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ट्रंप का बड़ा कदम: चार्ली किर्क हत्याकांड के बाद एंटीफा को किया प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने एंटीफा संगठन को एक प्रमुख आतंकी संगठन घोषित किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि मुझे हमारे अनेक अमेरिकी देशभक्तों को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा, एक बीमार, खतरनाक, कट्टरपंथी वामपंथी आपदा को एक प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित कर रहा हूं। ट्रंप ने कहा कि एंटीफा को वित्तपोषित करने वालों की उच्चतम कानूनी मानकों और प्रथाओं के अनुसार गहन जांच की जाए। ट्रंप ने इसलिए लिया एक्शन ट्रंप ने एंटीफा को इसलिए आतंकी संगठन घोषित किया। क्योंकि हाल ही में उनके करीबी चार्ली किर्क की हत्या हुई थी। इसका हत्यारा टायलर रॉबिन्सन वामपंथी राजनीतिक विचारधारा का था। एंटीफा संगठन ऐसे ही वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा था। एंटीफा दूर-वामपंथी और फासीवाद-विरोधी आंदोलन करता है। ट्रंप ने समूह को वित्त पोषित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों की गहन जांच का आह्वान किया।    ट्रंप ने पहले किया था वादा बता दें कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित करने का वचन दिया था। उस समय उनके अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने समूह की गतिविधियों को “घरेलू आतंकवाद” बताया था। अब ट्रंप ने करीबी चार्ली किर्क की हत्या के बाद सख्ती करना शुरू कर दिया है। क्या है एंटीफा? एंटीफा (फासीवाद विरोधी) एक औपचारिक संगठन नहीं है। यह एक शिथिल रूप से परिभाषित सामाजिक आंदोलन है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कानून आधिकारिक तौर पर नामित विदेशी आतंकवादी समूहों को “भौतिक सहायता” देने पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन घरेलू संगठनों के लिए कोई समान कानून नहीं है। ‘एंटीफा’ शब्द आम तौर पर वामपंथी, अक्सर अति-वामपंथी, राजनीतिक विचारों वाले व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला को दिखाता है। यह आमतौर पर मुख्यधारा की डेमोक्रेटिक पार्टी के एजेंडे से बाहर होते हैं। इस आंदोलन में एक केंद्रीकृत नेतृत्व संरचना या राष्ट्रीय मुख्यालय का अभाव है, हालांकि कुछ स्थानीय समूह नियमित रूप से मिलते रहते हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स पर भड़के ट्रंप, 15 अरब डॉलर की मानहानि का दावा ठोकने की चेतावनी

 न्यूयॉर्क  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के नामी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स और उसके चार पत्रकारों के खिलाफ 15 अरब डॉलर का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है. सोमवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "न्यूयॉर्क टाइम्स को बहुत लंबे समय से स्वतंत्र रूप से झूठ बोलने, बदनाम करने और मुझे बदनाम करने की अनुमति दी गई है, और अब यह बंद होगा!”. उन्होंने जानकारी दी कि इस मुकदमे को उन्होंने फ्लोरिडा में दर्ज कराया है. "आज, मुझे देश के इतिहास के सबसे खराब और सबसे पतित अखबारों में से एक, रेडिकल लेफ्ट डेमोक्रेट पार्टी के लिए एक वर्चुअल "मुखपत्र" बनने वाले द न्यूयॉर्क टाइम्स के खिलाफ 15 बिलियन डॉलर का मानहानि का मुकदमा लाने का बड़ा सम्मान मिला है. मैं इसे अब तक के सबसे बड़े अवैध कैंपेन चलाने में योगदान देने वाले के रूप में देखता हूं. कमला हैरिस के उनके समर्थन को वास्तव में द न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर केंद्र में रखा गया था, जो पहले कभी नहीं सुना गया था! "टाइम्स" आपके पसंदीदा राष्ट्रपति (यानी मेरे), मेरे परिवार, बिजनेस, अमेरिका फर्स्ट मूवमेंट, MAGA और समग्र रूप से हमारे देश के बारे में झूठ बोलने की एक दशक लंबी पद्धति में लगा हुआ है. मुझे गर्व है कि मैं एक बार सम्मानित "कचरा" को जिम्मेदार ठहराता हूं, जैसा कि हम फेक न्यूज नेटवर्क के साथ कर रहे हैं… न्यूयॉर्क टाइम्स को बहुत लंबे समय से स्वतंत्र रूप से झूठ बोलने, बदनाम करने और मुझे बदनाम करने की अनुमति दी गई है, और अब यह बंद होगा! यह मुकदमा ग्रेट स्टेट ऑफ फ़्लोरिडा में लाया जा रहा है. इस बात की ओर आपका ध्यान के लिए धन्यवाद. अमेरिका को फिर से महान बनाएं!" डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के अनुसार फ्लोरिडा में अमेरिकी जिला न्यायालय में दायर मुकदमे में न्यूयॉर्क टाइम्स के दो पत्रकारों द्वारा लिखे गए और 2024 के चुनाव के पहले छापे गए कई लेखों और एक किताब का नाम दिया गया है. इसमें आरोप लगाया गया है कि कहा गया है कि ये "न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मानहानि के दशकों पुराने पैटर्न का हिस्सा हैं." ट्रंप द्वारा दायर इस मुकदमे में कहा गया है, "बयानों के झूठ की जानकारी के साथ, और/या उनकी सच्चाई या झूठ की लापरवाह उपेक्षा के साथ, प्रतिवादियों (NYT और 4 पत्रकार) ने लापरवाही से ऐसे बयान प्रकाशित किए." AP की रिपोर्ट के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एजेंसी की तरफ से इस खबर पर प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए ईमेल का तुरंत जवाब नहीं दिया है. गौरतलब है कि ट्रंप अमेरिका के कई मीडिया आउटलेट्स के पीछे पड़ गए हैं. जुलाई में उन्होंने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और मीडिया के दिग्गज रूपर्ट मर्डोक के खिलाफ 10 बिलियन डॉलर का मानहानि का मुकदमा दायर किया था क्योंकि अखबार ने यौन शोषण के अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ ट्रंप के संबंधों पर एक स्टोरी छाप दी थी.

