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TVK सपोर्टर ने किया आत्मदहन, विजय हुए लाचार; तमिलनाडु में मंडरा रहा बड़ा संकट

चेन्नई  तमिलनाडु में अभी तक सरकार के गठन का रास्ता साफ नहीं हो पाया है. टीवीके भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से 10 कदम की दूरी उसकी सत्ता बनाने की राह में सबसे बड़ी रोड़ा बन रही है. स्पष्ट बहुमत और अभी तक अन्य दलों के स्पष्ट समर्थन न मिल पाने के कारण सरकार नहीं बन पा रही है।  लिहाजा शनिवार को होने वाला थलपति विजय का संभावित शपथ ग्रहण कैंसिल हो गया है. उधर राज्य में सरकार न बन पाने की स्थिति में विजय के समर्थकों में रोष भी देखा जाने लगा है. शनिवार को सामने आया कि एक समर्थक ने खुद को आग लगा ली, जिसे गंभीर रूप से झुलसे के बाद अस्पताल ले जाया गया है।  विजय के सीएम बनने में देरी से नाराज था युवक असल में, तमिलनाडु में सरकार गठन में हो रही देरी के बीच टीवीके प्रमुख C. Joseph Vijay के एक समर्थक ने कथित तौर पर खुद को आग लगा ली. करीब 40 वर्षीय इसक्कियप्पन गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि विजय के मुख्यमंत्री बनने में हो रही देरी से वह बेहद नाराज और भावुक थे. जानकारी के मुताबिक, चार महीने पहले भी इसक्कियप्पन ने विजय के मुख्यमंत्री बनने की कामना करते हुए अपने चेहरे में 16 फीट लंबा ‘वेल’ (भाला) आर-पार किया था।  तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर बढ़ते तनाव के बीच तमिलिसाई सौंदराराजन ने टीवीके प्रमुख थलपति विजय से शांति बनाए रखने की अपील करने को कहा है. तमिलिसाई ने कहा कि तमिलनाडु में हर व्यक्ति नई सरकार के गठन को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है और लोग यह भी चाहते हैं कि बनने वाली सरकार स्थिर हो. उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जा रहा है और इसी वजह से सरकार गठन के लिए कई मौके दिए जा रहे हैं।  वल्लियूर में भी एक युवक ने की आत्मदाह की कोशिश हालांकि उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर कई कार्यकर्ता भावनात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि वीसीके कार्यालय के बाहर एक युवक पर ब्लेड से हमला किया गया, जबकि वल्लियूर में एक अन्य व्यक्ति ने आत्मदाह की कोशिश की और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।  तमिलिसाई ने विजय से अपील करते हुए कहा कि वह तुरंत अपने समर्थकों और उन्हें वोट देने वाले लोगों के नाम शांति बनाए रखने का संदेश जारी करें और किसी भी खतरनाक कदम से बचने की सलाह दें।  थलापति विजय हुए लाचार, मंडरा रहा यह बड़ा खतरा! तमिलनाडु में जिसका डर है, वही होता दिख रहा है. तमिलनाडु चुनाव में रिजल्ट त्रिशंकु रहा. किसी को बहुमत नहीं मिला. न तो डीएमके-एआईडीएमके और न ही टीवीके. हालांकि, थलापति विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, मगर बहुमत से दूर रह गई. ऐसे में तमिलनाडु में सरकार गठन का पेच फंस गया है. यह पेच भी ऐसा है, जो सुलझता दिख नहीं रहा है. आलम यह है कि थलापति विजय लाचार दिख रहे हैं. महज एक-दो विधायकों की कमी से वह सरकार नहीं बना पा रहे हैं. राज्यपाल साफ कर चुके हैं कि जब तक बहुमत का नंबर नहीं होगा, तब तक सरकार गठन का न्योता नहीं मिलेगा. ऐसे में तमिलनाडु में संवैधानिक खतरा मंडरा रहा है।  दरअसल, तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी सियासी घमासान अब और गहरा गया है. राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं, क्योंकि सरकार गठन को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है. आरोप-प्रत्यारोप, विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त, फर्जी समर्थन पत्र और ‘लापता’ विधायकों के दावों ने राज्य की राजनीति को बेहद पेचीदा बना दिया है. सबके मन में राष्ट्रपति शासन वाला डर सता रहा है. थलापति विजय तो बड़ी जीत के बाद भी सरकार बनाने को तरस रहे हैं।  मंडरा रहा बड़ा संवैधानिक खतरा बहरहाल, तमिलनाडु की मौजूदा सरकार का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है. अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि अगली सरकार कौन बनाएगा. सरकार की तस्वीर अगर 48 घंटे में साफ नहीं होती है तो तमिलनाडु की तकदीर में कुछ और हो सकता है. जी हां, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने साफ कर दिया है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 118 विधायकों का समर्थन साबित किए बिना किसी भी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाएगा।  किसके पास कितनी सीटें 23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि, बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से वह अभी भी पीछे है. वहीं, डीएमके गठबंधन को 73 सीटें मिलीं, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की. बहुमत जुटाने के लिए टीवीके ने कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआई और सीपीआई (एम) से बातचीत शुरू की. कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद टीवीके का आंकड़ा 113 तक पहुंच गया।  कौन-कौन कर रहा समर्थन बाद में सीपीआई और सीपीआई (एम) ने भी बिना शर्त बाहरी समर्थन देने का ऐलान किया, जिससे संख्या बढ़कर 117 हो गई. लेकिन मामला यहां भी उलझ गया. थलापति विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ सकती है. ऐसे में प्रभावी संख्या फिर कम हो सकती है और टीवीके बहुमत से पीछे रह सकती है. वीसीके के समर्थन की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ों को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।   

