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मध्यप्रदेश में 10 ग्रामीणों को मिला संपत्ति का मालिकाना अधिकार, मुख्यमंत्री ने वितरित किए रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों को वितरित किये रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से मिला 10 हितग्राहियों को मालिकाना हक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के हस्तांतरण विलेख के निष्पादन योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 के हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम गोंदागांव के ग्रामीण निर्भयदास एवं भैयालाल को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किये। इस दौरान अन्य आठ हितग्राहियों को भी रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र ग्रामीणजन को उसकी भूमि का अधिकार मिले। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिल रही है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं। रजिस्ट्री मिलने से उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ेगी और वे शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। रजिस्ट्री प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी भूमि का विधिवत मालिकाना हक मिलने से उन्हें अब बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी तथा अपनी भूमि पर वे निर्भय होकर निर्माण एवं अन्य कार्य कर सकेंगे। उन्होंने सरकार की इस योजना की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को निर्देश दिये कि भू-स्वामित्व के अंतर्गत रजिस्ट्री के कार्य में गति बढ़ाएं एवं पटवारियों को बताए कि शासकीय कार्य निष्पादन में किसी के भी विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी, जिसमें वह राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में निष्पादन अधिकारी घोषित है। रजिस्ट्री का निष्पादन अधिकार अभिलेख में उल्लेखित जानकारी के आधार पर ही किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति के स्वामित्व का निर्धारण अथवा नई जानकारी का सृजन नहीं किया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय सुदाम खाड़े तथा कमिश्नर नर्मदापुरम श्रीकांत बनोठ, आईजी चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, हितग्राही और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

दुनियाभर में गहराता जल संकट, 35 साल के निचले स्तर पर नदियों का बहाव; ग्लेशियर तेजी से पिघले

नई दिल्ली दुनिया में पानी लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. कहीं नदियों का बहाव सामान्य से कम हो गया है तो कहीं कुछ ही समय में इतनी बारिश हो रही है कि बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO की स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025 रिपोर्ट ने इसी बदलते जल पैटर्न को लेकर गंभीर चिंता जताई है।  रिपोर्ट की मानें, तो 2025 में दुनिया के नदियों का प्रवाह पिछले 35 सालों में सबसे सूखा रहा. दूसरी तरफ 2014-16 के बाद से जमीन पर मौजूद कुल जल भंडारण में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।  जानकारी के मुताबिक, 2025 में वैश्विक नदी बेसिन के करीब 36% हिस्से में सामान्य से कम जल प्रवाह दर्ज किया गया. लगातार सातवें साल सामान्य नदी प्रवाह वाले बेसिन बेहद कम रहे.  बेसिन वह इलाका होता है जहाँ बारिश का पानी नालों, छोटी नदियों और नदियों के जरिए एक मुख्य नदी में जाकर मिल जाता है।  1991-2020 के औसत में जहां करीब 46% बेसिन सामान्य स्थिति में रहते थे, वहीं 2021 से 2025 के बीच यह आंकड़ा सिर्फ 34 से 38% तक सिमट कर रह गया. एशिया में मिडिल एशिया और मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में नदी प्रवाह सामान्य से कम दर्ज किया गया. हालांकि साउथ और साउथ ईस्ट एशिया के कई क्षेत्रों में 2025 के दौरान सामान्य से ज्यादा पानी दर्ज किया गया।  अब भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या भू जल और जल के भंडारण को लेकर है. रिपोर्ट में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम जल भंडारण दर्ज होने की बात कही गई है. उत्तर-पश्चिमी भारत में लगातार गिरता जलस्तर लंबे समय के जल संकट की ओर इशारा करता है. भारत की खेती, पानी और उद्योगों की बड़ी जरूरतें भूजल से पूरी होती हैं. ऐसे में कमजोर मानसून, बढ़ता तापमान से आने वाले समय में पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।  एशिया में बाढ़ और सूखे का दोहरा संकट WMO के मुताबिक, पिछले पांच सालों में एशिया और अफ्रीका पानी से जुड़ी समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे. इन घटनाओं से जुड़ी 80% से ज्यादा मौतें भी इन्हीं दोनों क्षेत्रों में हुईं. दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 2025 में चक्रवात और अत्यधिक मानसूनी बारिश कई देशों पर भारी पड़ी. श्रीलंका, पाकिस्तान, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस में ऐसी घटनाओं से हजारों लोगों की मौत हुई।  ग्लेशियर पिघलने से गहराया खतरा साल 2025 में दुनिया भर के ग्लेशियरों ने करीब 408 गीगाटन बर्फ पिघले. इससे समुद्र का पानी करीब 1.1 मिलीमीटर तक ऊपर आया. यह लगातार चौथा साल है जब सभी बड़े ग्लेशियर इलाकों में बर्फ की कमी हुई है।  हिमालयी ग्लेशियर भारत और पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम हैं. गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदीयों पर इनका सीधा असर पड़ता है. तेजी से पिघलते ग्लेशियर पहले अचानक बाढ़ और तेज बहाव का खतरा बढ़ा सकते हैं, जबकि लंबे समय में सूखे मौसम में पानी की कमी और गहरा सकती है। 

