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दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उन्नत खेती व पशुपालन से बढ़ायेंगे किसानों की आमदनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में उन्नत कृषि कार्यशाला में किसानों से किया संवाद अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का किया भूमिपूजन ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आमदनी केवल एक फसल से नहीं बल्कि बहु फसलों एवं उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा उन्नत व प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हम अगले पाँच वर्षों में मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन राज्य बनायेंगे। इसी कड़ी में सरकार नेशनल डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित साँची दुग्ध उत्पादन संघ को भरपूर मदद दे रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्नत कृषि पर हुई संभागीय कार्यशाला में मौजूद किसानों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कार्यशाला में किसानों से सीधा संवाद करते हुए जैविक व प्राकृतिक खेती पर अनुभव सुने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में मूर्तरूप लेने जा रही अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का भी रिमोट से भूमिपूजन किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर के खुरैरी एवं ग्राम जहांगीरपुर में इस हाईटेक नर्सरी के प्रथम चरण का कार्य होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं कृषि से जुड़े अन्य विभागों की योजनाओं के तहत विभिन्न किसानों को हितलाभ भी वितरित किए। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्क्रण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर व श्रीमती सरला रावत, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुँवर सिंह जाटव, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, साडा अध्यक्ष अशोक शर्मा, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, जयप्रकाश राजौरिया, किसान मोर्चा के पदाधिकारी गिर्राज व्यास व अमरदीप सिंह औलख सहित जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल रहे। सिंचाई रकबा होगा 100 लाख हैक्टेयर तक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद सिंचाई रकबे में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2003 में प्रदेश का सिंचाई रकबा मात्र साढ़े 7 लाख हैक्टेयर था जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हैक्टेयर हो गया है। इसे हम 100 लाख हैक्टैयर तक ले जायेंगे। चंबल-पार्वती-काली सिंध एवं केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओ के माध्यम से यह संभव हुआ। उन्होंने इन परियोजनाओं की मंजूरी के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। किसान अब चिंता मुक्त होकर जमा कर सकते हैं कृषि ऋण किसानों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश के कृषकों को 31 मार्च तक ऋण जमा करने की चिंता नहीं रही है। सरकार ने अब उन्हें ऋण जमा करने के लिये पूरे एक साल का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार द्वारा सभी प्रकार के कृषि उत्पादों व पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की सहूलियतों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। खिड़क प्रणाली के स्थान पर गौ-शालाओं की स्थापना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ माता कभी आवारा नहीं हो सकती। इसी भाव के साथ प्रदेश सरकार द्वारा गौ संरक्षण एवं स्वदेशी गाय पालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने इसी कड़ी में नगरीय क्षेत्रों में निराश्रित गायों को बंद करने के लिये कार्यरत खिड़क प्रणाली को समाप्त कर दिया है और बड़े पैमाने पर गौशालायें स्थापित की जा रही हैं। साथ ही देशी गायों में नस्ल सुधार के प्रयास भी प्रमुखता से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तरह प्रदेश के महानगर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर व भोपाल में बड़ी गौशालाओं की स्थापना की जा रही है। जैविक व प्राकृतिक खेती पर किसानों ने किए अनुभव साझा उन्नत कृषि पर आयोजित हुई संभागीय कार्यशाला में कृषकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी कृषकों को अपने पास बुलाया और उत्साहवर्धन किया। ग्वालियर जिले के ग्राम बिलौआ निवासी उन्नत कृषक प्राण सिंह माथुर ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि वे अपने छोटे से कृषि फार्म में सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने पाँच नए किस्म के पौधों की खोज की है, जिसे वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। उनके द्वारा ईजाद किए गए अमरूद की “बिलौआ-22” व “बिलौआ-रेड” किस्म पेटेंट हो चुकी हैं। प्राण सिंह अब तक 50 हजार से अधिक कृषकों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसी तरह ग्राम देवरा निवासी बृजेन्द्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया है। उन्नत प्राकृतिक खेती के लिये उनकी धर्मपत्नी को राष्ट्रीय स्तर पर पाँच अवार्ड मिल चुके हैं। भगवानपुरा मुरार निवासी कृषक देवराज कुशवाह का कहना था कि वे अब प्राकृतिक पद्धति से गेहूँ व सरसों जैसी खाद्यान्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा वे भिंडी, गेहूँ, मिर्च व आलू जैसी फसलें भी पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री ने समन्वित कृषि प्रणाली एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाइयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण भी किया। किसानों के लिए आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती का व्यावहारिक मॉडल कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। इस “समन्वित कृषि प्रणाली इकाई” में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया गया है। इस मॉडल में एक गतिविधि का अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए रॉ मटेरियल बनता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को आय … Read more

शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा ‘परशुरामपुरी’

यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी 60 करोड़ रुपये से लागू होगी बीमा योजना, 85 प्रतिशत प्रीमियम देगी सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान महामारी, दैविक आपदा और आकास्मिक दुर्घटना से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा, 2.28 लाख से अधिक पशु आएंगे दायरे में पशुओं की मौत या अपंगता पर नहीं होगा आर्थिक संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ,   सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है। इन स्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 प्रतिशत तक भुगतान प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। 2.28 लाख से अधिक पशुओं को होगा बीमा कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा। योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को अंशदान के रूप में देनी होगी। धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 प्रतिशत का योगदान है। प्रदेश में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 प्रतिशत से अधिक है। पशुधन का इसमें विशेष योगदान है। पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 75 जिलों में लागू होगी। राज्यांश 85 प्रतिशत (इसमें केंद्र का हिस्सा 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत शामिल) और लाभार्थी का अंश 15 प्रतिशत होगा। योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा। इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा। यूपी के गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है। प्रदेश में 7,500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम होगा 'परशुरामपुरी' नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर को मिलेगी नई आधिकारिक पहचान अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा नाम परिवर्तन का निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर 'परशुरामपुरी' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से जनपद शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत स्थित कस्बा जलालाबाद का नाम 'परशुरामपुरी' किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के बाद संबंधित विभाग द्वारा नाम परिवर्तन के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, विभागीय दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में नगर का नाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा। भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है जलालाबाद जनपद शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी। भारत सरकार द्वारा भी इस प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद राज्य सरकार ने नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर … Read more

कोरोना के बाद बढ़ी स्लीपिंग पिल्स की मांग! ICMR रिपोर्ट में लाइफस्टाइल बदलाव का बड़ा खुलासा

जबलपुर   भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है। एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं। शरीर की जैविक जरूरत मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं। सेहत पर असर नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है। अनिद्रा के कारण विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं- डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग। बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं। सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव। नींद लाने के लिए करें ये काम -समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें। -भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता -रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है। -शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें। -सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। -बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।

7 देशों ने मिलाया हाथ, Crude Oil Production पर लिया बड़ा फैसला; पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।  Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।  Crude की कीमतों में गिरावट जारी इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी। संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।  इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।  एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।  OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।  क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?  अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।   हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।  पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत  मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।  Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।   

मध्य प्रदेश में मानसून मेहरबान, 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी; मौसम विभाग ने बताया कब तक जारी रहेगा दौर

