samacharsecretary.com

नोबेल पुरस्कार को लेकर ट्रंप-मोदी के बीच हुई तीखी बातचीत, रिपोर्ट से खुला राज

वॉशिंगटन  अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में खटास आ गई है। टैरिफ तो एक वजह है ही साथ ही, दूसरी वजह ट्रंप का बार-बार भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने का दावा करना भी माना जा रहा। 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन कॉल हुई थी, जिसमें ट्रंप चाहते थे कि मोदी उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करें। इस पर पीएम मोदी भड़क गए थे। दोनों नेताओं के बीच 35 मिनट तक फोन पर बात हुई थी। अमेरिकी अखबार ने खुलासा किया है कि 17 जून को ट्रंप ने मोदी से फोन कॉल पर फिर भारत-पाकिस्तान सीजफायर का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें सैन्य तनाव खत्म करवाने पर कितना गर्व है। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि पाकिस्तान उन्हें (ट्रंप) नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने वाला है। इसका मतलब यह था कि पीएम मोदी भी ट्रंप को नॉमिनेट करें। भारतीय नेता (पीएम मोदी) भड़क गए और दो टूक कहा कि भारत-पाक सीजफायर में ट्रंप का कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत-पाक के बीच ही तय हुआ था। पीएम मोदी की टिप्पणियों को ट्रंप ने नजरअंदाज कर दिया, लेकिन सीजफायर पर असहमति और मोदी द्वारा नोबेल पुरस्कार पर बात करने से इनकार करने की वजह से दोनों नेताओं के बीच संबंध में खटास आ गई। जून में हुई इस फोन कॉल के कुछ समय बाद ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का फैसला किया। उन्होंने हवाला दिया कि भारत रूस से लगातार तेल आयात कर रहा है, जिसकी वजह से अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा। भारत पर अमेरिका द्वारा कुल 50 फीसदी टैरिफ वसूला जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप से परिचित लोगों के अनुसार, अब ट्रंप के शरद ऋतु में भारत आने की कोई योजना नहीं है, जबकि पहले उन्होंने पीएम मोदी को बताया था कि वे इस साल के आखिरी में क्वाड शिखर सम्मेलन में भारत आएंगे। 17 जून को हुई बातचीत के बाद से अब तक दोनों नेताओं में कोई भी वार्ता नहीं हुई है, जिससे दोनों के बीच खराब होते संबंधों का पता चलता है। एनवाईटी ने अमेरिका और भारत में एक दर्जन से भी अधिक लोगों के साथ बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। ज्यादातर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त रखी थी। उल्लेखनीय है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी और उनके बीच काफी अच्छे रिश्ते थे। पीएम मोदी के अमेरिका में भव्य कार्यक्रम हुए थे, जबकि ट्रंप जब 2020 में भारत आए तब गुजरात में नमस्ते ट्रंप आयोजित किया गया था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में अब दोनों नेताओं के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं।  

ट्रम्प के भारी टैरिफ का भारत पर असर, भारत के उद्योगों पर दबाव; पीएम मोदी ने लिया रणनीतिक फैसला

