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सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री

विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से तैयार होंगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पद्म भूषण पुलेला गोपीचंद, प्रदेश की प्रतिभाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण खेल प्रतिभाओं को अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता, खेल विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान बस्तर ओलंपिक से सामने आ रही दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाएं, दूसरे वर्ष लगभग 3.91 लाख खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा खेल उत्कृष्टता, आधुनिक सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के राज्य सरकार के प्रयासों की गोपीचंद ने की सराहना रायपुर  छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के जोरा में आयोजित सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्लब के संस्थापकों और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय बैडमिंटन को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके मार्गदर्शन में अनेक खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। नवा रायपुर में उनकी बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का निर्माण भी करते हैं। खेलों में निवेश वास्तव में हमारी युवा पीढ़ी और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दे रही है। बस्तर ओलंपिक ने बदली तस्वीर, गांवों से निकलकर मैदान तक पहुंच रहे युवा मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने का सशक्त मंच बना है। बस्तर ओलंपिक के पहले वर्ष में लगभग एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग तीन लाख 91 हजार हो गई। खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी बताती है कि बस्तर के युवाओं में खेलों को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है और क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आज युवा बंदूक और हिंसा से दूर होकर खेल, शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सुदूर गांव की प्रतिभा को भी वही अवसर और मंच मिले, जो बड़े शहरों के खिलाड़ियों को उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘खेलो इंडिया’ के अंतर्गत राष्ट्रीय जनजातीय खेलों का सफल आयोजन किया गया है। प्रदेश के खिलाड़ी भी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव तथा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अपने परिश्रम और प्रतिभा से प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं। खेल अधोसंरचना के विस्तार के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ सहित विभिन्न योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवश्यक सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी, चाहे वह किसी शहर से हो या सुदूर वनांचल से, संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे। प्रतिभा को अवसर से जोड़ना और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। नक्सलवाद से मुक्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता उनकी सरकार के लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद ने बस्तर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के विकास को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि इस परिवर्तन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जनता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोगों के विश्वास और सहयोग से आज उन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, खेल और रोजगार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘मोदी की गारंटी’ के अंतर्गत प्रदेशवासियों से किए गए वादों को पूरा करने के साथ सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा … Read more

किसानों की समृद्धि पर CM डॉ. मोहन यादव का जोर, बलराम कृषि महोत्सव से खेती को मिल रही नई दिशा

किसानों की समृद्धि ही हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई तकनीक से खेती कर समृद्धि की ओर बढ़ रहे किसान तरक्की की नई राह बना बलराम कृषि महोत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में बलराम कृषि महोत्सव महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा  कि किसानों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर तक प्रदेश के 55 में से करीब 43 जिलों में जिला स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव आयोजन हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही हमारा लक्ष्य है, हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और जिला अधिकारी सीधे किसानों से संवाद कर रहे हैं। किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, आधुनिक कृषि यंत्रों और खेती में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि कम निवेश में अधिक आमदनी प्राप्त करने के गुर सीखकर किसान अमल कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते समय में खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए परम्परागत तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही नई जानकारियां किसानों को बेहतर उत्पादन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। उन्होंने किसानों से बलराम कृषि महोत्सव में अवश्य भाग लेकर कृषि विशेषज्ञों की सलाह का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और कृषि क्षेत्र में समृद्धि के नए अवसर पैदा करना है। इसके लिए सभी जरूरी उपाय और प्रबंधन किये जा रहे हैं। खेती को लाभकारी बनाने का सशक्त मंच इस वर्ष 15 जुलाई 2026 से शुरू हुए बलराम कृषि महोत्सव आयोजन की श्रृंखला में अब तक हजारों किसान इस महोत्सव से लाभान्वित हो चुके हैं। बलराम कृषि महोत्सव खेती-किसानी को घाटे से उबारने, आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और किसानों को सफलता एवं लाभ के नए आयामों से जोड़ने का सशक्त मंच बन रहा है।  

डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती देने की तैयारी, RBI ने किए बड़े ऐलान; फॉरेक्स नियम सख्त

