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रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की मांग, जेलेंस्की पर क्यों भड़के डोनाल्ड ट्रंप?

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से यूक्रेनी समकक्ष जेलेंस्की पर निशाना साधा है। यूक्रेन की तरफ से रूस के कच्चा तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों को देखते हुए ट्रंप ने अपना गु्स्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि यूक्रेन को उसका नया राष्ट्रपति मिले। बता दें, कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह ऐलान किया था कि उन्होंने रूस के साथ समझौता किया है। इसके तहत अमेरिका रूस से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदेगा। इसके अलावा रूस के वैश्विक बाजार में तेल बेचने पर भी अमेरिका आपत्ति नहीं जताएगा। शनिवार को वाइट हाउस के बाहर मीडिया से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से यूक्रेन को रूसी रिफाइनरियों पर हमला करने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "उन्हें (यूक्रेन को) यह (रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाना) जरूर बंद कर देना चाहिए।" यूक्रेन की लीडरशिप पर सवाल उठाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कीव को अब अपना नया नेता चुन लेना चाहिए, जो कि बेहतर तरीके से समझौता कर सकता हो। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप लगातार यूक्रेनी राष्ट्रपति से रूस के तेल रिफाइनरियों को निशाना न बनाने के लिए कह रहे हैं। लेकिन पिछले एक हफ्ते से यूक्रेन लगातार इन्हीं रिफाइनरियों को निशाना बना रहा है। बता दें, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ट्रंप के इस फैसले का विरोध किया था, जिसमें उन्होंने रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की आलोचना की थी। जेलेंस्की ने कहा था कि अगर अमेरिका रूस से तेल खरीदता है, तो इससे मॉस्को के युद्ध जारी रखने के लिए अलग फंड मिलता रहेगा। इस फैसले से युद्ध को खत्म करने में आसानी नहीं होगी। रूस से डीजल क्यों चाहता है अमेरिका? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सबसे बड़ा सवाल वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती कीमतों का है। ट्रंप को मिडटर्म इलेक्शन का सामना करना है। ऐसे में बढ़ी हुई तेल कीमतें उनके लिए खतरा बन सकती है। चूंकि अमेरिका में ज्यादातर मालढुलाई का काम ट्रकों के जरिए ही होता है। ऐसे में डीजल यहां जरूरी है। होर्मुज के बंद होने के बाद ट्रंप के पास दूसरा कोई बड़ा ऑप्शन है नहीं। वेनेजुएला के तेल पर भले ही ट्रंप का कब्जा हो। लेकिन उसे रिफाइन करने की क्षमता अमेरिका के पास नहीं है। ऐसे में ट्रंप के सामने रूस के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। दूसरी तरफ जेलेंस्की हैं, जिन्हें इस बात का अंदाजा था कि ट्रंप इस फैसले पर ऐक्शन ले सकते हैं। इसलिए वह शुरुआत से ही रूस की रिफाइनरियों पर हमला करके उसकी क्षमता को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। जब ट्रंप ने जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के जरिए उन्हें रूस पर हमले रोकने के लिए कहा, तो जेलेंस्की ने शर्त रखी थी कि रूस को भी वादा करना होगा कि वह यूक्रेन के बिजली इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना नहीं बनाएगा। हालांकि, ट्रंप ने जोर दिया था कि रूस भले ही कोई वादा करे या न करे, लेकिन कीव को यह हमले रोकने होंगे। इस पर जेलेंस्की ने डील करने से इनकार कर दिया।

जशपुर में दंतैल हाथी की दस्तक, अस्पताल-कॉलेज और चर्च की बाउंड्री तोड़ी; वन विभाग अलर्ट

