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जेडी वेंस की पाकिस्तान टिप्पणी पर बवाल, अपनी ही पार्टी के सांसदों ने जमकर सुनाई खरी-खोटी

बर्न पाकिस्तान इन दिनों ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है. इस बीच, US सीनेटरों ने पाकिस्तान के आतंकवादियों को पनाह देने और बिन लादेन को छिपाने के इतिहास को उठाया. उन्होंने 'पाकिस्तान प्रेम' के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जमकर खरी-खोटी सुनाई है।  दरअसल वेंस ने स्विट्जरलैंड में वार्ता के दौरान कहा था, 'हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं.'  वेंस ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर उनके दो पसंदीदा लोगों में से एक बताया था. ऐसे में दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने वेंस के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना की।  बता दें कि वेंस ने कहा था, 'मैं कहूंगा कि जब से फील्ड मार्शल मुनीर ने इस्लामाबाद में प्राइम मिनिस्टर के साथ हमारा स्वागत किया है, मैंने मजाक में कहा है कि मेरी जिंदगी में दो बहुत, बहुत जरूरी लोग हैं- एक इंडियन और एक पाकिस्तानी. इंडियन मेरी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर हैं।  ''कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह… सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अब तक सबको ये साफ हो जाना चाहिए कि हमारे असल में दोस्त कौन हैं.' स्कॉट ने कहा, 'कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है और अभी वो एक मतलब की शांति पाने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी कैंपेन को सपोर्ट करने में कहीं ज्यादा लगे हुए लग रहे हैं।  स्कॉट ने आगे दावा करते हुए कहा था कि अभी भी एक ऐसे एग्रीमेंट की गुंजाइश है जिससे सबको फायदा हो. लेकिन, सबको ये बात समझ लेनी चाहिए कि ईरान के न्यूक्लियर हथियार बनाने की शून्य संभावना है।  पाकिस्तान पर लादेन को छिपाने का आरोप मोंटाना से सीनेटर टिम शीही ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अल कायदा लीडर ओसामा बिन लादेन को पनाह देने में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए. शीही ने कहा, 'पाकिस्तान, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान ने बिन लादेन को दस साल तक छुपाया. उन्होंने ISI इंश्योरेंस के जरिए अयातुल्ला को फंड दिया।  अमेरिका-ईरान के बीच स्थायी शांति की नींव पड़ी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ वार्ता को सफल समझौते की नींव रखने वाली कहा है। अमेरिका की ओर से मुख्य वार्ताकार जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरानी नेताओं के साथ बातचीत को स्थायी शांति की तरफ अच्छी शुरुआत कहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान पर अभी भी दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है लेकिन वेंस ने उम्मीद जताई की चीजें बेहतरी की तरफ जाएंगी। ईरान और अमेरिका में स्विट्जरलैंड में रविवार और सोमवार को बातचीत हुई है। जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देने और विदेशों में अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को संभालने और युद्धविराम का प्रबंधन करने के लिए तंत्र स्थापित करने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा, हमने एक सफल अंतिम समझौते के लिए बहुत अच्छी नींव रखी है। थोड़ी धमकी थी, थोड़ी शिकायत थी, लेकिन दिन के अंत में बातचीत जारी रही और हमने काफी प्रगति की।' ईरान को निर्यात पर छूट ईरान की सीज संपत्तियों को रिलीज किए जाने पर वेंस ने कहा कि हम ऐसी प्रक्रिया बनाना चाहते हैं, जिससे इस राशि का फायदा आम ईरानियों को हो।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया है कि तेहरान ने तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट, विदेशों में अपनी कुछ फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई और ईरान के लिए पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू करने की मंजूरी हासिल कर ली है। ईरान ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में दो दिनों तक चली शांति वार्ता के दौरान एमओयू से जुड़े उन मुद्दों पर बात हुई, जिनके आधार पर अंतिम समझौते के लिए वार्ता शुरू होगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने कहा कि ये बिंदु लेबनान में युद्ध रोकने, ईरान की फ्रीज संपत्तियां रिलीज करने और ईरानी तेल के निर्यात से जुड़े हुए हैं। मध्यस्थ देश क्या बोले मध्यस्थ पाकिस्तान और कतर ने बताया है कि दोनों पक्षों ने पिछले हफ्ते हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाते हुए रिसॉर्ट बर्गेंस्टॉक में हुई बातचीत में 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौते की दिशा में एक रोडमैप पर सहमति व्यक्त की है। लेबनान में लड़ाई रोकने और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक संचार लाइन खोलन पर सहमति बनी है। इस बातचीत के खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान के तेल उत्पादों पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने यह प्रतिबंध दो महीने के लिए हटाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 60 दिनों के लिए एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत ईरानी तेल के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान और कतर बातचीत की मेज पर हैं, तो US को UAE, इजरायल और सऊदी अरब को भी बातचीत में शामिल करना चाहिए. शीही ने UAE, इजरायल और सऊदी अरब को मिडिल ईस्ट में US का असली साथी बताया।  पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल मोंटाना के सीनेटर ने ये भी दावा किया कि कतर दशकों से आतंकवादी संगठनों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा है. शीही ने कहा, 'पाकिस्तानियों ने ISI के जरिए हमारे खिलाफ बगावत को फंड किया और बिन लादेन को छिपाया. इसलिए ये मानना ​​कि वो यहां सिर्फ बिचौलिए होंगे, मुझे नहीं लगता कि ये सही है।  शीही ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि हमें ये पक्का करना होगा कि हम UAE के साथ खड़े हों और हम बिना किसी शक के इजरायल के साथ खड़े हों, क्योंकि चाहे कुछ भी हो जाए, वो इस इलाके में हमारे अगुआ रहेंगे। 

