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ट्रंप की योजना पर भारत-पाक की संयुक्त चुनौतियां, अमेरिका की चाल फेल करने का प्रयास

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान को धमकी दे रहे थे. इस धमकी के खिलाफ अब भारत तालिबान के साथ खड़ा हो गया है. अफगानिस्तान को लेकर यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मोड़ दिखाता है. भारत ने तालिबान, पाकिस्तान, चीन और रूस के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस सौंपने की बात कही थी. यह फैसला उस समय आया है जब तालिबान शासित अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी इस हफ्ते भारत की ऐतिहासिक यात्रा पर आने वाले हैं. मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशन ऑन अफगानिस्तान’ की सातवीं बैठक में भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान सहित 10 देशों ने हिस्सा लिया. बेलारूस के प्रतिनिधि भी अतिथि के रूप में मौजूद रहे. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में किसी देश का नाम लिए बिना कहा गया, ‘प्रतिभागियों ने अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में किसी भी देश की ओर से सैन्य ढांचे की तैनाती के प्रयासों को अस्वीकार्य बताया, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के खिलाफ है.’ यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप की योजना की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है. ट्रंप और तालिबान भिड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मांग की थी कि तालिबान अमेरिका को बागराम एयरबेस वापस सौंप दे. यह वही बेस है, जहां से अमेरिका ने 2001 के बाद ‘वॉर ऑन टेरर’ यानी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध अभियान चलाया था. 18 सितंबर को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, ‘हमने वह बेस उन्हें मुफ्त में दे दिया, अब हम उसे वापस चाहते हैं.’ उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी लिखा था- ‘अगर अफगानिस्तान ने बाग्राम एयरबेस वापस नहीं किया तो नतीजे बुरे होंगे.’ तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ट्रंप की मांग को खारिज करते हुए कहा, ‘अफगान किसी भी हाल में अपनी जमीन किसी और को नहीं देंगे. हम अगले 20 साल युद्ध लड़ने को तैयार हैं.’ मॉस्को फॉर्मेट वार्ता के नए संस्करण में, देशों के समूह ने अफगानिस्तान में समृद्धि और विकास लाने के तौर-तरीकों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। इन देशों ने अफगानिस्तान और पड़ोसी देशों में सैन्य बुनियादी ढांचे तैनात करने के कुछ देशों के प्रयासों को 'अस्वीकार्य' बताया, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हितों की पूर्ति नहीं करता है। तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने पहली बार मॉस्को फॉर्मेट वार्ता में भाग लिया। कुछ हफ्ते पहले, ट्रंप ने कहा था कि तालिबान को बगराम एयरबेस अमेरिका को सौंप देना चाहिए, क्योंकि इसे वॉशिंगटन ने स्थापित किया था।मॉस्को में हुई बातचीत में भाग लेने वाले देशों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। बयान में कहा गया, 'उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान को आतंकवाद को खत्म करने और इसे जल्द से जल्द जड़ से मिटाने के लिए ठोस कदम उठाने में मदद दी जानी चाहिए, ताकि काबूल की धरती का इस्तेमाल पड़ोसी देशों और अन्य जगहों की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में न हो।' इसमें कहा गया कि इन देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद अफगानिस्तान, क्षेत्र और व्यापक विश्व की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत, रूस और चीन के अलावा, इस बैठक में ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने भी भाग लिया। इन देशों ने इस क्षेत्र और इससे आगे के देशों के साथ अफगानिस्तान के आर्थिक संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया। मुत्ताकी की यात्रा क्यों है खास भारत का इस मुद्दे पर तालिबान के साथ खड़ा होना कई मायनों में ऐतिहासिक है. मुत्ताकी पहली बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने उन्हें 9 से 16 अक्टूबर तक यात्रा की अनुमति दी है. क्योंकि मुत्ताकी UNSC की प्रतिबंधित सूची (Resolution 1988) में शामिल हैं, इसलिए उन्हें विशेष मंजूरी मिली है. बगराम क्यों चाहता है अमेरिका? काबुल से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित बाग्राम एयरबेस अफगानिस्तान का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है. इसमें दो बड़े रनवे हैं, जिसमें से एक 3.6 किमी और दूसरा 3 किमी लंबा. पहाड़ी इलाके के कारण अफगानिस्तान में बड़े विमानों की लैंडिंग मुश्किल होती है, ऐसे में बगराम एक रणनीतिक केंद्र माना जाता है.  

ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर हमास ने दी हामी, सभी इजरायली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित

 गाजा  हमास ने ट्रंप के गाजा पीस प्लान को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है और लगभग सभी बड़ी शर्तों को मानने के लिए हामी भरी है. ​इस फिलिस्तीनी मिलिशिया संगठन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आगे बढ़ाए गए शांति योजना के तहत सभी इजरायली बंधकों (चाहे जीवित हों या मृत) को रिहा करने के लिए तैयार है. हमास का यह फैसला गाजा में संघर्ष समाप्त करने में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. हमास ने एक बयान में कहा कि वह इस मामले (ट्रंप के गाजा प्लान) की विस्तृत चर्चा के लिए मध्यस्थों के माध्यम से तत्काल वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार है. यदि यह कदम साकार होता है, तो यह अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमले के दौरान अपहृत बंधकों की वापसी के लिए महीनों की कोशिशों में सबसे महत्वपूर्ण सफलता होगी. हमास ने यह भी दोहराया कि वह गाजा का प्रशासन 'स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की फिलिस्तीनी संस्था' को सौंपने के लिए तैयार है. हमास ने डोनाल्ड ट्रंप का जताया आभार बता दें कि हमास ही अब तक गाजा का प्रशासन चलाता था. इस समूह ने गाजा संघर्ष समाप्त कराने के प्रयासों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के लिए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया. साथ ही अरब, इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का आभार जताया. इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास से रविवार शाम 6 बजे तक इजरायल के साथ शांति समझौते पर पहुंचने का अल्टीमेटम था, वरना गाजा में कहर टूटने की चेतावनी दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया था अल्टीमेटम ट्रंप ने कहा था कि हमास को हमारे गाजा प्लान को स्वीकार करने, इजरायली बंधकों को रिहा करने और शत्रुताओं समाप्त करने का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है. अगर वह इस पर सहमति नहीं जताता है तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. उन्होंने कहा था कि गाजा में किसी न किसी तरह शांति जरूर स्थापित होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो वर्ष से चल रहे गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए इजरायल और हमास दोनों को शांति समझौते पर सहमत करने के लिए प्रयासरत हैं. ट्रंप के 20 सूत्री गाजा प्लान में क्या-क्या है? उन्होंने इसके लिए एक 20 सूत्री प्रस्ताव का खाका तैयार किया है, जो न केवल युद्ध को तत्काल रोकने का आह्वान करता है बल्कि गाजा में शासन के लिए एक समाधान भी प्रस्तुत करता है. व्हाइट हाउस ने संघर्ष समाप्त करने और क्षेत्र के भविष्य के प्रशासन को आकार देने के लिए ट्रंप के गाजा प्लान को एक रोडमैप बताया. ट्रंप के गाजा पीस प्लान (गाजा शांति योजना) के अनुसार, हमास और इजरायल के बीच शांति समझौते के 72 घंटों के भीतर हमास को सभी जीवित और मृत इजरायली बंधकों को रिहा करना होगा, बदले में इजरायल सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को अपनी जेलों से रिहा करेगा. अब गाजा पर नहीं होगा हमास का नियंत्रण इस प्लान के मुताबिक गाजा पर हमास का नियंत्रण खत्म होगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में एक स्वतंत्र सरकार यहां का प्रशासन चलाएगी. हमास की ओर से इस पीस प्लान पर सहमति जताने के तुरंत बाद गाजा में पूर्ण सहायता भेजी जाएगी. ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि हमास गाजा प्लान को अस्वीकार करता है, तो उसे पूरी तरह खत्म करने का काम पूरा करने के लिए इजरायल को अमेरिका का पूर्ण समर्थन मिलेगा. हमास का ट्रंप के गाजा प्लान पर सहमति जताना, मध्य पूर्व में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

