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भारत से तनाव पाकिस्तान पर पड़ा भारी, शहबाज सरकार को 40 अरब डॉलर की चपत

लाहौर  आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान (Pakistan Crisis) को भारत से पंगा लेना हमेशा ही भारी पड़ता है, फिर बात चाहे जंग के मैदान की हो या फिर बिजनेस की. इसका ताजा उदाहरण ये है कि भारत के साथ ट्रेड रुकने से पाकिस्तान को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है, जो 40 अरब डॉलर (11 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये) का है. अब पाकिस्तानी इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने भारत के साथ व्यापार फिर से शुरू करने की गुहार लगाई है।    PAK का अब आई भारत की याद रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की बिजनेस कम्युनिटी ने देश में बढ़ते आर्थिक नुकसान, ज्यादा इम्पोर्ट कॉस्ट और घरेलू इंडस्ट्रीज पर दबाव का हवाला देते हुए भारत के साथ ट्रेड रिलेशन फिर से शुरू करने की डिमांड शहबाज शरीफ सरकार से की है।  PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा है कि लंबे समय से चल रही व्यापार रुकावट की वजह से पाकिस्तानी बिजनेस को जरूरी कच्चा माल और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट दूर के देशों से खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे माल ढुलाई का खर्च और डिलीवरी का समय काफी बढ़ गया है और लगातार घाटा हो रहा।  पुलवामा अटैक के बाद से इतना नुकसान  पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के मुताबिक, साल 2019 में बाइलेटरल ट्रेड रुकने के बाद से ही पाकिस्तान को लगातार नुकसान हो रहा है. एक बिजनेस एडवोकेसी ग्रुप के मुताबिक, 2019 में भारत के साथ ट्रेड रुकने के बाद से पाकिस्तान को लगभग अब तक 40 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।   यह सस्पेंशन  पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) और उसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद किया गया था. पाक इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि कमर्शियल रिश्ते फिर से शुरू करने से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, खेती और पेट्रोलियम में इंपोर्ट कॉस्ट कम हो सकती है।  भारत के साथ व्यापार से सिर्फ फार्मा इंडस्ट्री हर साल $3 अरब बचा सकती है. कसूरी के मुताबिक, अगर भारत से जरूरी कच्चे माल का आयात फिर से शुरू होता है, तो फिर बड़ा फायदा हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय कच्चे माल तक पहुंच बहाल करने से पाकिस्तानी दवा कंपनियों को प्रोडक्शन खर्च कम करने और सप्लाई-चेन की क्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।  कपड़ा मिलों पर $5 अरब का एक्स्ट्रा बोझ पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भी भारत से पंगा लेने का खामियाजा उठाना पड़ा है. इस ट्रेड रुकावट का नुकसान खासकर घरेलू कॉटन प्रोडक्शन में गिरावट से आयात पर डिपेंडेंसी बढ़ गई है. कसूरी ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कपास मंगाने के बाद टेक्सटाइल बनाने वालों को लगभग 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है।  खाद, स्टील और पेट्रोल-डीजल आयात पर असर  फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अलावा, भारत की अच्छी-खासी प्रोडक्शन कैपेसिटी के बावजूद पाकिस्तान कई जरूरी चीजें दूर के बाजारों से इंपोर्ट कर रहा है. इनमें चीनी, फर्टिलाइजर, सीमेंट, पेट्रोलियम प्रोडक्ट, लोहा और स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी शामिल हैं।  नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा कि जियोग्राफिकल नजदीकी भारत को ज्यादा सस्ता सप्लायर बनाती है, खासकर उन प्रोडक्ट्स के लिए जिनमें ट्रांसपोर्टेशन का खर्च ज्यादा होता है. उदाहरण के लिए, भारतीय तेल रिफाइनरियां कई मौजूदा इंटरनेशनल सप्लायर्स की तुलना में पाकिस्तान के ज्यादा पास हैं, जिससे पेट्रोलियम की डिलीवरी तेज और सस्ती हो सकती है।  उन्होंने कहा है कि भारतीय खेती और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स तक पहुंच से पाकिस्तानी मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनपुट कॉस्ट कम हो सकती है. इन सब चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान बिजनेस काउंसिल ने भारत के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग की मांग की है। 

Pakistan News: बलोचिस्तान में फ्रंटियर कोर कैंप पर अटैक, BLF ने ली जिम्मेदारी; कई जवानों के घायल होने का दावा

