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गरिमामय रहा शिप्रा तीर्थ परिक्रमा का समापन समारोह

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 में 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई में निर्मित शिप्रा के घाट श्रद्धालुओं को पुण्य स्नान का लाभ देंगे। मां शिप्रा के स्वच्छ जल की उपलब्धता आयोजन को पावन बनाएगी। लगभग छह दशक बाद यह संभव होगा जब श्रद्धालु सिर्फ माँ शिप्रा के प्रवाहमान जल से सिंहस्थ के लिए पहुंचकर स्नान कर सकेंगे। गत सिंहस्थ : 2016 में माँ नर्मदा के जल से स्नान की सुविधा प्राप्त होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने कामना की थी कि मां शिप्रा का जल पूरी तरह से प्रवाहित हो और स्नान लाभ ले सकें। श्रद्धालुओं की आकांक्षा को पूर्ण करने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। बाबा महाकाल और संतों के आशीर्वाद से श्रेष्ठ प्रबंध कर हम सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाएंगे। सिंहस्थ के आयोजन से नए कीर्तिमान बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मां शिप्रा के आशीर्वाद से समारोह में अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहे हैं। दीपामलिकाएं देखकर लगता है जैसे दीप पर्व आ गया हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि सभी को यश प्राप्त हो। त्रिवेणी से सिद्धनाथ तक शिप्रा जी के घाट पवित्र माने जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से अनेक कार्य संचालित हैं, जो सिंहस्थ के आयोजन को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का कार्य करेंगे। भारत की मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत का संरक्षण भी हो रहा है। हाल ही में हुए न्यायालय के निर्णय भी परिपालन की दृष्टि से स्वर्णकाल का आभास करवाते हैं। देश के नागरिक सभी निर्णयों पर भरोसा करते हुए परस्पर सहयोग और समरसता का परिचय दे रहे हैं। अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के भूमि-पूजन और लोकार्पण में ऐसे सभी लोग उपस्थित हुए जिन्होंने मंदिर के संबंध में वर्षों तक न्यायालय में मुकदमा लड़ा। हमारे देश में मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा है। राजभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजाभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध है। धार में भोजशाला में मां वागदेवी की प्रतिमा स्थापित होगी। न्यायालय के निर्णय के बाद यह मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री  मोदी का शासन काल सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल की याद दिलवाता है, जिसमें प्रत्येक नागरिक का हित सर्वोपरि रहा। जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने तीन माह से अधिक अवधि के जल गंगा संवर्धन अभियान में कुओं- तालाबों, नदियों, पोखर, जलाशय और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण संवर्धन के कार्यों का संचालन किया है। इसमें जनता की भागीदारी भी हो रही है। मध्यप्रदेश नदी जोड़ो अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी बना है। समारोह में दरभंगा से कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए आई गायिका और बिहार विधानसभा की सदस्य सु मैथिली ठाकुर ने भजन प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से पूर्व सु ठाकुर का मध्यप्रदेश आगमन पर स्वागत किया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव तैयारियों की कर रहे नियमित समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सिंहस्थ: 2028 महापर्व आयोजन की तैयारियों को लेकर निरंतर निरीक्षण जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर क्षेत्र में नव निर्माणाधीन घाटों से 24 घंटे करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा में स्नान कराने के बाद सुरक्षा और सुविधा के साथ गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा। सिंहस्थ के लिए सभी विभागों ने निर्माणाधीन विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा कर जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर सिंहस्थ के लिए विकास कार्य प्रगतिरत है। सिंहस्थ में विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं को वाहन पार्किंग के साथ ही स्नान के लिए घाट तक पहुंचाने के लिए सुविधाजनक एप्रोच रोड का निर्माण किया जा रहा है। व्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र और घाट तक सुविधाजनक आने जाने के मार्ग होने से आवश्यक प्रबंधन करने में सुविधा होगी। हाल ही में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने उज्जैन पहुंचकर सिंहस्थ की तैयारियों का जायजा लिया है। 18 स्थान एप्रोच रोड के लिए हुए चिन्हित सिंहस्थ: 2028 के तहत नियमित निरीक्षण में संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी  आशीष सिंह, कलेक्टर उज्जैन  रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के दल मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों में की जाने वाली व्यव्स्थाओं का निरंतर जायजा ले रहे हैं। अधिकारी दल ने  विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित ब्रिज से निरीक्षण प्रारंभ कर करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण किया। उन्हेल रोड ब्रिज के समीप तक शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन नवीन घाट को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 18 स्थानों को एप्रोच रोड के लिए चिन्हित किया है। संवरने लगा है उज्जैन सिंहस्थ : 2028 महापर्व के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर विश्व भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुविधाजनक रूप से मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में स्नान करवाने और श्रद्धालुओं की मेजबानी के लिए उज्जैन संवरने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की जानकारी प्राप्त कर निर्देश देते है। हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों ने द्वितीय चरण में शिप्रा किनारे पैदल 36 किलोमीटर भ्रमण किया। अधिकारी दल ने इस दौरान शिप्रा घाट से जोड़कर बनाए जाने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए 140 स्थान चिन्हित कर तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री  मोदी के आह्वान पर किया अमल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर पेट्रोल-डीजल की मितव्ययिता के नियम का अनुसरण करते हुए अधिकारी बस में सवार होकर निरीक्षण के लिए पहुंचे। सिंहस्थ : 2028 के लिए निर्माणाधीन विकास कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित मार्ग चिन्हित करने के लिए नियमित निरीक्षण के तहत अधिकारियों की टीम सुबह पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देते हुए एक ही बस में यात्रा कर निरीक्षण स्थल पहुंचे। अधिकारी दल ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन सिंहस्थ : 2028 के अंतर्गत निर्माणाधीन नए घाट और सभी घाटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के लिए स्थान चिन्हित किए। निरीक्षण में अधिकारियों ने लाल पुल ब्रिज के नीचे स्थित घाट क्षेत्र से निरीक्षण शुरू करते हुए गऊघाट, वेधशाला के पीछे, वाकणकर ब्रिज के समीप, जीवन खेड़ी,  शनि मंदिर के समीप पुराने और निर्माणाधीन नवीन घाट तक पहुंच मार्ग तैयार करने के लिए प्रस्तावित स्थानों को चिन्हित किया। निरीक्षण के दौरान शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर स्थान चिन्हित किए । एप्रोच रोड निर्माण के लिए शिप्रा नदी के किनारों पर निर्माणाधीन नवीन घाट और पुराने घाट भी शामिल किए गए है। घाट से 200 मीटर एरिया में जो स्थान चिन्हित किए है उन स्थानों पर श्रद्धालुओं को घाट तक आने और जाने के लिए प्रस्तावित एप्रोच रोड का निर्माण सुविधाजनक और सहज हो, इस उद्देश्य से स्थान चिन्हित किए गए हैं। पुलिस विभाग के माध्यम से इन चिन्हित स्थानों पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को लेकर प्लान तैयार किया जाएगा।  

