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पंजाब में DA को लेकर कर्मचारियों का विरोध जारी, केंद्र के बराबर वेतन-भत्ते के ऑफर पर भी नहीं माने

अमृतसर  पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे डीए विवाद के बीच मान सरकार ने कर्मचारियों को नया ऑफर दिया है। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीरवार को दावा किया कि पंजाब सरकार सूबे के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन प्लस डीए देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केवल केंद्र के डीए प्रतिशत की नकल करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को केंद्र के बराबर करने के लिए तैयार है।  वित्तमंत्री ने दावा किया कि पंजाब अपने राजस्व का 51 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। साथ ही पंजाब में कर्मचारियों का वेतन पड़ोसी राज्य हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों से अधिक है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा कि डीए के बकाया भुगतान के लिए सरकार ने लिक्विडेशन प्लान बनाया हुआ है। इसके तहत चरणबद्ध भुगतान योजना के तहत बकाया डीए का किस्तों में भुगतान किया जा रहा है और आगे भी इसी तरह किया जाता रहेगा। मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह बकाया शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के कार्यकाल का है, जिसे आम आदमी पार्टी की सरकार डीए की दर बढ़ाते हुए चुका रही है। लिहाजा कर्मचारियों को सरकार का सहयोग करना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। उन्हें विपक्षी दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सरकार कर्मचारियों के साथ फिर बातचीत के लिए तैयार है। क्या है लिक्विडेशन प्लान? पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के छठे वेतन आयोग के तहत लंबित डीए/डीआर के करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान तैयार किया है। इसके तहत सरकार ने पूरी राशि एकमुश्त देने के बजाय पांच वित्तीय वर्षों (2024-25 से 2028-29) में चरणबद्ध तरीके से भुगतान का प्रस्ताव रखा है। वित्तमंत्री का दावा है कि बकाये की अदायगी मासिक किस्तों के जरिये की जा रही है। इसके तहत पेंशनभोगियों के लिए उम्र के आधार पर अलग-अलग किस्तों का प्रावधान किया गया था। 85 वर्ष से अधिक उम्र वालों को दो, 75 से 85 वर्ष वालों को 12 और 75 वर्ष से कम उम्र वालों को 42 मासिक किस्तों में भुगतान की रूपरेखा बनाई गई है। अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में इस लिक्विडेशन प्लान को रद्द कर 14 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। केंद्र-पंजाब के वेतन और डीए में फर्क – पंजाब में क्लर्क इस वक्त 42 प्रतिशत डीए के हिसाब से टेक होम यानी हाथ में आने वाला शुद्ध वेतन 54,812 रुपये प्राप्त करते हैं जबकि केंद्र के अधीन क्लर्कों को 60 प्रतिशत डीए के साथ 36,960 रुपये वेतन मिलता है। – इसी तर्ज पर पंजाब के ड्राइवर 40,612 रुपये वेतन पाते हैं जबकि केंद्र के ड्राइवरों को 36,960 रुपये मिलते हैं। – पंजाब के स्टेनोग्राफर का वेतन 56,374 रुपये है जबकि केंद्र का 47,360 रुपये। – पंजाब के ईटीटी टीचर का 67,592 रुपये वेतन मिल रहा है जबकि केंद्र के टीचरों का वेतन 65,760 रुपये है। – पंजाब के पुलिस कांस्टेबल 54,812 रुपये वेतन पाते हैं, जबकि केंद्र के 36,960 रुपये। – सरकार यदि पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर 60 प्रतिशत डीए देती है तो कर्मियों का वेतन और बढ़ जाएगा। कर्मचारियों का कड़ा रुख बकाया डीए के लिए संघर्ष कर रही पंजाब कर्मचारियों की विभिन्न जत्थेबंदियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समन्वयक सुखचैन सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने कहा कि कर्मचारी किसी भी तरह से गुमराह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पंजाब सरकार का लिक्विडेशन प्लान रद्द करते हुए बकाया डीए के भुगतान का आदेश दे चुका है। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसके अलावा आंदोलन के तहत कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लेने के बावजूद उनके खिलाफ अनधिकृत रूप से अवकाश लेने पर कार्रवाई के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट से याचिका तथा कार्रवाई के नोटिस वापस नहीं लेगी, तब तक कर्मचारी किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हैं।  वेतन और डीए पर सरकार ने बताए छह प्रमुख तथ्य – पंजाब के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वालों में पंजाब सरकार के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं। राज्य की अधिक बेसिक-पे संरचना के कारण कई प्रमुख श्रेणियों में पंजाब के कर्मचारियों का टेक-होम वेतन उनके केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में अधिक है। – राजस्व का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च पंजाब अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। इसके मुकाबले अखिल भारतीय औसत 38% है। – तीन किस्तों में डीए में 14% की बढ़ोतरी भगवंत मान सरकार ने नवंबर 2021 में डीए को 28% से बढ़ाकर नवंबर 2024 में 42% किया है। तीन किस्तों में हुई इस बढ़ोतरी के तहत अक्टूबर 2022 में डीए 34%, दिसंबर 2023 में 38% और नवंबर 2024 में 42% किया गया। – 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी विरासत में मिली तथ्य पत्र के अनुसार, लगभग 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी 2016-21 की अवधि से संबंधित है और पिछली कांग्रेस तथा अकाली-भाजपा सरकारों से विरासत में मिली है। – विरासत में मिले बकाये में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भगवंत मान सरकार ने विरासत में मिले डीए बकाये को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है और कर्मचारियों तथा पेंशनरों को इस देनदारी में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। – 60% डीए करने पर सालाना 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पंजाब में डीए को 60% करने पर राज्य के सरकारी खजाने पर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ेगा। इसके लिए इसे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर होने वाले खर्च के साथ संतुलित करना होगा। क्या बोले मंत्री? – वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि … Read more

