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सेमीकंडक्टर से टेक्नोलॉजी तक, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने खोले विकास के नए रास्ते

नई दिल्ली  दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।  पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।  किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।  इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला।  UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया? संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।  भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत? करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।  क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है।  पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला? प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा।  किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है? सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।  क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है। 

PM मोदी को मिले प्राचीन ताम्र पत्र, तमिलनाडु और चोल वंश की विरासत फिर चर्चा में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी. इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है? क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 'लीडेन प्लेट्स' भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था. कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है. जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं. ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी. चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है. तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है. चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए 'अनैमंगलम' गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है. इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं. अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था. सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया. चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: … Read more

कृषि क्षेत्र में भारत का बढ़ा मान, प्रधानमंत्री मोदी को FAO का बड़ा सम्मान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को  रोम, इटली में संयुक्त राष्ट्र संगठन के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सर्वोच्च सम्मान "एफएओ एग्रीकोला मैडल" से सम्मानित किया जाना किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा में संवर्धन और कृषि विकास की वैश्विक स्वीकृति है। श्रीअन्न को मिली है नई पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों के कल्याण और वैश्विक स्तर पर "श्रीअन्न (मिलेट्स) को नई पहचान दिलवाने के उनके ऐतिहासिक कार्यों के लिए प्रदान किया गया यह प्रतिष्ठित सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से भारत सहित अन्य देशों में भी श्रीअन्न की लोकप्रियता और उपयोग में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत किसानों के कल्याण, कृषि में नवाचार और अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता के नित नए प्रतिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संगठन के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सर्वोच्च सम्मान को भारत के करोड़ों किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया है।  

BRICS सम्मेलन से पहले कूटनीतिक हलचल तेज, शी जिनपिंग के भारत आने की चर्चा ने बढ़ाई उत्सुकता

नई दिल्ली भारत और चीन के रिश्ते में बहुत जल्द नया मोड़ देखने को मिल सकता है. भारत-चीन लगातार अपने संबंध सुधार रहे हैं. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं. यही कारण है कि बीते कुछ समय में चीन-भारत के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली है. अब भारत-चीन संबंध में नया मोड़ आया है. जी हां, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत जल्द भारत आने वाले हैं. सूत्रों की मानें तो इसी साल सितंबर में शी जिनपिंग भारत का दौरा कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो बीते 7 साल में शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी।   रिपोर्ट की मानें तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. माना जा रहा है कि चीन की ओर से नई दिल्ली को सूचित किया गया है कि शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में आने की संभावना है. यहां बताना जरूरी है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए दिल्ली में रहेंगे. रूसी साइड ने पुतिन के दिल्ली दौरे को कन्फ्रम बताया है।  पुतिन भी आ रहे भारत रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने पुतिन की उपस्थिति की पुष्टि की है. वह 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी के भी एससीओ समिट में शामिल होने की संभावना है।  2019 के बाद पहली यात्रा बहरहाल, ब्रिक्स समिट में अगर शी जिनपिंग आते हैं तो 2019 के बाद उनकी यह पहली यात्रा होगी. शी जिनपिंग की ब्रिक्स समिट में भागीदारी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होगा. आखिरी बार वह 2019 में भारत आए थे. अक्टूबर 2019 में वह चेन्नई के पास मामल्लापुरम में भारत-चीन नेताओं के दूसरे अनौपचारिक सम्मेलन में आए थे. उसके बाद गलवान हिंसा ने भारत-चीन के रिश्तों को बहुत खराब कर दिया।  भारत-चीन के रिश्ते कैसे बिगड़े जी हां, भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध अप्रैल-मई 2020 में सीमा विवाद के बाद काफी बिगड़ गए थे. तब गलवान हिंसा हुई थी. इस गलवान संघर्ष ने चीन-भारत के संबंधों को बिगाड़ दिया था. इसके बाद तो तनातनी खूब चली. हालांकि, संबंधों को स्थिर करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में शुरू हुई. तब रूस के कजान शहर में ब्रिक्स समिट था. वहां मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसी समय दोनों देशों ने एलईएस सैनिकों की वापसी पूरी करने का फैसला किया था. तब से लगातार भारत और चीन के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं।  भारत-चीन के रिश्ते में 2019 के बाद क्या-क्या हुआ?     भारत और चीन के रिश्तों में 2019 के बाद कई बड़े उतार-चढ़ाव आए. अक्टूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे. तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी. दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया था. उस समय रिश्तों में नरमी दिखाई दी थी।      लेकिन जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस संघर्ष में दोनों देशों के सैनिक मारे गए और सीमा पर तनाव बहुत बढ़ गया. इसके बाद भारत ने चीन के कई मोबाइल ऐप बैन किए और सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी. दोनों देशों के रिश्ते कई साल तक तनावपूर्ण रहे।      इसके बाद धीरे-धीरे सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई. इस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और रिश्तों को सामान्य बनाने पर सहमति जताई. इसके बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिशें फिर तेज हुईं।   

