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योगी सरकार ने बढ़ाया धान खरीद का लक्ष्य, 4,500 केंद्रों पर होगी खरीद; किसानों को मिलेगा बढ़ा MSP

इस बार देश में धान खरीद में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगी योगी सरकार   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में धान क्रय नीति को मंजूरी   पिछले वर्ष देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था उत्तर प्रदेश ने, इस बार 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य   आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से 4500 केंद्रों पर होगी खरीद, किसानों को मिलेगा बढ़ा समर्थन मूल्य   सामान्य धान 2441 और ग्रेड-ए धान 2461 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा   फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट, यथासंभव 48 घंटे में होगा भुगतान   लखनऊ धान की सरकारी खरीद में पिछले वर्ष देश में पहला स्थान हासिल करने वाली योगी सरकार इस बार देश में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान क्रय नीति को मंजूरी दी गई। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इस बार सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से प्रदेश में 4500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे। किसानों को उनकी उपज का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। खरीद के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे बैंक खातों में कराया जाएगा।   कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश ने 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। इस बार उससे तीन लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए क्रय केंद्रों की व्यवस्था के साथ भुगतान और धान की ढुलाई की निगरानी के भी प्रावधान किए हैं।   पश्चिमी यूपी में 15 अक्टूबर, पूर्वी यूपी में एक नवंबर से खरीद धान खरीद के लिए प्रदेश में दो अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक खरीद होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक धान खरीदा जाएगा। जिलों में धान की पैदावार और आवक के आधार पर क्रय केंद्रों का स्थान तय किया जाएगा।   धान के समर्थन मूल्य में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी भारत सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से इसी दर पर धान खरीदा जाएगा।   आठ एजेंसियां करेंगी खरीद, डीएम तय करेंगे केंद्रों का स्थान खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद एवं उससे संबद्ध एफपीओ-एफपीसी, एनसीसीएफ, नैफेड तथा भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से धान की खरीद होगी। कुल 4500 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। संबंधित जिलाधिकारी जिले में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्रय संस्थाओं के बीच केंद्रों का स्थल आवंटन करेंगे।   फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट धान की सरकारी खरीद के लिए इस बार फार्मर आईडी वाले किसानों को अलग से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराना होगा। भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत प्रदेश में बनाई गई किसान पहचान के आधार पर ही उनकी उपज खरीदी जाएगी। इससे किसानों को विभागीय पोर्टल पर दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी।   48 घंटे में भुगतान, देरी पर तय होगी जिम्मेदारी किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर धनराशि किसानों के खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है। भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।   जीपीएस से धान की ढुलाई, क्यूआर कोड से निगरानी धान खरीद में पारदर्शिता के लिए प्रदेश के सभी जिलों में क्रय केंद्रों से संबंधित चावल मिलों तक धान भेजने के लिए जीपीएस युक्त वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा पायलट परियोजना के तहत चिह्नित जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड के माध्यम से खाद्यान्न की आवाजाही और बिलिंग की निगरानी की जाएगी।   धान खरीद के लिए बोरों की भी व्यवस्था धान खरीद के दौरान बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी तैयारी की गई है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 80 हजार बोरों की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। कुल 12.25 लाख बोरे उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार ने खरीद के दौरान पैकिंग सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया है।

UP में नौसेना शौर्य संग्रहालय बनेगा खास टूरिस्ट स्पॉट, डिजिटल गैलरी से लेकर बोटिंग तक की मिलेगी सुविधा