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ सिंहस्थ 2028 की तैयारी

उज्जैन  उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब सुविधाओं के विस्तार के साथ ही सिंहस्थ 2028 की व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं को न सिर्फ दर्शन में आसानी होगी, बल्कि उन्हें मंदिर की अन्य प्रमुख आरतियों की जानकारी भी मिल सकेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगेंगे नए शेड और बैरियर्स महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए महाकाल लोक में फिलहाल फॉगिंग फव्वारे लगाए गए हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से राहत देने के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से फैब्रिकेशन शेड लगाया जाएगा। वहीं दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जल्द ही क्यूआर आधारित बैरियर्स भी लगाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को व्यवस्थित और आसान तरीके से दर्शन हो सकेंगे। अब सांध्य और शयन आरती की जानकारी भी मिलेगी अभी तक देश-विदेश से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु केवल सुबह होने वाली भस्म आरती के बारे में ही जानते हैं। मंदिर प्रशासन अब ऐसे प्रयास करेगा, जिससे श्रद्धालुओं को सांध्य आरती और शयन आरती के महत्व की भी जानकारी मिल सके। मंदिर समिति का मानना है कि इन आरतियों में शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे और बाबा महाकाल की विशेष पूजा परंपराओं से जुड़ पाएंगे। वेबसाइट पर शुरू होगा अन्नक्षेत्र मॉड्यूल मंदिर प्रशासन ने वेबसाइट पर अन्नक्षेत्र मॉड्यूल शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मंदिर समिति का 29974.37 लाख रुपये का प्रस्तावित बजट भी पारित किया गया है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए बढ़ेंगे इंतजाम सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए मंदिर में 80 नई स्टील दानपेटियां बनाई जाएंगी। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कतार प्रबंधन को मजबूत करने के लिए करीब 1000 नए बैरिकेड्स लगाने की मंजूरी भी दी गई है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु को सुगम और व्यवस्थित दर्शन का लाभ मिल सके।

सिंहस्थ 2028 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तेज, समयसीमा पर कमिश्नर सख्त

उज्जैन उज्जैन में “सिंहस्थ महापर्व 2028” को लेकर शहर के विकास कार्यों को तेज कर दिया गया है। नगर निगम के मास्टर प्लान के तहत सड़कों के निर्माण का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर में मास्टर प्लान के अंतर्गत कुल 27 सड़क परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से वर्तमान में करीब 22 सड़कों पर निर्माण कार्य जारी है। उज्जैन में मास्टर प्लान की 27 सड़कों पर काम किया जाएगा। निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि सभी सड़कों का निर्माण मास्टर प्लान में निर्धारित चौड़ाई के अनुसार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 530 करोड़ रुपए है। ठेकेदारों-इंजीनियरों को सख्त टाइमलाइन कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि होली पर्व के कारण एक-दो दिन निर्माण कार्य की गति थोड़ी प्रभावित हुई थी, लेकिन अब सभी साइटों पर फिर से पूरी टीम के साथ काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही पहले जैसी रफ्तार देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम ने इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों और इंजीनियरों को स्पष्ट चुनौती देते हुए सख्त टाइमलाइन तय की है। ये है नगर निगम का लक्ष्य साथ ही कौन-सी सड़क कितने समय में पूरी होगी, इसका डेटा भी सार्वजनिक किया गया है, ताकि काम तय समय सीमा में पूरा हो सके। नगर निगम का लक्ष्य है कि “सिंहस्थ 2028” से पहले शहर की प्रमुख सड़कों का निर्माण पूरा कर यात्रियों और श्रद्धालुओं को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

उज्जैन में शिप्रा नदी के 200 मीटर के भीतर अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे, आदेश जारी

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ के मद्देनजर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शिप्रा नदी के किनारे हो रहे निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि शिप्रा के दोनों ओर 200 मीटर के भीतर किए गए सभी निर्माण अवैध हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। साथ ही पूर्व में जनहित याचिका में मांगी जानकारी को 21 जनवरी तक दाखिल करने को कहा। चेतावनी दी कि तय तिथि तक रिपोर्ट नहीं पेश हुई तो उज्जैन कलेक्टर व निगम आयुक्त को उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चंदेसरा ब्रिज से राजगढ़ तक केवल शासकीय निर्माण ही होंगे। वहीं शिप्रा के 200 मीटर में किसी नए निजी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों के उल्लंघन में हो रहे निर्माण तुरंत हटाए जाएंगे। ये है मामला उज्जैन के सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया गया। याचिका में आरोप है कि उज्जैन के मास्टर प्लान के विपरीत शिप्रा के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी जा रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। बुधवार को सरकारी वकील की याचिका पर कोर्ट ने 21 जनवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कब होगा सिंहस्थ उज्जैन में अगला सिंहस्थ मेला 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा, जो लगभग दो महीने तक चलेगा और इसमें शाही स्नान (Royal Bath) और पर्व स्नान (Festival Bath) होंगे, और मध्य प्रदेश सरकार इसे 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें घाटों का सुंदरीकरण और पुलों का निर्माण जैसे काम शामिल हैं। मुख्य जानकारी: अवधि: 27 मार्च से 27 मई 2028 (कुल 2 महीने) स्नान: इस दौरान 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान होंगे। विशेषता: इसे देश का पहला 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछला सिंहस्थ: पिछला सिंहस्थ 2016 में हुआ था, और अगला 2028 में है, जो हर 12 साल में आता है।