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान कर दिया है। यह वही टैरिफ है जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कर चुके हैं।अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ड्राफ्ट नोटिस जारी कर इसकी रूपरेखा पेश की। यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की कोशिशें ठप पड़ती नजर आ रही हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि यह बढ़ा हुआ टैरिफ भारत के उन उत्पादों पर लागू होगा, जो 27 अगस्त, 2025 को सुबह 12:01 बजे (पूर्वी डेलाइट समय) के बाद खपत के लिए आयात किए जाएंगे या गोदाम से निकाले जाएंगे।ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत के सामान पर टैरिफ को 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा की थी, जो रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया जा रहा है। अमेरिका की यह समयसीमा 27 अगस्त को खत्म हो रही है। पीएम मोदी ने चल दी गजब की चाल,  ट्रंप के टैरिफ की नहीं गलेगी दाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। भारत पर पहले से ही 25% टैरिफ लगाया गया है और 27 अगस्त से अतिरिक्त टैरिफ लागू हो जाएगा। इस तरह भारत से आने वाले सामान पर कुल 50% टैरिफ लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए दूसरे देशों से प्रतिस्पर्द्धा करना मुश्किल होगा। लेकिन ट्रंप के टैरिफ के असर को कम से कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमर कस ली है। मोदी ने 15 अगस्त को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है। जीएसटी में अभी चार स्लैब हैं जिनमें से दो स्लैब खत्म करने का प्लान है। इससे खासकर खाने-पीने की चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी और ग्राहकों को फायदा होगा। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से कई सरकारी अधिकारी भी हैरान थे। पिछले एक साल से सरकारी अफसर जीएसटी में बदलाव करने की बात कर रहे थे। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ था। पुतिन पर दवाब बनाने के लिए ट्रंप का प्लान अमेरिका का मकसद इस टैरिफ के जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना है, ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ चल रही जंग को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर आएं। अमेरिका रूस के तेल व्यापार को रोकने की कोशिश में है और भारत पर यह टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन भारत ने इन तथाकथित सेकेंडरी टैरिफ को अन्यायपूर्ण ठहराया है और अपने हितों की मजबूती से हिफाजत करने का ऐलान किया है। भारतीय सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत के ऊर्जा विकल्पों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन और यूरोपीय देशों जैसे बड़े आयातकों पर ऐसी कोई आलोचना नहीं की गई। जयशंकर ने इसे "तेल विवाद" के रूप में गलत तरीके से पेश करने की बात कही और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। मांग बढ़ाने की जुगत ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में बातचीत चल रही थी पर घोषणा करने में कुछ महीने और लगते। लेकिन अमेरिकी टैरिफ के कारण मोदी सरकार जीएसटी में बदलाव जैसी नीतियों को जल्दी से लागू कर रही है। इससे अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और ग्रोथ में तेजी आएगी। कई साल से ट्रेडर्स और अर्थशास्त्री कह रहे थे कि कुछ सुधारों की वजह से निवेश रुका हुआ है। मोदी ने नीतियों में बदलाव करने के लिए दो बड़ी कमेटियां बनाई हैं। एक कमेटी की अगुवाई कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं। यह कमेटी राज्यों में नियमों को आसान बनाने पर ध्यान देगी। दूसरी कमेटी के प्रमुख राजीव गाबा हैं जो नीति आयोग के सदस्य हैं। यह कमेटी अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए सुझाव देगी। हाल ही में मोदी ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक की। इसमें अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सुझाव लिए गए। बैठक में कई अर्थशास्त्रियों ने कहा कि मार्च 2026 तक 6.5% विकास दर हासिल की जा सकती है। कम महंगाई और ब्याज दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए नीति में बदलाव जरूरी हैं। अमेरिका को एक्सपोर्ट भारत की इकॉनमी अभी स्थिर है। इसलिए, सरकार के पास मुश्किल सुधार करने का मौका है। महंगाई 8 साल के सबसे निचले स्तर पर है। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 18 साल में पहली बार भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई है। मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि अर्थव्यवस्था के सभी आंकड़े अच्छे हैं। इससे सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, ताकि हम विकास की अगली सीढ़ी पर चढ़ सकें। नोमुरा होल्डिंग्स लिमिटेड की सोनल वर्मा ने कई सुधारों की बात की। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना, श्रम और भूमि कानूनों में ढील देना जरूरी है। सरकार निर्यातकों को आर्थिक मदद देने पर भी विचार कर रही है। इससे उन्हें टैक्स से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। कपड़ा, गहने और जूते जैसे उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। भारत की इकॉनमी ज्यादातर घरेलू मांग पर चलती है, न कि निर्यात पर। इसलिए लोगों और व्यापारियों का भरोसा बढ़ाना जरूरी है, ताकि विकास तेजी से हो। निजी खपत भारत की जीडीपी का लगभग 60% है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। साल 2024 में भारत से अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान भेजा गया था जो भारत की कुल जीडीपी का सिर्फ 2% है। कितनी बढ़ेगी इकॉनमी सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी में कटौती से लोग ज्यादा खर्च करेंगे। खासकर खाने-पीने और कपड़ों जैसी जरूरी चीजों पर ज्यादा खर्च होगा। अभी इन चीजों पर 12% टैक्स लगता है। माना जा रहा है कि अधिकांश चीजों को 5% वाले स्लैब में लाया जाएगा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक … Read more

ट्रंप ने कोरियाई राष्ट्रपति के सामने जताई ताकत, कहा- चीन को बर्बाद करने की क्षमता है