लखनऊ स्थित नौसेना शौर्य संग्रहालय का होगा विस्तार, 6.8 एकड़ में होगा वाटर बॉडी का विकास योगी कैबिनेट ने तीसरे चरण की परियोजना को दी मंजूरी, संग्रहालय के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा एलडीए नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल गैलरी होंगे आकर्षण छात्रों को रियायती दर पर मिलेगा प्रवेश, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य युवाओं को राष्ट्रीय विरासत से जोड़ता है पर्यटन- जयवीर सिंह प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करेःं जयवीर सिंह लखनऊ,  लखनऊ में पर्यटन को नया आयाम देने के लिए विकसित किए जा रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में संग्रहालय के तीसरे चरण के तहत वाटर बॉडी विकसित करने के लिए करीब 6.8 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही संग्रहालय परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपने का भी निर्णय लिया गया। वाटर बॉडी विकसित करने के लिए एलडीए संबंधित 6.8 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को एक लाख रुपये की टोकन मनी पर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो के साथ जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से जुड़ी प्रदर्शनियां विकसित की जाएंगी। इससे नौसेना शौर्य संग्रहालय को एक ऐसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां लोग देश के समुद्री इतिहास और नौसेना की तकनीक को करीब से जानने के साथ मनोरंजन का भी आनंद ले सकेंगे। इतिहास, विज्ञान और तकनीक से रूबरू होंगे पर्यटक उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग भारतीय नौसेना के सहयोग से नौसेना शौर्य संग्रहालय विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को देश की समुद्री विरासत और नौसेना की सामरिक ताकत से रूबरू कराने के साथ अनुभवात्मक व ज्ञान आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है। संग्रहालय में नौसेना के उपकरणों, समुद्री इतिहास और देश की रक्षा क्षमताओं की झलक देखने को मिलेगी। डिजिटल तकनीक, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और सिमुलेशन के जरिये पर्यटक नौसेना की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे। 'संग्रहालय विस्तार से बढ़ेंगे पर्यटन और रोजगार' पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करने के साथ युवाओं को देश की राष्ट्रीय विरासत से जोड़ें। अनुभवात्मक और ज्ञान आधारित पर्यटन के जरिए विद्यार्थियों के लिए इतिहास, विज्ञान और तकनीक को अधिक रोचक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नौसेना शौर्य संग्रहालय के विस्तार से परिवारों को लखनऊ घूमने का एक नया विकल्प मिलेगा। साथ ही पर्यटन से जुड़े कारोबार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।' मई में हुआ था पहले चरण का उद्घाटन परियोजना के पहले चरण के तहत विकसित नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन 30 मई 2026 को केंद्रीय रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया था। वाटिका में भारतीय नौसेना की ओर से उपलब्ध कराए गए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के हिस्से, नौसैनिक तोपें, लंगर और प्रोपेलर प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से पर्यटक समुद्र से दूर स्थित लखनऊ में भी भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली और उसकी सामरिक क्षमताओं को करीब से समझ सकते हैं। आधुनिक तकनीक से रूबरू कराएगा एक्सपीरियंस सेंटर परियोजना के तहत प्रस्तावित क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर में भारत की समुद्री विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यहां डिजिटल गैलरी, इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां और सिमुलेशन विकसित किए जाएंगे। इनके जरिए प्राचीन समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक नौसैनिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा तकनीक तक की यात्रा को दर्शाया जाएगा। केंद्र में भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और बचाव अभियानों में भूमिका की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त यहां एक्वेरियम विकसित करने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों और शोध में रुचि रखने वाले युवाओं को समुद्री जीवन तथा उससे जुड़ी तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा। वाटर बॉडी में बोटिंग और लाइट एंड साउंड शो परियोजना के तीसरे चरण में विकसित होने वाली वाटर बॉडी संग्रहालय परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। यहां नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियों के साथ बोटिंग की सुविधा विकसित की जाएगी। लाइट एंड साउंड शो तथा जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से संबंधित प्रदर्शनियां भी प्रस्तावित हैं। इससे संग्रहालय को शैक्षणिक भ्रमण के साथ परिवारों के मनोरंजन के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकेगा। 69.10 करोड़ की परियोजना, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य संग्रहालय भवन, नौसेना शौर्य वाटिका और क्यूरेशन से जुड़े कार्यों के लिए अब तक करीब 69.10 करोड़ रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस तीन चरणों वाली परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था भी होगी। विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों के लिए रियायती दरों पर प्रवेश की व्यवस्था होगी। इससे स्कूलों के शैक्षणिक भ्रमण को प्रोत्साहन मिलने और विद्यार्थियों को इतिहास, विज्ञान, तकनीक तथा राष्ट्रीय सेवा से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलने की उम्मीद है। पूरे परिसर का संचालन करेगा एलडीए नौसेना शौर्य वाटिका के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी एलडीए संभालेगा। क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर और वाटर बॉडी का निर्माण पूरा होने के बाद उनका संचालन भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाएगा। इससे पूरे परिसर में रखरखाव, सुरक्षा, टिकट और पर्यटक सुविधाओं का प्रबंधन एक ही एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा।