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को सपोर्ट करने के लिए कई उपयों का ऐलान किया है. आरबीआई ने तीन सरकारी तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों (OMCs) की डेली अमेरिकी डॉलर की पूरी आवश्‍यकता को पूरा करने के लिए एक स्‍पेशल विंडो खोल रहा है. इसके अलावा, सट्टेबाजी को रोकने, रिजर्व रिस्‍क और करेंसी हेजिंग संबंधी भी उपाय किए गए हैं।  RBI के एक बयान के अनुसार, डॉलर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) को बेचे जाएंगे. यह सोमवार, 12 अक्‍टूबर, 2026 से प्रभावी होगी और अगले आदेश तक लागू रहेगी।  इस व्‍यवस्‍था के तहत RBI नामित बैंकों के माध्‍यम से तीन पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों को अमेरिकी डॉलर बेचेगा. इस सुविधा का उद्देश्‍य यह तय करना है कि कंप‍नियां अपने ऑपरेशन के लिए अपनी हर दिन की विदेशी मुद्रा आवश्‍यकताओं को पूरा कर सकें।  ये उपाय ऐसे समय में आए हैं जब केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना हुआ है. शुक्रवार को रुपया 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो मई में दर्ज किए गए अपने सर्वकालिक निचले स्तर 96.96 रुपये के करीब है।  1. तेल कंपनियों के लिए स्‍पेशल डॉलर विंडो  केंद्रीय बैंक ने मौजूदा बाजार स्थितियों के आकलन के बाद इस उपाय की घोषणा की. हालांकि, उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सुविधा कितने समय तक लागू रहेगी, केवल इतना कहा कि यह अगली सूचना तक जारी रहेगी. इस विशेष व्यवस्था के तहत तीनों तेल कंपनियों को बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से डॉलर प्राप्त करने के लिए एक चैनल उपलब्ध कराया गया है. आरबीआई ने इस व्यवस्था के तहत आपूर्ति की जाने वाली विदेशी मुद्रा की मात्रा का खुलासा नहीं किया है और न ही व्यक्तिगत लेनदेन पर किसी सीमा का विवरण दिया है।  तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों को कच्‍चे तेल के आयात और अन्‍य विदेशी खर्चों के भुगतान के लिए अमेर‍िकी डॉलर की आवश्‍यकता होती है. कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से डॉलर में होता है, इसलिए रुपये-डॉलर विनिमय दर में उतार-चढ़ाव आयात की लागत और कंपनियों की वित्तीय आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकता है।   2. विदेशी करेंसी डेरिवेटिव के लिए लोअर लिमिट   केंद्रीय बैंक ने कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया है. संशोधित सीमा रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर भी लागू होती है. इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े डेरिवेटिव पोजीशन, जैसे आयात भुगतान या निर्यात सपोर्टिव हों, न कि मुख्य रूप से सट्टेबाजी के उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाएं।  3. नया 20% विदेशी करेंसी रिजर्व रिस्‍क आरबीआई ने 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेतिक मूल्य वाले पात्र रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए विदेशी मुद्रा रिस्‍क रिजर्व (एफईआरआर) की आवश्यकता शुरू की है. रजिस्‍टर्ड डीलरों को हर पात्र लेनदेन के रुपये मूल्य के 20% के बराबर कैश रिजर्व अमाउंट आरबीआई के पास रखनी होगी. यह आवश्यकता उन कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर लागू होती है, जिनका उपयोग चालू खाता जोखिमों को हेज करने के लिए किया जाता है, जहां यूजर्स रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा खरीदता है।  4. हेजिंग के लिए सख्त डॉक्‍यूमेंटेशन रजिस्‍टर्ड डीलरों को फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट में एंट्री करने वाले यूजर्स से एक वचन पत्र प्राप्त करना और उसे अपने पास रखना होगा, जिसमें यह पुष्टि की गई हो कि उसी रिस्‍क को किसी अन्य डीलर के माध्यम से हेज नहीं किया गया है. इस आवश्यकता का उद्देश्य एक ही तरह के जोखिम की दोहरी हेजिंग को रोकना और बाजार में सुधार करना है।   क्‍या इससे रुपये की गिरावट रुकेगी?  इन उपायों से डॉलर की सट्टा मांग कम हो सकती है और शॉर्ट टर्म अस्थिरता में राहत मिल सकती है. हालांकि, यह कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक डॉलर की गतिविधियों सहित व्यापक कारकों पर निर्भर करेगी. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.60 अरब डॉलर रह गया, जो लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट है। 