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग बैठे थे. दक्षिण कोरिया और चीन तगड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. इस दरम्यान डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं अगर वे चाहें तो चीन को बर्बाद कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे. ट्रंप ने कहा कि उनके पास ऐसे-ऐसे कार्ड्स जो चीन को तबाह कर सकता है.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि अमेरिका चीन के साथ "बेहतरीन संबंध" बनाए रखेगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वह ऐसे कदम नहीं उठाएंगे जो इस देश को तबाह कर दें. ट्रंप ने कहा, "चीन के साथ हमारे अच्छे संबंध होंगे… उनके पास कुछ कार्ड हैं. हमारे पास तुरुप के कई पत्ते हैं, लेकिन मैं उन कार्डों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता. अगर मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल करता हूं, तो इससे चीन बर्बाद हो जाएगा. मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल नहीं करने वाला." कभी पुचकराना, कभी दुत्कारना ट्रंप की कूटनीति कभी पुचकराने तो कभी दुत्कारने की रही है. समय-समय पर वे इसका इस्तेमाल करते रहते हैं. ट्रंप ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि चीन को अपना मैग्नेट अमेरिका को देना ही पड़ेगा. अगर चीन ऐसा नहीं करता है कि उसे 200 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा.  यहां मैग्नेट का अर्थ 'रेयर अर्थ मैग्नेट' या 'रेयर अर्थ एलिमेंट'से है.  ये मैग्नेट उच्च-तकनीकी और औद्योगिक प्रयोगों में महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर, पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली जैसी रक्षा प्रणालियां शामिल हैं. चीन दुर्लभ 'रेयर अर्थ एलिमेंट' वैश्विक आपूर्ति में अग्रणी है, और दुनिया के लगभग 90% दुर्लभ रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन करता है. गौरतलब है कि जब से अमेरिका चीन पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहा है तब चीन ने भी रेयर अर्थ एलिमेंट के निर्यात को कंट्रोल कर दिया है. चीन ने इसे एक्सपोर्ट कंट्रोल की सूची में डाल दिया है इससे अमेरिका को इसका निर्यात बंद हो गया है और अमेरिका उद्योग प्रभावित हुए है.  उनके पास रेयर अर्थ है, हमारे पास टैरिफ राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर इस महत्वपूर्ण मैटेरियल की सप्लाई के लिए दबाव डालते हए कहा, "लेकिन हमारे पास टैरिफ जैसी बहुत शक्तिशाली चीज है. अगर हम 100% या 200% टैरिफ लगाना चाहें, तो हम चीन के साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे. और अगर ऐसा करना पड़ा तो भी ठीक होगा. लेकिन जहां तक मैग्नेट की बात है हमारे पास उनके लिए बहुत शक्ति है, और उनके पास भी हमारे खिलाफ कुछ शक्ति है." राष्ट्रपति ट्रंप ने मैग्नेट को लेकर आगे का प्लान बताते हुए कहा कि हमारे पास बहुत सारे मैग्नेट होंगे. वास्तव में इतने ज्यादा होंगे कि हमें समझ नहीं आएगा कि उनके साथ क्या करना है. मैग्नेट की कहानी बहुत दिलचस्प है. यह इसलिए हुआ क्योंकि हमारे राष्ट्रपति बिजनेसमैन नहीं थे, इसलिए उन्होंने ऐसा होने दिया, जो नहीं होना चाहिए था.  उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास बहुत बेहतर और बड़े विकल्प हैं. फिर भी मेरा मानना है कि हमारा चीन के साथ अच्छा रिश्ता है. मैंने हाल ही में राष्ट्रपति शी से बात की थी, और इस साल या उसके बाद, हम शायद चीन जाएंगे और वहां कुछ शानदार देखेंगे. यह एक महान देश है." बता दें कि अभी अमेरिका चीन से आने वाले अधिकांश वस्त्रों पर औसतन 145% टैरिफ वसूल रहा है, जबकि चीन अमेरिका से आयात होने वाली अधिकांश वस्तुओं पर 125% टैरिफ लगा रहा है.  अमेरिका ने अपने सुरक्षा, ड्रग तस्करी (फेंटेनल) और तकनीकी हितों के चलते टैरिफ बढ़ाए हैं, जिससे व्यापक तौर पर चीनी सामान पर 145% तक का टैरिफ लागू है. चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 125% तक बढ़ा दिए हैं, खासकर एग्रीकल्चर, ऑटो पार्ट्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाए हैं. 