इंदौर में मंदिरों में बड़े पैमाने पर सुधार, रोज दो लाख से अधिक भक्तों की सुविधा पर खर्च करोड़ों रुपए

इंदौर   सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें। रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था।  सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं।   

सिंहस्थ 2028 के लिए बिजली सप्लाई होगी बेहतरीन, यूपी की विशेषज्ञ टीम ने व्यवस्थाओं का किया दौरा

उज्जैन  उज्जैन जिले में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारियां की जा रही है। देश के सबसे बड़े आयोजन में किसी तरह की अव्यवस्था ना हो इसके लिए अभी से पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के पावर डिपार्टमेंट की एक एक्सपर्ट टीम पहुंची हुई है। यह टीम सिंहस्थ 2028 के दौरान बिजली की सुचारू सप्लाई के लिए प्लान बनाने के लिए जमीनी इंतजामों का अध्ययन करेगी और जानकारी शेयर करेगी। दरअसल, यूपी की यह एक्सपर्ट टीम शिप्रा नदी के किनारे मेला क्षेत्र में बिजली प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा करेगी। साथ ही आवश्यक प्लानिंग तैयार करेगी। ताकि कार्यक्रम के समय बिना अड़चन के बिजली की सप्लाई बंद नहीं हो। 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान आपको बता दें कि उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ हर 12 साल में होने वाला एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। यह आयोजन गर्मियों के पीक सीजन में आयोजित होगा। इसके चलते बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। खासकर एयर कंडीशनर जैसे ज्यादा पावर वाले उपकरणों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के कारण बिजली की खपत बढ़ जाएगी। अधिकारियों का अनुमान है कि उज्जैन शहर और मेला क्षेत्र में सिंहस्थ के दौरान बिजली की मांग लगभग 100 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगी, जो पिछले सिंहस्थ के दौरान दर्ज की गई 60-70 करोड़ यूनिट से काफी ज्यादा है। 3 दिवसीय दौरे पर आई टीम उत्तर प्रदेश से आई टीम का यह दौरा  19 दिसंबर 2025 तक तय है। विशेषज्ञ के आने उद्देश्य मध्य प्रदेश वेस्टर्न रीजन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के साथ जानकारी और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। डिस्कॉम वेस्टर्न रीजन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनूप कुमार सिंह ने कहा, 'इस दौरे का मकसद डिस्कॉम को गर्मियों के पीक महीनों के दौरान स्थिर बिजली बनाए रखने में व्यावहारिक जानकारी और विशेषज्ञता हासिल करने में मदद करना है, जब एयर कंडीशनर जैसे हाई-लोड उपकरण बड़े पैमाने पर चलते हैं। 24 घंटे एक्टिव रहेगा कॉल सेंटर विश्वसनीयता और रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने के लिए, मेला क्षेत्र में 24×7 कॉल सेंटर की योजना बनाई गई है। एक्सपर्ट्स के सुझावों के साथ एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें शिकायतों का तेजी से समाधान और बिजली कटौती या खराबी को ठीक करने के लिए जमीनी स्तर पर तेजी से टीम भेजने पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि रियल-टाइम फॉल्ट का पता लगाने और तेजी से बिजली बहाल करने के लिए मेला नेटवर्क में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन सिस्टम लगाए जाएंगे। व्यापक योजना में लोड फोरकास्टिंग, फीडर-लेवल ऑग्मेंटेशन, महत्वपूर्ण नोड्स पर रिडंडेंसी और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी शामिल होने की उम्मीद है ताकि लाखों तीर्थयात्रियों के लिए एक सुचारू त्योहार का अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।  

