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मोदी सरकार में शिंदे की बढ़ी ताकत! NDA को अब नायडू-नीतीश की जरूरत नहीं? मंत्री पद पर बेटे की चर्चा तेज

नई दिल्ली 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए थे, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) 240 सीटों पर सिमट गई थी। पूर्ण बहुमत के 272 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा था। उस वक्त 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) और 12 सांसदों के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) 'किंगमेकर' बनकर उभरे थे। ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी बार बनी मोदी सरकार की चाबी इन्हीं दोनों नेताओं के हाथ में है और इनके बिना NDA का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, अब 2026 आते-आते सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। पश्चिम बंगाल और फिर महाराष्ट्र में एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने न सिर्फ मोदी सरकार को और मजबूत कर दिया है, बल्कि नायडू और नीतीश पर सरकार की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर दिया है। महाराष्ट्र: 'ऑपरेशन टाइगर' से उद्धव गुट में बड़ी सेंधमारी हाल ही में महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत एक बड़ा उलटफेर हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को तगड़ा झटका दिया है। उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर इन सांसदों ने आधिकारिक तौर पर अपना गुट बदल लिया है। शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसद:     ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव)     नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)     संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी)     संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)     भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)     संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम) इस बगावत के बाद लोकसभा में उद्धव गुट (UBT) के पास अब मात्र 3 सांसद बचे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है। दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जिसे इन 6 सांसदों ने आसानी से पार कर लिया। बंगाल में तो खेला ही हो गया, NDA में सबसे बड़ी पार्टी बनी NCPI पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। लोकसभा में TMC के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। इस बड़ी बगावत की अगुवाई बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर नेता कर रही हैं। इन सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। दल-बदल कानून के तहत संसद सदस्यता रद्द होने के खतरे से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक बेहद चालाक रणनीतिक कदम उठाया है। कानूनन दल-बदल से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ आना जरूरी था। इन सभी ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) नामक एक बेहद कम चर्चित और गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में अपने गुट का विलय कर लिया है। 2023 के आसपास पंजीकृत हुई यह गुमनाम सी पार्टी रातों-रात भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। 20 सांसदों के विलय के साथ ही यह अब लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और NDA के भीतर दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है। NDA का मजबूत अंकगणित और कैसे कम हुई निर्भरता? शिंदे के 6 नए सांसदों और NCPI के 20 सांसदों के NDA में शामिल होने से गठबंधन का कुल आंकड़ा लोकसभा में काफी मजबूत हो गया है। 2024 में सरकार गठन के समय NDA के पास लगभग 293 सांसद थे। अब यह आंकड़ा 318 तक पहुंच गया है। ऐसे में मौजूदा स्थिति यह है कि अगर आज चंद्रबाबू नायडू (16) और नीतीश कुमार (12) किसी बात पर नाराज होकर NDA से अपना समर्थन वापस भी ले लेते हैं, तब भी नए सांसदों और अन्य छोटे दलों के समर्थन से मोदी सरकार पूर्ण बहुमत (272) के आंकड़े के ऊपर ही रहेगी। यानी सरकार पर से 'किंगमेकर्स' का दबाव अब खत्म हो गया है। लोकसभा में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों और उनकी सीटों की मौजूदा स्थिति की टेबल नीचे दी गई है:   क्र. सं. राजनीतिक दल लोकसभा सीटें 1 BJP (भारतीय जनता पार्टी) 240 2 NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) 20 3 TDP (तेलुगु देशम पार्टी) 16 4 SHS (शिवसेना – शिंदे गुट) 13 5 JD(U) (जनता दल – यूनाइटेड) 12 6 LJP(RV) (लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास) 5 7 JD(S) (जनता दल – सेक्युलर) 2 8 JSP (जनसेना पार्टी) 2 9 RLD (राष्ट्रीय लोक दल) 2 10 AD(S) (अपना दल – सोनेलाल) 1 11 AGP (असम गण परिषद) 1 12 AJSU (ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन) 1 13 HAM(S) (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा – सेक्युलर) 1 14 NCP (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – अजीत पवार गुट) 1 15 SKM (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा) 1   कुल (Total NDA Seats) 318 NDA में बढ़ा शिंदे का रुतबा  इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अंदर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कद काफी बढ़ा दिया है। 2022 में विधायकों की बगावत के जरिए शिवसेना में दो फाड़ करने के बाद, अब लोकसभा में भी शिंदे ने यह साबित कर दिया है कि 'असली शिवसेना' उन्हीं के पास है और उनके पास जमीनी नेताओं का समर्थन है।  मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे को मिलेगा मंत्री पद का इनाम? उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने वाले इस गुप्त अभियान 'ऑपरेशन टाइगर' को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई महीनों से श्रीकांत शिंदे ही इस ऑपरेशन की रणनीति बना रहे थे। बागी सांसदों को दिल्ली लाने के लिए निजी विमान बुक करने से लेकर उनकी सुरक्षा और स्पीकर से मुलाकात तक का पूरा जिम्मा श्रीकांत शिंदे ने ही संभाला था। अब दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मोदी सरकार में जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार में शिवसेना (शिंदे गुट) को इसका बड़ा इनाम मिल सकता है। NDA के … Read more

