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UAE के बड़े फैसले से बदलेंगे तेल समीकरण! भारत को दिखा बड़ा लाभ

नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले दिनों तेल उत्पादक मुस्लिम देशों के संगठन ओपेक से खुद को अलग कर लिया था। उसका कहना था कि इस संगठन में रहते हुए उसके ऊपर तेल उत्पादन की सीमा तय करने को लेकर बंधन रहता है। ऐसे में वह इससे बाहर रहना ही ठीक समझ रहा है। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी यूएई दौरे पर 15 मई को पहुंचने वाले हैं। उससे पहले यूएई स्थित भारतीय राजदूत दीपक मित्तल का कहना है कि इससे हमें फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत की ऊर्जा सुरक्षा यूएई के साथ संबंध बेहतर होने से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अब यदि यूएई की ओर से तेल उत्पादन में इजाफा होगा तो इसका फायदा हमें सीधे तौर पर मिलेगा। इसके अलावा हम अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधिकरण भी कर सकेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे से पहले उन्होंने कहा कि हमारी संयुक्त अरब अमीरात के साथ साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। अब हम अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहे हैं और अलग-अलग देशों से खरीद बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत भी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से इजाफा कर रहा है। हमारी ओर से पाइपलाइन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा एलपीजी, कच्चा तेल, एलएनजी की स्टोरेज के लिए भी हम क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं। मित्तल ने कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात हमारे लिए महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। पिछले साल भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाले देशों में यूएई चौथे स्थान पर था। भारत के कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 11 फीसदी थी। इसके अलावा पिछले 6 से 7 सालों में वह एलएनजी का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है।' दीपक मित्तल ने कहा कि यूएई ने जब ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया है तो वह अपने लिए बाहर भी अवसरों की तलाश कर रहा होगा। उसने उत्पादन में इजाफा किया तो भारत एक खरीददार के तौर पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हमेशा ही अच्छे नेटवर्क को प्राथमिकता दी है। सऊदी अरब से किन मतभेदों के चलते OPEC से निकला UAE उन्होंने कहा कि हम अपने रणनीतिक स्टोरेज में इजाफा कर रहे हैं। कच्चे तेल के अलावा हम गैस, एलपीजी और पीएनजी की स्टोरेज भी बढ़ाना चाहते हैं। बता दें कि इसी महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात ने ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया था। इस तरह उसने दशकों से सऊदी अरब के साथ चले आ रहे मतभेदों को खत्म कर दिया था। दरअसल सऊदी अरब की ओपेक में ज्यादा पकड़ मानी जाती है। अकसर वह तेल उत्पादन घटाने और बढ़ाने के एकतरफा फैसलों की बात करता था। यह स्थिति यूएई को असहज करने वाली थी।

भारत-UAE संबंधों में नई उड़ान! PM मोदी की यात्रा में अरबों डॉलर के निवेश पर बनी सहमति

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान शुक्रवार को भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कई समझौते हुए। इसमें द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी, एलपीजी की आपूर्ति एवं रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और भारत के आरबीएल बैंक, सम्मान कैपिटल और इन्फ्रास्ट्रक्चर में 5 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। इसके अलावा, दोनों देश के बीच गुजरात के वाडिनार में एक शिप रिपेयरिंग क्लस्टर को स्थापित करने के लिए समझौता हुआ है। अबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत हर परिस्थिति में संयुक्त अरब अमीरात के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा। शांति और स्थिरता की बहाली के लिए भारत हर संभव सहयोग देगा।" उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का "स्वतंत्र और खुला रहना महत्वपूर्ण है ओर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भारत यूएई की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहह्यान को धन्यवाद दिया और कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति में द्विपक्षीय सहयोग का महत्व और भी बढ़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनवरी में यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने संबंधों को गुणात्मक रूप से उन्नत करने पर सहमति जताई थी और कम समय में ही महत्वपूर्ण प्रगति हासिल कर ली है। उन्होंने कहा, "हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए में आपको हार्दिक धन्यवाद देता हूं। जनवरी में आपकी भारत यात्रा के दौरान, हमने अपने संबंधों को गुणात्मक रूप से उन्नत करने पर सहमति व्यक्त की थी। इतने कम समय में भी, हमने सभी मामलों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आज की स्थिति को देखते हुए, भारत-यूएई रणनीतिक सहयोग का महत्व बहुत बढ़ गया है। आने वाले समय में, हम हर क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संवाद और कूटनीति ही मुद्दों को सुलझाने का सर्वोत्तम तरीका है। प्रधानमंत्री आज सुबह यूएई पहुंचे और उनका औपचारिक स्वागत किया गया। बाद में, उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (जिन्हें लोकप्रिय रू से एमबीजेड के नाम से जाना जाता है) के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी, ग्रीन ट्रांजिशन और व्यापार सहित प्रमुख क्षेत्रों में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करना है।

