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IMF की वॉर्निंग: युद्ध से वैश्विक संकट गहरा, भविष्य और खराब होने का अंदेशा

  नई दिल्ली    अमेरिका और ईरान के बीच हमलों की खबर से एक बार फिर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की तमाम कोशिशें होर्मुज स्ट्रेट पर आकर फेल हो रही हैं. न तो डोनाल्ड ट्रंप Hormuz Strait पर पीछे हटने को तैयार हैं, न ही ईरान हथियार डालने के मूड में नजर आ रहा है।  मिडिल ईस्ट में गहराए इस तनाव को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने बड़ी चेतावनी दी है. आईएमएफ चीफ ने कहा है कि अगर ये युद्ध 2027 तक चला, तो इसके सबसे बुरे परिणाम देखने को मिलेंगे।  अनुमान से ज्यादा बुरे परिणाम आईएमएफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया में महंगाई पहले से ही बढ़ रही है. इस बीच मिडिल ईस्ट युद्ध एक और बड़ा संकट बनकर सामने आया है. IMF Chief क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच ये युद्ध 2027 तक खिंचता है और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनुमान से कहीं ज्यादा बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  जॉर्जीवा ने आगे कहा कि US-Iran War को लेकर अब तक जो पूर्वानुमान जताए गए थे, वो धरे रहते जा रहे हैं. इसके साथ ही इनमें जाहिर किए गए ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में गिरानट के बाद इसके 3.1 फीसदी और महंगाई के 4.4 फीसदी रहने के अनुमान पीछे छूटते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर बीतते दिन के साथ ये अनुमान बेकार होते जा रहे हैं।  IMF Chief के मुताबिक, युद्ध का जारी रहना, तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक पर बने रहना और इसके चलते महंगाई के बढ़ते दबाव का साफ मतलब है कि हालात आगे खराब होने वाले हैं और आईएमएफ का आउटलुक अब आधार बन चुका है. इसमें कहा गया है कि 2026 में वैश्विक ग्रोथ 2.5 फीसदी तक गिर सकती है, जबकि महंगाई का बम फूट सकता है और ये 5.4 फीसदी पर पहुंच सकती है।  Hormuz बंद होने से बिगड़ेंगे हालात शेवरॉन (Chevron) के चेयरमैन और सीईओ माइक विर्थ ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति में भौतिक कमी दिखाई देने लगेगी, जिसके माध्यम से युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता था. विर्थ के मुताबिक, लंबे समय तक युद्ध चला तो दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ने लगेंगी, सबसे पहले एशिया में बुरा असर देखने को मिलेगा।  IMF की हालात पर पैनी नजर क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि IMF इस संघर्ष के सप्लाई चेन पर पड़ने वाले धीमे असर पर बारीकी से नजर रख रहा है. इसके असर को देखें, तो खाद पहले से ही 30% से 40% महंगी हो चुकी है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम 3% से 6% तक बढ़ सकती हैं. सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि दूसरे बिजनेस भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।  उन्होंने आगे कहा, 'मैं जिस बात पर जोर देना चाहती हूं, वह यह है कि यह वाकई बहुत गंभीर मामला बनता जा रहा है. कई पॉलिसी मेकर्स अभी भी ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, मानो यह संकट कुछ ही महीनों में खत्म हो जाएगा. वे उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे तेल की डिमांड लगातार हाई पर बनी हुई है। 

IMF ने कहा: भारत दोगुनी गति से बढ़ रहा है, पाकिस्तान को कर्ज देने वाले देश का हाल

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के बाद भी भारत की ग्रोथ का IMF यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अनुमान लगा चुका है। अब इसकी प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने भारत की नीतियों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि भारत दोगुनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। खास बात है कि पाकिस्तान लगातार IMF से कर्ज ले रहा है। IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर जॉर्जीवा ने कहा, 'आज के भारत को देखिए। भारत की विकास दर दुनिया की औसत विकास दर से दो गुनी से भी अधिक है।' उन्होंने कहा, 'ऐसा इसलिए हो सका, क्योंकि फंडामेंटल्स या बुनियाद मजबूत है।' भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने का अनुमान पीटीआई भाषा के अनुसार, IMF ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। 'वैश्विक आर्थिक परिदृश्य' रिपोर्ट में यह अनुमान जताते हुए कहा कि इस साल 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मुद्राकोष ने भारत के संदर्भ में कहा, 'वर्ष 2026 के लिए वृद्धि अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की हल्की बढ़ोतरी की गई है। इसके पीछे 2025 के मजबूत प्रदर्शन का असर और भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने जैसे कारक हैं। इन कारकों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।' इसके साथ ही मुद्राकोष ने वर्ष 2027 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान जताया। साथ ही आईएमएफ ने 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025 के अनुमानित 3.4 प्रतिशत से कम है। पाकिस्तान को मिली सऊदी अरब से मदद सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। इसी के साथ मौजूदा पांच अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज के पुनर्भुगतान की मियाद भी और तीन साल के लिए बढ़ा दी है। पाकिस्तान को यह मदद ऐसे समय में मिली है जब वह इस महीने UAE को 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है, जिसकी वजह से उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है। IMF ने शर्त लगाई है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं (सऊदी अरब, चीन और यूएई) को मौजूदा तीन साल के कार्यक्रम के पूरा होने तक देश के साथ अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी।