अमेरिका में वीजा धारकों पर शिकंजा, ट्रंप प्रशासन ने बनाए कड़े नियम

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 5.5 करोड़ (55 मिलियन) वीजा धारकों की संपूर्ण समीक्षा (Review) शुरू की है। इस समीक्षा का उद्देश्य है यह देखना कि किसी ने वीजा की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं किया है और अगर किया है तो उस पर डिपोर्टेशन (देश से निकाला जाना) की कार्रवाई की जा सके। किन-किन पर पड़ेगा असर? इस फैसले का असर अमेरिका में रह रहे सभी वीजा होल्डर्स पर पड़ सकता है, जैसे:     छात्र (Student Visa)     वर्क वीजा वाले कर्मचारी (H1-B, L1 वीजा आदि)     फैमिली वीजा धारक (Spouse/Dependent Visa)     पर्यटक या विज़िटर वीजा पर आए लोग     ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर चुके लोग सरकार की दलील क्या है? एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार:"अगर किसी व्यक्ति के वीजा रिकॉर्ड में ओवरस्टे (यानी तय समय से ज्यादा रुकना), आपराधिक गतिविधि, सुरक्षा के लिए खतरा, या आतंकवाद से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी मिलती है, तो उसका वीजा कभी भी रद्द किया जा सकता है।" यानी कि अगर कोई वीजा धारक नियमों के उल्लंघन में पकड़ा जाता है तो बिना किसी पूर्व चेतावनी के उनका वीजा सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। कौन कर रहा है यह जांच? यह जांच अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से की जा रही है। सभी वीजा धारकों की पृष्ठभूमि (Background) की जांच की जा रही है। इसमें पुलिस रिकॉर्ड, इमिग्रेशन हिस्ट्री, और कोर्ट केस तक की जानकारी शामिल होगी। क्यों हो रही है चिंता? इमिग्रेंट एडवोकेसी ग्रुप्स (प्रवासी अधिकार संगठनों) ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक:     यह प्रक्रिया अत्यधिक कठोर और भेदभावपूर्ण हो सकती है।     बिना स्पष्ट वजह के भी कई लोगों का वीजा रद्द किया जा सकता है।     ऐसे फैसलों से विदेशी छात्रों और कुशल कामगारों में डर का माहौल बन सकता है। पहले भी ट्रंप प्रशासन ने किए थे सख्त फैसले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में इमिग्रेशन नीति पहले से ही काफी सख्त रही है। इससे पहले उन्होंने मुस्लिम बैन लगाया था, जिसमें कुछ देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से रोका गया था। H1-B वीजा की प्रक्रिया को कड़ा किया था और डीएसीए (DACA) जैसे कार्यक्रमों को खत्म करने की कोशिश की थी, जिससे लाखों युवा अप्रवासी प्रभावित हुए थे। भारतीयों पर क्या असर? अमेरिका में लाखों भारतीय छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स H1-B, F1 और अन्य वीजा पर रहते हैं। ऐसे में इस फैसले से भारत के हजारों परिवारों और पेशेवरों पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर वे लोग जिनकी वीजा वैधता को लेकर कोई पेचीदगी है — उन्हें डिपोर्टेशन का नोटिस मिल सकता है।

तनाव की नई लहर: ट्रंप-मेदवेदेव की बयानबाजी से न्यूक्लियर युद्ध का खतरा?

वाशिंगटन  अमेरिका और रूस के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  और रूस के पूर्व राष्ट्रपति व वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव के बीच सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाज़ी अब  न्यूक्लियर सबमरीन की तैनाती तक पहुंच गई है। मुद्दा सिर्फ यूक्रेन युद्ध पर बातचीत का नहीं, बल्कि अब यह दोनों नेताओं की व्यक्तिगत रंजिश और सत्ता के प्रभाव क्षेत्र को लेकर सीधा टकराव बनता जा रहा है।   ट्रंप का अल्टीमेटम और मेदवेदेव की नाराज़गी डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को चेतावनी दी थी कि अगर 8 अगस्त तक  यूक्रेन के साथ युद्धविराम नहीं होता है, तो अमेरिका सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप का कहना था कि रूस को अब 50 नहीं, बल्कि सिर्फ 10 से 12 दिन  ही दिए जाएंगे। इस पर  दिमित्री मेदवेदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “ट्रंप रूस के साथ अल्टीमेटम का गेम खेल रहे हैं। उन्हें दो बातें याद रखनी चाहिए- रूस ना तो इज़रायल है और ना ही ईरान। हर नया अल्टीमेटम एक धमकी है और युद्ध की ओर एक और कदम है।” मेदवेदेव ने आगे चेताया कि यह विवाद रूस-यूक्रेन का नहीं बल्कि  अमेरिका और रूस के बीच सीधा टकराव  बनता जा रहा है। उन्होंने ट्रंप को ‘ स्लीपी जो ’ (जो बाइडेन का उपहास वाला नाम) की राह पर न चलने की सलाह दी।   ट्रंप की  न्यूक्लियर चेतावनी ट्रंप ने भी जवाब में कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि  “मेदवेदेव को बता दो, जो रूस का असफल पूर्व राष्ट्रपति है और खुद को अब भी राष्ट्रपति समझता है, कि वह खतरनाक जोन में जा रहा है।”इसके बाद ट्रंप ने 1 अगस्त को ऐलान किया कि उन्होंने  दो परमाणु पनडुब्बियां रणनीतिक स्थानों पर तैनात करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मेदवेदेव के "मूर्खतापूर्ण बयानों" से स्थिति बिगड़ सकती है, और यह शब्दों की लड़ाई से आगे बढ़कर गंभीर परिणाम ला सकती है। मेदवेदेव का तीखा तंज और "डेड हैंड"   मेदवेदेव ने ट्रंप की चेतावनी पर कहा कि अमेरिका की प्रतिक्रिया दिखाती है कि रूस सही रास्ते पर है।  उन्होंने सोवियत युग की "डेड हैंड" प्रणाली का उल्लेख किया  कि एक ऐसी स्वचालित परमाणु हमला प्रणाली जो दुश्मन के पहले हमले के बाद सक्रिय हो जाती है। उन्होंने ट्रंप को तंज कसते हुए "Walking Dead" जैसे ज़ॉम्बी शो देखने की सलाह दी और अमेरिका के "घमंड" को रूस की अनदेखी नीति का जवाब बताया।   कौन हैं मेदवेदेव ? रूस के पूर्व राष्ट्रपति व वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष हैं दिमित्री मेदवेदेव 2008-2012  तक रूस के राष्ट्रपति रहे। पुतिन  ने उन्हें राष्ट्रपति बनाया था और खुद प्रधानमंत्री बने थे। दिमित्री मेदवेदेव अब रूसी सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद से  अमेरिका और नाटो के मुखर आलोचक बन चुके हैं। रूस बनाम अमेरिका: परमाणु शक्ति की होड़ फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुसार: दुनिया में मौजूद करीब  12,241 परमाणु हथियारों में से  83% रूस और अमेरिका के पास हैं। जनवरी 2025 तक दोनों देशों की क्षमता अब भी दुनिया के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा बनी हुई है। ट्रंप और मेदवेदेव के बीच यह टकराव अब केवल राजनीतिक नहीं रहा, यह वैश्विक सुरक्षा, रणनीतिक संतुलन और परमाणु हथियारों के खतरे का मामला बन गया है। सोशल मीडिया की बयानबाज़ी ने दोनों महाशक्तियों को एक बार फिर कोल्ड वॉर के दौर की याद दिला दी है।