लखनऊ में बाढ़ प्रभावितों तक नावों से पहुंच रहा भोजन और राशन, 1,900 फूड पैकेट बांटे गए

योगी सरकार के निर्देश पर बाढ़ प्रभावितों को नावों से पहुंचाया जा रहा भोजन और राशन लखनऊ के जलभराव वाले क्षेत्रों में 1,900 खाद्य पैकेट और पेयजल वितरित नावों के जरिए भोजन पैकेट के साथ कच्चा और सूखा राशन भी पहुंचाया लोहरामऊ और दाउदनगर में ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव, शनिवार से तीन ड्रोन लगाने की तैयारी नगर आयुक्त ने फैजुल्लागंज और गुल्मी खेड़ा समेत प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा   लखनऊ,   गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से जलभराव की समस्या से जूझ रहे लखनऊ के इलाकों में योगी सरकार के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं। लखनऊ नगर निगम की टीमें प्रभावित परिवारों तक भोजन, राशन और स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के साथ सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा के इंतजामों में जुटी हैं। शुक्रवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने फैजुल्लागंज, गुल्मी खेड़ा समेत विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नावों से पहुंचाई गई राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन की परेशानी को देखते हुए नावों के माध्यम से लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। निजी संस्थाओं के सहयोग से नगर निगम की टीम ने करीब 500 से 600 पके भोजन के पैकेट के साथ कच्चा और सूखा राशन वितरित किया। जोन-3 और जोन-6 के अंतर्गत हयात नगर, बरावन कला, टांड़ खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, दौलत खेड़ा, लक्ष्मी हॉस्पिटल वाली गली और गुल्मी खेड़ा समेत अन्य प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई गई। नगर निगम की टीम ने सुबह और शाम दोनों पालियों में कुल 1,900 खाद्य पैकेट और पेयजल की बोतलें वितरित कीं। प्रशासन का जोर प्रभावित परिवारों को समय पर भोजन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर है। अधिकारियों ने संभाली राहत कार्यों की कमान जोन-3 में जोनल अधिकारी अजीत राय, जोनल सेनेटरी ऑफिसर सचिन सक्सेना और अधिशासी अभियंता नजमी मुजफ्फर ने राहत कार्यों की निगरानी की। वहीं, जोन-6 में जोनल अधिकारी अमरजीत सिंह यादव, जोनल सेनेटरी ऑफिसर राकेश कुमार और अधिशासी अभियंता अशोक यादव ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में राहत सामग्री के प्रबंधन के लिए करीब 70 कर्मचारियों को लगाया गया। कर्मचारियों ने पिछले दो दिनों में पहुंची खाद्य सामग्री को उतारकर ट्रैक्टरों पर लोड किया, जिससे इसे प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में आसानी हो सके। बीमारियों की रोकथाम के लिए ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव  जलभराव के बाद मच्छरों के प्रजनन और संक्रामक बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए लोहरामऊ और दाउदनगर में ड्रोन के जरिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। जलस्तर स्थिर होने के बाद अभियान का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। शनिवार से तीन ड्रोन लगाने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव किया जा सके। नगर निगम की टीमें राहत वितरण, सफाई, स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में लगी हैं।

