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पंजाब में 33 हफ्ते में जन्मी नवजात को ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से मिली जिंदगी, जीती मौत की जंग

चंडीगढ़  नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है. बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।  सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई. उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है. जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी. बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था. ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।  डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया. बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे. मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी. हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।  इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा. नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया. इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया. सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।  डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है.” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ। सांस सामान्य होने लगी. प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं. जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा. डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है. थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।  इस मामले में कोई देरी नहीं हुई. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।  17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई. अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है. हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है. नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।  एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया. उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी. उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।  रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।  मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है. जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है. यह बहुत बड़ी बात है।  पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।  यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है। 

फिनलैंड यूनिवर्सिटी के साथ पंजाब सरकार का सहयोग, शिक्षा में सुधार और बेहतर क्लासरूम वातावरण

 चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार और फिनलैंड की टुर्कू यूनिवर्सिटी के बीच सहयोग से पंजाब के क्लासरूम में प्रत्यक्ष बदलाव दिखने लगे हैं, जिसने शिक्षण प्रथाओं को अधिक आनंदमय और व्यावहारिक बना दिया है और विद्यार्थियों के लिए सीखने का माहौल अधिक प्रभावशाली बन रहा है।  इस पहल के हिस्से के रूप में पढ़ाई-लिखाई रट्टे मारने के तरीकों से हटकर अब अधिक आनंदमय और सहभागितापूर्ण सीखने के माहौल की ओर बढ़ रही है. पंजाब की व्यापक शिक्षा क्रांति में शामिल यह कार्यक्रम स्थानीय क्लासरूम में वैश्विक विशेषज्ञता को शामिल करने पर केंद्रित है, जो एक संरचित ट्रेन-द-ट्रेनर्स मॉडल के माध्यम से पैमाने को निर्धारित करता है, जिसमें बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगभग 300 शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी।  फिनलैंड की अपनी सरकारी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कुकुलो-मोइकोइनेन अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन एंड केयर सेंटर का दौरा किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल पहले से ही स्थानीय क्लासरूम के साथ वैश्विक शिक्षा विशेषज्ञता को एकीकृत करके शानदार परिणाम दे रही है।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग के माध्यम से शुरू की गई यह साझेदारी प्रारंभिक और बुनियादी शिक्षा में शिक्षक की भूमिका को मजबूत करने के प्रयासों की ओर अग्रसर है. यह अल्पकालिक हस्तक्षेप के रूप में नहीं बल्कि पंजाब की शिक्षा प्रणाली में बाल-केंद्रित और खेल-आधारित शिक्षा को शामिल करने के लिए दीर्घकालिक संस्थागत प्रयास के रूप में तैयार की गई है, जिसमें बेहतरीन शिक्षा प्रथाओं को भी शामिल किया गया है।  यह कार्यक्रम शिक्षकों को शोध-आधारित तरीकों से सुसज्जित करने पर केंद्रित है, यह सुनिश्चित करते हुए कि ये दृष्टिकोण पंजाब के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ के अनुकूल हों. उन्होंने कहा कि ये प्रशिक्षण सत्र चंडीगढ़ और फिनलैंड के शहरों टुर्कू तथा राउमा दोनों जगह आयोजित किए गए, जिसमें शिक्षकों को कार्यशालाओं, मार्गदर्शन प्रथाओं और स्कूलों के दौरों के माध्यम से क्लासरूम की नई तकनीकों से अवगत करवाना शामिल है. गौरतलब है कि मई 2026 तक चार समूहों में लगभग 300 शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे, जिससे पूरे पंजाब भर के विद्यार्थियों को लाभ होगा।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देते हुए कहा, "शिक्षा को आनंदमय और दिलचस्प बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसलिए हम रट्टे लगाने के पुराने तरीकों के स्थान पर सक्रिय सहभागिता की ओर बढ़ रहे हैं. शिक्षकों को विशेषज्ञों की सहायता वाले संदर्भ-विशिष्ट प्रोजेक्ट डिजाइन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है ताकि इन विचारों को उनके अपने क्लासरूम में लागू किया जा सके. क्षेत्र से मिले फीडबैक से विद्यार्थियों की भागीदारी और प्रेरणा में सुधार होता है और क्लासरूम का वातावरण सकारात्मक बनता है।  उन्होंने कहा, "शिक्षकों ने नए तरीकों के साथ प्रयोग करने और सीखने की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार पाठों को ढालने में अधिक विश्वास प्रकट किया है. इस पहल की एक अनूठी विशेषता विदेशी मॉडलों को सीधे लागू करने के बजाय प्रासंगिक अनुकूलन पर जोर देना है. फिनलैंड के विशेषज्ञों से निरंतर सलाह सहायता ने इस बदलाव को सक्षम बनाया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि वैश्विक स्तर के सर्वोत्तम अभ्यासों को स्थानीय प्रणालियों में सार्थक रूप से एकीकृत किया जाए।  इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विस्तृत बातचीत के लिए टुर्कू यूनिवर्सिटी और टुर्कू शिक्षक प्रशिक्षण स्कूल का भी दौरा किया. उन्होंने कहा, "सरकार अब कार्यक्रम को 'ट्रेन-द-ट्रेनर्स' दृष्टिकोण के माध्यम से विस्तारित करने की योजना बना रही है, जिससे प्रांत भर में इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर्स का एक कैडर तैयार किया जा रहा है." उन्होंने आगे कहा, "निरंतर व्यावसायिक विकास और व्यापक पहुंच का समर्थन करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और मिश्रित प्रशिक्षण फॉर्मेट भी विकसित किए जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा, "विस्तार के लिए एक संरचित प्रणाली और प्रशिक्षित शिक्षकों के बढ़ते पूल के साथ इस सहयोग को पंजाब के व्यापक शिक्षा सुधारों की नींव के रूप में देखा जा रहा है. प्रांत जन शिक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि विद्यार्थी सफल होने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें और इस क्षेत्र में गति बनाए रखने के लिए इसी प्रकार की पहल की जाएंगी। 