वैश्विक मंच पर भारत का दम! प्रधानमंत्री मोदी की 5 देशों की अहम यात्रा आज से शुरू

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 15 मई से अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा शुरू कर रहे हैं। इस 5 दिवसीय दौरे (15-20 मई) के दौरान पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच यह दौरा भारत के लिए रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। जानें क्या है दौरे का मुख्य एजेंडा? होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पीएम मोदी का प्राथमिक लक्ष्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को पुख्ता करना है। इस यात्रा में पारंपरिक ईंधनों के साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन और न्यू टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर रहेगा। सबसे पहले जायेंगे UAE दौरे के पहले दिन पीएम मोदी सबसे पहले अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। जिसके बाद IOC और ADNOC के बीच LPG सप्लाई को लेकर रणनीतिक सहयोग होगा। भारत में Strategic Petroleum Reserve बनाने के लिए ISPRL और ADNOC के बीच अहम डील होने की उम्मीद है। वहीं UAE में रह रहे 45 लाख भारतीयों के हितों पर भी चर्चा होगी। यूरोप दौरा नीदरलैंड (16-17 मई): पीएम मोदी नीदरलैंड्स के पीएम रॉब जेटन के साथ सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन पर बात करेंगे। स्वीडन (17-18 मई): गोथेनबर्ग में स्वीडिश पीएम के साथ सप्लाई चेन और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा होगी। यहां पीएम मोदी 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे। नॉर्वे: 43 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे जा रहा है। 19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। यहां मुख्य फोकस ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) और आर्कटिक सहयोग पर रहेगा। इटली: दौरे का समापन 20 मई को यात्रा के अंतिम चरण में पीएम मोदी इटली पहुंचेंगे। वहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा और व्यापार संबंधों पर द्विपक्षीय बातचीत के बाद वे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे। जानें क्यों जरूरी है यह दौरा? जनवरी 2026 में भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह पीएम की पहली बड़ी यूरोप यात्रा है। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यात के लिए नए रास्ते खोलना और भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद 'सप्लाई चेन पार्टनर' के रूप में स्थापित करना है।

नरेंद्र मोदी पर शिवराज सिंह चौहान की अनोखी प्रस्तुति, किताब में दिखा ‘अपनापन’ का जिक्र