बलोचिस्तान पाकिस्तान के बलोचिस्तान में सैन्य कैंप पर हमले को लेकर बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने बड़ा दावा किया है. संगठन के मुताबिक, उसकी लड़ाकू यूनिटों ने 1 अक्टूबर 2026 को वाशुक जिले के मश्केल इलाके में गोरिंदर स्थित फ्रंटियर कोर (FC) के कैंप को निशाना बनाया. BLF ने दावा किया कि इस हमले में पाकिस्तान के 18 सुरक्षाकर्मी मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हो गए. हालांकि, इन हताहतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।  BLF के मुताबिक, हमले में उसकी नई महिला यूनिट करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन (KAAD) और वैनगार्ड क़ुरबान यूनिट ने मिलकर कार्रवाई की. संगठन का दावा है कि लड़ाकों ने कैंप को चारों तरफ से घेर लिया और रॉकेट, ग्रेनेड लॉन्चर तथा दूसरे भारी हथियारों से हमला किया।  संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच के मुताबिक, इस हमले में फ्रंटियर कोर के 18 जवान मारे गए और कई घायल हुए. BLF ने इसे अपनी संयुक्त कार्रवाई बताया है।  फ्रंटियर कोर के कैंप को बनाया निशाना हमले का निशाना फ्रंटियर कोर की 58 विंग का कैंप बताया गया है, जो बलोचिस्तान के वाशुक जिले के मश्केल इलाके में स्थित है. BLF ने हमले से जुड़ी जानकारी जारी करते हुए हताहतों का दावा किया है. हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इस दावे की पुष्टि से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं है।  बलोचिस्तान में BLF पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाने वाले संगठनों में शामिल है. इस घटना में भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है, लेकिन जवानों की मौत और घायलों की संख्या को लेकर उसके दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। 

पाकिस्तान में महंगा हुआ ईंधन! LPG के दाम 7000 रुपये तक पहुंचने का दावा

इस्लामाबाद  अमेरिका के दबाव और सीमा पर बढ़ती परेशानियों के बीच पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों में नई मुश्किलें सामने आ रही हैं. कुछ महीने पहले तो हालात ये थे कि पाकिस्तान ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने में आगे-आगे घूम रहा था लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं. खासतौर पर जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच अलग ही मोर्चा खुल गया, तो  पाकिस्तान को समझ ही नहीं आने लगा कि वो किस तरफ जाए।  इसी बीच सऊदी अरब से दोस्ती निभाने के चक्कर में पाकिस्तान ने अपने ईरान बॉर्डर को बंद कर दिया और व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ. पहले तो ईरान ने इसे बातचीत से सुलझाने की बात कही लेकिन अब उसने ईरान से आने वाली रसोई गैस (LPG) की सप्लाई रोक दी है. ऐसे में पाकिस्तान की अवाम की रसोई में महंगाई की आग लग गई है. पहले से ही महंगे गैस सिलेंडर अब और भी ज्यादा महंगे हो गए हैं।  पाकिस्तान में 7000 रुपये में एक सिलेंडर  ईरान की ओर से एलपीजी रुकने से पाकिस्तान में संकट गहराने लगा है. महज कुछ दिनों में 12 किलो के LPG सिलेंडर की कीमत 4500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर करीब 7000 रुपये पहुंच गई है. कारोबारियों को आशंका है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं. दरअसल पाकिस्तान के लिए ईरान से LPG की आपूर्ति बेहद अहम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान हर दिन ईरान से करीब 7,000 टन LPG आयात करता है. सीमा बंद होने से गैस से भरे सैकड़ों ट्रक फंस गए हैं और बाजार में कमी का दबाव बढ़ रहा है।  17 अक्टूबर को बंद हुए बॉर्डर के रास्ते      पाकिस्तान ने 17 अक्टूबर को ईरान के साथ गबद-रिमदान और तफ्तान सीमा मार्गों से व्यापार रोक दिया था. पाकिस्तान के अधिकारियों ने इसके पीछे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, तस्करी रोकने और सीमा प्रबंधन सुधारने की वजह बताई।      वहीं ईरान ने सीमा पर तकनीकी समस्याओं और एहतियाती कदमों का हवाला दिया. ऐसे में सीमा बंद करने के कारणों को लेकर दोनों देशों के बयानों में अंतर दिखाई देता है. सीमा बंद होने का असर सिर्फ गैस तक सीमित नहीं है।      रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के आलू, केले और चावल से भरे एक हजार से ज्यादा कंटेनर भी फंस गए थे. सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हुई. गबद-रिमदान मार्ग पर पाकिस्तानी खराब होने वाले सामान के निर्यात को दोबारा अनुमति मिली, लेकिन LPG का आयात बाधित रहा।  क्या अमेरिका के दबाव में उठाया गया कदम? इस पूरे मामले में अमेरिका की भूमिका भी चर्चा में है. वॉशिंगटन लंबे समय से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है. पाकिस्तान के सामने मुश्किल यह है कि उसे अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंध भी बनाए रखने हैं और ईरान से होने वाले व्यापार को भी बचाना है. 23 अक्टूबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश लागू अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करता है. हालांकि इस्लामाबाद ने यह स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं किया कि सीमा बंद करने का फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया था। 

