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पाकिस्तान क्रिकेट में मचा बवाल, सईद अजमल ने PCB को घेरा; बोले- 10 साल पीछे पहुंच गए

इस्लामाबाद  कुछ दिन पहले पाकिस्तान क्रिकेट में आया भूचाल अब नहीं दिशा लेता दिख रहा है. सोमवार को ही इस तरह के भी चर्चे और बातें हो रही हैं कि पिछले दिनों टीम के हेड कोच और पूर्व कप्तान सरफराज अहमद के अलावा 7 खिलाड़ियों को स्वदेश भेजने का रिश्ता मैच फिक्सिंग से भी हो सकता है. वैसे अगर ऐसा होता है, तो पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए यह चौंकाने वाली बात नहीं ही होगी. अब पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर सईद अजमल ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट 10 साल पीछे चली गई है. जब पाकिस्तान टीम 0-3 से सूपड़ा साफ (व्हाइटवॉश) होने से बचने की उम्मीद में एजबेस्टन में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे और अंतिम टेस्ट में उतर रही है, तब अजमल ने राष्ट्रीय टीम में गलत हो रही हर चीज पर खुलकर बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी. टीम में हाल ही में हुए इस फेरबदल पर अजमल ने कहा कि पीसीबी द्वारा खिलाड़ियों को "अपमानित" किया जा रहा है।  अजमल ने कहा, 'बोर्ड ने खुद खिलाड़ियों को किसी भी अन्य चीज की तुलना में सबसे ज्यादा हतोत्साहित किया है. बोर्ड किसी भी खिलाड़ी को सेटल नहीं होने दे रहा है. ऐसे खिलाड़ी भी हैं जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें भी बाहर कर दिया गया है. ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें पीसीबी द्वारा अपमानित किया गया है.' अजमल ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट से पहले पाकिस्तान की रेड-बॉल टीम का प्रभार संभालने वाले माइक हेसन और टीम के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद पर भी तंज कसा।  समा टीवी पर अजमल ने कहा, 'आकिब जावेद और माइक हेसन (जिन्हें तीसरे टेस्ट के लिए टेस्ट टीम की कमान संभालने को कहा गया है) एक टीम हैं. ये दोनों सब कुछ नियंत्रित कर रहे हैं और  पैदा हुई अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं. यह पूरा मुद्दा इगो से जुड़ा है.हमारी टीम 10 साल पीछे चली गई है. हमने भविष्य के लिए कोई योजना नहीं बनाई है.' शीर्ष स्तर की क्रिकेट में किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन के लिए उसे लगातार मौके मिलना बेहद जरूरी है.  हालांकि, अजमल को लगता है कि पीसीबी का असली इरादा सिर्फ खिलाड़ियों को बदलना है।  उन्होंने कहा, 'किसी सीरीज का हर मैच हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है. और अगर कोई खिलाड़ी प्रदर्शन नहीं कर रहा है तो हमारे पास उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है. इन बदलावों के पीछे का उद्देश्य खिलाड़ियों को दावेदारी से हटाना नहीं, बल्कि केवल उन्हें बदलना है. सलमान आगा को ही देख लीजिए, जो बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन कुछ कारणों से उनका बल्ला नहीं चल सका. इस बारे में उनसे बात की गई थी। 

