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आज DA Hike पर लग सकती है मुहर! कैबिनेट बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों की बढ़ सकती है सैलरी

नई दिल्ली केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DA DR Hike) में बढ़ोतरी को लेकर आज अच्छी खबर आ सकती है। 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले डीए-डीआर का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों की नजर अब 21 अक्टूबर याानी आज होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक पर है। माना जा रहा है कि सरकार इस बैठक में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को मंजूरी दे सकती है। कर्मचारी संगठनों को डीए बढ़ने की उम्मीद ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि डीए के ऐलान (DA Hike 2026) में इस बार काफी देरी हो चुकी है। ऐसे में उम्मीद है कि बुधवार यानी आज होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर फैसला लिया जा सकता है। वहीं, ऑल इंडिया डिफेंस इंप्लॉइज फेडरेशन के सचिव सी. श्रीकुमार ने भी बैठक के बाद डीए बढ़ोतरी की घोषणा होने की उम्मीद जताई है। डीए में देरी से कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता बढ़ रही है। इसी के चलते कंफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इंप्लॉइज एंड वर्कर्स ने 16 अक्टूबर को अलग-अलग कार्यस्थलों पर लंच ब्रेक के दौरान प्रदर्शन किया था। संगठन ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर 1 जुलाई से डीए, डीआर और बोनस का जल्द ऐलान करने की मांग की थी। सरकार इससे पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए परफॉर्मेंस-लिंक्ड बोनस (PLB) और नॉन-PLB बोनस की घोषणा कर चुकी है, लेकिन डीए पर फैसला अभी बाकी है। कितना बढ़ सकता है महंगाई भत्ता? फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को 60% की दर से महंगाई भत्ता (DA Hike) मिल रहा है। डीए की गणना पिछले 12 महीनों के औसत खुदरा महंगाई के आंकड़ों के आधार पर की जाती है। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, इस बार डीए में 3% की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर सरकार इसे मंजूरी देती है, तो महंगाई भत्ता 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। सैलरी में कितना होगा फायदा? अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 44,900 रुपए है, तो मौजूदा 60% डीए के हिसाब से उसका कुल वेतन 71,840 रुपए बताया गया है। डीए बढ़कर 63% होने पर यह रकम 73,187 रुपए (Salary Hike 2026) हो सकती है। इस हिसाब से कर्मचारी को हर महीने करीब 1,347 रुपए का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। अब सभी की नजरें कैबिनेट बैठक पर हैं, जहां डीए बढ़ोतरी को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

लद्दाख में पानी और बिजली संकट दूर करने की तैयारी, ₹3,350 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन

लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लिए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3350 करोड़ रुपये की पांच बड़ी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया।इन परियोजनाओं का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना, ऊर्जा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और जल सुरक्षा को बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने दोपहर करीब साढ़े 12 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक सभा को संबोधित किया। इन प्रमुख परियोजनाओं में लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डे पर बनी नई यात्री टर्मिनल बिल्डिंग भी शामिल है। इसे बनाने में 640 करोड़ रुपये की लागत आई है। करीब 23800 वर्ग मीटर में फैले इस टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता 35 लाख है। ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए इसमें जियोथर्मल एनर्जी सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह लद्दाख के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में टिकाऊ बुनियादी ढांचे पर दिए गए जोर को दर्शाता है। आधुनिक यात्री सुविधाओं और लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित वास्तुकला के साथ डिजाइन किया गया यह टर्मिनल, यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाएगा और देश के बाकी हिस्सों के साथ हवाई संपर्क को मजबूत करेगा। निम्मू-पदुम-दारचा सड़क का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा बनाई गई 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दारचा सड़क को भी राष्ट्र को समर्पित किया। यह सड़क लेह के निम्मू को हिमाचल प्रदेश के दारचा से जोड़ती है और दुर्गम जंस्कार घाटी से होकर गुजरती है। यह श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह राजमार्गों के अलावा लद्दाख तक पहुंचने का एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है। हिमालय के कठिन इलाकों और अधिक ऊंचाई वाले शिनकुन ला दर्रे से होकर गुजरने वाली यह सड़क, सशस्त्र बलों की आवाजाही और लॉजिस्टिक सपोर्ट को बेहतर बनाएगी। इससे जंस्कार क्षेत्र के निवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बाजारों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। ऊर्जा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने 9 मेगावाट की 'हनु स्मॉल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट' और 66 kV की 'डबल-सर्किट दाह-हनु-खालत्सी ट्रांसमिशन लाइन' का उद्घाटन किया।इन परियोजनाओं का लक्ष्य बिजली वितरण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाना और लद्दाख की अक्षय ऊर्जा क्षमता का उपयोग करना है। हेरिटेज टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा प्रधानमंत्री मोदी लेह के सिंधु घाट पर भारत के पहले 'पेट्रोग्लिफ कंजर्वेशन पार्क' (प्राचीन शैल-चित्र संरक्षण पार्क) का उद्घाटन किया। लद्दाख में प्रागैतिहासिक काल की सैकड़ों ऐसी जगहें हैं जहां चट्टानों पर वन्यजीवों, इंसानों और विभिन्न प्रतीकों की आकृतियां उकेरी गई हैं। ये आकृतियां हजारों साल पुराने मानव इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। यह संरक्षण पार्क इन पुरातात्विक अवशेषों को सुरक्षित रखने लोगों में जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित जगह प्रदान करेगा। 40 जल निकायों का भी उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत 40 गांवों में तैयार किए गए 40 जल निकायों का उद्घाटन भी किया। 'मिशन अमृत सरोवर' के उद्देश्यों के अनुरूप, यह पहल लद्दाख में जल संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने पर केंद्रित है। लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता में मौसमी असंतुलन रहता है। साल के कुछ समय तो बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से काफी पानी मिलता है, लेकिन बुवाई के अहम समय में किसानों को अक्सर पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इसका किसानों को बहुत फायदा मिलेगा।

