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पंजाब-चंडीगढ़ में आज मौसम रहेगा ड्राई, 25 सितंबर से बारिश की संभावना

चंडीगढ़  पंजाब से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हो गई है। मानसून की वापसी रेखा पटियाला और गुरदासपुर से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक से 2 दिनों में मानसून पंजाब के बाकी हिस्सों से निकलकर चंडीगढ़ और दिल्ली की ओर आगे बढ़ सकता है। वहीं आज 23 सितंबर को पूरे राज्य में मौसम ड्राई रहेगा। पश्चिमी हवाएं चल रही हैं, ऐसे में बादल नहीं बन पा रहे हैं। हालांकि, 25 सितंबर के आसपास पंजाब समेत कुछ इलाकों में बादल छाने और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक इसका मानसून की वापसी से कोई सीधा संबंध नहीं होगा। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार पिछले 24 घंटे में पंजाब के औसत तापमान में 0.1 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। तापमान सामान्य के करीब बना हुआ है। पटियाला में सबसे अधिक तापमान 35.4 डिग्री दर्ज किया गया। गर्मी मई के महीने जैसी बनी हुई है। इस बार पंजाब में मानसून सामान्य से 39% कम रहा है। इसका असर खेती, बिजली और भूजल पर पड़ सकता है। सुबह ही बिजली की डिमांड 12 हजार पार पंजाब में बिजली की मांग 12,990 मेगावाट रही। राज्य ने 7,437 मेगावाट बिजली ली, जबकि निर्धारित शेड्यूल 7,392 मेगावाट था। यानी पंजाब ने शेड्यूल से 45 मेगावाट ज्यादा बिजली ली। राज्य में बिजली का अपना उत्पादन 5,556 मेगावाट रहा, जबकि ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.82 हर्ट्ज दर्ज की गई।

