samacharsecretary.com

Punjab-Haryana High Court में नई ग्रीन पार्किंग का शुभारंभ, 6.23 एकड़ में हाईटेक सुविधा, विजिटर्स को मिलेगी राहत

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट आने वाले वकीलों, वादकारियों (लिटिगेंट्स) और आम लोगों के लिए राहत की खबर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने लंबे समय से लंबित पार्किंग परियोजना को पूरा कर हाईकोर्ट परिसर के पास नई ग्रीन सरफेस पार्किंग शुरू कर दी है। करीब 3.41 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस पार्किंग में एक समय में 750 से अधिक चारपहिया और दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इसके शुरू होने से हाईकोर्ट के आसपास वर्षों से चली आ रही पार्किंग समस्या और ट्रैफिक जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। 6.23 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई पार्किंग नई पार्किंग हाईकोर्ट से सटी 6.23 एकड़ जमीन पर विकसित की गई है। यह क्षेत्र पहले कच्चा और पथरीला था, जहां अनियमित तरीके से वाहन खड़े किए जाते थे। यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने इसे आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया है। पार्किंग में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन पेवर ब्लॉक्स लगाए गए हैं। इससे हरियाली बनी रहेगी और बारिश के पानी की निकासी भी बेहतर होगी। प्रशासन का कहना है कि इस तकनीक से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यूनेस्को हेरिटेज क्षेत्र होने के कारण बरती गई विशेष सावधानी यह पार्किंग कैपिटल कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में स्थित है, जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण निर्माण कार्य के दौरान हेरिटेज मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। परियोजना का टेंडर सितंबर 2025 में जारी हुआ था और अक्टूबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू किया गया। इस स्थान पर पहले से लोग वाहन खड़े करते थे, इसलिए काम चरणबद्ध तरीके से किया गया। अधिकांश निर्माण कार्य हाईकोर्ट की छुट्टियों के दौरान पूरा किया गया ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। प्रशासन ने पार्किंग का डिजाइन तैयार करने के लिए लैंडस्केप कंसल्टेंट की भी मदद ली, जिससे कैपिटल कॉम्प्लेक्स की मूल संरचना और हेरिटेज वैल्यू प्रभावित न हो। रॉक गार्डन के पास भी बनेगी नई पार्किंग हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यूटी प्रशासन अब रॉक गार्डन के समीप खाली पड़ी जमीन पर एक और पार्किंग विकसित करने की तैयारी कर रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 27 मई को प्रशासन को 90 दिनों के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू करने के निर्देश दिए थे। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार यहां 70 से 80 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। मौजूदा हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए पार्किंग का डिजाइन तैयार किया जा रहा है। नई पार्किंग बनने के बाद हाईकोर्ट, रॉक गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग व्यवस्था और अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।  

तथ्य छिपाने पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट सख्त, जमानत याचिका पर लगा झटका

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने करनाल के निसिंग क्षेत्र में 21 वर्षीय युवती से कथित छेड़छाड़ और पीछा करने के मामले में आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी अदालत ने पाया कि आरोपित ने एफआईआर के अनुवादित संस्करण में एक महत्वपूर्ण आरोप को जानबूझकर हटाकर अदालत के समक्ष अधूरी और भ्रामक तस्वीर पेश की। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी तथ्यात्मक जानकारी छिपाने वाला व्यक्ति अग्रिम जमानत जैसी विवेकाधीन राहत पाने का हकदार नहीं हो सकता। जस्टिस संदीप मौदगिल ने अपने आदेश में कहा कि यह कोई मामूली भाषाई त्रुटि नहीं, बल्कि अभियोजन के पूरे मामले की नींव से जुड़ा गंभीर आरोप है। अदालत के अनुसार आरोपी ने रिकार्ड का गलत प्रस्तुतीकरण किया और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए, जिससे उसकी नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। मामले के अनुसार निसिंग थाना पुलिस ने 14 मई को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। शिकायतकर्ता युवती ने आरोप लगाया था कि 12 मई को वह गांव के मंदिर जा रही थी, तभी आरोपित उसका पीछा करते हुए आया। उसने पीछे से उसकी चप्पल पर पैर रखा, कंधे और निजी अंगों को छुआ तथा विरोध करने पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपित काफी समय से उसका पीछा कर रहा था, अशोभनीय इशारे करता था और बाद में उसके घर के आसपास भी घूमता रहा, जिससे वह भयभीत थी। युवती का बयान बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत भी दर्ज किया गया, जिसमें उसने अपने आरोप दोहराए।दूसरी ओर आरोपित ने अदालत में दलील दी कि एफआईआर दो दिन की देरी से दर्ज हुई और यह उसे फंसाने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया एक जवाबी कदम है। उसने दोनों परिवारों के बीच पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए खुद को निर्दोष बताया।हालांकि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि आरोपित द्वारा पेश किए गए एफआईआर के अंग्रेजी अनुवाद में निजी अंगों को छूने संबंधी आरोप को हटा दिया गया था। अनुवाद में केवल कंधा छूने और अन्य सामान्य आरोपों का उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि यदि पूरा आरोप निष्पक्ष रूप से सामने रखा जाता तो स्पष्ट होता कि मामला केवल पीछा करने या अभद्र टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निजी अंगों से शारीरिक छेड़छाड़ का विशिष्ट आरोप भी शामिल है। अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत मांगने वाले व्यक्ति का दायित्व है कि वह सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का पूर्ण और निष्पक्ष खुलासा करे। चूंकि आरोपित ने ऐसा नहीं किया और रिकार्ड के महत्वपूर्ण हिस्से को दबाया, इसलिए वह अदालत के समक्ष साफ हाथों से नहीं आया। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।