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मानसून बना किसानों का सहारा, झारखंड के खेतों में लौटी हरियाली और उम्मीद

 रांची मानसून की सक्रियता और लगातार हो रही बारिश ने पंच परगना क्षेत्र (सिल्ली, बुण्डू, बरेंदा, राहे और तमाड़) के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. पिछले दो दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने लगा है. इसके साथ ही धान की रोपाई का कार्य भी रफ्तार पकड़ चुका है. ग्रामीण इलाकों में खेतों की रौनक लौट आई है और किसान पूरे उत्साह के साथ खेती-किसानी में जुट गए हैं. सुबह से शाम तक खेतों में जुटे किसान इन दिनों सुबह से लेकर शाम तक किसान परिवार के सदस्य और खेतिहर मजदूर धान रोपाई में लगे हुए हैं. खेतों में महिलाएं धान की पौध रोप रही हैं, जबकि पुरुष जुताई, पाटा चलाने और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं. गांवों का माहौल पूरी तरह खेती-किसानी के रंग में रंग गया है. नर्सरी से निकाली जा रही धान की पौध पंच परगना क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों और गांवों में किसानों ने पहले से तैयार नर्सरी से धान की पौध निकालकर रोपाई शुरू कर दी है. वहीं, कुछ स्थानों पर अभी खेतों की अंतिम तैयारी की जा रही है, ताकि अगले कुछ दिनों में रोपाई पूरी की जा सके. अच्छी बारिश से बेहतर उत्पादन की उम्मीद किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नियमित रूप से बारिश होती रही तो इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है. उनका मानना है कि समय पर बारिश होने से खेती की लागत भी कम होगी और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा. कृषि विशेषज्ञों ने बताया मौसम अनुकूल कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी और पानी का होना जरूरी है. वर्तमान मौसम धान की खेती के लिए अनुकूल है. समय पर रोपाई पूरी होने से फसल की वृद्धि बेहतर होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है. यदि बीच सीजन में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो फसल प्रभावित हो सकती है. गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी मिली रफ्तार खेती शुरू होने के साथ ही कृषि कार्यों से जुड़े मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा है. गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. कृषि उपकरण, खाद और बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है. किसान धान की खेती के लिए आवश्यक उर्वरक, बीज और अन्य कृषि सामग्री की खरीदारी में जुटे हैं.

महतारी वंदन योजना से बदली सुनीता साहू की जिंदगी, बच्चों की बेहतर शिक्षा का बना मजबूत आधार

मुंगेली : महतारी वंदन योजना बनी सुनीता साहू के बच्चों की बेहतर शिक्षा का आधार प्रतिमाह की सहायता राशि से बच्चों की पढ़ाई और स्कूल वैन का खर्च हो रहा आसान मुंगेली  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना जिले की हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। जिले के ग्राम लिम्हा की निवासी श्रीमती सुनीता साहू भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने परिवार के भविष्य को संवार रही हैं। उन्हें प्रतिमाह मिलने वाली 01 हजार रुपये की सहायता राशि बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने का अवसर दे रही है।       सुनीता ने बताया कि इस राशि से वे अपने बच्चों की स्कूल वैन का किराया और पढ़ाई से जुड़ी आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रही हैं। पहले बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों का प्रबंधन करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता ने काफी राहत दी है। इससे बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले से अधिक संतुलित हुई है। उन्होंने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि छोटी जरूर है, लेकिन नियमित रूप से मिलने के कारण यह परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गई है। इससे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देना आसान हुआ है और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा है। सुनीता साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और परिवार की आर्थिक मजबूती का प्रभावी माध्यम बन रही है। 

