samacharsecretary.com

MSME विभाग के कर्मचारियों को बड़ी सौगात! 10 साल बाद 217 प्रमोशन, 116 नए पदों पर होगी भर्ती

भोपाल मध्य प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया आखिरकार आगे बढ़ गई है। करीब दस साल बाद विभाग में बड़े स्तर पर कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। विभाग की ओर से कुल 217 कर्मचारियों के प्रमोशन के आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही विभाग में सीधी भर्ती के लिए 116 नए पद भी उपलब्ध हो गए हैं, जिन पर आने वाले समय में नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह प्रशासनिक निर्णय अहम माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर इसे लंबित मामलों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से विभिन्न विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए थे। सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देश मिलने के बाद उद्योग संचालनालय ने अलग-अलग संवर्गों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित की। बैठक में सेवा अभिलेख, वरिष्ठता सूची और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं की समीक्षा के बाद पात्र कर्मचारियों के नामों पर सहमति बनी। इसके आधार पर विभाग ने रविवार को पदोन्नति संबंधी आदेश जारी कर दिए। 116 नए पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती विभाग का कहना है कि पदोन्नति के बाद सीधी भर्ती के 116 नए पद उपलब्ध हो गए हैं। इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इससे विभाग में लंबे समय से रिक्त पदों को भरने का रास्ता साफ होगा और नए अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा। कर्मचारियों को 10 साल बाद मिली पदोन्नति एमएसएमई विभाग में करीब एक दशक बाद बड़े पैमाने पर पदोन्नतियां होने से कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। विभागीय कर्मचारी और कर्मचारी संगठनों ने पदोन्नति आदेश जारी होने पर राज्य सरकार के प्रति आभार जताया है। लंबे समय से लंबित पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को इससे बड़ी राहत मिली है। अधिकारियों की डीपीसी भी जल्द विभाग ने अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की तैयारी भी पूरी कर ली है। अधिकारियों की पदोन्नति के लिए जल्द ही मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से डीपीसी बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव है। इसके बाद अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। जारी आदेश के मुताबिक सबसे वरिष्ठ श्रेणी में अधीक्षक के एक पद पर पदोन्नति की गई है। इसके अलावा सहायक अधीक्षक के तीन पदों पर कर्मचारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहायक वर्ग-1 में 43 कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है, जबकि सबसे अधिक 131 कर्मचारियों को सहायक वर्ग-2 के पद पर प्रोन्नति मिली है। इसी तरह सहायक वर्ग-3 के 14 कर्मचारियों को भी उच्च पद पर पदोन्नत किया गया है। निज सहायक संवर्ग में 25 कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिला है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सभी आदेश नियमानुसार जारी किए गए हैं और संबंधित कार्यालयों को इसकी सूचना भेज दी गई है। सूत्रों के अनुसार लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण विभाग में कई पदों पर कार्यभार का असंतुलन बना हुआ था। वरिष्ठता के आधार पर आगे बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में लगातार असंतोष भी देखा जा रहा था। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत थे, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। अब बड़ी संख्या में पदोन्नतियां होने से विभागीय ढांचे में नई व्यवस्था लागू होगी और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण भी किया जाएगा। इन पदोन्नतियों का एक बड़ा असर भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ा है। विभाग के अनुसार जब कर्मचारियों को उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया तो निचले स्तर के कई पद रिक्त हो गए। ऐसे कुल 116 पद अब सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध हो गए हैं। विभाग ने संकेत दिए हैं कि इन पदों को जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भर्ती की औपचारिकताओं को लेकर संबंधित एजेंसियों और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ की जा रही हैं। इससे नए अभ्यर्थियों के लिए सरकारी सेवा में आने का अवसर भी बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों पर नियुक्तियां होने से विभाग के विभिन्न कार्यालयों में लंबे समय से बनी स्टाफ की कमी भी काफी हद तक दूर हो सकेगी। वर्तमान में कई इकाइयों में सीमित कर्मचारियों के सहारे कामकाज संचालित किया जा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक कार्यों की गति बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही विभिन्न योजनाओं के संचालन और उद्योगों से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी सुविधा मिलने की संभावना है। विभागीय कर्मचारियों के बीच पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद उत्साह का माहौल देखा गया। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से लंबित प्रक्रिया पूरी होने से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिली है। कई कर्मचारियों को लंबे इंतजार के बाद पहली बार पदोन्नति का लाभ मिला है। विभागीय स्तर पर इसे कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला फैसला माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पदोन्नति मिलने से कर्मचारियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी और विभागीय कामकाज में अनुभव का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एमएसएमई विभाग ने केवल कर्मचारियों की पदोन्नति तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रखी है। विभाग अब अधिकारियों के लंबित प्रमोशन पर भी काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इसके लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आयोग से बैठक की तारीख तय होने के बाद अधिकारियों के मामलों पर भी विचार किया जाएगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होते ही अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े आदेश भी जारी किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार का उद्देश्य विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति मामलों का चरणबद्ध तरीके से समाधान करना है। इसी कड़ी में एमएसएमई विभाग की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर वरिष्ठता सूची, रिक्त पदों की स्थिति और सेवा नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रियाएं भी जारी हैं। आने वाले समय में भर्ती और पदोन्नति दोनों मोर्चों पर विभाग में गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