पंजाब चुनाव में CM फेस का कितना असर? 1997 से 2022 तक के नतीजे दे रहे बड़ा संकेत

चंडीगढ़ पंजाब के विधानसभा चुनावों से पहले सीएम चेहरा घोषित करने का भी ट्रेंड रहा है। यह पैटर्न असरदार तो रहता है मगर इसे निर्णायक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मजबूत सीएम फेस के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और अनुकूल राजनीतिक माहौल भी जीत के लिए बड़ा आधार बनते हैं। कमजोर चेहरों और पार्टी विरोधी लहर की वजह से दलों ने नुकसान भी झेला है। साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनावों में ट्रेंड देखें तो अधिकतर दलों ने सीएम फेस पर ही चुनाव लड़े और उन्हें फायदा भी मिला। इन चुनावों में सीएम फेस के साथ-साथ मुद्दे भी अहम रहे। इसके अलावा दलों ने जातीय समीकरणों को भी साधते हुए अपने सीएम फेस घोषित किए। अब फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के दौरान भी दलों की ओर से सीएम फेस पर मंथन जारी है। अभी तक आम आदमी पार्टी अपना सीएम फेस घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की रणनीति अबकी इस दिशा में अलग है। सीएम फेस के साथ चुनाव लड़ने के पैटर्न को यदि देखें तो साल 1997 में प्रकाश सिंह बादल शिअद-भाजपा गठबंधन के प्रमुख चेहरे थे। मुद्दे भी असरदार रहे, लिहाजा पार्टी को जीत हासिल हुई। साल 2002 के चुनाव में शिअद की ओर से बादल ही चेहरा थे, मगर कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रमुख चेहरा बनाकर मैदान में उतारा। सत्ता विरोधी लहर भी थी। नतीजतन बादल हार गए और कैप्टन अमरिंदर सीएम बने। साल 2007 और 2012 में शिअद-भाजपा गठबंधन ने प्रकाश सिंह बादल के नाम और सरकार के काम पर चुनाव लड़ा। इस दौरान कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही प्रमुख चेहरा बनाया गया। पहले चुनाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी माहौल, मजबूत ग्रामीण-सिख आधार, अकाली दल का संगठन और गठबंधन का सामाजिक समीकरण जीत का आधार बना, जबकि 2012 में बादल के चेहरे और उनकी पहली पारी के विकास कार्यों पर मतदाताओं ने फिर मुहर लगाई।  नतीजतन लगातार दूसरी जीत हासिल हुई। साल 2017 में भी मुकाबले में बादल और कैप्टन ही प्रमुख चेहरों के तौर पर आमने-सामने थे, मगर 10 साल की शिअद-भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, नशे, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। हालांकि प्रकाश सिंह बादल का व्यक्तिगत कद बड़ा था, लेकिन सरकार के खिलाफ नाराजगी की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन का नुकसान हुआ। साल 2022 में बने थे नए समीकरण साल 2022 में कांग्रेस ने दलित चेहरे पर दांव खेलते हुए दो बार के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर छह माह के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाया। ‘साड्डा चन्नी-साड्डा सीएम’ नारा भी दिया गया, मगर कांग्रेस की अंदरूनी कलह और आम आदमी पार्टी के वादों ने सत्ता पलट दी। आप ने अपने वादों और गारंटियों के साथ भगवंत सिंह मान को प्रमुख चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा। नतीजतन भगवंत मान की लोकप्रियता ने चन्नी के दलित कार्ड को पीछे छोड़ दिया। साल 2027 के लिए क्या? आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल साल 2027 के लिए भगवंत सिंह मान को सीएम फेस घोषित कर चुके हैं। कांग्रेस ने 2027 के लिए अब तक किसी एक नेता को औपचारिक मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। इसी मुद्दे पर अंदरूनी कलह के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल कह चुके हैं कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ेगी। जीत के बाद राहुल गांधी सीएम फेस तय करेंगे।  शिरोमणि अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल चुनावी तैयारी में सक्रिय हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा भी की है मगर पार्टी की ओर से औपचारिक सीएम फेस की घोषणा अभी नहीं हुई है। भाजपा भी साफ कर चुकी है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जीते तो संभवतः जट सिख चेहरे को सीएम बनाया जाएगा।   

