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छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के कामकाज से प्रभावित हुईं निधि छिब्बर, कार्यों की तारीफ की

नीति आयोग की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के कार्यों की सराहना की राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का सशक्त और स्थायी तंत्र विकसित करने में हरसंभव सहयोग का दिया आश्वासन राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, स्टेट सपोर्ट मिशन के कार्यों की हुई समीक्षा अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए डेटा आधारित नीति निर्माण, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामोन्मुखी योजनाओं पर विशेष जोर रायपुर, नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने राज्य में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके वास्तविक परिणामों के आकलन के लिए एक सशक्त एवं स्थायी निगरानी तथा मूल्यांकन तंत्र विकसित करने पर जोर देते हुए इस दिशा में DMEO, नीति आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ में आज स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने की। इस अवसर पर सचिव, योजना श्री भुवनेश यादव सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री गणेश शंकर मिश्रा बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य नीति आयोग एक परामर्शदात्री एवं ज्ञान आधारित संस्था (थिंक टैंक) के रूप में प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा देने के लिए कार्य कर रहा है। आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और विभागीय समन्वय के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तथा उनके प्रभाव और परिणामों का आकलन ठोस आँकड़ों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयोग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए डेटा आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित कर रहा है। योजनाओं के मूल्यांकन में IIM रायपुर और IIT भिलाई की विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, श्री भुवनेश यादव ने कहा कि राज्य शासन योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दिशा में भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे योजनाओं के मूल्यांकन में आधुनिक तकनीक, शोध आधारित अध्ययन और शैक्षणिक विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन, अंजोर विजन पोर्टल पर भी कार्य जारी बैठक में राज्य नीति आयोग की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन इकाई तथा परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं के पायलट मूल्यांकन के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। ये अध्ययन नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा निर्धारित मूल्यांकन ढाँचे पर आधारित हैं। राज्य में DMEO के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) तथा डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी एवं समीक्षा के लिए अंजोर विजन पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यूनिसेफ के सहयोग से विकसित हो रहा बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के विकास के लिए बनेगा प्रभावी आधार बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य नीति आयोग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित किया जा रहा है। यह देश में इस दिशा की अग्रणी पहलों में शामिल है। इस सूचकांक के माध्यम से बच्चों तक पहुँचने वाली विभिन्न सेवाओं की उपलब्धता के साथ उनके वास्तविक प्रभाव और परिणामों का भी आकलन किया जाएगा। इस पहल से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं समग्र कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी। साथ ही यह निर्धारित करने में भी मदद मिलेगी कि किन जिलों और क्षेत्रों में अधिक ध्यान एवं निवेश की आवश्यकता है। इससे बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा। सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी के लिए जिला स्तरीय डैशबोर्ड, परिणाम आधारित बजट की दिशा में पहल बैठक में बताया गया कि राज्य नीति आयोग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्रगति का आकलन करने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय फ्रेमवर्क के आधार पर प्रतिवर्ष प्रगति प्रतिवेदन जारी किए जा रहे हैं। जिलों में सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की नियमित निगरानी के लिए विशेष डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है। इसके साथ ही राज्य में सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित बजट विश्लेषण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शासकीय व्यय का विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में कितना योगदान है। इसके निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में बजट निर्माण की प्रक्रिया में सतत विकास लक्ष्यों को चरणबद्ध रूप से समाहित कर परिणाम आधारित बजट व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ की पहल सराहनीय, निगरानी एवं मूल्यांकन का स्थायी तंत्र विकसित करना आवश्यक : सुश्री निधि छिब्बर महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने राज्य नीति आयोग द्वारा कम समय में किए गए व्यापक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने DMEO के मूल्यांकन ढाँचों को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल उनके क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित … Read more

योगी सरकार का मिशन शक्ति अभियान: गांव-गांव पहुंच रही महिला पुलिस, महिलाओं की सुरक्षा पर जोर