कौशल प्रशिक्षण से बेटियों को मिल रही नई उड़ान, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ा आत्मविश्वास

कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम भोपाल  प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की योजनाएं उन्हें कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर दे रही हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। प्रदेश में 934 आईटीआई हैं। इनमें 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई शामिल हैं। इन संस्थानों में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सत्र 2025 में शासकीय आईटीआई में 94.55 प्रतिशत प्रवेश हुआ। यह अब तक का सर्वाधिक प्रवेश प्रतिशत है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शासकीय आईटीआई में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है। प्रदेश की आईटीआई में वर्तमान में 71 आधुनिक ट्रेड्स में 15 हजार से अधिक महिला प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। “कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा)”, “स्टेनोग्राफर हिन्दी” और “इलेक्ट्रिशियन” जैसे ट्रेडों में बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण ले रही हैं। यह बदलते माहौल और बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। अब बेटियां नए क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को मजबूत बना रही हैं। महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदेश में 7 शासकीय महिला आईटीआई संचालित की जा रही हैं। वहीं 56 शासकीय आईटीआई में महिला छात्रावास सुविधा उपलब्ध है। इनमें 3400 से अधिक सीटें हैं। इससे दूर-दराज क्षेत्रों की बेटियों को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का फोकस केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभाग महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी लगातार काम कर रहा है। विशेष महिला प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 777 महिला प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार मिला है। इंदौर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा 509 महिलाओं को निःशुल्क वाहन संचालन प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता का भाव और मजबूत हुआ है। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और निर्धन वर्ग की 13 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इससे बड़ी संख्या में बेटियों को प्रशिक्षण जारी रखने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के अंतर्गत हजारों बेटियों को उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग का अवसर मिला है। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों में 5660 बेटियाँ शामिल हैं। सागर की सुस्नेहा रजक और रायसेन की सुलिया जैसी युवतियां प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्राप्त कर चुकी हैं। अब वे अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं। महिलाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। “जीवन तरंग” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 3000 बेटियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं "यूएन वीमेन" के सहयोग से बेटियों को "स्टेम और सॉफ्ट स्किल्स" का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे बेटियाँ एडवांस तकनीक और नए कार्यक्षेत्रों से जुड़ रही हैं। परम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित आईटीआई कौशल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। धार जिले के सरदारपुर आईटीआई में संचालित कार्यक्रमों में प्रशिक्षणार्थियों का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। इससे बेटियों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हुए हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत भी 64 हजार से अधिक बेटियों को कौशल प्रशिक्षण का लाभ मिला है। प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। शासकीय महिला आईटीआई बैतूल की प्रशिक्षणार्थी सुत्रिशा तावड़े ने राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद परीक्षा में सेंट्रल ज़ोन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया। ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर्स में मध्यप्रदेश के 10 प्रतिभागियों में 5 बेटियाँ शामिल रहीं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 में भोपाल की शासकीय संभागीय आईटीआई की प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं इंडिया स्किल प्रतियोगिता-2024 में प्रदेश की बेटियों ने सिल्वर, ब्रॉन्ज और मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए। यह उपलब्धियां प्रदेश की बेटियों की क्षमता और मेहनत को दर्शाती हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रयासों से प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण उनके लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रहा है।  