पाकिस्तान में गैस की किल्लत से बढ़ेगा प्रदूषण? कोयले और तेल के इस्तेमाल ने बढ़ाई चिंता

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में वायु प्रदूषण की समस्या और गंभीर होने का खतरा है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से पाकिस्तान में बिजली बनाने के लिए कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ रहा है. हवा में प्रदूषण बढ़ सकता है. लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और मुरी जैसे शहर पहले से ही खराब हवा की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में सर्दियों से पहले ही पंजाब में स्मॉग का खतरा बढ़ने की चिंता है।  पाकिस्तान में LNG की कमी का असर घरों और कारखानों को मिलने वाली गैस पर भी पड़ रहा है. कराची यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. शाइस्ता तबस्सुम के मुताबिक, युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार में रुकावटें आई हैं. कतर से गैस की सप्लाई भी काफी कम हुई है. गैस की कमी और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के बीच पाकिस्तान को बिजली बनाने के लिए दूसरे ईंधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।  कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ने से बढ़ेगा प्रदूषण पाकिस्तान में LNG की कमी के कारण बिजली बनाने के लिए दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. कोयले और तेल को जलाने से हवा में धुआं और प्रदूषण फैलाने वाले छोटे कण निकलते हैं. ये कण हवा की क्वालिटी खराब करते हैं और लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर इन ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो पहले से प्रदूषित शहरों में स्थिति और खराब हो सकती है।  अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में आई इस रुकावट का असर पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है. अप्रैल 2026 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, LNG की कमी के कारण पाकिस्तान ने फर्नेस ऑयल से बिजली बनाने का इस्तेमाल बढ़ाया था. देश में बिजली की मांग पूरी करने के लिए दूसरे ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।  पाकिस्तान में स्मॉग की दूसरी वजहें भी पाकिस्तान में स्मॉग की समस्या सिर्फ गैस की कमी या बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन तक सीमित नहीं है. लाहौर और पंजाब के दूसरे शहरों में गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, कारखानों का प्रदूषण, ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं और सड़कों की धूल भी हवा को खराब करते हैं।  इसके अलावा, फसल कटने के बाद खेतों में बचे हिस्सों को जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है. सर्दियों में मौसम की कुछ स्थितियों के कारण प्रदूषण हवा में ज्यादा देर तक बना रह सकता है. ऐसे में अलग-अलग स्रोतों से निकलने वाला धुआं मिलकर स्मॉग की समस्या को गंभीर बना सकता है।  इलेक्ट्रिक गाड़ियों से कैसे मिलेगी मदद? पाकिस्तान सरकार ने 2030 तक 50 फीसदी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों से पेट्रोल और डीजल जलने के कारण सड़कों पर होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है. लेकिन इसके लिए चार्जिंग की अच्छी व्यवस्था और पर्याप्त बिजली भी जरूरी है।  अगर बिजली बनाने के लिए कोयले और तेल का इस्तेमाल ज्यादा होता है, तो प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. इसलिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के साथ बिजली बनाने के साफ तरीकों को अपनाना और कारखानों से होने वाले प्रदूषण को कम करना भी जरूरी है।  डॉ. शाइस्ता तबस्सुम ने LNG की सप्लाई बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को इसके आयात के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया है. इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने और अंडरग्राउंड मेट्रो जैसी सुविधाओं पर काम करने की जरूरत बताई है।  सार्वजनिक परिवहन बेहतर होने से लोग निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम कर सकते हैं. इससे सड़कों पर गाड़ियों की संख्या और उनसे निकलने वाले धुएं को कम करने में मदद मिलेगी. वहीं, ईंट भट्टों, कारखानों और खेतों में फसल के बचे हिस्सों को जलाने से होने वाले प्रदूषण पर भी रोक लगानी होगी।  पाकिस्तान के सामने गैस की सप्लाई बनाए रखने और वायु प्रदूषण को कम करने, दोनों की चुनौती है. अगर LNG की कमी के कारण कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ता है, तो स्मॉग की समस्या और गंभीर हो सकती है. ऐसे में ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के साथ हवा को साफ रखने के लिए भी कदम उठाने होंगे। 