बिलासपुर सुबह का वक्त था. बच्चे स्कूल के हॉस्टल में थे. किसान अपने खेतों में धान की फसल को लेकर उम्मीद लगाए हैं. तभी खबर आई कि इलाके में हाथियों का झुंड पहुंच गया है. एक-दो नहीं, पूरे 53 हाथी. स्कूल की बाउंड्री टूट गई. खेतों में खड़ी फसल रौंद दी गई. अब जरा छत्तीसगढ़ के दूसरे जिले की तस्वीर देखिए. यहां हाथियों का पूरा झुंड नहीं, बल्कि एक दंतैल हाथी शहर के भीतर पहुंच गया. कभी अस्पताल परिसर, कभी कॉलेज और फिर चर्च तक. तीन जगहों की बाउंड्रीवाल टूट गई. ये दोनों घटनाएं रविवार को छत्तीसगढ़ के कोरबा और जशपुर में सामने आईं. कोरबा में 53 हाथियों के झुंड ने मिशन स्कूल और किसानों के खेतों में नुकसान पहुंचाया. वहीं, जशपुर जिले के कुनकुरी में झुंड से बिछड़ा एक दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया. वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं. सवाल ये है कि जंगल में रहने वाले हाथी स्कूल, खेत, अस्पताल और शहर तक कैसे पहुंच रहे हैं? और जब ऐसा होता है, तो इंसानों और हाथियों, दोनों को सुरक्षित कैसे रखा जाए? पहली कहानी कोरबा जिले के तेलियामार की है. यहां जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड मिशन स्कूल के पास पहुंच गया. झुंड में कुल 53 हाथी थे. हाथियों ने स्कूल की बाउंड्रीवाल तोड़ दी. स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के बीच डर का माहौल बन गया. नुकसान सिर्फ स्कूल की दीवार तक सीमित नहीं रहा. हाथियों के झुंड ने आसपास के खेतों में धान की फसल को रौंद डाला. सवाल है कि 53 हाथियों का इतना बड़ा झुंड आबादी के करीब पहुंच जाए, तो उससे निपटने की तैयारी कैसी होनी चाहिए? क्योंकि हाथियों को देखकर शोर मचाना, उनके करीब जाना या उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करना खतरे को बढ़ा सकता है. अब जशपुर की कहानी सुनिए, जहां दंतैल शहर में घुस आया दूसरी घटना जशपुर जिले के कुनकुरी की है. यहां एक दंतैल हाथी अपने झुंड से बिछड़कर रिहायशी इलाके में पहुंच गया. दंतैल यानी नर हाथी, जिसके लंबे दांत बाहर निकले होते हैं. इस हाथी की मौजूदगी ने इलाके में हलचल पैदा कर दी. वह हॉली क्रॉस मिशन हॉस्पिटल के परिसर तक पहुंच गया और वहां की बाउंड्रीवाल तोड़ दी. इसके बाद हाथी लोयला कॉलेज परिसर में पहुंचा. फिर उसकी मौजूदगी चर्च परिसर में भी देखी गई. हाथी ने कुल तीन स्थानों की बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचाया. अक्सर हाथी को देखने की उत्सुकता में लोग घरों से बाहर निकलने लगते हैं. कोई मोबाइल से वीडियो बनाना चाहता है, कोई पास जाकर उसे देखना चाहता है. लेकिन हाथी कोई ऐसा जानवर नहीं है, जिसके सामने खड़े होकर आराम से वीडियो बनाया जा सके. वह डर जाए, खुद को घिरा हुआ महसूस करे या अचानक दिशा बदल दे, तो गंभीर हादसा हो सकता है. इसीलिए वन विभाग की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हाथी की लोकेशन पता करना नहीं, बल्कि लोगों को उससे सुरक्षित दूरी पर रखना भी है. जंगल से बस्ती तक पहुंचने की वजह क्या है? सवाल है कि