पाकिस्तान की शर्मनाक हार, भारतीय गेंदबाजों के आगे 55 रन पर सिमटी पूरी टीम

दुबई दुबई के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारतीय शेरनियों के सामने पाकिस्तान ने पूरी तरह से सरेंडर कर दिया. श्री चरणी और प्रेमा रावत ने स्पिन जाल का पड़ोसी बल्लेबाजों के खिलाफ कोई जवाब नहीं था. आलम यह था कि टीम के 9 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए. पाकिस्तान पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल पाई और 18.1 ओवर में सिर्फ 55 पर ऑल-आउट हो गई.  इस मुकाबले में निराशाजनक प्रदर्शन के साथ ही पाकिस्तान के नाम शर्मनाक रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है. 55 रन पाकिस्तान का टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अब तक का न्यूनतम स्कोर है।  इससे पहले, साल 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पाकिस्तान की पूरी टीम 56 रन बनाकर ऑलआउट हुई थी. जबकि 2009 में टीम इंग्लैंड के खिलाफ 60 के स्कोर पर पूरी टीम सिमट गई थी. भारत के लिए श्री चरणी ने 4 ओवर में 7 रन देकर 3 विकेट झटके, जबकि प्रेमा रावत ने 4 ओवर में 9 रन देकर 3 विकेट निकाले।  T20I में PAK-W के सबसे कम ऑल-आउट स्कोर     55 बनाम भारत दुबई, 2026     56 बनाम न्यूजीलैंड, दुबई, 2024     60 बनाम इंग्लैंड, टॉनटन, 2009     63 बनाम भारत, ग्वांगझू, 2012     65 बनाम वेस्टइंडीज, सेंट एंड्रयूज, 2011     72 बनाम श्रीलंका, कोलंबो (NCC), 2018 महामुकाबले में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. मुनीबा अली और शवाल जुल्फिकार ने पहले विकेट के लिए 27 रन जोड़े. मुनीबा 13 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि जुल्फिकार 14 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गईं. इसके बाद पाकिस्तान की बल्लेबाजी बुरी तरह लड़खड़ा गई. गुल फिरोजा बिना खाता खोले आउट हुईं. आयशा जफर सिर्फ 2 रन बना सकीं, जबकि सदाफ शमास 3 रन पर क्लीन बोल्ड हुईं. कप्तान फातिमा सना भी कोई रन नहीं बना पाईं और दीप्ति शर्मा का शिकार बनीं।  मध्यक्रम में भी कोई बल्लेबाज ज्यादा देर टिक नहीं सकी. एमान फातिमा ने 5 रन और उम्म-ए-हानी ने 6 रन बनाए. तूबा हसन 9 रन बनाकर पवेलियन लौटीं. टीम की 9 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा तक पार नहीं कर सकीं. और पूरी टीम सिर्फ 55 रन पर सिमट गई।  भारत की स्पिन गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। श्री चरणी ने 4 ओवर में सिर्फ 7 रन देकर 3 विकेट लिए. प्रेमा रावत ने भी 3 बल्लेबाजों को आउट किया और 9 रन दिए. दीप्ति शर्मा ने 3.1 ओवर में केवल 5 रन देकर 2 विकेट झटके. शेफाली वर्मा ने भी 1 विकेट चटकाया. भारतीय टीम ने 56 रनों के लक्ष्य को 8.4 ओवर में 3 विकेट गंवाकर हासिल किया. भारत की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर 18 और दीप्ति शर्मा 12 रन बनाकर नाबाद रहीं।  इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ निराशाजनक रिकॉर्ड इस मुकाबले ने पाकिस्तान महिला टीम के टी20 इतिहास के सबसे निराशाजनक अध्यायों को एक बार फिर ताजा कर दिया. पाकिस्तान के महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट इतिहास में अब सबसे कम स्कोर के आंकड़े कुछ इस प्रकार दर्ज हो चुके हैं. भारत के खिलाफ 55 रन (18.1 ओवर) का यह स्कोर अब पाकिस्तान का टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे कम स्कोर बन चुका है. इससे पहले, 14 अक्टूबर 2024 को इसी दुबई के मैदान पर न्यूजीलैंड की महिला टीम के खिलाफ पाकिस्तान की पूरी टीम 11.4 ओवर में केवल 56 रन बनाकर आउट हो गई थी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  अगर और पीछे जाएं, तो 16 जून 2009 को टॉन्टन के मैदान पर इंग्लैंड महिला टीम के खिलाफ पाकिस्तान की टीम 16.5 ओवर में 60 रन पर सिमट गई थी. इसी तरह, 31 अक्टूबर 2012 को एशियाई खेलों के दौरान गुआंगझू (Guangzhou) में भी भारत के खिलाफ पाकिस्तान की टीम 19.1 ओवर में महज 63 रन पर ऑलआउट हो गई थी. वहीं, 25 सितंबर 2023 को हांग्झू (Hangzhou) में बांग्लादेश की महिला टीम के खिलाफ पाकिस्तान ने पूरे 20 ओवर खेलकर 9 विकेट के नुकसान पर 64 रन बनाए थे। 