मौसम विभाग की चेतावनी: भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट

लखनऊ यूपी में अगले एक हफ्ते तक झमाझम बारिश होने वाली है। इसे लेकर मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। वैज्ञानिकों की मानें तो आज और कल पूर्वी और पश्चिमी यूपी के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं, कई जिलो में यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। वहीं, बीते दिनों बारिश से कई स्थानों पर तापमान में गिरावट भी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक उत्तर प्रदेश के मौसम में सक्रियता बनी रहने की संभावना व्यक्त की है। छह जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है। इस बीच सोमवार सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और पिछले कई दिनों से पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। हालांकि, महज कुछ घंटे की बारिश से ही कई इलाकों में जलभराव हो गया। इससे पहले रविवार को पूरे दिन तेज धूप और उमस के कारण लोग बेहाल रहे, लेकिन सोमवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने बादल छा गए और शहर के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण मौसम सुहावना हो गया, वहीं कई प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, अगले सात दिनों तक प्रदेश के मौसम में सक्रियता बनी रहने की संभावना है। 6 और 7 जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के झोंके (60 किमी प्रति घंटे तक) आने की चेतावनी जारी की गई है। 12 जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी यूपी में बारिश मौसम विभाग ने सात से 12 जुलाई के दौरान पूर्वी यूपी के अनेक स्थानों तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है। 10 और 11 जुलाई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने, आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी परामर्श का पालन करने की सलाह दी है। आज इन जिलों में मेघगर्जन के साथ वज्रपात की संभावना वैज्ञानिकों के मुताबिक 6 जुलाई को बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, संभल, जालौन, महोबा, हमीरपुर, झांसी, ललितपुर और आसपास के जिलों में मेघगर्जन के साथ वज्रपात की संभावना है। 7 जुलाई को इन जिलों में झमाझम बारिश का यलो अलर्ट बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर में झमामझ बारिश के साथ यलो अलर्ट जारी है।

झारखंड में निवेश को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े प्रोत्साहन का ड्राफ्ट जारी

रांची  झारखंड में नई उद्योग नीति के तहत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पर अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक सब्सिडी (अनुदान) देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही झारखंड की नई उद्योग नीति 2026 के तहत माइक्रो उद्योगों को 25 लाख रुपये तक का ब्याज अनुदान देने का प्रस्ताव दिया गया है। राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में मुख्य रूप से कैपिटल इन्वेस्टमेंट (पूंजी निवेश) पर दी जाने वाली सब्सिडी की अधिकतम सीमा को काफी बढ़ा दिया गया है, जबकि अन्य प्रोत्साहन जैसे कि स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की 100% प्रतिपूर्ति को बरकरार रखा गया है। शैक्षणिक संस्थानों को बड़ा लाभ, पूंजी निवेश सब्सिडी को डेढ़ गुना बढ़ाया गया झारखंड औद्योगिक निवेश प्राेत्साहन नीति के तहत 2021 में 20 करोड़ रुपये की सीमा थी, जिसे नए ड्राफ्ट में डेढ़ गुना बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये (भूमि को छोड़कर) कर दिया गया है। यह सब्सिडी कुल निवेश के 25% तक होगी। इसके साथ ही ब्याज सब्सिडी पांच साल की अवधि के लिए पांच प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ रुपये निर्धारित की गई है (2021 में इसकी कोई अलग सीमा नहीं थी)। सरकार की ओर से प्रस्तावित इस सुविधा को लेने के लिए उद्योगों को न्यूनतम सौ सीटें और इंजीनियरिंग की कम से कम पांच स्ट्रीम के साथ पर्याप्त बुनियादी ढांचा होने की शर्त को अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिलेगी बढ़ी हुई सहायता ड्राफ्ट में अस्पतालों और नर्सिंग कालेजों की स्थापना के लिए सब्सिडी की लीमिट में भी बढ़ोतरी की गई है। पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत की सब्सिडी अब अलग-अलग श्रेणियों में इस प्रकार होगी :     मल्टी-स्पेशियलिटी हास्पिटल (ग्रेड 1) : पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये।     मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (ग्रेड II) : 12.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये।     सुपर-स्पेशियलिटी हास्पिटल : 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30 करोड़ रुपये।     नर्सिंग कालेज : पहले की तरह अधिकतम 1 करोड़ रुपये सब्सिडी का प्रविधान बरकरार रहेगा। इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी पांच साल के लिए 5 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी नई अधिकतम सीमा तीन करोड़ रुपये (2021 में इस पर कोई निर्धारित सीमा नहीं थी) रखी गई है। इसके अलावा, पूर्ण स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की 100 प्रतिशत वापसी का प्रविधान भी यथावत रखा गया है। सरकार के इस ड्राफ्ट का उद्देश्य राज्य में निजी निवेश को आकर्षित करना और क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना है।

