samacharsecretary.com

मोहन यादव पर आरोपों को लेकर BJP का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया साजिश रचने का आरोप

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस भ्रम की स्थिति निर्मित कर रही है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकप्रिय नेता हैं और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जो आरोप लगाया गया, वो पूरी तरह गलत है। कांग्रेस और उनके नेताओं द्वारा भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं बताना चाहता हूं कि हमारे मुख्यमंत्री के द्वारा साल 2023 में जो नामांकन दाखिल किया गया उसके मुताबिक उस वक्त उनके पास 17 एकड़ की जो जमीन थी, वो साल 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।" उन्होंने कहा कि एक सिद्धि विनायक कंपनी, जिसका आरोप में जिक्र किया गया, उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून में घटकर मात्र 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साल 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई परिवर्तन नहीं आया। ये सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थी। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की थी। आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है। वो पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना देना नहीं है। उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में यह आया है कि रिश्तेदारों पर भी जो आरोप लगाए गए, उसमें भी दिए गए तथ्य गलत हैं। मुझे बताया गया है कि ये रिश्तेदार भी अपनी बात कहेंगे और कार्रवाई करेंगे। CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने बताया षड्यंत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे पूरी तरह निराधार और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब ओबीसी वर्ग का मुख्यमंत्री बना और आगे बढ़ा तो यह कांग्रेस को रास नहीं आया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। कांग्रेस और उसके नेताओं के द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है‌। 2023 के बाद जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव में जो नामांकन दाखिल किया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ जमीन थी। आज उसमें कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। जिस सिद्धिविनायक कंपनी का उल्लेख किया गया उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून 2026 में घटकर 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री ने 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पूर्व 16 एकड़ जो जमीन थी, डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया। यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले थी। पुत्रवधू द्वारा खरीदी गई 10 एकड़जमीन का भी दिया विवरण खंडेलवाल ने आगे कहा कि सीएम की पुत्रवधू शालिनी यादव के द्वारा जरूर 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई है, जो कि विकसित मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर थी। आरोप में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, वह भी पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई उसे लेना-देना है। उनके रिश्तेदारों का स्वतंत्र अस्तित्व है और मेरी जानकारी में यह आया है कि वे आरोपों के संबंध में अपना स्टैंड लेंगे और जो कार्रवाई करना होगी, वह करेंगे। प्रदेश के सतत विकास में जुटे सीएम खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा प्रदेश के विकास में लगातार काम किया जा रहा है। इस प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने काम किया है फिर वह चाहे किसानों की बात हो या फिर चाहे औद्योगिक विकास की। इस प्रदेश को मध्य प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में ले जाने का काम मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा है। उनके खिलाफ षड्यंत्र का काम कांग्रेस पार्टी कर रही है। कांग्रेस कर रही षड्यंत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश को ओबीसी मुख्यमंत्री मिला, चाहे उमा भारती हो, शिवराज सिंह चौहान या डॉ. मोहन यादव, उन्हें षड्यंत्र करके कमजोर करने का काम कई लोगों के द्वारा किया गया। इस तरह मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम कांग्रेस के लोग करते हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के द्वारा जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसमें पीछे नहीं कर पाए तो इस तरह के षड्यंत्र करके हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। इसे इस प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेसी पिछड़े वर्ग का नेतृत्व बर्दाश्त नहीं करती प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस प्रदेश को विकसित बना रहे हैं। चाहे किसानों की बात करें, चाहे उद्योगों के विकास की बात करें, सीएम डॉ. यादव इस प्रदेश को आगे ले जा रहे हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस पार्टी षडयंत्र रच रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि जब-जब एक पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री इस प्रदेश को मिला, चाहे उमा भारती हों, चाहे शिवराज सिंह चौहान हों, या मोहन यादव … Read more

पंजाब CM वीडियो केस में बड़ा खुलासा, ₹10 लाख की रिश्वत और फर्जी रिपोर्ट मामले में 2 गिरफ्तार