शरद पवार ने विपक्ष को दिया संदेश, बोले- देश की छवि के मुद्दे पर राजनीति ठीक नहीं

 मुंबई NCP (SP) चीफ शरद पवार अक्सर सियासी मतभेद के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने कहा है कि जब वैश्विक स्तर पर देश की प्रतिष्ठा की बात आती है तो इस पर राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए. राष्ट्रीय सम्मान सभी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है।  उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं. राजनीतिक मुद्दों पर हमारी उनसे अलग राय हो सकती है. हालांकि जब देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को विदेश में कम करने या उससे समझौता करने की बात आती है तो इसे हम स्वीकार नहीं करेंगे. राष्ट्र के गौरव और सम्मान के मामले में कोई सियासी मतभेद या विवाद नहीं होना चाहिए।  एनसीपी चीफ ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. शाम मुंबई में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए. साथ ही देश की प्रतिष्ठा को मजबूत करने में योगदान देना चाहिए।  इंदिरा गांधी-नरसिम्हा राव का जिक्र पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन जैसे नेताओं ने हमेशा देश के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा को अपने नेतृत्व के केंद्र में रखा।  पवार ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं. जब राष्ट्र के सम्मान की बात हो, तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए. कुछ लोग आज अलग-अलग पार्टियों में हो सकते हैं, लेकिन आप सभी आम लोगों के बीच जुड़े हुए हैं और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।  शुरुआती सियासी सफर को किया याद अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद करते हुए पवार ने कहा कि 1958 में जब उनकी उम्र 18 वर्ष थी, वह बारामती से पुणे आए थे. उस समय उनके गृह नगर में कोई कॉलेज नहीं था. वह युवा आंदोलन से जुड़े. चार साल बाद पुणे सिटी यूथ कांग्रेस के प्रमुख बने. बाद में महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस का नेतृत्व किया, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर काम किया।  शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन सोवियत संघ की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया गया. पूर्व पीएम इंद्रकुमार गुजराल के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से कहा था कि वह 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके सम्मान का अपमान वह कभी स्वीकार नहीं करेंगी।  उन्होंने पूर्व सहयोगियों से अपील करते हुए कहा, यदि राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तो आप सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ भाग लेना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। 

नॉर्वे के अखबार में छपे कार्टून से मचा हंगामा, PM मोदी के दौरे के बाद उठे सवाल

नई दिल्ली नॉर्वे के एक बड़े अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक कार्टून बनाया है जिस पर अब विवाद शुरू हो गया. इस कार्टून में पीएम मोदी को सपेरे की तरह दिखाया गया था. उनके हाथ में सांप जैसी दिखने वाली एक पेट्रोल पाइप भी दिखाई गई. कार्टून के साथ छपे लेख का शीर्षक था, "A clever and slightly annoying man" यानी "एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।  सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस कार्टून को नस्लवादी बताया. लोगों का कहना है कि पश्चिमी मीडिया अब भी भारत को "सपेरों का देश" वाली पुरानी सोच से देखता है. कई यूजर्स ने लिखा कि यह भारत की गलत और पुरानी छवि दिखाने की कोशिश है।  एक यूजर ने एक्स पर लिखा, "यह कार्टून रेसिस्ट लगता है. पीएम मोदी खुद कई बार कह चुके हैं कि पहले दुनिया भारत को सपेरों का देश मानती थी, लेकिन अब वही सोच फिर दिखाई जा रही है." कुछ लोगों ने इसे "औपनिवेशिक मानसिकता" भी बताया।  विवाद तब और बढ़ गया जब नॉर्वे की पत्रकार हेले लाइंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा कि पीएम मोदी मीडिया से सवाल क्यों नहीं लेते. उन्होंने भारत में प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारों का मुद्दा भी उठाया. हालांकि पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गाहर बिना जवाब दिए वहां से चले गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।  इसके बाद भारत की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई. भारतीय राजनयिक सिबि जॉर्ज ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया को समझे बिना कुछ विदेशी संस्थाएं अधूरी जानकारी के आधार पर राय बना लेती हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही 200 से ज्यादा न्यूज चैनल हैं और भारत जैसे बड़े देश को समझना आसान नहीं है।  इससे पहले भी कई विदेशी मीडिया संस्थानों पर भारत को पुराने "स्नेक चार्मर" वाले स्टीरियोटाइप में दिखाने के आरोप लग चुके हैं. पीएम मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कहा था कि दुनिया कभी भारत को "स्नेक चार्मर्स" यानी "सपेरों का देश" कहती थी, लेकिन आज भारत टेक्नोलॉजी और आईटी की ताकत बन चुका है। 