आठ जिलों में 60 करोड़ की लागत से आदिवासी छात्रावास निर्माण का फैसला

पटना  राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देने हेतु आठ जिलों में 19 छात्रावास का निर्माण कराने जा रही है। इस पर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 60 करोड़ 42 लाख रुपये खर्च होंगे। यह राशि जल्द ही पश्चिम चंपारण, कटिहार, बांका, भागलपुर, जमुई, कैमूर, रोहतास और पूर्णिया जिले को आवंटित की जाएगी। इस राशि में केंद्र सरकार का अंश 36 करोड़ 25 लाख रुपये है, जबकि राज्यांश 24 करोड़ 17 करोड़ रुपये है। प्रत्येक छात्रावास में 100 छात्रों के लिए सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। इन छात्रावासों का संचालन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर किया जाएगा। ताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर संचालन मिली जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत छात्रावासों का निर्माण कराने का फैसला लिया गया है। इस महाअभियान का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक शिक्षा सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के सहयोग से इन छात्रावासों का संचालन नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर किया जाएगा। इन छात्रावासों में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकेंगे।

जिला स्तरीय टेस्टिंग और असेसमेंट से 2100 स्कूलों में परीक्षा सुधार अभियान तेज

रांची  जिला स्तरीय प्रोजेक्ट टीम (टेस्टिंग, इवेल्यूएशन, असेसमेंट एंड मेंटरिंग) से सरकारी विद्यालयों की रूपरेखा बदल रही है। पहली जुलाई को जिले के 2100 सरकारी विद्यालयों में प्रोजेक्ट टीम के तहत आयोजित परीक्षा में डेढ़ लाख बच्चे शामिल हुए। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल का फलाफल सामने आने लगा है। प्रोजेक्ट टीम के तहत विद्यालयों में टेस्टिंग, इवेल्युएशन, असेसमेंट एंड मेंटरिंग को गति दी जा रही है। इसके तहत प्रोजेक्ट टीम का गठन भी किया गया है, जिसकी मदद से लगातार विद्यालयों की मानिटरिंग की जा रही है। जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी चिन्हित इस प्रोजेक्ट को नियंत्रित और निर्देशित करने के लिए जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी भी चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें नामित करते हुए निर्देशित कार्यों में सहयोग करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। नोडल पदाधिकारी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रोजेक्ट टीम को संचालित कर रहे हैं। बता दें कि राज्य द्वारा संचालित रेल (रेगुलर असेसमेंट फार इंप्रूव्ड लर्निंग), एसए 1, एसए 2, आठवीं बोर्ड एवं जिले द्वारा संचालित विभिन्न परीक्षाओं जैसे प्री-एसए 1, एसए 2 और प्री-आठवीं बोर्ड की परीक्षा के सफल संचालन एवं शत प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति, प्रश्नपत्रों को विद्यालयों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यक्रम में प्राथमिकता के आधार पर समाहित किया गया है। मासिक मूल्यांकन में हो रही ये पहलें     जांच परीक्षा, जेसीईआरटी के द्वारा उपलब्ध कराई गई समय सारिणी एवं प्रश्नपत्र के अनुसार संचालन     आइडियल एनईपी 2020 के पाठ्यक्रम को ससमय पूर्ण कराते हुए रेल परीक्षा के लिए छात्रों को तैयार करना     शत प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति, छात्रों की संख्या की प्रविष्टि ई-विद्यावाहिनी ऐप पोर्टल के संबंधित खंड में समाहित करना     परीक्षा के बाद छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन परीक्षा समाप्ति के एक सप्ताह के अंदर करते हुए प्राप्तांकों को रजिस्टर और ई-विद्यावाहिनी ऐप पोर्टल में अनिवार्य रूप से अपलोड करना     छात्र-छात्राओं के परीक्षाफल से संबंधित जानकारी पीटीएम में साझा करना     परीक्षा में निम्न प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षकों द्वारा विशेष शिक्षण योजना तैयार कर क्रियान्वित करना     परीक्षा में छात्रों की उपस्थिति से संबंधित डेटा का विद्यालय वार समीक्षा प्रखंड के नोडल के द्वारा करते हुए जिला नोडल पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराना     डीडीओ, डिस्ट्रिक्ट एपीओ, डिस्ट्रिक्ट एमआइएस, ब्लाक नोडल टीचर, बीपीओ, बीआरपीएस, सीआरपी द्वारा परीक्षा अवधि में विद्यालय भ्रमण करते हुए प्रतिवेदन नोडल पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराना शामिल है। इस पहल से ये मिल रहा लाभ इस पहल से सभी विद्यालयों में परीक्षा सुनिश्चित कराने में जहां मदद मिल रही है वहीं, शत-प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति भी अनिवार्य रूप से मानिटर हो पा रही है। क्वेश्चन सेटर ग्रुप के द्वारा सभी वर्गों के लिए विषयवार प्रश्न पत्रों का निर्माण कराया जा रहा है। परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सभी विद्यालयों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी विद्यालय अपने उपलब्ध संसाधन के अनुसार छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध करा रहे हैं, या ब्लैकबोर्ड पर लिखकर बच्चों के समक्ष दे रहे हैं। परीक्षा के बाद छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन परीक्षा समाप्ति के तीन दिनों के अंदर करते हुए प्राप्तांकों को विद्यालय के रजिस्टर और विभाग को भेजा जाएगा। डेटा का विद्यालयवार समीक्षा परीक्षा में छात्रों की उपस्थिति से संबंधित डेटा का विद्यालयवार समीक्षा प्रखंड के नोडल के द्वारा करते हुए जिला नोडल पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला नोडल पदाधिकारी, जिले के नामित विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए प्रश्न पत्रों का निर्माण कराने के लिए प्राधिकृत हैं। इसका सीधा लाभ आठवीं बोर्ड के वैसे परीक्षार्थियों को भी मिलेगा जिन्हें किसी कारणवश प्रश्न पत्र या अंकपत्र नहीं मिलने की शिकायत रहती है।  

इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में रणनीति बदलेगा भारत, तेज गेंदबाज को मौका

नई दिल्ली ओल्ड ट्रैफर्ड में रणनीति उलटी पड़ने के बाद भारतीय टीम अब ट्रेंट ब्रिज में नया दांव खेलने की तैयारी में है. मंगलवार को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय में कप्तान श्रेयस अय्यर और टीम प्रबंधन परिस्थितियों के अनुरूप अतिरिक्त तेज गेंदबाज के साथ उतर सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो इसकी सबसे बड़ी कीमत लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को चुकानी पड़ सकती है, जिनकी प्लेइंग इलेवन में जगह खतरे में नजर आ रही है. पहला टी20 बारिश की भेंट चढ़ गया था, जबकि दूसरे मुकाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में पांच मैचों की सीरीज में बराबरी हासिल करने के लिए तीसरा मुकाबला भारतीय टीम के लिए बेहद अहम है. टीम प्रबंधन अब परिस्थितियों के अनुरूप संयोजन चुनने पर अधिक जोर देता नजर आ रहा है. बिश्नोई के प्रदर्शन ने बढ़ाई मुश्किल मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 में बिश्नोई पूरी तरह लय से बाहर दिखे. उन्होंने तीन बैक-फुट नो-बॉल फेंकी और पारी के 17वें ओवर में 29 रन लुटा दिए. चार ओवरों में बिना विकेट लिए 60 रन खर्च करने वाले बिश्नोई के प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है. ओल्ड ट्रैफर्ड जैसी परिस्थितियों में अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती के रहते तीसरे विशेषज्ञ स्पिनर की जरूरत नहीं थी. ट्रेंट ब्रिज में तेज गेंदबाजों को मिलने वाली मदद को देखते हुए भारतीय टीम अतिरिक्त पेसर के साथ उतर सकती है. ऐसे में प्रिंस यादव मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. नई गेंद से स्विंग कराने और पिच से अतिरिक्त उछाल हासिल करने की उनकी क्षमता इंग्लैंड की परिस्थितियों में भारत के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. हालांकि पिछले मुकाबले में अर्शदीप सिंह ने नई गेंद से दो शुरुआती विकेट समेत तीन सफलताएं हासिल की थीं, लेकिन इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने उनके एक ओवर में 27 रन बटोरकर मैच का रुख बदल दिया. इंग्लैंड ने 191 रनों का लक्ष्य एक ओवर शेष रहते हासिल कर लिया था. बीच के ओवरों में फंस रही बल्लेबाजी गेंदबाजी के साथ-साथ भारतीय बल्लेबाजी को भी अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा. पिछले कुछ महीनों में आईपीएल समेत अधिकतर मुकाबले सपाट विकेटों पर खेलने वाली भारतीय बल्लेबाजी इंग्लैंड की अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और सैम करन की विविधताओं के सामने सहज नहीं दिखी है. कप्तान श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने उपयोगी पारियां जरूर खेली हैं, लेकिन वे अब तक इंग्लैंड के गेंदबाजों पर पूरी तरह हावी नहीं हो सके हैं. तिलक वर्मा ने पिछले मुकाबले में अंतिम ओवरों में तेज रन बनाए, मगर बीच के ओवरों में रन गति बनाए रखना भारत की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. लियाम डॉसन, विल जैक्स और आदिल राशिद ने अपनी धीमी गति और विविधताओं से भारतीय बल्लेबाजों को लगातार बांधे रखा है. भारत ने दूसरे टी20 में 190 रन बनाए, लेकिन यह स्कोर इंग्लैंड की मजबूत बल्लेबाजी के सामने पर्याप्त साबित नहीं हुआ. भारतीय बल्लेबाजों में केवल अभिषेक शर्मा ही अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली में नजर आए. उन्होंने 24 गेंदों पर 43 रन बनाकर शुरुआत तो शानदार दी, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. अभिषेक और वैभव पर रहेंगी निगाहें ट्रेंट ब्रिज की बल्लेबाजी के अनुकूल पिच पर एक बार फिर अभिषेक शर्मा और युवा वैभव सूर्यवंशी से तेज शुरुआत की उम्मीद होगी. डेब्यू का दबाव पीछे छोड़ चुके वैभव इस बार अधिक बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी करने की कोशिश करेंगे. यदि दोनों सलामी बल्लेबाज पावरप्ले का पूरा फायदा उठाने में सफल रहते हैं तो भारत बड़े स्कोर की नींव रख सकता है. दूसरी ओर, भारतीय स्पिन आक्रमण की अगुआई कर रहे वरुण चक्रवर्ती भी टी20 विश्व कप के बाद वाली धार नहीं दिखा सके हैं. उनकी गेंदों में पहले जैसा छल और गति में बदलाव नजर नहीं आया, जिसका फायदा इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उठाया. ट्रेंट ब्रिज की पुरानी यादें बदलना चाहेगा भारत भारत ने पिछली बार 2022 में ट्रेंट ब्रिज में टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था. उस मैच में सूर्यकुमार यादव ने 48 गेंदों पर शानदार शतक जड़ा था, लेकिन उनकी विस्फोटक पारी भी भारत को हार से नहीं बचा सकी थी. इस बार भारतीय टीम उस याद को पीछे छोड़ते हुए सीरीज में बराबरी हासिल करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.