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े वायरल वीडियो मामले में अब नया मोड़ आया है. गुरुग्राम पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है और एक एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि कुछ लोगों ने मिलकर ऐसी फॉरेंसिक रिपोर्ट बनवाने की साजिश की जो मुख्यमंत्री के पक्ष में जाए. यह मामला धार्मिक और राजनीतिक तौर पर बहुत संवेदनशील बन गया है।  कुछ समय पहले एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक शख्स को मान जैसा दिखाया गया था. वीडियो में सिख गुरुओं और भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ कुछ आपत्तिजनक हरकतें दिखाई गई थीं. इस पर सिख संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और अकाल तख्त ने मान को खालसा पंथ विरोधी करार दिया. आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि वीडियो में दिख रहा शख्स मान नहीं है।  अब हरियाणा के एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट जसप्रीत ने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार के अधिकारी बनकर कुछ लोग उनके पास आए और उनसे ऐसी रिपोर्ट बनवाने को कहा जो साबित करे कि वीडियो फर्जी है और शख्स मान नहीं है. उन्हें फाइव स्टार होटल में बुलाया गया, धमकाया गया और गाड़ी में जबरदस्ती 10 लाख रुपये नकद रखे गए. इनकार करने पर उन्हें सिरसा के अरुण महेंद्रा और जींद के अंकित से मिलवाया गया, जिन्हें अधिकारियों ने पेन ड्राइव सौंपी थी।  बाद में दो प्राइवेट कंपनियों, सिफर सेंटिनल लैब और साइबरयान लैब्स से रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिनके ड्राफ्ट वॉट्सऐप पर अधिकारियों से शेयर किए गए और बदलाव के सुझाव दिए गए. जसप्रीत ने पुलिस सुरक्षा और डिजिटल सबूतों की सुरक्षा की मांग की है।  गुरुग्राम पुलिस ने  दिए अपने बयान में कहा कि यह मामला शुरुआती जांच, तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल सबूतों की पड़ताल, पैसों के लेनदेन की जांच और दूसरी उपलब्ध जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया है।  पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने भगवंत मान से तुरंत इस्तीफे की मांग की पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने कहा कि अकाल तख्त की अवहेलना करने के बाद मुख्यमंत्री के पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं बचा है।  गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए वड़िंग ने आरोप लगाया कि अकाल तख्त को गलत साबित करने के लिए अनुकूल फोरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने की कोशिश की गई. उन्होंने इस मामले को बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया। 

खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करें, किसानों को समय पर उपलब्ध हों सभी संसाधन: मुख्यमंत्री

असामान्य वर्षा की आशंका के दृष्टिगत प्रदेशव्यापी तैयारी तेज, पूरी तरह सतर्क रहें सभी विभाग: मुख्यमंत्री खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करें, किसानों को समय पर उपलब्ध हों सभी संसाधन: मुख्यमंत्री बीज, उर्वरक, सिंचाई और फसली ऋण की व्यवस्था पर विशेष जोर, जमीनी स्तर पर हो सतत निगरानी पशुधन संरक्षण, चारा भंडारण और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश खरीफ अभियान, पेयजल, पशुधन संरक्षण एवं जल संरक्षण की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की विस्तृत समीक्षा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा के अंतर्गत आने वाले विभागों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि मौसम की अनिश्चितता और वर्षा के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रदेश को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। ऐसे में किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई जल, विद्युत आपूर्ति, फसली ऋण तथा वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पूर्व तैयारी रखने के निर्देश दिए।  बैठक में बताया गया कि खरीफ 2026 के लिए 110.65 लाख हेक्टेयर आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि वर्ष 2025 में 106.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इस वर्ष धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन तथा कुल खरीफ उत्पादन का लक्ष्य 302.62 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। 22 जून तक 5.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई तथा 4.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान नर्सरी का आच्छादन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए किसानों को समय पर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। संभावित अल्पवृष्टि अथवा सूखे की स्थिति के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न परिस्थितियों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है। आवश्यकता पड़ने पर उर्द, मूंग, ज्वार, बाजरा, तिल तथा अन्य कम अवधि वाली फसलों के आच्छादन को बढ़ाया जाएगा। किसानों को संदेश सेवा, आकाशवाणी, दूरदर्शन तथा अन्य माध्यमों से कृषि संबंधी तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकतम कवरेज तथा किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अधिकाधिक किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बीज उपलब्धता की समीक्षा में बताया गया कि खरीफ 2026 में अनुदान पर बीज वितरण का लक्ष्य 2.29 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1.77 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है तथा 1.12 लाख क्विंटल से अधिक बीज का वितरण किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित रहे और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए। उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता की नियमित निगरानी की जाए तथा कृत्रिम कमी अथवा कालाबाजारी की किसी भी शिकायत पर कठोर कार्रवाई की जाए। उद्यान विभाग की समीक्षा में बताया गया कि सूखा प्रबंधन की रणनीति के तहत 125 हाईटेक नर्सरियों के माध्यम से 15 करोड़ सब्जी पौध उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने सिंचाई तथा लघु सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि नहर प्रणाली का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए और अंतिम छोर तक सिंचाई जल पहुंचाया जाए। प्रत्येक ब्लॉक एवं तहसील स्तर पर सिंचाई संसाधनों तथा कृषि आवश्यकताओं का आकलन किया जाए। कम सिंचाई वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने संभावित सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारा, पानी और चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। भूसा संग्रहण अभियान के अंतर्गत 131.40 लाख क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष 136.01 लाख क्विंटल भूसा संग्रहित किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 103 प्रतिशत है। पशुओं के लिए टीकाकरण अभियान निरंतर संचालित हैं तथा मोबाइल वेटनरी यूनिट्स के माध्यम से चौबीसों घंटे सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने चारा भंडारण तथा पशु स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। पंचायती राज विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल स्रोतों के संरक्षण, हैंडपंपों के अनुरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को अभियान के रूप में संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेज गति से जारी है जांच

