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टकराव के बावजूद अमेरिका को 90 अरब डॉलर का फायदा, ट्रंप की रणनीति रंग लाई

तेहरान  ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका की जमीन के नीचे ऐसा खजाना मिला है, जो आने वाले कई दशकों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी (USGS) ने खुलासा किया है कि देश के एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में लिथियम मौजूद है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर बताई जा रही है. यह ईरान युद्ध में हुए नुकसान और खर्च लगभग 25 बिलियन डॉलर से कहीं ज्यादा है. यह खोज ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ रही है।  अमेरिका की लिथियम खोज क्यों है खास रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2.3 मिलियन मीट्रिक टन लिथियम ऑक्साइड मौजूद है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि आने वाली कई पीढ़ियों तक अमेरिका की जरूरतों को पूरा कर सकती है. यही वजह है कि इस खोज को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह लिथियम मुख्य रूप से कैरोलिना क्षेत्र के ‘टिन-स्पोड्यूमीन बेल्ट’ में पाया गया है. यह इलाका पहले भी दुनिया का प्रमुख लिथियम स्रोत रह चुका है, लेकिन समय के साथ यहां खनन गतिविधियां कम हो गई थीं. अब एक बार फिर यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा के नक्शे पर लौटता हुआ नजर आ रहा है. खास बात यह है कि यहां पाया जाने वाला स्पोड्यूमीन एक ऐसा खनिज है, जिससे सीधे लिथियम निकाला जा सकता है, जो बैटरियों के लिए बेहद जरूरी होता है।  चीन की नहीं होगी जरूरत  रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक अमेरिका अपनी लिथियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता रहा है. खासकर चीन और चिली जैसे देशों पर उसकी निर्भरता ज्यादा रही है. लेकिन इस नई खोज के बाद अमेरिका के पास मौका है कि वह अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करे और विदेशी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दे. दुनिया भर में लिथियम को ‘व्हाइट गोल्ड’ यानी सफेद सोना कहा जाने लगा है. इसकी वजह है इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2040 तक लिथियम की मांग में करीब 40 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है. अनुमान है कि इस भंडार से करीब 13 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां तैयार की जा सकती हैं।   

US एक्शन का असर: ट्रंप की सख्ती से मेक्सिको के नेता पद छोड़ने को मजबूर

मेक्सिको अमेरिका द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाए जाने के बाद मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लौडिया शिनबाम की पार्टी के दो सदस्यों ने अपने पद से अस्थायी रूप से हटने की घोषणा की है। उत्तर पश्चिमी सिनालोआ राज्य से शिनबाम की पार्टी के इन सदस्यों ने बताया कि अमेरिका ने उन पर और आठ अन्य नेताओं एवं सुरक्षा अधिकारियों पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप लगाए हैं। अमेरिका के द्वारा ड्रग्स तस्करी का आरोप लगाए जाने के बाद मैक्सिको के सिनालोआ प्रांत के गवर्नर और मेयर ने अपना पद छोड़ दिया है. शुक्रवार मध्यरात्रि को जारी एक वीडियो संदेश में अभियोग में नामित गवर्नर रुबेन रोचा मोया ने उन आरोपों का खंडन किया. उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह ‘सिनालोआ कार्टल’ को संरक्षण देने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने लाखों डॉलर की रिश्वत के बदले में उसे अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी में मदद करने से इनकार किया. पूर्व राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर के लंबे समय से सहयोगी रहे 76 वर्षीय रोचा ने कहा, ‘मेरा ईमान साफ है. मैं अपने लोगों और अपने परिवार से आंख मिलाकर कह सकता हूं कि मैंने कभी आपको धोखा नहीं दिया और न ही कभी दूंगा.’ वहीं, सिनालोआ राज्य की राजधानी कुलियाकान के मेयर जुआन डी डियोस गामेज मेंडिविल का नाम भी अभियोग में शामिल है. उन्होंने भी आरोपों से इनकार किया और पद से हटने का ऐलान किया. शनिवार को एक विशेष मतदान में राज्य की स्थानीय कांग्रेस ने रोचा की सहयोगी येराल्डिन बोनिला वाल्वरडे को अंतरिम गवर्नर नियुक्त किया. मैक्सिको में ड्रग्स और उसकी तस्करी के कारण हिंसा भी बहुत होती है. लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से उस पर इस धंधे पर लगाम लगाने का भी दबाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को इन्हीं आरोपों के तहत उनके देश में उनके बिस्तर से गिरफ्तार कर लिया. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम को अपनी प्रगतिशील मोरेना पार्टी के हितों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कार्टेल के खिलाफ लड़ाई तेज करने के दबाव के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है. शीनबाम ने कहा कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति का बचाव नहीं करेंगी जो अपराध करने का दोषी पाया गया हो. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन 10 लोगों के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो उन पर मैक्सिको में ही केस चलाया जाएगा. मैक्सिको में कई तरह के ड्रग कार्टेल काम करते हैं. पिछले दिनों, फरवरी 2026 में एल मेंचो नाम के ड्रग लॉर्ड और जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल का संंचालक की मौत काफी चर्चा में था. सिनालोआ कार्टेल मैक्सिको का सबसे शक्तिशाली ड्रग नेटवर्क है.

