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23 साल पुराने आदेश पर सवाल, हिंदू पक्ष ने पूछा—ना वजूखाना, ना मीनार, फिर मस्जिद कैसे?

धार  मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अदालत में मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।  एएसआई के 2003 के आदेश को दी चुनौती हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि एएसआई का यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी संरक्षित स्मारक या तीर्थ स्थल का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। पूजा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि एएसआई के आदेश के आधार पर लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का उल्लंघन करती है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष के तर्कों का खंडन करते हुए कहा कि उसके द्वारा दायर जनहित याचिका कोई दीवानी मुकदमा नहीं है। साथ ही हिंदू पक्ष ने यह भी पूछा कि जब उस इमारत में मीनार और वजूखाना दोनों नहीं है तो वह मस्जिद कैसे कहलाएगी। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई की कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 11वीं सदी के इस संरक्षित स्मारक का 'मूल धार्मिक स्वरूप' बहाल करने का निर्देश दे क्योंकि ASI की मौजूदा व्यवस्था से उसके बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने विवादित स्मारक को लेकर ASI के सात अप्रैल 2003 के एक आदेश को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी और स्मारक में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार लगाई। दरअसल ASI के वर्तमान आदेश के अनुसार विवादित परिसर में हर मंगलवार को हिंदुओं और हर शुक्रवार को मुस्लिमों को उपासना की अनुमति दी गई है। जैन ने कहा कि ASI का यह आदेश प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करता है। ASI के आदेश को बुनियाद अधिकार का उल्लंघन बताया विष्णुशंकर जैन ने कहा कि इस कानून के एक प्रावधान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित कोई स्मारक पूजास्थल या तीर्थस्थल है, तो उसका उपयोग उसके स्वरूप के विपरीत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। जैन ने कहा, 'ASI के साल 2003 में दिए गए आदेश के आधार पर जारी व्यवस्था से हमारे उपासना के अधिकारों के साथ ही बुनियादी अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।' सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर विवादित स्मारक के 'मूल धार्मिक स्वरूप' के अनुरूप कार्य करने का वैधानिक दायित्व है। विष्णुशंकर जैन ने दिया मुस्लिम पक्ष के तमाम दलीलों का जवाब जैन ने मुस्लिम पक्ष की इस आपत्ति को खारिज किया कि भोजशाला विवाद को लेकर 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की जनहित याचिका वस्तुतः एक दीवानी मुकदमा है और इसे उच्च न्यायालय की रिट कार्यवाही के बजाय किसी दीवानी अदालत में चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,'यह कोई दीवानी मुकदमा नहीं है और इसमें तथ्यों से संबंधित कोई विवादित प्रश्न नहीं हैं।' मुस्लिम पक्ष ने दिया उपासना स्थल अधिनियम का हवाला मुस्लिम पक्ष का कहना है कि धार का विवादित स्मारक देश की आजादी की तारीख यानी 15 अगस्त 1947 को मस्जिद के रूप में वजूद में था, लिहाजा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के प्रावधानों के तहत इसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता। हालांकि जैन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला पर यह कानून लागू नहीं होता क्योंकि वह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष के वकील ने पूछा- मीनार या वजूखाना नहीं तो मस्जिद कैसे उधर हिंदू पक्ष के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मुस्लिम पक्ष के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि विवादित स्मारक में कोई मीनार या वजूखाना (नमाज से पहले हाथ-मुंह धोने का स्थान) नहीं है, ऐसे में इसे मस्जिद कैसे कहा जा सकता है? तिवारी ने इमारत के जैन मंदिर होने के दावे को भी नकारा साथ ही तिवारी ने भोजशाला के जैन मंदिर होने के दावे को भी गलत बताया और कहा कि यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी। बता दें कि उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।   मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि धार स्थित यह विवादित स्मारक 15 अगस्त 1947 यानी स्वतंत्रता के समय एक मस्जिद के रूप में मौजूद था। इसलिए पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 के तहत इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून भोजशाला परिसर पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष ने कहा- भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं एक अन्य हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष … Read more

नशे की समस्या पर चिंता जताई, सांसद ने मरीजों के बेहतर इलाज और नशा केंद्रों पर दिया जोर