अमेरिका ने माना कूटनीति विफल, इजरायल ने गाजा पर तेज़ हमलों का आगाज किया

 तेल अवीव कतर में सोमवार को 60 मुस्लिम देशों की मीटिंग हुई, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ। वहीं उसी समय इजरायल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे। उन्होंने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ कई घंटे तक मीटिंग की और मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि गाजा में जारी जंग का कोई कूटनीतिक समाधान होने की उम्मीद नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि हमास एक आतंकी और बर्बर संगठन है। वह जब तक सरेंडर नहीं करेगा, तब तक फिलिस्तीन के मसले पर किसी समाधान की उम्मीद करना बेमानी होगा। उनका यह स्टैंड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एकदम उलट है, जिन्होंने पिछले दिनों कहा था कि जल्दी ही गाजा में जंग समाप्त होगी। मार्को रुबियो के बयान से स्पष्ट है कि गाजा में अब इजरायल और आक्रामक हो सकता है क्योंकि उसे अमेरिका की ओर से समर्थन हासिल है। यही नहीं इजरायल ने गाजा पर हमले करना शुरू भी कर दिया है। सोमवार देर रात से ही इजरायल की ओर से गाजा पर हमले जारी हैं। रुबियो ने कहा कि हम चाहते हैं कि जंग समाप्त हो, लेकिन हमास एक आतंकी संगठन है, जो सरेंडर नहीं कर रहा है। उसके सरेंडर किए बिना गाजा में जंग का कोई कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीद बेहद कम है। उन्होंने कहा कि हमास का घोषित लक्ष्य इजरायल की बर्बादी है। उसने लगातार कई हमले इजरायल पर किए हैं। इसलिए उसके खात्मे के साथ ही समाधान संभव है। फिलहाल गाजा में भीषण हमलों का दौर जारी है। इजरायल की चेतावनी के बाद से हजारों लोग गाजा छोड़कर निकल रहे हैं। इसी को लेकर रुबियो ने चेतावनी दी है कि हमास के पास कुछ दिन का ही वक्त बचा है। वह सीजफायर डील को स्वीकार कर ले या फिर गाजा पर इसी तरह बमबारी जारी रहेगी। इजरायल ने तो ऑपरेशन शुरू भी कर दिया है। हालांकि इजरायल के लिए भी राह आसान नहीं है। एक तरफ मुस्लिम देश एकजुट हैं तो वहीं यूरोप के कई मुल्क भी इजरायल के खिलाफ हैं। अब लग्जमबर्ग का भी कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र आम सभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने के प्रस्ताव का समर्थन करेगा। इससे पहले ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी ऐसा प्रस्ताव रख चुके हैं। बता दें कि रुबियो ने इजरायल की यात्रा के बाद अब कतर का दौरा किया है। वहीं कतर के पीएम इस्लामिक देशों की मीटिंग से पहले अमेरिका गए थे। माना जा रहा है कि अमेरिकी दखल के चलते ही कतर शांत है और मध्यस्थता की मीटिंग जारी रखने पर सहमत है। वहीं नेतन्याहू का कहना है कि कतर पर हमले से पहले उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को जानकारी दी थी, लेकिन उनकी ओर से रोका नहीं गया।