पंजाब की पॉलिटिक्स में बड़ी हलचल! SAD पुनर सुरजीत ने जारी किया विज़न डॉक्यूमेंट

चंडीगढ़ 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में पॉलिटिकल पार्टियां पूरी तरह एक्टिव हो गई हैं। इसी सिलसिले में आज चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह की लीडरशिप में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत का विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया गया। इस दौरान ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने डॉक्यूमेंट जारी करते हुए इसे पंथ, पंजाब और भविष्य के लिए एक विज़न बताया। इस मौके पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट सरदार इकबाल सिंह झुंडा की लीडरशिप वाली कमेटी और जानकारों की मेहनत से तैयार किया गया है। प्रोफेसर पूरन सिंह के शब्दों में, 'पंजाब वसदा गुरु दे नात ते' टाइटल से जारी इस घोषणा में पंजाब के आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक मुद्दों को एड्रेस किया गया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने साफ किया कि पंजाब से पंथ को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए पार्टी पंथिक मुद्दों को प्राथमिकता देगी। पंजाब की मौजूदा आर्थिक हालत पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य कर्ज के बोझ तले दबा है और मौजूदा सरकार कर्ज मुक्ति के अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही है। महिलाओं और युवाओं के लिए आरक्षण युवाओं की हालत पर चिंता जताते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब का युवा दिशाहीन होता जा रहा है। इसी तरह, युवाओं को दिशाहीनता और ड्रग्स से बचाने के लिए पार्टी में 40 परसेंट रिप्रेजेंटेशन देने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया से बड़े पैमाने पर जानकारी मिल रही है, जिसमें से ज्यादातर फेक होती है और इससे उनके विचारों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने बेरोजगारी और ड्रग्स के बढ़ते असर को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि सरकारें इस मुद्दे को हल करने में नाकाम रही हैं। पार्टी युवाओं को रोजगार के मौके देने और उन्हें सही दिशा में ले जाने के लिए खास प्लान बनाएगी। महिलाओं के अधिकारों के बारे में उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की में महिलाओं का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि जहां 33 परसेंट रिजर्वेशन की बात हो रही है, वहीं वे इससे भी ज़्यादा, 35 परसेंट रिजर्वेशन देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से महिलाओं की भागीदारी और मज़बूत होगी। हेल्थ, एजुकेशन और एनवायरनमेंट ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि घोषणापत्र में हेल्थ और एजुकेशन को राज्य के दो अहम पिलर माना गया है और इन्हें बेहतर बनाने की बात कही गई है। एनवायरनमेंट कंजर्वेशन, खासकर जंगलों का एरिया बढ़ाना और मत्तेवाड़ा जैसे जंगलों की रक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। सोशल जस्टिस के तहत S. C, S. T, O. B. C. और जनरल कैटेगरी के गरीब तबके के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने का वादा किया गया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह मैनिफेस्टो आनंदपुर साहिब प्रस्ताव की रोशनी में तैयार किया गया है, जिसमें राज्यों को ज़्यादा अधिकार देने की वकालत की गई है। केंद्र सरकार पर राज्यों की शक्तियां छीनने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वे केंद्र से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। उन्होंने कहा कि यह मैनिफेस्टो पूरी तरह से 'ओपन' है और पंजाब की बेहतरी के लिए दूसरे सुझाव भी इसमें शामिल किए जाएंगे। माइनॉरिटीज़ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश और पंजाब दोनों में माइनॉरिटी सेक्शन की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना पार्टी की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी सेक्शन के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी को बराबर अधिकार मिलेंगे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पार्टी का यह मैनिफेस्टो पंजाब के हर सेक्शन को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा, जिसका मकसद राज्य को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण के लिहाज़ से मज़बूत बनाना है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने SGPC के रवैये पर उठाए सवाल, श्री दरबार साहिब निवास से सामान ले जाना शुरू किया अमृतपाल सिंह, पंजाबी जागरण, अमृतसर: श्री हरमंदिर साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कमेटी पर उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने और उनके व्यक्तिगत सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि हाल ही में जब वह अपने श्री दरबार साहिब निवास से अपना सामान शिफ्ट करवा रहे थे, तो गेट पर तैनात सेवादारों ने उनसे लिखित में साइन करवाने के बाद सामान ले जाने दिया। ज्ञानी रघबीर सिंह ने इस कार्रवाई को बेहद बुरा बताया और कहा कि लंबे समय से गुरु घर की सेवा कर रहे सेवादार के निजी सामान की तलाशी लेना बेहद अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि किसी भी गैर-कानूनी चीज के शक पर ही तलाशी ली जाती है, लेकिन यहां जानबूझकर नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। अपनी रिटायरमेंट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी दो साल से ज्यादा की सर्विस बाकी थी, लेकिन उन्हें 26 फरवरी को जबरदस्ती रिटायर कर दिया गया, जबकि वह मेडिकल लीव पर थे। उन्होंने कहा कि उनके घर आने-जाने वाले लोगों पर जासूसी की जा रही है और कर्मचारियों द्वारा निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वह घर खाली करने के लिए तैयार हैं, लेकिन नए घर के रेनोवेशन के कारण उन्होंने 10-12 दिन और मांगे थे। फंड के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उन्होंने 36 साल श्री गुरु रामदास जी के घर की सेवा की है, अगर कमेटी फंड जारी करती है तो ठीक है, वरना वह भरोसे के गुरु हैं। उन्होंने मैनेजमेंट से अपील की कि मैनेजमेंट में नैतिकता और शालीनता बनाए रखी जानी चाहिए। इस बारे में मैनेजर भगवंत सिंह धंगेरा ने कहा कि श्री दरबार साहिब के हर गेट पर सेवक तैनात हैं। कोई भी सामान बाहर ले जाने के लिए गेट पास होना जरूरी है, गेट पर तैनात सेवक ने हमेशा की तरह अपनी ड्यूटी निभाई है। सेवकों को बताया गया है कि सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह जो भी सामान बाहर ले जाते हैं, उसके लिए किसी गेट पास या इंस्पेक्शन की जरूरत नहीं है। अगर सिंह साहब ने पहले ही किसी एडमिनिस्ट्रेटर से संपर्क किया होता तो ऐसा नहीं होता, जब मुझे पता चला तो मैंने तुरंत नौकरों … Read more

ड्रग्स के खिलाफ पंजाब का मेगा एक्शन: 41,850 केस दर्ज, 60,000 अरेस्ट, करोड़ों की हेरोइन बरामद

