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वोटर लिस्ट अपडेट के लिए पंजाब में बड़ा अभियान, 86% मैपिंग पूरी; कल से शुरू होगा SIR

अमृतसर  पंजाब में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत राज्यभर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह अभियान 24 जुलाई तक चलेगा। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बुधवार को पंजाब भवन में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी। 2.14 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेगा चुनावी अमला मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, राज्य के 24,453 BLO अगले एक महीने तक घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे, उनका सत्यापन करेंगे और उन्हें वापस एकत्र करेंगे। इस दौरान पंजाब के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा। साथ ही मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। 3 अगस्त को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची अभियान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां 2 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा और 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। 86 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी बैठक के दौरान बताया गया कि पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दी गई है। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी अमनदीप गर्ग, संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी नवनीत कौर बल्ल समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आम आदमी पार्टी की ओर से फैरी सॉफ्ट, कांग्रेस की ओर से हरदीप सिंह किंगरा और हैप्पी खेड़ा, भाजपा की ओर से परमपाल कौर, शिरोमणि अकाली दल की ओर से एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर और नछत्तर सिंह गिल तथा बसपा की ओर से जसवंत राय और हरभजन सिंह उपस्थित रहे। इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने का प्रयास करेगा, ताकि आगामी चुनावों में पात्र मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।  

कनाडा से पंजाबियों को राहत! नए रिफ्यूजी नियम लागू, अवैध एंट्री के बाद भी मिलेगा असाइलम का मौका

जालंधर कनाडा में रह रहे पंजाबियों को कनाडा सरकार ने वीजा नियमों में राहत दी है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने बिल C-12 के तहत 6 नए नियम लागू किए हैं। नए नियमों के अनुसार अब कनाडा पहुंचने के 14 दिन के अंदर शरणार्थी का दावा किया जा सकता हैं।  IRCC के अनुसार, ये बदलाव सिस्टम में बढ़ रहे आवेदनों के बोझ को कम करने, प्रशासनिक देरी को समाप्त करने और इमिग्रेशन व्यवस्था सही करने के लिए किए गए हैं। इससे केवल जरूरतमंदों को समय पर सुरक्षा मिल सकेगी। इन बदलावों से जो लोग तय समय-सीमा के कारण अयोग्य माने जाएंगे, उनके लिए भी प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट (PRRA) का सुरक्षा विकल्प बरकरार रहेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी को भी ऐसे स्थान पर न भेजा जाए, जहां उसे जान का जोखिम हो। पहले रिफ्यूजी वीजा के लिए अप्लाई करने की सीमा एक साल थी। इससे इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास पेंडिंग मामलों का अंबार लग गया था। इससे वास्तविक जरूरतमंदों को भी सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कनाडा इमिग्रेशन के 6 प्रमुख बदलाव…     शरणार्थी दावे के लिए एक साल का नियम: अब कोई भी व्यक्ति कनाडा में आने के एक साल के भीतर ही शरण (Asylum claim) के लिए दावा कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति कनाडा में आने के एक साल बाद दावा करता है, तो उसके मामले को इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास नहीं भेजा जाएगा और वह अयोग्य माना जाएगा।     अवैध रूप से सीमा पार करने वालों के लिए 14 दिन की समय-सीमा: यदि कोई व्यक्ति अमेरिका से कनाडा की सीमा को आधिकारिक चेकपोस्ट से अलग किसी अन्य रास्ते से पार करता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर शरण का दावा करना अनिवार्य है। 14 दिनों के बाद किए गए दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।     आवेदन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण: शरणार्थी प्रणाली को तेज और आसान बनाने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार केवल उन्हीं आवेदनों को स्वीकार करेगी, जो पूरी तरह से दस्तावेजों के साथ तैयार होंगे, ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।     डेटा साझा करने का अधिकार: अब इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह शरणार्थियों से संबंधित जानकारी अन्य सरकारी विभागों (प्रांतीय और संघीय) के साथ साझा कर सके। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में बेहतर तालमेल बिठाना और सुरक्षा को पुख्ता करना है।     इमिग्रेशन दस्तावेजों में किया जा सकता बदलाव: जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार के पास अब वीजा, वर्क परमिट या स्टडी परमिट जैसे दस्तावेजों को रद्द करने, निलंबित करने या बदलने की व्यापक शक्तियां हैं। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार को संसद में इसकी जानकारी देनी होगी।     देश निकाले से पहले जोखिम का मूल्यांकन होगा: जो लोग नए नियमों के कारण शरण के लिए अयोग्य पाए जाते हैं, उनके लिए भी एक सुरक्षा विकल्प मौजूद है। इसे प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट कहते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी को भी ऐसे देश में वापस न भेजा जाए, जहां उसे जान का खतरा या उत्पीड़न का डर हो। आपराधिक मामले में छूट नहीं मिलेगी रिफ्यूजी के लिए वे लोग अप्लाई करते हैं जो कनाडा के नियम पूरे न करने पर (पूरा टैक्स न देने, पेपर क्लीयर न करने के कारण) अपना पीआर अप्लाई नहीं कर पाते। रिफ्यूजी के तहत बिना पीआर के भी रह सकते हैं। हालांकि, आपराधिक मामले में छूट नहीं मिलेगी।

