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मोदी सरकार की 12वीं सालगिरह: मोहन सरकार लाएगी खुशियों की सौगात

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 26 मई 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे कर 13वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। इस मौके को खास बनाने के लिए भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मध्य प्रदेश में सरकार भी केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ ही प्रदेश स्तर पर नई सौगातों की तैयारी कर रही है। केंद्र की योजनाओं के प्रचार का बनेगा रोडमैप सूत्रों के मुताबिक, मोहन सरकार इस अवसर पर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को प्रदेश की जनता के सामने प्रभावी तरीके से रखने का रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत गांव-गांव और शहर-शहर तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर फोकस रहेगा। जनहित योजनाओं के विस्तार के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनहित से जुड़ी योजनाओं का विस्तृत खाका तैयार करें और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की योजना बनाएं। सरकार के फोकस में खासतौर पर किसान,आदिवासी वर्ग,महिलाएं रहेंगे। ढाई साल पूरे होने पर भी सरकार का विशेष फोकस मई माह में मोहन सरकार के ढाई साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में सरकार इस अवधि को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण मान रही है। माना जा रहा है कि इसी अवसर पर कुछ नई घोषणाएं और योजनाएं सामने आ सकती हैं। जनहित योजनाओं का खाका तैयार करने का आदेश सूत्रों के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने टॉप अफसरों से कहा है कि जनहित योजनाओं का खाका तैयार कर उनके विस्तार पर योजना तैयार करें। इनमें कि सान और आदिवासी सरकार की फोकस में होंगे। बता दें, मई में मोहन सरकार के भी ढाई साल पूरे होंगे। सरकार इस मौके को खास बनाना चाहती है। जनता को ये सौगात दे सकते हैं मुख्यमंत्री     दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने वाले लाभों का दायरा बढ़ा सकते हैं।     आदिवासियों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने में तेजी।     सड़क, सिंचाई व बिजली से वंचित क्षेत्रों में नई योजना की शुरु आत।     महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, आर्थिक गतिविधियों से जोडऩा।     लघु उद्योगों की स्थापना के लिए अतिरिक्त छूट दी जा सक ती है।     कृषि आधारित उद्योगों में किसानों व उनके परिवारों को जोडऩे के प्रयास। मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए होगी बैठक बता दें कि प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का 13 मई को ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके लिए सीएम मोहन यादव द्वारा सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री ने बैठकों की डेडलाइन भी तय कर दी है जिससे कई मंत्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा ​है कि समीक्षा बैठकें 8 मई से 10 मई के बीच विभागवार होंगी। भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव(CM Mohan Yadav) शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने उन्हें अंगवस्त्रम ओढ़ाया और भेंट किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में ट्वीट भी किया। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में हुई इस भेंट की तस्वीरें अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट की हैं। इधर सीएम के दिल्ली दौरे पर भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बीजेपी में खासी गहमागहमी है। मंत्रियों के कामकाज की होगी समीक्षा इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की विभागवार समीक्षा बैठकें बुलाने के निर्देश दिए हैं। ये बैठकें 8 से 10 मई के बीच आयोजित होंगी। भोपाल में राजनीतिक हलचल तेज हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद भोपाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। निगम-मंडलों में नियुक्तियों और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।  