शिवसेना UBT में बढ़ी बगावत, आदित्य के करीबी नेता ने भी छोड़ा साथ; उद्धव पर संकट गहराया

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की सियासत मातोश्री से ही चलती रही है. एक समय था कि 'मातोश्री' का हुक्म आखिरी माना जाता था, लेकिन आज मातोश्री अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है. शिवसेना (यूबीटी) के मुखिया उद्धव ठाकरे के सामने एक बार फिर से पार्टी और अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।  पिछले चार साल में दूसरी बार उद्धव की पार्टी में टूट पड़ी है. 2022 में सत्ता और शिवसेना गंवाई और चार साल के बाद फिर से टूट हो गई है. इस बार 6 लोकसभा सांसद उद्धव का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ चले गए और अब विधायकों पर भी संकट गहरा गया है।  ठाकरे परिवार के सामने संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस नेता ने साल 2019 में उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे के राजनीतिक उदय के लिए हंसते-हंसते अपनी सीट का बलिदान दे दिया था, आज वह भी उद्धव का साथ छोड़कर बागियों के पाले में जा खड़ा हुआ है. यह केवल एक विधायक का टूटना नहीं है, बल्कि ठाकरे परिवार के प्रति निष्ठा की दीवारों में आई गहरी दरार का सबूत है।  उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे चार विधायक  उद्धव ठाकरे ने विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाई थी. ऑपरेशन टाइगर की चर्चा के बीच बुलाई गई उद्धव की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के तीन विधायक और एक एमएलसी नहीं पहुंचे. इसके चलते एक बार फिर रा चर्चा तेज हो गई कि सांसदों के बाद क्या अब उद्धव गुट के विधायक भी शिंदे सेना का दामन थामेंगे।  हालांकि, इन विधायकों ने अपनी गैरहाजिरी के बारे में पार्टी को पहले ही बता दिया था कि वे बैठक में नहीं आ पाएंगे. उन्होंने अपनी गैर-मौजूदगी के लिए एमएलसी चुनाव, खराब सेहत और निजी कामों का हवाला दिया था. ऐसी ही बातें उस समय भी सामने आई थी, जब बैठक से सांसद नदारद रहे थे. इस बार की फेहरिश्त में एक नाम बहुत अहम है, वो सुनील शिंदे का है. MLC सुनील शिंदे ही वो नेता हैं, जिन्होंने आदित्य ठाकरे के लिए अपनी वर्ली सीट खाली की थी।  आदित्य के लिए सीट छोड़ने वाला नेता क्या होगा बागी  उद्धव ठाकरे के सियासी विरासत को आगे बढ़ाने का बीढ़ा आदित्य ठाकरे ने उठा रखा है. ठाकरे परिवार के इतिहास में पहली बार कोई सदस्य 2019 के विधानसभा चुनाव मैदान में  उतरने का फैसला किया था. ये नाम आदित्य ठाकरे का है, जिनके लिए सबसे सुरक्षित और मुफीद सीट 'वर्ली' चुनी गई. इस सीट पर शिवसेना के कद्दावर नेता सुनील शिंदे का दबदबा था, वो 2014 में वर्ली से विधायक बने थे।  आदित्य ठाकरे का जब चुनाव लड़ने का फैसला तय हो गया और मातोश्री से आदेश आया, तो सुनील शिंदे ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जीती-जतायी सीट आदित्य ठाकरे के लिए 'कुर्बान' कर दी. आदित्य ठाकरे वर्ली से चुनाव लड़े और जीतकर विधायक बने. 2024 में दूसरी बार विधायक बने हैं।  सुनील शिंदे के सीट छोड़ने के फैसले को शिवसेना की परंपरा और ठाकरे परिवार के प्रति अटूट निष्ठा के रूप में देखा गया था, लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि आज वही 'त्याग' करने वाला नेता उद्धव की बैठक से दूर रहा.  ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या सुनील शिंदे भी बागी गुट के साथ जाना चाहते हैं, जिसके लिए उद्धव की बैठक में शामिल नहीं हुए. सुनील शिंदे भी बागी गुट के साथ जाते हैं और उद्धव से मुंह मोड़ लेते तो फिर पार्टी के भीतर असंतोष की आग काफी गहरी है।  उद्धव ठाकरे के लिए गहराया अस्तित्व का संकट? शिवसेना (यूबीटी) के एक के बाद एक करीबियों का साथ छोड़ना उद्धव ठाकरे के लिए सिर्फ एक राजनीतिक झटका नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व की साख पर बड़ा सवालिया निशान है। इसके मुख्य रूप से तीन बड़े कारण नजर आते हैं. बागियों का हमेशा से यही आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे तक आम विधायकों और कार्यकर्ताओं की पहुंच बेहद मुश्किल हो गई है. 'मातोश्री' के दरवाजे जो कभी शिवसैनिकों के लिए हमेशा खुले रहते थे, वहां एक खास घेरा तैयार हो गया था।  उद्धव ठाकरे की पार्टी में हुई बगावत ने महाविकास अघाड़ी का ढांचा पूरी तरह हिल गया. महाराष्ट्र में कांग्रेस के बाद उद्धव की पार्टी के पास सांसद थे, लेकिन शिंदे के ऑपरेशन टाइगर ने उन्हें सियासी हाशिए पर पहुंचा दिया है. इस टूट-फूट के चलते उद्धव ठाकरे की सियासी ताकत कमजोर पड़ी है. शिवसेना के पास 3 सांसद ही रह गए हैं और उद्वव की बैठक से तीन विधायक और एक एमएलसी की गैर-मौजूदगी अगर बगावत में बदलती है तो फिर महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के लिए मुश्किल हो जाएगी।  महाविकास अघाड़ी के गठन के बाद से ही पारंपरिक शिवसैनिकों का एक बड़ा वर्ग असहज महसूस कर रहा था. कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन को जमीनी स्तर पर शिवसैनिक पचा नहीं पाए, जिसका फायदा विरोधी गुट ने पहले उठाया और अब भी उठा रहे हैं. बालासाहेब ठाकरे के समय शिवसेना में कोई बगावत सोच भी नहीं सकता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि जिन नेताओं को उद्वव ठाकरे के लेकर आए, वो भी बागी हो गए हैं।  क्या आदित्य ठाकरे का सियासी भविष्य खतरे में है? बालासाहेब ठाकरे के सियासी वारिस उद्धव ठाकरे बनकर उभरे, लेकिन बगावत के बाद एकनाथ शिंदे ने खुद को साबित किया. उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने वाले ज्यादातर नेताओं का ठिकाना शिंदे की शिवसेना ही बन रही है. शिवसेना की असली ताकत हमेशा से मुंबई, ठाणे, और कोंकण के तटीय इलाके रहे हैं. पहली बगावत के बाद इन क्षेत्रों के विधायकों, नगरसेवक और जमीनी स्तर के नेता शिंदे के साथ जा चुके हैं।  शिवसेना में फंड और बूथ मैनेजमेंट संभालने वाले कद्दावर नेता भी पाला बदल चुके हैं.इस तरह से जब आपकी अपनी जमीन पर ही सियासी घेराबंदी हो रही हो, तो आप सहयोगियों से राज्य स्तर पर बड़ी रियायतों की मांग नहीं कर सकते. अब उद्धव ठाकरे का सियासी वारिस आदित्य ठाकरे माने जा रहे, लेकिन जिस तरह पार्टी के नेता साथ छोड़कर शिंदे के साथ एक के बाद एक जा रहे हैं, … Read more

लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त एक्शन, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैकलिस्ट करने के दिए निर्देश

लापरवाह ठेकेदारों एक्शन की तैयारी, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैक लिस्ट करने के दिए निर्देश विकास कार्यों की हुई समीक्षा, 3 दिनों में लंबित कार्य पूर्ण करने के दिये निर्देश भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में निर्माण कार्यों में देरी और लापरवाही पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जो ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि जनता की सुविधा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में जिन विकास कार्यों के वर्कऑर्डर जारी हो चुके हैं, उनका शीघ्र भूमि पूजन कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए, जिससे आमजन को समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग कर कार्यों को तय समय में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।  

राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड: शादी, तलाक और संपत्ति नियमों में बड़े बदलाव की संभावना

जयपुर जयपुर की एक बुजुर्ग महिला वर्षों से अपने पैतृक घर के एक हिस्से पर हक की लड़ाई लड़ रही है। दूसरी तरफ, एक युवती अदालतों के चक्कर काटते हुए यह साबित करने में लगी है कि शादी के बाद भी उसे बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। कहीं एक महिला अपने पति की दूसरी शादी के खिलाफ न्याय चाहती है, तो कहीं लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला एक जोड़ा सामाजिक पहचान की तलाश में है। अब राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता की तैयारी के साथ इन तमाम कहानियों का भविष्य बदल सकता है। सरकार ने बढ़ाया पहला बड़ा कदम राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी कानून का मसौदा तैयार करेगी। लेकिन यह सिर्फ एक नया कानून नहीं होगा, बल्कि राजस्थान के करोड़ों लोगों की निजी जिंदगी को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। शादी के नियमों में बड़ा बदलाव अगर यूसीसी लागू होती है तो सबसे बड़ा असर विवाह व्यवस्था पर दिखाई देगा। प्रदेश में किसी भी धर्म का व्यक्ति एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेगा। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, लेकिन नए कानून के बाद विवाह के नियम एक समान हो सकते हैं। इसका मतलब यह होगा कि शादी केवल सामाजिक या धार्मिक रस्म नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी रूप से पंजीकृत संबंध बन जाएगी। महिलाओं को मिल सकती है नई ताकत विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी। आज भी कई मामलों में महिलाएं दूसरी शादी, भरण-पोषण और वैवाहिक अधिकारों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ती हैं। एक समान कानून इन विवादों को कम कर सकता है। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अलग-अलग कानूनों की व्याख्या पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बेटियों के अधिकारों की नई कहानी यूसीसी का दूसरा बड़ा प्रभाव संपत्ति के अधिकारों पर पड़ सकता है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवारों में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हिस्सा देने को लेकर अनिच्छा दिखाई देती है। हालांकि कानून पहले से अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में स्थिति अलग है। यूसीसी लागू होने के बाद संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर एक समान व्यवस्था बनने की संभावना है, जिससे बेटा और बेटी दोनों के अधिकारों को और स्पष्ट कानूनी मजबूती मिल सकती है। लिव-इन रिलेशनशिप भी आएंगे कानूनी दायरे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ऐसे संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। समर्थकों का कहना है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित होंगे, जबकि आलोचक इसे निजी जीवन में सरकारी दखल के रूप में देखते हैं। लेकिन इतना तय है कि पहली बार ऐसे रिश्ते कानूनी बहस के केंद्र में आ जाएंगे। शादी और तलाक का रिकॉर्ड बनेगा जरूरी शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण भी आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगा। आज भी प्रदेश में हजारों विवाह केवल सामाजिक और धार्मिक स्तर पर संपन्न होते हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता। बाद में संपत्ति, पहचान, भरण-पोषण या वैवाहिक विवादों के दौरान यही सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से ऐसे विवादों में कमी आ सकती है परंपराओं और कानून के बीच संतुलन की चुनौती हालांकि यूसीसी का रास्ता पूरी तरह आसान नहीं होगा। राजस्थान की सामाजिक संरचना बेहद विविध है। यहां अलग-अलग धर्म, समुदाय और परंपराएं सदियों से साथ-साथ चलती रही हैं। ऐसे में नया कानून लागू होने पर कई सवाल भी उठेंगे। क्या सभी समुदाय इसे समान रूप से स्वीकार करेंगे? क्या पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन बन पाएगा? यही वह चुनौती है जिस पर गठित कमेटी को सबसे ज्यादा काम करना होगा। जनजातीय समुदायों के लिए अलग व्यवस्था संभव सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय जनजातीय समुदायों को उनकी सांस्कृतिक और संवैधानिक विशेषताओं के आधार पर नए कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान में यूसीसी का स्वरूप अन्य राज्यों से कुछ अलग भी हो सकता है। दूसरे राज्यों के अनुभवों पर भी नजर उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है। गुजरात और असम भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। अब राजस्थान इस बहस का नया केंद्र बनने जा रहा है। लेकिन यहां सवाल सिर्फ कानून का नहीं है। सवाल उन महिलाओं का है जो बराबरी चाहती हैं। उन बेटियों का है जो अपने हिस्से का सम्मान मांगती हैं। उन परिवारों का है जो वर्षों से अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के बीच उलझे हुए हैं। विधानसभा से घर-घर तक पहुंचेगी बहस आने वाले महीनों में जब कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी और विधानसभा में इस पर बहस होगी, तब सिर्फ एक विधेयक पर चर्चा नहीं होगी। चर्चा इस बात पर होगी कि क्या राजस्थान अपनी सामाजिक संरचना में एक ऐसा बदलाव स्वीकार करने के लिए तैयार है, जो लोगों के निजी जीवन, पारिवारिक रिश्तों और अधिकारों की परिभाषा को नए सिरे से लिख सकता है। एक कानून से कहीं बड़ी कहानी फिलहाल यूसीसी एक प्रस्ताव है, लेकिन इसकी आहट ने प्रदेश में एक नई बहस शुरू कर दी है। यह बहस अदालतों से निकलकर घरों तक पहुंच चुकी है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी कहानी है। आने वाले समय में यह तय होगा कि यूसीसी केवल कानून बनकर रह जाती है या फिर राजस्थान के सामाजिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है।

सीएम विजय का बड़ा बयान, बोले- पेरियार हमारे आदर्श हैं, लेकिन भगवान पर भी पूरा विश्वास है

