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मध्यप्रदेश में BJP की बड़ी जीत! तीनों सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, मीनाक्षी नटराजन केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को आज ही जीत का प्रमाण पत्र दे दिया गया। दरअसल, नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद और केवल तीन पदों के लिए तीन ही नामांकन शेष रहने के चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें प्रमाण पत्र सौंपा है। बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए आज 11 जून को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा तय है। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद स्थिति यह बन गई कि तीन सीटों के मुकाबले केवल तीन ही उम्मीदवार मैदान में रह गए, जिससे चुनाव निर्विरोध हो गया। जिसके बाद बीजेपी के तीनों राज्यसभा सांसदों का स्वागत पार्टी कार्यालय में करने की भी तैयारी की जा रही है। विधायक दल के बाद ये सभी नव-निर्वाचित सांसद बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे, जहां प्रदेश अध्यक्ष उनका स्वागत करेंगे। इन सीटों से बीजेपी के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट का राज्यसभा जाना तय हो गया है। हालांकि मीनाक्षी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि अदालत चुनाव होने दे और रिजल्ट घोषित करने पर अपने आदेश का कैप लगा दे. लेकिन अदालत ने दलील दरकिनार कर दी।  गुजरात राज्यसभा चुनाव गुजरात में राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी के सभी चार उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. राजू शुक्ल, मानसिंह परमार, मुकेश राठवा और जितेंद्र कंजारिया ने जीत दर्ज की है।  इसके साथ अब राज्यसभा में गुजरात से 11 सांसद है, सभी सांसद बीजेपी के हैं. साल 2029 मे अब अगले राज्यसभा चुनाव होंगे तब तक गुजरात से कांग्रेस का कोई भी सांसद नहीं होगा।  बता दें, राजस्थान में भी तीनों राज्यसभा उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीते हैं.  दो सीटों पर बीजेपी के सतीश पुनिया और अल्का गुर्जर और एक सीट पर कांग्रेस के नीरज डांगी चुनाव जीत गए हैं।  क्यों आई ऐसी स्थिति? यह पूरा विवाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने के बाद शुरू हुआ। बीजेपी ने उन पर आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था। स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने आपत्ति सही मानते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और सड़क पर प्रदर्शन भी किया। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। आयोग ने भी आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने को आधार मानते हुए नामांकन खारिज रखने का निर्णय बरकरार रखा। फिलहाल कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मीनाक्षी के नामांकन रद्द मामले में अब कल होगी सुनवाई 48 घंटे के भीतर कांग्रेस चुनाव आयोग से लेकर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई. कांग्रेस ने डिजिटल याचिका दायर की, लेकिन अब भी मीनाक्षी नटराजन के निलंबन के मामले में कोई राहत की तस्वीर कांग्रेस के लिए दिखाई नहीं दे रही है. चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है. उधर नामांकन वापसी की तारीख नजदीक आते देख कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट भी पहुंची और याचिका लगाई, लेकिन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी गई है।  क्या था वो मामला? राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसी आधार पर भाजपा ने उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई दायित्व नहीं था।

मध्यप्रदेश में बदलेगा मौसम! 34 जिलों में तेज बारिश-आंधी के आसार, 6 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। प्रदेश में सक्रिय दो मौसमीय प्रणालियों के कारण प्री-मानसून गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिला, जबकि गुरुवार को भी ग्वालियर, जबलपुर समेत 34 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 1 जून से लगातार कहीं न कहीं बारिश दर्ज की जा रही है। अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहने के आसार हैं और मानसून के सक्रिय होने तक प्री-मानसून सिस्टम प्रभावी रहेंगे। ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम, ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कुछ जिलों में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।  कई जिलों में बदला मौसम बुधवार को छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना, उमरिया, बैतूल, मंडला, अनूपपुर, शहडोल, जबलपुर, छतरपुर, दमोह, उज्जैन, रतलाम, नरसिंहपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार एक ओर प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों में ग्वालियर का तापमान 43.1 डिग्री, जबलपुर 40.5 डिग्री, भोपाल 40.4 डिग्री, उज्जैन 39.5 डिग्री और इंदौर 38.9 डिग्री सेल्सियस रहा। नौगांव, दतिया, सतना, दमोह और रीवा सहित कई जिलों में भी पारा 42 डिग्री के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया। गुरुवार को इन जिलों में बारिश और तेज हवा मौसम विभाग ने ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में हवा की गति 40 से 60 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। वहीं भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, उज्जैन, देवास, मंदसौर, रतलाम और आसपास के इलाकों में गर्मी का असर बना रह सकता है। छह जिलों में ओले गिरने की आशंका मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इन जिलों में तेज हवाओं के साथ मौसम अचानक बदल सकता है। 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम में बदलाव की यह है वजह मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसके अलावा ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण और एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में आंधी, बारिश और बादलों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। 