भारत बनेगा Hyundai का बड़ा ऑटो हब, ₹1.47 लाख करोड़ के निवेश से बढ़ेंगे मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के मौके

नई दिल्‍ली  दक्षिण कोरियाई कंपनी हुंडई मोटर ग्रुप 2026 और 2032 के बीच भारत में 15.5 अरब डॉलर (करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इससे हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड और किआ इंडिया की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लोकल सोर्सिंग और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े बिजनेस भी मजबूत होंगे। नई दिल्ली में हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक के बाद मंगलवार को इस सात साल के निवेश प्लान की घोषणा की गई। यह प्लान कोरियाई ऑटोमोटिव ग्रुप की ग्लोबल ग्रोथ स्ट्रैटेजी में भारत के बढ़ते महत्व को दिखाता है। भारत में बनेगी खास निवेश इकाई यह पहल भारत को हुंडई मोटर ग्रुप की भविष्य की ग्रोथ, उभरते बाजारों में विस्तार और अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव इनोवेशन के लिए एक अहम रणनीतिक बाजार के तौर पर स्थापित करती है। इतने बड़े पैमाने पर निवेश की इस पहल को सही ढंग से लागू करने के लिए हुंडई मोटर ग्रुप भारत में एक खास निवेश इकाई बनाएगा। यह इकाई R&D इंफ्रास्ट्रक्चर, भविष्य की टेक्नोलॉजी और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के बड़े इकोसिस्टम में निवेश का तालमेल बिठाएगी। साथ ही उसे लागू करेगी। भारत में निवेश और रणनीतिक विस्तार हुंदै मोटर समूह के कार्यकारी चेयरमैन ईसुन चुंग ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान भारत के वाहन उद्योग के भविष्य और समूह की दीर्घकालिक वृद्धि रणनीति पर चर्चा हुई। समूह ने कहा कि निवेश का बड़ा हिस्सा हुंदै मोटर इंडिया और किआ इंडिया की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना और भारत को समूह के प्रमुख वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है। भारत में समूह की मौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता 14 लाख से अधिक वाहनों की है। कलपुर्जों का स्थानीयकरण बढ़ेगा हुंदै स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी बढ़ाकर कलपुर्जों का स्थानीयकरण करेगा। इससे भारत में वाहन कलपुर्जों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में मदद मिलेगी। समूह नई प्रौद्योगिकियों और नए मोबिलिटी कारोबार में भी निवेश करेगा। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, वाहन वित्त और पुराने वाहनों के पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रोजगार के मौके बढ़ेंगे कंपनी चेयरमैन चुंग ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर हुंदै मोटर के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में से एक है। भारत में समूह की मौजूदगी के 30 साल पूरे होने के बाद यह निवेश अगले 30 साल और उससे आगे तक देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत के औद्योगिक विकास में योगदान मिलेगा। भारत ग्रुप के सबसे अहम बाजारों में एक हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन यूइसुन चुंग ने कहा, 'भारत दुनियाभर में हुंडई मोटर ग्रुप के सबसे अहम और रणनीतिक बाजारों में से एक बना हुआ है। पिछले 30 साल भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाते हैं। यह निवेश अगले 30 साल और उसके बाद भी भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से पक्का करता है।' चुंग ने आगे कहा, 'इस निवेश के जरिए हम रोजगार के और मौके पैदा करेंगे। भारत के लगातार औद्योगिक विकास में मदद करने के लिए अपने पार्टनर्स और स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर काम करेंगे।' कंपनी का बड़ा है प्‍लान ग्रुप की योजना बढ़ती मांग को पूरा करने और भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के तौर पर मजबूत करने के लिए अपनी हुंडई और किआ फैसिलिटीज में प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने की है। हुंडई मोटर ग्रुप की भारत में अभी सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 14 लाख से ज्‍यादा गाड़ियों की है। इसमें हुंडई की चेन्‍नई और पुणे फैसिलिटीज और किआ का अनंतपुर प्लांट शामिल हैं। दक्षिण कोरियाई ऑटोमेकर अपनी भारतीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में भी लगभग 70 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। इसमें गाड़ी टेस्टिंग ट्रैक भी शामिल है ताकि अगली पीढ़ी की ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के विकास में तेजी लाई जा सके। इसका प्‍लान लोकल इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने का है। साथ ही भारत को एक अहम इनोवेशन हब के तौर पर विकसित करने की भी योजना है। ग्रुप की योजना रीजनल पार्टनर्स में निवेश करके और एक ज्यादा मजबूत लोकल सप्लाई चेन विकसित कर घरेलू सोर्सिंग को मजबूत करने की है। यह EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, खास ऑटोमोटिव फाइनेंसिंग और गाड़ियों की रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में भी मौके तलाशेगा। साथ ही, यह ज्‍याादा संभावना वाले स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर मोबिलिटी सर्विसेज का विस्तार करेगा। भारत में 24,000 से ज्‍यादा कर्मचारी हुंडई मोटर ग्रुप के भारत में अभी 24,000 से ज्‍यादा कर्मचारी हैं। उसने कहा कि इस निवेश से मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, R&D और सप्लाई चेन में रोजगार के मौके पैदा होने की उम्मीद है। इस घोषणा में हुंडई और किआ के बीच निवेश के बंटवारे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हुंडई मोटर ग्रुप ने अपनी सहयोगी कंपनियों के जरिए भारत में कंपोनेंट और सर्विस से जुड़े कामकाज भी शुरू किए हैं। इन कंपनियों में हुंडई मोबिस, हुंडई ट्रांसिस, हुंडई कैपिटल, हुंडई विया और हुंडई ग्लोविस शामिल हैं।