ट्रंप का जर्मनी पर दोहरा हमला: सैनिकों की वापसी और कारों पर 25% टैरिफ का कड़ा फैसला

वाशिंगटन जर्मनी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त दिख रहा है. उन्होंने साफ कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या सिर्फ 5 हजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा कटौती की जाएगी. यानी जो शुरुआत 5 हजार सैनिकों की वापसी से हो रही है, वो आगे और बड़ी हो सकती है. इससे पहले ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था, जिसका असर खासतौर पर जर्मनी पर पड़ सकता है।  देखा जाए तो ट्रंप की नाराजगी की वजह व्यापारिक समझौतों का सही से पालन न होना है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने खुलेआम कहा है कि यूरोपीय संघ ने वादों को निभाया नहीं है, इसलिए अब अगले हफ्ते से वहां बनने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा. जर्मनी, जो गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. असल में सारा मामला फ्लोरिडा में खुला, जहां पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने दो-टूक कहा, '5 हजार का आंकड़ा तो बहुत छोटा है, हम इससे कहीं ज्यादा सैनिकों की छुट्टी करने वाले हैं और सेना में बड़ी कटौती करेंगे।  हैरानी की बात ये है कि खुद पेंटागन ने पहले सिर्फ 5 हजार सैनिकों की बात कही थी, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने सबको सोच में डाल दिया है. अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. कई बड़े नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिकी सैनिक जर्मनी छोड़कर चले गए, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ताकत दिखाने का खुला मौका मिल जाएगा. खासकर तब, जब यूक्रेन और रूस की जंग को 5 साल पूरे होने वाले हैं।  क्या अकेले पड़ जाएंगे यूरोपीय देश? जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पर बहुत ही शांत तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सैनिकों को वापस बुलाने की बात तो ट्रंप सालों से कर रहे थे, इसलिए ये कोई नई बात नहीं है. उनका मानना है कि अब यूरोप के देशों को खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी याद दिलाया कि अमेरिकी सैनिकों का जर्मनी में होना सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के फायदे के लिए भी है।  पेंटागन की मानें तो इन सैनिकों की वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी कर ली जाएगी. फिलहाल जर्मनी में करीब 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो वहां के बड़े मिलिट्री बेस और एयर बेस की सुरक्षा संभालते हैं. जानकारों का कहना है कि सैनिकों का जाना एक अलग बात है, लेकिन इससे जो दुनिया को मैसेज जाएगा वो काफी गंभीर हो सकता है. ट्रंप की ये नाराजगी ईरान के मामले में भी देखी जा रही है, जहां उन्हें लगता है कि यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया।  अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप का ये 'हंटर' जर्मनी की तिजोरी और उसकी सुरक्षा पर कितना भारी पड़ता है. एक तरफ सैनिकों की घर वापसी का दबाव और दूसरी तरफ कारों पर 25% का तगड़ा टैक्स, ट्रंप ने साफ मैसेज दे दिया है कि अब वो 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं. अब देखना ये होगा कि क्या इस फैसले के बाद यूरोप अपने दम पर अपनी सुरक्षा कर पाएगा या फिर उसे अमेरिका के आगे झुकना पड़ेगा?  

पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, जारी किया विशाल कॉन्ट्रैक्ट

इस्लामाबाद अमेरिकी वायु सेना ने F-16 फाइटर जेट्स के रडार सिस्टम को लॉन्ग-टर्म तकनीकी और इंजीनियरिंग सपोर्ट देने के लिए 488 मिलियन डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान किया है। खास बात यह है कि अमेरिका की इस बड़ी रक्षा डील के दायरे में पाकिस्तान भी शामिल है। यह अहम कॉन्ट्रैक्ट प्रमुख रक्षा कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन को सौंपा गया है। इस कदम को अमेरिका के सहयोगी देशों की वायु सेना में F-16 की ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने के लिए अमेरिका की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है। डील और अपग्रेड से जुड़ी मुख्य बातें:     रडार सिस्टम की बढ़ेगी क्षमता: आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मुख्य रूप से F-16 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले 'APG-66' और 'APG-68' रडार सिस्टम को इंजीनियरिंग सपोर्ट दिया जाएगा।     2036 तक चलेगा काम: फाइटर जेट्स के अपग्रेड और सपोर्ट का यह काम अमेरिका के मैरीलैंड स्थित लिंथिअम हाइट्स में किया जाएगा और इसके 31 मार्च, 2036 तक जारी रहने का कार्यक्रम है।फंडिंग और मंजूरी: यूटाह स्थित अमेरिकी वायु सेना के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट सेंटर द्वारा यह कॉन्ट्रैक्ट जारी किया गया है। इसके लिए वित्त वर्ष 2026 के फंड से शुरुआती तौर पर 2.64 मिलियन डॉलर की राशि जारी भी कर दी गई है। पाकिस्तान के अलावा किन-किन देशों को मिलेगा फायदा? यह कॉन्ट्रैक्ट अमेरिका के 'फॉरेन मिलिट्री सेल्स' (FMS) प्रोग्राम के तहत सहयोगी देशों के लिए किया गया है। इस डील में पाकिस्तान के अलावा बहरीन, बेल्जियम, चिली, डेनमार्क, मिस्र, ग्रीस, इंडोनेशिया, इराक, इजरायल, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, मोरक्को, नीदरलैंड, नॉर्वे, ओमान, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, थाइलैंड और तुर्किए शामिल हैं। 2040 तक बढ़ जाएगी पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की उम्र यह नया समर्थन पाकिस्तान को दिए जा रहे अमेरिकी सहयोग की एक कड़ी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अपनी संसद को पाकिस्तान के F-16 बेड़े को अपग्रेड करने के लिए 686 मिलियन डॉलर के एक अलग पैकेज की जानकारी दी थी। इस 686 मिलियन डॉलर के पैकेज में 'लिंक-16' टैक्टिकल डेटा सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड और ट्रेनिंग सपोर्ट शामिल है। इस अपग्रेड योजना में 'आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो' सिस्टम, सटीक नेविगेशन टूल और सुरक्षित संचार उपकरणों में बदलाव भी शामिल किए गए हैं। DSCA के अनुसार, इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 बेड़े का आधुनिकीकरण करना है ताकि विमानों की सर्विस लाइफ 2040 तक बढ़ाई जा सके। साथ ही इसका मकसद भविष्य में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए अमेरिका और अन्य सहयोगी बलों के साथ पाकिस्तान के तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को और ज्यादा मजबूत करना है। इस अपग्रेड कार्यक्रम के लिए 'लॉकहीड मार्टिन' को प्रमुख ठेकेदार के रूप में चुना गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया था कि इस काम के लिए अमेरिकी कर्मियों को पाकिस्तान भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पाकिस्तान ने किया अमेरिकी मदद का स्वागत मामले से जुड़े एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने F-16 प्रोग्राम के लिए अमेरिका के लगातार मिल रहे सपोर्ट का स्वागत किया है। सूत्रों का कहना है कि इन अपग्रेड्स से विमानों की उम्र बढ़ेगी और सहयोगी प्रणालियों के साथ तकनीकी अनुकूलता बनी रहेगी। सूत्र ने यह भी बताया कि पाकिस्तानी वायु सेना ने हाल के वर्षों में अपने बेड़े में कई नए विकल्प शामिल किए हैं जिससे किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम हुई है, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मौजूदा F-16 क्षमताओं को बनाए रखने को काफी अहमियत देते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान: ईरान के मामले को युद्ध नहीं कहूंगा, फिर खुद की सराहना की