रूस की विजय दिवस परेड शांत, सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों का आदला-बदली होगा

मॉस्को  यूक्रेन युद्ध के लगातार जारी रहने और सुरक्षा खतरों के बीच रूस ने शनिवार को अपना विजय दिवस परेड बेहद सीमित रूप में आयोजित किया. हर साल 9 मई को मॉस्को के रेड स्कॉयर पर होने वाली यह परेड रूस के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में मानी जाती है. यह दिन सोवियत संघ की नाजी जर्मनी पर जीत और दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लाखों लोगों की याद में मनाया जाता है. लेकिन इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई दिया।  आमतौर पर रूस इस परेड में अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करता रहा है. टैंक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें रेड स्कॉयर पर दिखाई जाती थीं। हालांकि इस साल सुरक्षा कारणों और यूक्रेन हमले के खतरे की वजह से टैंक या भारी सैन्य वाहन सड़क पर नहीं उतारे गए।  इसके बजाय रूस ने अपनी सैन्य ताकत को बड़े डिजिटल स्क्रीन और सरकारी टीवी प्रसारण के जरिए दिखाया. इसमें Yars इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, आर्कान्जेस्क परमाणु पनडुब्बी, पेरेसवेत लेजर हथियार, सुखोई Su-57 फाइटर जेट, एस-500 मिसाइल सिस्टम और कई ड्रोन व आर्टिलरी सिस्टम शामिल थे।  परेड में रूसी सैनिकों और नौसेना के जवानों ने मार्च किया. इनमें कुछ ऐसे सैनिक भी शामिल थे जो यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रेड स्क्वायर में व्लादिमीर लेनिन समाधि के पास बैठे दिखाई दिए. उनके साथ रूसी युद्ध वेटरन्स भी मौजूद थे. इस बार परेड में नॉर्थ कोरिया के सैनिक भी शामिल हुए. रिपोर्ट के मुताबिक ये सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगभग आठ मिनट का भाषण दिया. उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध में जीत हासिल करेगा. उन्होंने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' चला रहे रूसी सैनिक NATO समर्थित ताकतों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आगे बढ़ रहे हैं. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल करने वाली पीढ़ी आज के सैनिकों को प्रेरणा दे रही है।  इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की जानकारी दी. उन्होंने ने कहा कि वे इस युद्धविराम को और लंबे समय तक बढ़ते देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे विनाशकारी संघर्ष बन गया है. उनके मुताबिक हर महीने हजारों युवा सैनिक मारे जा रहे हैं।  रूस और यूक्रेन दोनों ने हाल के दिनों में एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए थे, लेकिन शनिवार से शुरू हुए नए सीजफायर के उल्लंघन की कोई बड़ी रिपोर्ट सामने नहीं आई।  रूस ने यूक्रेन को चेतावनी दी थी कि अगर उसने विजय दिवस परेड को निशाना बनाया तो कीव पर बड़ा मिसाइल हमला किया जाएगा. मॉस्को ने विदेशी दूतावासों को भी सतर्क रहने को कहा था।  वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने व्यंग्यात्मक अंदाज में बयान जारी करते हुए कहा कि रूस की 9 मई की परेड 'होने दी जाएगी' और यूक्रेनी हथियार रेड स्कॉयर को निशाना नहीं बनाएंगे. परेड के दौरान मॉस्को में सुरक्षा बेहद कड़ी रही। शहर के कई रास्ते बंद किए गए और सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहे. रॉयटर्स की तस्वीरों में हथियारबंद सैनिक पिकअप ट्रकों पर तैनात दिखाई दिए।   सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों की अदला-बदली होगी रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 4 साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन का सीजफायर होगा. यह युद्धविराम 9 मई, 10 मई और 11 मई तक लागू रहेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों ने तीन दिन के सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप ने बताया कि रूस में यह समय विक्ट्री डे के जश्न का है. वहीं यूक्रेन भी दूसरे विश्व युद्ध का एक अहम हिस्सा रहा है, इसलिए यह समय दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सीजफायर के दौरान सभी तरह की सैन्य गतिविधियों को रोका जाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 1,000 कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी।  ट्रंप ने पुतिन को कहा थैंक्यू ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह अनुरोध उन्होंने खुद किया था और इसके लिए उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का धन्यवाद किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम लंबे समय से चल रहे इस खतरनाक युद्ध को खत्म करने की शुरुआत साबित हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए बातचीत लगातार जारी है. उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि शांति की दिशा में कोशिशें हर दिन आगे बढ़ रही हैं और दुनिया इस युद्ध के अंत के और करीब पहुंच रही है। 

तमिलनाडु राजनीति में बदलाव: वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से विजय की पार्टी मजबूत