भारत ने ट्रंप की टैरिफ धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया, अमेरिका और ईयू के डबल स्टैंडर्ड को उजागर किया

नई दिल्ली पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक कूटनीति और व्यापार के मंच पर एक नया तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल और हथियार खरीदने के लिए 25% टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी की धमकी दी है। उनका दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफे के लिए बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है। लेकिन यह कहानी उतनी सीधी नहीं है, जितनी दिखाई देती है। भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का एक बयान फिर से वायरल हो रहा है जिससे इस कहानी में अमेरिका का पाखंड साफ दिख रहा है। गार्सेटी ने पिछले साल कहा था कि अमेरिका खुद चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे। तो फिर अब यह पलटवार और धमकियां क्यों? क्या यह अमेरिका का पाखंड है या ट्रंप का कूटनीतिक दोगलापन? आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं। अमेरिका का दोहरा चेहरा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने अपने तेल को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है, उसने इस अवसर का लाभ उठाया। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने में भी योगदान दिया। उस समय अमेरिका ने भारत के इस कदम को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे प्रोत्साहित भी किया। भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने स्पष्ट कहा था कि भारत का रूस से तेल खरीदना वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी है। पिछले साल 2024 में 'कॉन्फ्रेंस ऑन डायवर्सिटी इन इंटरनेशनल अफेयर्स' में बोलते हुए गार्सेटी ने कहा, "भारत ने रूसी तेल इसलिए खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूसी तेल को मूल्य सीमा (प्राइस कैप) पर खरीदे। यह कोई उल्लंघन नहीं था, बल्कि यह नीति का हिस्सा था, क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढ़ें, और भारत ने इसे पूरा किया।" लेकिन अब वही अमेरिका भारत पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन के कारण होने वाली मानवीय त्रासदी की कोई परवाह नहीं।" यह बयान न केवल भारत की ऊर्जा नीति को गलत ठहराता है, बल्कि यह भी भूल जाता है कि भारत का यह कदम अमेरिका की सहमति से ही उठाया गया था। भारत की ऊर्जा नीति और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और रूस उसका सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। 2022 के बाद से भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35-40% रूस से आता है। यह सस्ता तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास रूस के अलावा भी तेल आपूर्ति के विकल्प हैं, जैसे सऊदी अरब, इराक, यूएई और ब्राजील। लेकिन रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और महंगाई पर अंकुश लगता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की मजबूरियों पर आधारित है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना अनुचित है, खासकर तब जब ये देश स्वयं रूस से व्यापार कर रहे हैं।" भारत ने आंकड़ों के साथ दिखाया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का व्यापार हुआ, जो भारत-रूस व्यापार से कहीं ज्यादा है। यह सवाल उठता है कि जब यूरोप और अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो भारत को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? ट्रंप का दोगलापन: भारत बनाम चीन ट्रंप की धमकियों में एक और विरोधाभास साफ दिखता है। वह भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ और पेनल्टी की धमकी दे रहे हैं, लेकिन चीन के मामले में उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम है। चीन रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो रूस के कुल तेल निर्यात का 47% खरीदता है। फिर भी, ट्रंप ने चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाई, जितनी भारत के खिलाफ। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका के लिए चीन एक बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है और ट्रंप शायद चीन के साथ व्यापार युद्ध को और तीव्र नहीं करना चाहते। दूसरी ओर, भारत को एक आसान निशाना माना जा रहा है, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंधों में मित्रता का तत्व मजबूत है। अपने मुनाफे के लिए भारत पर निशाना अमेरिका ने यूक्रेन के साथ हाल ही में एक रेयर अर्थ मिनरल्स डील की है, जिसके तहत वह यूक्रेन के विशाल खनिज संसाधनों, जैसे लिथियम, टाइटेनियम और रेयर अर्थ तत्वों, का दोहन करना चाहता है। यह डील अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खनिज हाई-टेक उद्योगों, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते इन संसाधनों का खनन मुश्किल हो रहा है, इसलिए वह युद्ध को जल्द खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस डील के जरिए अमेरिका न केवल अपनी खनिज आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भरता को भी कम करना चाहता है, जो इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, जब अमेरिका रूस को सीधे तौर पर प्रभावित करने में असमर्थ रहा, तो उसने रणनीति बदलकर रूस के करीबी सहयोगियों, जैसे भारत, को निशाना बनाना शुरू किया। टैरिफ का भारत पर असर ट्रंप की धमकी अगर हकीकत बनती है, तो भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत हर साल अमेरिका को 83 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं … Read more