वाशिंगटन दुनियाभर में आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मामले को युद्ध मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के अभियान के बाद ईरान की नौसेना और थल सेना कमजोर हो गई है और अब वे समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। ईरान की सैन्य क्षमता पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी ड्रोन फैक्ट्रियों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा ईरान की परमाणु क्षमता को भी धराशायी कर दिया गया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा था कि टैरिफ का दबाव बनाकर उन्होंने युद्ध रुकवाया था। युद्ध रुकवाने के दावे करके वह कई बार नोबेल पुरस्कार की भी इच्छा जता चुके हैं। इस बार का शांति का नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं मिला तो वह काफी भड़के हुए थे। युद्ध को लेकर क्या कह रहे डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौते की शर्तें मानने को तैयार नहीं होता तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है। अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के श्री ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं। अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।

ट्रंप ने इस देश को भी दिया रूसी तेल खरीदने का तोहफा, भारत के बाद मिली छूट

नई दिल्ली मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने फिलीपींस को बड़ी राहत दी है. अमेरिका ने फिलीपींस के अनुरोध पर उसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए अस्थायी छूट दे दी है. बीते हफ्ते में तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए ट्रंप ने रूसी तेल खरीद की छूट बढ़ा दी थी. इसका फायदा खुद भारत को भी हो रहा है लेकिन फिलीपिंस को और भी राहत दी गई है।  फिलीपींस के ऊर्जा विभाग के मुताबिक, यह छूट 17 अप्रैल से 16 मई तक प्रभावी रहेगी. इससे पहले मार्च में भी अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी थी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अब नई छूट मिलने से फिलीपींस को कुछ समय के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में राहत मिलेगी।  ऊर्जा विभाग के अंडरसेक्रेटरी एलेस्सांद्रो सेल्स ने बताया कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. वहीं ऊर्जा सचिव शेरोन गैरीन ने कहा कि देश के पास फिलहाल करीब 54 दिनों का ईंधन भंडार मौजूद है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अतिरिक्त विकल्प जरूरी थे।  तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित हुई संघर्ष का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग पर तनाव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसी कारण कई देशों को वैकल्पिक सोर्सेज की तलाश करनी पड़ रही है।  तेल की कीमतों को काबू में रखने की कोशिश? फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने हाल ही में राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया था. इस कदम का मकसद देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और संभावित संकट से निपटना है।  इस बीच फिलीपींस सरकार ने यह भी साफ किया है कि वह नए कोयला परियोजनाओं पर लगी रोक को नहीं हटाएगी. अब अमेरिका से तेल खरीद की छूट मिलने पर लोगों को और भी राहत मिलने की उम्मीद है. इसके जरिए तेल की कीमतों को काबू में रखा जा सकता है।  साल 2020 में देश ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नई कोयला परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाया था. हालांकि 2019 से पहले मंजूरी प्राप्त परियोजनाएं आगे बढ़ सकती हैं. ऊर्जा मंत्रालय अब पुराने कोयला संयंत्रों की समीक्षा भी कर रहा है, क्योंकि लंबे समय में उनकी लागत ज्यादा है और वे भरोसेमंद भी नहीं माने जा रहे। 

Donald Trump की मौजूदगी में फायरिंग, United States Secret Service की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

