बार उपलब्ध होने के बाद सब्सक्रिप्सन के लिए अलग से प्रोसेस कंप्लीट करना होगा |   

WhatsApp 1 मार्च से भारत में करोड़ों यूजर्स के लिए बंद, चेक करें अपने अकाउंट की स्थिति

नई दिल्ली, SIM-Binding नियम को लेकर अब तस्वीर और साफ होती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM से अकाउंट जोड़ना अनिवार्य रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील देने का फिलहाल इरादा नहीं है. 1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में दिखाई दे रही है.  दूरसंचार विभाग यानी DoT ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को साफ निर्देश दिए हैं कि यूजर का अकाउंट एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए. WhatsApp पर क्या पड़ेगा असर? इसका मतलब यह है कि अगर फोन में वह SIM मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है. भारत में WhatsApp के सबसे ज्यादा यूजर्स हैं जो अलग अलग डिवाइस पर एक ही नंबर का WhatsApp यूज करते हैं. ऐसे में करोड़ों यूजर्स के लिए WhatsApp काम नहीं करेगा जिन्होंने एक अकाउंट को अलग अलग डिवाइसेज पर ऐक्टिव कर रखा है.  रिपोर्ट्स में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें कहा गया कि सुरक्षा पहले है और SIM-Binding नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. सरकार का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड और फर्जी नंबर के जरिए हो रहे अपराधों को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है. Sim Binding से प्रभावित कौन होगा?     जो यूजर एक सिम से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप चलाते हैं. साथ ही जो बार बार सिम कार्ड बदलते रहते हैं.      WhatsApp Web खुद से हर छह घंटे में लॉगआउट हो जाएगा. जारी रखने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा.      60-80% तक छोटे बिजनेस ऑपरेशनल डिसरप्शन का शिकार हो सकते हैं. SIM Binding के बाद WhatsApp का Linked Device काम करेगा? WhatsApp का एक बड़ा फीचर इसका लिंक्ड डिवाइस है. इसके तहत ही एक नंबर से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप काम करता है. लेकिन इस नियम के बाद इसमें बड़ी रेस्ट्रिक्शन लगेगी.  गौरतलब है कि Sim Binding Rule के बाद Linked Device पूरी तरह से काम करना बंद नहीं करेगा, लेकिन लिमिटेशन आएंगी. WhatsApp सिर्फ उसी फोन में चलेगा जिसमें वो सिम होगा जिससे WhatsApp अकाउंट बनाया है. अगर डिवाइस से सिम निकलेगा तो वॉट्सऐप बंद हो सकता है.  मौजूदा समय में 14 दिन तक वॉट्सऐप लिंक्ड रहता है. लेकिन नियम आ जाने के बाद ये ऐसा नहीं हो पाएगा. बार बार वेरिफिकेशन होगा जिससे वॉट्सऐप  काम करना बंद हो सकता है. सिम बाइंडिंग से डिजिटल फ्रॉड कम होंगे? पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, और नकली प्रोफाइल के जरिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. सरकार का तर्क है कि अगर हर मैसेजिंग अकाउंट एक्टिव और असली SIM से जुड़ा रहेगा, तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा. यही वजह है कि इस नियम को साइबर सुरक्षा के नजरिए से अहम बताया जा रहा है. SIM Binding पर टेक कंपनियों का विरोध हालांकि दूसरी तरफ कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और इंडस्ट्री ग्रुप्स ने चिंता भी जताई है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ग्लोबल मैसेजिंग कंपनियों ने DoT के नियमों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह नियम कानूनी दायरे से बाहर हो सकता है. कुछ कंपनियों ने इसे प्राइवेसी से भी जोड़ा है. लेकिन सरकार का रुख फिलहाल साफ दिख रहा है कि नियम वापस लेने या टालने का कोई संकेत नहीं है. WhatsApp यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? खबरों के मुताबिक 1 मार्च की डेडलाइन इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद नियम पूरी तरह लागू माने जाएंगे. पहले कहा जा रहा था कि कंपनियों को समय दिया गया है ताकि वे अपने सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें. अब माना जा रहा है कि यह समय सीमा खत्म होने के करीब है. अगर ये नियम 1 मार्च से लागू हो गया तो WhatsApp Web या दूसरे डिवाइस पर लॉगिन के नियम सख्त हो सकते हैं. एक्टिव SIM के बिना ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि अभी तक आम यूजर के लिए कोई अलग से आधिकारिक पब्लिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए कई लोग इंतजार कर रहे हैं कि अंतिम रूप से क्या व्यवस्था लागू होगी.   WhatsApp ही नहीं, दूसरे ऐप्स पर भी असर यह पूरा मामला सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं है. Telegram, Signal और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं. यानी यह एक व्यापक नीति बदलाव हो सकता है, जो पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित करेगा. फिलहाल साफ संकेत यही है कि SIM-Binding नियम पर सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है. 1 मार्च को लेकर काउंटडाउन जारी है और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजर भी इसी पर टिकी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नियम किस रूप में लागू होता है और आम यूजर के अनुभव में कितना बदलाव आता है.