मतदाता सूची की होगी बड़ी पड़ताल, पंजाब में आज से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू

चंडीगढ़  पंजाब में आज से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत 2 करोड़ 14 लाख 57 हजार 160 मतदाताओं की जांच की जाएगी। 1 अक्तूबर को फाइनल मतदाता सूची जारी की जाएगी। इस दौरान फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे। बीएलओ के प्रशिक्षण और संशोधन प्रक्रिया से जुड़ी गतिविधियों से इसकी शुरुआत की जा रही है जो 24 जून तक जारी रहेगी। राज्य में 25 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं के फॉर्म भरवाएंगे। प्रत्येक बीएलओ को औसतन 300 घर और 1200 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा मतदाता सूची का मसौदा 3 अगस्त को प्रकाशित होगा। इसके बाद 3 अगस्त से 2 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के दौरान आधार कार्ड को केवल पहचान के स्रोत के रूप में माना जाएगा। इसे पहचान के अंतिम प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। बीएलओ फॉर्म देने के बाद उन्हें लेने के लिए मतदाताओं से तीन बार संपर्क करेंगे। सत्यापन के दौरान मतदाताओं की जन्मतिथि और पारिवारिक रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। जिन लोगों का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं था लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम दर्ज था, उनके दस्तावेज भी जांचे जाएंगे। मतदाता आयोग की वेबसाइट पर पुराने रिकॉर्ड चेक कर सकेंगे। आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 भरना होगा। वहीं ऐसे एनआरआई जिन्होंने किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं ली है वे फॉर्म-6ए भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा सकते हैं। 

सचिवालय धमकी मामले में बड़ी कार्रवाई: पश्चिम बंगाल का आरोपी दबोचा, मोबाइल-लैपटॉप खंगाल रही पुलिस

