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पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, कई अधिकारी मौके पर

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी. सुबह करीब 7 बजे सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी पर ED अधिकारियों का काफिला पहुंचा. करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों के साथ भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया. CIA और स्पेशल फोर्स के करीब तीन दर्जन जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया. जानकारी के मुताबिक सुबह 7:25 बजे औपचारिक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. ED की यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की जा रही है. एजेंसी चंडीगढ़ और दिल्ली-NCR में संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े सहयोगियों के कुल चार ठिकानों पर जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई दो दिन पहले शुरू हुई बड़ी जांच का विस्तार मानी जा रही है, जिसमें बिल्डर अजय सहगल, मोहिंदर सिंह और अन्य कारोबारियों के यहां भी छापेमारी हुई थी।  इस कार्रवाई के समानांतर पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर की 9वीं मंजिल पर चल रही ED रेड भी शुक्रवार देर रात खत्म हुई. यह सर्च ऑपरेशन करीब 40 घंटे तक चला. कारोबारी नितिन गोहल और प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घरों और दफ्तरों पर लगातार जांच चलती रही. सूत्रों के मुताबिक प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घर से ED की टीम रात करीब 11 बजे निकली, जबकि नितिन गोहल के यहां कार्रवाई देर रात 12:30 से 1 बजे के बीच खत्म हुई. हालांकि अधिकारियों ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि ED अधिकारी कई बैग और दस्तावेज लेकर बाहर निकले. अभी तक एजेंसी ने बरामदगी, जब्ती या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।  एक महीने में दूसरी बार, एक साल में तीसरी रेड पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ED पहुंची है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे कोई ताकत झुका नहीं सकती. मान ने आरोप लगाया कि ED और BJP मिलकर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है।  बिल्डर नेटवर्क से जुड़ रही जांच की कड़ियां सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले पंजाब और दिल्ली-NCR में बिल्डर और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की थी. उसी जांच के तार अब संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है. अधिकारियों ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ती छापेमारी से यह साफ है कि जांच का दायरा बड़ा हो चुका है।  सुरक्षा घेरे में पूरा इलाका ED रेड के दौरान चंडीगढ़ के सेक्टर-2 इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी रही. मंत्री आवास के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था. सुबह से लेकर देर शाम तक मीडिया और स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा रही. अधिकारियों ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।  क्या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है? फिलहाल ED ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब की राजनीति में इस कार्रवाई को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

देश का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क भोपाल में आज खुलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी। इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है। इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी। इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग। इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी। अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है। इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे। भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण? भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए। 'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा। 3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:     प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।     प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।     मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत, मंत्री ने कहा—धार्मिक संस्थानों में मिलेगी उपयोगी ट्रेनिंग

भोपाल मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अब प्रशिक्षित और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंदिरों में तेजी से बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या मंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के दूसरे बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले जहां विशेष पर्व, शिवरात्रि या सावन जैसे मौकों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब हर शनिवार-रविवार और छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में अब सामान्य दिनों में भी एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सुविधाओं को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। क्या पढ़ाया जाएगा टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में? इस नए कोर्स में सिर्फ धार्मिक पहलुओं पर नहीं बल्कि आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर फोकस किया जाएगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग और डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्च और मस्जिद में भी काम आएगा यह मैनेजमेंट इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह एक जैसे होते हैं। जो छात्र यहां प्रशिक्षण लेंगे, वे चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी शुरुआत मंदिरों से इसलिए की है क्योंकि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट, फिर दूसरे विश्वविद्यालयों में  सरकार फिलहाल इस कोर्स को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन में शुरू करेगी। इसके बाद छात्रों की रुचि, एडमिशन और परिणामों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले साल इसे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी शुरू करने की कोशिश की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाद में जबलपुर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स लागू किया जा सकता है। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, मंदिरों की व्यवस्थाएं ज्यादा प्रोफेशनल होंगी और धार्मिक स्थलों का संचालन अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। विपक्ष के सवालों पर मंत्री का जवाब विपक्ष द्वारा इस कोर्स को राजनीति और धर्म से जोड़ने पर मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्थाओं और मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों पर बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं, वे इसकी वास्तविक जरूरत को समझ नहीं पा रहे हैं। सरकार समय की मांग के अनुसार धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।  

