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Punjab News: ED ने मंत्री संजीव अरोड़ा की ₹55.57 करोड़ की संपत्ति की अटैच, दुबई कंपनियों के नाम पर बिलिंग का आरोप

लुधियान  प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई करते हुए पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ी कंपनी मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (पूर्व नाम-मैसर्स रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) और संबंधित लोगों की 55.57 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क हुई कुर्क।  यह कार्रवाई कथित तौर पर मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दुबई की जिन कंपनियों के नाम पर मोबाइल निर्यात के बिल बनाए गए, वे भी कथित रूप से आरोपी पक्ष से जुड़ी हुई थीं। ईडी ने इस मामले के मुख्य आरोपी और कंपनी के तत्कालीन चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर को पहले ही गिरफ्तार किया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने संकेत दिया है कि मामले में आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। इन शहरों की संपत्तियां हुईं कुर्क ED द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), जमीन, कमर्शियल स्पेस और आलीशान आवासीय अपार्टमेंट शामिल हैं। ये संपत्तियां लुधियाना, गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हैं और कंपनी, संजीव अरोड़ा तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं। कैसे खुला फर्जीवाड़े का यह खेल, जानिए..     गुरुग्राम में दर्ज FIR से शुरू हुई जांच: यह मामला सबसे पहले गुरुग्राम (हरियाणा) के उद्योग विहार थाने में दर्ज एक FIR के बाद सामने आया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं (जो पहले IPC की धारा 420, 467, 471 और 120-B थीं) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया गया था। चूंकि ये मामले PMLA एक्ट के तहत आते हैं, इसलिए ED ने इसकी जांच अपने हाथ में ली थी।   कागजों पर बेच डाले ₹157 करोड़ के मोबाइल: ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रियल एस्टेट सेक्टर की इस कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 157 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई थी। इसमें से करीब 102.50 करोड़ रुपए का मोबाइल एक्सपोर्ट दुबई (UAE) की दो कंपनियों मैसर्स फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और मैसर्स ड्रैगन ग्लोबल FZCO को करना दिखाया गया था।     शेल कंपनियों का नेटवर्क: एक ही नंबर और ईमेल से खुलीं फर्में: जब ED ने गहराई से जांच की तो पता चला कि जिन स्थानीय सप्लायर्स से मोबाइल खरीदना दिखाया गया था, वे असल में केवल कागजी (शेल) कंपनियां थीं। कई फर्में एक ही मोबाइल नंबर और एक ही ईमेल आईडी पर चल रही थीं। इनका काम सिर्फ फर्जी बिल बनाना और बिना किसी सामान की डिलीवरी के केवल कागजी एंट्री घुमाना था।     दुबई कनेक्शन भी खुद का ही: ED के मुताबिक, दुबई जिन कंपनियों को मोबाइल का निर्यात दिखाया गया, वे असल में कोई बाहरी कंपनियां नहीं थीं, बल्कि उनका रिमोट कंट्रोल भी इसी आरोपी ग्रुप के हाथों में था। यानी बिना किसी मोबाइल की आवाजाही के सिर्फ कागजों पर करोड़ों का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट चल रहा था। ₹102.99 करोड़ की 'अपराध की कमाई ED ने अब तक की जांच में इस पूरे घोटाले से हुईअपराध की कमाई की कुल रकम करीब 102.99 करोड़ रुपए आंकी है। एजेंसी ने बीते 9 मई 2026 को इस मामले में धारा 17 के तहत बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया था, जिसके बाद मुख्य आरोपी संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार किया गया था। ED का कहना है कि मोबाइल एक्सपोर्ट के नाम पर की गई मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खोली जा चुकी हैं, जबकि इस मामले में लोकल सेल (स्थानीय बिक्री) को लेकर जांच अभी भी जारी है, जिससे कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।  

संजीव अरोड़ा को नहीं मिली राहत, अदालत बोली- जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा

चंडीगढ़  . पंजाब सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका लगा है. ट्रायल कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत देने से गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और साक्ष्‍य भी प्रभावति हो सकते हैं. इसलिए जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है।  कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी मामले से जुड़े एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, संजीव अरोड़ा ने एक गवाह को उसका बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35 हजार रुपये का भुगतान किया था. अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो उसके द्वारा दोबारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।  खारिज करने की बताई वजह अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में यदि किसी आरोपी के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप सामने आते हैं, तो उसे जमानत देने से जांच और सुनवाई प्रभावित हो सकती है. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि संजीव अरोड़ा नियमित जमानत पाने के हकदार नहीं हैं और उनकी याचिका खारिज कर दी।  पहले भी गवाह प्रभावित कर चुका है कोर्ट ने आदेश के अंत में विशेष रूप से उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, आरोपी ने गवाह को अपना बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35,000 रुपये का भुगतान किया था।  क्‍या है मामला संजीव अरोड़ा पंजाब की राजनीति में एक चर्चित चेहरा हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं. उनके खिलाफ चल रहे मामले को लेकर पिछले कुछ समय से कानूनी कार्यवाही जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष यह दलील दी थी कि आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया था।  अब बचा है ये विकल्‍प अब ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद संजीव अरोड़ा को राहत नहीं मिली है. हालांकि, उनके पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला हुआ है. फिलहाल अदालत के इस फैसले ने मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में चर्चा तेज कर दी है। 