ट्रंप की एंट्री से गरमाया फुटबॉल विवाद, फीफा के फैसले पर सोशल मीडिया में हंगामा

 नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका के फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन विवादों में घिर गए हैं। इसमें संयुक्त राज्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि ट्रंप के फोन कॉल की वजह से बालोगुन पर लगे बैन को फीफा ने हटा दिया। दरअसल, अमेरिका का सामना राउंड ऑफ-32 में बोस्निया हर्जेगोविना से था। मैच में बालोगुन ने एक शानदार गोल किया। हालांकि, इस दौरान उनका पैर बोस्निया के डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच के पैर से लग गया था। इसके बाद मैच रेफरी राफेल क्लॉस ने सामान्य फाउल मानने से इनकार कर दिया। वीएआर में स्लो मोशन में देखने के बाद रेफरी ने बालोगुन को रेड कार्ड दिखा दिया और उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। फीफा ने रेड कार्ड को बताया था सही फीफा ने दो दिनों बाद साफ कर दिया कि रेड कार्ड सही है। इसके बाद बालोगुन पर अगले मैच के लिए बैन कर दिया गया। इससे उनका बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले से बाहर होना तय माना जा रहा था। हालांकि, रविवार को अचानक फीफा ने अपना फैसला बदल दिया और बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए हरी झंडी दे दी गई। फीफा ने लेकिन रेड कार्ड को पूरी तरह से खत्म नहीं किया। अगर वे आने वाले मैच में इस तरह का फाउल करेंगे, तो बैन को तुरंत लागू कर दिया जाएगा। फीफा ने अचानक कैसे बदल दिया नियम? फीफा के अचानकर फैसला बदलने की वजह से सोशल मीडिया पर इसकी जमकर आलोचना हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि फीफा ने किस नियम के तहत बैन को हटाया है। दरअसल, फीफा ने आर्टिकल 27 का इस्तेमाल कर बालोगुन के बैन को हटाया है। ये आर्टिकल फीफा को अधिकार देता है कि वो किसी खिलाड़ी के बैन को पूरी तरह से खत्म कर सकता है या फिर आंशिक रूप से खत्म कर दे। बालोगुन के लिए इसी नियम का इस्तेमाल किया गया और अगर वे अगले एक सालों कोई इस तरह का फाउल करते हैं, तो उनके ऊपर दोबारा से ये प्रतिबंध लागू कर दिए जाएंगे। डोनल्ड ट्रंप की कैसे हुई एंट्री? प्रतिबंध हटने के बाद ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट सामने आई। इसमें दावा किया गया कि बालोगुन पर बैन लगने के बाद बुधवार से लेकर रविवार के बीच ट्रंप ने फीफा के अधिकारियों को तीन बार फोन किया। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैन हटने के बाद ट्रंप ने फीफा के इस कदम को सही बताया और इसका स्वागत किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी कि फीफा ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में आकर ऐसा फैसला किया है।  