PM मोदी पर ट्रंप का बयान… शेयर बाजार चढ़ा, इन 10 स्टॉक्स में सबसे ज्यादा उछाल

मुंबई  भारत-US के बीच अटली ट्रेड डील पर बात बनती नजर आ रही है. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से इसे लेकर पॉजिटिव संकेत दिए हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत अच्छा दोस्त बताते हुए ट्रेड डील के सफल होने की बात कही है, तो उनकी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पीएम मोदी ने भी इंडिया-यूएस डील पर जल्द बात पूरी होने की उम्मीद जताई है. तमाम मुद्दों को लेकर फंसी इस डील के पूरा होने की उम्मीद का सीधा असर बुधवार को शेयर बाजार पर देखने को मिला है और सेंसेक्स-निफ्टी खुलने के साथ ही रॉकेट की तरह उड़ान भरते नजर आए हैं.  सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा, निफ्टी 25000 के पार बीएसई के सेंसेक्स इंडेक्स ने शेयर मार्केट ओपन होने के साथ ही अपने पिछले बंद 81,101.32 की तुलना में करीब 400 अंकों की छलांग लगाते हुए 81,504.36 के स्तर पर ओपनिंग की और 81,587.91 पर कारोबार करता हुआ दिखाई दिया. वहीं दूसरी ओर एनएसई निफ्टी ने भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अपने पिछले बंद 24,868.60 के मुकाबले उछाल भरते हुए 25,017 पर कारोबार की शुरुआत की.  शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में मौजूद करीब 1728 कंपनियों के शेयरों ने अपने पिछले बंद के मुकाबले जोरदार तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत ग्रीन जोन में की थी, तो वहीं  595 कंपनियों के शेयर लाल निशान पर कारोबार करते दिखे. इसके अलावा 168 शेयरों की फ्लैट ओपनिंग हुई यानी इनकी स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. बाजार खुलने पर कोटक महिंद्रा बैंक, जियो फाइनेंशियल, एलटी, डॉ रेड्डीज लैब और टीसीएस के शेयर सबसे तेज भागे.  विदेशों से मिल रहे थे तेजी के संकेत शेयर बाजार में तेजी के संकेत इसके ओपन होने से पहले ही विदेशों से मिलने लगे थे. दरअसल, अमेरिका से जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर बयान आया था, तो वहीं दूसरी ओर एशियाई बाजार में तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई थी. शुरुआती कारोबारी में गिफ्ट निफ्टी 107.50 अंक चढ़कर 25,027.50 पर कारोबार कर रहा था, तो जापान का निक्केई 174 अंक, हांगकांग के हैंगसेंग 198.86 अक और साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 46.13 अकं की बढ़त लिए हुए था.  ट्रंप ने PM मोदी को लेकर ऐसा क्या कहा? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल अकाउंट से शेयर की गई अपनी एक पोस्ट में लिखा कि मैं अपने बहुत अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी से आने वाले हफ्तों में बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत चल रही है. मुझे पूरा यकीन है कि दोनों महान देशों के लिए इस वार्ता का सफल निष्कर्ष निकलेगा. वहीं ट्रंप की इस पोस्ट को लेकर पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका को अच्छा दोस्त बताते हुए कहा है कि समृद्ध भविष्य के लिए दोनों साथ काम करेंगे. खुलते ही रॉकेट बने ये 10 शेयर  शेयर मार्केट में तूफानी तेजी के बीच तमाम शेयरों में उछाल देखने को मिला और इनमें 10 सबसे तेज भागने वाले स्टॉक्स की बात करें, तो लार्जकैप कैटेगरी में शामिल एचसीएल टेक (2.28%), टेक महिंद्रा (2.10%), टीसीएस (1.95%) की तेजी लेकर भागा. तो वहीं मिडकैप में शामिल भारत फोर्ज (4.13%), एम्फेसिस (3.79%), थर्मेक्स (3.71%), टाटा एलेक्सी (3.30%) और कोफोर्ज शेयर (3.20%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा स्मॉलकैप कैटेगरी में सस्ता सुदंर शेयर 20 फीसदी, वेलस्पन शेयर 10.50% और आईसीआईएल शेयर 8.20% चढ़ गया. 

डिनर पार्टी में मारपीट की नौबत: ट्रंप के सामने भिड़े वित्त मंत्री बेसेंट और वरिष्ठ अफसर