Pakistan Terror Attack: पुलिस चौकी पर आतंकियों का हमला, 9 सुरक्षाकर्मी मारे गए

इस्लामाबाद आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि जियारत जिले में सोमवार देर रात आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने लगे। इस हमले में दो एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मी मारे गए। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने पांच जवानों को अगवा भी कर लिया है। वहीं, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें 15 आतंकवादी मारे गए। घटना की पुष्टि करते हुए जियारत के पुलिस अधीक्षक अब्दुल कुदूस ने बताया कि हमलावरों ने मांगी फेज-तीन क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी को निशाना बनाया। रात भर चली गोलीबारी बेहद भीषण रही, जिसमें दोनों तरफ से भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ। मारे गए पुलिस अधिकारियों में मांगी थाने के एसएचओ मोहम्मद हुसैन, कोवास थाने के एसएचओ सोहबत खान और एंटी-टेररिस्ट फोर्स के इंचार्ज हेड कांस्टेबल सैफुल्लाह शामिल हैं। मारे गए जवानों के शवों को जियारत जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हमले में टीटीपी का हाथ? बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि मांगी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया क्लियरेंस ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट, स्पेशल ऑपरेशंस विंग और एंटी-टेररिज्म फोर्स ने भाग लिया। शाहिद रिंद ने आगे बताया कि अभियान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 15 आतंकवादी मारे गए। रिंद ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित अभियान और तेज किए जाएंगे। वहीं, अगवा किए गए पांच पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने की घटना की निंदा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शरीफ ने कहा कि हम बलूचिस्तान की शांति को नुकसान पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं देंगे। शांति के दुश्मनों को पूरी तरह समाप्त किए बिना हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कायराना हमले न तो शांति भंग कर सकते हैं और न ही आतंकवाद के खिलाफ देश के दृढ़ संकल्प को कमजोर कर सकते हैं। इलाके में तनाव, सड़कें जाम हमले की खबर फैलते ही जियारत और आसपास के इलाकों में गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय कबीलों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस कारण सैकड़ों यात्री बसें और माल ढोने वाले वाहन सड़कों पर फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने कहा कि लापता जवानों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त सैन्य व पुलिस बल भेजे गए हैं।

US-ईरान समझौते के बीच पाकिस्तान को इजरायल ने दिखाया आईना, राजदूत बोले- भरोसे लायक नहीं

यरुशलम अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता पश्चिम एशिया की जियोपॉलिटिक्स को बदल रहा है. इजरायल इस समझौते से खुश नहीं है. इस समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है. इस पर भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने शांति की कोशिशों में पाकिस्तान की किसी भी भूमिका की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि इजरायल, पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता।  न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए अजार ने कहा कि 'मैंने कई इंटरव्यू में यह बात कही है. हम पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करते. मुझे लगता है कि उनका व्यवहार निंदनीय रहा है. जैसे- इजरायल के प्रति उनका रवैया, उनके रक्षा मंत्री की यहूदी-विरोधी टिप्पणियां वगैरह. इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है।  उनकी यह टिप्पणी तब आई है, जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इजरायल और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध न होने के बावजूद पाकिस्तान इस क्षेत्र में भूमिका निभा सकता है।  इजरायल और पाकिस्तान के बीच रिश्ते हमेशा से कड़वाहट भरे रहे हैं. दोनों के बीच अप्रैल में तनाव तब बढ़ गया था जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को बुरा और मानवता के लिए अभिशाप बता दिया था. आसिफ ने इजरायल को 'कैंसर' तक कह दिया था और इजरायलियों के लिए 'नरक में जलने' की दुआ की थी. इसके जवाब में इजरायल ने ख्वाजा आसिफ के बयान को 'बेहद आपत्तिजनक' बताया था और निष्पक्ष मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।  इंटरव्यू के दौरान रूवेन अजार ने अमेरिका-ईरान डील में लेबनान के शामिल होने की बात को भी खारिज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि ये डील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए हुई है. उन्होंने कहा कि हमारे पास जो जानकारी है, उससे लगता है कि सबसे जरूरी बात होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की है. टोल वसूलने या अमेरिका से मुआवजा पाने जैसी उनकी सारी कल्पनाएं अब खत्म हो चुकी हैं।  उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 'लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है. लेबनान के भविष्य का फैसला लेबनान की सरकार को करना है, जो इस समय इजरायल के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रही है.' उन्होंने कहा, 'हमारे रक्षा मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि हम लेबनान समेत अपने सभी बफर जोन में बने रहेंगे और अपनी सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेंगे।  उन्होंने कहा कि हम हिज्बुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि इजरायली कैबिनेट को समझौते की शर्तों को देखना होगा और तय करना होगा कि वह क्या करना चाहती है. उन्होंने साफ किया कि इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है। 

