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अमेरिका में सीजफायर के बाद ट्रंप से इस्तीफे की मांग, जानें क्या है वजह

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ पिछले 40 दिन से जारी सैन्य कार्रवाई रोकने का ऐलान कर दिया है. ट्रंप ने दो हफ्ते के लिए सीजफायर का ऐलान किया है. इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ हमले रोकने की बात कही है और आगे की बातचीत पाकिस्तान में होगी. ट्रंप के ऐलान को युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।  अमेरिकी राष्ट्रपति के इस संदेश से जगी शांति की आस के बाद दुनियाभर के बाजार बम-बम हैं. वहीं, अमेरिका में अब ट्रंप के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ती नजर आ रही है. अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने ईरान के खिलाफ लड़ाई के इस अंत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूर्ण समर्पण बताया है. उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन पर कहा है कि इससे ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण मिल गया।  अमेरिकी सीनेटर ने दावा किया कि वह सच नहीं बता रहे हैं. अगर ईरान की मांग का कुछ हिस्सा भी मान लें, तो डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर उसे नियंत्रण देने की सहमति दे दी है. क्रिस मर्फी ने दुनिया के लिए इसे विनाशकारी स्थिति बताया. वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य ग्वेन मूरे ने युद्ध विराम के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस से ट्रंप पर लगाने की मांग की और कहा कि वह (डोनाल्ड ट्रंप) राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य हैं. ग्वेन मूरे ने तो यहां तक कह दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप को किसी भी संभव तरीके से पद से हटाया जाना चाहिए. ग्वेन मूरे ने कहा कि अब समय आ गया है कि रिपब्लिकन सांसद भी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर उनकी इस पागलपन भरी नीति को खत्म करें।  वहीं, अमेरिका के पूर्व एंटी टेरर चीफ जो केंट ने कहा है कि युद्धविराम सफल बनाना है, तो इजरायल को भी संयम बरतने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इज़राइल को नियंत्रित रखें. एक तरफ अमेरिका में ट्रंप के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है, वहीं व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया है।  व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह अमेरिका की जीत है. इसे राष्ट्रपति ट्रंप और हमारी शानदार सेना ने संभव बनाया है. उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत से ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान के चार से छह हफ्ते तक चलने के अनुमान लगाए थे. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिकों की असाधारण क्षमता से सैन्य लक्ष्य 38 दिन में ही हासिल कर लिया, उसे पार भी कर लिया। 