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ सिंहस्थ 2028 की तैयारी

उज्जैन  उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब सुविधाओं के विस्तार के साथ ही सिंहस्थ 2028 की व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं को न सिर्फ दर्शन में आसानी होगी, बल्कि उन्हें मंदिर की अन्य प्रमुख आरतियों की जानकारी भी मिल सकेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगेंगे नए शेड और बैरियर्स महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए महाकाल लोक में फिलहाल फॉगिंग फव्वारे लगाए गए हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से राहत देने के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से फैब्रिकेशन शेड लगाया जाएगा। वहीं दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जल्द ही क्यूआर आधारित बैरियर्स भी लगाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को व्यवस्थित और आसान तरीके से दर्शन हो सकेंगे। अब सांध्य और शयन आरती की जानकारी भी मिलेगी अभी तक देश-विदेश से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु केवल सुबह होने वाली भस्म आरती के बारे में ही जानते हैं। मंदिर प्रशासन अब ऐसे प्रयास करेगा, जिससे श्रद्धालुओं को सांध्य आरती और शयन आरती के महत्व की भी जानकारी मिल सके। मंदिर समिति का मानना है कि इन आरतियों में शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे और बाबा महाकाल की विशेष पूजा परंपराओं से जुड़ पाएंगे। वेबसाइट पर शुरू होगा अन्नक्षेत्र मॉड्यूल मंदिर प्रशासन ने वेबसाइट पर अन्नक्षेत्र मॉड्यूल शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मंदिर समिति का 29974.37 लाख रुपये का प्रस्तावित बजट भी पारित किया गया है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए बढ़ेंगे इंतजाम सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए मंदिर में 80 नई स्टील दानपेटियां बनाई जाएंगी। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कतार प्रबंधन को मजबूत करने के लिए करीब 1000 नए बैरिकेड्स लगाने की मंजूरी भी दी गई है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु को सुगम और व्यवस्थित दर्शन का लाभ मिल सके।

69000 बेसिक: 8th Pay Commission के बाद आपकी सैलरी में बदलाव का हाल

  नई दिल्‍ली आठवें वेतन आयोग की टीम आए दिन अलग-अलग राज्‍यों में बैठकें कर रही है और कर्मचारियों की समस्‍या और मांग जानना चाहती है, ताकि वह एक रिपोर्ट तैयार कर सके और उसे सरकार को सौंप सके. अभी तक कर्मचारियों की ओर से कुछ मांग रखी गई है, जिसके मुताबिक, मिनिमम बेसिक सैलरी 69000 रुपये और फिटमेंट फैक्‍टर 3.83 रखने की बात कही गई है।  8वें वेतन आयोग की टीम ने दिल्‍ली, पुणे और उत्तराखंड में बैठक पूरी की है. अब अगर 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की 3.83 फिटमेंट फैक्टर वाली मांग मान ली जाती है तो सिर्फ बड़े अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि सरकारी चपरासी, क्लर्क, टीचर, रेलवे कर्मचारी से लेकर IAS अधिकारियों तक की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।  न्यूनतम बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर करीब 69000 रुपये तक पहुंच सकती है. साथ ही 30 साल में पांच बार प्रमोशन हो सकता है. महंगाई भत्ता और एचआर के अलावा, अन्‍य भत्तों में तीन गुना इजाफा हो सकता है. हालांकि, यहां एक सैलरी अनुमान लगाया गया है, जिसके तहत हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि किस लेवल के कर्मचारियों की कितनी सैलरी बढ़ सकती है?  आपकी कितनी बढ़ सकती है सैलरी?  8वें वेतन आयोग के तहत लेवल 1 में चपरासी और अटेंडेंट आते हैं. लेवल 2 में लोअर डिवीजन, लेवल 3 में कांस्‍टेबल और कुशल कर्मचारी आते हैं. लेवल 4 में ग्रेड डी स्‍टेनोग्राफर और यूनियर क्‍लर्क आते हैं, जिनकी मौजूदा सैलरी 25,500 रुपये है. अगर 3.83 रखा जाता है तो मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, सैलरी में बढ़ोतरी कुछ इस प्रकार हो सकती है।  संभावित नई बेसिक पे: लगभग 68,940 रुपये     लेवल-1: 18,000 रुपये  से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये     लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर लगभग 76,000 रुपये     लेवल-3: 21,700 रुपये  से बढ़कर लगभग 83,000 रुपये     लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर लगभग 97,000 रुपये     लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर लगभग 1.11 लाख रुपये मिड लेवल कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी      लेवल-6: 35,400 रुपये से बढ़कर लगभग 1.35 लाख रुपये     लेवल-7: 44,900 रुपये  से बढ़कर लगभग 1.72 लाख रुपये     लेवल-8: 47,600 रुपये से बढ़कर लगभग 1.82 लाख रुपये     लेवल-9: 53,100 रुपये से बढ़कर लगभग 2.03 लाख रुपये सीनियर अधिकारियों सैलरी कितनी बढ़ सकती है     लेवल-13: 1.23 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4.71 लाख रुपये     लेवल-14: 1.44 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 5.52 लाख रुपये     लेवल-15: 1.82 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 6.97 लाख रुपये     लेवल-18: 2.50 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 9.57 लाख रुपये  