Pakistan Squad Announced: एशियन गेम्स में नए चेहरे, वरिष्ठ खिलाड़ियों की छुट्टी, फरहान बने कप्तान

करांची  एशियन गेम्स 2026 के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। जापान में होने वाले इन एशियाई खेलों के लिए पाकिस्तान की टीम में तमाम दिग्गजों को जगह नहीं मिली है। कप्तान सलमान अली आगा से लेकर बाबर आजम, शाहीन अफरीदी और मोहम्मद रिजवान जैसे खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा नहीं है। पहली नजर में देखकर लग रहा है कि यह एकदम नई नवेली टीम है, क्योंकि 4 खिलाड़ियों ने अभी तक T20I में डेब्यू भी नहीं किया है। इस टीम की कप्तानी बोर्ड ने युवा बल्लेबाज साहिबजादा फरहान को सौंपी है, जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन किया था। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान में एशियन गेम्स का आयोजन होना है। इसके लिए क्रिकेट टीमों की घोषणा होना शुरू हो गया है। बीसीसीआई ने पिछले सप्ताह टीम की घोषणा की थी। बीसीसीआई ने फुल फ्लेज्ड टीम इस इवेंट में भेजने का फैसला लिया है, जबकि पाकिस्तान एक युवाओं से भरी हुई टीम भेजने जा रहा है, जिसकी घोषणा भी पीसीबी ने कर दी है। बहुत कम ऐसे खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं, जिन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट का बहुत ज्यादा अनुभव है। बोर्ड ने यह फैसला क्यों लिया है? इसकी वजह अभी सामने नहीं आई है। हो सकता है कि कोई सीरीज उस समय पाकिस्तान की किसी देश के साथ शेड्यूल हो। 10 टीमों का मेन्स T20I इवेंट आइची प्रीफेक्चर के कोरोगी एथलेटिक पार्क में खेला जाएगा। मेन्स क्रिकेट इवेंट 24 सितंबर को शुरू होगा, जबकि मेडल मैच 3 अक्टूबर को खेले जाएंगे। पाकिस्तान के लिए 46 टी20 मैच खेल चुके साहिबजादा फरहान इस टीम को लीड करेंगे, जो दो शतक और 10 अर्धशतक इस फॉर्मेट में जड़ चुके हैं। वहीं, पांच टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने वाले अब्दुल समद को वाइस कैप्टन बनाया गया है। 4 खिलाड़ी ऐसे भी इस 15 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं, जिन्होंने अभी तक टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू नहीं किया है। आकिफ जावेद, अली रजा, माज सदाकत और साद मसूद ने अभी तक पाकिस्तान के लिए एक भी टी20 इंटरनेशनल मैच नहीं खेला है। इनमें से कुछ खिलाड़ियों को एशियन गेम्स में खेलने का मौका मिल सकता है और देश का प्रतिनिधित्व इंटरनेशनल क्रिकेट में करने का मौका मिलने की संभावना है। पाकिस्तान की टीम इस प्रकार है साहिबजादा फरहान (कप्तान), अब्दुल समद (उप-कप्तान), अबरार अहमद, अहमद दानियाल, आकिफ जावेद, अली रजा, अराफात मिन्हास, हैदर अली, हसन नवाज, माज सदाकत, मोहम्मद सलमान मिर्जा, साद मसूद, सैम अयूब, सुफयान मुकीम और उस्मान खान (विकेट-कीपर) एशियन गेम्स के लिए जो सपोर्ट स्टाफ पाकिस्तान भेजने वाला है। उनमें हेड कोच माइक हेनस, बॉलिंग कोच एशले नोफके, फील्डिंग कोच शेन मैकडरमॉट, फीजियोथेरेपिस्ट मुहम्मद ताहिर, ट्रेनर इमरान उल्लाह और एनालिस्ट उस्मान हाशमी का नाम शामिल है।  