पंजाब में खेलों का महासंग्राम, 10 लाख खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे; QR कोड से होगा पंजीकरण

पटियाला पंजाब सरकार ने ‘खेडां वतन पंजाब दियां-2026’ की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। खेलों का चौथा सत्र पांच सितंबर को बठिंडा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम से शुरू होगा। इसमें करीब 10 लाख खिलाड़ी 38 खेलों में हिस्सा लेंगे। पहली बार चार पैरा खेल भी प्रतियोगिता का हिस्सा होंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क और आसान बनाई गई है। खेल विभाग ने पहली बार क्यूआर कोड आधारित पंजीकरण की सुविधा शुरू की है। खिलाड़ी किसी भी समय और कहीं से भी महज 15 सेकंड में पंजीकरण कर सकेंगे। पंजीकरण खेल विभाग की वेबसाइट के माध्यम से भी किया जा सकता है। इस सत्र में 14 वर्ष से 70 वर्ष से अधिक आयु तक के नौ आयु वर्गों में मुकाबले होंगे। पैरा खेलों में एथलेटिक्स, पावरलिफ्टिंग, बैडमिंटन और व्हीलचेयर बास्केटबॉल शामिल हैं। राज्य स्तरीय पदक विजेताओं को स्वर्ण के लिए 10 हजार रुपये, रजत के लिए सात हजार और कांस्य के लिए पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। प्रतियोगिताओं का समापन 29 नवंबर को पटियाला में होगा।  9 आयु वर्ग, 16 जिलों में राज्य स्तरीय आयोजन इस सीजन में 14 साल से लेकर 70 साल से अधिक उम्र तक के नौ आयु वर्गों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। खेल पंजाब के सभी 153 ब्लॉकों में कराए जाएंगे, जिला स्तरीय मुकाबले 23 जिलों में होंगे और राज्य स्तरीय खेल 16 जिलों में आयोजित होंगे। खेलों का समापन 29 नवंबर को पटियाला में होगा। खास बात यह है कि पहली बार लड़कों और लड़कियों, दोनों के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया है, ताकि उभरते खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिल सके। विजेताओं के लिए आकर्षक इनाम राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने वालों को 10,000 रुपये, रजत के लिए 7,000 रुपये और कांस्य के लिए 5,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। सीएम मान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे आयोजन को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। पहली बार लड़के-लड़कियों का क्रिकेट पहली बार लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया है। प्रतियोगिताएं पंजाब के सभी 153 ब्लॉकों और 23 जिलों में होंगी। राज्य स्तरीय मुकाबले 16 जिलों में आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों का उद्देश्य गांवों, कस्बों और शहरों की छिपी प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।  अमृतसर जिले में ‘खेडां वतन पंजाब दियां-2026’ के ब्लॉक स्तरीय मुकाबले 8 सितंबर से 17 सितंबर तक दो चरणों में करवाए जाएंगे। इन प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी नेशनल स्टाइल, कबड्डी सर्कल स्टाइल, वॉलीबॉल स्मैशिंग, वॉलीबॉल शूटिंग और खो-खो के मुकाबले शामिल होंगे। इस वर्ष टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शन खेल के तौर पर भी शामिल किया गया है। पहले चरण में पांच ब्लॉकों में मुकाबले पहले चरण में 8 से 11 सितंबर तक चौगावां, तरसिक्का, अटारी, वेरका और अजनाला ब्लॉक में मुकाबले होंगे। वहीं दूसरे चरण में 14 से 17 सितंबर तक म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, रईया, मजीठा, जंडियाला गुरु और हरशा छीना ब्लॉक में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन खेल मुकाबलों में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी पंजाब खेल विभाग की वेबसाइट (https://sports.punjab.gov.in) पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। खिलाड़ियों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना पंजीकरण करवाकर अधिक से अधिक संख्या में खेलों में हिस्सा लें और अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करें।