सैकड़ों फ्री टीवी चैनल बंद होने की आशंका, 1.3 करोड़ दर्शकों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली Free TV Channels: भारत में स्मार्ट टीवी ने लोगों के टीवी देखने का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है। अब सिर्फ इंटरनेट की मदद से दर्शक सैकड़ों चैनल और कंटेंट आसानी से देख पा रहे हैं। लेकिन अब इस सुविधा के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह फ्री सिस्टम आगे भी जारी रहेगा या नहीं। TRAI के नए नियम पर विचार टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) इस पर विचार कर रही है कि स्मार्ट टीवी ऐप्स को भी DTH और केबल टीवी की तरह नियमों के दायरे में लाया जाए। इस पर अंतिम फैसला 4 मई 2026 को आ सकता है। अगर यह नियम लागू होता है, तो कई फ्री चैनलों पर शुल्क लग सकता है। क्यों खत्म हो सकता है फ्री चैनलों का दौर? हाल ही में सामने आई जानकारी के मुताबिक Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या स्मार्ट टीवी ऐप्स को भी DTH और केबल की तरह नियमों के दायरे में लाया जाए. इस मामले पर अंतिम फैसला 4 मई 2026 को आ सकता है. अगर ऐसा होता है तो अब तक मुफ्त में मिलने वाले कई टीवी चैनलों पर शुल्क लग सकता है।  कितने लोग होंगे प्रभावित? बताया जा रहा है कि भारत में करीब 13 करोड़ से ज्यादा लोग स्मार्ट टीवी के जरिए बिना किसी केबल या DTH कनेक्शन के 150 से अधिक चैनल मुफ्त में देख रहे हैं. इन यूजर्स को बस इंटरनेट और कुछ ऐप्स की जरूरत होती है जिससे वे न्यूज, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और अन्य कई तरह के चैनल आसानी से एक्सेस कर लेते हैं।  DTH और स्मार्ट टीवी में क्या है फर्क? जहां एक तरफ DTH और केबल कंपनियां हर चैनल के लिए पैकेज बनाकर पैसे लेती हैं, वहीं स्मार्ट टीवी ऐप्स पर कई चैनल बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होते हैं. DTH कंपनियों को सरकार को भारी फीस देनी पड़ती है और उन्हें सख्त नियमों का पालन करना होता है जबकि स्मार्ट टीवी ऐप्स पर अभी तक ऐसे नियम लागू नहीं हैं. यही कारण है कि अब इस असमानता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।  क्या सभी यूजर्स पर पड़ेगा असर? हालांकि यह बदलाव बड़ा लग रहा है लेकिन हर यूजर पर इसका असर जरूरी नहीं है. आज के समय में ज्यादातर लोग स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए करते हैं. कई यूजर्स तो सिर्फ OTT कंटेंट या गेमिंग के लिए टीवी का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें फ्री चैनलों की जानकारी भी नहीं होती।  आने वाले समय में स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल देखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसका असर हर किसी पर नहीं पड़ेगा. Telecom Regulatory Authority of India का फैसला यह तय करेगा कि भारत में टीवी देखने का अनुभव कितना बदलने वाला है।  करोड़ों यूजर्स पर असर भारत में करीब 13 करोड़ से ज्यादा लोग स्मार्ट टीवी के जरिए बिना DTH या केबल कनेक्शन के 150 से अधिक चैनल मुफ्त में देख रहे हैं। ये यूजर्स सिर्फ इंटरनेट और कुछ ऐप्स की मदद से न्यूज, एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स चैनल आसानी से देख लेते हैं। बदलाव होने पर इन पर सीधा असर पड़ सकता है। DTH और स्मार्ट टीवी में अंतर DTH और केबल टीवी में हर चैनल के लिए पैकेज लेना पड़ता है और कंपनियों को सरकार को शुल्क भी देना होता है। वहीं स्मार्ट टीवी ऐप्स पर कई चैनल अभी मुफ्त में उपलब्ध हैं और उन पर नियम भी कम हैं। इसी असमानता को दूर करने के लिए नए नियमों पर चर्चा हो रही है। आगे क्या असर हो सकता है? अगर नए नियम लागू होते हैं तो स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनलों का उपयोग महंगा हो सकता है। हालांकि इसका असर सभी यूजर्स पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि कई लोग अब OTT प्लेटफॉर्म जैसे Netflix, Amazon Prime Video और YouTube का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। TRAI का फैसला आने वाले समय में टीवी देखने के अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है।