तमिलनाडु तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय के मुख्यमंत्री बनने और सरकार गठन का रास्ता शनिवार को पूरी तरह साफ हो गया है. वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) ने उनकी पार्टी टीवीके (TVK) को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है. दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं. इससे पहले विजय लगातार तीन दिनों तक राज्यपाल से मुलाकात के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन नहीं दिखा पाए थे. अब वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन के बाद विजय के पास 120 विधायकों का समर्थन हो गया है. इसके साथ ही चार दिनों से जारी राजनीतिक असमंजस खत्म हो गया. विजय की पार्टी टीवीके ने विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपने और सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से आज शाम 6 बजे मुलाकात का समय मांगा था. हालांकि, टीवीके को आज राज्यपाल से मिलने का समय नहीं मिला. इससे पहले विजय ने दो बार राज्यपाल से मुलाकात की थी. लेकिन बहुमत के लिए विधायकों की संख्या पूरी नहीं होने के चलते उन्हें राज्यपाल की ओर सरकार गठन का न्योता नहीं मिला था. तमिलनाडु में TVK बनी सबसे बड़ी पार्टी दो साल पुरानी विजय की टीवीके ने इस चुनाव में डीएमके और एआईएडीएमके जैसी द्रविड़ राजनीति के धुरंधरों को पीछे छोड़ते हुए 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में सफलता हासिल की. हालांकि, विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक छोड़नी होगी, इसलिए पार्टी के विधायकों की वास्तविक संख्या 107 है. डीएमके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 5 सीटें जीतीं. त​मिलनाडु चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस डीएमके से अलग होकर, टीवीके को समर्थन देने वाली पहली पार्टी बनी थी. वामदलों ने भी अपने चार विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है. अब वीसीके और आईयूएमएल के जुड़ने से टीवीके बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है. बता दें कि 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है. विजय के पास 120 विधायकों का समर्थन टीवीके के 107, कांग्रेस के 5, वामदलों के 4 और वीसीके-आईयूएमएल के 2-2 विधायकों के समर्थन से विजय के पास अब 120 विधायकों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े से 2 ज्यादा है. वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन इस बात से नाराज थे कि विजय ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के बजाय व्हाट्सऐप संदेश के जरिए समर्थन मांगा था. आईयूएमएल ने भी शुरुआत में सख्त रुख अपनाते हुए खुद को डीएमके के साथ बताया था. लेकिन शनिवार सुबह टीवीके नेताओं की वीसीके और आईयूएमएल नेतृत्व से मुलाकात के बाद स्थिति बदल गई. वीसीके ने भले ही बिना शर्त समर्थन दिया हो, लेकिन पार्टी नेता वन्नी अरसु ने स्थानीय मीडिया से कहा कि सरकार में शामिल होने को लेकर फैसला बाद में लिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी चाहती है कि विजय द्वारा खाली की जाने वाली सीट से थोल थिरुमावलवन चुनाव लड़ें और आगे चलकर उपमुख्यमंत्री बनें.

PM मोदी ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया, माखनलाल सरकार और बंगाल की जनता पर भावुक पल