चेन्नई  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय ने अपनी पार्टी टीवीके (TVK) की वैचारिक दिशा को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी द्रविड़ राजनीति के जनक माने जाने वाले पेरियार के सामाजिक सिद्धांतों को अपनाने है, लेकिन उनकी नास्तिकता और धार्मिक विश्वास को नकारने के उनके विचारों से वो सहमत नहीं हैं।  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान घोषणा की कि उनकी पार्टी टीवीके (TVK) ने द्रविड़ राजनीति के जनक पेरियार ईवी रामासामी के व्यापक सामाजिक सिद्धांतों को तो अपनाया है।  'धार्मिक विश्वास नकारने वाले बातें स्वीकार नहीं' पेरियार की तर्कवादी सोच और अपनी पार्टी के रुख के बीच अंतर बताते हुए विजय ने कहा, 'हमने धार्मिक विश्वास को नकारने वाली पेरियार की बात को स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनके व्यापक सिद्धांतों को पूरी तरह अपनाया. हमने पेरियार की शिक्षाओं को तो लिया, लेकिन ये भी स्पष्ट किया कि हम ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोग हैं. हमने हमेशा यह साफ किया है कि हम किसी की विचारधारा के विरोधी नहीं हैं।  'अंबेडकर और कामराज मॉडल…' मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि उनकी सरकार कई वैचारिक प्रभावों के मिश्रण से चलती है. सरकार ने डॉ. बीआर अंबेडकर के समान अवसर और सामाजिक न्याय के आदर्शों को पूरी तरह स्वीकार किया है. इसके साथ ही तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज के ईमानदार प्रशासन के मॉडल को सरकार ने अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया है।  'पहले जनता के पास गए फिर बनाई पार्टी' विजय ने उन आलोचकों को करारा जवाब दिया जो उनके संगठन को सिर्फ एक अभिनेता के नेतृत्व वाला दल बताते हैं. उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग पहले राजनीतिक दल शुरू करते हैं और फिर जनता के पास जाते हैं, लेकिन उन्होंने पहले जनता के बीच जाकर काम किया और उसके बाद अपनी पार्टी शुरू की. जो लोग इस जमीनी हकीकत को नहीं समझते, वो ही TVK को केवल एक अभिनेता की पार्टी कहकर खारिज करते हैं।  '1.72 करोड़ वोट मिले' वहीं, साल 2026 के विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक प्रदर्शन को याद करते हुए विजय ने कहा कि उनकी पार्टी बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनावी मैदान में उतरी थी. राज्य की जनता ने उनकी बात को स्पष्ट रूप से समझा, जिसके चलते उन्हें कुल 35 प्रतिशत वोट मिले. चुनाव में रिकॉर्ड 17.2 मिलियन (1.72 करोड़) वोट प्राप्त कर वो एक बड़ी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत के रूप में उभरे और आज सरकार में बैठे हैं।  करूर की घटना का जिक्र उन्होंने अपनी पार्टी को असंबंधित घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि करूर में 41 लोगों की जान चली गई, लेकिन उसका सारा दोष उनकी पार्टी पर मढ़ दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीति इसी तरह की जानी चाहिए? अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को आम जनता से जोड़ते हुए विजय ने इसकी तुलना पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुराई और एमजी रामचंद्रन (MGR) के शासन से की. उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्ना के समय सामान्य लोगों की सरकार थी और एमजीआर के समय बहुत ही सामान्य लोगों की सरकार थी, ठीक उसी तरह विजय के नेतृत्व वाली ये सरकार सबसे आम लोगों की सरकार है, जिसने 2026 के चुनाव में धर्म और जाति की सभी बाधाओं को तोड़ा है।  विजय ने अपने भाषण में पिछली सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के शासनकाल के दौरान 'पार्टी फंड' की आड़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था. मुख्यमंत्री के इस तीखे प्रहार के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और विरोध स्वरूप द्रमुक (DMK) पार्टी के विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया।  वामपंथी दलों पर भी की टिप्पणी वामपंथी दलों के विरोध प्रदर्शन के बीच उनके बारे में की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए विजय ने स्पष्ट किया कि ये पार्टियां किसी की दया या मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से उनके गठबंधन में शामिल हुई हैं।  उन्होंने कहा कि वामपंथी दल खुद कहते हैं कि वो अपनी मर्जी से साथ आए हैं. हालांकि, इसके बाद उन्होंने ये भी जोड़ा कि वो नहीं समझ पा रहे हैं कि वामपंथी दल आखिर कहना क्या चाह रहे हैं।   