पाकिस्तान की बढ़ीं मुश्किलें! UAE की एयरलाइन ने फ्लाइट सेवाएं रोकीं, जानिए क्या है कारण

 दुबई यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) की लो-कॉस्ट एयरलाइन फ्लाईदुबई (Flydubai) ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। एयरलाइन ने 'ऑपरेशनल कारणों' का हवाला देते हुए पाकिस्तान के तीन प्रमुख शहरों के लिए अपनी उड़ानें 26 अक्टूबर तक के लिए सस्पेंड कर दी हैं। इनमें राजधानी इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर शामिल हैं। हालांकि, एयरलाइन ने यह साफ किया है कि कराची से आने-जाने वाली उड़ानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पहले की तरह ही जारी रहेंगी। इन रूट्स पर कैंसिल हुईं उड़ानें एविएशन मॉनिटर 'फ्लाइटरडार24' के मुताबिक, कम से कम 7 मई से ही इन तीन शहरों के लिए फ्लाईदुबई की उड़ानें कैंसिल चल रही हैं। प्रभावित होने वाली उड़ानों की डिटेल इस प्रकार है: इस्लामाबाद-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ353 और FZ354 लाहौर-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ359 और FZ360 पेशावर-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ375 और FZ376 आपको बता दें कि फ्लाईदुबई ने जुलाई 2024 में इस्लामाबाद और लाहौर में अपना ऑपरेशन शुरू किया था, जबकि पेशावर के लिए बीते साल मई में उड़ानें शुरू की गई थीं। एयरलाइन ने यात्रियों को दी ये सलाह ईरान युद्ध शुरू होने के कुछ दिन बाद, 31 मार्च को फ्लाईदुबई की वेबसाइट पर एक बयान जारी किया गया था। इसमें बताया गया था कि एयरलाइन "फिलहाल अपने नेटवर्क पर घटे हुए शेड्यूल के साथ उड़ानें संचालित कर रही है।" एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी है कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले वे लेटेस्ट अपडेट्स और अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें। कंपनी ने अपने बयान में 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों से भड़के मध्य पूर्व संघर्ष का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा: हम स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और उसी के मुताबिक अपने फ्लाइट शेड्यूल को अपडेट कर रहे हैं। यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ईंधन संकट: हवाई यात्रा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते जेट फ्यूल (विमान ईंधन) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण एविएशन सेक्टर में बीते कई सालों का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भी पिछले महीने चेतावनी दी थी कि ईरान युद्ध से उपजे जेट फ्यूल संकट की सबसे बड़ी मार सबसे पहले एशिया पर पड़ सकती है। IATA के प्रमुख विली वॉल्श ने कहा, "मुझे लगता है कि ईंधन की संभावित कमी को देखते हुए, गर्मियों के पीक सीजन में एयरलाइंस अपनी उड़ानों के शेड्यूल में कटौती करना शुरू कर देंगी।" कर्ज वापसी के बाद अब टेलीकॉम सेक्टर से भी UAE का किनारा एविएशन सेक्टर में मिले इस झटके से ठीक पहले यूएई आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा चुका है। बीते दिनों यूएई ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के भारी-भरकम कर्ज की अचानक वापसी करा ली थी। यह वही कर्ज था जिसे यूएई पिछले कई सालों से रोल-ओवर कर रहा था ताकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार दिवालिया होने से बचा रहे। कर्ज वापसी के झटके से पाकिस्तान उबर भी नहीं पाया था कि अब यूएई की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी ईएंड (e& जिसे पहले एतिसलात के नाम से जाना जाता था) ने भी पाकिस्तान से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी शुरू कर दी है। एतिसलात के पास पाकिस्तान की सरकारी टेलीकॉम कंपनी पीटीसीएल (PTCL) में 26 फीसदी हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा कर रही है और अपने शेयर बेचकर पाकिस्तान के टेलीकॉम मार्केट से बाहर निकलने की योजना बना रही है। दरअसल, पाकिस्तान सरकार और एतिसलात के बीच 2005 से 800 मिलियन डॉलर (करीब 6.6 खरब पाकिस्तानी रुपये) का एक बड़ा वित्तीय विवाद अनसुलझा है। इसके अलावा यूएई अपनी नई ग्लोबल 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' के तहत भी पाकिस्तान से अपने निवेश वापस खींच रहा है।