Flydubai Flight Case: भारतीय कैप्टन पर हमले की जांच NIA को सौंपी गई, केंद्र का बड़ा फैसला

  नई दिल्ली फ्लाईदुबई की फ्लाइट संख्या 1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार पर हुए हमले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी. केंद्र सरकार ने एजेंसी को केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है. आरोप है कि विमान के ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने फ्लाइट को हाईजैक करने या क्रैश कराने की कोशिश के दौरान कैप्टन पर हमला किया था।  केंद्र सरकार को मिली जानकारी के अनुसार, फ्लाईदुबई की यह फ्लाइट 30 सितंबर 2026 को सुबह 7:05 बजे दुबई से रवाना हुई थी. विमान में 174 यात्री और क्रू के 6 सदस्य सवार थे. भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार और ओमानी फर्स्ट ऑफिसर विमान उड़ा रहे थे. सुबह करीब 9:21 बजे जॉर्डन और सऊदी अरब की सीमा के पास विमान तेजी से नीचे आने लगा और फिर सऊदी हवाई क्षेत्र की ओर मुड़ गया।  यात्रियों के मुताबिक, उड़ान के दौरान ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर दिया. आरोप है कि वह विमान को हाईजैक करने या उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश कर रहा था. इस दौरान यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने उसे काबू कर लिया. हमले में कैप्टन के सिर और हाथों पर गहरे कट लगे।  इसके बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के अन्य पायलटों ने कमान संभाली और विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट पर उतार दिया. विमान की लैंडिंग सुबह 10:45 बजे हुई. इसके बाद सऊदी अधिकारियों ने ओमानी फर्स्ट ऑफिसर को गिरफ्तार कर लिया।  NIA को सौंपी गई जांच केंद्र सरकार के मुताबिक, इस मामले में एंटी हाईजैकिंग एक्ट, 2016 की धारा 3 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 16 और धारा 15(1)(a) के तहत अपराध बनते हैं. ये राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत निर्धारित अपराधों में शामिल हैं. सरकार ने मामले की गंभीरता, इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों और किसी बड़ी साजिश का पता लगाने की जरूरत को देखते हुए जांच NIA को सौंपने का फैसला किया है. केंद्र ने एजेंसी को केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। 

मध्यप्रदेश में 27% OBC आरक्षण क्यों नहीं हुआ लागू? हाईकोर्ट ने फैसले में उठाए ये 5 अहम सवाल