भोपाल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों पर एक किताब लिखी है। किताब का नाम ' अपनापन ' है। इसका लोकार्पण 26 मई को नई दिल्ली में है। शिवराज सिंह चौहान ने खुद इसकी जानकारी दी है। किताब की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिवराज सिंह चौहान के अनुभवों पर है। पीएम के साथ अनुभवों को किताब में लिखा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा कि तीन दशकों से अधिक के सार्वजनिक जीवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनेक भूमिकाओं और विभिन्न दायित्वों में कार्य करते हुए मुझे उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व, सेवा, संगठन, सुशासन और राष्ट्र समर्पण के अनेक दुष्टिकोणों से देखने समझने का अवसर मिला है। इन्हीं अनुभवों, भावनाओं, प्रेरणाओं और जीवन-मूल्यों को मैंने अपनी पुस्तक 'अपनापन' में संजोने का विनम्र प्रयास किया है। 26 मई को किताब का लोकार्पण शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरी इस कृति 'अपनापन' का लोकार्पण 26 मई 2026 को सुबह साढ़े दस बजे, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में होगा। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक सभी पाठकों को, विशेषकर हमारे युवा मित्रों को, सेवा, संवेदना, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण के विचारों के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देगी। पुस्तक का लोकार्पण पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ करीब से जिया है उन्होंने कहा कि मेरे लिए 'अपनापन' केवल एक पुस्तक नहीं है, यह उन तैंतीस वर्षों को शब्दों में उतारने का प्रयास है, जिनको मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत करीब से जिया है। लोगों ने मंचों से उन्हें भाषण करते हुए देखा है, लेकिन मैंने उनमें उस व्यक्ति को देखा है, जो दिन भर देर रात तक काम करने के बाद भी अगली सुबह उसी ऊर्जा के साथ देश के लिए खड़ा होता है। लोग उनके निर्णय को देखते हैं, लेकिन मैंने देखा है कि कैसे उनका दिल हर गरीब, हर किसान, मां, बहन-बेटी और हर कार्यकर्ता के लिए धड़कता है। 1991 की एकता यात्रा का जिक्र शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुझे आज भी 1991 की एकता यात्रा याद है। तब कई लोग उसे राजनीतिक यात्रा के रूप में देखते थे, लेकिन मोदी जी ने उसे राष्ट्रीय चेतना का अभियान बना दिया। उनकी सोच स्पष्ट थी कि तिरंगा श्रीनगर के लाल चौक तक ही नहीं, देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए। और तब मैंने पहली बार महसूस किया कि नेतृत्व सिर्फ भाषण से नहीं आता, नेतृत्व तपस्या से आता है, नेतृत्व अनुशासन से आता है, नेतृत्व समर्पण से आता है और सबसे ज़्यादा नेतृत्व अपनेपन से आता है। क्यों लिखा 'अपनापन' उन्होंने कहा कि उन अनुभवों को यादों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि एक पुस्तक के रूप में जनता तक पहुंचाना चाहिए और इसी सोच ने मुझे लेखक बना दिया। 'अपनापन' यह पुस्तक आपके सामने है। इस पुस्तक में संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग यह देखेंगे कि बड़े लक्ष्य केवल भाषण से पूरे नहीं होते। बड़े लक्ष्य अनुशासन, समर्पण, तपस्या और सामूहिक प्रयासों से पूरे किए जा सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पुस्तक में युवा देखेंगे कि कैसे जनता से जुड़कर, उनकी समस्या जानकर और उनको साथ लेकर मेहनत करके बदलाव लाया जा सकता है। वे लोग, जो भारत में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव को देख रहे हैं, इस पुस्तक में एक ऐसी झलक देखेंगे कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े राष्ट्रीय परिवर्तन का वातावरण बनाया जा सकता है। और दुनिया में वे लोग, जो नरेंद्र भाई के नेतृत्व को देख रहे हैं, उनको इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व को ज़्यादा निकटता से समझने का अवसर मिलेगा। पुस्तक से देश बदलने का साहस मिलेगा इस पुस्तक 'अपनापन' में आपको सिर्फ घटनाएं नहीं, वह सोच मिलेगी जिसने देश को बदलने का साहस किया। वह अनुशासन मिलेगा, जिसने सपनों को सिद्धि में बदल दिया और वह अनुभव मिलेंगे, जो नेतृत्व को देखने के आपके नजरिये को बदल देंगे। इस पुस्तक को पढ़ते समय अगर आपने यह महसूस किया कि देश बदलने के लिए बड़े पद नहीं, बड़े संकल्प की जरूरत होती है, तो मैं मानूँगा कि मेरा प्रयास सार्थक हुआ।  