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डिनर पार्टी में उनके दो टॉप इकोनॉमिक अधिकारी मारपीट की नौबत तक पहुंच गए. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि एक अधिकारी ने दूसरे के सामने कहा कि 'तेरा मुंह तोड़ दूंगा… बाहर चल'. यह घटना वाशिंगटन डीसी में एक विशेष क्लब "एक्जीक्यूटिव ब्रांच" के उद्घाटन और एक पॉडकास्ट होस्ट चमथ पालिहपितिया के जन्मदिन समारोह के दौरान हुई. ट्रंप के जिन दो अफसरों के बीच मारपीट की नौबत आई वे हैं सेक्रेटरी ऑफ फाइनेंस यानी कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के डायरेक्टर बिल पुल्टे के बीच.  सीएनएन के अनुसार एग्ज़ीक्यूटिव क्लब में एक रात्रिभोज के दौरान स्कॉट बेसेन्ट ने पुल्टे के मुंह पर मुक्का मारने की धमकी दी. सूत्रों के अनुसार बेसेंट  को पता चला कि बिल पुल्टे ट्रंप के सामने उनकी चुगली कर रहे हैं.  इसकी जानकारी मिलते ही स्कॉट बेसेन्ट आपे से बाहर हो गए और उन्होंने बिल पुल्टे के चेहरे पर मुक्का मारने की धमकी दी.  यह घटना 4 सितंबर 2025 को वाशिंगटन डीसी में एक निजी डिनर के दौरान हुई. इस डिनर में कई बड़े नाम मौजूद थे जैसे ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी सीन डफी, कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लुटनिक, इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम, और नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड. लगभग 30 मेहमानों के लिए एक लम्बी मेज सजाई गई थी जिस पर उच्च श्रेणी के क्रिस्टल और चीनी मिट्टी के बर्तन लगे थे.  लेकिन कॉकटेल पार्टी के शोरगुल के बीच बेसेंट ने पुल्टे पर गालियों से भरी तीखी टिप्पणी की. दरअसल खबर यह है कि स्कॉट बेसेन्ट ने कई लोगों से सुना था कि फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के निदेशक ट्रंप के सामने उनकी बुराई कर रहे थे.  मौका मिलते ही बेसेंट ने पुल्टे से कहा, "तुम राष्ट्रपति से मेरे बारे में क्यों बात कर रहे हो? भाड़ में जाओ." "मैं तुम्हारे मुंह पर मुक्का मार दूंगा." अमेरिकी राजनीति पर गहरी नजर रखने वाली वेबसाइट पॉलटिको में इस झगड़े की विस्तार से रिपोर्ट छपी है.  बेसेंट की प्रतिक्रिया देख पुल्टे स्तब्ध लग रहा था. चश्मदीदों के अनुसार इस तनावपूर्ण मुठभेड़ के बाद क्लब के सह-मालिक और फाइनेंसर ओमीद मलिक को हस्तक्षेप करना पड़ा. लेकिन बेसेंट को यह मंजूर नहीं था. वह पुल्टे को पार्टी से ही बार निकलवाना चाहता था.  बेसेंट ने क्लब मलिक से कहा, "या तो वो यहां रहेगा या मैं. तुम मुझे बताओ कि यहां से कौन निकलेगा." "या फिर," उसने आगे कहा, "हम बाहर जा सकते हैं." "क्या करने?" पुल्टे ने पूछा. "बात करने?" "नहीं," बेसेंट ने जवाब दिया. "मैं तुम्हारी पिटाई कर दूंगा." स्थिति को शांत करने के लिए मलिक ने उन लोगों को अलग किया और बेसेंट को शांत करने के लिए क्लब के दूसरे हिस्से में ले गए. डिनर के दौरान बेसेंट और पुल्टे को मेज के विपरीत छोर पर बिठाया गया. इस घटना पर बेसेंट, पुल्टे, मलिक और व्हाइट हाउस ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.  ट्रंप को उम्मीद थी तीनों साथ मिलकर काम करेंगे ट्रंप ने मई में घोषणा की थी कि बेसेंट, वाणिज्य मंत्री ल्यूटनिक और पुल्टे मिलकर काम करेंगे. लेकिन ट्रंप प्रशासन के सूत्रों के अनुसार इन अफसरों के बीच एक तरह की ज़मीनी जंग छिड़ी हुई है. इस विवाद से परिचित कुछ लोगों का कहना है कि बेसेंट का मानना ​​है कि पुल्टे ने खुद को उन मामलों में शामिल कर लिया है जिसे वित्त मंत्री अपना अधिकार क्षेत्र मानते हैं. ट्रंप से कई सीट दूर बैठे बेसेंट यह पहली बार नहीं है जब बेसेंट का ट्रंप के किसी सलाहकार से झगड़ा हुआ हो. इस साल की शुरुआत में कई सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि बेसेंट का एलॉन मस्क से तीखी बहस हुई थी.   बेसेंट रविवार को ट्रंप के साथ यूएस ओपन में शामिल हुए हालांकि उन्हें राष्ट्रपति से कुछ सीटें दूर बैठाया गया था. 