BRICS मंच पर भारत की बढ़ी ताकत, मोदी की रणनीति से बदले समीकरण; चीन के भी बदले सुर

नई दिल्ली इस वक्त पूरी दुनिया ट्रंप की डील और अमेरिका-ईरान की बातचीत पर चर्चा कर रही है. लेकिन ग्लोबल पॉलिटिक्स की असली हलचल भारत में मची हुई है. ट्रंप की डील अब पूरी तरह कबाड़ होती दिख रही है. ईरान कुछ और कह रहा है और ट्रंप के बयान अलग आ रहे हैं. दुनिया यह तमाशा देख रही है कि अमेरिका में चल क्या रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ा ग्लोबल मैसेज दे दिया है. अमेरिका से ईरान हैंडल नहीं हो रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी ने चीन-अमेरिका और ईरान-इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को एक जगह ला दिया है. भारत अब इन सभी देशों के साथ बड़ी डील कर रहा है. नरेंद्र मोदी वह काम कर रहे हैं जो दुनिया में कोई सोच भी नहीं सकता. ग्लोबल पॉलिटिक्स का पूरा नैरेटिव अब भारत ने चेंज कर दिया है. मोदी ने भारत की डिप्लोमेसी को सुपरफास्ट ट्रैक पर दौड़ा दिया है. दुनिया अब अमेरिका नहीं बल्कि भारत की तरफ देख रही है।  ब्रिक्स की मीटिंग में पीएम मोदी ने ट्रंप को कैसे दे दिया सबसे बड़ा झटका? कुछ महीने पहले तक डॉनल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर बड़ी धमकियां देते थे. ट्रंप ब्रिक्स का नाम लेकर दुनिया को धमकाते थे कि ऐसा मत करो. लेकिन आज ट्रंप की ऐसी हालत है कि कोई उनका लोड नहीं ले रहा है. नरेंद्र मोदी तो ट्रंप का बिल्कुल भी लोड नहीं लेते. पीएम मोदी ने पहले ट्रंप को मुंह पर सीधा सुना दिया था. अब ब्रिक्स देशों की मीटिंग से मोदी ने तगड़ा मैसेज दे दिया है।  भारत में ब्रिक्स देशों के एनएसए की अहम मीटिंग हो रही है. पीएम मोदी खुद इस ग्लोबल मीटिंग में पहुंच गए. वहां ब्रिक्स नेताओं की ग्रुप फोटो हुई और वन-टू-वन मुलाकात भी हुई. पीएम मोदी ने जो कड़क मैसेज दिया है, उससे ट्रंप के लोगों में हड़कंप मच गया है. पीएम मोदी ने कहा कि बदलते ग्लोबल हालात में ब्रिक्स की भूमिका बहुत अहम है. उन्होंने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर बहुत ज्यादा जोर दिया।  पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ग्लोबल साउथ का पूरा समर्थन करेगा. भारत एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने के लिए अपनी ताकत लगाएगा. पीएम मोदी ने एक ही मीटिंग से दो बड़े काम निपटा दिए हैं. एक तरफ ब्रिक्स को अहम बताकर अमेरिका को पीछे हटने का मैसेज दे दिया. दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाकर सबको अलर्ट कर दिया।  ट्रंप को अमेरिका में वोट वाला झटका कैसे लगा और अब वह क्या बहाने बना रहे हैं?     अमेरिका में मध्‍यावधि चुनाव बहुत नजदीक हैं और डॉनल्ड ट्रंप लगातार दावे कर रहे हैं. लेकिन ट्रंप को हाल ही में एक बहुत बड़ा वोट वाला झटका लगा है. अमेरिका के भीतर ही ट्रंप का वोट बेस अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है. ट्रंप पहले जो वादे कर रहे थे, अब वहां की जनता उन पर सवाल उठा रही है. चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होते देख ट्रंप अब रोज नए बहाने बना रहे हैं।      ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर दुनिया में कुछ हुआ तो वह भारत के साथ खड़े होंगे. ट्रंप को यह अच्छे से पता है कि भारतीय मूल के वोटर अमेरिका में क्या ताकत रखते हैं. इसलिए ट्रंप अब भारत और पीएम मोदी की तारीफ करके अपना वोट बैंक बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी खुद की विदेश नीति अब पूरी तरह से फेल हो चुकी है।      ईरान को लेकर ट्रंप का स्टैंड अमेरिका में ही एक बड़ा मजाक बन गया है. ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि इस बड़े ग्लोबल शिफ्ट को कैसे हैंडल किया जाए. अब ग्लोबल पॉलिटिक्स ऐसे नहीं चलेगी कि सब कुछ सिर्फ ट्रंप की मर्जी से होगा. अमेरिका जो तय कर लेगा अब दुनिया में वही नियम नहीं चलने वाला है।  