उद्यमियों को भेल और गेल सहित मानक ब्यूरो से मिले अनेक टिप्स

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं गुणवत्ता सत्र संपन्न उद्यमियों को भेल और गेल सहित मानक ब्यूरो से मिले अनेक टिप्स उत्पाद की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के संबंध में दी गई व्यावहारिक जानकारी भोपाल अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर शनिवार को रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम तथा “उत्पाद गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक के लिए“सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश—हार्ट ऑफ इंडिया, हार्ट ऑफ ग्रोथ” की थीम पर हुए सत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, प्रतिष्ठित निजी कंपनियों एवं संस्थागत खरीदारों से जोड़ने के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई। सत्र में विशेष रूप से बीएचईएल, गेल, एनसीएल और पावरग्रिड सहित सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों एवं प्रतिष्ठित निजी कंपनियों से प्रदेश के एमएसएमई उद्यमियों ने सीधा संवाद किया। भारतीय मानक ब्यूरो के मोहम्मद रिजवान तथा मोहम्मद तौसीफ ने दी मानकीकरण, प्रमाणन और शुल्क रियायतों की जानकारी दी।भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा विश्व बैंक की RAMP योजना के अंतर्गत वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर बीएचईएल, गेल इंडिया लिमिटेड, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, Resonia, JadeBlue, FabIndia और Olam Agri सहित सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने व्याखान एवं प्रेजेंटेशन दिया | कार्यक्रम में प्रदेश के पंजीकृत एमएसएमई उद्यमियों को इन संस्थाओं की खरीद प्रणाली, वेंडर पंजीकरण प्रक्रिया, निविदाओं में भागीदारी, तकनीकी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं, समयबद्ध आपूर्ति तथा आपूर्ति शृंखला में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। बीएचईएल के विभाग अध्यक्ष पंकज कुमार झा एवं  प्रबंधक सुमीनाक्षी सिंह ने संस्थान की खरीद प्रक्रिया, वेंडर पंजीकरण व्यवस्था तथा एमएसएमई के लिए उपलब्ध खरीद अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश के सक्षम उद्यमों को निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप बीएचईएल की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। Resonia के सहायक उपाध्यक्ष दीपांकर बरगली ने कॉर्पोरेट वेंडर ऑनबोर्डिंग, खरीद प्रक्रिया और व्यावसायिक अवसरों के संबंध में जानकारी साझा की। गेल इंडिया लिमिटेड के नवीन जमालमुडी ने वेंडर पंजीकरण, निविदा प्रक्रिया, तकनीकी योग्यता और आपूर्ति शृंखला की आवश्यकताओं से उद्यमियों को अवगत कराया। उन्होंने संस्थागत खरीद में भागीदारी के लिए उद्यम पंजीकरण, आवश्यक अभिलेखों, तकनीकी क्षमता और डिजिटल उपस्थिति के महत्व पर बल दिया। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के विपुल जैन ने एनसीएल के साथ व्यवसाय करने, वेंडर के रूप में पंजीकरण कराने और संस्थान की खरीद प्रक्रिया में भाग लेने के संबंध में मार्गदर्शन दिया। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सुपल्लवी मिश्रा ने विद्युत पारेषण क्षेत्र में सामग्री आपूर्ति, सिविल कार्य, रखरखाव सेवाओं और अन्य श्रेणियों में एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा क्रमशः JadeBlue के अमित खामर ने परिधान खुदरा क्षेत्र में उत्पाद गुणवत्ता, निरंतर आपूर्ति और समयबद्ध डिलीवरी से संबंधित अपेक्षाओं पर जानकारी दी। FabIndia की सुनलिनी गर्ग ने पारंपरिक शिल्प, हथकरघा वस्त्र, गृह-सज्जा और कारीगर आधारित उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए उपलब्ध वेंडर डेवलपमेंट अवसरों पर प्रकाश डाला। Olam Agri के निर्देश त्रिवेदी ने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कमोडिटी एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा, ट्रेसेबिलिटी और लॉजिस्टिक्स से संबंधित खरीद अवसरों की जानकारी दी। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान यह रेखांकित किया गया कि बड़े सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के लिए उत्पाद की निरंतर गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी मूल्य, निर्धारित समय पर आपूर्ति, तकनीकी क्षमता और आवश्यक प्रमाणनों का अनुपालन महत्वपूर्ण है। प्रेजेंटेशन के बाद क्रेता–एमएसएमई संवाद और व्यावसायिक नेटवर्किंग बैठकें आयोजित की गईं। इनमें पंजीकृत उद्यमियों को संस्थागत खरीदारों के प्रतिनिधियों के समक्ष अपने उत्पाद, उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा संबंधित संस्थाओं की वर्तमान एवं संभावित खरीद आवश्यकताओं पर सीधे चर्चा करने का अवसर मिला। मानक ब्यूरो का हुआ विशेष सत्र कार्यक्रम के समानांतर आयोजित भारतीय मानक ब्यूरो के विशेष सत्र का संचालन ब्यूरो के अधिकारी मोहम्मद रिजवान तथा मोहम्मद तौसीफ ने किया। दोनों अधिकारियों ने एमएसएमई उद्यमियों को भारतीय मानकों, उत्पाद प्रमाणन, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों, BIS लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया और उद्यमों के लिए उपलब्ध शुल्क रियायतों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानकीकरण और प्रमाणन को केवल वैधानिक अनुपालन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उत्पाद की गुणवत्ता, बाजार में विश्वसनीयता, उपभोक्ताओं के विश्वास और बड़े संस्थागत बाजारों तक पहुँच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्र में बताया गया कि 22 जून 2026 की स्थिति में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा 22 हजार 860 से अधिक भारतीय मानक विकसित किए गए हैं। कुल 1,477 उत्पाद BIS प्रमाणन के दायरे में हैं तथा मानव स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सहित विभिन्न कारणों से 600 से अधिक उत्पादों के लिए अनिवार्य प्रमाणन लागू है। देशभर में 53 हजार से अधिक BIS लाइसेंस संचालित हैं। उद्यमियों को लागू भारतीय मानक की पहचान करने, मानक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करने, कारखाना निरीक्षण, उत्पाद नमूना परीक्षण तथा लाइसेंस प्रदान किए जाने की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीआईएसअधिकारियों ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के संबंध में बताया कि इनका उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ाना, मानव, पशु एवं पादप स्वास्थ्य की रक्षा करना, पर्यावरण संरक्षण तथा अनुचित व्यापार व्यवहारों को रोकना है। उद्यमियों को यह भी बताया गया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के अंतर्गत चिन्हित उत्पादों का निर्माण, आयात अथवा विक्रय निर्धारित भारतीय मानकों और प्रमाणन आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक होता है। सत्र में एमएसएमई के लिए BIS द्वारा प्रदान की जा रही विशेष शुल्क रियायतों की जानकारी भी दी गई। सूक्ष्म उद्यमों एवं स्टार्टअप्स को वार्षिक न्यूनतम मार्किंग शुल्क में 80 प्रतिशत, लघु उद्यमों को 50 प्रतिशत तथा मध्यम उद्यमों को 20 प्रतिशत तक रियायत उपलब्ध है। महिला उद्यमियों को संबंधित उद्यम श्रेणी में मिलने वाली रियायत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रदान किए जाने का प्रावधान है। यह स्पष्ट किया गया कि वेंडर डेवलपमेंट और उत्पाद मानकीकरण एक-दूसरे के पूरक हैं। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम उद्यमों को संभावित खरीदारों और नए बाजारों से जोड़ता है, जबकि BIS मानकों का अनुपालन और उत्पाद प्रमाणन उन्हें संस्थागत खरीद एवं बड़ी आपूर्ति शृंखलाओं की गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं … Read more