मध्यप्रदेश में मौसम बना जानलेवा, एक साल में 537 मौतें; बढ़ती गर्मी और कंक्रीट से बढ़ी चिंता

भोपाल  आप इस बात की कल्पना कीजिए कि लगभग हर सुबह की शुरुआत किसी ना किसी प्राकृतिक आपदा की खबर से हो. कहीं भीषण गर्मी, कहीं तूफान, कहीं बाढ़ तो कहीं भूस्खलन. भारत के लिए साल 2025 में यह कल्पना नहीं, बल्कि सच्चाई बन चुकी थी. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और पत्रिका डाउन टू अर्थ के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 334 में से 331 दिन ऐसे रहे, जब देश के किसी ना किसी हिस्से में अत्यधिक मौसमीय घटना (Extreme Weather Event) दर्ज की गई. यानी पूरे साल का लगभग 99 प्रतिशत समय. अगर 2024 से तुलना करें तो पिछले साल यह आंकड़ा 295 दिनों का था. इन आपदाओं में 4400 से अधिक लोगों की जान गई और करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई, जो बदलते जलवायु संकट की भयावह तस्वीर पेश करती है।  साल 2025 में मौसम संबंधी घटनाओं की वजह से मध्यप्रदेश में 537 लोगों की मौत हुई। पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर काम करने वाले संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से यह रिपोर्ट जारी की गई है।कहीं गर्मी, कहीं बारिश, कहीं सूखा तो कई जगहों पर भूजल और बोरवेल का दबाव लोगों के सामने चुनौती बनकर आया है। इसका असर लोगों की आजीविका और कमाई पर भी पड़ा है।अलग-अलग इलाकों की अपनी समस्याएं हैं। ऐसे में वहां की जरूरत के हिसाब से तैयारी भी जरूरी है।इसी को समझने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) ने मध्यप्रदेश में जलवायु जोखिमों का अध्ययन किया और उनसे निपटने के उपायों पर रिपोर्ट तैयार की है। कंक्रीट और बदलता मौसम पैटर्न WRI की रिसर्च में सबसे अहम बात यह सामने आई है। दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश में जलवायु जोखिम एक जैसा नहीं है। शहरों में बढ़ती गर्मी और कंक्रीट का विस्तार चुनौती बन रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में बारिश का बदलता पैटर्न, सूखा, पानी की उपलब्धता और खेती की बदलती परिस्थितियां बड़ा जोखिम हैं। जंगल वाले क्षेत्रों में आग, पानी और वन आधारित आजीविका पर असर पड़ रहा है। इसी वजह से WRI की रिसर्च में जगह के हिसाब से जोखिम की पहचान और उसी के अनुसार समाधान तैयार करने पर जोर दिया गया है। 5 बड़े शहरों के हाल जानें 1. भोपाल : शहर एक, अंदर 4 से 6 डिग्री तक का अंतर WRI की नई हीट रिसर्च में भोपाल का उदाहरण बताता है कि गर्मी का असर शहर के हर हिस्से में एक जैसा नहीं है। झीलों और हरित क्षेत्रों के कारण कई हिस्सों को प्राकृतिक ठंडक मिलती है, लेकिन घनी बसाहट और कम छायादार इलाकों में हालात बदल जाते हैं। यहां तापमान आसपास के रिहायशी क्षेत्रों की तुलना में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया। यानी शहर में रहने की जगह और आसपास की हरियाली यह तय करने लगी है कि एक ही गर्मी में किस व्यक्ति को कितनी गर्मी झेलनी पड़ेगी। 