चंडीगढ़ पंजाब में नशे और संगठित अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के तहत राज्य सरकार ने नशा तस्करों और गैंगस्टरों पर कड़ा शिकंजा कसा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस अभियान के 414 दिन पूरे हो चुके हैं, जिसमें पुलिस ने करीब 59,631 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। वहीं, ‘गैंगस्टर विरोधी अभियान’ के तहत 22,389 अपराधियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है। भारी मात्रा में ड्रग्स की बरामदगी पुलिस की कार्रवाई में अब तक 2569 किलोग्राम हेरोइन, 4599 किलोग्राम कोकीन सहित बड़ी मात्रा में अन्य नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। हाल ही में एक दिन में ही 79 तस्करों को गिरफ्तार कर उनसे ड्रग मनी और हेरोइन बरामद की गई। गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत एक ही दिन में 564 स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 245 गिरफ्तारियां हुईं। सरकार का दावा है कि अब तक 22,000 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हेल्पलाइन से बढ़ी जनता की भागीदारी सरकार ने जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 भी जारी किया है, जहां लोग गुप्त रूप से सूचना साझा कर रहे हैं। जनता के सहयोग से सफलता अधिकारियों के अनुसार, गांव रक्षा समितियों (VDC) और आम जनता के सहयोग से इस अभियान में सफलता दर 80 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है। इस दौरान हजारों युवाओं को नशा मुक्ति केंद्रों से जोड़कर पुनर्वास भी किया गया है। हाई-टेक पुलिसिंग और सख्त नीति सरकार ने पंजाब पुलिस को आधुनिक हथियारों, तकनीक और संसाधनों से लैस किया है। साथ ही पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर पूरी स्वतंत्रता दी गई है, ताकि वह बिना किसी दबाव के कार्रवाई कर सके। सरकार का दावा है कि इस सख्त अभियान से पंजाब में नशा और अपराध नेटवर्क को बड़ी चोट पहुंची है और राज्य में सुरक्षित भविष्य की नई उम्मीद जगी है।

स्मार्ट शिक्षा की ओर बढ़ते कदम: होशियारपुर में स्कूल के नए कमरों का शिलान्यास, बच्चों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

होशियारपुर. होशियारपुर क्षेत्र में विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूल की नई इमारत के निर्माण का कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस परियोजना की नींव रखी गई। इस नई इमारत का निर्माण होने से न केवल स्कूल में कमरों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को बैठने के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान भी उपलब्ध होगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया भवन स्कूल के इस नए बुनियादी ढांचे को आधुनिक मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसमें हवादार कमरों के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल की अच्छी इमारत बच्चों के सीखने के स्तर को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इस परियोजना के तहत स्कूल परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बच्चे एक खुशनुमा माहौल में अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें। गुणवत्ता और समय सीमा पर जोर निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। इस भवन को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि अगले शैक्षणिक सत्र तक छात्र नए कमरों का लाभ उठा सकें। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है जो समय-समय पर प्रगति की जांच करेगी। क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर इस स्कूल भवन का निर्माण स्थानीय समुदाय के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से इस क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता थी। सरकारी स्कूलों के कायाकल्प से अब गरीब परिवारों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में मदद मिलेगी।

PSEB का बड़ा विजन: ‘क्रिएटर्स, नॉट कंज्यूमर्स’ मंत्र के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय नेशनल AI सम्मेलन

चंडीगढ़.  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने चंडीगढ़ स्थित सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का समापन गूगल और इंटेल द्वारा आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं के साथ हुआ, जिसने पंजाब की शिक्षा प्रणाली में एआई को गहराई से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया। इस सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर कक्षाओं में एआई के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया। छात्रों के लिए 'निर्माता' बनने का विजन PSEB के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने एआई के नैतिक उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों की समस्या समाधान कौशल को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे तकनीक के केवल उपभोक्ता बनकर न रहें, बल्कि इसके निर्माता बनें। डिजिटल युग में एआई उपकरणों को सही मित्र की तरह चुनने की सलाह देते हुए उन्होंने स्पष्ट कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर सीखने की प्रक्रियाओं को मजबूत करने का आह्वान किया। गूगल और इंटेल की विशेष कार्यशालाएं सम्मेलन के दौरान गूगल के सत्रों ने शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही, इंटेल द्वारा 'कार्यस्थल पर एआई' विषय पर आयोजित कार्यशाला में 112 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस सत्र में डेटा गोपनीयता और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सरकारी ढांचे के भीतर एआई उपकरणों को प्रभावी ढंग से तैनात करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नेतृत्व और अकादमिक अखंडता पर चर्चा स्कूल प्रमुखों के लिए आईकेजी पीटीयू द्वारा आयोजित 'स्कूल लीडर्स के लिए एआई' कार्यशाला में एआई उपकरणों को संस्थागत प्रबंधन में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें एआई-जनित सामग्री की पहचान करने और एआई-सक्षम वातावरण में अकादमिक अखंडता बनाए रखने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। नीव एआई (Neeev AI) द्वारा संचालित छात्र-केंद्रित कार्यशाला ने युवाओं को एआई अनुप्रयोगों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और उन्हें भविष्य के करियर विकल्पों के लिए प्रेरित किया। भविष्य की डिजिटल चुनौतियों की तैयारी चेयरमैन ने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से छात्रों को एआई तकनीक के निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं और इसके पीछे आवश्यक कौशल सेट के बारे में गहराई से बताया गया। पंजाब के छात्रों ने इस उभरती तकनीक के प्रति जबरदस्त जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता दिखाई है। यह पहल न केवल छात्रों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और नवाचार-आधारित डिजिटल भविष्य का निर्माण करने में भी सक्षम बनाएगी।