MSME मध्यप्रदेश की समृद्धि और रोजगार का मजबूत आधार: मंत्री काश्यप

एमएसएमई मध्यप्रदेश की समृद्धि और रोजगार की मजबूत नींव – मंत्री काश्यप अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर प्रदेशवासियों, उद्यमियों, स्टार्टअप को दी शुभकामनाएँ भोपाल  एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम भारत की अर्थव्यवस्था की सशक्त आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एमएसएमई क्षेत्र को देश के विकास की धुरी बताते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया है।मंत्री काश्यप ने शनिवार 27 जून को अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर प्रदेशवासियों सहित उद्यमियों को शुभकामनाएं और बधाई दी है। मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अनेक योजनाओं एवं सुधारों के माध्यम से देशभर के लाखों उद्यमियों को नई ऊर्जा और अवसर प्राप्त हुए हैं।मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में औद्योगिक विकास को नई गति मिली है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे अभिनव आयोजनों ने प्रदेश के एमएसएमई, स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ा है, रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और स्थानीय उद्यमों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान मिल रही है। मंत्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश का युवा स्टार्टअप्स और एमएसएमई के माध्यम से अपने सपनों को साकार कर रहा है। शासन की विभिन्न योजनाओं, प्रोत्साहन नीतियों और वित्तीय सहायता के बल पर हमारे उद्यमी निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहे हैं तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होने वाला कार्यक्रम प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा। इस अवसर पर विभिन्न हितलाभों का वितरण किया जाएगा, नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा अनेक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। वैश्विक कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ेगा और मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।  

तबादला आदेशों से MSME विभाग में नाराजगी, अब जूनियर अधिकारियों को मिली वरिष्ठों की CR लिखने की जिम्मेदारी

भोपाल  वाणिज्यिक कर विभाग के बाद अब मध्यप्रदेश के एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) विभाग में तबादलों और प्रभार आदेशों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग के भीतर आरोप लग रहे हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज कर जूनियर अधिकारियों को बड़े पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले का विभाग के कई अधिकारी खुलकर विरोध कर रहे हैं। विवाद 15 और 16 जून को जारी हुए प्रभार आदेशों को लेकर है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग ने ऐसी व्यवस्था लागू कर दी है जिसे कर्मचारी "चार्ज के ऊपर चार्ज" की व्यवस्था बता रहे हैं। यानी जिन अधिकारियों का मूल पद सहायक प्रबंधक है और जो वर्तमान में प्रभारी प्रबंधक के रूप में काम कर रहे हैं, उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी) के महाप्रबंधक का प्रभार सौंप दिया गया है। इन अधिकारियों को मिला महाप्रबंधक का प्रभार     सुबोध कुमार श्रीवास्तव को मंडीदीप     जेपी तिवारी को रीवा     शिवशंकर सिंह को निवाड़ी     सुरेश कुमार गोस्वामी को भिंड     राममूर्ति खरे को अनूपपुर     अजय तिवारी को शिवपुरी     बीएल अहिरवार को दमोह जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक का प्रभार दिया गया है। यही नियुक्तियां पूरे विवाद की मुख्य वजह बनी हुई हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ये सभी अधिकारी प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उन्हें महाप्रबंधक जैसे उच्च पद का प्रभार सौंपा गया है। 60 से ज्यादा राजपत्रित अधिकारी होने के बावजूद नहीं मिला मौका अधिकारियों का कहना है कि विभाग में एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित वर्ष 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें प्रबंधक और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद इन अधिकारियों को नजरअंदाज कर प्रभारी प्रबंधकों को महाप्रबंधक का प्रभार देने से विभाग में असंतोष बढ़ गया है। अधिकारियों का सवाल है कि जब नियमित रूप से चयनित और वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं, तो उन्हें जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई। पदोन्नति रोकी, फिर भी बड़े पदों का प्रभार दिया विभाग के भीतर यह भी नाराजगी है कि लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया लंबित है। अधिकारियों का कहना है कि एक ओर विभाग पदोन्नति नहीं कर रहा, वहीं दूसरी ओर प्रभारी व्यवस्था के जरिए जूनियर अधिकारियों को वरिष्ठ पदों का प्रभार देकर वरिष्ठता और योग्यता को दरकिनार किया जा रहा है। कई अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था विभागीय पदक्रम और सेवा नियमों के विपरीत है तथा इससे वरिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा। जूनियर अधिकारी लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर विवाद की एक बड़ी वजह गोपनीय चरित्रावली (सीआर) भी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में अब वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी ऐसे अधिकारियों के अधीन काम करेंगे जो मूल रूप से वर्ग-3 सेवा श्रेणी से हैं। ऐसी स्थिति में जूनियर अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की सीआर लिखेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह सेवा संरचना और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिहाज से असामान्य स्थिति है। प्रशासनिक आधार पर उठ रहे सवाल विभाग के भीतर चर्चा है कि यदि नियमित राजपत्रित अधिकारी उपलब्ध हैं, तो फिर प्रभारी व्यवस्था के जरिए उच्च पदों का प्रभार देने के पीछे क्या प्रशासनिक आधार अपनाया गया है। इसी कारण इन आदेशों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विभाग में असंतोष का माहौल इन आदेशों के बाद विभाग के कई अधिकारी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वरिष्ठता, योग्यता और चयन प्रक्रिया को महत्व देने के बजाय प्रभार व्यवस्था के माध्यम से नियुक्तियां की जा रही हैं। इससे विभाग में असंतोष और निराशा का माहौल बन गया है। फिलहाल विभाग की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभार आदेशों को लेकर चर्चा और विरोध लगातार बढ़ रहा है।