2. इंदौर : कंक्रीट और कामकाजी आबादी पर दबाव इंदौर में तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र, बढ़ती निर्माण गतिविधियां और घनी होती बसाहट गर्मी के जोखिम को बढ़ा रही हैं। WRI ने खास तौर पर औद्योगिक और कामकाजी क्षेत्रों में बाहर काम करने वाले लोगों के लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने को जोखिम से जोड़ा है। यानी गर्मी का असर सिर्फ तापमान के आंकड़े तक सीमित नहीं है। इसका असर काम के घंटों, उत्पादकता और परिवार की आय तक पहुंच सकता है। 3. ग्वालियर : शहर का घना हिस्सा ज्यादा गर्म ग्वालियर में WRI ने शहर के घने निर्मित हिस्से को गर्मी रोकने वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। घनी इमारतें, सड़कें और कम खुले स्थान गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। इससे शहर के मध्य हिस्से में गर्मी का संपर्क ज्यादा देर तक बना रह सकता है। यहां भी जोखिम पूरे शहर में बराबर नहीं है। 4. जबलपुर : आधी आबादी को हरियाली का लाभ नहीं जबलपुर की स्थिति कुछ अलग है। यहां जंगल, खुले क्षेत्र और जलस्रोत शहर को गर्मी से प्राकृतिक राहत देते हैं। इसके बावजूद WRI के मुताबिक करीब 49 प्रतिशत आबादी के आसपास गर्मी से राहत देने वाली पर्याप्त हरियाली उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह है कि प्राकृतिक संसाधन मौजूद होने के बावजूद शहर के हर हिस्से तक उनका फायदा नहीं पहुंच रहा है। 5. उज्जैन : बाहर रहने वालों का जोखिम ज्यादा उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के कारण बड़ी संख्या में लोग खुले स्थानों में समय बिताते हैं। WRI ने शिप्रा के रामघाट जैसे पर्यटन क्षेत्रों का उदाहरण दिया है, जहां छाया सीमित है। ऐसे स्थानों पर बढ़ती गर्मी का सीधा असर स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर पड़ता है। गांवों में बारिश बदली तो खेती और पानी दोनों प्रभावित WRI की ग्रामीण रिसर्च के मुताबिक किसान पानी की कमी से ही नहीं, गर्मी और अनियमित बारिश से भी परेशान हैं। बेमौसम बारिश से फसल में फूल आने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, दाना कमजोर बन सकता है और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। वहीं मानसून में देरी से भूजल रिचार्ज कम होता है, जिससे गर्मियों में ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या बढ़ सकती है।     बड़वानी : जमीन-पानी बचाने से जुड़ी ग्रामीण आय – WRI ने बड़वानी में जलवायु जोखिम को सिर्फ खेती के नुकसान तक सीमित नहीं माना है। अध्ययन में बताया गया है कि जमीन और पानी की स्थिति सीधे ग्रामीण परिवारों की आय पर असर डालती है। इसलिए स्थानीय लोगों की भागीदारी से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बहाल करने पर जोर दिया गया है।     सीधी : जमीन की खराब होती स्थिति भी जलवायु जोखिम – सीधी में WRI ने जमीन, पानी और खेती को ग्रामीण आजीविका से जोड़कर देखा है। जमीन की गुणवत्ता या पानी की उपलब्धता प्रभावित होने पर खेती और परिवार की कमाई पर भी असर पड़ता है। इसलिए जलवायु से निपटने की योजना में मौसम के साथ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बचाना भी जरूरी बताया गया है। एक ही जिले में अलग-अलग जोखिम बैतूल WRI की रिसर्च में इस बदलाव को समझने का एक जमीनी मॉडल है। अध्ययन में जिले के दो ब्लॉकों … Read more