जापान-रूस समेत 7 देशों से निवेश लाने की तैयारी, MP में फार्मा सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार

भोपाल  एमपी ने ग्लोबल निवेश की अगली बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। सीएम मोहन यादव ने मुंबई में सात देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन्हें GIS-2027 में पार्टनर कंट्री बनने का न्योता दिया। इसी दौरान फार्मा उद्योग के दिग्गजों के साथ बैठक में पिछले 18 महीनों के 19,477 करोड़ के प्रस्तावित निवेश और 18,646 संभावित रोजगार का खाका सामने रखा गया। GIS-2027 में सात देशों की भागीदारी पर जोर जापान, मेक्सिको, रूस, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों से चर्चा में सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश की वैश्विक साझेदारी अब ठोस परियोजनाओं पर आधारित होगी। जनवरी 2027 में भोपाल में होने वाली GIS के जरिए प्रदेश निवेश और व्यापारिक रिश्तों को और विस्तार देना चाहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश प्रस्तावों की असली सफलता उनके जमीन पर उतरने से तय होगी। फार्मा में 19,477 करोड़ के प्रस्ताव मिले फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 18 महीनों में 54 निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें करीब 19,477 करोड़ का निवेश और 18,646 रोजगार की संभावना है। इनमें 34 इकाइयों के करीब 12,306 करोड़ के प्रस्तावों के लिए जमीन आवंटित होने और 14 इकाइयों में उत्पादन शुरू होने की जानकारी दी गई। मेडिकल डिवाइस पार्क में 17 इकाइयां शुरू उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क में 57 इकाइयों को आवंटन दिया गया है, जबकि 17 इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। यहां करीब 2,374.86 करोड़ के निवेश और 9,625 रोजगार की संभावना बताई गई। रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां फार्मा, बायोटेक और केमिकल सेक्टर को प्राथमिकता मिलेगी। पीथमपुर से उज्जैन तक विदेशी निवेश मुख्यमंत्री ने ब्रिटेन की हेलियॉन के पीथमपुर में करीब 2,000 करोड़, जापान के टोप्पन समूह के करीब 950 करोड़ और दक्षिण कोरिया की ईसीडीएस के उज्जैन में करीब 780 करोड़ के प्रस्तावों का उल्लेख किया। प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से ज्यादा API एवं बल्क ड्रग निर्माता होने की जानकारी भी दी गई। R&D और एक्सपोर्ट पर भी फोकस उद्योग संवर्धन नीति-2025 के तहत फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस को फोकस सेक्टर बनाया गया है। पात्र निवेश पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन, R&D खर्च पर 50 प्रतिशत सहायता और टेस्टिंग व क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए वित्तीय सहयोग का प्रावधान बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल दवा बनाने तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश में API, वैक्सीन, इंजेक्टेबल, बायोटेक, मेडिकल डिवाइस, रिसर्च, टेस्टिंग और निर्यात की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की तैयारी है। 8.5 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश का दावा मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025 की GIS के बाद मध्यप्रदेश में ₹8.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि GIS-2027 में भी सरकार का जोर घोषणाओं से ज्यादा उनके क्रियान्वयन पर रहेगा। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को 2028 के उज्जैन सिंहस्थ में आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है और उसका स्वभाव दुनिया को जोड़ना है।