राहत मिलेगी या बढ़ेंगी मुश्किलें? संजीव अरोड़ा मामले में आज कोर्ट में अहम सुनवाई

लुधियाना प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए गए पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा है। वहीं, मंत्री के समर्थकों, पार्टी नेताओं और परिजनों की नजरें भी अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। सुनवाई से एक दिन पहले रविवार को संजीव अरोड़ा के करीबी समर्थकों और पार्टी नेताओं ने गुरुद्वारा साहिब में विशेष अरदास करवाई। उन्होंने मंत्री की जल्द रिहाई और न्यायिक राहत की कामना की। पिछले कई दिनों से उनके समर्थक लगातार सकारात्मक फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गौरतलब है कि 9 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि एक रियल एस्टेट कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से संपत्तियों की खरीद-बिक्री तथा वस्तु एवं सेवा कर संबंधी कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी मामले में जांच के दौरान एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए अरोड़ा को चंडीगढ़ से हिरासत में लिया था। न्यायिक हिरासत में हैं मंत्री अरोड़ा गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से उनका रिमांड प्राप्त कर पूछताछ की थी। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी इस मामले की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही है। बीते कुछ सप्ताह के दौरान अरोड़ा से जुड़े कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा हाल ही में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के आवास पर भी एजेंसी ने कार्रवाई की थी। हालांकि एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी नई जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है। आज राहत मिलने के संकेत राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सोमवार की सुनवाई इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यदि अदालत से राहत मिलती है तो यह संजीव अरोड़ा और उनके समर्थकों के लिए बड़ी राहत होगी। वहीं यदि जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा जाता है या याचिका खारिज होती है तो उनकी कानूनी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें अदालत की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय की जांच भी लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संजीव अरोड़ा केस में प्रवर्तन निदेशालय की ताबड़तोड़ रेड, कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

लुधियाना  पंजाब की भगवंत मान सरकार के पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्शन तेज कर लिया है. ईडी ने सुबह-सुबह यूपी से पंजाब तक छापेमारी की है. संजीव अरोड़ा को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था वो अभी गुरुग्राम की जेल में बंद हैं।  ईडी ने संजीव अरोड़ा से जुड़े जिस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की है, वो दुबई को मोबाइल फोन के फर्जी एक्सपोर्ट से जुड़ा है. कई जगहों पर सुबह से छापेमारी चल रही है. यूपी के नोएडा और बरेली, दिल्ली और पंजाब के जालंधर शहर में ईडी की कार्रवाई जारी है।  अधिकारियों के अनुसार, जिन परिसरों में सर्च ऑपरेशन चल रहा है, उनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड मामले में जांच के दायरे में आए व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़े आवास और व्यावसायिक कार्यालय दोनों शामिल हैं।  केजरीवाल बोले- हिंदू व्यापारियों पर ईडी की रेड आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने ईडी को ईडी पार्टी बताते हुए कहा, 'ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है. ED पार्टी पंजाब के छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है. मेरी सभी व्यापारियों से अपील है- घबराने की कोई बात नहीं है, पूरा पंजाब और पंजाब सरकार आपके साथ है, हम सब मिलकर ED पार्टी का मुकाबला करेंगे।      ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है। ED पार्टी पंजाब के छोटे छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है। पंजाब, यूपी और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर छापेमारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (Hampton Sky Realty Ltd.) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी जांच के क्रम में लुधियाना और जालंधर (पंजाब), बरेली (उत्तर प्रदेश) तथा दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन परिसरों पर तलाशी ली जा रही है उनमें मामले से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के आवासीय एवं व्यावसायिक कार्यालय शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की जांच के तहत की जा रही है। तलाशी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और एजेंसी द्वारा बरामद सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। संजीव अरोड़ा के खिलाफ एक्शन क्यों? संजीव अरोड़ा को ED ने 100 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें उनसे जुड़ी कुछ इकाइयां शामिल हैं. अरोड़ा से जुड़ी कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) ने फर्जी दस्तावेजों और फर्जी निर्यात के जरिए करीब ₹102.5 करोड़ की अवैध कमाई की और GST रिफंड लेकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया. बता दें कि HSRL को पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। 