वैश्विक संकट के बीच चमका भारत! IMF ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान, मार्केट में पॉजिटिव संकेत

नई दिल्ली. वैश्विक तनाव और ईरान-अमेरिका युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था IMF (International Monetary Fund) ने भारत की ग्रोथ को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है, जो यह संकेत देता है कि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जहां एक तरफ वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव है, वहीं भारत इस माहौल में भी बेहतर प्रदर्शन करता नजर आ रहा है। आइए इस रिपोर्ट को जरा विस्तार से समझते हैं। IMF (International Monetary Fund) के अनुसार, भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.6% रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से 1% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। वहीं IMF (International Monetary Fund) ने FY27 और FY28 के लिए ग्रोथ अनुमान 6.5% रखा है, जो स्थिर और संतुलित विकास की ओर इशारा करता है। इस सुधार के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भारत की मजबूत घरेलू मांग और पिछले साल का बेहतर आर्थिक प्रदर्शन है, जिसका असर आगे भी दिख रहा है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर टैरिफ में कटौती से भी निर्यात को राहत मिली है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट मिला है। महंगाई यानी (Inflation) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। IMF (International Monetary Fund) का अनुमान है कि FY27 में महंगाई 4.7% और FY28 में 4% तक आ सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आम लोगों पर महंगाई का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर स्थिति इतनी मजबूत नहीं दिख रही है। IMF (International Monetary Fund) ने दुनिया की कुल ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। वैश्विक ग्रोथ 2026 में 3.1% और 2027 में 3.2% रहने का अनुमान है, जो पिछले औसत से कम है। इसका मुख्य कारण बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, महंगे कमोडिटी दाम और वैश्विक व्यापार में गिरावट है। IMF ने चेतावनी भी दी है कि अगर मध्य-पूर्व का संकट और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक ग्रोथ पर दबाव आ सकता है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। IMF का यह अपडेट न सिर्फ निवेशकों बल्कि आम लोगों के लिए भी भरोसा बढ़ाने वाला है कि आने वाले समय में भारत आर्थिक मोर्चे पर मजबूत बना रह सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर IMF की मुहर, भाजपा बोली—राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति को जवाब

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रशंसा किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि आईएमएफ का भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ करना राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब है। सीआर केसवन ने राहुल गांधी को 'लीडर ऑफ पेसिमिज्म' (एलओपी) बताते हुए कहा, "उन्होंने जानबूझकर झूठ बोला और भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा-भला कहा। क्या वे अब देश और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे?" भाजपा प्रवक्ता ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "आईएमएफ की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब और झटका है। उन्होंने देश की शानदार प्रगति और विकास को कम आंकने की कोशिश की थी। राहुल गांधी को जनता बार-बार नकार रही है, क्योंकि अपने छोटे, नाकाम राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत को गाली देने और बदनाम करने में उन्हें कोई पछतावा या शर्म नहीं है।" ज्ञात हो कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने कुछ महीने पहले भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' करार दिया था। राहुल गांधी ने अपने एक बयान में कहा, "सब जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मरी हुई अर्थव्यवस्था है। इस बारे में पूरी दुनिया जानती है।" हालांकि, आईएमएफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि हाल की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर गति से बढ़ी है। आईएमएफ ने यह भी कहा कि वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका बहुत अहम है। भारत की 2025 की आर्थिक वृद्धि को लेकर पूछे गए सवाल पर आईएमएफ की संचार विभाग की निदेशक जूली कोजेक ने कहा, "भारत ग्लोबल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है, भले ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल में अनिश्चितता छाई हुई हो।" कोजेक ने आगे कहा, "हमने देखा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है।" इससे पहले, भारत ने पहली और दूसरी तिमाही में क्रमशः 7.8 प्रतिशत और 8.2 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ रेट दर्ज की। इसकी तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत से काफी ऊपर ग्रोथ रहने का अनुमान है। एक प्रमुख एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की कुल ग्रोथ रेट 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