वाशिंगटन. वाशिंगटन हिल्टन होटल में शनिवार की रात 8:45 बजे (अमेरिकी समय के अनुसार) के करीब कॉरेस्पोंडेंट डिनर कार्यक्रम के दौरान जोरदार फायरिंग की आवाज सुनाई दी। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए थे। इस घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रपति सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे सीक्रेट सर्विस के एजेंट ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति को सुरक्षित वहां से बाहर निकाल लिया। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। इस घटना पर राष्ट्रपति ट्रंप की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस घटना के करीब एक घंटे बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि एक शूटर को पकड़ लिया गया है। ट्रंप ने आगे कहा, "डीसी में आज की शाम काफी गहमागहमी भरी रही। सीक्रेट सर्विस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शानदार काम किया है।" रॉयटर्स के लिए काम करने वाले एक फ्रीलांस फोटोग्राफर ने आंखोदेखा हाल बताते हुए कहा कि होटल के भीतर फायरिंग की चार से छह राउंड आवाज सुनाई दी। हालांकि ये आवाजें मुख्य डाइनिंग हॉल के बिल्कुल पास नहीं थीं, लेकिन इनकी तीव्रता ने सभी को चौंका दिया। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि होटल परिसर के भीतर एक सशस्त्र हमलावर देखा गया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया। जैसे ही आवाजें सुनाई दीं, मेहमानों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। "गेट डाउन, गेट डाउन!" हॉल में मौजूद लगभग 2,600 मेहमान अपनी मेजों के नीचे छिप गए। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और अमेरिका की पर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी कार्यक्रम स्थल से सुरक्षित निकाल लिया गया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा मंच से हटाए जाने से कुछ ही देर पहले मेलानिया ने भीड़ में किसी बात पर प्रतिक्रिया दी और उनके चेहरे पर चिंता के भाव दिखाई दिए। The empty stage is seen after President Donald Trump and other top leaders were evacuated from an annual dinner of White House correspondents on Saturday night(, April 25, 2026, in Washington/ AP Photo/Zeke Miller) प्रेस पूल ने सीक्रेट सर्विस के हवाले से बताया कि ट्रंप के डिनर के दौरान हुई कथित गोलीबारी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया। यह सुरक्षा घटना उस कमरे के बाहर हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य अधिकारी डिनर कर रहे थे। सीक्रेट सर्विस और अन्य अधिकारी बैंक्वेट हॉल पहुंचे। सैकड़ों मेहमान मेजों के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे। क्या होता है कॉरेस्पोंडेंट डिनर? वाशिंगटन डीसी में हर साल कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर का आयोजन किया जाता है, जिसकी मेज़बानी वाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन करता है। इस समारोह में पत्रकार, राजनेता और हॉलीवुड की मशहूर हस्तियां एक साथ जुटती हैं। यह समारोह प्रेस की आजादी का जश्न मनाता है, पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्तियां जुटाता है और इसमें हल्के-फुल्के अंदाज में राजनेताओं की रोस्टिंग (व्यंग्या) किया जाता है। अक्सर इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति भी शामिल होते हैं।

ईरान के लिए ट्रंप का कड़ा संदेश: ‘डील करो, नहीं तो होगी बमबारी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने दोहरे तेवर में नजर आए हैं. एक तरफ वे ईरान के साथ युद्ध खत्म होने पर व्हाइट हाउस में "पार्टी" करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खुली चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ, तो फिर से बमबारी शुरू हो सकती है।  एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं भी हो सकते. उन्होंने कहा, "शायद मैं इसे एक्सटेंड न करूं. अगर ऐसा हुआ तो ब्लॉकेड जारी रहेगा और हमें फिर से बम गिराने पड़ सकते हैं।  राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि 21 अप्रैल की डेडलाइन बेहद अहम है. अगर इस तारीख तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो सीजफायर खत्म हो सकता है. इसका मतलब साफ है कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की तरफ बढ़ सकता है. हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डील हो जाएगी. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह होने वाला है" लेकिन ईरान का कहना है कि उनकी बातों पर भरोसे कम है।  होर्मुज के आसपास ब्लॉकेड रहेगा जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि चाहे सीजफायर बढ़े या नहीं, अमेरिका का ईरान पर लगाया गया नौसैनिक ब्लॉकेड जारी रहेगा. यह ब्लॉकेड ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इससे उसके तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ता है. यानी भले ही बातचीत जारी हो, लेकिन दबाव की राजनीति भी साथ-साथ चलती रहेगी।  अमेरिका-ईरान में बातचीत की कोशिशें जारी इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि जल्द ही पाकिस्तान में एक नई बातचीत के दौर के लिए मिल सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश में हैं. ईरानी सूत्रों की तरफ से खबरें चल रही हैं कि सोमवार को ये बातचीत इस्लामाबाद में होगी और रविवार शाम तक दोनों देशों के नेता पाकिस्तान पहुंचेंगे. पिछले दौर की बातचीत बिना नतीजे के खत्म हुई थी, ऐसे में इस बार का राउंड और भी अहम माना जा रहा है।  ट्रंप का "डबल गेम" ट्रंप की रणनीति को समझना मुश्किल नहीं है. एक तरफ वह बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखते हैं.  फिलहाल हालात बेहद नाजुक हैं. 21 अप्रैल की डेडलाइन करीब है और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। 

