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कोल लेवी घोटाले की जांच में नया मोड़, छत्तीसगढ़ के राजीव भवन तक पहुंची 104 करोड़ रुपये की रकम का दावा

रायपुर  ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था। किसे कितनी मिली अवैध रकम रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप। देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण। चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए। जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया। विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य। राजीव भवन में रकम आने और राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने वाले लोगों के बयानों में कैश से भरा बैग राजीव भवन ले जाकर देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात है। देवेंद्र डडसेना, राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और राजीव भवन में उनके कक्ष के पास बैठता था। राजीव भवन में देवेंद्र डउसेना के साथ कार्यरत कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। रूपेंद्र यादव और सोहन साहू ने बताया कि उन्होंने कई बार भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और देवेंद्र डडसेना के कमरे में रखे जाते देखे। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8-10 बैग आने और कई बार उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। सोहन साहू ने एक गाड़ी के नंबर में “0009” अंक होने और सफेद स्विफ्ट डिजायर का जिक्र किया। बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के उस हिस्से को बंद करने और कर्मचारियों को वहां से हटाने की बात भी सामने आई है। शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव ने बताया कि राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना उस समय कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने उस हिस्से को बंद किए जाने और बैगों के बारे में बाद में मिली जानकारी भी दी। शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए। व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है। चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका 1. राम गोपाल अग्रवाल राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है। 2. देवेन्द्र सिंह यादव भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है। 3. विनोद तिवारी विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है। 4. रामप्रताप सिंह जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। 5. चंद्रदेव प्रसाद राय तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के … Read more

RBI Repo Rate: जल्द 0.50% बढ़ाना चाहिए रेपो रेट! SBI रिसर्च ने क्यों दी चेतावनी, जानें असर

 नई दिल्‍ली SBI रिसर्च ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से रेपो रेट को लेकर ज्‍यादा अग्रेसिव नजरिया अपनाने का सुझाव दिया है और कहा है कि संभव हो तो दिसंबर तक 50 बेसिस पॉइंट रेपो रेट में बढ़ोतरी करनी चाहिए, क्‍योंकि ग्‍लोबल स्‍तर पर महंगाई तेजी से बढ़ रही है, फाइनेंशियल उथल-पुथल जारी है, कैपिटल की लागत भी बढ़ रही है और मुद्रा भी अस्थिर है।   9 अक्‍टूबर को Ecowrap में SBI रिसर्च ने कहा कि अभी के माहौल में रणनीति बदलने की आवश्‍यकता है, जिसमें ब्‍याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी, लिक्विडिटी और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता रोकना शामिल है. इस रिपोर्ट में अगली आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी के इंतजार के बजाय ऑफ सर्किल पॉलिसी एक्शन की भी बात कही गई है।  कितनी रहेगी भारत की जीडीपी ग्रोथ?  SBI रिसर्च को उम्‍मीद है कि आर्थिक विकास दर लचीला बना रहेगा, जो संभावित 7.5 फीसदी से ज्‍यादा हो सकता है और उनका मानना है कि दिसंबर की पॉलिसी बैठक में ब्‍याज दरों मं बड़ी बढ़ोतरी उचित हो सकती है. हालांकि, रिपोर्ट में इन उपायों को RBI से सिफारिश के तौर पर पेश किया गया है।  क्‍यों बढ़ानी चाहिए और रेट?  रिपोर्ट में ग्‍लोबल अनिश्चितता में बढ़ोतरी, सरकारी बॉन्‍ड पर मिले ब्‍याज में उतार-चढ़ाव, वस्‍तुओं की आपूार्ति को लेकर चिंताएं और अमेरिकी ब्‍याज दरों के बारे में बदलती उम्‍मीदों की ओर इशारा किया गया है. इन घटनाक्रमों ने वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव तेज कर दिया है. एसबीआई रिसर्च का तर्क है कि उभरते बाजारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि ग्‍लोबल कैपिटल फ्लो अधिक अस्थिर हो जाता है और फंड की लागत और उपलब्धता बिगड़ जाती है।  रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि RBI द्वारा हाल ही में की गई ब्याज दर में बदलाव का बॉन्ड यील्ड और विनिमय दर पर प्रभाव सीमित रहा है, क्योंकि बाजारों ने पहले ही इस बदलाव को ध्यान में रख लिया है. इस कारण अगली नीतिगत प्रतिक्रिया का समय और दायरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।  आरबीआई को एसबीआई रिसर्च ने दिया ये भी सुझाव  ब्‍याज दर में बढ़ोतरी के साथ-साथ, एसबीआई रिसर्च ने लिक्विडिटी एटजेस्‍टमेंट फैसिलिटी (LAF) कॉरिडोर को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर सीमित अवधि के लिए उच्च स्तर पर करने का प्रस्ताव दिया है. अभी रेपो रेट 5.5 फीसदी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई अपनी लिक्विडिटी मैनेजमेंट के तहत, MPC के नीतिगत दर पर लिए गए निर्णय से स्वतंत्र रूप से, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और रिवर्स रेपो दरों को समायोजित कर सकता है. इसमें 2013 के टेपर टैंट्रम और 2020 के कोविड-19 संकट के दौरान केंद्रीय बैंक की कार्रवाइयों को वित्तीय तनाव की अवधि के दौरान कॉरिडोर को चौड़ा करने के लिए मिसाल के तौर पर अपडेट किया गया है।  इस बड़ी बढ़ोतरी से क्‍या मतलब है? ब्‍याज दरों में ज्‍यादा बढ़ोतरी से मॉनिटरी पॉलिसी की विश्वसनीयता को मजबूत करने और महंगाई की आशंकाओं को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे फैमिली और बिजनेस के लिए उधार लेने की लागत भी बढ़ सकती है. उच्च ब्याज दरें, निवेश और लोन की मांग पर दबाव डाल सकती हैं, जबकि सख्त वित्तीय स्थितियां आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।  एसबीआई रिसर्च ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन को मजबूत करने, लोन और इक्विटी बाजारों में लॉन्‍गटर्म कैपिटल आकर्षित करने के लिए सरकारी उपायों की भी मांग की है. आखिर में रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि RBI को विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना होगा और लगातार आने वाले झटकों का सामना करना होगा। 

राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी माता साहिब हासी देवी के स्मारक सिक्के का लोकार्पण, 35 ग्राम है वजन

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार 200 का स्मारक सिक्का जारी करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर लोकभवन में सिक्के का विमोचन करेंगी। इस मौके पर माता साहिब के सम्मान में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। 35 ग्राम वजन वाले इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी सहित चार धातुओं का मिश्रण होगा। इस पहल को सिंधी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है। दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका है। इससे देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों को गर्व महसूस होगा। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को अहम बताया। सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा, कोलकाता टकसाल में बना है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे। राष्ट्रपति के हाथों होगा सिक्के का विमोचन 22 अक्टूबर को रायपुर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्मारक सिक्के का अनावरण करेंगी। आयोजन में 200 से अधिक विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। सिक्के के साथ विशेष डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी दी गई है। माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 35 ग्राम का सिक्का, 50 प्रतिशत चांदी का इस्तेमाल प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत के मुताबिक, स्मारक सिक्के का निर्माण भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में किया जा रहा है। सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा। सिक्के में इस्तेमाल होने वाली धातुएं: चांदी: 50 प्रतिशत तांबा: 40 प्रतिशत निकल: 5 प्रतिशत जस्ता: 5 प्रतिशत धातुओं के इस मिश्रण से तैयार होने वाला सिक्का माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती की स्मृति में जारी किया जाएगा। कहां और कैसे होगी सिक्के की बुकिंग? शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई के अनुसार, सिक्के के विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, बुकिंग की तारीख, कीमत, उपलब्ध सिक्कों की संख्या और आधिकारिक बिक्री संबंधी विस्तृत जानकारी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए। सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि दरबार के सचिव उदय सांई ने कहा कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए गर्व का विषय है। इससे देश और विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया। शदाणी दरबार की परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी हुई है। दरबार के संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे और बाद में हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां प्रज्वलित की गई पवित्र धूनी साहिब आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। बुकिंग की भी मिलेगी सुविधा संत डॉ. युधिष्ठिर लाल के बेटे और दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की कई इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे। इसके अलावा कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उदय सांई ने कहा कि सिंधी समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है। स्मारक सिक्के के जरिए माता साहिब हासी देवी के योगदान और शदाणी दरबार की पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है। शदाणी दरबार पीठ 300 साल पुराना मठ शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे। इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब प्रज्वलित की गई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल इसके नौवें पीठाधीश्वर हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्य भी किए जाते हैं। ……………………… विभाजन के बाद रायपुर बना शदाणी परंपरा का प्रमुख केंद्र भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं। सिक्के से राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी विरासत को पहचान माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का सिंधी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा। रायपुर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं, इतिहास में रुचि रखने वालों और सिक्का संग्राहकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सुसाइड अटैक की साजिश का आरोप, यूएई जांच में ओमानी को-पायलट को लेकर नया खुलासा