एमपी में लघु उद्योगों में महिलाएं भी बना रही हैं कमाल, 8.87 लाख में से हर चौथा उद्योग महिला के पास, 6 साल में रोजगार 6 गुना बढ़ा

भोपाल  देश में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के बीच अब महिलाओं की आर्थिक ताकत के आंकड़े भी सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में महिलाओं ने सिर्फ घर तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि कारोबार की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर चौथा लघु उद्योग अब महिलाओं के हाथ में है, जो बदलाव की साफ तस्वीर दिखाता है। यह आंकड़े लोकसभा में पेश किए गए हैं, जिन्हें सांसद विजय सिंह बघेल ने सामने रखा। इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि महिलाएं अब सिर्फ नौकरी करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि खुद रोजगार देने वाली बन रही हैं। एमपी में 8.87 लाख MSME 28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 8,87,087 पंजीकृत MSME इकाइयां हैं। इनमें से 2,28,959 इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। यानी प्रदेश की लगभग हर चौथी MSME इकाई महिला उद्यमियों के हाथ में है, जो आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत संकेत है। 6 साल में 6 गुना बढ़ा महिला रोजगार महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां MSME क्षेत्र में 1,53,493 महिलाएं कार्यरत थीं, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 10,07,995 हो गई है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाती है कि महिलाएं न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। 6 साल में 10 लाख महिलाओं को मिला काम महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-21 में MSME सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 1,53,493 थी। लेकिन 28 फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 10,07,995 पहुंच गया। यानी सिर्फ 6 सालों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह दिखाता है कि महिलाएं न केवल खुद बिजनेस शुरू कर रही हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। इससे राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उद्यम पोर्टल के बाद तेजी से बढ़ी संख्या महिला उद्यमियों की संख्या में यह उछाल अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे सरकारी पहल भी बड़ी वजह है। उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपने बिजनेस रजिस्टर कराए। 2020-21 में जहां महिला स्वामित्व वाले MSME की संख्या सिर्फ 14,239 थी, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 हो गई। 2023-24 में यह संख्या और बढ़कर 7,44,746 तक पहुंच गई। हालांकि ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में 2,28,959 यूनिट्स पंजीकृत हैं, जो अब भी एक मजबूत संख्या मानी जा रही है। देश में भी महिलाओं का बढ़ता दबदबा अगर पूरे देश की बात करें तो महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है। MSME रजिस्ट्रेशन के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा यूनिट्स पंजीकृत हैं। वहीं महिला नेतृत्व वाले MSME में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस मामले में मजबूत स्थिति में हैं। देशभर में उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ से ज्यादा महिला उद्यमी MSME पंजीकृत हो चुके हैं, जो महिलाओं के बढ़ते योगदान को दिखाता है। उद्यम पोर्टल से मिली गति वर्ष 2020-21 में उद्यम पोर्टल शुरू होने के बाद महिला उद्यमियों की संख्या में तेजी आई। उस समय 14,239 महिला स्वामित्व वाले MSME थे। 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 और 2023-24 में 7,44,746 तक पहुंच गई। 2025-26 में यह संख्या 2,28,959 पर दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा महिलाओं का दबदबा देशभर में भी महिला उद्यमिता तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले MSME पंजीकृत हो चुके हैं। महाराष्ट्र MSME पंजीकरण में अग्रणी है, जबकि महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस सूची में मजबूत स्थिति में हैं। आर्थिक सशक्तिकरण की नई तस्वीर एमपी के ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसाय और उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। यह बदलाव नारी शक्ति के सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है। एमपी में महिला उद्यमियों की संख्या ऐसे बढ़ी     2020-21: उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद पहले वर्ष में राज्य में महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई की संख्या 14,239 थी ।     2022-23: यह संख्या बढ़कर 2,07,795 तक पहुंच गई ।     2023-24: वर्ष 2023-24 में राज्य में महिला उद्यमियों की संख्या अपने उच्चतम स्तर 7,44,746 पर पहुंच गई ।     2025-26: 28 फरवरी 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में महिला नेतृत्व वाले 2,28,959 एमएसएमई पंजीकृत हैं। देश में सबसे ज्यादा एमएसएमई महाराष्ट्र में एमएसएमई और महिला नेतृत्व में अग्रणी राज्ययदि राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें, तो एमएसएमई पंजीकरण के मामले में महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां कुल पंजीकृत इकाइयों की संख्या सबसे अधिक है । वहीं, महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई (Woman-owned MSMEs) के मामले में आंध्र प्रदेश ने बाजी मारी है, जो देश में सर्वाधिक महिला उद्यमियों वाला राज्य बना हुआ है। इन अग्रणी राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। पूरे देश की बात करें तो उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के बढ़ते योगदान को प्रमाणित करते हैं।