WhatsApp का नया अपडेट: सिम कार्ड हटाते ही होगा ऐप बंद, जानें नया नियम

 नई दिल्ली WhatsApp प्लेटफॉर्म ने सिम बाइडिंग सर्विस को शामिल किया है और लेटेस्ट बीटा अपडेट में इसकी टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. ये जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. दरअसल, साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए भारत सरकार के रसंचार विभाग ज्यादातर OTT ऐप्स के लिए SIM-Binding नियम का ऐलान किया है.  Wabetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि मैसेजिंग ऐप ने न्यू रेगुलेशन के साथ काम करना शुरू कर दिया है, जिसका नाम सिम बाइंडिंग है. इसकी मदद से WhatsApp अकाउंट सेफ रहेगा और एक्टिव सिम कार्ड पर ही काम करेगा.  WhatsApp beta के Android 2.26.8.6 अपडेट में पता चलता है कि वह भारत के मेंडेटरी सिम लिंक रूल्स पर काम कर रहा है.  सिम बाइडिंग नियम क्या है? SIM-Binding, असल में एक ऐसी सर्विस है कि कोई भी मैसेजिंग या कम्युनिकेशन ऐप उसी SIM कार्ड के साथ काम करेगा, जिस नंबर से वह रजिस्टर है. स्मार्टफोन से जैसे ही सिम निकाली या बदली जाती है तो WhatsApp भी काम करना बंद कर देगा. UPI ऐप्स में सिम बाइडिंग की सुविधा पहले से है.  WhatsApp चलाने के लिए चाहिए होगी एक्टिव सिम कार्ड. (Unsplash) Wabetainfo का पोस्ट  Wabetainfo ने एक स्क्रीनशॉट्स जारी किया है, जो पोस्ट में देखा जा सकेगा. इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप भारत में नए नियमों को फॉलो करने के लिए तकनीकी उपाय लागू करेगा. WhatsApp पर मौजूदा समय सिस्टम   मौजूदा समय में यूजर्स समय-समय पर 6 डिजिट के वेरिफिकेशन कोड को एंटर करके WhatsAppको यूज कर सकते हैं. एक बार लॉगइन करने के बाद सिस्टम यह चेक नहीं करता है कि सिम एक्टिव है या नहीं. सिम बाइडिंग के साथ ऐसा नहीं होगा.  भारत सरकार का मकसद  भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) के मुताबिक, सिम बाइडिंग सिस्टम डिसकनेक्टेड हो चुके हैं नंबर या फिर दोबारा सेल किए गए फोन के नंबर के मिसयूज को रोकना है. साइबर स्कैमर्स पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी. 