UCC पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा दावा, बोले- 90% से अधिक नागरिक समान नागरिक संहिता के पक्ष में

समान नागरिक संहिता के पक्ष में हैं 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूसीसी पर सभी जिलों में हो चुकी हैं बैठकें प्रदेश में गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया जाएगा 15 से 29 जुलाई तक बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को मिला "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड" समारोहपूर्वक होगा जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन 25 से 30 जून तक होंगी गतिविधियां प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को प्राप्त हुए 1640 करोड़ रूपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में समान नागरिक संहितालागू (यूसीसी) करने के लिएसभी जिलों में जन परामर्श बैठकें हो चुकी हैं। सभी जिलों में कार्य शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनैतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया। लगभग 3.49 करोड़ एस.एम.एस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजें गए। नागरिकों के 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90% से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में यह जानकारी दी। गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा के अंतर्गत सभी स्कूलों में होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा दिनांक 15 से 29 जुलाई तक मनाया जा रहा है। इस अवधि में सभी स्कूलों में अलग अलग शैक्षणिक, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और गतिविधियां होंगी। इसमें जनप्रतिनिधि, पालक एवं विषय विशेषज्ञ शामिल होगें। इसमें विद्यार्थियों के विकास की कार्य योजना बनाई जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रत्येक दिवस की कार्य योजना बनाई है, इसमें भाषण, निबंध प्रतियोगिता, संस्कृत श्लोक प्रस्तुति, स्वास्थ्य जागरूकता, वृक्षारोपण, कैरियर मार्गदर्शन इत्यादि विषय शामिल किए गए हैं। इस अवधि में सांदीपनि विद्यालयों में एक दिवसीय गुरू पूर्णिमा उत्सव होगा। इसके अंतर्गत विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान प्रदर्शिनी, नवाचार इत्यादि के कार्यक्रम किए जाएगें। कार्यक्रम में अभिभावक, जनप्रतिनिधिगण और नागरिकों की सहभागिता होगी। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की देश-विदेश में विशेष पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रसिद्ध वन्य जीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्-2026" में "एडिटर्स चॉईस अवार्ड- बेस्ट वाईल्ड लाईफ डेस्टिनेशन" श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। गोवा में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदान किया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य और प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। यह अवार्ड प्रदेश सरकार की जैव विविधता के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है। जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन समारोह में पंचायत स्तर तक होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 19 मार्च से प्रारंभजल गंगा संवर्धन अभियान का 25 से 30 जून 2026 की अवधि में समारोहपूर्वक समापन होगा। भारत सरकार के जल संचय जन भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। डिण्डौरी, खण्डवा तथा शहडोल देश के प्रथम 10 जिलों में तथा खण्डवा और इंदौर के नगरीय निकाय, देश के प्रथम 10 नगरीय निकायों में शामिल है। प्रदेश में अभियान में जल संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय कार्य हुए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में समारोहपूर्वक समापन कार्यक्रम आयोजित किया जाए। अभियान अंतर्गत किए गए कार्यों की प्रदर्शनी, भाषण, ग्राम पंचायत में जनभागिता से किए गए कार्यों का प्रेजेंटेशन किया जाए और जल के सदुपयोग की शपथ भी दिलाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का किसान सम्मान निधि के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रदेश भ्रमण संबंधी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 20 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि अंतरित की गई। प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का प्रदेश के किसानों की ओर से आभार माना।  