CM यादव बोले: MSME इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र और लाखों परिवारों का स्वावलंबन

एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र और लाखों परिवारों के स्वावलंबन का हैं आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार प्रदेश के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने उपलब्ध करा रही है सहयोग और मार्गदर्शन देश-दुनिया के सभी निवेशकों के लिए खुले हैं प्रदेश के दरवाजे देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित हो रहा है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की एमएसएमई इकाइयों को 169 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित स्टार्टअप को अनुदान और उद्यमियों को प्रदान किए भू-आवंटन पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मंत्री काश्यप ने भेंट किया लघु उद्योग निगम के 8 करोड़ रूपए के अंतरिम लाभांश का चैक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक सशक्त, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बेहतर वित्तीय प्रबंधन वाले प्रथम तीन राज्यों में से एक है। राज्य सरकार प्रदेश के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है। देश-दुनिया के सभी निवेशकों के लिए प्रदेश के दरवाजे खुले हैं। हम उद्योग मित्र नीतियों और सहयोग की भावना के साथ उनके स्वागत के लिए तत्पर हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्योग हो या कृषि हर क्षेत्र में योगदान के लिए निरंतर सक्रिय है। एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र होने के साथ लाखों परिवारों के स्वावलंबन का आधार भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समर्थ एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश की थीम पर मुख्यमंत्री निवास में 257 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को उनके खाते में 169.57 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से जारी कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप को लगभग 28 लाख से अधिक की अनुदान राशि की प्रथम किश्त भी जारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने लघु उद्योग निगम की ओर से 8 करोड़ रूपए के अंतरिम लाभांश का चैक भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल और आगर-मालवा के तीन उद्यमियों को औद्योगिक भूमि के लिए आवंटन-पत्र प्रदान किए और मुख्यमत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत हितलाभ वितरण भी किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का आयोजन महावीर जयंती के शुभ अवसर पर हो रहा है। यह भगवान महावीर के जनकल्याण और शुचिता के सिद्धांतों को साकार करने का भी प्रतीक है। प्रदेश में उद्योग-व्यापार गतिविधि और उद्यमिता प्रोत्साहित करने के लिए व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करते हुए निरंतर नवाचार जारी हैं। राज्य सरकार उद्यमियों को लिए पूंजी, भूमि और व्यवस्थाओं में सरलता कर, उनकी प्रगति की राह को आसान बना रही है। विभाग द्वारा बड़ी राशि का सिंगल क्लिक से सीधे अंतरण व्यवस्था में सुगमता और स्पष्टता का परिचायक है। पूरे देश में मार्च क्लोजिंग का वातावरण है, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों को राशि और सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह प्रदेश में नए संकल्पों के साथ नया वित्तीय वर्ष आरंभ करने का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ही भारत स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हुए प्रगति पथ पर अग्रसर है। युद्ध के दोनों पक्ष भारत का सहयोग कर रहे हैं, यह प्रधानमंत्री मोदी की कुशल नीतियों से ही संभव है। जहां एक ओर विश्व के कई देशों में पेट्रोल-डीजल, गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, वहीं हमारे देश में प्रधानमंत्री मोदी ने इनके मूल्यों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत समर्थ भी है और सक्षम भी। सभी क्षेत्रों में हो रही है प्रगति : मंत्री काश्यप सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनता के बीच सक्रिय होने के साथ प्रशासनिक दृष्टि से भी निरंतर गतिशील हैं। उनके व्यापक और स्पष्ट दृष्टिकोण के परिणाम स्वरूप प्रदेश उद्योग-व्यापार, कृषि, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने सहित सभी क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है। प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विभाग में डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं। जिसके परिणामस्वरूप भूमि आवंटन प्रक्रिया को गति मिली है। प्रदेश के 25 औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं, साथ ही 6 नए औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 7100 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश, देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित हो रहा है। कार्यक्रम में एमएसएमई इकाई के संचालक, उद्यमी और बड़ी संख्या में स्टार्ट-अप्स मौजूद रहे।  

यूपी बजट 2026-27 में संरचनात्मक निवेश से लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसरों की तैयारी

औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर बनेंगे रोजगार के बड़े इंजन यूपी बजट 2026-27 में संरचनात्मक निवेश से लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसरों की तैयारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार की श्रृंखला होगी सक्रिय, एमएसएमई और वस्त्रोद्योग में बढ़े प्रावधान से नई नौकरियों की उम्मीद एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट में बढ़ेंगे अवसर डेटा सेंटर व एआई मिशन से हाई-स्किल जॉब्स का होगा विस्तार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से युवाओं के लिए खुलेंगे नए करियर विकल्प लखनऊ  प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विकास को जिस पैमाने पर प्राथमिकता दी गई है, वह प्रदेश में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की ठोस रणनीति की ओर स्पष्ट संकेत कर रहा है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए ₹27,103 करोड़ का प्रावधान कियी गया है जो कि पिछले वर्ष के बजट से 13 प्रतिशत अधिक है। यह साफ दर्शाता है कि योगी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित औद्योगिक विस्तार को रोजगार वृद्धि का मुख्य आधार बना रही है। बजट में किए गए ये निवेश निर्माण से लेकर उत्पादन, लॉजिस्टिक्स संचालन और डिजिटल सेवाओं तक रोजगार की बहु-स्तरीय श्रृंखला तैयार करने की योजना का हिस्सा हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार का लक्ष्य प्रदेश में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर विकास और रोजगार को समानांतर गति देना है। औद्योगिक क्लस्टर: उत्पादन से लेकर रोजगार की पूरी चेन औद्योगिक क्लस्टर मॉडल की सबसे बड़ी ताकत उसकी बहु-स्तरीय रोजगार क्षमता है। एक एंकर यूनिट स्थापित होते ही उसके आसपास कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, मशीनरी रखरखाव, परिवहन, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर की दर्जनों सहायक इकाइयां विकसित होती हैं। यही कारण है कि बजट 2026-27 में एमएसएमई सेक्टर के लिए ₹3,822 करोड़ (19% वृद्धि) और वस्त्रोद्योग के लिए ₹5,041 करोड़ का प्रावधान केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि रोजगार विस्तार की संरचनात्मक रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने वस्त्रोद्योग क्षेत्र में वर्ष 2026-27 के लिए 30,000 नए रोजगार सृजन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है, जो इस सेक्टर को प्रत्यक्ष नौकरी सृजन का प्रमुख केंद्र बनाता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास में हर एक प्रत्यक्ष रोजगार के साथ कई अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़ते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक गतिशीलता आती है। इसके साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन के लिए ₹575 करोड़ तथा निवेश प्रोत्साहन नीति के क्रियान्वयन हेतु ₹1,000 करोड़ का प्रावधान बड़े और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। बड़े उद्योगों की स्थापना से दीर्घकालिक, स्थायी और कौशल आधारित रोजगार अवसरों का मजबूत आधार तैयार होगा। लॉजिस्टिक्स हब: सड़क से सप्लाई चेन तक रोजगार की नई राह इसी तरह एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर बढ़ा निवेश केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिलाने की रणनीति का हिस्सा है। जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए ₹1100 करोड़, आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक हेतु ₹1250 करोड़ और विन्ध्य एक्सप्रेसवे व अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए ₹500-500 करोड़ के प्रावधान से माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ता है। जहां सड़क पहुंचती है, वहां वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, कोल्ड स्टोरेज और वितरण केंद्र भी विकसित होते हैं। यह सेक्टर स्वभाव से श्रमप्रधान है। ड्राइवर, लोडिंग-अनलोडिंग स्टाफ, वेयरहाउस ऑपरेटर, सप्लाई चेन मैनेजर, डेटा ऑपरेटर और आईटी सपोर्ट कर्मियों तक रोजगार के विविध अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही छोटे ट्रांसपोर्टर, पैकेजिंग इकाइयां, मरम्मत कार्यशालाएं और स्थानीय सेवा प्रदाता भी इस आर्थिक गतिविधि से जुड़ते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार की एक विस्तृत श्रृंखला बनती है।  डेटा सेंटर और एआई: तकनीक से खुलेंगे नए करियर के दरवाजे बजट में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए ₹2,059 करोड़ का प्रावधान है जो पिछले वर्ष के बजट से 76% अधिक है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेजी से डिजिटल और तकनीक-आधारित दिशा दी जा रही है। ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ के लिए ₹225 करोड़ और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर हेतु ₹95.16 करोड़ की व्यवस्था केवल तकनीकी ढांचा मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल है। प्रदेश में पांच गीगावॉट क्षमता के पांच डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की योजना के लिए ₹100 करोड़ का प्रारंभिक बजट प्रस्तावित है। यह राशि आने वाले वर्षों में आईटी सेक्टर को नई ऊंचाई दे सकती है। डेटा सेंटर स्थापित होने पर केवल आईटी इंजीनियर या डेटा विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि नेटवर्क मैनेजर, क्लाउड आर्किटेक्ट, साइबर सुरक्षा विश्लेषक, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर और तकनीकी सपोर्ट स्टाफ जैसे अनेक प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा डेटा सेंटर के संचालन के लिए निरंतर बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, सुरक्षा, फायर सेफ्टी और मेंटेनेंस सेवाओं की जरूरत होती है। इनसे जुड़े तकनीकी और सहायक क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे। बहुस्तरीय रोजगार मॉडल को बढ़ावा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया निवेश केवल सड़क, भवन या औद्योगिक परिसर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रोजगार की एक पूरी श्रृंखला को जन्म देता है। शुरुआत निर्माण चरण से होती है, जहां इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, मशीन ऑपरेटर और बड़ी संख्या में श्रमिकों को तत्काल काम मिलता है। इसके बाद जब औद्योगिक इकाइयां उत्पादन शुरू करती हैं, तो फैक्ट्री कर्मियों, सुपरवाइजर, तकनीकी स्टाफ और प्रबंधन पेशेवरों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसी के साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन और वितरण सेवाएं सक्रिय होती हैं, जो सप्लाई चेन के हर स्तर पर नई नौकरियां जोड़ती हैं। इतना ही नहीं, इन गतिविधियों से स्थानीय बाजार, छोटे व्यवसाय, मरम्मत सेवाएं, पैकेजिंग और सहायक उद्योग भी लाभान्वित होते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार का दायरा और व्यापक हो जाता है।