UP-MP के बीच यात्रा आसान: भोपाल से कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से केवल 7 घंटे में पहुंचेगे

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को 6800 करोड़ का तोहफा दिया है। नितिन गडकरी ने 6800 करोड़ के राजमार्गों को तोहफा मध्य प्रदेश को दिया है। इसमें 18 नेशनल हाईवे का निर्माण किया जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 550 किमी की होगी। सोमवार को नितिन गडकरी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के साथ भोपाल से कानपुर के बीच भोपाल कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का ऐलान किया गया। भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-विदिशा-सागर-कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए भोपाल से विदेशा होकर सागर तक और सागर से महोबा जिले तक कवरई होकर कानपुर तक 11300 करोड़ की लागत से इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। इस हाईवे को निर्माण से भोपाल के कानपुर की दूरी 15 घंटे के घटकर 7 घंटे रह जाएगी। इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्लिविटी अच्छी हो जाएगी। वहीं बुंदेलखंड से भोपाल और कानपुर आने-जाने में भी समय बचेगा। सिर्फ 7 घंटे में भोपाल से कानपुर इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के ओरछा में 6800 करोड़ रुपये की लागत से 550 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 18 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि स्थानीय लोगों की बेतवा में पुल बनाने की दो दशक पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि 665 मीटर लंबे इस पुल को 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 2-लेन के पेव्ड शोल्डर ब्रिज और फुटपाथ के निर्माण से ओरछा, झांसी, टीकमगढ़ की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि पवई, ओरछा, हरपालपुर, कैथी पड़रिया कला, पटना तमौली, जस्सो, नागौद और सागर लिंक रोड बाईपास के निर्माण से शहर में यातायात का दबाव कम होगा। सागर ग्रीनफील्ड लिंक रोड से भोपाल से कानपुर की दूरी 21 किमी कम हो जाएगी, मोहरी से सताई घाट और चौका से एमपी/यूपी तक की दूरी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमा तक 4 लेन चौड़ा करने से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सागर सिटी, छतरपुर सिटी और गढ़ाकोटा में फ्लाईओवर बनने से ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों ओरछा, खजुराहो, पन्ना, चित्रकूट, टीकमगढ़, सांची तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से सीमेंट और खनिजों का परिवहन आसान होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होगी। मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्टिविटी अच्छी होगी, टीकमगढ़ से ओरछा तक पक्की शोल्डर वाली 2 लेन सड़क बनने से यातायात सुरक्षित होगा। इस कार्यक्रम में गडकरी ने 2000 करोड़ रुपये की लागत से बमीठा से सतना तक 105 किलोमीटर लंबी 4 लेन की ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की भी घोषणा की। इस सड़क के बनने से टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, खजुराहो, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर में तैयार हो रहा हीट प्रूफ पाथ-वे