PM मोदी ने दुनिया के सामने रखा भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल, तकनीक से हर वर्ग को जोड़ने पर जोर

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आयोजित ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक फोरम में पावर टू एंपावर का विजन पेश किया. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी, डेटा, ज्ञान और इनोवेशन ही असली ताकत हैं, लेकिन इनका उद्देश्य लोगों को सशक्त बनाना होना चाहिए. पीएम मोदी ने भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम, सस्ती इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने बताया कि देश में स्टार्टअप की संख्या ढाई लाख से अधिक हो गई है. साथ ही, सरकार की योजनाओं के जरिए पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलने का भी उल्लेख किया।  PM मोदी ने कहा कि आज टेक्नोलॉजी, डेटा, नॉलेज और इनोवेशन सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है. पीएम मोदी के कहा कि, क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ कुछ ही लोगों को आगे बढ़ाती है या फिर लाखों लोगों के लिए नए लोगों के लिए नए मौके बनाती है।  भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने विदेशी मेहमानों से अपील की कि वे इसे खुद आजमाकर देखें। स्ट्रीट वेंडर से कार शोरूम तक एक ही प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जो अतिथि विदेश से आए हैं, उन्हें मैं कहूंगा कि आप भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आजमाकर देखिए। हमारे यहां एक स्ट्रीट वेंडर और कार शोरूम का कारोबार अलग-अलग है, उनका स्केल अलग है, लेकिन भारत में ये दोनों डिजिटल पेमेंट के एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी की ताकत है।” लोकतंत्र की जननी और डिजिटल विविधता का देश पीएम मोदी ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए देश की डिजिटल विविधता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में 100 से अधिक भाषाएं, करीब 80,000 रजिस्टर्ड अखबार और प्रकाशन तथा 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। सोशल मीडिया के दौर में यहां सैकड़ों करोड़ यूट्यूब उपभोक्ता और विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार मौजूद है। डिजिटल पावर ने मठों और विभिन्न संप्रदायों पर सामूहिक चर्चाओं में भी बड़ी भूमिका निभाई है। स्टार्टअप क्रांति: छोटे शहरों से निकल रही नई प्रतिभाएं प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 2014 से पहले देश में कुछ सौ स्टार्टअप ही हुआ करते थे, अब इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें से करीब आधे छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं। 45 प्रतिशत स्टार्टअप में एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर है। इससे साफ है कि इनोवेशन के अवसर अब ज्यादा लोगों तक पहुंच रहे हैं और नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। दुनिया के साथ साझा कर रहा है भारत अपना डिजिटल अनुभव पीएम मोदी ने कहा कि भारत दूसरे देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनुभव साझा कर रहा है, ताकि वे अपनी जरूरतों के हिसाब से डिजिटल सिस्टम बना सकें। कोविड-19 के दौरान ओपन सोर्स ‘को-विन’ प्लेटफॉर्म भी बनाया गया था। उन्होंने जोर दिया, “हमारी लगातार कोशिश यही है कि भारत की क्षमताएं दूसरे देशों के लिए भी संभावनाओं के नए रास्ते खोलें। हमारी क्षमताओं से मानवता सशक्त होनी चाहिए।” इनोवेशन की असली ताकत ज्यादा लोगों तक पहुंचने में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी आइडिया को प्रोडक्ट में और समस्या को समाधान में बदलना बड़ी काबिलियत है। लेकिन जब समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह मौका मिलता है, तो ताकत का संतुलन बना रहता है और इसका असर कई गुना बढ़ जाता है। यही इन्क्लूसिव इनोवेशन की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि क्या नॉलेज सिर्फ कुछ लोगों की ताकत तक सीमित रहता है या फिर यह हर किसी की कैपेसिटी बढ़ाता है, और यहीं से एक नई सोच का जन्म होता है, पावर टू एम्पावर।  प्रधानमंत्री ने कहा, भारत लोकतंत्र की जननी है, भारत में 100 से अधिक भाषाएं हैं, करीब 80,000 रजिस्टर्ड न्यूज पेपर और पब्लिकेशन्स हैं. 1,000 से ज़्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल्स हैं. इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के दौर में भारत में 500 मिलियन से ज्यादा यूट्यूब यूजर्स हैं. 500 मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं।   

