samacharsecretary.com

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए PM मोदी को ईरान का निमंत्रण, बढ़ी कूटनीतिक चर्चा

नई दिल्ली  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई कर आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है। 28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।  

रास लाफान हादसे पर कतर के अमीर ने PM मोदी से की बात, भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली  कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दर्दनाक हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत की हो गई है। इस बीच मंगलवार को कतर के अमीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास फोन करके इस हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कतर और भारत नागरिकों की भलाई और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए हादसे को लेकर कतर के अमीर ने जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- 'मैं कतर के अमीर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने फोन करके कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना जताई। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और एक-दूसरे के साथ एकजुटता से खड़े हैं।' 12 भारतीय नागरिकों की मौत     कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में पुष्टि करते हुए बताया, ''रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।''     अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है। दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक है रास लाफान रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ, जब फैसिलिटी में कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सपोर्ट टर्मिनल के कुछ हिस्सों को फिर से चालू करने का काम चल रहा था, तभी धमाका हुआ। कंपनी के मुताबिक, रविवार रात इसी काम के दौरान बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई। बरजान फैसिलिटी कतर के गैस आधारभूत संरचना का एक अहम हिस्सा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1.4 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रतिदिन है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को चलाने के लिए किया जाता है, जो इस सूखे खाड़ी देश में पानी की आपूर्ति करते हैं।

PM मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- उनकी नेतृत्व शैली प्रभावशाली और दृढ़ है

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने शी जिनपिंग को ऐसा नेता बताया जो पूरी तरह अपने काम पर केंद्रित रहते हैं और हर मुद्दे को गंभीरता से संभालते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप ने बेहद सख़्त, निर्णायक और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाला नेता बताया. ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने देशों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि काफी मजबूत है, जिसकी वह व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हैं।  इससे पहले भी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी जमकर प्रशंसा की. लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी जितने शांत स्वभाव के नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के विपरीत, जो शांत, संयमित और बेहद प्रभावशाली हैं, मैं ऐसा नहीं हूं।   भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा "प्रधानमंत्री @narendramodi को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए @POTUS का आमंत्रण साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा!"

ट्रंप ने भारत को दिया खुला समर्थन, कहा- किसी ने हमला किया तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत के समर्थन को लेकर बड़ा बयान दिया. ट्रंप ने कहा कि अगर कभी भारत पर हमला होता है, तो अमेरिका उसके साथ खड़ा होगा. ट्रंप ने कहा, ‘अगर पीएम मोदी हैं और भारत पर क‍िसी ने अटैक क‍िया तो अमेरिका भारत के लिए मौजूद रहेगा, भले ही इस संबंध में कोई लिखित समझौता न हो. कोई और नेता होगा तो हम कह नहीं सकते।  राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण र‍िश्तों के बीच आया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरा विश्वास और साझेदारी है।  ट्रंप के बड़े बयान ट्रंप ने भारत के भविष्य की संभावनाओं को पीएम मोदी के पद पर बने रहने से जोड़ते हुए कहा, जब तक मोदी भारत के नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाएगा।  ट्रंप ने कहा, पिछली बार भारत का दौरा बहुत शानदार रहा था. हमने उस नए स्टेडियम का उद्घाटन किया था… भारत में मेरा समय बहुत अच्छा बीता… मुझे लगता है कि हर चीज में भारत की बड़ी भूमिका है. जब तक वे (पीएम मोदी) वे नेता हैं. भारत बड़ी भूमिका निभाने वाला है… जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, व्हाइट हाउस में उनका एक बहुत अच्छा दोस्त है. मुझे नहीं पता कि कहां कोई समस्या है. मुझे ऐसा नहीं लगता. यहां हर कोई भारत को पसंद करता है और इस व्यक्ति (पीएम नरेंद्र मोदी) के लिए बहुत सम्मान रखता है।  पीएम मोदी की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा- वह (पीएम मोदी) बहुत टफ न‍ेगोश‍िएटर हैं. मैं आपको एक बात बताता हूं. वह दिखने में बहुत अच्छे हैं, बहुत भले लगते हैं, जैसे कोई फरिश्ता हों. लेकिन वह बहुत टफ नेगोश‍िएटर हैं. वह बहुत कठोर हैं. वह बहुत ही कड़े मिजाज के इंसान हैं. लेकिन वह दिखते बहुत अच्छे हैं. इसी तरह वह आपको चौंका देते हैं।  जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस पर फिर से कोई प्रतिबंध लगाए जाएंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हम इस पर विचार कर रहे हैं. हम देख रहे हैं कि तेल की कीमतें कितनी नीचे आती हैं, वे तेजी से गिर रही हैं… कीमतें कम हो रही हैं और जल्द ही उस स्तर पर आ जाएंगी जो 4 महीने पहले था. इसके अलावा, हमारे सामने बिना परमाणु हथियारों वाला ईरान होगा. मैं कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री भी इस बात को लेकर बहुत गंभीर हैं। 