UP में भदोही के नाम को लेकर बड़ा बदलाव, योगी कैबिनेट ने प्रस्ताव पर लगाई मुहर

भदोही को फिर मिलेगी संत रविदास के नाम से पहचान, योगी कैबिनेट की मुहर   सपा सरकार ने हटाया था संत रविदास का नाम, अब संत रविदासनगर भदोही होगा नाम   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर   संत रविदास के सम्मान के साथ भार राज की ऐतिहासिक विरासत भी रहेगी बरकरार   दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने का सियासी संदेश   लखनऊ भदोही जिले को एक बार फिर संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में जिले का नाम 'संत रविदासनगर भदोही' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। समाजवादी पार्टी की सरकार में जिले के नाम से संत रविदास का नाम हटाकर केवल भदोही कर दिया गया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम दोबारा जोड़ने के साथ भदोही की ऐतिहासिक पहचान भी बरकरार रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। इसे दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।   कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जिले का नाम संत रविदासनगर भदोही होगा। सरकार ने भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सुधार में संत रविदास के योगदान को इस निर्णय का आधार बनाया है। नए नाम में संत रविदास के सम्मान के साथ भदोही की पहचान भी शामिल रहेगी।   सपा सरकार में हटाया गया था संत रविदास का नाम भदोही के नामकरण का राजनीतिक इतिहास रहा है। वर्ष 1997 में मायावती सरकार ने जिले का नाम संत रविदास नगर किया था। वर्ष 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने जिले का नाम बदलकर केवल भदोही कर दिया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम फिर शामिल करने का निर्णय लिया है।   दलित और राजभर समाज को संदेश संत रविदास दलित समाज की आस्था और सामाजिक चेतना के प्रमुख प्रतीक हैं। वहीं भदोही की ऐतिहासिक पहचान भार राज से जुड़ी मानी जाती है। राजभर समाज इस विरासत को अपनी परंपरा से जोड़कर देखता है। ऐसे में जिले के नए नाम में संत रविदास और भदोही, दोनों को स्थान देने का राजनीतिक महत्व है। इसे दोनों समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।   राजस्व संहिता के तहत होगा नाम परिवर्तन प्रदेश सरकार के अनुसार, नाम परिवर्तन का निर्णय उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत लिया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर किसी राजस्व क्षेत्र का नामकरण कर सकती है। प्रस्ताव को केंद्र सरकार के 11 सितंबर 1953 के संबंधित परिपत्र के अनुरूप भी बताया गया है।

यूपी में दिवाली पर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की बल्ले-बल्ले, योगी सरकार देगी फ्री सिलेंडर

दीपावली से पहले उज्ज्वला लाभार्थियों को योगी सरकार की सौगात, मिलेगा मुफ्त सिलेंडर   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर   दीपावली और होली पर एक-एक मुफ्त सिलेंडर रिफिल देने की योजना जारी रहेगी   अक्टूबर से दिसंबर तक पहला चरण, जनवरी से मार्च के बीच दूसरा चरण   योजना पर 2142.78 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार, आधार प्रमाणीकरण जरूरी    लखनऊ दीपावली से पहले योगी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में दीपावली और होली पर एक-एक मुफ्त एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने की योजना को जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर रिफिल मिलेंगे। इस पर राज्य सरकार 2142.78 करोड़ रुपये खर्च करेगी।   कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि गरीब परिवारों को रसोई गैस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मंत्रिपरिषद ने योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहला मुफ्त रिफिल अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच दीपावली के अवसर पर और दूसरा जनवरी से मार्च 2027 के बीच होली के अवसर पर दिया जाएगा।   आधार से जुड़ा बैंक खाता होना जरूरी योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े होंगे और आधार प्रमाणीकरण पूरा होगा। सरकार ने पात्रता के लिए यह शर्त निर्धारित की है।   पिछले वर्षों की व्यवस्था रहेगी जारी योगी सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में भी दीपावली और होली पर उज्ज्वला लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है। अब चालू वित्तीय वर्ष में भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार, इससे गरीब परिवारों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ेगा और महिलाओं तथा बच्चों को परंपरागत ईंधन के धुएं से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बदल रहा भारत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही बड़ी बात