चीन के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने कौन सा बड़ा खेल कर दिया? ट्रंप के लिए सबसे बड़ा मैसेज यह है कि मोदी ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ब्रिक्स की बैठक में वांग यी के साथ हुई बातचीत की डिटेल से अमेरिका परेशान हो जाएगा. चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि मोदी ने शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने को कहा है. पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी पारंपरिक दोस्ती आगे बढ़ानी चाहिए. दोनों देश हाई लेवल बातचीत जारी रखें और ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करें. चीन के साथ पीएम मोदी की इस बात से अमेरिका को जरूर बड़ी आग लग जाएगी।  ट्रंप तो शुरू से ही ब्रिक्स और चीन के बिल्कुल खिलाफ रहे हैं. चीन ने भी साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘दोनों देश एकजुटता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’ चीन अब ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा. चीन अब भारत के साथ भरोसा बढ़ाने और संदेह दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन के बयान से साफ है कि वह भारत से टकराव नहीं बल्कि दोस्ती चाहता है।  ईरान और इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को पीएम मोदी कैसे एक साथ हैंडल कर रहे हैं?     ब्रिक्स की अहम बैठक से अलग पीएम मोदी ने ईरान के टॉप अधिकारियों से भी मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ गदीर निजामीपुर पीएम मोदी से मिले. यह मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के तेल पर भारी छूट दी है।      ग्लोबल मार्केट में ईरान का तेल आने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का बड़ा न्योता दिया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के विदाई कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. यहां लोग कह रहे थे कि इजराइल से दोस्ती के चक्कर में भारत ने ईरान से रिश्ते बिगाड़ लिए. लेकिन मोदी ईरान के टॉप अधिकारियों से मिलकर नया ग्लोबल नैरेटिव सेट कर रहे हैं।      उधर भारत … Read more

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए PM मोदी को ईरान का निमंत्रण, बढ़ी कूटनीतिक चर्चा

नई दिल्ली  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई कर आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है। 28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।  

रास लाफान हादसे पर कतर के अमीर ने PM मोदी से की बात, भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली  कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दर्दनाक हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत की हो गई है। इस बीच मंगलवार को कतर के अमीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास फोन करके इस हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कतर और भारत नागरिकों की भलाई और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए हादसे को लेकर कतर के अमीर ने जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- 'मैं कतर के अमीर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने फोन करके कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना जताई। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और एक-दूसरे के साथ एकजुटता से खड़े हैं।' 12 भारतीय नागरिकों की मौत     कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में पुष्टि करते हुए बताया, ''रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।''     अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है। दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक है रास लाफान रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ, जब फैसिलिटी में कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सपोर्ट टर्मिनल के कुछ हिस्सों को फिर से चालू करने का काम चल रहा था, तभी धमाका हुआ। कंपनी के मुताबिक, रविवार रात इसी काम के दौरान बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई। बरजान फैसिलिटी कतर के गैस आधारभूत संरचना का एक अहम हिस्सा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1.4 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रतिदिन है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को चलाने के लिए किया जाता है, जो इस सूखे खाड़ी देश में पानी की आपूर्ति करते हैं।