योगी सरकार के मिशन शक्ति अभियान से महिलाएं हुईं सशक्त, 99 हजार से अधिक गांवों तक पहुंची महिला बीट पुलिस  – अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण में 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच – 66 हजार से अधिक महिलाओं और बेटियों ने दौड़ में लिया भाग –  38.64 लाख से अधिक लोगों की हुई चेकिंग, 1,841 अभियोग किए गये दर्ज लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान के प्रभावी परिणाम सामने आये हैं। मिशन शक्ति अभियान ने जहां एक ओर आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उन्हे सशक्त बनाया। अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण 19 मार्च-26 से 17 अप्रैल तक प्रदेशभर में करीब 3 लाख स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों की जाचं की गई। इसके अलावा महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करने के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया।  66 हजार से अधिक महिलाओं और बालिकाओं ने दौड़ में लिया भाग  महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की नोडल अधिकारी एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए जागरूकता, संवाद और सख्त कार्रवाई पर एक साथ जोर दे रही है। इसी क्रम में मिशन शक्ति अभियान फेज-5 का द्वितीय चरण प्रदेश भर में संचालित किया गया। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों ने समन्वित रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। अभियान में महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के तहत महिला सुरक्षा को लेकर जनपद स्तर पर 66,441 महिलाओं और बालिकाओं ने आयोजित दौड़ कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 49,437 प्रचार-प्रसार सामग्री वितरित की गई। इनमें 1,930 जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्रेरणादायी महिलाओं ने भी भाग लिया। वहीं, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित महिला चौपालों के माध्यम से 15,55,219 लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं से संबंधित जानकारी दी गई। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और जरूरत के समय उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। 99 हजार से अधिक गांवों में पहुंची महिला बीट पुलिस अभियान के दौरान 1,593 मिशन शक्ति केंद्रों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में 12,51,777 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान 10,05,926 सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन से संबंधित पम्फलेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न ग्राम पंचायतों और वार्डों में बीट पुलिस अधिकारियों ने 45,040 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, बीसी सखी, लेखपाल, एएनएम, आशा वर्कर, ग्राम पंचायत अधिकारियों और रोजगार सेवकों सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने सहयोग किया। इन कार्यक्रमों में 72,820 लोगों सहित जनमानस को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। महिलाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए महिला बीट पुलिस अधिकारियों ने व्यापक स्तर पर भ्रमण किया। अभियान के दौरान महिला बीट अधिकारियों ने 99,377 ग्रामों और वार्डों का दौरा किया। इस दौरान घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता से जोड़ने पर जोर दिया गया। घरेलू विवाद, भरण-पोषण और अन्य समस्याओं से जुड़े मामलों में पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने की पहल की गई। 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की निगरानी और चेकिंग भी तेज की गई। 2,90,153 स्कूल-कॉलेजों तथा चौराहों, बाजारों, मॉल, पार्क और भीड़भाड़ वाले स्थानों की जांच की गई। इस कार्रवाई के दौरान 38,64,614 व्यक्तियों की चेकिंग की गई। वहीं 1,841 अभियोग पंजीकृत किए गए, 6276 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 16,85,263 व्यक्तियों को चेतावनी दी गई।  अभियान के दौरान 59,897 स्थानों पर पुलिस की गश्त और फुट पेट्रोलिंग की गई। इसके साथ ही महिला अपराधों से जुड़े संवेदनशील स्थलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 39,454 कैमरे अधिष्ठापित कराए गए। राजकीय रेलवे पुलिस ने भी मिशन शक्ति अभियान से संबंधित 4,893 रेलवे स्टेशनों पर 11,226 ट्रेनों में 1,69,201 प्रचार सामग्री वितरित की।

योगी सरकार का आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तोहफा, अब हर साल मिलेंगी 3 साड़ियां

योगी सरकार अब आंगनबाड़ी कर्मियों को हर साल देगी तीन साड़ियां   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी   3.80 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिलेगा लाभ   अब दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी, अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार   प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से 19.02 करोड़ रुपये होंगे खर्च लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को हर साल तीन साड़ियां देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अभी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को साल में दो साड़ियां मिलती हैं। नई व्यवस्था से प्रदेश की 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। इस पर राज्य सरकार करीब 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।   कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इनके लिए 1,90,145 कार्यकत्रियों और इतनी ही सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। सभी स्वीकृत पदों के आधार पर कुल 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक-एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।   अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी वाली योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तीसरी साड़ी राज्य सरकार अपने खर्च पर देगी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये निर्धारित किए गए हैं। कुल अनुमानित व्यय 19,01,45,000 रुपये होगा।   नियमित इस्तेमाल और धुलाई की परेशानी होगी दूर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में काम करना होता है। नियमित इस्तेमाल, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और साड़ी के अचानक गंदा या खराब होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला किया गया है।   प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इन सेवाओं के संचालन में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की अहम भूमिका है।

रेलवे कर्मचारियों के बोनस पर बड़ा अपडेट, वायरल लेटर निकला फर्जी; जानें कितनी मिलती है PLB राशि