चंडीगढ़  दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है। कुछ मिनटों की देरी जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है। पंजाब में अब समय के साथ चल रही यह जंग लगातार जीती जा रही है, क्योंकि भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत तेज और कैशलेस एंजियोप्लास्टी सेवाएं मरीजों को जरूरत पड़ने पर समय पर यह आपातकालीन इलाज उपलब्ध करवा रही हैं। हार्ट अटैक केवल एक चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति ही नहीं होता, बल्कि यह परिवारों पर आर्थिक बोझ भी डालता है। पहले इलाज के लिए पैसों का प्रबंध करने, जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने और अस्पताल से मंजूरी लेने में परिवारों का कीमती समय बर्बाद हो जाता था। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। स्वास्थ्य कार्ड सिस्टम के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की जांच और आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया, इलाज से पहले भुगतान में होने वाली देरी के बिना, तेजी से पूरी की जा रही है। यह बदलाव विशेष रूप से ‘गोल्डन ऑवर’ — अर्थात हार्ट अटैक के बाद के पहले 60 मिनट — के दौरान कीमती जानें बचाने में निर्णायक साबित हो रहा है। विश्व स्तर पर हृदय संबंधी बीमारियां मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण होती है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जहां इलाज में हुई देरी जानलेवा साबित होती है। पंजाब की स्वास्थ्य प्रणाली अब इस चुनौती से सक्रिय रूप से निपट रही है। राजभर के डॉक्टरों के अनुसार, दिल की बीमारियों के मामले अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आरामदायक जीवनशैली, तनाव, अस्वास्थ्यकर खानपान और डायबिटीज के बढ़ते मामले इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। हालांकि, इसके साथ-साथ हृदय संबंधी बीमारियों के आपातकालीन इलाज तक पहुंच भी पहले से बेहतर हुई है। नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई बैठक में तिवारी ने शहर में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खासकर रिहायशी कॉलोनियों और शहरी गांवों में युवाओं में नशे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। कई महिलाओं ने भी उनसे बच्चों में बढ़ते नशे को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सेक्टर-18 के नशा मुक्ति केंद्र समेत शहर के सभी डी-एडिक्शन सेंटर पूरी तरह सक्षम होने चाहिए, ताकि नशे की लत छोड़ना चाहने वाले लोगों को सही इलाज और मदद मिल सके। साथ ही इलाज का खर्च भी कम रखा जाए। फंड से अस्पतालों में स्थायी सुविधाएं बेहतर करे तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों को मुफ्त इलाज, जांच और इमरजेंसी सेवाएं मिल रही हैं। इससे लोगों खासकर गरीब और जरूरतमंद वर्ग को काफी राहत मिल रही है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का मकसद हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ता इलाज पहुंचाना होना चाहिए। उन्होंने रोगी कल्याण समिति के सदस्यों को निर्देश देते हुए कहा कि समिति के फंड का उपयोग मुख्य रूप से अस्पतालों में स्थायी सुविधाएं विकसित करने पर किया जाए। इसमें नए मेडिकल उपकरण खरीदना, अस्पतालों में अतिरिक्त बेड बढ़ाना, मरीजों के बैठने की बेहतर व्यवस्था करना, भवनों की मरम्मत, नई स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार करना और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना शामिल होना चाहिए। विकास कार्यों में इस्तेमाल हो फंड तिवारी ने कहा कि अस्पतालों के रोजमर्रा के खर्च जैसे बिजली-पानी के बिल, सामान्य रखरखाव, स्टाफ वेतन, अन्य प्रशासनिक खर्च चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार के नियमित बजट से पूरे किए जाने चाहिए, ताकि रोगी कल्याण समिति का फंड विकास कार्यों में इस्तेमाल हो सके। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के सुझाव बैठक में मौजूद समिति के अन्य सदस्यों ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए। सदस्यों ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम खर्च में अच्छी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में डॉक्टरों, दवाइयों और मेडिकल जांच सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए। स्टेट हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के दौरान स्वास्थ्य योजना के तहत कुल 5,054 हृदय संबंधी सर्जरियां की गई हैं। इनमें 5,000 परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए) प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम भी शामिल हैं, जबकि 54 मामलों में पेरिफेरल एंजियोप्लास्टी की गई। इन इलाजों की कुल लागत लगभग 49.6 करोड़ रुपये रही, जिसमें पीटीसीए प्रक्रियाएं संख्या और कुल खर्च दोनों मामलों में सबसे अधिक रहीं। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस योजना का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “अब अधिक मरीज उन स्थितियों से भी बच रहे हैं, जिन्हें पहले लगभग जानलेवा माना जाता था। ऐसे नाजुक समय में स्वास्थ्य कार्ड सिस्टम के कारण इलाज की तेजी ही राज्य के लिए जीवनरक्षक बन रही है।” अस्पतालों के कार्डियोलॉजी विभाग को तेजी से नई जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। आपातकालीन प्रोटोकॉल इस प्रकार सुव्यवस्थित बनाए जा रहे हैं कि हार्ट अटैक के संभावित मरीजों की तुरंत जांच हो सके और प्रशासनिक कार्रवाई में फंसे बिना उन्हें आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जा सके। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और राजिंदरा अस्पताल, पटियाला के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा, “स्वास्थ्य कार्ड लोगों को समय पर इलाज दिलाने में मदद कर रहा है। इलाज के खर्च को लेकर जो हिचकिचाहट पहले होती थी, वह अब काफी हद तक कम हो गई है। पहले कई परिवार इलाज की लागत को लेकर असमंजस में रहते थे, जिसके कारण प्रक्रिया के लिए मंजूरी देने में देरी होती थी।” डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने से यह रुकावट लगभग समाप्त हो चुकी है। यह बदलाव जिलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पहले मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किए जाने के कारण खतरनाक देरी का सामना करना पड़ता था। अब योजना के तहत अधिक अस्पतालों के सूचीबद्ध होने और बेहतर सुविधाओं से लैस होने के कारण कई केंद्र लंबी दूरी तक रेफर किए बिना ही एंजियोप्लास्टी शुरू करने में सक्षम हो गए हैं। 5 हजार हृदय संबंधी सर्जरियां हुईं पंजाब में स्टेट हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों … Read more

धमाके से दो दिन पहले रेकी करने वाला संदिग्ध दिल्ली से पकड़ा गया, जालंधर में थ्री-लेयर चेकिंग