 नई दिल्ली यूएई के अटॉर्नी जनरल हमाद सैफ अल-शामसी ने फ्लाईदुबई फ्लाइट की घटना से जुड़े नया खुलासा किया है. सितंबर 2026 में दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी पर आरोप है कि उन्होंने विमान का नियंत्रण हासिल कर इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल पर आत्मघाती हमला करने की कोशिश की थी. यात्रियों और चालक दल ने समय रहते उन्हें रोक लिया. जांच में सामने आया कि उसकी कट्टरपंथी विचारधारा का शुरुआती मोड़ ऑस्ट्रेलिया में पड़ा।  अल-हम्मामी 2015 से 2017 तक मेलबर्न के आरएमआईटी विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा था. यूएई जांच के अनुसार, 2017 में उसने चरमपंथी साहित्य पढ़ना और ऑनलाइन सामग्री देखना शुरू किया जो आतंकवादी संगठनों और आत्मघाती हमलों के तरीके को बताती थी।   वो आरएमआईटी से जुड़े एक मस्जिद में जाता था, जहां उनका परिचय माई सेंटर नाम के केंद्र से जुड़े लोगों से हुआ. उसके बयान के मुताबिक, यह केंद्र एक लेबनानी व्यक्ति अबू हम्जा द्वारा संचालित था. मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी एक संस्था से समर्थन प्राप्त था. इन दावों की अभी जांच चल रही है. इस दौरान उसकी सोच में हिंसा और आतंकवाद की तरफ झुकाव स्पष्ट रूप से बढ़ा।  नौकरी और योजना की तैयारी उसने स्वीकार किया कि 11 सितंबर 2001 के हमलों से प्रेरित होकर उसने पायलट बनने का फैसला किया. ओमान एयर, रॉयल एयर मोरक्को और फिर फ्लाईदुबई में काम करते हुए उसने दो बार पहले तेल अवीव की उड़ानें भरीं ताकि मार्ग और एयरपोर्ट की जानकारी जुटा सकें. तीसरी उड़ान पर योजना अमल में लाने की कोशिश हुई. जांच में कहा गया कि उन्होंने मानसिक और शारीरिक तैयारी भी की।  यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ स्थानों पर कट्टरपंथी विचारधारा युवाओं को प्रभावित कर सकती है. ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में शिक्षा के दौरान बाहरी प्रभावों से व्यक्ति की सोच बदल सकती है. मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी विचारधारा से जुड़े दावों पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि ये लंबे समय तक छिपे रहकर खतरा पैदा कर सकते हैं. एयरलाइन सुरक्षा जांच में ऐसी प्रवृत्तियां नहीं पकड़ी गईं, जो सिस्टम की कमजोरी उजागर करती है।  वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव यह घटना हवाई यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है. एक व्यक्ति की विचारधारा पूरे विमान और एयरपोर्ट को निशाना बना सकती है. कट्टरपंथी सामग्री का ऑनलाइन प्रसार और कुछ धार्मिक केंद्रों में विचारधारा का प्रचार रोकने की जरूरत है. देशों को आपसी कोयोग बढ़ाकर ऐसे मामलों की निगरानी करनी चाहिए।  ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां भी अब उसकी वहां की गतिविधियों की जांच कर रही हैं. यह मामला याद दिलाता है कि घृणा फैलाने वाले प्रचारक और चरमपंथी सामग्री समाज में हिंसा का खतरा पैदा करते हैं. जागरूकता, सख्त स्क्रीनिंग और विचारधारा के प्रसार पर अंकुश जरूरी है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। 