मोदी के ‘ईंधन बचाओ’ संदेश का असर, नेताओं ने छोड़ी लग्जरी गाड़ियां; साइकिल-ट्रेन से किया सफर

चंडीगढ़  हरियाणा में बृहस्स्पतिवार को सत्ता और सादगी की एक अलग तस्वीर देखने को मिली। आम दिनों में लंबी-लंबी गाड़ियों के काफिलों के बीच चलने वाले मंत्री और वीआईपी इस बार सीमित वाहनों के साथ नजर आए। कहीं मंत्री साइकिल से कार्यक्रम में पहुंचे तो कहीं विधायक ट्रेन में सफर करते दिखाई दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील के बाद हरियाणा सरकार ने वीआईपी कल्चर में कटौती की शुरुआत कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले में दिखाई दिया। जहां पहले मुख्यमंत्री के काफिले में 14 से 15 गाड़ियां चलती थीं, वहीं गुरुवार को उनका काफिला केवल चार वाहनों तक सीमित नजर आया। मुख्यमंत्री आवास से निकलते समय सुरक्षा और आवश्यक स्टाफ के वाहन ही साथ रखे गए। सीएम बोले – जरूरत भर वाहन ही चलेंगे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सरकारी खर्च और ईंधन की बचत को लेकर बड़ा संदेश देते हुए घोषणा की है कि अगले आदेश तक उनके कारकेड में केवल जरूरी वाहन ही शामिल किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सप्ताह में एक दिन बिना सरकारी वाहन के काम करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही सभी मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों से भी सीमित वाहनों का उपयोग करने और अधिक से अधिक बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने की अपील की गई है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सरकारी खर्च कम होगा, बल्कि ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। सरकार के इस संदेश का असर मंत्रियों और विधायकों के व्यवहार में भी दिखाई दिया। पंचकूला स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित निकाय चुनाव सम्मान समारोह में कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा साइकिल पर सवार होकर पहुंचे। उनके साथ कार्यकर्ताओं ने भी साइकिल यात्रा की। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि भाजपा केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जनहित के संदेशों को व्यवहार में लागू करके उदाहरण पेश करना चाहती है। वहीं पानीपत से विधायक प्रमोद विज भी अपनी निजी गाड़ी के बजाय ट्रेन से चंडीगढ़ पहुंचे। इसे भी सरकार के ‘कम खर्च, कम ईंधन’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों के वाहनों की भी होगी समीक्षा मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद रातोंरात विभिन्न विभागों में वीआईपी और वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए वाहनों की समीक्षा शुरू कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों और विभागों के पास एक से ज्यादा वाहन हैं, वहां उनकी संख्या कम की जाएगी। कई विभागों में अतिरिक्त गाड़ियों को हटाने और सीमित उपयोग की नई व्यवस्था लागू करने पर काम शुरू हो चुका है। सरकार का फोकस यह संदेश देने पर है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही होना चाहिए। सुरक्षा से समझौता नहीं, फिजूलखर्ची पर रोक मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है और प्रोटोकॉल के अनुसार उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। इसके बावजूद सरकार ने सुरक्षा से समझौता किए बिना काफिले को छोटा करने का निर्णय लिया है। आमतौर पर मुख्यमंत्री के साथ सुरक्षा, स्टाफ और पायलट वाहनों सहित लंबा काफिला चलता था, लेकिन अब केवल आवश्यक गाड़ियों को ही शामिल किया जा रहा है। जानकार इसे सरकार की ‘लो-प्रोफाइल गवर्नेंस’ रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जिसके जरिए जनता के बीच सादगी और जवाबदेही का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।  