संगीत और नाटक के जरिए दिखा पीएम मोदी का जीवन, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में हुआ विशेष आयोजन

रायपुर : इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में ‘नमो सेवा– अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय भव्य नाट्य मंचन 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में संगीत और नाट्य प्रस्तुति के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सेवा-संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण का किया गया चित्रण रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालय खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय परिसर-2 में ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय नाट्य मंचन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संगीत, अभिनय और भावपूर्ण संवादों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सार्वजनिक सेवा के अनुभवों और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर आधारित संगीतमय नाटक प्रस्तुत किया।  इस प्रस्तुति में भारतीय कला, संगीत और नाट्य परंपरा के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संदेश को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।  इसके अतिरिक्त भारत के रंग’ की सांस्कृतिक भावभूमि पर आधारित वंदे मातरम की गौरव गाथा पर भरतनाट्यम , कथक की सामूहिक नृत्य प्रस्तुति दी गयी ।  जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नाटक के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सेवा भाव, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्रस्तुत किया। संगीत और अभिनय के समन्वय से तैयार इस प्रस्तुति ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का संदेश दिया। ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ के मंचन का प्रमुख उद्देश्य सेवा और समर्पण के विचारों को जनसामान्य तक पहुंचाना तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनसेवा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जनभागीदारी, सामूहिक प्रयास और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों ने सेवा के व्यापक अर्थ को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह जिला स्तरीय कार्यक्रम सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा के मूल्यों को प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को देश के सार्वजनिक जीवन, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को समझने के साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने कला और संस्कृति की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि संगीत एवं नाट्य मंचन जनजागरूकता, सामाजिक सहभागिता और सकारात्मक विचारों के प्रसार के प्रभावी माध्यम हैं। इस अवसर पर बिसेसर साहू, घम्मन साहू, शशांक ताम्रकार, जैनेन्द्र जंघेल, श्रीमती नीलिमा गोस्वामी, श्रीमती गिरिजा चंद्राकर, विकेश गुप्ता, रामाधार रजक, भावेश कोचर, गोरेलाल वर्मा, श्रीमती वंदना टांडेकर, आयूब सोलंकी, रूपेंद्र रजक और लखन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

PM मोदी बोले- DBT से करीब ₹5 लाख करोड़ की बचत, ‘जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हुई वो मुझसे प्यार करेंगे क्या?’

  नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण में डिजिटल तकनीक और सरकारी योजनाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रह गया है. यह सुशासन का बड़ा माध्यम बन चुका है. इसी दौरान उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT का भी जिक्र किया।  पीएम ने कहा कि DBT के जरिए 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचे हैं. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस वजह से जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हो चुकी है, वो मोदी से प्यार करेंगे क्या?  '5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे' पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की डिजिटल व्यवस्था से सरकारी मदद सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि मोबाइल से जुड़े बैंक खातों के जरिए लोगों तक सरकारी सहायता पहुंची है. इससे व्यवस्था में होने वाली लीकेज को रोकने में मदद मिली है।  उन्होंने कहा कि DBT के जरिए 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के खातों में पहुंचे. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई. पीएम ने कहा कि यह कोई छोटी रकम नहीं है. उनके मुताबिक, यह पैसा गलत हाथों में जाने से बचा है।  पीएम मोदी ने इसी बात को लेकर सवालिया अंदाज में कहा कि जिन लोगों की बिना मेहनत की कमाई बंद हो गई है, वे मोदी से प्यार करेंगे क्या? उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने सही काम किया या नहीं. पीएम ने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जाना चाहिए या नहीं. उन्होंने कहा कि विरोध और आलोचना के बावजूद वह इस काम को जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि वह इसे पूरा करके रहेंगे।  पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 से 12 साल में मोबाइल फोन की भूमिका काफी बदल गई है. अब यह सिर्फ बातचीत करने का साधन नहीं है. मोबाइल के जरिए सरकारी सेवाएं भी लोगों तक पहुंच रही हैं. उन्होंने कहा कि आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध हैं. लोगों को कई कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का तरीका बदला है।   डीपफेक और साइबर सुरक्षा पर भी की बात प्रधानमंत्री ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने डेटा की सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी का मुद्दा उठाया. उन्होंने डीपफेक जैसी तकनीक से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा कि डिजिटल दुनिया में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत ढांचे की जरूरत है. उन्होंने डेटा और डिजिटल सुरक्षा को लेकर देशों के बीच सहयोग की जरूरत बताई।  पीएम मोदी ने भारत के गेमिंग इकोसिस्टम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग गेमिंग इकोसिस्टम का हिस्सा हैं. इसमें छोटे शहरों और कस्बों के युवाओं की भी बड़ी भूमिका है।  इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा देश और विदेश के कई उद्योगपति और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग शामिल हुए।   