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक पिछड़ेपन, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व और आरक्षण बढ़ाने के लिए पेश किए गए आंकड़ों सहित कई अहम पहलुओं पर विचार किया। अदालत के 159 पृष्ठों के आदेश में स्पष्ट हुआ कि किसी वर्ग को आरक्षण देने का अधिकार और आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने का औचित्य दो अलग-अलग सवाल हैं। इन्हीं कसौटियों पर 27 प्रतिशत आरक्षण को उचित ठहराने के लिए प्रस्तुत आधारों की समीक्षा की गई। मामले में याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक सीमा का हवाला देते हुए आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को चुनौती दी, जबकि राज्य सरकार और आरक्षण समर्थकों ने सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा राज्य के नीतिगत अधिकारों के पक्ष में दलीलें रखीं। अंततः हाई कोर्ट ने 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कायम रखी और नियुक्तियों से जुड़े मामलों में भी निर्देश दिए। आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बनी प्रमुख आधार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलील थी कि इससे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को भी जोड़ने पर कुल आरक्षण का अनुपात और बढ़ जाता है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे आगे बढ़ने के लिए असाधारण परिस्थितियों और ठोस संवैधानिक आधार का होना जरूरी है। केवल किसी वर्ग की आबादी अधिक होने के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। सरकार ने सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का दिया तर्क राज्य सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण के फैसले का बचाव करते हुए ओबीसी वर्ग की सामाजिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में उसकी भागीदारी को आधार बनाया। सरकार का पक्ष था कि पिछड़े वर्गों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है और इसके निर्धारण में राज्य की नीतिगत भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर भी संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया। सरकार की ओर से तर्क रखा गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत दिया गया है। इसलिए इसकी संवैधानिक स्थिति का परीक्षण अन्य आरक्षण प्रावधानों से जुड़े सवालों के समान आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता ने भी सरकार का पक्ष रखा था। भाजपा सरकार से पूछा सवाल चौधरी ने मध्यप्रदेश के सीएम और भाजपा सरकार से सवाल पूछा है कि वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार OBC के 27% आरक्षण के पक्ष में मजबूत कानूनी आधार क्यों नहीं तैयार कर सकी? अगस्त 2025 में सर्वदलीय बैठक में 27% आरक्षण के समर्थन पर सहमति बनी थी, तो उस सहमति को कानूनी परिणाम में बदलने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? जिन युवाओं ने परीक्षाएं दीं, मेहनत की और वर्षों तक नियुक्तियों का इंतजार किया, उनके भविष्य की जवाबदेही कौन लेगा? समीक्षा करें सरकार OBC आरक्षण कोई राजनीतिक एहसान नहीं, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का सवाल है। सरकार को अब बयानबाजी से आगे बढ़कर फैसले के कानूनी पहलुओं की समीक्षा करनी चाहिए, उपलब्ध वैधानिक विकल्पों पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए और लंबित भर्तियों पर स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना जनता के सामने रखनी चाहिए। OBC को केवल आश्वासन नहीं, अधिकारों की प्रभावी पैरवी चाहिए। युवाओं को भाषण नहीं, अपने भविष्य का जवाब चाहिए। ओबीसी मुद्दे पर क्या बोली एमपी कांग्रेस इधर, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकारों की मंशा और ओबीसी आरक्षण को लेकर उनकी भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार की कमजोर पैरवी और आधी-अधूरी जानकारी प्रस्तुत किए जाने के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी जी ने 8 अक्टूबर 2025 को दिल्ल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात की थी और सरकार को समय रहते चेताया था। लेकिन, सरकार नहीं जागी और आखिरकार 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर माननीय हाईकोर्ट का फैसला सामने आया। ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा में सरकार की विफलता ने भाजपा की नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेश की जनता जवाब चाहती है। ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए सरकार ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? आरक्षण समर्थकों ने पिछड़ेपन और अवसरों पर दिया जोर 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पक्षकारों ने दलील दी कि ओबीसी वर्ग की सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में उसकी भागीदारी का आकलन किए बिना आरक्षण का प्रतिशत तय नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय की संवैधानिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल सभी को समान अवसर देने की औपचारिक घोषणा करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्गों को वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना भी है। आरक्षण समर्थकों ने इसी आधार पर राज्य सरकार के निर्णय को उचित ठहराने का प्रयास किया। पुरानी रिपोर्ट और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल मामले में आरक्षण बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए आंकड़ों और आयोगों की रिपोर्ट की प्रासंगिकता भी अहम मुद्दा बनी। वर्ष 2019 के निर्णय में वर्ष 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर निर्भरता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पुरानी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण बढ़ाने के औचित्य पर प्रश्न खड़े किए गए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श नहीं किए जाने का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान सामने आया। इसके अलावा, बाद में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट का भी परीक्षण हुआ। हाई कोर्ट ने रिपोर्ट के सीमित नमूने और तुलनात्मक आधार की कमी को ध्यान में रखते हुए उसे 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त ठोस आधार नहीं माना। हाई कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला हाई कोर्ट ने आरक्षण देने के अधिकार और उसके प्रतिशत में वृद्धि के औचित्य के बीच अंतर किया। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर सरकारी सेवाओं में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व को पर्याप्त माना और आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियां … Read more

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार बरकरार, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा संकेत

