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पंजाब नगर निकाय चुनाव में AAP का दबदबा, 95 में 56 वार्डों पर जीत, विपक्ष को बड़ा झटका

चंडीगढ़  पंजाब में चार नगर निकायों के लिए हुए चुनावों के नतीजे घोषित हो गए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले आए इन चुनाव परिणामों में आम आदमी पार्टी (आप) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 95 में से 56 वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक बढ़त कायम रखी है। इससे पहले हुए निकाय चुनावों में भी आप ने बेहतर प्रदर्शन किया था और इस बार भी पार्टी ने अपना दबदबा बरकरार रखा। इन चुनावों के लिए पांच जुलाई को होशियारपुर, फाजिल्का और फिरोजपुर जिले के चार निकायों के कुल 95 वार्डों में मतदान हुआ था। इनमें होशियारपुर नगर निगम की 50 सीटों, जलालाबाद नगर परिषद की 17 सीटों, गुरुहरसहाय नगर परिषद की 15 सीटों और ममदोट नगर पंचायत की 13 सीटों के लिए मतदान कराया गया। घोषित परिणामों के अनुसार, चारों निकायों में आम आदमी पार्टी ने कुल 56 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को 26 सीटें मिलीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में सात सीटें आईं। भारतीय जनता पार्टी को तीन सीटों पर जीत मिली, वहीं तीन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। फिरोजपुर जिले में आप का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा फिरोजपुर जिले में आप का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। यहां 50 वार्डों में से 35 पर पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। कांग्रेस ने नौ सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को तीन सीटों पर सफलता मिली। तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।फाजिल्का के जलालाबाद नगर परिषद चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने बढ़त बनाए रखी। यहां 17 में से 12 सीटों पर आप ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को चार सीटें मिलीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल एक सीट जीतने में सफल रहा। इन चुनावों की एक खास बात यह भी रही कि कुल 11 उम्मीदवार पहले ही सर्वसम्मति से निर्वाचित घोषित हो चुके थे। इसके बाद शेष वार्डों के लिए मतदान कराया गया।विधानसभा चुनाव से पहले आए इन निकाय चुनाव परिणामों को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।चुनाव नतीजों ने एक बार फिर राज्य की स्थानीय राजनीति में आम आदमी पार्टी की मजबूत पकड़ साबित की है, जबकि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा को सीमित सफलता से संतोष करना पड़ा।  अकाली दल का नहीं खुला खाता  नगर निगम होशियारपुर के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए निगम पर कब्जा कर लिया है। पचास सीटों में से आप ने 35 सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। कांग्रेस नौ सीटें जीतने में कामयाब हुई है। भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। तीन वार्डों में आजाद प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। निगम चुनावों में अकाली दल बादल का खाता नहीं खुला है। वहीं बसपा भी जीत का स्वाद नहीं चख पाई। बता दें कि राज्य चुनाव आयोग की ओर से करवाए गए चुनाव में आप 50, कांग्रेस 50, भाजपा 44, शिरोमणि अकाली दल बादल 36 और बसपा ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था। नगर निगम में बहुमत के लिए 26 सीटों की जरूरत थी। आप के खाते में 35 सीटें आई हैं। निगम में आम आदमी पार्टी का ही मेयर बनेगा। विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस रहेगी। पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 43 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 34 सीटों का नुकसान हुआ है। भाजपा पिछले निगम चुनाव में चार सीटें जीती थी। इस बार उसके खाते में तीन सीटें आई थीं। भाजपा को एक सीट का नुकसान हुआ है। आप ने पिछले चुनाव में सिर्फ दो सीटें जीती थीं। इस चुनाव में आप को 33 सीटों का फायदा हुआ है। आप विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा गदगद नजर आए। उन्होंने कहा कि जनता ने आप सरकार के विकास कार्यों पर मोहर लगाई है। निगम में आप का मेयर बनेगा। विकास कार्यों में और ज्यादा तेजी लाई जाएगी। सुखबीर बादल के गढ़ जलालाबाद में भी ‘आप’ की बड़ी जीत आम आदमी पार्टी ने जलालाबाद नगर परिषद की 17 में से 12 सीटों पर भी जीत हासिल की है. पार्टी ने ‘X’ पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह क्षेत्र कभी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का गढ़ माना जाता था।  बदला राजनीतिक समीकरण सुखबीर सिंह बादल ने 2017 के विधानसभा चुनावों में जलालाबाद सीट पर भगवंत मान को हराया था. इसके बाद 2022 के चुनावों में आम आदमी पार्टी के नेता जगदीप कंबोज ने एसएडी प्रमुख को 30,930 वोटों के अंतर से हराने में कामयाबी हासिल की थी. इससे पहले मई महीने में भी, आम आदमी पार्टी ने आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी। 