ट्रंप ने झुककर किया ईरान से समझौता, दो हफ़्ते का सीजफायर हुआ लागू

वाशिगटन / तेहरान  मिडिल-ईस्ट में पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रही जंग अब थम सकती है.  अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों से शुरू हुई महाजंग में अब सीजफायर का ऐलान हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जो डेडलाइन दी थी, उसके खत्म होने से ठीक पहले ही ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए जंग रोकने की घोषणा कर दी।  धमकियों से अचानक पीछे हटते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोक देंगे, जो कूटनीति के लिए एक संभावित मौके का संकेत है. सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा, "मैं दो हफ़्तों की के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं." उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिन्होंने उनसे नियोजित हमलों को टालने का आग्रह किया था।  ईरान ने पाकिस्तान के दो हफ़्तों के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस युद्धविराम को देश के नए सुप्रीम लीडर ने मंज़ूरी दे दी है. ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत को जंग के खत्म होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. 10-सूत्रीय प्रस्ताव में सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाने, पूरी तरह मुआवज़ा देने और ईरान की सभी ज़ब्त संपत्तियों को जारी करने की मांग की गई है।  वहीं, ईरान ने जंग रोकने के लिए 10-Points का प्रस्ताव भेजा है. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने कहा कि वह युद्ध की समाप्ति को तभी स्वीकार करेगा. ईरान की मांगों को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत होगी।  सीजफायर के बावजूद जारी तनाव हालांकि कागजों पर सीजफायर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी देशों और इजरायल में मिसाइल हमलों के अलर्ट जारी रहे। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहे। इससे साफ है कि क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इजरायल और ईरान के बीच भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा। इसी दबाव के चलते अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाया। सीजफायर के तहत दो हफ्तों के लिए इस स्ट्रेट को खोलने पर सहमति बनी है। हालांकि यह पूरी तरह खुला रहेगा या सीमित नियंत्रण में, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। आर्थिक असर और अंतरराष्ट्रीय दबाव सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखा गया। अमेरिका के तेल की कीमतों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी रही।   आइए जानते हैं अब तक के बड़े अपडेट क्या हैं-   1- ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने से परहेज करेगा. मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में मीटिंग होगी।  2- कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आने के बावजूद जमीनी स्तर पर अनिश्चितता और हिंसा जारी रही. ईरान ने सीजफायर समझौते को स्वीकार कर लिया है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका बनी रही. व्हाइट हाउस की ओर से सीजफायर पर सहमति जताए जाने के बावजूद, इज़रायली सेना ने ईरान पर हमले जारी रखे।  3- ट्रंप ने ऐलान करते हुए कहा, 'मैं आज रात ईरान पर भेजे जा रहे विनाशकारी बल को रोक रहा हूं और अगर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है तो मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को निलंबित करने पर सहमत हूं।  4- ईरान ने कहा, 'अगर उस पर हमले रोक दिए जाते हैं तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी.' ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित वार्ता के अनुरोध पर विचार कर रहा है. साथ ही वाशिंगटन द्वारा ईरान की 10 सूत्रीय योजना को वार्ता के ढांचे के रूप में स्वीकार करने पर भी विचार कर रहा है।  5- तेहरान ने आगे कहा कि दो सप्ताह की अवधि के लिए, ईरान के सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन संभव होगा।  6- ईरान ने इसे तेहरान की जीत बताया और उसकी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ट्रंप ने शत्रुता समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तें मान ली हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस ने जवाब दिया कि वास्तविकता यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए मजबूर किया था।  7- व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इज़राइल ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान को रोकने पर सहमत हो गया है. हालांकि, इजरायली सैन्य अधिकारियों ने कहा कि देश अभी भी हमले कर रहा है. तेल अवीव की ओर से औपचारिक बयान का इंतजार है।  8- ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है, इसके बावजूद सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत सहित खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए।  9- खबरों के मुताबिक, ईरान की दीर्घकालिक शांति योजना में ओमान के साथ समन्वय में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाना शामिल है. तेहरान का कहना है कि इस राजस्व का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा. इसके अलावा युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तों में क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू … Read more

ईरान ने दिखाई ताकत, दो दशक में पहली बार अमेरिका को झटका; 13 सैनिक मारे गए

वाशिंगटन/ तेहरान  ईरान युद्ध में अमेरिका को जो झटका लगा है वैसा झटका पिछले दो दशक में कभी नहीं लगा। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना को दो विमानों को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि एक पायलट की जान बच गई है जबकि दूसरा लापता है। पिछले 20 साल में ऐसा नहीं हुआ कि अमेरिकी सेना के दो विमान विदेशी धरती पर गिरा दिए गए हों। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि ईरान एकदम कमजोर हो गया है तो दूसरी तरफ ईरान कहता है कि वजह जवाब देने के लिए तैयार है। दो दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ''ईरान को हरा दिया है और उसे पूरी तरह से तबाह कर दिया है और हम अपने काम को बहुत तेजी से पूरा करने जा रहे हैं।' इराक में गिराया गया था अमेरिका का विमान ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एक पायलट को बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश जारी है। ईरान की मीडिया ने दावा किया है कि यूएस ए-10 विमान को भी निशाना बनाया गया है। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ए-10 थंडरबोल्ट II को गिराया गया था। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अब तक ऐसा कोई भी देश नहीं कर पाया, यह कोई चमत्कार से कम नहीं है। मारे गए 13 अमेरिकी सैनिक इस युद्ध के दौरान अब तक कुल 365 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हुई है। बीसीसी ने अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के हवासे से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि इन आंकड़ों में ईरान में हाल ही में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के मार गिराये जाने और लापता चालक दल को खोजने के लिए चलाए गये बचाव अभियान के दौरान घायल हुए सैनिक भी घायलों की इस सूची में शामिल हैं या नहीं। अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 13 ही बनी हुई है। युद्ध के दौरान घायल हुए अमेरिकी सैनिकों में सेना के 247 जवान, नौ सेना के 63 जवान, वायु सेना के 36 जवान और 19 मरीन सैनिक शामिल हैं। नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य स्थिति पर चर्चा करते हुए पहले कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया या इसमें ईरान की कोई भूमिका थी। चालक दल की स्थिति और विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का सटीक स्थान भी तुरंत ज्ञात नहीं हो सका।