ट्रंप दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जिनपिंग और किम से बातचीत की संभावना

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकार एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) व्यापार मंत्रियों की बैठक के लिए अक्टूबर में दक्षिण कोरिया की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात संभव है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सरकार की टैरिफ नीतियों को लेकर दुनियाभर के देश चिंता में हैं। वहीं, इसका वैश्विक व्यापार पर भी असर देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि एपेक के दौरान द्विपक्षीय बैठक के बारे में गंभीर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनी है। अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में ग्योंगजू शहर में होने वाले इस शिखर सम्मेलन को ट्रंप के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का एक अहम अवसर माना जा रहा है। पिछले महीने एक फोन कॉल में जिनपिंग ने ट्रंप और उनकी पत्नी को चीन आने का निमंत्रण दिया था। इस निमंत्रण का अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी स्वागत किया था, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका में अधिक आर्थिक निवेश हासिल करने के अवसर के रूप में भी देख रहा है। ट्रंप की सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की यात्राओं सहित हालिया विदेश यात्राओं का मुख्य केंद्र यही रहा है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, "दक्षिण कोरिया की यात्रा पर चर्चा हो रही है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग पर केंद्रित होगी।" अधिकारी ने बताया कि अन्य लक्ष्यों में व्यापार, रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग पर चर्चा पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इस क्षेत्र में ट्रंप की मौजूदगी उन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ एक बार फिर बातचीत करने की स्थिति में ला सकती है, हालांकि किम इसमें शामिल होंगे या नहीं, यह अभी भी सवाल है। अधिकारियों का कहना है कि शी जिनपिंग के साथ संभावित बैठक के आयोजन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले हफ्ते ट्रंप के साथ बैठक के दौरान उन्हें एपेक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि यह आयोजन ट्रंप को किम से मिलने का अवसर प्रदान कर सकता है। शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह किम से मिलने के इच्छुक हैं। उत्तर कोरियाई नेता के बारे में ट्रंप ने दावा किया, "मैं ऐसा करूंगा और हम बातचीत करेंगे। वह मुझसे मिलना चाहेंगे। हम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हैं और हम संबंधों को बेहतर बनाएंगे।" अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण कोरिया की अपेक्षित यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब शी जिनपिंग और किम दोनों के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हैं। शी जिनपिंग ने इस हफ्ते बीजिंग में किम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की थी। जिनपिंग के साथ संभावित बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वाशिंगटन और बीजिंग ट्रंप के टैरिफ को लेकर आमने-सामने हैं। अमेरिका और चीन के अधिकारी एक व्यापार समझौते पर कई वार्ताओं में शामिल रहे हैं, जिसमें यूरोप में दोनों देशों के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों के साथ दो आमने-सामने की बैठकें भी शामिल हैं। ट्रंप ने अप्रैल में चीन के आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। टैरिफ पिछले महीने लागू होने वाले थे। लेकिन, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नवंबर तक बढ़ी हुई टैरिफ पर रोक लगा दी।

‘ट्रंप की भावनाओं का सम्मान…’ पीएम मोदी का संदेश, दोनों नेताओं के रिश्तों में दिखी गर्माहट

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के तनावपूर्ण संबंधों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर अब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया है. पीएम मोदी ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर पोस्ट करते हुए कहा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और दोनों देशों के संबंधों के प्रति उनके सकारात्मक आकलन की सराहना करता हूं. भारत और अमेरिका के बीच बहुत ही सकारात्मक, दूरदर्शी एवं वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है. बता दें कि पीएम मोदी का यह बयान ट्रंप को लेकर दिए गए उनके हालिया बयान के बाद आया है. ट्रंप ने कहा था कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत स्पेशल हैं. उन्होंने कहा था कि मौजूदा तनाव के बावजूद पीएम मोदी मेरे दोस्त रहेंगे. हमारी दोस्ती बनी रहेगी. वह बेहतरीन प्रधानमंत्री हैं. ग्रेट हैं. ट्रंप ने ये भी कहा था पीएम मोदी एक महान प्रधानमंत्री हैं. लेकिन वह फिलहाल जो कर रहे हैं, मुझे वह पसंद नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप से यह सवाल पूछा गया था कि क्या वह भारत के साथ फिर से संबंधों को सुधारने के लिए तैयार हैं? क्योंकि टैरिफ की वजह से दोनों देशों के संबंध बीते दो दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं.  ट्रंप कह चुके हैं कि वह बेहद निराश हैं कि रूस से भारत बहुत तेल खरीद रहा है. हमने भारत पर बहुत टैरिफ लगाया है, पचास फीसदी टैरिफ. पीएम मोदी से मेरे रिलेशन अच्छे हैं. वह महान पीएम हैं. वह यहां कुछ महीने पहले आए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इससे पहले कहा था कि लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है. 