 नई दिल्ली सरकार रेलवे कर्मचारियों को सालाना 41000 रुपये का बोनस देने जा रही है? सोशल मीडिया पर इस तरह का मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे बोर्ड का एक लेटर शेयर किया जा रहा है और कहा गया है कि रेलवे प्रोडक्‍ट लिंक बोनस या सालाना बोनस वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सभी कर्मचारियों को देने जा रहा है. अब रेलवे बोर्ड ने इसपर सफाई दी है और कहा है कि इस तरह कोई भी लेटर उसके द्वारा शेयर नहीं किया गया है. यह पूरी तरह से फर्जी है. 6 अक्‍टूबर की डेट वाले इस लेटर में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने 78 दिनों के बराबर वाला प्रोडक्‍ट लिंक बोनस को जारी करने का आदेश दे दिया है. यानी कि रेलवे के सभी कर्मचारियों को 41,149 का बोनस दिया जाएगा. रेलवे बोर्ड ने नहीं जारी किया लेटर वहीं 7 अक्‍टूबर को भेजे गए एक लेटर में रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे के जनरल मैनेजरों को कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये लेटर पूरी तरह फेक है, जिसमें फर्जी सिग्‍नेचर किया गया है. रेलवे ने अलर्ट करते हुए कहा कि यह लेटर गलत है और उसके द्वारा जारी नहीं किया गया है. इस लेटर के तहत जारी किया गया किसी भी तरह का कंटेंट अधिकारिक तौर पर जारी नहीं हुए हैं. रेलवे बोर्ड ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि बोनस को लेकर किसी भी तरह का फैसला नहीं लिया गया है और ना ही किसी भी डॉक्‍यूमेंट के आधार पर भुगतान किया गया है. रेलवे कर्मचारी बोनस का ऐलान कैसे चेक करें? रेलवे बोर्ड की ओर से जानकारी देते हुए कहा गया है कि अगर इस तरह की खबर आपके सामने आती है तो आप सबसे पहले रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट और रेलवे के अथोरिटी अधिकारी से बातचीत करके वेरिफाई कर लें. इसके अलावा, आप रेलवे मंत्रालय की वेबसाइट पर भी फैक्‍ट्स की जांच कर सकते हैं. हर साल रेलवे कर्मचारियों को कितना बोनस मिलता है? नॉन गैजेट्स वाले कर्मचारियों को प्रोडक्‍ट लिंक बोनस 17,951 रुपये दिया जाता है. यह लिमिट 2014-15 से तय की गई है. रेलवे कर्मचारियों के लिए सलाना बोनस की गणना 7000 रुपये के वेज सीलिंग और 78 दिन के लिए, के आधार पर की जाती है. बोनस बढ़ाने की मांग हाल ही में Indian Railways Technical Supervisors’ Association (IRTSA) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उनकी वेज सीलिंग बढ़ाकर 18000 रुपये कर दी जाए और साथ ही लेवल-2 कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता और बढ़ा दिया जाए. IRTSA का  कहना है कि अनस्किल लोगों के लिए 21,000 वेज सीलिंग है. इसलिए 7000 रुपये वेज सीलिंग को बढ़ाकर 18000 रुपये किया जाना चाहिए. बोर्ड ने कहा कि 18000 रुपये के बेसिस पर बोनस को 17,951 रुपये से बढ़ाकर 46,184 रुपये किया जाना चाहिए.

नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा तेज, भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला सम्मान