DA-DR बकाया भुगतान का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मान सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की याचिका

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तीन अगस्त के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा है कि वह राज्य कर्मचारियों को समान श्रेणी के केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर टेक-होम (हाथ में आने वाला) वेतन देने के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने को तैयार है। हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों के समान डीए प्रतिशत को यांत्रिक रूप से लागू करने का विरोध किया है। राज्य का तर्क है कि पंजाब में कई पदों पर मूल वेतन केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक है। ऐसे में केवल डीए प्रतिशत की तुलना से वास्तविक समानता नहीं हो सकती। सरकार ने सात प्रतिनिधि श्रेणियों के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे हैं। इनमें से पांच में 42 फीसदी डीए के बावजूद पंजाब कर्मचारियों की कुल परिलब्धियां संबंधित केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक बताई गई हैं।  सरकार का कहना है कि उसने बकाया राशि से इन्कार नहीं किया है और 13 फरवरी 2025 को मंजूर लिक्विडेशन प्लान के तहत चरणबद्ध भुगतान किया जा रहा है। राज्य ने कहा कि केंद्रीय दर के अनुरूप डीए करने पर सालाना करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पंजाब का वेतन-पेंशन खर्च राजस्व प्राप्तियों का करीब 51 फीसदी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और मौजूदा भुगतान योजना जारी रखने की अनुमति मांगी है। 

Punjab Prisons में नशे पर हाईकोर्ट सख्त, 44% कैदी नशे की गिरफ्त में; हर सप्ताह होगी सुनवाई

चंडीगढ़  पंजाब सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की जेलों में 35,449 कैदियों में से 15,768 नशे पर निर्भर हैं। यानी करीब 44 प्रतिशत कैदी नशे के आदी हैं। हाईकोर्ट ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गंभीर स्थिति और क्या होगी। सरकार को कैदियों को नशे की निर्भरता से बाहर निकालने के लिए प्रभावी नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। अदालत ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों में बड़ी संख्या युवाओं की है। ऐसे में सवाल है कि उन्हें इस निर्भरता से बाहर निकालने के लिए क्या नीति अपनाई जा सकती है। आंकड़ों के अनुसार अमृतसर जेल में 4,918 कैदियों में से 2,124 नशे पर निर्भर हैं। बठिंडा जेल में 1,978 कैदियों में 1,064 नशे के आदी हैं। एक जेल में 69% कैदी उपचार के तहत मामला हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद सुनवाई में आया। मानसा सत्र मंडल के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट में जेलों में नशे की समस्या और उपचार की स्थिति सामने आई थी। एक जेल में 767 कैदियों में 530 बाह्य रोगी ओपिओइड उपचार केंद्र से जुड़े मिले। यह संख्या करीब 69 प्रतिशत है। अदालत ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों को अचानक दवा नहीं मिलने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। हालांकि इसका समाधान तलाशना होगा। कैदियों को हमेशा इस स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता।  हर सप्ताह होगी सुनवाई हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की हर सप्ताह सुनवाई होगी। हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से उनकी जेलों में नशे पर निर्भर कैदियों का ब्योरा मांगा गया है। केंद्र सरकार को भी सहयोग करने को कहा गया है। अदालत ने केंद्र को पीजीआईएमईआर निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक सहायता लेने के निर्देश दिए हैं। 