जालंधर पंजाब के जालंधर में BSF पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर 5 मई को हुए धमाके मामले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिससे CIA और दिल्ली पुलिस की टीमें पूछताछ कर रही हैं। शुरुआती जांच में दावा किया गया है कि आरोपी वारदात से पहले दो दिन तक BSF चौक और आसपास के इलाके की रेकी करता रहा। जांच एजेंसियों के मुताबिक संदिग्ध जालंधर से बस में बैठकर दिल्ली पहुंचा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विस्फोट आरोपी ने खुद किया या उसे किसी अन्य व्यक्ति ने विस्फोटक डिलीवर किया था। हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार आरोपी को जालंधर लाकर पूछताछ की जा रही है। CCTV फुटेज से मिला बड़ा सुराग धमाके के तुरंत बाद जालंधर पुलिस को इलाके में लगे CCTV कैमरों से अहम सुराग मिले थे। जांच के दौरान एक युवक धमाके के बाद तेजी से बस स्टैंड की ओर जाते हुए दिखाई दिया था। पुलिस ने बस स्टैंड और रास्ते में लगे कैमरों की फुटेज खंगालकर उसकी मूवमेंट ट्रैक की। दिल्ली में पकड़े गए संदिग्ध से पूछताछ में भी यही जानकारी सामने आई कि वह वारदात के बाद बस से दूसरे शहर गया और फिर दिल्ली में छिप गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है या नहीं। आरोपी वारदात को अंजाम देने के बाद जालंधर बस स्टैंड पहुंचा था और वहां से दूसरे शहर के लिए बस पकड़ी। बाद में दिल्ली जाकर छिप गया। इस मामले में पुलिस ने भी कोई पुष्टि नहीं की, लेकिन बताया जा रहा है कि आरोपी को जालंधर पुलिस कस्टडी में ले आई है। सूत्रों के हवाले से ये भी बताया गया कि सीआईए स्टाफ जालंधर और दिल्ली पुलिस की टीम ने संयुक्त आपरेशन चलाकर संदिग्ध को पकड़ा। ब्लास्ट में इसकी कितनी भूमिका है, इसके बारे में कुछ भी शेयर नहीं किया गया है। बता दें कि 5 मई को जालंधर के बीएसएफ हेडक्वार्टर के बाहर रात 8 बजे विस्फोट हुआ था। इसमें बीएसएफ से पार्सल लेने आए गढ़ा निवासी गुरप्रीत (21) की स्कूटी जल गई थी। शुरूआती जांच में स्कूटी में विस्फोटक का शक जताया गया था। गुरप्रीत को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। अगले दिन रात को उसे छोड़ दिया गया। जालंधर में धमाके के बाद अमृतसर के आर्मी एरिया खासा में विस्फोट हुआ। इस मामले में अभी तक कोई नहीं पकड़ा जा सका है। 2 दिन तक BSF चौक के आसपास रेकी की थी धमाके के बाद ही जालंधर पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से क्लू मिले थे। हालांकि पुलिस ने जांच प्रभावित होने का हवाला देकर कुछ भी जानकारी शेयर करने से मना कर दिया था, लेकिन इतना जरूर पता चला था कि धमाके के बाद एक युवक बस स्टैंड की तरफ भागकर जाता दिखा था। दिल्ली में पकड़े गए संदिग्ध से हुई पूछताछ में भी कुछ ऐसी ही बातें समाने आई है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले 2 दिन तक इलाके की रेकी की थी। धमाके के तुरंत बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने बस स्टैंड और रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस की है। 5 मई को BSF मुख्यालय के बाहर हुआ था धमाका 5 मई की रात करीब 8 बजे जालंधर स्थित BSF पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर धमाका हुआ था। घटना के दौरान गढ़ा निवासी 21 वर्षीय गुरप्रीत अपनी स्कूटी पर पार्सल लेने पहुंचा था। विस्फोट में उसकी स्कूटी जलकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस को स्कूटी में विस्फोटक होने का संदेह हुआ था, जिसके बाद गुरप्रीत को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। हालांकि, अगले दिन पुलिस ने जांच के बाद उसे छोड़ दिया और बाद में क्लीन चिट दे दी। गुरप्रीत ने बयान में कहा था कि वह केवल पार्सल लेने गया था और उसी दौरान धमाका हो गया। पंजाब के कैंट इलाकों में सुरक्षा कड़ी जालंधर धमाके और अमृतसर के खासा आर्मी एरिया में हुए दूसरे विस्फोट के बाद पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पाकिस्तान सीमा से करीब 550 किलोमीटर लगने वाले पंजाब के सभी कैंटोनमेंट क्षेत्रों में थ्री-लेयर चेकिंग लागू की गई है। जालंधर कैंट, पठानकोट और अन्य सैन्य इलाकों में अब हर वाहन और व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। आर्मी, पंजाब पुलिस और डिफेंस सिक्योरिटी स्टाफ संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं। बिना पहचान पत्र किसी भी नागरिक को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही। संसारपुर, कुक्कड़ पिंड और धोगड़ी जैसे इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। राज्यसभा सांसद साहनी ने पीड़ित युवक की मदद का ऐलान किया धमाके में स्कूटी खोने वाले डिलीवरी बॉय गुरप्रीत की मदद के लिए राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी आगे आए हैं। उन्होंने गुरप्रीत के पिता कश्मीर सिंह से फोन पर बातचीत कर नई स्कूटी देने का भरोसा दिलाया। सांसद ने कहा कि गुरप्रीत जिस मॉडल की स्कूटी चाहता है, उसकी जानकारी उनके कार्यालय को भेज दी जाए। साहनी ने यह भी कहा कि अगर गुरप्रीत डिलीवरी का काम जारी रखना चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वहीं अगर वह कोई नया कौशल सीखना चाहता है तो उनकी सन फाउंडेशन उसे स्किल ट्रेनिंग भी देगी। इस घोषणा के बाद परिवार ने सांसद का आभार जताया है। पार्सल देने आए युवक को पुलिस ने क्लीन चिट दी घटना के बाद पुलिस ने धमाके में डैमेज स्कूटी मालिक गुरप्रीत को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। एक दिन बाद गुरप्रीत को छोड़ दिया गया था। गुरप्रीत ने पुलिस को बताया था कि वह केवल पार्सल लेने के लिए वहां आया था। इसी दौरान धमाका हो गया। पुलिस ने युवक की गतिविधियों और बयान की जांच के बाद उसे क्लीन चिट दी है। पंजाब के सभी कैंट में थ्री लेयर चेकिंग साढ़े 500 किलोमीटर बॉर्डर शेयर करने वाले पंजाब में अचानक धमाकों के बाद सभी कैंटोनमेंट में सिविलियन की एंट्री पर जांच कड़ी हो गई है। जालंधर, पठानकोट सहित सभी कैंटोनमेंट एरिया … Read more

नोरोवायरस का हमला, 115 यात्रियों की तबीयत बिगड़ी, 3116 लोगों से भरी क्रूज शिप प्रभावित