पंजाब विधानसभा में बेअदबी पर संशोधित बिल पास, लागू होगा तुरंत, राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं

Punjab: विधानसभा में बेअदबी पर संशोधित बिल पास, अब राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं पंजाब विधानसभा में बेअदबी पर संशोधित बिल पास, लागू होगा तुरंत, राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं पंजाब विधानसभा में बेअदबी पर संशोधित बिल पास, अब बिना राष्ट्रपति की मंजूरी के होगा लागू चंडीगढ़   पंजाब सरकार 13 अप्रैल को विशेष सत्र के दौरान धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने से संबंधित संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश करेगी। इस पर चर्चा के बाद इसका निर्विरोध पारित होना तय माना जा रहा है। यह विधेयक पूरी तरह राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए जरूरी औपचारिकताओं के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने की जरूरत नहीं होगी और पारित होते ही लागू कर दिया जाएगा। प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बेअदबी के मामलों के चलते लंबे समय से सख्त कानून की मांग उठ रही थी। आम आदमी पार्टी सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया हुआ है। जुलाई 2025 में सरकार ने इस संबंध में एक मसौदा विधानसभा में पेश किया था लेकिन विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के सुझाव लेने के लिए इसे विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर की अध्यक्षता वाली सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था। बाद में कमेटी को दो महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया। अब खालसा पंथ के सृजन दिवस 13 अप्रैल को सरकार इस अहम विधेयक को सदन में लाने जा रही है। यह संवेदनशील और पंथक मुद्दा होने के कारण किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध की संभावना कम मानी जा रही है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल भी नहीं होगा। इस संबंध में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने नोटिस जारी कर दिया है। सख्त होगा सजा का प्रावधान : मान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि दि जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। इस एक्ट के तहत एसजीपीसी को ग्रंथ की छपाई और प्रकाशन का अधिकार है और छपने के बाद इसे गुरु साहिब का स्वरूप माना जाता है। उन्होंने कहा कि संशोधन के बाद बेअदबी के मामलों में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और लाखों रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। सुरक्षा के लिए बार कोड और क्यूआर कोड जैसे उपाय भी लागू किए जाएंगे। सावर्जनिक हो सिलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट : जाखड़ पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सिलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट और विधेयक का मसौदा सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह संवेदनशील मामला है, इसलिए सभी राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों को विश्वास में लिया जाना जरूरी है।   