IT Jobs में बूम! 1.23 लाख नौकरियां उपलब्ध, लेकिन 55% वैकेंसी सिर्फ अनुभवी उम्मीदवारों के लिए

 नई द‍िल्ली भारत के टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट से एक बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर आई है. देश में टेक नौकरियों की संख्या पिछले 18 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में एक्टिव जॉब्स का आंकड़ा 1.23 लाख के पार हो गया है. लेकिन, अगर आप कॉलेज पासआउट हैं और यह सोच रहे हैं कि बाजार खुलने का सीधा फायदा आपको मिलेगा, तो ठहरिए—आंकड़ों की इस चमक के पीछे एक बड़ा कैच (पेच) छुपा है।  स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' की ताजा 'एक्टिव टेक जॉब्स आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में नौकरियों की मांग सितंबर के मुकाबले 5% और पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 17% बढ़ी है. हालांकि, रिकवरी की यह बयार सबके लिए एक जैसी नहीं है, इस बाजार पर पूरी तरह से अनुभवी पेशेवरों का कब्जा दिख रहा है।  1.23 लाख नौकरियां… आखिर किसे मिल रहा है मौका? आंकड़ों का हिसाब-किताब देखें तो मिड-सीनियर (अनुभवी) रोल्स की मांग सबसे ज्यादा है. अकेले इस सेगमेंट में 68,000 वेकेंसी हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा हैं. इसमें सालाना आधार पर 19% का उछाल दर्ज किया गया है।  दूसरी तरफ, फ्रेशर्स या एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या महज 15,000 पर सिमट कर रह गई है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल से 15% ज्यादा है, लेकिन सितंबर के मुकाबले इसमें 6% की गिरावट दर्ज की गई है. साफ संदेश है कि बाजार तो बड़ा हो रहा है, लेकिन मलाई अनुभवी हाथों के हिस्से ही आ रही है।  हायरिंग लेवल का पूरा गणित मिड-सीनियर: 68,000 (कुल का 55%, YoY +19%) एंट्री-लेवल: 15,000 (YoY +15%, लेकिन MoM -6%) मिड-जूनियर: 7,000 (MoM +40%, YoY +17%) सीनियर रोल्स: 2,000 (मांग का छोटा हिस्सा) अन्य/अपरिभाषित पद: 31,000 कंपनियों को कैसी स्किल्स की तलाश है? इस रिकवरी को सबसे ज्यादा सहारा आईटी सर्विसेज से मिल रहा है, जहां 66,000 एक्टिव नौकरियां हैं जो पिछले साल अक्टूबर से 57% ज्यादा हैं।  कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर नौकरियां नहीं बांट रहीं. Xpheno के मुताबिक, एआई इंजीनियरिंग (AI Engineering), डेटा एनालिस्ट और टेक्निकल लीडरशिप जैसे रोल्स की जबरदस्त डिमांड है. टॉप 6 आईटी कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि इन खास रोल्स में टैलेंट पूल पिछले दो तिमाहियों में 14% से 22% तक बढ़ा है।  कोर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रोल्स 61,000 नौकरियों के साथ सबसे आगे हैं. इसके बाद टेक बिजनेस डेवलपमेंट व सेल्स (14,000), टेक कंसल्टिंग (5,000) और आईटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (3,000) का नंबर आता है।  वर्क-फ्रॉम-होम का जमाना खत्म, ऑफिस वापसी का दौर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 18,000 वेकेंसी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 64% ज्यादा हैं. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव काम करने के तरीके में आया है.  वर्क-फ्रॉम-ऑफिस (WFO): 1 लाख नौकरियां (कुल मांग का 81%) पूरी तरह ऑफिस से काम करने वाली हैं. रिमोट और हाइब्रिड: वर्क-फ्रॉम-होम (रिमोट) नौकरियों में 23% और हाइब्रिड रोल्स में 19% की भारी गिरावट आई है. बेंगलुरु का दबदबा कायम, लेकिन टियर-2 और 3 शहरों ने चौकाया टेक जॉब्स के मामले में 31,000 नौकरियों के साथ बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा हब बना हुआ है. इसके बाद हैदराबाद (14,000) और दिल्ली-एनसीआर (9,000) का नंबर आता है. लेकिन असली चौंकाने वाला आंकड़ा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आया है. छोटे शहरों में एक्टिव टेक नौकरियों की संख्या बढ़कर 40,000 पहुंच गई है, जिसमें सालाना आधार पर 67% की रिकॉर्ड तेजी देखी गई है। 

मध्यप्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार, 500 किमी रेल लाइन का सर्वे जल्द पूरा होने की उम्मीद