बैंकॉक कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर नोरोवायरस का बड़ा संक्रमण फैल गया है. इस जहाज पर कुल 3116 यात्री सवार थे, जिनमें से 102 यात्रियों और 13 क्रू सदस्यों को बीमारी हो गई. कुल मिलाकर 115 लोग इस संक्रमण की चपेट में आए हैं. यह यात्रा 28 अप्रैल से 11 मई तक की थी, जो फोर्ट लॉडरडेल से शुरू होकर पोर्ट कैनावेरल पर खत्म होने वाली है।  यात्रा के दौरान जहाज अरूबा, बोनेर, प्यूर्टो रिको और बहामास जैसे सुंदर स्थानों पर रुका था. सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, बीमारी के मुख्य लक्षण उल्टी और दस्त था. प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने इसे पेट संबंधी बीमारी बताया है।  नोरोवायरस क्या है और यह कैसे फैलता है? नोरोवायरस एक संक्रामक वायरस है जो पेट और आंतों को संक्रमित करता है. यह तेजी से उल्टी और दस्त पैदा करता है. यह वायरस बंद जगहों और लोगों के संपर्क वाली जगहों पर तेजी से फैलता है. क्रूज शिप जैसी जगहें खासतौर पर जोखिम भरी होती हैं क्योंकि यहां हजारों यात्री और कर्मचारी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, एक ही भोजन का सेवन करते हैं. सामान्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं।  संक्रमित व्यक्ति के हाथों, खाने-पीने की चीजों, पानी या छुई हुई सतहों के जरिए यह वायरस दूसरों तक आसानी से पहुंच जाता है. क्रूज शिप पर होने वाली पेट की बीमारियों का सबसे आम कारण नोरोवायरस ही है।  इस यात्रा में क्या हुआ? यह प्रकोप पूरी यात्रा के दौरान धीरे-धीरे फैला. सभी यात्री एक साथ बीमार नहीं हुए, बल्कि केस पूरे सफर में लगातार बढ़ते रहे. जब बीमार लोगों की संख्या कुल यात्रियों के 3 प्रतिशत से अधिक हो गई, तब CDC को सार्वजनिक सूचना जारी करनी पड़ी. स्वास्थ्य अधिकारी अब जहाज का पूरा निरीक्षण कर रहे हैं. वेसल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत गहन जांच चल रही है।  कंपनी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे जहाज पर सख्त सफाई और डिसइंफेक्शन बढ़ा दिया है. बीमार यात्रियों और क्रू सदस्यों को अलग-अलग रखा गया है. उनके स्टूल सैंपल लेकर जांच की जा रही है. CDC के साथ मिलकर हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।  बीमारी के लक्षण क्या हैं? नोरोवायरस संक्रमण के प्रमुख लक्षण अचानक शुरू होने वाली उल्टी और पानी जैसे दस्त हैं. इसके साथ पेट में दर्द, जी मिचलाना, हल्का बुखार, सिरदर्द और शरीर में कमजोरी भी हो सकती है. ज्यादातर मामलों में ये लक्षण 1 से 3 दिन तक रहते हैं. ज्यादातर लोग बिना किसी गंभीर समस्या के ठीक हो जाते हैं।  हालांकि, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इस प्रकोप में प्रभावित लोगों को हल्की बीमारी बताई गई है।  क्रूज शिप पर नोरोवायरस क्यों फैलता हैं? क्रूज शिप बंद और भीड़-भाड़ वाली जगह होती है, जहां एक संक्रमित व्यक्ति पूरे समूह को आसानी से संक्रमित कर सकता है. अक्सर कोई यात्री बिना लक्षण दिखे जहाज पर चढ़ जाता है. फिर बुफे खाना, स्विमिंग पूल, लिफ्ट, हैंड्रेल जैसी साझी चीजों के जरिए वायरस फैलने लगता है।  अमेरिका में हर साल लाखों लोग नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं, लेकिन क्रूज शिप वाले मामले कुल आंकड़ों का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं. फिर भी इनकी चर्चा ज्यादा होती है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ प्रभावित होते हैं।  प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने कहा कि उन्होंने पूरे जहाज को अच्छी तरह साफ किया. पूरे सफर के दौरान अतिरिक्त सैनिटाइजेशन जारी रखा. हाथ धोने, सैनिटाइजर इस्तेमाल करने और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है. कंपनी CDC के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।  नोरोवायरस कितना खतरनाक है? नोरोवायरस आमतौर पर जानलेवा नहीं होता. ज्यादातर लोग कुछ दिनों में आराम से ठीक हो जाते हैं. गंभीर जटिलताएं बहुत कम होती हैं. वे भी मुख्य रूप से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में देखी जाती हैं. इस प्रकोप में भी ज्यादातर मामलों में स्थिति हल्की बताई गई है. यात्रा के दौरान यात्रियों में तनाव और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। 

