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सुपरफास्ट ग्रोथ के मिशन पर भारत, प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक विशेषज्ञों के साथ किया मंथन

नई दिल्‍ली  पूरी दुनिया मंदी, युद्ध की आहट और आर्थिक अनिश्चितता के चक्रव्यूह में फंसी है. वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा है, सप्लाई चेन टूट रही है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने को बेताब हैं. दुनिया की इस महा-उथल-पुथल के बीच दिल्ली के पावर कॉरिडोर में भारत को आर्थिक सुपरपावर बनाए रखने की एक बेहद महत्वपूर्ण बिसात बिछाई जा रही थी. जून की इस तपती दोपहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े आर्थिक धुरंधरों (PM-EAC) के साथ बंद कमरे में मेज पर जुटे. मकसद साफ था दुनिया भले ही मंदी की गर्त में जाए लेकिन भारत की विकास दर सुपरफास्ट रफ्तार से दौड़ती रहनी चाहिए. इस हाई-प्रोफाइल बैठक में न सिर्फ भारत की अभेद्य आर्थिक किलेबंदी का ब्लूप्रिंट तैयार हुआ बल्कि पश्चिम एशिया के बारूद की आंच से घरेलू बाजार को बचाने का फुलप्रूफ प्लान भी सामने आया।  पीएम नरेंद्र मोदी की बैठक की 5 मुख्य बातें • आर्थिक किलेबंदी की रणनीति: वैश्विक मंदी और तनाव के बीच भारत की 7.7% की रफ्तार को बरकरार रखने और इसे आगे बढ़ाने के लिए नए आर्थिक सुधारों पर गहन मंथन हुआ।  • पश्चिम एशिया संकट पर पैनी नजर: लाल सागर और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के व्यापार, MSMEs और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ने वाले असर का बारीकी से आकलन किया गया।  • नीति आयोग की खुफिया रिपोर्ट: नीति आयोग द्वारा पीएमओ (PMO) को सौंपी गई इम्पैक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के बड़े झटकों से निपटने की रणनीति बनाई गई।  • ईज ऑफ लिविंग पर सबसे बड़ा दांव: आम आदमी के जीवन को आसान बनाने और व्यापारिक बाधाओं को खत्म करने के लिए नियमों को और अधिक सरल बनाने पर सहमति बनी।  • घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर: विदेशी झटकों से बेअसर रहने के लिए देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने और घरेलू उपभोग को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।  वैश्विक तूफान, पीएम मोदी की ढाल वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रही है. एक तरफ पश्चिम एशिया का संकट अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना रहा है तो दूसरी तरफ दुनिया के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की जा रही सख्ती ने निवेश पर ब्रेक लगा दिया है. ऐसे में भारत के लिए अपनी ग्रोथ को कायम रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।  इस बैठक का सबसे बड़ा आर्थिक संदेश यह है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक नीति पर चल रहा है. वित्त वर्ष 2026 में 7.7% की जीडीपी ग्रोथ हासिल करके भारत ने अपनी आंतरिक मजबूती साबित की है. नीति आयोग की रिपोर्ट और PM-EAC की सलाह का कोर-पॉइंट यह है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत अपनी घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड सरकारी खर्च के जरिए उसकी भरपाई करेगा. सरकार का यह कदम भारतीय बाजार को एक इंसुलेटेड शील्ड यानी सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, जिससे दुनिया की मंदी का असर भारत के युवाओं के रोजगार और उद्योगों पर न पड़े।  सवाल-जवाब PM-EAC की इस आपात बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था? इस बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की विकास दर को ‘सुपरफास्ट’ बनाए रखना, घरेलू उद्योगों को सुरक्षित करना और आर्थिक सुधारों को गति देना था।  पश्चिम एशिया के तनाव से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या खतरा है? भारत अपनी ऊर्जा (क्रूड ऑयल) जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और माल ढुलाई (शिपिंग रूट) महंगी हो सकती है, जिससे भारत के निर्यात और MSMEs पर असर पड़ सकता है।  नीति आयोग की ‘इम्पैक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट’ में क्या खास है? इस रिपोर्ट में युद्ध के लंबे खिंचने की स्थिति में भारतीय व्यापार, किसानों, कृषि क्षेत्र और प्रमुख औद्योगिक सेक्टरों पर पड़ने वाले तात्कालिक और मध्यम अवधि के प्रभावों का पूरा खाका और उससे निपटने के उपाय सुझाए गए हैं।  सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर इतना जोर क्यों दे रही है? वैश्विक उथल-पुथल के समय अगर देश के भीतर व्यापार करना और आम नागरिक का जीवन आसान होगा, तो घरेलू निवेश बढ़ेगा. इससे नए रोजगार पैदा होंगे और विदेशी निवेशकों के लिए भारत सबसे सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बना रहेगा। 