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून ने पूरी ताकत के साथ एंट्री मार दी है. मानसून ने मध्य प्रदेश को पूरे तरीके से कवर कर लिया है. भोपाल, इंदौर सहित हर जिले में बारिश का दौरा देखने को मिल रहा है. इसी बीच बिजली गिरने सहित हादसों की खबरें भी सामने आ रही है. अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. अब चूंकि इस बार मध्य प्रदेश में मानसून तय टाइम से देरी से आया था. ऐसे में मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी भरपाई के लिए मानसून अधिक समय तक सक्रिय रह सकता है. आर्टिकल में जानिए मानसून की गतिविधियां।  कब तक एक्टिव रहेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है. इसलिए फिलहाल सितंबर तक इसके प्रभावी बने रहने की संभावना है. लेकिन मानसून की सक्रियता पूरी तरह मानसूनी ट्रफ की स्थिति पर डिपेंड करती है. ऐसे में बीच-बीच में कुछ दिनों के लिए बारिश कम हो सकती है. इसके बाद ट्रफ के अनुकूल होने पर बारिश का दौर फिर से तेज होने की संभावना रहेगी. सितंबर के बाद मानसून लौटना शुरु हो जाएगा।  मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ''मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव सामान्यतः जून से सितंबर तक रहता है. इस दौरान मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं रहता, बल्कि इसकी तीव्रता मानसून ट्रफ की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है. वहीं बीच-बीच में ब्रेक की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन फिर मानसून दोबारा सक्रिय हो जाता है. मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई सामान्यतः सितंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी होती है।  कैसे आता है मानसून, कैसे बनते हैं बादल मानसून भारत में सबसे पहले केरल में पहुंचता है. मानसून के बनने का प्रोसेस भी काफी रोचक है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून गर्मियों में जमीन के तेजी से गर्म होने और समुद्र से उठने वाली नमी वाली हवाओं के कारण आता है. हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर हवाएं भारत की ओर आती हैं. नमी वाली हवाएं ठंडी होकर घने बादलों में तब्दील हो जाती हैं और बारिश होने लगती है. मानसून 15 जून से भारत में एक्टिव हो जाता है. जो सितंबर तक चलता है. सिंतबर के बाद मानसून विदा लेने लगता है।  22 जिलों में होगी भारी बारिश 7 जुलाई सुबह 8:30 से 8 जुलाई सुबह 8:30 तक विदिशा, रायसेन, शहडोल और उमरिया जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, सीधी, रीवा, मऊगंज, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, सिंगरौली, सतना और अनूपपुर सहित 22 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात एवं तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल सहित 28 जिलों में झंझावात, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।  7 जुलाई सुबह 8:30 से 9 जुलाई सुबह 8:30 तक रायसेन, गुना, अशोकनगर और सागर जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, श्योपुरकलां, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित 16 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट है. वहीं भोपाल सहित 34 जिलों में झंझावात, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।  9 जुलाई सुबह 8:30 से 10 जुलाई सुबह 8:30 तक गुना और अशोकनगर में अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है. राजगढ़, आगर, मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, श्योपुरकलां, कटनी, पन्ना, दमोह, सागर और छतरपुर सहित 13 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा सहित 39 जिलों में वज्रपात, झंझावात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। 

मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज, नौकरशाहों को अहम मंत्रालय मिलने की संभावना

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस विस्तार में अनुभवी सेवानिवृत्त नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारियां मिलने की अटकलें है। सूत्रों का कहना है कि ‘परफॉर्मेंस’ और ‘लॉयल्टी’ के फॉर्मूले पर खरे उतरने वाले अफसरों को पीएम मोदी जल्दी रिटायर नहीं होने देते। ऐसे में कुछ बड़े अधिकारियों के नाम मंत्रिमंडल फेरबदल में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में शक्तिकांत दास और तपन डेका जैसे आला अधिकारियों के नाम हैं। इनके अलावा भी कुछ अधिकारी महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर आ सकते हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में भी कभी-कभी ऐसे प्रयोग हुए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में यह व्यवस्थागत रूप ले चुकी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार मिलना सामान्य हो गया है और वे विभिन्न मंत्रालयों तथा सरकार संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह मॉडल न केवल प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करता है, बल्कि बड़े सुधारों को गति देने और संकट प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। सरकारों को यह होता है लाभ: दशकों का प्रशासनिक अनुभव, जटिल नीतियों की गहरी समझ, संस्थागत स्मृति का संरक्षण, बड़े सुधारों में निरंतरता, संकट के समय अनुभवी नेतृत्व की उपलब्धता और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन रिटायर लोगों को जिम्मेदारी देने की बड़ी वजह बताई जाती है। मोदी सरकार का जोर अनुभव, निष्ठा और परिणाम पर रहा है। फाइल क्लियरेंस, प्रोजेक्ट डिलीवरी, खर्च प्रबंधन की दक्षता और शिकायत निवारण जैसे पैमानों पर अधिकारियों को स्कोर कार्ड दिए जा रहे हैं। हालांकि, इस मॉडल की आलोचना भी होती है। आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक सेवा विस्तार से नए अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। भारत ही नहीं कई देशों में भी यह प्रयोग यह प्रवृत्ति केवल भारत तक सीमित नहीं है। सिंगापुर में स्थायी सचिव सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कंपनियों और नीति आयोगों का नेतृत्व करते हैं। अमेरिका में जेम्स मैटिस और लॉयड ऑस्टिन (सेवानिवृत्त जनरल) रक्षा मंत्री बने। जेनेट येलेन (पूर्व फेड चेयर) वित्त मंत्री बनीं। जेरोम पॉवेल केंद्रीय बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व अधिकारी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, थिंक टैंक और विशेष दूत के रूप में कार्य करते हैं। ब्रिटेन में सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवकों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स, सार्वजनिक आयोगों और नियामक संस्थाओं में नियुक्त करना सामान्य है। मार्क सेडविल सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न संस्थानों में रणनीतिक भूमिकाएं निभा चुके हैं। फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों स्वयं उच्च सिविल सेवा से आए। जापान में अमकुदरी (स्वर्ग से अवतरण) परंपरा के तहत वरिष्ठ नौकरशाह सेवानिवृत्ति के बाद निजी कंपनियों में नेतृत्व करते हैं।