IMC 2026 का PM मोदी ने किया उद्घाटन, 5G-6G से आगे स्मार्ट मोबिलिटी और रोबोटिक्स का दिखा दम

 नई दिल्ली इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. IMC 2026 देश का बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट है. इसका आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में हो रहा है. इस बार IMC का 10वां एडिशन है।  नरेंद्र मोदी ने IMC 2026 का उद्घाटन करते समय सबसे पहले लोगों का धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि आज भारत के लिए एक विशेष दिन है.  साथ ही उन्होंने बताया कि कल ही उन्हें देश की सेवा करते हुए 25 साल पूरे हुए हैं. उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी।  नरेंद्र मोदी ने बताया है कि बीते 10-12 सालों में मोबाइल फोन गर्वनेंस का टूल बनकर सामने आया है. यह हमारे डिजिटल इंडिया का को रहा है. आज दूर सुदूर गांव और गरीब के बच्चे भी मोबाइल की वजब से बेहतर एजुकेशन पा रहे हैं।  कोरोना माहामारी के दौरान भी मिला फायदा – मोदी मोबाइल से कोरोना महामारी के दौरान भी काम और पढ़ाई जारी रही, जो नई टेक्नोलॉजी की वजह से संभव हुआ. दूर-दराज के गांवों के बच्चे भी डिजिटल लर्निंग का फायदा उठा पा रहे हैं. उन्होंने ऑनलाइन एजुकेशन के लिए ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म के बारे में भी बात की।  प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि अब सरकारी योजना और सब्सिडी का लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच रहा है. साथ ही उन्होंने बताया है कि भारत में टेलिकॉम सेक्टर का विस्तार हुआ है. रिमोट एरिया में भी टेलिकॉम का विस्तार हुआ और डेटा भी अफोर्डेबल हुआ है।  इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम ‘Scale Without Boundaries’ है. यहां 5G, 6G, AI, IoT, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और दूसरी नई टेक्नोलॉजी देखने को मिल रही हैं. दुनियाभर की बड़ी टेक और टेलीकॉम कंपनियां, स्टार्टअप और इंडस्ट्री के बड़े नाम इस इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं. आइए जानते हैं क्या होगा इस इवेंट में।  फ्यूचर टेक्नोलॉजी की झलक IMC 2026 एशिया का बड़ा टेक्नोलॉजी शोकेस होने वाला इवेंट है. इस इवेंट में देश और दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से लेकर नए-नए स्टार्टअप अपने प्रोडक्ट्स और भविष्य में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी की झलक दिखा रहे है. इस इवेंट में टेलीकॉम को 5G से 6G तक कैसे लेकर जाया जाए, इस पर भी बात होगी।  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को देश में ही कैसे बनाया जा सके और लोगों के भले के लिए इसका इस्तेमाल कैसे हो, इस पर भी चर्चा होगी. स्टार्टअप्स अपने AI प्रोडक्ट्स की झलक दिखा सकते हैं. इसके अलावा, इस साल कुछ नई चीजें भी जोड़ी गई हैं, जैसे स्मार्ट मोबिलिटी और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स. आने वाले समय में बड़े स्तर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है.इनका डेमोंस्ट्रेशन और एग्जिबिशन भी लगाया गया है।  कैसे हिस्सा लें इस इवेंट में IMC 2026 के इवेंट में जाकर नई टेक्नोलॉजी को समझने और डेमोंस्ट्रेशन देखने के लिए आप रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. स्टूडेंट्स और विजिटर्स के लिए फ्री एंट्री दी गई है. रजिस्ट्रेशन करने के लिए IMC के ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। 