किसानों से लेकर रेल यात्रियों तक खुशखबरी: केंद्र सरकार ने लिए कई बड़े फैसले

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आज बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी फैसलों को मंजूरी दी गई है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार ने अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा के बीच देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है. करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल सफर की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि धोलेरा को भविष्य के सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।  धोलेरा रेल प्रोजेक्ट से कैसे बदलेगी गुजरात की तस्वीर? यह 134 किलोमीटर लंबी रेल लाइन गुजरात के अहमदाबाद जिले के 284 गांवों को सीधे जोड़ेगी. इससे करीब 5 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. यह प्रोजेक्ट आने वाले धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल मैरीटाइम कॉम्प्लेक्स को भी जोड़ेगा. सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार होगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि हर साल 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत भी होगी, जो पर्यावरण के लिए 10 लाख पेड़ लगाने जैसा होगा।  किसानों के लिए MSP में कितना हुआ इजाफा? सरकार ने साल 2026-27 के लिए खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों पर आधारित यह MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक रखी गई है।  कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के MSP को मंजूरी दी. सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा. 824.41 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।  कोयला गैसीकरण और नागपुर एयरपोर्ट पर क्या है प्लान? कैबिनेट ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली योजना को मंजूरी दी है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास 200 साल का कोयला भंडार है, जिसका उपयोग अब गैस बनाने में होगा. इसमें 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा. इसके अलावा, नागपुर एयरपोर्ट को अब पीपीपी मॉडल के तहत इंटरनेशनल स्तर पर विकसित किया जाएगा, जिससे विदर्भ क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। 

केंद्र ने बढ़ाए MSP रेट: धान समेत खरीफ फसलों के नए दाम जारी, किसानों को राहत

नई दिल्ली  केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) हेतु 2.60 लाख करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद किसानों को मजबूत आय सहायता देना है। MSP को कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी। सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों का MSP बढ़ा दिया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।  धान समेत अन्य फसलों की नई MSP सरकार ने बुधवार को 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।पिछले वर्ष की तुलना में MSP में सबसे अधिक वृद्धि की सिफारिश सूरजमुखी के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए की गई है, जिसके बाद कपास (₹557 प्रति क्विंटल), नाइजर बीज (₹515 प्रति क्विंटल) और तिल (₹500 प्रति क्विंटल) का स्थान है। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, इस फैसले से किसानों को लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने की उम्मीद है, जबकि सालाना खरीद 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। सरकार ने यह भी बताया कि MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज्यादा है, जो 2019 में शुरू की गई उस नीति को जारी रखता है जिसका मकसद किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार इस संबंध में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में एक फैसला लिया गया। 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीज़न (सितंबर-अक्टूबर) के लिए, सामान्य और 'A-ग्रेड' किस्मों का समर्थन मूल्य 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर क्रमशः 2,441 रुपये और 2,461 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 37500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद भारत की आयातित प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही घरेलू कोयला भंडारों का ज्यादा साफ-सुथरे तरीके से इस्तेमाल करना है। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है, और यह सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगी।

वीआईपी कल्चर छोड़ बस में सफर: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारियों ने अपनाई सादगी

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाओ' अपील और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने काम करने का तरीका भी बदल दिया है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही बस में बैठकर सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच प्रशासन का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, कमिश्नर – अधिकारी निरिक्षण के लिए अलग वाहन नहीं बल्कि ट्रेवलर से पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, आशीष सिंह ने मितव्ययिता के नियमों के अनुरूप, अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में यात्रा करके सिंहस्थ से संबंधित कार्यों का नियमित निरीक्षण शुरू किया। इससे पहले, अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करते थे। नियमित दौरे के हिस्से के रूप में, व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और नए घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्गों के विकास की निगरानी करने हेतु गौ घाट से अन्य घाटों तक निरीक्षण किए गए। सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं। अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती 15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे। अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है। रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। टीम भावना भी मजबूत होगी मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया। सिंहस्थ के लिए इतना बजट है प्रस्तावित बता दें कि, आगामी सिंहस्थ के लिए, ₹3,060 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। कंठल चौराहे से सती गेट तक सड़क चौड़ीकरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। निर्माण कार्य की समय सीमा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य 2027 तक, यानी सिंहस्थ आयोजन से 6 महीने पहले ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि आखिरी समय में कोई समस्या न हो। 90 प्रवेश द्वारों से जुड़ेगा घाट क्षेत्र शिप्रा नदी के बाएं तट पर निर्मित हो रहे 14.5 किमी लंबे नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु 65 प्रवेश-निर्गम मार्ग चिन्हित किए गए हैं। कुल 90 प्रवेश द्वारों को एप्रोच मार्गों और पार्किंग से जोड़ा जाएगा।  