दतिया उपचुनाव का बिगुल बजा! 13 जुलाई को नामांकन, क्या दोहराई जाएगी मिश्रा बनाम भारती परिवार की सियासी टक्कर?

दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां पहले से ही तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने बैठक कर संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की है। भाजपा की भोपाल स्थित 74 बंगला में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा कर पैनल तैयार किया गया, जिसे उसी दिन केंद्रीय नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दिया गया। 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान निर्वाचन आयोग ने दतिया उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और मतगणना 4 अगस्त को की जाएगी। भाजपा ने शुरू की चुनावी रणनीति भाजपा नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की टीम दतिया में उतारने की रणनीति बनाई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संगठन बूथ से लेकर जिला स्तर तक लगातार सक्रिय है और उपचुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत सूत्रों के अनुसार भाजपा में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सबसे प्रमुख दावेदार हैं। वे पिछले कुछ समय से लगातार दतिया के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुनावी माहौल तैयार कर रहे हैं। पार्टी के भीतर भी उन्हें सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है। कांग्रेस में टिकट को लेकर कई दावेदार     कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और सिद्धार्थ कुशवाहा की समिति गठित की है, जो राजनीतिक हालात का आकलन कर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को रिपोर्ट सौंपेगी। टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक घनश्याम सिंह, अवधेश नायक और अन्य नेता सक्रिय हैं।     सूत्रों के अनुसार आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। माना जा रहा है कि वह अपने बेटे अंकित भारती को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वह पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात करा चुके हैं। आसपा ने घोषित किया प्रत्याशी दतिया उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवार के रूप में दामोदर यादव के नाम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही दतिया का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावनाएं भी चर्चा में हैं, हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है।

E20 Fuel Survey: आधे से ज्यादा कार मालिक असंतुष्ट, 66% बोले- माइलेज पर पड़ा बुरा असर