MP के 5 जिलों की बदलेगी तस्वीर, 4415 करोड़ की लागत से दो हाईवे परियोजनाओं को मंजूरी

भोपाल   प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्ष्ता में दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में आयोजित की गई। इस मीटिंग में मध्य प्रदेश के रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े प्रस्ताव पास किए गए। मीटिंग में मध्य प्रदेश को दो हाईवे की सौगात देने का फैसला लिया गया। केंद्रीय कैबिनेट बैठक में नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग हिस्सों को अपग्रेड करने और चौड़ीकरण का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट की लागत 4415 करोड़ रुपए होगी। प्रोजेक्ट की लंबाई 233.635 किमी होगी जिसमे प्रदेश के कई बड़े जिले शामिल होंगे। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने दी। बता दें कि, 6 जून को पीएम मोदी का नरसिंहपुर दौरा प्रस्तावित है। एमपी में दो मिलेंगे दो नए हाईवे मोदी कैबिनेट ने नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने का फैसला लिया है। पहला हिस्सा हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूढ़ी सेक्शन के 125 किमी पर मौजूद नैरो लेन को दो लेन में अपग्रेड किया जाएगा। दूसरा हिस्सा 108.643 किमी के देशगांव-जुलवानिया सेक्शन है जिसे टू-लेन से फोरलेन किए जाने फैसला लिया गया है। इसके अलावा खरगोन में ट्रैफिक कम करने के लिए 16.20 किमी का ग्रीनफ़ील्ड बाईपास के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट से बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिले को बड़ा फायदा मिलेगा। पीएम गति शक्ति का हिस्सा है प्रोजेक्ट रेल मंत्री के अनुसार 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने वाल प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति पहल का हिस्सा है जिसमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक इंडस्ट्रियल पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। यह खंडवा और बड़वानी जिलों के साथ-साथ बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे आदिवासी जिलों सहित पांच सामाजिक नोड्स को भी जोड़ेगा। एमपी आने वाले है पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मध्यप्रदेश के दौरे पर आ सकते हैं। इस बार प्रधानमंत्री का दौरा नरसिंहपुर जिले का प्रस्तावित है, जहां वे गाडरवारा तहसील में सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन विस्तार परियोजना के विस्तार के लिए भूमिपूजन करने आ सकते हैं। सीएम ने प्रधानमंत्री को गाडरवारा आने का न्योता दिया था। पीएम के संभावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल दौरा प्रस्तावित है, आधिकारिक आदेश नहीं आया है।

₹2.25 लाख करोड़ की निकासी के बाद सरकार का बड़ा दांव, क्या फिर लौटेंगे विदेशी निवेशक?

 नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के निकलने का सिलसिला लगातार जारी है और FPIs की भारी बिकवाली का दबाव शेयर मार्केट में साफ नजर आ रहा है. इस साल सिर्फ फरवरी महीने को छोड़ दें, तो हर महीने एफपीआई ने बाजार से पैसे निकाले हैं. अब इन निवेशकों की वापसी के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे इन निवेशकों के यू-टर्न (FPIs U-Turn) की उम्मीद जागी है।  दरअसल, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत मोदी सरकार (Modi Govt) ने भारतीय सरकारी बांडों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर पूंजीगत लाभ कर यानी कैपिटल गेन टैक्स को हटाने का निर्णय लिया है।  मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी सूत्रों के हवाले से ये बात सामने आई है कि कैश फ्लो को बढ़ावा देने, भारतीय करेंसी रुपये (Indian Rupee) को सपोर्ट करने और ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल की हाई कीमतों के प्रभाव से इकोनॉमी को बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के तहत मोदी कैबिनट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।  इसे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसका सीधा उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स के जटिल जंजाल को कम करना है ताकि वे अपनी पूंजी भारत से बाहर ले जाने के बजाय यहीं निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों. एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों को मिलने वाली इस प्रस्तावित टैक्स राहत से न सिर्फ घरेलू शेयर बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ेगी, बल्कि रुपये पर बना भारी दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।  रिजर्व बैंक भी कर सकता है महत्‍वपूर्ण घोषणा सरकार का यह अध्यादेश भारतीय रिजर्व बैंक के साथ बनाई गई एक संयुक्त और समन्वित रणनीति का हिस्सा है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है. शुक्रवार को एमपीसी के फैसलों की घोषणा होगी. ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक इस अध्यादेश को सपोर्ट करने वाले कुछ और बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय बदलावों का ऐलान भी कर सकता है।  अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की तैयारी विदेशी निवेशकों को लुभाने और रुपये को मजबूत करने के साथ ही सरकार विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य नीतिगत कदमों पर भी काम कर रही है. विभिन्न उद्योगों और कारोबारों को मंदी से बचाने के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट लाइन दी जा सकती है. वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण संकट से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए विशेष राहत पैकेज लाया जा रहा है. कैबिनेट ने आयकर अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी है, जिससे इन बदलावों को लागू किया जा सके. बता दें कि राष्ट्रपति से अप्रूवल मिलने के बाद यह निर्णय प्रभावी हो जाएगा।  सरकार ने क्यों लिया फैसला?  मोदी सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जबकि देश वेस्ट एशिया संघर्ष से विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली से जूझ रहा है. इसके साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से लेकर बढ़ती ऊर्जा लागत की मार भी पड़ रही है।  सूत्रों के अनुसार, इन सबके बीच सरकार का उद्देश्य भारतीय ऋण बाजारों में अधिक विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना है, जिससे Iran War के चलते पैदा हुए चुनौतियों का कुछ समाधान किया जा सके. इस कदम के तहत सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह समाप्त करेगी।  अभी कितना लगता है टैक्स?  गौरतलब है कि फिलहाल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए बॉन्ड और लिस्टेड शेयरों पर 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना होता है. इसके अलावा, उन्हें सरकारी बॉन्ड से मिले ब्याज पर 20% का विदहोल्डिंग टैक्स भी चुकाना पड़ता है. इस पर पहले मिलने वाली 5% की रियायत को सरकार ने 2023 में समाप्त कर दिया था।  2026 में अब तक ₹2.50 लाख करोड़ निकाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs का बीते लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार को लेकर मूड खराब है. इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2026 में फरवरी महीने को छोड़कर हर महीने बिकवाली हुई है और अब तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. इस हिसाब ये साल विदेशी निवेश जाने के मामले में अब तक के सबसे खराब सालों में से एक बन गया है। 

मध्यप्रदेश दौरे पर पीएम मोदी, नरसिंहपुर के गाडरवारा में NTPC परियोजना को देंगे बड़ी सौगात

नरसिंहपुर   मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में 6 जून को बड़ा ऊर्जा कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi प्रस्तावित दौरे के तहत गाडरवारा पहुंचेंगे, जहां वे NTPC सुपर थर्मल पावर स्टेशन के विस्तार परियोजना का भूमिपूजन कर सकते हैं। इस दौरे को प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परियोजना के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। 1600 मेगावाट क्षमता की दो नई यूनिटें गाडरवारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन के विस्तार के तहत यहां 800-800 मेगावाट की दो नई यूनिटें स्थापित करने का प्रस्ताव है। कुल 1600 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट से प्रदेश को अतिरिक्त बिजली उत्पादन में मजबूती मिलेगी। माना जा रहा है कि इससे आने वाले वर्षों में औद्योगिक और घरेलू बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम के दौरान इन दोनों नई पावर यूनिटों का भूमिपूजन करेंगे। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना मध्य प्रदेश के साथ-साथ आसपास के राज्यों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस बड़े विस्तार प्रोजेक्ट से केवल बिजली उत्पादन ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे। निर्माण कार्य से लेकर तकनीकी और सहायक सेवाओं तक बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलने की संभावना जताई जा रही है। गाडरवारा और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी इससे गति मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने तेज की तैयारियां प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह और पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने कार्यक्रम स्थल, हेलिपैड और पार्किंग व्यवस्था का निरीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। वीआईपी मूवमेंट, आम लोगों की सुविधा और कार्यक्रम संचालन को लेकर अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए गाडरवारा में तैयारियों का दौर लगातार जारी है। ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निवेश गाडरवारा NTPC परियोजना का विस्तार मध्य प्रदेश में ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए यह परियोजना आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही यह निवेश औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने वाला माना जा रहा है।  