No Hug, Only Handshake! मोदी-ट्रंप की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां, समझिए भारत का कूटनीतिक मैसेज

नई दिल्ली आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी।  जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई।  पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं. पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया।  कैसे दोनों की हुई मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही।  मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी।  पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले।  इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही।  मोदी के नो हग का मैसेज हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा।  पीएम मोदी ने उन्‍हीं की भाषा में समझाया कैसे न‍िभाते हैं र‍िश्ते कहते हैं क‍ि क‍िसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाह‍िए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्‍कुल वही क‍िया. ज‍िस रोनाल्‍ड रीगन को डोनाल्‍ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, ज‍िनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्‍ता में आए हैं, उन्‍हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया क‍ि जो दुन‍ियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया क‍ि दूसरे देशों के साथ र‍िश्ते कैसे न‍िभाते हैं।  मौका G7 सम‍िट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्‍होंने कहा- आज दुन‍िया इंटरकनेक्‍टेड है. एक दूसरे पर ड‍िपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरश‍िप का महत्‍व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरश‍िप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में व‍िश्वास हो. यह भरोसा हो क‍ि सप्‍लाई चेन का इस्‍तेमाल हथ‍ियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण द‍िया. उन्‍होंने कहा, रोनाल्‍ड रीगन कहते थे क‍ि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्‍टेड रूल बेस्‍ड ऑर्डर का न‍िर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो क‍िसी रूल बेस्‍ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्‍लाई चेन को हथ‍ियार बना रहे हैं. कभी टैर‍िफ लगा द‍िया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे।  भारत का उदाहरण देकर समझाया पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्‍ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन … Read more

PM मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री की संयुक्त प्रेस वार्ता, रक्षा, व्यापार और तकनीक पर बने अहम समझौते

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा में स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ जॉइंट प्रेस मीट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत स्लोवाकिया के रिश्ते को रेखांकित किया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेट साइन किया है।  पीएम ने अपने संबोधन में कहा, "मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं. वह एक अनुभवी नेता और भारत के सच्चे दोस्त हैं. भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अहम रोल रहा है. मुझे खुशी है कि उनसे मिलकर मुझे हमारे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पल देखने का मौका मिला।  रक्षा सहयोग के लिए साइन की डील पीएम ने कहा, "मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है. मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी का दर्जा देने का फैसला किया है।  पीएम मोदी ने कहा, "रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक अभिसरण का प्रमाण है. मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया. इससे संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा में स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ जॉइंट प्रेस मीट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत स्लोवाकिया के रिश्ते को रेखांकित किया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेट साइन किया है।  पीएम ने अपने संबोधन में कहा, "मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं. वह एक अनुभवी नेता और भारत के सच्चे दोस्त हैं. भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अहम रोल रहा है. मुझे खुशी है कि उनसे मिलकर मुझे हमारे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पल देखने का मौका मिला।  रक्षा सहयोग के लिए साइन की डील पीएम ने कहा, "मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है. मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी का दर्जा देने का फैसला किया है."  पीएम मोदी ने कहा, "रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक अभिसरण का प्रमाण है. मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया. इससे संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।  दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध हमारे संबंधों को मजबूत आधार प्रदान करते हैं. भारत के प्राचीन उपनिषदों का “स्लोवाक” भाषा में अनुवाद किया जाना हमारी सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है. स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग यहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।  भारत स्लोवाकिया स्पेस मिशन को किया याद पीएम मोदी बोले, "2017 में स्लोवाकिया की पहली सैटेलाइट भारत द्वारा लांच की गई थी. आज भारत में स्पेस सेक्टर अभूतपूर्व गति से नई ऊंचाइयां छू रहा है. मैं स्लोवाकिया की कंपनियों को इस विकास-यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता हूं। 