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत प्रवेश कर चुका है नए दौर में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम में बच्चों ने रंगोली से किया राष्ट्र के प्रति अपने भावों का प्रकटीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टी.टी. नगर स्टेडियम में किया कार्यक्रम को संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण भारत, नए दौर में प्रवेश कर चुका है। मध्यप्रदेश भी तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मोत्सव को पूरे एक माह तक सेवा संकल्प अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम में विशाल और आकर्षक रंगोलियां तैयार की गईं। रंगोली के माध्यम से बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और राष्ट्र के प्रति अपने भावों का प्रकटीकरण किया है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'सेवा के रंग-राष्ट्र के संग' कार्यक्रम के अंतर्गत मानव रंगोली निर्माण कार्यक्रम को टीटी नगर स्टेडियम में  संबोधित कर रहे थे। भारत के नक्शे के रूप में बनाई मानव रंगोली मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को टी.टी. नगर स्टेडिटम में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर, प्रधानमंत्री मोदी और विकसित भारत के संकल्प पर आधारित विशाल रंगोलियों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत के नक्शे के रूप में बनी मानव रंगोली में शामिल बच्चों के बीच जाकर बैठे और बच्चों से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  इस अवसर पर रंगीन गुब्बारे आसमान में छोड़े। पूरा स्टेडियम भारत माता की जय के नारों से गुंजायमान हो रहा था। स्टेडियम में उपस्थित युवाओं ने देश को @2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए "वी विल डू इट" और  भारत माता की जय के नारों का उद्घोष किया। इस अवसर पर युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था, विद्यार्थी मुख्यमंत्री डॉ यादव से हाथ मिलाने,उनका अभिवादन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने  के लिए आतुर थे। एशियन गेम्स : 2026 में हमारे खिलाड़ियों ने उत्कृष्टता सिद्ध की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने जापान में संपन्न हुए एशियन गेम्स-2026 की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की। मध्यप्रदेश को इस प्रतियोगिता में कुल 11 पदक मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी खिलाड़ियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। रंगोली के माध्यम से दिया 'विकसित भारत-सशक्त भारत' का संदेश प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित 'सेवा के रंग-राष्ट्र के संग' विशाल रंगोली कार्यक्रम में बच्चों ने सुंदर रंगोली बनाई हैं। इनके माध्यम से बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत-सशक्त भारत का संदेश दिया है। हमारे प्रतिभाशाली युवा ही कल के भारत का नेतृत्व करेंगे। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, स्थानीय सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, राहुल कोठारी और रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं खिलाड़ी और विद्यार्थी उपस्थित थे।                                             

‘We Will Do It’ का संदेश, 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक संकल्प और विश्वास पर कैलाश सारंग का जोर