PM मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- उनकी नेतृत्व शैली प्रभावशाली और दृढ़ है

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने शी जिनपिंग को ऐसा नेता बताया जो पूरी तरह अपने काम पर केंद्रित रहते हैं और हर मुद्दे को गंभीरता से संभालते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप ने बेहद सख़्त, निर्णायक और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाला नेता बताया. ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने देशों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि काफी मजबूत है, जिसकी वह व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हैं।  इससे पहले भी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी जमकर प्रशंसा की. लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी जितने शांत स्वभाव के नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के विपरीत, जो शांत, संयमित और बेहद प्रभावशाली हैं, मैं ऐसा नहीं हूं।   भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा "प्रधानमंत्री @narendramodi को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए @POTUS का आमंत्रण साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा!"

ट्रंप ने भारत को दिया खुला समर्थन, कहा- किसी ने हमला किया तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत के समर्थन को लेकर बड़ा बयान दिया. ट्रंप ने कहा कि अगर कभी भारत पर हमला होता है, तो अमेरिका उसके साथ खड़ा होगा. ट्रंप ने कहा, ‘अगर पीएम मोदी हैं और भारत पर क‍िसी ने अटैक क‍िया तो अमेरिका भारत के लिए मौजूद रहेगा, भले ही इस संबंध में कोई लिखित समझौता न हो. कोई और नेता होगा तो हम कह नहीं सकते।  राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण र‍िश्तों के बीच आया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरा विश्वास और साझेदारी है।  ट्रंप के बड़े बयान ट्रंप ने भारत के भविष्य की संभावनाओं को पीएम मोदी के पद पर बने रहने से जोड़ते हुए कहा, जब तक मोदी भारत के नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाएगा।  ट्रंप ने कहा, पिछली बार भारत का दौरा बहुत शानदार रहा था. हमने उस नए स्टेडियम का उद्घाटन किया था… भारत में मेरा समय बहुत अच्छा बीता… मुझे लगता है कि हर चीज में भारत की बड़ी भूमिका है. जब तक वे (पीएम मोदी) वे नेता हैं. भारत बड़ी भूमिका निभाने वाला है… जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, व्हाइट हाउस में उनका एक बहुत अच्छा दोस्त है. मुझे नहीं पता कि कहां कोई समस्या है. मुझे ऐसा नहीं लगता. यहां हर कोई भारत को पसंद करता है और इस व्यक्ति (पीएम नरेंद्र मोदी) के लिए बहुत सम्मान रखता है।  पीएम मोदी की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा- वह (पीएम मोदी) बहुत टफ न‍ेगोश‍िएटर हैं. मैं आपको एक बात बताता हूं. वह दिखने में बहुत अच्छे हैं, बहुत भले लगते हैं, जैसे कोई फरिश्ता हों. लेकिन वह बहुत टफ नेगोश‍िएटर हैं. वह बहुत कठोर हैं. वह बहुत ही कड़े मिजाज के इंसान हैं. लेकिन वह दिखते बहुत अच्छे हैं. इसी तरह वह आपको चौंका देते हैं।  जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस पर फिर से कोई प्रतिबंध लगाए जाएंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हम इस पर विचार कर रहे हैं. हम देख रहे हैं कि तेल की कीमतें कितनी नीचे आती हैं, वे तेजी से गिर रही हैं… कीमतें कम हो रही हैं और जल्द ही उस स्तर पर आ जाएंगी जो 4 महीने पहले था. इसके अलावा, हमारे सामने बिना परमाणु हथियारों वाला ईरान होगा. मैं कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री भी इस बात को लेकर बहुत गंभीर हैं। 

No Hug, Only Handshake! मोदी-ट्रंप की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां, समझिए भारत का कूटनीतिक मैसेज