ट्रंप की जुबान फिर फिसली! 27 वर्षीय सेक्रेटरी पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट की तारीफ करते हुए ऐसे शब्द कहे जिन पर अब देश-विदेश में बहस छिड़ गई है। न्यूजमैक्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने लेविट को “अब तक की सबसे बेहतरीन प्रेस सचिव” बताया, लेकिन तारीफ के दौरान उनके शब्दों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। ट्रंप ने कहा, “वो एक स्टार बन चुकी हैं। वो चेहरा, वो दिमाग, वो होंठ… जिस तरह वो हिलते हैं, जैसे मशीन गन हो। वो वाकई एक शानदार इंसान हैं।” कौन हैं कौरोलिन 27 वर्षीय कैरोलिन लेविट ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली प्रेस सचिव हैं और अब तक कुल मिलाकर उनकी पांचवीं प्रेस सचिव हैं। एक दिन पहले वाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में लेविट ने ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की तारीफ करते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि ट्रंप ने पिछले छह महीनों में लगभग “हर महीने एक शांति समझौता या संघर्षविराम” कराया है। लेकिन ट्रंप की व्यक्तिगत शैली में की गई यह प्रशंसा कई लोगों को अजीब और असहज लगी। सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों को “अप्रोफेशनल”, “क्रिंजी” और “परेशान करने वाली” बताया गया। सोशल मीडिया पर कमेंट एक यूज़र ने लिखा, “अगर किसी आम ऑफिस में कोई पुरुष किसी महिला सहयोगी के लिए ऐसी बात कहे, तो उसे फौरन नौकरी से निकाल दिया जाए और कंपनी पर केस कर दिया जाए।” कई यूज़र्स ने मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। कहा, “क्या कोई मेनस्ट्रीम मीडिया इन बेतुकी और अजीब बातों पर ट्रंप या वाइट हाउस से सवाल पूछेगा? शायद नहीं।” इस बयान ने ट्रंप की पहले से ही विवादों में घिरी छवि को और बिगाड़ दिया है, खासकर महिलाओं के साथ उनके बर्ताव को लेकर लोग पहले भी सवाल उठाते रहे हैं।