पाकिस्तान वार्ता विफल, अब सीधे ट्रंप से बोले PM मोदी — 40 मिनट की अहम चर्चा

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बात हुई है। यह बातचीत करीब 40 मिनट तक हुई है। पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद इस बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। इस साल तीसरी बार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर बात की है। वहीं, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दूसरी बार दोनों के बीच बात हुई है। पीएम मोदी ने क्या हुआ अमेरिकी राजदूत ने कहाकि ट्रंप ने पश्चिम एशिया की स्थिति, जिसमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी भी शामिल है, पर प्रधानमंत्री को जानकारी दी। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच कुछ बड़े सौदे अपेक्षित हैं, जिनमें ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है। सर्जियो गोर के मुताबिक इस दौरान पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा, ‘मैं सिर्फ यही चाहता हूं कि आप जान लीजिए कि हम सभी आपसे प्यार करते हैं।’ अमेरिकी राजदूत ने कहाकि राष्ट्रपति ट्रंप, पीएम मोदी को लगातार अपडेट करते रहते हैं। अब तक तीन बार बातचीत पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल पहली बार दो फरवरी को बात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ट्रेड डील पर बातचीत हुई थी। इसके बाद 24 मार्च को दोनों ने पश्चिम एशिया के हालात को लेकर चर्चा की थी। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने बाद पहली फोन कॉल में, पीएम मोदी ने जल्द से जल्द पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने का समर्थन किया था। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि होर्मुज खुला और सुरक्षित रहेगा। अपनी बातचीत के बारे में पोस्ट करते हुए, पीएम मोदी ने कहा था कि ट्रंप से उनकी बात हुई थी। इस दौरान दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात पर उपयोगी बातचीत हुई थी। विफल हो चुकी है ईरान-अमेरिका वार्ता गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल संघर्ष विराम है। इस बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों के बीच शांति वार्ता हुई थी। हालांकि करीब 21 घंटे तक चर्चा के बावजूद इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मूड भी उखड़ा हुआ है। वह लगातार ईरान को तबाह करने वाली धमकियां दे रहे हैं। इस बीच ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी बहुत जल्द हो सकती है।

ईरान शांति वार्ता के लिए है, होर्मुज खुलेगा ही – ट्रंप की चेतावनी शांति प्रयासों से पहले

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में आज शांति वार्ता होने वाली है. दूसरी तरफ, वार्ता से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. ट्रंप ने दावा किया है कि 'ईरान के पास कोई ऑप्शन नहीं है और वो सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा है.' उन्होंने होर्मुज खोलने को लेकर भी बड़ा बयान दिया।  ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कंट्रोल करके दुनिया को जबरन वसूली का शिकार बना रहा है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, 'ईरानियों को शायद ये अहसास नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया को डराने के अलावा उनके पास कोई कार्ड नहीं है. वो आज अगर जिंदा हैं, तो सिर्फ बातचीत करने के लिए।  शांति वार्ता नाकाम होने पर फिर शुरू हो सकती है जंग बता दें कि एक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंचे हैं. ट्रंप ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में ये इशारा किया है कि अगर ये शांति वार्ता नाकाम साबित होती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि अमेरिकी युद्धपोतों को बेहतरीन गोला-बारूद से लैस कर दिया गया है और वो हमलों के लिए तैयार हैं।  अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सहमति हो या न हो, वाशिंगटन जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल देगा. उन्होंने कहा, 'ये आसान नहीं होगा. मैं बस इतना कहूंगा कि हम इसे जल्द ही खोल देंगे।  ट्रंप ने इस दौरान ईरान को लेकर कहा, 'हम ऐसे लोगों से निपट रहे हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता कि वे सच बोलते हैं या नहीं. हमारे सामने वो कहते हैं कि वो परमाणु हथियार खत्म कर रहे हैं और फिर प्रेस में जाकर कहते हैं कि वो यूरेनियम संवर्धन करना चाहते हैं।  ट्रंप के मुताबिक, ईरान के लोग लड़ने से बेहतर फेक न्यूज मीडिया और पब्लिक रिलेशंस संभालने में माहिर हैं।  बता दें कि ईरान-अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है. इस्लामाबाद में आज ईरानी-अमेरिकी अधिकारी आमने-सामने होंगे और अपना-अपना पक्ष रखेंगे।