नई दिल्‍ली  वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक सुस्ती और चीन जैसे दिग्गज देशों की घटती रफ्तार के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के कदम रुकने वाले नहीं हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाला देश बना रहेगा. जहां एक तरफ पड़ोसी देश चीन की विकास दर धीमी पड़ रही है, वहीं भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के दम पर नए रिकॉर्ड बनाने को तैयार है।  यूएनसीटीएडी (UNCTAD) की ‘व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र’ के मुताबिक, कच्चे तेल के भारी आयात और वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार जारी रहेगी. रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 (वित्त वर्ष 2027) में भारत की जीडीपी 7.3 फीसदी की दर से बढ़ेगी, जबकि 2027 (वित्त वर्ष 2028) में यह 6.8 फीसदी रह सकती है।  चीन-इंडोनेशिया काफी पीछे, एशिया का मुख्य इंजन बना भारत रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अकेले एशिया का योगदान 59 फीसदी रहने का अनुमान है. भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है तो चीन की अर्थव्‍यवस्‍था महज 4.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी. इंडोनेशिया आर्थिक विकास दर 5.2 फीसदी रहने का अनुमान है।  घरेलू मांग भारत की सबसे बड़ी ताकत भारतीय बाजार की सबसे बड़ी खूबी इसका अंदरूनी उपभोग है, जो बाहरी झटकों को आसानी से झेल लेता है. रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत की घरेलू खपत 6.9 फीसदी और अगले वर्ष 5.6 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है. हालांकि, बढ़ती लागत और महंगाई के चलते पिछले वर्षों की तुलना में खत की गति में हल्की नरमी देखी जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद यह आंकड़ा अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और स्थिर है।  भारत के डिजिटल मॉडल (DPI) का दुनियाभर में बजा डंका संयुक्त राष्ट्र ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और यूपीआई आधारित भुगतान मॉडल की सराहना की है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एक प्रमुख तकनीकी केंद्र के रूप में भी उभर चुका है. भारत ने अपनी डिजिटल तकनीक साझा करने के लिए 23 देशों के साथ समझौते किए हैं, जिनमें से श्रीलंका और यूएई सहित आठ देशों में तकनीकी सहयोग पहले से संचालित हो रहा है. इसके जरिए भारत क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक एकीकरण को नई दिशा दे रहा है।  विकासशील देशों की औसत चाल सुस्त संयुक्‍त राष्‍ट्री की इस रिपोर्ट में दुनिया भर के आर्थिक हालात को लेकर चिंता भी जताई गई है. यूएनसीटीएडी के अनुसार, 2026 में वैश्विक वृद्धि दर गिरकर 2.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2.9 फीसदी थी. वहीं विकासशील देशों की औसत वृद्धि दर भी 4.7 फीसदी से घटकर 4 फीसदी पर आ सकती है। 

राज्यसभा सांसद ने कहा- सपा अध्यक्ष चुनाव के समय मंदिर, तिलक और धर्म की बातें करते हैं, बाकी समय तुष्टिकरण की राजनीति

रायपुर  ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था। किसे कितनी मिली अवैध रकम रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप। देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण। चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए। जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया। विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य। शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए। व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है। चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका 1. राम गोपाल अग्रवाल राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है। 2. देवेन्द्र सिंह यादव भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है। 3. विनोद तिवारी विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है। 4. रामप्रताप सिंह जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। 5. चंद्रदेव प्रसाद राय तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है। 6. जयप्रकाश मौर्य तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है। 7. पियूष कुमार साहू पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। 8. जोगेन्दर सिंह जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका … Read more

‘जो मैं कहूं, वही सही’ की सोच लोकतंत्र के लिए चुनौती, राहुल गांधी पर नरेश चंद्र का निशाना