 नई दिल्ली कहते हैं बदलाव की कीमत चुकानी पड़ती है. लेकिन जब कीमत हर बार आम आदमी की जेब से ही निकले, तो सवाल उठना तय है. सरकार E20 पेट्रोल के फायदे गिना रही है, उधर पुराने पेट्रोल वाहन चलाने वाले लोग घटते माइलेज और बढ़ते रिपेयर बिल का हिसाब लगा रहे हैं. अब एक बड़े सर्वे ने इस बहस को और हवा दे दी है. सर्वे में 53 प्रतिशत लोगों ने E20 लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताई, 66 प्रतिशत ने माइलेज गिरने की शिकायत की और 45 प्रतिशत ने कहा कि गाड़ी का मेंटेनेंस पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।  लोकल सर्किल्स (LocalCircles) के सर्वे में देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया. सर्वे के अनुसार 53 प्रतिशत लोगों ने सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय की E20 पेट्रोल लागू करने की प्रक्रिया को या तो "बेहद खराब" या "असरहीन" बताया. इनमें 42 प्रतिशत लोगों ने इसे "बेहद खराब" करार दिया, जबकि सिर्फ 13 प्रतिशत लोगों ने इस पहल को थोड़ी अच्छी रेटिंग दी।  10% घटा माइलेज सर्वे में सबसे बड़ी चिंता 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों को लेकर सामने आई. ऐसे वाहन मालिकों में 66 प्रतिशत लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया है. वहीं 45 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनकी गाड़ियों के कंपोनेंट में समस्या बढ़ी है और मरम्मत पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।  इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि, लोग इथेनॉल ब्लेंडिंग का पूरी तरह विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चाहिए. 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के करीब 31 प्रतिशत मालिकों ने कहा कि अगर E0 या E10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए तो वे E20 से महंगा होने पर भी उसे खरीदना पसंद करेंगे. इससे साफ है कि पुराने वाहन मालिक कम इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के लिए रेडी हैं, भले ही इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़े।  सरकार E20 के फायदे गिना रही है दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव कर रही है. सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा, एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. बीते दिनों सरकार ने दिग्गज वाहन निर्माताओं के अधिकारियों का एक पूरा पैनल बठाया था. जिसमें सभी कंपनियों ने एक सुर में इथेनॉल के फायदे गिनाए थे।  सर्वे में कहा गया है कि भारत की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी पेट्रोल गाड़ियां चल रही हैं जिन्हें कम इथेनॉल वाले फ्यूल को ध्यान में रखकर बनाया गया था. अप्रैल 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं, जबकि अप्रैल 2025 के बाद बनने वाले नए मॉडल पूरी तरह E20 कम्पलायंट माने जाते हैं. ऐसे में पुराने वाहन मालिकों को माइलेज और मेंटेनेंस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  अपग्रेड करना भी आसान नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पुरानी गाड़ियों को E20 कम्पलायंट बनाना हो, तो फ्यूल सिस्टम के ऐसे कई पार्ट बदलने पड़ सकते हैं जो ज्यादा इथेनॉल को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते. इससे वाहन मालिकों का खर्च और बढ़ सकता है. हाल ही में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बलानी ने आजतक से ख़ास बातचीत में बताया कि, एक ख़ास तरह की फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट की टेस्टिंग की गई है. जिसके नतीजे काफी हद तक पुरानी बीएस4 और बीएस6 कारों के लिए सकारात्मक रहे हैं।  दीपक बलानी ने ये भी बताया कि, इस कन्वर्जन किट की टेस्टिंग रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है. हालांकि इसे इंपोर्ट कर के लाया गया था तो इसकी कीमत 50,000 रुपये है. लेकिन अगर इसे स्थानीय स्तर पर डेवलप किया जाता है तो इसकी कीमत तकरीबन 20,000 रुपये तक हो सकती है. ISMA ने इस किट को मारुति डिजायर कार में टेस्ट किया था।  कैसे किया गया सर्वे लोकलसर्किल्स का यह सर्वे देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों के बीच किया गया. इसमें 69 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाओं ने हिस्सा लिया. करीब 46 प्रतिशत लोग टियर-1 जिलों से, 32 प्रतिशत टियर-2 जिलों से और बाकी 22 प्रतिशत टियर-3, टियर-4, टियर-5 और ग्रामीण इलाकों से थे. लोकल सर्किल्स के अनुसार सर्वे में शामिल सभी लोग उसके प्लेटफॉर्म के रजिस्टर्ड और सर्टिफाइड यूजर थे। 

Apple Crisis in Himachal: 40% तक घट सकता है सेब उत्पादन, जानें कौन बन रहा ₹5000 करोड़ के कारोबार का सबसे बड़ा ‘खलनायक’