मनी लॉन्ड्रिंग केस में मंत्री संजीव अरोड़ा न्यायिक हिरासत में, अदालत में भावुक हुए

  चंडीगढ़ पंजाब सरकार के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को बड़ा झटका लगा. स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. अब इस मामले में उनकी अगली पेशी 1 जून को होगी. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो दिन की रिमांड समाप्त होने के बाद संजीव अरोड़ा को कोर्ट में पेश किया था।  कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान संजीव अरोड़ा भावुक नजर आए. जैसे ही उनकी मुलाकात परिवार के सदस्यों से हुई, वह उन्हें गले लगाकर फफक कर रो पड़े. गिरफ्तारी के बाद यह पहला मौका था जब उनके परिजन उनसे मिल पाए. कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों ने भी इस भावुक पल को देखा. ईडी ने संजीव अरोड़ा को 9 मई की देर शाम चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था।  जांच एजेंसी का आरोप है कि वह 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी GST बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट से जुड़े हुए हैं. ईडी के मुताबिक मोबाइल फोन ट्रेडिंग के नाम पर कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर फर्जी बिल तैयार किए गए और हवाला जैसे नेटवर्क के जरिए रकम को इधर-उधर किया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि दिल्ली स्थित बोगस कंपनियों के माध्यम से संदिग्ध लेनदेन किए गए।  इसी मामले में ईडी ने दिल्ली, चंडीगढ़ और गुरुग्राम समेत कई स्थानों पर छापेमारी भी की थी. छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिलने का दावा किया गया है, जिनकी जांच अभी जारी है. सुनवाई के दौरान संजीव अरोड़ा की ओर से कोर्ट में आवेदन दाखिल कर अपनी पसंद का वकील नियुक्त करने और वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने की अनुमति मांगी गई. ईडी के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर साइमन बेंजामिन ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।  इसके बाद कोर्ट ने संजीव अरोड़ा को वकील नियुक्त करने की अनुमति दे दी और जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वकालतनामा से जुड़े दस्तावेज उनके वकील या परिवार के सदस्य को बिना देरी उपलब्ध कराए जाएं. इसके अलावा कोर्ट ने ईडी को यह भी निर्देश दिया कि संजीव अरोड़ा को रोजाना सुबह 10 बजे से 11 बजे तक अपने वकील से मिलने दिया जाए. साथ ही उनकी सेहत को देखते हुए सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं और दवाइयां उपलब्ध कराने के आदेश भी दिए गए हैं। 

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा हुए गिरफ्तार, ED ने लिया सख्त एक्शन

चंडीगढ़  पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को शनिवार को बड़ा झटका लगा है। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। 100 करोड़ से ज्यादा के कथित फर्जी जीएसटी खरीद बिल और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को करीब 7 घंटे लंबी चली रेड के बाद ईडी ने संजीव अरोड़ा की यह गिरफ्तारी की है। चंडीगढ़ में उनके सरकारी आवास से उम्हें गिरफ्तार किया गया है। उनके बेटे की भी गिरफ्तारी की सूचना है। अरोड़ा के चंडीगढ़ समेत कई ठिकानों पर ईडी ने आज सुबह रेड की थी। अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी की कार्रवाई पांच परिसरों में की गई, जिनमें आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरोड़ा का चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक आवास भी शामिल है। छापेमारी दिल्ली और हरियाणा के गुरुग्राम स्थित परिसरों में भी की गई। इनमें 'हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड' नामक कंपनी का परिसर भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत नया मामला दर्ज किए जाने के बाद ये छापेमारी की गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में यह तीसरी बार है जब ईडी संजीव अरोड़ा के घर पहुंची है, लेकिन एजेंसी को अब तक कुछ नहीं मिला. उन्‍होंने कहा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे दबाया नहीं जा सकता. भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है.  आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने ईडी को भाजपा का ‘सुपारी किलर’ बताते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि कुछ दिनों तक कार्रवाई और खबरों का दौर चलेगा, लेकिन बाद में एजेंसी खाली हाथ लौट जाएगी.  पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया. उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले भाजपा इस तरह की कार्रवाई कर विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश करती है. चीमा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के नेताओं को डराने और कामकाज प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. ईडी ने अप्रैल में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के दीवानी प्रावधानों के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापे मारे थे। अरोड़ा (62) लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। भगवंत मान ने साधा केंद्र पर निशाना वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शनिवार को छापेमारी किए जाने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा। मान ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत केंद्र सरकार पर अपने राजनीतिक मकसद पूरे करने के लिए ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी एजेंसियों को 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री मान ने संगरूर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां भाजपा के पास मौजूद वे चार-पांच हथियार हैं, जिनका राजनीतिकरण कर दिया गया है। मान ने कहा, ''वे लंबे समय से अपनी राजनीति के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे महाराष्ट्र हो या ओडिशा, बिहार हो या कर्नाटक अथवा पश्चिम बंगाल। अब पंजाब उनके निशाने पर है।''