खर्च घटाने की पहल: प्रधानमंत्री मोदी ने छोटा किया काफिला, सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव के निर्देश

नई दिल्ली देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ‘किफायत’ बरतने की अपील के बाद सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है. पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया है कि वे एक साल के लिए सोना न खरीदें और विदेश यात्राओं पर खर्च कम करें. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल भी संभलकर करने को कहा ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके।  PM Narendra Modi: पीएम मोदी जो कहते हैं, वो खुद भी करते हैं. इसका सबूत उन्होंने खुद दिया है. पूरी दुनिया में ईंधन संकट की आहट है. संकट से बचने को भारत में भी इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है. यही कारण है कि पीएम मोदी अब लोगों को विदेश यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं. सोना न खरीदने को कह रहे हैं. खर्च कम करने को प्रेरित कर रहे हैं. पीएम मोदी केवल देशवासियों से ही ऐसा करने को नहीं कह रहे. वह खुद भी इसे अमल में ला रहे हैं. या यूं कहिए कि उन्होंने एग्जांपल सेट कर दिया है. जी हां, पीएम मोदी ने अपना काफिला आधा कर दिया है. एसपीजी को खास निर्देश देकर काफिले में गाड़ियों की संख्या 50 फीसदी कम करने को कहा है।  टीओआई की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उनके काफिले का आकार आधिकारिक रूप से कम कर दिया गया है. पीएम मोदी का यह एक बड़ा कदम है. इससे पीएम मोदी ने सरकारी खर्च में कटौती की मिसाल पेश की है. पीएम मोदी ने इस उम्मीद से ऐसा किया है, ताकि बाकी सरकारी विभाग भी इसका पालन करेंगे. हालांकि, पीएम मोदी के इस निर्देश का असर दिखने लगा है. यूपी से एमपी तक मंत्रियों के काफिले कम होने लगे हैं।  PM मोदी का एसपीजी को निर्देश सूत्रों की मानें तो, पीएम मोदी ने एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को काफिला कम करने का निर्दश दिया है. पीएम मोदी ने कहा है कि उनके काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या 50% तक कम की जाए. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि काफिले में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाए. हालांकि, इसके लिए नई गाड़ियां न खरीदी जाएं ताकि अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।  SPG ने एक्शन दिखाना शुरू किया पीएम मोदी का निर्देश मिलते ही एसपीजी एक्शन में है. एसपीजी ने पीएम के निर्देशों को लागू करना शुरू कर दिया है एसपीजी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि भले काफिला कम हो, मगर सुरक्षा के लिए जरूरी नियमों में कोई ढील न दी जाए. सूत्रों का कहना है कि हाल ही में पीएम की दिल्ली के बाहर की यात्राओं में काफिले का आकार पहले से छोटा नजर आया है. एसपीजी अब आगे भी इस दिशा में काम करेगी ताकि ब्लू बुक में दिए गए सख्त नियमों का पालन हो सके।  पीएम मोदी ने ऐसा क्यों किया? गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह कदम ऐसे वक्त में आया है, जब वह लगातार देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं. पीएम मोदी ने रविवार को हैदराबाद दौरे के दौरान लोगों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील भी की थी. इसके कुछ घंटे बाद गुजरात में भी पीएम मोदी ने यही दोहराया था. महज 24 घंटे में दो बार पीएम मोदी ने ईंधन और सोने की खपत में कमी की अपील की थी।  पीएम मोदी के इस कार्य का क्या संकेत अब सवाल है कि आखिर पीएम मोदी ने अपना काफिला छोटा क्यों किया? तो इसके पीछे वजह है एग्जांपल सेट करना. जी हां, पीएम ने खुद पहल करके अन्य विभागों और राज्य सरकारों को एक संकेत दिया है. अब पीएम मोदी की पहल के बाद बाकी सरकारी विभाग भी ऐसा ही कदम उठाएंगे. केंद्र सरकार के मंत्रालय भी अब खर्च कटौती के लिए ऐसे कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार अपने कर्मचारियों को मेट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करने, कारपूलिंग को अपनाने और बड़े-खर्चीले कार्यक्रम से बचने को प्रमोट कर रही है। 