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हीट प्रूफ पाथवे का निर्माण कराया गया है। इस पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे।प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर (लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट में ) हीट प्रूफ पाथ-वे (सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे तथा वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे। दर्शन हेतु प्रवेश एवं निर्गम मार्ग पर यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे श्रद्धालु गर्मी के बावजूद सुरक्षित एवं आरामदायक तरीके से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने लिया फैसला बाबा महाकाल के दर्शन करने रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रदालु आते हैं. इन्हीं के साथ वीवीआईपी, राजनेता, अभिनेता, व क्रिकेटर भी बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. उज्जैन व आसपास क्षेत्र में गर्मी भी अपना तेवर दिखा रही है. जिससे महाकाल मंदिर में आने वाले श्रदालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा में श्रद्धालुओं की सुविधान का ध्यान में रखते हुए महाकाल प्रबंधन समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।  महाकाल मंदिर में बनाया जा रहा हीट प्रूफ पाथ-वे जिसमें महाकाल लोक में शेड लगाने व हीट प्रूफ पाथ-वे बनाया जा रहा है. प्रंबधन समिति ने ठंडे पानी, मेटिंग व कूलर की व्यवस्था तो पहल ही कर रखी है. साथ ही गर्मी से बचने के लिए स्प्रिंगर भी लगाए गए हैं. सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि "श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर व अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक व अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक द्वारा दिए गए निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  कहां से कहां तक बन रहा पाथ वे इसी क्रम में मंदिर परिसर व महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर लगभग 13 हजार स्क्वायर फीट में हीट प्रूफ पाथ-वे सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक किया जा रहा है. इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे. वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे।  जलकुंभी निकालने व उसके निपटान के लिए उठाया कदम  श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक और धार्मिक महत्व के रुद्र सागर को स्वच्छ रखने के लिए उज्जैन नगर निगम ने एक बार फिर कवायद शुरू की है। निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रुद्र सागर (बड़ा एवं छोटा) से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया गया है। अनुमानित लागत 14 लाख 55 हजार रुपये तय की है। कहा है कि यह अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा। रुद्र सागर उज्जैन के उन पौराणिक सप्त सागरों में शामिल है, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख है। इसके केंद्र में सम्राट विक्रमादित्य की अपने नौ रत्नों के साथ विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। सागर की दीवारों पर सम्राट विक्रमादित्य काल के प्रतीक चिन्ह और 32 पुतलियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। प्रशासन का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है कि महाकाल मंदिर के इतने करीब स्थित इस जल निकाय को सदैव स्वच्छ रखा जाए। विशेष रूप से 2022 में महाकाल महालोक के निर्माण के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगर निगम द्वारा अब वार्षिक सफाई का टेंडर जारी करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल टेंडर जारी करने से काम नहीं चलेगा; सफाई की निरंतरता और गुणवत्ता की निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि करोड़ों की लागत से संवारा गया यह पौराणिक सागर अपनी पहचान न खोए। करोड़ों का बजट, फिर भी उपेक्षा का शिकारहैरानी की बात यह है कि बीते डेढ़ दशकों में रुद्र सागर के सुंदरीकरण और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 2022 से पहले यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार था। महालोक के निर्माण के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अनुभव यह रहा है कि रुद्र सागर साल में केवल दो से चार महीने ही साफ रह पाता है। शेष समय यह जलकुंभी की मोटी चादर से ढंका रहता है, जो न केवल जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को भी खराब करती है।  

PF पैसा आसानी से निकालेगा EPFO, ATM और UPI सुविधा जल्द उपलब्ध

नई दिल्ली ईपीएफओ के करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स के लिए गुड न्यूज है। आप अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा ATM और UPI के जरिए निकाल सकेंगे। यह सुविधा मई के अंत तक लाइव होने की उम्मीद है, जिससे पीएफ पैसे तक पहुंच और भी आसान और तेज हो जाएगी। ईटी नाउ के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। ईपीएफओ डैशबोर्ड के मुताबिक ईपीएफओ में करीब 7,98,24,491 मेंबर हैं। इनमें 7.74 करोड़ से अधिक सदस्यों की आधार सत्यापित KYC हो चुकी है। इनमें से 82,11,182 पेंशनर हैं। क्या है EPFO 3.0 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पिछले साल EPFO 3.0 लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल ढांचे और प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना है। यह नया सिस्टम मिड-2026 तक पूरी तरह लागू हो जाएगी। इससे पीएफ से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं यूजर-फ्रेंडली हो जाएंगी। क्या होगा फायदा इस नए सिस्टम से ईपीएफओ के सदस्यों को पीएफ तक आसान पहुंच होगी। ऑटो-क्लेम सेटलमेंट और पसंद के बैंक खाते में फंड ट्रांसफर हो सकेगा। सबसे अहम अपग्रेड एटीएम और यूपीआई के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा को लेकर होगा। कितना पैसा निकाल सकते हैं: EPFO निकासी की अधिकतम सीमा तय करेगा। इसके मुताबिक कुल पीएफ बैलेंस का 50% तक ही यूपीआई या एटीएम से निकाला जा सकेगा। कैसे काम करेगी यह सुविधा: EPFO सब्सक्राइबर्स को डेडिकेटेड एटीएम कार्ड जारी करेगा। यह कार्ड सीधे पीएफ अकाउंट से लिंक होगा। आप किसी भी एटीएम से जाकर अपना पीएफ पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, UPI के जरिए भी पीएफ बैलेंस ट्रांसफर किया जा सकेगा। कौन कर सकता है इस सुविधा का इस्तेमाल: ईपीएफओ सदस्यों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जैसे, एक्टिव UAN होना चाहिए। UAN से KYC डॉक्यूमेंट्स आधार, PAN, बैंक खाता नंबर और IFSC कोड लिंक होने चाहिए। रिकॉर्डतोड़ क्लेम श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले महीने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में EPFO ने 8.31 करोड़ क्लेम सेटल किए हैं, जो FY25 के 6.01 करोड़ से कहीं अधिक है। इनमें से 5.51 करोड़ क्लेम एडवांस या आंशिक निकासी के थे। यह पीएफ तक आसान पहुंच का बड़ा उदाहरण है। 71.11% एडवांस क्लेम ऑटो मोड में 3 दिनों के भीतर प्रोसेस हुए (पिछले साल 59.19%)। 6.68 करोड़ सदस्यों ने चेक लीफ अपलोड किए बिना ही क्लेम दायर किए। 1.59 करोड़ सदस्यों ने बिना एम्प्लॉयर की मंजूरी के अपने बैंक अकाउंट सीड किए। 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटोमेटिक प्रोसेस हुए। 24.84 लाख ट्रांसफर रिक्वेस्ट सदस्यों द्वारा बिना एम्प्लॉयर के हस्तक्षेप के की गईं।