ईरान जंग में US के लिए मुश्किलें बढ़ीं, 2 फाइटर जेट और 2 चॉपर क्रैश, पायलट लापता

वाशिंगटन पिछले पांच हफ्तों से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक और अनिश्चित दौर में पहुंच गया है. पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, जबकि बचाव अभियान में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी हमले की चपेट में आ गए हैं।  ईरानी मीडिया की तरफ से कुछ तस्वीरें जारी की गई हैं और दावा किया गया है कि कुवैत स्थित 'कैंप बुहरिंग' पर हुए ईरानी हमलों में अमेरिकी सेना का एक 'बोइंग CH-47 चिनूक' भारी-भरकम हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।  28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद  यह पहली बार है जब अमेरिकी विमानों को इस तरह नुकसान पहुंचा है. जिसने वाशिंगटन के ‘एयर सुपीरियरिटी’ के दावों को कड़ी चुनौती दी है.  जानकारी के मुताबिक, एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान ईरान के भीतर सैन्य अभियान के दौरान क्रैश हो गया. इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से एक को बचा लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता है और उसके ईरान में कहीं छिपे होने की आशंका है।  कुवैत में भी प्लेन क्रैश एक अन्य घटना में, कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि, इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा।  लापता पायलट को खोजने के लिए भेजे गए दो ब्लैक हॉक (Black Hawk) हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने भारी गोलीबारी की जिसके बाद वे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे. लगातार दो विमानों के नुकसान को इस युद्ध में अमेरिकी सेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  अमेरिकी सेना के लिए मुश्किल भरे रहे पिछले 24 घंटे      F-15E स्ट्राइक ईगल: ईरान की सीमा के भीतर एक F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया गया है. विमान में सवार दो क्रू मेंबर्स में से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है. लापता क्रू मेंबर की तलाश में हाई-स्टेक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।      A-10 वारथॉग: दो A-10 वारथॉग विमानों को निशाना बनाया गया. इनमें से एक फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया (पायलट सुरक्षित), जबकि दूसरे ने एक इंजन खराब होने के बावजूद इमरजेंसी लैंडिंग की।      रेस्क्यू  हेलीकॉप्टरों पर अटैक: लापता पायलट को खोजने निकले दो HH-60W जॉली ग्रीन II रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलाबारी की चपेट में आ गए. हालांकि क्रू सुरक्षित है, लेकिन कुछ जवान घायल हुए हैं।      इमरजेंसी लैंडिंग: एक F-16 फाइटर जेट और दो KC-135 टैंकर विमानों को भी तकनीकी खराबी या हमले के बाद इमरजेंसी घोषित कर सुरक्षित लैंडिंग करनी पड़ी।  ईरान का 'पायलट हंट'  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दक्षिण-पश्चिम इलाके में लापता अमेरिकी पायलट की तलाश के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने इसे जंग का टर्निंग पॉइंट बताते हुए कहा कि अब लड़ाई 'सत्ता परिवर्तन' से हटकर 'अमेरिकी पायलटों की तलाश' पर केंद्रित हो गई है।  ईरानी अधिकारियों ने अपने नागरिकों से पायलट की सूचना देने या उसे पकड़ने का आग्रह किया है और एक क्षेत्रीय अधिकारी ने 'शत्रु की सेनाओं' को पकड़ने या मारने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा इनाम देने की भी घोषणा की है।  ट्रंप बोले- यह जंग है, होता रहता है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं को बहुत अधिक महत्व न देते हुए कहा, 'यह जंग है और ऐसा होता रहता है.' उन्होंने संकेत दिया कि इन नुकसानों से ईरान के साथ चल रही बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ट्रंप के उन दावों के विपरीत है जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है।  सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर एयर डिफेंस सिस्टम भी मोबाइल मिसाइल और ग्राउंड फायर के जरिए खतरा पैदा कर सकते हैं. हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा, लेकिन दो विमानों के गिरने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  फिलहाल जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं और इसका असर पूरे मध्य-पूर्व पर पड़ रहा है. ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के प्रयासों को खारिज कर दिया है, जिससे पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे सीजफायर की कोशिशों को झटका लगा है. वहीं कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हमले और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। 