किशाऊ समझौते से पंजाब बाहर, यमुना के पानी पर सरकार ने उठाए सवाल

चंडीगढ़  किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर विवाद बढ़ गया है। पंजाब सरकार अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। छह राज्यों के बीच हुए समझौते से पंजाब को बाहर रखा गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता नील गर्ग ने यह जानकारी दी। गर्ग ने कहा कि पंजाब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उनका कहना है कि यमुना के पानी में पंजाब के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। 15 सितंबर को नई दिल्ली में यह समझौता हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। पंजाब इस समझौते का हिस्सा नहीं बना। पंजाब को इस प्रक्रिया से बाहर रखना स्वीकार्य नहीं है। 1954 में पंजाब के यमुना संबंधी अधिकार स्वीकार किए गए थे। पंजाब पुनर्गठन के बाद भी ये अधिकार खत्म नहीं माने जा सकते। पंजाब की आपत्ति और कानूनी आधार गर्ग ने बताया कि पंजाब की गैरमौजूदगी में उसके हितों को प्रभावित करने वाला फैसला नहीं हो सकता। पंजाब को यमुना में उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए। 1954 के समझौते की अनदेखी का कोई कानूनी आधार नहीं है। पंजाब को विश्वास में नहीं लेना आपत्तिजनक है। यह मामला अब नए कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। क्या है किशाऊ बांध परियोजना किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस परियोजना में 1,562 दस लाख घन मीटर जल भंडारण की क्षमता होगी। समझौते के तहत हरियाणा को 633 एमसीएम पानी मिलेगा। उत्तर प्रदेश को 411 एमसीएम, राजस्थान को 124 एमसीएम और दिल्ली को 80 एमसीएम पानी आवंटित किया गया है। परियोजना के लाभ और केंद्र का सहयोग परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट होगी। इससे सालाना करीब 1,476 दस लाख यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होने का अनुमान है। लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।  केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसके वित्तीय बोझ का करीब 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी। यह परियोजना लंबे समय से अंतरराज्यीय जल बंटवारे के मतभेदों के कारण अटकी हुई थी।  किस राज्य को कितना पानी मिलेगा? परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है। क्या है किशाऊ परियोजना     किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर निर्मित की जाने वाली एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है।     टोंस नदी यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है।     इस परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट का गुरुत्व बांध बनाया जाएगा।     निर्माण कार्य पूरा होने पर यह टिहरी बांध के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बन जाएगा।     इस बांध से 660 मेगावॉट हरित ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा।     करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1561.91 मिलियन घन मीटर है।     परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है।     राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। क्या है किशाऊ परियोजना का उद्देश्य? हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। यह बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी। परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे बहुउद्देशीय लाभ सुनिश्चित करना है। यमुना को कैसे मिलेगा लाभ? किशाऊ बांध से बिजली और पानी के अलावा यमुना की सफाई करने में भी मदद मिलेगी। इससे मानसून के दौरान बाढ़ की विभीषिका को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। गर्मी के मौसम में टोंस और आगे चलकर यमुना नदी में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखा जा सकेगा, जिससे यमुना नदी को साफ करने के अभियान में मदद मिल सकेगी। छह दशक से क्यों अटका था किशाऊ? किशाऊ परियोजना स्थापित करने की योजना करीब छह दशक पहले बनी। परियोजना को लेकर शुरुआती स्तर पर स्थल, भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन हुआ। इसके बाद डीपीआर, लागत, जल बंटवारे और छह राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मुद्दे सामने आते गए। परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी मिला, लेकिन अंतरराज्यीय सहमति का पेंच नहीं सुलझ पाया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने आगे बढ़कर संयुक्त उपक्रम बनाया, मगर परियोजना को वास्तविक गति देने के लिए छह राज्यों के बीच व्यापक सहमति जरूरी थी। अब यही सबसे बड़ा अड़ंगा दूर होता दिखाई दे रहा है। किशाऊ में कितना पानी जमा होगा? नई डीपीआर ने परियोजना की तस्वीर काफी बदल दी है। बांध की ऊंचाई घटाकर 232.6 मीटर की गई है, लेकिन जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता बढ़ाकर 1561.91 एमसीएम कर दी गई है। पहले यह क्षमता करीब 1324 एमसीएम थी। यानी नई व्यवस्था में लगभग 237.81 एमसीएम अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा। लीटर में समझें तो यह करीब 23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी है। यही अतिरिक्त भंडारण मानसून के दौरान पानी को रोकने और गैर-मानसूनी महीनों में उसका इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाएगा। किशाऊ के आंकड़े एक नजर में बांध की ऊंचाई : 232.6 मीटर जीवंत भंडारण क्षमता : 1561.91 एमसीएम अतिरिक्त भंडारण : 237.81 एमसीएम स्थापित बिजली क्षमता : 422 मेगावाट औसत वार्षिक बिजली उत्पादन : 1457 मिलियन यूनिट पुराने मुकाबले अतिरिक्त उत्पादन : 78 मिलियन यूनिट प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र : लगभग 97,076 हेक्टेयर एमओयू में राज्य : छह

पंजाब चुनाव 2027: AAP, BJP, अकाली दल और कांग्रेस ने कसी कमर

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी शुरुआती रणनीति जमीन पर उतार दी है। आम आदमी पार्टी सरकार के करीब साढ़े चार साल के कामकाज और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने में जुटी है। भाजपा केंद्र और अन्य राज्यों में अपनी सरकारों के कामकाज को आधार बनाकर पंजाब में विकल्प पेश कर रही है।  शिरोमणि अकाली दल प्रकाश सिंह बादल की विरासत और अपने पारंपरिक पंथक आधार को मजबूत करने की कोशिश में है। कांग्रेस गुटबाजी से ऊपर उठकर एकजुटता का संदेश दे रही है। इस बीच दलों की यात्राओं, रैलियों और घर-घर संपर्क अभियानों का सिलसिला शुरू हो चुका है। आप : विकास मॉडल को घर-घर ले जाएगी वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार आप ने 2027 की तैयारी में सरकार के करीब साढ़े चार साल के रिपोर्ट कार्ड और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने पर फोकस किया है। पार्टी ने 20 सितंबर से राज्यव्यापी घर-घर संपर्क अभियान शुरू किया है। इसमें 2.68 लाख से अधिक बूथ कमेटी सदस्य हर परिवार तक पहुंचने की योजना के तहत काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धूरी से अभियान की शुरुआत की। भाजपा : ट्रैक रिकॉर्ड के सहारे दावेदारी भाजपा नेता सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के अनुसार पार्टी केंद्र और अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के कामकाज को जनता के सामने रख रही है। वह नक्सलवाद में कमी, उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ केंद्र की नीति को भाजपा के ट्रैक रिकॉर्ड के उदाहरण के तौर पर गिनाते हैं। उनका कहना है कि पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद की समस्या का समाधान भी भाजपा की डबल सरकार कर सकती है। भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा सभी 117 सीटों तक पहुंच रही है। शिअद : बड़े बादल की विरासत पर भरोसा शिरोमणि अकाली दल अपनी पारंपरिक सियासी जमीन मजबूत करने के लिए पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल की विरासत को प्रमुखता से सामने रख रहा है। पार्टी उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों से सीधे जुड़ाव को अपनी पहचान के तौर पर पेश कर रही है। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की रैलियों में अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख लगातार हो रहा है। पार्टी बड़े बादल की राजनीतिक विरासत के सहारे पुराने समर्थक वर्ग को फिर लामबंद करने के साथ अपनी क्षेत्रीय पहचान को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस : एकजुटता के संदेश के साथ मैदान में कांग्रेस राहुल गांधी के नाम और एकजुटता के संदेश के सहारे चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी सामूहिक नेतृत्व का संदेश दे रही है। 15 सितंबर के प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर रंधावा का एक मंच पर आना इसी रणनीति का हिस्सा रहा। पायलट ने चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर कार्यकर्ताओं और पंजाबियों को संदेश दिया कि चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व और सामूहिक ताकत के साथ लड़ा जाएगा।   

पाकिस्तान से आया हथियारों का जखीरा बरामद, फरीदकोट में 3 तस्कर गिरफ्तार

फरीदकोट फरीदकोट जिला पुलिस के सीआईए स्टाफ ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 पिस्टल बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमृतसर निवासी राजबीर सिंह उर्फ अमित, अमर सिंह उर्फ अमर और दीप सिंह उर्फ दीपक के रूप में हुई है।  पुलिस के अनुसार, गिरोह पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगवाने की गतिविधियों में शामिल है। पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर केंद्रीय मॉडर्न जेल के आसपास कार्रवाई कर आरोपियों को काबू किया। थाना सिटी फरीदकोट में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरोह के अन्य सदस्यों और हथियारों की सप्लाई नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस को बड़ी वारदात की साजिश से जुड़े अहम सुराग मिलने की संभावना है।  पुलिस को सूचना मिली कि तीन व्यक्ति भारी मात्रा में हथियार लेकर मॉडर्न केंद्रीय जेल फरीदकोट के आसपास के क्षेत्र में पैदल घूम रहे हैं। ये लोग कथित तौर पर हथियारों का इस्तेमाल किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने अथवा आगे सप्लाई करने की फिराक में थे। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों को काबू कर उनके कब्जे से 10 पिस्टल बरामद किए। इसके बाद थाना सिटी फरीदकोट में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आरोपितों की पहचान श्री अमृतसर साहिब निवासी राजबीर सिंह उर्फ अमित पुत्र भूपेंद्र सिंह, अमर सिंह उर्फ अमर पुत्र अमरीक सिंह तथा दीप सिंह उर्फ दीपक के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा अब आरोपितों से पूछताछ कर हथियारों के स्रोत, सीमा पार से हथियार मंगवाने के तरीके तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियारों की सप्लाई कहां की जानी थी और गिरोह में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। पिस्टल लेकर घूम रहे थे पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए उक्त तीनों आरोपियों को काबू कर लिया। उनसे 10 पिस्टल बरामद किए गए। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किस वारदात के लिए इस्तेमाल किए जाने थे और गिरोह के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। पुलिस की जांच जारी है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।  

विदेश में छिपे बदमाशों पर पंजाब का एक्शन, 12 गैंगस्टर्स की हुई डिपोर्टेशन

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने मंगलवार को कहा कि भगवंत मान सरकार के नशों और गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त अभियान ने इस लड़ाई को पंजाब की सीमाओं से बाहर पहुंचा दिया है। पंजाब पुलिस दुनिया भर से एक दर्जन से ज़्यादा गैंगस्टरों को वापस ला चुकी है, जिसमें हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई का करीबी करमवीर देव भी शामिल है, जिसे कनाडा से डिपोर्ट किए जाने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था। बलतेज पन्नू ने कहा कि अमेरिका, दुबई, मलेशिया से लेकर मोल्दोवा तक, मान सरकार ने पंजाब पुलिस को हाई-टेक बनाया है और अपराध रोकने और गैंगस्टरों का पीछा करने के लिए बेहतर इक्विपमेंट से लैस किया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि पंजाब में अपराध में शामिल कोई भी गैंगस्टर दुनिया के किसी भी कोने को सुरक्षित जगह नहीं मान सकता। मीडियाकर्मियों को किया संबोधित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “सत्ता में आने के बाद, भगवंत मान सरकार ने नशों और गैंगस्टरों के खिलाफ लड़ाई को प्राथमिकता दी है। हमने पंजाब में एक्टिव क्रिमिनल नेटवर्क को खत्म करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की हैं और विदेश भागे गैंगस्टरों का भी पीछा किया है।” विपक्ष पर निशाना साधते हुए आप पंजाब मीडिया इंचार्ज ने कहा, "विपक्ष के पास पंजाब के लोगों को देने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह बार-बार मुद्दे उठाकर पंजाब सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और संगठित अपराध के खिलाफ़ हो रही कार्रवाई को नज़रअंदाज़ कर रहा है।" बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब का इतिहास बताता है कि 2007-2017 के समय में गैंगस्टरवाद में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने कहा, "अगर हम पंजाब में गैंगस्टरवाद के इतिहास को देखें, तो 2007-2017 के समय में यह घटना काफ़ी बढ़ गई थी। यह वह समय था जब 'गैंगस्टर' शब्द पंजाब की पहचान और पब्लिक डिस्कोर्स का हिस्सा बन गया था।" उन्होंने कहा कि 2017-2022 की कांग्रेस सरकार के दौरान भी यही हाल रहा। उन्होंने कहा, "इन नेटवर्क को खत्म करने के बजाय, कांग्रेस सरकार ने उत्तर प्रदेश से एक गैंगस्टर को पंजाब की जेल में लाकर वीआईपी सुविधाएं दीं। उत्तर प्रदेश सरकार को उसकी वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।" गैंगस्टरों के खिलाफ हो रही लगातार कार्रवाई: बलतेज पन्नू भगवंत मान सरकार के तरीके से इसकी तुलना करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, "हमने यह तरीका बदल दिया है। पंजाब पुलिस ने गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई शुरू की और उनके विदेश भागने के बाद भी उनका पीछा करती रही। पंजाब पुलिस की लगातार कोशिशों की वजह से अब तक एक दर्जन से ज़्यादा गैंगस्टर विदेश से वापस लाए जा चुके हैं।" उन्होंने कहा कि वापस लाए गए गैंगस्टरों में सचिन बिश्नोई, मनप्रीत सिंह उर्फ पीता, रमनजीत सिंह उर्फ रोमी, परमिंदर सिंह उर्फ पिंडी, अनमोल बिश्नोई, अमृतपाल उर्फ मेहरो, गुरविंदर सिंह और जोबनदीप सिंह उर्फ जोबन बिल्ला शामिल हैं। बलतेज पन्नू ने कहा, "अनमोल बिश्नोई, जिसे बड़े गैंगस्टर में से एक माना जाता है और लॉरेंस बिश्नोई का करीबी साथी है, उसे अमेरिका से वापस लाया गया। अमृतपाल उर्फ मेहरो, जिस पर विदेश भागने से पहले एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर की हत्या का आरोप है, उसे दुबई से लाया गया। गुरविंदर सिंह को मलेशिया से लाया गया था।" उन्होंने आगे कहा, "दो दिन पहले, एजीटीएफ टीम गैंगस्टर अमृतपाल उर्फ अमृत ढल्लम को मोल्डोवा से वापस लाई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने टीम से मुलाकात की और उनके प्रयासों की तारीफ की।" करमवीर देव की वापसी का प्रोसेस पूरा हो गया: बलतेज पन्नू बलतेज पन्नू ने कहा कि एक और बड़े गैंगस्टर करमवीर सिंह उर्फ करमवीर देव (देव) को भी पंजाब वापस लाने का प्रोसेस पूरा हो गया है। उन्होंने कहा, "करमवीर सिंह उर्फ करमवीर देव, जिसे देव के नाम से भी जाना जाता है, लॉरेंस बिश्नोई का करीबी साथी है। उसे कनाडा से डिपोर्ट किया गया है और दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के बाद एजीटीएफ टीम उसे पंजाब ला रही है।" " बलतेज पन्नू ने कहा, "यह मान सरकार के ढृढ़ संकल्प को दिखाता है कि पंजाब में अपराध में शामिल कोई भी गैंगस्टर दुनिया के किसी भी हिस्से को अपनी सुरक्षित जगह नहीं मान सकता।" पंजाब पुलिस को मजबूत करने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, "पंजाब सरकार ने पंजाब पुलिस को बहुत मजबूत और मॉडर्न बनाया है। यह सिर्फ़ बेहतर गाड़ियां देने तक सीमित नहीं है। हमने अपने जवानों को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट से लैस किया है।

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 1,234 गैंगस्टर मॉड्यूल ध्वस्त; विदेशों से 10 भगोड़ों को लाया गया भारत

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए अब तक की गई पुलिस कार्रवाई के आंकड़े साझा किए हैं। सरकार की ओर से सोमवार को ‘गैंगस्टरों पर वार’ और ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इस दौरान गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों पर पंजाब पुलिस ने अब तक 1,234 गैंगस्टर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इसके साथ ही विदेशों में छिपे 10 भगोड़ों को डिपोर्ट करवाकर भारत लाया गया है। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य पंजाब में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना और अपराध पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाना है। नशा तस्करी के रूट पर भाजपा को घेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने नशे की तस्करी को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट पर ध्यान दिया जाए तो पंजाब में नशे की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस ने मुंद्रा पोर्ट से नशे की बड़ी खेप बरामद की है और करीब 3,000 किलो नशा वहां जब्त किया गया था। मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से तस्करी रोकना मुख्य रूप से केंद्र की जिम्मेदारी है, फिर भी पंजाब सरकार ने अपने फंड से एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 532 किलोमीटर लंबी सीमा के पार से पंजाब में नशा भेजने की कोशिशें जारी हैं। उनके मुताबिक सरकार ने केवल गिरफ्तारियों पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि नशा और गैंगस्टर नेटवर्क की पहचान, सप्लाई चेन को तोड़ने, वित्तीय माध्यमों को रोकने और अपराधियों को कानून के कठघरे में लाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के कार्रवाई कर रही है। विपक्ष पर 'गिद्धों वाली राजनीति' का आरोप मान ने कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा पर पंजाब को लेकर सकारात्मक एजेंडा पेश करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए घटनाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्ष की राजनीति को 'गिद्धों वाली राजनीति' बताते हुए कहा कि लोग विवाद नहीं, समाधान चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस और अकाली दल पर पहले गैंगस्टरों को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को कुछ घटनाओं के आधार पर बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य देश का प्रवेश द्वार और भारत का गौरव है। सरकार पंजाब को सुरक्षित, नशामुक्त और खुशहाल बनाने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगी तथा किसी भी शरारती तत्व को राज्य की शांति और सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। मान ने बताया कि 2022 से एजीटीएफ ने 1.24 लाख गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की है। उनके अनुसार 1,170 हथियार, 15 हथगोले, 858.26 किलो हेरोइन, 480.26 किलो अफीम, 3,056.85 ग्राम सोना और 1.28 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने दूसरे देशों से 18 गैंगस्टरों को डिपोर्ट कराया है। उन्होंने कहा कि सरकार का रोडमैप स्पष्ट है और नशों, गैंगस्टरों तथा संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 60,582 एफआईआर दर्ज की गई हैं। नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ वित्तीय कार्रवाई करते हुए करीब 366 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।सरकार ने दावा किया कि पंजाब में फिलहाल अमन-शांति पूरी तरह कायम है और राज्य की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।   पंजाब की शांति और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और पंजाब की धरती पर अपराध तथा नशे के नेटवर्क को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा।

पंजाब में बिजली संकट गहराया, 10-11 घंटे तक कटौती; राजपुरा में 3 तो तलवंडी साबो में 7 दिन का कोयला

जालंधर पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी। बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी। शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है।  पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही।  थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी। इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है। इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है। इन प्लांटों की यूनिटें बंद पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं। शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है। मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे। 5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं। बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले … Read more

पंजाब में कर्मचारियों की हड़ताल से सरकारी कामकाज प्रभावित, लुधियाना में हाईवे पर लगा जाम

चंडीगढ़  लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश के बाद कर्मचारी संगठनों ने अब 11 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के इस फैसले से आने वाले दिनों में सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए नो वर्क नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का आदेश जारी कर दिया। कार्यालयों में होगी जनता को परेशानी साथ ही, ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कई कर्मचारी कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद काम के दौरान कार्यालयों से अनुपस्थित हो जाते हैं। इससे आम जनता को परेशानी होती है। बसों के चक्का जाम की चेतावनी  पंजाब रोडवेज, पनबस और पी. आर. टी. से. काट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री के साथ 8 सितम्बर को बैठक तय की गई थी, लेकिन मंत्री ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बैठक को 9 सितम्बर तक टाल दिया है। रेशम सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि यूनियन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लगातार लंबित रखने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 9 सितम्बर को दोपहर 12 बजे तक परिवहन मंत्री के साथ बैठक का समय तय नहीं किया गया तो यूनियन पंजाब में बसों का चक्का जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देगी। क्यों हो रहा आंदोलन? इसे "अनधिकृत अनुपस्थिति" मान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। कर्मचारी आंदोलन के पिछले चरण में सरकार ने 2,500 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए थे। कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

नशा, अपराध और भ्रष्टाचार के बीच चुनावी मुद्दा बनेगा कर्मचारियों का बकाया DA, पंजाब में बढ़ेगी सियासी गर्मी

चंडीगढ़  पंजाब के विधानसभा चुनाव में इस बार नशे, अपराध और भ्रष्टाचार के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों के बकाया डीए का मुद्दा भी खूब उछलेगा। इस मुद्दे पर सियासत खासी तेज है। विरोधी सियासी दल जहां इसे भुनाते हुए खुद को कर्मचारियों की सबसे हितैषी पार्टी बताने की होड़ में हैं। वहीं, मान सरकार इस विवाद को संभालते हुए चुनाव से पहले इसे हर हाल में खत्म कर कर्मचारियों को साधना चाहती है। पंजाब में करीब सवा तीन लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जबकि चार लाख पेंशनर हैं। सरकारी कर्मचारियों व पेंशनरों का डीए विवाद वर्ष 2016 से लंबित बकाये से जुड़ा है। छठे वेतन आयोग के तहत करीब 14191 करोड़ रुपये की देनदारी थी। सरकार ने फरवरी 2025 में पांच वित्त वर्षों में भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान बनाया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का दावा है कि इसके तहत सरकार करीब 4500 करोड़ रुपये कर्मचारियों का बकाया चुका चुकी है। अब करीब 9691 करोड़ रुपये बाकी हैं। दूसरी ओर, 1 जुलाई 2021 के बाद की डीए/डीआर (महंगाई भत्ता व महंगाई राहत) की किस्तों पर भी विवाद है। हाईकोर्ट ने इसी साल तीन अगस्त को लिक्विडेशन प्लान खारिज कर पूरा बकाया 15 दिन में चुकाने, देरी पर छह प्रतिशत ब्याज और गैर-जरूरी खर्च रोकने का आदेश दिया था। सरकार ने इसे वित्तीय रूप से और वैधानिक तौर पर असंभव बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। मुद्दा रहेगा असरदार यह मुद्दा चुनाव में खासा असरदार रहेगा। राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह बताते हैं कि यह मामला सीधे पंजाब के करीब सवा सात लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवारों से जुड़ा है। यह बड़ा और निर्णायक मतदाता वर्ग है। अभी विरोधी दल कर्मचारियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े हैं। यदि मान सरकार ने इसे जल्द नहीं निपटाया तो विरोधी पार्टियां निश्चित तौर पर इसे अपने-अपने घोषणा पत्रों में शामिल करेंगी।  