चंडीगढ़  जाब सिविल सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी एक युवक को वीरवार रात गिरफ्तार किया है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, मामले में थाना सेक्टर-3 में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान धमकी भरा ईमेल भेजने के आरोप में सौरव बिस्वास की गिरफ्तारी की गई। उसके खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। पश्चिम बंगाल में रहता आरोपी जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के पल्ली बाजार, गोबिंद पल्ली निवासी सौरव बिस्वास ने पंजाब सिविल सचिवालय की आधिकारिक ईमेल आईडी पर बम धमाके की धमकी वाला ईमेल भेजा था। ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस अलर्ट हो गईं तथा मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच, ईमेल ट्रैकिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने धमकी भरा ईमेल किस मकसद से भेजा था। इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। पूछताछ में होगा खुलासा गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने आरोपी सौरव बिस्वास को स्थानीय अदालत में पेश किया। मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने आरोपी का रिमांड मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से यह जानने का प्रयास करेगी कि उसने पंजाब सिविल सचिवालय को धमकी भरा ईमेल क्यों भेजा था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ईमेल भेजने के पीछे आरोपी का मकसद क्या था और क्या उसने यह काम अकेले किया या किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि धमकी वाला ईमेल किस डिवाइस और इंटरनेट कनेक्शन से भेजा गया था तथा कहीं इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या अन्य सहयोगी तो नहीं हैं। रिमांड के दौरान आरोपी से उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच की जा रही है। कई संस्थाओं को मिल चुकी धमकियां चंडीगढ़ में सरकारी और निजी स्कूलों, पासपोर्ट कार्यालय, पंजाब सचिवालय, चंडीगढ़ जिला अदालत, सेक्टर-17 बस स्टैंड, चंडीगढ़ नगर निगम तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को कई बार बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि, हर बार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई गहन जांच के दौरान किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। जांच में अब तक अधिकांश धमकियां अफवाह या फर्जी साबित हुई हैं।

‘मजीठिया कहां हैं?’ CM के बयान पर गनीव कौर का पलटवार, बोलीं- न भागे हैं, न भागेंगे

अमृतसर  अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के अंडरग्राउंड होने के मामले में सीएम भगवंत मान ने टिप्पणी की है। सीएम भगवंत सिंह मान ने उन पर तंज कसते हुए पूछा है कि अब वो मूछें नहीं दिख रही हैं, जिन पर ताव दिया जाता था। दरअसल, पुलिस कस्टडी से अपने समर्थक को छुड़वाने के आरोप में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिक्रम सिंह मजीठिया पर केस दर्ज कर पंजाब पुलिस की टीमें उन्हें तलाश रही है। वहीं सीएम के बयान पर मजीठिया की पत्नी और अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया ने कहा कि उनके पति न तो भागे हैं और न ही भागेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपनी कानूनी टीम के साथ संपर्क में हैं और इस मामले को अदालतों के ज़रिए आगे बढ़ाएंगे। कागजी शेर हैं मजीठिया मजीठिया पर तंज कसते हुए सीएम मान ने कहा कि अब उसकी मूंछें कहां गईं। उसे अब सामने आना चाहिए। मजीठिया माझे का जरनैल बनकर आगे आए मगर ये तो कागजी शेर हैं। इन्होंने लोगों को फंसाया और अब खुद फरार हो गया है। विदेश न भाग जाए, लिहाजा उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। सीएम ने कहा कि लोग जान गए हैं कि गुंडागर्दी इनके व्यवहार में शामिल है। ये लोग पुलिस के काम में किस तरह बाधा डाल रहा है, सबके सामने आ चुका है मगर इस मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। सीएम के अनुसार पुलिस मजीठिया को तलाश रही है। लापता होने के लगे पोस्टर उधर, मजीठा क्षेत्र में मजीठिया के लापता होने के पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में बिक्रम मजीठिया भगोड़े की तलाश लिखा गया है। पोस्टर में आगे लिखा कि अगर किसी को बिक्रम मजीठिया के बारे में कोई जानकारी हो तो वह इसकी सूचना पुलिस को दे ताकि कार्रवाई की जा सके। उल्लेखनीय है कि मजीठा थाने में पुलिस ने मजीठिया के खिलाफ केस दर्ज किया था। उन पर पुलिस के काम में बाधा डालते हुए अपने समर्थक को छुड़वाने का आरोप है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी जोबनप्रीत को फिर गिरफ्तार कर लिया था।  