ट्रंप का धमकी भरा कदम: फार्मा सेक्टर पर 100% टैरिफ, भारत पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप सरकार कुछ दवा कंपनियों पर टैरिफ लगाने के बारे में सोच रही है. अगर ये कंपन‍िया ट्रंप सरकार की शर्त नहीं मानती हैं, तो उन्‍हें 100 फीसदी तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. खासकर उन कंपनियों पर, जो अमेरिका में अपनी दवाएं इम्‍पोर्ट करती हैं. इसका मतलब है कि भारत से भी अमेरिका भेजे जाने वाले दवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।  ब्‍लूमबर्ग के मुताबिक, अगर दवा निर्माता कंपनियां अमेरिका में कम कीमतों की गारंटी देने वाले समझौतों पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो ट्रंप प्रशासन गुरुवार को ही उन पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकता है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ये शुल्क 100 प्रतिशत तक लागू हो सकता है. यह पहल व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत की गई जांच के बाद की गई है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार के फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर Sun Pharmaceutical Industries पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. वहीं, Divi’s Laboratories, Biocon, Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़े नामों में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया।  Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं, तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा. उनका फोकस “मेड इन अमेरिका” को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार बढ़ाना है. यही वजह है कि इस तरह के टैरिफ को ट्रंप लगाने की तैयारी कर रहे है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिखी है, वह ज्यादा सेंटिमेंट आधारित है. भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।  किन फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर? फिर भी कुछ कंपनियां ज्यादा प्रभावित दिखीं. जैसे सन फार्मा अमेरिका में कुछ स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती है. इसी वजह से उसके शेयरों पर दबाव ज्यादा रहा. वहीं Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियां API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) बनाती हैं, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है, इसलिए उनमें भी हल्की कमजोरी दिखी।  जेनरिक दवाओं का हिस्सा 90% से ज्यादा हालांकि, एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में निवेश कर रही हैं. Biocon ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है. ऐसे में जिन कंपनियों का लोकल प्रेजेंस है, उन पर टैरिफ का असर सीमित रह सकता है. भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है, जिसमें 90% से ज्यादा हिस्सा जेनरिक दवाओं का होता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह गिरावट कम समय के लिए भी हो सकती है. अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं और स्ट्रैटजी में बदलाव करती हैं, तो भविष्य में इसका फायदा भी मिल सकता है।  ट्रंप का यह बयान बाजार के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन भारतीय फार्मा सेक्टर की बुनियादी मजबूती अभी भी बरकरार है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टैरिफ नीति किस हद तक लागू होती है और कंपनियां इसके अनुसार खुद को कैसे ढालती हैं। 

ट्रंप ने किया मैक्रों का मजाक, कहा- उनकी पत्नी बहुत बुरा बर्ताव करती हैं

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का मजाक उड़ाया है। एक लंच के दौरान ट्रंप ने कहा, "मैंने फ्रांस के मैक्रों को फोन किया, जिनकी पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं। अब भी उस मुक्के से उबर रहे हैं, जो उन्होंने मुंह पर मारा था।" ट्रंप का यह कमेंट एक वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और यह व्हाइट हाउस के यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड कर दिया गया। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर वीडियो को ब्लॉक कर दिया गया। ट्रंप ने यह कमेंट पिछले साल मई के उस वीडियो को लेकर की थी, जिसमें मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट वियतनाम यात्रा के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति को धक्का देते हुए कैमरे में कैद हो गई थीं। हालांकि, बाद में मैक्रों ने दुष्प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच उन्होंने खुद फ्रांस से सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हमें उनकी जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी मैंने उनसे मदद मांगी।" ट्रंप ने कहा, "और मैंने कहा, इमैनुएल, हम खाड़ी में थोड़ी मदद पाकर खुश होंगे, भले ही हम बुरे लोगों और बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। हमें थोड़ी मदद मिल जाए तो अच्छा रहेगा। अगर आप ऐसा कर सकें, तो क्या आप कृपया तुरंत कुछ जहाज भेज सकते हैं?'' इसके बाद ट्रंप ने मैक्रों के फ्रेंच लहजे में नकल करते हुए कहा, ''नहीं नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते डोनाल्ड, हम यह युद्ध जीतने के बाद कर सकते हैं।'' ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि नहीं हमें युद्ध जीतने के बाद कोई मदद की जरूरत नहीं है। पत्नी संग वायरल हुआ था मैक्रों का वीडियो पिछले साल मैक्रों और उनकी पत्नी का वीडियो सामने आया था, जो चर्चा का विषय बन गया। इसमें दिखाया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू करने के लिए वियतनाम पहुंचने पर, राष्ट्रपति की पत्नी ने अचानक एक झटके के साथ उनका चेहरा एक तरफ हटा दिया। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही प्लेन का दरवाजा खुलता है, तुरंत सामने मैक्रों दिखाई देते हैं। उसी दौरान उनकी पत्नी का हाथ सामने आता है और मैक्रों के चेहरे को दूसरी ओर धक्का देती हैं। यह घटना वहां मौजूद क्रू भी देखती है और सामने लगे कैमरे में भी कैद होती है। जब मैक्रों को पता चलता है कि वीडियो बनाया जा चुका है, तो वह झेंपते हुए एक हल्की सी स्माइल पास करते हैं और कैमरे के सामने हाथ हिलाते हैं। बता दें कि मैक्रों ने ब्रिगिट मैक्रों से शादी की थी, जोकि उनकी हाईस्कूल में टीचर थीं। दोनों का रिश्ता तब शुरू हुआ था, जब मैक्रों की उम्र महज 15 साल थी। उस समय ब्रिगिट एमियंस के ला प्रोविडेंस स्कूल में 39 साल की टीचर थीं। दोनों के बीच लगभग 25 साल का गैप होने के बाद भी, साल 2007 में शादी कर ली थी।