पंजाब सरकार का बड़ा ऐलान, फूड ग्रेन पॉलिसी को मिली हरी झंडी; अस्पतालों में 151 पदों को मंजूरी

चंडीगढ़  पंजाब कैबिनेट की बैठक  चंडीगढ़ में सीएम भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने बैठक के बाद फैसलों के बारे में जानकारी दी।  चीमा ने बताया कि बैठक में पीपीएससी ग्रुप-1 रेगुलेशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा बैठक में नई भर्तियां निकालने पर भी चर्चा हुई। बैठक में पंजाब फूड ग्रेन ट्रांसपोर्ट पालिसी को हरी झंडी दे दी गई। चमकौर साहिब अस्पताल में 33, मलेरकोटला व धूरी के अस्पतालों में 19 व डेंटल विभाग में 80 पदों को भरने की मंजूरी भी कैबिनेट की बैठक में दे दी गई। हरपाल चीमा ने बताया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अब तक युवाओं को 71 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं।   मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में 251 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी गई। इनमें चमकौर साहिब के उपमंडलीय अस्पताल के लिए 33, मालेरकोटला के स्वास्थ्य विभाग के लिए 19, चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 तथा उपमंडलीय अस्पतालों और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब लोक सेवा आयोग में ग्रुप-ए के नियमों में संशोधन और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि नए पदों के सृजन का उद्देश्य सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की कमी दूर करना और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। चमकौर साहिब के उपमंडलीय अस्पताल में 33 पद सृजित किए गए हैं। सरकार के अनुसार इससे अस्पताल में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी दूर होगी और क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। मालेरकोटला में स्वास्थ्य प्रशासन होगा मजबूत मालेरकोटला में स्वास्थ्य विभाग के लिए 19 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सहायक सिविल सर्जन और जिला परिवार कल्याण अधिकारी सहित अन्य पद शामिल हैं। नया जिला बनने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन को मजबूत करने के लिए इन पदों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पद प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिकित्सा अधिकारियों और दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पदों को मंजूरी दी गई। वहीं, उपमंडलीय अस्पतालों और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद सृजित किए गए हैं। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक स्टाफ उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। कैबिनेट ने खाद्यान्न से जुड़ी नीतियों को भी मंजूरी दी। इनमें पंजाब कस्टम मिलिंग नीति, खरीद विपणन सीजन-2026, पंजाब खाद्यान्न ढुलाई नीति-2027 और पंजाब खाद्यान्न श्रम एवं कार्टेज नीति-2027 शामिल हैं। सरकार के अनुसार इन नीतियों से खरीद, ढुलाई और श्रम व्यवस्था को सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। कैबिनेट के अहम फैसले      पंजाब लोक सेवा आयोग में ग्रुप-ए के नियमों में संशोधन और नए पदों का सृजन।      चमकौर साहिब उपमंडलीय अस्पताल में 33 नए पद।      मालेरकोटला स्वास्थ्य विभाग में 19 नए पद।      चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पद।      उपमंडलीय अस्पतालों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद।      पंजाब कस्टम मिलिंग नीति और खरीद विपणन सीजन-2026 को मंजूरी।      पंजाब खाद्यान्न ढुलाई नीति-2027 तथा खाद्यान्न श्रम एवं कार्टेज नीति-2027 को स्वीकृति।