महंगाई का कहर: पाकिस्तान ने अपने ही लोगों पर डाला भारी बोझ, 11,000 करोड़ की रकम जुटाई

इस्लामाबाद पाकिस्‍तान के कटोरे में एक बार फिर अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भीख का पैसा डाल दिया है. इसके लिए पाकिस्‍तान को अपने ही लोगों का खून चूसना पड़ा. महंगाई बढ़ानी पड़ी और जब उसने आईएमएफ के सभी जरूरी मानक पूरे कर दिए तो अब 1.21 अरब डॉलर यानी करीब 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज उसे दिया गया है. आईएमएफ ने दो अलग-अलग चल रहे फाइनेंसिंग अरेंजमेंट्स के तहत पाकिस्‍तान के लिए यह कर्ज मंजूर किया है और माना जा रहा है कि अगले सप्‍ताह पैसे मिल जाएंगे।  आईएमएफ ने सितंबर 2024 में एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत 37 महीनों में 7 अरब डॉलर देने पर सहमति जताई थी. इसके अलावा रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत 1.4 अरब डॉलर देने का फैसला किया था. IMF के कार्यकारी बोर्ड ने EFF के तहत पाकिस्तान को लगभग 1 अरब डॉलर और RSF के तहत लगभग 21 करोड़ डॉलर देने पर सहमति दी है. इस तरह, कुल मिलाकर उसे 1.20 अरब डॉलर का कर्ज दिया गया है।  पाकिस्‍तान को कुल कितना पैकेज पाकिस्तान अब तक IMF से दो कर्ज पैकेजों के तहत कुल 8.4 अरब डॉलर में से 4.5 अरब डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपये) का कर्ज ले चुका है. एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, यह पैसा अगले हफ्ते की शुरुआत में जारी किया जाएगा, जिससे पाकिस्‍तान के सेंट्रल बैंक का रिजर्व बढ़कर 17 अरब डॉलर हो जाएगा. हालांकि, यह भारत के 700 अरब डॉलर के रिजर्व के मुकाबले बहुत छोटा हिस्‍सा है।  कर्ज पाने के लिए जनता पर जुल्‍म पाकिस्‍तान को भले ही आईएमएफ से 1.20 अरब डॉलर का कर्ज मिल गया हो, लेकिन इस कर्ज को पाने के बाद भी पाक सरकार को पुराने वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों पर टिके रहना पड़ा और स्थिरता के रास्ते पर बने रहने की प्रतिबद्धता का पालन करना होगा. भले ही इन नीतियों के खिलाफ जनता लगातार आवाज उठा रही है, क्‍योंकि इससे बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक असमानता बढ़ रही है. IMF की मंजूरी तब मिली जब सरकार ने वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन दिखाया, लेकिन इस वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में सरकार के इस रवैये को लेकर अलग-अलग स्‍वर उठ रहे हैं।  आईएमएफ के पैमाने पर खरा उतरा देश IMF मिशन ने जुलाई-दिसंबर 2025 की अवधि में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा की थी, जिसमें 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की तीसरी समीक्षा शामिल थी. पाकिस्तान ने दिसंबर 2025 के अंत तक सभी क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया पूरे किए और नेट इंटरनेशनल रिजर्व्स के फ्लोर पर भी बेहतर प्रदर्शन किया. साथ ही जनरल गवर्नमेंट का प्राइमरी बैलेंस टारगेट भी आसानी से हासिल किया. सरकार ने दिसंबर 2025 के अंत तक आठ में से छह इंडिकेटिव टारगेट्स पूरे किए, लेकिन फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू सबसे कमजोर कड़ी रहा. FBR द्वारा जुटाए गए नेट टैक्स रेवेन्यू और रिटेलर्स से इनकम टैक्स रेवेन्यू IMF के लक्ष्यों से कम रहे। 