सीएम की घोषणा: 1 लाख रुपये के पुरस्कार वाले टॉपर छात्रों को सरकार दिखाएगी IPL मैच

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड नतीजों में मेरिट में आए छात्रों को आईपीएल 2026 का मैच दिखाने का फैसला किया है। यह छात्र 10 मई को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुर के बीच मुकाबले का लुत्फ उठाएंगे। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में आदेश जारी किया है। साल 2026 में छत्तीसगढ़ बोर्ड में 10वीं में करीब 3 लाख 21 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 77.15 प्रतिशत छात्र पास हुए। इनमें 42 छात्र मेरिट में आए, जिनमें 26 लड़कियां शामिल हैं। दूसरी ओर, 12वीं की परीक्षा में करीब 2.44 लाख छात्र शामिल हुए, जिनमें 83.04 प्रतिशत सफल रहे थे। 1 लाख तक मिलेगा इनाम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी होने के बाद सफल हुए सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा तंत्र, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया था। मुख्यमंत्री साय ने इस सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। सरकार ने टॉपर्स को प्रतिभावान छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत एक से डेढ़ लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा भी की है। सभी कलेक्टरों को निर्देश इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं मेरिट में आने वाले छात्रों को मैच दिखाने लाने के लिए व्यवस्था की जाए। जारी लेटर में कहा गया है कि मेरिट लिस्ट में आने वाले छात्रों के साथ एक शिक्षक को 10 मई तक सुबह 10 बजे रायपुर लाने की व्यवस्था करनी होगी।     मेरिट में आने वाले छात्रों को सरकार का तोहफा     छत्तीसगढ़ बोर्ड में टॉप आने वाले छात्र देखेंगे मैच     10 मई को रायपुर में होगा आईपीएल का मैच     सभी जिला कलेक्टरों को दिए गए निर्देश भूपेश सरकार ने कराई थी हेलीकॉप्टर की सैर इससे पहले भूपेश बघेल की सरकार ने मेरिट आने वाले छात्रों को हेलीकॉप्टर में यात्रा कराई थी। मेरिट आने वाले छात्रों को हर साल सरकार की तरफ से हेलीकॉप्टर की सैर कराई जाती थी।  

लग्जरी वृद्धाश्रम में खाली कमरों की स्थिति, 80,000 रुपए तक का किराया रोक रहा बुजुर्गों को

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है। जनवरी में हुआ था उद्घाटन दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं। खर्च अधिक होने की वजह से खाली पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं। 24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था। सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है। मुनेश्वर कुमार

मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के फैसले पर खोला मोर्चा, ममता-स्टालिन को संभालने का सुझाव