WhatsApp यूज़र्स खुश! आया ऐसा शानदार फीचर जो काम कर देगा आसान

नई दिल्ली व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए लगातार नए फीचर्स पेश कर रहा है। अब कंपनी ने ग्रुप चैट से जुड़ा एक अहम अपडेट जारी किया है, जिससे नए सदस्य को ग्रुप की पुरानी बातचीत समझने में आसानी होगी। साथ ही, व्हाट्सऐप वेब पर वीडियो कॉलिंग सुविधा लाने की तैयारी भी चल रही है। नए सदस्य को मिलेगी पुरानी चैट अब तक जब किसी नए व्यक्ति को ग्रुप में जोड़ा जाता था, तो वह पहले के मैसेज नहीं देख पाता था। नए अपडेट के बाद ग्रुप में जोड़ते समय 'Send message history' का विकल्प मिलेगा। इसके जरिए नए सदस्य को हाल की चैट हिस्ट्री भेजी जा सकेगी, ताकि वह बातचीत का संदर्भ समझ सके और चर्चा में सहजता से शामिल हो सके। कितने मैसेज भेज सकेंगे? इस फीचर में एडमिन या सदस्य यह चुन सकेंगे कि वे 25, 50, 75 या 100 मैसेज तक की हिस्ट्री साझा करना चाहते हैं। यहां दिनों के आधार पर नहीं, बल्कि मैसेज की संख्या (मैसेज बबल्स) के आधार पर चैट भेजी जाएगी। इससे उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के अनुसार सीमित या अधिक मैसेज शेयर कर सकते हैं। सभी को मिलेगी सूचना जब किसी नए सदस्य को चैट हिस्ट्री भेजी जाएगी, तो ग्रुप में मौजूद सभी लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी। नए सदस्य को एक विशेष लेबल भी दिखाई देगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि उसे किस तारीख और समय से मैसेज उपलब्ध कराए गए हैं। यह सुविधा ग्रुप एडमिन के अलावा वह सदस्य भी इस्तेमाल कर सकता है, जो किसी को ग्रुप में जोड़ रहा है। सुरक्षा और गोपनीयता बरकरार कंपनी के अनुसार, शेयर की गई चैट पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहेगी। यानी बातचीत की सुरक्षा पहले की तरह सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा, जो मैसेज हिस्ट्री भेजी जाएगी, वह सामान्य चैट से अलग तरीके से दिखाई देगी। इसमें समय और भेजने वाले की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। व्हाट्सऐप वेब पर वीडियो कॉलिंग ग्रुप फीचर के अलावा कंपनी व्हाट्सऐप वेब यूजर्स के लिए भी नया अपडेट लाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्राउजर के जरिए वीडियो कॉलिंग सुविधा की टेस्टिंग की जा रही है। अभी कॉलिंग फीचर केवल Windows और macOS ऐप में उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही Chrome, Safari और Firefox जैसे ब्राउजर पर भी वीडियो कॉल संभव हो सकता है। फिलहाल यह फीचर बीटा वर्जन में है और आने वाले समय में सभी यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है।  

WhatsApp ला रहा नया सेफ्टी फीचर, बच्चे चुनिंदा लोगों से ही कर पाएंगे बातचीत

नई दिल्ली यह कुछ और नहीं बल्कि लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में आने वाला नया फीचर है। इस फीचर की मदद से माता-पिता सेकेंडरी अकाउंट के जरिए अपने बच्चों के व्हाट्सऐप अकाउंट की एक्टिविटी पर नजर रख पाएंगे। इसमें मेन अकाउंट से सेकेंडरी अकाउंट के तौर पर बच्चों का अकाउंट लिंक हो जाएगा। इससे माता-पिता बच्चों की प्राइवेसी सेटिंग्स को आसानी से देख और अपने अनुसार मैनेज कर सकेंगे। यह फीचर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है। लिंक के जरिए जुड़ेगा अकाउंट व्हाट्सऐप के अपकमिंग फीचर पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के लिए कुछ प्रतिबंधों और सीमित क्षमताओं के साथ व्हाट्सऐप में नया फीचर Primary Controls आने वाला है। यह पैरंट्स को बच्चों के अकाउंट पर अधिक कंट्रोल देगा। व्हाट्सऐप पर बच्चों के लिए बनाया गया सेकेंडरी अकाउंट मेन अकाउंट के साथ एक डिजिटल लिंक के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे माता-पिता उन प्राइवेसी सेटिंग्स को रिव्यू कर पाएंगे, जिन्हें बच्चे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इन सेकेंडरी अकाउंट्स में मैसेज और कॉल केवल कॉन्टैक्ट्स तक ही सीमित रहेंगे।फिलहाल, WhatsApp पर ऐसा कोई ऑप्शन नहीं है, जिससे यूजर यह चुन सकें कि उन्हें सिर्फ अपने कॉन्टैक्ट के मैसेज ही चाहिए। यह सुविधा बच्चों के लिए जरूरी है और सेकेंडरी अकाउंट इसी कमी को पूरा करने के लिए बनाए जा रहे हैं। क्या माता-पिता बच्चों की चैट देख पाएंगे? माता-पिता बच्चों की चैट और कॉल को एक्सेस नहीं कर पाएंगे। हालांकि, उन्हें अकाउंट के इस्तेमाल और पैटर्न से जुड़ी रिपोर्ट मिलेंगी। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन बच्चों की बातचीत को सुरक्षित रखेगा, जिससे निजी मैसेज को कोई और नहीं पढ़ पाएगा। इस तरह, माता-पिता बच्चों पर नजर रख सकेंगे, लेकिन उनकी निजी बातचीत में दखल नहीं दे पाएंगे। अभी चल रही टेस्टिंग यह फीचर अभी डेवलपमेंट में है। व्हाट्सऐप टेस्टिंग कर रहा है कि नए पैरंटल कंट्रोल मौजूदा अकाउंट सेटिंग्स के साथ कैसे काम करेंगे, ताकि यह एक्सपीरियंस आसान और सेफ हो। इंटरफेस को इस तरह से बेहतर बनाया जा रहा है कि माता-पिता आसानी से सेकेंडरी अकाउंट को कॉन्फिगर कर सकें। जब यह फीचर जारी होगा, तो माता-पिता यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि उनके बच्चे के अकाउंट में उम्र के हिसाब से सही सेटिंग्स हों, जिससे उनकी ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