महंगाई का कहर: पाकिस्तान ने अपने ही लोगों पर डाला भारी बोझ, 11,000 करोड़ की रकम जुटाई

इस्लामाबाद पाकिस्‍तान के कटोरे में एक बार फिर अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भीख का पैसा डाल दिया है. इसके लिए पाकिस्‍तान को अपने ही लोगों का खून चूसना पड़ा. महंगाई बढ़ानी पड़ी और जब उसने आईएमएफ के सभी जरूरी मानक पूरे कर दिए तो अब 1.21 अरब डॉलर यानी करीब 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज उसे दिया गया है. आईएमएफ ने दो अलग-अलग चल रहे फाइनेंसिंग अरेंजमेंट्स के तहत पाकिस्‍तान के लिए यह कर्ज मंजूर किया है और माना जा रहा है कि अगले सप्‍ताह पैसे मिल जाएंगे।  आईएमएफ ने सितंबर 2024 में एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत 37 महीनों में 7 अरब डॉलर देने पर सहमति जताई थी. इसके अलावा रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत 1.4 अरब डॉलर देने का फैसला किया था. IMF के कार्यकारी बोर्ड ने EFF के तहत पाकिस्तान को लगभग 1 अरब डॉलर और RSF के तहत लगभग 21 करोड़ डॉलर देने पर सहमति दी है. इस तरह, कुल मिलाकर उसे 1.20 अरब डॉलर का कर्ज दिया गया है।  पाकिस्‍तान को कुल कितना पैकेज पाकिस्तान अब तक IMF से दो कर्ज पैकेजों के तहत कुल 8.4 अरब डॉलर में से 4.5 अरब डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपये) का कर्ज ले चुका है. एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, यह पैसा अगले हफ्ते की शुरुआत में जारी किया जाएगा, जिससे पाकिस्‍तान के सेंट्रल बैंक का रिजर्व बढ़कर 17 अरब डॉलर हो जाएगा. हालांकि, यह भारत के 700 अरब डॉलर के रिजर्व के मुकाबले बहुत छोटा हिस्‍सा है।  कर्ज पाने के लिए जनता पर जुल्‍म पाकिस्‍तान को भले ही आईएमएफ से 1.20 अरब डॉलर का कर्ज मिल गया हो, लेकिन इस कर्ज को पाने के बाद भी पाक सरकार को पुराने वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों पर टिके रहना पड़ा और स्थिरता के रास्ते पर बने रहने की प्रतिबद्धता का पालन करना होगा. भले ही इन नीतियों के खिलाफ जनता लगातार आवाज उठा रही है, क्‍योंकि इससे बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक असमानता बढ़ रही है. IMF की मंजूरी तब मिली जब सरकार ने वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन दिखाया, लेकिन इस वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में सरकार के इस रवैये को लेकर अलग-अलग स्‍वर उठ रहे हैं।  आईएमएफ के पैमाने पर खरा उतरा देश IMF मिशन ने जुलाई-दिसंबर 2025 की अवधि में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा की थी, जिसमें 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की तीसरी समीक्षा शामिल थी. पाकिस्तान ने दिसंबर 2025 के अंत तक सभी क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया पूरे किए और नेट इंटरनेशनल रिजर्व्स के फ्लोर पर भी बेहतर प्रदर्शन किया. साथ ही जनरल गवर्नमेंट का प्राइमरी बैलेंस टारगेट भी आसानी से हासिल किया. सरकार ने दिसंबर 2025 के अंत तक आठ में से छह इंडिकेटिव टारगेट्स पूरे किए, लेकिन फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू सबसे कमजोर कड़ी रहा. FBR द्वारा जुटाए गए नेट टैक्स रेवेन्यू और रिटेलर्स से इनकम टैक्स रेवेन्यू IMF के लक्ष्यों से कम रहे। 

पाकिस्तानी नेता शाहीर सियालवी का ऐलान: सेना ने हाफिज सईद और मसूद अजहर के लिए लड़ा ऑपरेशन