 नई दिल्ली एक कहावत है कि 'रोज एक सेब खाएं और डॉक्टर को दूर भगाएं', लेकिन अब लग रहा है कि डॉक्टर को भगाने के लिए सेब ही नहीं बचेंगे. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से ये डराने वाले अनुमान जाहिर किए जा रहे हैं. सेब के उत्पादन के लिए सबसे बड़ा खलनायक बन रहा है मौसम का मिजाज, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब उत्पादन में 40 फीसदी की बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।  Apple इकोनॉमी खतरे में है बिजनेस टुडे पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था (Apple Economy) इस समय अभूतपूर्व जलवायु संकट का सामना कर रही है. मौसम की अनियमितता के चलते इस साल सेब उत्पादन में लगभग 40% की गिरावट आने की आशंका है और ये सेब की फसल पर निर्भर जिससे इस फसल पर निर्भर करीब  25 लाख किसान परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।  अधिकारियों को सता रही चिंता हिमाचल प्रदेश राज्य के बागवानी अधिकारियों ने अनुमान जाहिक करते हुए कहा कि राज्य में सेब का उत्पादन 2025 में 6.99 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2026 में लगभग 4.36 लाख मीट्रिक टन (लगभग 2.15 करोड़ बक्से) रह जाएगा, यानी 2.63 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आएगी. इसके साथ ही इसी अनुपात में सेब अर्थव्यवस्था में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।  सेब उत्पादन में इस बड़ी गिरावट को लेकर अधिकारियों ने कारण बताते हुए कहा कि सर्दियों में अपर्याप्त हिमपात, बेमौसम  बारिश, लगातार ओलावृष्टि और तापमान में अनियमित उतार-चढ़ाव से ये हालात पैदा हुए हैं. बागवानों की मानें, तो मौसम ने उत्पादन लागत बढ़ाने और पैदावार घटाने की चुनौतियां पैदा कर दी हैं. दूसरी ओर कीटनाशक दवाओं और मशीनरी समेत अन्य एग्रीकल्चर उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी ने उनका बोझ बढ़ा दिया है।  किसानों ने सरकार से लगाई गुहार राज्य के भारी भरकम 5000 करोड़ रुपये के करीब के सेब कारोबार पर संकट बढ़ता देख, किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. उन्होंने फसल बीमा योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।  मौसम का बदलता मिजाज न सिर्फ राज्य की इकोनॉमी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी मुसीबत माना जा रहा है, इसका प्रभाव सिर्फ सेब तक ही सीमित नहीं है. तमाम एक्सपर्ट शेयर बाजार पर भी मौसम के प्रभाव का अनुमान जता रहे हैं।  मौसम बनता जा रहा खलनायक? बीते कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई का जोखिम बढ़ाया था, लेकिन अब अमेरिका-ईरान में बात बनते ही तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट में तेल सस्ता होने के बाद अब एक्सपर्ट भी मानते नजर आए थे कि मौसम इकोनॉमी के लिए खलनायक बनता जा रहा है।  इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा था कि आज देश में महंगाई का सबसे बड़ा जोखिम तेल नहीं, बल्कि मानसून है. कमजोर मानसून अब भारत के लिए कच्चे तेल की तुलना में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा कर रहा है, क्योंकि देश में महंगाई की कैलकुलेशन में Fuel Price से कहीं ज्यादा खाद्य पदार्थों का रोल रहता है और भारत की करीब आधी एग्रीकल्चर लैंड बारिश पर निर्भर है, इसमें अनियमितता से अनाज, दालों, सब्जियों, फलों और तिलहन के प्रोडक्शन में कमी आ सकती है, जिससे महंगाई दर में तेज इजाफा हो सकता है और घरेलू बजट गड़बड़ा सकता है। 

राम मंदिर विवाद के बीच BJP सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की कांग्रेस को खुली चेतावनी, RSS पर बयान से गरमाई सियासत

खंडवा  मध्य प्रदेश की सियासत में अयोध्या के श्री राम मंदिर को लेकर एक बार फिर जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि मंदिर में बिना कलश स्थापना के ही प्राण प्रतिष्ठा की गई और भगवान राम की प्रतिमा का रंग भी काला है। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं वजहों से देश में 'दंड' मिल रहा है और वर्तमान की अप्रिय घटनाएं इसी का नतीजा हैं। बीजेपी सांसद का करारा पलटवार दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद बीजेपी पूरी तरह हमलावर हो गई है। बुरहानपुर पहुंचे खंडवा संसदीय क्षेत्र के बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सांसद ने साफ लफ्जों में कहा कि ऐसी ही बातें कह-कहकर दिग्विजय सिंह ने खुद का और अपनी कांग्रेस पार्टी का सत्यानाश कर लिया है। 'प्रभु राम ने कर दिया बेड़ापार' जो लोग कभी भगवान राम और रामसेतु को काल्पनिक बताते थे, प्रभु श्री राम ने आज उनकी और उनकी पार्टी की क्या स्थिति कर रखी है, यह सब देख रहे हैं। दरअसल, इनका खुद का मन काला है। इन्हें हर समय हिंदू समाज पर उंगली उठाने में ही आनंद आता है। प्रभु श्री राम इनको ऐसी ही सद्बुद्धि देते रहें और इनका जो बेड़ापार हुआ है, वह आगे भी ऐसे ही होता रहे। जब से राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ है, इनके पेट में दर्द हो रहा है। ये लोग गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।- ज्ञानेश्वर पाटिल, सांसद, खंडवा आरएसएस पर दिया बड़ा बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भी सांसद पाटिल ने सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि संघ एक पवित्र संस्था है और इसके मार्गदर्शन में सब काम कर रहे हैं। इस पर गलत आरोप लगाने वाले और उंगली उठाने वाले तत्वों की उंगली और हाथ तोड़ दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि चंदे के मामले में जिन कर्मचारियों की गड़बड़ी सामने आई थी, उन पर पहले ही एक्शन लिया जा चुका है और दोषियों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।