भोपाल  पश्चिम मध्य रेलवे में लगातार बढ़ते रेल यातायात के दबाव से निपटने के लिए तीसरी रेल लाइन के विस्तार पर काम किया जा रहा है। रेलवे 500 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की तैयारी है। बताया जाता है कि परियोजना का सर्वे अंतिम चरण में है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद काम शुरु किया जाएगा। करीब तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के लिए नया रेल पाथ उपलब्ध होगा। इससे ट्रेनों को रोकने और लाइन क्लियर होने के इंतजार की समस्या कम होगी। ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ परिचालन को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा। कार्य अंतिम स्तर पर थर्ड लाइन को लेकर सर्वे का कार्य अंतिम स्तर पर है। इसके तैयार होने से न केवल ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि पंक्चुअलिटी भी बेहतर होगी। इससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। – डॉ. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, पमरे रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का दबाव पश्चिम मध्य रेलवे का इटारसी जंक्शन प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल है। यहां से रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस नेटवर्क से गुजरती हैं। मौजूदा दो लाइनों पर बढ़ते यातायात के कारण कई बार ट्रेनों को लाइन क्लियरेंस के लिए रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान सूत्रों के अनुसार, तीसरी लाइन परियोजना पर करीब 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है। रेलवे के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाने में करीब 12 से 15 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। यह खर्च भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा। इसमें ट्रैक निर्माण के साथ सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य जरूरी रेल अधोसंरचना के काम भी शामिल होंगे। जबलपुर को भी मिलेगा फायदा इस रेलखंड से जबलपुर होकर कई लंबी दूरी की ट्रेनें संचालित होती हैं। यह रेलखंड माल परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन में सुधार का लाभ बड़ी संख्या में यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों के कारण मालगाड़ियों को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होगी। इससे माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। यह है स्थिति 500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन। 07 हजार करोड़ रुपए अनुमानित लागत। 450 से अधिक ट्रेनों का होता है आवागमन। 300 यात्री ट्रेनें, और 150 मालगाड़ियों की आवाजाही यह होगा फायदा ट्रैक मेंटेनेंस के लिए समय मिलेगा। ट्रैक का रखरखाव आसान होगा। ट्रेनों की गति बढ़ेगी। परिचालन व्यवस्था बेहतर होगी। कोचिंग ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी।

शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ समय क्या है? जानें 11 अक्टूबर का मुहूर्त और मां शैलपुत्री की पूजा विधि

Sharadiya Navratr2026 : शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होती है.  इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है.  अगर आप भी नवरात्र में घटस्थापना की तैयारी कर रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और स्थापना की विधि जान लेना जरूरी है.  साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी. कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र के पहले दिन यानी 11 अक्टूबर को कलश स्थापना की जाएगी.  नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के मुताबिक, घटस्थापना का सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है.  वहीं, वैकल्पिक अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा.   ध्यान रखें कि घटस्थापना का मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है.  इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि कर लें. कब शुरू होगी प्रतिपदा तिथि? हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी.  उदया तिथि के आधार पर नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर को माना जाएगा.  इसी दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना की परंपरा है. कलश स्थापना के लिए किन चीजों की जरूरत होगी? घटस्थापना से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहता है.  इसके लिए मिट्टी का पात्र, जौ, साफ मिट्टी, जल से भरा कलश, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप और फल जैसी सामग्री रख सकते हैं.  परंपरा के अनुसार सामग्री में क्षेत्र और परिवार की पूजा-पद्धति के आधार पर अंतर हो सकता है. कैसे करें कलश स्थापना? सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें . मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा को साफ स्थान पर स्थापित करें.  इसके बाद पूजा की चौकी तैयार करें. परंपरा के अनुसार मिट्टी के पात्र में मिट्टी और जौ बोएं. अब कलश में जल भरें.  उसमें सुपारी, अक्षत या सिक्का डालें.  कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें.  इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा के बाद आरती करें. नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.  धार्मिक मान्यताओं में उन्हें शक्ति, स्थिरता और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है.  भक्त इस दिन पूजा-अर्चना और व्रत का संकल्प लेते हैं.  इसके बाद नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है. नवरात्र से पहले इन बातों का रखें ध्यान कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को साफ रखें, जरूरी सामग्री पहले से जुटा लें.  पूजा के दौरान स्वच्छता और अपनी परंपरा के अनुसार नियमों का पालन करें.  अगर अखंड ज्योति जलाने की योजना है, तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था भी पहले कर लें.  