16 साल बाद वापसी कर रही साउथ अफ्रीका की बड़ी परीक्षा

जोहानिसबर्ग फीफा विश्व कप 2026 का भव्य आगाज शुक्रवार को प्रतिष्ठित एज्टेका स्टेडियम में मेजबान मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबले से होगा। यह मैच रात 12:30 बजे से खेला जाएगा। सह मेजबान होने के कारण मेक्सिको पर घरेलू दर्शकों की उम्मीदों का भारी दबाव है और टीम अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ करना चाहेगी। घरेलू मैदान पर किसी भी तरह की चूक पूरे टूर्नामेंट के माहौल को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर 16 साल बाद विश्व कप में वापसी कर रही दक्षिण अफ्रीका के लिए यह मुकाबला खुद को फिर से वैश्विक फुटबॉल मंच पर स्थापित करने का सुनहरा अवसर है। यदि वह मेजबान टीम को हराने में सफल रहती है तो ग्रुप ए की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है और उसके लिए नाकआउट चरण का रास्ता आसान हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 2010 विश्व कप के उद्घाटन मुकाबले में भी ये दोनों टीमें आमने-सामने थीं। तब जोहानिसबर्ग में खेला गया मैच 1-1 से बराबरी पर छूटा था और दक्षिण अफ्रीका बाद में गोल अंतर के कारण अगले दौर में जगह बनाने से चूक गया था। मेक्सिको के मुख्य कोच जेवियर अगुइरे अपने तीसरे कार्यकाल में टीम की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने टीम को मजबूत रक्षात्मक ढांचे, मिडफील्ड में एडसन अल्वारेज की अगुआई और स्ट्राइकर राउल जिमेनेज की गोल करने की क्षमता के इर्द-गिर्द तैयार किया है। एज्टेका स्टेडियम में मौजूद हजारों समर्थक टीम के लिए 12वें खिलाड़ी की भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, कोच ह्यूगो ब्रूस के मार्गदर्शन में दक्षिण अफ्रीका केवल रक्षात्मक रणनीति अपनाने नहीं उतरेगा। अफ्रीकी क्वालीफायर में नाइजीरिया जैसी मजबूत टीम को पीछे छोड़कर विश्व कप में पहुंची इस टीम ने छह मैचों में केवल चार गोल खाए और नौ गोल दागे। लाइल फोस्टर, ओसविन अपोलिस और मिडफील्डर टेबोहो मोक्वेना टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। ग्रुप ए में आगे कोरिया गणराज्य और चेकिया जैसी टीमों से भी मुकाबले होने हैं। ऐसे में विश्व कप के इस उद्घाटन मैच की जीत किसी भी टीम को शुरुआती बढ़त और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है। फुटबाल प्रेमियों की नजरें अब एज्टेका स्टेडियम पर टिकी हैं, जहां से विश्व कप 2026 की रोमांचक यात्रा शुरू होगी। दूसरे मैच में दक्षिण कोरिया का सामना चेकिया से विश्व कप में शुक्रवार को दूसरा मैच दक्षिण कोरिया और चेकिया के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सुबह 7:30 बजे से होगा। चेकिया की टीम 2006 के बाद पहली बार विश्व कप में खेल रही है और उसे दक्षिण कोरियाई टीम की कड़ी चुनौती का सामना करना है। दक्षिण कोरियाई टीम क्वालीफाइंग दौर में एक भी मैच नहीं हारी है। इस विश्व कप में सभी की नजरें दक्षिण कोरिया के स्टार खिलाड़ी सन हेंग मिन पर होंगी क्योंकि यह संभवत: उनका अंतिम विश्व कप हो सकता है।

Nipah Virus Alert: केरल में मिला नया मामला, 43 साल के शख्स के संक्रमित होने से बढ़ी चिंता