नई दिल्ली तमिलनाडु में नई सरकार में शामिल होने के लिए कांग्रेस ने वर्षों पुराना गठबंधन तोड़ लिया और ऐक्टर वियज की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस के इस फैसले की हर तरफ आलोचना हो रही है। सहयोगी के साथ-साथ पार्टी के लोग भी इसकी निंद कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने इसे भयानक निर्णय बताया है। वहीं, अखिलेश यादव ने आईना दिखाते हुए कहा है कि मुश्किलों में साथ नहीं छोड़ना चाहिए। मणिशंकर अय्यर ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस के इस फैसले में घटिया राजनीतिक अवसरवादिता की बू आती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इस कदम से भाजपा को को द्रविड़ राज्य में पिछले दरवाजे से घुसने का मौका मिलता है तो यह राजनीतिक खेल के इतिहास में अब तक का सबसे बुरा गोल होगा, जो कांग्रेस अपने ही गोलपोस्ट में करेगी। अय्यर ने कहा कि वह कल्पना भी नहीं कर सकते कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक ऐसी सुविधावादी राजनीति को अपना आशीर्वाद देंगे। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा कि DMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के ठीक बाद कांग्रेस का पाला बदलकर TVK के साथ गठबंधन करना एक भयानक फैसला है। कुछ ही दिन पहले जिन 23 विधानसभा सीटों पर हम हारे और जिन पांच सीटों पर हम जीते उन सभी पर हमारा मुकाबला टीवीके के साथ था। 'राजनीतिक अवसरवाद' का लगाया आरोप अय्यर ने तमिलनाडु के ताजा घटनाक्रम को घटिया राजनीतिक अवसरवाद यानि की Low Political Opportunism बताया है। उन्होंने कांग्रेस के फैसले को अनैतिक करारते हुए गठबंधन की मर्यादा के बताया है। अय्यर के मुताबिक, महज़ सत्ता के लिए दशकों पुराना साथ छोड़ना कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठाए सवाल लगातार मिल रही चुनावी हार और सांगठनिक कमजोरी का हवाला देते हुए अय्यर ने सीधे तौर पर राहुल गांधी के नेतृत्व को निशाना साधते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब कांग्रेस को पीछे हटकर क्षेत्रीय नेताओं को आगे आने का मौका देना चाहिए। अय्यर ने ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस), एम.के. स्टालिन (DMK),अखिलेश यादव (सपा) और तेजस्वी यादव (RJD) का नाम सुझाया है। क्षेत्रीय दलों को कमान देने की वकालत अय्यर का मानना है कि क्षेत्रीय नेता अपनी जमीन और जनता की नब्ज को कांग्रेस की तुलना में बेहतर समझते हैं। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन को बचाने और मजबूती देने के लिए इन प्रभावशाली क्षेत्रीय चेहरों को गठबंधन का नेतृत्व सौंपना ही एकमात्र विकल्प बचा है। DMK-AIADMK में भी हो रही बात तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर चल रही खींचतान के बीच एआईएडीएमके के विधायकों को पुडुचेरी के पूरनकुप्पम में एक निजी रिसॉर्ट में ठहराया गया है। सूत्रों ने बताया कि सरकार बनाने के लिए टीवीके को संभावित समर्थन देने के संबंध में प्रयास जारी हैं और कथित तौर पर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के जरिए एआईएडीएमके नेताओं के साथ चर्चा चल रही है। पलानीस्वामी ने की बैठक एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने रिसॉर्ट में विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक में 40 विधायक मौजूद थे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि पलानीस्वामी ने चुने हुए विधायकों से एकजुट रहने और धैर्य रखने को कहा है। उन्होंने विधायकों से कहा कि अच्छी चीजे सामने आएंगी, इसलिए आप सभी को अगले कुछ दिनों तक रिसॉर्ट में एकजुट रहना चाहिए।