WhatsApp यूजर्स के लिए अलर्ट: GhostPairing से खतरा, सरकार ने दी सुरक्षा टिप्स

 नई दिल्ली WhatsApp यूजर्स के लिए एक सरकारी एजेंसी ने जरूरी वॉर्निंग जारी की है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पोंस टीम (CERT-In) ने एक नए खतरे के बारे में  बताया है और उससे सावधान रहने को कहा है.  ये हाई रिस्क GhostPairing को लेकर है, जिसमें हैकर्स का ग्रुप बड़ी ही चालाकी के साथ WhatsApp अकाउंट को टेकओवर कर सकता है. वॉर्निंग में बताया है कि हैकर WhatsApp के डिवाइस-लिंकिंग फीचर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. बिना किसी ऑथेंटिकेशन के पेयरिंग कोड के जरिए अकाउंट को हाइजैक कर सकते हैं. यह इतना ज्यादा खतरनाक है कि हैकर्स रियल टाइम चैटिंग को पढ़ सकते हैं और सीक्रेट्स को लीक कर सकते हैं.   साइबर ठग ऐसे हाइजैक करते हैं WhatsApp  WhatsApp हैकिंग की शुरुआत एक सिंपल से मैसेज से होती है. जब विक्टिम को किसी जान-पहचान वाले कॉन्टैक्ट की तरफ से एक सिंपल सा मैसेज भेजा जाता है कि Hi, check this photo. मैसेज में एक लिंक होता है, जिसके अंदर फेसबुक जैसा प्रीव्यू नजर आता है.  CERT-In का पोस्ट  जब विक्टिम उस प्रीव्यू को देखने की कोशिश करते हैं तो प्रोसेस के दौरान वह फोन नंबर की डिमांड करता है और वेरिफिकेशन करने को कहते हैं. वॉर्निंग में बताया है कि साइबर अटैकर्स इस तरह से विक्टिम के WhatsApp अकाउंट को हाइजैक कर लेते हैं.  WhatsApp यूजर्स ना करें ये गलती  कोई भी परिचित शख्स ऐसा मैसेज भेजता है और उस मैसेज में मोबाइल नंबर एंटर करने को कहता है तो सतर्क होने की जरूरत है. ऐसे किसी भी लिंक पर मोबाइल नंबर को वेरिफाई ना करें, जिसमें आपका WhatsApp हैक हो सकता है.  WhatsApp की सेटिंग्स में है खास ऑप्शन WhatsApp की सेटिंग्स के अंदर लिंक्ड डिवाइस नाम का फीचर है, जिसको चेक करके जान सकते हैं कि WhatsApp अकाउंट कहां-कहां लॉगइन है. अनजान जगह लॉगइन होने पर उसे तुरंत लॉगआउट भी कर सकते हैं. यह सर्विस एंड्रॉयड और iOS दोनों में है.