पंजाब में बड़ा बदलाव: 102 नगर परिषदों के प्रधान और 9 नगर निगमों के मेयर हटाए गए

चंडीगढ़   चुनाव में देरी के चलते पंजाब सरकार ने 102 नगर परिषदों के प्रधान और नौ नगर निगमों के मेयर को हटा दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। यह अधिकारी चुनाव होने तक कामकाज देखेंगे। आज से ही प्रशासनिक अधिकारी नगर परिषद और नगर निगम के कार्य संभालना शुरू कर देंगे। पंजाब सरकार ने राज्य के नगर परिषद और नगर निगमों के कार्यकाल संबंधी आदेश जारी किए हैं। जिसमें लिखा गया है कि पंजाब नगर पालिका अधिनियम, 1911 और पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 के तहत राज्यपाल ने उपयुक्त अधिकारियों को अस्थायी रूप से नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सभी शक्तियों और कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया है। जारी आदेश के अनुसार, नगर पालिकाओं के कार्यकाल 5 अप्रैल से लेकर 17 जून तक के बीच में खत्म हो रहे हैं।  हालांकि, राज्यपाल की राय है कि इन नगर पालिकाओं और निगमों के चुनाव कार्यकाल की समाप्ति से पहले आयोजित नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए पंजाब के राज्यपाल ने अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अधिकारियों को उनके पांच वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति के अगले दिन से लेकर पुनर्गठित होने तक सभी प्रशासनिक शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग करने का अधिकार दिया है। अबोहर निगम का कार्यकाल 8 अप्रैल, एसएएस नगर, होशियारपुर, बठिंडा का कार्यकाल 11 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। वहीं, बटाला नगर निगम का 18 अप्रैल, बरनाला 14 अप्रैल, पठानकोट 28 अप्रैल, मोगा 12 मई 2026, कपूरथला 6 जून को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन सभी नगर निगम के लिए कमिश्नर नियुक्त किए गए हैं। अधिकारियों की यह नियुक्ति नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सुचारू व प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि स्थानीय प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। इस कदम से स्थानीय निकायों में संचालन की स्थिरता बनी रहेगी और नागरिकों को नियमित सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

US में पंजाब-हरियाणा के ड्राइवरों पर असर, 1790 नौकरियों का नुकसान, वर्क वीजा के बिना नहीं मिलेगा DL, पूरे USA में हो सकता है लागू