सुमन हेल्प डेस्क 24×7 सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा का बनी आधार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं तकनीक आधारित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग से प्रदेश सरकार महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रभावी पहल कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क एवं इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मध्यप्रदेश सरकार सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ नवजात शिशु की सुरक्षा के संकल्प को तकनीक, संवेदनशीलता और सतत सेवा के माध्यम से साकार कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, शिकायतों के त्वरित समाधान, समयबद्ध रेफरल एवं सतत निगरानी के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त आधार प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) हेल्प डेस्क व्यवस्था प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद सहायक प्रणाली बनकर उभरी है। राज्य में प्रारंभिक रूप से 57 स्वास्थ्य संस्थाओं से शुरू हुई यह व्यवस्था अब विस्तारित होकर 55 जिला चिकित्सालयों, 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों तथा एम्स भोपाल तक पहुँच चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया मध्यप्रदेश मॉडल मध्यप्रदेश के सुमन आइसीसीसी एवं जिला हेल्प डेस्क मॉडल को भारत सरकार द्वारा आयोजित 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन (नेशनल समिट ऑन इनोवेशंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज) में नवाचार एवं सर्वोत्तम कार्य-पद्धति के रूप में सराहा गया है। जिलों में स्थित सभी 66 हेल्प डेस्क भी अब 24×7 होंगी संचालित राज्य स्तर पर स्थित आईसीसीसी पूर्व से ही 24 घंटे सातों दिवस कार्यरत था, जबकि जिला स्तरीय हेल्प डेस्क कार्यालयीन समय में संचालित होते थे। इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए मई 2026 से प्रदेश के सभी 66 जिला स्तरीय SUMAN हेल्प डेस्क को भी 24×7 संचालित किया जा रहा है। सुमन हेल्प डेस्क प्रत्येक जिले में सक्रिय प्रदेश के प्रत्येक जिले में सुमन हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जहाँ 2 टेली-कॉलर एवं एक सुपरवाइज़र नियुक्त हैं। हेल्प डेस्क का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सभी निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है। लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं में देरी या असुविधा पर हेल्प डेस्क द्वारा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी — एएनएम, सीएचओ अथवा अन्य मैदानी अमले से समन्वय स्थापित कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है। शिकायतों का समयबद्ध निवारण इस प्रणाली की प्रमुख विशेषता है। आइसीसीसी से जुड़ी हाई-टेक निगरानी व्यवस्था सुमन हेल्प डेस्क व्यवस्था राज्य स्तरीय सुमन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) से जुड़ी हुई है। कंट्रोल सेंटर से सेवाओं की सतत निगरानी, रिपोर्टिंग एवं समन्वय किया जा रहा है। यह कमांड सेंटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और तकनीक-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 104 टोल फ्री सेवा से मिल रहा व्यापक परामर्श 104 टोल फ्री नंबर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, शिकायत निवारण, शासकीय योजनाओं की जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) सेवाओं की जानकारी, सोनोग्राफी एवं आवश्यक जांच के लिए परामर्श, आईएफए एवं कैल्शियम अनुपूरण संबंधी मार्गदर्शन, बर्थ वेटिंग होम में भर्ती के लिए प्रेरित करना, उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की सतत निगरानी, नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य ट्रैकिंग आदि सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। लाखों माताओं और नवजातों की नियमित मॉनिटरिंग सुमन हेल्प डेस्क से लाखों गर्भवती महिलाओं, उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली माताओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है। हेल्प डेस्क द्वारा समय-समय पर जागरूकता संदेश, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक जानकारी भी साझा की जाती है, जिससे सुरक्षित प्रसव एवं नवजात देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।  

भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय हॉकी श्रृंखला में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

भोपाल  भारत और आस्ट्रेलिया के बीच भोपाल में आयोजित होने वाली अंडर-18 हॉकी सीरीज के लिए भारतीय पुरुष एवं महिला टीमों की घोषणा कर दी गई है। इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला के लिए मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल के कुल 10 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन हुआ है। खिलाड़ियों के चयन से प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। भारतीय अंडर-18 पुरुष टीम में अकादमी के गोलकीपर आयुष रजक, डिफेंडर अंश बहुत्रा और करण गौतम, मिडफील्डर अवि माणिकपुरी तथा फॉरवर्ड खिलाड़ी सिद्धार्थ बेन और गाज़ी खान को स्थान मिला है। वहीं भारतीय अंडर-18 महिला टीम में अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों स्नेहा दावड़े, गोलकीपर महक परिहार, नम्मी गीता और नौशीन नाज़ का चयन हुआ है। इन खिलाड़ियों के चयन से अकादमी में खुशी और उत्साह का माहौल है। भोपाल में होगा भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंडर-18 हॉकी सीरीज का आयोजन भोपाल में किया जाएगा। यह सीरीज 15 मई से 20 मई 2026 तक खेली जाएगी, जिसमें देश और विदेश के युवा खिलाड़ी अपना कौशल दिखाएंगे। घरेलू मैदान पर खेलने का अवसर मिलने से मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का उत्साह और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय चयन में दिखा एमपी अकादमी का दम मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी लंबे समय से देश को प्रतिभाशाली खिलाड़ी देने का कार्य कर रही है। आधुनिक प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन और अनुभवी कोचिंग के कारण अकादमी के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय टीम में जगह बना रहे हैं। एक साथ 10 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन अकादमी की मजबूत खेल संरचना और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का प्रमाण है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  सारंग ने दी शुभकामनाएं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और राज्य सरकार द्वारा विकसित खेल सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे। हॉकी में उभरती ताकत बन रहा मध्यप्रदेश लगातार राष्ट्रीय टीमों में खिलाड़ियों के चयन और उत्कृष्ट प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश अब हॉकी के क्षेत्र में तेजी से उभरती ताकत बन रहा है। प्रदेश की खेल अकादमियों में तैयार हो रहे खिलाड़ी देश के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं।  

ना कारण, ना मोहलत: UAE ने पाकिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर बांधा