एसआईटी ने की अग्निकांड स्थल की पड़ताल, घायलों से भी मिला जांच दल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेज गति से जारी है जांच घायलों से मिली जानकारी व साक्ष्य के आधार पर कई लोगों से होगी पूछताछ: अमृत अभिजात एफएसएल की टीम ने मौके से जुटाए महत्वपूर्ण साक्ष्य, निर्धारित समय में आएगी जांच रिपोर्ट: प्रवीण कुमार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर अलीगंज अग्निकांड की समग्र जांच तेज गति से जारी है। मंगलवार को दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) घटनास्थल पर पहुंचा। टीम ने इसके बाद केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की और उनसे घटना के संबंध में जानकारी ली। उत्तर प्रदेश विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम ने भी घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। एसआईटी के सदस्य अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और एडीजी (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने करीब एक घंटे से अधिक समय तक बारीकी से पूरी बिल्डिंग का निरीक्षण किया। अमृत अभिजात ने कहा कि घटनास्थल की विभिन्न प्रकार से फोटो ली गई हैं। साक्ष्य जुटाकर जांच को तेजी से अंजाम दिया जा रहा है। अग्निकांड से संबंधित व्यक्तियों व विभागों से भी पूछताछ होगी। उसके बाद जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। एडीजी प्रवीण कुमार ने बताया कि हम लोगों ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया है। साथ में फॉरेंसिक की टीम ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनके आधार पर कुछ लोगों से पूछताछ की जाएगी। घटना से संबंधित हर विभाग के दायित्व को जांच दायरे में शामिल किया गया है। अग्निकांड पीड़ितों से भी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद निर्धारित समय सीमा में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। घटनास्थल से निकलने के बाद एसआईटी ने केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की। अयोध्या मामले में एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी  अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। एफएसएल ने जुटाए घटनास्थल से नमूने घटनास्थल पर एफएसएल डायरेक्टर आदर्श कुमार और विशेषज्ञों की टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। इसमें मलबा, जले हुए उपकरण और तार समेत अन्य नमूने शामिल हैं। गौरतलब है कि हादसे की सूचना मिलते ही सीएम योगी ने अलीगढ़ दौरा बीच में रद्द कर घटनास्थल का मुआयना किया था। उन्होंने केजीएमयू में पीड़ितों से भी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया। एसआईटी को 7 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी है। अब तक मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।

योगी सरकार का बड़ा कदम: BSB स्कूलों के छात्रों को मिलेगा मुख्यधारा से जुड़ने का मौका

छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता, बीएसबी से संबद्ध विद्यालयों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार – यू-डायस प्लस कोड आवंटन और विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया को मिली गति – छात्रों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की पहल – जिलों को आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक सक्षम और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों को संस्थागत मजबूती प्रदान करने और प्रत्येक विद्यार्थी को सुव्यवस्थित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने के क्रम में अब भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी), हरिद्वार से संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस कोड आवंटन तथा विद्यालय श्रेणी उन्नयन (स्कूल केटेगरी अपग्रेडेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक आधारित अनुश्रवण और डेटा प्रबंधन को लगातार मजबूती दी जा रही है। यू-डायस प्लस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से शिक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ने की पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने, अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए नवीन यू-डाइस प्लस कोड आवंटन तथा आवश्यकतानुसार विद्यालय श्रेणी उन्नयन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं, उन्हें नवीन कोड आवंटित होंगे निर्देशों में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें नवीन कोड आवंटित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व से यू-डायस कोड प्राप्त विद्यालयों के लिए मान्यता के अनुरूप विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों, आख्या और संस्तुति सहित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। बीएसबी ने किया है नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड, हरिद्वार द्वारा संचालित एवं संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इसके दृष्टिगत शासन स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विद्यालयों के यू-डायस प्लस प्रणाली से जुड़ने के बाद उनका शैक्षणिक डाटा राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में व्यवस्थित रूप से समाहित हो सकेगा, जिससे नामांकन, शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा संबंधी अभिलेखों तथा अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट! इस हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, जल्द हो सकता है समझौता

नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट सामने आया है. फरवरी 2025 में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने के बाद अब इस हफ्ते अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत आ रहे हैं. इस दौरान वह क्रेंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्‍य सीनियर सिटीजन अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।  दोनों देश अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत अंतरिम व्यापार समझौते और संयुक्त बयान पर बातचीत करेंगे. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच डील को आगे बढ़ाएंगे. 21 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय की ओर से इसकी जानकारी दी गई. साथ ही भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी सोशल मीडिया पोस्‍ट के जरिए इसकी जानकारी दी है।  भारत और अमेरिका के बीच इस डील पर अपडेट तब आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई थी. अमेरिका की ओर से कहा गया है कि जेमिसन ग्रीयर का भारत दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 13 फरवरी 2025 को हुई बैठक के बाद, डील को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हो रहा है. इस बैठक के तहत डील पर विस्‍तार से आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।  सर्जियो गोर ने एक्स पोस्ट पर क्या कहा? सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'नई दिल्ली में राजदूत ग्रीर का स्वागत करने के लिए उत्साहित हूं। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई बैठकें निर्धारित हैं।' ग्रीर की पीयूष गोयल के साथ बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अगले महीने की महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अंतरिम समझौता भविष्य के लिए अहम मंत्रिस्तरीय स्तर की यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच चल रही अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत का हिस्सा है। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करेगा। बीते रविवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि उनके अमेरिकी समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत के लिए मेरे समकक्ष कल दिल्ली आ रहे हैं।' बीटीए का पहला चरण अगले महीने तक होगा पूरा इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मुख्य उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते पर वार्ता को आगे बढ़ाना होगा। पीयूष गोयल ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया था कि बीटीए का पहला चरण अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है। यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका की ओर से सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में घोषित यह अस्थायी टैरिफ 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (एमएफएन) शुल्क दरों के अतिरिक्त लगाया गया था। 150 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर सकता है।   यह नई मंत्रिस्तरीय बातचीत 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में हुई मुख्य वार्ताकार स्तर की बैठकों के बाद हो रही है। उन बैठकों में भी प्रस्तावित व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई थी।भारत और अमेरिका दोनों आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से चरणबद्ध व्यापार व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। साथ ही दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। और कहां फंसा है पेच? अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने मार्च में भारत समेत कई देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत एकतरफा जांच दो मामलों में शुरू की थी। ये जांच ग्लोबल सप्लाई चेनों में कथित बंधुआ मजदूरी और ‘अत्यधिक उत्पादन क्षमता’ से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। यूएसटीआर ने 2 जून को भारत समेत 54 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था। यह टैरिफ बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में लगाने की बात कही गई थी। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है। इस पर हितधारक 22 जून तक सुनवाई में भाग लेने के अनुरोध और बयान जमा कर सकते हैं। यूएसटीआर 7 जुलाई को सुनवाई करेगा। दूसरी जांच की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है। क्‍यों महत्‍वपूर्ण है ये बैठक?  भारत और अमेरिका एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. कुछ सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा 190 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है. दोनों सरकारों ने आन वाले सालों में व्‍यापार को और बढ़ाने की इच्‍छा जताई है. इस कारण जेमिसन ग्रीर की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्‍योंक इससे व्‍यापार वार्ता की दिशा का संकेत मिल सकता है।  अभी तक डील पर क्‍या हुआ है?  भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौते का ऐलान किया गया है, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी नहीं हुई है. इस डील पर दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं, जल्‍द ही इस डील पर फाइनल मोहर लग सकती है. वहीं भारत अमेरिका से टैरिफ को और कम करने की मांग रख सकता है, जबकि अमेरिका भारत से एग्री के कुछ प्रोडक्‍ट्स को परमिशन देने की मांग कर रहा है। 