पटियाला  अमेरिका के इंडियाना राज्य ने अवैध रूप से गए सभी पंजाबी ड्राइवरों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए हैं। इंडियाना के नए कानून से 1790 ड्राइवरों की नौकरी चली गई है। इसमें अधिकतर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं।  इंडियाना की लाइसेंसिंग अथारिटी ने बताया कि लगातार इंडियन ड्राइवरों से हो रहे हादसों के बाद ये फैसला लिया गया। हादसों के बाद पूछताछ में पता चला कि पंजाब-हरियाणा मूल के ड्राइवरों को न तो रोड साइन इंग्लिश में पढ़ना आते थे और न ही वे अंग्रेजी में बात कर सकते थे। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 में हाउस एनरोल्ड एक्ट 1200 पर साइन कर दिए हैं। इंडियाना बीएमवी ने 16 मार्च को 1790 ड्राइवरों को नोटिस भेजा था, जिसमें लाइलेंस रद्द करने की सूचना दी गई थी। कानून लागू होते ही 1 अप्रैल को सभी नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल (जिनके पास एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था) अपने आप एक्सपायर हो गए। इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा बोले- हमारा मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्टीयरिंग व्हील के पीछे बैठा व्यक्ति पूरी तरह ट्रेंड और कानूनी रूप से योग्य हो। तरनतारन के युवक ने बैन को मारी थी ट्रक से टक्कर: इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा ने बताया कि कानून बनाने का मुख्य कारण पिछले 4 महीनों में अवैध इमिग्रेंट ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए गए हादसे हैं। इनमें कुल 6 मौतें हुईं। पंजाब के एक ट्रक ड्राइवर की अमेरिका के फ्लोरिडा टर्न पाइक में ड्राइविंग दौरान बड़ी लापरवाही का वीडियो सामने आया था। फ्लोरिडा की सड़क पर गलत यूटर्न लेने कारण एक बड़ा एक्सीडेंट हो गया था। इसमें वैन में सवार 3 लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक ड्राइवर तरनतारन के गांव रटैला का रहने वाला था। पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने रेड लाइट जंप कर मारी थी टक्कर: दूसरा हादसा 18 फरवरी 2026 को पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने किया। 24 साल का सुखदेव 2018 में अवैध रूप से आया था और मई 2025 में लाइसेंस लिया था। उसने हैंड्रिक्स काउंटी में यूएस 36 पर रेड लाइट क्रॉस की। सेमी ट्रक ने पिकअप ट्रक को टक्कर मारी जिसमें 64 वर्षीय टेरी शुल्त्ज की मौत हो गई। सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह सिर्फ 3 महीने से ट्रक चला रहा था। इसी के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाब के ट्रक ड्राइवर ने करीब 10 वाहनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी पहचान 21 साल के जशनप्रीत सिंह के रूप में हुई थी। हादसों के बाद कानून बनने पूरी कहानी     इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश:फरवरी 2026 में इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश किया गया। कई भयंकर एक्सीडेंट्स के बाद यह बिल पास हुआ। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 के मध्य में इसे साइन किया। लेफ्टिनेंट गवर्नर माइका बेकविथ और अटॉर्नी जनरल ने इसे सड़क सुरक्षा का बड़ा कदम बताया।     बीएमवी ने पहले नोटिस भेजा: इंडियाना ब्यूरो ऑफ मोटर व्हीकल्स (बीएमवी) ने 16 मार्च 2026 को लाइसेंस रद्द करने से पहले 1790 ड्राइवरों को मेल से नोटिस भेजा। इनमें वे सभी शामिल थे जिनके पास नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल था और लीगल स्टेटस यानी एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था।     1 अप्रैल 2026 को कानून लागू हुआ: 31 मार्च 2026 की मिडनाइट को सभी पुराने नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल एक्सपायर हो गए। अब अवैध इमिग्रेंट्स को नया सीडीएल नहीं मिलेगा। केवल एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा वाले ही अप्लाई कर सकेंगे।     नए कानून में अंग्रेजी आना जरूरी किया: नया लाइसेंस लेने के लिए एग्जाम अब केवल अंग्रेजी या अमेरिकन साइन लैंग्वेज में होगा। ड्राइवर को अंग्रेजी में बातचीत, ट्रैफिक साइन समझने और रिपोर्ट लिखना आना जरूरी कर दिया गया है। कंपनियां या ड्राइविंग लाइसेंस स्कूल अगर जानबूझकर अनएलिजिबल ड्राइवर को ट्रेनिंग या नौकरी देते हैं तो उन पर 50 हजार डॉलर (लगभग 42 लाख रुपए) जुर्माना होगा। फर्जी दस्तावेज देने पर भी 42 लाख की पेनल्टी लगेगी। लाइसेंस रद्द करने वाला इंडियाना पहला सूबा, बाकी जगह भी हो सकते अवैध रूप से ट्रक चला रहे प्रवासियों पर कार्रवाई करने वाला इंडिया अमेरिका का पहला सूबा है। गवर्नर माइक ब्रॉन ने बताया कि ये फैसला फरवरी 2026 में पंजाबी ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए 2 बड़े हादसों के बाद लिया गया है। खासकर फरवरी 2026 में सुखदीप सिंह के ट्रक से हुए एक्सीडेंट में 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। सरकार का कहना है कि इससे अनट्रेंड और अनक्वालिफाइड ड्राइवरों को रोका जाएगा, सड़कें सुरक्षित होंगी। नए नियम में अंग्रेजी आना अनिवार्य है। रद्द लाइसेंस वाले ट्रक ड्राइवरों को नौकरी देने वाले ट्रक मालिकों पर 50000 डॉलर जुर्माना लगेगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की बड़ी पहल से पंजाब की 97 प्रतिशत महिलाओं को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने पूरे पंजाब में ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ को मंजूरी देकर इस योजना को शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए सम्मान राशि मिलेगी। इस योजना से पंजाब की 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ योजना पूरे राज्य में शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि दी जाएगी। यह योजना महिलाओं को स्वतंत्र और सशक्त बनाकर उनकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह स्कीम महिलाओं को वित्तीय रूप से मजबूत करेगी, जिससे वे बचत और निवेश कर सकेंगी तथा घर-परिवार के लिए जरूरी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनेंगी।” इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने आगे कहा, “इस योजना से 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की संभावना है, जो इसे देश की सबसे महिला-हितैषी सामाजिक सुरक्षा पहलों में शामिल करता है। यह योजना राज्य भर में महिलाओं को सीधी आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और महिलाओं के सशक्तिकरण के तहत उनके लिए वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के प्रति सरकार के विजन को दर्शाती है।” यह योजना सीधा लाभ प्रदान करने के लिए तैयार की गई है, जिसमें वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस स्कीम के तहत एक परिवार में योग्य महिलाओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी और एक ही परिवार की कई महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकेंगी। मौजूदा सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को भी इस योजना के तहत अपनी पेंशन के अलावा पूरा वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे इसकी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ेगी। पंजाब में 18 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं, जो वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जिनके पास पंजाब निवास वाला आधार कार्ड और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर कार्ड है, इस योजना के तहत लाभार्थी के रूप में रजिस्टर होने के योग्य होंगी। इस पहल को और मजबूत करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पहले ही 9,300 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की जा चुकी है और योजना के पैमाने व पहुंच को देखते हुए यह पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे बड़ी महिला-हितैषी सामाजिक कल्याण पहलों में से एक होने की उम्मीद है। योजनाबंदी विभाग में सीधी भर्ती के तहत 70 पद भरने को मंजूरी कैबिनेट ने योजनाबंदी विभाग में सीधी भर्ती के तहत 70 पद भरने की मंजूरी दे दी है। आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड और सांख्यिकी विभाग, पंजाब के विलय की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस अभ्यास को देखते हुए भरे जाने वाले रिक्त पदों की आवश्यकता को संशोधित किया गया है। इसलिए अधिकारियों की कमेटी द्वारा सीधी भर्ती के 70 पद भरने की मंजूरी दी गई है। पी.एस.पी.सी.एल. और पी.एस.टी.सी.एल. के सी.एम.डी. तथा डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए शर्तों में संशोधन कैबिनेट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ट्रांसको) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (सी.एम.डी.) तथा डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यताओं और अनुभव संबंधी शर्तों में संशोधन करने की भी मंजूरी दे दी है। पछवाड़ा कोयला खदान में मानव शक्ति एवं सहायक स्टाफ नियुक्त करने को मंजूरी कैबिनेट ने झारखंड के जिला पाकुड़ स्थित पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान (पीसीसीएम) के संचालन और रखरखाव के लिए पी.एस.पी.सी.एल. द्वारा ठेके के आधार पर मानव शक्ति और सहायक स्टाफ नियुक्त करने को भी हरी झंडी दे दी है। इसके लिए एक अधिकृत कमेटी बनाने का फैसला किया गया है, जिसमें प्रबंधकीय सचिव को चेयरमैन और चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर तथा डायरेक्टर/जनरेशन, पी.एस.पी.सी.एल. को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। इस कमेटी को पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान, पाकुड़ के संचालन और रखरखाव के लिए सक्षम मानव शक्ति/सहायक स्टाफ की ठेके पर भर्ती और विस्तार संबंधी सभी मंजूरियां देने के लिए अधिकृत किया गया है। लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधन कैबिनेट ने लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों/शेडों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के अनुसार बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के पास गिरवी रखे गए औद्योगिक प्लॉट फ्रीहोल्ड में बदले जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित बैंक द्वारा प्राप्त ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जमा करवाया गया हो और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। ऐसे मामलों में जहां मौजूदा टाइटल दस्तावेजों में अनार्जित वृद्धि संबंधी कोई धारा नहीं है (भले ही यह पहले के टाइटल दस्तावेजों में मौजूद हो), 5 प्रतिशत की कन्वर्जन फीस लागू होगी। पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) (संशोधन) बिल-2026 कैबिनेट ने पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) (संशोधन) बिल, 2026 को पेश करने की मंजूरी दे दी है ताकि राज्य भर में औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एस.पी.वी.) की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को मजबूत किया जा सके। प्रस्तावित संशोधन औद्योगिक पार्कों के विस्तार और औद्योगिक एस्टेटों से बाहर नए औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार के कारण वर्षों में उभरी प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों को हल करेंगे। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कें, स्ट्रीट लाइटें, पार्क, सुरक्षा, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य साझा सुविधाओं जैसे साझा बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए सेवा शुल्क वसूलने और इनके उपयोग के लिए सुचारू प्रणाली विकसित की जाएगी। सभी औद्योगिक क्षेत्रों में एस.पी.वी. तैयार किए जाएंगे जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड होंगे। ये एस.पी.वी. औद्योगिक क्षेत्रों में साझे बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव के लिए बिना लाभ-बिना नुकसान के आधार पर काम करेंगे। साथ ही एस.पी.वी. के कार्यों की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करने हेतु जिला निगरानी प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा। एन.एच.ए.आई. प्रोजेक्ट्स के लिए सतलुज नदी से गाद निकालने को मंजूरी कैबिनेट ने राज्य में विभिन्न हाईवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एन.एच.ए.आई.) को साधारण मिट्टी देने के लिए सतलुज नदी से … Read more