PM मोदी बोले- 25 वर्षों का जनविश्वास और अनुभव सिर्फ मेरी नहीं, देश की पूंजी

25 वर्ष की सेवा पर प्रधानमंत्री मोदी ने दिया नया नारा- विकसित भारत का संकल्प, वी विल डू इट   इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम, पटेल पार्क से वर्चुअल माध्यम से जुड़े मुख्यमंत्री योगी   प्रधानमंत्री बोले- 25 वर्ष का जनविश्वास और अनुभव सिर्फ मोदी की नहीं, देश की पूंजी   जनता-जनार्दन का विश्वास और कार्यकर्ताओं का परिश्रम मेरी सबसे बड़ी शक्ति: प्रधानमंत्री मोदी   समस्या सबकी तो समाधान भी सबके लिए, सुशासन को सैचुरेशन से जोड़ने पर दिया जोर   नितिन नबीन बोले- आधुनिक भारत के शिल्पकार और विकसित भारत 2047 के सूत्रधार हैं प्रधानमंत्री मोदी   लखनऊ/नई दिल्ली  जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विकसित भारत के संकल्प के साथ नया नारा दिया- “वी विल डू इट।” उन्होंने कहा, “विकसित भारत बाई 2047, वी विल डू इट। टॉप-3 इकोनॉमी, वी विल डू इट। आत्मनिर्भर भारत, वी विल डू इट।” अपने 25 वर्षों के सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। इसलिए देश के प्रति उनका दायित्व भी सबसे अधिक है। जनता-जनार्दन का विश्वास और कार्यकर्ताओं का परिश्रम ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन में 25 वर्ष पूरे होने पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। लखनऊ के हजरतगंज स्थित पटेल पार्क में इसका लाइव प्रसारण हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए और प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।   सोचा नहीं था, कभी यह पड़ाव भी आएगा प्रधानमंत्री ने अपने 25 वर्षों के सफर की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि सात अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब नहीं सोचा था कि कभी यह पड़ाव भी आएगा। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा के कई चुनाव हुए और जनता ने उन्हें बार-बार सेवा का अवसर दिया। इसके लिए उन्होंने देशवासियों का आभार जताया और भारत के लोकतंत्र व संविधान का वंदन किया।   उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता-जनार्दन का है। 25 वर्षों में मिला जनविश्वास और अनुभव केवल मोदी की नहीं, बल्कि देश की पूंजी है। सुबह विनायक मंदिर में दर्शन के दौरान उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों के लिए प्रार्थना की। अपने लिए इतनी शक्ति मांगी कि और अधिक ऊर्जा के साथ दिन-रात देश की सेवा कर सकें।   आलोचकों ने अपने भीतर झांकना सिखाया प्रधानमंत्री ने अपने जीवन के अनुभवों को भी साझा किया। कहा कि वह आज भी स्वयं को विद्यार्थी मानते हैं। जिसने उन्हें घिसाया, उसने सिखाया और जिसने गिराया, उसने खड़ा होना सिखाया। समर्थकों ने आगे बढ़ना सिखाया तो आलोचकों ने अपने भीतर झांकना। साथ देने वालों से विश्वास की ताकत समझी और विरोध करने वालों से लोकतंत्र की।   भुज के भूकंप से लेकर चंद्रयान की असफलता और कोरोना महामारी तक का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर संकट ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। गांव और गरीब ने यह समझाया कि साधन-संसाधन भले सीमित हों, सपने बड़े और हौसले बुलंद होने चाहिए।   मेरे लिए कर्म ही धर्म है अपने राजनीतिक सफर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों की यह यात्रा उनके लिए व्यक्तिगत महिमामंडन का विषय नहीं है। चुनावी राजनीति में आने से पहले वह संगठन में रहे और आदिवासियों के बीच काम किया। चुनाव लड़ाए, लेकिन खुद चुनाव नहीं लड़ा था। उन्होंने कहा, “मैं एंबिशन के लिए नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान रहा हूं।” जो जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते चले गए। उनके लिए कर्म ही धर्म है।   प्रधानमंत्री ने कहा कि जब बात देश की हो तो पद, प्रतिष्ठा और अधिकार का महत्व नहीं रहता। उनका मूल्यांकन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह खुद कहां पहुंचे, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि देश कहां पहुंचा।   गुजरात में जनता पर किया भरोसा गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तब उनका मंत्र था- गुजरात के विकास से देश का विकास। सरकार चलाने का अनुभव नहीं था और प्रशासन की भी बहुत जानकारी नहीं थी। भरोसा जनता और जनशक्ति पर था। जनता को साथ लेकर फैसले किए, नीतियां बनाईं और उन्हें जमीन पर उतारा। जब जनता साथ होती है तो परिणाम भी आते हैं और गुजरात ने इसे करके दिखाया।   उन्होंने कहा कि 2014 में देश ने उनका दायित्व बढ़ाया और प्रधान सेवक के रूप में सेवा का दायरा बड़ा हो गया। उस समय अर्थव्यवस्था और महंगाई समेत देश के सामने कई चुनौतियां थीं। अब तस्वीर बदली है। पहले किसी संकट में भारत की अर्थव्यवस्था के हिलने की चर्चा होती थी, आज ऐसे समय में भारत के सामर्थ्य और सुधारों की चर्चा होती है। पहले आयात बढ़ाने के रास्ते खोजे जाते थे, अब निर्यात के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं और मेड इन इंडिया उत्पादों की पहचान बढ़ी है। उन्होंने 2015 से 2025 के दौरान खेती की विकास दर का भी उल्लेख किया।   2047 के संकल्प पर कहा- वी विल डू इट प्रधानमंत्री ने 25 वर्ष पूरे होने के मौके को अतीत की उपलब्धियां गिनाने के बजाय आगे के संकल्प से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ यादों का नहीं, अपने संकल्पों को नई ऊर्जा देने का है। लाल किले से दिए ‘सबका प्रयास’ के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने 2047 तक विकसित भारत, देश को दुनिया की टॉप-3 अर्थव्यवस्था बनाने और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य सामने रखा।   प्रधानमंत्री ने कहा कि इन लक्ष्यों को लेकर देश का संदेश साफ है- “वी विल डू इट।” जिस राष्ट्र के लोगों की धमनियों में ऐसा आत्मविश्वास लहू बनकर दौड़ता हो, उसे कोई रोक नहीं सकता।   समस्या सबकी है तो समाधान भी सबके लिए सुशासन पर प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति के लिए समाज को वोटों के हिसाब से बांटना देश की बड़ी त्रासदी रही है। खेत में पानी न पहुंचे या घर में बिजली न आए तो परेशानी किसी एक जाति या समुदाय की … Read more