2020 दिल्ली दंगों का मामला: पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन दोषी, 12 आरोपी बरी

 नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर इलाके के एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया. वहीं, अदालत ने इस मामले में शामिल 12 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।  अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत दोषी ठहराया. धारा 147 दंगा करने की सजा से संबंधित है, जबकि धारा 109 उकसाने के बाद अपराध किए जाने और उसकी सजा से जुड़ी है. अदालत ने सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की है।  इस मामले में कुल 13 आरोपी थे. इनमें ताहिर हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और मेहक सिंह शामिल थे. इन सभी पर दंगा करने, आवासीय मकान में चोरी और आग या विस्फोटक पदार्थों से नुकसान पहुंचाने समेत कई अपराधों के  आरोप थे।  ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया गया था जुलाई में दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था. उस मामले में अदालत ने उन्हें दुश्मनी बढ़ाने, दंगा करने, हमला करने, आपराधिक बल का इस्तेमाल करने और हत्या का दोषी पाया था।  यह मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज FIR से जुड़ा है. इस मामले में नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को निलंबित कर दिया था. फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, कई अन्य घायल हुए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. इसी मामले में मार्च 2023 में दिल्ली की एक अदालत ने ताहिर हुसैन और 10 अन्य के खिलाफ आरोप तय किए थे। 

UP Politics: अखिलेश ने CM योगी को दी अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती, क्या स्वीकार करेंगे सीएम?

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव की अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती पर पलटवार किया है. बलरामपुर की सभा में उन्होंने अखिलेश को भी अयोध्या से नामांकन करने को कहा और माफिया, राम मंदिर और विपक्ष की भाषा पर भी बोले. उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश पर सवाल उठाए।  अखिलेश दो दिन के दौरे पर अयोध्या पहुंचे थे. उन्होंने भागवत कथा में हिस्सा लिया, संतों से आशीर्वाद लिया और जनसभा में बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है तो अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं. चुनाव आयोग और प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि राज्य न्याय और मानवता से चलता है और अयोध्या की जनता चुनाव में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी।  इसी पर योगी ने बलरामपुर में जवाब दिया. उन्होंने कहा, “अखिलेश, अयोध्या हमारी पावन धाम है. हम सियासत के लिए नहीं, विकास के लिए अयोध्या जाते हैं.” आगे बोले, “आइए, आपको ऑफर देता हूं. आप भी अयोध्या से नामांकन करिए और मैं भी. चलिए, एक बार किस्मत आजमा लेते हैं.” योगी ने अयोध्या को अपनी आस्था की स्थली बताया।  योगी ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा. उनका आरोप था कि पहले माफिया जिस जमीन पर पैर रखता था, उस पर कब्जा कर लेता था. सपा के गुंडे व्यापारियों को फोन कर धमकाते और संपत्ति हड़प लेते थे. उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले बलरामपुर की सड़कें सबसे खराब थीं. अब वोट तस्करी और बदमाशों की अराजकता की जगह विकास और बदलाव का आधार बन रहा है और इलाके को आकांक्षात्मक जिले से संभावनाओं वाला जिला बनाने पर काम हो रहा है।  योगी ने राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम का जिक्र कर कहा कि इनके निर्माण में रुकावट बनने वाले आज प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर रहे हैं, पर विरोध की भी एक सीमा होती है. कांग्रेस और सहयोगी दलों पर उन्होंने शिष्टाचार भूलने और अभद्र भाषा बोलने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक ऐसे प्रयास देश को गुमराह करने और अराजकता की ओर ले जाने वाले हैं।  इससे पहले मौर्य ने कहा था कि अखिलेश भागवत कथा में गए, पर राम मंदिर में दर्शन करने नहीं गए. उनके मुताबिक रामलला के दर्शन न करने वालों की रामभक्ति पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि देश और दुनिया से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं।  अखिलेश ने अयोध्या में वादा किया था कि सपा की सरकार बनी तो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये मिलेंगे. उन्होंने भेदभाव न होने, दुकान और मकान न उजाड़े जाने और अयोध्या की पहचान मजबूत करने के लिए विकास कार्यों में तेजी का भरोसा भी दिया था। 