ट्रंप प्रशासन का H-1B नियम कोर्ट में घसीटा गया, वीजा फीस को लेकर उठे सवाल

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी वीजा फीस को 100,000 डॉलर करने के फैसले को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. शुक्रवार को यूनियनों, नियोक्ताओं और धार्मिक संगठनों के एक गठबंधन ने सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत में याचिका दाखिल कर इस आदेश को रोकने की मांग की. यह मुकदमा ट्रंप के उस ऐलान को पहली बार अदालत में चुनौती देता है जिसे उन्होंने दो हफ्ते पहले जारी किया था. इसमें कहा गया था कि अमेरिका में आने वाले नए एच-1बी वीजा धारकों को तभी प्रवेश मिलेगा जब उनके नियोक्ता अतिरिक्त 100,000 डॉलर का शुल्क जमा करें. हालांकि यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके पास पहले से वीजा है या जिन्होंने 21 सितंबर से पहले आवेदन कर दिया था. याचिकाकर्ताओं में यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स, एक नर्स भर्ती एजेंसी और कई धार्मिक संगठन शामिल हैं. उन्होंने दलील दी कि ट्रंप को कानून द्वारा बनाए गए वीजा कार्यक्रम में इस तरह से बदलाव करने या नए शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है. अमेरिकी संविधान के मुताबिक कर या शुल्क लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. वीजा फीस बढ़ाने पर क्या है ट्रंप प्रशासन का पक्ष ट्रंप प्रशासन ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि यह "सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी वेतन स्तर को गिरने से बचाने" के लिए जरूरी है. व्हाइट हाउस प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा कि यह कदम उन कंपनियों को भी आश्वासन देता है जिन्हें वास्तव में विदेशी प्रतिभा की जरूरत है. वर्तमान में नियोक्ता एच-1बी प्रायोजन के लिए कंपनी के आकार और अन्य कारकों के आधार पर लगभग 2,000 डॉलर से 5,000 डॉलर तक का शुल्क देते हैं. ट्रंप का आदेश इस लागत को कई गुना बढ़ा देगा. एच-1बी वीजा का बड़ा लाभार्थी भारत एच-1बी कार्यक्रम के तहत हर साल 65,000 वीजा और उन्नत डिग्री धारकों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा उपलब्ध कराए जाते हैं. 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है और उसे कुल मंजूर वीजा का लगभग 71% मिला, जबकि चीन का हिस्सा करीब 11.7% था. याचिका में कहा गया है कि नया आदेश "पे टू प्ले" (Pay to Play) व्यवस्था बनाता है, जिसमें केवल वही कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त कर पाएंगी जो भारी शुल्क अदा कर सकेंगी. इससे न केवल इनोवेशन पर असर पड़ेगा बल्कि चयनात्मक प्रवर्तन और भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ जाएगी.

नोबेल रेस में डोनाल्ड ट्रंप: मिल सकता है सम्मान या लगेगा बड़ा झटका?, 8 दिनों में होगा ऐलान