नई दिल्ली शांति के नोबेल प्राइज के लिए खुद को उपयुक्त दावेदार बताने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार भी इंतजार करते रह गए. इस बार भी उनकी चर्चा तक नहीं हुई.  संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख भारतीय मूल की नवनेथम नावी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. उन्हें यह अवार्ड अंतरराष्ट्रीय कानून में उनके योगदान के लिए दिया गया है. नोबेल जूरी ने शुक्रवार को नॉर्वे के ओस्लो में इसकी घोषणा की।  शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाली नावी पिल्लई ने, दुनिया भर में हाल ही में हुई हिंसा के लिए देशों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराया है. उन्होंने हिंसा व संघर्ष के पीड़ितों के लिए उम्मीद जगाई है. पिल्लई दक्षिण अफ्रीका की 85 साल की न्यायाधीश हैं।  अपने टाउन की महिला महिला वकील बनी दक्षिण अफ्रीका की नागरिक पिल्लई 1967 में अपने होमटाउन नेटाल में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला थीं. अगले कुछ वर्षों में, उन्होंने रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं के लिए बचाव पक्ष की वकील के रूप में काम किया. उन्होंने क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय में लेक्चरर के रूप में भी कार्य किया और बाद में डरबन वेस्टविले विश्वविद्यालय की परिषद की उपाध्यक्ष नियुक्त हुईं।  1995 में, रंगभेद खत्म होने के बाद पिल्लई को दक्षिण अफ़्रीकी उच्च न्यायालय में कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त किया गया. उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में चुना गया.  1 सितंबर 2008 को उन्हें  संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था।   शांति का नोबेल प्राइज विजेता की घोषणा करते हुए, नोबेल प्राइज कमेटी के X हैंडल से से जो पोस्ट शेयर किया गया है. इसमें लिखा है कि नवी पिल्लै हमारे समय में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों की महान पैरोकारों में से एक हैं. उनका शानदार करियर हमें वैश्विक स्तर पर कानून के शासन का समर्थन करने, उसे मजबूत करने और उसका विस्तार करने की जरूरत की याद दिलाता है।  न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति नवी पिल्लई की प्रतिबद्धता उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है जो एक अधिक शांतिपूर्ण दुनिया बनाना चाहते हैं.नावी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र के अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की अध्यक्ष थीं, जिसने पिछले साल यह निष्कर्ष निकाला था कि इज़रायल ने गाजा में नरसंहार किया है. इज़राइल ने इस रिपोर्ट को अपमानजनक बताकर खारिज कर दिया था।  नोबेल प्राइज समिति ने शांति का पुरस्कार विजेता की घोषणा करते हुए लिखा है कि इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करते हुए, नॉर्वे की नोबेल समिति दुनिया को यह याद दिलाना चाहती है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन उस व्यवस्था का आधार है जिसे हमने शांति सुनिश्चित करने और संघर्षों को अहिंसक रूप से हल करने के लिए स्थापित किया है. शांति के लिए न्याय आवश्यक है।  इतिहास गवाह है कि कानून के शासन के बिना चलने वाली दुनिया अन्यायपूर्ण, अविवेकी और अमानवीय होती है. न्यायाधीश – जो व्यवस्था और अराजकता के बीच संतुलन बनाए रखते हैं, इसलिए प्रशंसा के पात्र हैं. लेकिन आज, जब इन्हीं न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और उनकी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं, तो हमें साहस, दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प वाले लोगों की जरूरत है – ऐसे गुण जो नावी पिल्लई ने न्यायपीठ में अपने काम से दिखाए हैं। 

त्विषा शर्मा मौत मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर कराने की मांग