कलकत्ता भारतीय जनता पार्टी (BJP) और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पश्चिम बंगाल की जीत के मायने बड़े हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है जब वह शुभेंदु अधिकारी और उनकी कैबिनेट की शपथ के लिए मंच पर पहुंचे तो उन्होंने मंच पर मौजूद माखनलाल सरकार का सम्मान किया। प्रधानमंत्री ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड स्थित मंच पर पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और काफी देर तक गले से लगाए रखा। इस दौरान वहां पीएम मोदी और माखनलाल सरकार सहित मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।आज जब पहली बार पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो भगवा पार्टी ने 98 साल के इस वयोवृद्ध नेता को ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर स्थान दिया और उनका सम्मान किया। पीएम मोदी का बंगाल की जनता को अनोखा सलाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल में पहली भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. सीनियर लीडर सुवेंदु अधिकारी ने सीएम पद की शपथ ली. उनके साथ पांच अन्‍य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली. इस तरह 9 मई 2026 से बंगाल में भाजपा सरकार अस्तित्‍व में आ गई. इस दौरान पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्‍ता दिलाने के लिए पश्चिम बंगाल की जनता को नमन किया. शपथ ग्रहण मंच पर घुटनों के बल बैठते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरपूर प्रेम और आशीर्वाद देने के लिए बंगाल की जनता का भावुक तरीके से आभार जताया।  मौका था पश्चिम बंगाल में पहली भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का. इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे थे. सुवेंदु अधिकारी अन्‍य मंत्रियों के शपथ लेने के बाद उन्‍होंने बंगाल में भाजपा के पहले मुख्‍यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उनके कैबिनेट सहयोगियों को बधाई दी. इसके बाद मौका था उनका शुक्रिया अदा करने का, जिनके आशीर्वाद से भाजपा बंगाल की सत्‍ता में आई. पीएम मोदी ने पहले हाथ उठाया, फिर हाथ जोड़े, उसके बाद मंच पर घुटनों के बल बैठे और फिर नतमस्‍तक होकर पश्चिम बंगाल की जनता का शुक्रिया अदा किया. इस मौके पर समारोह स्‍थल पर ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगते रहे।  कौन हैं माखनलाल सरकार? माखनलाल सरकार आज भी राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती जमीनी स्तर के नेताओं में से एक हैं। 1952 में उन्हें कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ होने पर गिरफ्तार कर लिया गया था। इस दौरान वह जेल में रहे। 1980 में BJP के गठन के बाद वे पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों के संगठनात्मक समन्वयक बने। सिर्फ एक साल के अंदर ही उन्होंने लगभग 10,000 सदस्यों को पार्टी में शामिल करवाने में मदद की। 1981 से लगातार सात वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में सेवा की। यह उस समय एक असाधारण उपलब्धि थी, जब आम तौर पर BJP के नेता किसी एक ही संगठनात्मक पद पर दो साल से ज्यादा नहीं रह पाते थे। इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए शुभेंदु अधिकारी के साथ सभा में पहुंचे रपीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। 'जय श्री राम' के नारों के बीच मोदी खुले वाहन पर सवार होकर समारोह स्थल में दाखिल हुए और हाथ हिलाकर समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया। प्रधानमंत्री सुबह करीब दस बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिये रेस कोर्स मैदान पहुंचे, जहां से वह सड़क मार्ग से समारोह स्थल पर पहुंचे। सुबह से ही हजारों भाजपा समर्थक शपथ ग्रहण समारोह के साक्षी बनने के लिए ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जमा होने लगे।आपको बता दें कि भाजपा ने 294-सदस्यीय विधानसभा में 207 सीट जीतकर राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया है। वयोवृद्ध पार्टी कार्यकर्ता के पीएम मोदी ने छुए पैर पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का आशीर्वाद लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे थे. ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए नामित सुवेंदु अधिकारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य के साथ खुली जीप में सवार होकर वहां मौजूद हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अभिवादन किया. पूरा ब्रिगेड परेड ग्राउंड भगवा रंग में सजा हुआ नजर आया. समारोह में बड़ी संख्या में कलाकार पारंपरिक ढोल की थाप पर प्रस्तुति दे रहे थे. जीप यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं से मुलाकात की. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने माखनलाल सरकार का सम्मान करते हुए उन्हें शॉल भेंट की और पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।  श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कर चुके हैं काम 98 वर्ष की आयु में भी माखनलाल सरकार आजादी के बाद के भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती जमीनी स्तर के नेताओं में से एक हैं. 1952 में उन्हें कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ होने पर गिरफ्तार किया गया था. साल 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों का संगठन समन्वयक बनाया गया. उन्होंने सिर्फ एक साल में करीब 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने का काम किया. साल 1981 से लगातार सात वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया. उस समय यह बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी, क्योंकि आमतौर पर भाजपा नेता एक ही संगठनात्मक पद पर दो साल से ज्यादा नहीं रह पाते थे। 

बंगाल में सुवेंदु सरकार की बड़ी योजना, मोदी गारंटी हर घर तक

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया. पहली बार भाजपा ने राज्य की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ कब्जा किया और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. ब्रिगेड मैदान में हुए भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस जीत को राष्ट्रीय महत्व दे दिया. चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने दावा किया था कि अगर बंगाल में उसकी सरकार बनी तो वे सभी केंद्रीय योजनाएं लागू होंगी जो सालों से राजनीतिक टकराव के कारण अटकी हुई थीं. अब सुवेंदु सरकार के गठन के साथ ही 'मोदी की गारंटी' को जमीन पर उतारने की चर्चा तेज हो गई है. भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, किसानों और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को युद्ध स्तर पर लागू किया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति अब कल्याणकारी योजनाओं की सीधी प्रतिस्पर्धा में बदल सकती है।  सबसे ज्यादा चर्चा आयुष्मान भारत योजना को लेकर हो रही है. अब तक पश्चिम बंगाल इस केंद्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से बाहर था. भाजपा सरकार बनने के बाद इसे राज्य में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इस योजना के तहत हर पात्र परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने विजय भाषण में कहा कि बंगाल के गरीब परिवारों को अब इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लाखों गरीब परिवारों को राहत मिलेगी और निजी अस्पतालों तक उनकी पहुंच आसान होगी. भाजपा इसे बंगाल में अपनी सबसे बड़ी सामाजिक गारंटी के तौर पर पेश कर रही है।  प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी नई सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है. पिछले कुछ सालों में इस योजना पर भ्रष्टाचार और लाभार्थी चयन में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे. अब सुवेंदु सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आवास योजना को तेज करने की तैयारी में है. भाजपा नेताओं का दावा है कि लाखों अधूरे घरों का निर्माण जल्द पूरा होगा. केंद्र और राज्य के बीच फंड और नामकरण को लेकर जो विवाद था, वह अब खत्म माना जा रहा है. गरीब परिवारों को पक्का घर देने का मुद्दा भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है।  जल जीवन मिशन को भी नई सरकार के मेगा प्लान का अहम हिस्सा माना जा रहा है. बंगाल में अभी तक ग्रामीण इलाकों के केवल सीमित परिवारों तक नल से जल पहुंच पाया है. केंद्र ने हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन काम धीमा रहा. भाजपा सरकार का दावा है कि अब गांव-गांव पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाएगा. राजनीतिक रूप से भी यह योजना बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का मुद्दा लंबे समय से बड़ा चुनावी विषय रहा है. भाजपा इसे 'डबल इंजन सरकार' की ताकत बताकर प्रचारित कर रही है।  किसानों को लेकर भी भाजपा सरकार बड़े ऐलान कर रही है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के साथ राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहायता जोड़ने की तैयारी है. भाजपा ने वादा किया है कि किसानों को सालाना 9 हजार रुपए तक की मदद दी जाएगी. इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को भी राज्य में पूरी तरह लागू किया जाएगा. प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसानों को सीधे मुआवजा मिलेगा. भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।  महिलाओं और बेरोजगार युवाओं के लिए भी सुवेंदु सरकार बड़े कदम उठाने जा रही है. भाजपा ने चुनाव के दौरान महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए देने का वादा किया था. इसे तृणमूल कांग्रेस की 'लक्ष्मी भंडार' योजना से बड़ा कदम बताया जा रहा है. वहीं स्नातक बेरोजगार युवाओं को भी मासिक भत्ता देने की बात कही गई है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को एकमुश्त आर्थिक सहायता देने का वादा भी भाजपा के एजेंडे में शामिल है. इससे युवा वर्ग में नई सरकार को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।  प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी बंगाल की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती हैं. बंगाल के कारीगरों, बुनकरों, कुम्हारों और मछुआरों को आधुनिक उपकरण, ट्रेनिंग और बिना गारंटी वाले लोन देने की तैयारी है. भाजपा का मानना है कि इससे पारंपरिक रोजगार को नई ताकत मिलेगी. खासकर उत्तर और दक्षिण 24 परगना, सुंदरबन और तटीय इलाकों में मछुआरा समुदाय को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. सरकार इसे 'आत्मनिर्भर बंगाल' मॉडल का हिस्सा बता रही है।  सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी भाजपा सरकार ने बड़ा संदेश दिया है. चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर लंबित डीए का भुगतान किया जाएगा और सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा. अब लाखों कर्मचारी नई सरकार के फैसलों पर नजर लगाए बैठे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सुवेंदु सरकार इन वादों को तेजी से लागू करती है तो बंगाल की राजनीति में भाजपा अपनी पकड़ और मजबूत कर सकती है. वहीं विपक्ष इसे चुनावी वादों की असली परीक्षा बता रहा है। 