भगवंत मान ने किया जोरदार बयान, कहा- भाजपा की ED ने अरोड़ा के घर मारा छापा

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora) के घर ईडी की छापेमारी को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन पंजाब दबाव में आने वाला नहीं है। भगवंत मान ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, “आज फिर से भाजपा की ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है। एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार भाजपा की ईडी उनके घर आई है। फिर भी उन्हें कुछ नहीं मिला।” उन्होंने आगे कहा, “मैं मोदी जी को बताना चाहता हूं कि पंजाब गुरुओं की भूमि है। औरंगजेब भी इसे झुका नहीं सका। यह भगत सिंह की भूमि है, जिन्होंने अंग्रेजों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया, इसलिए पंजाब मोदी की चालों के आगे कभी नहीं झुकेगा।” मुख्यमंत्री ने भाजपा और ईडी के बीच “अनैतिक गठबंधन” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब इस राजनीति का जवाब देगा। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि शनिवार सुबह ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर छापेमारी करने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई थी। बीजेपी पंजाब में भी खेल रही वहीं खेल  मुंख्‍यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "आज फिर ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है. एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार भाजपा की ED उनके घर आई है. फिर भी उन्हें कुछ नहीं मिला. पंजाब गुरुओं की भूमि है, औरंगजेब भी इसे झुका नहीं सका. यह भगत सिंह की भूमि है, जिन्होंने अंग्रेजों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया. इसलिए, पंजाब विरोधियों की चालों के आगे कभी नहीं झुकेगा. पंजाब में भी वही हो रहा है, जो BJP पूरे देश में काम कर रही है. बीजेपी प्रवर्तन निदेशालय, चुनाव आयोग जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर रही है. पंजाब अब बीजेपी के निशाने पर है. पहले अशोक मित्तल के घर और यूनिवर्सिटी पर रेड, 2 दिन रेड और तीसरे दिन वो बीजेपी में शामिल हो गए. आज सुबह संजीव अरोड़ा के घर पर रेड पड़ रही है. इस महीने में 2 बार आए, कुछ नहीं मिला, लेकिन लोगों को डरा-धमकाकर शामिल करवा रहे हैं।  पिछले महीने भी ठिकानों पर दबिश दी थी  करीब 20 दिन पहले भी मंत्री संजीव अरोड़ा और उनके 2 पार्टनर के लुधियाना और जालंधर के ठिकानों पर ED ने रेड की थी. अधिकारियों ने बताया था कि संजीव अरोड़ा पर अपने राजनीतिक प्रभाव के जरिए पंजाब में अवैध सट्टेबाजी (बेटिंग) संचालकों को संरक्षण देने का संदेह है, ताकि उनके मुनाफे में हिस्सा लिया जा सके. उन पर यह भी आरोप था कि वह अपनी कंपनियों और कई एंट्री ऑपरेटरों का इस्तेमाल कर सट्टेबाजों के बेहिसाब पैसे को वैध निवेश में बदल रहे हैं. वह मनी लॉन्ड्रिंग में सहायता कर रहे थे।  अधिकारियों के अनुसार, संजीव अरोड़ा की कंपनियां कई फर्जी निर्यात बिल बुक करने, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फंड की राउंड-ट्रिपिंग करने और नॉन-एग्जिस्टेंट जीएसटी संस्थाओं से फर्जी खरीदारी दिखाने के मामले में भी जांच के दायरे में हैं।  अब कानून वापस नहीं होगा पंजाब के लोग बेअदबी कानून के साथ सहमत है, लेकिन सिर्फ बादल परिवार ही ऐसा है जो विरोध कर रहा है। इसका कारण यह है कि परिवार पहले खुद बेअदबी की घटना में संलिप्त रहा है। पंजाब में क्या कोई नया पंथ बादल पंथ चलाया जा रहा है। अब कानून वापस नहीं होगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। कोई पत्थर दिल होगा जो इस कानून का विरोध करेंगा। ED, CBI का भाजपा ने किया राजनीतिकरण मान ने कहा कि पूरे देश में भाजपा के काम करने का यही तरीका है। अब वह ईडी, सीबीआई, इनकम टेक्स, चुनाव आयोग का इस्तेमाल करेंगे। इन विभागों का भाजपा ने राजनीतिकरण कर दिया है। भाजपा इन्हें लंबे समय से इसी तरह से बरत रही है। महाराष्ट्र, बिहार, यूपी, वेस्ट बंगाल आदि राज्यों में भी इसका इस्तेमाल इसी तरह से किया गया है। ED रेड का मतलब भाजपा में आ जाओ सब कुछ माफ मान ने कहा कि अब पंजाब में चुनाव आने वाले हैं। ED रेड का मतलब यही है कि भाजपा में आ जाओ फिर सब कुछ माफ है। कुछ दिन पहले अशोक मित्तल के घर ED ने रेड की थी। वह भाजपा में आए तो रेड खत्म उन्हें Y सुरक्षा देकर भाजपा ने सम्मानित कर दिया। संजीव अरोड़ा को डराया जा रहा है अब संजीव अरोड़ा के घर रेड की गई है। पहले भी अरोड़ा के रेड की थी कुछ नहीं मिला था। अब भी कुछ नहीं मिलेगा। संजीव अरोड़ा को डराया जा रहा है कि आपके कारोबार बंद कर देंगे अन्यथा भाजपा में आ जाओ। यह सब पंजाब में नहीं चलेगा। पंजाबी डरने वाले नहीं है। एक बार ही मोदी जी ने यू-टर्न लिया और माफी मांगी थी जब तीनों काले कानूनों को रद्द करना पड़ा था। उस समय भी उन्हें पंजाबियों ने झुकाया था। उसी बात का मोदी जी दिल में दर्द रखे बैठे हैं। कभी कहते हैं चंडीगढ़ हम अलग से यूटी बना देंगे। उसका राज्यपाल अलग बना देंगे। कभी कहते हैं कि पंजाब यूनिर्वसिटी हमारी है। कभी कहते हैं कि भाखड़ा पर डेंम सीआईएफ लगाकर पानी हरियाणा को देंगे। कभी कहते हैं धान नहीं उठानी। कभी पंजाब की झांकी नहीं 26 जनवरी को दिखानी। आरडीएफ का पैसा नहीं देना। किस मुंह से वोट मांगने अब आएंगे। मोदी की नीरव मोदी और विजय माल्या के साथ है तस्वीरें मान ने कहा कि मैं ईडी के इस्तेमाल की सख्त शब्दों में निंदा करता हूं। कुछ दिन पहले एक कारोबारी पर रेड की और अमन अरोड़ा का नाम उससे जोड़ दिया। अमन अरोड़ा की कई लोगों के साथ तस्वीरें हैं। किसी के साथ तस्वीर खिंचवाने से पहले उसकी आईडी नहीं पूछ सकते। ऐसे तो मोदी जी की नीरव मोदी या विजय माल्या के साथ तस्वीरें है। बंगाल में अभी भाजपा ने शपथ ग्रहण करना है, उससे पहले ही पूरे बंगाल में आग लगी पड़ी है। दो समुदायों … Read more

क्रिकेट और राजनीति में मुश्किलें: यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा जांच के दायरे में