दुबई अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच खुद को मध्यस्थ यानी बिचौलिए के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिश उसी पर भारी पड़ गई है। पाकिस्तान के इस कदम से मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ उसके कूटनीतिक संबंध बिगड़ गए हैं। यूएई से बड़े पैमाने पर पाकिस्तानी कामगारों को डिपोर्ट (निर्वासित) किया जा रहा है। यूएई क्यों है पाकिस्तान से खफा? खाड़ी में कई हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई इस बात से बेहद नाराज है कि पाकिस्तान ने अमीराती क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा नहीं की। इसी नाराजगी के चलते यूएई की तरफ से पाकिस्तानियों पर यह सख्त कार्रवाई की जा रही है। बिना कारण बताए हजारों पाकिस्तानियों को किया डिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स ने कई पाकिस्तानी कामगारों और समुदाय के नेताओं से बातचीत के आधार पर बताया है कि हाल के हफ्तों में हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को यूएई से निकाल दिया गया है। कई लोगों का दावा है कि उन्हें डिपोर्ट करने से पहले बिना कोई कारण बताए हिरासत में रखा गया था। पाकिस्तानी शिया नेताओं का कहना है कि उनके समुदाय के लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि उनके ईरान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। सामुदायिक संगठनों का अनुमान है कि मध्य-अप्रैल से लेकर अब तक हजारों परिवार इस निर्वासन से प्रभावित हो चुके हैं। हालांकि, यूएई ने अभी तक इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी ऐसे किसी सामूहिक निर्वासन अभियान के दावों को खारिज किया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका इस मुद्दे ने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि यूएई से आने वाला पैसा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी जीवन रेखा है। वर्तमान में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी यूएई में रहते और काम करते हैं। अकेले पिछले साल ही इन पाकिस्तानी कामगारों ने 8 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम अपने देश भेजी थी। पाकिस्तान की कूटनीति और डगमगाती अर्थव्यवस्था इस समय खाड़ी देशों के बदलते रुख के बीच फंसी हुई है। एक तरफ जहां पाकिस्तान ने सऊदी अरब से अपनी नजदीकियां बढ़ाई हैं, वहीं दूसरी तरफ यूएई (UAE) का रवैया उसके प्रति बेहद सख्त हो गया है। दशकों से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को कर्ज का 'रोल-ओवर' करके सहारा देने वाले यूएई ने अपना 3.5 अरब डॉलर का कर्ज तुरंत वापस ले लिया है। अप्रैल 2026 में पाकिस्तान को मजबूरन यह भारी-भरकम कर्ज यूएई को चुकाना पड़ा, जिसके लिए उसे सऊदी अरब से मिली नई आर्थिक मदद (डिपॉजिट) का सहारा लेना पड़ा। यूएई का यह कदम साफ दर्शाता है कि पाकिस्तान का सऊदी की तरफ अधिक झुकाव और ईरान विवाद में उसकी मध्यस्थता वाली भूमिका के चलते अबू धाबी का रुख अब 'मुफ्त मदद' से बदलकर 'सख्त वसूली' वाला हो गया है। अमेरिका 'प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस' की तैयारी में यह निर्वासन का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ बातचीत विफल होती है, तो वॉशिंगटन "प्रोजेक्ट फ्रीडम" को फिर से शुरू कर सकता है। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए बनाई गई एक समुद्री सुरक्षा पहल है। खाड़ी में जारी अस्थिरता के बीच ट्रंप ने साफ किया है कि इस ऑपरेशन को "प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस" के नाम से और भी व्यापक रूप में वापस लाया जा सकता है।

जल जीवन मिशन बना जनभागीदारी और सामाजिक परिवर्तन की मिसाल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के प्रयासों को गति मिली है। इसी क्रम में लागू मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत सागर जिले के राहतगढ़ विकासखंड के 131 ग्राम, जैसीनगर के 145 ग्राम, सागर ब्लॉक के 26 ग्राम तथा रायसेन जिले के बेगमगंज ब्लॉक के 15 ग्रामों सहित कुल 317 ग्रामों को शुद्ध पेयजल सुविधा से जोड़ा गया है। घर-घर नल कनेक्शन से संवरा ग्रामीणों का जीवन ग्राम खजुरिया में लगभग 147 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि, मजदूरी और पशुपालन पर आधारित है। योजना लागू होने से पहले गांव में केवल दो नल और एक कुआं था, जो गर्मियों में सूख जाता था। पानी के लिए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों को एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता था। पानी की समस्या का सीधा असर बच्चियों की पढ़ाई और महिलाओं के दैनिक जीवन पर पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिली है और गांव में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार दिखाई दे रहा है। दिव्यांग नीरज साहू को मिला आत्मसम्मान इस योजना ने गांव के कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद भी जगाई है। ग्राम खजुरिया के निवासी नीरज साहू, जो एक हाथ से दिव्यांग हैं, आज गांव की जल आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रोजगार के अवसर नहीं मिलने के बीच उन्होंने ग्राम पंचायत के समक्ष बॉलमेन के रूप में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। ग्राम सभा की सहमति से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। आज वे गांव में जल सप्लाई व्यवस्था संभालते हुए सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके लिए यह योजना केवल पेयजल सुविधा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन गई है। जनभागीदारी बनी योजना की सबसे बड़ी ताकत योजना में सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। सहयोगी संस्था आई.एस.ए. मध्य सेवा एसोसिएशन, भोपाल द्वारा जनसभाओं, ग्रामसभाओं, नुक्कड़ नाटकों और स्कूल रैलियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया। गांवों में ग्राम जल एवं स्वच्छता तदर्थ समितियों का गठन कर स्थानीय समुदाय को जल प्रबंधन से जोड़ा गया। इससे ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुआ ग्रामीण मॉडल ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे गांवों में सहभागी विकास और सामाजिक समावेशन का प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने योजना के संचालन और रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाया है। हर घर नल से जल पहुंचने से सुधरा जीवन स्तर आज खजुरिया गांव में टोंटी से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता केवल सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में आए व्यापक बदलाव का प्रतीक बन चुकी है। स्वच्छ पेयजल मिलने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है, महिलाओं के श्रम और समय की बचत हुई है तथा बच्चों को बेहतर वातावरण मिल रहा है। जल जीवन मिशन ने यह सिद्ध किया है कि जब योजनाएं संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण और जनसहभागिता के साथ लागू होती हैं, तब उनका प्रभाव सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है। जल है तो कल है” का साकार होता संदेश सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा यह परिवर्तन प्रदेश में विकसित हो रहे उत्तरदायी और सहभागी ग्रामीण मॉडल की तस्वीर प्रस्तुत करता है। मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना अब अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रही है। खजुरिया में 'जल है तो कल है' का संदेश अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि बदलती जिंदगी का वास्तविक अनुभव बन चुका है।  