‘डॉलर’ बचाने की तैयारी में सरकार? विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर बढ़ी चिंता, क्या लग सकता है बड़ा बैन

नई दिल्ली ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संकट से बचने के लिए सरकार कुछ इमरजेंसी कदम उठाने पर विचार कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाना है। इसके लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात पर रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के बीच इस संभावित संकट को टालने के लिए कई अहम चर्चाएं हुई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर भारत के पास कितने दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) बचा? संकट के बीच कौन से बड़े कदम उठाने की तैयारी में सरकार? ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी चर्चा में सबसे प्रमुख प्रस्तावों में से एक ईंधन की कीमतों में वृद्धि करना है। यदि ऐसा होता है, तो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी आयात पर रोक अधिकारियों की एक बड़ी चिंता बढ़ता चालू खाता घाटा है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध या सख्ती लगाने पर विचार कर रही है। यदि स्थिति नहीं सुधरती है, तो अधिकारी गैर-जरूरी कार्यों, जैसे विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा निकालने पर भी अस्थायी रूप से रोक लगा सकते हैं। भारत पर ईरान युद्ध और तेल संकट का सीधा असर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से भारत को भारी नुकसान हो रहा है। रुपये पर दबाव महंगे कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर (विदेशी मुद्रा) चुकाना पड़ रहा है। इस कारण भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.6% टूट चुका है, जो इसे प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनाता है। भारत के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार बचा? RBI के आक्रामक कदम रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कई अहम कदम उठा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति: 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 690.7 बिलियन डॉलर रह गया है, जो एक महीने से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। हालांकि, यह भंडार अभी भी 10 से 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। सट्टेबाजी पर लगाम: RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए बैंकों की दैनिक सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है। भविष्य के नियम: RBI आयातकों के लिए 'करेंसी हेजिंग' के नियम बदल सकता है और निर्यातकों को निर्देश दे सकता है कि उन्हें विदेशी व्यापार से मिलने वाले डॉलर वे तुरंत देश वापस लाएं। प्रधानमंत्री की जनता से अपील रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से इस संकट की घड़ी में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिए कि:     ईंधन बचाने के लिए लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और 'वर्क फ्रॉम होम' करें।     लोग सोना खरीदना बंद करें (क्योंकि सोना भारत के सबसे बड़े आयातों में से एक है)।     गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम की यह चेतावनी भविष्य में किसी भी संभावित कमी से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। वियतनाम और थाइलैंड जैसे अन्य एशियाई देशों ने भी डॉलर और ईंधन बचाने के लिए ऐसे ही 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश दिए हैं। सख्त फैसले लेने की मजबूत राजनीतिक स्थिति हाल ही में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी दल अब भारत के दो-तिहाई राज्यों को नियंत्रित करते हैं। इस मजबूत राजनीतिक स्थिति के कारण सरकार के लिए देश हित में इस तरह के सख्त आर्थिक फैसले लेना आसान हो गया है। संक्षेप में कहें तो ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिससे भारत का खजाना (विदेशी मुद्रा) तेजी से खाली हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है। इससे बचने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात रोकने और जनता से ईंधन व डॉलर बचाने की अपील करने जैसे आपातकालीन उपाय कर रही है।