उज्जैन सिंहस्थ 2028 से पहले बनेगी मेगा पार्किंग, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी कंट्रोल में

उज्जैन सिंहस्थ-2028 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक अनुभव दिलाने के लिए राज्य सरकार ने भीड़ और यातायात प्रबंधन के सबसे अहम मोर्चे पर निर्णायक कदम उठा लिया है। उज्जैन में 100 करोड़ रुपये की मेगा पार्किंग परियोजना को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी गई है। इस परियोजना के तहत 6012 हेक्टेयर क्षेत्र में विशाल पार्किंग नेटवर्क बनाया जाएगा, जिसके साथ ही अत्याधुनिक जनसुविधाएं भी विकसित होंगी। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को शहर की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही व्यवस्थित पार्किंग और सुचारू ट्रैफिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। यह साफ संकेत है कि इस बार सिंहस्थ भीड़ के दबाव से नहीं, बल्कि डिजिटल और संरचनात्मक प्लानिंग की बदौलत संचालित होगा।   पार्किंग के साथ आधुनिक सुविधाओं का विकास सरकार की इस विशेष योजना में केवल पार्किंग स्थल का निर्माण नहीं हो रहा है। यहां पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र, यातायात संकेत और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं भी स्थापित की जाएंगी। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा और सुगमता के लिए सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है। इसका उद्देश्य उज्जैन शहर के भीतर वाहनों के दबाव को कम करना और प्रमुख मंदिरों तथा घाटों तक पहुंच को पहले की तुलना में अधिक सहज बनाना है। इसके लिए एक परामर्शदाता फर्म का चयन किया जा रहा है, जिसे सेवाओं के बदले लगभग दो करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह फर्म दो प्रमुख चरणों में काम करेगी। दो चरणों में होगा काम पहला चरण डिजाइन और रूपरेखा तैयार करने से संबंध‍ित होगा। इसमें विस्तृत इंजीनियरिंग सर्वेक्षण, भू-तकनीकी अध्ययन, संरचनात्मक नक्शे, लागत अनुमान और आवश्यक स्वीकृतियां शामिल रहेंगी। दूसरे चरण में निर्माण प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, साइट सुपरविजन, ठेका प्रबंधन और समयबद्ध कार्य निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, समय सीमा में केंद्रित इस परियोजना से सिंहस्थ-2028 के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन अत्यधिक सुदृढ़ हो जाएगा। भीड़ प्रबंधन होगा आसान परियोजना लागू होने से उज्जैन शहर के भीतर जाम की समस्याएं कम होंगी और श्रद्धालुओं को प्रमुख मंदिरों, घाटों और आयोजनों तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी। सिंहस्थ-2028 को दुनिया के सबसे विशाल धार्मिक समागम को आधुनिक स्वरूप में आयोजित करने की दिशा में यह कदम भीड़ प्रबंधन की चुनौती को अवसर में बदलने वाला साबित होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से मुलाकात, सिंहस्थ-2028 तैयारियों पर चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डा. खट्टर से की सौजन्य भेंट सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डा. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डा. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

महाकाल नगरी उज्जैन चमकेगी: सिंहस्थ 2028 से पहले 5 बड़े प्रोजेक्ट में होंगे हजारों करोड़ खर्च