बड़ा साइबर अलर्ट: WhatsApp यूजर्स पर मंडराया खतरा, बिना नोटिफिकेशन जासूसी कर सकता है नया टूल

नई दिल्ली दुनिया भर में व्हाट्सऐप के तीन अरब से ज्यादा यूजर्स की निजता खतरे में पड़ सकती है। एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने ऐसा टूल बनाया है जो सिर्फ फोन नंबर जानकर किसी की भी एक्टिविटी पर नजर रख सकता है। यह टूल चुपके से काम करता है और यूजर को पता भी नहीं चलता। इस तरीके को 'साइलेंट व्हिस्पर' नाम दिया गया है। यह व्हाट्सऐप और सिग्नल ऐप में मौजूद एक कमजोरी का फायदा उठाता है। हमला करने वाला कोई संदेश नहीं भेजता, फिर भी वह फोन से जानकारी ले सकता है। यह जासूसी करने का एक सीक्रेट टूल है, जो आपकी निजता के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है। चलिए समझते हैं कि यह टूल कैसे काम करता है और आप ऐसे साइबर अटैक को कैसे पहचान सकते हैं? अटैकर्स कैसे करते हैं हमला? साइबर न्यूज की एक रिपोर्ट (Ref.) के मुताबिक, व्हाट्सऐप और सिग्नल में जब कोई मैसेज आता है तो ऐप अपने आप एक कन्फर्मेशन भेजता है कि मैसेज मिल गया। यह कन्फर्मेशन बहुत तेजी से होता है और यूजर को दिखाई नहीं देता। हमलावर इस कन्फर्मेशन के आने-जाने के समय को मापता है। इस समय के आधार पर वह पता लगा सकता है कि फोन चालू है या बंद, यूजर फोन इस्तेमाल कर रहा है या नहीं, घर पर है या बाहर घूम रहा है। अगर फोन वाई-फाई पर है तो जवाब तेज आता है, मोबाइल डेटा पर तो थोड़ा धीमा। लंबे समय तक नजर रखने से यूजर की रोज की आदतें, सोने-उठने का समय और ट्रेवल का पता चल जाता है। यह सब बिना कोई मैसेज पढ़े या कॉन्टैक्ट लिस्ट देखे हो जाता है। साइबर अटैक को ऐसे पहचानें यह हमला फोन की बैटरी को बहुत तेज खराब करता है। नॉर्मल सिचुएशन में खाली फोन एक घंटे में एक फीसदी से कम बैटरी खाता है। लेकिन इस हमले के दौरान आईफोन 13 प्रो में 14 फीसदी, आईफोन 11 में 18 फीसदी और सैमसंग गैलेक्सी एस23 में 15 फीसदी बैटरी प्रति घंटे कम हो जाती है। मोबाइल डेटा भी ज्यादा खर्च होता है लगातार हमला करने से मोबाइल डेटा भी बहुत खर्च होता है। वीडियो कॉल जैसी चीजें चलाने में दिक्कत आती है। यूजर को लगता है फोन खुद ही गर्म हो रहा है या बैटरी जल्दी खत्म हो रही है, लेकिन कारण पता नहीं चलता। क्या रीड रिसीप्ट बंद करने से बच जाएंगे? टूल बनाने वाले ने कहा है कि यह सिर्फ रिसर्च के लिए है और गलत इस्तेमाल न करें। लेकिन कोई भी इसे डाउनलोड कर इस्तेमाल कर सकता है। दिसंबर 2025 तक व्हाट्सऐप और सिग्नल में यह कमजोरी ठीक नहीं हुई है। रीड रिसीप्ट बंद करने से कुछ मदद मिलती है, लेकिन पूरी सुरक्षा नहीं। व्हाट्सऐप में अज्ञात नंबरों से ज्यादा मैसेज ब्लॉक करने का ऑप्शन है, लेकिन उसकी लिमिट कितनी है, यह स्पष्ट नहीं है।