जनगणना 2027: मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने स्वगणना कर भागीदारी दर्ज की

जनगणना-2027: मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने स्वगणना कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई स्वगणना-2027 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए योगी सरकार ग्राम स्तर तक चलाएगी जागरूकता अभियान, हेल्पडेस्क स्थापित करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को किया था जनगणना-2027 के प्रथम चरण का शुभारंभ नागरिकों से जनगणना पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने की अपील डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के सभी मानकों के पालन का भरोसा लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार जनगणना- 2027 को पारदर्शी, तकनीक आधारित और सटीक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। इसी क्रम में शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री नरेन्द्र कश्यप के सरकारी आवास पर जनगणना-2027 के अंतर्गत स्वगणना सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने स्वगणना कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। 22 मई से मकान सूचीकरण होगा आरंभ स्वगणना की इस पहल से नागरिकों को अपनी और अपने परिवार की जानकारी जनगणना पोर्टल http://se.census.gov.in पर ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करने का अवसर मिलेगा। इसको लेकर प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वह जनगणना-2027 में उत्साहपूर्वक भाग लें और स्वगणना प्रक्रिया को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य डेटा संकलन की प्रक्रिया को तेज करना और त्रुटिहीन एवं सटीक आंकड़े प्राप्त करना है। जनगणना-2027 के प्रथम चरण यानी स्वगणना प्रक्रिया में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के सभी मानकों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। स्वगणना की 15 दिनों की अवधि पूर्ण होने के बाद 22 मई से औपचारिक मकान सूचीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा।  ग्राम स्तर तक चलेगा जागरूकता अभियान स्वगणना-2027 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए योगी सरकार प्रदेश स्तर से लेकर जिला और ग्राम स्तर तक जागरूकता अभियान चलाएगी। साथ ही नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पडेस्क और सहायता केंद्र स्थापित किए जाने के लिए भी कहा गया है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार अपने-अपने स्तर पर इस कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। साथ ही अधिक से अधिक नागरिकों को इसमें सम्मिलित होने के लिए प्रेरित करें। जनगणना 2027 के माध्यम से स्वगणना प्रक्रिया को मिलेगी नई दिशा मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि जनगणना 2027 के माध्यम से स्वगणना प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। इससे प्राप्त आंकड़े राज्य की विकासपरक योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में अत्यन्त सहायक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम में जनगणना कार्य निदेशालय तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उच्चाधिकारी एवं विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