मोदी- मेलोनी की दोस्ती फिर चर्चा में, डिनर डेट के बाद साथ देखा रोम का ऐतिहासिक कोलोसियम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के अहम कूटनीतिक दौरे के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को इटली की राजधानी रोम पहुंचे। रोम पहुंचने पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद खास अंदाज में उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने डिनर के बाद रोम के ऐतिहासिक 'कोलोसियम' का एक साथ दौरा किया है। इसके बाद, सोशल मीडिया पर एक बार फिर 'मेलोडी' (Meloni+Modi = Melodi) ट्रेंड कर रहा है। तस्वीरों में 'मेलोडी' का खास अंदाज पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन तस्वीरों को शेयर किया है। इन खास तस्वीरों में भारत-इटली की मजबूत होती दोस्ती और दोनों नेताओं के बीच की सहजता साफ देखी जा सकती है। पहली दो तस्वीरों में पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी एक बालकनी से रोम शहर के खूबसूरत नजारों को निहारते और गहरी बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी अपने चिर-परिचित नीले रंग के लिबास में हैं, जबकि मेलोनी पीच रंग के खूबसूरत और सौम्य परिधान में हैं। एक तस्वीर में दोनों नेता कार की पिछली सीट पर बैठे हैं और कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे हैं। यह तस्वीर दोनों के बीच की बेहतरीन व्यक्तिगत बॉन्डिंग को दर्शाती है। कोलोसियम का ऐतिहासिक नजारा: एक अन्य तस्वीर रात के समय की है, जहां दोनों नेता रोम की सबसे भव्य और प्राचीन इमारत 'कोलोसियम' के सामने खड़े होकर पोज दे रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "रोम में उतरने के बाद, मुझे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ रात्रिभोज पर मिलने का अवसर मिला, जिसके बाद मैंने मशहूर कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने विचार साझा किए। आज होने वाली हमारी बातचीत का मुझे बेसब्री से इंतजार है, जिसमें हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत बनाने के विषय पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे।" मेलोनी ने क्या कहा? जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोम पहुंचने पर उनका स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वेलकम टू रोम, माय फ्रेंड!" पहले भी वायरल हुईं मोदी-मेलोनी की तस्वीरें यह पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले साल 2023 में दुबई में हुए COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी की 'Good friends at COP28' वाली सेल्फी काफी वायरल हुई थी। वहीं, साल 2024 में इटली के अपुलिया में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'मेलोडी टीम की तरफ से हैलो' वीडियो ने भी दुनियाभर में चर्चा बटोरी थी। दोनों नेताओं की यह आठवीं मुलाकात विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, साल 2023 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच यह आठवीं मुलाकात है। मार्च 2023 में मेलोनी की भारत यात्रा और जी-20 शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी थी।   पीएम मोदी और मेलोनी का संदेश इन पलों को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "रोम में उतरने के बाद, प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर पर मुलाकात का अवसर मिला, जिसके बाद ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। आज होने वाली हमारी वार्ता को लेकर उत्सुक हूं, जहां हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत करने के तरीकों पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे। वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी पीएम मोदी के साथ की तस्वीर साझा करते हुए गर्मजोशी से लिखा- रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त! इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जहां पीएम मेलोनी पीएम मोदी को रोम शहर के बारे में बता रही हैं। आज की द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा यह यात्रा केवल इन शानदार तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाने का एक बड़ा अवसर है। ताज़ा जानकारियों के अनुसार, आज होने वाली आधिकारिक मुलाकातों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: रणनीतिक साझेदारी (2025-2029): दोनों देश 'जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029' की समीक्षा करेंगे। इसके तहत व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया जाएगा। (आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.77 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है)। IMEC पर जोर: इस द्विपक्षीय वार्ता में 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को लेकर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। FAO मुख्यालय का दौरा: पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र के 'खाद्य और कृषि संगठन' (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति से मुलाकात: पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मुलाकात करेंगे। प्रवासी भारतीयों द्वारा भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर पीएम मोदी का भारतीय समुदाय ने बेहद शानदार स्वागत किया। इस दौरान इतालवी कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत (राग हंसध्वनि) और कथक नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने बच्चों को ऑटोग्राफ दिए, वाराणसी के घाटों की एक पेंटिंग देखी और भारतीय मूल के लोगों से खास बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने 'सनातन धर्म संघ' की इटली में आधिकारिक मान्यता को लेकर आध्यात्मिक गुरुओं से भी मुलाकात की। यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के सफल दौरे के बाद, इटली में पीएम मोदी का यह स्वागत भारत की मजबूत होती वैश्विक पकड़ और इटली के साथ गहरी होती साझेदारी का एक स्पष्ट संकेत है। इन तस्वीरों ने कूटनीति के साथ-साथ दो वैश्विक नेताओं की व्यक्तिगत दोस्ती को भी बखूबी बयां किया है।