हाथी आबादी के करीब पहुंचते ही क्यों हैं? इसकी कोई एक वजह हर मामले में नहीं होती. हाथियों की आवाजाही पर जंगल में भोजन और पानी की उपलब्धता, उनके पारंपरिक रास्ते, जंगलों के आसपास खेती और मानवीय गतिविधियों का असर पड़ सकता है. लेकिन कोरबा और कुनकुरी की इन दोनों घटनाओं में हाथियों के आबादी तक पहुंचने की सटीक वजह सामने नहीं आई. हाथियों के रास्तों और इंसानी बस्तियों के बीच टकराव की समस्या केवल दीवार टूटने या फसल बर्बाद होने तक सीमित नहीं रहती. कई बार इससे इंसानों की जान पर खतरा पैदा हो जाता है. कोरबा के वन मंडलाधिकारी जितेंद्र शुक्ला के मुताबिक, हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही हैं. उन्होंने बताया कि हाथी ऐप के जरिए ग्रामीणों को भी हाथियों की मौजूदगी के बारे में तत्काल सूचना दी जा रही है. अधिकारी के अनुसार, जनहानि की खबर नहीं है. वन विभाग इतने बड़े झुंड पर निगरानी रखे हुए है, ताकि हाथियों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने दिया जा सके. हाथी ऐप से समय पर मिली जानकारी लोगों को सतर्क रहने का मौका देती है. अगर ग्रामीणों को पता हो कि हाथियों का झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है, तो वे उस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं और बच्चों को भी सुरक्षित रख सकते हैं. हालांकि, केवल सूचना देना ही पर्याप्त नहीं है. ऐसी घटनाओं में स्थानीय स्तर पर निगरानी, लोगों को जागरूक करना और हाथियों की आवाजाही के दौरान भीड़ को कंट्रोल करना भी होता है. हाथी दिख जाए, तो क्या नहीं करना चाहिए? अगर गांव के रास्ते में सामने हाथी दिखाई दे जाए. या फिर मोबाइल पर सूचना आए कि पास के खेत में हाथियों का झुंड मौजूद है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि हाथी के पास जाने या उसका रास्ता रोकने की कोशिश करने से बचा जाए. हाथी को घेरने या उसे उकसाने से बचना चाहिए. उसके सामने भीड़ लगाकर वीडियो नहीं बनाना चाहिए. बच्चों और दूसरे लोगों को हाथी के करीब नहीं जाने देना चाहिए. स्थानीय वन विभाग को जानकारी देनी चाहिए. सुरक्षित दूरी बनाए रखकर वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए. खासकर जब हाथियों का बड़ा झुंड मौजूद हो, तब यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है कि वे किस दिशा में जाएंगे. इसलिए उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करने के बजाय वनकर्मियों को स्थिति संभालने देना ज्यादा सुरक्षित है. कोरबा में 53 हाथियों का झुंड मिशन स्कूल की बाउंड्री तोड़कर खेतों तक पहुंचा. जशपुर के कुनकुरी में एक दंतैल हाथी अस्पताल, कॉलेज और चर्च परिसर तक पहुंच गया. एक तरफ स्कूल में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा का सवाल है, दूसरी तरफ किसानों की मेहनत से तैयार होती फसल का. और इन सबके बीच उन लोगों की चिंता भी है, जिन्हें रोजमर्रा के काम के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है. फिलहाल वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है.    