नई दिल्ली आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी।  जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई।  पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं. पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया।  कैसे दोनों की हुई मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही।  मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी।  पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले।  इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही।  मोदी के नो हग का मैसेज हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा।  पीएम मोदी ने उन्‍हीं की भाषा में समझाया कैसे न‍िभाते हैं र‍िश्ते कहते हैं क‍ि क‍िसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाह‍िए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्‍कुल वही क‍िया. ज‍िस रोनाल्‍ड रीगन को डोनाल्‍ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, ज‍िनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्‍ता में आए हैं, उन्‍हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया क‍ि जो दुन‍ियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया क‍ि दूसरे देशों के साथ र‍िश्ते कैसे न‍िभाते हैं।  मौका G7 सम‍िट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्‍होंने कहा- आज दुन‍िया इंटरकनेक्‍टेड है. एक दूसरे पर ड‍िपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरश‍िप का महत्‍व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरश‍िप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में व‍िश्वास हो. यह भरोसा हो क‍ि सप्‍लाई चेन का इस्‍तेमाल हथ‍ियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण द‍िया. उन्‍होंने कहा, रोनाल्‍ड रीगन कहते थे क‍ि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्‍टेड रूल बेस्‍ड ऑर्डर का न‍िर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो क‍िसी रूल बेस्‍ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्‍लाई चेन को हथ‍ियार बना रहे हैं. कभी टैर‍िफ लगा द‍िया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे।  भारत का उदाहरण देकर समझाया पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्‍ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन … Read more

PM मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री की संयुक्त प्रेस वार्ता, रक्षा, व्यापार और तकनीक पर बने अहम समझौते

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा में स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ जॉइंट प्रेस मीट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत स्लोवाकिया के रिश्ते को रेखांकित किया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेट साइन किया है।  पीएम ने अपने संबोधन में कहा, "मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं. वह एक अनुभवी नेता और भारत के सच्चे दोस्त हैं. भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अहम रोल रहा है. मुझे खुशी है कि उनसे मिलकर मुझे हमारे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पल देखने का मौका मिला।  रक्षा सहयोग के लिए साइन की डील पीएम ने कहा, "मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है. मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी का दर्जा देने का फैसला किया है।  पीएम मोदी ने कहा, "रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक अभिसरण का प्रमाण है. मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया. इससे संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा में स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ जॉइंट प्रेस मीट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत स्लोवाकिया के रिश्ते को रेखांकित किया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेट साइन किया है।  पीएम ने अपने संबोधन में कहा, "मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं. वह एक अनुभवी नेता और भारत के सच्चे दोस्त हैं. भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अहम रोल रहा है. मुझे खुशी है कि उनसे मिलकर मुझे हमारे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पल देखने का मौका मिला।  रक्षा सहयोग के लिए साइन की डील पीएम ने कहा, "मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है. मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी का दर्जा देने का फैसला किया है."  पीएम मोदी ने कहा, "रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक अभिसरण का प्रमाण है. मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया. इससे संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।  दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध हमारे संबंधों को मजबूत आधार प्रदान करते हैं. भारत के प्राचीन उपनिषदों का “स्लोवाक” भाषा में अनुवाद किया जाना हमारी सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है. स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग यहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।  भारत स्लोवाकिया स्पेस मिशन को किया याद पीएम मोदी बोले, "2017 में स्लोवाकिया की पहली सैटेलाइट भारत द्वारा लांच की गई थी. आज भारत में स्पेस सेक्टर अभूतपूर्व गति से नई ऊंचाइयां छू रहा है. मैं स्लोवाकिया की कंपनियों को इस विकास-यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता हूं। 

क्या होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा भारत? G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-मैक्रों की अहम बैठक