13 जिलों में मौसम अलर्ट, प्रदेश में दो सिस्टम सक्रिय; कल से बढ़ेगी गर्मी

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार मई की शुरुआत से ही मौसम ने अलग रंग दिखाया है। जहां आमतौर पर तेज गर्मी का असर रहता है, वहीं इस बार आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के बीचोंबीच से दो ट्रफ लाइन गुजर रही हैं और ऊपरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। इसी वजह से कई जिलों में मौसम लगातार बदल रहा है। इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट शनिवार को मौसम विभाग ने 13 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। राजधानी भोपाल स्थित राज्य मौसम विभाग ने शनिवार को सूबे के नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली यानी कुल 13 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन्ही में से कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। इन जिलों में आंधी बारिश दर्ज इससे पहले शुक्रवार को कहीं तेज गर्मी तो कहीं आंधी-बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी, छिंदवाड़ा, रायसेन, सागर, दमोह, बालाघाट, भोपाल, देवास, खरगोन, राजगढ़, विदिशा, टीकमगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, बैतूल, नरसिंहपुर, मंडला, पांढुर्णा, डिंडौरी, अनूपपुर में कहीं तेज आंधी तो कहीं हल्की बारिश हुई। इन जिलों में तेज ग्रमी का असर वहीं, दिन में कई जिलों में गर्मी का असर देखा गया। इस वजह से रतलाम में पारा 43.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। शाजापुर में 42.6 डिग्री रहा। वहीं, पांच बड़े शहरों में उज्जैन में पारा 42.4 डिग्री, इंदौर-भोपाल में 41.2 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री और ग्वालियर में 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 3 से 4 डिग्री तक तापमान में बढ़ोतरी का अनुमान मौसम विभाग ने शनिवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार को मौसम शुष्क होने के कारण प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में अदिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग की सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। खासकर पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने को कहा गया। मौसम में बदलाव होने पर खुले – मैदानी क्षेत्र छोड़कर किसी पक्के मकान में शरण लेने की हिदायत दी गई है। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है। मई में अब तक बारिश का दौर IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, इस बार मई के पहले ही दिन से प्रदेश में मौसम बदला हुआ है। आम तौर पर शुरुआत में तेज गर्मी का असर रहता है, लेकिन इस बार कहीं तेज आंधी-बारिश तो कहीं ओलावृष्टि वाला मौसम रहा। चक्रवात, ट्रफ और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से ऐसा मौसम रहा। पारे में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी होगी मौसम विभाग ने शनिवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार को ज्यादातर शहरों में पारे में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विभाग की सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। खुले मैदान में होने पर तुरंत किसी पक्के मकान की शरण लें। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है।

