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PM मोदी के सामने आया मंत्रियों का परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड, किस मंत्रालय ने मारी बाजी?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी मंत्रालयों के कामकाज का लेखा-जोखा रखा गया। कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत साल 2025 के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रालयों का 'रिपोर्ट कार्ड' पेश किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणियों में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों की पहचान की गई है। इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों को खर्चों पर लगाम लगाने और फिजूलखर्ची से बचने के सख्त निर्देश भी दिए हैं। नई मूल्यांकन प्रणाली: 2025 में कैसे तय हुई परफॉर्मेंस? कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत मंत्रालयों के प्रदर्शन की बारीकी से समीक्षा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सभी मंत्रालयों का विस्तृत स्कोरकार्ड पेश किया। बैठक में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कामकाज को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ कैसे बनाया जाए। किन पैमानों पर कसा गया मंत्रालयों को? मूल्यांकन के दौरान मंत्रालयों को सिर्फ उनके कोर काम पर नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में उनकी सक्रियता पर भी परखा गया। शिकायत निवारण: आम जनता की समस्याओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से सुलझाया गया। फाइल मैनेजमेंट: दफ्तरों में अटकी हुई फाइलों का निपटारा कितनी तेजी से हुआ। रणनीतिक सूझबूझ: अंतर-मंत्रालयी मामलों में सटीक और अहम सुझाव देना। संकट प्रबंधन: पश्चिम एशिया युद्ध जैसे वैश्विक संकट के बीच देश के हितों को सुरक्षित रखना। बेस्ट और वर्स्ट परफॉर्मर: किस मंत्रालय ने मारी बाजी? इस कड़ी समीक्षा में कुछ मंत्रालयों ने बेहतरीन काम कर टॉप स्कोर हासिल किया है, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों को सुधार के लिए चिन्हित किया गया है ताकि खामियों को दूर किया जा सके। खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों के नाम सामने नहीं आए हैं। यहां सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले मंत्रालयों की लिस्ट है। मंत्रालय शानदार प्रदर्शन का क्षेत्र (Top Category) उपभोक्ता मामले मंत्रालय जन शिकायत निवारण और पश्चिम एशिया संकट प्रबंधन कोयला मंत्रालय फाइलों का त्वरित निपटान और उत्कृष्ट विभागीय प्रबंधन ऊर्जा मंत्रालय ऊर्जा सुरक्षा और लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति स्वास्थ्य मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं और नीतिगत मोर्चे पर शानदार काम पीएम मोदी का सख्त निर्देश: फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम चार घंटे से अधिक चली इस बैठक में मोदी 3.0 की दूसरी वर्षगांठ (9 जून) से पहले सरकार की दिशा तय कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को वीआईपी कल्चर से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। बैकग्राउंड और पीएम के प्रमुख निर्देश: विदेशी दौरों पर पाबंदी: जब तक देश के हित में बहुत जरूरी न हो या भारत के भविष्य के लिए अहम न हो, विदेशी यात्राएं नहीं होंगी। बड़े काफिलों से परहेज: मंत्रियों को अपने बड़े काफिलों को छोटा करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसके लिए एक नया अभियान शुरू हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समिट रद्द: फिजूलखर्ची रोकने के लिए अफ्रीका और 'बिग कैट एलायंस' जैसी इंटरनेशनल मीटिंग्स फिलहाल टाल दी गई हैं। ऊर्जा संकट पर फोकस: पश्चिम एशिया के तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के गतिरोध को देखते हुए बायोगैस व नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल पर फोकस करने को कहा गया है। आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है? अक्सर आम लोग सरकारी दफ्तरों में लटकती फाइलों और लेट-लतीफी से परेशान रहते हैं। इस 'रिपोर्ट कार्ड' सिस्टम से नौकरशाही और मंत्रियों को सीधा संदेश गया है कि उनकी कुर्सी 'परफॉर्मेंस' से तय होगी। इससे पब्लिक के लिए सरकारी योजनाओं का फायदा बिना किसी रुकावट के पहुंचने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगने से देश का पैसा सीधे विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर खर्च हो सकेगा।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर बड़ी चर्चा, पीएम मोदी से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

नई दिल्ली अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को पीएम मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटें तक चर्चा चलती रही है. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जय शंकर के अलावा एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद रहे हैं. हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि रूबियो की दिल्ली यात्रा भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है. अपनी इस अहम कूटनीतिक यात्रा के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर रक्षा, व्यापार, इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. इस उच्च स्तरीय मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण वह निमंत्रण रहा, जो रूबियो वाशिंगटन से अपने साथ लेकर आए थे. रूबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का विशेष न्योता दिया।  अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं. उन्होंने आज प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. इस दौरान मार्को रुबियो ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है।  बैठक काफी सकारात्मक रही- रुबियो रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि यह बैठक काफी सकारात्मक और उपयोगी रही. दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. अमेरिका ने साफ तौर पर भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला और उभरती टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।  रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न सिर्फ दोनों देशों को मजबूत करेगा, बल्कि एक मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित होगा।  बैठक के बाद पीएम मोदी ने शेयर कीं तस्वीरें प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद X पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगति पर विस्तार से बातचीत हुई. इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत और अमेरिका वैश्विक हितों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे. दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।  करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा हुआ. इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शहर का दौरा किया था. ऐसे समय में रुबियो का आगमन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्वाड समेत कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी. रुबियो का भारत दौरा 23 से 26 मई तक प्रस्तावित है. इस दौरान वह कोलकाता के अलावा नई दिल्ली, आगरा और जयपुर भी जाएंगे. माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।  इन बातों पर रहेगा फोकस दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को जितनी अधिक एनर्जी (तेल, गैस) बेच सकेगा, उतना बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने भारत को महान साझेदार बताया. इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को प्रस्तावित क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है. बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे. इसमें भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar मेजबानी करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी शामिल होंगे।  पीएम मोदी ने मार्को रूबियो से मुलाकात पर दी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस बैठक की अहम जानकारी साझा की है. पीएम मोदी ने रूबियो का भारत में स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की और बताया कि इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत-अमेरिका ‘व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में हो रही निरंतर प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दों पर भी गहरा मंथन किया. अपनी पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई और साझा हितों के लिए भविष्य में भी मजबूती से एक साथ मिलकर कार्य करते रहेंगे।   भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत बनाने पर मोदी-रूबियो की चर्चा- सर्जियो गोर मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद मीडिया से बात कर बैठक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे के करीब चली बैठक काफी सकारात्मक रही. बैठक में सुरक्षा, व्यापार और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. गोर ने भारत को अमेरिका का एक अहम साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश मिलकर फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।   अब और मजबूत होगी भारत-US रणनीतिक साझेदारी, MEA ने किया जोरदार स्वागत मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी किया है. MEA ने नई दिल्ली पहुंचने पर तस्वीर शेयर करते हुए रूबियो का हार्दिक अभिनंदन किया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ये यात्रा दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में मील का पत्थर साबित होगी. मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया … Read more

सेमीकंडक्टर से टेक्नोलॉजी तक, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने खोले विकास के नए रास्ते

नई दिल्ली  दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।  पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।  किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।  इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला।  UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया? संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।  भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत? करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।  क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है।  पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला? प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा।  किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है? सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।  क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है। 

PM मोदी को मिले प्राचीन ताम्र पत्र, तमिलनाडु और चोल वंश की विरासत फिर चर्चा में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी. इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है? क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 'लीडेन प्लेट्स' भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था. कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है. जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं. ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी. चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है. तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है. चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए 'अनैमंगलम' गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है. इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं. अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था. सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया. चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: … Read more

कृषि क्षेत्र में भारत का बढ़ा मान, प्रधानमंत्री मोदी को FAO का बड़ा सम्मान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को  रोम, इटली में संयुक्त राष्ट्र संगठन के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सर्वोच्च सम्मान "एफएओ एग्रीकोला मैडल" से सम्मानित किया जाना किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा में संवर्धन और कृषि विकास की वैश्विक स्वीकृति है। श्रीअन्न को मिली है नई पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों के कल्याण और वैश्विक स्तर पर "श्रीअन्न (मिलेट्स) को नई पहचान दिलवाने के उनके ऐतिहासिक कार्यों के लिए प्रदान किया गया यह प्रतिष्ठित सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से भारत सहित अन्य देशों में भी श्रीअन्न की लोकप्रियता और उपयोग में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत किसानों के कल्याण, कृषि में नवाचार और अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता के नित नए प्रतिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संगठन के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सर्वोच्च सम्मान को भारत के करोड़ों किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया है।  

BRICS सम्मेलन से पहले कूटनीतिक हलचल तेज, शी जिनपिंग के भारत आने की चर्चा ने बढ़ाई उत्सुकता

नई दिल्ली भारत और चीन के रिश्ते में बहुत जल्द नया मोड़ देखने को मिल सकता है. भारत-चीन लगातार अपने संबंध सुधार रहे हैं. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं. यही कारण है कि बीते कुछ समय में चीन-भारत के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली है. अब भारत-चीन संबंध में नया मोड़ आया है. जी हां, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत जल्द भारत आने वाले हैं. सूत्रों की मानें तो इसी साल सितंबर में शी जिनपिंग भारत का दौरा कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो बीते 7 साल में शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी।   रिपोर्ट की मानें तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. माना जा रहा है कि चीन की ओर से नई दिल्ली को सूचित किया गया है कि शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में आने की संभावना है. यहां बताना जरूरी है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए दिल्ली में रहेंगे. रूसी साइड ने पुतिन के दिल्ली दौरे को कन्फ्रम बताया है।  पुतिन भी आ रहे भारत रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने पुतिन की उपस्थिति की पुष्टि की है. वह 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी के भी एससीओ समिट में शामिल होने की संभावना है।  2019 के बाद पहली यात्रा बहरहाल, ब्रिक्स समिट में अगर शी जिनपिंग आते हैं तो 2019 के बाद उनकी यह पहली यात्रा होगी. शी जिनपिंग की ब्रिक्स समिट में भागीदारी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होगा. आखिरी बार वह 2019 में भारत आए थे. अक्टूबर 2019 में वह चेन्नई के पास मामल्लापुरम में भारत-चीन नेताओं के दूसरे अनौपचारिक सम्मेलन में आए थे. उसके बाद गलवान हिंसा ने भारत-चीन के रिश्तों को बहुत खराब कर दिया।  भारत-चीन के रिश्ते कैसे बिगड़े जी हां, भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध अप्रैल-मई 2020 में सीमा विवाद के बाद काफी बिगड़ गए थे. तब गलवान हिंसा हुई थी. इस गलवान संघर्ष ने चीन-भारत के संबंधों को बिगाड़ दिया था. इसके बाद तो तनातनी खूब चली. हालांकि, संबंधों को स्थिर करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में शुरू हुई. तब रूस के कजान शहर में ब्रिक्स समिट था. वहां मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसी समय दोनों देशों ने एलईएस सैनिकों की वापसी पूरी करने का फैसला किया था. तब से लगातार भारत और चीन के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं।  भारत-चीन के रिश्ते में 2019 के बाद क्या-क्या हुआ?     भारत और चीन के रिश्तों में 2019 के बाद कई बड़े उतार-चढ़ाव आए. अक्टूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे. तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी. दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया था. उस समय रिश्तों में नरमी दिखाई दी थी।      लेकिन जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस संघर्ष में दोनों देशों के सैनिक मारे गए और सीमा पर तनाव बहुत बढ़ गया. इसके बाद भारत ने चीन के कई मोबाइल ऐप बैन किए और सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी. दोनों देशों के रिश्ते कई साल तक तनावपूर्ण रहे।      इसके बाद धीरे-धीरे सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई. इस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और रिश्तों को सामान्य बनाने पर सहमति जताई. इसके बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिशें फिर तेज हुईं।   

कौशल प्रशिक्षण से बेटियों को मिल रही नई उड़ान, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ा आत्मविश्वास

कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम भोपाल  प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की योजनाएं उन्हें कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर दे रही हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। प्रदेश में 934 आईटीआई हैं। इनमें 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई शामिल हैं। इन संस्थानों में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सत्र 2025 में शासकीय आईटीआई में 94.55 प्रतिशत प्रवेश हुआ। यह अब तक का सर्वाधिक प्रवेश प्रतिशत है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शासकीय आईटीआई में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है। प्रदेश की आईटीआई में वर्तमान में 71 आधुनिक ट्रेड्स में 15 हजार से अधिक महिला प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। “कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा)”, “स्टेनोग्राफर हिन्दी” और “इलेक्ट्रिशियन” जैसे ट्रेडों में बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण ले रही हैं। यह बदलते माहौल और बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। अब बेटियां नए क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को मजबूत बना रही हैं। महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदेश में 7 शासकीय महिला आईटीआई संचालित की जा रही हैं। वहीं 56 शासकीय आईटीआई में महिला छात्रावास सुविधा उपलब्ध है। इनमें 3400 से अधिक सीटें हैं। इससे दूर-दराज क्षेत्रों की बेटियों को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का फोकस केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभाग महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी लगातार काम कर रहा है। विशेष महिला प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 777 महिला प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार मिला है। इंदौर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा 509 महिलाओं को निःशुल्क वाहन संचालन प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता का भाव और मजबूत हुआ है। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और निर्धन वर्ग की 13 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इससे बड़ी संख्या में बेटियों को प्रशिक्षण जारी रखने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के अंतर्गत हजारों बेटियों को उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग का अवसर मिला है। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों में 5660 बेटियाँ शामिल हैं। सागर की सुस्नेहा रजक और रायसेन की सुलिया जैसी युवतियां प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्राप्त कर चुकी हैं। अब वे अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं। महिलाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। “जीवन तरंग” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 3000 बेटियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं "यूएन वीमेन" के सहयोग से बेटियों को "स्टेम और सॉफ्ट स्किल्स" का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे बेटियाँ एडवांस तकनीक और नए कार्यक्षेत्रों से जुड़ रही हैं। परम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित आईटीआई कौशल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। धार जिले के सरदारपुर आईटीआई में संचालित कार्यक्रमों में प्रशिक्षणार्थियों का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। इससे बेटियों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हुए हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत भी 64 हजार से अधिक बेटियों को कौशल प्रशिक्षण का लाभ मिला है। प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। शासकीय महिला आईटीआई बैतूल की प्रशिक्षणार्थी सुत्रिशा तावड़े ने राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद परीक्षा में सेंट्रल ज़ोन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया। ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर्स में मध्यप्रदेश के 10 प्रतिभागियों में 5 बेटियाँ शामिल रहीं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 में भोपाल की शासकीय संभागीय आईटीआई की प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं इंडिया स्किल प्रतियोगिता-2024 में प्रदेश की बेटियों ने सिल्वर, ब्रॉन्ज और मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए। यह उपलब्धियां प्रदेश की बेटियों की क्षमता और मेहनत को दर्शाती हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रयासों से प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण उनके लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रहा है।  

शरद पवार ने विपक्ष को दिया संदेश, बोले- देश की छवि के मुद्दे पर राजनीति ठीक नहीं

 मुंबई NCP (SP) चीफ शरद पवार अक्सर सियासी मतभेद के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने कहा है कि जब वैश्विक स्तर पर देश की प्रतिष्ठा की बात आती है तो इस पर राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए. राष्ट्रीय सम्मान सभी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है।  उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं. राजनीतिक मुद्दों पर हमारी उनसे अलग राय हो सकती है. हालांकि जब देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को विदेश में कम करने या उससे समझौता करने की बात आती है तो इसे हम स्वीकार नहीं करेंगे. राष्ट्र के गौरव और सम्मान के मामले में कोई सियासी मतभेद या विवाद नहीं होना चाहिए।  एनसीपी चीफ ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. शाम मुंबई में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए. साथ ही देश की प्रतिष्ठा को मजबूत करने में योगदान देना चाहिए।  इंदिरा गांधी-नरसिम्हा राव का जिक्र पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन जैसे नेताओं ने हमेशा देश के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा को अपने नेतृत्व के केंद्र में रखा।  पवार ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं. जब राष्ट्र के सम्मान की बात हो, तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए. कुछ लोग आज अलग-अलग पार्टियों में हो सकते हैं, लेकिन आप सभी आम लोगों के बीच जुड़े हुए हैं और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।  शुरुआती सियासी सफर को किया याद अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद करते हुए पवार ने कहा कि 1958 में जब उनकी उम्र 18 वर्ष थी, वह बारामती से पुणे आए थे. उस समय उनके गृह नगर में कोई कॉलेज नहीं था. वह युवा आंदोलन से जुड़े. चार साल बाद पुणे सिटी यूथ कांग्रेस के प्रमुख बने. बाद में महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस का नेतृत्व किया, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर काम किया।  शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन सोवियत संघ की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया गया. पूर्व पीएम इंद्रकुमार गुजराल के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से कहा था कि वह 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके सम्मान का अपमान वह कभी स्वीकार नहीं करेंगी।  उन्होंने पूर्व सहयोगियों से अपील करते हुए कहा, यदि राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तो आप सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ भाग लेना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। 

नॉर्वे के अखबार में छपे कार्टून से मचा हंगामा, PM मोदी के दौरे के बाद उठे सवाल

नई दिल्ली नॉर्वे के एक बड़े अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक कार्टून बनाया है जिस पर अब विवाद शुरू हो गया. इस कार्टून में पीएम मोदी को सपेरे की तरह दिखाया गया था. उनके हाथ में सांप जैसी दिखने वाली एक पेट्रोल पाइप भी दिखाई गई. कार्टून के साथ छपे लेख का शीर्षक था, "A clever and slightly annoying man" यानी "एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।  सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस कार्टून को नस्लवादी बताया. लोगों का कहना है कि पश्चिमी मीडिया अब भी भारत को "सपेरों का देश" वाली पुरानी सोच से देखता है. कई यूजर्स ने लिखा कि यह भारत की गलत और पुरानी छवि दिखाने की कोशिश है।  एक यूजर ने एक्स पर लिखा, "यह कार्टून रेसिस्ट लगता है. पीएम मोदी खुद कई बार कह चुके हैं कि पहले दुनिया भारत को सपेरों का देश मानती थी, लेकिन अब वही सोच फिर दिखाई जा रही है." कुछ लोगों ने इसे "औपनिवेशिक मानसिकता" भी बताया।  विवाद तब और बढ़ गया जब नॉर्वे की पत्रकार हेले लाइंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा कि पीएम मोदी मीडिया से सवाल क्यों नहीं लेते. उन्होंने भारत में प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारों का मुद्दा भी उठाया. हालांकि पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गाहर बिना जवाब दिए वहां से चले गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।  इसके बाद भारत की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई. भारतीय राजनयिक सिबि जॉर्ज ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया को समझे बिना कुछ विदेशी संस्थाएं अधूरी जानकारी के आधार पर राय बना लेती हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही 200 से ज्यादा न्यूज चैनल हैं और भारत जैसे बड़े देश को समझना आसान नहीं है।  इससे पहले भी कई विदेशी मीडिया संस्थानों पर भारत को पुराने "स्नेक चार्मर" वाले स्टीरियोटाइप में दिखाने के आरोप लग चुके हैं. पीएम मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कहा था कि दुनिया कभी भारत को "स्नेक चार्मर्स" यानी "सपेरों का देश" कहती थी, लेकिन आज भारत टेक्नोलॉजी और आईटी की ताकत बन चुका है। 

मोदी- मेलोनी की दोस्ती फिर चर्चा में, डिनर डेट के बाद साथ देखा रोम का ऐतिहासिक कोलोसियम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के अहम कूटनीतिक दौरे के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को इटली की राजधानी रोम पहुंचे। रोम पहुंचने पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद खास अंदाज में उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने डिनर के बाद रोम के ऐतिहासिक 'कोलोसियम' का एक साथ दौरा किया है। इसके बाद, सोशल मीडिया पर एक बार फिर 'मेलोडी' (Meloni+Modi = Melodi) ट्रेंड कर रहा है। तस्वीरों में 'मेलोडी' का खास अंदाज पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन तस्वीरों को शेयर किया है। इन खास तस्वीरों में भारत-इटली की मजबूत होती दोस्ती और दोनों नेताओं के बीच की सहजता साफ देखी जा सकती है। पहली दो तस्वीरों में पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी एक बालकनी से रोम शहर के खूबसूरत नजारों को निहारते और गहरी बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी अपने चिर-परिचित नीले रंग के लिबास में हैं, जबकि मेलोनी पीच रंग के खूबसूरत और सौम्य परिधान में हैं। एक तस्वीर में दोनों नेता कार की पिछली सीट पर बैठे हैं और कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे हैं। यह तस्वीर दोनों के बीच की बेहतरीन व्यक्तिगत बॉन्डिंग को दर्शाती है। कोलोसियम का ऐतिहासिक नजारा: एक अन्य तस्वीर रात के समय की है, जहां दोनों नेता रोम की सबसे भव्य और प्राचीन इमारत 'कोलोसियम' के सामने खड़े होकर पोज दे रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "रोम में उतरने के बाद, मुझे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ रात्रिभोज पर मिलने का अवसर मिला, जिसके बाद मैंने मशहूर कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने विचार साझा किए। आज होने वाली हमारी बातचीत का मुझे बेसब्री से इंतजार है, जिसमें हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत बनाने के विषय पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे।" मेलोनी ने क्या कहा? जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोम पहुंचने पर उनका स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वेलकम टू रोम, माय फ्रेंड!" पहले भी वायरल हुईं मोदी-मेलोनी की तस्वीरें यह पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले साल 2023 में दुबई में हुए COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी की 'Good friends at COP28' वाली सेल्फी काफी वायरल हुई थी। वहीं, साल 2024 में इटली के अपुलिया में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'मेलोडी टीम की तरफ से हैलो' वीडियो ने भी दुनियाभर में चर्चा बटोरी थी। दोनों नेताओं की यह आठवीं मुलाकात विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, साल 2023 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच यह आठवीं मुलाकात है। मार्च 2023 में मेलोनी की भारत यात्रा और जी-20 शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी थी।   पीएम मोदी और मेलोनी का संदेश इन पलों को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "रोम में उतरने के बाद, प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर पर मुलाकात का अवसर मिला, जिसके बाद ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। आज होने वाली हमारी वार्ता को लेकर उत्सुक हूं, जहां हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत करने के तरीकों पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे। वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी पीएम मोदी के साथ की तस्वीर साझा करते हुए गर्मजोशी से लिखा- रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त! इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जहां पीएम मेलोनी पीएम मोदी को रोम शहर के बारे में बता रही हैं। आज की द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा यह यात्रा केवल इन शानदार तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाने का एक बड़ा अवसर है। ताज़ा जानकारियों के अनुसार, आज होने वाली आधिकारिक मुलाकातों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: रणनीतिक साझेदारी (2025-2029): दोनों देश 'जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029' की समीक्षा करेंगे। इसके तहत व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया जाएगा। (आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.77 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है)। IMEC पर जोर: इस द्विपक्षीय वार्ता में 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को लेकर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। FAO मुख्यालय का दौरा: पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र के 'खाद्य और कृषि संगठन' (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति से मुलाकात: पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मुलाकात करेंगे। प्रवासी भारतीयों द्वारा भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर पीएम मोदी का भारतीय समुदाय ने बेहद शानदार स्वागत किया। इस दौरान इतालवी कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत (राग हंसध्वनि) और कथक नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने बच्चों को ऑटोग्राफ दिए, वाराणसी के घाटों की एक पेंटिंग देखी और भारतीय मूल के लोगों से खास बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने 'सनातन धर्म संघ' की इटली में आधिकारिक मान्यता को लेकर आध्यात्मिक गुरुओं से भी मुलाकात की। यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के सफल दौरे के बाद, इटली में पीएम मोदी का यह स्वागत भारत की मजबूत होती वैश्विक पकड़ और इटली के साथ गहरी होती साझेदारी का एक स्पष्ट संकेत है। इन तस्वीरों ने कूटनीति के साथ-साथ दो वैश्विक नेताओं की व्यक्तिगत दोस्ती को भी बखूबी बयां किया है।