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति खुलकर जाहिर कर चुके हैं कि वह नोबेल पुरस्कार चाहते हैं। हालांकि, इसकी संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि उन लोगों के पुरस्कार जीतने की संभावनाएं ज्यादा हैं, जो सुर्खियों से दूर हैं और भुला दिए गए मुद्दों पर काम कर रहे हैं। खास बात है कि ट्रंप ने उन्हें नोबेल पुरस्कार दिए जाने के तार अमेरिका के सम्मान से जोड़े हैं। 10 अक्तूबर शुक्रवार को पुरस्कारों की घोषणा की जानी है। एएफपी के अनुसार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के कुछ जानकार बताते हैं कि अमेरिका फर्स्ट की नीति और विभाजनकारी तरीकों के चलते उन्हें पुरस्कार मिलने की संभावनाएं नहीं हैं। इतिहासकार ओविंद स्टीनर्सन ने कहा कि ट्रंप कई मायनों में उन आदर्शों के खिलाफ काम करते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व नोबेल प्राइज करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने 6 या 7 युद्ध खत्म कराए हैं। जबकि, जानकारों की राय इससे अलग है। SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख करीम हैगाग ने कहा, 'नोबेल कमेटी आकलन करेगी कि शांति स्थापित करने में सफलता हासिल करने के स्पष्ट उदाहरण हैं या नहीं।' कहा जा रहा है कि नोबेल पीस प्राइज के लिए उम्मीदवारी जताने के लिए हजारों पात्र लोग हैं। ट्रंप ने अमेरिका के सम्मान से जोड़े तार ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है तो उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लिया है। ट्रंप ने कहा, 'यह शानदार है। कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, ‘क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?’ बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वे इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है… जी हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा। लेकिन देखते हैं क्या होता है।' उन्होंने कहा, 'यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी। मैं आपको बता दूं कि मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि यह देश को मिले। यह सम्मान देश को मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। इस बारे में सोचिएगा जरूर। मुझे लगता है कि यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) सफल होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं समझौतों के बारे में किसी से भी ज्यादा जानता हूं।' उन्होंने कहा, 'लेकिन, आठ समझौते करना वाकई सम्मान की बात है।'  

ट्रंप के गाजा प्लान पर समर्थन से घिरा पाकिस्तान, सोशल मीडिया पर भड़के लोग – ‘शहबाज ने सरेंडर कर दिया