कोझिकोड केरल में निपाह वायरस के एक मामले की पुष्टि हो गई है. शुरुआती जांच में 43 साल के व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. कोझिकोड के फेरोक के रहने वाले संदिग्ध मरीज की शुरुआती जांच में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है. यह जांच कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में की गई थी.स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ अस्पताल के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आया था और माना जा रहा है कि निपाह का संदिग्ध मरीज़ माने जाने से पहले वह कई लोगों के संपर्क में आया था।  अधिकारियों को शक है कि यह संक्रमण किसी गोदाम की सफाई के दौरान हुआ हो सकता है, हालांकि इसके सही स्रोत की अभी पुष्टि नहीं हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) से अंतिम पुष्टि गुरुवार को होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ की हालत अभी स्थिर है. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार सुबह मेडिकल बोर्ड की बैठक बुलाई गई है. कोझिकोड ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अलग समीक्षा बैठक भी होगी. कंटेनमेंट ज़ोन घोषित करने और पाबंदियां लगाने का फ़ैसला समीक्षा बैठकों और NIV टेस्ट के नतीजों के आधार पर लिया जाएगा.स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज़ के कई लोगों के संपर्क में आने की वजह से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है।  घबराने की जरूरत नहीं: केरल के स्वास्थ्य मंत्री केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि कोझिकोड के जिस व्यक्ति की शुरुआती जांच में निपाह की पुष्टि हुई है, वह कई लोगों के संपर्क में आया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय घबराने की कोई वजह नहीं है.मंत्री ने कहा कि 43 साल के मरीज़ ने उस प्राइवेट अस्पताल के कई विभागों का दौरा किया था जहां उसने शुरू में इलाज कराया था, जिससे दूसरों के भी संक्रमित होने की चिंता बढ़ गई है.मंत्री ने बताया कि एहतियात के तौर पर, अस्पताल के जिन कर्मचारियों के मरीज़ के संपर्क में आने की संभावना है, उन्हें क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है।  मंत्री ने आगे कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है और वे हालात पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य मंत्री के ऑफ़िस में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है. मरीज़ का सैंपल पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजा गया है, जबकि ज़िला और राज्य स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी तैयारी के उपाय कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि मरीज़ की हालत स्थिर बनी हुई है।   

TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! कल्याण बनर्जी के अल्टीमेटम से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

कोलकाता पश्चिम बंगाल की सत्ता का 15 साल तक सिरमौर रहीं ममता बनर्जी और उनकी अगुवाई वाली पार्टी तृणमूल कांग्रेस मुश्किल में हैं. एक के बाद एक नेता टीएमसी से किनारा कर रहे हैं. 60 से ज्यादा विधायक बागी हो गए हैं. दिल्ली में लोकसभा सदस्यों ने भी पार्टी में बगावत का बिगुल फूंक दिया है. वहीं, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका अब कल्याण बनर्जी का ताजा रुख है।  ममता बनर्जी ने जिन कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बनाने के लिए 40 साल पुरानी सहयोगी काकोली घोष को पद से हटा दिया, अब वही कल्याण बनर्जी भी बगावत का झंडा बुलंद करते दिख रहे हैं. कल्याण बनर्जी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को यह अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो वह अभिषेक को चुन लें, या फिर मेरे जैसे वफादारों को।  कल्याण बनर्जी ने कहा है कि ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी को हटाएं. नहीं तो हम पार्टी में नहीं रह सकते. उन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर केस से भी खुद को अलग करने का ऐलान किया और कहा कि अभिषेक बनर्जी ने कभी भी मुझपर भरोसा नहीं किया और आगे भी नहीं करेंगे. कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम कल अभिषेक के केस के लिए तैयारी कर रहे थे और आधी रात मुझे बताया गया कि वकील बदल दिया गया है।  उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अपमानजनक है. अभिषेक बनर्जी को वरिष्ठों का सम्मान करना नहीं आता. कल्याण बनर्जी ने अभिषेक को घमंडी व्यक्ति बताया और तल्ख लहजे में कहा कि वह हैं कौन? अभिषेक बनर्जी की वजह से पार्टी को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूं. लेकिन दीदी को अब फैसला करना होगा कि उनको पार्टी और वफादार नेता चाहिए या बच्चा और परिवार।  कल्याण का बागी रुख ताबूत में आखिरी कील? कल्याण बनर्जी की गिनती ममता बनर्जी के विश्वस्त नेताओं में होती है. पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद कल्याण बनर्जी कई अहम मामलों में कोर्ट के भीतर भी टीएमसी से जुड़े मामलों की पैरवी करते नजर आए हैं. फर्जी हस्ताक्षर से संबंधित जिस केस में अभिषेक बनर्जी भी आरोपी हैं, उस मामले में भी कल्याण बनर्जी ही वकील थे. कल्याण बनर्जी के बागी रुख को टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील की तरह देखा जा रहा है।  बिछड़ रहे सब बारी-बारी ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से सांसद-विधायक और नेता बारी-बारी बिछड़ रहे हैं. कल्याण बनर्जी के बागी रुख अख्तियार करने से कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी को दो बड़े झटके लगे. पहले प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. वहीं, कल तक ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आए प्रसून बनर्जी भी बागी काकोली गुट के साथ हो लिए. काकोली गुट को लोकसभा में अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग वाले पत्र पर प्रसून बनर्जी ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।   