जनसेवा के 25 साल पूरे, PM मोदी का संकल्प- 140 करोड़ सपनों से बनेगा विकसित भारत

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हम अपनी आंखों के सामने भारत को विकसित होते देखेंगे. अब हमें यह तय करना है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आज से क्या करना होगा. पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम उनका संकल्प है और वे तब तक रुकेंगे नहीं जब तक भारत विकसित नहीं हो जाता. उन्होंने अपने जीवन को देश के लिए समर्पित बताया।  पीएम मोदी ने कहा कि देश आज हर वह कदम उठा रहा है जो विकसित भारत के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा, हमारे सामने मुश्किलें हैं लेकिन हमारे पास 140 करोड़ समाधान भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत 140 करोड़ सपनों का देश है और देश में सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है. पीएम मोदी ने कहा, 'हमें आजादी मिली जब देश के लोगों ने जान दी. अब हमें विकसित भारत के लिए जीना है।  पीएम मोदी ने कहा कि हमें देश के लिए जीना होगा. उन्होंने कहा, 'मरेंगे तो देश के लिए, जीएंगे तो देश के लिए, भक्ति होगी देश के लिए और क्रिएट करेंगे तो देश के लिए.' उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम उनका संकल्प है और राष्ट्र समृद्धि उनका लक्ष्य. उन्होंने कहा, 'कर्म मेरा धर्म होगा, कर्तव्यपरायणता मेरा ध्यान होगा।  पीएम मोदी ने कहा कि स्वयं से वयं तक, उनका जीवन मंत्र रहेगा. जीवन का कण-कण, क्षण-क्षण देश के लिए समर्पित होगा. उन्होंने कहा, 'जब तक भारत विकसित नहीं होगा, तब तक मैं न रुकूंगा, न थकूंगा, न पथ से डिगूंगा।  गौरतलब है कि पीएम मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें जनसेवा में 25 साल पूरे हो गए हैं। 