इस्लामाबाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्री गाजा शांति योजना ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर हलचल मचा दी है। लेकिन इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का इस योजना का खुला समर्थन उनके लिए मुसीबत बन गया है। उनके विरोधी कह रहे हैं कि शहबाज शरीफ ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। विपक्षी नेता और आम नागरिक उन्हें 'गद्दार' करार दे रहे हैं जिसने फिलिस्तीन के साथ धोखा किया है। मामला बिगड़ता देख शहबाज सरकार ने सफाई दी है कि ट्रंप की गाजा योजना में पाकिस्तान की सभी मागों को शामिल नहीं किया गया है। ट्रंप ने सोमवार को वाइट हाउस में अपनी गाजा योजना का ऐलान किया। ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वार्ता के बाद प्रस्तुत की गई इस योजना में गाजा में युद्ध तत्काल खत्म करने, हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा करने और गाजा के असैन्यीकरण का प्रस्ताव है। योजना में इजरायल को गाजा के आसपास सुरक्षा परिधि बनाने और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई का प्रावधान है, लेकिन कई आलोचकों का मानना है कि यह प्लान इजरायल के हितों को प्राथमिकता देता है और फिलिस्तीनियों की सहमति को नजरअंदाज करता है। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की खुलेआम तारीफ की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल शुरू से हमारे साथ थे। उन्होंने 100% समर्थन का बयान जारी किया है। वे कमाल के लोग हैं।" इसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गाजा योजना का स्वागत करते हुए कहा कि “फिलिस्तीनी जनता और इजरायल के बीच स्थायी शांति ही क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास ला सकती है।” लेकिन उनके इस बयान ने पाकिस्तान के भीतर कड़ी प्रतिक्रिया पैदा कर दी। राजनीतिक दलों, विश्लेषकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने इसे "सरेंडर" करार देते हुए सरकार पर ऐतिहासिक रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया। 'मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया' पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने कहा कि मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना से पहले अब्राहम समझौते में शामिल होना पाकिस्तान के लिए “भारी भूल” होगी। मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन के नेता अल्लामा राजा नासिर ने योजना को “त्रुटिपूर्ण और अन्यायी” बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनियों की राय को दरकिनार कर अमेरिकी और इजरायली हितों को आगे बढ़ाती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इमान जैनब मजारी ने कहा, “फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान की जनता एकमत है। प्रधानमंत्री का यह कदम देश की ऐतिहासिक स्थिति से विश्वासघात है।” लेखिका फातिमा भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान का इजरायल से सामान्य संबंध स्थापित करना नैतिक और धार्मिक कर्तव्य से पलायन है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तानी जनता कभी दो-राष्ट्र नीति के सरेंडर को स्वीकार नहीं करेगी। केवल एक फिलिस्तीन है और वह इजरायल के कब्जे में है।” पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं की नाराजगी पत्रकार तलत हुसैन ने योजना की आलोचना करते हुए कहा, “कोई फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं, गाजा में फिलिस्तीनी अथॉरिटी नहीं, हमास का सफाया- और नेतन्याहू हत्याओं के बाद शांति-दूत बन जाएंगे। यह सब ताजा खून की धरती पर ट्रंप का रियल एस्टेट सौदा है।” पत्रकार जर्रार खुहरो ने इसे “इजरायल को पाक-साफ करने और फिलिस्तीनियों के गुस्से को भटकाने की चाल” बताया। वहीं कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने शहबाज शरीफ़ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जनसंहार कर रहे जायोनी देश से शांति की बात करना शर्मनाक है। पाकिस्तान की जनता कभी इसे माफ नहीं करेगी।” सीनियर नेता जावेद हाशमी ने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का रुख स्पष्ट था कि इजरायल “एक नाजायज देश” है। जमात-ए-इस्लामी प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री के बयान को पूरी तरह खारिज करती है। उन्होंने लिखा, “66,000 शहीद फिलिस्तीनियों की लाशों पर खड़ी किसी भी तथाकथित शांति योजना की तारीफ करना दरअसल गुनहगारों के साथ खड़ा होना है।” पूर्व वित्त मंत्री असद उमर ने भी प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब इजरायल का इतिहास हर समझौते को तोड़ने का रहा है, तो उसे चरणबद्ध वापसी का भरोसा क्यों? गाजा में 20 लाख की आबादी के लिए केवल 600 ट्रक राहत क्यों?” पाक सरकार की सफाई पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ईशाक डार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित गाजा शांति योजना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह योजना पाकिस्तान द्वारा सुझाए गए सभी बदलावों को शामिल नहीं करती है। डार ने एक टीवी चैनल पर कहा कि वाशिंगटन द्वारा तैयार अंतिम मसौदा पाकिस्तान के 24 घंटे के भीतर सौंपे गए संशोधनों को नजरअंदाज करता है। डार ने कहा, "ट्रंप की टीम ने कुछ बिंदु साझा किए थे, और हमने 24 घंटे के भीतर अपने संशोधन सौंपने का वादा किया। लेकिन वाशिंगटन द्वारा तैयार दस्तावेज में हमारे सभी सुझावों को शामिल नहीं किया गया।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की नीति फिलिस्तीन मुद्दे पर स्पष्ट और अपरिवर्तित बनी हुई है। उप प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना के तहत फिलिस्तीन में एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की सरकार स्थापित की जाएगी, जिसकी निगरानी मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों से बनी एक पर्यवेक्षी संस्था करेगी। उन्होंने गाजा में युद्ध विराम और पूर्ण शांति लाने के प्रयासों के बारे में बात की, जिसमें पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आठ मुस्लिम देशों के नेताओं की तैयारी बैठक भी शामिल थी।