We Will Do It- 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक संकल्प विश्वास कैलाश सारंग भोपाल भारत की विकास यात्रा आज उस मुकाम पर पहुंच चुकी है, जहां दुनिया भारत को केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं बल्कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमता रखने वाली एक सशक्त शक्ति के रूप में देख रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का वी विल डू इट का मंत्र देशवासियों के भीतर नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और बड़े संकल्प का संचार करता है। 7 अक्टूबर को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के सामने भविष्य के भारत की एक ऐसी तस्वीर रखी जिसमें लक्ष्य छोटे नहीं बल्कि विराट हैं। सपने सीमित नहीं बल्कि वैश्विक हैं और उन्हें पूरा करने का विश्वास 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक संकल्प में है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अब असंभव समझे जाने वाले लक्ष्यों से पीछे हटने वाला नहीं है। वी विल डू इट प्रधानमंत्री जी का यह मंत्र भारत की उस बदलती मानसिकता का प्रतीक है, जिसमें चुनौतियों को बाधा नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखने का आत्मविश्वास पैदा हुआ है। हम कर सकते हैं से आगे बढ़कर हम करके दिखाएंगे का भाव ही इस मंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। प्रधानमंत्री जी ने जिन लक्ष्यों को सामने रखा उनमें 2047 तक विकसित भारत, विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का स्थान, आत्मनिर्भर भारत, भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूना शामिल हैं। हर लक्ष्य के साथ उनका उद्घोष वी विल डू इट देश की सामूहिक संकल्प की इच्छाशक्ति को अभिव्यक्त करता है। 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। यह केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बल्कि वर्तमान पीढ़ी के सामने इतिहास रचने का अवसर है। आज की युवा पीढ़ी के सामने यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसा भारत बनाए जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर हो, सामाजिक रूप से सशक्त हो और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता हो। प्रधानमंत्री जी ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज सवाल केवल यह नहीं है कि 2047 में भारत को कहां पहुंचना है बल्कि यह है कि उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज से क्या करना है? यही विचार वी विल डू इट को भविष्य के संकल्प से वर्तमान के कर्म से जोड़ता है। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं बल्कि दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाते हुए अपनी क्षमताओं को मजबूत करना है। आज भारत मोबाइल निर्माण से लेकर रक्षा उत्पादन, डिजिटल तकनीक से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर स्टार्टअप इकोसिस्टम तक अनेक क्षेत्रों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। प्रधानमंत्री जी के वी विल डू इट का संदेश इसी आत्मविश्वास को और मजबूत करता है कि भारत केवल दूसरों से सीखने वाला देश नहीं बल्कि दुनिया को सिखाने वाला देश बने। यह आत्मविश्वास उस भारत का है जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ वैश्विक बाजार के लिए भी उत्पादन करने की क्षमता रखता है। भारत की विशाल युवा आबादी, प्रतिभा, तकनीकि क्षमता और बड़ा घरेलू बाजार उसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वाभाविक रूप से सक्षम बनाते हैं। मेक इन इंडिया से शुरू हुई सोच अब मेक फॉर द वर्ल्ड की दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत में निर्मित उत्पाद जब दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बनाते हैं तो यह केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं होती बल्कि भारतीय प्रतिभा और सामर्थ्य पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का प्रमाण भी होती है। प्रधानमंत्री जी ने इसी संदर्भ में बड़े लक्ष्यों की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि लक्ष्य बड़ा होगा तो प्रयास भी बड़ा होगा और परिणाम भी असाधारण प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री जी के वी विल डू इट मंत्र में भारत की खेल शक्ति के विस्तार का संकल्प भी दिखाई देता है। ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की आकांक्षा नहीं है बल्कि भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आज देश में खेल अधोसंरचना का विस्तार हो रहा है। छोटे शहरों और गांवों से प्रतिभाएं सामने आ रही हैं और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गांव से ग्लोबल तक पहुंचती भारतीय खेल प्रतिभा इस विश्वास को मजबूत करती है कि यदि अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो भारत के युवा किसी भी वैश्विक मंच पर तिरंगे की शान बढ़ा सकते हैं। जिस देश ने कभी अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत सीमित संसाधनों के साथ की थी, वही भारत आज चंद्रमा पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी का अंतरिक्ष में भारत की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का संकल्प यह दर्शाता है कि भारत की आकांक्षाएं अब धरती की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। प्रधानमंत्री जी के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उन्होंने इन लक्ष्यों की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी है। उन्होंने देश की 140 करोड़ आबादी को भारत की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। भारत की हर समस्या के समाधान में करोड़ों भारतीयों की क्षमता जुड़ी है। किसान, युवा, महिला, वैज्ञानिक, उद्यमी, श्रमिक, खिलाड़ी, शिक्षक, स्टार्टअप संस्थापक और देश का प्रत्येक नागरिक विकसित भारत की यात्रा का भागीदार है। यही कारण है कि वी विल डू इट में वी सबसे महत्वपूर्ण शब्द है। यह मैं करूंगा का नहीं बल्कि हम करेंगे का सामूहिक मंत्र है। भारत के पास युवा शक्ति है, विशाल बाजार है, तकनीकी क्षमता है, लोकतांत्रिक मजबूती है और वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव है। इसलिए आज भारत के सामने छोटे सपने देखने का समय नहीं है बल्कि बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी शक्ति से जुट जाने का समय है। वी विल डू इट की वास्तविक शक्ति केवल इसे बोलने में नहीं बल्कि इसे अपने जीवन और कर्म में उतारने में है। 2047 का विकसित भारत किसी एक सरकार, … Read more

मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवाओं से मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय संवाद

युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही होगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवाओं से मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय संवाद मुख्यमंत्री ने साझा किए अपने संघर्ष, जनसेवा और सार्वजनिक जीवन के अनुभव, युवाओं को दिया निष्ठा और संवेदनशीलता से कार्य करने का मंत्र आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण और जिलों में मैदानी अनुभव से शासन की कार्यप्रणाली समझेंगे युवा फेलो शिक्षा, कौशल, आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों से युवाओं को सशक्त बना रही राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर सृजित करना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री साय जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं, जनकल्याण को बनाएं अपने कार्य का उद्देश्य : मुख्यमंत्री साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री साय ने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों से लेकर जनसेवा और सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव उनके साथ साझा किए। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे इस अवसर का उपयोग केवल शासन की कार्यप्रणाली को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और नवीन विचारों के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की शक्ति है। जब यही शक्ति जनकल्याण और समाज की बेहतरी से जुड़ती है तो बड़े परिवर्तन का आधार बनती है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर परिश्रम और प्रत्येक दायित्व का निष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सफलता के साथ आत्मसंतुष्टि भी प्रदान करता है। संवाद के दौरान युवा प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री साय से फेलोशिप को लेकर उनकी अपेक्षाओं, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक, प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका और उनके व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन की यात्रा से जुड़े अनेक प्रश्न किए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रश्नों का सहजता और आत्मीयता से जवाब दिया। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति करते हुए विश्व में अपनी सशक्त भूमिका स्थापित कर रहा है। इस यात्रा को और गति देने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को निरंतर निखारें, नए विचारों के साथ आगे आएं और शासन-प्रशासन के साथ कार्य करते हुए जनहित से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए युवाओं के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप सीखने, अनुभव प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को प्रदेश के विकास में उपयोग करने का महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिलों में कार्य के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझना सबसे महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर ऐसे सुझाव दिए जाएं, जिनसे योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। शिक्षा ने तय की लंबी यात्रा, आज प्रदेश में उपलब्ध हैं प्रतिष्ठित संस्थान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है। युवा जहां भी अध्ययन करें, वहां से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग अपने समाज और प्रदेश की उन्नति में करें। अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं बहुत सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव के विद्यालय में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और बच्चों को बैठने के लिए अपने घर से चटाई अथवा जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी राज्य सरकार सहायता उपलब्ध करा रही है। शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल भी जरूरी मुख्यमंत्री साय ने युवाओं के लिए शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल को आवश्यक बताते हुए कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। जिलों में लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उनकी क्षमता और कौशल के अनुरूप प्रदेश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध हों तथा वे रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार देने वाले उद्यमी भी बनें। निवेश को रोजगार में बदलना सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें … Read more

योगी सरकार की सौगात, यूपी के 18 शहरों में शुरू होगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसों की सेवा

योगी कैबिनेट का फैसला: 18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, 12 साल की होगी अनुबंध अवधि 12 मीटर की बस पर 40 लाख और 9 मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान आगरा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी समेत 18 शहरों को मिलेगा लाभ लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें, वाराणसी में 250 और गोरखपुर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें यूपी में निर्मित बसों की खरीद को मिलेगी वरीयता, रोजगार के नए अवसरों की खुली राह लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में बसें संचालित की जाएंगी। इनमें 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है। लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के 18 शहरों में जल्द ही 1,725 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें आगरा में 100, मथुरा-वृंदावन में 50, अलीगढ़ में 25, फिरोजाबाद में 25, गाजियाबाद में 100, मेरठ में 100, शाहजहांपुर में 25, बरेली में 25, मुरादाबाद में 25, सहारनपुर में 25, नोएडा (जेवर सहित) में 100, वाराणसी में 250, अयोध्या में 50, लखनऊ में 300, गोरखपुर में 150, कानपुर में 300, प्रयागराज में 50 और झांसी में 25 बसें चलाई जाएंगी। निजी ऑपरेटर करेंगे बसों का संचालन जीसीसी मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए आवश्यक चार्जर की व्यवस्था, बस चालक एवं तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर ऑपरेटरों को संचालन एवं रखरखाव शुल्क (ओएंडएम फी) का भुगतान किया जाएगा। वहीं, टैरिफ/प्रयोक्ता शुल्क निर्धारण सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों की खरीद पर मिलेगा अनुदान परियोजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस के लिए 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। निजी निवेश से सेवाओं में सुधार की उम्मीद सरकार के अनुसार, निजी निवेश के माध्यम से बस संचालन में सरकारी व्यय का बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। निजी ऑपरेटर दक्षता, समयबद्धता एवं उपभोक्ता संतुष्टि पर विशेष ध्यान देंगे। निजी ऑपरेटरों को प्रतिस्पर्धा के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नवीनतम तकनीक एवं सेवा सुधार लागू होंगे। निजी ऑपरेटर निविदा प्रक्रिया से चयनित होकर अनुबंधित किए जाएंगे और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ प्राप्त होगा। प्रदेश में निर्मित बसों को मिलेगी वरीयता योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों के खरीद के संबंध में परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित नीति के क्रम में एल-1 के रेट पर उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों के क्रय को वरीयता प्रदान किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्रदेश में बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