1 जुलाई से बदलेंगे कई नियम! LPG, रेलवे टिकट और आधार समेत इन 7 बदलावों का पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली जून का महीना कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है और फिर जुलाई की शुरुआत होने वाली है. हर महीने की तरह इस बार भी 1 जुलाई से कई अहम फाइनेंशियल नियमों में बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ सकता है।  नौकरीपेशा कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, टैक्सपेयर्स और बैंक ग्राहकों समेत करोड़ों लोगों के लिए ये बदलाव जानना बेहद जरूरी है. कुछ नियम आपके खर्च को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि कुछ बदलाव आपके निवेश, बैंकिंग और वित्तीय योजनाओं से जुड़े हो सकते हैं. ऐसे में जुलाई शुरू होने से पहले इन नए नियमों की जानकारी रखना आपके लिए जरूरी साबित हो सकता है।  आधार कार्ड से जुड़ा नियम 1 जुलाई 2026 से आधार कार्ड में ई-मेल आईडी अपडेट कराना और आसान हो जाएगा. यूआईडीएआई (UIDAI) ने जानकारी दी है की आधार मोबाइल ऐप के जरिए ई-मेल अपडेट करने पर लगने वाला 75 रुपये का चार्ज अगले छह महीने तक नहीं लिया जाएगा. यह सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी. इस कदम का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने आधार रिकॉर्ड अपडेट रखवाना है और डिजिटल सर्विसेस तक उनकी पहुंच को बेहतर बनाना है।  रेलवे यात्रियों के लिए बदलेगा नियम 1 जुलाई 2026 से रेलवे में बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माना और सख्त हो सकता है. केंद्र सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बिना टिकट सफर करने पर न्यूनतम जुर्माना ₹250 से बढ़ाकर ₹500 किया जा सकता है. इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करना, ट्रेन में हंगामा करना, भीख मांगना, अवैध फेरी लगाना या महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में सफर करने जैसी गलतियों पर भी भारी जुर्माना लग सकता है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से रेलवे में अनुशासन और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है।  एफडी के नियमों में बदलाव पिछले महीने आरबीआई की एमपीसी बैठक के बाद कुछ बैंकों ने इंटरेस्ट रेट में बदलाव किए थे. जुलाई की शुरुआत के साथ एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) से जुड़े नियमों और ब्याज दरों में बदलाव देखने को मिल सकता है. बैंक समय-समय पर अपनी एफडी दरों की समीक्षा करते हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार इनमें बदलाव करते हैं. ऐसे में निवेशकों को नई एफडी कराने या पुरानी एफडी को रिन्यू कराने से पहले बैंक की ताजा ब्याज दरों और नियमों को चेक जरूर कर लेना चाहिए।  क्रेडिट कार्ड से जुड़ा नियम 1 जुलाई 2026 से एसबीआई कार्ड अपने कुछ क्रेडिट कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट नियमों में बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव खास तौर पर PhonePe SBI Credit Card PURPLE और PhonePe SBI Credit Card SELECT BLACK कार्डधारकों पर लागू होगा. नए नियमों के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की सीमा तय की जाएगी और कुछ अतिरिक्त प्रकार के लेनदेन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. ऐसे में इन कार्डों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को नए नियमों की जानकारी पहले से ले लेनी चाहिए, ताकि उनके रिवॉर्ड बेनिफिट्स पर पड़ने वाले असर को समझा जा सके. इसके अलावा भी कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड्स के नियमों से जुड़े बदलाव जुलाई के महीने में कर सकते हैं।  LPG के दाम में बदलाव जून के पहले हफ्ते में ही देशभर में घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर महंगा हो गया था. सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी. पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार था जब रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए. इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़त की गई थी. नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है. अब जुलाई के महीने में भी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव होने की उम्मीद है. अगर मिडिल ईस्ट का टेंशन पूरी तरह खत्म नहीं होता है और ऊर्जा सप्लाई में परेशानी आती है तो एलपीजी की कीमतों में बदलाव हो सकता है।  पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर भारत में पेट्रोल के दामों पर भी दिखा. मई 2026 में पेट्रोल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई. 25 मई को हुई बढ़ोतरी के अनुसार पेट्रोल 2.46 रुपये से 2.95 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हुआ. इससे पहले 23 मई को 0.87 रुपये से 1.46 रुपये था और उससे पहले 0.82 रुपये से 1.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. अब जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव हो सकता है।  ATF फ्यूल की कीमतों में बदलाव हफ्तेभर पहले ही केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी की थी. नई दरों के अनुसार, डीजल के निर्यात पर 14 रुपये प्रति लीटर और ATF के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया था. हालांकि, पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया. सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इन दरों की समीक्षा करती रहती है. ऐसे में नए महीने की शुरुआत में भी एटीएफ की कीमतों में बदलाव हो सकता है। 

