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उज्जैन में शिप्रा नदी के 200 मीटर के भीतर अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे, आदेश जारी

उज्जैन

मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ के मद्देनजर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शिप्रा नदी के किनारे हो रहे निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि शिप्रा के दोनों ओर 200 मीटर के भीतर किए गए सभी निर्माण अवैध हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं।

साथ ही पूर्व में जनहित याचिका में मांगी जानकारी को 21 जनवरी तक दाखिल करने को कहा। चेतावनी दी कि तय तिथि तक रिपोर्ट नहीं पेश हुई तो उज्जैन कलेक्टर व निगम आयुक्त को उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चंदेसरा ब्रिज से राजगढ़ तक केवल शासकीय निर्माण ही होंगे। वहीं शिप्रा के 200 मीटर में किसी नए निजी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों के उल्लंघन में हो रहे निर्माण तुरंत हटाए जाएंगे।
ये है मामला

उज्जैन के सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया गया। याचिका में आरोप है कि उज्जैन के मास्टर प्लान के विपरीत शिप्रा के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी जा रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। बुधवार को सरकारी वकील की याचिका पर कोर्ट ने 21 जनवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

कब होगा सिंहस्थ

उज्जैन में अगला सिंहस्थ मेला 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा, जो लगभग दो महीने तक चलेगा और इसमें शाही स्नान (Royal Bath) और पर्व स्नान (Festival Bath) होंगे, और मध्य प्रदेश सरकार इसे 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें घाटों का सुंदरीकरण और पुलों का निर्माण जैसे काम शामिल हैं।

मुख्य जानकारी:

अवधि: 27 मार्च से 27 मई 2028 (कुल 2 महीने)
स्नान: इस दौरान 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान होंगे।
विशेषता: इसे देश का पहला 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कई विकास कार्य किए जा रहे हैं।
पिछला सिंहस्थ: पिछला सिंहस्थ 2016 में हुआ था, और अगला 2028 में है, जो हर 12 साल में आता है।

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