नई दिल्ली  भारतीय टेस्ट टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और महिला टीम की तूफानी ओपनर शेफाली वर्मा मुश्किल में घिरते हुए नजर आ रहे हैं। इन दोनों को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने नोटिस भेजा है। नाडा ने दोनों खिलाड़ियों को ये नोटिस डोप टेस्ट नहीं देने को कारण भेजा है। दोनों ही खिलाड़ियों ने नाडा को अपने दिए गए ठिकानों पर टेस्ट के लिए न मिलने को लेकर नोटिस भेजा है। इस संबंध में दोनों को अपनी सफाई देने का मौका दिया जाएगा। 12 महीने में अगर खिलाड़ी तीन बार व्हेयर अबाउट फेल्योर टेस्ट को तीन बार मिस कर देता है तो उसे डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी माना जाता है। इसके बाद नाडा के पैनल के सामने खिलाड़ी को अपनी सफाई देनी पड़ती है। अगर इसमें वह असफल होता है तो फिर दो साल का बैन लगाया जाता है। 17 दिसंबर को नहीं मिले यशस्वी नाडा के नोटिस के मुताबिक, यशस्वी पिछले साल 17 दिसंबर को अपनी बताई हुई जगह पर डोप टेस्ट के लिए नहीं मिले। वहीं शेफाली सात नवंबर को अपनी बताई हुई जगह पर टेस्ट के लिए नहीं मिलीं। इसी कारण दोनों को नोटिस मिला है। ये दोनों ही खिलाड़ी नाडा की रिजस्टर्ड टेस्टिंग पूल का हिस्सा हैं। इस पूल में जो खिलाड़ी शामिल होते हैं उन्हें नाडा को बताना होता है कि वह कब और कहां टेस्ट के लिए उपलब्ध रहेंगे। उसी के हिसाब से नाडा टेस्ट के लिए अपनी टीम भेजता है, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी अपनी बताई हुई जगह पर नहीं मिले थे। सात दिन का मिला समय इस मामले की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और आईसीसी को दे दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही खिलाड़ियों को अपनी सफाई पेश करने के लिए सात दिन का समय मिला है। दोनों को अब पहले से ज्यादा एहियात बरतने की जरूरत है क्योंकि अगर दो और मिस टेस्ट की रिपोर्ट आती है तो इन्हें बैन झेलना पड़ सकता है। दोनों ने नहीं दिया था जवाब, फिर मिला समय मिस टेस्ट रिकॉर्ड होने के बाद भी दोनों खिलाड़ियों को अपनी सफाई देने का एक और मौका मिला है. शेफाली और यशस्वी को सफाई देने के लिए 7 दिन का और समय दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार 18 फरवरी और 20 फरवरी को इन दोनों क्रिकेटर्स से जवाब माँगा गया था लेकिन उनकी तरफ से कोई उत्तर नहीं दिया गया. इसके बाद नाडा ने पहला मिस टेस्ट रिकॉर्ड कर लिया।  नाडा ने इसकी जानकारी BCCI और ICC को भी दे दी है. अब दोनों ही खिलाड़ियों को सावधान रहना होगा क्योंकि अगर 2 मिस टेस्ट उनके खिलाफ और रिकॉर्ड में दर्ज हो जाते हैं तो उन पर बैन का खतरा मंडराने लगेगा।   क्या होगी सख्त कार्रवाई? 12 माह के अंतराल में अगर किसी भी खिलाड़ी के व्हेयर अबाउट फेल्योर के तहत तीन मिस टेस्ट दर्ज किए जाते हैं तो उसे एंटी डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी करार दिया जाता है। नाडा सुनवाई पैनल के समक्ष अगर खिलाड़ी अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाता है तो उस पर दो साल तक का प्रतिबंध लग सकता है। यशस्वी ने 17 दिसंबर को नहीं दिया टेस्ट यशस्वी और शेफाली दोनों नाडा के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (आरटीपी) में हैं। आरटीपी में शामिल खिलाड़ियों को डोप टेस्टिंग के लिए दिन के किसी भी समय का एक हिस्सा और स्थान नाडा को दर्ज कराना होता है। दिए गए समय और स्थान पर डोप कंट्रोल ऑफिसर (डीसीओ) कभी भी सैंपल लेने पहुंच सकता है। नाडा की ओर से जारी नोटिस के अनुसार यशस्वी का बीते वर्ष 17 दिसंबर और शेफाली का बीते वर्ष सात नवंबर को डोप टेस्ट लेने डीसीओ पहुंचा, लेकिन दोनों वहां नहीं मिले। नाडा ने दोनों क्रिकेटरों से इस वर्ष 18 और 20 फरवरी को जवाब मांगा, लेकिन दोनों ने कोई उत्तर नहीं दिया। इस पर नाडा ने दोनों का पहला मिस टेस्ट दर्ज कर दिया। बीसीसीआई, आईसीसी को दी गई जानकारी मिस टेस्ट दर्ज किए जाने के बावजूद दोनों क्रिकेटरों को सफाई के लिए सात दिन का समय दिया गया है। दोनों क्रिकेटरों के मिस टेस्ट की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और आईसीसी को भी दे दी गई है। अब दोनों ही क्रिकेटरों को बेहद सतर्क रहना होगा। अगर उनके खिलाफ दो और मिस टेस्ट दर्ज कर लिए गए तो दोनों बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। इस वक्त नाडा के आरटीपी में इन दोनों के अलावा अभिषेक शर्मा, अक्षर पटेल, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत, केएल राहुल, अर्शदीप सिंह, तिलक वर्मा, दीप्ति शर्मा, रेणुका ठाकुर जैसे क्रिकेटर शामिल हैं। About the author शिवम शिवम फरवरी 2025 से एबीपी की स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े हैं. इससे पहले शिवम ने 3 साल इनसाइडस्पोर्ट में बतौर सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम किया है. शिवम ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई जामिया मिल्लिया इस्लामिया से की है।   

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की खुशियों की चाबी पक्के घर का सपना हुआ साकार, हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के तहत आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मौके पर प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में 4 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों की चाबी सौंपी गई। लाभान्वित हितग्राहियों में ग्राम सिमड़ा की जेरोम, मयूरचुंदी के बीरबल यादव, करडेगा के टूना राम तथा जगदीश यादव शामिल हैं। पक्के मकान की चाबी पाकर सभी हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बारिश, धूप और अन्य कठिनाइयों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उनका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का सपना साकार हुआ है और अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में शपथ, शुभेंदु अधिकारी ने संभाली बंगाल की कमान