UNGA में भारत का दोटूक संदेश, परमाणु ब्लैकमेल से नहीं डरेंगे; आतंकवाद का मिलेगा करारा जवाब

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की प्रथम समिति की बैठक के दौरान पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए भारत ने करारा जवाब दिया है। पड़ोसी देश के द्वारा फैलाए जाने वाले प्रोपेगैंडा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारत के युवा राजनयिक और प्रथम सचिव अनमोल शेर सिंह बेदी ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आतंकवाद, परमाणु और क्षेत्रीय अस्थिरता के मुद्दों पर पाकिस्तान को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करने का हमारा अधिकार पूरी तरह अक्षुण्ण है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बेदी ने मई में भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। भारत ने कहा कि पहलगाम में हुए गंभीर उकसावे के बाद भारत ने केवल अपनी आत्मरक्षा में कदम उठाया था। भारत की यह कार्रवाई नपी-तुली, टारगेटेड और स्थिति को आगे न बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करते समय परमाणु खतरे का डर दिखाकर भारत को रोका नहीं जा सकता। सिंधु जल संधि और एक्यू खान नेटवर्क का भी जिक्र बेदी ने अपने संबोधन में दो अन्य बड़े और संवेदनशील मुद्दों का भी जिक्र किया। 1960 में हुई सिंधु जल संधि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता सद्भाव और आपसी विश्वास पर आधारित था। कोई भी देश एक तरफ तो इस विश्वास को तोड़े और दूसरी तरफ इस संधि से मिलने वाले विशेषाधिकारों का लाभ उठाना चाहे तो यह अब संभव नहीं है। पाकिस्तान के चर्चित एक्यू खान नेटवर्क (AQ Khan Network) के इतिहास का हवाला देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 का जिक्र किया। भारत ने दुनिया को आगाह किया कि वे उन्नत सैन्य तकनीक और परमाणु हस्तांतरण को लेकर उच्चतम स्तर की सतर्कता बरतें। बेदी ने कहा, "अगर कोई देश आतंकवाद की मदद से हिंसा फैलाता है तो इससे उस देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। परमाणु हथियारों को कूटनीति के रोजमर्रा के औजार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार पहले उकसावे की कार्रवाई करता है, फिर अपनी संलिप्तता से इनकार करता है और भारत के जवाब देने के बाद 'संयम' की अपील करने लगता है। इस दौरान उन्होंने भारत के तीन मुख्य सिद्धांतों का जिक्र किया। मुंहतोड़ जवाब: भारत पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा और माकूल जवाब दिया जाएगा। जीरो टॉलरेंस: भारत किसी भी तरह की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेगा। समान जवाबदेही: आतंकवाद को पनाह देने वालों और इसके मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच भारत कोई अंतर नहीं करेगा। जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में भारत ने एक बार फिर दोहराया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों को पाकिस्तान को खाली करना ही होगा। अंत में बेदी ने कहा, "भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है और रहेगा। लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों पर जवाबदेही तय नहीं होगी तो शांति केवल दो संकटों के बीच का एक छोटा सा ठहराव बनकर रह जाएगी।"

छत्तीसगढ़ में खाद खरीदने का बदलेगा तरीका, किसानों को मोबाइल ऐप से करनी होगी खरीदी

दुर्ग. किसानों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग उर्वरक विक्रय की नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर रहा है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को अब खरीफ और रबी सीजन की खेती के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की खरीदी करनी होगी। रबी सीजन में किसानो को टोकन के माध्यम से खाद मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली को पहले गरियाबंद एवं बीजापुर जिलों में मॉडल के रूप में संचालित किया गया था। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब रबी सीजन 2026-27 से इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है। यह किसानों के लिए नई व्यवस्था होगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण को सुव्यवस्थित करना, कालाबाजारी पर नियंत्रण रखना तथा किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में होने वाली अनावश्यक परेशानियों को कम करना है। नई प्रणाली के माध्यम से पीओएस मशीन से अनिवार्य विक्रय, उपलब्ध स्टाक का रियल टाइम मिलान, पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं आधार लिंकिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे उर्वरकों की अग्रिम मांग का आकलन करने, भंडारण एवं वितरण की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने तथा अमानक उर्वरकों और कालाबाजारी पर निगरानी मजबूत करने में सहायता मिलेगी। टोकन के लिए करना होगा यह प्रक्रिया नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से उर्वरक खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। जिन किसानों के पास स्वयं का मोबाइल फोन नहीं है, वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस फर्टिलाइजर ऐप इंस्टाल कर आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद टोकन अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से नजदीकी निर्धारित केंद्र से अनुशंसित मात्रा में उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

भोपाल में ध्वनि प्रदूषण का बढ़ता खतरा, 69 में से 47 चौराहों पर शोर तय मानक से ज्यादा