पंजाब चुनाव से पहले AAP का बड़ा संगठन विस्तार, एक दिन में 507 पदों पर नियुक्तियां

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ओर से धड़ाधड़ नियुक्तियों का दौर जारी है। प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का जोश बढ़ाने के लिए पार्टियां उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां सौंप रही हैं। दलों को इस बात का भलीभांति आभास है कि चुनाव केवल बड़े नेताओं और रैलियों से नहीं बल्कि बूथ स्तर की मशीनरी से जीते जाते हैं।  प्रत्येक बूथ पर कार्यकर्ता और जिम्मेदार पदाधिकारी होने से मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनती है। समर्थकों, नए मतदाताओं और प्रभावशाली स्थानीय समूहों से लगातार संपर्क रखा जा सकता है। पार्टी के प्रदेश स्तर के मुद्दों को गांव, वॉर्ड और बूथ तक पहुंचाने में संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की तैनाती, मतदाताओं से संपर्क और बूथ प्रबंधन के लिए मजबूत कैडर बेहद जरूरी है। इसी के मद्देनजर इन दिनों सभी राजनीतिक दलों के संगठन महासचिव व प्रभारी पूरी तरह सक्रिय है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष और प्रदेश संगठन महामंत्री श्रीनिवासलु मंथरी भी पिछले दिनों पंजाब के कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए थे। शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह चीमा भी रिक्त पदों पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंप रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व आप के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा व प्रभारी मनीष सिसोदिया भी बूथ स्तर तक अपना कैडर मजबूती देने में जुटे हैं।  संगठन मजबूती में दलों की कसरत -आम आदमी पार्टी लगातार विभिन्न प्रकोष्ठों के तहत अपनी नियुक्तियां कर रही हैं। 31 अगस्त को पार्टी ने 14 ब्लॉक प्रधान व यूथ विंग के 493 ब्लॉक समन्वयकों की नियुक्ति की। -शिरोमणि अकाली दल ने व्यापार व एससी सैल के हलका प्रधानों, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, यूथ अकाली दल की कोर कमेटी, जिला प्रधान, आठ जिलों की जनरल काउंसिल के सदस्य, यूथ अकाली दल कार्यकारी अध्यक्ष, लोकसभा हलका प्रभारी व संगठन सचिव समेत अन्य पदों पर 188 नियुक्तियां की हैं। -पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की तैनाती के बाद पार्टी भी अपनी संगठनात्मक नियुक्तियों में इन दिनों व्यस्त है। विभिन्न मोर्चों के तहत पिछले कुछ दिनों में 94 संगठनात्मक नियुक्तियां हो चुकी हैं। इसके अलावा पंजाब में भाजपा ने 25,332 बूथों पर बूथ कमेटियां सक्रिय करनी हैं। हर बूथ पर 11 सक्रिय सदस्यों की टीम बनाने का लक्ष्य है। अभी 11 हजार से ज्यादा बूथों पर टीमें नहीं हैं। 6425 सब सर्किल और 622 सर्किल बनाए जाएंगे। 117 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्येक में पांच सर्किल होंगे। एक सर्किल के अधीन करीब 40 बूथ होंगे। 30 सितंबर तक संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने और 31 अक्तूबर तक बूथ कमेटियों को सक्रिय करने का लक्ष्य रखा गया है। हर बूथ पर करीब 250 लोगों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की योजना है। -पंजाब कांग्रेस भी संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है। हालांकि पार्टी ने पिछले दिनों पांच ही नियुक्तियां की हैं। कांग्रेस भी पहली बार पंजाब में बूथ स्तर पर अपनी 11 सदस्यीय कमेटियां बना रही है। इस पर अभी काम जारी है। 

पंजाब नगर निकाय चुनाव में AAP का दबदबा, 95 में 56 वार्डों पर जीत, विपक्ष को बड़ा झटका

चंडीगढ़  पंजाब में चार नगर निकायों के लिए हुए चुनावों के नतीजे घोषित हो गए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले आए इन चुनाव परिणामों में आम आदमी पार्टी (आप) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 95 में से 56 वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक बढ़त कायम रखी है। इससे पहले हुए निकाय चुनावों में भी आप ने बेहतर प्रदर्शन किया था और इस बार भी पार्टी ने अपना दबदबा बरकरार रखा। इन चुनावों के लिए पांच जुलाई को होशियारपुर, फाजिल्का और फिरोजपुर जिले के चार निकायों के कुल 95 वार्डों में मतदान हुआ था। इनमें होशियारपुर नगर निगम की 50 सीटों, जलालाबाद नगर परिषद की 17 सीटों, गुरुहरसहाय नगर परिषद की 15 सीटों और ममदोट नगर पंचायत की 13 सीटों के लिए मतदान कराया गया। घोषित परिणामों के अनुसार, चारों निकायों में आम आदमी पार्टी ने कुल 56 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को 26 सीटें मिलीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में सात सीटें आईं। भारतीय जनता पार्टी को तीन सीटों पर जीत मिली, वहीं तीन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। फिरोजपुर जिले में आप का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा फिरोजपुर जिले में आप का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। यहां 50 वार्डों में से 35 पर पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। कांग्रेस ने नौ सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को तीन सीटों पर सफलता मिली। तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।फाजिल्का के जलालाबाद नगर परिषद चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने बढ़त बनाए रखी। यहां 17 में से 12 सीटों पर आप ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को चार सीटें मिलीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल एक सीट जीतने में सफल रहा। इन चुनावों की एक खास बात यह भी रही कि कुल 11 उम्मीदवार पहले ही सर्वसम्मति से निर्वाचित घोषित हो चुके थे। इसके बाद शेष वार्डों के लिए मतदान कराया गया।विधानसभा चुनाव से पहले आए इन निकाय चुनाव परिणामों को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।चुनाव नतीजों ने एक बार फिर राज्य की स्थानीय राजनीति में आम आदमी पार्टी की मजबूत पकड़ साबित की है, जबकि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा को सीमित सफलता से संतोष करना पड़ा।  अकाली दल का नहीं खुला खाता  नगर निगम होशियारपुर के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए निगम पर कब्जा कर लिया है। पचास सीटों में से आप ने 35 सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। कांग्रेस नौ सीटें जीतने में कामयाब हुई है। भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। तीन वार्डों में आजाद प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। निगम चुनावों में अकाली दल बादल का खाता नहीं खुला है। वहीं बसपा भी जीत का स्वाद नहीं चख पाई। बता दें कि राज्य चुनाव आयोग की ओर से करवाए गए चुनाव में आप 50, कांग्रेस 50, भाजपा 44, शिरोमणि अकाली दल बादल 36 और बसपा ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था। नगर निगम में बहुमत के लिए 26 सीटों की जरूरत थी। आप के खाते में 35 सीटें आई हैं। निगम में आम आदमी पार्टी का ही मेयर बनेगा। विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस रहेगी। पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 43 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 34 सीटों का नुकसान हुआ है। भाजपा पिछले निगम चुनाव में चार सीटें जीती थी। इस बार उसके खाते में तीन सीटें आई थीं। भाजपा को एक सीट का नुकसान हुआ है। आप ने पिछले चुनाव में सिर्फ दो सीटें जीती थीं। इस चुनाव में आप को 33 सीटों का फायदा हुआ है। आप विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा गदगद नजर आए। उन्होंने कहा कि जनता ने आप सरकार के विकास कार्यों पर मोहर लगाई है। निगम में आप का मेयर बनेगा। विकास कार्यों में और ज्यादा तेजी लाई जाएगी। सुखबीर बादल के गढ़ जलालाबाद में भी ‘आप’ की बड़ी जीत आम आदमी पार्टी ने जलालाबाद नगर परिषद की 17 में से 12 सीटों पर भी जीत हासिल की है. पार्टी ने ‘X’ पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह क्षेत्र कभी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का गढ़ माना जाता था।  बदला राजनीतिक समीकरण सुखबीर सिंह बादल ने 2017 के विधानसभा चुनावों में जलालाबाद सीट पर भगवंत मान को हराया था. इसके बाद 2022 के चुनावों में आम आदमी पार्टी के नेता जगदीप कंबोज ने एसएडी प्रमुख को 30,930 वोटों के अंतर से हराने में कामयाबी हासिल की थी. इससे पहले मई महीने में भी, आम आदमी पार्टी ने आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी। 

USA Birthright Citizenship: ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अमेरिका में जन्मे पंजाबी बच्चों की नागरिकता बरकरार

जालंधर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को रद्द कर जन्मजात नागरिकता को बहाल कर दिया है। इससे अवैध रूप से रहे पंजाबी समुदाय के साथ प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के इस फैसले से अवैध रूप से या अस्थायी वीजा पर रह रहे पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में जन्मे बच्चों को अब पूर्ण नागरिकता का अधिकार मिल गया है। हर साल पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में करीब 8 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2024 तक एशियन मूल की माता-पिता की संख्या 66 हजार के करीब है। यहां सालाना 8 हजार के करीब भारतीय मूल के बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें ज्यादा संख्या पंजाबी समुदाय के बच्चों की है।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की अलग-अलग जगहों पर इस वक्त शरणार्थी वीजा पर या अवैध रूप से लगभग 7 लाख भारतीय रह रहे हैं, न्यूयार्क में रहने वालों में ज्यादातर पंजाबी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पंजाबी समुदाय के उन माता पिता को बड़ी राहत है जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा हुए हैं, लेकिन ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने से उनको स्थायी वीजा नहीं मिल पा रहा था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा- अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिक है। फैसले से पंजाबी समुदाय में खुशी इस फैसले से अमेरिका में बसे पंजाबी परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।  पंजाबी समुदाय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य राज्यों में रह रहे पंजाबी परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित होने वाले थे। समुदाय के लोग इसे संवैधानिक जीत मान रहे हैं। पंजाब से आने वाले प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस फैसले से उनकी अगली पीढ़ी को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाबी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकारी नौकरी, स्कूल में एडमिशन का फायदा मिलेगा पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।  हर साल पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में करीब 8 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2024 तक एशियन मूल की माता-पिता की संख्या 66 हजार के करीब है। यहां सालाना 8 हजार के करीब भारतीय मूल के बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें ज्यादा संख्या पंजाबी समुदाय के बच्चों की है। अमेरिका की अलग-अलग जगहों पर इस वक्त शरणार्थी वीजा पर या अवैध रूप से लगभग 7 लाख भारतीय रह रहे हैं। न्यूयार्क में रहने वालों में ज्यादातर पंजाबी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पंजाबी समुदाय के उन माता-पिता को बड़ी राहत है, जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा हुए हैं, लेकिन ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने से उन्हें स्थायी वीजा नहीं मिल पा रहा था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा- अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिक है। फैसले से पंजाबी समुदाय में खुशी इस फैसले से अमेरिका में बसे पंजाबी परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पंजाबी समुदाय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य राज्यों में रह रहे पंजाबी परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित होने वाले थे। समुदाय के लोग इसे संवैधानिक जीत मान रहे हैं। पंजाब से आने वाले प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस फैसले से उनकी अगली पीढ़ी को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाबी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकारी नौकरी, स्कूल में एडमिशन का फायदा मिलेगा पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पंजाब में खेती संकट, बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की तलाश में कई परिवार यहां बस रहे हैं। ऐसे में जन्म सिद्ध नागरिकता का अधिकार उनके बच्चों को अमेरिकी समाज में पूर्ण रूप से शामिल होने का मौका देगा। वे स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के ले सकेंगे। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला पंजाबी संस्कृति को अमेरिका में मजबूत करने में मदद करेगा। बच्चे अब अमेरिकी नागरिक के रूप में बड़े होंगे, लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। पंजाब में खेती संकट, बेरोजगारी और फ्यूचर की तलाश में कई परिवार यहां बस रहे हैं। ऐसे में जन्म सिद्ध नागरिकता का अधिकार उनके बच्चों को अमेरिकी समाज में पूर्ण रूप से शामिल होने का मौका देगा। वे स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के ले सकेंगे। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला पंजाबी संस्कृति को अमेरिका में मजबूत करने में मदद करेगा। बच्चे अब अमेरिकी नागरिक के रूप में बड़े होंगे लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। 150 साल पुराना था जन्मजात नागरिका का कानून अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को संवैधानिक रूप से नागरिकता का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने इस कानून को प्रशासनिक आर्डर से खत्म कर दिया था।  सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्मे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वहां मौजूद हैं, वे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि अवैध प्रवासियों और कुछ अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे यूएसए के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं, इसलिए उन्हें जन्म सिद्ध नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए।  150 साल पुराना था जन्मजात नागरिका का कानून अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को संवैधानिक रूप से नागरिकता का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने इस कानून को प्रशासनिक ऑर्डर से खत्म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्मे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वहां मौजूद हैं, वे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि अवैध प्रवासियों और कुछ अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे … Read more