पीएम मोदी की ‘मन की बात’ से प्रेरित होकर डॉ. वर्णिका ने सुनी बच्चों के दिल की बात

पीएम मोदी की ‘मन की बात’ सुन डॉ वर्णिका ने सुनी बच्चो के मन की बात पीएम मोदी की ‘मन की बात’ से प्रेरित हुए बाल आश्रम के बच्चे, वर्णिका शर्मा ने कराई आम प्रदर्शनी की सैर रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 134वें संस्करण का श्रवण छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा ने बाल आश्रम के बच्चों के साथ किया। इस दौरान बच्चों ने प्रधानमंत्री के संदेशों को उत्साहपूर्वक सुना। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि देश के युवा खिलाड़ी लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं और अनिमेष कुजूर इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ी की सराहना होने से बच्चों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। वहीं, प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध आमों और गर्मी के मौसम में पारंपरिक पेय पदार्थों का भी जिक्र किया। आम की विभिन्न प्रजातियों के बारे में सुनकर बाल आश्रम के बच्चों ने आम के प्रति विशेष रुचि दिखाई और आम प्रदर्शनी देखने की इच्छा व्यक्त की। बच्चों की इस मांग को देखते हुए राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने तत्काल पहल करते हुए बच्चों को आम प्रदर्शनी ले जाने के लिए विशेष बस की व्यवस्था कराई। प्रदर्शनी में बच्चों ने विभिन्न किस्मों के आमों को देखा, उनके बारे में जानकारी प्राप्त की और इस अनूठे अनुभव का आनंद लिया। प्रदर्शनी के दौरान बच्चों के चेहरे पर उत्साह और खुशी साफ झलक रही थी। वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ ऐसे ज्ञानवर्धक और अनुभवात्मक अवसर उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रेरणादायक संदेश और बच्चों की जिज्ञासाओं को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियां उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

10 जून की मुख्यमंत्री परिषद बैठक से पहले बड़ा संकेत, मोदी सरकार में हो सकता है फेरबदल