USA Birthright Citizenship: ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अमेरिका में जन्मे पंजाबी बच्चों की नागरिकता बरकरार

जालंधर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को रद्द कर जन्मजात नागरिकता को बहाल कर दिया है। इससे अवैध रूप से रहे पंजाबी समुदाय के साथ प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के इस फैसले से अवैध रूप से या अस्थायी वीजा पर रह रहे पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में जन्मे बच्चों को अब पूर्ण नागरिकता का अधिकार मिल गया है। हर साल पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में करीब 8 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2024 तक एशियन मूल की माता-पिता की संख्या 66 हजार के करीब है। यहां सालाना 8 हजार के करीब भारतीय मूल के बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें ज्यादा संख्या पंजाबी समुदाय के बच्चों की है।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की अलग-अलग जगहों पर इस वक्त शरणार्थी वीजा पर या अवैध रूप से लगभग 7 लाख भारतीय रह रहे हैं, न्यूयार्क में रहने वालों में ज्यादातर पंजाबी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पंजाबी समुदाय के उन माता पिता को बड़ी राहत है जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा हुए हैं, लेकिन ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने से उनको स्थायी वीजा नहीं मिल पा रहा था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा- अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिक है। फैसले से पंजाबी समुदाय में खुशी इस फैसले से अमेरिका में बसे पंजाबी परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।  पंजाबी समुदाय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य राज्यों में रह रहे पंजाबी परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित होने वाले थे। समुदाय के लोग इसे संवैधानिक जीत मान रहे हैं। पंजाब से आने वाले प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस फैसले से उनकी अगली पीढ़ी को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाबी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकारी नौकरी, स्कूल में एडमिशन का फायदा मिलेगा पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।  हर साल पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में करीब 8 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2024 तक एशियन मूल की माता-पिता की संख्या 66 हजार के करीब है। यहां सालाना 8 हजार के करीब भारतीय मूल के बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें ज्यादा संख्या पंजाबी समुदाय के बच्चों की है। अमेरिका की अलग-अलग जगहों पर इस वक्त शरणार्थी वीजा पर या अवैध रूप से लगभग 7 लाख भारतीय रह रहे हैं। न्यूयार्क में रहने वालों में ज्यादातर पंजाबी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पंजाबी समुदाय के उन माता-पिता को बड़ी राहत है, जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा हुए हैं, लेकिन ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने से उन्हें स्थायी वीजा नहीं मिल पा रहा था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा- अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिक है। फैसले से पंजाबी समुदाय में खुशी इस फैसले से अमेरिका में बसे पंजाबी परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पंजाबी समुदाय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य राज्यों में रह रहे पंजाबी परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित होने वाले थे। समुदाय के लोग इसे संवैधानिक जीत मान रहे हैं। पंजाब से आने वाले प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस फैसले से उनकी अगली पीढ़ी को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाबी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकारी नौकरी, स्कूल में एडमिशन का फायदा मिलेगा पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पंजाब में खेती संकट, बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की तलाश में कई परिवार यहां बस रहे हैं। ऐसे में जन्म सिद्ध नागरिकता का अधिकार उनके बच्चों को अमेरिकी समाज में पूर्ण रूप से शामिल होने का मौका देगा। वे स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के ले सकेंगे। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला पंजाबी संस्कृति को अमेरिका में मजबूत करने में मदद करेगा। बच्चे अब अमेरिकी नागरिक के रूप में बड़े होंगे, लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। पंजाब में खेती संकट, बेरोजगारी और फ्यूचर की तलाश में कई परिवार यहां बस रहे हैं। ऐसे में जन्म सिद्ध नागरिकता का अधिकार उनके बच्चों को अमेरिकी समाज में पूर्ण रूप से शामिल होने का मौका देगा। वे स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के ले सकेंगे। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला पंजाबी संस्कृति को अमेरिका में मजबूत करने में मदद करेगा। बच्चे अब अमेरिकी नागरिक के रूप में बड़े होंगे लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। 150 साल पुराना था जन्मजात नागरिका का कानून अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को संवैधानिक रूप से नागरिकता का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने इस कानून को प्रशासनिक आर्डर से खत्म कर दिया था।  सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्मे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वहां मौजूद हैं, वे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि अवैध प्रवासियों और कुछ अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे यूएसए के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं, इसलिए उन्हें जन्म सिद्ध नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए।  150 साल पुराना था जन्मजात नागरिका का कानून अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को संवैधानिक रूप से नागरिकता का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने इस कानून को प्रशासनिक ऑर्डर से खत्म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्मे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वहां मौजूद हैं, वे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि अवैध प्रवासियों और कुछ अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे … Read more

36 लाख लोगों के खाते में पहुंचेगी राहत, पंजाब सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए जारी किए ₹1583 करोड़

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने राज्य के बुजुर्गों, विधवाओं, निराश्रित महिलाओं, अनाथ एवं आश्रित बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1,583 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। सरकार का कहना है कि इस राशि के माध्यम से लाखों पात्र लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्हें दैनिक जीवन की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सके। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने सोमवार को बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण योजनाओं के तहत कुल 6,131.91 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस बजट का उद्देश्य राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। हर व्यक्ति तक पहुंचे आर्थिक सहायता उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से पंजाब के लगभग 36 लाख लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी देरी के आर्थिक सहायता पहुंचे और किसी भी लाभार्थी को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक जारी की गई कुल राशि में से 1,048 करोड़ रुपये से अधिक बुजुर्ग पेंशन के रूप में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। 535 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी जारी इसके अलावा विधवाओं, बेसहारा महिलाओं, अनाथ एवं आश्रित बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत 535 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। डाॅ. बलजीत कौर ने कहा कि राज्य सरकार के लिए सामाजिक सुरक्षा केवल बजटीय प्रावधान नहीं, बल्कि जरूरतमंद वर्गों के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विभाग ने लाभ वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुचारु बनाया है, ताकि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक बिना किसी देरी के सहायता पहुंच सके।

वोटर लिस्ट अपडेट के लिए पंजाब में बड़ा अभियान, 86% मैपिंग पूरी; कल से शुरू होगा SIR

अमृतसर  पंजाब में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत राज्यभर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह अभियान 24 जुलाई तक चलेगा। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बुधवार को पंजाब भवन में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी। 2.14 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेगा चुनावी अमला मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, राज्य के 24,453 BLO अगले एक महीने तक घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे, उनका सत्यापन करेंगे और उन्हें वापस एकत्र करेंगे। इस दौरान पंजाब के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा। साथ ही मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। 3 अगस्त को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची अभियान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां 2 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा और 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। 86 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी बैठक के दौरान बताया गया कि पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दी गई है। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी अमनदीप गर्ग, संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी नवनीत कौर बल्ल समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आम आदमी पार्टी की ओर से फैरी सॉफ्ट, कांग्रेस की ओर से हरदीप सिंह किंगरा और हैप्पी खेड़ा, भाजपा की ओर से परमपाल कौर, शिरोमणि अकाली दल की ओर से एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर और नछत्तर सिंह गिल तथा बसपा की ओर से जसवंत राय और हरभजन सिंह उपस्थित रहे। इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने का प्रयास करेगा, ताकि आगामी चुनावों में पात्र मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।  

कनाडा से पंजाबियों को राहत! नए रिफ्यूजी नियम लागू, अवैध एंट्री के बाद भी मिलेगा असाइलम का मौका

जालंधर कनाडा में रह रहे पंजाबियों को कनाडा सरकार ने वीजा नियमों में राहत दी है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने बिल C-12 के तहत 6 नए नियम लागू किए हैं। नए नियमों के अनुसार अब कनाडा पहुंचने के 14 दिन के अंदर शरणार्थी का दावा किया जा सकता हैं।  IRCC के अनुसार, ये बदलाव सिस्टम में बढ़ रहे आवेदनों के बोझ को कम करने, प्रशासनिक देरी को समाप्त करने और इमिग्रेशन व्यवस्था सही करने के लिए किए गए हैं। इससे केवल जरूरतमंदों को समय पर सुरक्षा मिल सकेगी। इन बदलावों से जो लोग तय समय-सीमा के कारण अयोग्य माने जाएंगे, उनके लिए भी प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट (PRRA) का सुरक्षा विकल्प बरकरार रहेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी को भी ऐसे स्थान पर न भेजा जाए, जहां उसे जान का जोखिम हो। पहले रिफ्यूजी वीजा के लिए अप्लाई करने की सीमा एक साल थी। इससे इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास पेंडिंग मामलों का अंबार लग गया था। इससे वास्तविक जरूरतमंदों को भी सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कनाडा इमिग्रेशन के 6 प्रमुख बदलाव…     शरणार्थी दावे के लिए एक साल का नियम: अब कोई भी व्यक्ति कनाडा में आने के एक साल के भीतर ही शरण (Asylum claim) के लिए दावा कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति कनाडा में आने के एक साल बाद दावा करता है, तो उसके मामले को इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास नहीं भेजा जाएगा और वह अयोग्य माना जाएगा।     अवैध रूप से सीमा पार करने वालों के लिए 14 दिन की समय-सीमा: यदि कोई व्यक्ति अमेरिका से कनाडा की सीमा को आधिकारिक चेकपोस्ट से अलग किसी अन्य रास्ते से पार करता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर शरण का दावा करना अनिवार्य है। 14 दिनों के बाद किए गए दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।     आवेदन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण: शरणार्थी प्रणाली को तेज और आसान बनाने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार केवल उन्हीं आवेदनों को स्वीकार करेगी, जो पूरी तरह से दस्तावेजों के साथ तैयार होंगे, ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।     डेटा साझा करने का अधिकार: अब इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह शरणार्थियों से संबंधित जानकारी अन्य सरकारी विभागों (प्रांतीय और संघीय) के साथ साझा कर सके। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में बेहतर तालमेल बिठाना और सुरक्षा को पुख्ता करना है।     इमिग्रेशन दस्तावेजों में किया जा सकता बदलाव: जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार के पास अब वीजा, वर्क परमिट या स्टडी परमिट जैसे दस्तावेजों को रद्द करने, निलंबित करने या बदलने की व्यापक शक्तियां हैं। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार को संसद में इसकी जानकारी देनी होगी।     देश निकाले से पहले जोखिम का मूल्यांकन होगा: जो लोग नए नियमों के कारण शरण के लिए अयोग्य पाए जाते हैं, उनके लिए भी एक सुरक्षा विकल्प मौजूद है। इसे प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट कहते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी को भी ऐसे देश में वापस न भेजा जाए, जहां उसे जान का खतरा या उत्पीड़न का डर हो। आपराधिक मामले में छूट नहीं मिलेगी रिफ्यूजी के लिए वे लोग अप्लाई करते हैं जो कनाडा के नियम पूरे न करने पर (पूरा टैक्स न देने, पेपर क्लीयर न करने के कारण) अपना पीआर अप्लाई नहीं कर पाते। रिफ्यूजी के तहत बिना पीआर के भी रह सकते हैं। हालांकि, आपराधिक मामले में छूट नहीं मिलेगी।

मतदाता सूची की होगी बड़ी पड़ताल, पंजाब में आज से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू

चंडीगढ़  पंजाब में आज से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत 2 करोड़ 14 लाख 57 हजार 160 मतदाताओं की जांच की जाएगी। 1 अक्तूबर को फाइनल मतदाता सूची जारी की जाएगी। इस दौरान फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे। बीएलओ के प्रशिक्षण और संशोधन प्रक्रिया से जुड़ी गतिविधियों से इसकी शुरुआत की जा रही है जो 24 जून तक जारी रहेगी। राज्य में 25 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं के फॉर्म भरवाएंगे। प्रत्येक बीएलओ को औसतन 300 घर और 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा मतदाता सूची का मसौदा 3 अगस्त को प्रकाशित होगा। इसके बाद 3 अगस्त से 2 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के दौरान आधार कार्ड को केवल पहचान के स्रोत के रूप में माना जाएगा। इसे पहचान के अंतिम प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। बीएलओ फॉर्म देने के बाद उन्हें लेने के लिए मतदाताओं से तीन बार संपर्क करेंगे। सत्यापन के दौरान मतदाताओं की जन्मतिथि और पारिवारिक रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। जिन लोगों का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं था लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम दर्ज था, उनके दस्तावेज भी जांचे जाएंगे। मतदाता आयोग की वेबसाइट पर पुराने रिकॉर्ड चेक कर सकेंगे। आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 भरना होगा। वहीं ऐसे एनआरआई जिन्होंने किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं ली है वे फॉर्म-6ए भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा सकते हैं। 

सचिवालय धमकी मामले में बड़ी कार्रवाई: पश्चिम बंगाल का आरोपी दबोचा, मोबाइल-लैपटॉप खंगाल रही पुलिस

चंडीगढ़  जाब सिविल सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी एक युवक को वीरवार रात गिरफ्तार किया है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, मामले में थाना सेक्टर-3 में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान धमकी भरा ईमेल भेजने के आरोप में सौरव बिस्वास की गिरफ्तारी की गई। उसके खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। पश्चिम बंगाल में रहता आरोपी जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के पल्ली बाजार, गोबिंद पल्ली निवासी सौरव बिस्वास ने पंजाब सिविल सचिवालय की आधिकारिक ईमेल आईडी पर बम धमाके की धमकी वाला ईमेल भेजा था। ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस अलर्ट हो गईं तथा मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच, ईमेल ट्रैकिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने धमकी भरा ईमेल किस मकसद से भेजा था। इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। पूछताछ में होगा खुलासा गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने आरोपी सौरव बिस्वास को स्थानीय अदालत में पेश किया। मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने आरोपी का रिमांड मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से यह जानने का प्रयास करेगी कि उसने पंजाब सिविल सचिवालय को धमकी भरा ईमेल क्यों भेजा था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ईमेल भेजने के पीछे आरोपी का मकसद क्या था और क्या उसने यह काम अकेले किया या किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि धमकी वाला ईमेल किस डिवाइस और इंटरनेट कनेक्शन से भेजा गया था तथा कहीं इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या अन्य सहयोगी तो नहीं हैं। रिमांड के दौरान आरोपी से उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच की जा रही है। कई संस्थाओं को मिल चुकी धमकियां चंडीगढ़ में सरकारी और निजी स्कूलों, पासपोर्ट कार्यालय, पंजाब सचिवालय, चंडीगढ़ जिला अदालत, सेक्टर-17 बस स्टैंड, चंडीगढ़ नगर निगम तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को कई बार बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि, हर बार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई गहन जांच के दौरान किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। जांच में अब तक अधिकांश धमकियां अफवाह या फर्जी साबित हुई हैं।

‘मजीठिया कहां हैं?’ CM के बयान पर गनीव कौर का पलटवार, बोलीं- न भागे हैं, न भागेंगे

अमृतसर  अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के अंडरग्राउंड होने के मामले में सीएम भगवंत मान ने टिप्पणी की है। सीएम भगवंत सिंह मान ने उन पर तंज कसते हुए पूछा है कि अब वो मूछें नहीं दिख रही हैं, जिन पर ताव दिया जाता था। दरअसल, पुलिस कस्टडी से अपने समर्थक को छुड़वाने के आरोप में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिक्रम सिंह मजीठिया पर केस दर्ज कर पंजाब पुलिस की टीमें उन्हें तलाश रही है। वहीं सीएम के बयान पर मजीठिया की पत्नी और अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया ने कहा कि उनके पति न तो भागे हैं और न ही भागेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपनी कानूनी टीम के साथ संपर्क में हैं और इस मामले को अदालतों के ज़रिए आगे बढ़ाएंगे। कागजी शेर हैं मजीठिया मजीठिया पर तंज कसते हुए सीएम मान ने कहा कि अब उसकी मूंछें कहां गईं। उसे अब सामने आना चाहिए। मजीठिया माझे का जरनैल बनकर आगे आए मगर ये तो कागजी शेर हैं। इन्होंने लोगों को फंसाया और अब खुद फरार हो गया है। विदेश न भाग जाए, लिहाजा उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। सीएम ने कहा कि लोग जान गए हैं कि गुंडागर्दी इनके व्यवहार में शामिल है। ये लोग पुलिस के काम में किस तरह बाधा डाल रहा है, सबके सामने आ चुका है मगर इस मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। सीएम के अनुसार पुलिस मजीठिया को तलाश रही है। लापता होने के लगे पोस्टर उधर, मजीठा क्षेत्र में मजीठिया के लापता होने के पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में बिक्रम मजीठिया भगोड़े की तलाश लिखा गया है। पोस्टर में आगे लिखा कि अगर किसी को बिक्रम मजीठिया के बारे में कोई जानकारी हो तो वह इसकी सूचना पुलिस को दे ताकि कार्रवाई की जा सके। उल्लेखनीय है कि मजीठा थाने में पुलिस ने मजीठिया के खिलाफ केस दर्ज किया था। उन पर पुलिस के काम में बाधा डालते हुए अपने समर्थक को छुड़वाने का आरोप है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी जोबनप्रीत को फिर गिरफ्तार कर लिया था।  

पंजाब में फिर चला आम आदमी पार्टी का जादू, 8 में से 5 नगर निगमों पर किया कब्जा

चंडीगढ़  पंजाब के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति की दिशा तय करने के संकेत दे दिए हैं. चुनाव नतीजों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे मजबूत दल के रूप में उभरकर सामने आई है, जबकि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कुछ कम सफल रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर साफ दिखाई देगा।  नगर निगम, पंचायतों और परिषदों में AAP का दमदार प्रदर्शन शाम 8 बजे तक उपलब्ध नतीजों और रुझानों के अनुसार, AAP ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. आठ नगर निगमों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया. पार्टी ने बरनाला, मोहाली, मोगा, बठिंडा और बटाला नगर निगमों में जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस को कपूरथला नगर निगम में सफलता मिली. भाजपा ने अबोहर नगर निगम में जीत दर्ज की, जबकि पठानकोट नगर निगम में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी की जीत नगर परिषद चुनावों में भी AAP ने बढ़त बनाए रखी. राज्य की 75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी ने जीत हासिल की. कांग्रेस 18 परिषदों तक सीमित रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल को 10 परिषदों में जीत मिली. भाजपा के खाते में चार नगर परिषदें गईं, जबकि तीन परिषदों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।  11 नगर पंचायतों पर काबिज आम आदमी पार्टी नगर पंचायतों के नतीजों में भी आम आदमी पार्टी सबसे आगे रही. जिन 20 नगर पंचायतों में मतदान हुआ था, उनमें से 11 पर AAP ने जीत दर्ज की. कांग्रेस को पांच, शिरोमणि अकाली दल को दो और भाजपा को एक नगर पंचायत में सफलता मिली. एक सीट अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई।  अगर सभी 104 निकायों के कुल प्रदर्शन को देखा जाए तो आम आदमी पार्टी ने 56 निकायों में जीत हासिल कर अपना दबदबा कायम रखा है. कांग्रेस 24 निकायों में जीत दर्ज करने में सफल रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में 12 निकाय गए. भाजपा ने 6 निकायों में जीत हासिल की. वहीं पठानकोट नगर निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा देखने को मिला. राज्य के सभी 1,977 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें आम आदमी पार्टी ने 958 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ा दल बनने में सफलता हासिल की. कांग्रेस 397 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही. शिरोमणि अकाली दल को 192 वार्डों में जीत मिली, जबकि भाजपा ने 172 वार्डों पर कब्जा जमाया. वहीं 251 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवारों ने 7 वार्डों में जीत दर्ज की. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों के ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं. आम आदमी पार्टी इन परिणामों को अपनी सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के रूप में पेश कर सकती है. वहीं कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के लिए यह परिणाम संगठन को मजबूत करने और नई रणनीति तैयार करने का अवसर भी माना जा रहा है. ऐसे में पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने के आसार हैं।  कहां किसने दर्ज की जीत नगर निगम -8 आम आदमी पार्टी – 5 (बरनाला, मोहाली, मोगा, भटिंडा, बटाला) कांग्रेस – 1 (कपूरथला जीते) बीजेपी – 1  (अबोहर) पठानकोट – बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत नहीं। नगर काउंसिल – 75 आम आदमी पार्टी – 40 कांग्रेस – 18 शिरोमणि अकाली दल – 10 बीजेपी – 4 अन्य – 3 नगर पंचायत – 21 (एक पर कानूनी कारणों से चुनाव नहीं) – 20 आम आदमी पार्टी – 11 कांग्रेस – 5 शिरोमणि अकाली दल – 2 बीजेपी -1 अन्य -1 ओवरऑल पंजाब कुल निकाय – 104 आम आदमी पार्टी – 56 कांग्रेस – 24 बीजेपी – 6 शिरोमणि अकाली दल – 12 कुल वॉर्ड – 1977 नतीजे -1977 आम आदमी पार्टी – 958 कांग्रेस – 397 बीजेपी – 172 अकाली दल – 192 निर्दलीय – 251 बीएसपी – 7

105 निकाय चुनावों से तय होगी पंजाब की सियासी दिशा, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी एक्सरसाइज शुरू कर दी. इससे पहले सियासी दलों की अग्निपरीक्षा निकाय चुनावों में होनी है, जिसके लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है. यही वजह है कि पंजाब में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।   पंजाब की 105 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं, जहां पर 26 मई को मतदान है.  इन निकाय चुनावों का सीधा असर पंजाब के 117 विधानसभा सीटों में से करीब 90 सीट के सियासी समीकरणों पर पड़ेगा. निकाय चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव से पहले बहुत कुछ तय कर देंगे।  निकाय चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी अपने सियासी माहौल को बनाए रखने की कवायद करेगी, तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी जैसी पार्टियां अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए बेताब हैं. ऐसे में देखना है कि निकाय चुनाव में क्या किसका दबदबा रहता है?  पंजाब के 105 निकाय के लिए चुनाव  पंजाब के 105 सीटों के लिए निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जहां पर 26 मई को चुनाव जबकि नतीजे 29 मई को आएंगे. 105 नगर निकाय में 8 नगर निगमों, 76 नगर कौंसिल (नगर पालिका) और 21 नगर पंचायतों में चुनाव है. बठिंडा, मोहाली,होशियारपुर, मोगा, पठानकोट, बटाला, अबोहर और कपूरथला नगर निगम के पार्षद सीटों पर चुनाव है. ऐसे ही नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए भी अलग-अलग वार्डों में चुनाव है।  चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 105 नगर निकाय के लिए कुल  10,809 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे. इसमें 713 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद  10096 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए।  पंजाब के जिन 8 नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं, उसे अलग-अलग वार्डों (सीटों) पर पार्षदों के लिए 2003 उम्मीदवार बचे हैं.  76 नगर कौंसिल की सीटों के लिए 6,887 उम्मीदवार मैदान में है तो 21 नगर पंचायत के लिए मैदान में 1,206 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.  हालांकि, नामांकन वापस लिए जाने के बाद उम्मीदवारों के अंतिम आंकड़े सामने आ सकेंगे।  2027 चुनाव का सेमीफाइनल  पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है, जिसके चलते निकाय चुनाव को 2027 के सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. पंजाब का निकाय चुनाव सिर्फ मेयर या पार्षद चुनने का जरिया नहीं है. यह पंजाब की राजनीति का वो थर्मामीटर है, जो यह मापेगा कि सूबे में राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है. निकाय चुनाव के बाद सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों से प्रदेश के सियासी माहौल का पता चल सकेगा।  निकाय चुनाव में मिलने वाली हार जीत को सियासी दल अपने-अपने हिसाब से पेस करेंगे.  निकाय चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से ज्यादा शहरी मतदाताओं से जुड़े हुए हैं. इन चुनावों में 90 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों का टेस्ट होगा. सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है ताकि चुनाव से पहले जीत मिल सके और उसका फायदा विधानसभा चुनाव में पार्टियों को मिले।  किसके लिए कितना अहम बना चुनाव बीजेपी अब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है, जिसके लिए निकाय चुनाव काफी अहम है. राघव चड्डा सहित आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को बीजेपी ने अपने साथ मिलाने के बाद सियासी समीकरण को साधने की कवायद की है, लेकिन इन नेताओं की पहली अग्निपरीक्षा निकाय चुनाव में होनी है।  वहीं, पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए अपने सियासी साख को बचाए रखना के चुनाव माना जा रहा है.  'आप' प्रमुख शहरों के निगमों पर कब्जा बरकरार रखती है, तो 90 विधानसभा सीटों पर उसका कैडर मजबूत होगा. ऐसे में अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और विधायकों पर परफॉर्मेंस का दबाव दोगुना हो जाएगा।  कांग्रेस पंजाब में मुख्य विपक्षी दल है. लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. शहरी इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है. इन चुनावों में अगर कांग्रेस अच्छा करती है, तो वह 90 विधानसभा सीटों पर खुद को 'आप' के एकमात्र विकल्प के रूप में स्थापित कर लेगी।  वहीं, शिरमणि अकाली दल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, पार्टी के भीतर अंतर्कलह और नेतृत्व संकट जगजाहिर है. अकाली दल के लिए अर्ध-शहरी और कस्बाई इलाकों की सीटें बेहद अहम हैं. इन निकाय चुनावों में अगर अकाली दल खाता खोलने या सम्मानजनक सीटें पाने में नाकाम रहता है, तो कम से कम 40-50 विधानसभा सीटों पर उसका वजूद खतरे में पड़ जाएगा।