‘किसानों की जिंदगी बदल रही है’— शिवराज सिंह ने बताए 6 बड़े लाभ, सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

भोपाल   केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के विदिशा से सांसद शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में विकास और परिवर्तन को लेकर बड़ा दावा किया है। शिवराज ने कहा कि एमपी समेत पूरे देश में किसानों को 6 बड़े फायदे मिल रहे है। जिससे उनका जीवन खुशहाल हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ये जानकारी दी है। बताया कि आज का किसान परंपरागत खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर आधुनिक और विकसित खेती पद्दति से आत्मनिर्भर बना है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा – "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। किसान कल्याण को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों ने खेती को परंपरागत सीमाओं से निकालकर आधुनिक, विकसित और आत्मनिर्भर बनाया है। इन 12 वर्षों में कृषि की तस्वीर भी बदली है और तकदीर भी। व्यवस्था भी बदली है और विश्वास भी। खेती भी आगे बढ़ी है और किसान भी। – PM-KISAN के माध्यम से ₹4.3 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंची। – MSP पर ₹26 लाख करोड़ से अधिक की खरीद हुई। – 8 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड बने। – 26 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए। – PM फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को सुरक्षा कवच मिला। – e-NAM ने किसान को खेत से बाजार तक नई ताकत दी। अन्न को वैश्विक पहचान मिली, जलवायु अनुकूल फसल किस्में विकसित हुईं और AI आधारित कृषि सेवाएँ गाँव तक पहुंचीं। इन सब प्रयासों के परिणामस्वरूप खाद्यान्न उत्पादन में 71% की वृद्धि हुई। यह केवल योजनाओं की सफलता नहीं है, यह करोड़ों किसानों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है। आज किसान के चेहरे पर मुस्कान है, क्योंकि उसकी मेहनत को सम्मान मिला है। आज किसान के मन में विश्वास है, क्योंकि उसका हक सीधे उसके पास पहुंचा है। आज किसान के खेत में उम्मीद लहलहा रही है, क्योंकि बीज से बाज़ार तक उसके साथ मोदी सरकार खड़ी है।"