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति ने शनिवार को रवींद्र जयंती पर नया इतिहास लिख दिया. कोलकाता के विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने शपथ ली. शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों के एनडीए सरकारों के मुखिया की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए देश भर के नेता तो आये ही, बंगाल के कोने-कोने से आम लोग भी ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे। शुभेंदु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में कम से कम 20 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बीजेपी के दिग्गज नेता पहुंचे हैं। बीजेपी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हारने वाले दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया था। उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा कल ही पेश कर दिया था। मशहूर ब्रिगेड परेड ग्राउंड ने भव्य शपथ ग्रहण समारोह की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही टीएमसी के 15 साल का शासन खत्म हो गया है और पहली बार बंगाल में बीजेपी का सियासी सूर्योदय हुआ है। पहली बार लोक भवन के बाहर लोकतंत्र का उत्सव आजादी के बाद यह पहली बार है, जब बंगाल की किसी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह राजभवन (अब लोक भवन) के बंद कमरों से निकलकर खुले मैदान में आयोजित हो रहा है. बंगाली पंचांग के अनुसार, बैसाख के 25वें दिन पूरा राज्य रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मना रहा है. इसी दौरान रवींद्र संगीत की धुन के बीच राज्यपाल आरएन रवि ने शुभेंदु अधिकारी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. उनके साथ 5 मंत्रियों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक को भी राज्यपाल ने शपथ दिलायी।  ब्रिगेड परेड ग्राउंड में खुली जीप में पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुली जीप में बंगाल के नये चीफ मिनिस्टर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नये चीफ मिनिस्टर के साथ ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आये लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. पीएम मोदी हाथ हिला रहे थे और शुभेंदु अधिकारी तालियां बजा रहे थे. थोड़ी देर बाद पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक जीप से उतरकर पैदल ही स्टेज की तरफ बढ़े. इस दौरान वह लोगों से मिलते रहे. कभी हाथ जोड़कर, तो कभी दोनों हाथ हिलाकर प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिनंदन किया।   शहीद परिवारों को सम्मान भाजपा ने राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले अपने 200 से अधिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है. उनके बैठने के लिए मंच के पास अलग व्यवस्था की गयी थी. मैदान में आने वाले समर्थकों और मेहमानों के लिए बंगाल के पारंपरिक जायके ‘झालमुड़ी’ और ‘रसगुल्ले’ के स्टॉल लगाये गये थे।  निशीथ प्रमाणिक ने ली मंत्रिपद की शपथ माथाभांगा सीट से विधायक निशीथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंनेन राजनीति की शुरुआत टीएमसी से की थी और 2019 मेंबीजेपी में शामिल हुए थे। वह उत्तर बंगाल से आते हैं। वह केंद्र में राज्य मंत्री रह चुके हैं। वह कूचबेहार से सांसद थे। क्षुदीराम टुड्डू बने मंत्री क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। वह बंगाल का आदिवासी चेहरा हैं। पेशे से शिक्षक हैं और सरकारी स्कूल में अध्यापन करते थे। वह रानीबांध से चुनकर आए हैं। उन्होंने संथाली भाषा में शपथ ली है। अशोक कीर्तिनिया ने मंत्री पद की शपथ ली है।  वह बनगांव उत्तर से विधायक हैं। वह मुतआ समुदाय के लिए ऐक्टिव रहते हैं। सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को सराहा जाता है। वह लगातार दो बार विधायक बन चुके हैं। इस बार भी बनगांव से उन्हें जीत हासिल हुई है।  अग्निमित्रा पॉल ने ली मंत्रिपद की शपथ  अग्निमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। उन्हें भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वह आसनसोल दक्षिण से विधायक हैं और 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं। वह बंगाल में मजबूत महिला चेहरा हैं। वह फैशन डिजाइनर से नेता बनी हैं।  दिलीप घोष बने मंत्री दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ ली है। जानकारों का कहना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है। वह लंबे समय से आरएसएस से जुड़े हैं और बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। वह खड़गपुर सदर से विधायक हैं ब्रिगेड परेड ग्राउंड की खास बातें     900 एकड़ में फैला ‘कोलकाता लंग्स’ : ब्रिगेड परेड ग्राउंड का अपना एक गौरवशाली इतिहास है. इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरी पार्कों में गिना जाता है।      सेना का प्रबंधन : लगभग 900 एकड़ में फैले इस विशाल मैदान का रखरखाव भारतीय सेना की पूर्वी कमान के हाथ में है।      क्रिकेट का जन्मस्थान : कहा जाता है कि भारत में सबसे पहले क्रिकेट के बैट-बॉल इसी मैदान पर चले थे, जहां इयोनिया और कोलकाता के बीच मैच हुआ था।      राजनीति का मक्का : 18वीं सदी में जंगलों को साफ कर बनाये गये इस मैदान में 7 लाख से भी अधिक लोगों की रैलियां हो चुकी हैं. माकपा, कांग्रेस, टीएमसी और अब भाजपा, सभी ने यहां से अपनी सांगठनिक ताकत का लोहा मनवाया है।  सुरक्षा का अभेद्य किला ब्रिगेड परेड ग्राउंड कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के लिए 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था. पूरे मैदान में 1500 सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से नजर रखी जा रही थी. वीवीआईपी मेहमानों के लिए कार्यक्रम स्थल के पास ही अस्थायी हेलीपैड बनाया गया था. मैदान में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के लिए 100 से अधिक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगायी गयी है, ताकि हर कोई इस पल को लाइव देख सके। 