भोपाल. भोपाल के चौराहों पर ट्रैफिक और हॉर्न का शोर तय सीमा पार कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की जांच में 69 प्रमुख चौराहों में से 47 पर ध्वनि प्रदूषण निर्धारित मानक से ज्यादा मिला, जबकि 22 पर सीमा के भीतर रहा। सबसे ज्यादा औसत शोर काली मंदिर तिराहे पर 89.90 डेसिबल और अल्पना तिराहे पर 88.56 डेसिबल दर्ज हुआ। व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन के समय निर्धारित सीमा 65 डेसिबल है। इस लिहाज से दोनों जगह क्रमशः 24.90 और 23.56 डेसिबल ज्यादा शोर मिला। पीसीबी ने 21 से 24 सितंबर 2026 के बीच सुबह 10 से शाम 6 बजे तक जांच की। नियम 5(4) के अलग आकलन में 21 चौराहों पर सीमा पार हुई। आम आदमी पर क्या असर यदि कोई यातायात पुलिसकर्मी, वाहन चालक, ठेला संचालक या दुकानदार रोज कई घंटे ऐसे शोर के बीच रहता है, तो उसका तनाव एक-दो मिनट वहां से गुजरने वाले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा संस्थान ने काम के दौरान 85 डेसिबल के शोर पर 8 घंटे की सीमा सुझाई है। लंबे समय तक ऐसे शोर में खड़े रहने से कान, आंख में खराबी और मानसिक पीड़ा भी हो सकती है। रिहायशी इलाकों में भी राहत नहीं तय सीमा 55 डेसिबल है, लेकिन कोहेफिजा में 76.34 और त्रिलंगा में 75.02 डेसिबल शोर लाउडस्पीकर बंद, फिर भी शोर ज्यादा मामला ट्रैफिक सिग्नलों पर लगे सार्वजनिक लाउडस्पीकर की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर एनजीटी ने 21 मई 2026 को पीसीबी को ध्वनि स्तर की व्यापक जांच, ध्वनि मानचित्रण और उद्घोषणा तंत्र के नियमों की समीक्षा के निर्देश दिए थे। इसके बाद पीसीबी ने 21 से 24 सितंबर 2026 तक सुबह 10 से शाम 6 बजे के बीच चौराहों पर शोर मापा। याचिकाकर्ता के वकील हर्षवर्धन तिवारी के मुताबिक, जांच में 69 में से 68 चौराहों पर लाउडस्पीकर बंद थे। केवल कोलार तिराहे पर चालू मिला। ज्यादा शोर का कारण केवल लाउडस्पीकर होना साबित नहीं होता। वाहनों की आवाजाही आसपास शोर बढ़ाती हैं। जांच में 22 चौराहों पर शोर तय सीमा के भीतर मिला। वहीं, नियम 5(4) के अलग आकलन में 21 चौराहों पर निर्धारित सीमा पार हुई।

अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 पर भारत का रुख साफ, वायुसेना प्रमुख ने क्या कहा?

 नई दिल्ली भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने  अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 को लेकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी भारतीय अधिकारियों को इस लड़ाकू विमान के पास तक नहीं जाने देते, जबकि इसे भारत को बेचने की बात हो रही है. वायुसेना प्रमुख ने यह टिप्पणी अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर की मौजूदगी में की. दरअसल, जोधपुर में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' के समापन समारोह के मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. इसमें भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर एक साथ मंच पर मौजूद थे. इस दौरान वायुसेना प्रमुख से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 को भारत को बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव दिया है? इस सवाल पर एपी सिंह ने कहा, 'आपके लोग हमें विमान के पास भी नहीं जाने देते और आप इसे हमें बेचने की बात कर रहे हैं.' उनकी इस टिप्पणी ने अमेरिकी लड़ाकू विमान को भारत को बेचे जाने की चर्चाओं की ओर ध्यान खींचा. F-35 को लेकर अमेरिका ने नहीं दिया कोई आधिकारिक प्रस्ताव वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से F-35 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर भारत को अब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है. उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब अमेरिका की ओर से भारत को इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं. खास बात यह रही कि एपी सिंह ने यह टिप्पणी वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर की मौजूदगी में की. रूस के Su-57 लड़ाकू विमान पर क्या बोले वायुसेना प्रमुख? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख से रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर उन्होंने बताया कि रूस की ओर से इस विमान को लेकर दिया गया प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के संज्ञान में आया है. हालांकि, अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि इस लड़ाकू विमान का मूल्यांकन किया जाना चाहिए या नहीं. एपी सिंह ने कहा, 'एक बार सरकार की ओर से हमें फैसला बता दिया जाएगा, तो हम मूल्यांकन करेंगे कि Su-57 हमारी जरूरतों को किस हद तक पूरा करता है.' उनके बयान से स्पष्ट है कि रूसी लड़ाकू विमान को लेकर अभी मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय नहीं हुआ है. भारत खुद भी बना रहा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारत अपनी भविष्य की लड़ाकू विमान संबंधी जरूरतों का आकलन कर रहा है. इसके साथ ही भारत स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रहा है. भारत की दीर्घकालिक रक्षा योजनाओं में स्वदेशी लड़ाकू विमानों का विकास और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. तरंग शक्ति-2026 युद्धाभ्यास का समापन जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' में भारतीय वायुसेना समेत कुल आठ देशों की वायुसेनाओं ने भाग लिया. इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाना और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था. इसी युद्धाभ्यास के समापन समारोह के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना प्रमुख ने अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 लड़ाकू विमानों को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट की.