प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी, योगी सरकार नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार

योगी सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार प्लाईवुड उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश ने खोले विकास के नए द्वार देशभर से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों ने लखनऊ और हरदोई में निवेश संभावनाओं को तलाशा  ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार, 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां और आकर्षक प्रोत्साहन निवेशकों को दे रहे नई गति : दीपक कुमार लखनऊ  योगी सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और निवेशकों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में सोमवार को लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों एवं संभावित निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय निवेश संवाद आयोजित किया गया। इसमें उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा ताकि उन पर शीघ्र अमल हो।  बैठक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश के लिए तैयार आधारभूत संरचना, सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं तथा प्लाईवुड एवं संबद्ध उद्योगों में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद कर उद्योग वृद्धि के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि राज्य सरकार प्लाईवुड एवं एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित नीति तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। हम पड़ोसी राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन करेंगे ताकि प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी एवं उद्योग-अनुकूल ढांचा विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए गठित की जाने वाली समिति में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे नीतिगत निर्णय व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप लिए जा सकें। इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निरंतर सुधारों, सक्रिय निवेश सुविधा तंत्र और मजबूत औद्योगिक आधार के कारण देश के सबसे प्रतिस्पर्धी निवेश स्थलों में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां, पूंजीगत सब्सिडी, भूमि आधारित प्रोत्साहन और रोजगार सहायता योजनाएं निवेशकों को विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख अवसर प्रदान कर रही हैं।उन्होंने बताया कि राज्य शीघ्र ही उपलब्ध भूमि बैंक से चार से पांच औद्योगिक क्लस्टरों की पहचान कर उन्हें क्लस्टर आधारित विकास के लिए आरक्षित करेगा। साथ ही यदि निवेशकों को भूमि बैंक से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने और छह माह के भीतर उसका आवंटन सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी। प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को कृषि, विनिर्माण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा बहुआयामी क्षेत्र बताते हुए ओडीओपी की तर्ज पर “वन इंडस्ट्रियल पार्क” मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित उद्योगों के लाइसेंस, वन नियमों, प्रदूषण मानकों, दंडात्मक प्रावधानों और एनओसी से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया तथा एग्रो आधारित उद्योगों के लिए पृथक नीति बनाने का प्रस्ताव रखा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक कुमार ने कहा, “उद्योग जगत द्वारा उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को हम गंभीरता से आगे बढ़ाएंगे तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखकर उद्योग-अनुकूल और व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे।” बैठक में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती प्रेरणा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत निवेशक प्रतिनिधिमंडल 23 जून को हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र का दौरा करेगा, जहां वे भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेंगे। इस पहल से नए निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन बढ़ने और उत्तर प्रदेश के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

PAK की ‘राफेल कहानी’ फिर हुई फेल, एयरफोर्स टेंडर से सामने आई 36 विमानों की सच्चाई