पंजाब में फिर चला आम आदमी पार्टी का जादू, 8 में से 5 नगर निगमों पर किया कब्जा

चंडीगढ़  पंजाब के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति की दिशा तय करने के संकेत दे दिए हैं. चुनाव नतीजों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे मजबूत दल के रूप में उभरकर सामने आई है, जबकि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कुछ कम सफल रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर साफ दिखाई देगा।  नगर निगम, पंचायतों और परिषदों में AAP का दमदार प्रदर्शन शाम 8 बजे तक उपलब्ध नतीजों और रुझानों के अनुसार, AAP ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. आठ नगर निगमों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया. पार्टी ने बरनाला, मोहाली, मोगा, बठिंडा और बटाला नगर निगमों में जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस को कपूरथला नगर निगम में सफलता मिली. भाजपा ने अबोहर नगर निगम में जीत दर्ज की, जबकि पठानकोट नगर निगम में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी की जीत नगर परिषद चुनावों में भी AAP ने बढ़त बनाए रखी. राज्य की 75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी ने जीत हासिल की. कांग्रेस 18 परिषदों तक सीमित रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल को 10 परिषदों में जीत मिली. भाजपा के खाते में चार नगर परिषदें गईं, जबकि तीन परिषदों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।  11 नगर पंचायतों पर काबिज आम आदमी पार्टी नगर पंचायतों के नतीजों में भी आम आदमी पार्टी सबसे आगे रही. जिन 20 नगर पंचायतों में मतदान हुआ था, उनमें से 11 पर AAP ने जीत दर्ज की. कांग्रेस को पांच, शिरोमणि अकाली दल को दो और भाजपा को एक नगर पंचायत में सफलता मिली. एक सीट अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई।  अगर सभी 104 निकायों के कुल प्रदर्शन को देखा जाए तो आम आदमी पार्टी ने 56 निकायों में जीत हासिल कर अपना दबदबा कायम रखा है. कांग्रेस 24 निकायों में जीत दर्ज करने में सफल रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में 12 निकाय गए. भाजपा ने 6 निकायों में जीत हासिल की. वहीं पठानकोट नगर निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा देखने को मिला. राज्य के सभी 1,977 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें आम आदमी पार्टी ने 958 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ा दल बनने में सफलता हासिल की. कांग्रेस 397 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही. शिरोमणि अकाली दल को 192 वार्डों में जीत मिली, जबकि भाजपा ने 172 वार्डों पर कब्जा जमाया. वहीं 251 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवारों ने 7 वार्डों में जीत दर्ज की. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों के ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं. आम आदमी पार्टी इन परिणामों को अपनी सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के रूप में पेश कर सकती है. वहीं कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के लिए यह परिणाम संगठन को मजबूत करने और नई रणनीति तैयार करने का अवसर भी माना जा रहा है. ऐसे में पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने के आसार हैं।  कहां किसने दर्ज की जीत नगर निगम -8 आम आदमी पार्टी – 5 (बरनाला, मोहाली, मोगा, भटिंडा, बटाला) कांग्रेस – 1 (कपूरथला जीते) बीजेपी – 1  (अबोहर) पठानकोट – बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत नहीं। नगर काउंसिल – 75 आम आदमी पार्टी – 40 कांग्रेस – 18 शिरोमणि अकाली दल – 10 बीजेपी – 4 अन्य – 3 नगर पंचायत – 21 (एक पर कानूनी कारणों से चुनाव नहीं) – 20 आम आदमी पार्टी – 11 कांग्रेस – 5 शिरोमणि अकाली दल – 2 बीजेपी -1 अन्य -1 ओवरऑल पंजाब कुल निकाय – 104 आम आदमी पार्टी – 56 कांग्रेस – 24 बीजेपी – 6 शिरोमणि अकाली दल – 12 कुल वॉर्ड – 1977 नतीजे -1977 आम आदमी पार्टी – 958 कांग्रेस – 397 बीजेपी – 172 अकाली दल – 192 निर्दलीय – 251 बीएसपी – 7