विजय के शपथ समारोह में अटपटे हालात, तमिलनाडु की राजनीति में नए मोड़

चेन्नई  तमिनलाडु की सियासत में सस्पेंस ही सस्पेंस है. ऐसा लग रहा जैसे सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा हो. कभी थलापति विजय की टीवीके की सरकार बनती दिखती है तो कभी डीएमके-एआईडीएमके के बीच गठबंधन की हवा चलती है. कभी सरकार बनने की बात आती हो तो कभी फिर इंतजार बढ़ जाता है. थलापति विजय कभी सरकार बनाने के लिए बहुमत होने की बात करते हैं तो कभी उनके नंबर कम पड़ जाते हैं. पहले खबर आई कि थलापति विजय आज सरकार बनाएंगे और शपथग्रहण होगा. मगर अब तमिलनाडु में फिर ट्विस्ट आ गया है. ऐसा लग रहा है कि थलापति विजय के शपथग्रहण पर फिर से ग्रहण लग गया है. कारण कि आधिकारिक तौर पर अब तक गवर्नर ने सरकार बनाने के लिए थलापति विजय को न्योता नहीं दिया है।  जी हां, टीवीके के संस्थापक एक्टर विजय के 118 विधायकों के बहुमत के आंकड़े को पार करने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ घंटे बाद ही शुक्रवार देर रात उनकी बहुमत की स्थिति को लेकर नया संशय पैदा हो गया. आईयूएमएल ने थलापति विजय को समर्थन देने से इनकार कर दिया. वहीं वीसीके ने अपना फैसला लंबित रखा है और समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रखीं. इससे तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति अस्थिर हो गई और बहुमत के आंकड़े फिर से अनिश्चित हो गए।  116, 117, 118: विजय अब भी बहुमत से दूर इन सबके बीच सरकार बनाने को लेकर थलापति विजय की टीवीके के लिए असमंजस और अनिश्चितता और बढ़ गई है. कारम कि थलापति विजय अब भी बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं. राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात के बाद भी टीवीके विधानसभा में बहुमत से कुछ कदम दूर है. यही कारण है कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए न्योता नहीं दिया है. थलापति विजय की टीवीके के पास 108 सीटें हैं. असल में देखें तो 107 क्योंकि विजय ने दो सीटों से जीत दर्ज की है. ऐसे में एक सीट उन्हें छोड़नी होगी. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है।  कैसे थलापति विजय को लगा झटका थलापति विजय के दो सीटों से जीतने के बाद प्रभावी बहुमत घटकर 117 रह गया. डीएमके गठबंधन से अलग हुई कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ विजय को समर्थन दिया है. सीपीआई और सीपीआई(एम) के दो-दो विधायकों ने भी बिना शर्त बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया है. लेकिन आईयूएमएल ने डीएमके गठबंधन के साथ रहने का फैसला किया, जिससे विजय की पक्की संख्या घट गई और बहुमत के आंकड़े कड़े हो गए. ऐसे में विजय के बहुमत का आंकड़ा कभी 116 पर अटक जाता है तो कभी 118 पूरा हो जाता है. मगर आईयूएमएल के पीछे हटने से टीवीके अभी 116 पर है और उसे अब भी दो सीटों की जरूरत है।  आईयूएमएल ने बिगाड़ा विजय का खेल इधर डीएमके की पुरानी सहयोगी आईयूएमएल के पास दो विधायक हैं. उसने कहा कि वह राज्यपाल आरएन रवि की ओर से आमंत्रित किसी भी पार्टी को ‘स्थिर और धर्मनिरपेक्ष सरकार’ बनाने के लिए समर्थन देगी और भाजपा को ‘पीछे के रास्ते’ से राज्य में घुसने से रोकेगी. चूंकि न तो डीएमके और न ही एआईएडीएमके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है. इसलिए माना जा रहा था कि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का न्योता देंगे. टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।  हालांकि, बाद में खबर आई कि डीएमके की एक और सहयोगी वीसीके ने अपने विधायकों के साथ थलापति विजय को समर्थन देने का फैसला किया है. एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद पार्टी सूत्रों ने बताया कि वीसीके ने समर्थन देने पर सहमति जताई है और शनिवार सुबह टीवीके को समर्थन पत्र सौंपेगी. पार्टी प्रवक्ता ने भी यूएनआई से इस कदम की पुष्टि की।  शपथग्रहण पर ग्रहण वहीं, वाम दलों के समर्थन और वीसीके के संभावित समर्थन के साथ थलापति विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की. इससेक पहले वो दो बार राज्यपाल से मिल चुके थे और दोनों बार निराशा हाथ लगी थी. अबकी बार थलापति विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और समर्थन पत्र सौंपे. इससे राज्यभर में टीवीके कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल बन गया. खबरें यह भी थीं कि विजय का शपथ ग्रहण शनिवार को हो सकता है।  रात में अचानक हुआ खेल हालांकि, रात में हालात अचानक बदल गए. थलापति विजय ने सीपीआई और सीपीआई(एम) नेताओं से मिलकर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और आईयूएमएल और वीसीके नेताओं से मिलने की योजना बनाई, लेकिन दोनों दलों ने अपने रुख पर पुनर्विचार के संकेत दिए. इससे थलापति विजय को तगड़ा झटका लगा. अब सबसे बड़ा यूटर्न है कि आईयूएमएल ने स्पष्ट रूप से टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया है. उसने कहा कि वह डीएमके गठबंधन के साथ ही रहेगी. आईयूएमएल ने कहा कि हम पहले भी डीएमके के साथ थे, अब भी हैं और आगे भी रहेंगे।  थलापति विजय को एक बार फिर झटका लगा है. वीसीके ने भी लिया यूटर्न वहीं, वीसीके ने कहा कि बातचीत जारी है और विजय को समर्थन देने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. खबरें यह भी थीं कि पार्टी समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रख रही है. यह बात तब और मजबूत हो गई जब वीसीके के उप महासचिव और नवनिर्वाचित विधायक वन्नियारासु ने सोशल मीडिया पर सत्ता और शासन में हिस्सेदारी की मांग की. इस अनिश्चितता के बीच TVK के सदस्य जो विजय के शपथ ग्रहण की उम्मीद में बड़ी संख्या में जुटे थे, उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया. अब आगे जब तक बहुमत वाला नंबर नहीं दिखा देते एक्टर विजय, तब तक टीवीके सरकार का सपना… सपना ही रहेगा। 

ईंधन के दाम में इजाफा संभव, सरकार को हर दिन उठाना पड़ रहा 1000 करोड़ का भार

 नई दिल्‍ली ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं।  क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।  सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।  हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।  कई देशों में इमरजेंसी लागू  कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं।  भारत ने उठाए सख्‍त कदम  सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की।  सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार  उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं।  उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।  100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम  भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।