 भोपाल  त्विषा शर्मा मौत मामले में पीड़ित पक्ष ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिसे मंजूरी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगाए गए ट्रांसफर पिटिशन पर 16 अक्टूबर को सुनवाई होगी। याचिका में पीड़ित पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे भोपाल न्यायालय में निष्पक्ष न्याय मिलने को लेकर भरोसा नहीं है। इसी आशंका के चलते मामले की सुनवाई दिल्ली की अदालत में कराने की मांग की गई है। निष्पक्ष सुनवाई पर उठाए सवाल याचिका में कहा गया है कि मामले में आरोपित पूर्व जिला जज गिरीबाला सिंह को भोपाल न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी है। पीड़ित पक्ष ने इस तथ्य को भी अपनी आशंका का आधार बनाया है। याचिका में कहा गया है कि गिरीबाला सिंह पूर्व में भोपाल में जिला जज के पद पर रह चुकी हैं। ऐसे में पीड़ित पक्ष को आशंका है कि उनके प्रभाव के चलते मामले की सुनवाई निष्पक्ष रूप से प्रभावित हो सकती है। दिल्ली में सुनवाई की अपील पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मामले से जुड़े आरोपितों ने पहले भी अपने प्रभाव और शक्ति का इस्तेमाल जांच को प्रभावित करने तथा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के प्रयास किए हैं। इसी आधार पर याचिका में कहा गया है कि भोपाल में सुनवाई जारी रहने पर उन्हें न्याय मिलने को लेकर भरोसा नहीं है। पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित कर वहां सुनवाई कराने की मांग की है। अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। गिरीबाला सिंह के सामने नई मुसीबत, CBI ने फंसाया पेच जेल में बंद पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उनकी तरफ से दहेज एक्ट की धाराओं को विलोपित कर दायर की गयी संशोधित जमानत याचिका हाई कोर्ट में पेश की गयी. सीबीआई की तरफ से जमानत याचिका का विरोध किया गया।  सीबीआई ने दहेज मांग के साक्ष्य नहीं मिलने बताए इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई ने हाईकोर्ट में लिखित आपत्ति पेश की थी। इसमें बताया गया था कि मामले में दहेज की मांग किए जाने से संबंधित साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसके बाद गिरिबाला सिंह की ओर से जमानत आवेदन में संशोधन कर दहेज प्रताड़ना से संबंधित धारा हटाने की अनुमति मांगी गई थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में सुधार की दरख्वास्त पेश की गई, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी सीबीआई ने हाई कोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ को बताया "एकत्र किये गये तकनीकी साक्ष्यों को जांच के लिए लैब भेजा गया था, जिनकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. सीबीआई प्रकरण की जांच कर रही है और लैब रिपोर्ट प्राप्त होने पर साक्ष्यों के आधार पर संबंधित न्यायालय के समक्ष विधि अनुसार कार्रवाई की जायेगी." भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरीबाला सिंह की बहू व मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालात में 12 मई 2026 को मौत हो गई थी।  ट्विशा मौत केस में अब तक क्या हुआ पुलिस ने सास पूर्व जज गिरीबाला तथा उसके बेटे के खिलाफ दहेज हत्या व दहेज एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था. आरोपी सास को भोपाल जिला व सत्र न्यायालय से 15 मई को अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया था. पीड़ित पक्ष ने अग्रिम जमानत मिलने के खिलाफ हाई कोर्ट ने याचिका दायर की थी।  इसके अलावा मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने जाने की मांग करते हुए भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. हाई कोर्ट ने दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिये थे. हाई कोर्ट ने 27 मई को पूर्व न्यायाधीश को मिली अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया था. सरकार द्वारा प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गयी थी।  संशोधित याचिका पेश करते ही सीबीआई सक्रिय पिछली सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया था कि दहेज की मांग किये जाने के संबंध में साक्ष्य नही मिलने के कारण सीबीआई के तरफ से प्रकरण में दहेज एक्ट की धाराओं को हटा दिया गया है. एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को दहेज एक्ट की धाराओं को विलोपित कर संशोधित याचिका दायर करने के निर्देश जारी किए थे।  आदेश का पालन करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से संशोधित याचिका पेश की गयी. लेकिन सीबीआई की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि जब्त किये गये लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यो के रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. एकलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित की है।  अब आत्महत्या से जुड़े आरोपों पर सुनवाई जमानत आवेदन में संशोधन के बाद अब मामला आत्महत्या से जुड़े आरोपों के संदर्भ में आगे बढ़ेगा। हाईकोर्ट ने संशोधन की अनुमति देते हुए जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है। 12 मई को ट्विशा ने आत्महत्या की थी गिरीबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद ट्विशा के परिजन ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिजन का आरोप था कि ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था और मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ प्रताड़ना की गई। परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि लगातार मानसिक प्रताड़ना के चलते ट्विशा ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। गिरीबाला और बेटे पर केस दर्ज इसके बाद भोपाल पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और दहेज एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। पूर्व न्यायाधीश को भोपाल जिला सत्र न्यायालय से इस मामले में जमानत मिल गई थी। अग्रिम जमानत मिलने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसके अलावा मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। AIIMS दिल्ली की टीम ने किया दोबारा पोस्टमार्टम हाईकोर्ट ने दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने 27 मई को पूर्व न्यायाधीश को मिली अग्रिम जमानत … Read more

मध्य प्रदेश में निवेश को मिलेगी रफ्तार, आगर की मैक्केन फूड परियोजना से 2,000 लोगों को रोजगार