ट्रंप का ऐलान: दो-तीन हफ्तों में अमेरिका ईरान से वापस लौटेगा, जंग का अंत होगा

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को खत्म करने को लेकर बड़ा बयान दिया. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जल्द ही ईरान से अपनी सेना वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है।  ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान छोड़ देगी. ट्रंप ने दावा करते हुए कहा ईरान में 'रिजीम चेंज' का लक्ष्य पूरा हो चुका है. इसीलिए अमेरिका अब इस संघर्ष को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है।  हालांकि ट्रंप ने समझौते की शर्त को हटा दिया है, लेकिन उन्होंने ये भी संकेत दिया कि युद्ध खत्म होने से पहले एक डील हो सकती है. उन्होंने कहा, हो सकता है कि उससे पहले कोई समझौता हो जाए।  भले ही ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म करने का ऐलान कर दिया हो, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अब तक जंग खत्म करने की बात नहीं कही है. हाल ही में नेतन्याहू ने कहा था कि वो ईरान के साथ जंग खत्म करने की कोई डेडलाइन तय नहीं कर सकते हैं।  पश्चिम एशिया में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ ईरान की धमकी के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, 'उन्होंने (ईरान ने) उन्हें किस बात की धमकी दी? उन्होंने उन्हें कैसे धमकी दी? क्या उन्होंने कहा कि वो उन्हें उड़ा देंगे? क्या वो उन पर हमला करेंगे? वो ऐसा नहीं करेंगे. वो उन पर परमाणु हथियार से हमला नहीं करेंगे. उनमें से ज्यादा लोग (ईरानी नेतृत्व) पहले ही मर चुके हैं।  अमेरिका और इजरायल का ईरान पर संयुक्त हमला बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हमलों में खामेनेई की बेटी-दामाद, बहू और नातिन की भी जान चली गई. इसके अलावा, अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के कई दिग्गज अधिकारियों ने भी अपनी जान गवां दी।  खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया. ऐसी खबरें सामने आई कि मोजतबा हमलों में घायल हो गए हैं. हालांकि, मोजतबा इस समय कहां हैं, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। 

ट्रंप का बयान: अमेरिका ने दिया संकेत, युद्ध रुक सकता है, बाजार में सकारात्मक माहौल