MP Crime: सतना में किसान पर जानलेवा हमला, गला रेतकर लूटे जेवर, हमले में पांच लोग गंभीर

सतना. जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनवारी गांव में शनिवार-रविवार की दरम्यानी देर रात नकाबपोश बदमाशों ने एक घर में घुसकर खूनी वारदात को अंजाम दिया। खेत में बने घर के बरामदे में सो रहे 40 वर्षीय किसान रज्जन सिंह पटेल की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उनकी पत्नी, दो बच्चों और बुजुर्ग दादी पर भी हमला कर घायल कर दिया। वारदात के बाद बदमाश घर से गहने और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर हमले और किसान की हत्या से गांव में दहशत फैल गई। बरामदे में सो रहे किसान पर हमला प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 12:30 बजे रज्जन सिंह पटेल अपने खेत में बने घर के बरामदे में खाट पर सो रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। इसी दौरान करीब आधा दर्जन नकाबपोश बदमाश वहां पहुंचे और रज्जन पर कुल्हाड़ी सहित अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। चीख-पुकार सुनकर बाहर निकला परिवार मृतक की पत्नी अंजना सिंह पटेल के मुताबिक, पति पर हमला होने के दौरान चीख-पुकार सुनकर वह अपनी आठ वर्षीय बेटी रागनी सिंह पटेल, 12 वर्षीय बेटे अनिकेत पटेल और बुजुर्ग दादी लल्ली सिंह पटेल के साथ बाहर निकलीं। इस दौरान हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया। अंजना के सिर और लल्ली सिंह के सिर व आंख में चोट आई है। बेटी रागनी के सिर में भी चोट लगी, जबकि बेटे अनिकेत को मामूली चोट आई है। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची घटना की सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक महेंद्र सिंह और कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। डायल 112 की सहायता से सभी घायलों को सिविल अस्पताल मैहर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल पर फोरेंसिक अधिकारी डॉ. महेंद्र पटेल अपनी टीम के साथ पहुंचे और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मामले में गांव के कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हत्या और लूट की इस वारदात को लेकर पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।