लाहौर  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. अब इस ऑपरेशन के एक साल बाद पाकिस्तान से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान के एक नेता ने खुलेआम स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की सेना ने हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों के लिए लड़ाई लड़ी थी. यह बयान आतंकियों की एक बैठक में दिया गया, जिसने पाकिस्तान की असली नीति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।  क्या कहा पाक नेता ने? लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी नेता शाहीर सियालवी ने कहा… पहली बार पाकिस्तान की सेना ने हाफिज सईद और मसूद अजहर के लिए लड़ाई लड़ी. उन्होंने यह भी माना कि भारत ने 10 मई को मुरीदके (लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय) और बहावलपुर (जैश-ए-मोहम्मद का केंद्र) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. इन हमलों में कई आतंकवादी मारे गए थे।  पाकिस्तान ने बदली रणनीति सियालवी के अनुसार, हमलों के बाद पाकिस्तान ने दुनिया को गुमराह करने के लिए अपनी रणनीति बदल दी. आतंकियों के जनाजे की नमाज, मौलवी या मुफ्ती से नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के धार्मिक अधिकारी ने पढ़ाए. पाकिस्तानी सैनिक वर्दी पहनकर इन आतंकियों के शव लेकर निकले. इसका मकसद था दुनिया को यह दिखाना कि मारे गए आतंकी नहीं, बल्कि आजादी के लड़ाके थे।  आतंकियों की महफिल में खुलासा यह बयान लश्कर-ए-तैयबा के कार्यक्रम में दिया गया, जिसमें अमेरिका द्वारा घोषित आतंकी मुजम्मिल इकबाल हाशमी भी मौजूद था. इस बैठक में पाकिस्तान की सेना और आतंकियों के बीच गहरे संबंध साफ दिखाई दिए।  पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के अंदर लश्कर और जैश के मुख्य ठिकानों पर सटीक हमले किए थे. भारत का कहना था कि आतंकियों को सबक सिखाने के लिए जरूरी था।  इस खुलासे का मतलब यह बयान साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ दिखावा करता है. हकीकत में उसकी सेना कुछ खास आतंकी संगठनों और उनके सरगनाओं की खुलेआम मदद कर रही है. हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को पाकिस्तान अपनी सुरक्षा समझता है।  पाकिस्तान की यह नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके लिए शर्मनाक है. दुनिया के सामने उसकी दोहरी नीति को फिर से उजागर करती है. ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद पाकिस्तान के नेता का यह बयान भारत के लिए कोई नई बात नहीं है, लेकिन दुनिया के लिए यह सबूत है कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।  भारत लगातार कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंकियों का समर्थन करता है. अब खुद पाकिस्तान के लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। 

पाकिस्तान की हालत हुई दयनीय, सऊदी मदद भी नाकाम, ईरान युद्ध ने किया बर्बाद

करांची  अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से पाकिस्तान पर बड़ा असर दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में खुद ये बात कही है और चेतावनी दी है कि महंगे होते तेल और क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की आर्थिक हालत पतली कर दी है. कैबिनेट बैठक में उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल बिल करीब 300 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. ऐसे में हालात पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक टास्क फोर्स भी बनाई है. आपको बता दें कि पाकिस्तान इस वक्त महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर देख रहा है और तेल-गैस के लिए यहां त्राहिमाम मचा हुआ है।  शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.पाकिस्तान महंगाई की मार तो झेल ही रहा है, लेकिन शांति बनाने में भी वो सक्रिय है. शहबाज शरीफ ने बताया कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराई गई, जो 21 घंटे तक चली. इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता हो ही नहीं पाई. फिलहाल संघर्ष विराम बना हुआ है और पाकिस्तान किसी भी तरह से वार्ता को फिर से शुरू करना चाहता है।  तेल के बढ़ते दाम ने रुलाया प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं, इसलिए नए दाम तय करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से हालात पर काबू पाने की कोशिश जारी है. इस बीच उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ओर से उठाए गए कदमों के कारण पाकिस्तान में स्थिति अन्य देशों की तुलना में संतोषजनक है और कहीं भी लंबी कतारें नहीं हैं. हालांकि युद्ध से पहले और बाद की तुलना में 500 मिलियन डॉलर का उछाल आया है, जो अर्थव्यवस्था को की रीढ़ तोड़ रहा है. सरकार मितव्ययिता और बचत के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर रही है, इसके लिए एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है. सरकारी उपायों के चलते ईंधन की खपत में काफी कमी आई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही थी, लेकिन युद्ध के कारण प्रगति को नुकसान पहुंचा है।  ईरान-अमेरिका युद्ध में पाकिस्तान कर रहा मध्यस्थता     पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और तेल संकट के बीच इस पहल को काफी अहम माना जा रहा है, हालांकि ये कुछ खास परिणाम नहीं दे पाई है।      पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने की कोशिश की है. जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें युद्धविराम और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की गई. फिलहाल एक अस्थायी संघर्ष विराम बना हुआ है, जिसे बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।      पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था से परेशान है और शांति चाहता है और दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के लिए खूब उठापटक कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री के साथ संपर्क में रहकर आगे की रणनीति पर काम किया जा रहा है।   

पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- 5-7 दिन का कच्चा तेल बचा, लॉकडाउन की तैयारी

 इस्लामाबाद वैश्विक मंचों पर खुद को 'मध्यस्थ' के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के सामने अब एक गंभीर घरेलू संकट खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पूरे देश में खलबली मचा दी है। सरकार ने यह स्वीकार किया है कि देश के पास कच्चे तेल का रिजर्व केवल 5-7 दिनों का ही बचा है, जबकि डीजल और एलपीजी जैसे अन्य ईंधनों का स्टॉक भी कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है। संकट की जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना पाकिस्तान के इस अचानक उपजे ऊर्जा संकट का सीधा तार मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से जुड़ा है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कुवैत आदि) से होने वाले आयात पर निर्भर है। रास्ता बंद होने और जहाजों की कमी से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। पेट्रोलियम मंत्री का कुबूलनामा और वर्तमान हालात पाकिस्तान के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़ी मौजूदा भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच देश के ईंधन भंडार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समा टीवी के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा हो रही है। मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि पाकिस्तान का ऊर्जा तंत्र इस समय बाहरी झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि देश के पास वर्तमान में केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल मौजूद है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी पेट्रोल रिजर्व (भंडार) नहीं है। वहीं डीजल का स्टॉक 26-28 दिन और LPG का स्टॉक केवल 15 दिनों के लिए पर्याप्त है। पाकिस्तान दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर एयरलाइंस के लिए ईंधन की कमी की चेतावनी (NOTAM) जारी कर दी है। अली परवेज मलिक ने वैश्विक बाजारों में अत्यधिक अस्थिरता की ओर इशारा करते हुए बताया कि इतिहास में दुबई क्रूड की कीमतें कभी भी 170 डॉलर के उच्च स्तर तक नहीं पहुंची थीं। इस अस्थिरता को देखते हुए देश की ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत करना अब एक तत्काल आवश्यकता बन गई है। 'कोविड काल' जैसी पाबंदियों की वापसी की तैयारी ईंधन बचाने के लिए शाहबाज शरीफ सरकार बेहद सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए देश में लॉकडाउन जैसे नियम लागू किए जा सकते हैं। कॉरपोरेट और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया जा सकता है, ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम चलें। स्कूलों और कॉलेजों को बंद करके शिक्षा को फिर से ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने की योजना है। लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और कार शेयर करने की अपील की जा रही है। आसमान छूती महंगाई और चरमराती अर्थव्यवस्था पाकिस्तान पहले से ही भयंकर आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है। इस ऊर्जा संकट के कारण सरकार अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा 15 दिनों की जगह हर हफ्ते कर सकती है। युद्ध क्षेत्र से तेल लाने वाले जहाजों का बीमा 30,000 डॉलर से बढ़कर 4,00,000 डॉलर तक पहुंच गया है। इसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ेगा। परिवहन महंगा होने से फल, सब्जियां, राशन और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। 'मध्यस्थ' पाकिस्तान के लिए कितनी बड़ी विडंबना? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अक्सर खुद को इस्लामी देशों और पश्चिमी ताकतों के बीच एक 'मध्यस्थ' के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है। लेकिन वर्तमान हालात बताते हैं कि जो देश दूसरों के विवाद सुलझाने का दावा करता है, वह अपनी बुनियादी जरूरतों (ऊर्जा सुरक्षा) को सुरक्षित रखने में बुरी तरह विफल साबित हो रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ (IMF) के कड़े नियमों के बीच यह तेल संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए 'ताबूत में आखिरी कील' साबित हो सकता है।