सोने के साथ अब कटनी के बड़वारा में डोलोमाइट के भंडार-ब्लॉक्स आरक्षित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कटनी जिला देश के महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह अयस्क, मार्बल और लेटराइट जैसे बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध कटनी अब स्वर्ण अयस्क के साथ ही डोलोमाइट के विशाल भंडार खनन के लिये तैयार हैं। कटनी के बड़ेरा एवं बचरबाड़ा में 50 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तीन बड़े डोलोमाइट ब्लॉक्स को माइनिंग कॉर्पोरेशन के पक्ष में आरक्षित किया गया है। इस निर्णय से कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहाकि अब कटनी ‘माइनिंग कैपिटल’ के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि कटनी केवल ‘चूना नगरी’ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खनिज आधारित औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार और आधुनिक खनन प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनहितकारी उपयोग के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी को ‘कनकपुरी’ अर्थात ‘स्वर्ण नगरी’ के रूप में विकसित करने की परिकल्पना को विशेष महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि कटनी की धरती केवल खनिज संपदा का भंडार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक शक्ति का नया आधार बन रही है। कटनी की स्लीमनाबाद तहसील के इमलिया गांव, जिसे स्थानीय स्तर पर “सुनाही” के नाम से भी जाना जाता है। यहॉ पर लगभग 3.35 लाख टन से अधिक स्वर्ण अयस्क मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। यह खोज लगभग 50 वर्षों की लंबी भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया और सर्वेक्षण के बाद की गई है। वर्ष 1974 में प्रारंभ हुए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के आधार पर इस क्षेत्र में स्वर्ण भंडार की संभावना व्यक्त की गई थी, जिसे अब वर्ष 2025-26 में अंतिम रूप दिया गया है। सोने के साथ तांबा, जिंक, लेड और चांदी के भंडार इमलिया क्षेत्र में केवल सोना ही नहीं, बल्कि तांबा, लेड, जिंक और चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों के भंडार भी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज कटनी को देश के प्रमुख बहु-खनिज क्षेत्रों में स्थापित करेगी। इन खनिज संसाधनों का उपयोग प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 50 वर्ष के लिए हुआ खनन समझौता स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए मुंबई की ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी ने 121 करोड़ रूपये से अधिक की बोली लगाकर 50 वर्षों के लिए खनन लीज प्राप्त की है। लगभग 6.5 हैक्टेयर क्षेत्र में खनन गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, औद्योगिक गतिविधियाँ और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खनिज उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन सुनिश्चित करना भी है। माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0 से मिला वैश्विक निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अगस्त 2025 में आयोजित ‘माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0’ ने कटनी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर नई पहचान दिलाई। कॉन्क्लेव में 56 हजार 414 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख उद्योग समूहों और निवेशकों के साथ वन-टू-वन चर्चा कर कटनी की खनिज क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया था। कॉन्क्लेव में 8 बड़ी कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई थी। इन निवेश प्रस्तावों से सीमेंट, मिनरल प्रोसेसिंग, ऊर्जा, धातु प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र में बड़े स्तर पर औद्योगिक विस्तार होने की संभावना है। इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होंगे। नवाचार और सुशासन से राजस्व में वृद्धि कटनी जिला प्रशासन की सक्रियता, तकनीक आधारित निगरानी और बेहतर खनन प्रबंधन के कारण कटनी के खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पूर्व में जहां जिले की औसत वार्षिक खनिज आय लगभग 100 करोड़ रूपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 160 करोड़ रूपये से अधिक हो गई है। नई खदानों और औद्योगिक इकाइयों के प्रारंभ होने से आने वाले वर्षों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल राजस्व वृद्धि नहीं, बल्कि खनिज संपदा से समग्र क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ सड़क, बिजली, जल, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। तकनीक से अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण राज्य सरकार ने कटनी में पारदर्शी और व्यवस्थित खनन व्यवस्था स्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया है। बड़वारा रोड पर स्थापित ई-चेक गेट के माध्यम से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की जा रही है। माइनिंग सर्विलांस सिस्टम के जरिए अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। प्रशासन द्वारा लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण कर वैधानिक खनन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पारदर्शिता, तकनीक और सुशासन के माध्यम से खनन क्षेत्र में नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है। रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार से स्थानीय युवाओं, आदिवासी समुदायों और श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का प्रयास है कि औद्योगिक विकास का लाभ सीधे स्थानीय नागरिकों तक पहुंचे और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण को नई गति मिले। कटनी आज प्रदेश की औद्योगिक शक्ति, प्राकृतिक संपदा और विकास दृष्टि का प्रतीक बनकर उभर रहा है। “स्वर्ण नगरी” और “माइनिंग कैपिटल” की अवधारणा के साथ कटनी आने वाले समय में न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।