सड़क से रेलवे और बंदरगाह तक सब होगा एक सिस्टम में, मोदी सरकार ने दी ITLA को मंजूरी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और छोटे कारोबार को लेकर दो बड़े फैसले किए हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी यानी ITLA बनाने को मंजूरी दी है. साथ ही स्‍मॉल एंड मीड‍ियम एंटरप्राइजेज ग्रोथ फंड (SGF) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी गई है. सरकार एक तरफ देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आपस में जोड़कर काम कराने की तैयारी कर रही है. दूसरी तरफ छोटे और मझोले कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड बनाया जा रहा है. इससे आम आदमी, किसान, छोटे दुकानदार और छोटे कारोबारी को सीधा फायदा होगा।  आपके भी मन में सवाल होगा क‍ि आख‍िर इस तरह की अथॉर‍िटी की जरूरत क्‍यों पड़ी. मान लीजिए किसी किसान ने अपने खेत में गेहूं पैदा किया. गेहूं गांव से मंडी जाएगा, वहां से किसी दूसरे शहर में जाएगा और फिर किसी फैक्ट्री या गोदाम तक पहुंचेगा. इस पूरे सफर में सड़क, ट्रक, रेलवे, गोदाम और कई बार बंदरगाह तक की जरूरत पड़ सकती है. अगर सड़क अच्छी है लेकिन रेलवे कनेक्शन नहीं है, रेलवे है लेकिन माल उतारने-चढ़ाने की व्यवस्था कमजोर है या बंदरगाह तक पहुंचने में बहुत समय लग रहा है तो पूरे सिस्टम का खर्च बढ़ जाता है. यही खर्च आखिरकार सामान की कीमत में भी जुड़ता है. मोदी सरकार की नई ITLA का मकसद इसी पूरी कड़ी को एक साथ देखकर योजना बनाना है।  अभी कैसे होता है? अभी सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा, जलमार्ग और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़े काम अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के जरिए होते हैं. ITLA इन सबके बीच बेहतर तालमेल बनाने वाली संस्था के तौर पर काम करेगी. ITLA को आप सरकार का ऐसा सिस्टम समझ सकते हैं, जो यह देखने की कोशिश करेगा कि देश में माल और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कौन सा रास्ता सबसे बेहतर है. इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग, हवाई सेवा, जलमार्ग, कोस्टल शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स सभी को एक साथ देखा जाएगा।  यानी सरकार सिर्फ यह नहीं देखेगी कि सड़क कहां बनानी है. यह भी देखा जाएगा कि उस सड़क का रेलवे, बंदरगाह या दूसरे परिवहन साधनों से कनेक्शन कैसा है. इससे एक ही काम के लिए अलग-अलग विभागों में योजना बनाने की बजाय एक साझा प्लान के हिसाब से काम करने की कोशिश होगी।  10 साल या उससे ज्यादा का ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान बनेगा ITLA की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना होगी. यह छोटी अवधि की योजना नहीं होगी. सरकार ने इसे 10 साल या उससे ज्यादा की अवधि को ध्यान में रखकर बनाने की बात कही है. इसका मतलब यह है कि सरकार आने वाले वर्षों में देश में ट्रांसपोर्ट की जरूरत कहां बढ़ेगी, किस इलाके में सड़क चाहिए, कहां रेलवे कनेक्शन चाहिए, किस बंदरगाह की क्षमता बढ़ानी है और माल की आवाजाही किस तरह आसान बनाई जा सकती है] इन सबको पहले से प्लान करने की कोशिश करेगी. अगर किसी इलाके में अगले 10-15 साल में उद्योग, खेती या कारोबार बढ़ने वाला है तो वहां की सड़क और माल ढुलाई की जरूरत का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है।  500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट की भी होगी जांच ITLA की भूमिका सिर्फ प्लान बनाने तक सीमित नहीं होगी. 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तकनीकी जांच भी ITLA करेगी. इन परियोजनाओं की निगरानी और उनके असर का आकलन भी किया जाएगा. यानी किसी बड़े सड़क, रेलवे या दूसरे ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं तो यह देखने की व्यवस्था होगी कि परियोजना तकनीकी रूप से सही है या नहीं और इससे अपेक्षित फायदा मिल रहा है या नहीं. यानी बड़ा प्रोजेक्ट सिर्फ बनाना ही मकसद नहीं होगा, उससे कितना फायदा हुआ, यह भी देखा जाएगा।  FASTag से GSTN तक का डेटा एक जगह आएगा ITLA का एक और महत्वपूर्ण काम नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी बनाना होगा. इसमें FASTag, Vahan, GSTN e-way bill, GPS और ट्रैफिक सिस्टम जैसे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को एक साथ लाने की योजना है।  इसका फायदा क्या होगा? मान लीजिए किसी हाईवे पर हर दिन हजारों ट्रक गुजर रहे हैं. FASTag से टोल और वाहनों की आवाजाही का डेटा मिलता है. GSTN e-way bill से यह पता लगाया जा सकता है कि सामान की आवाजाही किस तरह हो रही है. GPS और ट्रैफिक सिस्टम से यह समझने में मदद मिल सकती है कि ट्रैफिक कहां और कितना है. अगर यह जानकारी एक साथ मिलेगी तो सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि कहां सड़क पर दबाव बढ़ रहा है, माल किस रूट से ज्यादा जा रहा है और कहां नई सुविधा की जरूरत है. यानी भविष्य में ट्रांसपोर्ट से जुड़े फैसले ज्यादा डेटा के आधार पर लेने की कोशिश होगी।  इसका फायदा आम आदमी को क्‍या फायदा अगर माल एक शहर से दूसरे शहर तक जल्दी और कम खर्च में पहुंचता है तो कारोबारी की लागत घट सकती है. अगर किसान की फसल मंडी तक जल्दी पहुंचती है तो नुकसान कम हो सकता है. अगर फैक्ट्री तक कच्चा माल समय पर पहुंचता है तो उत्पादन बेहतर हो सकता है. और अगर पूरे सिस्टम की लागत कम होती है तो लंबे समय में इसका फायदा कारोबार, किसान और उपभोक्ता, तीनों को मिल सकता है।  10 हजार करोड़ का SGF फंड है क्‍या? SGF के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं. यह फैसला छोटे और मझोले कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. देश में बहुत से कारोबार ऐसे हैं जो छोटी या मध्यम इकाई से शुरू होते हैं. इनमें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, सप्लायर, सर्विस कारोबार और दूसरी कारोबारी इकाइयां शामिल हैं. इन कारोबारों को आगे बढ़ने के लिए नई मशीन खरीदने, उत्पादन बढ़ाने, कारोबार का विस्तार करने या नई क्षमता तैयार करने के लिए पूंजी की जरूरत पड़ती है. SGF का उद्देश्य ऐसे छोटे और मझोले उद्यमों की ग्रोथ को सहारा देना है. हालांकि 10 हजार करोड़ रुपये का मतलब यह नहीं है कि हर छोटे दुकानदार या कारोबारी को सीधे उसके खाते में पैसा … Read more