UNCTAD की चेतावनी, वैश्विक आर्थिक संकट के बीच भारत की ग्रोथ 7.3% रहने की उम्मीद

नई दिल्ली दुनिया संकट में हैं, ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर वेस्ट एशिया में तनाव का बेहद बुरा असर देखने को मिल सकता है. ये चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास निकाय यूएनसीटीएडी (UNCTAD Warning Global Economy) ने दी है. इसमें अलर्ट किया गया है कि मध्य पूर्व में टेंशन के चलते पैदा हुआ एनर्जी संकट सबसे बड़ा खतरा बना है और इससे विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है, जिसके चलते ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोख रेट बीते साल के 2.9% से घटकर 2026 में 2.6% रह सकती है. एनर्जी प्राइस का दुनिया की रफ्तार पर असर UNCTAD के मुताबिक, वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट का बुरा असर दुनिया की इकोनॉमिक रफ्तार पर पड़ रहा है. अपनी व्यापार और विकास रिपोर्ट में इसने जहां ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ रेट बीते साल के 2.9% से घटकर इस साल 2.6% होने का अनुमान जाहिर किया है. तो वहीं कहा है कि वस्तुओं और सेवाओं के वैश्विक व्यापार में इस वर्ष स्थिर कीमतों पर 4% की वृद्धि होने का अनुमान है. हालांकि, व्यापार में अनुमानित वृद्धि का अधिकांश हिस्सा हाई एनर्जी कॉस्ट के कारण होने की उम्मीद है. संकट में भी नहीं रुकेगा भारत यूएनसीटीएडी का ताजा अनुमान बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों, वैश्विक व्यापार के पैटर्न में बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के उछाल से जुड़े वित्तीय जोखिमों को लेकर चिंताओं के बीच आया है. UNCTAD ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास में एशिया का योगदान 59% रहने का अनुमान है, जिसमें भारत की ग्रोथ रेट सबसे अधिक 7.3% रहेगी. इसके अलावा चीन की 4.5% और इंडोनेशिया की 5.2% रहने की उम्मीद है. ये अनुमान वेस्ट एशिया संकट और Energy Price Hike से व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव के बावजूद ग्लोबल ग्रोथ को समर्थन देने में एशिया की भूमिका को प्रदर्शित करते हैं. US-चीन से बदला व्यापार का गणित रिपोर्ट में अमेरिका-चीन के बीच तनाव जारी रहने से व्यापार में बदलाव का जिक्र किया गया है. यूएनसीटीएडी ने कहा कि 2024 से चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार में 20% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि पूर्वी एशिया ने चीन और उत्तरी अमेरिका दोनों के साथ व्यापार का विस्तार किया है. एजेंसी की ओर से चेतावनी दी गई है कि व्यापार और निवेश पर लगे प्रतिबंधों के कारण नई कंपनियों के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में प्रवेश करना लगातार कठिन होता जा रहा है. UNCTAD के अनुसार, निर्यात नियंत्रण, निवेश की जांच और सप्लाई चेन की स्थितियां नए एंट्री लेने वाले बिजनेस के लिए रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच जटिल बना रही है. AI को लेकर ये बड़ा अलर्ट एनर्जी प्राइस से लेकर अमेरिका-चीन में तनाव (US-China Tension) के असर का जिक्र करने के साथ ही एजेंसी की एआई के बढ़ते उपयोग से व्यापार के अवसर और वित्तीय जोखिम दोनों के बारे में अनुमान जाहिर किया है. UNCTAD के अनुसार, सेमीकंडक्टर समेत AI से संबंधित उत्पाद, माल व्यापार के मुख्य चालक के रूप में उभरे हैं. हालांकि, एआई से जुड़े व्यापार में ग्रोथ का मतलब यह नहीं है कि व्यापक विकास में भी स्वतः ही लाभ होगा. रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि एआई की बढ़ती लोकप्रियता वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बाजार तेजी से कुछ ही कंपनियों पर निर्भर होते जा रहे हैं. हालांकि, एजेंसी ने इन कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं किया है.

कान्हा टाइगर रिजर्व में आज खास पहल, मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे 8 जंगली भैंसों को रिलीज

बालाघाट. लगभग 150 साल बाद मध्य प्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों (एशियाई जंगली जल भैंस) की ऐतिहासिक वापसी की अगली कड़ी में आज रविवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार रेंज में जंगल भैंसों को प्राकृतिक आवास में विमुक्त करेंगे। लगभग 165 दिन पहले 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने पुनर्स्थापन योजना के तहत चार जंगली भैंसों को सुपखार रेंज में विमुक्त किया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव नरसिंहपुर से निकलकर शाम चार बजे सुपखार पहुंचेंगे। 4.30 से पांच बजे के बीच वह करीब आठ जंगली भैंसों को प्राकृतिक आवास में विमुक्त करेंगे। वह सुपखार के गेस्ट हाउस में ही रात्रि विश्राम करेंगे। बाघ राज्य के बाद ‘व्हाइट बफेलो स्टेट’ बनने का लक्ष्य गौरतलब है कि पुनर्स्थापन अभियान 28 अप्रैल को शुरू हुआ था, जब मुख्यमंत्री ने शुरुआत में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए चार जंगली भैंसों (एक नर और तीन मादा) को बाड़े में छोड़ा। मप्र सरकार का लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश को बाघ राज्य के बाद ‘व्हाइट बफेलो स्टेट’ के रूप में भी पहचान मिले। इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण पहल जानकारी के अनुसार, 1960 और 1970 के दशक में बालाघाट के जंगलों में जंगली भैंसे पाए जाते थे, लेकिन समय के साथ वे विलुप्त हो गए। सरकार की यह पुनर्स्थापन मुहिम जिले के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्य वन विभाग की ‘कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना' के तहत किया जा रहा है।