आगर में 3800 करोड़ की मैक्‍केन फूड परियोजना होगी शुरू : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव 2 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार पशुपालन, किसानों की आय बढ़ाने का महत्‍वपूर्ण साधन है मुख्‍यमंत्री ने आगर के बलराम कृषि महोत्‍सव में किसानों से किया वर्चुअली संवाद भोपाल  मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियों कॉन्‍फ्रेसिंग से आगर में शुक्रवार को आयोजित बलराम कृषि महोत्‍सव में सहभागिता करते हुए किसानों से सीधा संवाद किया। उन्‍होंने कृषक कल्‍याण वर्ष के तहत् आयोजित कार्यक्रमों में किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि के क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्‍यकताओं के संबंध में संवाद किया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर में 3800 करोड़ की मैक्‍केन फूड परियोजना शुरू हो रही है, इसमें 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्‍वपूर्ण साधन है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर-मालवा जिले के लालूखेड़ी में आलू प्रसंस्‍करण का 200 करोड़ का उद्योग स्‍थापित हो रहा है, लालूखेड़ी के साथ ही अब आगर-मालवा जिले के किसान भी आलू उगाऐंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर एवं सुसनेर का संतरा देश भर में भेजा जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि जिले के पशुपालक गौपालन के लिये भी विशेष रूप से जाने जाते है। जैविक दूध प्रदेश में कही मिलता है तो आगर में ही मिलता है। उन्‍होंने कहा कि प्रदेश का दूध उत्‍पादन भी बढ़ेगा, सांची का दुग्‍ध ब्राण्‍ड भी बढ़ रहा है। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि आगर जिला सौर उर्जा एवं विण्‍ड एनर्जी के लिये भी अपनी अलग पहचान रखता है। प्रदेश में पर्याप्‍त बिजली, सिंचाई के लिये पानी उपलब्ध है और पांच लाख किलोमीटर की सड़कों का जाल भी है। उन्‍होंने ने कहा कि वर्ष 2027 तक गेहूं 2700 से के भाव में खरीदेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर जिला गौ-सेवा के लिये भी विशेष पहचान रखता है। गौ-अभयारण्य सालरिया एवं जिले की अन्‍य गौशालाओं में 20 हजार से अधिक गौवंश की समुचित देखभाल की जा रही है। सरकार प्रति गौवंश 40 रूपए प्रतिदिन की दर से गौवंश की देखभाल के लिये गौशालाओं को राशि प्रदान कर रही है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौपालन को बढ़ावा देने के लिये गौपालन पुरस्‍कार योजना के तहत् अच्‍छे पशुपालकों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। जिसमें प्रत्‍येक विकास खण्‍ड से प्रथम पुरस्‍कार प्राप्‍त करने वाले पशुपालक को एक लाख रूपए, द्वितीय पुरस्‍कार के लिये 50 हजार एवं तृतीय पुरस्‍कार के रूप में 25 हजार रूपए की राशि पशुपालक को प्रदान की जाएगी। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने बिनायगा बड़ौद के प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसान राधेश्‍याम परिहार, आखाखेड़ी तनोडिया के प्राकृतिक अरहर खेती करने वाले किसान रोहित शर्मा एवं अन्‍य उपस्थित प्रगतिशील कृषकों से वर्चुअली संवाद कर उनके द्वारा की जा रही प्राकृतिक, जैविक एवं उन्‍नत कृषि के बारे में जानकारी ली तथा इससे होने वाले लाभ के बारे में भी चर्चा की। सांसद रोड़मल नागर ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने खेती को उद्यम बनाकर किसानों के लिये लाभ का धन्‍धा बना दिया है। आज उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने के बाद भी किसान पुत्र कृषि की ओर आकर्षित हो रहे है। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्‍यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, अपेक्‍स बैंक के प्रशासक महेन्‍द्र सिंह यादव और विधायक मधु गेहलोत ने भी संबोधित किया। प्रगतिशील किसानों, मेधावी विद्यार्थियों और भूतपूर्व सैनिकों का किया सम्‍मान कार्यक्रम मे उत्‍कृष्‍ट एवं प्रगतिशील किसानों, किसान परिवार के मेधावी छात्र-छात्राओं और भूतपूर्व सैनिकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्‍मानित किया गया। कार्यक्रम को कपिल यारदे, कप्‍तान सिंह यादव ने भी सम्‍बोधित किया। कार्यक्रम स्‍थल पर विभिन्‍न विभागों द्वारा लगाई गई, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्‍स्‍य विभाग एवं आधुनिक कृषि यंत्रों सहित अन्‍य विभागों की प्रदर्शनियों लगायी गई।  

कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की बड़ी पहल, चार संस्थाओं के साथ एमओयू

युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की बड़ी पहल, चार संस्थाओं के साथ एमओयू टीसीएस, अडानी समूह और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर विशेष जोर पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से कराया गया थर्ड पार्टी मूल्यांकन रायपुर,   छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल शैक्षणिक योग्यता तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल से सशक्त बनाना है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं प्रशिक्षण संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू), तकनीकी शिक्षा में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत तथा प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। चार संस्थाओं के साथ एमओयू से युवाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण             दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला 2026 के समापन अवसर पर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पहल की गई। इन समझौतों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सुविधा होगी।           टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सहयोग से इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और उद्योगों में उपयोग होने वाले व्यावहारिक कौशल की जानकारी प्राप्त होगी।          इसी प्रकार अडानी समूह के सहयोग से आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पहल से विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।           विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और रोजगार क्षमता में वृद्धि के लिए नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सॉफ्ट स्किल, अंग्रेजी संवाद कौशल, साक्षात्कार की तैयारी एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पिछले वर्ष इस संस्था के माध्यम से छह हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया गया था। इस वर्ष भी आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं कौशल विकास से जुड़े विद्यार्थियों को लगभग 48 से 50 घंटे का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।            इसके अतिरिक्त जंगल सफारी में विभिन्न ट्रेडों से संबंधित कौशल प्रशिक्षण के लिए भी संस्थाओं के साथ एमओयू की पहल की जा रही है। इससे युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने विशेष पहल            प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। इस मूल्यांकन में संस्थानों के शैक्षणिक स्तर, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपलब्ध अधोसंरचना और अन्य आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया है। मूल्यांकन की रिपोर्ट का रोजगार मेला के समापन समारोह में मुख्यमंत्री साय, मंत्री तकनीकी शिक्षा साहेब, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा  सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने विमोचन किया। इसमें संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों के आधार पर पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा। आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे आधुनिक तकनीक आधारित रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम           राज्य सरकार ने तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में पुराने एवं अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और आधुनिक तकनीक से संबंधित पाठ्यक्रमों को शामिल किया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों की जानकारी और व्यावहारिक दक्षता प्राप्त होगी। इससे वे बदलते औद्योगिक परिवेश में रोजगार की नई संभावनाओं का लाभ उठा सकेंगे। डिजिटल रोजगार पोर्टल को स्किल मार्केट के रूप में विकसित करने की तैयारी            कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा डिजिटल रोजगार पोर्टल को भविष्य में स्किल मार्केट के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस पोर्टल पर उद्योगों की आवश्यकताओं, विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रिक्त पदों और रोजगार के इच्छुक युवाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम           इस व्यवस्था के माध्यम से युवा अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वहीं उद्योग एवं नियोजक संस्थाएं अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का चयन कर सकेंगी। इससे रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी होगी। राज्य सरकार की इस पहल से प्रदेश में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय, आधुनिक पाठ्यक्रम, डिजिटल रोजगार सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

पूर्व अग्निवीरों को योगी सरकार की सौगात, पुलिस, वन, जेल और परिवहन विभाग में मिलेगा आरक्षण

पूर्व अग्निवीर युवाओं के लिए योगी सरकार ने आसान की सरकारी नौकरी की राह   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भर्ती नियमावली में संशोधन को मंजूरी   पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण   अधिकतम आयु सीमा 25 से बढ़ाकर 28 वर्ष की गई, युवाओं को मिलेगी तीन वर्ष की छूट   लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट, केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा   लखनऊ सेना में देश की सेवा कर चुके पूर्व अग्निवीर युवाओं के लिए योगी सरकार ने सरकारी नौकरी की राह और आसान कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीरों की भर्ती संबंधी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सरकार ने अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने के साथ ही लिखित और शारीरिक परीक्षा से भी छूट देने का निर्णय लिया है। पूर्व अग्निवीरों को केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। इस व्यवस्था से सैन्य सेवा पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।   कैबिनेट बैठक के बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि वर्ष 2022 में अग्निवीर योजना के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति से संबंधित नियमावली में संशोधन किया है।   चार विभागों की भर्तियों में 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदेश के पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी के अनुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा। इससे सैन्य सेवा पूरी करने वाले युवाओं को प्रदेश की सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के बेहतर अवसर मिलेंगे।   28 वर्ष तक की आयु में कर सकेंगे आवेदन पूर्व अग्निवीरों के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष से बढ़ाकर 28 वर्ष कर दी गई है। तीन वर्ष की इस छूट से सैन्य सेवा के बाद सरकारी नौकरी के इच्छुक युवाओं को आवेदन के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।   केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा पूर्व अग्निवीरों को इन विभागों में भर्ती के लिए लिखित और शारीरिक परीक्षा नहीं देनी होगी। उन्हें केवल मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में यह महत्वपूर्ण रियायत होगी।   सैन्य सेवा के बाद प्रदेश की सेवा का अवसर अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए सेवा अवधि पूरी होने के बाद रोजगार एक महत्वपूर्ण विषय है। योगी सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन कर ऐसे युवाओं के लिए प्रदेश की सरकारी सेवाओं में आगे बढ़ने की व्यवस्था को और सुगम बनाया है। इससे सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन का अनुभव रखने वाले युवाओं को देश की सेवा के बाद उत्तर प्रदेश में भी अपनी सेवाएं देने का अवसर मिलेगा।