क्या होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा भारत? G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-मैक्रों की अहम बैठक

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच फ्रांस ने भारत को एक अहम समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।  फ्रांस कई साझेदार देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में फ्री शिपिंग और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय पहल पर काम कर रहा है. इस पहल में भारत को भी शामिल किए जाने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य उपकरणों की खरीद, रणनीतिक साझेदारी और पश्चिम एशिया के ताजा हालात प्रमुख मुद्दे होंगे. हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा वैश्विक चिंता बन गई है।  भारत-अमेरिका-कतर समेत कई देशों की अलग मीटिंग G7 सम्मेलन के इतर पश्चिम एशिया पर केंद्रित एक विशेष बैठक भी होगी, जिसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है।  विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और मैक्रों की बैठक में पश्चिम एशिया समेत सभी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. उन्होंने संकेत दिया कि विभिन्न देशों द्वारा हाल में की गई नई पहलों और घोषणाओं पर भी विचार-विमर्श होगा।  फ्रांस युद्ध में शामिल नहीं, लेकिन समुद्री सुरक्षा जरूरी फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि समुद्री मार्गों का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. उनका कहना है कि फ्रांस किसी युद्ध का हिस्सा नहीं है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।  फ्रांस ने भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर बेहद मजबूत है. रिपोर्ट में फ्रांसीसी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, भारत अब G7 से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मंचों का हिस्सा बन चुका है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है. इस बीच सिबी जॉर्ज ने यह भी संकेत दिया कि 14 से 16 जून के बीच होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं। 

PM मोदी का नया सियासी वार! कांग्रेस ग्रोथ रेट का जिक्र कर विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली एनडीए की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि जिस धीमी विकास दर को दशकों तक ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ कहा गया, उसे वास्तव में ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उस दौर की नीतियों, शासन शैली और आर्थिक फैसलों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, न कि देश की संस्कृति या बहुसंख्यक समाज. पीएम मोदी ने जो बातें कहीं हैं, वो कांग्रेस के ल‍िए मुसीबत के बीज की तरह हैं. क्‍योंक‍ि बीजेपी अब इस शब्‍द को लोगों के बीच ले जाएगी, उन्‍हें बताएगी क‍ि कांग्रेस राज में क‍िस तरह ह‍िन्‍दुओं के माथे पर कलंक मढ़ा गया।  पीएम मोदी ने कहा, NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था. देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट।  ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर समझाया पीएम मोदी ने कहा- सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी. आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी. आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा. इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है, जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है।  कहां से आया ये शब्‍द ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द मुख्य रूप से 1950 से 1980 के दशक के बीच भारत की औसत आर्थिक विकास दर के लिए इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर करीब 3 से 3.5 प्रतिशत के आसपास रहती थी. जबकि आबादी तेजी से बढ़ रही थी. नतीजा यह हुआ कि प्रति व्यक्ति आय में बहुत सीमित बढ़ोतरी हुई. कहते हैं क‍ि इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्‍णा ने किया था. उनका मकसद धीमी आर्थिक वृद्धि को व्यंग्यात्मक ढंग से बताना था. बाद में नेताओं ने इसका इस्‍तेमाल करना शुरू कर द‍िया, ज‍िसका ज‍िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क‍िया।  पीएम मोदी ने इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ क्यों कहा? प्रधानमंत्री मोदी का तर्क है कि धीमी विकास दर के लिए भारत की सभ्यता, संस्कृति या समाज को जिम्मेदार ठहराना गलत था. उनके मुताबिक उस समय देश में जिस तरह की आर्थिक नीतियां लागू थीं, वे कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाई गई थीं. स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत में लाइसेंस-परमिट राज, सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था और सीमित निजी निवेश का मॉडल लागू रहा. उद्योग लगाने से लेकर उत्पादन बढ़ाने तक लगभग हर काम के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत पड़ती थी. पीएम मोदी का कहना है कि विकास की धीमी गति की वजह यही नीतियां थीं. इसलिए उस दौर को हिंदू ग्रोथ रेट कहने के बजाय कांग्रेस ग्रोथ रेट कहना अधिक उचित होगा।  अटल सरकार का जिक्र क्यों किया? अपने भाषण में मोदी ने कहा कि देश ने पहली बार तेज विकास की झलक तब देखी जब अटल जी की सरकार आई. अटल सरकार के दौर में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, ग्रामीण सड़क योजना, दूरसंचार क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश जैसे कदम उठाए गए थे. बीजेपी लंबे समय से दावा करती रही है कि आर्थिक सुधारों को गति देने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मजबूत करने में अटल सरकार की बड़ी भूमिका रही. मोदी ने इसी संदर्भ में अटल सरकार को तेज विकास का शुरुआती मॉडल बताया। 