पाकिस्तान नहीं, भारत पर फोकस जरूरी; ट्रंप को समझाया पूर्व US अधिकारियों ने

वाशिंगटन  भारत और अमेरिका के बीच संबंध इस समय अभूतपूर्व तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर भारी टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता ठप हो गई है। इस बीच बाइडेन प्रशासन के दौर के पूर्व शीर्ष अमेरिकी अधिकारी- पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन और पूर्व उप-विदेश सचिव कर्ट एम. कैंपबेल ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो वॉशिंगटन एक अहम रणनीतिक साझेदार खो सकता है और चीन को इनोवेशन के क्षेत्र में बढ़त मिल सकती है। उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि भारत की तुलना पाकिस्तान के साथ नहीं की जानी चाहिए क्योंकि भारत कहीं ज्यादा जरूरी है। विदेश नीति पर लेख में जताई चिंता ‘फॉरेन अफेयर्स’ मैग्जीन में लिखे अपने संयुक्त संपादकीय में सुलिवन और कैंपबेल ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को लंबे समय से द्विदलीय समर्थन मिला है और इस रिश्ते ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की “लापरवाह आक्रामकता” को हतोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अमेरिकी सहयोगियों से कहा कि वे भारत को समझाएं कि “राष्ट्रपति ट्रंप की नाटकीय बयानबाजी में अक्सर किसी सौदेबाजी की भूमिका होती है।” भारत को ‘प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेलने’ का खतरा दोनों पूर्व अधिकारियों ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों- 50% तक टैरिफ, रूस से तेल खरीद और पाकिस्तान पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के रिश्तों में तेज गिरावट ला दी है। हाल में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो अमेरिका, भारत को प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेल देगा। पाकिस्तान नीति को भारत से अलग रखने की सलाह सुलिवन और कैंपबेल ने अमेरिका को सलाह दी कि वह अपनी विदेश नीति में “भारत-पाकिस्तान” की एक साथ तुलना न करे। उनका कहना था कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद से निपटने और परमाणु हथियार प्रसार को रोकने जैसी अहम चिंताएं हैं, लेकिन ये भारत से जुड़े बहुआयामी और दीर्घकालिक हितों के मुकाबले कहीं कम महत्व रखती हैं। अमेरिका-पाकिस्तान में नजदीकी और भारत पर टैरिफ ट्रंप हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष में संघर्षविराम का श्रेय लेते दिखे थे, जबकि भारत ने इसका खंडन किया था। इसके बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर का वाइट हाउस में स्वागत किया गया और अमेरिका ने पाकिस्तान को व्यापार, आर्थिक विकास और क्रिप्टोकरेंसी सहयोग का आश्वासन दिया। कुछ दिनों बाद ही अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ तेल समझौते की घोषणा की और उसी समय भारत के सामान पर 25% तक का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। नई रणनीतिक संधि का प्रस्ताव सुलिवन और कैंपबेल ने दावा किया कि भारत-अमेरिका के बीच नई रणनीतिक साझेदारी एक संधि के रूप में होनी चाहिए, जिसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी मिले। यह संधि पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी और इसका लक्ष्य दोनों देशों की सुरक्षा, समृद्धि और साझा मूल्यों को मजबूत करना होगा। तकनीकी साझेदारी पर जोर उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और अमेरिका को 10 वर्षीय कार्ययोजना पर सहमत होना चाहिए, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में तकनीकी साझेदारी शामिल हो। इसका उद्देश्य साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना होगा, ताकि अमेरिका और उसके लोकतांत्रिक सहयोगी चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को नवाचार के क्षेत्र में बढ़त न लेने दें। संपादकीय में कहा गया है कि दोनों देशों को “प्रमोट” एजेंडा (साझा निवेश, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा साझेदारी) और “प्रोटेक्ट” एजेंडा (निर्यात नियंत्रण और साइबर सुरक्षा सहयोग) दोनों पर मिलकर काम करना होगा।   रणनीतिक साझेदारी का महत्व पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने याद दिलाया कि भारत पिछले एक पीढ़ी से अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार बनकर उभरा है। उन्होंने भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और मनमोहन सिंह के बीच) और बाइडेन-मोदी के बीच एआई, जैव प्रौद्योगिकी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के साथ साझेदारी ने "इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के लापरवाह हरकतों को प्रभावी ढंग से हतोत्साहित किया है।"  