Pakistan Diplomacy: सऊदी के समर्थन और ईरान से रिश्तों के बीच फंसा पाकिस्तान, हूतियों के दावे और तीखी बयानबाजी चर्चा में

इस्लामाबाद पाकिस्तान अपनी जिस कूटनीति के गीत पूरी दुनिया में गा रहा था, वो पूरी तरह से फेल होती दिख रही है. मध्य पूर्व के मसलों में दलाल बनकर हर तरफ से मलाई खाने का उसका प्लान बर्बाद हो चुका है क्योंकि न तो ईरान उसकी मंशा पर भरोसा कर रहा है, न ही सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर बना उसका इस्लामिक नाटो उसके किसी काम का रह गया है. वहां पाकिस्तान के अंदर विरोध ने शहबाज-मुनीर के होश उड़ा रखे हैं, यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी इज्जत का फालूदा बन चुका है।  दरअसल सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान ने जो मक्का पैक्ट किया था और दुनियाभर में इस रक्षा गठबंधन का ढिंढोरा पीटा था, वो सबसे ज्यादा नुकसान उसी का कर रहा है. हूतियों की वॉर्निंग के बाद भी डिफेंस पैक्ट में बंधे पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन में जैसे ही अपनी सेना उतारी, उसके भाड़े के सैनिकों को हूती विद्रोहियों ने धर लिया. हूती प्रवक्ता जनरल याह्या सरी ने कहा है कि बाब अल-मंदेब की लड़ाई में हूतियों ने सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के 85 सैनिकों को पकड़ लिया है. इनमें 47 पाकिस्तानी सैनिक शामिल हैं।  ईरान के सांसद ने क्यों पाकिस्तान को लताड़ा? ईरानी सांसद मोहसेन जंगनेह ने पाकिस्तान की शांति की कोशिशों का मजाक उड़ाते हुए उनके निष्पक्ष होने पर सवाल उठाया. पाकिस्तान के सऊदी की जंग में उतरने के बाद ईरान की ओर से ऐसा बयान आया है. जंगनेह ने साफ तौर पर कहा कि विदेश नीति पर साफ तौर से अमेरिका का असर रहता है. ईरानी सांसद ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी जिक्र करते हुए भरपूर मखौल उड़ाया. उन्होंने लिखा-  उनके ट्वीट भी अमेरिकियों की ओर से लिखे जाते हैं. जंगनेह के निशाने पर वो ट्वीट था, जिसमें आखिर में एक ऐसी लाइन लिखी हुई थी, जिसे देखकर यह साफ समझ आ रहा था कि शहबाज शरीफ किया गया ट्वीट कहीं और से फॉरवर्ड हुआ है।  क्यों फंस गया है पाकिस्तान? पाकिस्तान को लेकर बात करें तो ये देश ईरान-अमेरिका के युद्ध की शुरुआत से ही पंचायत सुलझाने की भूमिका में आ गया था. उसने कुछ महीनों बाद इस्लामाबाद में दलाली का पूरा इंतजाम किया और दोनों पक्षों को बुला भी लिया लेकिन बात बनने के बजाय और बिगड़ गई. ईरान का भरोसा यहीं से पाकिस्तान पर से उठने लगा था और अब हूतियों के खिलाफ सेना उतारने के बाद परिस्थितियां पाकिस्तान के और खिलाफ हो चुकी हैं. ऐसे में पाकिस्तान पूरी तरह से फंसा हुआ है. एक तरफ सऊदी-तुर्की के साथ उसका डिफेंस पैक्ट है और ये दोनों देश अमेरिका की फ्रेंड लिस्ट में हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान है- जो उसका पड़ोसी है और उससे रिश्ते बिगाड़ना उसे कभी भी फायदा नहीं देगा। 