RR कैम्प में नए मालिक का आगमन, ₹15 हजार करोड़ की डील और खिलाड़ियों से बातचीत

जयपुर  उद्योगपति और राजस्थान रॉयल्स के नए मालिक लक्ष्मी निवास मित्तल शुक्रवार को जयपुर पहुंचे, जहां उन्होंने सवाई मानसिंह स्टेडियम में अपनी टीम का प्रैक्टिस सेशन देखा. इस दौरान उनके बेटे भी उनके साथ मौजूद रहे. स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी के मौजूदा मालिक मनोज बधाले भी उपस्थित रहे।  प्रैक्टिस सेशन के दौरान लक्ष्मी निवास मित्तल ने रॉयल बॉक्स में खड़े होकर खिलाड़ियों की तैयारियों को करीब से देखा. टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से उन्होंने बातचीत भी की. आईपीएल के अहम मुकाबलों से पहले टीम का माहौल काफी उत्साहपूर्ण नजर आया. स्टेडियम में मौजूद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच मित्तल की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।  RR टीम ने मैदान पर जमकर पसीना बहाया हाल ही में लक्ष्मी निवास मित्तल ने राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी को करीब 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वैल्यूएशन पर खरीदा है. इस डील के बाद राजस्थान रॉयल्स की गिनती आईपीएल की सबसे मूल्यवान फ्रेंचाइजियों में होने लगी है. जयपुर में राजस्थान रॉयल्स के अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों ने नेट्स पर जमकर पसीना बहाया. टीम के कोचिंग स्टाफ ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग से जुड़े अलग-अलग सत्र आयोजित किए।   भिड़ेगी रॉयल्स और जीटी: 9 मई को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम पर राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच मुकाबला खेला जाएगा. मुकाबले से पहले गुजरात टाइटंस के विकेटकीपिंग कोच ने कहा कि यह मुकाबला उनके लिए काफी अहम है. उन्होंने राजस्थान की टीम के ऊपरी क्रम के बल्लेबाजों को लेकर विशेष नीति बनाने की बात कही. उन्होंने वैभव सूर्यवंशी की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक शानदार खिलाड़ी हैं।  यशस्वी से की लंबी बात मित्तल परिवार के टीम के अभ्यास देखने और मिलने का वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि लक्ष्मी मित्तल और उनके बेटे आदित्य सहित परिवार के कुछ और लोग स्टैंड में पहुंचकर खिलाड़ियों को अभ्यास करते हुए देख रहे हैं। इसके बाद बाउंड्री लाइन के बाहर खड़े होकर एक-एक कर टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से मुलाकात की। इस दौरान टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को लक्ष्मी मित्तल से लंबी बात करते हुए देखा गया। उन्होंने कप्तान रियान पराग से भी बात की। रवींद्र जडेजा, बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर ने भी उनसे मुलाकात की। रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 की तीसरी तिमाही तक यह ट्रांजैक्शन पूरा होने की उम्मीद है. इसके बाद मित्तल परिवार के पास टीम की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूनावाला करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेंगे. बाकी 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा शेयरहोल्डर्स, जिनमें मनोज बदाले भी शामिल हैं, उनके पास रहेगी।  सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो फोटोज  में लक्ष्मी मित्तल खिलाड़ियों से बातचीत करते नजर आए. उन्होंने टीम के सपोर्ट स्टाफ से भी मुलाकात की. वीडियो में मित्तल को खास तौर पर यशस्वी जायसवाल से लंबी बातचीत करते देखा गया।  कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मित्तल परिवार ने जायसवाल के साथ ज्यादा समय बिताया, जबकि कप्तान रियान पराग के साथ उनकी बातचीत  कम रही. हालांकि टीम कैम्प में माहौल काफी सकारात्मक नजर आया।  राजस्थान रॉयल्स फिलहाल प्लेऑफ की दौड़ में मजबूती से बनी हुई है. टीम ने सीजन की शानदार शुरुआत की थी, लेकिन पिछले पांच मैचों में उसका प्रदर्शन थोड़ा लड़खड़ाया है. इसके बावजूद RR 12 अंकों के साथ चौथे स्थान पर कायम है।  अगर राजस्थान शनिवार को गुजरात टाइटन्स के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज कर लेती है, तो टीम अंक तालिका में दूसरे स्थान तक पहुंच सकती है. ऐसे में यह मुकाबला टीम के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।  जयपुर में रॉयल्स ने दो मुकाबले हारे हैं और पिछले दो मैचों में गेंदबाज मैच को पूरी तरह अपने पक्ष में नहीं कर पाए, जिस पर रॉयल्स के हेड कोच सांगक्कारा ने कहा कि ऐसा कुछ खास नहीं है. बात सिर्फ बेहतर तरीके से योजनाओं को लागू करने की है और उसके साथ अच्छी फील्डिंग करने की भी है।  सांगाकारा ने कहा कि "मुझे लगा कि पिछले दो मैचों में हमने अच्छी बल्लेबाजी की और गेंदबाजों को बचाव के लिए अच्छा स्कोर दिया. गेंदबाजों ने अपनी पूरी कोशिश की. मैं सिर्फ यही चाहता हूं कि हम थोड़े और स्मार्ट बनें, फील्डिंग में थोड़ा और बेहतर हों और अपनी योजनाओं को आक्रामक तरीके से लागू करें।  हाल ही में खरीदी हिस्सेदारी आईपीएल-2026 के बीच ही लक्ष्मी मित्तल ने राजस्थान प्रेंचाइजी में हिस्सेदारी खरीदी है। इसमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ आदर पूणावाला भी शामिल हैं। इसके लिए इस ग्रुप ने 15.660 करोड़ रुपये की कीमत चुकाई है। फ्रेंचाइजी के पुराने मालिक मनोज बादले भी टीम का हिस्सा हैं। इस ग्रुप ने पूरी रॉयल्स फ्रेंचाइजी को खरीद है जिसमें साउथ अफ्रीकी का एसए20 लीग की फ्रेंचाइजी पार्ल रॉयल्स और कैरिबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) की बारबाडोस रॉयल्स भी शामिल है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गांव-गांव संवाद, सुशासन तिहार में विकास का उत्सव:रत्नावली कौशल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गांव-गांव संवाद सुशासन तिहार विकास का त्योहार:रत्नावली कौशल शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना’ बनी जीवन रक्षक 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड, 48 लाख मुफ्त इलाज: संवेदनशील प्रशासन का प्रमाण रायपुर  भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण छत्तीसगढ़ शासन की पूर्व सदस्य रत्नावली कौशल ने ‘सुशासन तिहार 2026’ को ‘विकास का त्योहार’ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार जनता के द्वार पहुंचकर सुशासन की नई परिभाषा गढ़ रही है। रत्नावली कौशल ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार गांव-गांव पहुंचकर आमजन से सीधा संवाद कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुद्दों पर त्वरित पहल के साथ विकास कार्यों की सतत निगरानी भी सुनिश्चित की जा रही है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन का मजबूत सेतु बन रहा है। स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बना आयुष्मान   रत्नावली कौशल ने कहा कि सुशासन सरकार का सबसे बड़ा ‘स्वास्थ्य सुरक्षा कवच’ – ‘शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना’ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है। छत्तीसगढ़ में अब तक 2.49 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं। 45 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हुए हैं और 48 लाख से ज्यादा लोगों का ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज कराया जा चुका है।उन्होंने कहा कि पहले गंभीर बीमारी में गरीब परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाता था या इलाज के अभाव में जान गंवा देता था। आज माताएं-बहनें निश्चिंत होकर कहती हैं कि ‘मोदी-साय की सरकार है तो चिंता की कोई बात नहीं’। सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री स्वयं अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं और मरीजों से फीडबैक ले रहे हैं। इससे डॉक्टरों और स्टाफ की जवाबदेही तय हुई है। SC-ST वर्ग के लिए विशेष लाभ   रत्नावली कौशल ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के भाई-बहन जो दूरस्थ वनांचलों में रहते हैं, उनके लिए आयुष्मान योजना सबसे बड़ी राहत है। सुशासन तिहार के दौरान विशेष शिविर लगाकर वंचित परिवारों के कार्ड बनाए जा रहे हैं। पेंशन, राशन, आवास, नल-जल जैसी योजनाओं के साथ स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। यही ‘अंत्योदय से सर्वोदय’ का भाजपा का मूल मंत्र है। कांग्रेस पर साधा निशाना   रत्नावली कौशल ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में योजनाएं कागजों पर चलती थीं और कमीशनखोरी हावी थी। भाजपा की डबल इंजन सरकार में मुख्यमंत्री खुद खेत-खलिहान में किसान के पास, अस्पताल में मरीज के पास और चौपाल में मातृशक्ति के पास पहुंच रहे हैं। यही असली सुशासन है। ‘सुशासन तिहार’ ने साबित कर दिया कि सरकार एसी कमरों से नहीं, जनता के बीच से चलती है। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा सुशासन तिहार के दौरान हर बूथ तक जाएगी और बहनों को बताएगी कि ₹5 लाख का स्वास्थ्य कवच कैसे उनके परिवार को सुरक्षित रख रहा है। 2026 का यह ‘विकास का त्योहार’ छत्तीसगढ़ को ‘विकसित छत्तीसगढ़’ बनाने की नींव और मजबूत करेगा।