कैंसर अस्पताल निर्माण पर मंत्री सख्त, MLA शुक्ला बोले- तारीख बताओ, अब देरी बर्दाश्त नहीं

बिलासपुर बिलासपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण के साथ ही राज्य कैंसर अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान मंत्री ने ठेका कंपनी के कर्मचारियों से काम पूरा होने की तारीख पूछी। कर्मचारी ने जल्द काम पूरा करने की बात कही, लेकिन स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा- डेट बताओ, ऐसा नहीं चलेगा। पहले ही तीन बार समय बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 25 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें। 10 एकड़ में बनेगी सिम्स की नई बिल्डिंग दरअसल, कोनी स्थित सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और अस्पताल की सुरक्षा से जुड़े कई फैसले लिए। उनके साथ स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, डॉ. बीपी सिंह, सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, डॉ. भूपेन्द्र कश्यप सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान सिम्स की नई बिल्डिंग के लिए जमीन, अस्पताल के खुले रैंप की सुरक्षा, मशीनों की मरम्मत के लिए बजट और अस्पताल तक पहुंचने के लिए नई सड़क बनाने पर चर्चा हुई। मंत्री सीधे जमीन देखने जाने के बजाय सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की छठी मंजिल पर पहुंचे। यहां से विधायक सुशांत शुक्ला ने पीछे स्थित करीब 10 एकड़ खाली सरकारी जमीन दिखाई। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर सिम्स की नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव है। इसमें करीब 2.5 एकड़ जमीन वन विभाग की है। डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि इस संबंध में विभाग से पहले ही पत्राचार किया जा चुका है। खुले रैंप पर जाली लगेगी, जूदेव की प्रतिमा भी लगेगी निरीक्षण के दौरान अस्पताल के खुले रैंप को देखकर विधायक सुशांत शुक्ला ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रैंप खुला रहने से दुर्घटना की आशंका है और यह आत्महत्या जैसी घटनाओं के लिहाज से भी संवेदनशील स्थान बन सकता है। इस पर मंत्री ने तत्काल रैंप पर सुरक्षा जाली लगाने की स्वीकृति दी। विधायक ने अस्पताल परिसर में स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी। मंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। वहीं डॉ. बीपी सिंह ने अस्पताल की मशीनों में आने वाली छोटी-मोटी खराबियों को तत्काल दूर करने के लिए अलग से बजट जारी करने की मांग की, ताकि उपकरण खराब होने पर मरीजों के इलाज में बाधा न आए। ज्यादा लोग सवार हुए तो लिफ्ट नहीं चली निरीक्षण के बाद 5वीं मंजिल से नीचे उतरते समय एक लिफ्ट में क्षमता से अधिक लोग सवार हो गए। 12 से ज्यादा लोगों के चढ़ने के कारण लिफ्ट आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद डॉ. बीपी सिंह, डॉ. अर्चना सिंह और सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति को दूसरी लिफ्ट से नीचे उतरना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल में लिफ्ट के सुरक्षित उपयोग और क्षमता के पालन का मुद्दा भी सामने ला दिया। कैंसर अस्पताल का काम 25 दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के निरीक्षण के बाद मंत्री का काफिला सिम्स के लिए रवाना हो रहा था। इसी दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने याद दिलाया कि निर्माणाधीन राज्य कैंसर अस्पताल का निरीक्षण बाकी है। इसके बाद काफिला कैंसर अस्पताल पहुंचा, जहां अधिकारियों ने निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी। मंत्री ने ठेका कंपनी के कर्मचारियों से काम पूरा होने की तारीख पूछी। कर्मचारी ने जल्द काम पूरा करने की बात कही, लेकिन स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा- डेट बताओ, ऐसा नहीं चलेगा। पहले ही तीन बार समय बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 25 दिसंबर तक हर हाल में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें। डिप्टी सीएम अरुण साव भी पहुंचे इस दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव का फोन आया। वे भी मौके पर पहुंचे और प्रस्तावित योजनाओं और निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों के साथ अस्पताल से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की गई। तीन रास्तों से जुड़ सकेगा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल अस्पताल तक पहुंच आसान बनाने के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय के पास से और अस्पताल के पीछे से नई सड़क निकालने पर सहमति बनी। लिंक रोड बनने से सुपरस्पेशलिटी अस्पताल परिसर तक पहुंचने के लिए कुल तीन रास्ते उपलब्ध हो सकेंगे। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों को आपसी समन्वय से प्रस्ताव पर जल्द काम करने के निर्देश दिए।