खैबर पख्तूनख्वा में मंत्री फजल शकूर खान का कथित अपहरण, टायरों पर बरसाईं गोलियां

खैबर पख्तूनख्वा  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में दिनदहाड़े एक मंत्री के अपहरण से हड़कंप मच गया. पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग मंत्री फजल शकूर खान को सोमवार दोपहर हथियारबंद नकाबपोशों ने कथित तौर पर अगवा कर लिया. बताया जा रहा है कि हमलावरों ने मोटरवे पर उनकी गाड़ी को रोका और पहले उसके टायरों पर गोली चलाई. इसके बाद बंदूकधारी मंत्री को अपने साथ लेकर चले गए।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों के पास हथियार थे और उन्होंने नकाब पहन रखा था. सोशल मीडिया पर सामने आए कथित वीडियो में कुछ नकाबपोश लोग मुख्य सड़क पर रास्ता रोकते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि मंत्री की गाड़ी को रोकने के लिए सीधे टायरों पर गोलियां चलाई गईं. अभी तक यह साफ नहीं है कि फजल शकूर खान को किस संगठन या ग्रुप के लोगों ने अगवा किया और इसके पीछे उनकी क्या मांग या वजह है।  PTI नेता ने भी लगाया अपहरण की कोशिश का आरोप मंत्री फजल शकूर खान के अपहरण के अलावा पीटीआई के नेता और प्रांतीय विधायक शकील अहमद को भी अगवा करने की कोशिश की खबर सामने आई है. बताया गया कि मलाकंद में शकील अहमद को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद पीटीआई कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया।  मलाकंद में बड़ी संख्या में पीटीआई कार्यकर्ताओं ने बट खैला बाईपास को जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और नारेबाजी की. पीटीआई ने आरोप लगाया कि खैबर पख्तूनख्वा में उसके प्रांतीय नेतृत्व को निशाना बनाया जा रहा है और नेताओं को बंदूक की नोक पर अगवा करने की कोशिश की जा रही है।  पीटीआई ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप खैबर पख्तूनख्वा के सूचना मंत्री शफी जान ने इन घटनाओं को संविधान, कानून और जनता के जनादेश पर सीधा हमला बताया. पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री और पार्टी नेताओं को निशाना बनाए जाने पर जवाबदेही की मांग की है।  पार्टी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उसके मंत्रियों और नेताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रुकी, तो पूरे प्रांत में विरोध प्रदर्शन और तेज किए जाएंगे. फिलहाल फजल शकूर खान के अपहरण के पीछे किसका हाथ है और उनका क्या हुआ, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति साफ नहीं हुई है। 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद 16 महीने से रनवे की मरम्मत में जुटा पाकिस्तान, अब तक अधूरा काम

लाहौर  पहलगाम हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को ऐसा चोट दिया जिससे अब तक वह उबर नहीं सका है। भारतीय वायुसेना (IAF) के जांबाजों ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के सरगोधा स्थित मुसहफ एयरबेस के रनवे तो तबाह कर दिया है। इस हमले के 16 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो सका है। इसका खुलासा हाई रिजॉल्यूशन वाली सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है। तस्वीरों से पता चलता है कि रनवे और टैक्सी-ट्रैक के इंटरसेक्शन पर नए सिरे से रीसरफेसिंग और खुदाई का काम किया जा रहा है। आपको बता दें कि सरगोधा का मुसहफ एयरबेस लाहौर से लगभग 172 किमी उत्तर-पश्चिम और अमृतसर के पास भारत-पाक सीमा से करीब 200 किमी पश्चिम में स्थित है। भारत ने पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस पर सीधा हमला किया था। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर 2026 की वेंटोर सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे के जंक्शन पर गहरे रंग का एक असामान्य हिस्सा देखा गया है। यह डामर से बिल्कुल अलग दिखता है। यह नई खुदाई या रीसरफेसिंग कार्य की ओर इशारा करता है। एयरबेस के उत्तर दिशा में स्थित मिसाइल हमले के पुराने गड्ढे को फिर से सबग्रेड स्तर तक खोदा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले की गई अस्थायी मरम्मत में सतह के असमान होने, धंसने या कमजोरी जैसी समस्याएं आ गई होंगी। इसके जिसके कारण अब वहां नए सिरे से निर्माण करना पड़ रहा है। तस्वीरों में रनवे की पूरी लंबाई में चरणबद्ध तरीके से काम होता दिख रहा है। एक हिस्सा नया और समतल नजर आ रहा है, जबकि दूसरा हिस्सा अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। सटीक हमले का असर 10 मई 2025 की उपग्रह तस्वीरों से खुलासा हुआ था कि भारतीय वायुसेना ने मुसहफ एयरबेस के मुख्य 3200 मीटर लंबे रनवे पर दो बेहद सटीक निशाने लगाए थे। इस हमले में 8-9 मीटर चौड़ा और 4-5 मीटर गहरा विशाल गड्ढा बन गया था। दूसरा हमला इससे 660 मीटर की दूरी पर किया गया था। आपको बता दें कि 10 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के दस एयरबेस, रडार और जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल यूनिट्स को निशाना बनाया था। सरगोधा के मुशफ एयरबेस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच हमला किया गया। वायुसेना ने कहा था कि उस दिन उसने पाकिस्तान का एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल विमान या खुफिया जानकारी इकट्ठा करने वाला विमान मार गिराया था। उसी दिन दोपहर 3:35 बजे पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल ने अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और सीजफायर की अपील की। ​