बंगाल की राजनीति में हलचल: TMC सांसद प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे से मचा सियासी भूचाल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी में भगदड़ मची हुई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने आज राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।   प्रकाश चिक बराइक से पहले टीएमसी के दो और कद्दावर राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं. एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत काफी कम हो गई है. आज बराइक के इस्तीफे के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है।  आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं मुश्किलें सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, टीएमसी के भीतर यह असंतोष यहीं थमने वाला नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले एक हफ्ते के भीतर टीएमसी के तीन और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं।  अगर ये अटकलें सच साबित होती हैं, तो संसद में ममता बनर्जी की पार्टी का ग्राफ और नीचे गिर जाएगा.फिलहाल इन इस्तीफों के पीछे के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन विपक्षी दल इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती कलह और असंतोष के रूप में देख रहे हैं।  आ गई TMC के बागी सांसदों की लिस्ट! कुछ नाम तो चौंका देंगे अब तक कयास लगाए जा रहे थे क‍ि ममता का साथ क‍ितने सांसद छोड़ने वाले हैं. कोई 10 कह रहा था तो कोई 20… लेकिन अब 19 सांसदों की ल‍िस्‍ट सामने आ गई है. इसमें काकोली घोष दस्‍तीदार के साथ यूसुफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा समेत कई चौंकाने वाले नाम हैं. गौर करने वाली बात है क‍ि इसमें सयानी घोष जैसे कई नाम भी हैं, ज‍िनकी अटकलें लगाई जा रही थीं।  1. यूसुफ पठान (बहरामपुर) क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान ने कांग्रेस के गढ़ बहरामपुर में अधीर रंजन चौधरी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था. लेकिन राजनीति की पिच पर यूसुफ को दीदी के लोकल नेताओं से वैसी मदद नहीं मिल रही थी, जैसी उम्मीद थी. बहरामपुर के स्थानीय संगठन से उनकी दूरी अब खुलकर सामने आ रही है।  2. जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया (कूचबिहार) कूचबिहार की सीट हमेशा से उत्तर बंगाल की राजनीति का केंद्र रही है. जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया यहां टीएमसी के मजबूत राजबंशी चेहरा माने जाते हैं. लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और स्थानीय गुटबाजी के कारण उनके सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं. क्षेत्र में अपनी पकड़ के बावजूद संगठन से अनबन की खबरें हैं।  3. खलीलुर रहमान (जंगीपुर) मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर से आने वाले खलीलुर रहमान बीड़ी कारोबारी से राजनेता बने हैं. मुस्लिम बहुल इस इलाके में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है. हालांकि, केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आने और स्थानीय लीडरशिप से तालमेल की कमी के चलते उनके टीएमसी से दूर जाने की चर्चाएं तेज हैं।  4. अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद) मुर्शिदाबाद के कद्दावर नेता अबू ताहेर खान का इस लिस्ट में होना चौंकाता है. कांग्रेस से टीएमसी में आए अबू ताहेर का क्षेत्र में मजबूत जनाधार है. पिछले कुछ समय से जिला स्तर पर हो रही उपेक्षा और नए नेताओं को तरजीह दिए जाने से वह काफी नाराज बताए जा रहे हैं।  5. पार्थ भौमिक (बैरकपुर) बैरकपुर जैसी हाई-प्रोफाइल और हिंसा प्रभावित सीट से जीतने वाले पार्थ भौमिक ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे. लेकिन अर्जुन सिंह के साथ चलने वाली अंदरूनी खींचतान और पार्टी के भीतर गुटीय समीकरणों के बदलने से पार्थ भौमिक का मोहभंग होता दिख रहा है, जिससे बगावती सुर उठे हैं।  6. काकोली घोष दस्तीदार (बारासात) डॉ. काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी की बेहद सीनियर और तेजतर्रार नेता हैं. संसद में अपनी बात मजबूती से रखने वाली काकोली के बारे में कहा जा रहा है कि वह पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और युवा ब्रिगेड के फैसलों से असहज महसूस कर रही हैं, जिससे दूरियां बढ़ी हैं।  7. बापी हलदार (मथुरापुर) मथुरापुर (SC) सीट से चुनकर आए बापी हलदार जमीनी स्तर के नेता हैं. दक्षिण 24 परगना के सुंदरबन इलाके में उनकी मजबूत पकड़ है. स्थानीय पंचायत चुनावों और विकास कार्यों के फंड को लेकर जिला नेतृत्व के साथ उनकी अनबन अब बगावत के मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है।  8. सायोनी घोष (जादवपुर) टीएमसी की युवा विंग की अध्यक्ष रहीं सायोनी घोष हमेशा से ममता बनर्जी की फेवरेट रही हैं. जादवपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट से जीतकर संसद पहुंचने वाली सायोनी की बगावत की खबरें हैरान करने वाली हैं. बताया जा रहा है कि संगठनात्मक फेरबदल और कुछ आंतरिक फैसलों से वह खुश नहीं हैं।  9. माला रॉय (कोलकाता दक्षिण) कोलकाता दक्षिण सीट खुद ममता बनर्जी का पुराना गढ़ रही है, जहां से माला रॉय सांसद हैं. माला रॉय का नाम इस लिस्ट में आना टीएमसी के लिए सबसे बड़ा झटका है. कोलकाता नगर निगम और सांसद फंड के इस्तेमाल को लेकर पार्टी आलाकमान से उनके मतभेद गहरे हो चुके हैं।  10. मिताली बाग (आरामबाग) आरामबाग की बेहद करीबी मुकाबले वाली सीट से जीत दर्ज करने वाली मिताली बाग एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं. लेकिन सांसद बनने के बाद स्थानीय स्तर पर पार्टी के पुराने क्षत्रपों ने उन्हें काम नहीं करने दिया. इसी आंतरिक कलह और उपेक्षा के कारण मिताली ने अपने रास्ते अलग करने का मन बनाया है।  11. देव अधिकारी (घाटाल) बांग्ला सिनेमा के सुपरस्टार दीपक अधिकारी उर्फ देव के बागी तेवर नए नहीं हैं. वह पहले भी राजनीति छोड़ने की इच्छा जता चुके थे. ममता के मनाने पर वह माने तो थे, लेकिन घाटाल के स्थानीय टीएमसी नेताओं के भ्रष्टाचार और दखलअंदाजी से तंग आकर अब वह आर-पार के मूड में हैं।  12. कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम) आदिवासी बहुल झाड़ग्राम सीट से सांसद कालीपद सोरेन संथाली साहित्यकार और प्रतिष्ठित चेहरा हैं. टीएमसी ने इन्हें आदिवासी कार्ड के तौर पर उतारा था. लेकिन क्षेत्र में आदिवासियों की बुनियादी समस्याओं पर पार्टी के ढुलमुल रवैए और वादों से मुकरने के कारण कालीपद सोरेन ने बगावती रुख अख्तियार कर लिया है।  13. जून मालिया (मेदिनीपुर) मेदिनीपुर से सांसद और मशहूर अभिनेत्री जून मालिया को टीएमसी का ग्लैमरस लेकिन गंभीर चेहरा … Read more