उज्जैन  सिंहस्थ 2028 से पूर्व मध्यप्रदेश के उज्जैन की सूरत पूरी तरह बदलने जा रही है. मध्यप्रदेश सरकार का श्रद्धालुओं की सुविधाओ के लिए 5 बड़े कामों पर फोकस है, जिनकी लागत हजारों करोड़ है. सबसे पहला काम मोक्षदायिनी क्षिप्रा शुद्धिकरण (कान्हा डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना) है, जिससे क्षिप्रा पर कई जगह पुल, पुलिया व सड़क निर्माण के माध्यम से यातायात सुगम बनाया जाएगा. इसके बाद व्यापक स्तर पर सीवरेज पाइप लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल परियोजना, अस्पताल, विश्राम भवन आदि पर फोकस होगा. 5 विकास कार्यों पर होगा सबसे ज्यादा फोकस सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ ऐतिहासिक स्थलों को मजबूती देना व सरकार की प्राथमिकता है. इन प्रमुख पांच विकास कार्यों को कैसे किया जाएगा, इसके लिए कितने बजट की जरूरत होगी और इसकी क्या टाइम लाइन होगी इसे लेकर एक बार फिर प्रशासनिक बैठक का आयोजन किया गया. 20 हजार करोड़ से चमकेगी उज्जयनी नगरी सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन नगरी में वर्ष 2028 में लगने जा रहा है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है. सरकार का अनुमान है कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे और इसी के हिसाब से पूरा रेडमैप तैयार किया गया है. जनसंपर्क विभाग के अनुसार सिंहस्थ महापर्व 2028 के पहले जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि से अलग-अलग प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं. 914 करोड़ कान्हा क्लोज डायवर्जन परियोजना पर लगभग 919.94 करोड़ रुपए की लागत से कान्‍हा डायवर्जन क्‍लोज डक्‍ट परियोजना का कार्य क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए किया जाएगा. इसमें कान्हा नदी के पानी को 18.5 किमी कट/कवर व 12 किमी टनल का निर्माण कर उज्‍जैन शहर की सीमा से बाहर कर गंभीर नदी के डाउन स्‍ट्रीम में प्रवाहि‍त किया जाएगा. यह परियोजना आगामी सितंबर 2027 तक पूर्ण हो जाएगी. निर्माण एजेंसी द्वारा 15 वर्षों का संचालन व रख-रखाव का प्रावधान किया गया है. इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी रहेगी. इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद पूरे वर्ष क्षिप्रा नदी में स्‍वच्‍छ जल का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा. 440 करोड़ की लागत से पुलि-पुलियों का निर्माण सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए 19 नवीन पुलों व आरओबी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 14 पुल नदी पर व 5 रोड ओवर ब्रिज शामिल हैं. इनकी अनुमानित लागत 440.13 करोड़ रुपए है. पुल निर्माण कार्यों की श्रृंखला में शहर के बहुप्रतीक्षित फ्रीगंज का ब्रिज भी शामिल किया गया है. शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण काम म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा 371.11 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण, नवीन मार्गों का निर्माण भी इसमें शामिल है. सीवरेज पर 476 करोड़, पेयजल पर 1113 करोड़ सिंहस्थ मेला क्षेत्र में सीवरेज पाइप लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लान्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो शहर के अधोसंरचना विकास की दृष्‍टि‍ से अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण रहेगी और इसकी लागत 476.06 क‍रोड़ रुपए रहेगी. शहर की पेयजल परियोजना भी 1113 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. इस परियोजना में 150 एमएलडी का वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लान्‍ट, 700 किमी से अधिक पाइप लाइन का नेटवर्क और 17 नए जल टैंक बनाए जाएंगे. ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और मंदिर जीर्णोद्धार के लिए 500 करोड़ से ज्यादा ऐति‍हासिक स्थलों का संरक्षण करना जैसे शहर का कोठी पैलेस भवन उसे कुंभ एक्सपीरियंस सेंटर व वीर भारत संग्रहालय बनाना, वीर दुर्गादास सिंह राठौड़ की छत्री पर 52.69 करोड़ की लागत से विकास कार्य, मंदिर के जीर्णोद्धार कर परमार, मराठा शैली का वैभव लौटाना भी इसमें शामिल है. इसपर 500 करोड़ से ज्यादा खर्ज होंगे. अन्य कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे हजारों करोड़ सिहंस्‍थ में करोड़ों श्रध्‍दालुओं के आने पर उनके स्वास्थ्य का ध्‍यान रखते हुए 550 बिस्‍तरीय चिकित्‍सालय भवन, 150 सीट्स का चिकित्‍सा महाविद्यालय भवन व छात्रावास निर्माण होगा. इंदौर से उज्‍जैन के बीच 48 किमी एक नई ग्रीन फिल्‍ड सड़क का निर्माण कार्य लागत लगभग 2935 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे