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Diljit Dosanjh की फिल्म पर फिर विवाद! रिलीज के 2 दिन बाद OTT से हटाई गई, एक्टर ने कहा- मुझे इसका अंदाजा था

चंडीगढ़  दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95' को 3 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर नाम बदलकर रिलीज किया गया था, पर दो दिन बाद ही इसे हटा दिया गया। अब अगले आदेश तक इसे भारत में OTT पर नहीं दिखाया जाएगा। तीन साल तक सेंसर बोर्ड के साथ विवाद में फंसे रहने के बाद 'सतलज' बड़ी मुश्किल से अब रिलीज की रोशनी देख पाई थी, पर अचानक हटाए जाने से न सिर्फ आम जनता में गुस्सा है, बल्कि सेलेब्स भी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। 'सतलज' को हटाए जाने पर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इसे 'अभिव्यक्ति की आजादी' पर हमला बताया। एक्टर रणवीर शौरी से लेकर फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने भी नाराजगी जाहिर की है। 'सतलज' की कहानी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा पर आधारित है। उन्होंने 90 के दशक में 25 हजार लापता सिखों के लिए लड़ाई लड़ी थी। साथ ही 2000 लोगों की मौत का पता लगाया था, जिनकी लाशों को लावारिस बताकर जला दिया गया था। पर बाद में पुलिस ने खालरा का ही फेक एनकाउंटर कर लाश को नदी में फेंक दिया था। 'सतलज' को बंपर रिस्पॉन्स, फिल्म देख रो पड़े थे लोग 3 जुलाई को जब 'सतलज' OTT पर आई, तो जिन्होंने भी फिल्म देखी वो रो पड़े और सभी से इसे देखने की अपील की। यहां तक कि IMDb पर भी इसे 9.7/10 रेटिंग मिली है। लेकिन अब अचानक ही इस फिल्म को OTT से भारत में हटा दिया है। इससे जनता और सेलेब्स भड़के हुए हैं। सुखबीर सिंह बादल भड़के- अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने 'सतलज' हटाए जाने पर गुस्सा निकालते हुए X पर लिखा, 'भारत में ZEE5 से 'सतलज' को मनमाने ढंग से हटाए जाने से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। यह सशक्त फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास को साहसपूर्वक उजागर करती है और एस. जसवंत सिंह जी खालरा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, उसे इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह केवल सेंसरशिप नहीं है, यह हमारी सामूहिक स्मृति, सत्य और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस कदम की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, दमन का नहीं।' यह सशक्त फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास को साहसपूर्वक उजागर करती है और एस जसवंत सिंह जी खालरा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, उसे इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह केवल सेंसरशिप नहीं है, यह हमारी सामूहिक स्मृति, सत्य और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। रणवीर शौरी ने यूं जाहिर किया गुस्सा रणवीर शौरी ने भी गुस्सा निकालते हुए X पर लिखा, 'यह सुनकर बहुत निराशा हुई कि 'सतलज' को हटा दिया गया है। मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा था। जिस देश का इतिहास और विरासत कहानियों से सीखने का रहा है, वहां न जाने क्यों हम कहानियों को दबाने या खत्म करने वाले कल्चर को बढ़ावा देते रहते हैं।' मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा था। जिस देश का इतिहास और विरासत कहानियों से सीखने का रहा है, वहां न जाने क्यों हम कहानियों को दबाने या खत्म करने वाले कल्चर को बढ़ावा देते रहते हैं। पहले फिल्म के बारे में जानिए…     मानवाधिकार कार्यकर्ता पर आधारित, 2022 में बननी शुरू हुई: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर 2022 में फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम 'घल्लूघारा' रखा गया था, जिसका अर्थ 'नरसंहार' होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।     सेंसर बोर्ड ने नाम बदलवाया: साल 2023 में फिल्म बनकर तैयार हो गई। इसके बाद इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर 'पंजाब 95' रखा गया।     127 कट लगाने को भी कहा: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर बोर्ड की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी।     विदेशों में रिलीज नहीं हो सकी: इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। इसके बाद साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।     सिर्फ OTT पर रिलीज करने की छूट मिली: इसके बाद इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की छूट मिली। उसमें किसी तरह के कट नहीं लगाए गए थे। 2 दिन के भीतर पंजाब में इस फिल्म को खूब देखा गया। जिसके बाद अचानक OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हट गई। इसके बारे में सिर्फ इतना कहा गया कि अगले आदेश तक फिल्म हटा दी गई है। फिल्म हटाने पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा…     इंसानियत होती है, जो मर गई: फिल्म को हटाए जाने पर दिलजीत ने कहा कि मैं लोगों के मुंह की तरफ देखता हूं। एक इंसानियत होती है, लेकिन वह इंसानियत मर गई। कमाल है। फिल्म इंटरनेट से हट गई, इसलिए मैं उदास नहीं हूं। फिल्म तो लोगों तक पहुंच ही गई। अब वह कहीं नहीं जाने वाली। एक प्यार, इत्तेफाक और इंसानियत होती है, लेकिन लोगों का रवैया कमाल का है। बस इसी बात का थोड़ा दुख है।     मुझे पहले पता था ऐसा होना है: दिलजीत ने कहा- मुझे पहले से ही पता था कि ऐसा होना है। मैंने सोचा था कि अगर फिल्म दो-तीन दिन भी चल जाए तो हमारा काम हो जाएगा। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए, तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। इनके सलाहकार … Read more

पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ समेत मेयर के घर को उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

लुधियाना  पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ और लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर के घर को बम से उड़ने की धमकी भरा मेल मिला है. यह मेल सोमवार की सुबह लुधियाना नगर निगम कमिश्नर की सरकारी ईमेल आईडी पर आया है. इस मेल में कहा गया है कि लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर के घर को दोपहर 1:11 पर बम से उड़ा दिया जाएगा जबकि रात 9:11 पर दिलजीत दोसांझ के घर पर हमला होगा. यह मेल खालिस्‍तान नेशनल आर्मी की तरफ से भेजा गया बताया जा रहा है।  पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह-सुबह नगर निगम कमिश्नर के आधिकारिक ईमेल अकाउंट पर एक धमकी भरा मेल आया. बता दें कि इससे पहले पंजाब के कई स्कूलों को भी बम से उड़ाने की धमकियां दी जा चुकी हैं।  इस ईमेल में लिखा था कि लुधियाना की मेयर और सिंगर दिलजीत दोसांझ के ठिकानों पर जोरदार धमाके किए जाएंगे. धमकी देने वाले ने इस हरकत को अंजाम देने के लिए बकायदा एक खास तारीख और समय का भी जिक्र किया था।  ईमेल में खास लोगों और संगठन के नामों का भी हवाला सूत्रों ने बताया कि इस ईमेल में कुछ खास लोगों और एक संगठन के नामों का भी हवाला दिया गया है. पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स की टीमें इस ईमेल की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।  बम की इस खौफनाक धमकी के मिलते ही प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया. सुरक्षा के मद्देनजर मेयर के कैंप ऑफिस और शहर के सभी संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है।  क्या लिखा है धमकी भरे ईमेल में? सुबह करीब 7:28 बजे आई ईमेल आईडी का विषय "B"0mb Blast – Mayor Office Ludhiana!" रखा गया है। ईमेल में धमाकों का समय भी निर्धारित किया गया है। दोपहर 1:11 बजे लुधियाना मेयर पर हमले की धमकी दी गई है। इसके साथ ही रात 9:11 बजे दिलजीत दोसांझ के लुधियाना स्थित घर पर धमाके की चेतावनी दी है। हमलावरों ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि “कोई भी मदद दिलजीत दोसांझ करेगा, मारा जाएगा।” 1984 के दंगों का जिक्र, 6 जून तक का अल्टीमेटम ईमेल में 1984 के सिख दंगों का हवाला देते हुए "खून का बदला खून" की बात लिखी गई है। धमकी देने वालों ने लिखा है कि 6 जून तक बम धमाकों के जरिए निशाना बनाया जाएगा। किसने भेजी है यह धमकी? ईमेल के अंत में इसे 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' (KHALISTAN National ARMY) की तरफ से भेजा गया बताया गया है। इसमें भेजने वालों के रूप में दो नाम लिखे गए हैं: 1. इंजीनियर गुरनख सिंह (रुकन शाहवाला) 2. डॉ. गुरनिरवैर सिंह (खान राजादा) पुलिस महकमा और साइबर सेल पूरी तरह अलर्ट धमकी के बाद पुलिस महकमा और साइबर सेल पूरी तरह अलर्ट पर है। ईमेल के आईपी एड्रेस और सेंडर को ट्रेस करने की त्वरित जांच शुरू कर दी गई है। मेयर कार्यालय और महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा कड़ी किए जाने की संभावना है। जांच में जुटी पुलिस और खुफिया एजेंसियां लुधियाना पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस धमकी की गंभीरता को परखने और ईमेल भेजने वाले के आईपी एड्रेस को ट्रैक करने में जुट गई हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक जांच के दौरान किसी भी जगह से कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है।  इसके बावजूद, प्रशासन इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और पूरी सतर्कता के साथ चप्पे-चप्पे पर सर्च ऑपरेशन और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।   

दिलजीत दोसांझ: राजनीति नहीं, लेकिन सुर्खियों में हमेशा

चंडीगढ़ पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) ने हाल के समय में कई संवेदनशील सिख मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। चाहे अलगाववादी राजनीति से दूरी बनाने की बात हो या विदेशों में बसे पंजाबी सिख प्रवासियों की संघर्षपूर्ण सफलता को पहचान देने की, दिलजीत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, अब तक उन्होंने राजनीति में आने का कोई संकेत नहीं दिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में दोसांझ ने लिखा कि वह कभी भी राजनीति में नहीं आएंगे। दिलजीत दोसांझ ने लिखा, राजनीति में कभी नहीं… मेरा काम एंटरटेनमेंट करना है। मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं। इसके बावजूद पंजाब में एक वर्ग ऐसा है जो उन्हें मौजूदा समय में राज्य के लिए संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रहा है। आर्थिक चुनौतियों और नशे की समस्या से जूझ रहे पंजाब में कुछ सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि दिलजीत जैसे चेहरे की राजनीति में जरूरत है। ‘जागो पंजाब मंच’ नामक एक समूह, जिसमें पूर्व सैन्य अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, ने सार्वजनिक रूप से दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की अपील की है। सेवानिवृत्त नौकरशाह एस.एस. बोपाराय के नेतृत्व वाले इस समूह का मानना है कि दिलजीत मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व से अलग हैं, क्योंकि उन्होंने कभी सत्ता की इच्छा जाहिर नहीं की। दिलजीत आज सिर्फ एक वैश्विक कलाकार नहीं, बल्कि पंजाबी अस्मिता के प्रतीक बन चुके हैं। उनकी पहचान किसी राजनीतिक विचारधारा से नहीं, बल्कि “पंजाबी पहचान” से जुड़ी मानी जाती है। वह अपने देसी अंदाज को खुलकर अपनाते और प्रदर्शित करते हैं। हाल ही में मेट गाला में महाराजा शैली के हार और पंजाबी लिपि से सजी पोशाक पहनकर पहुंचे दिलजीत ने वैश्विक मंच पर पंजाबी संस्कृति को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। वहीं सोशल मीडिया पर भी वह खुद को एक साधारण ‘देसी बॉय’ के रूप में पेश करते हैं, जो उनके प्रशंसकों को उनसे जोड़ता है। साल 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। हालांकि, उस समय भी उन्होंने साफ किया था कि वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं हैं। पिछले वर्ष उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) से मुलाकात की थी, जिसे राजनीतिक रूप से संतुलित रुख के तौर पर देखा गया। हाल के दिनों में कनाडा में अपने कार्यक्रम के दौरान खालिस्तानी झंडे लहराए जाने पर आपत्ति जताकर दिलजीत ने खुद को अलगाववादी राजनीति से भी अलग दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कनाडा में पंजाबी प्रवासियों की यात्रा कोमागाटा मारू घटना से लेकर आज वहां प्रभावशाली समुदाय बनने तक को गर्व के साथ प्रस्तुत किया। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिलजीत दोसांझ कभी राजनीति में कदम रखेंगे? और अगर ऐसा होता है, तो क्या पंजाब की जनता उन्हें एक राजनीतिक नेता के रूप में स्वीकार करेगी? इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

दिलजीत दोसांझ के वैंकूवर कॉन्सर्ट में हंगामा, खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने की नारेबाजी

दिलजीत दोसांझ अब ग्लोबल स्टार बन चुके हैं. इंडिया में कॉन्सर्ट के बाद, वो अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपों में शोज करते हैं. वहां भी दिलजीत का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता है. 23 अप्रैल को दिलजीत ने कनाडा के वैंकूवर में अपने औरा टूर की शुरुआत की थी. वहां करीब 50,000 से ज्यादा इंडियन्स आए थे. ये पल सिंगर के लिए बेहद खास था, जिसका जिक्र उन्होंने बीते दिनों जिम्मी फॉलन के लेट नाइट शो पर भी किया था. मगर इस कॉन्सर्ट में एक और बवाल खड़ा हुआ, जिसकी जानकारी अब सामने आ रही है. दिलजीत के वैंकूवर कॉन्सर्ट में कुछ खालिस्तानी समर्थक घुस गए थे, जो वहां सिंगर के खिलाफ नारे लगा रहे थे. जानकारी के मुताबिक, मामला काफी गंभीर हो गया था. मगर सिक्योरिटी ने कुछ ही देर में उन्हें शो से बाहर किया और माहौल को शांत किया. कहा जा रहा है कि दिलजीत खालिस्तानियों का अगला निशाना हैं. दिलजीत के शो में हुआ हंगामा दरअसल, शो के दौरान अचानक कुछ लोग खालिस्तान के झंडे लेकर अंदर घुस आए और नारेबाजी शुरू कर दी. इन लोगों ने भारत के खिलाफ भी नारे लगाए और दिलजीत पर बीजेपी और आरएसएस का एजेंट होने के आरोप लगाए. मौके पर मौजूद सिक्योरिटी टीम ने जब हालात संभालने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारी उनसे भिड़ गए. कुछ देर के लिए कॉन्सर्ट का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया, हालांकि बाद में स्थिति को काबू में कर लिया गया. सूत्रों के मुताबिक हंगामा करने वालों में पवनदीप सिंह बस्सी और मनदीप सिंह रवि नाम के दो लोग शामिल बताए जा रहे हैं. इन पर आरोप है कि ये सिख्स फोर जस्टिस (SFJ) से जुड़े हुए हैं, जो भारत में बैन संगठन है और इसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने आगे भी दिलजीत दोसांझ के शो में विरोध करने की चेतावनी दी है. हालांकि दिलजीत ने अभी तक खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई किसी भी नारेबाजी पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. सिंगर पिछले कुछ वक्त से ही गुरपतवंत सिंह पन्नू के निशाने पर नजर आए हैं. उन्होंने दिलजीत को कई बार धमकी दी, मगर सिंगर ने उसका असर अपने ऊपर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने हमेशा प्यार फैलाने की बात कही.

भारतीय संगीत का परचम ऑस्ट्रेलिया में लहराया: दिलजीत दोसांझ को Senate का विशेष सम्मान

भारतीय संगीत जगत के चमकते सितारे और पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ ने इतिहास रच दिया है। उनके रिकॉर्डतोड़ ‘Aura Tour’ को ऑस्ट्रेलियन संसद के ऊपरी सदन सीनेट (Senate) में आधिकारिक रूप से सम्मानित किया गया। सीनेटर पॉल स्कार (Paul Scarr) ने संसद में खड़े होकर दिलजीत दोसांझ की सराहना की और कहा कि उन्होंने पंजाबी संगीत, संस्कृति और भारतीय पहचान को वैश्विक मंच पर अभूतपूर्व ऊंचाई दी है। उन्होंने कहा-“दिलजीत दोसांझ सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक दूत हैं जिन्होंने पंजाबी और भारतीय समुदाय को गर्व महसूस करवाया है।”  ‘Aura Tour’ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड दिलजीत दोसांझ पहले भारतीय कलाकार बन गए जिन्होंने सिडनी के CommBank स्टेडियम और मेलबर्न के AAMI पार्क जैसे विश्वस्तरीय स्टेडियमों में सोल्ड-आउट कॉन्सर्ट्स किए।मेलबर्न शो में 40,000 से अधिक दर्शक मौजूद थे।ऑस्ट्रेलिया के छह शहरों में उनके शो के 90,000 से अधिक टिकटें कुछ घंटों में बिक गईं।इन प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया कि भारतीय और पंजाबी संगीत अब वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। “हम सब एक हैं”- सिख सिद्धांत से प्रेरित संदेश हर मंच से दिलजीत ने “हम सब एक हैं” का संदेश दिया, जो सिख धर्म के मूल सिद्धांत ‘इक ओंकार’-सब एक हैं की भावना को दर्शाता है।उनकी यह सोच और सरलता ने न सिर्फ भारतीय फैंस बल्कि विदेशी दर्शकों को भी गहराई से प्रभावित किया। नस्लभेदी टिप्पणियों का शालीन जवाब टूर की सफलता के बीच दिलजीत को सोशल मीडिया पर कुछ नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने उन्हें “उबर ड्राइवर” और “7/11 कर्मचारी” कहकर नीचा दिखाने की कोशिश की। दिलजीत ने इन टिप्पणियों पर संयम से जवाब देते हुए कहा-“अगर ट्रक ड्राइवर न हों, तो आपके घर तक रोटी नहीं पहुंचेगी।”उनकी इस प्रतिक्रिया ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया। ऑस्ट्रेलियन मंत्री ने मांगी माफी ऑस्ट्रेलिया के मल्टीकल्चरल अफेयर्स मंत्री जूलियन हिल ने सार्वजनिक रूप से दिलजीत से माफी मांगी और कहा-“ऐसी टिप्पणियां देश की बहुसांस्कृतिक भावना को ठेस पहुंचाती हैं। दिलजीत दोसांझ ने जिस गरिमा के साथ जवाब दिया, वह वास्तव में प्रेरणादायक है।” भारतीय संस्कृति का राजदूत दिलजीत दोसांझ ने कहा कि उनका यह टूर सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति को दुनिया के सामने गर्व से पेश करने का प्रयास है। “यह टूर सिर्फ मेरे फैंस के लिए नहीं, बल्कि भारत की संगीत परंपरा और हमारी पहचान को विश्व मंच पर मनाने के लिए है।”इससे पहले उनके ‘Dil-Luminati’ और ‘Born To Shine’ टूर ने लंदन, कनाडा और अमेरिका में भी रिकॉर्ड तोड़े थे। अब ‘Aura Tour’ ने ऑस्ट्रेलिया में नई मिसाल कायम की है।  

दिलजीत दोसांझ पर खालिस्तानी संगठन का निशाना, वजह बना अमिताभ बच्चन के पैर छूना

मुंबई  खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन, सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ द्वारा बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के पैर छूने के विरोध में 1 नवंबर को ऑस्ट्रेलिया में उनके कॉन्सर्ट को बंद करने की धमकी दी है। समूह का आरोप है कि यह कृत्य 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों की "स्मृति का अनादर" करता है। पन्नू ने एक बयान में कहा-  "अमिताभ बच्चन, जिनके शब्दों ने 1984 के नरसंहार को हवा दी, के पैर छूकर दिलजीत दोसांझ ने 1984 के सिख नरसंहार के हर पीड़ित, हर विधवा और हर अनाथ का अपमान किया है।" उन्होंने आगे कहा- "यह अज्ञानता नहीं, विश्वासघात है। जिन सिखों को ज़िंदा जला दिया गया, जिन महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, जिन बच्चों को क़त्ल किया गया, उनकी राख अभी ठंडी भी नहीं हुई है। कोई भी विवेकशील सिख 1 नवंबर, स्मृति दिवस पर कोई भी प्रदर्शन या उत्सव नहीं मना सकता।" सप्ताहांत में 'कौन बनेगा करोड़पति 17' में अपनी उपस्थिति के दौरान, सेट पर पहुंचते ही दोसांझ ने दिग्गज अभिनेता के पैर छुए। बच्चन, जिन्होंने गायक-अभिनेता का परिचय "पंजाब दे पुत्तर (पंजाब का बेटा)" कहकर कराया, ने उन्हें गले लगाकर दर्शकों की तालियां बटोरीं। यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है और यूजर्स दोसांझ की इस हरकत की जमकर तारीफ कर रहे हैं। दोसांझ के कॉन्सर्ट को बंद करने की धमकी के अलावा, प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ने जत्थेदार अकाल तख्त साहिब, ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि वे अभिनेता-गायक को तलब करें और 2010 के तख्त के उस आदेश के मद्देनजर अपने कृत्य पर सफाई दें, जिसमें नवंबर 1984 को "सिख नरसंहार माह" के रूप में मान्यता दी गई थी। एसएफजे ने सभी "सिख संस्थाओं, कलाकारों और दर्शकों से उन दंगों के प्रचार या लीपापोती से जुड़े किसी भी कार्यक्रम या सहयोग का बहिष्कार करने" का आह्वान किया है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद हुए थे। इस बीच, दोसांझ जो इस समय अपने ऑरा टूर के लिए ऑस्ट्रेलिया में हैं, ने सिडनी में एक स्टेडियम शो के सभी टिकट बेचने वाले पहले भारतीय कलाकार बनकर इतिहास रच दिया। शो के सभी टिकट बिक गए, कुछ टिकट तो 800 डॉलर प्रति टिकट तक बिक गए और 30,000 प्रशंसक उपस्थित हुए।