विपक्षी दलों में बढ़ती खींचतान का BJP को फायदा? जानिए परिसीमन बिल पर क्या बन रहे समीकरण

 नई दिल्ली केंद्र की बीजेपी सरकार को विधानसभा चुनावों के बीच बड़े जोर का झटका लगा था. लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल गिर गया था. कांग्रेस के विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण राहुल गांधी भले ही क्रेडिट लें, लेकिन असल बात तो यह है कि तब तमिलनाडु में डीएमके और पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका थी।  तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के नए सिरे से जिक्र की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि दोनों ही दल अपने अपने राज्यों में सत्ता से बेदखल हो गए हैं. और, बेदखल ही नहीं हुए हैं. विधायकों के बाद टीएमसी के सांसद भी बगावत पर उतर आए हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मॉनसून सत्र में मिल सकता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण संशोधन बिल और परिसीमन विधेयक संसद में पेश कर सकती है – सवाल यह है कि बदले राजनीतिक हालात में दोनों विधेयकों के पास होने की कितनी संभावना है।  मॉनसून सेशन में महिला आरक्षण – परिसीमन बिल की संभावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीते 12 साल के कार्यकाल में पहला मौका था जब केंद्र सरकार की तरफ से पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में गिरा हो. संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए कानून में संशोधन और परिसीमन विधेयक के समर्थन में 298 मत पड़े, जबकि बिलों के विरोध में 230 मत पड़े थे. दरअसल, महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा क्षेत्रों की संख्या फिर से निर्धारित करने के मकसद से लाया गया परिसीमन विधेयक भी महिला आरक्षण संशोधन के साथ जुड़ा हुआ था।  बीजेपी वैसे तो विधानसभा चुनावों के बीच मिले जोरदार झटके की पूरी तरह भरपाई कर चुकी है, लेकिन नेतृत्व को मिशन तब तक अधूरा लग रहा होगा, जब तक कि दोनों विधेयक संसद से पास नहीं हो जाते – और यही वजह है कि बीजेपी सरकार मॉनसून सत्र में फिर से दोनों बिल लाने और उन्हें पास कराने के लिए प्रयासरत है।  पश्चिम बंगाल की चुनावी जीत का तो बीजेपी को लंबे समय से इंतजार था. कई बार के गंभीर प्रयासों के बाद जीत संभव भी हो पाई. तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के साथ भले ही थलपति विजय की सरकार बन गई हो, लेकिन डीएमके की हार तो बीजेपी को सुकून देने वाली ही है. AIADMK अगर सत्ता में लौट पाती तो गठबंधन पार्टनर बीजेपी के लिए और अच्छी बात होती. डीएमके ने तो संसद में बिल गिर जाने को वोटिंग से पहले ही जीत की तरह जश्न मनाया था, और चुनाव कैंपेन की स्ट्रैटेजी तक बदल डाली थी।  तृणमूल कांग्रेस में जो तबाही का दौर शुरू हुआ, चल ही रहा है. डीएमके नेतृ्त्व भी सशंकित है. वैसे भी आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के छोड़कर चले जाने के बाद तो विपक्षी खेमे के शायद ही कोई राजनीतिक दल होगा जो डरा हुआ न हो. खबर है कि बीजेपी ने क्षेत्रीय दलों से नए सिरे से संपर्क किया है. और, इस मामले में डीएमके की तरफ से भी नरम रुख अपनाए जाने की बात सामने आई है. वैसे भी गठबंधन तोड़कर कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय की टीवीके के साथ चले जाने के बाद डीएमके नए रास्ते और समीकरण तलाशने के लिए आजाद भी हो गई है. सुनने में आया है कि डीएमके केंद्र सरकार के बिल के नए ड्राफ्ट और लिखित प्रस्ताव का इंतजार कर रही है. अचानक डीएमके के लिए पलटना तो संभव भी नहीं होगा, लेकिन बीच का रास्ता तो निकाला ही जा सकता है।  राज्यसभा चुनाव से कितना फर्क पड़ेगा देश के 10 राज्यों में राज्यसभा की 24 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होने जा रहे हैं. और, इनमें से 10 सीटों पर पहले से ही बीजेपी की जीत पक्की मानी जा रही थी. अब इसमें मध्य प्रदेश से एक सीट और भी जुड़ रही है. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश से बीजेपी को राज्यसभा की 3 सीटें मिलना पक्का माना जाने लगा है. गुजरात से राज्यसभा की चारों सीटें बीजेपी को मिलना पक्का है. राजस्थान से 2 सीटें मिल सकती हैं. मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश से 1-1 सीटें मिलने वाली हैं. झारखंड में नंबर कम होने के कारण बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा कर रखी है।  राज्यसभा में बीजेपी के पास 113 सांसद हैं. और, पूरे एनडीए की बात करें तो ये नंबर 148 है. फिर भी दो तिहाई बहुमत के लिए 15 सीटें कम पड़ रही हैं. राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की जरूरत पड़ती है. मुद्दे की बात यह है कि टीएमसी के दो सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है, फिर तो बहुमत का आंकड़ा भी घट जाएगा. टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के बाद सुष्मिता देव ने भी इस्तीफा दे दिया है. सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात भी की है, जिससे आगे का प्लान स्पष्ट हो गया है।  लोकसभा में बदल रहा नंबर गेम बदले माहौल में लोकसभा में नंबर गेम भी बदल रहा है. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की बगावत के बाद तो पक्का ही हो गया है. टीएमसी के बागी सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में स्पीकर को अलग बैठने और अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए पत्र भी दे दिया है।  काकोली घोष दस्तीदार को नेता मानने वाले ऐसे ही 19 सांसदों की लिस्ट सामने आई है, जिनमें यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा  के साथ सयानी घोष का नाम भी शामिल है. जिस तरह से काकोली घोष प्रशासनिक मीटिंग में इलाके के विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ शामिल हुई थीं, इरादे तभी साफ हो गए थे।  अब अगर डीएमके सपोर्ट के लिए तैयार हो जाए, और टीएमसी के बागी सांसदों का साथ हो जाए तो बीजेपी के लिए दोनों बिल पास कराना आसान हो जाएगा. अगर कुछ कम पड़ा तो उसे भी मैनेज करने की कोशिश हो ही सकती है। 

वाहन चालकों के लिए खुशखबरी! ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर अब नहीं देनी होगी एक्साइज ड्यूटी