नई दिल्ली मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले विस्तार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। नौ जून को इस कार्यकाल के दो साल पूरा होने और 10 जून को राजगशासित दलों के मुख्यमंत्री परिषद की बैठक के बाद पहला मंत्रिमंडल विस्तार होगा, उसके बाद भाजपा के केंद्रीय संगठन की नई टीम बनेगी। हाल ही में दिल्ली के अध्यक्ष बनाए गए हर्ष मल्होत्रा और चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए मंत्री पद से इस्तीफा देंगे। सूत्रों ने बताया कि विस्तार के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम पर साथ-साथ मंथन हो रहा है। संकेत हैं कि मुख्यमंत्री परिषद की बैठक के बाद 20 जून से पहले मंत्रिमंडल विस्तार को अमली जामा पहनाया जाएगा, इसके तत्काल बाद केंद्रीय संगठन की नई टीम घोषित कर दी जाएगी। संगठन को मजबूत करने के लिए मंत्रियों के इस्तीफे संभव राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली प्रदेश इकाई की कमान संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा और आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्य उत्तर प्रदेश के संगठन प्रमुख पंकज चौधरी संगठनात्मक कार्यों पर अपना पूरा ध्यान लगाने के लिए जल्द ही केंद्रीय मंत्री पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई सांगठनिक टीम के गठन पर भी शीर्ष नेतृत्व में गहन विचार-विमर्श चल रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद 20 जून से पहले इस कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद राष्ट्रीय संगठन के नए पदाधिकारियों की सूची भी जारी कर दी जाएगी। आगामी विधानसभा और आम चुनावों को देखते हुए गहन मंथन इस बार सरकार और संगठन दोनों के स्तर पर बनने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई टीम में आगामी लोकसभा चुनाव तक किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं होगी। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी को अगले वर्ष के शुरुआती महीनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनावी दंगल में उतरना है, जबकि साल के अंत में गुजरात और मणिपुर जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और संगठन की नई टीमों के जरिए देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों के बीच एक सटीक संतुलन साधना बेहद जरूरी है, यही वजह है कि दोनों सूचियों को अंतिम रूप देने से पहले शीर्ष स्तर पर काफी बारीकी से समीक्षा की जा रही है। ​हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी देंगे मंत्री पद से इस्तीफा ! इस बड़े फेरबदल और विस्तार के बीच सरकार के 2 कद्दावर मंत्रियों के इस्तीफे की खबर सबसे ज्यादा चर्चा में है। हाल ही में दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाए गए हर्ष मल्होत्रा और उत्तर प्रदेश बीजेपी के नवनियुक्त अध्यक्ष पंकज चौधरी जल्द ही केंद्रीय मंत्री पद से अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंपेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 'एक व्यक्ति एक पद' के सिद्धांत के तहत इन दोनों नेताओं को पूरी तरह से चुनावी राज्यों और संगठन के काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। इन दोनों इस्तीफों के बाद खाली हो रहे पदों और नए मंत्रियों को शामिल करने को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के साथ मंथन का दौर अंतिम चरण में पहुंच गया है। ​आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए साधा जाएगा सामाजिक संतुलन  बीजेपी के केंद्रीय संगठन और मंत्रिमंडल में होने जा रही इस बड़ी माथापच्ची के पीछे का मुख्य कारण आगामी राज्यों के चुनाव हैं। पार्टी को अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात और मणिपुर जैसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है। इसके अतिरिक्त हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में हाजिरी लगाई है। सरकार और संगठन की इस नई टीम के जरिए इन सभी राज्यों में क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय समीकरणों को पूरी तरह दुरुस्त करने का खाका खींचा गया है, ताकि आगामी आम चुनावों तक टीम में बार-बार बदलाव की जरूरत न पड़े। शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्रियों के बीच बैठकों का दौर जारी सत्ता और संगठन को नया रूप देने के लिए ही हालिया पांच राज्यों के चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद से विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय आलाकमान के साथ ताबड़तोड़ बैठकें हो रही हैं। नतीजों के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने देश की राजधानी पहुंचकर केंद्रीय नेताओं से संवाद किया है। इसके साथ ही, खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी लगातार राज्यों के दौरों पर हैं, जहां वे ओडिशा और कर्नाटक के संगठनात्मक दौरों को पूरा करने के बाद अब उत्तराखंड के प्रवास पर रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसलिए ज्यादा माथापच्ची केंद्रीय संगठन की नई टीम और मंत्रिमंडल विस्तार से बनने वाली पीएम मोदी की नई टीम में आगामी आम चुनाव तक कोई बदलाव नहीं होना है। इसके अतिरिक्त पार्टी को अगले साल की शुरुआत में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब और अंत में गुजरात और मणिपुर जैसे अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव का सामना करना है। ऐसे में सरकार की नई टीम के जरिए सभी राज्यों से संतुलन बैठाना होगा। यही कारण है कि दोनों ही सूची के लिए गहन माथापच्ची हो रही है। मुख्यमंत्रियों के साथ ताबड़तोड़ बैठक दोनों स्तर पर नई टीम पर विचारविमर्श के लिए ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक हुई है। नतीजे के बाद बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में हाजिरी लगाई है। खुद पार्टी अध्यक्ष ओडिशा, कर्नाटक के बाद अब उत्तराखंड के दौरे पर हैं। 

आम लोगों के लिए खुशखबरी! केंद्र सरकार लाई नई योजना, पैसे से लेकर बीमा तक मिलेगा फायदा