23 साल पुराने आदेश पर सवाल, हिंदू पक्ष ने पूछा—ना वजूखाना, ना मीनार, फिर मस्जिद कैसे?

धार  मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अदालत में मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।  एएसआई के 2003 के आदेश को दी चुनौती हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि एएसआई का यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी संरक्षित स्मारक या तीर्थ स्थल का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। पूजा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि एएसआई के आदेश के आधार पर लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का उल्लंघन करती है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष के तर्कों का खंडन करते हुए कहा कि उसके द्वारा दायर जनहित याचिका कोई दीवानी मुकदमा नहीं है। साथ ही हिंदू पक्ष ने यह भी पूछा कि जब उस इमारत में मीनार और वजूखाना दोनों नहीं है तो वह मस्जिद कैसे कहलाएगी। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई की कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 11वीं सदी के इस संरक्षित स्मारक का 'मूल धार्मिक स्वरूप' बहाल करने का निर्देश दे क्योंकि ASI की मौजूदा व्यवस्था से उसके बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने विवादित स्मारक को लेकर ASI के सात अप्रैल 2003 के एक आदेश को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी और स्मारक में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार लगाई। दरअसल ASI के वर्तमान आदेश के अनुसार विवादित परिसर में हर मंगलवार को हिंदुओं और हर शुक्रवार को मुस्लिमों को उपासना की अनुमति दी गई है। जैन ने कहा कि ASI का यह आदेश प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करता है। ASI के आदेश को बुनियाद अधिकार का उल्लंघन बताया विष्णुशंकर जैन ने कहा कि इस कानून के एक प्रावधान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित कोई स्मारक पूजास्थल या तीर्थस्थल है, तो उसका उपयोग उसके स्वरूप के विपरीत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। जैन ने कहा, 'ASI के साल 2003 में दिए गए आदेश के आधार पर जारी व्यवस्था से हमारे उपासना के अधिकारों के साथ ही बुनियादी अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।' सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर विवादित स्मारक के 'मूल धार्मिक स्वरूप' के अनुरूप कार्य करने का वैधानिक दायित्व है। विष्णुशंकर जैन ने दिया मुस्लिम पक्ष के तमाम दलीलों का जवाब जैन ने मुस्लिम पक्ष की इस आपत्ति को खारिज किया कि भोजशाला विवाद को लेकर 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की जनहित याचिका वस्तुतः एक दीवानी मुकदमा है और इसे उच्च न्यायालय की रिट कार्यवाही के बजाय किसी दीवानी अदालत में चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,'यह कोई दीवानी मुकदमा नहीं है और इसमें तथ्यों से संबंधित कोई विवादित प्रश्न नहीं हैं।' मुस्लिम पक्ष ने दिया उपासना स्थल अधिनियम का हवाला मुस्लिम पक्ष का कहना है कि धार का विवादित स्मारक देश की आजादी की तारीख यानी 15 अगस्त 1947 को मस्जिद के रूप में वजूद में था, लिहाजा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के प्रावधानों के तहत इसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता। हालांकि जैन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला पर यह कानून लागू नहीं होता क्योंकि वह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष के वकील ने पूछा- मीनार या वजूखाना नहीं तो मस्जिद कैसे उधर हिंदू पक्ष के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मुस्लिम पक्ष के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि विवादित स्मारक में कोई मीनार या वजूखाना (नमाज से पहले हाथ-मुंह धोने का स्थान) नहीं है, ऐसे में इसे मस्जिद कैसे कहा जा सकता है? तिवारी ने इमारत के जैन मंदिर होने के दावे को भी नकारा साथ ही तिवारी ने भोजशाला के जैन मंदिर होने के दावे को भी गलत बताया और कहा कि यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी। बता दें कि उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।   मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि धार स्थित यह विवादित स्मारक 15 अगस्त 1947 यानी स्वतंत्रता के समय एक मस्जिद के रूप में मौजूद था। इसलिए पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 के तहत इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून भोजशाला परिसर पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष ने कहा- भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं एक अन्य हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष … Read more