ट्रंप की नई योजना से गाज़ा का भूगोल बदला, बफर ज़ोन और रंगबिरंगे मैप का विश्लेषण

गाज़ा  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा युद्ध को खत्म करवाने के लिए नया प्लान तैयार किया है. उन्होंने व्हाइट हाउस में इस प्लान को जारी किया. ट्रंप ने यह भी कहा है कि इजरायली पीएम बेंजामिन नेतान्याहू इस प्लान से सहमत हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने गाजा का नया नक्शा तैयार किया है. इस नक्शे के अनुसार गाजा और इजरायल के बीच अब हमेशा के लिए एक बफर जोर रहेगा. यानी कि इस रेखा के पार न तो इजरायली सैनिक जा सकेंगे, न ही फिलीस्तीन के लोग आ सकेंगे.  ट्रंप ने कहा कि इजरायल और अन्य देशों ने उनके द्वारा बताई गई रूपरेखा को स्वीकार कर लिया है. ट्रंप ने कहा, "अगर हमास इसे स्वीकार कर लेता है, तो इस प्रस्ताव में सभी शेष बंधकों को तुरंत रिहा करने का प्रावधान है, लेकिन किसी भी स्थिति में 72 घंटे से ज़्यादा समय नहीं लगेगा." इस प्रावधान के तहत हमास को सभी जीवित और मृत बंधकों को रिहा करना होगा. इजरायल-गाजा बॉर्डर पर बफर जोन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी नक्शे में तीन लाइनें हैं. नीली, पीली और लाल. इसके बाद बफर जोन है. नीली वो रेखा है जहां तक अभी इजरायली रक्षा बलों का नियंत्रण है.  ये रेखा खान यूनुस के पास है.  इसके बाद राफा से होकर पीली रेखा गुजरती है. इसे फर्स्ट विदड्राअल लाइन कहा गया है. इस पीली रेखा का मतलब है कि बंधकों के छोड़े जाने के साथ ही इजरायली सेना पीली रेखा तक आ जाएगी.  इसके बाद सेकेंड विदड्राअल लाइन है. ये लाल रेखा है. यानी कि सेकेंड विदड्राअल के बाद इजरायल की सेना यहां आकर रूक जाएगी.   इसके बाद बफर जोन शुरू होता है. इजरायल के सैनिक थर्ड विदड्राअल के बाद यहीं आकर रुक जाएंगे.    हमास को चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, "मुझे उम्मीद है कि हम शांति के लिए एक समझौता करेंगे, और अगर हमास इस समझौते को अस्वीकार कर देता है, जो हमेशा संभव है, तो इस डील से सिर्फ वे ही बच जाएंगे.  अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा, "बाकी सभी ने इसे स्वीकार कर लिया है. लेकिन मुझे लगता है कि हमें एक सकारात्मक जवाब मिलेगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो जैसा कि आप जानते हैं बीबी (इजरायली पीएम), आपको जो करना होगा, उसके लिए हमारा पूरा समर्थन है." प्रस्ताव में कहा गया है, "इजरायली सेना बंधकों की रिहाई की तैयारी के लिए सहमत रेखा पर वापस लौट जाएगी." इस प्लान  में यह भी कहा गया है कि गाजा का "गाजा के लोगों के लाभ के लिए पुनर्विकास" किया जाएगा, और "यदि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा." इजरायल रिहा करेगा 250 कैदी हमास द्वारा सभी बंधकों को रिहा कर दिए जाने के बाद इजरायल 250 आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को रिहा करेगा, साथ ही 7 अक्टूबर 2023 के बाद हिरासत में लिए गए 1,700 गाजावासियों को भी रिहा करेगा. इजरायल रिहा किए गए प्रत्येक इज़रायली बंधक के बदले, 15 मृत गाजावासियों के अवशेष भी रिहा करेगा.  गाजा छोड़ने को स्वतंत्र होंगे हमास सदस्य सभी बंधकों की वापसी के बाद, शांति की राह पर चलने को इच्छुक हमास के सदस्यों को माफी दे दी जाएगी. इसके लिए उन्हें अपने हथियार सरेंडर करने होंगे. गाज़ा छोड़ने के इच्छुक हमास सदस्यों को उनके गंतव्य देशों तक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जाएगा.  गाजा में हमास का नहीं होगा कोई रोल  हमास और अन्य गुट इस बात पर सहमत हैं कि वे गाजा के शासन में प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या किसी भी रूप में कोई भूमिका नहीं निभाएंगे. सुरंगों और हथियार उत्पादन सुविधाओं सहित सभी सैन्य, आतंकवादी और आक्रामक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका पुनर्निर्माण नहीं किया जाएगा.    