पाकिस्तान में क्यों लागू हुए कड़े फैसले? शादी में एक डिश, बाजार जल्दी बंद; जानें वजह

इस्लामाबाद भारत का पड़ोसी पाकिस्तान अक्सर अपनी उलझनों, कंफ्यूजिंग फैसले और डांवाडोल आर्थिक स्थिति के चलते दुनिया भर की मीडिया के बीच चर्चा में बना रहता है। अब अपनी ईंधन समस्याओं को लेकर वो पस्त हो चुका है। ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाक ने शादियों से लेकर, दुकान, बाजार और शॉपिंग मॉल के लिए नए रूल बना दिए हैं। पाक सरकार ने इस्लामाबाद में दुकानों, बाजारों और मॉल को रात 9 बजे तक बंद करने का आदेश दिया है। वहीं बैंक्वेट हॉल, मैरिज गार्डन और मैरक्वी को रात 10 बजे तक बंद करना जरूरी होगा। इसके अलावा शादियों और दूसरे समारोहों में सिर्फ एक डिश परोसने की इजाजत होगी। रेस्टोरेंट और कैफे रात 11 बजे तक खुले रहेंगे। सिर्फ 1 डिश परोसने का फैसला क्यों? सरकार ने मैरिज हॉल और अन्य समारोह स्थलों को रात 10 बजे तक बंद करने का फैसला किया है, इससे रात में बिजली की खपत कम करने में मदद मिलेगी। वहीं शादी के कार्यक्रमों में सिर्फ एक डिश परोसने की इजाजत दी गई है, इसका मकसद भी खर्च और संसाधनों की बचत करना है, इससे पैसे के साथ ऊर्जा की खपत कम होगी। सरकारी खर्च पर भी भारी कटौती पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ आम लोगों और कारोबारियों के लिए ही सख्त फैसले नहीं लिए हैं, बल्कि सरकारी गाड़ियों के लिए अगले तीन महीने तक ईंधन का कोटा 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। तीन महीने के लिए सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगाई गई है, इन सबके अलावा सरकारी विभागों में नए वाहन और टिकाऊ सामान खरीदने पर भी रोक लगा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक IT से जुड़ी खरीद और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को इस फैसले से बाहर रखा गया है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में गैर-कर्मचारी से जुड़े नियमित खर्च में हर महीने 5 प्रतिशत कटौती का भी आदेश दिया है। सरकारी वाहनों के ईंधन में 50 फीसदी कटौती कैबिनेट डिवीजन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकारी और प्रशासनिक वाहनों के लिए ईंधन आवंटन आधा कर दिया गया है। यह व्यवस्था तीन महीने तक लागू रहेगी। हालांकि सशस्त्र बलों, सिविल आर्म्ड फोर्सेज, कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों और जरूरी सेवाओं से जुड़े ऑपरेशनल वाहनों को इससे छूट दी गई है। सरकार ने सभी तरह के नए वाहनों की खरीद पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही आईटी से जुड़ी खरीद को छोड़कर टिकाऊ सामान की सरकारी खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है। विकास परियोजनाओं को इन दोनों प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। शादी में अब सिर्फ एक डिश पाकिस्तान सरकार के नए निर्देशों का असर शादी और अन्य समारोहों पर भी पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मैरिज फंक्शन और शादी से जुड़े आयोजनों में अब केवल एक डिश परोसने की अनुमति होगी। यह कदम गैर-जरूरी खर्च और संसाधनों की खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके अलावा मैरिज हॉल और अन्य समारोह स्थल रात 10 बजे तक बंद करने