मुस्लिम बहुल सीट पर भाजपा की जीत से सियासी हलचल, देवाशीष शर्मा ने बदरुद्दीन अजमल को 1.4 लाख वोटों से हराया

नई दिल्ली देश में आंदोलन के जरिए विपक्ष लगातार सरकार विरोधी माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में इस बा की चर्चा हो रही है। हालांकि, जब चुनावी राजनीति की बात आती है तो यहां आज भी भाजपा का वर्चस्व दिखता है। हाल ही में संपन्न विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव के नतीजों ने तो और चौंका दिया है। बंगाल की रेजीनगर विधानसभा और असम की नगांव विधानसभा सीट के नतीजे ने जरूर विपक्ष की चिंता बढ़ा दी होगी। इन दोनों मुस्लिम बहुत सीट पर भाजपा ने शानदार जीत हासिल की है। रेजीनगर जीतने के बाद तो पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने तो यहां तक कह दिया है कि मुस्लिम हमारे (भाजपा के) दोस्त बन गए हैं। रेजीनगर की चर्चा हमने पहले भी की थी। आज हम असम के नगांव लोकसभा सीट के बारे में आपको बताने वाले हैं, जहां करीब 13 मुस्लिम बताए जा रहे हैं। यहां हिंदू मतदाताओं की आबादी महज सात लाख के करीब है। विपक्ष यह मानकर चलता है कि मुस्लिम और भाजपा एक-दूसरे के लिए सियासी अछूत हैं। हालांकि इस दोनों नतीजों ने इस धारना को बदलकर रख दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि असम में भाजपा ने यह कमाल कैसे कर दिखाया। सरमा रहे जीत के रणनीतिकार असम की इस सीट पर जीत के सबसे बड़े रणनीतिकार मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को माना जा रहा है। इस उपचुनाव में भाजपा की रणनीति और प्लानिंक काफी हद तक काम की है। 2023 में सीटों के नए बंटवारे के बाद नगांव सीट साफ तौर पर मुस्लिम-बहुमत वाली लोकसभा सीट बन गई। यहां BJP की जीत मुश्किल लग रही थी। सरमा ने उम्मीदवार चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक की रणनीति खुद संभाली। भाजपा ने यहां पूर्व IAS अधिकारी और इसी जिले में अपनी सेवा दे चुके देवाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने बदरुद्दीन अजमल को करीब 1.4 लाख मतों से हरा दिया। कांग्रेस यहां पिछड़कर तीसरे नंबर पर जा पहुंची। मुस्लिम वोटरों का विपरीत ध्रुवीकरण रोका हिमंत सरमा ने उपचुनाव से काफी पहले ही देवाशीष शर्मा को नगांव का कमिश्नर नियुक्त कर दिया था। इस दौरान उन्होंने सभी समुदायों तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने की कोशिश की। इससे क्षेत्र में उनकी छवि अच्छी बन गई। जब उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान चलाए जा रहे थे तब इस बात का ध्यान रखा गया कि मुस्लिम वोटरों का विपरीत ध्रुवीकरण नहीं हो। इससे बचने के लिए प्रचार को जान-बूझकर लो प्रोफाइल रखा गया। वहीं, हिंदू वोट मजबूती से एकजुट हो गए। इस उपचुनाव में बदरुद्दीन अजमल देर से मैदान में उतरे। इसकी वजह से विपक्ष बंट गया और उपचुनाव होने की वजह से विचारधारा से जुड़े बड़े मुद्दों का असर भी कम रहा। वहीं, हिमंत सरमा को चुनाव मैनेजमेंट का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। उनके बारे में कहा जाता है कि वह पिछली हार से सीखते हैं। यही वजह है कि उन्होंने इस उपचुनाव की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी थी।