नई दिल्ली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी सुविधाओं के लिए स्कीम लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत सरकार एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी में है। यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) आशुतोष पेडनेकर ने दी है। सरकार ने बढ़ाए कदम पेडनेकर ने बताया कि सरकार गिग वर्कर्स को सुविधाएं देने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स को लागू करने की हरी झंडी दी गई है। यह बोर्ड इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर काम करेगा। इसके साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड भी बनाया जा रहा है। इस फंड के जरिए सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद करेगी। इन योजनाओं के स्वरूप को अंतिम रूप देने के लिए सरकार फंड मैनेजर्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। सरकार की ओर से इसके लिए प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने कर्मचारियों का डेटा 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने को कहा गया है। इससे कामगारों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके। कंपनियों के लिए क्या प्लान? सरकार की योजना के तहत एग्रीगेटर कंपनियों का डेटा और ई-श्रम पोर्टल एक-दूसरे से सीधे जुड़ेंगे। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। कामगार मोबाइल ऐप के जरिए अपने अधिकारों और इस्तेमाल की जानकारी भी देख सकेंगे। गिग वर्कर्स कौन हैं? गिग वर्कर्स ऐसे कर्मचारी होते हैं जो पारंपरिक कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से बाहर रहकर तय समय या प्रोजेक्ट के आधार पर काम करते हैं। इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र ठेकेदार और पार्ट-टाइम कर्मचारी आदि शामिल हो सकते हैं। वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे हैं जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे लोगों या कंपनियों को सेवाएं देते हैं। उदाहरण से समझें तो ओला-उबर के ड्राइवर या स्विगी-जोमैटो के डिलीवरी ब्वॉय प्लेटफॉर्म वर्कर की कैटेगरी में आते हैं। भारत में पहली बार नए श्रम कानूनों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। फिलहाल देश में करीब 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं और सरकार को उम्मीद है कि दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।

CM बनने के बाद पहली बार PM मोदी से मिले विजय, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

 नई दिल्ली तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री, जोसेफ विजय अपनी कुर्सी संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं. इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री से तमिलनाडु की उन मांगों को लेकर बात की जो केंद्र सरकार के सामने काफी लंबे समय से पेंडिंग हैं. विजय, तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. उनकी मुलाकात का पूरा एजेंडा तो सामने नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री के अलावा और भी कई राजनीतिक हस्तियों से मिल सकते हैं। तमिलनाडु हाउस पहुंचे विजय दिल्ली पहुंचने के बाद विजय सबसे पहले, सेंट्रल दिल्ली में तमिलनाडु हाउस पहुंचे. प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात शाम 4 बजकर 30 मिनट के लिए शिड्यूल थी. शाम को प्रधानमंत्री से मिलने विजय सेवा तीर्थ पहुंचे. वहां करीब 25 मिनट तक दोनों की मीटिंग चली. इस मीटिंग में विजय और पीएम मोदी की बातचीत के बारे में डिटेल्स सामने आने का अभी इंतजार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर दी थी बधाई विजय का सिनेमा सुपरस्टार से, पॉलिटिक्स का हीरो बनना बड़ी खबर थी. जब उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई दी थी. पीएम के एक्स हैन्डल से शेयर हुए पोस्ट में लिखा था, 'थिरु सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बधाई. उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं. केंद्र सरकार लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी। दो साल पहले ही अपनी पार्टी TVK के साथ विजय ने राजनीति में एंट्री ली थी. तमिलनाडु चुनावों में शानदार जीत के बावजूद उनके पास बहुमत की कमी थी जिसके चलते उनका मुख्यमंत्री बन पाना लगातार खबरों में था. लेकिन की दशकों के बाद राज्य में तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन की सरकार चला रहे विजय, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं।

PM मोदी के 12 साल पूरे, वित्त मंत्री ओपी चौधरी बोले- सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का बेमिसाल दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी शुभकामनाएं सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का बेमिसाल रायपुर  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि 26 मई 2014 से शुरू हुआ यह 12 वर्षों का कार्यकाल देश के इतिहास में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प का जीवंत प्रतीक रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने अंत्योदय के लक्ष्य को साकार किया है। योजनाओं से आया क्रांतिकारी व्यापक बदलाव          चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाया है। जनधन योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीबों, किसानों और माताओं-बहनों के जीवन को गरिमापूर्ण बनाया है। डिजिटल इंडिया अभियान ने युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं और देश में अभूतपूर्व पारदर्शिता सुनिश्चित की है। नव-निर्माण और सबका साथ, सबका विकास         वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह कालखंड देश के नव-निर्माण और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला रहा है। इन 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक पटल पर विकास, सुशासन, डिजिटल परिवर्तन और जनकल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अद्वितीय राष्ट्र-समर्पण, निरंतर जनता-सेवा और सुशासन के लिए उनका हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

‘एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार’— राहुल गांधी के दावे में कितना दम? राहुल गांधी का बड़ा दावा: क्या सच में खतरे में है मोदी सरकार या सिर्फ सियासी बयानबाजी?