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, पीएम मोदी का ‘करीबी’ बनकर ठगी करने वाले आरोपी को मिली जमानत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद आरोपी मोहम्मद काशिफ को सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी। काशिफ पर आरोप है कि उसने पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के साथ अपनी एडिट की हुई यानी मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर लोगों से धोखाधड़ी की थी। हाईकोर्ट के फैसले को किया रद्द बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें काशिफ की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी लगभग तीन साल से हिरासत में है और इस मामले में अपराध की कथित आय 1.10 करोड़ रुपये है। अदालत ने कहा- हम विवादित आदेश को इस कारण से रद्द करने के इच्छुक हैं कि अपीलकर्ता तीन साल से जेल में है। आरोपी ने कोर्ट में दी यह अंडरटेकिंग सुनवाई के दौरान आरोपी काशिफ ने कोर्ट को यह वचन दिया कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने उसे ट्रायल में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि काशिफ सहयोग नहीं करता है या जमानत की शर्तों और अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) जमानत रद्द कराने के लिए निचली अदालत का रुख कर सकता है। क्या है पूरा मामला? ऐसे करता था ठगी: ईडी के मुताबिक, काशिफ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड और एडिटेड तस्वीरें पोस्ट की थीं। इसका मकसद लोगों में यह भ्रम पैदा करना था कि उसकी सरकार के उच्च स्तर तक सीधी पहुंच है। नौकरी और ठेके का झांसा: इस झूठे रसूख का इस्तेमाल कर उसने लोगों से सरकारी विभागों में काम कराने, सरकारी नौकरी दिलाने और सरकारी ठेके दिलाने का वादा करके पैसे ऐंठे। 1.10 करोड़ की बरामदगी: यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से जुड़ा है, जो गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की एफआईआर पर आधारित था। ईडी ने काशिफ से जुड़े ठिकानों से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी का दावा किया है। कोर्ट में किसने क्या दी दलील? काशिफ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मूल अपराध में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। वह 25 मई 2023 से हिरासत में है और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के ट्रायल में काफी देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नवंबर 2023 में आरोप तय हुए थे और अगस्त 2024 में पहले गवाह की गवाही पूरी हुई थी। वहीं, ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया और कहा कि ट्रायल में कोई अनुचित देरी नहीं हुई है। इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ईडी की दलीलों को मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया है।

दुनिया में बढ़ा भारत का गौरव, PM मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से नवाजा गया

नई दिल्ली स्वीडन के बाद अब नॉर्वे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे की ओर से विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मानों में शामिल है। ‘ग्रैंड क्रॉस’ रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट का सर्वोच्च ग्रेड माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान वैश्विक कूटनीति, भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नेतृत्व के योगदान के लिए दिया गया। क्या है रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट ? नार्वे ने पीएम मोदी को जिस रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है, वह नॉर्वे का एक प्रतिष्ठित शाही सम्मान है। ग्रैंड क्रॉस नॉर्वे के शाही सम्मान का सर्वोच्च श्रेणी का पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। नॉर्वे और मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा देने वाले विदेशियों और विदेश में रहने वाले नॉर्वे के नागरिकों को यह प्रदान किया जाता है किसे दिया जाता है यह सम्मान? रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट को मुख्य रूप से विदेशी राजनयिकों, सिविल सेवकों, मानद वाणिज्य दूतों और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाता है। इस सम्मान को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों या ग्रेड में बांटा गया है। इसमें 'ग्रैंड क्रॉस'सर्वोच्च ग्रेड है। इसके बाद सेंट ओलाव आता है। सेंट ओलाव का शाही नॉर्वेजियन पदक ऑर्डर ऑफ सेंट ओलाव नॉर्वे के नागरिकों के लिए है, वहीं, 'ऑर्डर ऑफ मेरिट'मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉर्वे के साथ संबंधों को मजबूत करने वालों को दिया जाता है। कल स्वीडन ने किया था सम्मानित एक दिन पहले,मोदी को द्विपक्षीय संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मान में स्वीडन के प्रतिष्ठित 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान है जो विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाता है। अब तक 32 देश पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से कर चुके हैं सम्मानित इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 32 पहुंच गई है। बीते दिन ही स्वीडन ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था। ट्रेड पर भी हुई बात सम्मान समारोह में दोनों देशों के बीच व्यापार, ग्रीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक साख और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है. इस सम्मान के बाद भारत और नॉर्वे के रिश्तों में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है. अब तक 32वां सम्‍मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.