ट्रंप का टिम कुक से दो-टूक सवाल, मेहमानों से जानना चाहा इन्वेस्टमेंट प्लान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया ने व्हाइट हाउस में टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों को खाने पर बुलाया. ट्रंप ने इस दावत को हाई आईक्यू लोगों का जमावड़ा कहा. इस दावत में खाने के साथ-साथ पॉलिटिक्स, इकोनॉमी, निवेश और नौकरियों पर चर्चा हुई.  डिनर के दौरान ट्रंप ने टेक कंपनियों के मालिकों और सीईओ से पूछा कि वे अमेरिका में कितना निवेश कर रहे हैं.  ट्रंप के दाहिनी ओर बैठे मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं. इसके बाद ट्रंप ऐपल के सीईओ टिम कूक की ओर मुखातिब हुए. उन्होंने टिम कूक से पूछा, "और टिम… ऐपल अमेरिका में कितना पैसा लगाएगा? क्योंकि मुझे पता है कि यह बहुत ज़्यादा होने वाला है. और आप जानते ही हैं, आप कहीं और थे, और अब आप सचमुच बड़े पैमाने पर वापस लौट रहे हैं. आप कितना पैसा लगाएंगे?" ट्रंप ने टिम कुक से पूछा, “टिम, आप अमेरिका में कितने पैसे निवेश करने जा रहे हैं? मुझे पता है यह बहुत बड़ी रकम है। आप पहले कहीं और थे, अब आप बड़े पैमाने पर घर लौट रहे हैं। कितना निवेश होगा?” कुक ने जवाब दिया, “600 अरब डॉलर।” साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा, “मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने ऐसा माहौल बनाया जिससे हम अमेरिका में बड़ा निवेश कर सकें। यह आपकी नेतृत्व क्षमता और नवाचार पर ध्यान को दर्शाता है।” भारत पर ट्रंप की आपत्ति हाल ही में ट्रंप ने टिम कुक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्हें एप्पल का भारत में प्रोडक्शन बढ़ाना पसंद नहीं है। ट्रंप ने कहा, “मैंने टिम कुक से कहा, मेरे दोस्त, मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार किया है। अब तुम यहां 500 अरब डॉलर का निवेश करने आ रहे हो, लेकिन सुन रहा हूं कि तुम भारत में भी निर्माण कर रहे हो। मैं नहीं चाहता कि तुम भारत में बनाओ।” एप्पल ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना शुरू किया है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर में बिकने वाले 25 प्रतिशत iPhone भारत में बने। भारत में 6 करोड़ आईफोन बनाने की योजना टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को 4 करोड़ यूनिट्स से बढ़ाकर 6 करोड़ यूनिट्स करने के लिए करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। ट्रंप ने Meta प्रमुख जुकरबर्ग से भी यही सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा, “600 अरब डॉलर।” Google के सुंदर पिचाई ने जवाब दिया, “हम 100 अरब डॉलर से ऊपर हैं। अगले दो वर्षों में यह 250 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।” Microsoft प्रमुख सत्या नडेला ने कहा, “इस साल अमेरिका में हम करीब 75 से 80 अरब डॉलर निवेश करेंगे।” ट्रंप ने सभी की सराहना करते हुए कहा, “बहुत बढ़िया, हम आप पर गर्व करते हैं। बहुत सारी नौकरियां आएंगी।” इस पर टिक कूक ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं.  ट्रंप ने आगे कहा- 600 अरब डॉलर, बढ़िया है, बहुत सारी नौकरियां आएंगी. हमें ऐसा करके बहुत गर्व महससू होगा. आपका बहुत धन्यवाद, मैं इसकी सराहना करता हूं.  इसके बाद ट्रंप गूगल के सुंदर पिचाई से बात की और उनसे पूछा कि वे कितना पैसा अमेरिका में लगा रहे हैं.  सुंदर पिचाई ने कहा, "हम 100 बिलियन डॉलर से काफी ऊपर हैं. अगले दो वर्षों में अमेरिका में यह 250 बिलियन डॉलर हो जाएगा." इस पर ट्रंप ने कहा, "यह बहुत बढ़िया है, यह बहुत बढ़िया है. हमें आप पर गर्व है. शुक्रिया, ढेर सारी नौकरियां." फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला से पूछा कि उनकी कंपनी कितना पैसा अमेरिका में लगा रही है.  अमेरिका के लिए अपना निवेश प्लान बताते हुए सत्या ने कहा कि इस साल हम संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 75 से 80 अरब डॉलर के करीब निवेश करेंगे. ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को भी थैंक्यू कहा. व्हाइट हाइस के स्टेट डाइनिंग रूम में जमी टेक दिग्गजों की इस मीटिंग का सबसे हैरान करने वाला पहलू था- इस डिनर से दुनिया के सबसे अमीर और टेक दुनिया के टायकून एलॉन मस्क का गायब रहना. कभी ट्रंप के खास मित्रों में शामिल रहने वाले एलॉन मस्क और डोनाल्ड के संबंध अब बिगड़ गए हैं और दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते.  इस डिनर में ट्रंप ने मस्क के विरोधी और टेक दुनिया के दूसरे बड़े बिजनेसमैन ओपन एआई के सीईओ सैम अल्टमैन को बुलाया और उन्हें काफी तरजीह दी.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस में आयोजित टेक डिनर में भारतीय मूल के सीईओ का जलवा रहा. इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के सत्या नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोन टेक्नोलॉजीज के सीईओ संजय मेहरोत्रा, TIBCO के चेयरमैन और पैलंटिर के सीटीओ श्याम शंकर शामिल थे.   