नई दिल्ली विपक्ष के नेता राहुल गांधी का यह दावा कि अगले एक साल में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार गिर जाएगी, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. कांग्रेस की एक बैठक में दिए गए इस बयान को बीजेपी ने पूरी तरह हवा-हवाई और राजनीतिक निराशा से जुड़ा बयान बताया है. सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी के इस दावे के पीछे कोई ठोस राजनीतिक आधार है या फिर यह सिर्फ विपक्षी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश है? अगर मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो राहुल गांधी का दावा जमीन से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी जैसा नजर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि केंद्र में एनडीए सरकार अभी भी मजबूत संख्या बल के साथ सत्ता में बनी हुई है. बीजेपी भले अकेले दम पर पहले जैसा आंकड़ा न लाई हो, लेकिन गठबंधन के साथ सरकार पूरी तरह स्थिर दिखाई देती है. सरकार पर किसी तरह का तत्काल राजनीतिक संकट नजर नहीं आता।  दरअसल, हाल के महीनों में हुए कई चुनावों ने यह संकेत दिया है कि बीजेपी का जनाधार अभी भी बेहद मजबूत है. पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पार्टी को जनता का शानदार समर्थन मिला है. खासतौर पर बंगाल में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी को बेहद मजबूत किया है. असम में भी पार्टी और उसकी सरकार की पकड़ पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है. इन चुनावों ने यह संदेश दिया कि बीजेपी केवल हिंदी पट्टी तक सीमित पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आज भी बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का चेहरा अभी भी विपक्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी माना जाता है. विपक्ष लगातार महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठा रहा है, लेकिन इसके बावजूद मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता में कोई कमी नहीं दिख रही. उनमें जनता का एक अटूट भरोसा दिखता है. यही वजह है कि बीजेपी लगातार चुनावी राजनीति में भी बढ़त बनाए हुए है।  राहुल गांधी अपने बयान में आर्थिक असंतोष और युवाओं की नाराजगी को सरकार के खिलाफ माहौल बनने का कारण बता रहे हैं. कांग्रेस नीट पेपर लीक और छात्रों की परेशानी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. लेकिन, सरकार ने इन मुद्दों पर भी त्वरित कदम उठाते हुए परीक्षा रद्द कर दी. ऐसे में ये मुद्दे भी अब प्रभावी नहीं रहे. वैसे भी भारतीय राजनीति का अनुभव बताता है कि केवल मुद्दों के आधार पर सरकारें नहीं गिरतीं. इसके लिए सत्ता पक्ष के भीतर बड़ा विभाजन, गठबंधन में दरार या व्यापक राजनीतिक संकट होना चाहिए. फिलहाल ऐसी कोई स्थिति दिखाई नहीं देती. इसके बावजूद अगर राहुल गांधी एक मजबूत सरकार के गिरने की भविष्यवाणी कर रहे हैं तो इससे उनकी राजनीतिक समझ पर सवाल उठ सकते हैं।  विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं राहुल गांधी के बेतुके दावे के साथ विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं मानी जा रही. इंडिया गठबंधन के भीतर कई दलों के अपने-अपने क्षेत्रीय हित हैं और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष अब तक कोई स्पष्ट चेहरा या ठोस वैकल्पिक एजेंडा पेश नहीं कर पाया है. कई राज्यों में कांग्रेस का संगठन लगातार कमजोर हुआ है. ऐसे में बीजेपी के मुकाबले विपक्ष की चुनौती फिलहाल बिखरी हुई नजर आती है. बीजेपी नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान को इसी नजरिए से देखा है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सांसद संबित पात्रा जैसे नेताओं ने कहा कि विपक्ष जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहा और इसलिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं।  असल में राहुल गांधी का बयान ज्यादा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश लगता है. कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में यह भरोसा बनाए रखना चाहती है कि बीजेपी को चुनौती दी जा सकती है. लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरण, मोदी की लोकप्रियता, एनडीए का संख्या बल और विपक्ष की कमजोरी को देखते हुए यह दावा फिलहाल वास्तविकता से ज्यादा राजनीतिक कल्पना जैसा दिखाई देता है।