कागजों तक सीमित न रहे शिक्षा नीति, धरातल पर दिखे बदलाव: मंत्री टंक राम वर्मा

कागजों से निकलकर ज़मीनी स्तर पर दिखे शिक्षा नीति: उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को धरातल पर उतारने छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी पहल विश्वविद्यालयों में बनेंगे 'NEP सेल', संभाग व जिला स्तर पर होंगी कार्यशालाएं ​रायपुर, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सुचारू, सुदृढ़ और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शासन स्तर पर प्रशासनिक एवं अकादमिक कसरत तेज हो गई है। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में NEP-2020 को बिना किसी व्यावहारिक बाधा के लागू करने और पिछले दो वर्षों के अनुभवों के आधार पर आई चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।           ​बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, श्रीमती रीता यादव, प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के स्तर को उन्नत करने, विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने तथा नई शिक्षा नीति को राज्य में पूरी सुदृढ़ता के साथ धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।          बैठक में उच्च  शिक्षा मंत्री वर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लाभ तभी संभव है जब यह केवल कागजी निर्देशों, बैठकों और प्रशासनिक फाइलों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' और मुख्यमंत्री के 'विकसित छत्तीसगढ़' के संकल्प को साकार करने में इस नई शिक्षा नीति की अत्यंत निर्णायक भूमिका होगी।       ​मंत्री वर्मा ने कहा कि NEP-2020 का मूल ध्येय केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने उद्योगपतियों, औद्योगिक घरानों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से विद्यार्थियों को सीधे जोड़ने और उद्योग- अकादमिक समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया। ​व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान: संभाग और जिला स्तर पर प्रशिक्षण          ​पिछले दो वर्षों में NEP-2020 के क्रियान्वयन के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों, क्रेडिट सिस्टम एवं विषय चयन से जुड़े भ्रम पर गहराई से मंथन किया गया। इस भ्रम और कठिनाइयों को दूर करने के लिए मंत्री वर्मा ने व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। ​विशेष कार्यशालाओं का आयोजन       नई शिक्षा नीति की बारीकियों और प्रावधानों से प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को पूरी तरह अवगत कराने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र के हर सेमेस्टर की शुरुआत में विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश मंत्री वर्मा ने दिए। ​संभाग एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षण        बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने प्राध्यापकों और छात्रों के बीच समझ का दायरा बेहतर करने के लिए संभाग और जिला स्तर पर भी बड़े पैमाने पर कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने के निर्देश दिए।  विश्वविद्यालयों से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और ब्रांड एंबेसडरों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। ​निगरानी व्यवस्था मजबूत करने नोडल अधिकारी और ब्रांड एंबेसडर होंगे नियुक्त          ​प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, जमीनी निगरानी और त्वरित सूचना प्रसार को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नया ढांचा तैयार करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी तथा दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी और एंबेसडर शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के बीच समन्वय स्थापित कर जागरूकता फैलाने और मॉनिटरिंग का काम करेंगे। विद्यार्थियों को नीति से संबंधित आ रही शंकाओं, विषय चयन की समस्याओं और अन्य प्रशासनिक प्रश्नों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित 'NEP सेल' का गठन करने के निर्देश भी दिए। ​पाठ्यक्रम में सरलता, भारतीय ज्ञान परंपरा और अनिवार्य इंटर्नशिप पर जोर        ​विद्यार्थियों के अध्ययन और परीक्षा की प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुधारों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जनरल इलेक्टिव (GE) विषयों के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों को अधिक सरल, व्यावहारिक और लचीला बनाया जाएगा, ताकि विषय चयन और परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा या मानसिक दबाव न झेलना पड़े।पाठ्यक्रमों में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विरासत यानी 'भारतीय ज्ञान परंपरा' को प्रमुखता और अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए।        मंत्री वर्मा ने छठे सेमेस्टर में लागू अनिवार्य इंटर्नशिप व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए अभी से प्रारंभिक तैयारियां शुरू करने तथा विभिन्न उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।  ​निजी विश्वविद्यालयों की मॉनिटरिंग और बीएड पाठ्यक्रमों के संचालन में तेजी         ​शिक्षा की गुणवत्ता में एकरूपता लाने के लिए राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति और नई शिक्षा नीति के सही क्रियान्वयन की निगरानी के लिए अपर संचालक तथा कुलपतियों के समन्वय से एक विशेष निगरानी समिति बनाने के निर्देश दिए गए। इसके ​साथ ही, आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मंत्री वर्मा ने प्रदेश में बीएड कॉलेजों के त्वरित और सुचारू संचालन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन पात्र विश्वविद्यालयों और 'बी++' ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों से बीएड संचालन के आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन पर बिना किसी विलंब के शीघ्र कार्रवाई की जाए, इससे समय पर बीएड पाठ्यक्रम शुरू हो सकेंगे और राज्य को भविष्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।         ​बैठक के अंत में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सभी सदस्यों द्वारा दिए गए सकारात्मक सुझावों पर तत्काल अमल करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी हितधारकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा ताकि छत्तीसगढ़ पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन सके।