‘मैंने ही रोका भारत-पाक युद्ध’ — ट्रंप का पुराना दावा फिर सुर्खियों में

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को रोका जा सका था. ट्रंप ने कहा कि भारत की ओर से पहलगाम हमले के जवाब में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दोनों देशों के बीच हालात बेहद गंभीर हो गए थे, लेकिन उनके दखल से टकराव टल गया. क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप? ट्रंप ने बयान दिया, 'हमने कई युद्ध रोके. और ये कोई मामूली युद्ध नहीं थे. भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बहुत गंभीर हो चुके थे. विमान मार गिराए जा रहे थे. मुझे लगता है कि करीब पांच लड़ाकू विमान गिरा दिए गए थे. ये दोनों परमाणु हथियारों से लैस देश हैं और एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे.' उन्होंने आगे कहा कि यह एक 'नई किस्म की जंग' जैसी स्थिति बन गई थी, जैसा कि अमेरिका ने ईरान के साथ किया था. ट्रंप ने दावा किया कि 'हमने ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया.' ट्रेड के जरिए विवाद सुलझाने का दावा भारत और पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि 'हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे, और हमने इसे ट्रेड के जरिए सुलझाया. हमने कहा- अगर तुम लोग हथियारों (और शायद परमाणु हथियारों) का इस्तेमाल करते रहोगे, तो हम कोई व्यापार समझौता नहीं करेंगे.' भारत ने गिराए पाकिस्तान के कई हाई-टेक जेट्स   10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम होने के कुछ दिन बाद, एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा था कि भारत ने कई 'हाई-टेक' पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए, हालांकि उन्होंने संख्या स्पष्ट नहीं की थी. वहीं पाकिस्तान ने भारत के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) का सिर्फ एक विमान थोड़ा क्षतिग्रस्त हुआ है. इसके उलट पाकिस्तान का दावा है कि उसने भारत के छह लड़ाकू विमानों को मार गिराया, जिनमें राफेल भी शामिल हैं. CDS जनरल अनिल चौहान ने क्या कहा? हालांकि, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया है. उन्होंने यह जरूर माना कि संघर्ष के दौरान कुछ लड़ाकू विमान जरूर गिराए गए, लेकिन उनकी संख्या नहीं बताई. जनरल चौहान ने कहा कि ये नुकसान संघर्ष की शुरुआती स्थिति में हुए थे, लेकिन भारतीय सशस्त्र बलों ने बहुत तेजी से अपनी गलतियों को सुधारा और फिर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि विमान गिरा, बल्कि यह है कि वह क्यों गिरा… क्या गलती हुई, यही ज्यादा जरूरी है. संख्या मायने नहीं रखती.'  

अमेरिका में बड़ी चूक, ट्रंप पर हमले के मामले में 6 सीक्रेट सर्विस एजेंट सस्पेंड

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर पिछले साल पेनसिल्वेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान जानलेवा हमला हुआ था। इस मामले में सीक्रेट सर्विस के छह एजेंटों को निलंबित कर दिया गया है। इन एजेंटों पर सुरक्षा में गंभीर चूक का आरोप है। सीक्रेट सर्विस के डिप्टी डायरेक्टर मैट क्विन ने सीबीएस न्यूज को बताया कि निलंबन की अवधि 10 से 42 दिनों के बीच है और इस दौरान उन्हें वेतन नहीं मिलेगा। हालांकि एजेंटों को बर्खास्त नहीं किया गया है, लेकिन निलंबन के बाद उनकी जिम्मेदारियां घटा दी जाएंगी और उन्हें कम संवेदनशील भूमिकाओं में तैनात किया जाएगा। क्विन ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, “हम इसे बर्खास्तगी के जरिए हल नहीं करने जा रहे है। हम जड़ तक पहुंचकर उन खामियों को दूर करेंगे, जिनकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई थी।” आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व 2024 में पेंसिल्वेनिया में आयोजित एक चुनावी रैली में ट्रंप पर गोलियां चलाई गई थीं, जिसमें वे घायल हो गए थे। इस घटना ने अमेरिका की राजनीतिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि हमलावर काफी देर तक आसपास मौजूद था, लेकिन सीक्रेट सर्विस उसे समय रहते पहचान नहीं सकी। हमले के बाद से सीक्रेट सर्विस की भूमिका और सुरक्षा तंत्र की समीक्षा हो रही थी। कई सांसदों और विशेषज्ञों ने सुरक्षा में अभूतपूर्व चूक करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर क्विन का कहना है कि सुधार की प्रक्रिया सिर्फ सजा देने से नहीं, बल्कि प्रणाली को बेहतर बनाने से होती है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 देशों पर लगाया टैरिफ, भारत को लेकर क्या बोले ? पास में बैठे थे नेतन्याहू