भारत की ‘डिजिटल स्ट्राइक’! WhatsApp उपयोग पर नए नियम से ISI में हड़कंप, गुप्त बैठकें शुरू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने साइबर नियमों को और सख्‍त बनाते हुए गाइडलाइन जारी की है. इसके तहत अब WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप बिना एक्टिव SIM कार्ड के काम नहीं कर सकेंगे. दूरसंचार विभाग (DoT) ने यह नियम Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत लागू किया है. इस दिशानिर्देश में जो नई बात सामने आई है, वो ये है कि लैपटॉप, डेस्‍कटॉप पर भी ‘व्हाट्सएप वेब’ या अन्‍य प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल करने वाले यूजर्स को हर 6 घंटे में लॉग आउट करना होगा. इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगिन हो सकेगा. सरकार की गाइडलाइन पर कंपनियों का कहना कि लगातार सिम जांच और 6 घंटे के भीतर एक बार लॉगआउट के नियम से यूजर्स की प्राइवेसी में बाधा आ सकती है और एक से ज्‍यादा डिवाइस पर इन ऐप्‍स के इस्‍तेमाल की सुविधा खत्‍म हो सकती है. हालांकि, दूरसंचार कंपनियों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. वहीं सूत्रों के अनुसार इस कदम से पड़ोसी देश पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसियों में हड़कंप मच गया है. यही वजह है कि, आनन फानन में पाक इंटेलिजेंस एजेंसी ISI ने इसका तोड़ निकालने एक सीक्रेट मीटिंग बुलाई है. सरकारी सर्कुलर में क्‍या कहा गया? दूरसंचार विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि अगर मोबाइल या टैब में मूल सिम मौजूद न हो तो 90 दिनों के बाद इन ऐप्स का उपयोग नहीं कर पाएंगे. वेब आधारित प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, अराटाई, स्नैपचैट, शेयरचैट और ऐसे सभी अन्य प्लेटफॉर्म पर ये नियम लागू होंगे. यूजर्स के रजिस्‍ट्रेशन के समय उपयोग किया जाने वाला SIM यानी सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल सर्विसेज से जुड़ा होना चाहिए. इस मतलब ये हुआ कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सर्विसेज सिम से जुड़ी हुई होंगी. यानी जब सिम यूजर्स के फोन में मौजूद होगी, तभी आप इन ऐप्स की सर्विसेज का उपयोग कर पाएंगे जैसे ही सिम बंद हो जाएगी, आप सर्विसेज उपयोग नहीं कर पाएंगे. सरकार यह कदम क्यों उठा रही है? DoT के मुताबिक, अभी ज्यादातर मैसेजिंग ऐप सिर्फ पहली बार इंस्टॉल करते समय मोबाइल नंबर को वेरिफाई करते हैं. उसके बाद ऐप SIM हटाने या बंद होने पर भी चलता रहता है. COAI (सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने कहा कि यह तरीका बड़ी सुरक्षा खामी पैदा करता है. इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी SIM बदलने या बंद करने के बाद भी ऐप का इस्तेमाल जारी रखते हैं. उनकी लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड या कैरियर डेटा ट्रेस नहीं हो पाता. इसके अलावा इस नए नियम से सीमा पार आतंकवाद पर भी नकेल कसने में मदद मिलेगी. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? कुछ साइबर एक्सपर्ट मानते हैं कि इससे धोखाधड़ी और स्पैम कम हो सकते हैं, क्योंकि यूजर, नंबर और डिवाइस की ट्रेसिंग आसान होगी. लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी आसानी से फर्जी या उधार लिए हुए दस्तावेजों पर नए SIM ले लेते हैं, इसलिए फायदा सीमित ही रहेगा. वहीं टेलीकॉम उद्योग का मानना है कि भारत में मोबाइल नंबर ही सबसे मजबूत डिजिटल पहचान है और इस नियम से साइबर सुरक्षा बेहतर हो सकती है. आम यूजर पर क्या असर? यह कदम करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की डिजिटल आदतों में बदलाव ला सकता है. कारण, अब यूजर लगातार कई दिनों तक WhatsApp Web खुले नहीं रख पाएंगे. हर 6 घंटे पर लॉगआउट होना पड़ेगा. वहीं अगर SIM बंद हो गया या SIM स्लॉट में नहीं है तो ऐप खुलेगा ही नहीं. इसके अलावा जिन यूजर्स के पास दो डिवाइस हैं, वे पहले की तरह स्वतंत्र रूप से ऐप नहीं चला पाएंगे.