रायपुर  भाजपा विधि प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने कांग्रेस का नाम लिए बिना निर्वाचन आयोग के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है। इसकी मजबूती चुनावी जीत-हार से ही नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय, निर्वाचन आयोग, संसद और जांच एजेंसियों जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर नागरिकों तथा राजनीतिक दलों के भरोसे से तय होती है। गुप्ता के अनुसार, हाल के वर्षों में विरोध के बदलते तौर-तरीकों ने यह चिंता बढ़ाई है कि क्या सत्ता की होड़ में राष्ट्रहित और संस्थागत मर्यादा पीछे छूट रही है। बतादें कि कांग्रेस लगातार प्रदर्शन कर रही है। राज्य से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन किया। मतभेद की गरिमापूर्ण परंपरा गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति में मतभेद और विरोध की एक गरिमापूर्ण परंपरा रही है। जनसंघ और भाजपा के दौर से लेकर पूर्ववर्ती सरकारों के समय तक विपक्षी दल धरने-प्रदर्शन करते थे, लेकिन वे आम तौर पर सांकेतिक और अनुशासित होते थे। नेता निर्धारित स्थलों पर बैठकर वैचारिक तथा संसदीय भाषा में अपनी बात रखते और कानून का सम्मान करते हुए सांकेतिक गिरफ्तारियां देते थे। प्रशासनिक व्यवस्था की साख प्रभावित उनके मुताबिक, अब विरोध-प्रदर्शनों के दौरान संसद, अति-सुरक्षित परिसरों या प्रधानमंत्री आवास की ओर उग्र मार्च, सुरक्षा बलों और पुलिस अधिकारियों से धक्का-मुक्की तथा सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने की कोशिशें देखने को मिल रही हैं। गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री, मंत्री और सांसद जैसे जनप्रतिनिधि जब कानून-व्यवस्था को चुनौती देते दिखते हैं, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की साख प्रभावित होती है। विश्वसनीयता कम करने की कोशिश उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए जा रहे सवालों को भी चिंताजनक बताया। गुप्ता के अनुसार, सर्वोच्च अदालत अंतरिम राहत देने से मना करे या साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दे, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। इसी तरह निर्वाचन आयोग, सीबीआई, ईडी और सीएजी पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत काम करने के बावजूद एकतरफा होने के आरोप लगाकर उनकी विश्वसनीयता कम करने की कोशिश होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है असर गुप्ता ने भारतीय राजनीति के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जब व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं देशहित से ऊपर रखी जाती हैं, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ता है। उन्होंने 1946 के सत्ता हस्तांतरण के दौर का हवाला दिया, जब उनके अनुसार प्रांतीय कमेटियों के स्पष्ट बहुमत, जो सरदार पटेल के पक्ष में था, को नकारकर पंडित जवाहरलाल नेहरू की इस जिद को प्राथमिकता दी गई कि वे किसी अन्य के अधीन काम नहीं करेंगे। गुप्ता ने इसे राष्ट्रहित के ऊपर व्यक्तिगत पद को रखने का उदाहरण बताया। राहुल का हठधर्मी व्यवहार उन्होंने कहा कि आठ दशकों बाद वही प्रवृत्ति राहुल गांधी के राजनीतिक रवैये में दिखाई देती है। उनके अनुसार, नेता प्रतिपक्ष का महत्वपूर्ण संवैधानिक पद मिलने के बावजूद राहुल गांधी का व्यवहार “जो मैं कहूं, वही सही है” वाली हठधर्मिता दर्शाता है। गुप्ता ने आरोप लगाया कि चुनी हुई सरकार के अस्तित्व को खारिज करना, संसद के काम में लगातार गतिरोध पैदा करना और प्रतिकूल न्यायिक फैसलों के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाना देश में वैचारिक तथा सामाजिक अराजकता को बढ़ावा देता है। उनके मुताबिक, हालिया घटनाक्रम राजनीतिक हताशा और संवैधानिक प्रक्रियाओं की अवहेलना को उजागर करते हैं।  

दिवाली से पहले मेट्रो यात्रियों को सौगात, भोपाल और इंदौर में टिकट पर 25% डिस्काउंट

इंदौर/भोपाल   भारी भरकम खर्च और यात्रियों की बेरुखी से जूझ रही मेट्रो रेल कंपनी ने त्योहार के अवसर पर ट्रेन के टिकट पर 25% तक की छूट देने का ऐलान किया है. इतना ही नहीं अब ट्रेन के ग्रुप टिकट लेने की प्रक्रिया को भी आसान किया गया है. नवरात्रि के दिन से यह ऑफर शुरू हो रहा है।  त्योहार के अवसर पर डिस्काउंट का ऐलान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने यात्रियों को मेट्रो यात्रा पर सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट पर त्योहारों के अवसर पर डिस्काउंट का ऐलान किया है. इस विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट व्यवस्था के तहत यात्रियों को मौजूदा छूट के अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा. यह व्यवस्था 11 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक लागू होगी।  ग्रुप टिकट की सुविधा को भी यात्रियों के लिए आसान बनाया गया है. पहले ग्रुप टिकट लेने के लिए कम से कम 8 यात्रियों का होना आवश्यक था, जिसे अब घटाकर केवल 2 यात्री कर दिया गया है. इससे परिवार और दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले यात्री भी ग्रुप टिकट का लाभ ले सकेंगे. 20 रुपए के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी।  रिटर्न टिकट पर 30% और ग्रुप टिकट पर कुल 35% छूट     सिंगल जर्नी टिकट (SJT): टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट.     रिटर्न जर्नी टिकट (RJT): पहले मिलने वाली 5 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 30 प्रतिशत छूट.     ग्रुप टिकट (GT): पहले मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 35 प्रतिशत छूट. नई छूट से यात्रियों को होगा दोहरा फायदा MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर यात्रियों को पहले से ही रिचार्ज राशि के अनुसार 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बोनस राशि का लाभ दिया जा रहा है. इसके अंतर्गत ₹200 से ₹499 तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, ₹500 से ₹999 तक पर 10 प्रतिशत, ₹1000 से ₹1499 तक पर 12 प्रतिशत और ₹1500 से ₹2000 तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है।  अब इस मौजूदा ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल टिकट छूट का लाभ मिलने से यात्रियों को टिकट पर अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हो सकता है. इस पहल के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो में यात्रियों को देश की अन्य मेट्रो सेवाओं की तुलना में आकर्षक अतिरिक्त किराया छूट का लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है. डिजिटल टिकटिंग और ई-वॉलेट का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से लाभदायक होगी।      डिजिटल टिकटिंग और कैशलेस भुगतान से स्मार्ट यात्रा भोपाल एवं इंदौर मेट्रो में यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन प्रणाली पहले से संचालित है। यात्री MPMRCL के मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट प्राप्त कर सहज, सुरक्षित और कैशलेस यात्रा कर सकते हैं. टिकट का भुगतान यूपीआई, क्यूआर कोड, ई-वॉलेट और एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा सकता है।  इस डिजिटल व्यवस्था से टिकट खरीदने की प्रक्रिया सरल और तेज होती है और नकद भुगतान की आवश्यकता भी नहीं रहती. मौजूदा डिजिटल टिकटिंग और ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल छूट यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। 