200% दवा टैरिफ की योजना, भारत और अमेरिकियों को होंगे बड़े असर

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाहर से आने वाली दवाओं पर भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने के तैयारी में हैं. इसका असर भारत जैसे तमाम उन देशों पर पड़ेगा जो अमेरिका को दवा सप्लाई करते हैं. हालांकि, अभी भारत को इससे अलग रखा गया है लेकिन आने वाले समय में इसका असर भारत पर भी देखने को मिलेगा. लेकिन अगर भारत पर भी यह टैरिफ लागू हुआ तो उसके फार्मास्युटिकल, ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेडिकल उपकरण एक्सपोर्ट पर पड़ेगा. वहीं, टैरिफ से अमेरिका को भी नुकसान होगा वहां पर दवाओं की कीमत बढ़ जाएगी. स्टाक की कमी हो सकती है. एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने आयातित दवाओं पर भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है. अधिकारियों ने कुछ दवाओं पर 200 प्रतिशत तक के शुल्क सार्वजनिक रूप से लगाए हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि इस नीति से कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है. भारत पर क्या होगा असर हालांकि, अभी भारत को फार्मा टैरिफ से दूर रखने की बात कही गई है. लेकिन अगर यह लागू होता है तो कभी न कभी इसका असर भारत के एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है. ट्रेड इकोनॉमिक्स के डेटा के मुताबिक, इंडिया ने साल 2024 में अमेरिका को कुल 8.72 बिलियन अमेरिकी डॉलर के फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया था. इस पर भी असर पड़ सकता है. जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख निर्यातक है, विशेष रूप से असुरक्षित है। अगर अमेरिका में टैरिफ लगता है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को नुकसान हो सकता है और उनके निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ट्रंप प्रशासन चीन से आयातित दवाओं और उनके कच्चे माल (APIs) पर बहुत फोकस कर रहा है। ट्रंप का मुख्य टार्गेट फार्मा कंपनियों को दबाव डालकर अपना प्रोडक्शनअमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करना है। उनका तर्क है कि अमेरिका में बनी दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। पहले से ही, कुछ बड़ी कंपनियों जैसे जॉनसन एंड जॉनसन और रोश ने अमेरिका में निवेश बढ़ाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों और उद्योग समूहों का मानना है कि इतने ऊंचे टैरिफ का उल्टा असर हो सकता है। इससे दवाओं की कीमतों में वृद्धि होने और दवाओं की कमी पैदा होने का खतरा है। खासकर जेनेरिक (सामान्य) दवाएं, जो पहले से ही कम मुनाफे पर बिकती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि 25% टैरिफ भी अमेरिकी दवा की लागत को लगभग 51 अरब डॉलर बढ़ा सकता है। कई दवा कंपनियों और उद्योग समूहों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि टैरिफ से R&D और इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि कुछ निवेशकों और विश्लेषकों को संदेह है कि ट्रंप वास्तव में 200% जैसी ऊंची दर लागू करेंगे। उनका मानना है कि यह केवल निगोशिएशन की एक रणनीति हो सकती है। क्यों चिंता में अमेरिकी लोग? जानकारों का मानना है कि दवाओं पर भारी-भरकम टैरिफ से एक तरफ सप्लाई चेन प्रभावित होगी तो दूसरी तरफ दवाओं की कमी का खतरा बढ़ जाएगा. ट्रंप प्रशासन अपने इस कदम को सही ठहराने के लिए ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट 1962 की सेक्शन 232 का इस्तेमाल कर रहा है. दलील दी जा रही है कि दवाओं की कमी से बचने के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, ताकि कोविड-19 जैसी स्थिति दोबारा न हो. हाल ही में अमेरिका-यूरोप व्यापारिक फैसले में कुछ यूरोपीय सामानों पर 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था, जिनमें दवाएं भी शामिल हैं. इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन और ज्यादा टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. क्या होगा तत्काल असर? व्हाइट हाउस की तरफ से सुझाव दिया गया है कि हायर टैरिफ लागू करने में करीब डेढ़ साल का समय दिया जाना चाहिए. कई कंपनियां पहले ही आयात बढ़ा चुकी हैं और दवाओं के दाम बढ़ा चुकी हैं. जेफरीज के विश्लेषक डेविड विंडले ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह फैसला 2026 के आखिर या 2027 से पहले लागू नहीं हो सकता है. अल्पकालिक प्रभाव यह होगा कि दवाओं की कमी बढ़ेगी. जबकि लंबे समय में इसका सीधा असर लागत और आपूर्ति पर पड़ेगा. ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेडिकल उपकरण ऑर्गेनिक केमिकल्स भारत से अमेरिका को निर्यात 2.56 बिलियन USD की तुलना में अमेरिका से भारत को आयात 3.54 बिलियन USD से अधिक रहा है. भारत वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक केमिकल्स का एक प्रमुख निर्यातक है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा बाजार है. वहीं, मेडिकल उपकरण की बात करें तो भारत अमेरिका को मेडिकल उपकरण का भी काफी मात्रा में निर्यात करता है. इस पर टैरिफ का असर पड़ेगा. क्योंकि ज्यादा टैरिफ होने से सामान महंगे होंगे. हालांकि, भारत अमेरिका से करीब 5.7 बिलियन USD का आयात करता है. क्योंकि भारत अपनी हाई-एंड मेडिकल उपकरण जरूरतों के लिए अमेरिका पर निर्भर है.