भारत पर शर्तें और सलाहें! अमेरिकी सेक्रेटरी हॉवर्ड ल्यूटनिक का ऊटपटांग बयान

न्यूयॉर्क अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड ल्यूटनिक (Howard Lutnick) ने कहा है कि अमेरिका को भारत और ब्राजील जैसे देशों को 'दुरुस्त' करना होगा. उन्होंने यह बात टैरिफ विवाद के बीच अमेरिकी चैनल को दिए एक इंटरव्यू साक्षात्कार में कही है. अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया है, जिसमें नई दिल्ली की रूसी तेल खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क शामिल है.  ल्यूटनिक ने कहा कि इन देशों को अपने बाजार खोलकर और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई रोककर सही जवाब देना होगा. भारत अपनी ऊर्जा खरीद को राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से प्रेरित बताता रहा है.  ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया है. यह टैरिफ दरों में सबसे ज्यादा है, जो किसी भी देश पर लगाया गया है. इस टैरिफ में रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25 फीसदी का शुल्क भी शामिल है. भारत, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंध लगाने पर रियायती रूसी तेल खरीद रहा है. भारत का मानना है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता पर आधारित है. 'अमेरिका के साथ सहयोग करना होगा…' ल्यूटनिक ने कहा, "भारत, ब्राजील, स्विट्जरलैंड, और ताइवान जैसे कई देशों को 'दुरुस्त करने' की जरूरत है, क्योंकि इनके साथ अमेरिका के व्यापारिक मुद्दे अनसुलझे हैं."  उन्होंने आगे कहा कि इन देशों को यह समझना होगा कि अगर वे अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ बेचना चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ सहयोग करना होगा. वक्त के साथ इन व्यापार मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा. व्यापार समझौते पर गतिरोध… अमेरिका लगातार चौथे साल (2024-25) भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना रहा है. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 131.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है. अमेरिका भारत के कुल वस्तु निर्यात में करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 फीसदी और कुल व्यापार में 10.73 फीसदी का योगदान देता है. दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा $191 बिलियन से $500 बिलियन तक दोगुना करने की उम्मीद कर रहे हैं. समझौते की तारीख पर संशय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक डेलिगेशन पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में अमेरिकी पक्ष के साथ बैठकें कर रहा था. दोनों देशों को उम्मीद थी कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पूरी हो जाएगी. अमेरिकी अधिकारियों की एक टीम ने भी समझौते पर चर्चा के लिए 16 सितंबर को भारत का दौरा किया था और कोशिशों को तेज करने का फैसला किया था.  

खुद को झुकाने को तैयार पाकिस्तान? शहबाज-मुनीर ने ट्रंप के सामने पेश किया खास तोहफा

वॉशिंगटन  पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रिझाने में जुटा हुआ है। इसके लिए वह हर तरह के जतन कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ट्रंप के लिए खास तोहफा लेकर पहुंचे। जानकारी के मुताबिक दोनों ने रेयर अर्थ मटीरियल लकड़ी के बक्से में रखकर ट्रंप के लिए पेश किया। माना जा रहा है कि उनकी यह कोशिश अमेरिका की नजरों में खास मुकाम हासिल करने के लिए है। बता दें कि ट्रंप इस बेहद अहम मिनरल सप्लाई चेन पर चीन के प्रभुत्व को खत्म करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस ने एक तस्वीर जारी की है। इसमें पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर एक खास लकड़ी का बॉक्स पकड़े नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बॉक्स में रेयर अर्थ मटीरियल भी रखा हुआ है। वहीं, बगल में खड़े पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। यह फोटो अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बंद दरवाजों के पीछे हुई मीटिंग के बाद आई है। इससे करीब हफ्ते भर पहले अमेरिका की मेटल कंपनी और पाकिस्तान के बीच 500 मिलियन डॉलर की डील हुई है। वहीं, इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान की एक आर्मी इंजीनियरिंग संस्था ने मिसौरी-स्थित यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स ने देश में एक पॉली-मेटैलिक रिफाइनरी स्थापित करने के लिए के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अगस्त में, इस्लामाबाद ने अमेरिका के सामने मुनीर ने खजाना पेश किया और समझौते पर पहुंचे। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह उसके खनिज और तेल भंडार में अमेरिकी निवेश को आकर्षित करेगा। मुनीर ने पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट जियो ग्रुप के वरिष्ठ संपादक सुहैल वारैच को बताया कि पाकिस्तान के पास दुर्लभ पृथ्वी का खजाना है। इस खजाने से पाकिस्तान का कर्ज भी कम होगा और पाकिस्तान जल्द ही सबसे समृद्ध हो जाएगा।