MP कैबिनेट विस्तार जल्द! 5 नामों पर मंथन, सिंधिया गुट के इस दिग्गज की एंट्री लगभग तय

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अपने मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। दरअसल, हाल ही में सीएम मोहन यादव ने बड़े संकेत दिए हैं जिसके बाद से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो 4-6 मंत्री सीएम की रडार पर हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। वहीं खबर है कि 4-5 विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। जिनमें दो महिला विधायकों का जिक्र है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों की संख्या के गणित की बात करें तो मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरा जा सकता है। इसके साथ ही नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है। सीएम मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षी और उनके रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि इसके लिए उन्होंने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। अटकलें है कि मंत्री विजय शाह, वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, पंचायत विभाग की राज्यमंत्री राधा सिंह, संपतिया उइके और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना की शिकायतों के बाद उनपर गाज गिरना लगभग तय है। तीन सीनियर मंत्रियों के बदले जा सकते हैं विभाग अटकलें है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सरकार के दिग्गज मंत्रियों के विभागों में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका में देखें जा सकते हैं। इन विधायकों को मिल सकती है एंट्री कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। इनके अलावा सागर से प्रदीप लारिया, पन्ना से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। सिंधिया खेमे से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

अच्छी नौकरी, मोटी सैलरी फिर भी डिप्रेशन! ‘बोरआउट’ ने बढ़ाई कर्मचारियों की चिंता

नई दिल्ली  अब तक आपने सुना होगा कि ऑफिस में काम का दबाव ज्यादा होने के कारण लोग बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं। यानी काम का प्रेशर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से थका रहा है, लेकिन अब एक दूसरी समस्या सामने आ रही है।  अब कर्मचारी ऑफिस में बर्नआउट से ज्यादा बोरियत का शिकार हो रहे हैं, जिसे बोरआउट कहते हैं। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि दफ्तरों में करने के लिए काम नहीं बचा है, बल्कि लोगों को अब उस काम का कोई मकसद नजर नहीं आ रहा है। जब काम में कोई नया चैलेंज नहीं मिलता या वो दिनभर खाली बैठे रहते हैं, तो ये खालीपन उन्हें अंदर से तोड़ने लगता है।  बाहर से देखने पर सबकुछ बिल्कुल ठीक दिखाई देता है। अच्छी नौकरी, सैलेरी, एसी की हवा और आरामदायक कुर्सी, लेकिन भारी बोरियत की वजह से अंदर ही अंदर कर्मचारियों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।  बोरआउट कर्मचारियों को कैसे प्रभावित कर रहा है? इस शब्द का सबसे पहली बार इस्तेमाल यूरोप के एक वर्कप्लेस रिसर्च में किया गया था। इस रिसर्च के अनुसार, लगातार काम कम मिलना, एक ही तरह का काम रोज-रोज करना या अपने स्किन का इस्तेमाल न कर पाना, कर्मचारियों को स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन की तरफ धकेल रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने बर्नआउट को काम से जुड़े सिंड्रोम के रूप में डिफाइन किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑफिस में कोई मकसद न होने की वजह से पैदा होने वाला स्ट्रेस मेंटल हेल्थ के लिए काफी नुकसानेह है।  बिजी दिखने की मजबूरी एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट ऑफिसेज में ऐसे कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन्हें सैलेरी तो अच्छी मिल रही है, लेकिन उनका काम बहुत कम है या काफी बिखरा हुआ है। ऐसे कर्मचारी दिनभर सिर्फ बिजी दिखने की कोशिश करते हैं। मीटिंग्स, ई-मेल और स्क्रीन के सामने खुद को बेकार महसूस करना ही बोरआउट की असली वजह है।  वर्कप्लेस से जुड़ी रिपोर्ट्स बताती हैं कि कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अपने काम से कनेक्टेड महसूस नहीं करता। काम में कोई चैलेंज न होने से स्ट्रेस, आत्मसम्मान में कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं पैदा होती है, क्योंकि कर्मचारियों को अपनी प्रोडक्टिविटी और काबिलियत पर शक होने लगता है।  आईटी, बैंकिंग और सरकारी दफ्तरों पर सबसे ज्यादा असर ग्लोबल सर्वे और एचआर ट्रेंड्स के मुताबिक, दुनिया भर के करीब 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारी किसी न किसी स्तर पर इस बोरियत का सामना कर रहे हैं। खासतौर से आईटी, बैंकिंग और सरकारी दफ्तरों में यह समस्या बहुत ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि इन जगहों पर एक ही काम को बार-बार दोहराने का चलन ज्यादा है। क्यों बढ़ रहा है यह खतरा? हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के अनुसार, काम के मशीनीकरण के कारण नयापन खत्म हो रहा है। साथ ही, योग्यता के अनुसार जिम्मेदार न मिलना, जरूरत से ज्यादा स्टाफ होना, काम का गलत डिस्क्रिप्शन भी बोरआउट की वजह है। इसके पीछे मैनेजर का रवैया भी जिम्मेदार है कि वे केवल इस बात का ध्यान रखते हैं कि कर्मचारी काम करते हुए दिखे।   