11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, कलश स्थापना से पहले घर में इन बातों का रखें ध्यान

Sharadiya Navratri शारदीय नवरात्र शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं.  इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और घरों में कलश स्थापना से लेकर अखंड ज्योति तक कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं.  मान्यता है कि नवरात्र से पहले घर की साफ-सफाई और पूजा स्थल की तैयारी कर लेना शुभ माना जाता है.  इस बार शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होकर 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी. नवरात्र से पहले घर की सफाई करें नवरात्र शुरू होने से पहले घर के पूजा स्थल और आसपास की अच्छी तरह सफाई कर लें.  धार्मिक मान्यताओं में साफ-सुथरे स्थान को पूजा के लिए विशेष महत्व दिया गया है.  इसलिए मंदिर की सफाई के साथ वहां रखी पुरानी या खराब हो चुकी पूजा सामग्री को भी व्यवस्थित कर लें. घर के मुख्य द्वार, पूजा घर और रसोई की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है. नवरात्र के दौरान कई लोग सात्विक भोजन और व्रत का पालन करते हैं, इसलिए रसोई को भी पहले से व्यवस्थित करना सुविधाजनक रहेगा. पूजा की सामग्री पहले से जुटा लें नवरात्र में कलश स्थापना की जाती है, इसलिए पूजा सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर है.  कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, फल और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री की व्यवस्था पहले ही कर लें. अगर आप नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो दीपक, तेल या घी और पर्याप्त मात्रा में बाती भी पहले से रख लें.  इससे पूजा के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी. घर के पूजा स्थल को सजाएं नवरात्रि से पहले पूजा घर को फूलों, साफ कपड़े और दीपक से सजाया जा सकता है.  मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को साफ करके उचित स्थान पर स्थापित करें.  पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक सामान न रखें. धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल को शांत और स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है. नवरात्रि में घटस्थापना का महत्व नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है.  2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगी.  नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है.  हालांकि पूजा का मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना बेहतर है. महालया कब है? दुर्गा पूजा और नवरात्र से पहले महालया का भी विशेष महत्व माना जाता है.  साल 2026 में महालया 10 अक्टूबर को है.  बंगाली परंपरा में महालया के साथ देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है . इसके बाद मां दुर्गा के आगमन की तैयारियां तेज हो जाती हैं. दुर्गा पूजा कब से शुरू होगी? 2026 में कोलकाता समेत बंगाल में दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव 17 अक्टूबर से शुरू होगा.  षष्ठी से लेकर विजयादशमी तक पूजा और उत्सव का सिलसिला चलेगा.  पश्चिम बंगाल के आधिकारिक पूजा कैलेंडर के अनुसार 17 अक्टूबर को महाषष्ठी, 18 अक्टूबर को महासप्तमी, 19 अक्टूबर को महाअष्टमी, 20 अक्टूबर को महानवमी और 21 अक्टूबर को विजयादशमी होगी. वहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में शारदीय नवरात्र 11 से 19 अक्टूबर तक रहेगी, 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी.  क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार तारीखों में अंतर हो सकता है. नवरात्रि से पहले मन और घर दोनों तैयार करें नवरात्रि को केवल पूजा-पाठ का समय ही नहीं बल्कि आत्मचिंतन और सकारात्मक शुरुआत का अवसर भी माना जाता है.  इसलिए इन नौ दिनों की शुरुआत से पहले घर को व्यवस्थित करने के साथ अपने दैनिक जीवन में भी अनुशासन लाने की कोशिश करें.  पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक नियमों का पालन अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है.