वाशिंगटन शेयर बाजार में बड़ी तेजी का संकेत दिखाई दे रहा है. मंगलवार को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जो अमेरिकी बाजारों के लिए एक मजबूत शुरुआत का संकेत है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के ईरान में युद्ध समाप्‍त करने के लिए तैयार होने की रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई।  सुबह करीब 10.45 बजे NASDAQ-100 से जुडे फ्यूचर प्राइस 0.55 प्रतिशत ऊपर थे. S&P 500 के फ्यूचर प्राइस में 0.7 फीसदी की उछाल हुई, जबकि डाउ जोन्‍स इंडस्ट्रियल एवरेज के फ्यूचर प्राइस में 0.8 फीसदी की तेजी आई. मंगलवार को तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।  वॉर बंद होने के संकेत इधर, भारत में भी गिफ्ट निफ्टी तेजी का संकेत दे रहा है. हालांकि, आज भारतीय बाजार महावीर जयंती की वजह से बंद है. शेयर बाजार में यह तेजी का संकेत सिर्फ एक रिपोर्ट के कारण है. रॉयटर्स के अनुसार, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि  ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले बिना ईरान के खिलाफ सैन्‍य कार्रवाई योजना समाप्‍त करने को तैयार हैं।  तेल की कीमतों में भी गिरावट ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस में  1.22 डॉलर या 1.08 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 111.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि शुरुआती कारोबार में इसमें 2 फीसदी की तेजी थी. इसके साथ ही नेचुरल गैस कीमत और डॉलर इंडेक्‍स में भी गिरावट देखी जा रही है।  एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में गिरावट शॉर्ट टर्म में युद्ध समाप्‍त‍ि की संभावना को दिखाता है. उन्‍होंने कहा कि कोई भी महत्वपूर्ण परिवर्तन होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह से खुलने पर निर्भर करेगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार को अमेरिकी सरकार के अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार हैं, भले ही होमुर्ज काफी हद तक बंद रहे और बाद में इसे फिर से खोलने पर विचार किया जाए।   एशियाई मार्केट में भी गिरावट  अमेरिकी बाजार इस समय भले ही तेजी का संकेत दे रहा है, लेकिन एशियाई बाजार में गिरावट आई है. जापान का निक्‍केई 1.58 फीसदी गिर गया है. चीन का शंघाई 0.80% गिरा हुआ है और साउथ कोरिया का कोस्‍पी 4.26 फीसदी टूट चुका है और इस महीने इसमें 17 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने की संभावना है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट होगी।  घरेलू बाजार की बात करें तो, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कमजोर निवेशक भावना के बीच सोमवार को 2025-26 वित्तीय वर्ष के अंतिम कारोबारी सत्र में इक्विटी बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।  सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ. दिन के दौरान इसमें 1,809.09 अंक या 2.45 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 71,774.13 पर पहुंच गया. निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ। 

ईरान पर हमला करेगा US ? ट्रंप के प्लान में 2500 नौसैनिक, 3500 सैनिक और युद्धपोत, ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) और 'वॉशिंगटन पोस्ट' की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की पहली 'एक्सपीडिशनरी यूनिट' (31st MEU) मध्य पूर्व पहुंच चुकी है।  इसके साथ ही पेंटागन ने ईरान के भीतर हफ़्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन का खाका तैयार कर लिया है.अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने ईरान में संभावित जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है. वहीं अमेरिका ने क्षेत्र में 3500 से ज्यादा सैनिक तैनात किए गए हैं।  अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने दावा किया है कि  पेंटागन कई हफ्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन की योजना बना रहा है. इसमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्स और पारंपरिक पैदल सेना शामिल हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला अभी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लेना है।  मिडिल ईस्ट पहुंचा युद्धपोत  इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS Tripoli करीब 2500 मरीन सैनिकों को लेकर मिडिल ईस्ट पहुंच गया है. इस जहाज पर 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के सैनिक तैनात हैं. यह यूनिट पहले जापान में तैनात थी और ताइवान के आसपास अभ्यास कर रही थी, लेकिन करीब दो हफ्ते पहले इसे मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दिया गया।  USS त्रिपोली अपने साथ ट्रांसपोर्ट विमान, अत्याधुनिक स्ट्राइक फाइटर जेट्स (F-35) और Amphibious हमले के उपकरण भी मौजूद हैं जो समुद्र से जमीन पर सीधा प्रहार करने में सक्षम है।  वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी अब ईरान के भीतर 'स्पेशल ऑपरेशन्स' और पारंपरिक इन्फैंट्री सैनिकों द्वारा छापेमारी (Raids) की योजना बना रहे हैं. हालांकि, ट्रंप द्वारा इन जमीनी सैन्य अभियानों को अंतिम मंजूरी देना अभी बाकी है, लेकिन 82nd एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों और सैन डिएगो से रवाना हुए।  और खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकता है युद्ध दरअसल मिडिल ईस्ट में तनाव तब चरम पर पहुंचा जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला किया, जिसमें 10 अमेरिकी कर्मी घायल हुए. वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल संकट पैदा कर दिया है. यमन के हूती विद्रोहियों की सक्रियता ने 'बाब अल-मंडेब' जैसे व्यापारिक मार्गों को भी असुरक्षित बना दिया है।  सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान में जमीनी ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह युद्ध और व्यापक हो सकता है. अभी तक युद्ध मिसाइल, ड्रोन और एयर स्ट्राइक तक सीमित था, लेकिन ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होने पर सीधे जमीन पर लड़ाई शुरू हो जाएगी।  कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. ऐसे में मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है और दुनिया की नजर अब अमेरिका के अगले कदम पर टिकी है। 

ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप का कड़ा आदेश: ‘जल्द निपटाओ, और भी काम हैं

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहते और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे खत्म करने की कोशिश में हैं. ट्रंप आने वाले कुछ हफ्तों में इस संघर्ष पर पूर्णविराम लगाना चाहते हैं ताकि वे अपने अन्य घरेलू और राजनीतिक एजेंडों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।  Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि युद्ध अपने अंतिम चरण में है और उन्होंने अपने सहयोगियों को सार्वजनिक रूप से बताए गए 4-6 हफ्तों के टाइमलाइन पर टिके रहने के निर्देश दिए हैं. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मई के मध्य में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में एक शिखर सम्मेलन की योजना बनाई है. उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के शुरू होने से पहले ईरान युद्ध समाप्त हो जाएगा।  समस्या यह है कि ट्रंप के पास युद्ध समाप्त करने के आसान विकल्प नहीं हैं और शांति वार्ता अभी शुरुआती चरण में है. बाहरी राजनीतिक सहयोगियों के साथ बातचीत के दौरान उनका ध्यान कई बार अन्य मुद्दों पर भी गया, जिनमें आने वाले मध्यावधि चुनाव, हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन एजेंट भेजने का उनका फैसला और मतदाता पात्रता नियमों को कड़ा करने वाले कानून को कांग्रेस से पारित कराने की रणनीतियां शामिल हैं।  एक ओर तो ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दबाव भी बढ़ाया है. मध्यस्थ देशों के जरिए शुरुआती बातचीत शुरू हुई है, लेकिन अभी शांति वार्ता शुरुआती दौर में ही है और कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।   तेल और रणनीति रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के सामने ये बात रखी कि युद्ध खत्म करने के किसी समझौते के तहत अमेरिका को ईरान के तेल तक पहुंच मिल सकती है. हालांकि, इस पर अभी कोई ठोस योजना नहीं बनी है।  ट्रंप जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिसे वह टालना चाहते हैं. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है, जो उनकी चिंता का एक बड़ा कारण है.ट्रंप के करीबी सहयोगियों में इस बात को लेकर मतभेद है कि आगे क्या रणनीति होनी चाहिए. कुछ लोग कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, जबकि कुछ सख्त सैन्य कार्रवाई और यहां तक कि ईरान में शासन परिवर्तन की बात कर रहे हैं।  अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने का आदेश देने को तैयार हैं, लेकिन ऐसा करने से हिचक रहे हैं क्योंकि इससे युद्ध जल्दी खत्म करने का उनका लक्ष्य प्रभावित हो सकता है. उन्हें चिंता है कि यदि युद्ध जारी रहा तो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या घायल होने की संख्या बढ़ सकती है. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है।  वैश्विक असर और जोखिम यदि जल्द समझौता नहीं होता, तो होर्मुज में रुकावट जारी रह सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होगा. वहीं इजरायल और खाड़ी देशों की भूमिका भी इस संघर्ष को और जटिल बना सकती है।  इस युद्ध का असर अमेरिकी राजनीति पर भी दिख रहा है. आगामी चुनावों और बढ़ती महंगाई के बीच ट्रंप पर दबाव है. अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है. हाल ही में फ्लोरिडा की एक महत्वपूर्ण सीट डेमोक्रेट्स के खाते में जाने से हड़कंप मचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई और जीवनयापन की लागत आगामी चुनावों में ट्रंप की पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।  रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप खुद भी मानते हैं कि युद्ध उनके अन्य एजेंडे से ध्यान भटका रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका पहले से भी ज्यादा कड़ा हमला कर सकता है।