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर कंगना रनौत का बयान, राहुल गांधी पर चुनाव नतीजे स्वीकार न करने का आरोप

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन चालू है. पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रही है. उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है. गंभीर मुद्दे पर कंगना रनौत ने अपनी राय रखी है. उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है. जानते हैं कि प्रदर्शन पर कंगना का क्या कहना है।  कंगना ने साधा निशाना   मीडिया संग बातचीत में कंगना रनौत ने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन पर कहा- देखिए जो देशद्रोही, आतंकी शक्तियां और जो इंटरनेशनल साजिशें हैं. वो हमारे देश के लिए इस वक्त बहुत गंभीर समस्या बन चुकी है. क्योंकि किसी ना किसी तरीके से बहाना चाहे कोई भी हो. देश को और नागरिकों किसी ना किसी तरह की समस्या हो रही है।  वो कहती हैं- लेकिन जैसे आज हम आयोध्या जा रहे हैं. श्रीराम जी का आशीर्वाद लेने. जब श्रीराम और हनुमान जी का आशीर्वाद हमारे साथ है. देखिए कितनी शक्तियां हमें तोड़ने के लिए खड़ी हैं, लेकिन सभी भारतवासी एक-दूसरे के साथ खड़े हैं. कितने लोग जो हैं वो इनका पर्दाफाश करने में लगे हुए हैं. देशद्रोही ताकतों का. मैं तो कहती हूं कि पुलिस छोड़िए लोग ही इन्हें पकड़कर इनकी धुलाई करने वाले हैं. क्योंकि लोग परेशान हैं, क्योंकि आए दिन किसी ना किसी वजह से देश को बंद कर दिया जाता है।  राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कंगना ने कहा कि 'राहुल गांधी का हक बनता है कि वो राष्ट्रपति को मिलकर आपात्तिजनक चीजें बताएं. हमारे क्लास में भी ऐसा होता था, जो स्टूडेंट फेल हो जाते थे, उन्हें लगता था जो पास हो गया है उसके पास दूसरा पेपर आया था. या टीचर ने उनके साथ किसी तरह की दुश्मनी निकाली है. इलेक्शन से लेकर ABVP तक सारी चीजें बीजेपी जीत रहा है. अब राहुल जी कहते हैं कि अंगूर खट्टा है. पूरा देश हंस रहा है।  प्रदर्शन की मांग क्या है CJP और कई छात्र संगठनों का ये प्रदर्शन वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं के खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के सवालों का जवाब दें।  CJP ने 7 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की सूचना दी थी. लेकिन पुलिस ने कहा कि आवेदन कार्यक्रम से बहुत करीब किया गया और पिछले प्रदर्शन में शर्तों का पालन नहीं होने के कारण इजाजत नहीं दी जा रही है।