मध्यप्रदेश में रोजगार की बड़ी सौगात, टेक्सटाइल उद्योग में ₹7,500 करोड़ का निवेश; हजारों नौकरियां मिलेंगी

भोपाल /मुंबई  मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुंबई स्थित होटल 'द सेंट रेजिस' में आयोजित 'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से देश की अग्रणी टेक्सटाइल कंपनी 'भिलोसा इंडस्ट्रीज' के प्रबंध निदेशक श्री संदीप जैन ने उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक के दौरान भिलोसा इंडस्ट्रीज ने पीएम मित्र पार्क (धार) को केंद्र में रखते हुए राज्य में चरणबद्ध रूप से कुल ₹7,500 करोड़ के बड़े निवेश और करीब 3,750 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। पीएम मित्र पार्क, धार में स्थापित होगी अत्याधुनिक इकाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ चर्चा में श्री संदीप जैन ने बताया कि कंपनी पीएम मित्र पार्क, धार में टेक्सटाइल निर्माण के लिए 200 एकड़ और सहायक इकाइयों के लिए अतिरिक्त 100 एकड़ (कुल 300 एकड़) भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया में है, जिसका चयन अंतिम चरण में है। कंपनी प्रारंभिक रूप से ₹2,500 करोड़ के पूंजीगत निवेश के साथ कार्य प्रारंभ कर समग्र रूप से ₹7,500 करोड़ का निवेश करेगी। इस परियोजना के तहत वर्ष 2028 से उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। धार-इंदौर बेल्ट में बनेगा संपूर्ण पॉलिएस्टर इकोसिस्टम इस परियोजना के माध्यम से धार-इंदौर क्षेत्र में पॉलिएस्टर यार्न, फाइबर, निटेड फैब्रिक तथा मैन-मेड फाइबर आधारित नॉन-गारमेंट फैब्रिक का एक एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा। इसके अंतर्गत पॉलिएस्टर आधारित मुख्य उद्योगों के साथ-साथ कई सूक्ष्म एवं लघु सहायक इकाइयों को भी गति मिलेगी। वैश्विक स्तर पर स्थापित है भिलोसा इंडस्ट्रीज की साख उल्लेखनीय है कि भिलोसा इंडस्ट्रीज 13,232 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर के साथ भारतीय पॉलिएस्टर बाजार में लगभग 25% हिस्सेदारी रखने वाली शीर्ष निर्माता कंपनी है। कंपनी के उत्पाद घरेलू बाजार के साथ-साथ दक्षिण अमेरिका, तुर्की, नेपाल सहित कई वैश्विक बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। मध्यप्रदेश में इस संयंत्र की स्थापना से राज्य के निर्यात राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उद्योगों को हर संभव प्रोत्साहन देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार स्थित 'पीएम मित्र पार्क' विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से परिपूर्ण है, जो टेक्सटाइल उद्योग के लिए देश के सबसे मुफीद केंद्रों में से एक बनकर उभर रहा है। उन्होंने उद्योग समूह को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पॉलिएस्टर आधारित उद्योगों और उनके सहयोगी उपक्रमों के लिए अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं और केंद्रित प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।