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराने के पाकिस्तान के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है. भारतीय वायुसेना के मुख्यालय से जारी एक आधिकारिक दस्तावेज ने साफ कर दिया है कि भारत के पास फ्रांस से खरीदे गए सभी 36 राफेल विमान पूरी तरह ऑपरेशनल हैं. इस तरह भारत के राफेल पर गलतबयानी करने वाले पाकिस्तान को करारा तमाचा लगा है. पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई राफेल विमानों को गिराने का झूठ फैलाया था।  15 जून 2026 को एयर मुख्यालय के डायरेक्टरेट ऑफ इंजीनियरिंग (राफेल) ने फ्रांस की कंपनी सैफ्रान एयरक्राफ्ट इंजिन्स को एक "ब्रिज सपोर्ट" प्रस्ताव (RFP) भेजा है. ये एक तरह का सपोर्ट टेंडर है. इस दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भारतीय वायुसेना 2016 के भारत-फ्रांस सरकारी समझौते के तहत खरीदे गए सभी 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है और सितंबर 2026 के बाद भी इनके रखरखाव और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी. इसी काम के लिए भारतीय वायु सेना ने टेंडर जारी किया है।  36 राफेल के मेंटेनेंस के लिए एयरफोर्स ने जारी किया टेंडर दस्तावेज के अनुसार अगले पांच महीनों के लिए 36 राफेल विमानों के संचालन को ध्यान में रखते हुए पैकेज तैयार किया गया है।  यह घटनाक्रम 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान सेना और पाकिस्तान-समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स के उन बार-बार किए गए दावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि भारत के कई राफेल विमान मार गिराए गए थे।  पाकिस्तान के अलग-अलग मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और कमेंटेटर्स ने अलग-अलग आंकड़े पेश किए थे, जिनमें यह दावा भी शामिल था कि तीन राफेल विमान नष्ट हो गए हैं. हालांकि, IAF के हालिया दस्तावेज में बेड़े की संख्या में किसी भी कमी का जिक्र नहीं है; इसके बजाय, इसमें सभी 36 विमानों के लिए उड़ान की ज़रूरतों का हिसाब लगाया गया है।  टेंडर दस्तावेजों के अनुसार इस सपोर्ट पैकेज का मकसद 36 राफेल विमानों को चालू हालत में बनाए रखना है. इसके तहत हर विमान के लिए औसतन सालाना 150 घंटे की उड़ान तय की गई है, जिसका मतलब है कि पांच महीने की 'ब्रिज पीरियड' (अंतरिम अवधि) के दौरान कुल 2,250 घंटे की उड़ान का अनुमान है।  दस्तावेज में बताया गया है कि राफेल के मूल अनुबंध में 36 विमान, उनसे जुड़े उपकरण, इस्तेमाल होने वाली सामग्री, स्पेयर पार्ट्स और पांच साल तक विमानों के बेड़े के संचालन के लिए रखरखाव सहायता शामिल थी. प्रस्तावित 'ब्रिज सपोर्ट' का मकसद 18 सितंबर, 2026 के बाद भी विमानों के संचालन को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है।  PAK की 'मनोहर कहानियां' फिर ध्वस्त रक्षा सूत्रों का कहना है कि मेंटेनेंस और सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट आम तौर पर ऑपरेटर के पास मौजूद असल इन्वेंट्री पर आधारित होते हैं. 36 विमानों के पूरे बेड़े का बार-बार ज़िक्र होने से राफेल के नुकसान के बारे में पाकिस्तान के दावों पर और सवाल उठते हैं. पाकिस्तान ने यह झूठा दावा भी किया था कि उसने भारत की एक महिला पायलट को पकड़ लिया है. IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पहले ही पाकिस्तान के इन दावों को "मनोहर कहानियां" करार दिया था।  भारतीय वायु सेना के राफेल बेड़े के लिए ये सपोर्ट टेंडर का प्रस्ताव सैफ्रन एयरक्राफ्ट इंजन को भेजा गया है, जो राफेल के M88 इंजन बनाने वाली मूल कंपनी है. यह तरीका आमतौर पर तब अपनाया जाता है जब केवल मूल उपकरण निर्माता ही खास तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स या सेवाएं दे सकता है।  भारत ने फ्रांस के साथ 2016 के समझौते के तहत अपने 36 राफेल लड़ाकू विमान शामिल किए थे; ये विमान अभी IAF के नंबर 17 स्क्वाड्रन "गोल्डन एरोज़" और नंबर 101 स्क्वाड्रन में तैनात हैं। 

मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना की निरंतरता को मंजूरी, 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति

राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5,960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना की निरंतरता को मंजूरी, 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति 225 शासकीय माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल के हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5 हजार 960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी दी गई। बैठक में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान को गति देते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक निरंतर संचालित रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए राज्य में शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन की योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच बढ़ेगी और ड्रॉप आउट दर में कमीं आएगी। इसके अतिरिक्त, किसानों के आर्थिक संबल के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण योजना की नई शर्तों, शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय की स्थापना, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 3 हजार 580 करोड़ रूपये से अधिक की राशि की निरंतरता तथा जनजातीय क्षेत्रों के विद्युतीकरण संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना के संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। योजना अंतर्गत गरीब जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्यक्ता के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में राशि 55 हजार रूपये प्रति कन्या के मान से दी जाती है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रूपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह, योजना महिला सशक्तिकरण की एक अहम योजना है, जिसके अंतर्गत गरीब और जरुरतमंद अभिभावकों की कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न होता है। इस योजना से विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित हो जाती है। यह योजना महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिये महत्वपूर्ण है। 225 शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल एवं हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किया जाएगा। आगामी 2 वर्षों 2027-28 एवं 2028-29 में भी इसी प्रकार प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक एवं 100 हाईस्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। साथ ही विद्यालयों के उन्नयन के लिए अनुमानित व्यय राशि 635 करोड़ 24 लाख रूपये के प्रस्ताव पर सहमति दी। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मापदण्डों के आधार पर जिला स्तर से मैपिंग अनुसार 315 हाई स्कूल एवं 214 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा। सांदीपनि विद्यालय के कैचमेंट एरिया में आने वाले विद्यालयों के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालय में होने पर विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत विद्यालय अपने वर्तमान भवन या अन्य शासकीय भवन में संचालित होंगे। आवश्यकता एवं बजट उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का आंकलन गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या एवं यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर की जायेगी। राज्य में हाई स्कूल का सकल नामांकन दर (जीईआर) 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में कक्षांतरण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत है। विद्यालयों की दूरी अधिक होने होने के कारण विद्यार्थियों का प्रवेश कम होता है या वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाते, जिससे ड्रॉप आउट दर बढ़ती है। इसलिए विद्यार्थियों की पहुँच में विद्यालय उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन एवं निरंतरता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मूल लक्ष्य है। शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण प्रदाय करने के लिए किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन के लिए पृथक-पृथक देय तिथि (ड्यू डेट) नहीं रखते हुए उसके स्थान पर वार्षिक एकल ऋण सीमा रखी जाएगी, जिसमें नगद एवं वस्तु ऋण की उप-सीमा निर्धारित रहे। योजनान्तर्गत देय तिथि (डयू डेट) कृषकों को स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से प्रथम ऋण आहरण से 12 माह निर्धारित की जाएगी और अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। प्रदेश में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना वर्ष 2012-13 से निरन्तर लागू है। योजनान्तर्गत खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित तिथि (ड्यू डेट) तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से … Read more

‘जिन्हें पेपर बनाना था, वही लीक कराने वालों से जा मिले’, NEET घोटाले पर शिक्षा मंत्री का तीखा हमला

  नई दिल्ली देशभर में 21 जून को परी-नीट परीक्षा कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित किया गया था जिसमें करीब 22 लाख से अधिक छात्रों ने पेपर दिया था. पेपर पूरा होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आजतक को इंटरव्यू देते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में कमियों को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर माफिया और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि केवल दोषियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेक्सस को तोड़ना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें।  अभिभावकों समेत सबको आभार आजतक से बात करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों, छात्रों समेत री-नीट को सही से आयोजित करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि ये केवल एजेंसी या सरकार की जिम्मेदारी से नहीं बल्कि हर किसी के छोटे-छोटे योगदान से हुआ है। भविष्य में न उठे कोई सवाल   शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे. इसी दिशा में तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में अधिक से अधिक परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है. उनका मानना है कि इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बेहतर होगी और परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।  नागपुर छात्र का भी किया जिक्र केंद्रीय मंत्री ने नागपुर छात्र का भी जिक्र किया जिसकी री-नीट परीक्षा केंद्र अबूधाबी हो गया था. इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि छात्र की ओर से ही एग्जाम सेंटर को अबूधाबी किया था लेकिन हमने खुद छात्र के पिता से संपर्क किया. इसे लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा था जिसपर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को केवल राजनीति करनी है. उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं थी फिर भी वह इस मुद्दे में घुस गए।   CBSE के मुद्दे पर भी बोले  जब उनसे CBSE परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सुधारना हमारा दायित्व है जिसपर हम काम कर रहे हैं. नीट को लेकर भी हमने गलती सुधारी है।  राहुल गांधी पर भी साधा निशाना  धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. उनका कहना था कि छात्रों की चिंताओं का समाधान करना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन इस विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष होने के नाते सवाल उठाना उनका फर्ज है लेकिन मेरा उनको सुझाव है कि वह सही सवाल उठाए. शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह बच्चों के मन में डर पैदा करने का काम कर रहे हैं।  प्रधानमंत्री की थी नजर  शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए थे. उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों और जांच प्रक्रिया की लगातार निगरानी की गई. सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल समाधान निकालना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था को तैयार करना है जिससे छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर बना रहे।  देर से पहुंचे छात्रों का भी किया जिक्र  इंटरव्यू के दौरान उन्होंने उन छात्रों का भी जिक्र किया जो परीक्षा केंद्रों पर देरी से पहुंचने के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो सके. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार इस विषय को भी गंभीरता से देख रही है. उन्होंने माना कि ऐसे मामलों में छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और भविष्य में यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि किसी भी कारणों से छात्र का नुकसान न हो. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत, सुरक्षित और छात्र के हित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुधार किए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि देश के करोड़ों छात्रों को निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, जिससे उनकी मेहनत और प्रतिभा का सही मूल्यांकन हो सकें।  रक्षक ही बन गए भक्षक  री-नीट के सफल आयोजन पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मल्टीलेयर सुरक्षा के बीच आयोजित हुई परीक्षा. परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा रखी गई थी. लेकिन 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा में हुई पेपर लीक को लेकर उन्होंने कहा कि रक्षक ही भक्षक हो गया. जिन लोगों पर हमने भरोसा किया था कि पारदर्शी तरीके से प्रश्न पत्र बनाएंगे, उन लोगों ने बदमाशों के साथ मिलकर जो अपनी फायदे के लिए परीक्षा को तोड़ना चाहते हैं उनके वजह से 3 मई की घटना हुई है।