आर्थिक बदहाली के बीच पाकिस्तान को IMF से राहत, नियमों की अनदेखी के बाद भी मिली मदद

नई दिल्ली  पाकिस्तान वर्षों से एक के बाद एक आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बेलआउट पैकेजों पर उसकी निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि आईएमएफ की शर्तों का बार-बार उल्लंघन करने के बावजूद पाकिस्तान को लगातार कर्ज मिलता रहा है। अब पाकिस्तान अपने 25वें आईएमएफ ऋण कार्यक्रम की ओर बढ़ चुका है। ताजा समझौते के तहत पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) पैकेज 37 महीनों के लिए मिला है, साथ ही 1.4 अरब डॉलर का रेज़िलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फंड (आरएसएफ) भी शामिल है। अक्टूबर में हुए स्टाफ-लेवल एग्रीमेंट के अनुसार, पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत 1 अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत 20 करोड़ डॉलर मिलेंगे। इस तरह दोनों व्यवस्थाओं के तहत अब तक कुल 3.3 अरब डॉलर का वितरण हो चुका है। एशियन लाइट अखबार में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह वित्तीय मदद अस्थायी राहत जरूर देती है, लेकिन यह पाकिस्तान की बाहरी बेलआउट पर बढ़ती निर्भरता को भी उजागर करती है। आईएमएफ के कार्यक्रमों का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता और अनुशासन लाना होता है, लेकिन पाकिस्तान अब तक दीर्घकालिक सुधार लागू करने में असफल रहा है। आईएमएफ का काम घरेलू नीतियों का सूक्ष्म प्रबंधन करना नहीं, बल्कि राजकोषीय घाटा कम करना, राजस्व बढ़ाना और सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की सरकारें राजनीतिक रूप से सुविधाजनक लेकिन सामाजिक रूप से प्रतिगामी फैसले लेती रही हैं। इसका नतीजा यह है कि वेतनभोगी वर्ग और आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता गया, जबकि कृषि, रियल एस्टेट और रिटेल जैसे शक्तिशाली क्षेत्रों को कर के दायरे से बाहर रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में केवल करीब 2 प्रतिशत लोग ही आयकर देते हैं, जो कर व्यवस्था की गंभीर असमानता को दर्शाता है। नवंबर 2025 में जारी आईएमएफ की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की लगातार बनी हुई समस्या को रेखांकित करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए 15-सूत्रीय सुधार एजेंडा तुरंत लागू करने की मांग की गई थी। आईएमएफ की गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान का बजट विश्वसनीय नहीं है। कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बावजूद उन्हें पूरे कार्यकाल में पर्याप्त धन नहीं मिल पाता, जिससे देरी और लागत में भारी वृद्धि होती है। वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने 9.4 ट्रिलियन रुपये के अतिरिक्त खर्च को मंजूरी दी, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुना अधिक है। सांसदों के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले निर्वाचन क्षेत्र विकास कोष भी पूंजी निवेश को प्रभावित करते हैं और निगरानी को कमजोर बनाते हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। आईएमएफ भले ही वित्तीय अनुशासन पर जोर देता हो, लेकिन असली समस्या पाकिस्तान के शासक वर्ग की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। सरकारी संस्थानों के विलासितापूर्ण खर्च जारी हैं, सब्सिडी का गलत दिशा में इस्तेमाल हो रहा है और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकार बने हुए हैं। वहीं पेंशनरों को कटौती झेलनी पड़ रही है और गरीब उपभोक्ताओं पर गैस के फिक्स्ड चार्ज का बोझ डाला जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में यह असमानता साफ दिखती है। खपत आधारित बिलिंग के बजाय फिक्स्ड चार्ज लागू किए गए हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों पर बेमेल असर पड़ता है। आईएमएफ लागत वसूली की बात करता है, लेकिन प्रगतिशील टैरिफ और लाइफलाइन स्लैब लागू करना पूरी तरह पाकिस्तान सरकार के हाथ में है। आईएमएफ और पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) दोनों ने डेटा आधारित सुरक्षा उपायों, भ्रष्टाचार-रोधी दिशानिर्देशों और उचित जांच की जरूरत पर जोर दिया है, लेकिन इन सिफारिशों को लागू करने में प्रगति बेहद धीमी रही है।

IMF का पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर का और वित्तीय सहायता देने का फैसला, बावजूद इसके देश की स्थिति पर चिंता

इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता और सुधारों में कमी पर चिंता जताने के बावजूद देश को 1.2 अरब डॉलर की नई किस्त जारी कर दी है। यह राशि पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और महंगाई को नियंत्रित करने में सहायक होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दीर्घकालिक सुधारों के बिना जोखिम भरा हो सकता है। IMF ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर की तीसरी किस्त जारी करने की घोषणा की। यह धनराशि उन दो कार्यक्रमों के तहत दी गई है, जिनका उद्देश्य देश में आर्थिक सुधारों को समर्थन देना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। इस ताजा किस्त के साथ वाशिंगटन स्थित संस्था द्वारा इस्लामाबाद को अब तक कुल 3.3 अरब डॉलर जारी किए जा चुके हैं। आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक नाइजल क्लार्क ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान द्वारा लागू किए गए सुधारों ने हालिया झटकों के बावजूद मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेष रूप से इस वर्ष की मॉनसून बाढ़ों का उल्लेख किया, जिनमें सितंबर तक 1,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। क्लार्क ने कहा कि पाकिस्तान सरकार द्वारा प्राथमिक राजकोषीय संतुलन लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता, साथ ही बाढ़ प्रभावितों को जरूरी आपात सहायता प्रदान करना, उनकी वित्तीय विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, आईएमएफ अधिकारी ने सरकार से आर्थिक डेटा कलेक्शन में सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण और निवेश को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख सुधारों की गति तेज करने का आग्रह भी किया। गंभीर आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से लंबे आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। विदेशी कर्ज पर भारी निर्भरता रखने वाला देश 2023 में डिफॉल्टर होने से बाल-बाल बचा। तब 2024 में आईएमएफ द्वारा 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की मंजूरी मिली थी। दक्षिण एशियाई यह देश अर्जेंटीना और यूक्रेन के बाद आईएमएफ का तीसरा सबसे बड़ा देनदार है। वित्तीय मोर्चे पर राहत पाने के लिए पाकिस्तान ने जनवरी 2024 में विश्व बैंक से 10 वर्षों के लिए 20 अरब डॉलर के वित्तीय पैकेज पर भी समझौता किया था। आईएमएफ की ताजा किश्त से पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक आर्थिक सुधारों को तेज़ी से लागू किए बिना स्थिति में स्थायी सुधार की संभावना अभी सीमित है।

वैश्विक व्यापार को खतरा! IMF ने दी टैरिफ पर चेतावनी, भारत की नीतियों की सराहना

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बड़ी चेतावनी (IMF Warning On Tariff) दी है. आईएमएफ की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इसे ग्लोबल ट्रेड को नुकसान पहुंचाने वाला कदम करार दिया है और कहा है कि ये उभरते बाजारों की ग्रोथ को धीमा कर सकता है. इसे साथ ही उन्होंने एक बार फिर इंडियन इकोनॉमी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसका खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी है.    बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का हथियार बना टैरिफ आईएमएफ चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने टैरिफ से होने वाले संभावित नुकसानों के बारे में अलर्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में दुनिया की कुछ कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संरक्षणवादी उपायों की ओर मुड़ गई हैं और टैरिफ को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं. वहीं ज्यादातक देश अभी भी खुले और निष्पक्ष व्यापार का समर्थन करना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि उनका मानना ​​है कि ग्लोबल ग्रोथ के लिए यही सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि टैरिफ के बढ़ते प्रयोग से वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंच सकता है. जॉर्जीवा ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर कहा कि, 'दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने साझेदारों के साथ अपने संबंधों में टैरिफ को एक साधन के रूप में इस्तेमाल करना चुना है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बाकी दुनिया ने इसका अनुसरण नहीं किया है, कम से कम अभी तक तो नहीं.' 191 देशों में से 3 टैरिफ के पक्ष में  आईएमएफ चीफ ने आगे बताया कि IMF के 191 सदस्य देशों में से महज तीन देशों अमेरिका, चीन और कुछ हद तक कनाडा ने टैरिफ लगाने के लिए ज्यादा जोरदार कदम उठाए हैं. वहीं बाकी बचे 188 देशों ने कहा है, 'शुक्रिया, लेकिन नहीं.' इन सभी देशों ने मोस्ट फेवर्ड नेशन के नियमों के तहत ही व्यापार जारी रखने का विकल्प चुना है. क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से अपील की है कि वे एक खुली, निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली की दिशा में काम करें. भारत पर IMF को भरोसा वैश्विक संगठन आईएमएफ की निदेशक ने भारत पर फिर से भरोसा जताते हुए कहा है कि Indian Economy दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अपने सुधार प्रयासों के कारण ग्लोबल ग्रोथ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत एक ओपन इकोनॉमी है और खुला, प्रतिस्पर्धी और सुधार-संचालित बने रहना ही आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है. गौरतलब है कि IMF ने हाल ही में FY26 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 6.6% किया है. इसके साथ ही भारत को दुनिया के विकास के लिए ग्रोथ इंजन करार दिया था.