एमएसएमई को आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट, पैदा करेगा रोजगार के लाखों अवसर

96 लाख इकाइयों को मजबूती, तीन करोड़ परिवारों की आजीविका को मिलेगा स्थायित्व क्लस्टर, आधारभूत संरचना और बाजार विस्तार से प्रतिस्पर्धी बनेगा प्रदेश का उद्योग लखनऊ, प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को बजट 2026-27 में जिस प्राथमिकता के साथ रखा गया है, वह आने वाले वर्षों की औद्योगिक तस्वीर को बदलने का संकेत देता है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो करीब तीन करोड़ परिवारों की आजीविका का आधार हैं। इस बजट में 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बीते साल की तुलना में 19 प्रतिशत की वृद्धि केवल बजटीय विस्तार ही नहीं बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। प्रदेश सरकार एमएसएमई को अनुदान आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रतिवर्ष एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पांच वर्षों में पांच लाख से अधिक नई इकाइयां खड़ी हो सकती हैं जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित होने का अनुमान है। बैंक ऋण और सरकारी प्रोत्साहन के संयोजन से निवेश का मल्टीप्लायर इफेक्ट्स (गुणक) कई गुना बढ़ सकता है। एमएसएमई क्षेत्र की सबसे बड़ी बाधा ऋण हासिल करना है। छोटे उद्यमियों के पास पर्याप्त जमानत (कोलैटरल) न होने से वे औपचारिक बैंकिंग तंत्र से दूर रह जाते हैं। बजट में ऋण गारंटी तंत्र को सुदृढ़ करने और बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे बड़ी जमानत के बिना ऋण लेने की राह आसान होगी। इसका सीधा असर यह होगा कि बड़ी संख्या में इकाइयां असंगठित क्षेत्र से निकलकर औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगी जिससे कर संग्रह, पारदर्शिता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को भी बजट में बल मिला है। सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र के लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। समूह आधारित औद्योगिक क्षेत्रों में साझा मशीनरी, परीक्षण प्रयोगशालाएं और सामान्य सुविधाएं उपलब्ध होने से उत्पादन लागत घटेगी और गुणवत्ता में सुधार होगा। इससे छोटे उद्यम बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनेंगे। ओडीओसी के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था स्थानीय व्यंजनों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीति को मजबूती देती है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यदि प्रत्येक नया उद्यम औसतन पांच से 10 लोगों को रोजगार देता है तो केवल इस योजना से ही हजारों युवाओं के लिए अवसर बन सकते हैं। यह ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि को नई गति देगा। प्रत्यक्ष प्रावधानों के अलावा बजट में आधारभूत संरचना पर निरंतर निवेश भी एमएसएमई के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन है। एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक गलियारे और बेहतर विद्युत आपूर्ति से उत्पादन लागत घटती है और समयबद्ध आपूर्ति संभव होती है। परिवहन और लॉजिस्टिक सुविधा बेहतर होने से छोटे उद्योग भी निर्यात बाजार की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। व्यापार सुगमता सुधार, एकल खिड़की प्रणाली और ऑनलाइन स्वीकृति व्यवस्था निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर रही है। आज जब 96 लाख इकाइयां तीन करोड़ परिवारों की आजीविका का आधार हैं, तब लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने का है। बजट 2026-27 इस दिशा में बहुस्तरीय हस्तक्षेप का संकेत देता है। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश का एमएसएमई क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि रोजगार सृजन का सबसे बड़ा इंजन भी साबित होगा।

एमएसएमई का विस्तार अब ग्राम पंचायतों तक, मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम

भोपाल  मध्य प्रदेश में बड़े शहरों व कस्बों के बाद अब राज्य सरकार ग्राम पंचायत स्तर तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों का विस्तार करेगी। एमएसएमई विभाग इसकी विस्तृत कार्ययोजना बना रहा है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और ग्राम स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके लिए पहले जिलों का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयन कर प्रयोग किया जाएगा। ऐसी ग्राम पंचायतें चिह्नित की जाएंगी जहां सड़क, बिजली, पानी और उद्योग के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। रियायती दरों पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को किया जा रहा चिह्नित बता दें, इंदौर के आसपास की ग्राम पंचायतों में पहले से 308 उद्योग स्थापित हैं। यहां 90.41 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश हुआ है और इससे 1954 लोग रोजगार पा रहे हैं। भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को भी चिह्नित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इनमें क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास के लिए योजनाबद्ध हस्तक्षेप आवश्यक है। जिससे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इसमें छोटे उद्यमों के लिए वित्तीय क्रेडिट को सरल बनाया जाएगा। नए उद्यमों के लिए बाजार में प्रवेश की बाधाओं का सरलीकरण किया जाएगा। एमएसएमई ऋण मूल्यांकन -कैश फ्लो आधारित जोखिम मूल्यांकन को अपनाना, वित्तीय माड्यूल को प्रशिक्षण में एकीकृत करना, सूचना विषमता को दूर करना और श्रमिक अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा।  

उद्योगों को संजीवनी, रोजगार को रफ्तार — हरियाणा तैयार ‘मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस’ बनने को