होंगे। रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य खाने-पीने के आउटलेट्स को रात 11 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि टेकअवे और होम डिलीवरी सेवाओं को इस समय सीमा से छूट दी गई है। रात 9 बजे बंद होंगे बाजार नई व्यवस्था के तहत दुकानें, बाजार, शॉपिंग मॉल, बाजार परिसर, डिपार्टमेंटल स्टोर और किराना स्टोर रात 9 बजे तक बंद करने होंगे। वहीं फार्मेसी, अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल लैब, पेट्रोल और सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जिम, खेल सुविधाएं, आईटी कंपनियां और कॉल सेंटर जैसी जरूरी सेवाओं को इन समय सीमाओं से छूट दी गई है। तीन महीने विदेश यात्रा पर रोक सरकार ने संघीय मंत्रियों, सलाहकारों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर तीन महीने की रोक लगाई है। कुछ निर्धारित अपवादों को छोड़कर विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी के लिए विदेश जाना बेहद जरूरी हो, तो उसे इकोनॉमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति तथा कुछ प्रशिक्षण और कोर्स इस प्रतिबंध से बाहर रखे गए हैं। ऐसे मामलों में जहां विदेश में प्रतिनिधित्व जरूरी माना जाएगा, पाकिस्तान का संबंधित राजदूत या हाई कमिश्नर प्रतिनिधित्व कर सकता है। सरकारी डिनर और सेमिनारों पर भी रोक सरकारी विभागों को आमने-सामने बैठकों के बजाय टेलीकॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। सरकारी खर्च से होने वाले सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कॉन्फ्रेंस पर भी रोक लगाई गई है। अगर किसी कार्यक्रम का आयोजन जरूरी हो, तो सरकारी ऑडिटोरियम या कमेटी रूम जैसी अपनी सुविधाओं का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है। सरकारी आधिकारिक डिनर पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े आयोजनों को इससे छूट दी गई है। सरकारी खर्च में भी कटौती कैबिनेट डिवीजन की अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में कर्मचारियों से जुड़े खर्च को छोड़कर अन्य खर्च में हर महीने 5 फीसदी की कटौती की जाएगी। यह व्यवस्था विदेशों में स्थित पाकिस्तान के मिशनों और वहां तैनात अधिकारियों के खर्च पर भी लागू होगी। हालांकि किराया, शिक्षा शुल्क और चिकित्सा संबंधी खर्च जारी रहेंगे। विकास परियोजनाओं को इस कटौती से बाहर रखा गया है। पहले भी लागू हुए थे ऐसे उपाय पाकिस्तान सरकार ने इस साल मार्च में भी ईंधन बचाने और सरकारी खर्च कम करने के लिए कई मितव्ययिता उपाय लागू किए थे। इनमें सरकारी वाहनों के ईंधन आवंटन में कटौती, सरकारी कर्मचारियों के लिए आंशिक वर्क फ्रॉम होम और अन्य खर्चों में कमी जैसे कदम शामिल थे। बाद में जून में कई उपाय वापस ले लिए गए थे, जबकि बाजारों के बंद होने का समय जारी रखा गया था। पाकिस्तान को क्यों लेने पड़े सख्त फैसले? पाकिस्तान में दुकान-बाजार से लेकर शादियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक के लिए नए टाइमिंग और मेन्यू को लेकर सख्ती लागू की गई है, इसका कारण मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों में हूतियों की ओर से लगाई गई रोक के कारण तेल की सप्लाई को बताया जा रहा है। इस संकट के चलते पाकिस्तान में तेल और गैस की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस … Read more