36 लाख लोगों के खाते में पहुंचेगी राहत, पंजाब सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए जारी किए ₹1583 करोड़

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने राज्य के बुजुर्गों, विधवाओं, निराश्रित महिलाओं, अनाथ एवं आश्रित बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1,583 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। सरकार का कहना है कि इस राशि के माध्यम से लाखों पात्र लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्हें दैनिक जीवन की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सके। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने सोमवार को बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण योजनाओं के तहत कुल 6,131.91 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस बजट का उद्देश्य राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। हर व्यक्ति तक पहुंचे आर्थिक सहायता उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से पंजाब के लगभग 36 लाख लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी देरी के आर्थिक सहायता पहुंचे और किसी भी लाभार्थी को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक जारी की गई कुल राशि में से 1,048 करोड़ रुपये से अधिक बुजुर्ग पेंशन के रूप में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। 535 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी जारी इसके अलावा विधवाओं, बेसहारा महिलाओं, अनाथ एवं आश्रित बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत 535 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। डाॅ. बलजीत कौर ने कहा कि राज्य सरकार के लिए सामाजिक सुरक्षा केवल बजटीय प्रावधान नहीं, बल्कि जरूरतमंद वर्गों के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विभाग ने लाभ वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुचारु बनाया है, ताकि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक बिना किसी देरी के सहायता पहुंच सके।

वोटर लिस्ट अपडेट के लिए पंजाब में बड़ा अभियान, 86% मैपिंग पूरी; कल से शुरू होगा SIR

अमृतसर  पंजाब में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत राज्यभर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह अभियान 24 जुलाई तक चलेगा। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बुधवार को पंजाब भवन में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी। 2.14 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेगा चुनावी अमला मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, राज्य के 24,453 BLO अगले एक महीने तक घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे, उनका सत्यापन करेंगे और उन्हें वापस एकत्र करेंगे। इस दौरान पंजाब के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा। साथ ही मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। 3 अगस्त को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची अभियान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां 2 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा और 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। 86 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी बैठक के दौरान बताया गया कि पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दी गई है। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी अमनदीप गर्ग, संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी नवनीत कौर बल्ल समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आम आदमी पार्टी की ओर से फैरी सॉफ्ट, कांग्रेस की ओर से हरदीप सिंह किंगरा और हैप्पी खेड़ा, भाजपा की ओर से परमपाल कौर, शिरोमणि अकाली दल की ओर से एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर और नछत्तर सिंह गिल तथा बसपा की ओर से जसवंत राय और हरभजन सिंह उपस्थित रहे। इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने का प्रयास करेगा, ताकि आगामी चुनावों में पात्र मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।