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर के लिए नई मुश्किल, विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के अभाव में अटके शिक्षकों के आवेदन

भोपाल मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शिक्षकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है. पोर्टल की तकनीकी खामियों और नई अनिवार्य शर्तों के कारण हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों के सामने आ रही है. दरअसल इस बार पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वालों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है।  पुराने कर्मचारियों के लिए नई शर्त परेशानी शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार "स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं, जिनका विवाह 15 से 20 वर्ष पूर्व हुआ था. उस समय विवाह पंजीयन की व्यवस्था व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी और न ही विभागीय सेवाओं में इसकी कभी अनिवार्यता रही है. ऐसे में अचानक विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लागू होने से हजारों पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।  पुराने विवाहित कर्मचारियों के सामने संकट संगठन के अनुसार ऐसे लोक सेवक, जिनमें पति-पत्नी दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं या उनमें से एक अन्य विभाग में पदस्थ है, वे पति-पत्नी आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन पोर्टल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के बिना आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा। शिक्षकों का कहना है कि उनके पास विवाह से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज, सेवा अभिलेख, परिवार समग्र आईडी, नामांकन रिकॉर्ड और शासकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें आवेदन से वंचित किया जा रहा है। तकनीकी खामियों से बढ़ी मुश्किल विवाह पंजीयन के अलावा दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र, पारस्परिक स्थानांतरण, जिला विकल्पों की अनुपलब्धता और विभिन्न पदों के विकल्प नहीं खुलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक संगठन ने मांगा वैकल्पिक प्रावधान शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। जिन कर्मचारियों के पास विवाह पंजीयन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, समग्र आईडी, पति-पत्नी की शासकीय सेवा संबंधी जानकारी अथवा अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार करने का विकल्प दिया जाए। संगठन ने कहा कि यदि विभाग ने जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई तो हजारों शिक्षक केवल दस्तावेजी बाधा के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग शिक्षक संगठन ने शासन से पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने, विवाह पंजीयन संबंधी शर्त में संशोधन करने तथा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर देना विभाग की जिम्मेदारी है और किसी भी शिक्षक को तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।   वैकल्पिक दस्तावेजों को मिले मान्यता संगठन का कहना है कि पति-पत्नी संबंध प्रमाणित करने के लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, नामांकित सदस्य रिकार्ड, आधार कार्ड, समग्र आईडी अथवा अन्य विभागीय दस्तावेज पहले से उपलब्ध हैं. इन दस्तावेजों को मान्य नहीं किए जाने से शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  तिम तिथि नजदीक, बढ़ी चिंता बता दें की स्थानांतरण के आवेदन की अंतिम तिथि 24 जून निर्धारित है. ऐसे में जिन शिक्षकों के पास विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए निर्धारित समय में पंजीयन करवाकर आवेदन करना लगभग असंभव है. इससे पात्र शिक्षक अपने स्थानांतरण के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।  संगठन ने शासन से की मांग शासकीय शिक्षक संगठन ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता में तत्काल संशोधन किया जाए. अन्य वैध दस्तावेजों को स्वीकार करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए. साथ ही पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, जिससे कोई भी पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित न रहे।