जुमे की नमाज के बीच पाकिस्तान में जोरदार ब्लास्ट, 16 की मौत से मचा हड़कंप

खैबर पख्तूनख्वा  पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में पुलिस लाइंस इलाके में शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिद के पास जोरदार विस्फोट हुआ। इस घटना में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा घायल हैं। जिला मुख्यालय अस्पताल के डॉक्टर ताहिर अली शाह ने बताया कि विस्फोट के बाद अस्पताल में 16 शव और 50 से अधिक घायलों को लाया गया। पुलिस के मुताबिक, धमाका मस्जिद के बाहर हुआ, जिससे वहां बड़ा गड्ढा बन गया। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। विस्फोट के बाद पुलिस लाइंस में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, विस्फोट वाली जगह पर राहत और बचाव अभियान जारी है। घटना के बाद प्रशासन ने कोहाट-हंगू सड़क को सभी तरह के यातायात के लिए बंद कर दिया है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद कोहाट के जिला मुख्यालय अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने बाद में बताया कि विस्फोट में घायल कम से कम 25 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया है। विस्फोटकों से लदी गाड़ी पुलिस लाइंस के गेट से टकराई खैबर पख्तूनख्वा के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस जुल्फिकार हमीद ने बताया कि विस्फोटकों से लदा एक वाहन पुराने पुलिस लाइंस के गेट से टकराया और इसके बाद उसमें जोरदार धमाका हो गया। उन्होंने बताया कि वाहन के गेट से टकराने के बाद विस्फोट हुआ और गोलीबारी भी शुरू हो गई। आईजीपी के मुताबिक, यह आत्मघाती हमला था। गोलीबारी के दौरान स्पेशल ब्रांच की इमारत में भी एक अन्य आत्मघाती विस्फोट हुआ। खैबर पख्तूनख्वा पुलिस आतंकवाद के खिलाफ लोहे की दीवार की तरह खड़ी है और ऐसे हमले पुलिसकर्मियों का मनोबल नहीं तोड़ सकते। उन्होंने कहा कि शहीदों का खून व्यर्थ नहीं जाएगा और आतंकवादियों व उनके मददगारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। धमाके के बाद हमलावरों और सुरक्षा बलों में गोलीबारी केंद्रीय पुलिस कार्यालय ने बताया कि आईजीपी जुल्फिकार हमीद ने कोहाट के क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी से घटना की रिपोर्ट मांगी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विस्फोटकों से लदा वाहन पुराने पुलिस लाइंस के गेट से टकराया था। केंद्रीय पुलिस कार्यालय के मुताबिक, अधिकारी विस्फोट की पूरी प्रकृति और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रहे हैं। धमाके के बाद हमलावरों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी जारी रही। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर राहत-बचाव के साथ-साथ पूरे इलाके की जांच में जुटी हैं। धमाके की जांच जारी  शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, 'विस्फोटकों से लदे एक वाहन को ओल्ड पुलिस लाइन्स में घुसाया गया था, हालांकि, धमाके के पीछे का असल कारण अभी पता नहीं चला है। रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैज़ी ने एक बयान में कहा, 'धमाके के बाद हथियारबंद आतंकवादियों के साथ गोलीबारी हुई।' आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ी पुलिस  IG हमीद ने कहा, 'KP पुलिस आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक मज़बूत दीवार की तरह खड़ी है, कायरतापूर्ण हमले हमारे हौसले को नहीं तोड़ सकते।' बयान में उनके हवाले से कहा गया, 'शहीदों का खून बेकार नहीं जाएगा, आतंकवादियों और उनके मददगारों का अंजाम बहुत बुरा और मिसाल बनने वाला होगा।' उन्होंने घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।  

पाकिस्तान को ICC ने दिया दोहरा झटका, 11 WTC अंक गंवाए; स्लो ओवर रेट पर भारी पेनल्टी

करांची  इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान को 0-3 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. बर्मिंघम के एजबेस्ट मैदान पर खेले गए सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच में पाकिस्तानी टीम ने कुछ संघर्ष किया, लेकिन वो जीत दिलाने के लिए काफी नहीं था. इंग्लैंड ने वो मुकाबला 8 विकेट से जीतकर पाकिस्तान का सीरीज में 0-3 से सफाया किया था।  अब पाकिस्तानी टीम पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने तगड़ा एक्शन लिया है. एजबेस्टन टेस्ट में धीमा ओवर रेट पाकिस्तान को भारी पड़ गया. आईसीसी ने पाकिस्तानी टीम पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाया है, साथ ही वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 में उसके खाते से 11 अंक भी काट दिए हैं।  समय की तय छूट को शामिल करने के बाद भी पाकिस्तान की टीम निर्धारित लक्ष्य से 11 ओवर पीछे रही. इसी वजह से टीम पर यह कार्रवाई हुई. आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी रंजन मदुगले ने मामले में सजा सुनाई. मैदानी अंपायर्स पॉल राइफल और क्रिस गैफनी, थर्ड अंपायर अल्लाहुद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने धीमे ओवर रेट का आरोप लगाया था।  आईसीसी के नियम के अनुसार, निर्धारित समय में कम कराए गए प्रत्येक ओवर पर खिलाड़ियों की मैच फीस का 5 फीसदी जुर्माना लगाया जाता है. हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 50 फीसदी है. पाकिस्तान के 11 ओवर कम रहने के कारण उस पर अधिकतम 50 फीसदी जुर्माना लगाया गया।  आर्थिक जुर्माने से ज्यादा बड़ा झटका पाकिस्तान को डब्ल्यूटीसी में लगा है. नियमों के मुताबिक, प्रत्येक कम ओवर के लिए एक डब्ल्यूटीसी अंक काटा जाता है. लिहाजा 11 ओवर कम रहने के कारण पाकिस्तान के खाते से सीधे 11 अंक घटा दिए गए. पाकिस्तान WTC तालिका में पहले ही सबसे नीचे था. इस कटौती के बाद उसकी हालत और खराब हो गई है. उसका अंक प्रतिशत घटकर 4.63 रह गया है. इंग्लैंड के खिलाफ 0-3 की हार के बाद टीम के लिए यह दोहरी मुश्किल है।