सोनीपत  केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026 में उद्योग और एम.एस.एम.ई. सैक्टर को लेकर की गई घोषणाएं हरियाणा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती हैं। खासकर 10,000 करोड़ रुपए के एम.एस.एम.ई. ग्रोथ फंड, सरकारी खरीद में एम.एस.एम.ई. की भागीदारी बढ़ाने, टैक्सटाइल सैक्टर के लिए नई स्कीमों और माइक्रो इंटरप्राइजेज को लिक्विडिटी सपोर्ट देने जैसे फैसले राज्य के छोटे, मंझोले और उभरते उद्योगों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। हरियाणा पहले से ही ऑटोमोबाइल, टैक्सटाइल, आई.टी., लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोसैसिंग जैसे क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति रखता है। अब बजट में किए गए प्रावधानों से गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक और अंबाला जैसे औद्योगिक क्लस्टर्स में निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। आम बजट में भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए 10,000 करोड़ रुपए का एम.एस.एम.ई. ग्रोथ फंड बनाने की घोषणा की गई है, जिसमें 30 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। यह फंड उन एम. एस.एम.ई. इकाइयों को टार्गेट करेगा जो विस्तार करना चाहती हैं, नई तकनीक अपनाना चाहती हैं या वैश्विक बाजार में कदम रखना चाहती हैं। हरियाणा के एम.एस.एम.ई. सैक्टर की सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से वर्किंग कैपिटल की कमी, महंगे कर्ज और बैंक गारंटी की जटिल शर्तें रही हैं। नया ग्रोथ फंड इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक इससे माइक्रो और स्मॉल यूनिट्स मीडियम लैवल तक पहुंच सकेंगी जो रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाएंगी। इससे हरियाणा देश का अगला मैन्यूफैक्चरिंग पावरहाऊस बनेगा। सरकारी खरीद में एम.एस.एन.ई. की हिस्सेदारी बढ़ेगी बजट में एम.एस.एम.ई. से सरकारी खरीद बढ़ाने का साफ संकेत दिया गया है। इसका सीधा फायदा हरियाणा की उन हजारों इकाइयों को मिलेगा जो पहले बड़े कॉर्पोरेट्स से मुकाबले में पिछड़ जाती थीं। हरियाणा में ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, टैक्सटाइल, पैकेजिंग और इलैक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी एम.एस.एम.ई. इकाइयां सरकारी टैंडर से जुड़कर स्थिर ऑर्डर बुक हासिल कर सकेंगी। इससे नकदी प्रवाह सुधरेगा और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। टैक्सटाइल सैक्टर को नई उड़ान, पानीपत को मिलेगा सीधा फायदा बजट में टैक्सटाइल सैक्टर के लिए 3 बड़ी स्कीमों का ऐलान किया गया है जिनमें नैशनल फाइबर स्कीम, मैन मेड फाइबर स्कीम, एडवांस्ड फाइबर स्कीम शामिल हैं। इसके साथ ही नैशनल हैंडलूम पॉलिसी के जरिए कारीगरों और बुनकरों को प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता देने की बात कही गई है। हरियाणा का पानीपत टैक्सटाइल हब, जो हैंडलूम, होम फर्निशिंग और एक्सपोर्ट के लिए जाना जाता है, इन योजनाओं से सबसे अधिक लाभान्वित होगा। नई फाइबर टैक्नोलॉजी और डिजाइन सपोर्ट से यहां के उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति बना सकेंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर रिएक गारंटी फंडः निजी निवेश को मिलेगा भरोसा बजट में प्राइवेट डिवैल्पर्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गांरटी फंड की घोषणा की गई है जिसमें सरकार पार्शियल गारंटी देगी। यह कमद खासतौर पर हरियाणा जैसे औद्योगिक राज्यों के लिए अहम है, जहां निजी निवेशक अक्सर जोखिम को लेकर सतर्क रहते हैं। इस फैसले से औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और टाऊनशिप प्रोजैक्ट्स को गति मिलेगी। आई.एम.टी. खरखौदा, कुंडली-मानेसर-पलवल बैल्ट और फरीदाबाद-गुड़गांव क्षेत्र में नए प्रोजैक्ट्स आने की संभावना है। रियल एस्टेट में रिप्साइक्लिंग और सस्टेनेबल डिवैल्पमैंट रियल एस्टेट सैक्टर के लिए रिसाइक्लिंग से जुड़ी योजना को उद्योग जगत ने सकारात्मक कदम बताया है। इससे कंस्ट्रक्शन वेस्ट मैनेजमैंट, ग्रीन बिल्डिंग और पर्यावरण-अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलेगा। हरियाणा के तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों गडगांव सोनीपत और फरीदाबाद में यह नीति सस्टेनेबल अर्बन डिवैल्पमैंट की दिशा में अहम साबित हो सकती है। वहीं बजट में सैल्फ रिलायंट इंडिया फंड के जरिए माइक्रो इंटरप्राइजेज को वित्तीय मदद देने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही ट्रांजैक्शन सैटलमेंट प्रोग्राम, क्रैडिट गारंटी सपोर्ट मैकेनिज्म, जी.ई.एम. को ट्रेड से जोड़ना व एसेट बेस्ड सिक्योरिटी जैसे कदम लिक्विडिटी संकट से जूझ रहे छोटे कारोबारियों के लिए राहत लेकर आएंगे। हरियाणा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में चल रही हजारों माइक्रो यूनिट्स जैसे फूड प्रोसैसिंग, प्लास्टिक, फर्नीचर और सर्विस सैक्टर को इससे मजबूती मिलेगी। प्रोफैशनल सपोर्ट और स्किलिंगः टियर-2 और 3 शहरों पर फोकस बजट में शॉर्ट टर्म मॉड्यूलर कोर्स डिजाइन करने और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक ट्रेनिंग पहुंचाने का ऐलान किया गया है। इसका सीधा लाभ हरियाणा के युवाओं को मिलेगा। इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक स्किल मिलने से लोकल टैलेंट लोकल इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगा, जिससे माइग्रेशन भी घटेगा।