मल्टी-अकाउंट फीचर जल्द ही WhatsApp में: अलग नंबरों से एक साथ चलेंगे कई अकाउंट

नई दिल्ली ​WhatsApp एक बड़ा अपग्रेड लाने वाला है। हालांकि, यह अपडेट पहले से ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए अपलब्ध है, लेकिन अब लंबे इंतजार के बाद आईफोन चलाने वालों के लिए भी आने वाला है। आईफोन यूजर्स जल्द एक ही फोन में कई व्हाट्सऐप अकाउंट चला पाएंगे। जी हां, यह बिल्कुल इंस्टाग्राम, जीमेल और फेसबुक जैसा होगा। जिस प्रकार आप एक फोन में कई जीमेल, इस्टाग्रांम अकाउंट जोड़ सकते हैं। उसी प्रकार व्हाट्सऐप में भी मल्टीपल अकाउंट बना और जोड़ सकेंगे। फिर अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार कई अकाउंट्स के बीच आसानी से स्विच कर सकेंगे। इस फीचर का काफी लंबे समय से इंतजार हो रहा था। फीचर की डिटेल के लिए नीचे पढ़ें। अभी चल रही टेस्टिंग WAbetainfo की लेटेस्ट रिपोर्ट से पता चला है कि अभी यह फीचर टेस्टिंग फेज में है। इसे बाद में स्टेबल वर्जन के लिए रोल आउट किया जाएगा। व्हाट्सऐप के इस मल्टी-अकाउंट फीचर की मदद से यूजर एक ही फोन में अपने बिजनेस, ऑफिस और पर्सनल व्हाट्सऐप अकाउंट को आसानी से मैनेज कर पाएगा। इस फीचर के बाद उन्हें अलग-अलग फोन में विभिन्न व्हाट्सऐप अकाउंट चलाने की जरूरत नहीं होगी। ये लोग अभी से कर सकते हैं यूज जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अभी इसे टेस्टिंग के लिए रोल आउट किया गया है। अगर आप टेस्टफ्लाइट पर व्हाट्सऐप के बीटा वर्जन का इस्तेमाल करते हैं, तो इस फीचर को एक्सपीरियंस कर सकते हैं। आपके अकाउंट के लिए आया है या नहीं, ऐसे करें पता फीचर आपके अकाउंट के लिए आया है या नहीं, ये जानने के लिए आपको ऐप के सेटिंग्स मेन्यू में जाना होगा। उसके बाद आपको "अकाउंट लिस्ट" नाम से एक सेक्शन दिखेगा। या फिर QR कोड आइकन के बगल में एक खास बटन दिखेगा। अगर यह ऑप्शन है तो इसका मतलब है कि फीचर आपके लिए आ गया है। यह सेक्शन यूजर्स को बिना किसी सेकेंडरी डिवाइस या WhatsApp Business के सीधे ऐप से नया अकाउंट जोड़ने की सुविधा देता है। अभी सिर्फ दो अकाउंट कर सकते हैं इस्तेमाल आपकी जानकारी के लिए बात दें कि फिलहाल, बीटा वर्जन में यूजर्स एक बार में सिर्फ दो व्हाट्सऐप अकाउंट इस्तेमाल कर सकते हैं। टेस्टर्स एक बिल्कुल नया नंबर जोड़ सकते हैं, जिसे उन्होंने पहले कभी व्हाट्सऐप पर इस्तेमाल नहीं किया हो। इसके अलावा, यूजर्स अपने पुराने व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट्स को भी फिर से कनेक्ट कर पाएंगे। जैसे ही अकाउंट लिंक होगा, सभी चैट और प्रेफरेंसेज अपने आप सिंक हो जाएंगे। इस फीचर के जरिए व्हाट्सऐप अन्य इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप से काफी अलग हो जाएगा। सभी अकाउंट्स की सेटिंग होंगी बिल्कुल अलग WhatsApp में जोड़े गए हर अकाउंट के लिए सभी सेटिंग्स और प्रेफरेंस अलग-अलग रहती हैं। हर प्रोफाइल के लिए अलग चैट हिस्ट्री, बैकअप कॉन्फिगरेशन और नोटिफिकेशन टोन सेट कर सकते हैं। यूजर अपने डेटा इस्तेमाल की प्रेफरेंस या स्टोरेज की जरूरतों के आधार पर और मीडिया ऑटो-डाउनलोड ऑप्शन को अलग से मैनेज भी कर सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हर एक अकाउंट के लिए सभी सेटिंग अलग होगी। कब होगा रोल आउट? अभी इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि फीचर को कब रोल आउट किया जाएगा। उम्मीद है कि कंपनी सफल टेस्टिंग के बाद फीचर सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर देगी, लेकिन अभी इसके लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इस फीचर से Arattai जैसे ऐप्स के लिए मुश्किलें खड़ीं हो सकती हैं।