राजस्थान में सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर सरकार का बड़ा फोकस

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की. उन्होंने प्रदेश के 4 प्रमुख पार्कों का नाम उनके नाम पर करने और उनके आदर्शों को समर्पित स्मारक स्थापित करने की घोषणा की. उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों पर चलने की अपील की. चार शहरों में चार पार्कों के नाम बदले सीएम ने कहा कि जयपुर स्थित वुडलैंड पार्क, जोधपुर के विवेक विहार स्थित सेंट्रल पार्क, कोटा के रामचंद्रपुरा अटवाल नगर स्थित पार्क तथा उदयपुर की सेक्टर-12 योजना स्थित पार्क का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा. साथ ही, इन सभी स्थानों पर राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को प्रदर्शित करने वाले स्मारक भी स्थापित किए जाएंगे.       महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का संपूर्ण जीवन 'राष्ट्र प्रथम' की भावना, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति समर्पित रहा। उनके आदर्श आज भी हम सभी को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। श्यामा प्रसाद के आदर्शों को आत्मसात करने की अपील सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा क‍ि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ एकता, अखंडता और जनसेवा के लिए समर्पित रहा. उनके विचार, त्याग और राष्ट्रभक्ति आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. ऐसे में यह पहल भावी पीढ़ियों को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से प्रेरणा देने का एक विनम्र प्रयास है. सीएम ने प्रदेश के लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि वे उनके आदर्शों और संकल्पों को आत्मसात करते हुए विकसित भारत और विकसित राजस्थान के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं. इन 4 पार्कों के नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी     जयपुर का 'वुडलैंड पार्क'       जोधपुर के विवेक विहार कॉलोनी में स्थित लोकप्रिय 'सेंट्रल पार्क'       कोटा के रामचंद्रपुरा अटवाल नगर स्थित प्रमुख पार्क     उदयपुर की सेक्टर-12 योजना के तहत बने बड़े पार्क को इस सूची में शामिल किया गया है.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सीएम ने सड़क और पार्क नामकरण का ऐलान किया

पटना आने वाले दिनों में बिहार में अगर किसी सड़क का नाम श्याम प्रसाद मुखर्जी मार्ग हो तो आपको चौंकने की जरुरत बिल्कुल नहीं है। दरअसल बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी के नाम पर बिहार में सड़कों के नामकरण का ऐलान किया है। भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें कई हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर अपने आधिकारिक ऐक्स हैंडल पर एक बेहद ही खास ऐलान भी किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि अखण्ड भारत के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले युगपुरुष, भारत सरकार के पूर्व मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के नाम पर जिला मुख्यालयों में महत्वपूर्ण पार्क/सड़क का निर्माण एवं नामकरण किया जाएगा। इससे पहले एक अन्य ट्वीट में सीएम ने लिखा, 'राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। – डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी। एक मजबूत और एकजुट भारत निर्माण के दृढ़ निश्चयी, मानवता के उपासक, जनसंघ के संस्थापक, हमारे प्रेरणा पुंज परम श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती पर उन्हें कोटिश नमन!' PM मोदी ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने डॉ मुखर्जी को भारत के प्रमुख राष्ट्र-निर्माताओं में से एक बताया एवं कहा कि शिक्षा, उद्योग, मानवीय सेवा और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर मैं भारत के सबसे असाधारण राष्ट्र-निर्माताओं में से एक को नमन करता हूं, जिनका जीवन विद्वता, साहस एवं राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित रहा। उन्होंने खुद को भारत की एकता, सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।' डॉ मुखर्जी की बहुआयामी विरासत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षा, शासन एवं औद्योगिक विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उनका योगदान रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘डॉ. मुखर्जी का कई क्षेत्रों में योगदान रहा। वह एक बेहतरीन विचारक एवं शिक्षाविद् थे जिन्होंने नवाचार और भविष्य की आवश्यकता के हिसाब से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का समर्थन किया। उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि पारंपरिक क्षेत्र और लोगों की आजीविका फलती-फूलती रहे। बंगाल के अकाल के दौरान उनके मानवीय प्रयासों से मुसीबत में घिरे लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदना झलकती थी। सबसे बढ़कर, भारत की एकता एवं अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनी हुई है।’