ट्रंप का नया कदम: 1 अक्टूबर से दवाओं पर 100% और ट्रकों पर 50% तक टैक्स लागू

नई  दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।  

TikTok की चीन से विदाई, ट्रंप की चाल के बाद नया मालिक कौन?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने  एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन्स को बेचने की मंजूरी दी गई है. यानी टिकटॉक का अमेरिकी ऑपरेशन किसी अमेरिकी इन्वेस्टर ग्रुप को बेचने की मंजूरी दे दी गई है.  ये अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद था. अमेरिका ने कई बार टिकटॉक को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ऐसे में अगर टिकटॉक का ऑपरेशन किसी अमेरिकी कंपनी को मिलेगा, तो इससे ऐप को अमेरिका में बैन नहीं किया जाएगा.  कितनी लगाई गई है कीमत? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि टिकटॉक अमेरिका की वैल्यू 14 अरब डॉलर लगाई गई है. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर की वजह से टिकटॉक पर बैन फिलहाल के लिए टल गया है. एक्जीक्यूटिव ऑर्डर डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को कानून को लागू करने से रोकता है, जिसके तहत टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance को देश भर में बैन किया जाना था.  कौन होगा नया मालिक और क्या बदलेगा? डील के तहत TikTok US अब नए बोर्ड ऑफ डायरेक्ट नियुक्त करेगा. साथ ही एल्गोरिद्म रिकमेंडेशन, सोर्स कोड और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को भी नए मालिक को ट्रांसफर किया जाएगा. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद, Oracle अब TikTok US के सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को हैंडल करेगा और क्लाउड सर्विस भी ऑफर करेगी.  इसके अलावा Oracle, Silver Lake और अबू धाबी बेस्ड MGX ग्रुप नई इकाई में 45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी. वेंस ने रॉयटर्स को बताया, 'शुरुआत में चीन की ओर से कुछ प्रतिरोध था, लेकिन हम चाहते थे कि टिकटॉक काम करता रहे. हम ये भी चाहते थे कि अमेरिकी डेटा सुरक्षित रहे.' चीनी राष्ट्रपति से ट्रंप ने की बात ट्रंप ने भी रिपोर्टर्स ने बातचीत ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की और उन्होंने इस पर अपनी सहमति दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, 'मैंने उनसे (शी जिनपिंग) बताया कि हम ये करने जा रहे हैं और उन्होंने कहा आप करिए.' उन्होंने ये भी बताया कि अब TikTok US पूरी तरह से अमेरिका द्वारा ऑपरेट किया जाएगा.  ट्रंप ने ये भी कहा है कि टिकटॉक के नए मालिक इस बात का ख्याल रखेंगे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने में ना हो. हालांकि, इस पूरे मामले पर ByteDance ने कोई जानकारी नहीं दी है. कंपनी ने पहले ऐसा जरूर कहा था कि वे टिकटॉक को अमेरिका में बनाए रखने के लिए पूरी तरह से कानून का पालन करेंगे.