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, कई अधिकारी मौके पर

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी. सुबह करीब 7 बजे सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी पर ED अधिकारियों का काफिला पहुंचा. करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों के साथ भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया. CIA और स्पेशल फोर्स के करीब तीन दर्जन जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया. जानकारी के मुताबिक सुबह 7:25 बजे औपचारिक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. ED की यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की जा रही है. एजेंसी चंडीगढ़ और दिल्ली-NCR में संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े सहयोगियों के कुल चार ठिकानों पर जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई दो दिन पहले शुरू हुई बड़ी जांच का विस्तार मानी जा रही है, जिसमें बिल्डर अजय सहगल, मोहिंदर सिंह और अन्य कारोबारियों के यहां भी छापेमारी हुई थी।  इस कार्रवाई के समानांतर पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर की 9वीं मंजिल पर चल रही ED रेड भी शुक्रवार देर रात खत्म हुई. यह सर्च ऑपरेशन करीब 40 घंटे तक चला. कारोबारी नितिन गोहल और प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घरों और दफ्तरों पर लगातार जांच चलती रही. सूत्रों के मुताबिक प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घर से ED की टीम रात करीब 11 बजे निकली, जबकि नितिन गोहल के यहां कार्रवाई देर रात 12:30 से 1 बजे के बीच खत्म हुई. हालांकि अधिकारियों ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि ED अधिकारी कई बैग और दस्तावेज लेकर बाहर निकले. अभी तक एजेंसी ने बरामदगी, जब्ती या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।  एक महीने में दूसरी बार, एक साल में तीसरी रेड पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ED पहुंची है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे कोई ताकत झुका नहीं सकती. मान ने आरोप लगाया कि ED और BJP मिलकर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है।  बिल्डर नेटवर्क से जुड़ रही जांच की कड़ियां सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले पंजाब और दिल्ली-NCR में बिल्डर और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की थी. उसी जांच के तार अब संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है. अधिकारियों ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ती छापेमारी से यह साफ है कि जांच का दायरा बड़ा हो चुका है।  सुरक्षा घेरे में पूरा इलाका ED रेड के दौरान चंडीगढ़ के सेक्टर-2 इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी रही. मंत्री आवास के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था. सुबह से लेकर देर शाम तक मीडिया और स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा रही. अधिकारियों ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।  क्या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है? फिलहाल ED ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब की राजनीति में इस कार्रवाई को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

पंजाब सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, बदले गए अहम विभागों के प्रभार

चंडीगढ़ पंजाब सरकार एक बार फिर अपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक इस बार कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को लोकल बॉडी (नगर निकाय) विभाग दिया गया है, जबकि डॉ. रवजोत सिंह को एनआरआई विभाग की कमान सौंपी गई है। माना जा रहा है कि ये बदलाव प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किए गए हैं। यह सातवीं बार है जब भगवंत मान सरकार ने अपने मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया है। आप सरकार के सत्ता में आने के बाद लगातार कई मंत्रियों के विभाग बदले गए या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया गया है। जुलाई 2025 में भी हुए थे बड़े बदलाव जुलाई 2025 में संजीव अरोड़ा को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था। उसी समय कुलदीप सिंह धालीवाल को कैबिनेट से हटाया गया और उनका एनआरआई विभाग अरोड़ा को सौंपा गया था। इससे पहले सितंबर 2024 में बड़ा फेरबदल हुआ था, जिसमें चेतन सिंह जौड़ामाजरा, बलकार सिंह,  ब्रह्म शंकर जिम्पा और अनमोल गगन मान जैसे चार मंत्रियों को हटाकर उनकी जगह पांच नए चेहरों को मौका दिया गया था।   राजनीतिक समीकरण और उपचुनाव बने आधार इन बदलावों को मंत्रियों का आंतरिक प्रदर्शन और उपचुनावों के नतीजों से जुड़ा माना जा रहा है। तरुणप्रीत सिंह सोढ़ी के पास पहले उद्योग और वाणिज्य विभाग था, जिसे बाद में अरोड़ा को दे दिया गया। बदले में सोढ़ी को पर्यटन, संस्कृति, श्रम और पंचायत जैसे विभाग दिए गए। यह फेरबदल 2022 से लगातार चल रहे हैं, जब पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था। अब तक 4–5 मंत्रियों को हटाकर नए विधायकों को मौका दिया जा चुका है, ताकि सरकार में संतुलन और ताजगी बनी रहे। 2027 चुनाव की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा बदलाव राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ये बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हैं। वहीं राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इन सभी बदलावों को मंजूरी दे दी है।