IPL Fever in Raipur: 10 हजार तक बढ़े होटल रूम के दाम, फ्लाइट टिकटों ने भी छुआ आसमान

रायपुर राजधानी रायपुर में आईपीएल फीवर सिर चढ़कर बोल रहा है। इसका असर होटल-रिसोर्ट, फ्लाइट की महंगाई के साथ टिकटों की ब्लैकमार्केटिंग तक पहुंच गई है। रेलवे स्टेशन के पास के डोरमेट्री शुक्रवार को ही फुल हो गए। यहां युवाओं ने थोक में बुकिंग की है। 10 मई को मुंबई और आरसीबी के कड़े मुकाबले के कारण क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है, जिसकी वजह से वीआईपी रोड, तेलीबांधा और नवा रायपुर रोड स्थित होटल और रिसॉर्ट में कमरों की कीमतें अचानक 10 हजार रुपए तक बढ़ गई हैं। IPL 2026: फ्लाइट टिकट महंगी कई फाइव स्टार होटलों में डिस्काउंट ऑफर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। आईपीएल मैचों का असर हवाई किराए पर भी साफ दिख रहा है। सामान्य दिनों में 4 से 5 हजार रुपए में मिलने वाले फ्लाइट टिकट अब 10 और 13 मई के दिन 10 हजार रुपए से ऊपर पहुंच गए हैं।   एम-टिकट के बाद भी ब्लैकमार्केटिंग आईपीएल के दो मैचों के लिए टिकट पहले ही बिक चुके हैं। अब सोशल मीडिया में टिकटों की ब्लैकमार्केटिंग करने वाले 10 हजार 20 हजार अधिक कीमतों में ऑफर दे रहे हैं। नवा रायपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में पहली बार सीटों में नंबरिंग के हिसाब से दर्शकों को कुर्सियां मिलेंगी। ऑनलाइन टिकट भी इसी के मुताबिक बेचे गए हैं। इधर इंस्टाग्राम पेज पर टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग के मामले सामने आए हैं। स्टेडियम में मैच-होटलों में पार्टी, नजर पुलिस की सूत्रों के मुताबिक वीआईपी रोड व आस-पास के होटलों में मैच के प्रसारण के साथ पार्टियां रखी गई हैं। इन पर पुलिस की नजर है। इससे पहले वीआईपी रोड स्थित होटलों में ड्रग्स सहित अन्य मादक पदार्थों की बिक्री के मामले सामने आए हैं। रिसोर्ट में ठहरेंगे स्टार खिलाड़ी नवा रायपुर स्थित मे-फेयर व मायरा रिसोर्ट सहित फाइव स्टार मैरिएट में स्टार खिलाड़ी व आफिशियल रुकेंगे। जानकारी के मुताबिक आरसीबी और मुंबई इंडियंस के खिलाडिय़ों के लिए 15 दिन पहले से ही होटलों में ठहरने व उनके पसंदीदा खाने-पीने को लेकर मैन्यू की तैयारी शुरू हो चुकी थी।