आखिर क्यों इस छोटे से देश में तीन दिन बिताएंगे प्रधानमंत्री मोदी? रणनीतिक वजहें आईं सामने

नई दिल्ली स्‍लोवाक‍िया, ज‍िसकी आबादी तकरीबन 55 लाख है, यानी जयपुर से भी कम. फ‍िर इस देश में ऐसा क्‍या है क‍ि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन द‍िन के दौरे पर जा रहे हैं. 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी. पीएम मोदी वहां 14 से 16 जून तक रहेंगे. लगातार मीटिंग फ‍िक्‍स है. आपके मन में भी सवाल होगा क‍ि पीएम मोदी वहां इतना टाइम क्‍यों दे रहे हैं? वहां से क्‍या हास‍िल होने वाला है? स्लोवाकिया आकार में भले छोटा देश हो, लेकिन भारत के लिए उसकी रणनीतिक, आर्थिक और ज‍ियोपाल‍िट‍िकल अहमियत लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि पीएम मोदी का दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है।  स्‍लोवाक‍िया क्‍यों है खास?     लगभग 55 लाख आबादी वाला स्लोवाकिया दुनिया के सबसे बड़े कार मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग सेंटर में गिना जाता है. यहां Volkswagen, Kia, Jaguar Land Rover और Stellantis जैसी कंपनियों के बड़े प्लांट हैं. भारत मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाना चाहता है।      स्लोवाकिया European Union का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत रिश्ते भारत को मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक बेहतर पहुंच दिला सकते हैं. भारत और यूरोपीय यून‍ियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दौर में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है।      रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देश अपने ड‍िफेंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मॉडर्न बना रहे हैं. स्लोवाकिया भी उनमें शामिल है. भारत अपनी डिफेंस कंपनियों और स्वदेशी वेपन स‍िस्‍टम का एक्‍सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में ड‍िफ‍ेंस पार्टनरश‍िप दोनों देशों के रिश्तों का बड़ा आधार बन सकता है।      स्लोवाकिया अपनी बिजली का बड़ा हिस्सा परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है. भारत भी स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसलिए परमाणु तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं।      मध्य यूरोप में भारत अपनी मौजूदगी बढ़ाकर रणनीतिक संतुलन बनाना चाहता है. स्लोवाकिया NATO और EU दोनों का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को यूरोपीय राजनीति और सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावशाली साझेदार बनने में मदद कर सकते हैं।  दुन‍िया के ल‍िए मैसेज पीएम मोदी यह दौरा दिखाता है कि भारत की विदेश नीति अब केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन या फ्रांस जैसे बड़े देशों तक सीमित नहीं है. मोदी सरकार छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रही है। 

आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है

विशेष लेख प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है भोपाल  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ क्षण ऐसे हैं जो केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं होते, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं और विश्वास का प्रतीक बन जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के देश की जनता के निरंतर विश्वास के साथ ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त कर दीर्घकाल तक राष्ट्र का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त करना गौरवपूर्ण क्षण है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण के संकल्प, सेवा और सुशासन की विजय है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च साधन बनाया। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी एक नई पहचान स्थापित की है। आज विश्व भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हुई है और यह परिवर्तन प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच तथा निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी जी का देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित होना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, यह भारत की जनता के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। निरंतर जनसमर्थन किसी पद या प्रचार से नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, पारदर्शिता, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्य शैली से अर्जित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को सदैव "प्रधान सेवक" के रूप में प्रस्तुत किया और गरीब, किसान, महिला, युवा तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सतत प्रयास किया। यही कारण है कि देश की जनता ने बार-बार उन पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, अथक कार्यशक्ति, दूरदर्शी सोच और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्पष्ट संकल्प करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है तथा उन्हें जन-जन का प्रिय नेता बनाता है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना, रक्षा क्षमता, अंतरिक्ष विज्ञान और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और डिजिटल इंडिया जैसे अनेक कार्यक्रमों से करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। शासन की योजनाएँ पहली बार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी ढंग से पहुँची हैं। भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में रहेगा अंकित भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का भी यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों की सदियों पुरानी आस्था की पूर्ति का क्षण था। यह केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्म गौरव का पुनर्स्थापन था। जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक निर्णयों ने राष्ट्रीय एकीकरण को नई मजबूती प्रदान की। विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए जम्मू-कश्मीर आज नए अवसरों की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी ने यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छा शक्ति और स्पष्ट नीति के साथ कठिन से कठिन निर्णय भी राष्ट्रहित में लिए जा सकते हैं। मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का निरंतर लाभ प्राप्त हुआ है मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का लाभ निरंतर प्राप्त करता रहा है। प्रदेश में सड़क, रेल, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश एवं परियोजनाओं ने विकास को नई गति दी है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से गरीब, किसान, महिला और युवाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली अनेक योजनाओं का प्रभाव प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुँचा है। विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से मेरा गृह क्षेत्र रीवा भी इस परिवर्तनकारी यात्रा का साक्षी बना है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। यह परियोजना प्रधानमंत्री जी के उस विजन का प्रतीक है जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। आज रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और विंध्य की पहचान नई संभावनाओं से जुड़ चुकी है। विंध्य क्षेत्र में सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं, शिक्षा संस्थानों और आधारभूत संरचना के विस्तार ने विकास के नए द्वार खोले हैं। यह क्षेत्र अब पिछड़ेपन की पहचान से आगे बढ़कर प्रगति और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार का सतत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मुझे यह अनुभव करने का अवसर मिला है कि प्रधानमंत्री जी की सोच केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ भारत के व्यापक निर्माण की है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजना ने गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। प्रदेश सरकार भी प्रधानमंत्री जी के इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व हमें यह विश्वास देता है कि विकसित भारत का संकल्प केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक साकार होती राष्ट्रीय यात्रा है। उनके नेतृत्व में भारत ने आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज प्रत्येक भारतीय गर्व के साथ कह सकता है कि उसका देश विश्व पटल पर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। व्यक्तिगत रूप से मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे ऐसे युग निर्माता नेतृत्व के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है। भारतीय चिंतन में आदर्श नेतृत्व का आधार सदैव लोक कल्याण और राष्ट्रहित रहा है। "प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥" शासक का सुख प्रजा के सुख में और उसका हित प्रजा के हित में निहित होता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र प्रथम की यही भावना निरंतर परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश और विंध्य की जनता … Read more