105 निकाय चुनावों से तय होगी पंजाब की सियासी दिशा, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी एक्सरसाइज शुरू कर दी. इससे पहले सियासी दलों की अग्निपरीक्षा निकाय चुनावों में होनी है, जिसके लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है. यही वजह है कि पंजाब में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।   पंजाब की 105 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं, जहां पर 26 मई को मतदान है.  इन निकाय चुनावों का सीधा असर पंजाब के 117 विधानसभा सीटों में से करीब 90 सीट के सियासी समीकरणों पर पड़ेगा. निकाय चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव से पहले बहुत कुछ तय कर देंगे।  निकाय चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी अपने सियासी माहौल को बनाए रखने की कवायद करेगी, तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी जैसी पार्टियां अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए बेताब हैं. ऐसे में देखना है कि निकाय चुनाव में क्या किसका दबदबा रहता है?  पंजाब के 105 निकाय के लिए चुनाव  पंजाब के 105 सीटों के लिए निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जहां पर 26 मई को चुनाव जबकि नतीजे 29 मई को आएंगे. 105 नगर निकाय में 8 नगर निगमों, 76 नगर कौंसिल (नगर पालिका) और 21 नगर पंचायतों में चुनाव है. बठिंडा, मोहाली,होशियारपुर, मोगा, पठानकोट, बटाला, अबोहर और कपूरथला नगर निगम के पार्षद सीटों पर चुनाव है. ऐसे ही नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए भी अलग-अलग वार्डों में चुनाव है।  चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 105 नगर निकाय के लिए कुल  10,809 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे. इसमें 713 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद  10096 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए।  पंजाब के जिन 8 नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं, उसे अलग-अलग वार्डों (सीटों) पर पार्षदों के लिए 2003 उम्मीदवार बचे हैं.  76 नगर कौंसिल की सीटों के लिए 6,887 उम्मीदवार मैदान में है तो 21 नगर पंचायत के लिए मैदान में 1,206 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.  हालांकि, नामांकन वापस लिए जाने के बाद उम्मीदवारों के अंतिम आंकड़े सामने आ सकेंगे।  2027 चुनाव का सेमीफाइनल  पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है, जिसके चलते निकाय चुनाव को 2027 के सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. पंजाब का निकाय चुनाव सिर्फ मेयर या पार्षद चुनने का जरिया नहीं है. यह पंजाब की राजनीति का वो थर्मामीटर है, जो यह मापेगा कि सूबे में राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है. निकाय चुनाव के बाद सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों से प्रदेश के सियासी माहौल का पता चल सकेगा।  निकाय चुनाव में मिलने वाली हार जीत को सियासी दल अपने-अपने हिसाब से पेस करेंगे.  निकाय चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से ज्यादा शहरी मतदाताओं से जुड़े हुए हैं. इन चुनावों में 90 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों का टेस्ट होगा. सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है ताकि चुनाव से पहले जीत मिल सके और उसका फायदा विधानसभा चुनाव में पार्टियों को मिले।  किसके लिए कितना अहम बना चुनाव बीजेपी अब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है, जिसके लिए निकाय चुनाव काफी अहम है. राघव चड्डा सहित आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को बीजेपी ने अपने साथ मिलाने के बाद सियासी समीकरण को साधने की कवायद की है, लेकिन इन नेताओं की पहली अग्निपरीक्षा निकाय चुनाव में होनी है।  वहीं, पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए अपने सियासी साख को बचाए रखना के चुनाव माना जा रहा है.  'आप' प्रमुख शहरों के निगमों पर कब्जा बरकरार रखती है, तो 90 विधानसभा सीटों पर उसका कैडर मजबूत होगा. ऐसे में अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और विधायकों पर परफॉर्मेंस का दबाव दोगुना हो जाएगा।  कांग्रेस पंजाब में मुख्य विपक्षी दल है. लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. शहरी इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है. इन चुनावों में अगर कांग्रेस अच्छा करती है, तो वह 90 विधानसभा सीटों पर खुद को 'आप' के एकमात्र विकल्प के रूप में स्थापित कर लेगी।  वहीं, शिरमणि अकाली दल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, पार्टी के भीतर अंतर्कलह और नेतृत्व संकट जगजाहिर है. अकाली दल के लिए अर्ध-शहरी और कस्बाई इलाकों की सीटें बेहद अहम हैं. इन निकाय चुनावों में अगर अकाली दल खाता खोलने या सम्मानजनक सीटें पाने में नाकाम रहता है, तो कम से कम 40-50 विधानसभा सीटों पर उसका वजूद खतरे में पड़ जाएगा।     