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच फ्रांस ने भारत को एक अहम समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।  फ्रांस कई साझेदार देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में फ्री शिपिंग और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय पहल पर काम कर रहा है. इस पहल में भारत को भी शामिल किए जाने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य उपकरणों की खरीद, रणनीतिक साझेदारी और पश्चिम एशिया के ताजा हालात प्रमुख मुद्दे होंगे. हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा वैश्विक चिंता बन गई है।  भारत-अमेरिका-कतर समेत कई देशों की अलग मीटिंग G7 सम्मेलन के इतर पश्चिम एशिया पर केंद्रित एक विशेष बैठक भी होगी, जिसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है।  विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और मैक्रों की बैठक में पश्चिम एशिया समेत सभी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. उन्होंने संकेत दिया कि विभिन्न देशों द्वारा हाल में की गई नई पहलों और घोषणाओं पर भी विचार-विमर्श होगा।  फ्रांस युद्ध में शामिल नहीं, लेकिन समुद्री सुरक्षा जरूरी फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि समुद्री मार्गों का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. उनका कहना है कि फ्रांस किसी युद्ध का हिस्सा नहीं है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।  फ्रांस ने भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर बेहद मजबूत है. रिपोर्ट में फ्रांसीसी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, भारत अब G7 से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मंचों का हिस्सा बन चुका है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है. इस बीच सिबी जॉर्ज ने यह भी संकेत दिया कि 14 से 16 जून के बीच होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं। 

PM मोदी का नया सियासी वार! कांग्रेस ग्रोथ रेट का जिक्र कर विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली एनडीए की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि जिस धीमी विकास दर को दशकों तक ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ कहा गया, उसे वास्तव में ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उस दौर की नीतियों, शासन शैली और आर्थिक फैसलों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, न कि देश की संस्कृति या बहुसंख्यक समाज. पीएम मोदी ने जो बातें कहीं हैं, वो कांग्रेस के ल‍िए मुसीबत के बीज की तरह हैं. क्‍योंक‍ि बीजेपी अब इस शब्‍द को लोगों के बीच ले जाएगी, उन्‍हें बताएगी क‍ि कांग्रेस राज में क‍िस तरह ह‍िन्‍दुओं के माथे पर कलंक मढ़ा गया।  पीएम मोदी ने कहा, NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था. देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट।  ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर समझाया पीएम मोदी ने कहा- सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी. आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी. आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा. इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है, जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है।  कहां से आया ये शब्‍द ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द मुख्य रूप से 1950 से 1980 के दशक के बीच भारत की औसत आर्थिक विकास दर के लिए इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर करीब 3 से 3.5 प्रतिशत के आसपास रहती थी. जबकि आबादी तेजी से बढ़ रही थी. नतीजा यह हुआ कि प्रति व्यक्ति आय में बहुत सीमित बढ़ोतरी हुई. कहते हैं क‍ि इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्‍णा ने किया था. उनका मकसद धीमी आर्थिक वृद्धि को व्यंग्यात्मक ढंग से बताना था. बाद में नेताओं ने इसका इस्‍तेमाल करना शुरू कर द‍िया, ज‍िसका ज‍िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क‍िया।  पीएम मोदी ने इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ क्यों कहा? प्रधानमंत्री मोदी का तर्क है कि धीमी विकास दर के लिए भारत की सभ्यता, संस्कृति या समाज को जिम्मेदार ठहराना गलत था. उनके मुताबिक उस समय देश में जिस तरह की आर्थिक नीतियां लागू थीं, वे कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाई गई थीं. स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत में लाइसेंस-परमिट राज, सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था और सीमित निजी निवेश का मॉडल लागू रहा. उद्योग लगाने से लेकर उत्पादन बढ़ाने तक लगभग हर काम के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत पड़ती थी. पीएम मोदी का कहना है कि विकास की धीमी गति की वजह यही नीतियां थीं. इसलिए उस दौर को हिंदू ग्रोथ रेट कहने के बजाय कांग्रेस ग्रोथ रेट कहना अधिक उचित होगा।  अटल सरकार का जिक्र क्यों किया? अपने भाषण में मोदी ने कहा कि देश ने पहली बार तेज विकास की झलक तब देखी जब अटल जी की सरकार आई. अटल सरकार के दौर में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, ग्रामीण सड़क योजना, दूरसंचार क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश जैसे कदम उठाए गए थे. बीजेपी लंबे समय से दावा करती रही है कि आर्थिक सुधारों को गति देने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मजबूत करने में अटल सरकार की बड़ी भूमिका रही. मोदी ने इसी संदर्भ में अटल सरकार को तेज विकास का शुरुआती मॉडल बताया।