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को 14 देशों पर टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने इस संबंध इन सभी देशों को लेटर भी भेजा है जिसमें अमेरिकी सरकार के टैरिफ वाले फैसले के बारे में अवगत कराया गया है। अमेरिका ने एशिया में अपने दो महत्वपूर्ण सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया से आयातित वस्तुओं पर भी 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया। हालांकि भारत पर अभी नए टैरिफ को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत के साथ डील जल्द हो सकती है। भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मेजबानी के दौरान बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक व्यापारिक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप ने 14 देशों को नई टैरिफ दरों से संबंधित पत्र भेजे हैं, जो 1 अगस्त 2025 से लागू होंगी। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमने यूनाइटेड किंगडम और चीन के साथ समझौते किए हैं। हम भारत के साथ भी डील करने के बहुत करीब हैं।" उन्होंने आगे बताया कि जिन देशों के साथ समझौता संभव नहीं लग रहा, उन्हें पत्र भेजकर टैरिफ दरों की जानकारी दी जा रही है। ट्रंप ने कहा, "हमने अन्य देशों से मुलाकात की और हमें नहीं लगता कि हम कोई सौदा कर पाएंगे, इसलिए हम उन्हें एक पत्र भेज रहे हैं। हम विभिन्न देशों को पत्र भेज रहे हैं, जिसमें उन्हें बताया जा रहा है कि उन्हें कितना टैरिफ देना होगा।" ट्रंप ने जोर देकर कहा, "हम निष्पक्षता के साथ काम कर रहे हैं। कुछ देशों को थोड़ी छूट मिल सकती है, अगर उनके पास कोई उचित कारण होगा।" ट्रंप ने सुझाव दिया कि प्रमुख साझेदारों के साथ प्रगति हुई है, लेकिन जो देश अमेरिकी शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें नए टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। 14 देशों को टैरिफ पत्र, 25% से 40% तक की दरें ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर 14 देशों को भेजे गए पत्रों के स्क्रीनशॉट साझा किए। इन देशों में जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, थाइलैंड, म्यांमार, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, कजाकिस्तान, लाओस, दक्षिण अफ्रीका, ट्यूनीशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, और सर्बिया शामिल हैं। इन पत्रों में टैरिफ दरें 25% से लेकर 40% तक निर्धारित की गई हैं। उदाहरण के लिए, जापान और दक्षिण कोरिया पर 25%, म्यांमार और लाओस पर 40%, और बांग्लादेश व सर्बिया पर 35% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने इन पत्रों में चेतावनी भी दी कि अगर ये देश अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हैं, तो अमेरिका भी बदले में टैरिफ बढ़ा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर ये देश अपनी व्यापार नीतियों में बदलाव करते हैं, तो टैरिफ दरों में कमी की जा सकती है। 1 अगस्त तक टैरिफ की No Tension… अमेरिका ने सभी देशों को दी राहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर दुनियाभर के देशों को राहत दी है. ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ बढ़ाने की आखिरी तारीख बढ़ा दी है. ट्रंप ने टैरिफ की आखिरी तारीख नौ जुलाई से बढ़ाकर एक अगस्त कर दी है. इसके साथ ही ट्रंप ने ये भी कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील जल्द ही हो सकती है.  व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ पर छूट की अंतिम तारीख नौ जुलाई से बढ़ाकर एक अगस्त करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे. बता दें कि ट्रंप ने दो अप्रैल को भारत सहित कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था लेकिन बाद में विरोध बढ़ने पर इसमें 90 दिनों की छूट दी थी. इस तरह टैरिफ पर यह छूट नौ जुलाई थी.  वहीं, अमेरिका ने बांग्लादेश और जापान समेत 14 देशों पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान भी किया है. ट्रंप सरकार के इस फैसले के तहत कुछ देशों पर 25 फीसदी टैक्स लगाया गया है, जबकि कुछ पर 30 से 40 फीसदी तक का भारी शुल्क लगाया गया है. ट्रंप सरकार ने म्यांमार और लाओस पर सबसे अधिक 40 फीसदी टैरिफ लगाया है. थाईलैंड और कंबोडिया पर 36 फीसदी टैरिफ, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35 फीसदी टैरिफ, इंडोनेशिया को 32 फीलदी टैरिफ लगाया गया है. साउथ अफ्रीका और बोस्निया एंड हर्जेगोविना पर 30 फीसदी टैरिफ लगाया है. वहीं, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिसाय, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया पर 25 फीसदी टैक्स लगाया गया है. इसके साथ ही अमेरिका ने अभी तक ब्रिटेन और वियतनाम के साथ ही डील की है.  भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में प्रगति भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर पिछले कुछ महीनों से गहन वार्ता चल रही है। पिछले महीने भारतीय अधिकारी वाशिंगटन में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा में जुटे थे। ट्रंप ने अप्रैल में भारतीय सामानों पर 26% का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10% कर दिया गया और 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया, जो 9 जुलाई को समाप्त हो रहा है। भारत के लगभग 53 बिलियन डॉलर के निर्यात क्षेत्र को नुकसान से बचाने के लिए दोनों देशों के बीच तीव्र गति से बातचीत चल रही है। ट्रंप ने पहले ही वियतनाम और चीन के साथ समझौते किए हैं, जबकि यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ भी बातचीत चल रही है। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप स्वयं टैरिफ दरें निर्धारित कर रहे हैं और प्रत्येक देश के लिए "विशेष रूप से तैयार किए गए व्यापार प्लान" बना रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि जिन देशों का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा है, उनके लिए टैरिफ जरूरी हैं। उन्होंने दावा किया, "हमारा देश पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हमारे पास पहले कभी इतना निवेश नहीं था।" नेतन्याहू के साथ मुलाकात के दौरान बयान ट्रंप का यह बयान उस समय आया जब वह वाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ निजी रात्रिभोज के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने वैश्विक व्यापार और अपनी … Read more