बच्चों के नए आइडिया को मिलेगा प्रोत्साहन, इंस्पायर अवार्ड योजना पर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का जोर

इंस्पायर अवार्ड योजना से बच्चों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को मिल रहा प्रोत्साहन – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव शिक्षा मंत्री ने इंस्पायर मानक में चयनित 40 प्रतिभागियों का किया सम्मान रायपुर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इंस्पायर अवार्ड कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित लगभग 40 विद्यार्थियों को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता का अवसर मिला यह बहुत हर्ष की बात है।केंद्र सरकार की पहल से संचालित इंस्पायर अवार्ड योजना बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है, आवश्यकता है उसे पहचानने और उचित अवसर प्रदान करने की। ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और दैनिक जीवन में उपयोगी विभिन्न आविष्कारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार के साथ शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने तथा अपने आविष्कारों को समाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले अभिभावकों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को नवाचार, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। नवाचार का अर्थ केवल नई चीजों का आविष्कार करना नहीं, बल्कि पुराने कार्यों को नए और बेहतर तरीकों से करना भी है। विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने, प्रयोग करने तथा अपनी गलतियों से सीखना चाहिए।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी चाहे ग्रामीण क्षेत्र, आदिवासी अंचल अथवा किसी भी सामाजिक परिवेश से आते हों, उन्हें स्वयं को कभी कम नहीं समझना चाहिए। सफलता का आधार व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, मेहनत और सोच होती है।भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी, हिंदी, छत्तीसगढ़ी अथवा कोई भी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है। वास्तविक महत्व विषय की समझ, ज्ञान और कार्य करने की योग्यता का है। रायपुर के बीटीआई ग्राउण्ड परिसर में स्थित एससीआरटी भवन के सभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से चयनित चालीस विद्यार्थियों के साथ ही जुलाई माह में इंस्पायर मानक प्रतियोगिता में राज्य के पाँच प्रतिभागियों को जापान देश जाने और सीखने का अवसर मिला उनको भी सम्मानित किया गया । साथ ही जापान से वापस आए प्रतिभागी रमन दास मानिकपुरी, समीक्षा साहू, सुनयना और शैयाद अली ने अपने अनुभव को भी साझा किया । इस अवसर पर  लोक शिक्षण विभाग के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण सहित चयनित छात्र एवं छात्राएँ, शिक्षकगण उपस्थित रहे ।  ज्ञात हो कि इंस्पायर–मानक अवार्ड योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) के सहयोग से संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को उनके मौलिक एवं नवाचारी विचारों पर आधारित प्रोजेक्ट या मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलता है।

UP News: बाढ़ से खेतों की सुरक्षा के लिए योगी सरकार की पहल, 25.59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन सुरक्षित