  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण सप्लाई लाइन प्रभावित हुई है. पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित होने का असर कीमतों पर नजर भी आ रहा है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इस बीच अब भारत सरकार ने ईंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने एथेनॉल के अधिक मिश्रण वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त कर दी है. अब अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी।  भारत सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 22 से 30 फीसदी तक एथेनॉल के मिश्रण वाला पेट्रोल अब एक्साइज ड्यूटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है. यानी अब ई-22, ई-25, ई-27 और ई-30 श्रेणी के पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं देनी होगी।  सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस फैसले का तेल कंपनियों से लेकर आम किसान और उपभोक्ता तक, सभी को फायदा होगा. सरकार के इस कदम को पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. एथेनॉल के ज्यादा मिश्रण से पेट्रोल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिल सकेगी।  एथेनॉल का मिश्रण अधिक होने को किसानों के लिए भी लाभदायक बताया जा रहा है. एथेनॉल का कनेक्शन कृषि क्षेत्र से है. सरकार के इस फैसले का तत्कालिक प्रभाव जो भी रहे, इसके पीछे दीर्घकालिक रणनीति बताई जा रही है. ज्यादा एथेनॉल के मिश्रण वाले पेट्रोल एक्साइज ड्यूटी शून्य हो जाने के बाद ई-20 या प्रीमियम पेट्रोल के मुकाबले कहीं सस्ते होंगे।  इससे इसकी मांग बढ़ेगी. हालांकि, ये पेट्रोल सभी वाहनों में अभी से ही इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे, लेकिन वाहन बनाने वाली कंपनियां ऐसे इंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित होंगी जो ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर चल सकें. बता दें कि हाल ही में ई-85 पेट्रोल भी लॉन्च कर दिया गया था. हालांकि, यह पेट्रोल केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ही इस्तेमाल हो सकेगा।   

US Inflation Crisis: ईरान संघर्ष ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन, महंगाई पर काबू पाना हुआ मुश्किल

वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में युद्ध एक बार फिर तेज हो गई है. लगातार दूसरे दिन अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का सिलसिला जारी है. इस बीच कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है. ईरान युद्ध न सिर्फ दुनिया के तमाम अन्य देशों के लिए, बल्कि खुद अमेरिका के लिए भी बड़ी सिरदर्दी बनता जा रहा है और अमेरिकियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।  ईरान युद्ध के चलते तेल-गैस की सप्लाई में रुकावट और एनर्जी प्राइस में तगडी़ बढ़ोतरी से अमेरिका भी पीड़ित है और यहां महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है. मई महीने में अमेरिका में महंगाई दर के आंकड़े आ गए हैं और ये डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाले हैं. दरअसल, US Inflation मई में तीन साल के हाई पर पहुंच गई।  4 फीसदी के पार US में महंगाई रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जंग के चलते पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिका में महंगाई के रूप में देखने को मिला है. अमेरिकी लेबर स्टेटिस्टिक्स ब्यूरो ने बुधवार को बताया कि रिटेल महंगाई (CPI) मई में सालाना आधार पर बढ़कर 4.2% हो गई, जो कि अप्रैल 2023 के बाद सबसे ज्यादा है. उस समय ये 3.8 फीसदी पर पहुंची थी।  अब अमेरिकियों की सेविंग पर संकट  अमेरिका में महंगाई दर के ये अनुमान इकोनॉमिस्ट के सर्वे और अनुमानों के अनुरूप ही रहे हैं. महंगाई में लगातार तीसरे महीने मजबूत उछाल ने अमेरिकी परिवारों पर बढ़ते दबाव को उजागर किया है. साक्ष्य बताते हैं कि ज्यादातर लोग अब अपने खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी बचत का भी उपयोग कर रहे हैं. ये लगातार दूसरा महीना है, जबकि महंगाई दर वेतन वृद्धि से अधिक रही, जिससे आर्थिक ग्रोथ पर भी दबाव पड़ सकता है।  युद्ध, महंगाई और अमेरिकी बाजार क्रैश  ईरान के साथ एक बार फिर शुरू हुए युद्ध ने ग्लोबल टेंसन को चरम पर पहुंचा दिया है, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में फिर से आग लगने लगी है और खबर लिखे जाने तक ये 95 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था. इस बीच अमेरिका में पड़ी महंगाई की मार का सीधा अमेरिकी शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है. US Inflation Data आते ही यहां कोहराम सा मच गया. Dow Jones 953 अंक की बड़ी गिरावट लेकर बंद हुआ।  ट्रंप की राजनीति पर पड़ेगा असर  अमेरिका में बढ़ती महंगाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक राजनीतिक बोझ बनती जा रही है, जो नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रही है. बता दें कि ट्रंप ने 2024 का राष्ट्रपति चुनाव के दौरान महंगाई को कम करने के वादे किए थे और इसका फायदा उन्हें मिला था।