नवरात्रि के पहले दिन करें ये 5 काम, कलश स्थापना से कन्या भोज तक मिलेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद

Navratr 2026 नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। देवी आराधना के लिए समर्पित इन नौ दिनों में भक्त श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से की गई साधना मन को शांति देने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाती है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है। 1. कलश स्थापना करें नवरात्रि के प्रथम दिन घर में विधि-विधान से कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है। कलश को शक्ति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। देवी पूजा की शुरुआत कलश स्थापना और मां दुर्गा के आह्वान से की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक कलश की स्थापना भक्त को नियमित पूजा, जप और साधना से जोड़े रखती है। 2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष महत्व रखता है। संभव हो तो प्रतिदिन इसका पाठ करें। यदि समय कम हो तो देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का नियमित पाठ किया जा सकता है। सुविधा के अनुसार दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को नौ दिनों में बांटकर भी पढ़ा जा सकता है। मान्यता है कि देवी की महिमा का पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और मां की कृपा प्राप्त होती है। 3. नवार्ण मंत्र का जाप करें नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का जाप देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंत्र है- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। मान्यता के अनुसार इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली की आराधना का फल प्राप्त होता है। इसे रुद्राक्ष की माला से जप सकते हैं। समय कम हो तो रोज कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करें। 4. कन्याओं को भोजन कराएं नवरात्रि में कन्या पूजन और कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है। सामर्थ्य हो तो प्रतिपदा से महानवमी तक कन्याओं को भोजन कराया जा सकता है। किसी अनाथालय में बच्चियों को भोजन कराना भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है। 5. जरूरतमंदों की सहायता करें नवरात्रि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सेवा और दान-पुण्य का भी अवसर है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, दवाएं, जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुएं दान करें। सामर्थ्य रखने वाले लोग बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण में सहयोग करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं। सच्चे मन से की गई सेवा को देवी आराधना का ही एक रूप माना जाता है।

UP के किसानों के लिए बड़ा फैसला, खरीफ सीजन 2026-27 में 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी सरकार

किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति को मंजूरी   मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद के लिए प्रदेश में 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव   बाजरे के समर्थन मूल्य में 125 और हाइब्रिड ज्वार में 324 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी   किसानों से 31 दिसंबर तक होगी खरीद, यथासंभव 48 घंटे में बैंक खाते में पहुंचेगा भुगतान   लखनऊ  प्रदेश के किसानों को मोटे अनाज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति तय कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश में कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज की खरीद का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। खरीद के लिए 455 क्रय केंद्र खोलने की तैयारी है। बाजरे और हाइब्रिड ज्वार के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि हुई है। खरीद की अवधि एक अक्टूबर से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई है।   कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने क्रय नीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों से भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीद की जाएगी। उपज का भुगतान बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर सीधे किसानों के खातों में कराया जाएगा।   बाजरा 2900 और मक्का 2410 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा नई क्रय नीति के अनुसार, बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसमें 125 रुपये की वृद्धि हुई है। मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। वहीं, हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 3699 रुपये से बढ़कर 4023 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसमें 324 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ज्वार मालदांडी का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।   बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य प्रदेश में मोटे अनाज की सरकारी खरीद के लिए कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है। इसमें बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार की 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का की 15 हजार मीट्रिक टन खरीद शामिल है। सबसे अधिक खरीद का लक्ष्य बाजरे के लिए रखा गया है।   बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र खुलेंगे मोटे अनाज की खरीद के लिए प्रदेश में कुल 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इनमें बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र होंगे। क्रय केंद्र मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जहां संबंधित फसल की अच्छी आवक होती है और सरकारी खरीद की पर्याप्त संभावना रहती है।   इन 25 जिलों में होगी मक्का की खरीद मक्का की खरीद बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और ललितपुर में की जाएगी।   बाजरे की खरीद के लिए 33 जिले निर्धारित बाजरे की खरीद बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर में होगी।   ज्वार की खरीद के लिए चुने गए 13 जिले ज्वार की सरकारी खरीद उन्नाव, हरदोई, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, मिर्जापुर, झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में की जाएगी।   ऑनलाइन पंजीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य सरकारी खरीद के लिए किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। क्रय केंद्रों पर कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद होगी। इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीन के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा। खरीद की प्रक्रिया राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन संचालित होगी।   आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे मिलेगा भुगतान किसानों से खरीदी गई उपज का भुगतान उनके आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप किए गए बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से बैंक खातों का सत्यापन होगा। सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में धनराशि भेजने की व्यवस्था की गई है।