योगी सरकार ने बाढ़ से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की, किसानों को मिली राहत   बाढ़ सुरक्षा के अब तक 1549 प्रोजेक्ट पूरे होने से 2.21 करोड़ की आबादी को मिला लाभ यूपी में बाढ़ के खतरे से बचाव के लिए व्यापक इंतजाम, भूमि और आबादी को मिला संरक्षण सभी 75 जनपदों में नहरों, जलाशयों और नलकूपों का नेटवर्क भी किया गया मजबूत लखनऊ उत्तर प्रदेश में बाढ़ के खतरे से आबादी और कृषि भूमि को सुरक्षित रखने के लिए योगी सरकार ने बाढ़ सुरक्षा के कार्यों को गति दी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक अब तक लगभग 1,549 बाढ़ परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इन कार्यों के माध्यम से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को बचाने के साथ 2.21 करोड़ से अधिक आबादी को लाभान्वित किया गया है। बाढ़ सुरक्षा के इन इंतजामों से किसानों की जमीन, ग्रामीण आबादी और खेती-किसानी से जुड़ी आजीविका को सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिली है। 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सुरक्षा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुताबिक प्रदेश में बाढ़ से बचाव के लिए पूरी की गई परियोजनाओं का प्रमुख उद्देश्य बाढ़ के प्रभाव को कम करना और आबादी व कृषि भूमि को सुरक्षित रखना है। 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि का संरक्षण किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाढ़ से खेतों में खड़ी फसल, उपजाऊ जमीन और कृषि गतिविधियों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में बाढ़ सुरक्षा के कार्यों से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि की सुरक्षा को मजबूती मिली है। 2.21 करोड़ आबादी को मिला लाभ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखने के लिहाज से भी इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2.21 करोड़ से अधिक आबादी को लाभ मिलने से बाढ़ के जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के प्रयासों को बल मिला। बाढ़ से घरों, ग्रामीण संपर्क मार्गों और स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए बाढ़ सुरक्षा संबंधी कार्यों ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को भी राहत प्रदेश में जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक कुल 1,300 सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी की गई हैं। इनके माध्यम से 24.11 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ और 1.90 करोड़ से अधिक किसानों को लाभान्वित किया गया है। सिंचाई सुविधाओं के इस विस्तार से खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने और किसानों को कृषि कार्यों में सहायता देने की दिशा में काम किया गया। वहीं इसके अतिरिक्त प्रदेश के 75 जनपदों में 76,527 किलोमीटर नहरों की लंबाई, 71 जलाशयों और 36,342 नलकूपों के जरिए सिंचाई व्यवस्था के व्यापक नेटवर्क को मजबूत किया गया है।

प्रह्लाद जोशी का बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर बयान, जाति की राजनीति और नई शिक्षा नीति पर रखी राय

पटना  बिहार की शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पटना में बड़ा बयान दिया। बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में एक दौर ऐसा भी रहा, जब जाति और 'डिवाइड एंड रूल' की राजनीति ने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। जोशी ने कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। उनके बयान ने शिक्षा के मुद्दे पर बिहार की पुरानी व्यवस्था और मौजूदा बदलावों को लेकर राजनीतिक चर्चा को फिर सामने ला दिया रटकर परीक्षा पास करना नहीं, नए विचार पैदा करना है लक्ष्य केंद्रीय मंत्री ने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि पढ़ाई का मकसद केवल रटकर परीक्षा पास करना या नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों की सोचने-समझने की क्षमता, रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति विकसित हो। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है। ऐसे समय में एक नया विचार भी पूरे उद्योग को जन्म दे सकता है। इसलिए बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय सवाल पूछने, नए प्रयोग करने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए। 38 जिलों के 95,195 स्कूलों की भागीदारी पर जताई खुशी समारोह में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता में बिहार के 38 जिलों के 95,195 स्कूलों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए जोशी ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं में बच्चों को मिलने वाले पुरस्कार केवल इनाम नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता की पहचान हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, ऐसी गतिविधियां बच्चों को अपनी बात रखने, रचनात्मकता दिखाने और नए विषयों पर सोचने का अवसर देती हैं। पढ़ाई के साथ इस तरह की भागीदारी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मददगार हो सकती है। 2047 के विकसित भारत की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश के विकास की जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने युवाओं की प्रतिभा और नए विचारों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया। उनके मुताबिक, विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी है। इसके लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें ज्ञान के साथ रचनात्मकता और अपनी क्षमता को पहचानने का अवसर भी मिले। अभिभावकों से बोले- बच्चों पर अपनी पसंद न थोपें कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों से खास अपील की। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों की वास्तविक रुचि और प्रतिभा पहचाननी चाहिए। बच्चों पर अपनी पसंद का करियर थोपने के बजाय उन्हें उस क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए, जिसमें उनकी दिलचस्पी हो। उन्होंने संदेश दिया कि हर बच्चे की क्षमता और रुचि अलग होती है। ऐसे में उसे अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का मौका देना जरूरी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या नौकरी तक सीमित न रहकर बच्चों को सोचने, सीखने और अपनी पहचान बनाने में सक्षम करना भी होना चाहिए।