बच्चे की दर्दनाक घटना के बाद अलर्ट मोड में पंजाब, खुले बोरवेल पर सख्त आदेश

होशियारपुर (घुम्मन). यहां के चक समाना गांव में एक बच्चे के बोरवेल में गिरने की घटना के बाद, डिप्टी कमिश्नर ने शनिवार को संबंधित विभागों को जिले भर में खुले बोरवेल की तुरंत पहचान करने और उन्हें ठीक से ढकने और कैपिंग करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए। सर्वे अगले सात दिनों में पूरा हो जाएगा। आदेशों के अनुसार, खुले और छोड़े गए बोरवेल इंसानी जीवन, खासकर बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने सभी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), तहसीलदार, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO), म्युनिसिपल काउंसिल, नगर कमेटियों और नगर पंचायतों को ग्रामीण और शहरी इलाकों सहित अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे सभी बोरवेल की तुरंत पहचान करने का निर्देश दिया। संबंधित एजेंसियों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए, डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि संबंधित विभाग और एजेंसियां ​​यह सुनिश्चित करें कि निर्देशों को पूरी सतर्कता के साथ लागू किया जाए। इसी तरह, शहरी इलाकों में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और काउंसिल को अपनी सीमा के अंदर ऐसे बोरवेल का सर्वे करने का निर्देश दिया गया है। कोई भी व्यक्ति, एजेंसी या डिपार्टमेंट जो इस ऑर्डर को मानने में लापरवाही करेगा, उस पर डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 और दूसरे लागू कानूनों, ऑर्डर के तहत सज़ा हो सकती है।

उम्मीदवारों के लिए नए निर्देश जारी, पंजाब में चुनाव प्रचार पर चुनाव आयोग की कड़ी नजर

बरनाला  राज्य चुनाव आयोग पंजाब के दिशा-निर्देशों के तहत नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव 26 मई को करवाए जाएंगे। चुनावों की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है। जिला चुनाव अधिकारी हरप्रीत सिंह ने सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनाव आचार संहिता का पूरी तरह पालन करने के आदेश दिए हैं।  जिला चुनाव अधिकारी ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार को धर्म, जाति या समुदाय के नाम पर वोट मांगने की अनुमति नहीं होगी। धार्मिक स्थलों का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए करने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी उम्मीदवार के निजी जीवन से जुड़े अप्रमाणित आरोप लगाने या भड़काऊ बयान देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। सरकारी इमारतों में नहीं होगा प्रचार प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार कोई भी उम्मीदवार या समर्थक बिना अनुमति सरकारी इमारतों या सरकारी संपत्ति पर पोस्टर, बैनर या होर्डिंग नहीं लगाएगा। निजी संपत्ति पर प्रचार सामग्री लगाने के लिए संपत्ति मालिक की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसकी प्रति संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करवानी होगी। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार सामग्री जैसे पोस्टर और पंपलेट पर छापने वाले और प्रकाशित करने वाले व्यक्ति का नाम और पता लिखना जरूरी होगा। इसके अलावा जनसभाओं, रैलियों और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के लिए पहले संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। स्पीकरों के प्रयोग को किया सीमित जिला चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अनुमति मिलने के बाद भी स्पीकरों का उपयोग केवल सुबह सात बजे से रात दस बजे तक ही किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त मतदाताओं को किसी प्रकार का लालच, उपहार या शराब बांटने पर पूरी तरह रोक रहेगी। निर्देशों के अनुसार मतदान केंद्र के 100 मीटर दायरे में किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकेगा। किसी भी उम्मीदवार या उसके समर्थकों को ऐसी गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है, जिससे विभिन्न धर्मों, जातियों या समुदायों के बीच तनाव या नफरत फैलने की आशंका हो। विरोधियों के घरों के बाहर नहीं लगा पाएंगे धरने प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोधी उम्मीदवारों के घरों के सामने प्रदर्शन या धरना देने की अनुमति नहीं होगी। किसी अन्य उम्मीदवार की चुनावी सभा में बाधा डालना भी चुनाव कानून के तहत अपराध माना जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से अपील की कि वे चुनाव आचार संहिता का पालन करते हुए शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव करवाने में प्रशासन का सहयोग करें।

बठिंडा में शुकराना यात्रा के दौरान सीएम का BJP पर निशाना, बंगाल की स्थिति को बताया उदाहरण

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत मान की शुकराना यात्रा का आज तीसरा दिन है। जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट अमेंडमेंट 2026 के लागू होने के बाद सीएम पूरे पंजाब में यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दाैरान बठिंडा में मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधा। शहर के अमरीक सिंह रोड पर लोगों को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां पर बुरा हाल हो चुका है। मान ने कहा कि पंजाब में कुछ पार्टियां आपसी भाईचारक सांझ को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन पंजाब के लोग बहुत समझदार हैं। फिर भी राज्य के लोग ऐसी पार्टियों से सचेत रहें। मान ने कहा कि परमात्मा ने उन्हें हिम्मत दी, जिस कारण वे बेअदबी का इंसाफ देने के लिए कानून बनाने में कामयाब हुए।   अपनी चार दिवसीय शुक्राना यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले, मान ने जालंधर के ओल्ड बारादरी स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से कहा: “पंजाब की कठिन परिश्रम से अर्जित शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को कोई भंग नहीं कर सकता। पंजाब एक उपजाऊ भूमि है जहाँ कोई भी फसल उगाई जा सकती है, लेकिन नफरत के बीज यहाँ नहीं बोए जा सकते। हालिया विस्फोट पंजाब में भाजपा के प्रवेश के संकेत हैं।” मान ने इन घटनाओं को पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनावोत्तर भाषणों से जोड़ा और उनके नारे "बंगाल सरकार हमारी है, अब पंजाब की बारी है" का हवाला दिया। उन्होंने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों को सांप्रदायिक संगठन बताया और कहा कि पंजाब, जिसने AK-47 के दौर को पार कर लिया है, अपनी "मजबूत भाईचारे" के बल पर आज भी दृढ़ है। जांच बनाम आरोप मुख्यमंत्री के दावे पुलिस के मौजूदा रुख के विपरीत हैं। जहां मान ने बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर और खासा सेना छावनी के पास हुए विस्फोटों के लिए भाजपा की "कार्यशैली" को जिम्मेदार ठहराया, वहीं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये विस्फोट पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रायोजित आईईडी विस्फोट थे। इन टिप्पणियों पर तुरंत तीखी प्रतिक्रिया हुई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मान को कानूनी नोटिस भेजकर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। भाजपा ने इन आरोपों को राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलताओं से ध्यान भटकाने का "दुर्भावनापूर्ण प्रयास" बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि जब एक संवेदनशील आतंकी जांच चल रही हो, तब किसी राजनीतिक दल पर आरोप लगाना "खतरनाक" है। चुघ ने कहा कि मान ने बिना किसी सबूत के भाजपा पर संलिप्तता का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए चुघ ने कहा, "इसीलिए उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि, झूठी सूचना फैलाने और जन अशांति भड़काने के प्रयास के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।" “सवाल सीधा सा है: क्या मुख्यमंत्री पंजाब की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, या वे राष्ट्रविरोधी ताकतों को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं? जिस दिन पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर हमारे सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य का जश्न मना रहा है, उस दिन भाजपा जैसी लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी पार्टी को विस्फोटों से जोड़ने का मान का प्रयास न केवल एक राजनीतिक झूठ है, बल्कि लाखों भारतीयों के जनादेश और विश्वास का अपमान है,” चुघ ने कहा। उन्होंने कहा कि अगर मान सात दिनों के भीतर अपना बयान वापस नहीं लेते और सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी दोनों तरह की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी। जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम के पारित होने के उपलक्ष्य में शुरू की गई मान की शुक्राना यात्रा 9 मई को फतेहगढ़ साहिब में समाप्त होने वाली है।